Pushkar Dham Yatra || Day - 2 || HH Gopal Krishna Goswami Maharaj || 2025

HH Gopal Krishna Goswami Maharaj leads a congregational gathering with chanting, devotional prayers to Radha-Krishna, and stories about Vaishnava gurus and saints. The group shares reflections on the bhakti path while handling practical details like prasadam timing and badge collection for the Pushkar Dham pilgrimage.
Chapters
जाया गुरु गुरुदेव जाया गुरुदेवा
पीछे से
जाया प्रभु बदा प्रभु बदा प्रभु पदा जाया प्रभु पद प्रभु प्रभु पद प्रभु श्री गुरु चारा न बदमा केवल सजा श्री गुरु चारा केवल भागती सदमा श्री गुरु चराना पदमा केवल भा ग दी सदमा श्रीगुरु चराना पदमा केवल कते समा बन्द मुई सब धाना मात
हरे कृष्ण
ऑफरिंग के लिए फूल दिए जा रहे हैं तो सब लोग दूर से ही
मु में 1 ह धाना माते
बंद
मोई सब धना माते अहरा प्रसाद भ ह भव तरी या जहा र प्रसाद भाई। ए तोरी जय जहाँ रा प्रसाद भाई तारी आ जा जहाँ र प्रसाद भाई भबपरीयाजहकृष्ण प्राप्त हो यह दे कृष्ण प्राप्ति हो। हे जहा होई दे कृष्ण प्राप्त हो, यह ते कृष्ण हो जहाँ होते गुरु mokama जीते
क्या
मा बया चीते कोरिआई क्या गुरु मुखापातमावाक्या करिआ क्या गुरु खपतमाबखयाचतकौरिआई क्या आर न करी ह माने आशा र न कर हमने आशा न करी ह माने आशा आरना को रिहा माने आशा चराने राती ऐसे उत्ता मा गतीशगुरुचराने रती। ऐसे तमा गती शिगुरु चाराने राजी
से
कुरु
रती। ऐसे तमा गती पर सर आज
पूरे
सवा आशा आशा खुदा दिल जे जन्म जन प्रभु से खुदा दिल जन्म जन प्रभु से विज्ञान हिरदेप्रप्रसिता दिव्य ज्ञान हदेप्रप्रसिताप्रेम भक्ति जाते विद विनाशजदे विद्या ना मा भक्त जा विदा नाच जाते देदेगा जहारचरितारतदेरे गाय जहा रिता गोरु रु रु जिनदुआधमा जरबदुगुरोकरुना सिंधु धम बंधु गुरु का रोना जिंदा न रा बदुगुरोकरुना सिंधु गुरु जिंदा बदुकनाथ लोकरा जिवाना लोग ना लोकरा जिवाना भगवत लकेर जिवानलकेराजिवना छाया हा प्रभु कर दया छाया
या
छाया हा प्रभु या देह या खुश कुत्र बवाना बाना खुश कुत्र बोवना बाना भगवत जया भगवद भगवत दा
दा
दा प्रभु प्रभु बदा प्रभु बाजाजा प्रभु रा
nama
vishnpadaयaकषण या भूतला mt गोपाल क्रिष्ना गोस्वामी निटिनामीनमवृष्ण पदाया कृष्ण
कृष्णा श्रीमते
gossmenitinaine prbupadasasahit्यam prकshvitrचा प्रचारमकृतवन साधु भगवत पादाय te namaha पदaशaसहितmयprकs रचा प्रचार क्रेतान साधु भगवत पर ते नम नम ओम विश्न पदाया कृष्ण प्ृष्टाया भू टले श्रीमत भक्त दान का स्वामी निरनाम नमाम कृष्ण पदाया कृष्ण कृष्णया भूत ले श्रीमति भक्ति बेदान्त स्वामी ने ते नाम नमस्ते सर स्वत देबे गौरव वाणी प्रचार ने नीर विशेष चुन बारी पाचात्यजजतारिने नाम मस्ते सारे स्वतेदेबेगोरबानी प्रचारि ने विशेषा शौन्यबादी पद्शतारेसतारने shri krishna chetanya pro nityananda shreatatagadada vasa gौraaजशीकृषणच कन्या प्रभु नत्यानंद श्री देता गदाधर श्रिभाषारिगोर भक्त विंदा हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे रिश्ता रे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरि हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे रिश्ता हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे रे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे रिश्तार कृष्णा कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे हरे हरे राम राम राम राम हरे हरे हरे इस तारे कृष्ण रिश्ता हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे इश्राहरेपरिशना कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे हरे राम रे राम राम राम हरे हरे हरे रिश्ता रे रिश्ता कृष्णा रिश्ता हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे दारकश्नकिष्णा हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे राई गौरंगनितारगरंग राय राम राम राम राम गौरंगगरहरीताई गौरांग गौर
हरि जाया
या जि न न जाए सचिनन्दन जय चिननदनासचननदना गौर हरी जाए सचिनन्दन गौर हरि हरि हरि हरि हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम रे राम राम राम हरे हरे हरे रारेरकिषाकरहरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे हरे राम रे राम राम राम हरे कृष्णा कृष्णा रे हरे हरे रामा रामा रामा रामा हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा रे रे अरे कृष्णा कृष्णा हरे हरे राम राम राम हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे अरे राम रे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम राम राम राम हरे हरे हरे राम रे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे राम रे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे हमारे राम राम राम रे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम रे राम राम राम हरे हरे हरे हरे हरे राम रे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम रे हरे किष्हरेहरेहरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम रे राम राम राम हरे हरे हरे हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण हरे हरे हरे राम रे राम राम राम हरे हरे हरे हरे राम रे राम राम राम रे हरे प्रेम धन हरि राम संकतरारप्रेमराम हरि राम हरे कृष् हरे हरे हरे राम राम राम राम हरे हरे हरे हरे हरे राम रे राम राम राम रे हरे हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम रे हरे हरे सटाटेकिष्ाकृष्ना किस्तर हरे राम रे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम रे राम राम राम हरे हरे हरे विस्तार रे हरे हरे राम रे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम राम राम राम हरे हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे जी नंदन जाय सजीनंदनजायजंदन जाए नन ना गोरहरि जाई नन्दन गोरहरि गर गौरह गौर री गोरा गोरा गोरा हरिर गोर गोर रि गोरा गोरा गोरा हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे रिश्ता रे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे िसतारे किशना हरे राम रे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम रे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम रे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम रे राम राम राम हरे हरे हरे हरे विस्तार हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम रे राम राम राम हरे हरे हरे िशरेिगिष्नागिस्ता हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे विस्तार गि हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे किस तारे स्तर हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे प्रभु पदा प्रभु पदा प्रभु पदा जया प्रभु जाय प्रभु परा प्रभु बरा भर बरा जाय प्रभु परा भगवत दा भगवत दा भगवत भगवत पदा जाय रा रा भगवत भरा जाय भगवत परा prem
se raha गुंद राधा कुंदगग डबल धाम के मथुराधाम के नदी धाम के मायोपरामकेगंगम hai na ा krishna goswami maharaj
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speaking in hindi in an thank you so much and i thank you हर मी नाम है न क्या 1 मीना है हैलो जल्दी
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कृष्णा हरी कृष्णा और बढ़ाइए हरिबोल hregusnahadmenohe हरेkusna hरेkushnaकहाँ गया ho जय राधा माधा बा कुंज बिहारी र जय राधा माधव कुंज बिहारी जय ि गोपी जाना बला गिरवर धारि जया जया गोपी जाना ब गबरधारिजयजसोदानंद न रजजनरंजना जशोदा नंदन गजजनरंजनजजमुनपिरा बना जारी जमना तेरा बना चारी गया रा था मध पंजाब हारिजजनबभगिबरथार जर जसुदननजजजनजमुना पी
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जय श्री कृष्णा गा र हमारे
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हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा
हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा रे हरि
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रामा हरे रामा
रामा रामा रे होरिशना
हरे राम हरे
राम राम राम हरे
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राम राम राम
राम हरे राम राम
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हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
हरे कृष्णा हरे का
कृष्णा रे हरे हरे रामा रामा रामा हरे क
अरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा
रे हो रे हरे रामा रे रामा
रामा रामा जय राधा माधव राधा माधव
रा
भोपा पभपजायजायाभुपा गुरु देव व 2 व
जय विष्णुपाल पर परीराजडिवाइनग्रस अभय चरमा और विंद भक्ति वेदांत स्वामी शिला प्रभुपाद की जाए। इसका पाउडर चार्ज बीबीटी, फाउंडर चार्ज हो वर्ल्ड डिवाइन ग्रेस शिलप्रभुपात की जाए जय ओम विष्णपातपरिवराजकचार भक्ति शिद्धांत सरस्वती स्वामी की
जाए
भक्त की जाए। नामाचार ठाकुर की जाए, प्रेम से प्रभु, शिव आदि गौरव भक्तबं्द की जाए, राधा कृष्ण गोपीनाथ, राधा करण श्याम कुंड गिरिगोवर्धन की जाए, मथुरा व्रंदावन धाम की जाए, नवदीप माया पर धाम की जाए, पुरुष क्षेत्र जगरनाथ परिधान की जाए, से पुष्कर धाम की जाय, से ब्रह्म, देब की जाए, गंगा माया, जो, मुना मया पुष्कर तीर्थ की जाए, गोपाल कृष्ण गोस्वामी शीला भगत जात्रा की जाय, भक्त की जाए, भक्त की जाए, भक्त जाए।
ज
हरे कृष्ण तो 1 गाड़ी है।
डीएल थ्री सी सी एम सिक् सेवन
सिक्स नाइन गाड़ी का नंबर है।
