दामोदर लीला कथा || ŚB 10.09.1-2 || ISKCON Delhi || 11.11.2020 |Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja

Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja teaches the Damodara Lila from the Bhāgavatam, the story of Krishna's childhood and how two cursed sons of Kuber find redemption through devotion. He urges chanting the Mahā-mantra, observing Kartik-month vrata, and prioritizing bhakti over material pursuits to attract Krishna's grace.
Chapters
क
मारि
भगत वासुदेवा
a
कृsणकुसेभकतकअंगेजी समझ नहीं आता for को हम semaभगकेjsकनकमे ध्यय लोक 1 कर 2 पढेंगे ये है भगवान के दाम लीजा का वार्डर
manta
sim suasocोमेमामंथ यम swmdadisuamanta swim का और ऊपर लिखा
द तर नियुक्त सनद से
सुख हो सी छू।
हम रोगी ममता सरामसधीokarज
हे
जहा
माता
जी जे हो जा।
एगा
दा
ाहू eisotaआपकेबरेहै
so mask
स्री
वाचसरीशदम घर की नौकरानी काम में लगी
हुई
ोदादहोगानदननदमाराज की नाली कर अन्य काम काजों में
दू
मध्य
से
बैठा है। श्री सुदेवकुरस्वामी ने
आगे कहा 1 दिन
माता बोला देखा सारे लोग रानिया अन्य घरेलु है को सिरजनातनसवयस्कोी और धरन देते हुए देते हैं द्वारा दहेलीपडकीथोरना और शोला द्वारा उनका बाहा दीपावली या दीप मानिका गठित हुआ आज भी भारत में विशेष कर मुंबई में यह त्यौहार बड़ी ही संधान से बात के महीने कुल, झडियों तथा दीपों को जलाकर बनाया जाता है। यह माना जाता है कि नन्द महाराज के सारे गयोननसेमताशोता की कुछ में ऐसे सुगंधित भाषा खाली की जिससे उनका दूध सुगंधित हो जाता था। माता सूरा हिंदी का आयु का दूध एकत्र करके नहीं बना कर सुन मखन निकालना चाहते तब सोझा यह बालक कृष्ण पड़ोसी को को तथा योगियों के घर में जाकर माखन चुराता है क्यूँकि इससे दूर था सामान लेने से तैयार किया गया रही अच्छा नहीं लगता है दही प्रदेश है मादाकृषणीबालीराम गीत गाने जा रही है पुराने जमाने में ये प्रधान यदि कोई किसी बात को लगातार इस त्रण रखना चाहता है तो वह या तो उस कविता में ध्यान दे या पेसिवरलनेसेहसकरवाले। ऐसा लगता है कि माता सदा किश्नीनीरामको किसी भी समय भूलना नहीं चाहिए थी जिसकी उन्होंने किस्म के मालाणी सारी करण तथा होना ना सका तथा रणावरदवजकोकविता में गया था। और वही बनते समय वे कवितकुमकोगाती जो लोग चौबीसों घंटे किस भावना बनाते हैं, उन्हें ऐसा ही करना चाहिए। यह कहना पड़ता है ये सदा, ये शुदा कितनी भावना भावित थी। इस भावना ऐसे सिधियो का अनुसरण किया जाना चाहिए।
धन्यवाद
धन्यवाद फिर से नवादशरशरदकुसमैने। आगे कहा कि जब माता सोना ने देखा की सारी नौकरानिया अन्य घरेलु काम काज करते हैं तो वे स्वयं नहीं बढ़ने लगेगी दही बनते समय उन्होंने इसे की पाल क्रेताओं का स्मरण किया और सन नेताओं के विषय में ये बनाते। 2 बनाकर आराम
ह
आप सब जानते
हो कि खाते का महीना है और यह कहा जाता है सार में कि कार्ती का महीना सबसे सर, सबसे आवश्यक है सेवा करने के लिए, जैसे कि विद में, शास्र में वेद का सबसे अधिक प्रभाव है और महत्वपूर्ण है सारे महीनों में खाद्य का महीना सबसे महत्वपूर्ण है। थोडी सी भी आप सेवा करोगे उसका लाभ हजारों गुना प्राप्त होगा। 