भागवत अवतरण कथा || SB 1.02.06 || 02.01.2018 || Luknow Golf City ||Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja

Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja discusses how reciting Bhagavata verses overcomes ignorance and illusion. Through japa, selfless service, and listening to scripture, devotees cultivate true love and inner peace while balancing worldly duties with spiritual practice.
Chapters
का मारमोक omg catania manesabta yeh पूणसmपरध प्रिय यादमंसुपरसीदेदी यह भागवत के प्रसि श्लोकों में 1 माना जाता है। और पापा जी ने अनेक समय इस श्लोक का उपयोग किया और इस पर उपदेश दिया। इस समय हम भागवतम के पतन दूसरा ध्यान पढ़ रहे हैं और इस अध्याय का हर शलोक का बड़ा घेरा उद्देश है। वैसे तो पूरा भागवतम चीनी जैसा मीठा गन्ने को आप ऊपर से चबाओ या नीचे से मीठा पन मसूस होगा। जब कई लोग ज्यादा मीठे हैं, दूसरों से ये लोग का उच्चारन कर रहे हैं। सूतरगसामेपरे्मा विश्व के सम्राज थे और राजा भी थे और रिशी भी थे। प्राचीन समय में शासन किया जाता था राज दस्यु के द्वारा, आज के समान ने आज सब राजा बनना चाहते हैं। राजा के गुण ना तो राज, आज ऋषि पूरी प्रजा को अपनी मुलाहजा से मानते थे। जैसे आज हम खासकर के भारत में रामराज्य का स्मरन करते हैं। क्यूँ? 1 कारण यह है जो भगवान राम का शासन इतना सुन्दर था, पूरी प्रजा को अपनी गुलाल के समान मानते थे और हर प्रकार की आवश्यकता खराब थी। और उस युग में लोगों को छूट दी गई थी। वो खुद चुन सकते थे, उनकी मृत्यु का समय सब चुन लेते थे, तो फे्रम जंगल में थे और उन्हें प्यास लगी प्यास लगी तो देख रहे थे कहाँ पानी प्राप्त होगा सामने, उन्हें उन्हें 1 कुटिया दिखी, थोड़ी रोशनी प्रकाश प्राप्त हुआ। कुटिया के द्वारा, उन्होंने समझ लिया कोई होगा उस कुटिया में, इसलिए थोड़ी रोशनी है कुटिया के दर 1 सन था जो कि चिंतन में जुड़ा हुआ था। और जब राजा ने उस कुटिया में प्रवेश किया तो उस संतान की तरफ देखा ही नहीं। वैसे तो कहा गया है दुश्मन भी अगर आपके घर में आए, उसका स्वागत होना चाहिए। सबसे बेहतर तरीका है बिठाओ आदित्य को। ऑपरेशारखिलाओपापाजी की ये इच्छा थी कि हर व्यक्ति जो इस के मंदर में आए उसे प्रसाद खिलाया जाए और गर प्रसाद नहीं खिला सकते, जल्द दीजिए जल, विनी दे सकते हैं तो कम से कम बैठने का स्थान लीजिए और मीठे शब्दों से स्वागत कीजिए आप किसी के न जाते हो, वो मीठे रूप से चर्चा करे मन प्रसन्न हो जाता है और कोई कड़वी रूप से बात करें तो फिर वन जाने का दिल नहीं करता। तो समीगररशीनेराजा की तरफ देखा ही। हालांकि पर ज रिशी थे पर राजा भी थे और सत्या खून था उनमें उन्होंने इसका बड़ा अपमान महसूस किया। और जब वो कुटिया