विश्व में आध्यात्मिक क्रांति की आवश्यकता | SB 1.5.11 | Rohini | 28 Mar 2022 | Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī

In this extended Hindi discourse, the speaker (Gopal Krishna Goswāmī) argues that contemporary society is suffering from a lack of genuine spiritual knowledge, which he terms a "spiritual revolution" that must be initiated. He stresses the centrality of authentic scriptural study—especially the Śrīmad‑Bhāgavatam and the Bhagavad‑Gītā—while acknowledging that many printed editions contain errors or are incomplete. The talk underscores the importance of a legitimate guru‑paramparā (teacher lineage) to preserve the purity of the teachings. Historical anecdotes illustrate how early devotees established printing presses and distributed texts in the United States, Canada, England, and elsewhere, often facing logistical and financial obstacles. The speaker identifies modern challenges: people’s limited time, the tension between online and offline propagation, and the need for organized volunteer efforts to distribute books, conduct reading programs, and hold devotional gatherings. He links the spiritual deficit to social unrest, citing the India‑China border conflict as an example of a world lacking inner peace. Throughout, the audience asks practical questions about maintaining personal bhakti practice, balancing service (seva) with daily duties, and fostering community engagement. The lecture concludes with a call to action: systematic distribution of authentic scriptures, regular devotional practice, and collective effort to restore spiritual consciousness for societal harmony.
Chapters
oamupabndeamshre rupam s हे करशटकनजशचलगगी anta
sri
krishna catania साशा सब भक्तों का हार्दिक स्वागत है, पीछे सुनाई दे तो श्लोक है। और श्लोक में ये कहा जा रहा, ये शीशा दी जा रही है कि मा भाव होना, भवानी संदेश को छापे काग वह सिद्धांत जिसमें भगवान के कान नहीं होता, उसका पढ़ने का कोई लाभ नही आप। व्यासेन शास्र का वर्णन किया था जब ने, क्या, कुछ की, कुछ कमी और नारे मोदी ने कहा कि तुमने दिया में ज्ञान दिया, शि भक्ति का वर्णन है क्या? और फिर उन्होंने हमें श्रीवर भवन का उतम ज्ञान दिया है। तो पिछले श्लोक में बढ़ते हो। वो साहित्य जिसमें परम भगवान के विषय में चर्चा न हो। वो जो साहित्य है, वो पढने लगी है। जैसे कि में साइ कववे बैठते हैं, यह गंध हो। इस प्रकार देश जिसमें का ज्ञान वो पढे। आज स्कूल में ये कहा जा रहा
है
कि समाज की जो प्रजा है,
जुड़ी हुई है
बौधिक कार्यों में और बौद्धिक कार्यों में, पढ़ने से आप अपने आप को संतुष नहीं बना सकोगे। तो यह कहा जा रहा है कि वो साहित्य, इसमें पर भगवान में ज्ञान है, वो है हित में जो उसका है, पर भगवान के ज्ञान नहीं हो, उसका पढ़ने में कोई लाभ नहीं, सी बुकस्टोड़मे जाओ। आप, आप देखोगे, वो दुकान भरी हुई है। मैं अखबारों को देता। वो इस साहित्य में भगवान के मजे में 1 शब्द मिली हो तो उसका कलाम, उस साहित्य को आप पढ़ोगे। तो इसमें कुछ लाभ नहीं मिलेगा। पर वो सहित जिसमें परम भगवान के विषय में, पर भगवान के क्या क्या कहते है, जन्म दोनों ही में वो सारे थे, जिसमें परम भगवान विषय में ज्ञान है। वो वो हमें असली संतता, so शब्द का रथ है। समाज में क्रांति ला रेवोलूशन? और आज समाज में इसका ध्यान क्रांति? जिसके द्वारा समाज में ध्यानिक क्रांति आई, जिसके द्वारा होगा, जो चरित्र है, उसे। तो दूसरे शब्दों में यह कहा जा रहा है कि वो सहित जिसमें पर भगवान या उसकी तैयारी में कोई कमी भी रह गई हो। किताबें छपती हैं, जतरा भगत तैयारी है, जिसमे पर हम भगवान के कई बार आप देख सकते हैं कि छपाई की दृष्टी से कुछ कमी रह गई है, कोई स्पेलिंग मिस्टेक है, कोई प्रूफ फीडिंग। पर हमें यह नहीं सोचना चाहिए। इस में स्पेलिंग मिस्टेक है, यह सहायता में नहीं पढ़ना चाह में से सहायता पढ़ना चाहती हूँ कि इसमें क्या है, इसमें ज्ञान और धन। तो समाज में अगर किसी भी विषय की कमीं है। वो सहित जिसमें भगवान, वे ज्ञान है, कुछ कमी भी हो। छपाई के समय छपाई के कारण छपाई में कुछ कमी रह गए। और जब उसे मन, उसको आदर देना चाहिए और उन सादा को पढना चाहिए। तो बाजी भी कहते हैं। ये जो पेड़ है, जैसे साल कैसे छपता