In this informal Q&A session recorded at ISKCON Juhu, Srila Gopal Krishna Goswami Maharaj addresses a series of questions from devotees and seekers about practical aspects of bhakti‑yoga in the modern age. The discussion covers the efficacy of Sankirtan Yajna for fulfilling material desires, the minimal requirements for a devotee to be considered a practitioner of the Yajna, and how a single individual can balance full‑time service to Krishna with family responsibilities. Maharaj offers guidance on dealing with non‑devotee relatives, encouraging the performance of name‑chanting (japa) and Yajna for them, and explains what to do when family members are unwilling. He emphasizes maintaining enthusiasm and steadiness in devotional practice, suggesting regular association with advanced devotees, sincere service, and adherence to scriptural principles. Additional topics include the proper way to seek forgiveness for offenses against deities, the importance of cultivating friendly attitudes toward all beings, and lessons drawn from the Govardhan‑Indra episode. Throughout, Maharaj’s tone is compassionate, instructional, and encouraging, aiming to provide practical spiritual counsel.
Chapters
हरे कृष्ण मार थैंक यू फॉर द ऑन्डफुललेक्चर प्रश्न यह है कि आजकल लोग बहुत सारे गलत काम को कर रहे हैं अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए। तो क्या संकीर्तन यज्ञ का पालन करने से ऐसे लोगों की भौतिक इच्छाएं पूरी हो जाएंगी? संकीर्तन यज्ञ का पालन करने भगवान कहते
हैं 4 परिस्थिति में लोग मेरे श्वर में आते है।
1 दुसरे
दूसरा विज्ञा कहते हैं ये 4 के 4 पुनिता है, कम से कम मेरी।
तो चाहे आप किसी भाव से जुडो जुडो हस्ते हस्ते है। आप शुद्ध विचार
शुद्ध बन सकते है। महाराज गए थे जंगल में बड़ी गहरी तपसे उठाए उनका उद्देश्य क्या था? और फिर जब भगवान उनकी भक्ति से कितने प्रसन्न थे ने बम हुआ क्या चाहिए? मुझे कुछ नहीं चाहिए का क्लास फॉउडडामदूसराकरशशन
यह है कि 1 व्यक्ति मिनिमम क्या करे की कहा जाए कि ये संकृतन यज्ञ का पालन कर रहा है। मिनिमम च जब वो क्या करते है क्या करे?
so most importan und
round so
pirtuleadwincwa
ये हरे कृष्ण महाराज जी धन्यवाद आपके मधुर कथा के लिए आप बता रहे थे कि इस कथा के द्वारा भगवान हमें शिक्षा दे रहे हैं कि हमें नंबर बनना चाहिए। इस प्रसंग में जब कृष्ण नंद महाराज से पूछ रहे थे कि ये क्या कर रहे हैं आप? तो नन्द महाराज जी पहले ध्यान नहीं देते, समझते हैं की ये बच्चा है। तो वहाँ पे कृष्ण को लगा कि ये मुझे छोटा समझ रहे हैं इसीलिए नहीं बता रहे हैं। तो मुझे अपने बारे में बताना चाहिए। थोड़ा मैं अपना ज्ञान प्रदर्शित करूँगा, तब वो मेरे को बतायेंगे। तो यहाँ पर हम देखते हैं कि हम भी कब सेवा करते हैं। कभी तो देखते हैं कि सामने वाला व्यक्ति कुछ सुविधाएं या कुछ सहयोग नहीं कर रहा है। तो हम हमें अपने बारे में बताना चाहिए या नहीं बताना चाहिए।
मान लो
आप कोई सेवा करना चाहते
हो और दूसरा व्यक्ति
के पास ज्ञान
नहीं, आप ये सूचना दे सकते हो। यह है गोली।
कंप्यूटर जानता हूँ, यह जानता हूँ, यह
जानता हूँ और न भी प्राइड।
अगर आप केवल यह सूचना दे रहे
हो में यह योग्यता है और आप 22 यह
हरे कृष्ण महाराज जी 1 कोई लड़का है और उसका कोई भाई भी नहीं है। न बहन है, बस माँ है या फिर बाप है तो वो अपनी लाइफ को कृष्णा के फुल टाइम सेवा में कैसे दे सकता है? उसको बहुत सारे प्रॉब्लम्स आते रहेंगे। क्यूंकि वो अकेला है माँ बाप को भी माँ या बाप को संभालना तो वो कैसे दे सकता है?
हर सिचुएशन अलग होती है। यह ऐसी सिचुएशन है जहाँ की बेटा है। वो पूरा टाइम सेवा करना चाहता है। यह आज ब्रह्माचारी तो सेवा करें। आखिर हमारी सुरक्षा और भगवान करते हैं। हम सोते हैं वहाँ बेटा हमारी सुरक्षा करेगा, बैंक बाल सुरक्षा करेगा। सुरक्षा के कृषबानेकेपरअसल में कोई भी आपकी सुरक्षा नहीं कर सकता। केवल भगवान की छत होकर
केस इस लाइक दे डिफ्रेंट।
महाराज अगर घरवाले भक्ति नहीं कर रहे
हैं तो उनको यज्ञ करवाने के लिए कहना चाहिए था।
अगर घर वाले भक्ति नहीं कर रहे
तो यज्ञ करवाने चाहिए क्या उनको नाम से जोड़ो। इस कलयुग में सबसे उत्तम सेवा है नाम का उचारण। नाम के साथ जुड़ेंगे तो चे पर माजम
वो अगर नहीं कर रहे तो
आपको पर 4 करो नहीं करना चाहते फिर आप क्या कर सकते है?