छोड़कर जा रहे थे उन्हें 1 मरा हुआ शाम देखा तो उन्होंने गुस्से में शाम को उठाकर संघ के गले में हार के रूप में चढ़ा दिया। राज सिगरी बेटा भार खेल रहा था मित्रों के साथ, जब उसने देखा कि राजा कुटिया से निकलकर तेजी से चल कर जा रहा है तो उसमें जर्जिकीआसा हुई जा के पिता से पूछूं राजा ने क्या वर्ताव जब वो अंदर आया देखने के लिए, पिता से पूछने के लिए। उसने देखा पिता तो चिंतन में बैठे हैं, बड़ी गंभीरता के साथ, उनके गले में है क्या क्या मा तो वो समझ गए। इसका कारण राजा होगा और राजा के पीछे भागा। कहा? तुम्हारी ये हिम्मत संत इस प्रकार अपमान करते हो। मैं तुम्हें श्राप देता हूँ कि साधन के पश्चात तुम्हारा अंत आ जाएगा। अगर चाहते तो शाह का विरोध कर सकते थे। आखिर जब माता के गढ में थे और सताव बरमसर छोड़ा था, बरस 1 बड़ा सोफिष्ट के लिए हथियार है मानो 1 इस कमरे में 50 हजार बैठे हैं। आप व्यक्ति स्टेडियम में, और आपका टारगेट है। आपका निशाना है चौथा व्यक्ति, दाने तरह उस चौथे व्यक्ति को, मारेगा पांचवे को नहीं, साल से नहीं। आज की सी बॉल फेंक, 21 साल में, गिरदा, दूसरे साल में कई बार। 2 दांत स्पताल में ने छोड़ा था, इस उद्देश्य के साथ कि परेक्गर्भबद हो जाए। और भगवान ने विस्तार करके परीक्षित की सुरक्षा की या परीक्षित। मनाज माता के घर में थे। 1 पल के लिए उन्हें भगवान का दर्शन प्राप्त हुआ। और उस दर्शन में ऐसा आनंद अनुभव हुआ कि जिंदगी भर जभी वो किसी के चेहरे को देखते थे। ये देखते थे। ये चेहरा उसे मिलता जुलता तो नहीं है जो उन्होंने देखा था माता के घर में, इसलिए उनका नाम है ब्रेक का अर्थ है जो खोज रहा है। तो ब्रेक शेर जब सूचना मिली आप की जिंदगी में 7 दिन बच गए हैं। हमें इस प्रकार की सूचना मिलती है। हम घबरा जाते है, न को घबराए नहीं। उन्होंने सोचा कि संसार से छुटकारा प्राप्त करने का अच्छा अवसर है। तो उन्होंने संत ने मंत्र दिया। आज कल आप लोग एसएमएस इस्तेमाल करते हो? एसएम हमारे मंदर में एसएमएस की सुविधाएं 1 मिनट में 20 हजार देश पहुँच जाता। लगता है कि उन में एसएमएस से भी ज्यादा तेज सुविधा थी। ये मिनटों में हजारों साल परेक्श्रमराज के निमंत्रण पर उपस्थित हो विंडो में। और सब से उन्होंने 1 प्रश्न पूछा कि आधार प्रश्न जिस व्यक्ति कांत आने वाला है, उसे क्या करना चाहिए? और उन्होंने शिगरेगुस्वामी की। राय मे शुकदेव शुकदेव स्वामी ने क्या कहा कि आपने आपको कृष्णा के समन में ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। कृष्णा कथा सुननी चाहिए। तो जब शुकदेव स्वामी बिहार से बोल सुदेव स्वामी शुरू से ही आत्म ज्ञानी थे। पंद्रह साल 16 साल माता के गर्भ में रहे। माता के गर्भ से बाहर आने को इनकार कर रहे थे। वो चाहते नहीं थे। किसी प्रकार से भौतिक मातमान का प्रभाव पड़े। उन पर व्यास देव ने भगवान से निवेदन किया। आप ही मेरे बेटे को, बेटे को यकीन नहीं लायेंगे कि माया का प्रभाव नहीं पड़ेगा। और भगवान के कहने पर स्वामी निकले माता के गर्भ से और निकलते ही तुरंत ही। 