भगवान के अनेक अवतार क्यों होते हैं? | SB 07.15.27 | 01 Nov 2023 | NAVI MUMBAI |Gopal Krishna Goswami

Gopal Krishna Goswami discusses why God takes many avatars, using Krishna's pastimes and Bhagavad-Gita teachings to explain the guru-devotee relationship. The discourse covers how to know if your guru is pleased, maintain enthusiasm in service, and practice devotion through daily challenges.
Chapters
here a कृष्णा गला बैठा हुआ है, इसलिए मैंने कैसे नहीं किया और प्रयास करूंगा जोर से बोलने के लिए सुनाई दे रहा है। हरे कृष्णा पढ़ते हैं लोग ends to an nineteen sennbextenty seven
e शव भगवान साक्षा प्रधान पुरुष स्वर योगएश्वरवम्रआंग्रे लोकोयममन्नतेनरम भगवान शाक्षा प्रधान पुरुष स्वर योगेश्वर विम्रांग्रेलोकोयम मन्नते नरम एसव भगवान शाख्षाप्रधान पुरुष ऐश्वर योगज योग्श्वर विमरांगरिलोकोयममन्य ते नर इस व भगवान शाशा प्रधान पुरुष स्वर योगेश्वर विमरांगरे से दोकोयममन्यतेनर
भगवान शाक्षा
शाक्षा पुरुष स्वराधान पुरुष स्वरा युगेश्वर या रोगेश रुपया मनतेरा रुपया मानते नरा
सवय भगवान साक्षा वान साक्षा थाना पुरु श्वरापुरशेश्वरा स्वर दे 2 को मन तेनरोगोयममेतेनरा दाना पुरे श्वररापुरषेश्वरा मध्य से ना
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xेvजeजयहवे निस संदेह भगवान पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान साक्षात प्रत्यक्ष प्रधान प्रकृति के मुख्य कारण पुरुष पुरुष अवतार भगवान विष्णु का या समस्त जीवों का ईश्वर, परम नियंता योगेश्वर, बड़े बड़े साधु पुरुषों या योगियों द्वारा वि मृग्ञआंग्रि भगवान कृष्ण के चरणकमल जिनकी चेष्टा की जाती है। लोकहा सामान्य जन यह उनको मान्यता मानते हैं। नर मनुष्य अनुवाद तातपरिजडेससीवख्ति वेदांत स्वामी श्लप्रपाद महाराज द्वारा श्लप्रपादमहाराज की अनुवाद पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान कृष्ण अन्य समस्त जीवों के तथा भौतिक प्रकृति के स्वामी हैं। व्यास जैसे महरिशी उनके चरणकमलों की चेष्टा करते हैं और उन्हें पूछते हैं तो भी कुछ ऐसे मूर्ख हैं जो श्री कृष्ण को सामान्य मनुष्य मानते हैं। तात्पर्य गुरु को समझने के प्रसंग में श्री कृष्ण के पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान होने का उदाहरण उपयुक्त है। गुरु सेवक भगवान कहलाता है और कृष्ण सेव्य भगवान कहलाते हैं, जिनकी सेवा की जानी चाहिए। गुरु पूजक ईश हैं और भगवान कृष्ण पूज्य ईश है। गुरु और भगवान में यही अंतर है। दूसरी बात, जिस भगवत गीता में भगवान का उदेश्य है, वह बिना किसी हेर फेर के यथार्थ रूप में गुरु द्वारा प्रस्तुत किया गया है। अतएव परम सत्य गुरु में विद्यमान रहते हैं। श्लोक 26 में ज्ञान, दीप, दीप प्रद कहा गया है। पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान समुच्च विश्व को असली ज्ञान देते हैं और उनके प्रतिनिधि रूप में गुरु इस संदेश को सारे विश्व में ले जाता है। अतएव चरम पद पर गुरु तथा पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान में कोई अंतर नहीं होता। यदि कोई भगवान कृष्ण या रामचंद्र को सामान्य व्यक्ति मानता है तो इसका अर्थ यह नहीं होता कि भगवान सामान्य व्यक्ति बन गए हैं। इसी प्रकार पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान के प्रामाणिक प्रतिनिधि गुरु को यदि उसके परिवार के लोग सामान्य मनुष्य मानते हैं तो इसका अर्थ यह नहीं होता कि वो सामान्य मनुष्य बन गया है। गुरु भगवान के तुल्य है। अतएव जो आध्यात्मिक प्रगति करने में गंभीरता पूर्वक इच्छुक हों, उन्हें गुरु को इसी तरह मानना चाहिए। इस समझ में थोड़ा भी विचलन होने से शिक्षक के वैदिक, अध्ययन तथा तब में विनाश हो सकता है। श्लब्रोपाद महाराज की
यह सारे से सारे
हरे राम, राम, राम, राम मैं मैं
थोड़ी छोटी क्लास लूंगा में बैठा हुआ तो यहाँ इस अध्याय में मुनि शिक्षा है, भगवान है, मनी का विषय रहता है, वो है। भगवान की प्रशंसा। आपको सुनाई दे रहा है। वे इस लोक में क्या करे, न करे, पर भगवान है सब यूनियन के मालिक हैं जो जन हैं उनके वो भक्तों की रक्षा करते हैं और संत हैं उनके संदेश का सा है भगवान क्या कहते हैं करम भगवान साधारण व्यक्ति कहते हैं भगवान श्रधा भगवान गीत में क्या कहते हैं प्र दोनो ही है भगवान जब प्रकट होते हैं मारे जैसे प्रकट होते है नहीं और जो के साथ प्रकट होते हैं औ सजवा होता है कि इसे कैसे सजवा होता है। कारों के साथ 1 मनी भगवान पहनते हैं मनी उसका रंग हर सेकेंड बदल जाता है। वही भगवान प्रकट हुए माता पिता जेल मे कहा कृपा करके सदा बचे का रूप उनको कम्स की चिंता दी तुरंत रूप को सारा जैसा भगवान अपने आप को नेबसामेप्रकटरे सनदे प्रकट हुए आले पुरुष यहाँ भगवान मे मुनि भगवान जो है वो पूरे शिष्ट के स्वामी है व्यक्ति। यह सोचे ये कुमारी ने प्रयास है जो प्रकृति है किसके निसार है ह तो उनका भगवान हर कैसे हैं आलवेज मजूद बना लिए अनंत रूप आप जो हो आपके देह आत्मा में कोई अंतर नहीं और अपने आप को आनंद रूप में प्रकट करते हैं की तुलना कोई नहीं कर सकता। हमने जिन अफसरों का एवार्ड नाम किया भगवान मछली मची के रूप प्रकट हो जाता है। अधियम पुराना पुरुष आप जो हो पुराने पुरुष हो इसके लिए भगवान का 1 नाम है अली पुरुष और ता जूता का क्या करता है इन वेलेबल कोई गलती नहीं करता कोई व्यक्ति ये दावा नहीं कर सकता जूता है गलती नहीं करते। आज भी उनकी बुर गिरा पढ़ते इस रचना ने की थी हजारों साल पहले किताब हो इसमें इतना प्राचीन संदेश है पुराना पुरुष आप देख कैसे है मेरा दिव्य रूप रहता है। भगवान जी कहते हैं ईश्वर परम कृष्ण राधे राधे आप जो नेक ईश्वर हैं परमेश्वर है और वो यह सब चीज के कान पर ा मैं हिना मैं गोविंद भगवान की लीला है जैसे कि कार्ति का महीना है जे के महीने में बुझ सेवा कभी हजारों गुना लाभ होता है। 1 वाला की 1 प्राचीन मंदर था और में कोई मिली नहीं थी केवल रोल दिया जाता था तो 1 जुआ था रोज वह मंदर में आता था ई को चखने के लिए इस्तेमाल करते हो या 11 को कही ये चुआ और वो फंस गया में आ गई ने बड़ा प्रयास किया अपने आप को बचाने के लिए रुई में अपने आप को बचा नहीं सकता या भगवान ने स्वीकार किया यह नाच रहा था मेरे सामने चूहे को मुक्ति प्राप्त हुई यही प्रकट हुआ था। लीला वर्णन पुराना में है तो वो कर में थोड़ी भी लीला का लाभ मिल रहा है कार्की महीने भगवान की ने के लिए लाइन भी दी लीला रोज दे के महीने में वो सुनाई
है