है, कागज के ऊपर है तो कागज कैसे बनता है, कागज बनता है, पेड़ो को मार कर, पेड़ को पेड है, उनके बाद bat they also have a li। हमें यही सोचना चाहिए। तो पेड है। उनके बाद कोई जीव नही है, उनके कुछ जो पेड़ हैं, उनका भी लाइफ रहता है। और कई साल पहले 1 बड़े वैज्ञानिक ने यह साबित किया था कि जो पेड़ हैं उनके बेड उनकी है और पेड़ हैं, वो 1 दूसरे से कम्युनिकेट कर लेते। तो अगर हम सोचें पेड़ को काटते जाते है। devoliftरीजआlsो लाइफ तो वो साहित्य जिसमें परम भगवान का गुणगान, परम भगवान की रचना हो, वो साहित्य जो है, हमें जरूर पढना चाहिए, कोई में भी कमी भी है। गलतियाँ हो गई। जब बाजी ने श्रीमान का कदम स्तन प्रकाशित किया था, वह भारत में विदेश जाने से पहले बाबा जी ने भारत में क्या प्रकाशित किया था। 3 भागों व बड़ी कठिन स्थिति में तैयारी की थी। पापा जी का निवास का स्थान था। प्रापा मत में पकड़ते थे, गाड़ी और कहाँ ते थे, दिल्ली पहुँच कर कहाँ जाते थे, यूँ जाते थे और कागज को खील कर क्या करते थे, देते किताबें छप जाती थी, क्या कर देते थे। उन किताबों को बेचने का प्रयास कर मार मैना
ो
अगर आप को ना पडो तो ब्रह्माजी ने पराजित की थी। ले जाने से पहले आप देखो गे। उसमें कई टूटे हैं। वइंनिगकिताब के हाई क्वॉलिटी के ने कई फैलसे पर जी मरी जो साहित्य है, उनसे उसकी आवश्यकता है। वो जो साहित्य है, उसमें क्या है, विज्ञान है। ान के सहयोग से समाज में क्रांति लाना चाहे तो प्रक्रांति कोई राजनीतिक नेता दृष्टि से गांधी लोगों के हृदय को बना। तो अगर हम आध्यात्मिक साहित्य पढ़ेंगे, वो साहित्य पढ़ेंगे, जिसमें परम भवन उसको पढने का हो गया जैसे आप rita क्या लाभ होगा। इस कलियुग में दोषी दोश है, ब्रेक गुण है। इस कर्युगमें तो अध्यात्मिक ज्ञान की कमी है। और ध्यान ज्ञान की कमी क्यों है? हमारा समाज के प्रजा ये नही सोचते, यह महत्वपूर्ण है, हम ही जाती। यह बड़ा महत्वपूर्ण ज्ञान है। तो क्या किस चीज की कमी है। जब प्याज ले आये गुड नाथ मुनि जी। नाथ मुनि ने कहा कि निराशा का क्या कारण है? तुम वैसे गंद की रा नहीं। इसमें केवल परम भगवान के गुणों का वर्णन है, भगवान के लीला का वर्णन है। और श्रीमद भगवत में क्या है सबसे उत्तम काम, ये श्रीमत भगत है, क्या है? इसमें देवज्ञान आ रहा है, कैसे आ रहा है परम्परा के द्वारा, दिव्यज्ञान आ रहा है गुरु परंपरा और 1 जीवन में क्या प्राप्त होता है दिव्य ज्ञान? वो जब कोई फल पेड़ की चोटी से नीचे भेज कुछाया जाता है, अलग अलग व्यक्ति के द्वारा, विज्ञान क्या परिणाम होता है? वो फल तथा रूप नीचे पहुंचता है। अगर उसे फिर की उंचाई से कोई फेंके तो क्या परिणाम होगा? तो जमीन पर पहुँचेगा टूटे। अगर आप अलग अलग व्यक्तियों के द्वारा पहुँचाओगे तो यथा रूप कहते हैं। उसी प्रकार कवि दिव्य ज्ञान पूछा जाता है प्रमानिक गुरु परंपरा के द्वारा। तो हमें रूप, यह श्रीमत भगवन का किया ज्ञान है। सबसे पगवा ज्ञान, श्रीमन भवता ज्ञान जो है। सबसे पगवशिवज्ञानयहा पढ़ते हो कि हमें आध्यात्मिक ज्ञान में रूचि दे। आध्यात्विज्ञान क्या प्राप्त हो? इसके द्वारा क्या करना चाहिए? हमें धन में ज्ञान प्राप्त करना चा। ये पूछना चाहिए जीवन का लक्ष्य क्या है? तो उनका उद्देश्य क्या है? और ऐतिहासिक ज्ञान बिना समाज। तो हमारे जो चाय हुए हैं उन्होंने प्रचार के काय, उन्होंने ग्रंतो, कई बार लोग पूछते हैं तुम लोग इतने, उस से गलत को क्यों बाटते हो? इसने बाटते है जो नशा ये जो धार्मिक ज्ञान है, उसे उसे स्वीकार करने से क्या लाभ होगा? शुद्ध ज्ञान और इसके द्वारा अध्यान क्रांति आई तो आज समाज में ध्यान क्रांति की आवश्यकता है। ऐसे जैसे इतिहास में कॉम बात करे किस विषय का, इस विषय का ध्यान में ज्ञान दोगे तो उसके अध्ययन से जीवन सुधर। पापा जी ने कहा कि जो ग्रंथ है जैसे हम गीता बाटते है, बाग भरते हैं, उनमें 1 स्लो ध्यान से पढ़ लो। अपने जीवन में उतार। तो आपका कई बार लोग पूछते हैं लोग गंध क्यों पीछे कार्य है क्या? कारण कारण यह है कि समाज की प्रजा को क्या देना है तो ज्ञान की कमी है। हमने बार पढ़ा हे भारत के कई राज्यों में गीता का कोर्स सिखाना शुरू करने लगे। अगर करें तो अच्छी बात है। जब भारत को प्राप्त हुई थी, उस प्रौपर मानभघनेाप्रॉफा ने कहा कि आप गीता गीता का गुनगान करते हो तो a का से sco तो आज क्या े। फिर आध्यामिक ज्ञान पर ध्यान, वि ज्ञान कैसे प्राप्त होगा? अध्यामिक ज्ञान प्राप्त होता है। अगर हमें ज्ञान प्राप्त करे। इससे माने गुरु परम्परा पुराने गुरु परंपरा के द्वारा प्राप्त करोगे तो ज्ञान मिलेगा और प्रभाजी विवार व्यक्ति डॉक्टर की दवाएं अगर ले नुक्से के अनुसार तो उसका परिणाम होगा। अगर आप अपने मनमानी तरीके से लोग उसका लाभ नहीं तो यहाँ 1 कहा जा रहा है? पर भगवान जो हैं वो दिव्य है। और यहाँ भगवान के नाम, भगवान की दिलाए, भगवान के अनेक रुप किया विषय में है भगवान का ban rup, भगवान के कई गुण, wrna पुराना पुरुष,