1 परदे के घर में नही बैठे तुरंत ही घर से निकल गए और मांगा मनन करते गये और अलग थानों की यात्रा करते गए। तो शुगर स्वामी ने यह भाग दम का उच्चारन किया था, क्योंकि उन्होंने अपने पिता के द्वारा प्राप्त किया था। और उस सभा में हजारों संत उपस्थित थे, जिनमें 1 थे। सूत को साम उसके पश्चात नमश्रान्या में 1 सभा हो रही थी। नाली कहा से नमश्रानिया में आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा होती है। और जगस्वामी और भक्तों ने सूत स्वामी को चुना मार्ग दर्शन देने के लिए स्वामी में क्या योग्यता थी। 1 बार भागवत सुनने से पूरा भगत कॉन्टेस्ट कर लिया, 18 हज़ार लोग 1 बार सुनने से कंटेस्ट कर लिए। अंदाजा लगाओ का कोई व्यक्ति 1 बार सुनने से कंटेस्ट कर ले, उसे क्या कहते हैं। रतिधर जैसे जब केशर कश्मीरी गंगा की प्रशंसा करते हुए सौस लोगों का उचारन किया, वायु की तेजी के साथ वहाँ प्रभु ने 1 बार सुनने से ही पूरे सौ लोगों को खं्डरकरलिया सूतागसवामीनेतो, 18 हजार को 1 बार सुनने से ही ट्रेस कर लिया। तो न शाने में संतों ने अनेक प्रश्न पूछे थे और सूदरगुस्वामी ने उत्तर के रूप में पूरा भागवतम सुना दिया। इसलिए जब आप भागवतम पढ़ते हो, कई स्थानों में पड़ोगे सूका। वचा तो कई साल में पड़ोगे सूतावचाआजकसलोग का उचारण सूत को स्वामी करने हैं। वैसे तो व्यासदेव ने सारे वैदिक शासन की रचना की थी, उनके सार को प्रस्तुत किया था विधान सूत्रा में। और इन सब रचनाओं के पश्चात भी उन्हें ऐसा है। उन्हें ऐसा लगा मेरी रचना में कुछ कमी रह गई है। और जब वो खोजते थे, क्या कमी रह गई है। मेरी रचना में। वहाँ पहुँचे कौन कौन पहुंच गए, जिन्होंने कहा कि तुम्हारी रचनाये सुंदर है, पर उनमें कर्माकरण का भी प्रभाव है। केवल शुद्ध भक्ति के ऊपर ग्रंथ की रचना करो। इसके पश्चात उन्होंने हमें श्रीमद भगवत, हमले निगाम कल, भग, रोड, गलिधमपलजोंकि, पूरे, विर्क साहित्य का सबसे क्या है पकावा फल और हमारा भाग्य क्या है? 1 पक्के फल को आप पेड़ की चोटी से फेंकोगे तो जब नीचे पहुंचेगा तो टुकड़े टुकड़े हो जाएंगे और यही फल अगर नीचे अलग अलग व्यक्तियों द्वारा पहुंचाया जाए तो ऐसा रूप पहुँच जाएगा तो हमारा सौभाग्य है। यहाँ में शीत भागोतम का ज्ञान परंपरा द्वारा प्राप्त हो रहा है। अंदाजा लगाओ छटेसकरमेंहैआजमिल की कथा ये घटना बीती थी कोई 7, 8000 साल पूर्व। आज उसी घटना का ज्ञान आप भगत के अध्ययन द्वारा आप कर सकते हो। प्रभाजी ने कहा था भागवत का अध्ययन विश्व की शांति के लिए है। तो