बोल देना हम रिपीट कर रहे हैं महीने में है सेवक तो में क्या हैं दाम बदर दम भगवान बांधने गए थे हसी के साथ और भगवान को किसने बांधा की माँ ने दिवाली ला है दी थी दिवाली के दिन तो यसूलामासाकेपास घर में 9 लाख गायें थी जिनमें कि 20 गायें सुगंधे दूध देती थी। तो मार के ने ग्राम में ग्राम क्या है? जो आप के नाम के सामने चोर पोल या जाए। मैं क्या चोर हूँ, भगवान को जब चोर करते हो, वो आनंद उठाते हैं, आपको कोई आपके नाम के लिए जाएगा, आप गोद हो जाओगे। भगवान अनेक घरों से चुना देते हैं। और या शिकायत कर दी थी। इस बात से आपका बेटा हमारे घर में बेटा, आपके घर में क्यों चुराए? मेरे में कुछ कमी है, क्या? ठीक है, तुम को छुपाते है, ऊपर पहुंच नहीं सके। वो क्यों अंधेरे में भी वो चुरा लेता है। ऐसे उनके शरीर में है, प्रकाश से दिख जाता है, वान का है, ठीक है मैं उसके गे। फिर। वो कह देते हैं नहीं, नहीं, नहीं, वो सुन्दर दिखते है। तो वन जो गोपियां थीं, वो जाती थी स्नान करने के लिए। भगवान को पता था घर के बाहर निकलती है। तो भगवान योजना बनाई। वो उस गोपी के घर में गए, जाते, दीजिए जल्दी आ गए। भगवान तुम्हे पकड़ लिया। माँ हमेशा कहती है, क्या प्रमाण है। मेरा बेटा ने आपके घर चुनाया, आपको पकड़ लिया। व को आज से पकड़कर जा रही थी, भगवान ने क्या किया, 40 बड़े चापलूसी से अपना हाथ निकाल लिया, उनके बेटे का दाल दिया। वो पहचान नहीं पाये। तुम कैसे हो प्रमान राह देखो, आज मैं प्रमान रही हूँ। जब उसे दिखाने गई तो क्या कहीं? भगवान को पकड़ लिया। वो कैसे चोरी करने। भगवान को कोई पकड़ नहीं पाया। वो पड़ोस के फूल चुराते थे। तो आया था अमेरिका में, तो 1 दिन पकड़े गए। वो जो पड़ोसी कहते थे, ये फूल कहाँ घूम हो जाते हैं। वो चुप कर उनने बनायी, प्रावाद को पता लगा ये फूल चुराते हैं, पड़ोसियों को दुख हो। रा। प्रभा ने कहा चोरी करना है तो कृष्णा जैसे इसको कभी कोई पकड़ नहीं पाया, नहीं तो चोरी मत करो, नहीं तो चोरी मत करो। असली संदेश प्रभा, चोरी मत करो। पकड़े जा गए। तो वह भगवान की बोली लांक। गीत बना लिया था लीला। की के प्रकट होने से पहले ने। पवन ने छोड़ी मुनमेिलाकाप्रस्तुत किया। सोचे कौन है ये लड़का छोड़ी आयु में पूजा नगाबदकरदियाविश्व राशन दिया। तो इस मादा ने गीत बनाया था वन की सब लीलाओं का। और भगवान सो रहे थे। भगवान आ गए, देखा मादा याद नहीं है, रोने लगा, सुना बोला कर जाना पड़ा। तो भगवान की माता ने कहा कहते इसको सजा देनी चाहिए। मारूंगी। तो घर से वो चला जाएगा, उसे ऐसी ही सोचा हल्की सी जान, क्या उसे रसीले। तो माता ने पहले 1 बनने का प्रयास किया। और वो कितनी छोटी थी, इतनी छोटी थी, वो। 45 ोड़ासछोडिनतोउमली उमलीकाक्यार्ज हमारे हां चाय का है। 1 उगली भगवान को अगर समझना चाहते हो तो भगवान की कृपा से ही समझ सकते हो। भगवान के गुरु हो हमको ज्ञान देता है, जिसके द्वारा भगवान को समझ भगवान देख रहे थे। लीला। उनकी माँ में माँ प्रयास बांधने के लिए, पर सफलता नहीं प्राप्त हुई। तो माँ से सीना निकाल रहा था। भगवान ने दया किया मैंने बाल ने दिया ये जो लीला है, ये दाम लीला कहा जाता है। और जिला का उचारण करते हो। पर भगवान के आने के लिए लाये हैं। जैसे की कोर मनी गिव कुये के पुसगुजापुनेने शराब दिया था की तुम्हे तुम गे हो, सामने तुम्हे पढ़ लेता हूँ पेड़ बन जाओगे। पेड कहा में नहीं भगवान में और सौ वर्षों के प्रति आपको मेरा दर्शन प्राप्त हो गया। वह सौ वर्ष भगवान ने कहा था कि मेरा दर्शन प्राप्त हुआ। भगवान ने पुल को गिराया और 2 पेड़ो से क्या निकले तो। परम भगवान के यह नीला भगवान ही थे। बड़े पेड़ गिरे। तो उन्होंने भारी आवाज की। ओह भारी आवाज को सुधा भाषा रसोई में थी, उन्होंने सुन लिया तो भाग से भागे आए। 