Pushkar Dham Yatra (Evening Session) || Day - 3 || HH Gopal Krishna Goswami Maharaj || 2025

HH Prabodhanand Saraswati Maharaj describes how Haridas Thakur's sacred bathing site grants three blessings: purification, divine love for Krishna, and liberation. He urges devotees to chant the Hare Krishna mantra 16 malas daily as the most effective spiritual path.
Chapters
पा प्रभु पात प्रभु पा ज प्रभु पा जय जय प्रभु पा प्रब पात प्रभु पा जाय प्रभु पा srila propasesigcरnपmा किवल
सदमा
शी गुरु चरना बदमा केवल भक्ति सदमा
समा
वनडोम सबा धाना मतेन
साब धना
बंद मुई सब धना मते मुई साबा धना हा रोप् सादे भाई ए भव तोरिया जा र प्रसाद भाई जा ृष्णा प्रात या ह
हो जहाँ हो ये दे
कृष्ण प्राप्त ह यहाँ होए ते
प्रात हो जहाँ हो ते
गुरु मुख पदमा बाकया चित कोरिया का
खापा
क्या
पदमा बाकया चित कोरिया का
चित
का आज न कर मन आशाआरनक
आशा
आज न कर हमने आशा गुरु चराने रते कैसे त म गुरु ने रति से तामस शाद पूरे आशा
सब
पूरे सर आशा
आशा
चक्षुदान दिलो जे जन्म जन्म प्रभु से चक्षुदान दिल जन्म जन्म ्रभुसरभुसेविविज्ञान प्रकाशिता जा हृदय प्रकाश का या प्रेमा भक्ति।
यह
विद्या बिना जाते मा भक्त जहाँ विद्या बिना जाते मा भक्त। यहा हते विद्या बिना सजाते क्त करुना जिदद गुरु का नारा बंधु गुरु करो
ना सिन्धु
लोक लोक जीवन
लोक जीवन
लोक ना लोकेरजीवनाजवनाश्रिला प्रभुता पा बना नाला बना ना ना हिला बना रब रब रभुबाारभुबारभबा
हरि
हरि हरि बा हरबारिपरबहरिरिो हरि
बार
रभुपलाायरभुपदा रभु पदा ब पदा शी रबरबबदाताईगोरबरे मा नंद nhm विष्णु पदाय krishna prष्ठaयभuतले श्री मत भागते दान स्वामी नितिनामेंने
स्वामी नितिन
मस्ते सारस्वत गोरबानी प्रचार ने देर से सा शुन्य वादी पाश्चचादेशतारने एवरीबॉडी लावडआयशेकरृषना चेतन्या tanada sriयattागदaधा श्रीवास जी भकदाशकृष्णछतन्या nananaaaaasnjtnya prntanadasriadta श्रिवसदिगभकतगा जय श्री कृष्ण
तान्या
प्रभु नया
श्रियत्वाइतागदधा
श्रीवास गौ भक्त बिना भज गो रंगो को गो रंगो लाह गो रंग रंग लोगो राग लहो गो रंग र नाम रे बज गो रांग हो गो रंगो लो गो रंग र नाम रे रंग लो हो गोरांग लहो गो रंग ना रे जना गोरांगो भले सही हो मारा गोरांगो गो गो रागो लाओ गोरांग jana orange
ha
गो रांगों गाहो गो रागो लाहो गो राग रे नाम गो राग गो रांगर अरे कृषण कृशन कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे हरे रामा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृषना हरे कृषणा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम hamara maहरhरेरेकिशण हरे कृषना इश्तकेसाहर हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे ोनवानीलादा हरे कृष्णा हरे शकशकशाहरेहरेहरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे हरे हरे हरे राम हरे राम र राम राम हरे हो अरे रे हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम रहे गोरी बोरि रिब हर गो हरिया हरिया हरि वा हरिबा का हरिवाहोरिवाहरिब brahma bole chaturmukekinakisna har har mah देवा पंचमुख राम राम हरे हरे le catoknaksnarhar
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rama rama brahma bole chatur कृष्णा हरे हरे mha देवा पंचमुख रामा रामा हरे हरे हरे देवा पंचम के rama rama hare hare kisna hare kisna kisna hare hare hare rama hare rama राम राम हरे हरे अrरकरsनाअरेक्रृषणा kisnakusinahari hare hare rama हरे रामा रामा रामा रे हर ma rama rama rama kisna hareknakinakisna rama rama rama rama hare hare sngisnaisn हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे को कम बेस काम कर लो बस काम कर लो किश्णाकेशनारहरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे गोहलदोनोहाखुबर से खिलाते हुए हुए हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ओ रे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम अरे हरि हरे कृष्ण हरे हरे हरे राम राम राम राम हरे क हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम अरे हरे राम कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृश्ण कृश्णा हरे राम रे राम राम राम रे रे कृष्णा कृष्णा हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्ण रे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा
हरे
हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे हरे नाम क कृष्णा या दबाए न म राय नमा कृष्ण या दबाए न महा या दबा कृष् वा न माहा गोपाल गोविन्द राम श्रीमा दु सुदा गोपाल गो गोविंद राम श्री मधु सुदा गिरदारी गोपिनाथ मद मोह
गोपा
गिरदारी गोपिनामदनमरगोपिना गोपिनामदनमोहा मेरी धारी गोपिया नामा कृष्ण या दबाए नम अरे रा ना हो दवा दवा देश वाय नमा गोविंद राम श्री मदुसुदन गोविन्द श्री मधु सुदाराशीरीदारी गोपिन मदन
गोपिन
राधा गोविन्द राधा गोविंद श्री राधा गोविंद राधा गोविंद श्री राधे राधा गोविंद राधा गोविन्द श्री राधा
गो
गोविन्द श्री राधे राधा मदन राधा राधे राधे राधा गोपीनाथ राधा गोपी रा श्री राधेरा श्री राधे श्री राधे जय राधे राधे जय राधे श्री राधे जय राधे राधे जय राधे श्री राधे जय राधे राधे जरा गो रनिता गो रानिता गो रानिता गो राना गो रणिता गोरानितागोरानिता गो रन ता गाव रानिता गाव रानी राणिताहरबोरबो हरी हरी बोल बोल हरी बोल हरी बोल का हरि हरि हर ो बोल हरि बोल री बोल हरी बोल हरी बोल हरी बोल जाय जगना जग नाते जगत जगन नाथ जगना
जगत है ना
हे जगाते जय जग ना हे जग नाथ हे नाथ हे जग ना ना जग नाथ हे जग नाथ है जग नाथ जय जगना जय ना मि जय
ना स्वामी जय
जय जग ना हाल जय जय सब गुरु गुरुदे गुरु राजा दुरूद हरी कोर हरी
1 बार दोनो
हाथ ऊपर रखे न को थ्री लेखा का हरिया परिवार परिवार हरवा काय रिवा हरवा परिवार
अरे
ई गो प्रो मानदे
थैंक यू वेरी मच हरे किशना विष्ण िाइनसभचरणारविंद भक्ति विराम स्वामी प्रभुपाद की जाए। इस का फाउंडर आचार वििीाउडरडिवानशिल प्रभुपाद की जाए, जाए ओम विष्णु पात परम परिव्रज भक्ति सिद्धांत सर्वस्व को स्वामी शिला प्रभात की जाए, पर मध्य गोरी गुरु परम्परा की जाए, अनंत कड़ी वैष्णव भक्त बंद की जाए, नमाचर्जसहरिदास ठाकुर की जाए, प्रेम से कृष्ण चेतन्य प्रभु शादी गोर भक्त की जाए, राधा कृष्ण गोपी श्याम गिरी वर्धन की जाए, मथुरा बंदन की जाए, नवदीप मायापुर धाम की जाए, पुरुष तम क्षेत्र नाथ परिधान की जाए, श्री पुष्कर धाम की जाए। गंगा मैया जमुना मैया की जाए सी ब्रह्मदेव की ब्रह्मा जी की जाए, भक्त बंद की जाए, भक्त बंद की जाए, हरी हरी संगीतज्ञ की जाए। 2 पीस गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज जात्रा
की हरे कृष्ण हरे कृष्ण हे होलिनेस प्रबोधन सरस्वती महाराज की जाय। तो मारा बड़ा सौभाग्य है। आज के सत्र में हम सबको संग देने के लिए उपस्थित हैं। हिज होलिनेस प्रबोधन सरस्वती महाराज सो महाराज जी वास्तव में देखा जाए तो सबसे गहरे और वास्तव में असली ब्रह्मचारी तो है ही साथ साथ में ब्रज वासी भी है महाराज ब्रज में ही रहे हैं महाराज नाइन टी टी फोर में महाराज ने ज्वाइन किया था, उसका टू थाउजंड एट में महाराज ने सन्यास लिया फ्रॉम हिज होलीनेस गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज सो इन वे देखा जाए महाराष्ट्र यानि गोपाल कृष्ण के पहले संन्यासी शिष्य है। हिस होलिनेस प्रबोधनंद सरस्वती महारा महाराज ने प्रकार की सेवाओं की हुई है ब्रह्मचारी आश्रम गेंद चार्ज भी रहे हैं साथ ही बुक डिस्ट्रिब्यूशन भी किया है बुक डिस्ट्रिब्यूशन एक्टेस बुक का वितरण भी किया है और महाराष्ट्र साशीतोहैऔररसेट बल्कि महाराज ने 1 और बहुत ही विशेष सेवा स्वीकार की है वो है दीक्षा गुरु की सेवा सो। इस प्रकार महाराज आज दीक्षा गुरु भी है और हम सब की प्रेरणा का स्रोत है सो आज महाराज हमको बहुत ही स्पेशल कथा सुनाने वाले है नामाचार्य हरिदास ठाकुर जी के बारे में आप सब तैयार हैं हरी हे सो महाराज जी की जय के बीड बैक जिसका हो ये वीड बैग महापुरु भक्तगण वैराग्य प्रधान इतना वहरागैकीबीडबैग सी से तो कृपा कर सक करे और ये आधार कार्ड भी है कीर्ति अहूजा माता जी का ये भी आगे कर सकती है माताजी जहाँ कहीं भी हो हर कथा की जाए जगत गुरु श्री पर जाए