सूतगरसौवीक्या करें संपूर्ण मानव के लिए। परम धर्म वही है जिसके द्वारा सारे मनुष्य भी भगवान की प्रेम भक्ति प्राप्त कर सके। ऐसी भक्ति आकरण तथा खंड होनी तो धर्म क्या है? धर्म है हम सब का कर्तव्य। जैसे पानी का धर्म क्या है, लिक्विडिटी, चीनी का धर्म क्या है, उसी प्रकार राबा के शब्दों में हम पूरे मानवता का धर्म हैं। हई तु की, सेवा है तु की। और यह सेवा आकरण ज्यादा होनी चाहिए। वैसे तो आप भगवान की सेवा में सकाम भाव से भी जुड़ सकते हो और आप कह सकते हो सातवें अध्याय में भगवान कहते हैं न धन चाहिए तो मेरे पास आओ, दुखी हो तो मेरे पास आओ, रोगी हो तो मेरे पास आओ और ज्ञानी है तो भी मेरे पास आओ। तो आप कह सकते हो। पर भगवान ने खुद ही तो कहा है हमें इन 4 बड़ी थिति में मेरे सामने आओ। हाँ बहाने भी कहते हैं। इंचारा में सबसे उत्तम वो है जो ज्ञान के आधार पर मेरा तो निसकामभावसाकाअभाव ता में 1 श्लोक है। इस प्रकार का कृष्ण भक्त निस्काम आता। व शांता मुक्ति मुक्ति सिधिका में सरकारी शांता जो कि निष्काम भाव से जुड़ते हैं, भगवान की सेवा में हो सदा शांत रहते हैं, जो कि इच्छाओं के साथ भुक्ति मुक्ति होती चाहिए। योगिक सिद्धियां चाहिए। भगवान कर 1 बनना चाहते हैं। सदा शांत रहे। तो धरम को आप भगवान की शरण अनेक इच्छाओं के अनुसार स्वीकार कर सकते हो। सबसे उत्तम है शुद्ध भक्ति और इसके विषय में सतगुर कहते हैं आ जाता अगर आप निष्काम भाव से जुड़ोगे तो उसका उत्तम लाल है। और आगे क्या कहते हैं नीचे और इसके द्वारा प्रेम से प्रेम प्राप्त होगा। तो आप कहोगे? ये तो बहुत ऊंचा लक्ष है। यह लक्ष आकर खंड और भक्ति के मार्ग में इतनी शक्ति है। चाहे अब किसी भाव से गुजर हो। अब अंत में अशुभ विचारों को त्याग दोगे। उदाहरण दिया जाता है। कई बार धरमराज का उनकी सौतेली माँ ने उन्हें रोका था। पिता की गोद में बैठने से सौतेली माँ ने कहा, जब तुम्हारा भाग्य होगा, मेरे घर से जन्म हो, या तुम पिता की गोद में बैठ सके। दूसे शब्दों में उन्होंने कहा तो मरो श्री यागो मेरी कृपा भगवान की कृपा होगी, मेरे घर से जन्म होगा ने बड़ा अखबार महसूस किया और माँ से पूछा, कौन मेरी मदद कर सकता है? माँ ने कहा, मैं तो नहीं कर सकती, भगवान कर सकते हैं। 2 ने तपस्या आरंभ की थी, इस उद्देश्य के साथ कि उन्हें राज्य प्राप्त हो। सबसे प्रसिद्ध। और जब भगवान का दर्शन प्राप्त हुआ, तपस्या के कारण। भगवान ने पूछा, आप क्या चाहिए? भागा जोर चाहिए ने कहा, अगर, आप मुझे कुछ देना चाहते। उन्होंने कहा, मैं निकला था, घर से, मैं निकला था, घर से टूटे, शीषा की खोज में, पर मुझे हरा प्राप्त हो गया है। ये हैं शुद्ध भक्ति, ये जो बहुतिक सुख, बहुतिक सुविधाएं, जिनके हम इच्छुक रहते हैं। इनकी तुलना की जाती है टूटे शीशों के साथ और भक्ति