ज्ञान - भगवत प्राप्ति | अज्ञानता - इन्द्रिय तृप्ति | SB 1.2.10 | Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī | 21 Dec 2022

In this recorded satsang, Gopal Krishna Goswami (through Speaker A) delivers a devotional discourse contrasting the pursuit of material sense‑gratification (indriya‑tṛpti) with the quest for the supreme truth (Bhagavat). He critiques political and social leaders who pander to the senses, emphasizes that true human purpose is bhakti (devotion) to the Supreme, and explains how ignorance (ajñāna) clouds perception of the divine. The talk outlines the goal of devotion, the importance of purification (pavitrata) and disciplined meditation on the holy names, and how sincere chanting reveals the sweetness of God’s names even to those afflicted by ignorance. Scriptural anecdotes about sages, kings, and animals illustrate these points. The session concludes with gratitude expressed by participants and a reminder that sincere practice leads to the realization of Bhagavat. Key points: - Material pursuits lead to temporary satisfaction and eventual punishment; spiritual pursuit leads to lasting liberation. - Bhakti’s ultimate aim is to develop pure love for the Supreme, not merely ritual or external observance. - Purification through disciplined chanting (japa) and meditation transforms the mind, allowing one to experience the sweet essence of God’s names despite the disease of ignorance. - Scriptural stories (munis, kings, animals) serve as analogies for the soul’s journey. - The speaker warns against leaders who exploit sensory desires and urges listeners to focus on inner devotion. - Gratitude is expressed to the guru and participants, reinforcing the communal aspect of satsang.
Chapters
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was बजे सा बजे
कमस्या इच्छाओं का आना नहीं, इंद्रिय नदियों की प्रीति तुष्टि लाभ लाभ जीव, आत्म संरक्षण यावत जितना जीवस्य जीव का तत्व, परम सत्य की चिक्यासपूछताछ ना नहीं। अर्दअंतयजहअन्य जो भी, गर्म भी मृतियों के
द्वारा
द्वारा शुक्रवार की जीवन की छाए इंद्र की ओर रचित नहीं होनी चाहिए। मनुष्य को केवल स्वस्थ जीवन की यह आत्म संरक्षण की कामना करनी चाहिए, क्योंकि मानव तो परम सत्य के विषय में जिज्ञासा करने के लिए निमित बना है। मनुष्य के कर्मों को इसके अतिरिक्त अन्य कोई लक्ष्य नहीं होना चाहिए। पूर्ण रूप से मोहग्रस्त भौतिक, सविता, गलत तरीके से इन्दिरी इच्छा पूर्ति की दिशा में अग्रसर है। ऐसी सभ्यता में जीवन के सभी क्षेत्रों में इंद्री परम लक्ष्य होता है। चाहे राजनीति हो की समाज सेवा, परोपकार, परिवार या कि धर्म, यहाँ तक कि मोक्ष में भी वो इंद्रकी आप की प्रधानता बढती जा रही है। राजनीतिक क्षेत्र में लोगों के नेतागण अपनी अपनी इदर डिग्री परस्पर जगते हैं। मतदाता भी नेताओं को तभी मानते हैं, जब वे उनकी इदर कराने का वचन देते हैं। जब मतदाता अपनी इदर में असंतुष्ट हो जाते हैं, तो वे नेता को पद च्युत कर देते हैं, पदच्युत कर देते हैं। नेता भी मतदाताओं की इंद्रियों की दुष्ट ना करने करके उन्हें सदी निराश करते हैं। अन्य क्षेत्रों में भी यही लागू होता है। कोई भी जीवन की समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं है। यहाँ तक कि मोक्ष मार्ग ममु्शोभीपरमसत् से तदाकार होने की इच्छा करते हैं और इंद्र के लिए आध्यात्मिक आत्म हत्या करने को उद्दित रहते