हम
भगवान जो हैं वो अद्वेत मतलब कि विधेनेरआत्मा में कोई अंतर नहीं है। आपके हमारे देर, रात में अंतर है। भगवान कि देर आत्मा में कोई अंतर नहीं है। चूत जूतम का क्या ह, उनमें कोई कमी नहीं है, कोई गलती नहीं हो सकती। भगवान संदेश है। हजारों साल पुराना है। भगवती संदेश। बहुत पुराना गीत में भगवान कहते है मैंने ज्ञान सबसे पहले दिया था किसे और समय के साथ ये ज्ञान कुम हो गया था। मैं फिर रहा हूँ क्यूँ मित्र और भक्त हो। इसलिए ज्ञान को समझ पाओगे। तो ये हैं दिव्य ज्ञान और इसे समझने के लिए हमें प्रामाणिक प्रतिनिधि द्वारा, काम का प्रमाणिक, प्रतिनिधि द्वारा पूछे
लोग पलते हैं।
तुम्हारे पगतगितमेंगतयारूप क्यों लिखा है? पापाजी भूमि क भूमिका में समझाते हैं? क्योंकि उन्होंने उसी विचारधारा से संदेश दिया भगवान का, इस विचारधारा से भगवान ने बोला का, तो भगवान का, जो गीता का उपदेश है, हजारो साल पुराना है। 5000 साल पूर्व फिर से ज्ञान दिया था, क्योंकि ज्ञान खो गया था और अर्जुन को क्यों दिया, पर सन्यासी नहीं है में 1 गुना लोगों के मित्र थे। और इसलिए सह को समझ पाओगे। तो जब हम परवान के विषय में चर्चा करते हैं। हमें यह भी स्वीकार करना चाहिए।
न।
mata pita उन्होंने कहा कि सुधार बजलरूपग्रेंडकउ्होंने, तुरंत ही बच्चे का रूप भगवान जो है, छूता है और छूता कभी किसी प्रकार की गलती नहीं। साधारण। व्यक्ति ज्ञान लगता है पैदा और उसे आप अध्यात्मिक ज्ञान नहीं कर सकते। वो इस ज्ञान में अनेक 2 ने कमी है। और जो द्यातविज्ञान है उसमे कम्पलीट son को। ये का आधा पुरुष आधा। कई साल पहले मेरिका में 1 केस उड़के हुआ था, जिसमें मने की पारी आरोप लगा रही थी। ये हर किस का सिद्धांत तो कल्पना है वासिक word me on foto may or to a bagan ले पुरुष है ही दिखा। क्योंकि अभी बहुत बुद्धि से वो ये नहीं समझ सकते कि पर भगवान के लिए कोई कार्य नही है, वो चिंता है, छूता है, वो जिला का पढते हो। भगवान ने पूछना मना किया तो कोई साधारण। समाज में कोई भी बच्चा ऐसा कार्य नहीं कर सकता। आप समझ सकते हैं कैसे? कैसे समझ सकते हो? सेवा था सेवा के सेवा के माध्यम से। भगवान के अनेक
को
है कि उस आध्यात्मिक पुरुष के विषय में कुछ कमी हो तो उसे उसका प्रभाव पड़ेगा।
और
ब्रोवर विदेशी सुविधा। तो उनके कई भारतीय लोग कहने लगे, भक्त स्वामी के विद्यार्थी ठीक उचारण नहीं करते है। संस्कृत के श्लोकों के चाल में कमी रह जाती है न। ये श्लोक का उचालनकेरका। उनमे कुछ कमी भी होगी तो भी कुछ बुरा नहीं है। क्यूंकि? वो सच्चाई के साथ नमो का पालन करते हैं। तो भगवान जो है वो या तो भगवान अपने आप को अध्य पुराना पुरुष
है।
सबसे पुराना पुरुष, आदि पुरुष सबसे पहले। पर वो देखते हैं कैसे? now you see prachin bon दिव्य, उनका शरीर मारे जैसा बुरा नहीं होता। हम बौधिक जीवन में सबका शरीर नेता है। और क्या होता है, लाल भी हो जाता है, है। पर भगवान का जो दिव्य है, शरीर है, वो हमेशा रहता है। वो समय के साथ बुरा नहीं होता। तो यहाँ कहते हैं ध्यान, धार्मिक ज्ञान अर्थ है। पर भगवान के मशीन में उनका गुंगा भागवत किताब क्या है? भगवान का उपदेश श्रीमद भागवतम में क्या है न कि नीरा का वन प्रॉपली गए थे। सबसे पहली पुस्तक स पर उन्होंने काम किया। बोला भगोदमकासाप्रॉपाली ै भागवतम को प्रथम भाग को प्रकाशित किया था। भारत में उजप्रापाजीके बाद कैलास प्राप्त हो गया था। इन भागों में प्रबंध सोचा अमे इतिहास है। इसके आधार पर प्रचार, कर, गा जैसे युद्ध के मैदान में आपको अपने हथियार चाहिए। पवार ने सोचा कि अभी ध्यामिकहथियारथियार है, अमेरिका, जाने अमेरिका। सबसे पहले उन्होंने कृष्ण बुक का निवास किया। प्रभा जी चाहते थे कि वो प्रमाणिक रूप से प्रकाशित हो। भगवान की चर्चा करते हैं। अपने विचारों को जोर दे दे, वो प्रभाजी की इच्छा देगी। इन ग्रंथों में क्या हो? बिलकुल प्रमानिक ज्ञान। तो proपाजीनेप्रयास probाजीकीइच्छा kisnbokकbrेhi छापा। और आप लोगों ने पुरानी कृष्ण बुक देखी है। पहली बार सिल्वर सिल्वर जैकेट को। वो। तो उन दिनों में पापा जी ने अमेरिका, कैनाडा में कृष्ण भर्ती की सामना के बाद अपने शीश को भेजा इंग्लैंड में प्रचार आराम करे तो उन दिनों में