की तुलना की जाती है। असली सोने के साथ। और भक्ति के मार्ग में जितना प्रयास करोगे, उसी प्रकार का लाभ मिलेगा। अब पूरे श्रीमत भवन में शुरू से अंत तक शुद्ध भक्ति का संदेश दिया जा रहा है। नास्ता पर, नित्य भगवान, सेवा, भागवत युद्ध में शो के भक्ति, भागती ध्यान से। इस श्रीवर भगवतों को पढ़ेंगे सुनेंगे। हृदय में जो मैल है, मेल है, म सबके हृदय में थोड़ी या ज्यादा मैल दूर जाएंगे। इसलिए जब पापा जी ने इस कांड की स्थापना की, उन्होंने अपने हाथों से लिखा, हर मंदिर में सेवा होना चाहिए। भगोदमवरकलाशयाम को कला और दिन में सेवा। आपाद ने कहा दिस इज डिवोशनल सैवेज, यह भक्ति का सैने है। लैंवेज आप जानते हो। 1 दबती होती है, 1 तरफ, 1 होती दूरी तरफ वो बीच में कुछ सब्जी या आया, कुछ सुबह। भागवत क्लास सुनो दिन में सेवा करो, शाम को गीता सुनो। और अगर आप इस प्रकार सुनोगे बिना शंका के भागवत प्रेम प्राप्त होगा। तो ये है श्रीमद भागवतम का निर्णय। और भागवत में अनेक लीलाओं का वर्णन है। भागवत में भगवान के भक्तों की लीलाओं का उपवर्नन है और इनको सुनने से अध्यात्मिक जागती उत्पन होती है। जैसे प्लान मनाज की कथा है। अंत में क्या कहा गया है, जो व्यक्ति ध्यान से प्लाट मराज की कथा सुनेगा, उसके हृदय में भगवत प्रेम प्राप्त हो। जाएगा है न मिला की समाप्ति में कहा गया है योग ध्यान से ये कुछ कथा सुनेगा, उसके हृदय में भगवत प्रेम प्राप्त होगा। पर ये भगवत प्रेम प्राप्त करने के लिए हमें प्रयास करना पड़ेगा। क्योंकि अज्ञानता के कारण हम ब जीवों का बड़ा गहरा प्रेम और आकर्षण है। इसके प्रति, माया के प्रतिनिधियों के प्रति। तो ये प्रेम छोड़ना इतना आसान नहीं है, पर प्रयास करने पर संभव है। 1 तरफ से भगवान कहते हैं देवी शुगर, माए, मामा, माया दुरा। तो यार इस माया का विरोध करना बहुत कठिन है। आप कहोगे भगवान खुद तो कह रहे हैं माया का विरोध करना कठिन है? तो हम क्या करें? गे वा में माय में प्रपा ध्यान दें, माया मितरामदरंदीदेऔर जो मेरी शरण में आएगा, वो व्यक्ति माया का विरोध कर सकेगा रूपागुस्वामीजीहा में ग्रंथ दिए। इसमें 1 छोटा ग्रंथ है श्री उपदेश रमित, जिसमें केवल 11 श्लोक हैं। हर्श लोक बड़ा महत्वपूर्ण है। और पापा जी ने बहुत लम्बे तातप्रियलिएहहर्शलोक के साथ कितने भक्तों ने उपशमित पढ़ा है। magiaaiasintosreman भaaतaमें पब्लिक के सातवे श्लोक में रुप कहते हैं भगवान का जो नाम है, अत्यंत मीठे हैं, भगवान की जो लीला है, अत्यंत मीठे हैं। भगवान के जो गुण हैं, वो भी मीठे है। मीठा बन सबको अच्छा लगता है, लगता ही नहीं, मोजन के समाप्त में मीरा बन जाइए, जाइए और मीठा बना अच्छा लगता है। इसलिए लोगों को कैरोडी हो जाती है। वो कहते हैं भगवान के रामासिया मीठे है तो अगर मीठे है। भगवान के नाम। तो