हैं। किन्तु श्रीमत भाग का गठन है कि मनुष्य को इंद्र के लिए नहीं जीना चाहिए। इंद्रियों की तुष्टि आत्म संरक्षण हेतु करनी चाहिए, इन्द्र के लिए नहीं। चूंकि शरीर इंद्रियों से बना है और इन इंद्रियों को कुछ तुष्टि की आवश्यकता होती है। अतः ऐसी इंद्रियों की तुष्टि के लिए कुछ विधि विधान बनाए गए, किन्तु इंद्रियां अनिंद्रित भोग के लिए नहीं है। उ उदाहरण विभाग यानी स्त्री और पुरुष का मिलन सरकार प्रति के आवश्यक है, किन्तु यह इंद्री भोग के लिए नहीं होता। सुवेकषासेनिरोध के भाव में परिवार नियोजन के लिए प्रचार करना पड़ता है। किन्तु पुरुष लोग यह नहीं जानते कि परम सत्री खोज में लगते ही सदा ही परिवार नियोजन हो जाता है। परम सत्य का अग्रेशन करने वाले कभी भी अनावश्यक केंद्र के प्रति आदेश नहीं होते, क्योंकि परम सत्य की खोज के कार्य में वे पूर्ण रूप से व्यस्त रहते हैं। अत जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में परम सत्य की खोज को ही परम लक्ष्य बनाना चाहिए। इससे मनुष्य सुखी होगा, क्योंकि वे तरह तरह की इंद्रने कम लिप्त होगा। और वे परम सत्य क्या है, इसकी व्याख्या आगे की गई है। आइये अनुमान सर दोरागा जीवन की चाय की ओर सुरक्षित नहीं होनी चाहिए। मनुष्य को केवल स्वस्थ जीवन की ही या आत्म संरक्षण की कामना करनी चाहिए, क्योंकि मानव को परमसत् के विषय में जिज्ञासा करने के निमित बना है। मनुष्य के कर्मों का इसके अतिरिक्त कोई लक्ष्य नहीं होना चाहिए।
homygmaयa जय श्री कृष्णा, चेतन्या,
कृष्णा, हरे,
कृष्णा, कृष्णा, कृष्णा, हरे, हरे राम, हरे
राम राम राम रे, थैंक, यू सर,
so is a day, e gera और इन सब का मूल संदेश किया है। क्या में हमें मानव जीवन के द्वारा शुद्ध भक्ति का ज्ञान को करना चाहा। व्यास देव ने अनेक शासन का वर्णन किया था ने साल रूप प्रस्तुत किया पर व्यास देव लगा था की रचनाओं में कुछ कमी रह गई है। और ब्याज ने क्या कहा भारत के ऊपर बदली इसके बच्चा ईमन भगत गामा गलि राइपnफूdयहसबसे पका फल है। और ये फल हमें पुछायाजारहाहै ग्रुप बाबाजी कहते हैं कि फल को आप ऊपर से फेंकोगे जमीन पर टुकरे टुकरे हो जायेगा, ग्राम अलग अलग द्वारा नीचे वो फल। उसी रूप में तो ये जीवन भगवत हम में महान चायों के द्वारा प्राप्त हो और इसलिए इसका ज्ञान उठाए। तो आप जीवन के लक्ष्य अज्ञानता में हम क्या सोचते हैं? जीवन का लक्ष्य क्या होना चाहिए? या सोचते हैं? क् होना चाहिए? हम सुबह से रात तक व्यस्त रहते हैं बहुत में जुड़ने के लिए और जुड़े रहते हैं इन्हें ज्ञान खोजते हैं कि वि तिप्ती जीवन का लक्ष्य और पूरा प्रयास रहता है इन्हें करने के जैसे राजनीतिक नेता भी जब इलेक्शन का समय आता है, वो क्या वादा देते हैं ऑल इंडिया। कोई ये नहीं कहता सब को भगवान के नाम का उच्चारण करना हम सहयोग देंगे, सबको जॉब करने में कोई ये नहीं कहता हम गीता के संदेश को कोई नहीं कहता सुबह क्या संदेश दिया जाता है हिंदी दिप्ती कैसे आप प्राप्त कर सकते है? मैंने सुना है कि पंजाब की में 1 party हमे वोट दोगे तो 11 महिलाओं को हजार महिना तो वो ही
कहेंगे
ये महत्वपूर्ण बना देंगे। पारा में गीता भी बढ़नी चाहिए। तो यहाँ कई स्थानों में कई लोगों का उचारण गुदस्वामी ने किया और शो का उचारण गोसामा goswami तो हजारों माता samiशरानमेथे संता ने उनसे पूछा हाल में प्रश्न पूछे और गोस्वामी ने वही संदेश दिया जो कि उन्होंने प्राप्त किया था किसके माध्यम से जो व्यक्ति 1 बार सुनने से किसी विषय को कंटेस्ट कर लेता है उसे कहते है शूतिरशूतगुस्वामी ने भागुधमका उच्चारण सुना 1 बार और हजार ो on kashmiri बड़ा गहरा ज्ञान था पर उनका भाव क्या था को ये साबित करने में सब से पूछा कि मेरे ज्ञान मेरे सामने कोई काला नहीं कर सके तो नंबर कैसे
हो?