1 समय भक्तों ने पापा से पूछा तो कार्य के महीने में हमें क्या करना चाहिए? पवन का खाते के महीने में 24 घंटा जॉब करवा। ये सबसे सबसे महत्वपूर्ण तो कार्ती के महीने में इसे आप जानते हो। हमें क्या करना चाहिए? प्रयास करना चाहिए कि हम अब भी सेवा पढ़ाए। शास्रों को पढे कहा गया है कि शास्री महीने में भागवतम पढ़ना चाहिए ता पढ़ना चाहिए और हार के दामों का उच्चारण तपस्या बढ़ानी चाहिए से किसी ने पूछा क के हम खाना कम कर दे, वो भी वो ठीक रहेगा। मैंने कहा 4 खाना कम करे ज्यादा विश्राम नहीं करोगे है, खुला कम करके सो गे ज्यादा और सेवा वो ठीक नहीं है। जिले में काले के महीने में हमें 24 घंटे जॉब करना चाहिए। यह सबसे बेहतर है और खाते के महीने में कई शोध दिन है। तो आप राम लीला का वर्णन करते हो जब हम दमरास का उच्चालन करते हैं। सो भगवान के 1 जिला है जिसमें ये दामदलीलाबड़ीप्रसिद्ध मानी जाती है। सो जन्मा कर्मा में
भगवान कहते हैं
मेरा प्रकट होना और प्रकट होना दोनों ही लेबियम है और इसे केवल भंग समझ सकते हैं। उदाहरण के लिए, जब प्रकट हुए थे, 4 हाथों के साथ पूरा शरीर सदा वता से जब माता पिता ने विनती की कि आप साधारण बच्चे का रूप ग्रहण कर लो तो तुरंत उन्होंने
सारे
बच्चे का रूप ग्रहण कर लिया और भगवान के अनेक लिए लाये है। जाम से पहले में आप कई और इलाओं के विषय में पढ़ते हो। और जो भगवान लीला से वेजभासीभीआश्चर्य हो गये है वो चर्चा करे कौन है
ये भारत भगवान है,
नारायण है, हर कोई देवता है। ये कभी किसी ने देखा नहीं था कि इतना छोटा बच्चा इतने बड़े सुरों का बल कर लेता है। पूतना पिछले अध्याय में भगवान ने अपना में पूरे विश्व का दर्शन दिया था। अपनी माँ को भगसुरमेभग्तोने शिकायत की थी की हवा ने मिट्टी खाई है। भगवान के घर आये की माता ने पूछा तुमने मिट्टी खाई, आज क्या? और भगवान ने कहा नहीं, ये झूटी से कैत है खेल में हम ने हरा दिया था भाई को आप से दाल दिलवाने के लिए झूठी शिकायत कर रहे हैं।
गर। आप विश्वास नहीं करते हो, तुम मुह
खोल कर दिखा देता हूँ। आप खुद देख ले और दे मिट्टी है या नहीं।
जब माता ने जब बेटे ने मुंह
खोला तो माता ने क्या देखा? पूरे विश्व का दर्शन, सारे देवता देवताओं का दर्शन। इस प्रकार व्यक्ति अपने कर्मों के अनुसार सुख दुख भुगला है। और माता सोचने लगी मैं सपना तो नहीं देख।
तो सुधार व्यक्ति को कहो कि भगवान
भगवान ने अपने माता को दर्शन दिया। मुँह में सारे ब्रह्मण का दर्शन दिलाया कोई विश्वास नहीं करेगा। इसलिए भगवान की लीलाओं को समझने के लिए सेवा सेवा का भाव होना चाहिए की सेवा के माध्यम से हम शुद्ध बनते हैं।
सो भगवान ने
दिविलीलपकडकीथी जैसे हमने कहा रोज प्रकट हुए अपने रूप में हुए और उन्होंने दिवाली शुरू कर दी थी। बड़े बड़े स्कूलों का व बड़ी सरलता से हो रहा था।
माता
के मन भावा भगवान की सेवा और ननबनाजजोथेवोकिसान थे और उनके पास
9
लाख गायें थी, कितने 9 लाख प्रिय
साधारण गाय नहीं थे।
इनमें से लगभग सौ गायें थीं, जिनसे सुगंध दूध निकलता था। आप ने आज के वाद में कभी सुना है दूध अगर आपको सुगंध चाहिए। ऊपर से वनीला स्टॉप बेरी फ्लेवर फ्लेवर पर ये जो खास गाय थी को
इनका दूध केवल
भगवान को दिया जाता था, केवल तो लगभग सौ गाय थी जिनके लिए खास घास उगा था और इनका दूध ज्यादा कि केवल भगवान के पास, तो मा
बकैदा
सुनती रहती थी कि मेरा बेटा
पुलिसों के घर में जाकर
चलाता है मखन और
बहुत बड़ी
शिकायत की थी उन्होंने, माता ने खास एक्शन नहीं लिया
पर उनके मन में
थोड़ा शक था क्या शेर पड़ोस के
घर में
ज्यादा टेस्टी दूध नहीं मिल रही है। और भगवान के अनेक नाम हैं जिनमें 1 नाम है मक्खन, चोर और भक्त। उस नाम का उच्चारन करते खुशी के साथ भगवान को माखन चोर बुलाते कोई कहे राम चोर तुम छोड़ो हम बस्ती स्वीकार करेंगे लड़ने को तैयार हो जायेंगे
तुम हारे चोर बुला क्या भगवान को
छोड खुशी से बनाते हैं, बुलाते हैं और भगवान भी खुश होते है। तो मैने सोल के पास शिकायत आती थी र
मेरा बेटा आपके घर में क्यों आए?