हमारी रुची यह होनी चाहिए। दिन रात। हम भगवान के नाम ले। पर वाससिबका क्या है? असलियत क्या है? मार रूचि नहीं। भगवान के नामों में थोड़ी देर नाम लेते हैं, नींद आ जाती है। है कि नहीं? रोटी नहीं है। तो अभी का कारण क्या है? रूप कहते हैं इसका कारण हैं अभिलिया खा, क्रोध, लो, मो, मन, म का प्रभाव। इनके प्रभाव के कारण हम से में अविद्या कहते हैं हम भगवान के नाम मीटापन महसूस नहीं कर सकते। कहोगे? ्ुपगुसामी खुद कहते हैं अविद्या की बीमारी है। इस कारण हम मीटा पन महसूस नहीं कर सकते। तो जबूबगुसमेकहरेहैं हमारे क्या चांद, क्या संभावना पराग कहते हैं इस समस्या का हल कैसे किया जाए? कहते हैं अगर हम ध्यान पूर्वक जाप करेंगे नियमित रूप से तो ये विधा की बीमारी समाप्त हो जाएगी। और हम आई नाम का मीठा पन महसूस कर सकेंगे। जैसे आपका अभ्यास होगा। जब आप कृष्ण भक्ति में जुड़े तो 1 माला करना में कितना बड़ा संघर्ष था। पर आप दे 2 अगर करते गए। अंत में क्या देखा ये जो आप सोचते हो, कठिन है, बड़ा सरल है। क्योंकि जॉब करने से चेतदरबनमानमहिदेकी महत दूर होती है। पर रूस सूत है, मानवता का असली उद्देश्य है, होना चाहिए। भगवत प्रेम हमें ये देखना है कितनी मात्रा में हम भगवान के शरणगत हो रहे हैं। हमें यह देखना है कितनी मात्रा में भगवान और जीवात्मा प्रति आदर्श ने की स्नेह उत्पन हो रहा है। यह देखना कितना हमारा आकर्षण बढ़ रहा है। पर नाम के प्रति तो भक्ति करने से अर्था अविद्या की बीमारी सुधर जाती है। 1 समय किसी ने पापा से पूछा स्वामी जी, आप कुछ जादू कर सकते हो, क्योंकि भारत में सोचा जाता है। अगर कोई संत महात्मा है जादू करेगा। और कई लोग जादू करते हैं, चमत्कार करते हैं और भगवान बन जाते हैं। 1 हम सब मूर्ख हैं तो आप पढ़ते हो। पेपरों में ये बाबा के साथ समझ नही आता कि मुल्क तो यह अयोध्या की बीमारी दूर हो सकती है। जॉब करें। किसी ने पापा से पूछा स्वामी जी, आप कुछ जादू कर सकते हो, क्योंकि ये उम्मीद की जाती है, गुरु है तो कुछ चमत्कार होगा। स्वामी जी ने कहा नहीं, मैं जादू नहीं कर सकता। पर 1 जादू मैंने किया है। इस व्यक्ति ने बोली क्या जादू किया है। सामी ने मैंने हजारों मों को रावण बना दिया। जो व्यक्ति ना किसे कहते हैं, पतित व्यक्ति, जो व्यक्ति पाप के कार्य में जुड़ा है, मैंने क्या बना दिया? ब्राहमण असली ब्राह्मण नाम के ब्राह्मण ने नाम के ब्राहमण को। 2 पैसे का असली ब्राह्मण में तो चमत्कार नहीं। और कैसे किसके माध्यम से आई नाम और शासन के अध्ययन तो हमे भी इसका लाभ उठाना चाहे। तो वह भागवतम क्लास होती है? क्लास मंदन में है भाग काम की कोई चिंता नहीं हमारे। परम गुरु भक्ति सिनांदाजी ने प्राप भाल को कहा अगर कोई नहीं सुनने के लिए। तो दीवारों को सुनाओ। 