क्या pndt का सदेश दिया उदाहरण से लोग कहते हैं कि मैं बड़ा विद्वान हूँ पर आपकी तुलना में मैं कुछ नहीं जानता। 1 पंक्ति को भी सीधा नहीं सो। अब सुनाइए अपने ज्ञान का sample de p pl a so कैसे मा ने सारे सौच लोगों का उच्चारण कर दिया और ये भी बता दिया किस रोग में क्या कमी जबकि 1 बार सुनने से ही सौच लोगों को कस कर लिया। उन्होंने कहा मैंने तो वायु के तेज पर इन श्लोकों का उच्चारण किया। हमने कैसे थे वो a a god हसने लगे रोक दिया कहा की कथा क्या बाद में दे ने ये उदाहरण दिया किस प्रकार हमें व्यवहार करना चाहिए, उसी तरह जैसे अपराध के दे रूस से ऐसा व्यवहार करो जैसे आप जाते हो। तो तुम्हारे साथ खाए। तो सूतक। स्वामी ने पूरे भागवत को कंटेस्ट कर लिया था, 1 बार सुनने और वही भागवत
सूतक।
स्वामी कहते हैं, हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए इंडिया में जुड़े हमारा कार्य में, हम जो धन कमाते हैं, उसका क्या उद्देश्य रहा है? क्या हम धन का उपयोग करेंगे और इंडिया को आप पौधेको द्वारा कभी भी संतोष नहीं कर सकते। ये है शासन का निर्णय। और जो बुद्दिवान व्यक्ति है वो क्या कहते है? फोर शासी में विश्वास करते है। यहाँ कहा जा रहा है कि हमें प्रति नहीं जुड़ना चाहिए। तो आपको क्या करना चाहिए में परम भगवान के विषय में सुनना चाहिए। और इस अध्याय में लगभग हर श्लोक का ये संदीश, या में जीवन का उपयोग किस लिए? परम भगवान को समझे? ये समझने के लिए क्या है? इनकी शिक्षा क्या है? उनकी इच्छा और इंडियन किस लिए? भगवान की सेवा में, इंडियन को कुल कार्य में जुड़ना है। तो यह आप में या परम सत्य को समझ मुझे बुद्धिमान है। वो क्या करते है, वो उपयोग करते है भगवान श्रीमन उदरनपढ़े kis prakar nakpशकाntata who jude आंखे है। se bade cca roshni
bijli
में की गर्मी से मर जाता है। जो व्यक्ति मछली पर पहने जाते है, फुशिगरॉडमेंक्या कहते है खाना अच्छा लगता है, उसको जूस देते मछली देखती है वो खाने को खाने जाती है और क्या होता है गिर जाती है जो की वो सारा दिन खोजती है। कोई ऐसा स्थान मिला जहाँ खुशबू तो घूमते घूमते, वो कहाँ पहुँचती है कमल के फूल के, वहाँ जा पहुंचती है। तो क्या लगता है अब समाली विश्राम घर पर शाम को जब के फूल बंद होते है फिर deरडियरकोपकड़ना बहुत मुश्किल है, भागते रहते हैं बहुत तेजी के साथ, वो जो शिकारी है वो जानता है वही धुन बजाएंगे तो हम पकड़ पाएंगे। तो हिरन जब सुनता है वो धूल तो रुक जाता है देखने के लिए कहाँ से आवाज आ रही है। कोई हवा रुकते क्या होता है, शिकारी क्या करता है गुल व हाथी हाथी को पकड़ा है। तो शिकारी क्या करते वो उन्होंने इकड्ढा बनाया होता है जो घर से भर देते हैं। हर जाओगे she lipेnयेएलिफैन का पीछा करता है तो येलिफेनशीएलिफन का पीछा करता है। तो भगवत में उदाहरण दिए गए हैं। ये बताने के लिए जो पशु हैं उनके पास इंडिया भी हैं उनमें 1 प्रकार की इंद्री होती है इसको बेहाल करने का, इसको संतोष करने का प्रयास करते पर जो मनुष्य है who ka contra su sdisideforjest sadesingonnsan human means