मन चुराने के लिए मेरे घर में क्या मक्खन की कमी है? देखो न ये है और कई थी जिनका दूध केवल भगवान को दिया जाता था पर इस के मन में थोड़ा
शक भी था
क्या था वो सूझी शायद ये पड़ोसी गोपियों में की बातों में थोड़ी सच्चाई हो शायद मेरा बेटा उसे उनके घर के दूध का ज्यादा तेज चाल से सोती थी। तो भगवान चोरी करते थे पर कभी पकड़े नहीं गये समय लॉस एंजलिस में जब हम मंदिर गया था तो जो भागते वो पड़ोस के घर में जाकर फूल चुराकर ले आते पूजा पूजा
ही
कहते थे कौन चोरी करता है फूलों को तो 1 पड़ोसी छुप गया पेड़ के पीछे, वो देखना चाहता था कौन आएगा चोरी करना। उसने देखा की हर के भगत और उसने पलट मारी गोली होती है बंदूक जैसे आदमी मरता नहीं है पर चोरल पराली सूचना पहुँची की हमारे परोसी जो है और हम नए मंदिर थे उस इलाके में कह रहे हैं कि हम फूल चुरा दे, हालांकि चुराते थे भगवान के लिए अपने नए अगर तुम्हे चोरी
करना है
तो कृष जैसे चोरी करो कोई कोई पकड़ नहीं पाया सो भगवान
का मतलब था चोरी मत करो क्यूँ
की तुम पकड़े जाओगे ये चोरी करते थे और कभी किसी ने पकड़ा तो भगवान को, कभी किसी ने पकड़ा ने जो 1 समय भगवान पड़ोसी गोपी के घर में गए उनके बेटे के साथ मक्खन चुराने क्यूंकी वो पड़ोसी गोपी गयी थी गंगा में स्नान करने के लिए,
तो उन्होंने अंदाजा लगाया था तुम्हारी माँ को वहाँ जाके ना कर के वापस
आने में घने लगेंगे तो उन्होंने जल्दी जल्दी चोरी करने के लिए वो मन चोरी करने के लिए पर
वो गोपी
जल्दी वापस लौट गई और उन्होंने
पकड़
लिया भगवान को चोरी कर ली
तुम्हारी माँ कहती है बेटा चोरी नहीं पकड़
लिया तुम ले जाओ तुम्हारी तो बाये हाथ से बाये हाथ से उन्होंने भगवान को पकड़ा और रही थी सो बात बाता गोपी ने 1 हाथ से भगवान को पकड़ा था और भगवान ने इस गोपी के बेटे का हाथ पकड़ा हुआ
जा रहे थे
भगवान समझ गये है। बड़े चलाकी से अपना हाथ रबादा के हाथ से निकाल दिया।
बेटे का
गोबी पहुँची तो को पीने
का तुम क्या बार बार प्रभा
बाल बेटे को चोरी करते हुए तो बेटा
ये तो तुम्हारा बेटा है, वहाँ पर
कोई
तो
मक्खन मती थी,
उनका भाव
क्या था वो भगवान के लिए खुद अपने हाथों से मक्खन बनाएंगे।
हालांकि उनके घर में अनेक नौकर थे,
नौकरों की कमी नहीं थी और और यह शोध माता की इच्छा थी की वह ध्यान से वो खुद बना। तो शोध माता ने गीत बनाया था। उस गीत में क्या थे भगवान के लीला का वर्णन जो लीलाएं बीत गई थी, पुतना का वाद, वर्षा
जो जो
लीलाएँ बीत गई थी,
उन सब लीलाओं
को लेकर माता ने 1 गीत बनाया था और माता 1 तरफ से मछली सी दूसरी तरफ से सुन्दर गीत गाली थी, कोई फिल्मी गीत नहीं था 1 गीत था जिसमें भगवान की लीलाओं का वर्णन तो प्रापा जी की तारी कैसे है ये होना चाहिए हम सब का भाव की हम भी सदा भगवान के नामों का उच्चारन करे। आप कहोगे हम भी गीत लिखे?
क्या हमें गीत लिखने की आवश्यकता नहीं
हमें हमारे पास महामंच है उसमें प्रभा की सारी लीलाएं आ जाती है। तो क्या सोचती थी की मुझे बड़े ध्यान पूर्वक है क्योंकि उनके मन में यह भाव था कि शायद परोस की गोपियों का बखान ज्यादा टेस्टी है तो मेरा उससे भी ज्यादा अच्छा हो भग का ये भाव रहता है कि भगवान को सबसे बेस्ट सेवा दी जाए डे ध्यान से करे प्रकार ये सुन माता ने 1 गीत बनाया जिसमें भगवान की लीलाओं का था उसी प्रकार हमे भी हर सेवा करते हुए भगवान का गीत गाना चाहिए। जब चेतन है वहाँ प्रभु अपने साथियों के साथ गूडीचामंदिरकी सफाई कर रहे थे
तो भगत थे दूर दूर पानी लोटा
लाते थे पर कोई भी 1 दूसरे से बात नहीं करता रहा, सब हर
1 शहर
और हाथ से इशारा करते थे और पानी चाहिए और मटका चाहिए
तो ये होना चाहिए।
हमारा भाव क्या करें? सर के हैं तुम सदा भगवान के नामों का उचारण करे। आज जब कोई सेवा करे हो सेवा के साथ नाम को उचारण कर। आपके सामने सर माता का उदाहरण है तो पापा जी कह रहे हैं अब भी हमेशा भगवान की लीलाओं का वर्णन करना चाहिए। शन के चुनाव में क्या ये संदेश है? सदा भगवान के नामों का उजार करो, भगवान की लीलाओं का उच्चारण करो, भगवान
की लीलाओं का स्वादन करो। तो यशोदामाता
मछली सी दई को मक्खन बनाने के लिए और साथ में गीत गारी थी जिसमें भगवान की लीलाओं का वर्णन था तो भगवान सुबह जल्दी जाग गए
बेटी जागने से पहले मैं मक्खन
त्यार कर दू और सुबह भगवान
जागे