herrकsnaये
सतीश कुमार जी कहाँ मिला है ये एटीएम कार्ड कोई आगे लेना चाहे stis कumarsukmay आगे
हरे kisna श्रीकृष्ण चई तन्या प्रभु दया करो मोरे श्री कृष्ण चाहता दया करो मोरे तुम बिन के दयालु जगत संसार तुम बिना तुम बिन के
दयालु
जगत संसार पतित बना है तू दबाबातामसमापतता प्रभु नपाईदेवाआहप्रभुल क्या नंदा
पा बोलो ना करो आम
रोया को रोसितातगोसा दया
करो
दोब करपा बोले पाई हा सरूप सनातनपर भटजगशजीबहल जोया को 2 सी रामचंद्र संग मदर राम जंग जंग मा के
मोर
दया मोरितुममनाकेदयालु संसार
हर
गोपी जाना हारी
यशोदा
न गशोदागशौदारौदा जमुना तीर बना चारी जमुना जाना भारी भारी जसोदा जमुलतीरबनजारजमु गोपी जाना शोता शोता मन तेरा न
हारी
गोपिजन हारी यासोदननदसजलगमुल कुशला ह अरे जिसका हर क हर हर राम हरे राम राम राम हरे हरे शा करुणा
गोसाबारा करुणा करो बदोसा
मोती तो पा बोला तो मा बिना के होना,
बिना
के होना
पाना होना होना
आप दूर
जाहरनटेगले आप दूर जा
याल प्रभु
था मना दा के बा था पा गंगा परशा होले शत्यापवादशनेतर ने पवित्र करो
तो मार गहराने आप राधे करे
रिश्ता आप राधे अरे हरिना
2 मस्ताने आप रहे नहीं परता
रहे नहीं परता
सदा गोविन्द
सदा गोविन्द देशा
गोविन्द काहे ना बासा
हे नामोरा
रोटी जलने कौर आशा
जम
कर आशा ने रा धूली रोती कौड़ी आश धोली धोली न तो में करो दया ली
दया
करो दया होली
हरिदास
ठाकुर को दास ठाकुर दास
पा
पा
शिला पर बाद
गया भागवत पद भगवत भागवत
ा
ठाकोर
ठाकोर ठाकोजया गर हरेवा
हरिराज विश् भक्ति तो स्वामी प्रभु की जाए। इसका प्रतिष्ठाता 4 डिवाइन प्रभु की जाए, ब्रह्म मध्य गोडी गुरु परम्परा की जाए। 4 हरिदास ठाकुर की जाए। प्रेम ऐसी गौरव भक्त बंद की जाए, राधा कृष्ण गोपी गोपीनाथ राधा कुण श्याम कुंड गिरी गोवर्धन की जाए। मथुरा व्रंदावन धाम की जाए, न की जाए, जगरनाथ परिधान की जाए। गंगा मैया जमुना मैया की जाय। सी पुस्कार तिर्थ की जाए, से ब्रह्मा जी की जय। ब्रह्मा मध्य गोड़ी सम्प्रदाय की जाए समय भक्त की जाय। 2000 पचीस गोपाल कृष्ण को स्वामी महाराज यात्रा की जाए। ऑल ग्लो divots ग्लो भ श्री गुरु शीगुरंगाहरेकृषणओमज्ञाना तिमिरंधश्यज्ञाननयन सर कया चखरुमिलितमजनतसमई श्री गुरु भेनमहश्रीचइतन्या मनो भिष्ट स्थापित जनभुतड़े स्वयं रुप कदमहमददातिश्पद बनदेयहंस्रिगुरु श्रीजुतपदकमड़म श्री गुरु श्री रुपम सागर जात सहगणरघुनथानितमतंग सजीवमसाद्ोइतं सा बधु तंग परिजन सहित कृष्ण चैतन्य देवम श्री राधा कृष्ण पदान सहगण ललिता श्री विशाखा नितांश हे कृष्ण करुणा सिंधु दीन बंधु जगत पते गोपेश गोपिका कांत राधा कांत नमस्तुते तब कंचन गौरांगी राधे वृंदावनेश्वरी बृषभानु सुते देवी प्रणमामि हरि प्रिये बंछाकौपतरुभ्यश्च कृपा सिंधु भे बचा पति ताना पावनेभ्यवष्णवेभ्य नमो नम मुकं करोति वाचालं पंगुंगंघयतगिरिम जतक्रिपातमहंगबंदे श्री गुरु दिनतारिणम परमानंद माधव श्ीचत्यश्वरम नम विष्णु पादाय कृष्ण परस्ठायभुतड़े श्रीमति गोपाल कृष्ण गोस्वामी नीति नामिनी प्रभु पाद्य साहित्यं यह प्रकाश भितिरच प्रचार कृत वन साधु भगवत पदयति नमहा नमो विष्णु पादाय कृष्ण प्रस्ठायभुतडे श्रीमते भक्ति बेदान स्वामी नीति नामि ने नमस्ते सारस्वत देवे गौरव वाणी प्रचारिणी निरविषेसहशुन्यवादि पाश्चात्य दे स्वतारिणे नमोमहबदन्याय कृष्ण प्रेम प्रदायते कृष्ण या कृष्ण चैतन्य नमीने गौरव सै ना जाया जाया। श्री चतन्य जया नित्या नंदा जया द्वैत चनरा जाया गौरा भक्त ब्रिंदा जाया जाय, श्री चतन्य जाया नित्या नन्दा जय द्वइतचन्द्रजया गौर भक्त ब्रिन्दा जाया जाया। सिचाई जया नित्या नंदा जया द्वैत चन्द्र जाया गौर भक्त वरिंद हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे ह हरे राम हरे राम राम राम हरे हो रि चैतन्य चरिता ध्याय 3 संख्या 250 और 251 तब नारी के तारे करी नमस्कार आम माय करी ते लम परिया तो मारा ब्रह्मा दी जी वो मी सबरे मोहिलूएकलतोमारे मी मोहीतेनारिलू। तबे नारी कहे तारे करी नमस्कार मी माय करी ते आइल परिखा तुमारा ब्रह्मा दीदी व मी स बार मोहिलुकेलातुमारे आमी मोहीतेनारीलुतोबे नारी को। हे त रे कोरी नमस्कार आमी माया करिते ले पोरिख्यातोमारब्रह्मा दिजीवमीसबारे मोहिल अकेला तुमारे आमी मोहिते नारी लू मोहिते नारी लु। सबदार्थतबे उस समय नारी स्त्री कोहे बोली तारे हरिदास ठाकुर को कोरी नमस्कार प्रणाम करके मैं माया माया हूँ करते करने के लिए आला में आई थी। परीक्षा परीक्षा तुम्हारे आपके, ब्रह्मा आदि जीव ब्रह्मा से लेकर सभी जीवों को आमी मैंने संवारे मोहि लो सबको मोहित कर दिया। अकेला 1 मात्र तुमारे आपको आमी में मोहित नारू मोहित न कर पाई नुबातकृषणकृपामृति स्वामी के द्वारा प्रभु की जाए। हरिदास ठाकुर को नमस्कार करके वह स्त्री बोली मैं पूर्ण पुरुषोतम भगवान की मोहिनी शक्ति माया हूँ। मैं यहाँ आपकी परीक्षा लेने आई थी। ब्रह्मा जी मिसबारे पहले ब्रह्मा तक के मोहन को मोहित किया है और नयी बात जान जाने दे केवल आपके मन को ही में आकृष्ट नहीं कर सकी। ब्रह्मा जी से लेकर ख्युद्रचितितक सारे जीव, बिना किसी अपवाद के पूर्ण पुरुष तो भगवान के माया द्वारा आकृष्ट होते हैं। देवता, मनुष्य, पशु, पाखी, कीड़े, पेड़, पौधे सभी संभोग च्छा द्वारा आकृष्ट होते हैं। यह माया का मोह है। पुरुष हो या स्त्री, हर व्यक्ति यही सोचता है कि वह माया माया का भोगता है। इस तरह हर व्यक्ति मोहित होता है और भौतिक कार्य में लगता है किन्तु हरिदास ठाकुर सदैव पूर्ण पुरुषोतम भगवान का चिंतन करते रहते थे और सदैव भगवान के दरिया को तुष्ट संतुष्ट करने में लगे रहते थे। उन्हें इस विधि ने माया के बंधन से बचाया। यह भक्ति की शक्ति का ज्वलंत प्रमाण है। भगवान की सेवा में पूरी तरह लगे रहने के कारण ही उनकी माया के साथ भोग करने के लिए प्रेरित नहीं किया जा सकता। शास्त्रों का निर्णय है कि शुद्ध, वेष्टन, व कभी भी भौतिक जगत के भोग करने को की नहीं जाता। सोचता जिसकी परम परिणाम संभव है। यह कभी भी अपने आप को भोक्ता नहीं मानता। प्रतुत भगवान द्वारा भोग भोग होता है। इसलिए यह निष्कर्ष निकलता है की पूर्ण पुरुषोतम भगवान सा सनातन दिव्य है तथा इन्द्रिय तृप्ति की अनुभूति अनुभूति से बहुत गुणों से परे है। यदि जीव इस भ्रांत धारणा को त्याग देता है कि शरीर ही आत्मा है और यदि वह अपने आप को कृष्ण तथा वैष्णव का नित्य दास समझता है तो वह माया के प्रभाव को लग सकता है। माम बजे प्रपद्यते माया मत तरंति। इस तरह जो शुद्ध जीव अनर्थ निवृत्ति, का, बाद, अनर्थ, निवृति का पद प्राप्त कर लेता है, उसके लिए इस भौतिक जगत में भोग करने के लिए कुछ नहीं बचता। इस स्थिति को भक्ति कार्य को सही ढंग से संपन्न करके ही प्राप्त किया जा सकता है। सरल रूप को सामने लिखा है आद श्रद्धा तथा साधु संग भजन क्रिया, अनर्थ निवृति स्यात, ततो निष्ठा रूचि। तत प्रारंभ में आत्म साक्षात्कार की इच्छा होनी चाहिए। इससे व्यक्ति आध्यात्मिकता में उन्नत व्यक्तित्व का संग करने का प्रयास करेगा। अगली अवस्था में वह उन्नत गुरु से दिखा लेगा। उसके और उनके उसके निर्देशन में कनिष्ठ भक्त भक्ति जो प्रारंभ करेगा। भक्ति के निर्देशन में भक्ति संपन्न करने से वह सारी भौतिक आसक्तियों से मुक्त हो जाता है। आत्म साक्षात्कार में स्थिरता प्राप्त करता है तथा पूर्ण पुरुष तुम भगवान श्री कृष्ण के विषय में सुनने के लिए रुचि उत्पन्न करता है। यदि कोई सचमुच भक्ति करता है तो अनर्थ श्रोता ही लुप्त हो जाएंगे। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण। अब इसमें नामाचार हरिदास ठाकुर के तिरोभाव भी 6 तारीख को गया था। जिस दिन यहाँ पर उसी दिन नवाचार हरिदास ठाकुर के तिरोभाव तिथि था। हरिदास ठाकुर हमको दोनो सिखाया आर्ट ऑफ़ लिविंग आर्ट ऑफ डायिंग साधारण तो दुनिया में लोग सिखाते कई लोग हैं जो सिखाते आर्ट। लेकिन हरिदास ठाकुर हमको आर्ट ऑफ़ लिविंग भी सिखाया था। लेकिन वो आर्ट ऑफ डाइंग भी सिखाया कौनसा ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। आर्ट ऑफ डाइंग। अंत नारायण हरिदास ठाकुर को चैतन्य महाप्रभु ने जो कहा था कुछ बार मांगने के लिए तो इन सारे इच्छा को पूर्ण करना चाहते थे। महाप्रभु चैतन्य महाप्रभु ने जो कहे तो रिदास ठाकुर ने कहा है हदएधरिमुतबा कमर चरण ने, हे रिबुचतबचंदबदना मुख्य उचारिमोकृष्णा चतन्य नाम। यह माता इच्छा मर छाडीमुपराणा कितने लोकास इच्छा है। बोलो सब हद धरि मुतवा कोमल चरण नयनेहेरिबुतबा चांद बदना। मुख्य उचारि मु कृष्णा चैतन्य नाम।