दिल्ली की गाड़ी है।
सिक् सेवन सिक्स नाइन उस बिल्डिंग की पार्किंग में रही है। वो बोल रहे हैं हटाने के लिए।
वहां पर उससे कुछ प्रॉब्लम क्रिएट हो रहा तो गाड़ी को जहां पर प्रसाधन वाले उसमे आप लगा सकते हैं।
यहां कोई दिक्कत नहीं होगा।
गाड़ी का नंबर है सिक्स सेवन सिक्स नाइन। डी एल दिल्ली की गाडी है।
यह हर 1 कृष्ण ओमज्ञानातिमिरंधश्य ज्ञानं यन सला कया चरुनमिलितमजेन तस्मै, श्री गुरु भेनमहा, श्री चैतन्या मनोभीष्ट स्थापित जनभुतडे स्वयं रुप कदामयमददातिशपदां ति कम बंदे गुरु, श्री जुता पदकमल, श्री गुरु वश्नमचह, श्री रुपम सग्र जात सहगणरघुणाथानितम तंग सजेवम साद्वयितंग सावधुतंग परिजन सहित कृष्ण चयितंन्य देवम, श्री राधा कृष्ण पदान सहगण ललिता, श्री विशाखा नितांश हे कृष्ण करुणा सिंधु दीनबंधु जगतपति गोपेश गोपिका कांत राधा कांत नमस्तुते तब त कंचन गौरांगी राधे वृंदावनेश्वरी बृषभानु सुते देवी प्रणमामि, हरि प्रिय वंछा कलपतरु भ्यश्च कृपा सिंधु भय बच पतितानांपाबणेभ्य वयषनवेभ्य नमो नम मुकंगकरोतिवाचालंग पंगु लंघयते गिरि यतकपतमहंगबंदेसि गुरुदिनतालणम परमानंद माधवम सी चैतन्य स्वर नम विs्णपादयकृष्ण प्रस्ठायभुतडे, श्रिति गोपाल कृ गोस्वामी निति नमी ने प्रभुपाद श् साहित्य जहाँ प्रकाश भितिरच, प्रचारं कितमान साधु भगवत पधायतेnmnmvispday, कृष्ण प्रस्ठायभुतडे, श्रीमति भक्त वेदांत स्वामी नीति नोमिने नमस्ते सारस्वत देवे गौर वाणी प्रचारिणी निरविशेष सुन्यवादी पश्चात्य दे स्तारिणेम नमोमहावदन्याय, कृष्ण प्रेम प्रदायते, कृष्णाय कृष्ण चतन्य नमीने, गौरत श नमह ईश्वर परम कृष्ण सचिदानंद विग्रह अनादि आदि गोविंद सर्व कारण कारण श्री कृष्ण चइतन्या प्रभुणित त्या नंदा स्य द्वैत गदाधर सिवासादी गौर भक्त वृंदा हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा भागवत की कक्षा में सभी का स्वागत है। समस्त भक्तों को आज दूसरे स्कल भागवत के नवमध्यायश्री भगवान के बच्चन का उदाहरण देते हुए प्रश्न का उत्तर इसमें आज से दूसरे अध्याय के नवम अध्याय की 5 नंबर सुक स्वादि देब जगतं पर
गुरु
स्वादिष नयम अस्थाय सुश्ुख्यया खततामनअध्यगचदिसम आत्मता प्रपंच निर्माण विधि जया भवे शादी देव जगत पर गुरु sधisनयmstायख्यत काम अध्यगचदरशमन्नसममताम प्रपंच निर्माण विधि यया भवे साद देव जगत पर गुरु swadisnयmasथाखतम दामनअध्यगचद्िसव नस्यामवताम प्रपंच निरमाण विधि या या भवे
काम पर
यह मात्र समा
जरा करो गुरु।
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दुशमत्रसम्मताm निर्माण विदीजयाभरे हो कम
पुरु
खोदीशवससचलेचता
सामना दजचदादिशमातसममाता चवारदाकाे
सारे
काले
दि
या जगत पर हुजरे आसथाएसीस माली
या हरे ले दीदी हो जता था संता यार सवेता श्रोता सर
वे
प्रथम
देव
ब्रह्मांड के पर सर्वपरी गुरु गुरु स्वधिसस्नस्वधिस्नयम अपने कमलासन का अस्थाय शोध जानने के लिए, शिख्ययासांसरिक व्यापर की सृष्टि करने के लिए 1 खेत सोचने लगे काम उस विषय में न नहीं। अध्यक्ष समझ सकें, दसम, दिशा, अत्र, वहाँ, सम्मतम, उचित, राह, प्रपंच, भौतिक, निर्माण, रचना, विधि, विधि, ढंग या यह जितना कि भवेत होना चाहिए। नुवा तथा तात्पर्य कृष्ण कृपा स्मृति, अभय चरणारविंद भक्ति वेदांत स्वामी शिल प्रभुपर के द्वारा श्रील प्रभुपाद की है। प्रथम गुरु एवं ब्रह्माण के सर्वश्रष्ठ जीव होते हुए भी ब्रह्मा अपने कमलासन के स्रोत का पता न लगा सकें और भौतिक जगत का सृजन करने के विषय में सोचने। पर वे यह भी न जान पाये कि किस किस दिशा में ऐसे सूजनात्मक कार्य का प्रारंभ किया जाय। नहीं, वे ऐसी सृष्टि करने के लिए कोई विधि ही ढूंढ पाए। तातपर्य यह श्लोक श्री भगवान के रूप तथा धाम की दिव्य प्रकृति की व्याख्या की प्रस्तावना है। श्रीमद भागवत के आरंभ में यह कहा जा चुका है कि सर्वपरि परम सत्य अपने धाम में भ्रामक शक्ति के संपर्क में आये बिना रहते हैं। अतः श्री भगवान का धाम कल्पना न होकर 1 भिन्न दिव्य ग्रह का क्षेत्र है, जिसे बैकुंठ कहते हैं। इस अध्या में इसी की व्याख्या की जाएगी। इस भौतिक आकाश से बहुत परे आध्यात्मिक। आकाश का ऐसा ज्ञान तथा उसके समस्त सामग्री की जानकारी केवल भक्ति योग द्वारा ही संभव है। ब्रह्मा ने भक्ति जोग के बल पर ही सूजन सूजन करने की शक्ति प्राप्त की थी। सूजन करते समय ब्रह्मा भ्रमित हो गए थे और वे अपने स्वयं के अस्तित्व के स्रोत का पता नहीं लगा पा पा रहे थे किन्तु उन्हें यह सारा ज्ञान भक्ति योग द्वारा ही प्राप्त हो सका। भक्ति योग से मनुष्य ईश्वर को जान सकता है और ईश्वर को सर्वोच्च, सर्वोच्च जान कर शेष सब कुछ जाना जा सकता है। जो परमेश्वर को जानता है, वह अन्य सब कुछ जानता है। यही समस्त वेदों का कथन है। इस ब्रह्मांड के प्रथम गुरु ब्रह्मा को श्री भगवान की कृपा से प्रकाश प्राप्त हुआ था। तो ऐसा और कौन होगा? उनकी कृपा के बिना स कुछ जान सके। यदि कोई हर 1 विषय की पूर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहता है तो उसे चाहिए कि वह भगवत कृपा प्राप्त करे। इसके अलवा दूसरे कोई उपाय नहीं है। अपने निजी बल पर ज्ञान की खोज करने का प्रयास करना समय का अपव्यय मात्र होगा। हम ब्रह्म संगीता में प्रत्येक श्लोक में ब्रह्मा ने गोविंद मादिपुरुसमतमहंग भजा में स्थिति की। इस तरह भगवान श्री कृष्ण ने कृष्ण मंत्र द्वारा ब्रह्मा को दिख्या दी, जिससे विशाल ब्रह्माण्ड की पुष्टि करने का पूर्व वे वैष्णव अर्थात भगवान के भक्त बन सके। ब्रह्म संगीता में उल्लेख है की ब्रह्मा को 18 कर वाले हरे कृष्ण महामंत्र में लिखित किया गया, जिससे प्राय भगवान श्री कृष्ण के समस्त भक्त समस्त भक्त स्वीकार करते हैं। हम उसी सिद्धांत का पालन करते हैं। क्योंकि हमारा सम्बन्ध ब्रह्म सम्प्रदाय से ही है। जो सीधे ब्रह्मा से सी नारद, मुनि, नारद, मुनी से सिल व्यासदेव, व्यास, देव से शिलमाध्योमुनिशिल, माध्य, मुनि से माधवेंद्र पुरी जी तथा माधवेंद्र पुरी से ईश्वर पुरी जी, ईश्वरपुरी से भगवान चैतन्य और क्रमशः। हमारे गुरु कृष्ण कृपा समृति भक्ति सिद्धांत सरस्वती की गुरु शिष्य परंपरा में है। इस प्रकार जो मनुष्य गुरु शिष्य परंपरा में लिखित होता है, उसे बेस ही फल या सुष्टि करने की शक्ति प्राप्त होती है। कामना रहित भगवत भक्त के के लिए पवित्र मंत्र का जब भी 1 मात्र आसरा आसरा हे केवल इसी तपस्या से भगवत भक्त ब्रह्मा के समान सारी सिद्धियां प्राप्त कर लेता है। हरे कृष्ण तो ब्रह्मा जी की महिमा कहा गया कि ब्रह्मा जी की महिमा और उनके कुछ कार्यकला चर्चा करने के लिए। तो ब्रह्मा जी की महिमा के बारे में प्रुप जी पहले पत्र में लिखे। ब्रह्मा जी सबसे पहला जीव है। कहाँ से ब्रह्मा सुष्टि हुए भगवान की नाभी कमल से? ऐसे ही तो ब्रह्म संगीता जी देखेंगे चित्र किसके हैं दिया गया है कि भगवान ने इस भागवत का भी पीछे। भगवान श्री कृष्ण के नाभी से ब्रह्मा जी जन्म हो रहे है। लेकिन प्रति विष्णु के नाभि कमल से ब्रह्मा का सुष्टि हुआ। संता का रंग भुजगशयनं, पद्मनाभं, सुरेशं, विश्, स्वाधा, रंग गगन, सद्रिस, मेघ बन, शुभंग, लख्मी कांतं कमरा, कमल, नयन, जोगी, भिध्यान, गम्य, बंदे, विष्णु भवभयहरं, सर्वलोकइकनाथम। ये भगवान विष्णु भी ये किसका किसके विस्तार है। भगवान श्री कृष्ण के भगवान श्रीकृष्ण की पहला विस्तार बालाराम जी व मूल संकर्षण भी कहा जाता है। तो बड़ा राम से मूल वासुदेव संकर्षण, द्वितीय संकर्षण है। द्वितीय संकर्षण से तीनों विष्णु आते कारण कसाई विष्णु गौरभदोकसईविष्णु और कसाई गर्भ। विष्णु के नाभि से जो कमल उगता है, उसी कमल के ऊपर कौन प्रकट हुए ब्रह्मा जी? तो इसलिए सबसे पहला जीव भगवान की सृष्टि का सबसे पहला सृष्टि है। इसलिए उनको आदि गुरु कहा गया। स्लोक में क्या क्या कहा गया? आदि गुरु, आदि गुरु, तम आदि देव। ये समस्त देवता में भी आदि है, समस्त गुरु में भी आदि है। गुरु। परम्परा यदि हमारे चारों संप्रदाय है, लेकिन फिर भी ब्रह्मा जी ने सबसे पहला इसलिए को आदि देव, समस्त डेमिगडजितनेभी। ता से ये पहला इन की सृष्टि हुई है। जगत पर गुरु हो। ये सारे जगत का भी गुरु है। कौन ब्रह्मा जी सुखदेव स्वामी पर गुरु ब्रह्मा का सर्वस् जी होते है हुए और ब्रह्मा ने अपने कम। लेकिन इतने होते हुए भी उन्होंने कहां से प्रकट हुए, उसका कुछ पता नहीं लगा पा रहे थे। वो कमल के पर बैठे, लेकिन कहां से प्रकट हुए, क्या उनकी कर्तव्य कर्तव्य है, इसके बारे में कुछ पता नहीं लगा पा रहे थे। भौतिक जगत का सुजन करने के विषय में सोचने पर वे यह भी न जान पाये कि किस दिशा में ऐसे सूचनात्मक सूचनात्मक कार्य का प्रारंभ किया जाए। नहीं, वे ऐसे सुष्टि करने के लिए कोई विधि ही ढूंढ पाये। इस प्रकार जब जल में स्थित ब्रह्म सोच रहे थे तो पास में ही उन्हें परस्पर जुड़े हुए 2 अक्षर, 2 अक्षर बारे में सुने। इनमें से 1 सवा सोवा सोवा और दूसरा इक्कीसवां स्पर्ष अक्षर था। ये दोनो मिलकर विरक्त जीवन के निधि बनते हैं। संस्कृत भाषा में व्यंजन अर के 2 विभाग हैं। स्पर्श वर्ण था, कौ से लेकर के स्पर्ष हालत है। और इस समूह का सलवा है। तो जब कि पर है। अतः जब वे दोनो मिल जाते हैं तो ये कौन सा शब्द बनता है, तपहतपस्याबनताबातपह या तपस्या बनता है। यह तब ही ब्राहमण तथा तपस्या का सौंदर् धन है। श्रीमद भागवत के दर्शन के अनुसार प्रत्येक मनुष्य स्टॉप के निमित्त ही बना है और किसी निमित्त नहीं। इस प्रकार पहले ब्रह्माजी के ये दोनों अक्सर सुनाई पड़ा शुन्य से तप तप। इसलिए सर्वोपरि जो गुरु ब्रह्मा ने इसको ग्रहण