2 बड़े पेड़ जो उनके बगीचे में थे कि भगवान के मिश्र से पूछने लगे ये 2 पेड़ कैसे गिरे? तो इतने हवाई देखिया, गिराये वालों ने कहा नहीं, तुम्हारे बेटे ने ये 2 पेड़ गिराए और वो कहने लगे बेटा छोटा सा है 5 साल का, वो कैसे हैं 2 पेड़ को ब्याज जरूर मेरे पति ने रोक दिया होगा। भगवान की सोमासानेस्वीकार नहीं किया, अगर उन्हें पता होता भगवान है में आधा है। और हम भक्तों को यालौजाहोजा तो आज किस लोक में कहा जा रहा है। पर हम भगवान कौन है? हर चीज के स्वामी, हम प्रभाव वन जो है हर चीज के स्वामी है, वैश्नमभक्तहैं वो स्वीकार करते हैं। पर भगवान हर चीज के स्वामी हैं। हमने ही का उपयोग कर किया की सेवा में। अगर आपके पास कोई कला है, उस कला का उपयोग करो। भगवान की सेवा में, धन है, उसका उपयोग करो भगवान की सेवा में। तो इस रोग में कहा जा रहा है। बर भगवान जो हैं हम उस चीज के स्वामी है। यह मत सूचिएगा कि देवता देवी के कारण है। नाम अपराधों में 1 अपराध है यह समझना कि परम भगवान देवता स्टार खुश देवता है, वो भी स्वीकार करते हैं भगवान। ऐसे आर्थिक महीने में भगवान की गोदा लीला, गोद लीला क्या है। संक्षेप में भगवान ने कस रक्षा के से उसने देखा कि नमाज और उनके 1 दूसरे काम के वाक्य उन्हे सालाना कर दिया है। ओ ने सोचा उनको सजा दी जाए। कैसे जी के साथ बारिश बढ़ी थी। 1 पानी 1 बून भूल भारी था और जो बृजवासी के चेहरे को देख रहे थे और वो घबराए थे, इन बारिश बढ़ रही थी को डाउन हो जाए तो विवासी माने और उन्हें चिंता थी हम डूब जाएंगे, भगवान प्रकट हो और 1 पहाड़ गोवरधन को उठा, यह गोवरधन हैं। उस समय इतना लंबा था, पूछा था कि उसकी चोटी आकाश आज आप गोरदन देखो। भगवान के समय गोवरदानप्रवल था आकाश और भगवान ने 7 दिन के लिए उठाया, 1 और बृजवासी 7 दिन के लिए भगवान के चेहरे को देख रहे थे। और बोलना तो भूख लगी आप प्यास लगे ने पहाड़ गिर जाए घबराओ मत ये पहाड़ नहीं गिरेगा। फिर जब सा दिन किया उसके मूड पर ने खोल नीचे ले आए और ये लीला का भी गाली के महीने मे सी के महीने में प्रवाद प्रगट हुए, प्रकट हुए, 2 दिन के बाद हर गया। लीला प्राप भग से, वो भी कार्ति के महीने में कार्तिक महीने में प्रयास करते हैं। अपनी सेवा बढ़ाने के लिए आप सेवा कैसे बढ़ा सकते है? बला का बढ़ा सकते है। अगर आप अध्ययन करते हो, गृंधाअध्ययनकर सकते हो, अगर आप जान जान लेते हो, उसको बढ़ा सकते हो। राज्य सिंह के महीने में आपको भगवान की कृपा प्राप्त होती है। तो इस लोक में कहा जा रहा है पर भगवान जो देवी है और उन्हें समझ गुरु की जो है, गुरु सेवक है। भगवान सेवक गुरु का क्या सन्देश में वान का ज्ञान देते हैं। चाहे वो गारी हो, अच्छा है। वो तो 1 ही भाव रहता है। गुरु है, उसके महिमा वन है। ये शुद्ध गुरु पर के समान, जिसके में इसी प्रकार का दोष नहीं, वो 24 घंटे जुड़ा है। वान गुरु है, कौन है। वो 1 पोसफैन है। पोसे क्या करता है, आपकी चिट्ठी को पचाता है। आजकल तो ईमेल आ गया है, काम कम हो गया है तो क्या करता है। संदेश यह नहीं गुरु को वो इसी प्रकार का भौतिक लाभ की इच्छा है। वो असली गुरु वो है, सेवा करता है, समभाव से वा का उपदेश देता है। और जो गुरु है वो भगवान के संदेश को पाता है। बस तो मन ने प्रा ने 1 और कार है। जो किया जाता है वो है क्या है।