मरा
छाड़ी मु पराना। और चैतन्य महाप्रभु के इच्छा भी अंत समय में महाप्रभु महासंकट। जिसमे सारे गौरांग महाप्रभु सभी पार्षद सम्मिलित थे, उसमें स्वयं सरुदामदगोस्वामी के गायक के रूप में बकेश्वर पंडित स्वयं महाप्रभु करते थे। नितिन प्रभु सब को लेकर, सम्पूर्ण पारद को लेकर, पारस को लेकर, हरिदास ठाकुर की इच्छा को जानते हुए महाप्रभु ने पधारे थे। कभी हरिदास ठाकुर के समस्त इच्छा को गौरांग महाप्रभु पूर्ण किए। यदि मैं पूरा केवल महाप्रयाण कहूँगा तो क्लास उसी में समाप्त हो जाएगा तो? लेकिन मैं उसका डिटेल न कहा कि पूरा हरिदास ठाकुर के बारे में थोड़ा जानना चाहिए कि मुझे टॉपिक दिया गया था कि हरिदास ठाकुर किस ने ब्रह्मा किस प्रकार हरिदास ठाकुर के रूप में अवतरित हुए हैं। और इनके कुछ ग्लोरी पासटाइम्स
की ये
नबदधामहातममें श्रील भक्ति विनोद ठाकुर ये कहते है कि द्वापर युग में ब्रह्मा जब बच्चोको और ग्वाल वालों को चोर चोरी कर लिए थे। भगवान श्री कृष्ण जब अपने बड़ गवालवालोंकोलेकर जमुना किनारे भोजन की लड़ा कर रहे थे, सभी लोग बैठे हुए थे। बच्चे गिर कर बीच में बैठे कृष्ण कहाँ बैठे थे। बीच में ही बैठे थे। प्रत्येक बच्चा सोचता था की कृष्ण मुझे ही देख रहे हैं, क्या सोच सब लोग सोचता डेट देख रहे हैं। तो बच्चे घर बैठे थे। लेकिन सभी सोचते थे कृष्ण को देख रहे हैं। तो उसी के बीच में भगवान बड़े आनंद ले थे, भोजन का आनंद ले रहे थे। कोई बच्चा कुछ कहता कि कृष्ण मुख खोलो मैं बहुत बहुत अच्छा आइटम है, लाया स्पेशल तू कभी खाया भी नहीं होगा। मेरी माँ ने आज बना 1 स्पेशल इट दिया है। मुख खोलो डालूंगा भगवान जो मुख खुलते थे, फूल डाल देता था। सब ताली बजा के प्री फुल भगवान श्री कृष्ण को भी बुद्धू बना देते थे। दूसरा बच्चा कहता था की कहा की देखो लाता था, लड्डू लेकर खाता। कृष्ण बड़े टेस्टी है, बहुत टेस्टी है, तुम भी खा के देख। कितना टेस्टी है। खा के आधार झूटन को डाल देता है मुख्य में किसका कृष्ण बड़े आनंद में खा लेते हैं। मधुमंगल लता कृष्ण 2 बला रहा है। साइड में। भगवान उस साइड को देखते ही जाता है। ब्रह्मा आकाश में वो आये थे, हंसवाहन बैठकर और घास सुर के कैसे हुआ उसको देख बड़े ब्रह्मा तक सार देवता उसको डरते थे। लेकिन देखिये की कृष्ण की 6 साल के बालक उसको मार हा है। सुर के जो विमान ब्रह्म के साइड होकर ऊपर जा रहा था, भगवान के हाथ से मरने के कारण उसको मुक्ति मिल गया। कभी वो सिले ब्रह्मा जी देखने आये थे, भोजन कर रहे थे। तो सोचने लगे क्या ये जो बाल के बीच में बैठा है, जिसकी लड्डू चोरी कर लेता हुआ बोला ये क्या भगवान है? ये वही भगवान है जिसको में प्राथना किया था। परम कृष्ण, सचिदानंद, विग्रह आदि गोविंद, सर्वकारण कारण, वो क्या वही गोविंद है और कोई है थोड़ा सोच। इसलिए उनको थोड़ा परीक्षा करने की सोचे देखता हूँ। थोड़ा मेरा जो योग शक्ति, ये दुनिया में जितने भी जीव आत्मा है, सबसे ज्यादा योग शक्ति किसके पास है ब्रह्मा जी के पास। लेकिन ब्रह्म शक्ति कहाँ से प्राप्त की? भगवान श्री कृष्ण मेरा प्रभु होगा तो पता लगेगा मेरा योगशक्ति को अतिक्रम कर लेगा। तो ये सोचे सोचकर। पहले भोजन में बैठे आसपास घास का रहे थे, पहले बच्चों को हरण कर लिए, इसके बाद बचे कहा गए?
तो
बैठो तुम खाओ आराम से खाओ मैं देख रहा हूँ। बच्चों खा रहे थे तो भगवान स्वयं गए। भगवान जब चले गए तो फिर उनको भी ले लिया किसको सारे गाल को ले गया। लेकिन उस दिन कौन नहीं किस लिए काम करने में समर्थ होगी। ब्रह्मा जी ने उस दिन कौन नहीं आया था बालाराम जी नहीं आये थे। बालाराम जी बैठे होते तो बालक के साथ भी भगवान 1 ले जाता। फिर ब्रह्मा जी की मुश्किल होता है। फिर तो ले गये। तो भगवान अरे बचड़े गए। मेरे सखा सब कहा गए। इसलिए उन्होंने क्या के उन्होंने समझ 4 मुख वाला इधर उधर घूम रहा है, इसको देखता है। उधर बोले अच्छा भगवान ने आपने जो शक्ति से फेर दोबारा ऐसे ही बना लिए। जैसे ही बच्चे थे बच्चे सब बैठ गए बड़े वैसे ही बैठ गये। सब फेर भोजन गड़ा करने लगे है। लेकिन ब्रह्मा जी जो 1 किरण के लिए चला गया, इन गुफा देख रहे थे। 1 ब्रह्मा पर लोक 1 साल बीत
गया
लेकिन ब्रह्मा जी समझ गये कि किसके द्वारा हुई है, कौन है यह स्वयं मेरे प्रभु है। में क्या किया कितना बड़ा अपराध किया, रोने पर भी रो रहे थे। ब्रह्मा जी पर भागवत चोद मध्यय ब्रह्मा की सिया बहुत सुन्दर स्तुति गा, लेकिन भगवान ने प्रकट हो कुछ 1 भी शब्द नहीं बोले, 1 भी शब्द केवल खड़े देखते रहे, सुनते रहे, बोले कुछ ऐसे खड़े सुनते रहे, 1 शब्द भी नहीं बोले। ब्रह्मा को। भगवान ने समझा जो जो काम किए हैं नहीं समझे। इंद्र ने वो 7 दिन बारिश किया था, भगवान ने इससे डिस्टर्ब नही हुए थे। बोले बहुत अच्छा काम किया, गुलाकर साथ में बुला दिए। सभी ब्रजवासी 7 दिन, 7 रात गोबर धन के नीचे रहे। भगवान ने विशेष रूप गोपियों के प्रति निरिक्षण करते हुए राधा रानी के बुखार को निहारते हुए बड़े प्रसन्ता से। लेकिन आज भक्तों को अलग कर दिया। भगवान से क्रोधित है थोड़ा क्रोधित सा कुछ नहीं बोला। इसलिए ब्रह्मा जी के जो अपराध है रह गया। तो उन्होंने दोबारा आये भक्त ठाकुर नवदीप महात्मा में देखे। कृष्ण तो कुछ बोले नहीं। ब्रह्मा जी ने फिर नवदीप धाम वहाँ पर पर आकर चैतन्य महाप्रभु की जानते। यह सबसे दयदवरबतारहैगराग महाप्रहुकेचरम में प्रणाम करके उनके पूजा बंधन करने के करके उनको प्रसन्न किए तो हा प्रभु ने उनको शांत ना दिया। तो मेरे लीला में इसी कॉलेज युग में मेरे अंतरंग पार्षद अवश्य बनोगे जुग जो युग धर्म को, तुमने हरिराम संतन को जो 16 से 20 मंत्र दिया था ना, इसको परंपरा ऐसी दे दिया धरा पर। तो उसी मंत्र का विशेष प्रचार के लिए 4 हरिदास ठाकुर के रूप में धरा पर होगा। हरे कृष्ण, हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण, हरे हरे, हरे राम, हरे राम राम राम, हरे हरे। इसीलिए चैतन्य महारों की लड़ाई में 2 हरिदास है। ये हैं। इनको कहते हैं ब्रह्म हरिदास। क्या कहते हैं ब्रह्म हरिदास। ब्रह्मा जी का ही अवतार थे हरिदास ठाकुर। हरि नाम से की। तो इसको उन्होंने आपनी आचरी प्रभु जी सिखाए इस ला में जन्म। इसलिए कहा हुआ जवनकुमेभागवतमे दास ठाकुर की बुढ़नग्रामेजमिलरिदा स से है।
तू