किया। तपस्या द्वारा ही मनुष्य को मानव जीवन का लाभ प्राप्त प्राप्त हो सकता है। इसलिए रिशब्दवनीआपने पुत्रों को भी कहा था। तप दिव्य पुत्र कहा। शुद्धि तो जैन सत्ता है। इसलिए ब्रह्मा जी ने ये 2 शब्द सुने। लेकिन जब ब्रह्मा को समझ में नहीं आ रहा था कि ब्रह्मांड का सुधन किस प्रकार किया, तब वे कमलासन के श्रोत का तथा सुष्टि के साधन का पता लगाने लगाने के लिए जल के भीतर गए। जहाँ उन्होंने तप शब्द की 2 बार गूंज सुनी के पथ को ग्रहण करना जिज्ञासु के लिए माना। दूसरा जन्म होता है यहाँ पर उपसुणातशब्दअत्यंत साथ। यह यह उपनयन के समान है। अर्थात तप के मार्ग पर शिष्य को गुरु के समीप लाने के समान है। अत ब्रह्मा को भगवान श्री कृष्ण ने दिख्या दे दी और उनके पुरुष इसी की पुष्टि स्वयं ब्रह्मा ने अपनी कृति ब्रह्म संगीता में की है। ब्रह्म संगीता में, क में प्रत्येक शोक में ब्रह्मा ने गोविंद आदि पुरुष तमंग भजामि सूती की है। इस तरह भगवान श्री कृष्ण ने कृष्ण मंत्र द्वारा ब्रह्मा को दिख्या दे दी। जिससे विशाल ब्रह्मा की सृष्टि करने के पूर्व वे वरष्नबतथासचिभगवान के भक्त बन सके। ब्रह्म संगीत में उल्लेख है कि ब्रह्मा को 18 अक्षर वाले हरे कृष्ण मंत्र में लिखित किया गया। जिससे पहले भगवान श्री कृष्ण के समस्त भक्त स्वीकार करते हैं। उस हम उसे सिद्धांत का पालन करते हैं। क्योंकि हमारा सम्बन्ध ब्रह्म सम्प्रदाय ऐसी है जो सिद्धि ब्रह्मा ब्रह्मा से नारद मुनि, नारद मुनि से व्यासदेव, ब्याज देव से मध्य मु, मध्य मनुष्य, माध्यवेंद्रपुरी, माध्यविंद्रपुरी, सी, ईश्वरपुरी, ईश्वरपुरी से चैतन्यमहाप्रभु और उसी परंपरा में स्वामी और प्रुप गुरु महाराज डिवाइन, भक्ति सिद्धांत सरस्वती ठाकुर। फिर भक्ति वेदांत स्वामी प्रभुपाद और उसी परंपरा में हमारे गुरु महाराज आये। कौन? जोन गोपाल कृष्ण गोस्वामी सलभागत्पाद। तो इसलिए परंपरा चलते रहता है। तो इसलिए ब्रह्मा जी की महिमा ब्रह्मा जी पता लगेगी ये ही आदि गुरु है। यह पहला जीव है। यह आदि देव है। समस्त देवता में सबसे पहला देव है। यह 12 महाजन में से 1 महाजन है। स्वयंभू नारद सम्भु कुमार कपिल, मनु, प्रल्हाद, जनक, विश्व बलि बयास की बयमजनमेसबसेमहासका नाम है। स्वयंभू ब्रह्मा जी। ये गुणा अवतार में भी 1 गुण, गुण में भी ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों गुण के अवतार हैं। इसलिए ब्रह्मा जी रजगुण के अवतार होने के कारण सुजन शक्ति, इनको सुजन शक्ति भगवान ने प्रदान किया है। इसलिए नको सख्त्यावेसअवोतार भी कहा जाता है। भगवान के द्वारा विशेष शक्ति प्राप्त की है। किसके लिए? सुजन के लिए प्राइमरी क्रियेटर जो मूल सस्ता भगवान श्रीकृष्ण ही है। लेकिन ये सेकेंडरी क्रिएटर कौन है? ब्रह्मा जी? ब्रह्मा जी को द्वितीय सस्ता सेकेंडरी क्रिएटर कहते है? भगवान न केवल सब कुछ तय सुष्टि की है। 55 तत्वों से 5 स्थूल तत्व, 3 सुखों तत्वों निर्माण की गई है। लेकिन, लेकिन इसकी जो, ये तो सभी भगवान के द्वारा, लेकिन स्कूल लेकर, काठी करके, संजो करके जो शरीर से प्राप्त करते हैं, ये शरीर के निर्माता कौन है? ब्रह्मा जी? इन्होंने ये सेकेंड क्रिएटर है? तो इसलिए इन के प्रभाव, यह भौतिक संसार में भगवान के जैसे है, भगवान के द्वारा शक्ति प्राप्त की है, सख्त्याबसअबतार भी है। इसलिए ब्रह्म सम्प्रदाय, हमारा सम्प्रदाय भी। उन्ही से ही जुड़ा हुआ किससे ब्रह्मा से, ब्रह्मा से जुड़े हुए हैं। और ये ब्रह्मा जी ही हमारा हमारे संप्रदा को ही ब्रह्म ब्रह्म सम्प्रदाय कहा जाता है। अन्य सम्प्रदाय है रुद्र शंकर जी से, रुद्र सम्प्रदाय और कुमारों से, कुमारा सम्प्रदाय और सी सी सम्प्रदाय लक्ष्मी जी से। लेकिन फिर भी हमारे ब्रह्मा जी को डायरेक्ट भगवान ने ज्ञान दिए। अवश्य अन्य सम्प्रदाय में भी भगवान ने ज्ञान दिए, है डायरेक्ट। लेकिन भागवत में वे सुंदर भाव से बंधन है। किस प्रकार भगवान ने इनको भागवत कहता है? तेन ब्रह्म, हृदा आदि को जन्मा दश्य जाता। इतरतसचाथेसुअभिज्ञा स्वराट। तेने ब्रह्म, हृदा आदि। कब यो मुहनतीजत्सुरया तेज बारि मृदा यथा विनिमय यत्रतिसरगमरिसा धाम ना स्वेन सदा निरस्त हुकम सत्यंग परं धीमही। इसे कहते ब्रह्मयुदातेने ब्रह्म हुदा। दिव्यज्ञान। भगवान श्रीकृष्ण ने डायरेक्ट हृदय से प्रदान किया किसको ब्रह्मा को ब्रह्मा को हृदय से। इसलिए हम कहते हैं दिव्य ज्ञान और हृदय। चुदान जन्म, जन्म प्रभु से, दिव्य ज्ञान, हद प्रकाश। क्योंकि ब्रह्मा जी डायरेक्ट शिष्य बने। किसका है भगवान श्री कृष्ण को। भगवान श्रीकृष्ण ने डायरेक्ट र से, इनके हृदय से इनको समस्त ज्ञान दिए। इसलिए सारे देवता, यह आदि देव हैं और इनको आदि देव। इसलिए सारे देवता भी कुछ संकट आता है। पृथ्वी पर। ये सब कहाँ जाते हैं? ये देवताओं से डायरेक्ट। भगवान प्रार्थना नहीं सुनते हैं। वे अन्य अन्य देवता लोग जा कर भगवान के साथ प्रत्यक्ष रूप से संयोग नहीं कर सकते। उनसे डायरेक्ट मेसेज, इन को नहीं मिलता है। तो ये सभी आकर किस के पास पहुंचते हैं। ब्रह्मा जी के चरण में पहुंचते हैं। ब्रह्मा जी। समस्त देवताओं को लेकर। खिर सागर किनारे जाकर भगवान विष्णु को। फिर वो। कभी कभी भगवान विष्णु साक्षात दर्शन देकर कहते है, कभी कभी हृदय से ही ब्रह्मा को भगवान ने ज्ञान देते हैं, दिव्य ज्ञान देते हैं, हृदय से ही प्रकाश प्रकट करते हैं। क्या भगवान कहना चाहते हैं? भगवान को हृदय से पता लगता है। इसलिए भगवान भगवान श्री कृष्ण के अति प्रिय है। कौन? ब्रह्मा ब्रह्मा जी बहुत प्रिय है। उनका पहला शिष्य है। प्रथम सृष्टि था शिष्य। यदि गुरु। इसलिए सुष्टि पर देखते है धरा पर। ब्रह्मा जी का केवल स्थान। ये जो स्थान है कौन सा पुष्कर, तीर्थ पुष्कर, तीर्थ देखे। ये ब्रह्मा जी के अति प्रिय स्थान है। पुष्कर। तिर्थ जो देख रहे हैं पुष्कर का, पुष्कर का, वही लोग सुने होंगे सुनाई शाम के क्या में। लेकिन ये पुस्कर जो पुराना पुस्कर। भगवान ब्रह्मा जी के हाथ से। जिस कमल में बानी प्रकट हुए थे, उसी कमल के ही 1 पकड़ा गिरा उसी पाखुड़ा से सागर जल को लेकर पकड़ा गिरा। तोसी सही यह तीर्थ प्रकट हुआ। कौन सा पुष्कर प्रभुपाद चैतन्य चरित के तात पर्ज में बहुत है। बहुत सुन्दर प्रभु लगते है। ब्रह्म संगीता 1 आदि महत्वपूर्ण शास्त्र है। भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने इसका पांचवा अध्याय, दक्षिण भारत, तमिलनाडु राज्य में स्थित आदि के सब मंदिर से प्राप्त किया था। उस पांचवे अध्याय में चिंतित के सिद्धांत का वर्णन है। साथ ही विभिन्न भक्ति, पध्यतियाँ, मंत्र, आत्मा, परमात्मा एवं सकामकर्म, पर, विवेचन, कामगायत्री, कामो, बीज तथा मूल, महा, विष्णु की व्याख्या एवं आध्यात्मिक जगत विशेषकर गोलक वृंदावन का विशिष्ट विवरण, ब्रह्म संहिता में गणेश देव, गौरवदुकसयविष्णु, गायत्री, मंत्र की उत्पति, गोविंद का विग्रह एवं उन्हीं की दिव्य, स्थिति, वर, धाम, जीव, तत्व, सर्वोतम, सर्वोत्म, लख्य, भगवती, दुर्गा, तोप का पंच, भूत, भगवत, प्रेम, निरबिशसब्रह्म, ब्रह्मा जी की दिख्या एवं चिन्मय प्रेम द्वारा भगवत दर्शन का विवरण भी भी देती है। इसमें भक्ति के स्तर भी बताए गए हैं। मौन, जो, निद्रा, भगवती, लख्मी, रागानुगा, भक्ति, श्री राम, चन्द्र आदि अवतार, देवतागण, बद्धात्मा तथा उनके कर्तव्य, भगवान श्री विष्णु की वास्तविकता, स्तुतिया, वैदिक, मंत्र, भगवान शिव, वैदिक, साहित्य, स्वगुण, निर्गुण, तत्व, सदाचरण, इति, सदाचरण इत्यादि अनेक विषय में भी यह चर्चा की गयी है। कौन चर्चा किया है, कौन किया है? सु ब्रह्म ब्रह्म संगत का शो कौन है? कौन गया शुभ ब्रह्मा जी? गाये है। ताली ब्रह्मा जी को ये सारे ज्ञान पता है। जितने विषय पढ़े इसमें समस्त ज्ञान किसको पता है? ब्रह्मा जी को पता है। इस इस में सूर्य भगवान के विश्व रूप का भी वरण विवरण है। इस ब्रह्म संगिता में इन सब विषयों का सार रूप में संचित वर्णन हुआ है। और ये समस्त ज्ञान ब्रह्मा जी को प्राप्त है। किसके द्वारा भगवान श्री कृष्ण को भी उन्होंने जो जो भगवान शिव ज्ञान प्राप्त हुआ, उसी ज्ञान को उन्होंने व्यक्त करने के लिए ब्रह्म संगीता की स्तुति गाने लगे है। अध्याय संख्या 202, सौ 40, पार भक्ति वेदांत स्वामी शिला प्रभुपाद जी कहते हैं। इसलिए ब्रह्मा जी हम सभी के वंदनीय है। सबसे परंपरा हमारे परंपरा, ऐसी उनसे ही शुरुआत होती है किस से ब्रह्मा जी से ही हमारी परंपरा शुरुआत होती है। तो इसलिए से ब्रह्मा जी के जगह पर आम देखे ब्रह्मा जी का 4 मुख कितना मुख आपको लगता है ब्रह्मा जी का 4 मुख, इसी ब्रह्मांड का ब्रह्म। लेकिन अब द्वारका में देखे थे की वो 4 मुख वाले ब्रह्मा कितने ब्रह्मा को लिखे थे। परार्ध मुख तक ब्रह्मा भी है अन्य अन्य ब्रह्मांड में। लेकिन ये फिर भी ये चतुर मुख्य ब्रह्मा जी हैं। अभी जो शासन जो सृष्टि का सर्जना की है। ये भगवान के शुद्ध भक्त हैं। ब्रह्मा जी हमेशा सारे ब्रह्मा शुद्ध भक्त नहीं होते हैं। ब्रह्मा जी 1 पोस्ट है। यह पोस्ट है। पदपीकानामहै। ब्रह्मा किसी भी जीवात्मा प्रयास करके तपस्या के बल पर ब्रह्मा के पद को हासिल कर सकता है। कितने जन बनना श्रम धर्मों को जल्दी ठीक। ऐसी त्रुटि रहित होकर कोई ऐसा ही सौ जन्म तक कैसे पालन कर लेगा। पचीस साल ब्रह्मचारी 50 तक हस्त प्रस्तर संन्यास, इसी प्रकार चा सौ जन्म तक सौ पीड़िया ऐसे यदि वो बनना समधनों, सी, टी, रहित, होकर पावन कर पाएगा तो फिर वो पद के लिए वो योग्य बन जाता। कौन सा पद के लिए, ब्रह्माजी, का पद के लिए जिस प्रकार इन्द्र को चाहिए, इन्द्र बनना चाहता तो उसको सौ करना पड़ेगा। अर्थात सौ बार डिकार में पृथ्वी का 1 छत्र दिप्ति समराट हूँ और कोई भी उसका चैलेंज नहीं दे पायेगा तो पर वो इन्द्र बनने के लिए योग्य बनेगा। इसी प्रकार यदि बनना श्रम धर्म का ठीक सौ बार यदि कोई उसको ठीक से निभा लेगा, पावन कर लेगा, नीति नियम के साथ, तो फिर ब्रह्म पद को प्राप्त करने के लिए योग्य पंज। लेकिन अभी जो ब्रह्मा ये ब्रह्मा विशेष रूप शुद्ध भक्त है, इसलिए महाजन है। इसलिए 12 महाजन में से पहला उनके नाम आती है, स्वयं। तो इसलिए ये महाजन भी है। और ये चारों वेद को पकड़े हुए है। कौन, सा, रोग, श्याम जदुर चारों दिशा में के मुख्य सार पर सब कुछ जानते हैं, जानने वाले सब कुछ देख सकते हैं, सभी सुख सब कुछ जान सकते हैं। ये भगवान के द्वारा विशेष सख्ती संपन्न है, सत्या तार भी है, ये गुणावतार भी है। लेकिन इसलिए हम बड़े भाग्यवान है की इन्ही के संप्रदाय में आये है किनके संप्रदाय में ब्रह्मा जी के संप्रदाय में ब्रह्म संप्रदाय है। इस प्रकार ब्रह्मा जी की महिमा भागवत में बताया गया। सबसे पहले भगवान ने ही इन्हीं को ही चत्तुसुलकेसुनाया। श्रीमद भागवत के चतुसुणकेआगेजोआयगा चतोसकीभागवतमेकहे। सबसे पहला श्लोक में भगवान कहते