इंग्लैंड में 1 रॉक ग्रुप था। सो मेरे बीज थे, लगभग दे जामे प्रोग्राम लाखों लोग आते jorge सुनाई जॉज जॉजहैजनतोहमारे पापा जी, श्याम सुंदर उन्होंने जॉर्ज हरिजन के साथ अच्छी डोली बनानी थी और जॉर्ज हैजल शुरू कर दिया था। सो पापा ने कहा tel jorge to for probe bilkul, na bga hoga kitab the to gltemabaगa dont worry घबड़ा गया था कैसे, जॉर्ज को बोलूँ ये किताब को महंगे रूप से पुरुष ने कह दिया न्यू yok तो आज की योल एकदम क्या हो गया। तो प्रोपर्जीने इस दसवीं खन को प्रस्तुत किया है साल में पता के रूप में प्रोपर्जीचाते ऊपर भगवान के हिलाए है, उनका वर्णन हो किस प्रकार वाणिक रूप से तो ये ज्ञान अगर हम अधर रूप प्राप्त करें। इस ज्ञान का प्रभाव पड़े तो समाज में किसी की कमी है, आध्यात्मिक सिद्धांत की कमी है। जैसे की कई बड़े बड़े माह विद्याला है और इन मा विद्याल में 2000 से अधिक भाग है। अमेरिका में university है जहाँ की 5000 से ज्यादा बिबाह पूछो आपके पास साहित्य है। पर भगवान की में आपको क्या दिखेगा क्या है? ध्यान दे जान। ये है समाज की कमी। इसलिए जो चाय है उन्होंने बल दिया है किस पर इस सिद्धांत पर में इन ग्रंथों को पढ़ना चाहिए, उनको प्रकाशित करना चाहिए और वेतन भी करना चाहिए। बाकी सिद्धांत जी है। कई प्रिंटिंग प्रेस भी छापे थे, हुए थे और वो पहले भक्ति ठाकुर से पहले महान चाहा जिन्होंने आध्यात्मिक ग्रंथों का मिसन की चर्चा की। भती ठाकुर ने city के उस ग्रंथ को अगर आप देखोगे बहुत सादा कागज था, सपाई भी बहुत। जब भी उन्होंने इस गंध को शो की मां में ज्यादा में और कई ने गंद को पढ़ा। तो आध्यात्मिक ग्रंथ जो हैं उनको आप 20 साल बाद भी पढ़ सकते हो। उसका असर कैसे होगा? जैसे कि कई उदाहरण है किसी ने गीत और 10 पंद्रह साल को खोला भी नहीं। जब बाद में खोला से क्या प्रभाव हुआ। सेवा प्रभाव होता है तो ध्यान ज्ञान में प्राप्त होता है। ध्यान में अदन और अगर। पूरी साहित्य की 7 में धन वि ज्ञान है। ज्ञान द्वारा अमोल शिक्षा मिलती है। क्या होना चाहिए जीवन गलत माता प्रथम ये जो ज्ञान है, ये सबसे तो इस काल के भक्त हैं। कोई रुचि नहीं लेते, बहुत प्रकाशन है। जहां कि भगवान क्या उनका नहीं हो। या पापा जी समझाते हैं कि आज हमने समाज को सुधारना है और कैसे सुधारोगे। अध्यात्मिक ज्ञान के वितरण के द्वारा ध्याता बाटोगे तो उससे क्या लाभ होगा? आम लोगों के हृदय को बदल सकूंगा इसके द्वारा क्या होगा? अध्यात्मिक क्रांति तो प्रभाजी ने इस श्लोक के साथ 3 पेज का पूरा पोर्टर का है। इसमें प्रभाजी कह रहे हैं कि ये ध्यात्मिक साहित्य की बहुत आवश्यकता है, चाहे उसमें हो यह ्यात्मिक सहिता की बोला। इसलिए 5 साल में वावधरा ञान का अध्ययन होना चाहिए। तो ब्याज से ने पूछा था क्या है में निराशा का कारण? मुझे क्या कहा? तुमने शूधभक्ति पर बदल दिया और शुद्ध भक्ति का ज्ञान शिव भागवत में शुल्भक्तिका ज्ञान है। और इस ज्ञान से हमें ज्ञान शिक्षा मिलती है। जगह में जन्म मिल की मदद से छुटकारा चाहिए। अगर हम जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करना चाय तो क्या आवश्यक है ध्यान में ज्ञान का अध्यन और जो ज्ञान है चाहे किस रूप से प्रकाशित प्रकाशित करने में कमी हो, इस ज्ञान का लाभ आपको मिलेगा तो आध्यात्मिक ज्ञान हमें प्राप्त होता है। इसके द्वारा साधु के द्वारा साधु साधु। तो ये साधु की संगत में 2 माध्यम से मिलती है। 1 है भक्साधुभकसाधुको मिलते हो, मंत्र देता है, देश देता है, दूसरा है। हम लोग किताबें बाँटते हैं, किताबें द्वारा लोगों में जागृति उत्पन्न होती है। तो आज समाज में अगर किसी की की कमी है, कि सुष की कमी है। पापा जी तारे में चीन युद्ध का वर्णन कर रहे है। ये जो युद्ध, जिसका वर्णन हो रहा है, अब का युद्ध, यह युद्ध हुआ था नाइन टू में, प्रभा जी कह रहे हैं समाज में कितनी शांति है? probe 1 समय था भारत चीन mit, नइntीnxyनका लिखा था, नाइन फिफ्टी, नाइन है। तो यह साबित करे हैं दादपुर में कि समाज की जो स्थिति है, वो बिगड़ती जा रही है, युद्ध बेचैनी है, हर जगह आप देख रहे है। तो इस अशांत वतन में शांति लाने के लिए क्या आवश्यक है? क्या आवश्यक है विज्ञान ध्यान, विज्ञान कहा प्राप्त होगा? अध्यान की रचना कौन करता है भगवान? और जो हमारे है वो हमें समझने में सहयोग देते हैं। वो उसी विचार धारा से उपदेश देते हैं। इस विचारधारा से भगवान है या। तो श्रीमन भागोतम शुरू से अंत तक क्या है ध्यान में ज्ञान और श्रीमन भगत में आप क्रमाकर के विश नहीं पढते करमाकर का क्या, भगवान से 1 प्रकार का सौदा करना मैं ये अर्पणकर मुझे। तो जो भागते है, इसमें कोई रूचि नहीं। चेते कृष्ण भक्त हैं निष्काम मुक्ति, मुक्ति सीधी कामी, जो कृष्ण भक्त हैं। 