और सीधा माता के पास गए दूध पीने के लिए न तो शोध माता थी, 1 साथ अनेक काम खरीदे, 1 तरह से 2 मथुरीसी दूसरी तरफ से थोड़ी दूरी पर आग में दूध को बाल ली थी वो दूध से फिर
वो
मक्खन बनाने वाले थे तो भगवान आये माता के पार और उन्होंने उनका सन से दूध पीना शुरू कर दिया।
और साथ में जो चूहा था
उसमें दूध उबला था।
वो बोलते बोलते दूध, वो बर्तन से
बाहर गिर रहा था। ये जो दूध था स्पेशल गायों का दूध था। और ये दूध भी तैयार हो रहा था भगवान के लिए,
तो जब
पानी दूध बर्तन के बाहर आ रहा था,
इस माता के पास कोई उपाय नहीं
था पर अपने बेटे को नीचे रख कर वो गए वो इस बर्तन को नीचे लाने ले। अचारों का कहना है कि ये जो
दूर था
उसमें भी चिंता पैदा हो गई थी। वो कही थी अगर भगवान ने पेट
भर लिया माता के स्तन से दूध
पीने के लिए, तो मुझे कौन पिएगा चौ चायों का कहना है दूध उबलने लगा क्योंकि उसे पता था
बर्तन के
बाहर गिरेगा तो इस माता को आना ही पड़ेगा। उसे
माता ने देखा
जिसकी दूध उबल रहा है और बर्सन के बाहर गिर रहा है। तो उन्हें भगवान को नीचे बिठा कर वहाँ आए।
भगवान गुस्से हो गई।
माँ ने मुझे क्यों छोड़ा, माँ ने क्यों छोड़ा, भगवान ने क्या किया सारा मखन और पर कर मड़की को तोड़ा इसे जो मक्खन आया भगवान लेकर
गये,
उखर के ऊपर बैठकर बंधू को बांटने लगे। तो जब उनहोंने देखा मरकीबेछेकहै और सब मन बाहर गिर गया है। तुम समझ गई क्या किसकी शरारत है भगवान की शरारत समझ गई की शरारत भगवान की है। और उन्होंने क्या किया? वो वो फुल पिल्स देखा। भगवान के पैरों की निशानी और देखकर पैरों की निशानियों को देखते देखते। 5 क्या भगवान मक्खन मार रहे हैं।
और भगवान जो मक्खन बात रहे थे उनके मन में ये विचार था या
माँ आयेगी मुझे पकड़ने के लिए, तो 1 तरफ से खाये थे, मन
बंध
को बांट रहे थे और चारो तरफ का ही है। और इस माता ने सरलता से पहचान
लिया
किस रास्ते से भगवान
पहुँचे हैं
जहाँ वो क्या कर रहे थे।
तुझे भगवान ने देखा
कि बेमारी है पीछे से छड़ी के साथ, तो भगवान घबरा गये, भागे और माता उनके पीछे भागी।
ऐसे भगवान को पकड़ना या समझना न काम है,
न काम है। भगवान को पकड़ना बहुत ही मुश्किल काम है। और जो योगी है, ज्ञानी हैं
वो
कभी भगवान को पकड़ नहीं पाते हैं। समझने पाते, यह भक्ति योगी हैं,
भगवान
को समझ सकते हैं। इसे भगवान गीता में ज्ञान कहते है।
भक्तियां मा अगर तुम मुझे समझना चाहते
हो,
जीना को समझना चाहते हो।
तू क्या है उपाय भक्ति का, ये है शासु का निर्णय, भगु गीत का निर्णय यह है।
गीत में।
तो भगवान कहते हैं
प्रेम और भक्ति के साथ 1 तुलसी का अर्पण करोगे।
मुझे तो मैं स्वीकार कर लूंगा। भगवान ये भी नहीं कहते मुझे कोई महंगा पानी 2 या महंगी चीज 2, 55 पुष्पम फल तुलसी के पत्ते की क्या कीमत है, जल की, क्या कीमत। तो प्रेम और भक्ति के साथ, तो माता कैसे पकड़ लिया उन्होंने भगवान को क्यूँ की। हालांकि उनका वजन भी ज्यादा था और जब वो बॉडी थी सब फूल वगैरह गिरे थे, पकड़ लिया।
माता ने देखा कि बेटा डर गया
है, वो छड़ी है। स्टेक छड़ी को देखकर सोचा की छड़ी मुझे फेंक देनी चाहिए क्योंकि बेटे को बेटा डर जाए, कहीं घर से भाग नहीं जाए। माँ बेटे को शिक्षा देना चाहती थी,
पर इतनी भाई शिक्षा दे वो घर
से भाग जाए वाला था,
बेटे डाट
पड़ती थी, बेटा ठीक है
आप बंद बुलाते हो जाता हो। बंधों के साथ।
माता के सामने यह समस्या थी,
डाटा भी है, सुधारना भी है, पर उसको घर से भागने भी नहीं देना।
माता ने छड़ी को फेंक दिया और माता ने कहा ठीक है, इसे मैं फेंक देती हूँ, इसको मैं बांध देंगे।
अगर बांध
व छोटी सजा होगी। छड़ी से मार
दे। भगवान को बांधने का प्रयास किया
और पहले
1 रस्सी से बांधने का प्रयास
किया, पर देखा कि
1 रसीली छोटी
पड़ रही है
कितनी हो
लोग रोगी छोटी पड़ रही है। वो माता थे मेरे बेटे का इतना छोटा हाथ है और यह 1 सी 10 गुना बढ़ी है। दे दूर से रसीली, तीसी रसीली जितनी
रसिया थी, घर में सब को जोड़
दिया, 1 के साथ, 1 के साथ, 1 के साथ। और इतनी लम्बी रस्सी हो गयी।
जब वो बांधती थी
और सी छोटी निकाल रही थी तो माता आश्चर्य हो गई थी। उनके बेटे का हाथ वैसे ही छोटे का छोटा था यह है कि भगवान का हाथ भी बड़ा होते जा रहा था, उनका हाथ बिलकुल छोटा था और
उन्होंने सारे रहस्यों को जोड़ दिया था।
जभी भी 2 उंगनियछोडीेऔरजोग दूसरी गोपियाँ हैं, वो हसी थी, है वो ही क्यों
जब हम जाते हैं शिकायत करने के लिए, वो कहती है, कहाँ है?
