Pushkar Dham Yatra (Morning Session) || Day - 4 || HH Gopal Krishna Goswami Maharaj || 2025

The video captures a morning devotional gathering on Day 4 of the Pushkar Dham Yatra, led by senior Vaishnava teachers and attended by multiple devotees (Speakers A‑E). The session interweaves bhajans, Hare Krishna mantras, and Sanskrit‑Hindi verses praising the divine, followed by a series of theological teachings on the proper attitude for chanting the holy name (Harinaam). Central teachings stress self‑humiliation, tolerance, and the elimination of ego as prerequisites for sincere chanting. A detailed exposition lists ten "name crimes"—misuses and disrespect of divine names—that practitioners must avoid. The guru’s role is emphasized, with strict instructions on conduct (e.g., avoiding mobile phones, maintaining awareness while driving or flying, respecting the guru’s instructions). Anecdotes illustrate chanting in everyday challenges such as flights and vehicle travel. The latter part of the session provides logistical announcements: the morning program schedule, check‑out times, and room key procedures for participants. Overall, the content blends devotional fervor, doctrinal instruction, practical discipline, and event coordination.
Chapters
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न मस्त सिहलधलददाईने हिरन का सी
पूर्वक शाह
शिला का न काला ह तो न सिंहा पर तो न सिंहा या तो तो यामितातो नसिंहाबहरनसिंगा रि द न सिंगा नर सिंग मा दम शरन प्रप दे तबका कम काम अदभुत श्रंगा लिता हीरन्याकशपुतोनु भिंगा केश वध्रित नरहरी रूपा जय जग दीशा रे जाए जगदीश रि जय जगदीश हरे जय लक्ष्मी नरसेना जय लक्ष्मी नरसि मा लक्ष्मी नरसि मा जय लक्ष्मी हर सिमा गा जया प्रलज माराज प्रलज माराज प्रल माराज जया प्रलाद महराज राज
राज जय जय प्रभु
प्रभु का प्रभु पा जो प्रभु सिंह देव भगवान की जा भक्त प्रहलाद की जा जगत
शीला प्रभुपाद की जा hrs
सब लोग तुल्सी मराज को प्रणाम करेंगे वृन्दाय तुलसी दिव्य प्रयाय के सवस्यचकृष्णभक्ति प्रदेव सततइनमोनमहा बृंदायतुल्सदेव्या पर्याय के सव्च कृष्ण भक्ति ब्रदेव सतति नमोनमहाबरिनदाय तुलस देव्या पर्याय के सवस्सचकृष्ण भक्ति ब्रदेव सतकई नमोनमाहाँ ulnadेvkeja
sीकrषणाप्राशि ना ना ना राधा कृष्ण से यही है बिला सी जतमरसररलातराबलचपी कृपा कर करो पर वृन्दावन मशी मन म मोराललिहिला बिना कुल नया ने हरिदा सदा सी न धरा सखयमदताकर सेवा लाभ का रावी करा ली जरा सी बिना कृष्ण का स का यही न र विराग सब सी सी कृषणा ना तूने कल चापा ने ब्रह्मा हा प्रालि पालि चा पानी का प्राय सती रबजीनकारटग पानी काली चाप पानी ब्रह्म है प्रदी पानी चाय पानी पानी पाया सतिप्रदचिनततद हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हर रंग हर मन राम र है रे हर कुशा हार ना जल ब्रिंदेदेवीबृिंद देवि बिंद देवी जल बिंदा देवी देवी जय कुषिमहरजरतुशि रा कुशी महरानी जल भक्ति देवी हरि भक्ति देवी वृंदा तुलसी देवी प्रिया केश्वश्याकृष्ण भक्ति प्रदेवी शत्रुता नम नम वृंदा लकलसिदेवीप्रियाल के स्वश कृष्ण भक्ति परते देवी सतवतनमोनमोवृंदाल तुलसी देवी प्रिया केश्वशकृष्णभक्ति प्रतेवेवीसतवृति नमो नमो तुलसी देवी भक्ति देवी कृष्ण जी की