19 का भाव से सेवा में जुड़ते हैं। भगवत साहित्य है। इसमें। परम भगवान के विषय में ज्ञान है। पर क्या किया गया निस्काम भाव? जिस काम भाव से वाली सेवा में जुड़ना, जिस काम भाव और वो संतोष रहते हैं, शांत रहते हैं। क्योंकि उनका भाव क्या है? जिसका भाव से भगवान श्री बोला, इसकी तुलना में भुक्ति मुक्ति सीधी काम ये जो कही है, करमा कर करते हैं, उनको चाहिए उनको ये जो है, इनका, उनकी क्या इच्छा है। यह बहुत ही लाभ है। बहुत सूम ऐसे व्यक्तियों मन हमेशा शांत रहता। rippen froud vedic noleg उसका पूरा लाभ है। तो पrपाजीअ 3 पेज के तारे में साबित कर रहे हैं कि हमें किस चीज की आवश्यकता है और न वे ज्ञान और ध्यान में ज्ञान होगा। कि स रूप स्वीकार करे तो फिर उसका पूरा प्रभाव पड़ेगा, उसका पूरा लाभ न सकोगे। तो सर क्या कमी है ध्यान ज्ञान के अफसोस की बात यह है कि भौतिक समाज में अगर आप किसी या भौतिक विषय पर प्रवचन दे रहे हो, हजार log आ जाएंगे, आपका भ्यास होगा। आप कई बार अपने रिश्तेदारों को निमंत्रण देते हो।
आइए
बहाना दे रहे बोला क्यूंकि हमारा जो टेस्ट है वो है बात, तो अध्यात्मिक गाना में बकैदा पढ़ना। ऐसे इस कार माला में भगतमकाअध्ययन किया जाता है। ल on nasa nimit rup का क्या मेल है, बहुत आकर्षण है वो करेगा आध्यात्मिक गति के लिए 1 सीधे मा खूब ने सनातन सामी को बड़ा गहरा ज्ञान दिया था। पर सुनाते समय उस समय के प्रसिद्ध राजा के राज्य का शासन कर रहे रहे। पहले स्वामी को ज्ञान दिया सनातन सनातन 5 की चर्चा की। और सबसे पहला क्या था साधु। ध्यान दें कि उन्नति के लिए यानी ज्ञान के ले सबसे महत्व क्या है या साधु के संग हो। सका अर्थ है साधु किसे कहते है जो कि यथलूपभगवानकीसंदेश का आगे इस साल प्रचार करे तो शुद्ध शालू की प्राप्त होगी और शुद्ध संदेश मिलेगा। वो क्या है इस कर पढ़ते ध्यतोविश्णु। इस बंद का साधन किया था भगवान का चंदन lo साथ सत भगवान का
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ले में वो ही लाभ मिलेगा जिसके द्वारा राम ये है उपाय तो साल में ही नाम की महिमा विशेज्ञा नाम के आगे शिवन भगवत का अध्ययन, भगवत का अध्ययन भी बहुत महत्वपूर्ण है। अगर रोज नहीं पढ सकते में क्या करना चाहिए? पिछले 2 सालों से इस्कॉन के भक्त प्रयास कर रहे हैं। भगवतम सेट को काटने के लिए आप में से कितने भक्त हो जिनके पास पूरा भागवत सेठ घर में है। सपा जी ने 1 पत्र में लिखा था दिल्ली में अब हमारा भाव होना चाहिए। ये भगवत हम दोनो बाते क्या कारण है? क्योंकि इनमें है िविज्ञान िविज्ञान जिसमें कोई कमी नहीं हुए हैं। इसे हम जी तो पढ़ोगे तो ज्ञान प्राप्त हुआ हो जाएगा। आपको बुखार होता तो बुखार का इलाज कैसे करते हो? कैसे करते हो? तो ब्राहमण ने श्राप दिया था। rassie sikar as any co, uti rose उस कुटिया में आए वो आए थे। इस भावना से मुझे जल्द मिलेगा। वो कुटिया में चिंतन और ऋषि ने राजा की तरफ देखा भी नहीं। और कुछ आदर दे। ऐसे तो अगर शत्रु भी आपके घर में आये। आपको इसका स्वागत करना है। सबसे बेहतर है स्वागत करो बिठाकर को कुशाल लीजिएगा। पर अगर आप नहीं कर सकते तो कम से कम मीठे शब्दों से सवागत हो। पर ये सिरे न उन्हें बैठने का स्थान दिया, न जल दिया, न मीठे शब्द। बोले ने अपमान मसूस किया हो जाने थे। उन्होंने देखा, मयवाशामउसेअपनेधलू से उठा कर उस ब्राह्मण ऋषि के गले में या उस से रिशी का बेटा था। भारत खेल रहा था। जब उसे देखा कि राजा पिता की कुटिया से निकलकर घुसे में है, तो उसमें रियास राजा ने क्या चर्चा की तुहा क्या देखा। देखा कि पिता के गले में। सिंह ने कहा कि ये है आज के जा शक्ति। उन्होंने क्या, उन्हें श्राप दिया जा। राजा का ध्यान जाए तो जग्समीकरिशीको पता लगा कि बेटे ने श्राप दिया। बड़े क्रोधित हुए। उन्होंने कहा कि तुमने गलती कर दी। इसके पुत्र राजा को श्राप देता और परेश राणका प्रश्न किया था। कृषि राजा से उनके प्रभाव से 64 हजार संत महात्मा मिनट में पहुंच गए। हंघाकीतटपरजहाँ की प्रेक्शनब्रांज मृत्यु की तैयारी कर रहे थे। ऐसे तो देखा जाए लाननव्यक्ति को