गाँव डिस्टिक बंग्लादेश के बुधन गाँव में जन्म हुआ था। किसका हरिदास ठाकुर के परिवार में जन्म हुआ। लेकिन जन्म से ही इनको इनके इनको हरिणाम में विशेष प्रेम था। जैसे ब्रज में कोई बच्चा जन्म होता है, वो क्या कहता है, जन्म से जन्म लेते है, उसको क्या कहता है राधे राधे। पहले यदि कुछ बोलना चाहता तो राधे राधे बोलता है। हरिदास जल्दी भी जन्म लिए थे। मुसलमान घर में जन्म से। वो क्या कहने लगे हरे कृष्ण, हरे कृष्ण कर रहा है। बंद करवा होकर पूरा का पूरा जो है। अपने गाँव के जंगल ले गए। जंगल में जाकर कुटिया निर्माण, कि छोटा, कुटिया बना कर इसको बनाकर, उनके सामने बैठ के शुरू कर दिया। गुरु कौन है? वो हरिनाम जपना शुरू कर दिया। गुरु कौन है? गुरु था तो तो स्वयं गुरु है। कल आदि देव आदि गुरु ब्रह्मा जी जानते थे। ये जुग धर्म है। तुलसी महारानी के सामने बैठकर बात में फिर गुरु रूप में स्वीकार करते। साथ नहीं हुई। बैठ कर तुलसी के सामने जपते थे। हरे कृष्ण, हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण, हरे हरे, हरे राम, हरे राम राम राम। इसलिए चैतन्य वहाँ पर ने भी उद्घोषित किया है। चैतन्य दिख्या पुरुष चरण विधि, अपेक्षा न करे जीवा स्पर से अचंडाले सौबार उधारे हरिनाम दिख्या के लिए वेट नहीं करता है। पुरश्चरण, विधि, दुसरे, मंत्र को सिद्ध प्राप्त करने के लिए कुछ करना पड़ा। जपने से ये पुर्ण होगा, सिद्ध होगा, ऐसा भी नहीं है हरी राम में। पर ऐसी आचार सवारे उधर। इसलिए हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे, हरे, हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे। ये वैसा ही जपने लगे। आसपास के लोग दूर दूर से इनकी शुद्धता पवित्रता के आधार पर लोग केंद्र प्रति आकर्षित हुए। फोर्स हरिदास ठाकुर की शुद्धता के कारण ब्राह्मण कुल में जन्म लेने वाले व्यक्ति भी सभी लोग दूर दूर से आकर इनके आस दूर से प्रणाम करने लगे। हज़ार लोगो की सम्मान मिलने लगा है, उनको भी 1 मुसलमान जा कर कम्प्लेन किया किसको जो मुलगपतिवहाँथाजो शासक और जो काजी था मुसलमान होकर ये हिंदू भगवान का नाम ले रहा है तो फिर से इसको बंद कर दिया जाए। फिर हमारे सारे मुस्लिम क्या बन जायेंगे। हिंद बन जाएगा। जो शासक था। 10 न्होंने बोला ठीक है लोकल काजी, उसका होता लोकल शासक ठीक है। पर लेके आओ, दरबार में अरेस्ट करके गया, अरेस्ट करके हरिदास ठाकुर को लेके लोग हाय करते सुनने वाला मुसलमान क्या चाहते हो? उनसे पूछो क्या पूछना चाहते हो? तुम आप ही पूछी बादशाह मुसलमान होकर अल्ला अल्ला नहीं कह रहा है, क्या कर रहा है, क्या कह रहा है? हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे, ये हिंदू भगवान का नाम ले रहा है। तो इसको बोली ये छोरे हरिराम के क्या कहे, कलमा, क्या कहते है कलमा ये बोले ये क्या कर रहा है? तो तो तुम्हारा नाम हरिदास कौन दिया है हरिदास। तो आपने आपको नाम रख लिए। तो हरिदास हरि दास अपने नाम दास कृष्ण दास है। तो बोला कि तुम मुसलमान हो और इनके जाता इनके पिता जी भी 1 काजी थे, किसका है हरिदास ठाकुर के भी जो रिकॉर्ड है तो वो भी अच्छे परिवार में नहीं थे, अच्छे परिवार में पिताजी व काजी था लेकिन ये तो घरबार छोड़ के आ गए थे। तो उन्होंने कहा वो कहा की देखो तुम मुसलमान हो इसलिए तुम हिंदू भगवान के नाम तो दास ठाकुर को है की क्या में कुछ दोष नहीं देखा, भगवान तो 1 ही है, सबके हृदय में भगवान है, जिसको जैसे प्राण देते हैं वो ऐसा ही कहता है आपको किसको मेरे हृदय में भगवान ऐसे परणा देते हैं क्या कहने के लिए हरे कृष्ण हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे में तो कुछ फर्क नहीं देख रहा हूँ, मेरा मेरे को जैसे भगवान ने प्रणाम दिया, मेरा से नाम लिया। आप लोग कह हो भले तुम बहुत ज्यादा दिख रहे, दिखा रहे हो। तुमको सीधा कहा जा रहा है मुसलमान घर में जन्म मुसलमान है इसलिए तुमको अल्ला बोलना है, कहीं ही बोलोगे तुम्हारे तुम्हारी जान निकाल लेंगे। तभी उन्होंने काजी कहने पर बादशाह ने कहा की ठीक है इसको इतना हम इसका 22 इसको पिटाती करते रहो, कब तक जान जब तक निकाल जाए। 22 बाजार में ट्वेंटी टू मार्केट प्लेस में पिटाई कर ले जाओ। 20 पहलवान को नियुक्त कर दिया गया, 22 लोग पिटाई कर 2 और जाते थे में पिटाई करते थे, दोनो मे लोग सज्जन सब हाहाकार करते थे, दूर से प्रणाम करते थे और हिसाब देते थे। वो बात सह हूँ क्या कर रहा है। लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था, हरिदास ठाकुर के की खंड खंड हई देह जदि छड़ी जाए प्राण तबुतमुतबीतबुतो उच्चारिमुतबी बदले हरिराम दली मरे शरीर को टुकड़े टुकड़े करके काट के ऐसे फेंक दोगे जब तक मेरे प्राण है शरीर में मैं मुख से हरि नाम को चरण करना नहीं छोडूंगा तो ऐसे ही दुर संकल्प होना चाहिए। आ किसी भी स्थिति में हरिनाम को उच्चारण करना नहीं छोड़ना है, इसे संकल्प लेकिन बहुत हिम्मत है इसका पिटाई करो देखो। यदि ये 22 बाजार में पिटाई खा के भी नहीं मरेगा जाना, ये कोई जिंता पीर है, कोई बात है तो पिटाई होने पिटाई शुरू कर दी है। 1 मार्केट, दूसरे मार्केट, तीसरे मार्केट। ऐसे ही 22 बाजार, 22 पुलिस पिटाई किए। हरी बोल, हरी बोल लोग करते थे। बहुत प्रणाम करते थे, हाथ जोड़ते थे छोड़ 2 इनको। लेकिन कोई सुनता नहीं था। तो भी देखे की। जो लोग पिटाई करते थे, उनके हाथ सब पड़ गया। जब हे से पढ़ते थे ये हाथ सौ उनका पड़ गया। सो कुंड निकालने लगा। हरिदास का कुछ नहीं हुआ। बात में, शिवा संग में प्रकाश ने हरिदास को बोला देखो, हरिदास मेरे पीठ देखो। पिटाई तो तुमको हो रहा था। तुम मेरे प्राण से अधिक मुझे प्रिय थे। इसलिए तुम्हारे पीठ पर कौन था। मैं ही स्वयं ये सबको सहन करता। कोई हरदास मुझे तो कुछ पता भी नहीं चलता था। कोई पिटाई कर रहा है, क्या कर रहा है। तो प्रेम में, आनंद में और जोर से हरी नाम ले रहा था। बहुत जोर से नाम लेते थे। हरे कृष्ण, हरे, कृष्ण, कृष्ण, कृष्ण, हरे,
हरे, हरे, राम, हरे, राम, राम, राम, हरे हरे।
नाम ले। तो। इसलिए पिटाई करते करते 20 लोग। 22 बाजार में पिटाई का जो डालेगा। तुम मर जाओगे तो तुम्हारा परिवार भी नहीं है। हमारा 20 लोक का करेगा क्या करेगा? जान। से सकता है। तुम मर जाओ, कृपा करके मर जाओ, हर कृपा करके मर जाओ। चरण में गिर पड़े तो चरण में गिर के कहे की कृपा करके हर 10 के। ठीक है। मैं अकेले, त्याग, दूंगा। सभी का भला होगा।
ठीक।
ऐसे कहे समाज हस्त हो कर गिर पड़े। बस लाकर, अरे गया। बस चलो उठा के लिए हरिदास ठाकुर जी के शासन के ले गया। पहले अभी क्या करना है? सो तभी काजी ने विचार कर। इसको कवर नहीं देना। मुसलमान मुसलमान की जाए। जो हिंदू लोग इसको जलाते हैं, इसको जलाना नहीं है। हिंदू भगवान के पास चला जायेगा। जैसा काम किया इसको ऐसे ही पानी में फेंक 2, नदी में फेंक 2 और मछली कछुआ सो खा जाए। सो काट काट के इसको खा जायेंगे। तो फिर लोग क्या कर दिए। गंगा में, पास में गंगा जी बहुत आता है। गंगा में फेंक दिए, गंगा में फेंक दिया था। वो तो सामाजिक के दूसरी साइड में चले गए। दूसरी साइड में खड़ा होकर फेर। दोनो हाथ पर उठा के फेर जोर जोर से बोले हरे कृष्णा, हरे, कृष्णा,
कृष्णा, हरे, हरे, हरे, राम, हरे, राम, राम, राम, हरे हरे।
जो बात शाह को पता चला। बोले अरे इसको मर गया था। तभी बादशाह बोले जिंता, यह कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। कभी। सभी लोग, सभी मुसलमान, जो, विचार के सभी लोग चरण में गिरे बला, बला के स्कूल और चरम में सब बादशाह से लेकर का। बादशाह ने कहा कि हरिदास, तुम साधारण नहीं हो। तुम तो जिंदा भी हो। इसलिए मेरे राज्य में आज ऐसी कोई रिस्टिक्शन नहीं है। तू कहीं भी गुम सकता, कहीं भी नाम कर सकता है। जहाँ भी जाओगे, तुम ना करो। कोई रस्टिक्शनसआपहले गवर्मेंट थोड़ा कुछ करता है, रशिया वगैरह करता, थक जाता है।
ठीक है। ठीक
कहा भाई राज्य गवर्नमेंट। कम्स कारण जो। हरिनाम जेल में क्या सॉल्टेड ब्रेड, जो ब्रेड खाने के लिए उसको खाते को गड़ा करके फिर बॉल बना कर फिर उसी में धागा दे के फिर जपते थे किनका जपा फिर उसमे जप करते थे। ऐसी दृढ़ निष्ठा देखकर जैसे हरिदास ठाकुर को पूरा हो गया। घटना की बात उनको कोई बाधा, कोई मुसलमान शासक बाधा नहीं दिया। तो इस प्रकार प्रचार में पूरा हिम्मत होना चाहिए। प्रचार कुछ, कष्ट, आएगा कुछ, लेकिन डरना नहीं। हरिदास ठाकुर के जीवन म देखेंगे कैसे है? तो इसके बाद हरिदास ठाकुर प्रचार पोली वहाँ गए, शांतिपुरी पुलिया, रे पुलिया, पुलिया होंगे, शांतिपुर शांतिपुर से आगे थोड़ा जाओगे। 10 बार हरिदास ठाकुर के फुलिया गाँव गंगा किनारे जाकर, गुफा बना, दी गुफा जैसे ऐसे वह स्वयं गुम्फा में जाकर रहते थे। हरिदास ठाकुर वहीं तुलसी पेड़ सामने रखकर क्या करते थे, भजन करते थे हरे कृष्ण, हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे जपा करते थे। और देता बहुत प्रसन्न होते थे। भोजन के के घर में करते थे। हरिदास ठाकुर डेली भोजन प्राप्त होता था। दिन रात कर जप करते थे। हरिदास को प्राप्त करके प्रसन्न रहे
