In this devotional lecture, Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī addresses the spiritual benefits of reading sacred scriptures such as the Bhagavata and the Bhagavad‑Gītā. He recounts historical efforts by senior devotees to translate, print, and distribute these texts worldwide, describing the hardships faced in early publishing and the dedication required to make the books accessible. Practical advice is given to listeners on how to engage with the scriptures, the importance of sincere devotion, and the impact of scriptural study on personal transformation. The session includes a Q&A where audience members raise ethical dilemmas—specifically the conflict between marketing practices that involve lying and the teachings of the Gītā—as well as a query about the distinction between different types of propagators (e.g., “kand” promoters versus RSS activists). Goswāmī responds by emphasizing degrees of truthfulness, the need for integrity, and the spiritual criteria that differentiate sincere devotional work from other forms of activism. Throughout, the tone remains devotional, instructional, and supportive, aiming to inspire listeners to prioritize scriptural study and ethical conduct.
Questions this video answers
Goswāmī explains that there are degrees of falsehood; one should research and avoid unnecessary deception, striving for honesty even in business, and align actions with the higher moral standards taught in the scriptures.
He states that sincere devotional propagators act out of pure spiritual purpose and follow dharma, whereas political activists may have different motives; the distinction lies in the intention and adherence to scriptural purity.
Chapters
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mike hi krsna सबको फैसल अच्छा लग रहा है, टफेशरकोएकचें करना चाहिए
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रे रे
हरे रामा रामा रामा रा भा ले हर
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जा जा ले आये हाना हरे राम बोलेगा रबर हरे
आप सब भक्तों का हार्दिक स्वागत कई बार कह रहे थे फसल को एक्सटेंड करना चाहिए।
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कई कहते हैं कि वो उतना सवाल नहीं रहा है। घर से बेर अगला अगला कैंप और लंबा कर दे तो सबसे पहले मैं सुधर, गोपाल और भक्तों का बाहर पकड़कर आहूँ। उन्होंने योजना बनाई है और योगी भक्त आये। सबने कहा कि वेरी वलानबन थैंक। यू तो आज का विषय है बाबा जी की महिमा और आजाद में गंधों की आवश्यकता। हम 11 श्लोक पढ़ेंगे भगतं, जिसमें आपको ध्यानिक गर्दों के आवश्यक से गाना है। ये है हिबरभगतापतमसकपाँच दिखाए शोक बरदार