न
पश्चात हम
जो
दुसरे विद्या। yataभasayatatama yatamhantiभutani butesucसनुpतनi vistaniasुनतsुहम। तत्व यस्या सर्वत्र, सर्वदा पूरा भागवत। श्रीमत भागवत को के चारों शोक में भगवान ने सब समझ किसको कहा? ब्रह्मा जी को ब्रह्मा। वह मैं ही वह मैं ही भगवान हूँ जो सुष्टि के पूर्व विद्यमान था। जब और कुछ भी नहीं था, तब इस सुष्टि के कारण सौ रूपया भौतिक प्रकृति भी नहीं थी, जिससे तुम वह भी मैं ही हूँ। और प्रलय के पश्चात जो शेष रहेगा, वह भी भगवान ही, भगवान में वो भी मैं ही हूँ। हे ब्रह्मा। जो कुछ भी सार युक्त होता है, यदि वह मुझसे संबंधित नहीं है तो उसमें कोई वास्तविकता नहीं है। इससे मेरी माया जानू। इसे ऐसा प्रतिबिम्ब मानो जो अंधकार में प्रकट होता है। हे ब्रह्मा। तुम यह जान लो कि ब्रह्मांड के सारे तत्व विश्व में प्रवेश करते हुए भी प्रवेश नहीं करते हैं। उसी प्रकार में उत्पन्न की गई प्रत्येक वस्तु में स्थिर रहते हुए भी प्रत्येक वस्तु से पृथक रहता हूँ। जो व्यक्ति परम सत्य रूप श्री भगवान की खोज में लगा हो, उसे चाहिए की वह समस्त परिस्थितियों में सर्वत्र और सर्वदा प्रत्यक्ष तथा प्रत्यक्ष दोनो ही प्रकार से इसी की खोज करे। इसलिए भगवान ने सबसे पहला भागवत किस को कहे, ब्रह्माजी को कहे। लेकिन ब्रह्मा जी को वैसे भगवान। चारो श्लोक में, चारो श्लोक में ब्रह्मा जी पूरा समझ गए। सम्पूर्ण भगवान क्या कहना चाहते हैं? ये चारो श्लोक ही बात में विस्तारित हुआ है। ब्रह्मा जी को कहें। फिर ये और विस्तारित हुआ और विस्तारित हुआ। फिर ब्याज ने इसको सुखदेव को सं हे और विस्तारित हुआ। सुखदेव को स शमी सुने। फिर दोबारा के रूसियों के बीच में कहे फिर इसके विस्तारित होता रहा। इसी प्रकार भागवत परंपरा से ही, ब्रह्मा से, भगवान श्री कृष्ण से, फिर ब्रह्मा से, परंपरा से ही भागवत ज्ञान को प्राप्त हुआ है। इसलिए भगवान भगवान की बड़ी अत्यंत प्रिय, प्रिय, संतान इनके पुत्र भी है, इनके इनके शिष्य भी है। भगवान की पहला यह सुष्टि भी है और इनके इनको भी। भगवान ने आदि गुरु रूप में भागवत के लोक कहते है। आदि गुरु आदि गुरु है। आदि देव हैं, देवताओं में भी प्रथम है, गुरु में भी प्रथम है। परंपरा में से ब्रह्मा जी के धाम पर ये ब्रह्मा जी की है पृथ्वी पर तो उस कहानी कालिया आप सुने होंगे, क्यूँ अन्य स्थान में उनकी पूजा नहीं की जाती। कहा जाता है की पुष्कर है, उनके मंदिर है। अब थाईलैंड थाईलैंड में देखे थे, ब्रह्मा जी के मंदिर भी है और इस प्रकार ब्रह्मा जी की बहुत सीमित मंदिर है। लेकिन ब्रह्मा जी की परंपरा में आते हुए हम उनके गुणगान अगले क्लास में कल फिर आम सुनेंगे ब्रह्मा जी किस प्रकार नामाचार हरिदास ठाकुर के रूप में आये है। भगवान श्री कृष्ण से ने ब्रह्मा को ये हरे कृष्ण मंत्र में ही लिखित किए। नाराज ने पूछे किसको ब्रह्मा जी को कली मनुष्य? कैसे उद्धार होंगे? तो उन्होंने भी वही कहा क्या कहा न। तो पर हरे नाम हर नाम हरेराम को नाश्ता नाश्ता नाश्ते व गतिरन्यथा हरे कृष्णा हरे, कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।
आज की और विशेष दिन है। आज संन्यास है, आज विश्वरुप महोत्सव है। आज श्रीमद भागवत का है
है,
महत्वपूर्ण भी है। भागवत चर्चा कर। भागवत ने भी कहा गया कि क्या कहता है। भागवत भागवत के अध्याय है। की 13 नंबर श्लोक पnmshamसिंहासनस्त, हम सिंहा सनान ददाति जो, भागवतम सजाति परम गति। आज के दिन जो क्या करता है, भागवत दान करता है। किस में रख के सोन सिंह घासन में रखकर भागवत यदि किसी किसी को दान करता है तो फिर परम गति को प्राप्त कर जाता है। परम गति भगवत धाम को प्राप्त करने के लिए अस्तास्त योज्ञ चले जाता है। कहाँ से आता है भगवत धाम को प्राप्त करता है। आज भी सब जगह इस कॉम्पिटिशन प्राइस में भागवत की भागवत के वितरण करने के लिए है। यह विशेष मौका है। आज के दिन भागवत बांटना चाहिए, लुक कूल देना चाहिए। भाग कैसा तो कहीं कर जाता है। लेकिन यह विशेष तिथि भी है। और पुण्य क्षेत्र में कहाँ? पुष्कर क्षेत्र में यदि कोई भागवत दान करता है तो विशेष विशेष भगवत जाने के मार्ग में निश्चित रूप में ग्रणी होगा। वह प्राप्त ही कर लेगा, भगवत धाम प्राप्त कर लेगा। इसलिए आप सभी सभी लोग प्रति होना जिसकी समर्थ है, पैसा कितने कहा जाता है है तो भागवत का, आज भागवत को कोई दान आज विश्व रूप महोत्सव है। भगवान चैतन्य बड़े भाई भला हइल विश्व रुप संन्यास करिल। मात्र कुल पित्रु कुल दुईवद्धारिला विश्वरुप विश्वरुप थे। उन्होने वे विशेष संसार हुआ। क्योकि स्कूल में पढाई करने, स्कूल में पढाई करने जाते थे। उनके पैर से जोन को प्राप्त करने वाले है और कम बस में भी सास है। तो सुने और इनके माता पिता उनकी शादी के लिए व्यवस्था करने लगे। उनके लिए लोग कहीं कन्या देखने लगे जो विवाह विवाह उत्सव बनाने के लिए प्रयास करने देखकर छोड़ के भाग गए। कौन विश्वरूप ये महा संकर्षण के अवतार थे, उनके विशेष देश लेकर संसार में आये थे। तो दुखी हुए माता स्वच और जगरनाथ मिश्र दोनों दिन रात रोते रहे। इतने शांत ये निमाई की दुष्ट नहीं थे, इसके बाल नहीं थे, किसको छिड़ते नहीं थे, बहुत शांत रहते थे और अत्यंत विद्वान विद्वान थे और सब लोग इनको आधार करता था। छोटे, बड़े सभी निवासी इनके स्वभाव से इनके प्रति आकृष्ट थे। ये ऐसे पुत्र को खो। ये दोनों बहुत दुखी हो रहे थे, रो रहे थे। तभी उनकी खबर मिला के यह जाकर कहीं सन्यास ले लिया है। कौन विश्व रुप, विश्व रूप जाकर सन्यास लिया। इसके बारे में कई महत्व आता है। अभिधान में कहा था कि वो बनारस में जाकर संन्यास लिए हैं, श्री कृष्ण भारतीय से, बनारस से। लेकिन हम साधारण तो जानते है। कहते है की विश्व रूप दक्षिण भारत में गये थे, कि क्षेत्र भाव। कहते की मैं दक्षिण भारत में जाऊँगा। क्योंकि मेरे बड़े भाई विश्व रूप दक्षिण भारत में गया है, इसलिए उन्होंने दक्षिण
भारत में जा कर।
पंढरपुर में कहा जाता है कि पंढरपुर में जाकर तो इन्होंने वहीं पर जाकर। पंडरपुर में लख्मी सन्यास इस प्रकार अन्य अन्य ता है और वहीं पर उन्होने अंतरित हो गए थे। कौन विश्व रूप। कई जगह पर यह भी लिखा गया विश्वरूप महोत्सव ये महोत्सव त तीनों तिथि, उनकी 1 ही दिन संगठित हुआ था। इनका आविर्भाव, इनकी क्या संन्यास और इनके अंतर ध्यान हो जाना, गला में प्रवेश कर जाना पड़ा वो तो अंतर हो गए, इसलिए विश्व रूप क्या कहते है। इस विशेष घटना माता पिता को शांत ना देते हुए कहते है की भाला करल, विश्व रुप सन्यास कर्ल, मातृकुल कुल उद्धार क्यूं रोते हो, अच्छा किया, सन्यास ले लिया, को उद्धार किया। जिस बंक्समेंएकभक्त बनत संन्यास का है, जो सम्पूर्ण काया मोनो वाक्य में सम्पूर्ण समर्पित कर दे, सब कुछ समर्पित कर देता है, किसको भगवान के चरण में जब शरणागत हो जाता है, सब कुछ समर्पण करता है। तो इसलिए 20 सौ रुपए जैसे समर्पण के आदर्श प्रतिष्ठित किए है। हम सभी के द ऐसे ही समर्पण करना, सबकुछ सब कुछ त्याग कर उन्होंने भगवान की सेवा के लिए त्याग दिया, इसलिए ये अच्छा किया। ये भी कहा जाता है चतनयमहापइसपेरण भाई के त्याग को देख कर जल्दी तु तुरंत नहीं छोड़ा, क्यूंकि माता पिता बहुत ज्यादा दुखी होंगे, लेकिन भविष्य में वो भी जो वस्ता से कितने साल में 24 साल सब छोड़ संन्यास लेकर, भारती में संन्यास लेकर पूरी जगरनाथपुर में आ गए। तो इसलिए ये विश्वरूप महोत्सव और प्रहुपाजने इसी तिथि को चुना किसके लिए संन्यास लेने के लिए संसारिक जीवन बिता दे। ग्रस्त जी आश्रम में थे तो में कभी कभी उनके गुरु महाराज आते थे। वही दिव्य सन्यासी व आध्यात्मिक जगत से वकुल जगत से तेज सी सन्यासी भगवान श्री कृष्ण के निज पात्शदंकीबीच से आ रहे थे। कर कहते थे सन्यास लेकर समय हो गया। संन्यास लो प्रचार में निकालो प्रभु पाज नहीं बड़े। क्या यह सम्भव में कैसे ले सकता है? से हो सकता है। मेरे छोटे छोटे बच्चे हैं, तो मेरे कितने सारे कर्तव्य पड़ा हुआ है, कैसे करे प्रभु पाजी 1 बार, 2 बार, 3 बार। स्वप्न में आ गए। तो प्रहुपाजनेपरभी तैयार नहीं थे, बिजनेस करते बिजनेसमैन थे। लखनऊ में 1 मेडिसिन फैक्ट्री भी था। लगभग उन समय में 40 लाख मेडिसिन फैक्टरी था। और कुछ इनकम करके पैसा कमाऊंगा, फेर प्लान