तो
फुलिया में भजन होलिया में भजन उस कुटिया था, उसके अन्दर 1 साफ़ रहता था, 1 रत था, मैंने क्या रहता था कोबरा साप सुधर था, हरिदास ठाकुर रहता था, कोई फर्क नहीं पड़ता था, इनके बैठकर करते थे। लेकिन जो लोग आये इनको मिलने के लिए, हरिदास ठाकुर के यही लोग आये। बैठ नहीं पा। स यहाँ से कहाँ से आ रहा है? बोले हरिदास गुम्पा झरा साफ है। आप यहाँ पर कैसे भजन कर रहे हो? मैं चालू, आमको, आपको और दूसरा कुटिया बना देते हैं यहाँ छोड़ 2 लेकिन हरिदास ठाकुर की नहीं। तब उन्होंने हाथ जोड़ कर कहे। यदि कोई महा कोई इसके अंदर भी है, यदि मैं उनका डिस्टर्ब करता होगा, यहाँ मेरे रहने से उनको कुछ बाधा उत्पन हो रहा है, तो आज ही मैंने स्थान छोड़ के चले जाऊँगा। यदि वो यदि अपने स्थान परिवर्तन नहीं करेंगे, मैं ही स्वयं पर चले जाऊँगा। जो दास ठाकुर घोषणा की है साप ने तुरंत विशाल कबरा बाहर निकाला। सब लोग देखते को आघात नहीं करना। शांत होकर साफ आगे बाहर निकाल गया। हरिदास ठाकुर के प्रभाव तभी अस्तेस्तेकुछभुजभजन वहाँ के स जगह जगह पर भजन बड़ा पुल में पहुँचे बनापुल में वो जब हरिदास ठाकुर ऐसे ही गंगा गंगा किनारे 1 सुन्दर कुटिया बना कर फेर भजन करने लगे। उसके आस पास के जो था वो रामचन्द्र खान जो शासक था, लोकल शासक इन्होंने देखा। हरिदास ठाकुर को इतना लोग सम्मान करते हैं, हजारो हजार लोग के उसको राजा हूँ, कोई मेरे को प्रणाम नहीं करता। उसको सहन नही हुआ, इस इसा करने लगा क्यू की यही सबसे बड़ा शत्रु है, पर सूखे दुखी पर दुख है। सुखी ये होना बद्ध जीव का स्वाभाविक लक्षण है। तो इसलिए उन्होंने सहन नहीं किया। सारे गाँव में जितने प्रस्टिट्यूट थे तो सारे वेश्या को काठी किया उनके बीच में बैठ के स्टष्ट इधर आया न ये यंग लड़का है जो वसा में 20, 22 साल के आप लोग से कोई इसको गिरा सकते हो। भजन ऐसी का 1 संत है, भजन कर रहा है। लेकिन 1 यह 1 यंग लड़की। बहुत देखने में सुन्दर सुन्दर थी
और
उसका हीरा नाम था। पहली बात में उसका नाम लखे हीरा हो जाता है। तो हीरा वो बोला कि हाँ मैं करूँगा 3 दिन बस 3 दिन में हो जाएगा, मैं ठीक कर दूंगा, उस वो जल्दी मेरे पीछे मेरे भागेगा नहीं बोला ठीक है। तो रामचंद्र ने खान ने कहा है मैं 1 सिपाई भेजता हूँ, तुम्हारे साथ तुम्हारे साथ साथ जाएगा, जब तुम तुमको लिंग करेगा। तुरंत दोनों को अरेस्ट करके ने कहा नहीं नहीं इतने सुन्दर जुबकहै, इतनी दिल वाला, चेहरा वाला तो 1 बार मेरे साथ संपर्क हो जाए, हमारे 1 बार 1 बार में इसका उपभोग कर लेता हूँ। फिर बात सेकंड टाइम को अरेस्ट करना। बोला ठीक। अब स्याने रात्रि की रात है। और हरिदास ठाकुर बैठकर तुलसी के सामने जपा कर रहे। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। ये गया, प्रणाम भी किया तो। और वही वही बैठ कर सामने बैठ गया और बस्तर को थोड़े थोड़े अपने विभिन्न अंग से थोड़ा निकाल के उनको दिखाते है। रे बोलने लगा, हे ठाकुर जी, आप तो नबजुबकहोमैं तो नबजुवतीहूँ। और मेरे मन में आप ऐसा कौन स्त्री है जो आपको देखकर ध्वज धारण करके रहेगा। आपको देख कर मेरा मन आपको लिंग करने की बासा मेरे मे बहुत तीव्र है। आप पर दुखी दुखी हो, विष्णु इसलिए थोड़ा मेरा इच्छा पूर्ण कीजिए। मैं आपके साथ संभव करने के लिए यहाँ आया। हरिदास ठाकुर क्रोधित कुछ नही बोला। शांत शंकर जी के सामने जाकर ऐसे लोग उपद्रव करते थे। कामदेव क्या किए वो तीसरे नेत्र खुले बस। लेकिन ये जो देखे, ये इसे कहने पर भी हरिदास ठाकुर देखे समझ गए। पति जीव, अब मेरा काम है, इनको उद्धार करना, इसे शांत रहे। कह के ठीक है, लेकिन मैं के आकर में रत रखा हूँ। प्रत्येक दिन 3 लाख नाम जॉब करना। मुझे मेरी जॉब कम्पलीट हो जाएगा। आपके साथ आपकी इच्छा मनवाना पूर्ण करूँगा। बैठ के सुन नाम से करो। थोड़ी सी सामने बैठकर। हरिदास ठाकुर जपने लागे। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे पूरी रात्रि बीत गया, ब्रह्म मुहरत होने लगा। थोड़ा तो थोड़ा आलोक का दिखाई पड़ा थोड़ा दिशा में उदय होने का पहला तो वेश्या ने खड़ा हंगाम लोग सब आयेंगे। पता नहीं कोई पिटाई भी करेगा। मुझे इधर क्यों आ गया तो बहुत दुखी हूँ। आपकी इच्छा पूर्ण नहीं कर पाया। क्यूंकि मेरा नाम सुनके आज पूरा नहीं हुआ। कल फिर आना ना बोले, कालाना बनाया। अच्छा ठीक है, कल आऊंगा फिर प्रणाम चला गया। जा कर रामचन्द्र खान पूछा, क्या हवा? नहीं, नहीं, नहीं, आज ने आज एग्री हो गया। काल बला ने के लिए आऊँगा दूसरे दिन गया, दूसरे दिन भी शाम के समय आकर के फेरे बैठा। जैसे पहले था, सयोंग नाम सुनो, श्रवण करो, नाम श्रवण करो। आज नाम पूरा हो जाएगा। तुम्हारी इच्छा पूर्ण होगा। पूरी रात फेरे व हरिदास ठाकुर जॉब करते रहे। नाम सुन सुना तुलसी के पास बैठा है। पहले प्रणाम भी किया है को सुकृति मिल गया है। इसको के नाम सुना। लेकिन पूरी रात चला गया। फिर उसी पूर्व दिन की तरफ थोड़ा सा झाप सा आलोक आने लगा। तो फिर वो खड़ा हो, वो खड़ा हो। मैं बहुत दुखी हूँ, आपकी इच्छा पूर्ण नहीं कर पाया। लेकिन मेरे को पूर्ण विश्वास है। कल रात आगे तुम्हारी इच्छा निश्चित पूर्ण हो जाएगी। मरा नाम संख्या पूरा हो जाएगा। तो तीसरे दिन फिर आ गया की फिर आशा लेके आया। प्रणाम क्या तुलसी महारानी को परिक्रमा कर दिया। फिर बैठा बैठ के फिर सुना नाम नाम। जब शुद्ध नाम क्या सुनता था, वो आभास नाम नहीं सुनता था। नाम तीनों स्तर पर है। आभास नाम, अपराध, युक्त नाम, आभास नाम, फिर शुद्ध नाम, हरिदास ठाकुर कौन सा नाम ले रहे थे, शुद्ध नाम, निरपराध नाम लेले। आस्ते नाम सुन रहा था। पूरा नाम की प्रभाव पड़ा। हरिदास ठाकुर अंत करण में भगवान को प्रार्थना करते थे। योगज्ञान है क्या कर रहा है उसको पता भी नहीं है। प्रभु इसको कीजिए इसको भी आपके भक्ति प्रदान कीजिए। तो हरिदास ठाकुर भी हो सकता है की रात्री क्या हुआ? देखा कि दूसरे दिन पर फिर पूरा रात बीत जा रहा। वो तो हो लेकिन उसी समय 3 रात बीते जब सुना उनका माइंड पर परिवर्तन हो गया। किसका शिया का लख्य हीरा हीरा पहले था। बार लख्य नाम देने लगा, फिर उसका नाम लख्य हीरा हो गया है। तो नाम लेना रहा हो। गा कर प्रणाम किया, रोने लगे गोसाई मुझ में इतनी हीन कर्म क्या हूँ। जैसे वह भागवत वो मन में काम वासना जागृत करने के लिए प्रयास किया। ये मुझे भेजा था। कौन भेजा था मुझे रामचन्द्र खान ने मुझे भेज दिया था। आपके मन में कराने के लिए। अपराध रोने लगी। जोर जोर से हरिदास ठाकुर रोना बंद करो। तुम्हारे कोई दोस्त नहीं है। वो जो हरिदास जो रामचन्द्र खान है, वो तो ऐसा ही है। वो भी अज्ञान है, ज्ञान है। वो क्या करता है? उसको अज्ञा का अपराध मैं नहीं लेता। मैं इसको अपराध नहीं मानता हूँ। तो इसलिए अज्ञा अपराध में जानता था। तुम जिस दिन आया, उसी दिन में चला जाता था। यह स्थान छोड़े। लेकिन केवल तुमको उद्धार करने के लिए। मैं 3 रात यहाँ पर रहा। इस प्रकार दुख है। दुख स्वयं को संकट में के वो में आपको गुरु रूप में स्वीकार करता हूँ। जो बोली मुझे मुझे कैसे उद्धार होगा। कुछ उपाय कीजिये बताइए हरिदास कह के तुम घर में जाओ। जितनी वेश्या वृत्ति करके धन कमाया, इसके सारे ब्राह्मण को दान दे देना। सब दे के 1 ही वस्त्र पहन कर यहाँ आकर। इसी गुफा में मैं यहाँ से जा रहा हूँ। यही बैठकर तुम करना। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
हरे।
10 ठाकुर तो चले गए लेकिन वहाँ बैठकर क्या करने लगे? हरी राम रामचन्द्र का बोला कहाँ गया?