हरी हरी सी चैता ने महा प्रभु
की
चेतोदरपनमा जनम भव महा दागागनिरवापनम शयाकेरवचंद्र का तरणम विद्या दु जीवनम आनन्दम बुद्धि बर दनम प्रति पदम पूरना मृत सादन सर बात म सनम पनम परम विजयते श्रीकृष्ण संकी तनम नाम नाम कारि बहुदा निज सर्व शक्ति सत्रार पिता नियमित स्मरणे न काल हा। एता दृषि। तब कृपा भगवन न मापी दूरदबमिंद्रशमिहा जनिनानोरागहा त्रणादपीसुनिचेना रपिशहेसुना आमानिनामानदेना की तनी सदारी न धनम न जनम न सुंदरी कविता बजगदीशकामय मम जन्मनि जन मनेश्वरी भवता द भक्ति रहे तुकी तई आई ननदतनुजकिंकराम पति त मान विश्व में भव ब। 2 कृपया तबपादपंकजा स्थित धुली सदरिशमविचिंतयम नयनमगलदश्रुधारया वदनम गदगदरधयागिरा पुल कै निश्चितम बपु कदा तब नाम ग्रह ने भविश्य ती युगायतमनिमेकसेना चक्षुषा प्रभूषायतम शुन्यायतम जगत सरवा गोविंद वि रहे नमे औसलश्बापादरतंपिनष्टु माम अदरशनाममरमहताम करो तुबा यथा तथा व विद्धान तु लंपटो मत प्राणनाथस्तुसैव नापर हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
श्लोक संख्या 3 स्वयं को मार्ग में पड़े हुए तृण से भी अधिक नीच मान कर, विक्स से भी अधिक सहनशील होकर मिथ्या मान की भावना से सर्वथा 0 रहकर दूसरों को सदा ही मान देने वाला होना चाहिए। ऐसी मन स्थिति में ही व्यक्ति हरिनाम की तन कर सकता है।
शृषिचैतनयमहाप्रभुष स्टास्ट कम के
10 नाम अपराध भगवान के जपमें होने वाले पहला भगवनान के प्रचार को जीवन भव नाम के प्रचार में जीवन को समर्पित करने वाले भक्तों की निंदा करना, दूसरा, शुभ, ब्रह्मा आदि देवों के नाम को भव नाम के समान स्वतंत्र समय तीसरा गुरु की अवज्ञा करना और उन्हें साधारण मनुष्य समय चौथा वैदिक शास्त्र परमाणु का खंडन करना। 5 महरी कृष्ट महामंत्री, जबकि को काल्पनिक समेना छठा भगवान नाम के अर्थवाद का रोग करना, सातवां नाम के बल पर पाप करना। 8 वा कृष्ण महामंत्र को वेदों में वर्णित 1 शुभ सकाम कर्म या कर्मकांड के समान समेना नवा, अश्रद्धालु को कृष्ण नाम की महिमा का उपदेश करना, दसवां भगवान राम के मेंुरुश्वास न होना और इसकी इतनी अगाध में हम श्रवण करने पर बहुत ही कसरती बनाए रखना। भगवान नाम का जप करते समय पूर्ण रूप से सावधान रहना भी परा है। प्रत्येक भक्त जो अपने को वैशनवसमयतवस्य चाहिए कि 10 प्रकार के नाम अपराध, सदा, बच कर रहे, राज्य श्री कृष्ण चरणकलमेप्रीति शीघ्राति प्राप्त हो, जो मनुष्य जीवन का परम लक्ष्य है। हम सभी व्यस्त भक्तों के चरण कमलों की वंदना करते हैं, जो वांछाओं को पूर्ण करने के लिए कल्प वृक्ष के समान है। कृपा के समुद्र हैं, पथियुतोंका उधार करने वाले हैं।
lanca कlptrोbksakipa सिंधुबईबचptita, nam, वes्nभीभ्योनमो, न, म,
ह वैष्णव ठाकुर की अनंत कोटी वैष्णव की जाए,