करके फैर प्रचार करूंगा। लेकिन भगवान श्रीकृष्ण की प्लान और कुछ था। इसलिए तो उन्हों की गुरु का आदेश बार बार ये प्रस्तुत नहीं होते। तुरंत तो भगवान ने हस्तके किया, जदहंगनगनामीहरिसय, नई, सब कुछ छीनने लगे। इन मेडिसिन वो फैक्ट्री फेलियर हो गया। प्रहुपाझानसीमें प्रचार करते वक्त समाज लीग के प्रचार लगे हुए थे। उनका छोटा बेटा जो वृंदावन भक्त दिन आया, कहा पिता जी लूट गया, फैक्टरी लूट गया। कहाँ का चलिए थोड़ा, कुछ बचायेंगे, लेकिन प्रहुपजनहे बोले बेटा अर्जुन के सामने खड़ा होने वाला व्यक्ति को देखा। कितना हाथ था उसका हजारों हाथों से, हजारों हाथों से जो छीन रहा है, तो 2 हाथ में कितना पकड़ लेगा प्रपा किसी समय में, जीवन के किसी भी समय में सदा ब्रह्मा, सोचती पर फिर और प्रचार कार्य में लगे हुए है। तब से जो बिजनेस पूरा हो गया, पैसा कुछ नहीं रहा। यह परिवार को चलाने के लिए क्षमता नहीं रह का, जो अपने घर में 1 बार गए तो स्नान करके प्रत्येक दिन भागवत पढ़ते थे। भागवत पढ़ने के समय में भागवत भागवत था। नहीं कहा गया राधारानी उनके नाम भी राधाराणी। लेकिन वो 2 भागवत चाय दुकान भागवत चाहिए। चाय दुकान में हंसते हुए जानते नहीं, मैं सुबह, चाय पीती हूँ, शक्कर पति वहाँ लेके आया हूँ चाय भागवत से। उसी दिन घर त्याग, यू लाइक, मी और यू लाइक की वो भी मुस्कराते हुए। बोले लेक बस रहुपाजबहुतगंभर सीरियस हो गए। उसी समय निकल आया और कभी वापस नहीं गया। वृंदावन में आकर लोटा कंबल लेकर। पहले बंशी गोपाल मंदिर में थे। कैसे कैसे, कैसे सारी सन्यास बंकी गोपाल मंदिर है। ज्यादा ज्यादा लोग राधा बंशी गोपाल मंदिर है। जहाँ प्रहुपाजीआकरभी 1900 इन नाइनटीन फिफ्टी फिफ्टी, नाइन नाइन। उस समय की, वही थे, बंशीवोकपाड़ मंदिर में रहते थे। बात में। सिक्स्टी टू में आये। राधा सिक्टी टू से सिक्स्टी फाइव 62 से पैसठ। जब तक गए अमेरिका गए, तब राधा दामद रहते थे। उन दिनों में जो प्रभु को देखा है। 1 चटाई सिम्पल चटाई के कम्बल। ऐसे में कंबल 1 था बस सिर पर सुने। इसको भक्ति वेद नारायण महाराज कहते थे, पहले आते थे बहुत पहले। फोल्डिंग कम्बल ही सो जाते थे। टाइम लेते कुछ भी नहीं था। जमुना किनारे जाते थे जो वह समाप्त करके, जमुना में स्नान करके, वह लोटा में 1 लोटा पानी लेकर अपनी कुटिया में आ जाते थे। तो स्थिति में थे उन दिनों में। लेकिन अभी तो सीरियस हो गया उनके गुरुभाई को अप्रोच किया, कई लोग मना कर दिया। पहले से। ये जो थे भक्ति प्रज्ञान का सब गोस्वामी महाराज मथुरा में उनके सब गोडिया प्रुप देख रहा हूँ की ऐसी गुरुभाई के माध्यम, ऐसी मुझे मेरे गुरु महाराज बोल रहे हैं। और भाई बाबू यदि गुरु के आदेश है तो आपको सन्यास ले लेना चाहिए। संन्यास लीजिये मैं आपको संन्यास दूंगा तो प्रहुपाजमसेसहमति होकर देखे तो भगवान ने बाध्य कर दिए भी संन्यास लेने के लिए सौ छिन गया। कुछ नही तो इसलिए आकर किस गोडियमलठमेहै मथुरा में तो उन्होंने संन्यास आज की तिथि में, विश्वरूप महोत्सव आज की तिथि में सन्यास ले थे। कहा से मथुरा आज के दिन संन्यास संन्यास लिए थे। संन्यास श्रीमनी में कुछ लोग थे जो लोग थे कोई हिंदी बने हिंदी बैंगली समझने वाला ज्यादा था बैंगली बनने वाला है गोडि बोलने वाले। लेकिन प्रभु पर न बोलने वाला, समझने वाला बिल में कोई थे। लेकिन फिर भी प्रभु पाज ने जो उनके नया स्पीच बोलने के लिए इन्होंने इंग्रेजी में ही बोले स्पीस दिए, क्यूँकी उनके गुरु महाराज का आदेश थ पश्चात जगत में इंग्रेजी भाषा में बोलने प्रचार करने के लिए उन सभा में सीमित लोग थे। कई लोग भोजन के अपना प्रवचन देना प्रारंभ किए। उनमें से 1 प्रसिद्ध विष्ण थे और किचन कृष्णदास बाबा जी महाराज, प्रहुपयप्रह प्रिय प्रभु कृष्णदास बाबा जी महाराज अपने शिष्यों को कभी रुकते नहीं थे। उनसे मिलने के लिए कहते जाओ सभी कर सकते हो। किससे दास बाबाजी महाराज प्रत्येक व्यक्ति खड़ा होकर अपना अपना भाषण दे रहा था। कि स्वामी जी का मन संन्यास के बारे में बोल रहे थे। लेकिन अकिंचन कृष्णा दास बाबाजी जब खड़े हुए बोलने के लिए कुछ उन्होंने कहा आज ये पवित्र समारोह ये जो समाहरोह में जो भक्ति वेदांत ने किया वह चरण भाई बाबू अभय चरण को जो आज संन्यास दी जा रही है चरणदास को, चरण दास को, आज उनके संन्यास नाम क्या हुआ भक्ति वेदांत स्वामी महाराज नाम दिया गया भक्तवेदांत स्वामी महाराज।
लेकिन
कृष्णदास बाबूजी कहे की मैं ये देख रहा हूँ की इस समारोह में आप सभी लोग अन्य अन्य कार्य में व्यस्त रहते हो। बहुत कुछ कोई गाने बजाने अन्य सभी लोग लगे हुए हैं। लेकिन मैंने मार दिया इन व्यक्ति को। स्वामी महाराज ये बैठे हुए थे अपने स्थान पर और पूरे भाव इनकी आँख मुद्रित था और मुदित आँख में बड़े ध्यान से माला में जपा करते थे। हरे कृष्ण, हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे
हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।
इसलिए नाम में इतनी रुचि है नामे रुचि जीव, दया वैष्णव सेवा या धर्म नहीं सनातन क्यूँकि नाम में इतनी रुचि है। मैं ये फोटकास्टकरताहूँ भविष्यवाणी करता हूँ। ये ही चैतन्य महाप्रभु की इच्छा को 1 दिन पूरा विश्व तक बनायेंगे पथमितेजतगराधिग्राम। सरदकप्रप्रचारहईवे मोरो राम महा प्रभु की वाणी को इस व्यक्ति ने अवश्य 1 दिन सार्थक करेगा। भविष्यवाणी कौन क्या था कृष्ण दास बाबा जी की कृष्णदास बाबा जी महाराज यह भविष्य वाणी कर दिए थे। आज सन्यास नहीं है। आज हम कहाँ होते? प्रसिद्ध जन है किसका दास ठाकुर का यदि तब की तो भक्तों के लिए जदि तबे की कहा होता जो से खोला हुआ है। अभी स् की परंपरा गुरु परम्परा हम प्रहुपाजकेशिष्य के द्वारा लिखित है। कुछ द्वारा ये कहा से चलता था। आज सारे प्रपा कितनी देर है, रूनी कितने है? गुरु की रुण को शिष्य कभी भी चुका नहीं सकता। प्रहुपाजीकहतालेकिन प्रचार को अवश्य आगे बढ़ाने ऐसे गुरु को प्रसन्न कर सकता। इसने प्रहुपाजी आज के दिन ही संन्यास लिए कहाँ पर केस गोडिमुराज्ञान कैसे स्वामी महाराज से। इसलिए संन्यास लेना मना नहीं है। कहा जाता पुराण ा गया, को सन्यास का छोड़ गया वो औसमधंगवालमसन्यासम पड़ा पुत्र 5 चीज में वर्जित किया गया है।
क्या
सन्यास ये केवल माया बाप सन्यास को मना किया है। जो सो हम मैं ही भगवान हूँ, स्वयं ब्रह्म डिकलारकरताहैनही, हमारे सम्प्रदाय में देखेंगे चाहे प्रसार करने वाले आदि संकरजी सन्यासी है। कितने साल में सन्यासी है? 8 साल में संक्राचारजीआठ साल में संन्यासी है। माधव सम्प्रदाय के ब्रह्म सम्प्रदाय के आचार्य कौन है? माधव 4 मध्य मुनि, माधव आचार्य माधव आचार्य 12 साल में सन्यासी है। जो भी रुद्र संप्रदाय के विष्णु स्वामी, वो भी सन्यासी है और निंबार्क निवारक, जो भी आदि जो संप्रदाय के प्रारंभ सभी सन्यासी है। हमारे सम्प्रदाय में, हम देखते है की माधव में सन्यासी रहे, इशरपुरी रहे, सन्यास रहे। इसके बाद थोड़ा गुस्सा परंपरा। लेकिन फिर भी इस परंपरा को भक्ति सिद्धांत सरस्वती ठाकुर, फेर, शुभारम्भ के फेरवो संन्यास लिए, दंड लेकर आरोप, उन्ही से प्रभु सन्यास लिए है। उनसे और संन्यास से संन्यास वर्जित नहीं है। लेकिन जानना चाहिए की पूजा, मान, प्रतिष्ठा के लिए सन्यास नहीं होना चाहिए। इसलिए संन्यासी बनना चाहते पूजा, ज्यादा, सम्मान, मिलेगा, ज्यादा लोग, माँ प्रणाम, करेंगे, मा, अच्छा खाना, ये सब के लिए अ संन्यास की अपतिदंडधारणकरना काया मोनो बाक्य में संपूर्ण रूप में भगवान के गुरु में समर्पित हूँ और उन्ही की इच्छा को मेरे गुरु आदेश को पालन करने के लिए मैं जीवन को पूरा समर्पित कर दिया हूँ। जीवन उसी के लिए है। गुरु कृष्ण प्रसंता के लिए है। इसलिए परपज इसी भावना से प्रहुपाजीकीआजस्यास तिथि है। तो इसी भावना ऐसी कोई संन्यास ले सकता। नेता संन्यास इस कॉलेज में बजी, लेकिन आज प्रभु प्रहुपाजनेसन्यास कृष्ण बलराम मंदिर, वृंदावन में आज 1 उत्सव मनाया जाता है। वहाँ पर बड़े बड़े स्पीकर स्पीच तो और आज चंद्रग्रहण भी है, जानते चंद्रग्रहण भी आज है, साध पे भी प्रारंभ हो रहा है। कब से आज से शुरू हो रहा है। सादा पखे शुरू हो रहा है पिंडदान करने का। लेकिन के लिए इतना ठीक है क्यूँकि? वॉटम लोग फिर भी पित्र साध कर रहे थे? यदि वो महा विष्णु के वतार थे, लेकिन फिर भी ग्रस्त तो वो भी पिंडदान करते थे। लेकिन पिंडदान जो अर्पण करते थ प्रसाद सबसे पहला पात्र किस को अर्पण करते थे, नामाचार हरिदास ठाकुर को खिलाते थे। इसलिए इस प्रकार कई दृष्टि से आज के दिन बड़े महत्वपूर्ण है। इसलिए आज भी श्याम सब लोग के हुए, एकत्रित हुए है। कुछ गुणगान करने की विशेष किस का ब्रह्मा जी के जिन्होंने, हमारे संप्रदाय के संस्था सब चार्ज है। मुख्या अचर्ज उनसे ही हमारे ब्रह्म सम्प्रदाय प्रारंभ हुई है और ये भगवान श्री कृष्ण के प्रत् संय पुत्र हैं और भगवान सिह डायरेक्ट प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त किए हैं। इनके हर्देश भगवान ने इनको ज्ञान दिया है। उसी परंपरा से हम आये हैं। उसमें प्रत्येक सभी लोग आज विशेष रूप में है। उनका स्मरण करने के लिए ब्रह्म संगीता को भी गा लेना चाहिए। समय है कितना टाइम है, है is ना ली सह सत संग से क्या बरहा वतंग समसितमबुदसुनदरंगम कंदल कोठी विशेष चोभम
गोविंद मारी पुरुष श रतना गदम प्रणय केलि का सम श्यामन त्रिबंगललितंगियत प्रकाशम गोविंद अगनीस्यसकरेवृत्ति मंदी पश्चनतीपांदि गंदी चिरंजगंतीआनदचिन माय सदुजलविगहस्या
पुरुष