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very garfulक्योकहपयाज कर सारे को संतोष करने के लिए अब संत सुबरीमुनीकी baimani
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ncgoyogीथeोेबडी गरी तपस्या कर रहे थे, अंडरवॉटर पानी के नीचे थे, jee ko pta jha राई, जा कता है alimony
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कह रहे थे, चिंतन कर रहे थे भगवान अंडरवाटर और उन्होंने देखा तो मछलियां पोवग्लासके गाडी में जुड़े है, तो वो सोचने लगा इस काल में अधेक आनंद है। china a an vichar mani निकले बाहर गांड समाधि और गाय सीधा राजा के पास राजा राजा की 50 बेटियां थी। मैं आपकी किसी 1 बेटी के साथ विवाह करना चाहता हूँ। तो राजा ने देखा इतना बदसूरत व्यक्ति लम्बे नाखुन लंबे, बाल सालों से ना किया तो राजा ने डिप्लोमेटिक ली कह दिया मैं तो जब बेटियों की शादी नहीं करवा सकता, तुम चाहते हो तो जाके खुद चुन लेना, खुद पूछ लेना। तो भाई मुनी गए और सारे बेटियों ने शकल देखते ही दरवाजा बन कर दिया।
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janta hu n o e a muni योगी के द्वारा बहुत खुबसूरत बन गये। इतने खुबसूरत के पृथ्वी के सबसे खुबसूरत व्यक्ति माने जाते थे। तो सवारी मुझे अपने आप को बहुत खुबसूरत बना लिया और साथ में 50 महल भी पैदा कर दिया बोले सवा
मनी
में राजा की भेडिया को देखा सबने हमें इसे लेना है हमारे पति के रूप में और बैन के बीच में झगड़ा हो या हर फैन ने कहा मुझे spine मुनी था। 50 सफाई मुनी ने अनेवादकिया की मैं इतना मूर्ख हूँ। 1 समय विचलित हो गया तो क्या किया
है?
नाऊ नो मोर non वेलकम नहीं करना, वो वापस गये भगवान को चिंतित करने के लिए, उनकी श्रीमत भगवत में अनेक
उधर
n द्वारा क्या, india kunकukriethesins is some engagment, india s तो प्रश्न है इंडिया को कुछ न कुछ कार्य भागवत में पढ़े। इस प्रकार ये 2 भाग मन, को और न ने क्या किया, शराब किया सौ साल के लिए,
जाओगे
नमाज के आंगन में और उसके पश्चात तुम्हें परम भगवान का दर्शन प्राप्त होना। तो ये बन गे पेड़ के आंगन में सौ साल देवता के सौ सालों के लिए। और फिर भगवान ने उनका उधारण किया। 2 पेड़ बन के द्वारा पेड़ो को गिराया और उनसे क्या निकले वो समझ गए कि नाद मुनि की कृपा है, यह दर्शन प्राप् होगा और उसके पश्चात। उन्होंने कहा कि अब से हम हमारे इंडिया का, योग का उपयोग, तो अज्ञानता में हम नहीं समझते इंडिया का उपयोग किस रूप से पर। अगर आपको सारा संघ में आकर वे ज्ञान प्राप्त हो। फिर आप जान लाभ उठा, आप से हम जरा बने, इंडियन का उपयोग करेंगे किसलिए जीव का उपयोग कैसे करना चाहे? तो इस विषय में हमारे समक्ष अमरीश मराज। अम्बरीश मराज ने, क्या, क्या ने उपयोग किया, भगवान की सुन्दर विगराकद्शनलेने पेड़ों का उपयोग किया। किस लिए? मंदर जलके जाने ले। हा उपयोग किया, किसलिए के बंदर को साफ, उन्हें उदाहरण दिया। किस प्रकार हम उपयोग के भगवानक तो