वो
3 दिन में देखा क्या कौन है इसका हरेृषणध बोला, हरे कृष्ण दोनो साथ में बाबाजी बैठे। लेकिन शब्द आँख से राम, हरे राम खातीढ़लग वैश्। इसलिए चरण चना गुड़ चरण करके दिन रात हरिदास ठाकुर की तरफ नाम ले रही थी। बड़े तारे देख बड़े बड़े महान वस्तु जैसे हरिदास ठाकुर देखने आते थे। इसकी शुद्धनाम लेने लगा। शुद्धनाम के प्रभाव से इसकी ख्याति बढ़ने लगी। यह भी बन गए कौन उसका नाम लोक रखा, लखराम लेने लगी तो इसका नाम आया। सब लोग के प्रणाम करके करके जाते थे। इस प्रकार हरिदास ठाकुर जो वेश्या को उसी के गुम्पा में ही छोड़कर जो हीन कर्म किया। कौन? रामचंद्र वो तो सहन करके चले गए। लेकिन इसका प्रतिशोध लेने के लिए स्वयं गये। नित्यानंद प्रभु। उसी गाँव में आए रामचन्द्र खान के गाँव में आये की वह उसी गाँव में रामचंद्र खान के घर में, उसके घर में जाकर उसका दुर्गा मंडप बनाते, दुर्गा दुर्गा मंडप में लेकर बैठ कर। वही समहासककरेल हरे कृष्ण, हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम, हरे राम राम राम रामचन्द्र खान को सहम नहीं हुआ। हरिराम थोड़ी अच्छा लगा तो कहा भेज दिया, भेज दिया, 23 को भेज दिया। बोले जा बोल। 2 ये क्या कर रहा है? उधर सुबह के लिए चाहिए या क्या अपराध है। हरिदास ठाकुर अपराध किया है तो मे तो आया है इसको दंडित करने के लिए तो बोले की ये स्थान हमारे लिए नहीं है, सज्जन के लिए नहीं है, हरिराम के लिए नहीं है। यहाँ पर जब मुसलमान आकर ही पर बैठेंगे और गोहत्या करके गोमांस खा के ये रामचन्द्र रामचन्द्र खान के संग लूटेंगे को पूरा लूट के जायेंगे। ऐसे के क्रोधित होकर स्थान चले गए और सारे किर्तन पार्टी उनके साथ गए। ठीक नेक्ट दिन आ गये। कहाँ वो मुसलम जो रामचन्द्र खान को टैक्स टैक्स ठीक से गवरमेंट को देता नहीं था, उसको 10 लाख देना नहीं, गवर्मेंट को 20 लाख देना था, 10 ला देता था और और गड़बड़ी करता था। दूसरे को खबर दिया। राजा को बोलते बहुत पैसा खाता है। इसको हटा के किसी मुसलमान को डाल दे ये क्या कर रहा है। उधर तो वहाँ से सिपाही आ गए के इसको घर में अरेस्ट कर लिए किसको रामचंद्र खान को अरेस्ट कर लिया था। संग पत्नी बच्चे के साथ अरेस्ट कर लिया। ऐसे रखा गया दिनों को और मुसलमान लोग रहे। दिन रात और गाय। वहीं पर काटे गमांग और पूरे गाँव को लूटे उजाड़े। सरी गाँव से गाँव लोग भाग गए। 1 अपराध है, 1 अपराध है। जिस स्थान पर निंदा होता है, अपराध करता है, उस गाँव को इसका रिएक्शन भोग पड़ता है। 1 का नारा दोष था, इसी का दोष हुआ था। सारे प्रजाओं को दोष भोगना पड़ा। हरिदास ठाकुर क्या गए, ब्राह्मण थे। हरी नदी। गाँव में गए तो वहाँ से ब्राहमण लोग ने हरिदास ठाकुर बोले हरिदास ये जोर जोर से क्यूँ का नाम लेता है, चुप चुप नाम लेने से नहीं होता है। स्वाप को डिस्टर्ब कर के रखता है। वन से नाम ले
तो
वहाँ से हरिदास ठाकुर आस्ते आस्ते। जब करने तो मेरा ही मंगल होगा। लेकिन मैं जोर जोर से जब करता हूँ तो वो जितने लोग के यहाँ आस पास में सभी का बुरखयरताऐसी लेकर सभी को पुकारा होता है, स्थावर जंगम है, सबको उपकार होता है। इसलिए कहते है हरिदास ठाकुर 1 लाख नाम जोर जोर से लेते थे और 15 जब करते थे, 1 लाख 1 लाख मानसिक जप करते थे। ऐसा भी कहा जाता है। तो बाद में उन्होंने फिर आ गए। बलराम आचार्य जो की रघुनाथ दास गोस्वामी के है, उनके स्कूल में जाकर पढ़ते थे, उनके 2 गुरु थे, 1 बड़ा राम आचार्य जो दिखा गुरु तो वहाँ बड़ा राम आचार्य ने उनको लेकर थोड़ा हरिनाम की। महिमा ये गोवर्धन के दरबार में बोली हजार लोग होंगे नाम की महिमा कर। राम नाम में कैसे रुचि उत्पन होगा उसके लिए बड़े सम्मान के साथ बैठा है। हरिदास ठाकुर नाम की व्याख्या करने लगे हैं। तो तो कहे देखो। कोई कहता था कि नाम लेने ऐसी पाप के हो जाता है। कोई कहा कि नाम लेने से मुक्ति मिलता है। दूसरे जो पंडित से बैठे थे। लेकिन ना मेरे दु फल दोनो नाम का नहीं है। विशुद्ध नाम लेने से कृष्ण प्रेम पूजा, शुद्ध तो भगवान श्री कृष्ण के चरण में प्रेम उत्पन्न होता। हरिदास ठाकुर कहें की यदि कोई अपराध युक्त नाम लेता है, 10 नाम अपराध साथ भी नाम लेता है तो फिर उसको भी जितनी बहुतिकच्छाउसके मन में रहता है, सारे पूर्ण हो जाते हैं। अपराध नाम लेने से बहुत किच्छा पूर्ण होता है। प्रति कुछ मिल जाए ता उसको यदि कोई आभास नाम लेता है तो उसको मुक्ति मिल जाता है नाम कुंठा। यदि कोई शुद्ध नाम लेता है तो फिर उसको भगवत चरण में प्रेम प्राप्त हो जाता है। तो इसलिए है ये सुनकर वहा बैठा था जवान लड़का बैठा था 22 साल का, उसका नाम था गोपाल चक्रवर्ती ब्राह्मण का ब्राह्मण लड़का यंग सांस्कृति वगैर थोड़ा क्या बकवास कर रहा है। खड़ा हो गया, उसको सौर नहीं हुआ, बोला ये क्या है मुसलमान का प्रवचन कर रहा है, क्या बोल रहा है। ये क्या है क्या भक्ति नाम लेने से सारे पाप नष्ट हो जाता है। क्या बकवास कर रहा है। कौन बोला गोपाल चकरतीहाहाकारमच गया, वो दोनों
खड़े हो
र वहाँ बड़ा रमा सौबल गाली देने लगे तो क्या करे? तो इससे जो होलीदास। ठाकुर को चैलेंज दिया, चैलेंज किया, हलदस ठाकुर के चैलेंज को स्वीकार किए। यदि मेरे बचपन में कोई गलती है आपको परिश्रम नहीं करना पड़ेगा की आप आप ही मेरे नाक में सोयेंगे अपने नाक को हे इसको सुन सुन हो। हाहाकार मच गया, उसको निकाल दिया और उनके दरबार में 1 अकाउंटेंट काम करता था।
वह
कोई काम नहीं की हमारा दर्जा तुम्हारे लिए, सब दिन के लिए बंद है। हरिदास ठाकुर बड़े दुखी हुए है, अज्ञ में इसका अपराध को नहीं। लेकिन हरिदास ठाकुर खेमा। भगवान किसी खेमा नहीं करते, खेमा करते है लेकिन अपराध करने से कौन रिया। कौन इसका एक्शन लेता है। भगवान एक्शन लेते है। अम्बरीश महाराज दुर्वासा मैंने जो कुछ किया लेकिन भगवान को सहन नहीं हुआ, सुदर्शन आ गया। ये चला गया। हरिदास ठाकुर चले गए। लेकिन ये देखे सभी लोग 3 दिन के अन्दर में, 3 दिन में इसके नाक। पूरा सड़क सड़क से गिर गया। बहुत सुन्दर नाक से नाक यहाँ से सड़के नीचे गिर गया। हरिदास ठाकुर के नाक काट लेगा से गिर गया। पूरे आंगली में सब पैर हाथ। सभी को व्याधि हो गया। ऐसा रहा सब देखकर हाहाकार करने के लिए। जाए हरिदास, जाए हरिदास, जाए हरिदास। सारे लोग जय हरिदास कहने लगे। नाम का प्रभाव हरिदास की निंदा करने से क्या होता है। लोग 70 रहे गए। हरिदास की जयजयकार होने लगा। सर्वत्र फैल गया। हरिदास की महिमा को लोग 1 दुसरे से बोलने लगे। सकोजोपा से लड़ा बहुत है हरिदास ठाकुर के। लेकिन सीमित समय है। फिर मुझे टाइम दिया गया। इसे खत्म करना है। मैं बीच में, बीच में बंगाली फेर कोर्ट तो और और लम्बा हो जाता। इसलिए उन्होंने प्रकट हो गए। हरिदास ठाकुर के ये संकीर्तन और साला ग्राम के। पूजन साल ग्राम तुलसी पूजा करते थे। रीना ठाकुर। दोनो मिलकर मायापुर में शिवा ठाकुर। फिर वो किर्तन में जुड़े थे, जो महा संकर। इनकी हुंकार को सुन कर ही धरा। पर जब वो किशोरावस्था में प्रकट किए भी आदेश दिए। नाम प्रचार के लिए। सुना सुना, नित्यानंद, सुन, हरिदास, सर्वत्र हमारा आज्ञा कर प्रकाश प्रति घरे घरे गया। करो विख्या, बोले, कृष्ण, भाजा, कृष्ण, गौरव, कृष्ण सिख्या, नित्य प्रचारक। कौन है नित्यानंद प्रभु के साथ केवल हरिनाम और जापान नहीं करते थे। साथ साथ प्रचार भी करते थे। सबसे पहला नाम हट्टडीहोटीहप्रचार भेजा प्रचार में गए, घर घर में गए और स्कूल न जाय माधाई में कौन था। नित्या के साथ हरिदास ठाकुर थे। जो नित्यांद हरिदास ठाकुर भी थे, हरिदास ठाकुर गए थे। पास में न बोलने के लिए। बोलो भाई थोड़े 1 बार तो बोलो क्या हमको बोल रहा है। कौन है पकड़ा जगाए माधाई की उधार में भी इनकी भूमिका है। किसकी हरिदास ठाकुर के, काजी के, काजी के, जो काजी के घर में जो महासंत जा रहे थे, उसमें भी हरिदास ठाकुर के भूमिका है। वो भी रतन पार्टी में जाते थे। जब जगरनाथ बात होगा, रथयात्रा के बारे में, सुनेंगे, वहाँ पर कौन कौन रास्ता था। डेंसी पार्टी जगरनाथ के सामने नृत्य करने का पार्टी है। पहले पार्टी में तो रास्ते थे, दूसरे पार्टी में नित्य रास्ते थे। तीसरी पार्टी में ये नाश्ते थे। कौन हरिदास ठाकुर करते थे। चौथा पार्टी में बकरे स्वर पंडित। पूरा दिन जगनराज के सामने। उस समय 3 लाख नाम करते थे। महाप्रभु की प्रसन्नता के लिए। हरिदास ठाकुर सब कुछ करने में तैयार थे। जो गोरांग महा प्रो सन्यास लिया, सन्यास ले कर। फिर कहाँ चले गए। पूरी जगरनाथ। पुरी आये। बोलने का टाइम, नहीं तो पुरी आ गए। पुरी आया। हरिदास ठाकुर भी आ गए। हरिदास ठाकुर बड़े दया नम्रता से नाथ मंदिर के पास भी नहीं जाते थे दूर, ऐसी सनातन, सनातन, समीरा, सब दूर दूर से जाते थे लोग। थोड़ा कुछ दिन मुसलमान के दरबार में नौकरी किए थे। प्रधान मंत्री पद में अर्थमंत्री पर थे, मुसलमान लाते थे आओ हरिदास। यहाँ तक कि उन्होंने बैस्ट के साथ में बैठकर भोजन भी नहीं करते थे। अलग से दूर बैठते थे, बैठकर प्रतीक्षा करते थे। सभी के बाद इच्छा था कि क्या खाने के लिए महाप्रभु के महा महा प्रसाद। इसलिए बात इनके मन को जानते हुए कुरांग महाप्रभु ने महाप्रसाद जो खाने के बाद जो कुछ पत्र में रहता था, उसको उसके पास भेज देते थे किसके पास गोविंद को कहते गोविंदा दे देना। किसको हरिदास को हरिदास जितने दूर से खड़ा होता था, दूर से। वैश् प्रणाम करते थे। हूँ हूँ। मैं बहुत पापी हूँ। उनको पता भी था। मैं कौन था, साधारण जीव नहीं थे, पूर्व में पता था वो कौन थे। स्वयं ब्रह्मा जी ब्रह्म हरिदास। तो महाप्रभु ने सोचा कि हरिदास को ऐसा एकांत स्थान कहीं न कहीं चुन की में दूँ, जहाँ पर बैठकर डेली क्या करेगा। 3 लाख नाम लेगा। तो उन्होंने जाकर बात बात करके काशी मिश्र से सर। कांत मिश्र, काशी मिश्रा वहाँ रहते थे उसके पीछे।