नम विष्णु बादा, गृष्णपरिष्ठाबूतले, श्री गोपाल ष्ण गोस्वामी प्रभु स् साहित्य प्रकाश ितिजप्रचारकृत्वान साधु भगवत बादायतनबदा, श्रीमत भक्ति वेदांत स्वामी इतना नमस्ते सार स्वदेह देवे गौर वाणिक प्रचारने निर्विशेष शून्यवादी भा्ात्यदेशतारणे
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विनु कलि का ल न हीं आज धर्म, सर्व मंत्र सार नाम एई शास्त्र मरमा। यह क्षेत्र चरित्रा के आद लिला के सत्तम अध्याय के 74 विश्व लोक से उद्धरण है। बहुत ही महत्वपूर्ण श्लोक है। इससे हम ये पता कर सकते हैं कि सर्व मंत्र सार, नाम शास्त्र मर्मा समस्त शास्त्रों का मर्म ही ये हरि नाम है और इसलिए परम भगवान स्वयं बता रहे हैं, नाम वेन कोलिकल नहीं। हर धर्म और कोई धर्म नहीं है। जो परम भगवान सर्व धर्मान परित्यज्जा बोलते हैं। हमें समझना चाहिए कि ये बाकी उन सभी धर्मों के पर्या की बात कर रहे हैं। सिवा इस नाम के। इसलिए श्वीपदाइंद्रप्रभु बोलते थे। नाम कम शरणम रजा, कम नहीं, ना में कम शरण म रजा। मात्र हरिनाम का शरण ग्रहण करना चाहिए। और नाम हित हाई, सर्व जगत निस्तार। ये विश्वास भी होना चाहिए कि समस्त जगत का निस्तार हो जाएगा। हरि नाम से मात्र हमारा नहीं और हमारा सिद्धांत नहीं कि मात्र हम अपना उद्धार करे। 1 वरिष्ठ केशना ने बताया था कि हमारे आध्यात्मिक जीवन के प्रथम 50 प्रतिशत जीवन हम स्वयं के उद्धार के लिए कार्य करते हैं और अगला 50 प्रतिशत दूसरों के उद्धार के लिए कार्य करते है। लेकिन समस्या यह कि हमें पता नहीं कौन सी 50 प्रतिशत अभी चल रहा है, क्या किसी की आयु कितनी है, कोई बता नहीं सकता उसकी परिधि। इसलिए दोनो साथ साथ चलना चाहिए। सर्व मंत्र सार ये समझना चाहिए। समस्त मंत्रों का सार यही है और न ही आर धर्म और कोई धर्म नहीं है। इसलिए बाकी समस्त धर्मों को त्यागना चाहिए। पूरा समय त्याग नहीं सकती। तो कम से कम हरिनाम के समय तो समस्त धर्मों को त्यागना चाहिए। बाकी समस्त धर्मों को हरिणाम करते समय समस्त धर्मों को त्यागना चाहिए। सिवाय हरिणाम के स्व गोपाल, कृष्ण गो, समित गुरमा भगवतपाद बोलते थे। अटेंटिव चैंटिंग मींस यू डू ओनली चैटिंग एप द टाइम नो मोबाइल
जपा के
टाइम पर तो भले हम चाहें न चाहें, हम सब किसी न किसी प्रकार से 4 रेगुलर प्रिंसिपल से तो स्ट्रॉंग ली, उसको हम फॉलो कर रहे हैं। लेकिन फिफ्त रिगल प्रिंसिपल अभी मोबाइल का रखना पड़ेगा। क्योंकि उससे कई भक्तों के स्वाध्याय में कई भक्तों के जब में बाधा आ रही है। और हमारे गुरु महाराज बोलते थे कि गाड़ी चलाते समय भी कुछ लोग माला करते हैं। यह अच्छी बात है क्यूंकि कभी कभी भी हरिनाम करना अच्छी बात है। लेकिन वो गिनती में नहीं आएगा। तो समस्त हमारे हमारे जीवन के साथ हरिनाम घुल मिल जाना चाहिए। इसका मतलब हमारे जो वैधानिक साला माला जो है वो भी घुल मिल जाए। वैधानिक 16 माला दाल रोटी है होना चाहिए। सही टाइम पर भक्तों के साथ मुझे अभी भी याद है। वृंदावन में गुरमा ने लगभग साढ़े 6 के करीब मैं उनके कमरे के पास सर्वेंट रूम में था। तो महाराज जैसे मुझे देखा हर डिवूटiसमहाराज 20 