भगवान राम की दिव्य लीलाएं | SB 09.10.53 | Apr 2006 | Juhu | Srila Gopal Krishna Goswami

यह हिन्दी व्याख्यान श्रीमद भागवत के दो अध्यायों पर आधारित है, जिसमें शुकदेव स्वामी द्वारा संक्षिप्त रूप में भगवान राम के प्रमुख लीलाओं का वर्णन किया गया है। वक्ता रामराज्य की परिपूर्णता – जहाँ शारीरिक व मानसिक कष्ट, रोग, वृद्धावस्था और मृत्यु का अभाव था – को उजागर करता है, फिर सीता के स्वयंवर में शिव के धनुष को तोड़ने की घटना, राम का पिता दशरथ के आदेश पर 14 वर्ष का वनवास, सीता के साथ वन में त्याग, समुद्र को उकसाकर लंका तक पहुँचने की कथा, रावण के साथ युद्ध और विजय, तथा अंत में राम के शासन में प्रजा के सर्वांगीण कल्याण का विवरण देता है। व्याख्यान में भक्ति के सर्वोत्तम मार्ग के रूप में राम के चरणों में सेवा, वैकुंठ (परम सुख) की अवधारणा, और साधु-संगत के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है। वक्ता इन घटनाओं को आध्यात्मिक संदेश के साथ जोड़ते हुए श्रोताओं को आध्यात्मिक जीवन की ओर प्रेरित करता है।
Chapters
हाई कृष्णा, तो नो वे स्कंद में संक्षेप रूप में भगवान राम की लीला का वर्णन है। श्रीमद भागवत, नदी, व्यादी, जरा, गला, दूर, शोगा वया, कलमा, मृत्यु चली से जन लोक अनुवाद इस प्रकार ऐसी है। जब भगवान रामचन्द्र इस जगत के राजा थे तो सारे शरीरिक, शरीरिक तथा मानसिक, कष्ट, रोग, बुड़ापा, बिछो, पछता, 2 दाल तथा तथावत का नाम निशाना न था, यहाँ तक कि न जाने वालों के लिए मृत्यु होती थी। दूसरे शब्दों में, जब राम राज्य होता था, इस पृथ्वी पर, तो शारीरिक कष्ट में नहीं और मानसिक कष्ट में न। साथ में। कहा जा रहा है, क्या रोब नहीं। मतलब की कोई डॉक्टर नहीं थे, हॉस्पिटल नहीं, हॉस्पिटल है, या उस समय कोई रोग नहीं, रोग नहीं हो तो हॉस्पिटल की आवश्यकता पड़ेगी नहीं, बुरा बन भी नहीं। मतलब की सदा जवान कोई कोई बिचो पष्टता, फिर दुख। पर भगवान के शासन के समय कोई दुःख नहीं था, कोई थकावतभी नहीं, इन चीजों का नाम निशान भी था, ये नहीं की 90 प्रतिशत के पास नहीं था और 12 के पास था। तो राम राज्य की चर्चा लोग आज भी करते हैं। भगवान राम स्वयं भगवान हैं। भागवत में शुकदेव स्वामी जी ने कहा की अनादि काल से अनेक संतों ने भगवान राम की लीला का वर्णन किया है। इसलिए मैं केवल संक्षेप रूप में ही इसे प्रस्तुत करूँगा। संक्षेप रूप। तो। इसलिए हे राम, कथा इतनी बढ़ी है। और ने इसकी रचना की। श्रीमद भागवत में केवल 2 अध्याय है, जहाँ के शुकदेव को संक्षेप रूप में भगवान राम की लीलाओं का वर्णन करते हैं। तो भगवान राम कब प्रकट हुए थे, 10 शब्दों में प्रकट हुए थे। लगभग 20 लाख साल पूर्व भगवान राम प्रकट हुए थे। अपने 3 भाइयों के साथ। क्या क्या थे, उनके नाम लक्ष्मण, भरत और बाबा जी इसकी तार में कहते हैं। ये हैं विष्णु तत्व जीवत, नहीं तो विष्णु तत्व जीव। तत्व में