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जी मा भारत इसका 1, 28 मार्च, शो 10 नायक 50 चित्र बदन भर शो जल दरवायकीभशकिवासह न स की शिक्षा केवल भगवत संपूर्ण ब्रहमांड के वातारण को शुद्ध कर सकता है। जो वाई श्री भगवान की महिमा का बटन नहीं करती, उसे साधु गवकोंकेदवस्थान के समान मानते है। बराधमंसव्यक्ति दिव्य लोक के निवासी होने में बदामतेऐसेस्थान में कोई आनंद नहीं मिलता। अरवादरायअनवादपछे दवाएगा केवल महिमा का गुणगान भी संपूर्ण भरा के माता को शुद्ध कर सकता है। जो वाणी श्री भगवान की महिमा का वर्णन नहीं करती, उसे 7 कौवों के लिए कहा फिर समान आते हैं और हर व्यक्ति फिर लोग के निवासी होते हैं। अत ऐसे मे work
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यस हो क्या? वह कसलोजिसाहुआहै? दूसरी ओर जो जो साहित्य असी, पर, देश के नाम, यस रूपों तथा गाँव की महिमा के भार से दूर है, वह कुछ भी नहीं रखा है। जो इस जगत की भारत सभ्यता के अपार जीवन में क्रांति लाने वाले दिव्य शब्दों से लोग होगे, ऐसा दिव्य साहित्य चाहे वो ठीक से न भी बचाव हो, ऐसे वरित्ममनुष्यों द्वारा सुना गया निकाल दिया जाता है। जो विमान निश्,
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जाएगा। दूसरी ओर जो साहित्य ही प्रवेश के नाम, ये रुको की हिमा के वाटर से दूर से गम हैं। नहीं रखा है। जो इस जगत की ना सकता, अपने जीवन में ट्राफी आने वाले दिल्दश्रथों से वो लोग है, ऐसा साबित भी बचा लो हो। ऐसे बल पुरुषों वाला सुना पाया था, स्वीकार किया जाता है।
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थैंक यू आज की मैने कहा गया था। mahima jan mhtवpूrणaorbka one fiis बनाए तो आप सब का परिचय है प्रॉपर के साथ और आप सब जानते है कि वो भगवान के शूल े प्रकट हुए थे भविष्य को पूरा करने के। भगवान की ज्ञान शासन के तने उनकी भविष्य वाली क्या थी। क्या विश्व में जीते नगर गाँव है, सब्जा क्या होगा बिहारी राम मारे चाय
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प्रयास किया था इसको सफल बनाने के लिए, और खास करके बाकि ठाकुर। पाखी ठाकुर को रूप विसामेमाप्रकुकी विवि शक्ति माना जाता है और उन्होंने शुद्ध भक्ति का जो कि उन्होंने विश्व के कोने कोने में भेजा और उनके पति भी पक्षी सादाजी। पक्षी सदाद ने अनेक भक्तों को अनेक डंगों का अनुवाद किया और उन्होंने अपने सन्यासी से भेजे थे विदेश में कृष्ण भक्ति के संदेश के साथ और ज्यादा सब लौट के आ गए तो हमारे गुड़िया सन्यासी थे। हामारे, भविष्य वाले तो है पर a b paisa pura vishvas a this is gospedicsion has no ti जो बड़े प्रभावित हुए है भक्ति सिदाना का कला पर सिर्फ संत रहता है। मुझ से मिला पापा के पिता, उनका नाम था ब कैदा संतों की सेवा करते थे। वो पापाजी बचपन से ही संतों के दर्शन प्राप्त होता था। और जब यहाँ संत पूछते हैं हम क्या करते है तो गोमो पूछते थे को कहते थे मेरे बेटे को आशीर्वाद 2 क्यों राधा और जो राज माता जी थे वो कहती आशीर्वाद हो मेरा बेटा इंग्लैंड जा के तो प्रभा का परिटेथासंो पापा मेरे शब्दों को मिल चुका हूँ, मैं किसी से भी प्रभावित नहीं हुआ। बाद के शब्दों में वो गिजीजकरलेगए तुझे बार 1922 में पापाजी मिले s mann can es a young man, who can fulflocsanelpeon pale prapाeनe वत प्रयास किया, उन्होंने सन्यास लिया। मिला दिल्ली आते थे। किताबों को उनके मन में 1 ही भाव था। गमराज का ऑर्डर है उसको 1935 में राजी पाकिसीदांदजीके साथ गाद और बाकि दादाजी ने 1 मिदंगाकीफोटो खींची और कहा अगर भगवान, तुमे सफलता ने वो ग्रंथ क्या करना प्रकाशित