और जब उसे शरारत की है इस माता के घर में सब गुस्से हो गई है। तो इस प्रकार परोसी गोपिया थी इस
लीला को की माता प्रयास करिए बेटे को रस्सी से बांधने के लिए। और इतनी रस्सों झूल दिया जब वे
2 ही छोटी थी।
गोपिया
सोच इस में कमी है, इतनी
ताकत ला भी नहीं।
बेटे को।
तो भगवान ने देखा की मे माता
प्रयास कर रही है, पसीना निकल रहा है, फूल गिर रहे हैं और लोग
उनकी हँसी उड़ा रहे है।
छोटे बच्चे को बाल नहीं सकती।
तो ये 2 लोग का क्या अर्थ है? 1 उंगली का हमारे अचारों के अनुसार ये है। अगर आप भगवान को समझना चाहते हो
तो आपको प्रयास करना पड़ेगा। अगर आप भगवान की सेवा करना चाहते हो तो ये है माध्यम को। 1 उंगली का अर्थ है प्रयास करोगे। तुम ही भगवान को समझ पाओगे। और दूसरी उंगली से क्या है
भगवान की कृपा से। तो भगवान देखेंगे कहा की भक्ति शुद्ध है, आपके भाव शुद्ध है।
तो फिर भगवान मोदी देते हैं। अपनी कृपा दे दे। तो यह कि भगवान को समझना इतना सा है। भगवान को समझने के लिए हमें प्रयास करना पड़ेगा। जैसे की भाग जाता है सादा भक्ती का पालन करो, सो जब करो, ज्यादा करे तो कर सकते हैं और कम नहीं कर सकते। और तो अगर हम नियमों का पालन करे फिर आप भगवान के नाम जाने के योग्य बन सकते है में उन्होंने
हा everybody can sixty non for for
go back to god। अगर हम इन नियमों का पालन करें, ये नियम क्यों दिए गए हैं? सबसे पहले हमें ये सब चाहिए तो भगवान की इच्छा है की हम महामंत्र का उचारन करे महा मंत्र का प्रचार बढ़ाने के लिए और
भगवान का भगवान का ऑर्डर है। कोई साधारण व्यक्ति का ऑडर नहीं है।
भगवान कह रहे हैं सब दर्दों को
छोड़ कर मेरे सर में आओ। भगवान कहते हैं
नमके, अब वही सत्य पर
मेरा चिंतन करो, मेरा स्मरण करो, मेरा बल बना और यह सब करोगे तो क्या लाभ होगा?
तो मेरे धाम आओगे अगर, अमेजन जैसी बड़ी कंपनी है समान आपको आपके घर में पहुँचा देंगे, दाल
को दुकान में जाकर, मोर में जाना, कोई जरूरत नही
आप के घर पहुँचा देंगे।
और अगर आपको अच्छा नहीं लगे 30 दिन।
तो हम विश्वास करते हैं।
भगवान कहते हैं,
सच
कहते है किसने देखा है।
तो 1 उगली का प्रयास करना, जब हम प्रयास करें इसे भगवान ऋिश्देवकहते है
पुत्र का यह
मेरे बेटे, तुम सब
तपस्या करो
किस लिए भगवान 1 प्रकार से देखा जाए।
आज के बाद में सारे जीवन में
भी बहुत तपस्या है। जैसे आज का ये थोड़ी केवल भाग दुखी है, यह वायरस के पूरा समाज दुखी है,
और की नौकरी है।
पर आदि गंगा अक्सर उम्मीद करते हैं की हर साल दंगाव बढ़ेगी अभी में है, हर साल तंग
ही मेहनत कर
के पी एच री कमाई और जब नौकरी के लिए जाते नौकरी में तो
1 ऐसे देखा जाए।
बोतिवादीव्यक्ति भी स्वीकार कर रहे हैं वे जबरदस्ती तपस्या करनी पड़ रही है तपस्या करो। पर भगवान की खुशी ही है जीव
द्वारा, भाव है,
बहुत उचाना, तपस्या है बहुत चर्चा की वजह कृतार तो प्रयास करना आवश्यक है।
और अगर आप भक्तों के संग में
रहोगे तो यह प्रयास ज्यादा सरल है। इसलिए शासन का क्या कहा गया है। शादी शाधुसाामाधसाधु
भक्तों के संग में रहोगे
तो भक्ति का पालन ज्यादा सरल हो जाता है। इसलिए बार बार पर शादी
तो प्रयास
करना हमारे हाथ में है। भगवान के लिए, पाने के लिए प्रयास करोगे तो फिर भगवान की कृपा प्राप्त होगी।
यह है जितनी मात्र है कोई मेरे
शहर में आता है, उन मात्र उसी प्रकार की बुद्धि मा देता हो। भगवान को समझे मुझे समझ नही भी
तो सुलह माता सफल हुई भेजे को बालने में।