द्वतबचुबनादीबनंत रूपम आध्यमपुरानपुरुषम वय वेदेशुदुल्लभबदुर्ल भात गोविंद मादी पुरुष भजन बनथस्तकोटिछतसरसम प्रगया बायो रथापिबनसमुनिपुंग नाम गोली दी पुरुसमकमहनभजानी गोप्यसरचतुमजगदंड कोटी यछरस्तजदंडचयाय ता अनडातरसतभरमनचाया रस्तम गोविंद पुरुष यदभाबभावितदियमनुजा कई वा सं प्राप्य रूप महिमा सनया न भूषा सुताइगमेबनिगम प्रतिदस तु बनती गो।
आदि पुरुष तमहं बजानी आनन्द चिन मायरसप्रदिभाविता
बेस ता भी बनिजरुपतयाकलाबी गोलों का वनिवसत्यकिलामभूता
गोविंद पुरुष
प्रेम जनाछुरिदभक्ति विलो चनेना संत सदा भगृधयशुविलोकयंती यशा मसुनदरबचिंत्य गुना रुप गोविन्द पुरुष भजनी राम दि शुकला नियमे नतिश्कनदहनाबतरमगरो बने शुकिन तो कृष्ण स्वयं सम र म पु मान्य यस्य प्रभा प्रभत कोटी कोटी स्वचेशबसुदाती विभुति बिनन तक ब्रम बारिश का मनतमचेचभूतम गोविन्द पुरुष तमंजनीमायही्यजदंड सतानी सुते तरह गुण्य वेद बिताया सत्व बल मि पर सत्व विशुद्ध सत्व गोविंद आनदचिमरसतमदयामनफ सो प्राणिनाम प्रति पलनस्मरतामुपेत लीला। इते नबु बनान जयत्यजश्रमगोिुरष गोलोदननिनिजधमतले सतस्या देवी महे सहरिदामसुतेशुदेशु प्रभा बन चयाबी चाहना गोविन्द
आदि
स्रष्टि स्तीदीरलयसाधन शक्ति रेखा चाय वाय भु बनानी भर्ती दुर्गा। इच्छा नो रूपमपय्यचकतेसा
पुरुष
षीरमयथाददिविगार विशेष योगा संजायते नहीं तथा प्रिती तो य शंभुता बपिततासमोपतगरया महंग भजन य कारण नभजलेभकदीपाचिरेवहि दचनतरमभ्युबेत्या दीपा। यते विवृधहेतुसमानधर्मा यसाद्रगेवहिजविष्णु या वि भाती
पुरुष
जा यह कारण जले भजदिस्मयहगनिद्रा बन जगदन्डसरोमकुपहा गोविंद यस्कनिश्वसीतकाल बता बल पयाजीबंतिलोमबिलजा ता विष्णु महान स यत्यकलाविशेषो गोविंद भसवनथमसकलेशुनिजेशुते जहा सवीमकीपग अध्यपितत्वधत्रा ब्रह्मा यह शजगदंडविधानगरता यद्बदबलभयुगमविनिधाय कुम्भा द्वंद प्रणाम समय सगणदिराजाविगनान बिह तुमलमस्याजगत्रयस्या गोविन्द पुरुष
कम
ही गगनममबोमरुद्दिशश्चा गह स दा म सी जगत्रयाणीजस्माध भबंतिविभवंती विशंतियमचा गोविन्द मद पुरुष यज्छछुरेशसविता स कल ग्रहाण राजा समस्त सुरमूरतिरशेशतेजहा
यस्या ब्रभदिसमभुतका लचक्रओगोविंदमाद पुरुष महंग भजामि भर
बदबाबनिजयश्रोधयस्त बम से ब्रह्मादि की टपदगबदयसचजिवहा। यद म त्रबिभवप्रगडप्रभवा गोविंद पुरुष यसविन्दरगोभम दवेंद्र महो्वगरमबंधानुरुभ मातनोति कर माणिनिर्दहदीकिनतु भक्ति बाजा यनक्रदगामसजप्रण दि बीती व सल्यमोहगु गौरव सेव्य भाव संचिनततसदशिनतनुमा पुरे ते का का परम पुरुष दरुमाभुमि्चिंता मनि गण गधा गनnनटिंगmnmपiमशi के सिदnndnजोdprmतद सु सु महान नहीं यत्रापिसमयहा भधेश्वेददीपम तमहमिहगोलोगमितियम विदनदस्तेसनदक्षि जारा की ईश्वर परम कृष्ण सचिदानन्द विग्रह अनादि राधिरकोविनद सर न क राम हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे हरे रे
रामा हरे हम रामा रामा हरे हरे
श्रीला प्रभुपाद की कोई किस का प्रश्न है? प्रश्नोत्तर
हरे krsna
महाराज जी सौरी सौरी महाराज जी सौरी कहाँ से बोल रहे
सोरी महाराज जी सौरी महाराज 11 प्रश्न था कि ब्रह्मा जी का मंदिर सब
जगह क्यूँ नहीं है?
सिर्फ पुष्कर ही क्यों है?
तो काले सुने होंगे कथा में की ब्रह्मा जी की जो इनके मूल पत्नी है साबित देवी लेकिन ब्रह्मा जी यहाँ पर जज कर रहे थे विस्तार से नहीं कर रहा सुने पुस्कर महिमा जो बोल रहे थे तो में उनको लेट हो रहा था पत्नी के साथ में दोनो बैठ के जज करते हैं। लेकिन ये सावित्री आने में विलंब हो रहा था। इसलिए ब्रह्मा जी ने सो गाय है, गाय जो पर बैठा कर जज्ञ कर लिए। इसलिए क्रोधित हो अभिसाबदी कौन साबित जला दिए। इस पूजा नही सुने थे। उसका महिमा क्या पुसकहिमाउसमेआपको बताया गया होगा। और कोई प्रश्न है। हर कृष्ण महाराज, धनवाद प्रणाम, धनवाद प्रणाम। महाराज जी, महाराज जी कल की कथा में आया था की कहाँ से बना खड़े खड़े खड़े है। महाराज जी लो कल की कथा बताया
गया था की 3 कमल के पंखुड़ी
गिरा था और तीनों पुष्कर बना।
तो 1 तो यहाँ है, 2 कहाँ है?
यही पर है। तीनों, तीनों, यहीं पर है ही। पर मूल पुस्कर 2 सबसे मूल पुस्कर है। वो ब्रह्मा पुस्कर है। उसके बाद विष्णु पुस्कर भी है और शंकर जी का पुष्कर पुस्कर भी है। तीनों इधर ही है। ठीक है अच्छा इधर, इधर, ऐसी माता जी कुछ हरे कृष्णा महाराज जी। बहुत बहुत धन्यवाद। महाराज जी जैसे हमने सुना की ब्रह्मा जी गुरु भी हैं, शुद्ध भक्त भी हैं और जवान के पुत्र भी हैं। भगवान के पुत्र रजोगुण के अधिष्ठाता देव भी है, रजोगुण के अधिष्ठाता देव भी हैं। तो शुद्ध भक्त या रजोगुण की दिष्ठ स्वयं रजगुण में नहीं है। नहीं, इसका शुद्ध भक्त की परिभाषा क्या होनी चाहिए? शुद्ध भक्त की क्या परिभाषा होगी? फिर आपको पता है और न्याय सुन्य, ज्ञान, कर्मादि, अनुकुल परिभाषा है। तो रजगुन, दिष्ठ, क्यों, दूसरा, सेवा, भक्ति इंद्र को भगवान कृष्ण की सेवा में लगाया है। ठीक है कृष्ण मदनजी, महाराज जी, प्रणाम टो। यू तो मेरा प्रश्न है कि
ब्रह्मा
जी भगवान के सर्वप्रथम पुत्र है।
और फिर आपने बताया कि ब्रह्मा जी
1 पोस्ट है, ब्रह्मा जी 1 पदवी है, म है। अभी। अभी जो ब्रह्मा हैं, उनका का क्या नाम है? ऋषि कुमार, प्रभु क्या नाम है? अभी जो ब्रह्मा है, चिरंजीवी क्या, वीरन जी, अभी जो ब्रह्मा है, उनके नाम हैं। जैसे इंद्र है, इंद्र भी 1 पोस्ट है। पोस्ट में बैठने वाला व्यक्ति, उसका नाम होता है। इंटर चेंज होते हैं, ब्रह्मा भी चेंज होते है। तो इसलिए मेरा प्रश्न ये था कि जो सबसे पहले पुत्र है, उनका नाम विरंची हुआ। और फिर जो आगे अलग अलग भगवान स्वयं कितनी बार सुष्टि होता है? फिर सम्पूर्ण हो जाता है। ब्रह्मा। जब सम्पूर्ण पर प्रलय का देखे न भिन्न भिन्न प्रकार की प्रलय होता है, जो सम्पूर्ण प्रलय है। तो ब्रह्मा, समेत सब कुछ ब्रह्म लोक मत पड़े हो जाता है। तो ब्रह्मा पर दोबारा सुष्टि होता है। और कोई प्रश्न है।
अरे महाराज महाराज जी गुरुदेव के प्रति अनुराग कैसे उत्पन्न करें?
गुरुदेव के प्रति अनुराग कैसे उत्पन्न करना है? गुरु देव को आदेश को पालन करते हुए गुरु देव की 2 प्रकार की सेवा आप कर। पाओगे की बाणी बप्पू सेवा।
तो
वाणी वाणी जो है। प्रभुपाद, साहित्य, प्रकाश, प्रचार, साधु, मंत्री कहता है? पुस्तक का वितरण करना, प्रभु, पाजी, किताबों का वितरण करना प्रभु। पा जी को प्रसन्न करने से हमारे गुरु महाराज प्रसन्न हो जाते। ठीक है और कोई प्रश्न है। बोलो।
जब भी सन्यास किसी को मिलना होता है तो क्या मतलब भागवती उसको अनुभव
स्टार्ट हो जाते है?
या जैसे अपने सांसारिक जीवन में उसे कोई ऐसी बाधाओं को मतलब फेस करना पड़ता है। इसलिए वो सन्यास लेता है। मतलब जैसे आप हैं तो कैसे अनुभव
होते हैं
गुरु के आदेश से? क्या सभी गुरु का गुरु के आदेश से शिष्य को संन्यास लेना?
कभी जो सन्यासी बनते हैं अचानक से। जैसे आपने कहा की गुरु महाराज को भागवत अनुभव होने लगे थे, अब उठो सन्यास लो। तो क्या सभी संन्यासियों को ऐसे अनुभव होते है? या फिर वो साधु संघ ऐसे ही हो जाते?
प्रभु पाजी की जैसे स्थिति था उन्होंने बताई सभी का सन्यास।
और जैसे आप सन्यासी जीवन में है, उसका क्या अनुभव होता है?
सांसारिक ऐसी कैसा अनुभव होता?
हमें बचपन से संन्यासी है। आप भी संन्यास लेना चाहते हो
है
ब्रह्मचारी पहले रहो, कम से कम ब्रह्मचार
रहोगे
फेसन्यसकीबरेमे क्यू जिज्ञासी करते हो? आप तो खुद ही ब्रह्मचारी तक भी नहीं बन पा रहे हो। ठीक है और कोई प्रश्न है अरेक्
हरे कृष्णा महाराज जी आपके
और कैसे कोई प्रश्न है हरे कृष्णा, हरे कृष्णा
महाराज जी, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा महाराज जी आपके चरणों में महाराज जी हम भाग से, आज हम आप से, हम लोग शाली है कि आ पाया समय में आप के सामने महाराज ब्रह्म पूर्ण में स्नान का क्या महत्व है? ब्रकु में आज के दिन स्नान का क्या महत्व है?
जैसे चंद्रगढ़ है तो क्या महत्व आप जानते हो
स्नान करना चाहिए, आ पता
नहीं है, स्नान करना चाहिए, क्यूँ नहीं करना चाहिए? छा।
तो महाराज। 1 दुसरा था की जैसे कुछ भक्त टेम्पल की सेवा में लगे हुए हैं, कुछ भक्त जो आ नहीं पाया टेम्पल की सेवा में लगे हुए हैं, तो क्या उनके लिए इस समय का कुछ जल वगैरह ले जाना चाहिए? जल वगैरह ले जाना चाहिए अपने साथ,
तो आपकी आप जानते, आपको जल लेना नहीं चाहिए। शुभ आपके ऊपर निर्भर करता है, वन आधा करण, जल लाते हो, नहीं लाते जरुरत है स्थान की, जल लेना चाहिए। भगवान को देना चाहिए न चढ़ा 2 पत्रंग पुस्प
आपने के लिए जी महाराज जी ले जाए। प्रश्न जिनका भी प्रश्न थोड़ा आगे आये है, पता नहीं चल रहा ह विश्रा
महाराज, थैंक यू सो मच महाराज। जैसे हमने कल सुना की सावित्री जी ने ब्रह्मा जी को श्राप दिया है। और तो इससे हमें, हम, हम जो शिक्षाएं लेते हैं तो हमें इन कथाओं से कुछ शिक्षा लेनी होती है। इन इन कथाओं से हमें कुछ शिक्षा हम सीखते हैं। तो हमारे को पर्सनल लाइफ में तो ऐसा कहा जाता है कि अगर हमें हर कोई भी प्रोवोकिंग सिचुएशन है तो हमको उसको टॉलरेट करना चाहिए, हमें क्रोध नहीं करना चाहिए, किसी को अंदर से श्राप नहीं देना चाहिए या बुरा नहीं करना चाहिए। तो इससे हम क्या शिक्षा लेते है? अगर दिया किसको साथ देना तो मन की तरफ पहले बनो तो आपका साथ भी आशीर्वाद बनेगा। नारमन। साफ दिया किसको न तो उनका कुछ नुकसान होना। क्या विष्ट की साफ और इनका अश्रीवाद साफ दोनों बराबर होता है। इसलिए पहले साफ देने के लिए वो ही जोगी बनता है, जो ऑलरेडी विष्ट है। जिसको नारदमुनि के समान सब समय पर पर दुखी दुखी रहता है। सारे संसार के कल्याण के चिंतन में जो सदा रहता है, इनके अभिसाप उसके कल्य होता है?