साल इस कांड में उस समय 56 साल पहले की बात है। तो हम समझ सकते हैं कि गुरु मात हमेशा चाहते थे कि भक्तों के साथ में जब करें, बिना मोबाइल के जप करें और विशेषतया इस भाव से करें कि और कोई धर्म नहीं है। यह विश्वास हमें होना चाहिए जब हमें पता चल जाता है। षिलोपरोपत बोलते हैं कि ऐसा जब करना चाहिए कि सामने मृत्यु खड़ी है, मृत्यु सामने खड़ी है तो हम कैसे जब करेंगे। अभी कई बार मुझे याद आता है जब फ्लाइट में जाते हैं तो टर्बुलेंस होता है। तो उस समय मैं बहुत बढ़िया जब करता हूँ। मेरा सबसे बढ़िया जब तब होता है जब टरबुलेंट टाइम पर फ्लाइट में मौसम खराब होने से जो हिलना शुरू हो जाता है। तो मैंने ही सोना भक्ती दीरदामदऔरमहाराज से इसके बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि हमें यह तो बहुत अच्छी बात है, तुम्हें फ्लाइट के होने से तुम्हें माला करने का मन कर रहा है। अच्छे से तो तुम्हें और फ्लाइट लेना चाहिए। भले डर लगे और परम राधानाथ स्वामी महाराज से भी बात कर रहा था। 1 समय उन्होंने मुझे बताया कि ऐसा नहीं कि हमारे आचार्य पूरी तरह निर्भीक थे, वो जब भी उनका भाई आता था वो पूरी तरह निर्भर थे। भगवान पर यह अंतर है। निर्भिक होना हमारा सिद्धांत नहीं है। निर्भर होना हमारा सिद्धांत है। इसलिए 1 अंतिम बात बताना चाहूँगा हरिणामप्रभु 1 व्यक्ति है। जैसे आपके सामने कृष्ण खड़े है तो आप कैसे हाथ जोड़ते हैं। उसी प्रकार हम सबको यह प्रयत्न करना चाहिए। जब जब करते समय भी हम हरिणाम के प्रति बंध मोई सवाधान माते हैं। हाथ, जोड़ के करना चाहिए जब सम्भव हो, सम्भव हो और दूसरी बात जैसे किसी वैष्णो के प्रति हमने अपराध कर लिया, पैर लग गया मैंने क्षमा याचना कर दी उसी प्रकार हरिणा प्रभु से समय चना करनी चाहिए। 11 माला होने के बाद हरिणा प्रभु समय करनी चाहिए कि मेरे से गलती हो गयी प्लीज माफ़ कर। 2 आगे से मैं ठीक से करने का प्रयत्न करता हूँ आशीर्वाद तो इस प्रकार से हरि णाम प्रभु बहुत कृपालु है जरूर प्रतिशत करेंगे बस हमें कोशिश करना है। 1 वरिष्ठ वेष्टन मुझे बताया था उनका बुक जब साइन करते हुए देते हुए उन्होंने लिखा था मेरे लिए एवरीथिंग इज द होली, नाम यू ओनली हैव, टू चांटे सब कुछ हरिणाम में है बस आपको जब करना है बस हमको जप करना है हर 1
थैंक यू
हर 1 प्रश्न तो सभी भक्तों का मॉर्निंग ब्रा में स्वागत है और इसके बाद भी जब करेंगे सवा 7 बजे तक सवा 7 बजे गुरु पूजा होगा और जिसमें सिंगिंग करेंगे श्री निकेत प्रोजी गुरु पूजा वर्ष करेंगे ऋषि कुमार प्रजी इसके बाद फिर प्रवचन रहेगा सेवन फॉर्टी फाइव पौने 8 बजे से है जो भक्ति पद, सौरव प्रचारक स्वयं महाराज का हरि बोल और सभी भक्तों से करबद्ध निवेदन है कि जहां जहां रुके हुए हैं तो 10 बजे से पहले ही वहां पर चेक आउट करके और जो कीज होंगी वो रिसेप्शन पर आप लोगो को जमा कर देना है उसके बाद अगर कोई रुकेंगे तो भूरीजनप्रुजी का कहना ऐसा कि आपको खुद पे करना पड़ेगा आज का रूम का थैंक यू वेरी मच स्रप्रापादकी जाए।
he, he, he, he।
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