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सेकेंड मे नोट तो प्रेशर ब्रांड बड़े ध्यान से क्या सुन रहे थे रेशमा ने कहा कि मैं मुझे इतना आनंद आ रहा है ये अमृत वाणी को सुनकर मेरी जो भूख प्यास थी, साल क सूचना दी थी उन्होंने तैयारी की, जैसे की अगर आप कैंसर की बीमारी तो हम तैयारी तो तैयारी की। उस समय के सारे पर संतों को निमंत्रण देगा। क्या कहते हैं इतना आनंद रहा था अमृत वाणी को सुन कर जो बहुत ही प्यास और भूख थी की बृजवासी की भगवान ने गोधन पर्वत को उठाया, इसलिए पक्षों की सुरक्षा के लिए और पूरे गोदान को पर्वत को बाय हाथ के छोटी उम्र के नागपुर पर के बल पर उठाया। जो ब्रिजवासी थे वो सब भगवान के काता के अंदर आ गए। और बड़ी तेज बारिश बरस थी में करो था बिशवासियों के विरोध में थे कि उन्होंने बालक ने उनके अंदर जज को रुकवा दिया था। सो जो ब्रिजवासी थे वो धार पर्वत की छाता के अंदर थे। और 7 दिन के लिए कितनी तेज बारिश बढ़ थी। और पानी का मूड 1 खम्बे जितना भारी था। और भगवान पूरे पर्वत को उठाया विराज बिलकुल भूख नहीं लगी, आनंद अनुभव हो रहा था। भगवान के भगवान के चारे का चिंतन करते ह। तो जब हम आध्यात्मिक विषय को ध्यान से सुनते हैं और ध्यान से सुनते हैं, उसका बड़ा गहरा असर होता है। इसलिए हमें श्रीमार भर गीता सहित को स्वीकार करना चाहिए कैसे परंपरा के द्वारा और फिर उसका प्रभाव पड़ा। इस से में। आज शोक हमने पढ़ा है। इसमें आप आध्यात्मिक साहित्य की महिमा के विषय में पढ़ते अभी सुन रहे और पढ़ रहे हो क्या कि हमें समाज में शांति है, बेचैनी है। और ये जो क्या है, उपाय उपाय है कि हमें आध्यात्मिक साहित्य में रूचि ले ली जाए।
और
जो साहित्य पर भगवान के गुणों का वर्णन कर रहा है, भगवान की महिमा का वर्णन कर रहा है, भगवान के नामों का वर्णन कर रहा वो साहित्य है। अगर उसमें छपाई में कुछ कमी भी हो। हमें घबराना नहीं चाहिए। साहित्य में क्या प्राप्त हो रहा है? या तो हमें शुद्ध भक्ति का ज्ञान प्राप्त क? क्योंकि प्राप्त होता है कैसे कैसे प्राप्त होता है इन साहित्यों के द्वारा, तो इस साहित्य में कुछ कमी भी हो। असल में कोई कमी नहीं है। क्योंकि उसमें गुनगान हो रहा है कि
इस का
और जो ध्यादमीभागतेहै उनकी रूचि रहती है, सब वेदिक साहित्य में रूचि बढ़ है। वो 1 सहित में रूची कैसे बढ़ती है? पढ़ने से कई बार बार पूछते हैं नाम में रूचि कैसे बढेगी ना रुची बढ़ती है। नाम ले जो शुद्ध साहित्य में रूची बढ़ती है, उसे पढकर और इस फवजीसाथपरेमें थापित कर रहे हैं कि ज्ञान की बहुत समाज में डिप्लोले हमारे संत नगर में य करते हैं। सना में धार्मिक क्रांति, समाज में धार्मिक क्रांति की आवश्यकता है। यह कैसे संभव होगी? ग्रंथों के वेतन ही कृष्ण
us
se na प्रश्न था। प्रोज की जो साहित्य वह साहित्य होने कर देश का वर्णन किया है। तो आजकल हम देखने की बहुत ज्यादे सोशल इशूज होते हैं जो इतिहास के बारे में बताते हैं और बहुत ही शू जिनके बारे में जानना मेस सिटी कर जाते वश्यजातीप्रचारकारी को प्रचार करे लोग प्रस्तुत भी करते हैं। इतिहास के बारे में। सरकार की सोशल हो जाए तो आवश्यकता जाते से कैसे से स्थापित करेंगे कि
उसका साइज और जैसे की कपूर विज्ञान ने को कहा था। विज्ञान के ज्ञान का उपयोग करो यह साबित करने के लिए who is god? अगर आप भी इतिहास की किताबें पढ़ रहे हो, इस दृष्टि से, इस ज्ञान से आप के द्वारा आप लोगों को प्रभावित कर सक। m s से रहे। jane s col तो 1 संस्कृत के विद्वान थे, जो कि हर व्यक्ति बन जाते थे और पूछते थे। उनसे संस्कृत भाषा की डिबेट करते थे। फिर उनको हरा कर उनसे 1 पत्र लेते थे। विजय पत्र कि मैंने से डिबेट किया था और उनकी वजह वो पास। यह कहते हुए मैंने भारत के सारे विद्वानों को हरा दिया है। मैंने सुना आप भी बड़े विद्वान हो। सामी ने कहा, आपकी तुलना में मैं तो कुछ नहीं हूँ। उसने कहा, मुझे 10 साल करके विजय पत्र। 2 मैंने आपको सी भाषा की डिबेट में हरा दिया। अगर को किसी और एंगल से ज्ञान भरे। फिर उसकी आवश्यकता नहीं है। आप उस ऐंगल से पढ़ रहे हो, कोई किताब को जिसके द्वारा आप ये स्थापित करोगे। कृष्ण भगवान पर भगवान है।
आयेंगे भारत भक्ति वाली पढने के के
की की इच्छा है।
यह बात कुत्ते में रुचि कम कैसे
पूरे गीत में कैसे वर्ष में कंट्रोल करोगे उपाय है। भक्ति हो शान बंदी। अगर आप धार्मिक साहित्य को पढ रहे हो, आधार में को सुन रहे हो, इनाम ले रहे हो और नाम की महिमा का प्रचार हो। फिर ये इन हथियारों के द्वारा बच सकते हो। इस पीड़ा को करने के कलास
कि
भारत और चीन में जो लड़ाई का कारण है, वो कैसे लगा जो कि शायद जी लाइन में नहीं है, क्योंकि वो भगवान के संदेश तो सबके आगे हैं, देश का सा का करो। तो मैं आपसे पूछना था कि हालांकि भक्ति करने का पालन करना, भाग पड़े प्रयास, मे प्रयास करता प्रयास, लेकिन सामने बेगरीअगरमहसूस होते हैं। तो कहाँ पाने गया?