नहीं।
सावित्री जी श्राप दे रहे हैं, सावित्री जी गुस्सा कर रहे हैं, क्रोध कर रहे हैं और श्राप दे रहे हैं। और ठीक है आप उनको फॉलो करोगे ना क्या महा जन जन का तश्यपनथामहाजनको ठीक है महाराज और कोई प्रश्न है
थैंक यू महाराज
जल्दी बोला महाराज जब
भोग लगाते है तो पर्दा क्यों करते? क्या? हरे कृष्णा महाराज महाराज ये पूछना चाहती है कि हम भोग लगाते हुए पर्दा क्यों करते हैं? काफी समय से पूछ रहे हैं आप से भोग को बचाने के लिए। युवा ऐसी लाल टपकेगा भगवान के सामने आपको। भगवान जो खाना है उसको खाने के लिए आपके मन में इच्छा नहीं होना चाहिए।
हर कृष्ण महाराज जी, राम महाराज जी,
मेरा प्रश्न था की आप तो प्रश आपको नहीं दिया जायेगा। दूसरे बोलो ये पूछता हूँ महाराज जी
की वैष्णव अपराध से कैसे बचा जा सकता है?
वैष् की सेवा करके तादेरेचरणऐसीभी भक्त निवास जन्म में जन् मे भिलासवैष्टमकी सेवा की निंदा करोगे, प्रशंसा करो, वो की सेवा
करो,
सदा, वषों की सेवा करूँगा, स्टोंस सेवा लगा नाम दास है। मैं सभी का दास हूँ प्रभु कोई मुझे कहने पर भी मैं अपने स्वरुप, अपने स्थिति को जाने दास हूँ। ठीक है जीव, स्वरुप कृष्ण नित्यदास सबकी सेवा करो किससे मक्खी की तरफ कमी को मत देखो। गंदगी में बैठे। प्रत्येक व्यक्ति पास कुछ दुर्गुण रहता है और कुछ अच्छे गुण रहता है। मधु मक्खी की तरफ मधु में बैठे इसके अच्छे गुण को देखो। किसी व्यक्ति से कोई बुरा गुण मत देखो। किसी व्यक्ति कितनी कितनी दुष्ट होने पर भी जल्दी उसके 95 प्रतिशत नाइनटी, नाइन प्रतिशत भी गुण होता है। 1 परसेंट कुछ न कुछ अच्छा गुण होता है। अच्छा गुण को देखो तो फिर आप किसी की निन्दा नहीं करोगे। ठीक है दूसरे ऐसी अछे गुण देखो, उसी की सराहना करो। और कोई प्रश्न है हरी कृष्ण महाराज जी, दननोदप्रणाम महाराज जी जैसे भगवान ने ब्रह्मा जी को बोला था तप करने के लिए तो तप का मतलब भक्ति योग होता है। और भक्तियोग हरे कृष्ण महामंत्र से शुरू होता है। तो हरे कृष्ण महामंत्र हर जैसे ब्रह्मा जी का कल्प शुरू होता है तो हर कल्प में वैसे ही शुरुआत होती है क्या तब का तलब भक्तियोगी होता है। हरे कृष्ण कॉलेज में कॉलेज के धर्म है, कॉलेज की मनुष्यों के लिए जरुरत है लेकिन भगवान में लगता है कृष्ण ने ब्रह्मा जी को ये हरे कृष्ण मंत्र में ही लिखित किया है। तो इसलिए भक्ति योग, भक्ति योग, भक्ति जोग धन, भक्ति जोग कृष्ण नाम बन
कंडम
करना लेकिन उच्चारण करना लेकिन आँख से असर बढ़ना सवणकंदनमेसधरबगगध रुद्ध, गिरा पुल कई निचतबपुकदातबनग्ण भविष्य
है।
हरे कृष्ण समय हो चूका है।
अरे कृष्ण हरदयसीसबमहाराजजी का अभिवादन करे। परम पूज्य स्वामी गुरु महाराज की जगत, गुरु, शिला की गोपाल, स्वामी, गुरु महराज व यात्रा की। यहाँ पर श्रीदाम प्रभु अभी थोड़ा निकाल गए हैं। गुरुदेव श्रीदाम प्रभु। तो आज का कार्यक्रम कुछ आगे इस प्रकार रहेगा कि अभी कुछ ही समय में हमारे गोरांग गुरुकुल से बच्चे प्रस्तुत करेंगे। क्रैटीट्यूटऔर गुरु परंपरा इस विषय के ऊपर गुरु परंपरा के प्रति कृतज्ञ दा। इस विषय के ऊपर लघु नाटिका प्रस्तुत करेंगे। उससे पहले 1 विशेष अनुरोध महाराज जी से कि हमारे गुरु महाराज के स्मरण के रूप में हम लोग नया, कैलेंडर और डेली मेडिटेशन गुरु महाराज को ऑफर करना चाहते हैं। सभी प्लीज फोकस ऑन दैट पार्ट महाराज जी से अनुरोध है और कुछ बुक्स भी। आज हम पुलिस कर रहे हैं। गुरु हमेशा चाहते थे, ये हमारे नंद गोपाल जीवन, गोल्डन मीडिया के सब जानते हैं। तो महाराज जी बताते थे कि नंद गोपाल इस जीनियस। तो महाराज जी चाहते थे कि नंदोगुबाजीवनप्रभु हर व्यास पूजा में, हर फेस्टिवल में कुछ न कुछ नए बुक का प्रकाशन करें। और इसके साथ यहाँ टू थाउजन्ड ट्वेंटी सिक्स का कैलेंडर भी है। इसके अतिरिक्त भी हमारा स्टॉल वहाँ पर है। गोल्डन एज मीडिया का जरूर वहाँ से आप बुक्स प्राप्त कर लें। गुरु महाराज के द्वारा लिखित तथा उनके प्रवचन से रेखा के जितने भी ग्रंथ हैं वो सारे में उपलब्ध है। ये कॉन्वर्जेशन स्वि स संत के साथ वार्तालाब शीला प्रोप और गुरु महाराज के बीच जितने भी संवाद हुए हैं। वो सारे इसमें है और मात्र 1600 रुपए वाला था। आज कुछ भक्तों के विशेष योगदान से सिर्फ 500 रुपए में 550 रुपए में आपको उपलब्ध है। जरूर उसको प्राप्त करे। इसके बाहर कोई भी नहीं है। प्रोप और गुरु मराज के बीच में कोई भी कांड नहीं है। इसके बाहर। तो जरूर इसको खतरे कितने लोग लेंगे, थैंक, यू और कुछ अन्य ग्रंथ भी हैं जो की डेली कोट्स है। कैलेंडर के सुबह आप इसको देख कर अपने दिन की शुरुआत कर सकते हैं। महाराज जी कुछ बोलना चाहते हैं। महाराज जी को पहले 1 प्रति दे रहे हैं। महाराज जी को डेली मेडिटेशन बहुत जरूरी है। भागना और कुछ बुक्स और है। तुरंत रिलीज कर हे हैं। आज इनका प्रकाशन और है पुष्कर में 1 स्व बृहद भागवत, अमृत कथा रूप में, सर्वसाक्षी रूप के द्वारा, श्री कथा रूप में महाराज, श्री कृष्ण जन्माष्टमी भी बिल्कुल अच्छा लग जाएगा, भक्तों को दामोदर लीला, होली लीला, होली, मत, ओ, ओ एल वाई, होली ल और माखन चोरी लीला और श्री राधा ये सारे ग्रंथ आज इनका प्रकाशन हो रहा है। छोटी छोटी पुस्तकें हैं जरूर इनको भी प्राप्त कर ले। लेकिन मुख्यता गुरु महाराज के जितने भी प्रवचन के द्वारा प्रवचन, ऐसे आलेखित जितने भी ग्रंथ है, उनको जरूर खरीदे सुर। गोपाल स्वामी, गुरु महाराज की, गोपाल, कृष्ण, गोसवा महाराज, इंस्पायर्ड, गोल्डन मीडिया के और 1 विशेष प्रति है हिंदी में, अंग्रेजी में दोनो ये प्रति पूरी तरह समर्पित है। गोपाल कृष्ण, गोसवामी, गुरु महाराज के लिए भगवत दर्शन प्रति हिंदी में है, इंग्लिश में back to god हेड द फोरमोस्ट। इस्कॉन मैन परमोन्नत इस्कॉन के प्रतिनिधि शीलगpाdकीअबगौरांगा गुरु के द्वारा लगुनाटिका गुरु परंपरा से संपणतवकगदाग्राटिटयू तो गुरु परंपरा। जैसे जैसे स्टेज तैयार हो रहा है, कुछ विशेष सूचनाएं और भी है। आज दिन के साढ़े 10 से 3 बजे तक आप विश्राम कर सकते हैं। यह धाम के स्थानीय जितने भी तीर्थ स्थान है वहां पर दर्शन कर सकते हैं। 3 से 5 बजे भाद्र पूर्णिमा महोत्सव
जी
बस यहाँ के लोगो को अच्छा लग रहा है। हा के लोग बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा है। श्रीमद भागवतम का गुणगान करेंगे परमपुजगुरुप्रसाद स्वामी
मारा
और 5 से 6 बजे 5 से 6 बजे प्रसाद है उन लोगो के लिए जो की आज उपवास नहीं रख सक। ग्रहण के उपलक्ष में वो 5 से 6 बजे प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं। 6 से साढ़े 6 बजे शाम को अजमेर भक्तों के द्वारा नाटिका है। पतित पावन गौर साढ़े 6 बजे गौरा आरती और 7 बजे संध्या कालीन प्रवचन होगा। परम पोज भक्ति श्रवैश्रजस्वामी गुर महाराज के द्वारा और आज का विषय होगा। ब्रह्मविमोहन लीला तो अब अधिक देर न करते हुए लघु नाटिका देखेंगे। गुरु परंपरा के प्रति कृतग्यता के बारे में जिनको भी प्रसाद लेना है। इसके बाद ले और अच्छे से अपने आप को लोड करें। अगर उपवास रखना चाहते हो तो अरे कृष्णा,
यदि पर हो तो कब, की हो तो बेजेवानाबहीतगीसे
तो
जे वाना बही
से
गा रेराकारका कुरूनशकरदेशेेतरिराम कुरुन देशेतबके हो जेवनपहेतकेसतरोजो तुम अभिदरंचारीशयवादे बायाबादीनधेराउधारा कोरि माना है दायानीटितधराऊ धरा कोरि बारे बोला इन कौन नीरयदकतबेकतूजबन
श
दे रानी खाते कंजा नाशी मेला तो होरेन ददे रानी क गंजा नाशी लयता होरी ना शवयाजीपारूपे गाड़ी दे ता धा रा हो ही तो गुय होई तो दावे, की हो तो एजेवनानेतकीसे होरी, विग्रहो शेव हरुधीरत्रीधिने देश देशी होरी विग्रहो शेव आरूतीरत्रीटिरे रत तझतदीमहूसबछोरो दा को जाने दी, जे मा नो पहेतकेसे
गीता
का गबताचेतन्नचोरीत थोरा सा सारो गीता का करता चतननचरिताप्रेमा थोड़ा सा सारोकदानाशलारा सरल कोरिया के पुजताआर
लेस
की हो तो जिवोलातहेत।
i go
to
कृष्ण से ईर्ष्या करके
मैं इस भौतिक संसार में आ गया।
लेकिन कृष्ण ने ही कृपा करके मुझे
वैश्नव का सम दिया।
जिन्होंने मुझ भक्ति का मार्ग दिखाया,
उस
मार्ग पर चलना सिखाया और महान गुरु
परंपरा की गोद में मुझे बिठाया।
a आपने कृपा कर मुझे अपनाया भक्ति का मुझको रस्ता दिखाया लडखडाया मैं जो मुझको संभाला उंगली पकड़ मेरी चलना सिखाया। संग पके बहता जीवन भक्ति बड़े मेरी ये चिंतन करते, कमियों को मेरी पूरा करते, सब कष्टों को खुद सेहे जाते भक्ति की राह मेरी सरल बनाते, संगपकेबहताईजी मुझे सार समझ नहीं आते। संग पढके मुझे समझाते हर प्रश्न का पड़े देते है। मुझे जब करू में ध्यान लगाकर, इसके लिए युवती बनाते। आप की वजह से जब मे हम में लगे आपने तो अपना हर पल मेरी सेवा में लगाया प्रेम इतना दे दिया। संग प के बहता जीवन मुझे भक्तों के संग मिलाये परिवार का हिस्सा बनाये। सीराज से अपने अपने त्याग प्रेम से सुख दुख में संद रहे। जो सदा किश्न की याद दिलाये बचके सकु। यहाँ माया के जाल से आपकी ही वजह पाये सच्चे रिश्ते मैंने झूठी दुनिया के बीच में संग प के बहता ए जी रभु पात के सैनिक बने हम कैसे शिक्षाएं, उनकी जिए, हम कै से आचरण से, अपने हम को सिखाते, बिना आप के हम ना कुछ कर पाते। संग आप के बहता जीवन सदा करते कृष्ण की सेवा का ठाकुर जो के लेना विड़ताभकतीमें मे देख कर को मेरे मन की रुचि है, जिसमें से वह ढूंढ ले आये। इस तरह से मोड़ मुझको भक्ति की राह पे मन से जो मैं लड़ न पाऊँ अन थो में मैं बस जाऊँ। दे हंस के मुझे अपना अनमोल समय मेरा उत्साह बढ़ाते 4 सिखाते ही में बांध देते प्रेजोरसीआपने तो अपना हर पल मेरी सेवा में लगाया प्रेम। इतना दे दिया संग आपके बहता जीवन, संग आप के बहता ये जीवन