यहाँ
कह रहे हैं कि हमारा प्रयास होना चाहिए। परंपरा और उनकी सेवा में तो ये संभव होता है। अगर आप साधु सांग साधु संघ में रहोगे तो विज्ञान आपको प्राप्त होगा। और साधु संघ जैसे हम कह चुके है। 2 साधन है उनके द्वारा प्राप्त करते हो। 1 बग साधु की सर आप किसी परीक्षा में आते हो क्योंकि आपको यह शिक्षा दे रहे हैं। दूसरा है ग्रंथ साधु आप आप के पास को किताब प्राप्त होती है? जैसे की हमारे यहाँ चारो ने कहा
है
कि यह बुद्धिमान व्यक्ति है, क्या करता है? वहां के प्रचार सबसे प्रिय व्यक्ति? तो बुद्धिमान व्यक्ति है, वो क्या कर रहे हैं वो ये जानना चाहता है वो कौन सा है, वो क्या जीवन, कला और इन उत्तर कहाँ प्राप्त होता है केद्वारा सो यहाँ हम किसी भक्ति संघ में आते हैं जो हमें निमंत्रण देते हैं और भक्ति में जुड़ते हैं। यहाँ ग्रंथ के माध्यम से जैसे की राज ने कहा अगर तुम मुझे संतोष करना चाहते हो तो क्या करें? के वाले बहुत पैसा कमाते हैं और ज्ञान के प्रभाव से आप की प्रेरणा आती है कि हमें भी भगवान के शरणागत होना चाहिए और शरमकृषणकेमाध्यम से आप समझ पाते हो। क्या आपको सुनना क्या नहीं सुनना चाहे? तो इस में लगभग वैसे तो देखा जाए। पुरे भगवत के आधार हजार शो सभी महत्वपूर्ण so के कई शो का उपयोग किया। शोक बड़ा महत्वपूर्ण है। तो यह शो मे है कि हमें इंडियन का उपयोग इन लक्ष्य सोचना चाहिए। आत्म सत्य भगवान के विषय में संबधनाचाहिएऔर, इसके लावा और कोई लक्ष्य नहीं होना चाहिए और साथ प्रभाजी इसी विषय पर चर्चा करे। तो क्या कारण है? इस शो में इतने श्लोक हैं जिनके द्वारा यह संदेश दिया जा रहा है। कारण ये है केंदीतिबदीहमारी सबसे बड़ी शद्दुहै। और जब हम इस क्षेत्र को वशमे नहीं लायेंगे, भगवान को नहीं करोगे जैसे आपका अनुभव होगा। जब आप चैटिंग करते हो तो उसके पश्चात हाल में सब ऊँचा रहता है और मान लो आप खाना ठीक रूप नहीं रखे तो क्या परिणाम होगा? आपका बहुत रहेगा तो बढेगा। तो शाम किसिम के द्वारा हम अपनी इंडियन को वाइफ बना सकते हैं। तो सुधा है कि का लक्ष्य इंडिया सिपी नहीं होना चाहिए, यू का लक्ष्य होना चाहिए और सत्य सेवा और साधु संग में ये सबसे सरल रहता है और हम शिक्षा इन गंदों को बाटते है क्यों? क्योंकि इन गंथों में इस विषय का ज्ञान है और यह है सबसे महत्वपूर्ण ग्यान और आधु संघ के द्वारा शिक्षा प्राप्त करते हैं। is प्रकार को and association in her home भक्तों के मे तो ज्यादा सरल हो जाता है में जोड़ने के लिए वे इमपोर्टंट we should meditate nd only
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activities in conus मानपुर ने क्या कहा जो भक्ति के लि cul prikol में कहते हैं आपके इतने गुण है कहा से काम नहीं चलेगा हजारों जीवों के हमारे दुरभाग संभाले तो शो का संदेश का पालन करना चाह