जब जब भगवान ने निर्णय किया, मा थक गई है पुलिस की गोपोनपरहसरीहै। भगवान ने उन्हें मान ले लिया तो भगवान को मान लिया था कि मंडी जाते हो तो आपको उस साल मिल जाते हैं। का
गान को बना था
और आप के पुजों कथा हम पढ़ते हो।
ये जो दान लीला है इसके 2
अंग हैं, 1 भाग है जिसका संक्षेप में चर्चा की दूसरा भाग है।
वह अंग को उखल के साथ बांधा
हुआ था और
बुनी
1 समय आये गुजरे थे मालसी गंगा के पार से और उन्होंने देखा कि कुबेर के 2 पुत्र मनु जीवा और
रात के नशे में हैं
औरतों के संग में। और जब दादगुरी वहाँ पहुँचे, जो
औरतें
थीं, उन नंगे को ढंक लिया। पर जो बेटे थे, इतने गहरे नशे में थे कि उन्होंने इस महान संत को प्रणाम भी नहीं किया।
आज भी नही दिया
सो मुझे ने। क्या सोचा मुझे इन्हें सुधारने 2 जो भक्त है, संत है, सजा भी देता है, सजा देता है किसके लिए वह भलाई करे। कई बार हम उठ जाते हैं और ये नहीं भूल रही है हमारी भलाई के लिए।
डाट पड़ी है।
सुधारने का उपाय दिया है भगवान को। बांदा बाधा, उखल के साथ। और ना मुझे। इन 2 को सबक सिखाने जा। उन्होंने श्राप दिया श्राप कि तुम सौ सालो के लिए पूल बन जाओ। कहा
दिल्ली में, न्यूयॉर्क में
नहीं, नंद मराज के आंगन में आपको, ऐसा शराब दिया जाए। सब पसंद आएगा। वह वृंदावन मंदर में, वो जमाना का पेड़ है। ये जो पेड़ है बंदर के आंगन में, वे बड़े भाग्यशाली है।
तो
जा मुझे ने श्राप दिया था सब। भगवान जो हैं, उन्हें पता था मेरे
पीए भागने
श्राप दिया है। क्या? कि देशों के सौ वर्षों के परिचार
तुम क्या बन जाओगे
में भगवान का जश्न प्राप्त होगा। भगवान अपने भक्तों के वर्षों का पालन कर। ते है।
जो
बन गए पेड़ धनी। व्यक्ति सरलता से भगवान को भूल जाता है। भौतिक शिक्षा हो तो भी हम भूल जाते हैं, खुबसूरत ही हो। और व्यक्ति बहुत खुबसूरत है सब उसकी तारीफ करे तो भी हम भगवान को भूल जाते हैं। आप। किसी आज के बार में, सब प्रयास करते हैं अपने चेहरे को और खूबसूरत बनाने के लिए। इसलिए कोने कोने में ब्यूटी से दूर
है
आप किसी को कैद
हो,
खुश हो जाते है आप किसी को केदाह से। ये उन्हें
तो आज के तल में
हर व्यक्ति प्रयास कर रहा है अपने आप को ज्यादा खुबसूरत बनाने के लिए। खुबसूरती है उज्जापहोगी अब भक्ती में जुडो। तो कुरियर के बेटे इतने कमांडी बन गए थे। जब उन्होंने कुछ आद नहीं दिया तो भगवान के साथ बने थे। और उन्हें याद था मेरे भक्त ने क्या दिया है इन 2 पेड़ों को खर को खींच कर ले गये 2 पेड़ों के बीच में, और उन्हें खींचा। और जब खींचा तो क्या हुआ जो 22 पेड़ों के बीच में आ गया। और 2 पेड़ बहुत जोर से आवाज करते हुए इतनी जोर से
भागी भागी आई।
देखे क्या हुआ, क्या हुआ? उन्होंने देखा ये पेड़ गिर गए है और बेटा खा मुश्कल।
ऐसे।
तो माता ने भगवान की बेटा पूछा,
यह पेड़ कैसे गिरे? वहाँ दूसरे ग्वाले भी थे जो खेल रहे थे।
तो माता ने पूछा यह पेड़ कैसे गिरे? तो सवाल बना, सोचा तूफान आया होगा।
जिसके कारण ये पेड़ गिर गये।
और माता कुछ हुई थी, कैसे गिरे यह पेड़ मेरे पाती गिराये तो गुवालोनेबोला।
ये तो आपके बेटे गिर ये है।
हमने अपनी आँखों से देखा कि 22
पैर गिरे
आपके बेटे के के कारण आपके बेटे का 2 अप्रैल के बीच में आ गया था। और उन्हें खींचा देगे माता कहने लगे
ये संभव नहीं है।
कैसे? 1 छोटा बालक इनमें 2 बड़े पेड़ों को गिरा सकता है? तुम सच नहीं बोल रहे, माता विश्वास नहीं कर पाई, मेरे बेटे में इतनी ताकत है। वो सोच रही थी,
मेरे पति के
सहयोग से गिरे हो गए, और खूब वो सोच से सोच रहे थे, नहीं, आंधी आई होगी, आँधी आई होगी, वो, ये तुपाल हवा से गिर गये होगे। तो वो 2 पेडों से कौन निकाले?