यह
करुणा की नदी तो सीधे कृष्ण से आ रही है और हमारे महान आचार्यों के माध्यम से हम तक पहुँची है। आओ बताता हूँ आओ मिलवाओ तो मे शीला प्रभु पा से सबके शुभ चिंतक
वोही रे
वो जो न होते तो ये संग न मिलता कृष्ण मिलते हमको कैसे गुरु के आदेश को माना जीवन का धार रि अंग्रेजी में लिख डाले ग्रंथों के अनुवाद रे वृंदावन से दिल्ली आते ग्रंथ को छपवाने में कागज लेकर जाते थे पब्लिक चर की दुकान में जो प्रभुपाल ीला प्रभुपाल जाय प्रभुपाल शीला प्रभु पा गीता भवत चैतन्य चरित रे दिन तो 9 ने लिखे सर्दी गली न देखी सड़कों पे निकले घर घर बटन समुन्दर पार गए वो 70 वर्ष की आयु में 40 रुपए और भागवतम लेकर अपने हाथों में in the m
c t i m this tansnmentl vibration बाई चाटिंग हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे is the saplai
method for eviving har krishna consesstness
हर
कीर्तन 9 पर 7 से हिप्पी भी हैप्पी बना दिए करुणा करके मायावादी शून्यवादी तारिय गुरु का आशीर्वाद, भक्ति का कट कर हमाज अपना भा, फिर ये प्रभु का कृपा मूर्ति बन कर गोपाल कृष्ण गोस्वामी रे हाय कृष्ण मेरा गला थोड़ा
बैठा हुआ है आपसे बक्सों का हार्दिक
स्वागत
प
सब के पास रहने का स्थान है प्रसाद सब मिल गया, सब सब ने प्रसाद पाया भूर्ज प्रभु उनकी टीम का आभार को सारा प्रबंध किया,
फिर प्रभु पति मूर्ति बन गोपाल कृष्ण गोस्वामी ले प्रभु जी की पुस्तकों का है भाषा में दिया प्रकाशन, वित्र मंदिर का निर्माण कराया। फिर सारे संसार में भद्रता की मिसाल बन गए सारे। इस कौन में जी बी सी और बी बी टी को भी संभाल लिया। अंतिम सांस की सेवा की और जीवन का बलिदान दिया। जाय भगवत पाद जाए भगवत पाद गुरु का आशीर्वाद, भक्ति का आधार आओ अब मैं तुम्हे शिलप रुपा के गुरुदेव से मनवाता थेवो प्रसिद्ध सिधे गुरु के नाम स ठाकुर भक्ति। ऐसी धधुएढोंगी पाखंडी 2 रूल से थे गाते गान की तलवार, जो चले निडर हो, स्थापित करते भक्ति के सिधांत रि जात बात देखे बिना वो बाते, हरि नाम रे ब्रिजमंडल में उन पर जो हुए थे पथराव रे हमको सिखलाया उन ने नम्रता गवारे गुरु का आशीर्वाद, भक्ति का दा, हमार अपना भा। 1922 में वो बिल्ले प्रभु से इच्छा अपनी हदे कहे धन कोला गाँव पुस्तकों के प्रचार में, वह में दंगा बजे गुरु का आशीर्वाद, भक्ति का धा प्रकट करे हमार अपना भा
आओ।
अब मैं तुम्हें हमारी गुरु परम्परा के अन्य महान ाचारियों से परिचित कराता हूँ वरज्ञमूर्तिगौकी शोरदार बाबा जी यशौरिजनसेथेपर सदा जपते रहते थे वो हरि नाम रे कृष्ण पर राशि वो रहे। घर नहीं था उनको कोई रेते थे वि रा में धारण करते वस्र जो फेंके गए शमशान में मधुकरी ऐसे पाते टूटे बर्तन में प्रसाद रे न मिलने पर लेते गंगा की मिट्टी का स्वाद क आशीर्वाद भक्ति का धान कट करे हमारा अपना मिलते है आप ठाकुर भक्ति विनोद से साथ वे को स्वामी जो थे उनके जीवन में चर से हम सीखे ग्रस्त बकती कैसे करे कर ते थे हर कार्य वो तो समय के अनुसार रे ऑफिस जाना, साधना करना, ग्रंथों का निर्माण अंग्रेजी सरकार में ऊँचा पद था उनको प्राप्त रे घर तक देदी रेल दफ्तर जाना हो आसान रे गुरु का आशीर्वाद, भक्ति का धान प्रकट करे हमाज अपना भा देगे हम सुन्दर वैश्नो भजन वे भक्ति की प्रेरणा बने नवदीप धाम में जो नाम हट खोले हरि नाम की गंगा है, ब है लगे खोजने योग पीपे पूरी जी जान से कृपा मिली जो महाप्रभु के दिखलाया वो स्थान रे दिखा जो उनको तीव्र तेज गंगा के उस पार ले पहुँचे बाबा जी को वो अपने संगम स्थान पर गुरु का आशीर्वाद, भक्ति का धा प्रकट करे हमार अपना आभार जगननदाजबाबाजी। महाराज जो ठाकुर के शिक्षा गुरु थे, करते थे भक्ति को 1 ही स्थान पर वृद्धा अवस्था में वो जो थे, देह में बल्ला था, लेकिन उत्साह था महान ठोकर में बैठे वो तो ढूंढे जो पे धाम रे भाव में आकर उछल पड़े जो पहुँचे उस स्थान पर कूद कूद कर ले रहे थे म महा प्रभु का नाम रे गा
गोर गोरा गोरा गोरा गोरा को गोरा कर,
गुरु का आशीर्वाद, भक्ति का धान प्रकट करे हम बाज अपना आभार। और अब मैं तुम्हे कलयुग में भगवान के अवतार श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु से मनाता हूँ कलयुग में हम सबको भक्ति सिखाने कृष्ण चयतनियबने महा वदन, न्याय वो कहलाए बात सभी को कृष्ण प्रे पतितों का उद्धार किया, न कोई भेदभाव जगाई मदाई के पापों को किया मार भारत के हर कौने पहुँचे करने वो प्रचार रे केवल 1 स्पर्श से करते भक्ति का संचार, गौर नित्याननद जयो गौर, नित्याननद, गौर नित्या न जाय गौर नित्याननद महा प्रभु के प्रिय हुए छेशिशवेसडको स्वामी हम क हे प्रभु की इच्छा पूरी करने को, वो तो जीवन करे, विंदावन की खोज करी और ढूंढे लीला स्थान रे विग्रहों को स्थापित किया मंदिर का निर्माण दिशा दिखाई हम सबको लिख ग्रंथ अपने हाथ से, उनके आशीर्वाद से मिलता महा प्रभु का सात्रे गुरु का आशीर्वाद, भक्ति का धा प्रकट करे हमार अपना आभार वो जो न होते तो ये ब्रज न मिलता धाम हम जाते कैसे राधा और कृष्ण की दिव्य लीलाओं से प्रेम हम करते कैसे
धन्य हुआ सुनकर आपसे ये सुन्दर गुणगान आप ही सिखा रहे। कृतज्ञता का भाव रे कृपा करके आपने जो थामा मेरा हाथ रे कृष्ण की ओर चल पड़े ले मुझको अपने साथ रे गुरु का आशीर्वाद भक्ति का आधार प्रकट करे, हम आज अपना आभार
गुरु का, आशीर्वाद भक्ति का धान प्रकट करे, हम आज अपना आभार गुरु क का आशीर्वाद भक्ति का धान प्रकट करे, हमाज अपना आभार गुरु का आशीर्वाद भक्ति का आधार प्रकट करे, हमाज अपना आभा
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गुरु का आशीर्वाद भक्ति का आधार प्रकट करे हम आज अपना आभार प्रकट करे, हम अपना आभार आपको भी थैंक यू वेरी मच वेरी वेरी स्पेशल thanks please put hands again टोgदोरुकनीजीवन प्रभु दे गो रंग गुर गो
hygin आशीर्वाद ऑफ आल द वैशनवर्स हम हर साल यहाँ पर आ रहे हैं। हम आशा करते हैं कि हम आपके सामने कुछ प्रस्तुत कर पा रहे हैं। लेकिन यहाँ पर आज विशेष आप कृपा करेंगे। यदि आप ये हमें आशीर्वाद दे की हमारे प्रिय गुरु, महाराज और चिलपुरा की प्रसन्नता के लिए हम इन बच्चों को मार्ग दर्शन देते रहे ताकि ये आप सब को सर्व कर पाए।
माइक दे रहे हैं सब अपना अपना नाम बताइए बताते हुए माइक पास अपना
नाम बोलो वृन्दा prtarancisiasroti cavanevsudesnali vibmeti x्षtetnyasचिnuan
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थैंक यू थैंक यू थैंक यू थैंक यू थैंक यू दोहरान गागर
गोल
और किसी का बिड बैग रो रहा है उनके विरोध में बाइक चेन 16 माला हो चुकी है तो भी आप ले सकते हैं क्योंकि कल करना है और बैजेस नहीं लिया अभी तक 16 म नहीं हो तो जरूर प्राप्त कर लें और 16 माला कर भी लिया तो एक्स्ट्रा माला कर सकते हैं। प्रोप ने बताया तो हू बीड बैक इस क्राइंग देयर तो वहीं रो रहा है उनके विरह में प्लीज से बीड बैग ले ले और 1 और बैग भी है जिसमें छाता है जो कि शायद बीड बैक से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है आपके लिए इस वेदर में जरूर इसको प्राप्त कर लें और पुनः आप सब से मिलेंगे 3 बजे वि हि सोना गुरु प्रसाद स्वामी महाराज हर 1 कृष्णा हर 1 कृष्ण जो भक्त जा रहे हैं कृपया सुनते हुए जाइएगा इस सूचना को कि अभी जो प्रसाद है आप भरपेट ले लीजिये विशेषकर जैसे कल भक्ति वार ने बताया था जो भक्त उपवास करने वाले हैं तो वो उनके लिए तो ये लास्ट मील है 1 तरीके से तो भर पेट पा सकते हो अभी के साढ़े 12 बजे दोबारा बार चाह तो साढे 12 बजे तक लगभग यहाँ सर्विंग होगा और शाम को जो बच्चों के लिए या वोटिस के लिए जो पास नहीं रख सकते हैं 5 बजे प्रसाद होगा लेकिन हम बहुत कम मात्रा में कुकिंग कर रहे हैं उसकी तो इसलिए य यह अज्यूम करके की अधिकांश भक्त फास्टिंग करेंगे तो आप पर्याप्त जो है मात्रा में प्रसाद ले लीजियेगा और जिनको अभी भद्र पुर्णिमा पर भागत सेट लेना हो तो एंट्रेंस गेट पर हमारे भक्तों ने स्टॉल भी लगाया हुआ है आप ले सकते हैं आज पुष्कर धाम में भद्र पुर्णिमा में हो सौपे हरे कृष्ण
tt यदि कम हो तो काबे की हो तो बेजेवनाभड़ेथागी से कम का तो जवनोपईतकेशेदगकरेरा दरेगुरिराम गबारोरोनकदीत
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केस।
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