वो
पूना में उधारण के लिए जानी शुरू हो गई है। सा क्या है ने ना ैंसनमरसान शुरू हो गया है। इस साल प्रयास किया जा रहा है। 1 मास में जोन करना आप सब मजा हुई है। और पिछले साल भी आप जुड़े थे पर भक्तो 2 मेजोन करना 1 जान। यह मनदरसममापकरनेगा गंधा को मारने गया तो निर्माण में सहयोग देना चाहिए। ऐसे कि इनमे किया 22 है। अब तक हम अंदर करो कोई सम्भव होगा। आप सब परिश्रम करो या करो तो करोगे पिछले साल भक्त ने कितने ग्रंथ बाटे हैं। ये साला आप कितना लाख 1 लाख की योजना बनाई है। तो प्रयास करोगे। तो भगवान सहयोग देंगे गो है। जो वान किन का सहयोग देते हैं, उसे हम प्रयास है। अब सब जुड़े और उत्साह के साथ की। हम भगवान की सेवा के लिए उत्साहित रहते हैं। बाबा जी कहते थे कि मेरे ग्रंथ हैं। किसान के उत्साह के कारण 1 बार मैंने भरा योजना बंद किया था में 1 महीने का किताब नहीं बिकी में यह कहा। उन्होंने कहा गतामेबिखरीहैगउस्साह दुकान में कोई नहीं होता तो जो भी हमारी सेवाएं सोल सेवा हो झाडू मारने की हमें साथ करना चाहे। आप किसी कार्य कर हो वान की प्रशंसा के लिए तो सब प्रयास करो। हम सोचते हैं। कई बार हम सबके पास तो चले गये। आप कहाँ जायेंगे साल जितनी जान बचा थी सबको हमने अप्रोच कर लिया है। आप आश्चर्य होंगे, सादा से प्रयास कर रहे हो तो भगवान आपको खुली देंगे ग प्रयास करते हो। हमें इन गंथों को बाटना है और साथ में पढ़ना भी है। see i do no o को बैठा
हरे कृष्ण, महाराज, थैंक, यू सो, मच, फॉर, नाइस, क्लास, महाराज। 1 मन में प्रश्न रात महाराज की सभी शिष्य चाहते हैं अपने गुरु को खुश करना और यथाशक्ति प्रयास भी करते हैं। बट आज के जो स्कोर सिनारियो में हम देखते हैं कि गुरु इतने व्यस्त रहते हैं कि पर्सनली मिलना और उनसे पूछना कि क्या वो सेवा से खुश है या जानना थोड़ा मुश्किल हो जाता है तो कैसे किस से जान सकता है कि उसका जो प्रयास है उससे वो गुरु खुश हो रहे है कि
नहीं हो रहे गुरुकी थोड़ा मराज जरूर करना मंदिर में बैठकर तो ज्यादा अच्छा
है
न हो waporwababoiste कहते हैं कहते है गुरु है उनकी वाणी द्वारा उनके साथ हूँ
अरे किशन महाराज महाराज जब डिफिकल्ट सिचुएशन आता है तो हमारा मन काफी विचलित हो जाता है तो उस समय अपने मन को कंट्रोल करके भगवान में फोकस करने के लिए हमें क्या
करना चाहिए
हम हमारे सुख रहे ा न करना पड़ता है और कठिन सिटी में हम मां का ही करे की हमे जान बुझकर कठिन सीडी बनानी है और ये है welcome bedaoवelकmwedavelcm ये दिल्ली से आये है
अरे कृष्ण महाराज, अरे कृष्ण महाराज चरणों में प्रणाम महाराज हमारा जो गुस्सा है पुस्तक वितरण हुआ है बाकी सेवा में, विशेष पुस्तक वितरण में उत्साह कभी कभी थोड़ा कम हो जाता है, जो गुस्सा है मतलब कंटिन्यूस नहीं रहता है तो जो उत्साह कंटिन्यूस रखने के लिए तो विशेष क्या करना पड़ेगा
सर कंटिन्यूस ली
ग
पर गोपाल के महाराज की
माले, हाल राम, रामा, रे, रे।
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