फिर
आज क्या कहते हैं सिद्ध स्थान। महाप्रभु ने चुन कर दिया। 1 समय बिल्डिंग बिल्डिंग नहीं था। इसलिए वहाँ बैठ के वो सीधे जगन्नाथ मंदिर के ऊपर में जो पति बना को पताका को देखते थे, चक्कर को देख कर वही बैठ कर वही प्रणाम करते थे। प्रणाम करके कितना कितना नाम लेते थे। 3 लाख नाम, 3 लाख से ज्यादा लेते थे। क्यूंकि उनको 1 महिना में 1 करोड़ नाम देना है। 1 करोड़ होने से 3 लाख, 1 करोड़ थोड़ी होता है। हिना में कितना होता है 90 लाख। इसलिए वो ज्यादा करते थे। इससे भी तो वहाँ बैठ कर पाते थे। महाप्रभु ने इनको रहने का व्यवस्था किया। बगीचे के अन्दर रह कर देखे की हरिदास बैठकर धूप में ऐसे कहीं बारिश में बैठकर भी जॉब करता है। तो महा प्रभु ने इसलिए 1 दिन जगरनाथ मंदिर में किए थे। जगरनाथ जी के ही जो दांतुन सुबे सुबे दांतुन करते हैं, गए होंगे। जगनाथ बड़ा सामने रखे जगना दांतुन पुजारी ने दे दिया, किस को दे दिया। महाप्रभु को दिया। तो गोरांग महाप्रभु ने उस दांतुन लाकर हरिदास जहाँ भजन गढ़ा दी। दास को छाया होना चाहिए। यहाँ बैठ कर वो दिन भर करता है। गा दिया तो तुरंत हो बरखा विशाल हरिदास ठाकुर उसी के नीचे बैठकर विशेष महिमा पर देखे हरे दास ठाकुर के नीचे बैठकर हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे, हरे, हरे राम, हरे राम, राम राम। 3 लाख बार से ज्यादा नाम बैठकर जपा करते थे, कहीं जाते नहीं थे। खाने पीने के लिए। प्रत्येक दिन गोविंद को भेजते थे। क्या करने के लिए प्रसाद जो बचता था पर के प्लेट का, वही ला कर देता है। 1 बार उसी खाकर दिन रात भजन करते थे। जितने के नियम था जब प्रत्येक दिन समुद्र स्नान करने जायेंगे। अवश्य हरिदास को मिल के जायेंगे हरिदास की कुटिया में आते थे। वही हरिदास को दर्शन देकर आ भगवान को दर्शन। ऐसा इसलिए प्रहुपाजीवा उनकी गुरु महाराज भी कहा करता था। ऐसा ही कुछ करके कुछ सेवा करो। भगवान के लिए। भगवान, तुमको देखने के लिए आयेंगे। तुमको भगवान को देखने के लिए ज्यादा प्रयास नहीं करना चाहिए। हरिदास ठाकुर ऐसे ही सेवा करते थे। तो चैतन्य महाप्रभु स्वयं जो जगरनाथ ही है जेई गोर, सही कृष्ण स्वयं, जगरनाथ गोरांग के रूप में प्रत्येक दिन आते थे को दर्शन देने, इसको हरिदास ठाकुर को दर्शन देकर। इनका सुख दुख थोड़ा पुछते थे। कैसे अच्छा है की नहीं ऐसे कह के फिर समुद्र स्नान करने जाते थे। हरिदास ठाकुर वहीं बैठकर भजन करते रहे, महाप्रभु बीच में दक्षिण भारत में चले गए, फिर वो वापस आये लेकिन वो हरिदास ठाकुर वहीं बैठकर महाप्रभु के आदेश की नुजाईहप्रत्येक दिन 3 लाख नाम जपते रहे। लेकिन आसते आसते देखिये की हरिदास ठाकुर प्रसिद है। स्वयं ब्रह्मा जी थे, इनको पता चला कि गोरांग महार ज्यादा दिन ला को इधर विस्तारित नहीं करेंगे यह भी अपने समाप्त करने वाले हैं। जानते थे ये कौन है स्वयं कृष्ण है। इसके बीच में दिन हरिदास नाम की महिमा भी उसका नाम उनके मुख से हरिदा ये बात किसके बीच में चैतन्य महा प्रभु और हरिदास ठाकुर वो सारे विस्तार या नहीं मुसलमान है। जवान है ये लोग कैसे होंगे भगवान के आश्रय नहीं करते, नाम नहीं लेते है ये पतितों का इनका कैसे उद्धार होगा। हरदास कर आप चिंता मत कीजिये ये मुसलमान लोग भी हराम हराम हराम जब सुर को भागा तो क्या कहते है हराम हराम तो ये नाम भास होता है, क्या कहते है राम नाम भास से उनके सारे पाप नष्ट हो जाता है। बराह पुराण से कोर्ट की कैसे 1 स्वर था और व्यक्ति था जब था तो उसको डायरिया हो गया था, बार बार जाना पड़ता था, वो अन्दर में बैठा सर आ गया पीछे हर हर हर वही आरोप शरीर दिया, विश् इसको लेके चले गए। इसलिए प्रभु चिंता न कीजिये के जरा जा नहीं पाते इनके कैसे उद्धार होगा। और हरे कृष्ण, हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण
हरे हरे हरे राम हरे राम राम
राम ये हरे महामंत्र जो धोनी शब्द है ये जब काल में सभी का ब लता पशुकी। जहाँ भी ये धोनी व्याप्त होगा ये सभी का उद्धार हो जायेगा की हरिदास ठाकुर महाप्रभु को प्रसन्न किए महाप्रभु के मुख में इनको ही देना चाहते थे। इसलिए इनके मुख से हरि नाम की महिमा को व्याप्त कि आप। यदि समय है तो पढ़ना क्या हरिराम चिंतामणि हरिनाम के मारे डीटेल ज्ञान नामाचार हरिदास के मुख से महाप्रभु ने व्यक्त कराया। आस्ते महाप्रभु के महा प्रणाय प्रयाण के समय देखे की चैतन्य महा प्रयाण देखना मैं कभी नहीं देख सकता हूँ महाप्रभु अंतर ध्यान हो जाना इसलिए वो निर्णय किया, निश्चित किया महाप्रभु लड़ा को समर में स्वयं में स्वयं शरीर को त्याग दूंगा। इसलिए 1 दिन गोविंद महाप्रभु के जो सेवक था गोविंद, प्रतेक दिन लेके आता था प्रसाद खिलाने के लिए प्रसाद की जो आया तो देखे उस दिन ऐसे लेटे हुए थे लेटे की धीमी गति में नाम ले रहे थे गोविंद कहा की हरिदास महाप्रसाद लेकर आया हूँ, महाप्रसाद ग्रहण करो हरिदास ठाकुर के की में बहुत सुस्त हूँ, मेरे मन बहुत मैं मेरे मन आज नहीं कर में महा प्रसाद खाऊँ लेकिन मेरे नाक को नहीं खाऊँ न। मेरा नाम संख्या पूरा नहीं हुआ है। आज नाम संख्या भी पुरा न हो। लेकिन महा प्रसाद लेकर आये हो। मानव कैसे कर सकता हूँ? प्रणाम किया महा प्रसाद को। 23 साल चावल राज्य के और प्रसाद लेकर मुख में डाले और फिर बैठकर जप करने लगे। गोविंद बड़ा महाप्रभु की महाप्रभु। आज हरिदास ने स्वीकार कि सुस्त चेतन महाप्रभु स्विंग आये। बोले क्या बीमार है, हरिदास है। महा प्रभु मेरे सुस्त है, मेरा मन ही सुस्त है। शरीर का क्या मन है। मौन सुस्त है, मुझे थोड़े दिन में कर लेंगे, लेकिन कृपा करके मुझे दिखा में स्कूल देखना। स्वयं। पहले मैं इस शरीर को त्याग देना चाहता हूँ। आपके चरण कमल में ही कभी हरिदास ठाकुर हद। धरि। मुतवा कमल चरण, नय ने रि। मु त व चांद बदन मुख्य उचारी मुकृष्णाचतन्यनामा। यह मत इच्छा मारा छाड़ीमुपराणमाप्रभु मेरी इच्छा है। आपके चरण कमल को में, हृदय में धारण करते रहूँगा। आपके मुख को निहारते रहूँगा। बार बार मुख से कृष्ण चैतन्य, कृष्ण चतन्य कहते हुए मेरे प्राण पी। जैसे शरीर ऐसी उड़ जाए, मेरे समाप्ति हो जाए। इसको सुनकर महाप्रवकहेकेहरिदास इससे कहना ठीक नहीं है। तुम्हारी उपस्थिति में मैं कितने आनंदित हो रहा हूँ। कृष्ण ने मुझे तुम जैसे सेवक दिया है। तुम्हारे संग करके में तो बड़े प्रसन्न होता था। तुम मुझे छोड़ के कैसे अकेले चले जाओगे। लेकिन जब किसी शुद्ध भक्त के मन में ऐसी इच्छा प्रकट होता, अवश्य कृष्ण इच्छा पूर्ण करते हैं, कुछ मांगता नहीं है भगवान को। लेकिन उनके मन में थोड़ा भी कुछ थोड़ा सा का क पूर्ण कर देते है। इसलिए समझ गई तो जाएंगे चले जायेंगे। दिन। इसलिए महा संकृत पार्टी लेकर आये है। 4 प्रभु रामानंद, राय, जितने भी पूरी में बंग की प्रसाद जो ये सब लोग के हो गए। सभी लोग महा संकृतन करके आये। बक् सर पंडित स्वयं नृत्य करते थे, महाप्रभु भी नृत्य करते थे। महाप्रठिकवोनकीइच्छा था उनके चरण को, उनके जैसे उनकी रखकर ऐसे ही बैठे रहे। हरिदास ठाकुर, महा प्रव चरण कमल को स्पष्ट करते, पकड़ते हुए, निहारते हुए। कृष्णा चैतन्य, कृष्ण चैतन्य, कृष्ण चेतन्या बार बार उच्चारित करते हुए नितल में प्रवेश कर गए।
जयनील प्रेम धन
करुणा। प्र चु। जेनिला। हे ना।
प्रभु। कुठागलाअचारजठाकु