दोनों ने
भगवान को प्रणाम किया। नरेंद्र मोदी ने क्या वर दिया था।
देवों के सौ सालों के बाद उन्हें भगवान का दर्शन प्राप्त होगा। आप को कहा जाए।
देवता के सौ सालों के लिए हमारे
पृथ्वी के 6 महीने
देव के बाहर करने के बराबर है। नाजा लगाओ चैक मिली र्स, कितने बन्दे हैं? हो? आभार पकड़ किया
जमुनी।
आज हमें आपका दर्शन पाप है, भगवान का दर्शन प्राप्त हो रहा है, जमुनी है।
और उन्होंने आगे कहा, आप से हमारी ये इच्छा रहेगी, यह हमारी भाविद्वा, हमेशा
हम आपका गुणगान करे।
ज्ञान हमने अनेक गलत कार्य किए है।
पर भगवान की कृपा से, नारद मुनि की कृपा से हम समझ पाये हैं। कि वाली द्वारा सदा भगवान का गुणगान होना चाहिए।
कानों द्वारा आप गुणगान, सुने, पैरों द्वारा,
भगवान के मंदिर में चले जाए, कागों द्वारा गुणगान सुने। दूसरे शब्दों में आप से हम सारे मन, बुद्धि नदियों का उपयोग करें। आप ही से तो अज्ञानता में
हम
गलत कार्य कर लेते हैं। भक्ति में जुड़ने से पहले हम सब जुड़े थे, गलत काम हो गए। पर संत साधु के परीक्षा के द्वारा ये हम समझ गए।
ये गलत है।
फिर से हमें बचना चाहिए। मत खोलो भगवान जी गुरु कृष्ण
भक्ति का बीज है। यह ज्ञान की भक्ति योग ही 1 साधन है। यह ज्ञान के वन्य जीवन बहुत दुर्लभ है।
यह ज्ञान हमें भगवान के सनगत होना चाहिए।
और नई संगत हो।
तो अब जल पी रहे हो। जैसे 1 प्रसिद्ध भाग का मनुष्य जो
पाया राना
ज्ञान 0, 20 हिल हो
प्राप्त कर लिया। और याद कृष्ण ने जान बुझ कर क्या कर रहे हैं?
जहर पी रहे है।
तो आज क्या स्थिति है? लोग जहर पी रहे हैं। और आप ने बोला डोंट।
फिर नेक्टर वो क्या कहते हैं? पायल मुल्क।
तो
कुरु के पुत्रों का उद्धार हुआ। उनकी बुद्धि जादगूरी का दर्शन देने से शुरू हो गयी थी। और उन्होंने कहा आपने हम
बल बुधि
निखला करेंगे, हमारा भाव होना चाहिए। स्कॉल जुड़ने से पहले हमने कई गलत काम किए होंगे। पर जो ज्ञान प्राप्त हुआ है साधु संगत के द्वारा, तो हमारा क्या प्रयास रहेगा कि ये गलती फिर से नहीं करे। और आपका ये प्रयास रहेगा। आवश्यक ही इस प्रकार के बेटे के बेटे उनका उधार हुआ। उनकी बुद्धि विश्व तो साले संग में रहकर। यह भक्ति का बीज प्राप्त होता है। तो यह भक्ति का बीज उठता कैसे है।
ये उगेगा अगर आप
करो। जैसे की आप का सुन्दर बगीचे में आपने सीट लान किया है, बीज उगेगा, कैसे पानी पिलाये, पानी पिलाने का अर्थ है कैसे न हो। हम सब के लिए सबसे महत्वपूर्ण सेवा है जो इस कार्ति के महीने में ये प्रयास करो कि सुन बढ़ाओ और क्या घटाओ जल्पा। कहते हैं।
यह जल पा पर करोगे तो भक्ति के मार्ग में आगे नहीं बरसात होगे।
और ये इस कार्तिक के महीने में
हमें इन भक्तों की निंदा करने से भी बचना चाहिए।
निंदा करोगे तो उसका बड़ा बड़ा पड़ेगा।
कार्ती के महीने में थोड़ी सी सेवा
के द्वारा हजार गुना लाभ मिल जाता है। इस महीने में जैसे हमने का जॉब करना दान देना, उनका हजारों गुना अधिक लाभ मिलता है। और जिसने भगवान का नाम लिया है वो भगवान को कृषि कर सकता है। और आज की कथा में क्या पढ़ते हो।
आज वही संगत मे गिर गए थे और
विधि नियमों का पालन थे। उन्होंने बंद कर दिया था क्योंकि वे थे और वैसे से विवाह किया।
10 बच्चे हुए।
देश में सबसे छोटे बेटे का क्या नाम था? और हम ने देखा इस व्यक्ति के पाप का बोझ बहुत बढ़ गया है। उन्होंने 3 या मजदूरो को भेजा। आज बेल को धड़क में लाने के लिए सजा हो देखा।
3 भाग गए।
यूपी या आये है, उन्हें नरक में जाना पड़ा। पर ने पुकारा और को वो दिन में 50 बार उच्चारन करते थे, नाम दिया था किसे उनके सबसे छोटे बेटे का, जिसके प्रति बड़ा आकर्षण था।
माजरा
खाओ करो। तो जब या को देखा तो आज ने क्या किया, चिला कर बड़ी सरदार से निशान को पुकारा, जिसके कारण विष्णु दूध भगवान विष्ण के प्रतिनिधि पहुँच गए। और विष्णु उन्होंने वा को रोक दिया।
आजम को
लौटे
1 प्रेशर ने हमारा आज पहली बार है जब कि आपने
हमें भेजा था किसी कार्य के लिए,
वो किसी ने रोक दिया। यहाँ मंत्री जब आय
रोक दिया, उन्हें अपने का आदेश का पालन करने थे।
तो आज पहली बार है।
जब हम गए तो किसी ने हमें रोका आपके आदेश का पालन कर रहे थे। यहाँ मैंने क्या कहा?