धार में क्या लास्ट
लास्ट जाना, सालों में भक्ति करने का प्रयास कर रहा हूं।
मेरा नर्स जो है आप को सताएंगे नथ की व हमें सताएंगे 10 पंद्रह साल के ले, फिर सब शांत हो जाए। ये अन आपको सुलायेंगे, अंतर इससे आप हमेशा सावधान है। समय पापा जी भगवान का दर्शन। तो भक्तों ने पूछा पापा को वो यू प्रें, आप क्या प्रार्थना कर हे थे? praintokrisna काल म bagan gt, e a, a, e a, e a train जो उपाय है, केवल आन को रोजगार दिलाया जाता है। नाम का। यह नहीं कि हर नाम के 4 में हमें आनंद क्यों स्कूल में जाते हो, स्कूल के विद्यार्थि को छुट्टी चाहिए, छुट्टी नहीं मिलेगी तो वो दुखी हो जाता है। आप दफ्तर में काम कर रहे हो, आपको छुट्टी चाहिए। क्यों आप काम करते हो, उसे दंगा जाते हो, अगर आप वकील हो फिर तो छुट्टी छोटी। ये माना जा रहा है कि कार में बड़ी बुद्धि लगती है। वो ज्यादा छोटी ने भक्ति में कभी आप सोचते हो कि हमें मंदिर के अधिकारी से परमिशन लेनी चाहिए। महीने म जब से 2 माला के जाप के मेरा मेरा अधूरा तो ये जो भक्ति का उपाय है, इसमें आनंद भी है। page geta अब so bar me pd nbbेbaraot
भक्ति में उत्साह कभी उपसाइड हमेशा
उत्साह कैसे बनाये सकते हैं? चौदीसरनमेंइस विषय की चर्चा करते मूली ने कहा, कई बार हमें लगता है हमारा सुधार हो गया तो दवाई देनी चाहिए। उसमें हम ढीले बन जाते है, ढीले बन जाते हो तो फिर से माया का प्रभाव टैक। तो उपाय क्या है? आप साधना स्टेली इन्हें कि 1 हफ्ते में तो अगले हफ्ते में ओके apko सुनाई
महाराज मेरा प्रश्न है कि 1 तो जो हमारे साथ ना होती है, मसीह मे गैकटीजैसेकीीयारी भी हो और पर्सनली सेवा या जाते मौका जाता है। आज तो इतनी सेवा की वा काल या तो सेवा सेवा जो उसको पर रहते हैं। तो क्या यह था कि प्रारेटकिसकोदेलि सेवा तो साथ दोनों में से 1 जो कम। to what should be be mars
sodales program साधना सेवा हरेक महमंद का उजालने, भगवान को क्या कह रहे हैं में सेवा, दीजिये सेवा, जब सेवा मिलती है, हम बीमार हो जाते है। balans इतनी ज्यादा सेवा भी नहीं करो, जाके से मिली मिलेगा। okay i question mataji
बहुत बहुत धन्यवाद महाराज मेरे पास, आज कल आपके डॉक्टर से है। मेरा प्रश्न यही है कि जैसे जगतनाथ भगवान की यात्रा होती है तो मैं बहुत उत्साहित हूं। अब श्री श्री कृष्ण प्रगामी तो उसकी साथ मेरा उस तरीके से उत्साहित है जो पहले होता। तो इस चीज को कैसे अपना मुताहित करे कि श्री श्री कषप्ररामजीकेप्रति जनाब।
अब यही सोचो रोज जगना यात्रा निकाल रहे हो जागना। बाला में कोई अंतर नहीं है। गर आपको लगता है कि जगना यात्रा का चिंतन करके ज्यादा उस रोज, उसमे कोई अपराध नहीं होगा। okay more any question from the late mataji थैंक यू से भक्ती
बनी,
केवल भावना है, अभी छोड़ दिया है is good program प्रयास करते जाओ, माया का विरोध करते हो, मन को हराना प्रयास भगवान क्या कहते हैं माया
मा
बहुत कठिन है, भगवान खुद कह रहे हैं बहुत कठिन है हम प्रयास आगे भगवान के ध्यान से दि। 2 करोगे तो इसका विरोध कर। देश छोटा ग्रंथ है, जिसमें गिहार लोगों में बड़ा गहरा ज्ञान है। उसमें कहते हैं भगवान के जो नाम है वो मीठे ठी पर अविद्या के कारण अगर आप नियमित रूप से जाप की बीमारी
का
तो हमारे शासों में समस्या का वर्णन है। और उपाय का वर मोनसमाजमेंमानआपको कैंसर हो गया? डॉ sorry doing ilाजध्यानेक्षेत्र में जो समस्या है, उसकी चर्चा है, उसका उपाय कर गया।
थैंक यू सो मच सदी जो उसके बाद ये पूछिए कि जीवन। का जो समय है वो काफी कर रहे है और सभा काफी बड़ा है और प्रयास सामने बताया है। कॉस्ट रेफर करते रहे तो उसको करते रहने के भाग पढ़। सेवा भी कर रहे है। साधक होने के नाते जो भी प्रैक्टिसेज है सब चल रही है और सेवा भी है। बस पी करने का प्रयास हो लेकिन समय कम है और बहुत बढ़ा कारण है जिसके लिए लगता है कि अगर प्रयास नहीं चलता रहा तो अजीब कम हो।
उसको कैसे चुने के बंदे ने पंत कहते हैं। 1 पल का भी दुरुपयोग मत करो, यूँ सारे विश्व के धन को इकट्ठा करोगे और आप प्यार करोगे। टाइम वेस्ट हो उसे वापस प्राप्त करने के लिए और वापस 1 मिनट मिलेगा न मिलेगा तो डोंट वेस्ट इन टाइम आप भक्ति के वीडियो का पालन करो। सेवा में जुडो को जल पर से बचो बचो तो आप अपने समय का पूरा सुदुपयोग आप में महाराज। महाराज। कठोर राजा थे बड़े दयालु। उन्होंने 1 समय देवताओं का सहयोग दिया था। स्कूलों को कहलाने में जो है वह भारी हो गये। अब में योग दिया तो उन्होंने कहा महाराजा से हम आप के कोई सेवा कर सकते हैं। ये बताइए कि मुझे कितना वर्ष बच गया, मेरी जिंदगी में देवता को चिंतन करना चाहता, वो अपने मन को जोड़ना चाहते थे उनकी छवि मन द्वारा भगवान का चिंतन हो। हमें यही सोचना चाहिए 1 पल बच गए हमारी जिनगी में, में इसका 1 पल का भी दुरुपयोग नहीं, हम क्या सोचते हैं हम सोचते हैं ह hot
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dont was taime, hey bo
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हरी आ बहुत सुन्दर तरीके से समझाया। जैसा की हमने अभी इसी श्लोक में पढ़ा कि आध्यात्मिक ज्ञान का वितरण समाज में सबसे बड़ा, सबसे ज्यादा जरुरत है। तब से तो मना कि हम जब प्रचार करने के लिए जाते है तो हम उनको काफी समझाते हैं। लेकिन लोगों का सबसे बड़ा प्रश्न होता है उससे बड़ी प्रॉब्लम होती है कि हमारे पास टाइम नहीं। ऐसा जब हमें बार बार कहते हैं तो 23 दिन जाने के बाद हमारा काम का कम हो जाता है। तो ऐसी स्थिति में हमें क्या करना चाहिए?