है, न प्रभु में पुरा नहीं गाऊंगा। क्यूकी टाइम हो गया। दास ठाकुर महाप्रयाण दिव्य शरीर को उठा लिए, ऐसा धारण करते हुए बस में नृत्य करने लगे। कौन हरिदास ठाकुर के शरीर को स्वयं महार करते हुए नृत्य करने लगे। और महा चलते रहा। समय जानकर सोल बोले थक गए। सो समाप्त करो इसका ने, संस्कार का प्रशासन के साथ हरिदास ठाकुर को, सब को रखा गया। स्वयं समुद्र की बाल में समाधि है। क हरिदास ठाकुर के समाज, वही महाप्रभु लेकर, हरिदास ठाकुर के शरीर को समुद्र में स्नान कराया, स्नान करा के। फिर नया स्तर दूसरे विस्तरण को पहनाये शरीर में पूरा तिलक धारण कराए, धारण कर। महा प्रसाद जगराज के महा प्रसाद डोरी चन्दन। शोबायथा तुरंत वहाँ पर जो आदेश देते। तुरंत राजा ने बोला तो स्वयं को वहाँ पर डकार किया। आज से वह महोदधी महातिर हो गया है। जहाँ पर हरिदास ठाकुर के शरीर को स्नान जहाँ पर कराया गया है, यह स्थान आज महातिर बन गया। यदि किसी व्यक्ति ने आकर इस स्थान पर आकर स्नान करेगा। समुद्र में, महोदधि में, इसको भगवान श्री कृष्ण के चरण में अवश्य विशुद्ध प्रेम भक्ति प्राप्त हो जायेगा। महा वरदान दे दिया। हरिदास ठाकुर के शरीर को। जहाँ स्नान करा गया था, वहाँ पर यदि कोई आ कर, स्नान करेगा, उसको 3 जगह पर वरदान है, दूसरा है, शांतिपुर में, माधवनदरपुरकीतिरा तिथि, आरोप, शांतिपुर में आकर, यदि कोई भोजन करेगा, वहाँ पर भी महाप्रभु वरदान है। गोविंद गोविंद प्रेम, गोविंद प्रेम प्राप्त है। भोजन कर ले थी। महाप्रभु ने वहाँ पर किया। शांतिपुर अन्य शास्त्र कहा गोर कर। गंगा में, म पर स्नान करेगा। महार विशेष कृपा है। कृष्ण प्रेम दुर्लभ कृष्ण प्रेम प्राप्त हो जाएगा। तो इसी प्रकार हरिदास ठाकुर के महा प्रयाण बहुत विशाल है, इसका वर्णन नहीं कर सकता। डिटेल समय होने वाला। इसलिए वहाँ से जब महा प्रव, हरिदास के शरीर में सब लोग बालू देकर, समाज से बनाए, बर, बर समाधि बनाकर। चारों साइड में ने घेर दिए है। जैसे कोई अन्य जंतु इसके अंदर प्रवेश न कर सके, कोई खुदा ही करेगा। तो इसके बाद स्वयं या फिर महा संकेतन के साथ सिंह दर्जे पर आये है। महा पर सोए अपने ही बढ़ाने लगे, सबको बोले देखो। मैं हरिदास का महाप्रयाण उत्सव का। कुछ ब्राह्मण वषों को भोजन खिलाना चाहता हूँ। आप लोग कुछ मुझे सहायता करो, कुछ भिक्षा दे। 2 ऐसा बढ़ा अरे स्वयं गोरांग सब देख खड़ा हु तो सर्वदा जा रहे है। आप जाओ, आगे जाओ पर भेज दिए। स्वयं जितना जरुरत है। 5 लोग मिलकर शंकर पंडित, ने पंडित और स्वयं सर्वदा लोग मिलके प्रस। 700 लेके आये है। जो बैठा दिया गया। 12 लाइन में मैं सर्विस करूँगा और किसका हाथ में रन लेते थे। 4 लोग का खाना आता था वो 4 लोगो का खाना 1 में डाल देते थे। सोना गैर ही आपको सर्विस ही कृष्ण प्रेम दान करते रहो जाओ। खाओ दूसरे दुगी नही करेगा, सर्विस सर्विस से भोजन करते हुए देख कर, ह वजन कर। वहाँ भी वरदान दिए। हरिदास ठाकुर के महा प्रयाण के लड़ा में जो भी जाकर, जो भी वहाँ पर नाचा गाया कीर्तन किया, जो भी प्रशासन में समुद्र तक गया, जो हरिदास समाधि में बालू अर्पण किया, जो देखा, जो यहाँ यहाँ भी जाकर, जो जगरनाथ मंदिर आया, आ के देखा और प्रसाद लिया, वितरण किया, जो प्रसाद खाया, ये सभी लोग भगवान के चरण में कृष्ण प्रेम पर कर लेंगे, नित्य लड़ा में प्रवेश कर जायेंगे। जन्म पति संसार से सदा सदा के लिए उद्धार हो जायेंगे। ये हरिदास की महिमा है। इसलिए महाप्रभु ने इतने सुन्दर है। वरदान महाप्रभु गया, ब्याकुल हो गए, को छोड़ के हरिदास चला गया। सारे कुटी माता पीव गोरा गोरांग गुलेर निधि कुटाई। तो हरिदास ठाकुर महा प्राण। इस प्रकार अंतिम सीमा है। चैतन्य महाप्रभु चैतन्य भक्त जन महा प्रयाण का, लिला हरिदास ठाकुर का, तो हरिदास ठाकुर की महिमा। जो महाप्रभु कहते 5 मुख में, जैसे 5 मुख में कह रहे हैं। बड़े आनंद में आता था हरिदास की महिमा को वर्णन करने में। इसलिए आप हरिदास ठाकुर के आज सभी लोग संकल्प लीजिये। जैसे उन्होंने साधन दोनो आचार प्रचार के हूँ उन्ही की, बता गया अचार कर, हु न करे, प्रचार प्रचार कर, न केहु न करे, आचार अचार प्रचार ना मेरे कर, 2 कार्य तुम जगत रे, पुज्य तुम ही आचार्य। इसलिए हरिदास ठाकुर दोनो करते थे, आश्रम करते थे और प्रचार भी करते थे, प्रचार करते थे, 3 लाख नाम जपते थे, प्रचार करते थे महाप्रभु के परिवर्धन के लिए सब कुछ करने के। वो समर्थित है। इसलिए हमें जानना चाहिए हमारे सम्प्रदाय के अचार है। कौन? ब्रह्मा हरि दास है, दूसरा हरिदास है, वो छोटा हरिदास। नहीं, ये ब्रह्म हरिदास, ये स्वयं ब्रह्मा जी के अवतार हैं। इसलिए ये ब्रह्म हरिदास को फॉलो करना है। क्या है हरिदास ठाकुर की, नामाचार जी, हरिदास ठाकुर की जाए, नामाचार जी, हरिदास ठाकुर की जाए, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा, हरे हरे, हरे राम, हरे राम राम राम, हरे हरे, हरे राम ह, हरे हरे व केबल को नाश्ता, नाश्ते, व नास्ते न्यथा निष्ठा है। लेकिन हरिदास ठाकुर के स्टैंड था कितना 3 लाख महापरहुनेइसलिएकहत, 1 लाख नाम नहीं लेता। तो मैं उसके हाथ में पानी भी नहीं हूँ। लेकिन प्रभु कृपालु इतनी दयालु है कितनी है मिनिमम 16 माला पर 16 माला भी जॉब करोगे, ध्यान पूर्वक, 16 माला जप करो, तब भी तुम भगवत धाम जाने में समर्थ हो जाओगे। 16 माला ध्यान पूर्वक नहीं करते। कहाँ गिरे हुए कम से कम बैठ कर 2 घंटा, 16 माला प्रत्येक दिन गोरांग, गुरु, गोरांग की प्रसन्ता के लिए जॉब कर लेना चाहिए। हरे कृष्ण, हरे कृष्ण क, हरे हरे हरे राम, हरे राम राम राम प्रपा जी, कहे जी। कोई ध्यान पर प्रत्येक दिन सोलमारा निश्चित करता है। दुनिया में कोई भी शक्ति नहीं है, उसको माया में गिरा सकता है। इसलिए आप देखे की स्वयं माया देवी, स्वयं माया देवी स्कूल में व्याख्या भी नहीं कर पाई है। स्कूल दूसरा परीक्षा करने आये है किसको हरिदास ठाकुर को स्वयं सुष्टि स्थिति प्रलय साधन। भवनानी दुर्गा पुरुषण माया देवी ने स्वयं के कहा के हरिदास ठाकुर के आया था। लेकिन लेकिन 3 रात प्रयास करके भी माया देवी से भी समर्थन नहीं हो पाई। हरिदास ठाकुर के मन में कुछ काम वासना जागृत करना, कृष्ण भक्ति से इनको नीचे गिराना है। तो इस बात में ही मैं स्वयं माया देवी हूँ, स्वयं शंकर का पत्नी हूँ, मैं सारे सुष्टस्थितिअधिकरिणी हूँ, मैं स्वयं तुमको परीक्षा करने के लिए आया तब भी तुम विचलित नहीं हुए हो। इसलिए आगे ही खा गया। तो कहा कि मेरे पति ने मुझे राम नाम जप का मंत्र दिया था। हरे राम, हरे राम राम राम हरे हरे। लेकिन आपके मुख से कृष्ण राम का उच्चारण देखकर आकर्षित हो गया। हरि राम नाम तो क्या मुक्ति देता है। राम राम राम राम बोलने से मुक्ति मिलता है। प्रेम। ये हर कृष्ण बोलने से मिलता है। हरे कृष्ण, हरे कृष्ण कृष्णा, कृष्णा, हरे
हरे, हरे राम, हरे राम राम राम,
हरे हरे हरे चतुर मुखे ब्रह्मा कहे कृष्ण हरे हरे पंच मुख महादेव राम राम हरे हरे या प्रभु। सबसे बेस्ट मार्ग दिया है, सबसे बेस्ट मंत्र दिया है। इसे ध्यान पूर्वक को आश्रय कर। रामाश्रय कर कॉलेज का धर्म है। ये। कॉलेज में कोई दूसरा उपाय नहीं है। शीला प्रभुपाद की नाम चार्ज शिला हरिदास
ठाकुर की नीता गौर हरि हरि हो,
his होल
जाय। जाय हो
इतना सुन्दर गुण हरदास ठाकुर जी का। 1 के बाद 1 महाराज ने रिलायं शिक्षाएं दी जोरदार तालियाँ हो जाए महाराज के लिए। प्लीज ओके तो पीछे बुकस्टाल भी है बुकस्टाल से आप बुक्स ले सकते हैं।
बहुत दुखी हूँ क्यूँ की प्रश्नउत्तर के लिए। समय नहीं बच पाया। समय हो चुका है क्लास जो प्रश्नोत्तर
के बाद मिलेंगे फिर भी भक्तों के पेट में चूहे हाथी बने। उसके पहले पहले प्रसाद पाना जरूरी है। लेकिन पितर हा है। तो इसलिए दान करने का बहुत महत्व है। और पुष्कर तीर्थ में यहाँ पर दान करने का अत्यंत महत्व है। यह कैन कोड सकते हैं। प्लीज अपना जी खोलिए, पेटीएम खोलिए, फोन पे खोलिए और आप दान कर सकते हैं ताकि इस यात्रा में हम और अच्छी सुविधा दे सकें और अधिक अच्छा प्रसाद खिला सकें, आपकी और अच्छी सेवा कर सकें। सो प्लीज काइली डू स्कैन दिस कोड माताएं निकल जाएं, प्रभु लोग रुक जाएं। अपने फोन के साथ स्कैन कोड खोलें और दान करें। क्योंकि धन शुद्ध होता है दान से, मन शुद्ध होता है हरी के नाम से। बुद्धि शुद्ध होती है दिव्यज्ञान से, तन शुद्ध होता है स्नान से, लेकिन धन शुद्ध होता है दान से, तो कृपा करके दान करें। 5 सौ हजार 1121 सौ 51 सौ 11 हजार 51 हजार 11 लाख 11 करोड़ जितना आप देना चाहें प्लीज दान करें और साथ ही बुक अवेलेबल हैं। प्लीज गोल्डन एज मीडिया की सुंदर सुंदर बुक्स। विशेष रूप से हिंदी भाषी भक्तों के लिए हर साल लेकर आते हैं हमारे हिज्रे नंद गोवाल, जीवन प्रभु, सो भक्तों, प्रसाद अवश्य पाए। साथ ही बुक्स पी अवश्य लेकर के जाए। शाम 5 बजे तक ही है। बुक स्टॉल अवश्य लेकर के जाए। नाइनटी परसेंट डिस्काउंट से बुक्स मिल रही है। प्लीज अरे कृष्णा हिज होलीनेस पर सस्ती महाराज ही की जाए। कृष्ण प्रसादम की जाए। इसके बाद ब्रेक टाइम है और फिर से हम लोग 2 बजे इकट्ठा होंगे और फिर हम 2 घंटे गुणगान सुनेंगे हिस होलनेस। गोपाल कृष्ण गोसायमहाराजकासो, प्लीज काली बी देर और शाम का सत्र रहेगा। शाम को 7 बजे हिस होलिनेस। भक्ति पद सवार प्रचार महाराज जो कि हम बताएंगे चतुष लोकी भागवतम से बड़ी विशेष कथा सो प्लीज काली बी देर। जगत गुरु श्रील प्रभाद की जाए।
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