yes
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the so hard के bag slोonsक ये भी बड़ा प्रिय रोग
हरे कृष्ण महाराज
जी महाराज जी
ये जब हम फरवगीताकिसकेहाथने ते है और कोई फरवगीताकेएकपेज को भी उसका जीवन हो जाता है तो कोई फरवगीताभरवगीता को काटता है है न तो उसके जो पिता तो फिर तो फिर उस व्यक्ति को 4 सी भी ज्यादा फल मिलता है क्या महाराज जी मेरा कोन था की अगर कोई व्यक्ति अगर हम किसको प्रगीत अगर कोई पुलकिता पेज को पढ़ ले तो उसका जीवन नहीं हो जाता है तो अगर कोई पुस्तक वितरण करता है कोई तो तो तो देवासी को 7 से भी ज्यादा फल मिल गा जो पित्रों का शाद करते है पुस्तक वितरण का जो जो शाद से फल मिलता है वो पुस्तक मित्र ऐसे भी मिल सकता का
और बाजी खा गीता के विषय में। 1 श्लोक भी तुम पढ़ लोगे और अपनाओगे अपने चरित्र में पढना पढ़ लिया। उनका पालन नहीं करोगे कि हर श्लोक का गहरा अर्थ क्या है। सेवा तमाम पे गरम 1 स्लो को भी पढ़ोगे व अपने जीवन में उतारोगे। ये है गीता का मत
मा ने आपने बताया की जीवन का लक्षण है और आपने अम्बरीश महाराज को दिया। अमरीश की चाह कर के नाम के 2 घंटे, 4 घंटे तो बंद कर पाते हैं, 2 घंटे, 4 घंटे तो अपने आप से भवादकादर्शनकरते है। का कथा सुनते है, नाम लेते है। जैसे ही हम 24 घंटे कर पाएगी, हमारे को
कई बार लोग पूछते हैं 16 माला क्यों गुरुजी ने कुरिया वो? क्योंकि अगर आप 16 माला ध्यान से करो तो आपके पास शक्ति होगी। बाकि 22 माना को 22 घंटे सेवा में जुड़े लेगा। ये हई जे से आप दवाई लेते हो। कई दवाइयां हैं लोंग लास्टि तो 11 गोली लो, उसका से 10 10 घंटे चलेगा सो। smile also bone आप 2 घंटे करोगे ध्यान से, जो 22 घंटे बड़ा भागेगे, वो ठीक जस्ता में उपयो
दादाजी। जैसे आपने बोला कि 2 घंटे की नाम अच्छे से तो होगा। वो जब 2 घंटे जब करने बैठे तो उस समय में मन में कुछ
न कुछ विचार चलते रहते। उस चुपाने कहा से बढ़ ने समय कि इगनोर द माइंड मन में मन के विचार भटक रहे हैं। इग्नोर करो जैसे बच्चा दुकान में जाता है माता के साथ, वो हर चीज खरीदना चाहता है मदर जैसे इगनोर सो, इगनोर द। माइंड जब जागरूक करने का प्रयास करते है तो जनवरी फेंसेस करने की चीज को रोकती है। हमें तो हम कैसे अपने फेंसेस करने के खत्म कर सकते है, प्रयास करो कम अपराध नहीं करो। जाने अनजाने में कुछ हो गया तो पर ने यह नहीं कि हम अपराध करे कहे या अंजाने में हो गए। और आप के ज, उनके साथ उनकी बुद्धि ज्यादा तेज
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ज्यादा सरल सरलता से आप बहुत देखे आप कब का अनुभव होगा कि जब आप साधना रखते हो, अंदर आते हो कर कैसे रहता
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ढीले हो जाते हो तो क्या परिणाम होता है, पौधे का कर्षण जाता है बगतीबलसू। satna admin jean s to pryas god hevtoto गुरुजी के आशीर्वाद मिल गई, आप सब को हो गया को प्रयास भी फिर के
