In this devotional lecture, the speaker explores the essence of service (seva) and its purpose as presented in spiritual texts, citing the Bhagavad‑Gita and other scriptures. He emphasizes that the ultimate goal of a disciple is to spread Krishna‑consciousness through chanting the holy names, especially Hare Krishna. The talk weaves several illustrative anecdotes of devotees who, despite severe physical ailments, poverty, or social marginalisation, experienced miraculous transformation and inner beauty through Krishna’s mercy (kripa). These stories serve to inspire listeners to relinquish anxiety, trust fully in the Lord, and actively teach the message of bhakti to others. The discourse concludes with a call to disciples to carry the teachings house‑to‑house, chant regularly, and cultivate a positive, service‑oriented mindset.
Chapters
के समय हमारे परसाल विश्व में जुड़े हुए हैं कि सेवा में सेवा का नाम क्या है? बुक में इसका उद्देश्य क्या है? जैसे आप जानते हो भागो गीता में भगवान कहते है 7 हफ्तों में सबसे प्रिय कौन है? कौन है ये मेरा प्रचार करता है। उसे ज्यादा पेन तो हुआ है, न होगा तो परम भगवान स्वयं विचार की सेवा प्रबल देते है। साथ में हमको प्लान की शिक्षा प्राप्त होती है। प्लान भा ने कहा अपने सुर मे दूसरों को यह शिक्षा 2 जिसके द्वारा भक्ति का ज्ञान बढे और क्षेत्रीय महाप्रभु क्योंकि पर भगवान के अनुसार है। उन्होंने भी इस विष पर संक्षेप में उन्होंने कहा यारेदारसताएकह जैसे कि तुम मेरा से क्या करो कृष्णा का हो। और चेतीनेबहारलुगू ने प्रचार की सेवा पर बदल दिया। ये भाव भी प्रकट किया चिंता का भाव जैसे कि 1 समय चेती में महार लोग आला साब कुक गए थे अरे राज सागोर क्योंकि जन्म था मुसलमान खाना में, वो कभी जब पूरी मंदर के अंदर नहीं गए तो वहाँ प्रभु रोज उन्हें मिलने जाते थे पा उन्होंने कहा अरे दादी बताओ कैसे दिया न तो हरिया से हा प्रभु चिंता न करे, हमे भगवान चिंता मत करो। आराम हारा बाले बा से हरी का नाम देंगे प्राधान से रहे। तो जब चेदिनेमहाकदक्षि भारत की यात्रा में कुणणोब्रामणके घर में निवास कर रहे थे और वहाँ से चलने के पश्चात वास विप्रा घर में पहुंचा वासविक कोड की बिमारी थी। पूरा शरीर बस से भरा हुआ था। पर कुछ दिन तैयार भाग के थे, क्यूंकि पुरे शरीर में कीड़े थे। जैसे कोई कीड़ा नीचे गिरता था, उठाकर शरीर के साथ जोड़ देते थे। जो गैवहालोगोंको मिलने वहाँ लोग चल पड़े है तो शो दुखी हो। वहाँ तो भी उसे पता लगा कि ऐसी आवाज के अत्यंत दुखी है। तो वापस लौटे और वापस लौटे। वास्ते पे हो। क्या किया उन्होंने गले लगाया जैसे ही गले लगाया वो ही बदसूरत कर। यो 1 प्रेशन पूजा बहन से उन्होंने कहा कि अब आप की कृपा से मैं खूबसूरत युवक बन गया हूँ। मुझे डर है मैं गमन नहीं नही बन जा। पहले तुम्हें ऐसी स्थिति थी, कोई में निकट नहीं आता था। पर अब आप की क्रपा से इतना खूबसूरत हो गया हूँ। वहाँ ने क्या कहा क्या करो चैंरेश्नऔरका्रचार करो। शिक्षा के काम प्राप्त होती है। तो प्रपजीसलीलाकेतबपर कहते हैं जैसे की पॉसतिवकथा इस संसार के हर भाग का उधार हुआ। इस संसद के हर भग का कर्तव्य है कि वो घर घर जाए ये संदेश लेकर जाप करो और और क्या ना हार क्रिश्ना हाल किशना क्रिष्ण हारे हारे हारे।