1 दिन पापाजी की भूमिका पड़ी होगी भागवत गीता की। इसमें प्रापा जी ने बड़े सुन्दर रूप से पूरा सार दिया है। गीता का कितने बकने भूमिका पड़ी है। तो प्रापा जी 1 दिन न्यूयॉर्क में बैठे नियकमंदरमेंनययॉक। अब कमरे में बैठे थे और प्रापाजीकोईभी इनसान के कमरे में। पापा जी को याद आया। गुरूजी ने कहा कोई नहीं है, प्रचार ले तो देवाराम को प्रचार करो। बाबा ने दिवार को लक्ष्य देना शुरू किया। वो लक्ष्य इतना सुंदर था कि गीता की भूमिका है। तो कोई नही है तो भी देश। 2 तो भाग क्लास जरूर होनी, चाहि चाहे 1 व्यक्ति हो। और पापा जी तो क्लास सुनेंगे साल में राधा रावन बिहारी जी, उन्हें भी क्लास सुनना अच्छा लगता है, क्लास जरूर होनी चाहिए। चाहे कोई भी नहीं आए। आप लोग आ सकते है। तो अच्छी बात है, क्लास भी होनी है। और आज इन ग्रंथों का अनुवाद विश्व की हर जिद भाषा में हो। सारे विश्व में लोग इताब पढने भागवतम पढने। तो स्वामी कह रहे हैं असली धर्म वो है जिसके द्वारा भगवत प्रेम अनुकूल हो। और ये भगवत प्रेम बिना भाव के और निरंतर किया जाना चाहिए। नहीं, 2 दिन भक्ति की। अभी 2 दिन छुट्टी चाहिए। आप 5 दिन नौकरी करते हैं, सातवें दिन छुट्टी चाहिए, 11 महीने काम कर दे, 12 महीना टी चाहिए। यह नहीं कि हमें भक्ति से छुट्टी चाहिए और नेस काम भाव से जुड़ेंगे तो भागवत भी प्राप्त होगा। इसके अगले शोक में कहा गया है वस लेवा भगती ज्ञान में क्या नाम चाहिए, वासले भक्ति करोगे तो ये त्याग की भावना उत्पन्न होगी, वैराग्य उत्पन्न होगा। मारक रूप से सेवा करने के द्वारा कई वो 1 दम क्षेत्र में था और कई विद्यार्थियों को मिला जो कि संस्कृत महाविद्यालय में पढ़ रहे थे। पूरी गीता उन्होंने कंस की थी की वो सेवा भाव में नहीं जुड़े थे, उनकी वाणी में गंदे गंदे शब्द निकलते आ रहे थे। तो मैं सोचता था संस्कृत पार साल मैं ने पढ़ लिया क्योंकि सेवा में नहीं जुड़े। इन स्लोक का असली अर्थ है, वो नहीं समझ पा रहे हैं। तो हमें प्रामाणिक रूप से सेवा में जुड़ना चाहिए। केवल गीता को कंट्रास्ट कर लिया, अच्छी बात है। और गीता का जो उद्देश्य है उसे हमारे चिरित्र में हमें उतरना चाहिए। और फिर प्राप्त होगा ईश्वर की शांति। तो भगवत क्लास में आइए और किसी कारण नहीं आ सकते कि दूर हो या सर जाना है भगवान को रोज पढ़िए घर में, भगवदम में इतनी शक्ति है, केवल घर में रखने से ही सी मात्रा में भगवान की कृपा प्राप्त हो जाती है। तो रोज पढने का प्रयास की गई, लोग भगुदमकश्लोग पाली नाम साथ में। और अगर आप इन इस शिक्षा का लाभ उठाओगे तो तेजी के साथ भगवत प्रेम अनुगुल कर पाओगे जो कि जीवन का लक्षण ठीक है कि भक्त सभा में भगवत को रोज पढ़ते हो। wo hi krsna press