क्या अंतर है? तत्व का अर्थ है जब भगवान स्वयं अपने आप को प्रकट करते हैं और जब वो प्रकट होते हैं, किसी प्रकार से मौलिक प्रगति के प्रभाव में नहीं आते। भगवान राम ने भी अदभुत लीला प्रकट की भागवत मे। इसका वर्णन संक्षेप रूप नहीं है। जैसे कि जब सीता के पति चुनने का समय था तो कई राजकुमार आये थे। सीता को पत्नी के रूप में स्वीकार करने के लिए। क्या आवश्यक था की 1 बहुत भारी धनुष था शिव जी का धनुष, जिसे उठाने के लिए 300 व्यक्तियों की आवश्यकता थी। कितने भगवान राम ने जब तोड़ना था, जैसे हाथी के को तोड़ा, वैसे उन्होंने थोड़ा की 3 पत्नियां थी और जिनमे 1 पत्नी। कई ने 1 समय शरद का सहयोग दिया था। 1 कठिन परिस्थिति में, जिसके कारण शरद ने कहा था की मां को मेरे से क्या मांगना चाहते हो, तुमने मुझे कठिन स्थिति में सहयोग दिया है? क्या मैं कर सकता हूँ? आपके लिए थी। उसने कहा की इस वक्त मुझे कुछ नहीं चाहिए, पर ठीक समय पर आ से मांगो और 10 क्या चाहते थे की उनके बेटे का राजा अभिषेक किया जाए, तो समय की बड़ी और भगवान की इच्छा क्या थी? वजह मेरे पुत्र को उसका राजा भी किया जाए। तो गए कहा? और कहने लगी? तुम्हें याद है न कि तुम ने मुझे वादा किया था, जो मैं माँगूंगी वो पूरा करोगे। तो आज मैं आप से कुछ मांगना चाहती हूँ। पहले ये बताइए की इच्छा पूरी करोगे। सुदर्श भागो क्या मांगना चाहते हो तो कहीं कहीं आप अपने बेटे को, राम को वनवास में भेज, 212 साल के लिए नहीं, 14 सालों के लिए। और उसकी वजह मेरे पुतलों को उसका राजा अभिषेक होना चाहिए, राज्य का शासन उन्हें देना चाहिए। शरद ने वचन दिया हुआ था कि जो के मांगेगी वो पूरा करेंगे। तो हालांकि उनकी इच्छा नहीं थी। मजबूरन उन्हें कहना पड़ा किससे भगवान से जाओ। जंगल में। तो यहाँ भगवान ने अपने त्याग या प्राज्ञा की भावना की। भगवान राम ने पिता के आदेश को स्वीकार करके गए जंगल के जंगल की ओर जाने की तैयारी की। वो तो अकेले जाने को तैयार थे और मैं भी आपके साथ चलूंगी भाग। राम ने कहा तुम तो राजकुमारी हो, महलों में पली हो, जिंदगी भर। तुम कहाँ जंगल का खर्च। भुगत। सकोगे ने कहा नहीं, पत्नी के रूप में मेरा कर्तव्य है, आपके साथ चलूँ। और फिर भारी लक्षण भी साथ में गए। कई बहुत होशियार थी। उसने केवल यह नहीं कहा की राम की वजह भारत को राजा बना। उसने कहा उनको जंगल में भेजो 14 सालों के लिए दूर क्यूँ की। उसे भय था कि अगर भारत का शासन हो, राम भी अयोध्या में ही है तो किसी से भी अंगरेजी में। कहते है कूदता हो सकता। और रामचंद्र जी ने थुरंतिस्वीकार कर लिया। तो रावण ने असली सीता नहीं मा या सीता को कोई छू नहीं सकता। जब समय आया श्रीलंका जाने के लिए। भगवान गए समुन्द्र के तट पर 3 दिन के लिए। वहाँ रुके और समुन्द्र ने उन्हें कुछ आदर नहीं दिया, न ही सेवा की भावना पकड़ की। जब 3 दिन बीत गए और समुद्र ने किसी प्रकार से सेवा की भावना भी