आपको यह उम्मीद रखना। हर व्यक्ति जिसे आप चर्चा करोगे वो आपके संदेश को स्वीकार करेगा। मैंने कई बार उदाहरण दिया है तो भगवान नंदरहाेदाजठाकुर घर घर जाकर संदेश दे रहे थे, क्या हर 1 व्यक्ति ने स्वीकार नहीं किया के ये आपका आदेश मा प्रभु का आदेश संपादन,
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हमें वहां उत्सा कम क्यों हो जाता है? हम सोचते हैं हर व्यक्ति जिससे हम बोलेंगे चैनरेकृष्णवउम्मीदी मत रखो ये उम्मीद रखो कि कहीं स्वीकार करेंगे, कहीं आपका अपमान करेंगे, कहीं आप जुदा भी मार सकते
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वहा पर जा प्रयास करते जाना। went core question in and stop
bucbucegetemik,
thank you for the main for class?
my cusion is suman adata icanasinofcrisn rasmeongbiisbuss at the translation, says even to transmit is in perfect le compose, i would is pati?
know what made that point of time that transelatesur when the between probe printed the first canto there was pelting the thing to i case describing go
की इस प्रकार से कि ऑनलाइन ऑफलाइन का प्रयास करते हैं तो ऑनलाइन होने के कारण 1 चुनौती का सामना करने अपने व्यक्तिगत जीवन और दूसरे की सहायता कर देता। तो ऑनलाइन जो व्यक्तिगत भगवान के संबंध है साथ सातु संख्या और शीवीग्रव्यक्तिगत रुचि है वो कम देखा जाए तो क्या इतना ऑनलाइन को जस्टिफाई विकेट भी ऑनलाइन किया जा, ऑनलाइन प्रचार किया जाए ऑनलाइन। लेकिन ऑफलाइन के प्रति जो दी राधा लुक है
औन ऑनलाइन माध्यम के द्वारा में 1 व्यक्ति जुड़े हैं पर जो उनको जोड़ रहे हैं उनका अगला प्रयास रहता है उनको ऑफलाइन में ऑनलाइन हम ये नहीं कहते ऑनलाइन वालों को कभी ऑफलाइन नहीं बनाये गए उनको 2 want a prayas bad that online is a begning and progress is in a question is yes
सुन्दर देश से बताया जैसे हम ग्रंथ परती अपनी रूची कर सकते
हैं,
अपनी रूचि जारी कर सकते हैं। प्रश्न है कि हम भक्तों के प्रति, साधु के प्रति, कैसे अपने जो श्रोता है, उसका विकास करते है। इसी से हम सुनते हैं बार बार उनके प्रति कभी अपराधी कैसे हम साधु के पति, संता,
विनम्रता, अभाव साधु के गुणों को और आपका कहना है कि वो साधू को रोज सुनते हो। फिर जरा ओपन से मिंटालरीहोजाती है, ये संभव है। इसलिए हमें क्या सोचना चाहिए सबको आदर 2 बिना किसी आदर की उम्मीद है आप को आदर 2 और सब के गुणों को दे 2 गुन को नहीं
जो
मक्खी होती है अभी मी वो साफ बादल में रहना चाहती है और जो कवे हैं वो गंदे स्थान में जाते हैं। हमें भक्तों के गुरु को देखना चाहिए गुरोघसनाचाए goa
बहुत bot, n, a भाव को नियम से करना चाहिए तो धीरे धीरे करके उसमें रुचि 1 ही संदेश को पढ़ते हैं। तो कई बार रेपुटेशन रूची बडी से कम कई बार बड़ी लैब्स आ बीच में थोड़ा सा भी उसको बार से पकड़ना जा तो कैसे उसके अंदर नियमित रूप से पढ़ते हैं? कैसे प्रश्न है कि हम बहुत गीता व्याधि पढने का प्रयास करते हैं, परंतु सेवाएं जमा हो गय।
as she is balance balans, means you time for java time, wasting time for a seva, but i
और खासकर फेस्टिवल होते हैं बहुत सी सर्विस पे कैपाजाउसकेबाजको पकड़ना द्वारा,
कैसे dr se balensselulrco balence did like you ad balence, dirtormainhelty balence
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thank you सुनते हैं हमें मालूम चलता कि जीवन का क्या कर, कैसे उन्हें क्या क्या करना चाहिए, नहीं करना चाहिए, लेकिन अपनी पुरानी आदत तो पुराने संस्कार में कारण का बार और ऐसी स्थिति में आज हिम्मत, छोडते, मालूम का क्या करने, ने में करने तो इस हताशा के सा से कैसे ऊपर उठाए?
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have the all have a takes time to give
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you should be convinced that will take you at the bukti oga, it will do the jo
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visas action siddhant
prapt
इसमें शक्ति है, जो उपदेश है, वो लागू हो, विश्वास होना चाहा है, कृष्ण से मात विश्वास होना चाहिए। क्या हम भगवत पढ़े पढ़ेंगे रोज, उसे वा करेंगे, माला का जाप करेंगे तो हम आएगा विरोध कर सकेंगे। pura vishvas hona ful fatin हमारी समस्या, ये है पूरी शा okay i think it is com last crestor thank you so।
गुरु जैसे हमारे कमेटmentराउसेतो सम ह को
मैनेज करना, लेकिन रीडिंग के
तो कभी कभी कभी आज के वाटर में इस का कर कर रही है परतों को परंतोमेऊपरनही अभी गई मिनिस्ट्री मिनिस्ट्री को गई है मिनिस्ट्री के इन इंटरनल रीडिंग तो मंदिर के जो अधिकारी हैं वो भी अभी इस का हर मंदिर में कलश करेंगे विद्यालयों को इन गंधों को पढने के लिए जो हम किताबों को बांट रहे हैं वो भी हमारा प्रयास है। a log gita le pr o a o e book as at a list
corsforsertificat भी थोड़ा just रे कृश्णा का धन्यवाद करते हैं ही
हे सारे हाय शाइशहरेरामरेराम
तो जो है अभी आराम से विशेष सूचना मिली है और आप सभी के लिए बहुत बहुत विशेष सूचना है की आज।
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