करना। p्रपाजीकemn book so अत्यंत कठिनाई से उन्होंने 1 ै वन मैन आर्मी के सदस्य होते है l man rape was वल मैन आर्मी 2 कमरे थे राधा में रहने के लिए और 1 टूटा वा tera tap tap dilli आते san और उन दिन में थर्ड क्लास डब्बे होते थे, आजकल तो थर्ड क्लास नहीं है, भारत में तो थर्ड क्लास के टिकट देने आते थे, और चीवीवाणे इलाके में जहाँ पेपर का खेलते थे और छाप के अकेले जाते थे, और रॉबर्ज कठिन स्थिति में इस कार्य को किया। जब उन्हें प्रधम्स्कनकेची से भारत को प्रकाशित करना था, तो पैसे को की तलाश में इस a bomb जा से पापाजी बmbेiश्रीवतबधाजी को मिलने के ब a a a a s परावालेक्याकिया उस बिल्डिंग के सीडियों में बैठ, 4 घंटे सिरे में बैठकर tonk prapati lodi e nica sexi formie con mi a इस प्रकार भीगमागबालके propjiebgteeng्lish me forscandocapa second can, japa con and prop bad for cat proपाanowihavbpns फाइट मेरे पास वो हथियार है, जिससे मां और उन्होंने पूरा प्रयास किया। पश्चिम देशों में जाने और पश्चिम देशों में बड़ी कराई यात्रा के भी भारी यात्रा करते हो। रास्ते में 2 हार गया। प्रबल ने सोचा में, ो सफल नहीं होगी तो भगवान प्रकट हुए देवता के साथ राजधानी के down और उनके पिता उन्हें के पास जोशी ने कहा था। 70 साल की आयु में ये बाल विदेश जायगा में क्या करेगा। soira bare tsाieउन्होंने अनेक कठिन शीत का सामना किया a, a, a, a, a, guru गुरू का आदेश a और उन्होंने लगभग 70 गधों का अनुवाद किया अंग्रेजी भाषा में। और इनका अनुमान आगे विश्व की हर पुष भाषा में हो गया है। तो हमारे फलतगुरुनेबल दिया था इस पर प्रिंटिंग, इन डिश तो कई बार भर पूछते है क्या कारण है इसे? लोग इतना परिश्रम करते हो, घंटों बांटने जाते हैं, परिश्रम करना पड़ता है, न
हा या ना
परिश्रम करना। आप तो आपकी इच्छा होगी की जिस व्यक्ति हम किताब दिखाए वो किताब ले वैसे होता है। क्या? 10 आदमी को किताब दिखाओ? 1 थोड़ी रूचि प्रा को को इतना बल क्यों दिया जाता है? कहते हैं प्राभाजेका आदेश था, आदेश क्यों था, ग्रंथ में है भगवान की और भगवान की वाणी को पढ़ोगे तो क्या लाभ होगा? आपको असली ज्ञान प्राप्त होगा। तो आज हमने आपको 2 श्लोक पढ़कर सुनाए थे। मन भगत, भगत का जो ज्ञान है, सबसे उतम ज्ञान है। पहले शो में कहरे कि जो सिद्धार्थ, जिसमें भगवान के विषय में कोई चर्चा नहीं हो, वो सिद्धांत क्या है, को के स्थान को से सुना है। और जो ग्रंथ आपको ज्ञान दें, भगवान के विषय में, जीवन के लक्ष के विषय में, उस की तुलना की गई है। तो आज समाज में किताबों की कमी नहीं है। रूस जैसे देश में हर चौथी दुकान है, किसी किताब की दुकान है। पर वो जो सिद्ध है, जो ब्रश है, उसमें कुछ ध्यानिक होगा। आप लोग पढ़ लो, ये किताब को कोई ध्यान नहीं, ग होगा। जबाब भागवतम पढो गीता पढ़ो, जिसमें ज्ञान के भगवान में ज्ञान है, उस गान, तो क्या क्या परिणाम होगा? आपका जीवन जलता तो वापू और बाली वापू है। जब कोई मानस आपको अब देश देता है और भारी हैं, उनकी भानी का पल, उनमें बोला क्या है? तो वा पुर वाली वाली का खास है। तो क्या कारण है कि इन के विषय में इतना प्रयास करते हैं? क्या कारण है कोई बताएगा आप में से कितने भक्त बुक डिस्ट्रीब्यूशन किया है? लगभग सब ने। तो इन गंधों में क्या है, जो दूसरे किताबों में क्या है?