महाराज जी, जब हम जॉब वगैरह पर जाते हैं तो बहुत सिंसियर एफर्ट्स करते है और पूरा मन लगा के काम करते हैं। और जब भक्ति में करने की बात आती है तो इतना सिंसियरली एफर्ट्स नहीं कर पाते। तुम्हारे जी कैसे चेक करे कि हम भक्ति में प्रोग्रेस करने के लिए सिंसियर एफर्ट्स कर भी रहे हैं कि नहीं।
आप 3 प्रकार की संगत होती है भक्तों के लिए आपसे, उत्तम, ज्यादा, एडवांस, भ, आपके समान और आपफीकमज्ञानरखदे। तो साधु संघ में रहो और उत्तम भक्तोंकी संगत में रहो। तो आप पूछ सकते हो कि क्या कारण है, भक्ति करता हो तो आप क्या पुराना। जब बहुत नौकरी करते हो तो वहाँ सावधान ना पड़ता है नई रहोगे तो छुट्टी हो जाएगी। भक्ति करते है तुम्हारे मन में यह डर नहीं रहता तो है भगवान परेशान
है
अपने ऊपर शान करते हो में जुड़ते हो पीने के बराबर sana
जीवन उतारना चाहिए। कई बार काफी प्रयासों की बात हम शो को नहीं उतार पाते, लोगों को प्रजीव उतार नहीं पाते, देश को तुम निराश हो जाते हैं और फिर पुरानी मे फसे साल खो बैठे हैं कैसे इस निराशा की स्था से अपने परोहा
sir mai in lab to in both जैसे भगवान कहते है रूपक हमें कहते है भगवान के नाम जो है चीनी जैसे मीठे हैं, पर विद्या के कारण हमें वो मीठा बन आप जप करते हो तो सो जाते हो रात में बैठे बड़े जाती क्यूंकि हमारे रूची हुई है पर रूप कहते हैं अब ध्यान से जब करोगे तो क्या आयेगा अभी दे की बीमारी का इलाज होगा हमारे अच्छायों ने हर समस्या का वर्णन किया है और क्या है उपाय तो वी डोंट नीड टू स्पेकुलेट ok ले रे
मेरा प्रश्न यह था की नाम जापुर साधु संग में कौन सा मतलब हमको रेफर करना चाहिए मतलब आजकल जो है हर 1 का बीज सेड्यूल है, हर 1 ने अपने नाम के लिए 1 समय रखा हुआ है और द सेम टाइम हमें साधु संघ का ऑफर मिलत है तो हमे किस को प्रैफर करना चाहिए
रहोगे तो महिमा से बचोगे तो
ये उपदेश
से सालो की क्या पहचान है वो भगत कृपया न तो साधु संग भी आवश्यक है।
और
मा ने कहा अगर आप मुझे वर देना चाहते हो तो खबर दीजिए उत्तम भक्तों की संगत म a kre ke last question sorry
i तो वो
मार की बत्ती लगे हुए थे, फिर भी वो विचार होगा कैसे बचा जा
सकता है की उसे
हमने गलती की
थी,
वो पहले क्लब में मैंने गलती की थी, गुरुता को रोका था मछली खाने से तो उसके कारण सजा मिली सो वो अंडर वोटर से करने लगे तो फिर सो मुनी क्वेशन क्या है हा भक्तियों का लक्ष्य क्या है? तो प्योरीफाई प्योरीफाई साल का माध्यम क्या है शव नाम और कितना ध्यान से करोगे तो यह परिणाम होगा यह बहुत आकर्षण है वो जाएगा रूप भी कहते हैं भगवान के नाम मीठे हैं पर क्यूंकी अविद्या की बीमारी है हम उसका मीट पर महसूस नहीं करते पर अगर हम ध्यान से जॉब करेंगे तो क्या नाम होगा आप मीट पर फिर से महसूस कर पाओगे। ओ
रे मिश्रा बहुत बहुत धन्यवाद करते हैं इस माल महाराज का।
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