पकड़ नहीं की। तो भगवान ने अपने क्रोधित नेत्रों से देखा समुन्द्र की ओर और समुन्द्र ने वो नेत्रों के क्रोध की गर्मी को मसूस किया। सारी यूनियन जो थी, सब काँपने लग गई। समझ गया कि स्वयं भगवान है और हमें इनके आदेश को पूरा करना है। भगवान ने अपनी सेना के साथ क्या किया, श्रीलंका जाने की योजना बनाई। जब भगवान राम अपनी सेना के साथ जाते थे, कहा श्रीलंका राम उनसे लड़ने के लिए, यह सीट को वापस लाने के लिए। तो भगवान राम की सेना में केहू 2 व्यक्ति थे, जिनमें न चलाने की भी शक्ति थी। कौन में राम की सबसे ब की सेना थी। यहाँ से भगवान ने अपनी जब बाहर की चोटियों को पदों फेका था। तो ये डूबने की वजह अब भगवान के लिए क्या कोई कार्य असम्भव है? रावण के कितने शेर थे? रावन का अर्थ क्या है? जो दूसरों को रुलाता है? हम सब का परिचय है कि रावन दुष्ट आक्षस। भगवान के भक्त तुम ने कहा कि अगर हमें जन्म ग्रहण करना है तो किसी राक्षस से दुष्ट व्यक्ति का 2 और सदा हम भगवान की संगत में रहे। तो जब भारत को सूचना पहुंची की भगवान राम लौट रहे हैं तो भारत अपने मंत्रियों के साथ और पूरी योध्या की प्रजा उनका वागत करने गए और भारत का चरित्र देखो आचरन देखो। 14 सालों के लिए ने जो शासन किया भगवान राम के खड़ाऊं को सिरसा में बिठाया था मतलब की उनके के और खाने के लिए क्या खा रहे थे जो तो राम राज्य के समय भागवत के अनेक लोकों में बताया जाता है की भगवान राम पूरी प्रजा को अभी उला, समान बच्चे जैसे पाल रहे थे और पुरी जो प्रजा हैं भगवान राम को पिता के रूप में स्वीकार कर रहे थे और इसलिए समाज में कुछ कष्ट नहीं न मानसिक न शरीर, हालांकि यह राम राज्य बीता था, थे युग में जो सुख था प्रजा का, उसकी तुलना कर सकते हो सतियों के सुख के साथ सतियों के समान सुख व्यक्ति भुगत रहे। राम राज्य के समय। तो अगर आप शरीरिक और मानसिक कष्टों से बचना चाहते हो, अगर आप इन क्लेशों से बचना चाहते हो, अगर आप इन क्लेशों का नाम निशाना नहीं देखना चाहते और अगर आप मृत्यु से भी बचना चाहते हो। उपाय है की आप 1 अध्यात्मिक देश कर करो। इस समय जो आपका देह है यह भौतिक है तो भौतिक भे है आपको रुलाएगा कर्ज देगा और भगवान कहते है की मेरे धाम में लौटो वैकुनतावैकुनता का अर्थ है यहाँ की कोई कष्ट भोगा नहीं पड़े और भगवान कहते है कहाँ लौटो वैकु धान में लौटो। जैसे ने कहा है के भगवान ने पूरी शक्ति डाली है। इन नामों में तो हमें इन नामों का उच्चारण करना चाहिए। तो श्रीमद भागवत के द्वारा हमें यह सन्देश प्राप्त होता क्या की सबसे उत्तम भक्ति क्या है? भगवान के चरणों में, सेवा में जोड़ना साधु संगत द्वारा हमें यह प्रेरणा मिलती है की हम स मार्ट में जुड़े रहे। इसलिए शास्त्र में कहा गया क्या साधु साधु संग, सारे शास्त्र का निर्णय क्या है साधु संग का लाभ रामा, रामा, रे, रे।
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