भविष्य में जिस व्यक्ति ने हाय राम का उज्झालन किया है,
उसे मेरे सामने नहीं रहा, बोल
वयक्ति ने हार का नाम लिया है।
जो व्यक्ति भगवान के मंदिर जाता है, उसे मेरे पास को मत छूना। तो ये है भगवान के नाम के
कई
यमराज ने पूछा की दुर्ग में कैसे होगा? उधर करे 22
कार्ती के महीने में
हमारा प्रयास होना चाहिए कि हरी किताब का उच्चारण हम भाई और जल
घटाई भी बिल्कुल जीरो पर ले आओ।
निंदा बिल्कुल बंद कर 2 महीने में वैसे अपराध का बहुत बुरा परिणाम होता है। और कार्य के महीने में गीता पढ़ो जिंदगी का पढोजदकथापढ़ोगे तो पूरा दम पढ़ने का िए बराबर का लाभ मिलेगा तो करती भक्तों का भाव रहता है यह सेवा बढ़ाये और प्रचार बढ़ाये तो युके बेटे थे। उनका उधार हुआ कैसे दम उनी की कृपा है। और उन्होंने यह प्रार्थना की याद से
हम किसी प्रकार से बलबोधीनियाका उपयोग करेंगे।
किस में भगवान तो ये होना चाहिए हमारा निर्णय और ये संभव है अगर नियमित रूप से जाप। इत्यादी के भगवान जब पकड़ होते हैं, अलभुतदीदापगड़़ करते हैं, जैसे की भगवान। ने 2 बड़े पेड़ों को गिरा दिया। ये कोई संभव है साधारण स्थिति में कोई छोटा बच्चा 2 बड़े पेड़ों को गिरा दे बनाने देखा कि ये उखल में बांधा हुआ है मेरे बेटे को
ने पूछा किसने बांदा से
ये किसी की शरारत है मेरे प्यारे बेटे को तो सदा माता ने बांध सब चुप हो गये ने उन को खोल दिया भगवान को बने थे कौन भाई को बाल सा है। और फिर उन्हें बिल्कुल चुप हो गए और ो
है
न माने वो भी चुप हो गए उन्हें पता लगा कि इसने माता ने माना है भगवान वादा के बाद पिता के पास गए उनके जान ली। किस प्रकार भगवान ने माता का इतना स्नेह था इतना प्रेम था तो वान की अनेक लीला है जिनके 10 में पढ़ते। हमने केवल संक्षेप में राम लीला का वर्णन किया और इस महीने सुवा और शाम दाल उचारण करते जिसमें भगवान की पूरी लीला संक्षेप रूप में प्रस्तुत हुए। हमे इसे गाना और कार्तिक में दिया भी भगवान को अरब भगवान की मुर्ति को यहाँ भगवान की तस्वीर को ही अर्बन करना चाहिए उसे भगवान बड़े प्रस हमें खार्दी पूरा फायदा उठाना चाहिए शव के बढ़ा और यह होना चाहिए आपका प्रयास।
अगर आप चाहते है की अभी खुदा
कम करो करो कम पर इस शर्त पर की सेवा कम नही होगी अगर खुदा कम करोगे और आप विश्राम करोगे सेवा कर जाओगे तो इसका कोई लाभ नहीं अगर आप उतनी सेवा करना चाहते हो तो करो तो फिर आप खुराक को कम कर सकते हैं जो भगवान की दान लीला में भक्त बड़ा आनंद पाल करते हैं। और आज सारे विश्व में दान लीला की चर्चा हो रही है में स्पष्ट रूप से इन लीला का वर्णन है और हमें इन लीला में रुचि ले ली कृष्णा बढ़ा ली चाहिए और फिर भगवान के शरणागत हो पाएंगे दलीलकी कृष्ण कोई prs आज 10 मिनट अभी कोई आ रहा है। ye
desi believe
i gestes this point
of interveranmersy, how to be know bearendevering?
best you can verify with our senior, there s a senior to you were were you go and very fy with guru saduisisright correct, we can i need to improve। हमें हमेशा पूरी तरह ना जाए माई सेवा में और सुधार हो सकता है
ये
हमेशा हमारी तारीफ की स on the mind to do or more advance and second stage instructor and attempt should always be to in devar। इम्प्रूव वर को यही सोचते मेरी सेवा बहुत कमजोर है मुझे सुधार की आवश्यकता है हमने केवल संक्षेप में चर्चा
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मारा, पर जल को नहीं करना, लगाना छोड़ देने दे, मराजे बाहर जाते हो, उस का काम करना तो नहीं जाते हैं।
जो आप ऑफिस में करते हो, चर्चा वैसे जल नहीं मान। ऑफिस में आपको उनकी बोली बोलनी पड़ती है, पर ऑफिस के बाहर मत करो ऑफिस में आपको बोलना, पड़ेगा बॉस की तारीफ करो, उसकी तारीफ करो।
वो
वो 1 दम से आपकी नौकरी में आ जाता है और उसके बर stove last yes quickly wtr a boy, he is noishpuaweयनोईस। कैसे mhada mahadev as same she s a protect। उनके दामों में शिव लंदन की मूर्ति होती है। दे पर प्रोटेक्टिंग धाम शिव जी की प्रार्थना करें ये बात करनी चाह मे कृष्ण भक्ति प्राप्त हो, वे स्टॉक नाम
हाई क्रेशा।
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