बोलिए, बोलिए,
बोलिये क्या है, ज्ञान है। समाज में देवी ज्ञान की कमी है। इतनी किताबें छपी है, देवी ज्ञान की कमी है। और इस इन ग्रंथों के अध्ययन से हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। उन्होंने अपने जीवन को सुधारा है। तो इन ग्रंथों में है भगवान की वाणी और भगवान की वाणी के साथ महान संतों का तातपर्य। औ ये जो मान सं है, उनकी वाणी, उनका देश भी बड़ा महत्वपूर्ण है। क्यूंकि वो हमे समझाते हैं कि जो भगवान से कहते हैं, उसका अर्थ क्या है? तो आज हम देखते हैं सारे विश्व में लोग जुड़े हैं कृष्ण भक्ति के साथ। और अगर आप उनसे पूछो आपका पहला परिचय कैसे मत करो? मैं बार मदद 5 साल मे ये शा तो भक्त होगा, देवरी। तो ये हुआ कोई जबरदस्त भक्ती में हम जुड़ते हैं अपनी इच के अनुसार, अब रहते हैं अपनी इशा के अनुसार। कोई कानून जुड़े देश में अगर आप भक्ति नहीं करोगे, आपको जेल में जाना पड़ेगा, ऐसा कारण भर तो अच्छा है। ऐसा कारण है क्या
थैंक यू महाराज नेक्ट क्वेश्चन है महाराज ये अयोध्या से भाग आए हैं उनका नाम अनुवाद शुक्ला उन्होंने प्रश्न पूछा है महाराज में 1 प गुड कंपनी के सीनियर मार्केटिंग एग्जिट के बार बार कोस बताने करता हूं, जहां मुझे पट से मार्केटिंग कस्टमर डीलिंग के दौरान बार बार झूठ बोलना होता है गीता अध्यन के साथ झूठ बोलना उचित नहीं है तो इसे कैसे सही
करे या है झूठ की कई डिग्री होती है आप से वो रिसर्च करना पड़ेगा 1 छोटा वा प्रॉपर्टी कहते है और कहता है तुम्हारे लिए वह ज्यादा दफा नहीं मारा मैं स्पेशल डिस्काउंट दे रहा हू प्रॉफिट नहीं करवाएगा ज्यादा कैसे चलेगा ये हुआ छोटा jod बडा जूट हुआ आधे अनूनथोड़ाअलगहै छोड़ा बोला bada sas वाह वाह सबसे अच्छा है ट्राई to कooबडाjoteतुमको डिसकाudेobra समझे find a get a car at last last last key mamada
दवा तुम्हारा 1 प्रश्न है जो की आज के परिपेक्ष में है इस कांड के प्रचारकों में और आरएसएस के प्रचारकों में क्या अंतर कई बार भक्तों को बोला जाता है कि आप लोग सस्ती नहीं उठाते केवल साफ साफ तो करते रहते हैं तो इस चीज को कैसे समझा जाए इस कांड के प्रचारकों में औआरसिसकेपचातोमें क्या आगर
हम आस के कुछ है हम खुश हैं कि वह हिंद सुरक्षा में रूची और साला पालन करते हैं अकतीकेसतारेनियम और हमें पालन करके संदेश देना है यह प्रैक्टिस और अंतर पाने भर सेवा करते हैं मेरे ख्याल से wocarneयmनहीलिजा for a calle de schat yes डिफरेंस
थैंक यू सो मच तो भार जी का बहुत बहुत धन्यवाद करेंगे बार जी ले वर्कर के साथ बहार जी का विशेष आसीदेशतोवाजके साथ पाल जी ली इस आंदोलन के बचाव में हमारे गुरु महाराज ने 50 वर्षों से ज्यादा समर्पित किया है और पर्सनल मोमेंट साथ में रही है धोभाजेकेतोऐसे मोमेंट धोभाजगेगुरमहाराज ने हमारे साथ शेयर किए गुरु महाराज का बहुत बहुत दिल से आभार करते महाराज पहले बिकती आई दूसरे दिल्ली आए और आज भी हम हमारे साथ है से है महाराज जी हमारे साथ हैं हमारा हमारा उस को
14 दिन ही है
चौथा चाहते है की अपनी बात 14 बुरी हो तो इसलिए हमारा क्या है अगली बात अगली बात बात रिया हमारे बाल सारे गोल हो गे हे रिशा
भूलना 1 है रोज सोना बना का जाप करना कठिन नहीं है और दूसरा कोई बीदरइदकोरोजपरना 1 शोर कम से कम भूलोगे नहीं को वीडियो में रिकॉर्ड हो रहा भूल जाओगे तो आपको आपका वीडियो दिखाना पड़ेगा