प्रयास के लिए कहा सो सम टाइम क्या होता है, सम टाइम क्या होता है की हम लोग प्रयास करते हैं लेकिन प्रयास में विफल होते हैं। तो फिर हम लोग लगता है कि कुछ नहीं हो सकता। तो उसको हम किस तरह से काफी लंबे टाइम, काफी लंबे टाइम होता है लेकिन फिर भी सफलता नहीं मिलती है। तो उसको हम कैसे ज्यादा में आम
सॉरी
आपने बोला कि भक्ति में माया का प्रभाव, माया का प्रभाव, अविद्या का प्रभाव है। लेकिन अगर हम प्रयास करेंगे तो हम
आगे भगवान खुद कहते हैं मेरी शहर में आओगे तो इसका विरोध कर सकते हो। हाँ, तो प
कोन की थुजियजमकैसे मेंटेन करे क्यूंकि अगर विफल होते जाते है, भगवान में नहीं जा पा रहे हैं।
कैसे मेंटेन करे अगर आप 25 साथ नार होगे, जब करोगे गन्ने गुसा सदा ऊँचा रहेगा, हम सोचेंगे एडवांस बग बन गए, हमें नियम का क्या आवश्यक, मंगला, दिवाने की आवश्यक न हम पुराना गए। थोड़ी तो आप का उतसाकमहोजाएगा, भक्ति की विधियों का पालन करना और साथ में जाप इत्यादि भजन करोगे तो अनाथ निरवृद्धिप्राप्त होगी। और ये जो नियम हैं, ये सबके लिए है, यह नहीं, केवल नए भक्तों के लिए है। नए पुराने, no ception और प्रश्न पूछिए lo
कि गीता में गया है कि भगवान कृष्ण ने कि मैं पक्षों में पीपल संघ में आकर की? तो केवल बा के अलावा भगवान कहीं नहीं?
नहीं भगवान कनखल में हर जगह पर जो योग्यता है, वो सबसे खूबसूरत चीज है, वो भगवान की बस है। मान लो आप कोई खूबसूरत चीज को देखते हो। मालिवाली व्यक्ति सो जा। मुझे इसको अपनी जेब में डालने 2 भक्त हो जा। यह भगवान की हाता से बनी है। मुझे उपयोग करने 2 भगवान की सेवा
में,
हवा में कोई योग्यता है, कोई कला है। हमें सोचना चाहिए। कला भगवान की कृपा से प्राप्त हुए है। ये कला का उपयोग करे। धन है। धन कमाते हो भर सोचता है कि धन कमाया है। भगवान की कृपा से इसका उपयोग करने 2 भगवान के सेवा okay goi
ना चाहिए।
चेतन करना चाहिए। पढ़ सकते हो तो बहुत ही अच्छी बात है। आपने जो प्रश्न पूछा है तो मतलब भी चाय पढने गीता पढी गीता पढ़ ली चेत पापाजी ने कहा भागवत गीता इस हाई स्कूल bagwadmiscollेg greduation cेतिनचतजपoस्ट गेजुएट पढ़ सकते हो। बहुत अच्छी बात है माना का जॉब भी जरूर गिरे माना का जॉब करते हो।
मदर जी ने मेरी कुर्सी है और कभी कभी आना है खबर कब नहीं है।
नहीं बरेली कितनी दूर है। यहाँ से 24 घंटे आपको ड्यूटी करनी पड़ती है नौकरी।
बहुत बड़ी
क्या है क्या काम है आपका
कर।
अब तो जीएसटी आ गई है क हम 2 एक्साइज की छुट्टी हो गई। सरकार ने आपको आराम दे दिया। एक्सा अभी जीएसटी के कारण एक्साइट नहीं लगती।
जो शराब हुआ उसका। अब शराब, शराब
और जॉब ड्यूटी थोड़ी करनी पड़ती है।
रात नहीं भागना पड़ता है।
कभी कोई नहीं ठीक है जा कितना भी भागना पड़े के समय निकाल सकते है।
प्रयास तो पूरा रहता है।
okay he krishna।
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