यू कैन ट्राई वंस तो आइस ट्राइ
नहीं
तो यज्ञ उनको करवानी चाहिए, क्या नहीं करवाना चाहिए।
इस कलियुग में यज्ञ है ही राम
नाम का उचारण हर व्यक्ति कर सकता है।
हरिकृष्ण महाराज जी, थैंक यू फॉर द वंडरफुल लेक्चर। मेरा यह प्रश्न है की यदि कोई देवता के प्रति हमसे कुछ अपराध हो जाता है और डेमिको के प्रति तो हमें उस डेमिको सी माफी मांगनी चाहिए या कृष्ण से माफी मांगनी चाहिए।
अगर आप कृष्ण भक्ति कर रहे हो
तो उसके द्वारा देवता भी प्रसन्न है तो आपको किसी से माफी मांगने की जरूरत है।
आपको किसी से माफी मांगने की जरूरत नहीं है।
जी महाराज थैंक यू महाराज, हरी कृष्ण
गुरु महाराज प्रणाम महाराज। मेरा प्रश्न यह है की भक्ती में हमारा अक्सर उत्साह और धैर्य है, वो कम हो जाता है। और जब बक्तों के संघ में आते हैं और चैटिंग जापा अच्छा हो जाता है तो हमारा उत्साह वापस बढ़ जाता है। लेकिन यह उत्साह भक्ति में टिका नहीं रहता है। तो महाराज उत्साह को सेवा में हम कैसे लगा सकते है और मतलब उत्सव कैसे मेंटेन कर सकते।
प्रश्न यह है हमेशा उत्साद कैसे रहो?
येस महाराज,
हमेशा उत्साद कैसे रहोगे, सादा
भक्ती भक्ती हो, नियमों का पालन कर रहे हो तो आपका उत्साह हमेशा बचा जाएगा। अगर आप 1 दिन उत्साह उत्साह के जॉब करते हो, आप रांसी हो जाते हो, साधना कमजोर हो जाती है, आपका उत्साह कम हो जाएगा। सो दि, सलूशन बिस्टेर,
हरे कृष्ण महाराज जी, महाराज जी, इस श्लोक के अनुवाद में ऐसा लिखा है कि उदासीन मतलब जो न्यूटरल है उसको हम लोग वर्जित करना चाहिए। जस्ट anime और जो सिविृ्धहैमित्र है उसको हम अपने समान देखना चाहिए, जिसके अपने समान देखना चाहिए। आप ऐसा है तो हमको भी ऐसे सामान्य जीवन में ये पालन करना चाहिए। तो कैसे करना चाहिए?
सादा श्रोधारणजीवन में सबके प्रति मित्रता का भाव रखो
बनी। कहते हैं इन प्रकार के सम्बन्ध ने उनसे मिलो जो आपसे ज्यादा उत्तम है, आपके बराबर के भक्तों से मिलो और
जो आप 1
ज्ञानी है। जब आप उत्तम भक्तों को मिले तो
क्या भाव होना चाहिए?
संस्था क्यूंकि आपको कोई दिव्य ज्ञान प्राप्त होगा?
जब आप अपने सामान्य के व्यक्ति को
मिला, क्या भाव होना चाहिए,
मित्रता का भाव करत है।
हम 1 साथ मिलकर वार की सेवा में जुड़ते हैं और आपसे कम ज्ञान
के व्यक्ति से मिलो।
तो क्या होना चाहिए? दया या आप देख रहे कि भगवान क्या कह रहे हैं, भगवान ये कोशिश कर रहे हैं।
किसी न किसी रूप से उनके पिता
द्वारा ये सुना जाए क्या
एशिया की
कर रहे है, उसका भाव क्या है? वो पिता को कह रहे हैं।
चाहे दुश्मन में हो,
बताइए क्या उन्हें
पता था यह का क्या कारण है?
हमें यह नहीं सोचना कि वह इनका पता नहीं था। भगवान को भगवान संतरयामीहैजबकिशबाल देव ने देखा सब तैयारी कर रहे हैं। पता है इंद्र पर भगवान का ये उपदेश्य था इंद्र को विलम्ब बनाया जाए
और वो ये साबित करना चाहते थे
कि समाज में कृष्ण भक्ति करोगे सारे देवता जाते है
कृषमार आस्किंग इन इंग्लिश
मार
गोवरदलीलाबिससी mars is a lot govardhan love? i see lord indra sincery regrets is actions for to offence against the lord and again me se for the parijata flower, and then again lord indra fence krishna lord krishna s of course this are pastas lord indus position is very elevated position as sadka what should be e learning from this tropastamsmanag
god? and the lord is a the correct age
mragwani please generally we find some some students, there were shipping shiva or some other demigods सो how to deal with them like we the we should directly to say him no cristiana supreme
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