भगवान अपने दिव्य गुण क्यों प्रकट करते हैं? | SB 10.09.19 | 23 Oct 2005 | Gopal Krishna Goswami |

यह हिन्दी व्याख्यान भगवान के दिव्य गुणों के प्रकट होने के कारणों को समझाता है। वक्ता बताते हैं कि परमेश्वर अपने भक्तों के बीच अपने गुणों को उजागर करता है, जिससे भक्तों का विश्वास और भक्ति गहरी होती है। वे शैव, ब्रह्मा, इंद्र जैसे उच्च देवताओं को भी परमेश्वर के अधिकार के अधीन दर्शाते हुए, इन देवताओं के लीलाओं (जैसे शिव का राक्षस विकास को शक्ति देना, ब्रह्मा का बच्चों को निंद्रा में डालना, इंद्र का यज्ञ रुकना) का उल्लेख करते हैं। मुख्य उदाहरण के रूप में कृष्ण की लीलाएँ – गोवर्धन उठाना, यशोदा की मातृभक्ति, दाम‑ध्यान एवं मंत्रों का प्रयोग – प्रस्तुत किए गये हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भगवान का एक प्रमुख गुण यह है कि वह अपने भक्तों के जीवन में प्रत्यक्ष रूप से प्रकट होता है। व्याख्यान में दाम‑ध्यान, मंत्रजप, और शास्त्रों (भगवद्गीता, भागवत) के उद्धरणों के माध्यम से भक्तियों को प्रेरित करने का भी उल्लेख है। अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया कि भगवान के अनगिनत गुणों में से यह गुण—भक्तों में प्रकट होना—सबसे प्रमुख है, और यह लीलाओं के माध्यम से सिद्ध होता है।
Chapters
ओम नमो भगवते वासुदेवाय, ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम भगवते वासुदेवाय, कम के नाम द हाई टाइम्स लोग पर इस लोक के द्वारा भगवान के दम कर लीला का वर्णन है। और ये दाम रस्सगरकामहिला है हम रोज दाम कारते, महिला रोज दाम रस से हटाते हैं। तो मैंने सोचा की हमे एस लीरा सुनना चाहिए। पसीरा पर विचार व home gatanrasagandnaslca tlinamitreglabe na maha trtेtनaससदननीनभूक लेख ymlubatedadiw ham de ham sreगरtivdaptकmlam srीgरुबठनबंशा च्रीलबमशलदहगना कम कम सजेवम सेतम सुब खुद rगनaसइतम कृsणaचेतन्या धेवमश्रीराधा कृष्ण दान धरिक हे कृष्णा करना सिंधु हीन बंदुजगपतेहोपेस कोटि का न, स के कजन घोराही रहेवदहेपलेपछ mjतकपासिंधुबहिवज श्री कृष्ण चेतना रहुरीअर हगशहेशएवम संदरचदयांगाहरीना भृत्या वैश्य दा साबजिनापीकरृष्ण ना si se he mahan prrectभगवansेr भगवान ब्रह्मा तथा भगवान इंद्र जैसे महान एवम उचित देवताओं समेत सम्पूर्ण ब्रह्मण भगवान के वर्ष में है। फिर भी भगवान का 1 दिल गुन है कि वे अपने भक्तों के वर्ष में रहते हैं। यही बात इस लीला में कृष्ण द्वारा दिखाई गयी है। तो वर्षों से हम भक्तों ने है दाम लस्ट का, दाम का, प्रार्थना का उच्चारण किया है। और हरी वक्कीब्लासमें कहा गया है कि अगर हम दामलष्काप्राथना का उच्चालन करे। रोज द्वारा भगवान दामला के प्रति मा है भरेगा। और हम भर्ती में आने प। और इस श्लोक में कहा जा रहा है शुक्र देव स्वामी जी के द्वारा ये भगवान शेव, ब्रह्मा दाता। इन्द्र यह महान ऊँचे देवता 33 करोड़ देवता हैं। और ब्रह्मा, शिव और इंद्र को ऊँचे देवता माना जाता जाता है। फिर जो ऊंचे देवता हैं ये सुपर ब्रह्मण के भगवान के वर्ष में है। श्रीमत भर्वदममें। आप पढते हो। किस प्रकार ये ऊँचे देवता भी भगवान के वर्ष में है। यह शिव जी के विषय में आप पढ़ते हो। किस प्रकार 1 समय शिव जी ने 1 राक्षस विकास सुरा को बल दिया था। तो ये था कि जहाँ भी वो हाथ रखे, उसके नीचे जो भी है वो नष्ट हो जाएगा। जैसे ही विकास को ये वर प्राप्त हुआ, उसने अपना हाथ हिलाया कहा, भगवान शिव के सिर। और अंत में शिव जी को दौड़ना पड़ा। और जहाँ भी वो दौरे उनके पीछे प्रकाश था। फिर अंत में वो स्वेता पहुँचे। यहाँ के भगवान ने अपना 1 ब्रह्मचारी का रूप ग्रहण कर लिया था। और फिर जब वे सुना उनके पीछे भागा और वह ने पूछा अरे भाई, तुम किसका पीछा कर रहे हो? क्यूँ उन्होंने मुझे वर दिया है? मैं उस घर का उपयोग करना चाहता हूँ। भगवान ने कहा, तुम जानते नहीं, जब से शिव जी का अनबन हुआ के ससुर के साथ लाई हुई है। जब से उनके मन में ताकत नहीं, तो पहले यह तो देखो कि ये वर्ड झूठा था और यकीन से झूठा था। तुम्हें मारने का अधिकार है, नहीं तो पाप कमा गए तरिका अच्छी सलाह दे। जैसे ही उन्होंने हाथ को सिर पर रखा, क्या परिणाम है? और शिव जी ने भी की हो उन्हें मंत्र दिया था, उच्चारण का, किस का मंत्र दिया था भगवान कृष्ण 3 गुना। इसी प्रकार यहाँ कहा गया है ब्रह्मा जी, ब्रह्मा जी ने भी भगवान की परीक्षा देने के लिए वालों को, बच्चों को चुरा लिया था, कितना कर लिया था। जैसे आजकल लोग कितना करते हैं, कितना लिया था? और जैसे डॉक्टर लोग आपको परेशन पहले लोरोफॉर्म देते है, तो ब्रह्माजी ने अपना क्लोरोफॉर्म देकर इन बच्चों को, गालों को गहरी नींद में डाल दिया था। क्लोरोफॉर्म तो देते हैं 45 घंटे के लिए। ज्यादा से ज्यादा। और ब्रह्माजी का क्लोरोफॉर्म तो बहुत लम्बा था, पूरा साल सोते रहे। और फिर भगवान ने अपना विस्तार किया। भगवान को तो समझ गए थे कि ब्रह्मा की लीला है। और ब्रह्मा जी ने अंत में क्या देखा कि भगवान ने विस्तार कर लिया था। तो सोचे की जिनको उन्होंने छुपाया था, वो जाग गए। ब्रह्मा जी जब देखने गए की वो सो रहे है या नहीं, उन्होंने उन्हें छुपा दिया था पहाडो के पीछे, तो देखा की वो बचे वहां सो रहे हैं। भगवान जी भी समझ पाए क्या की भगवान की अद्भुत लीला है। और न हो गए, उनसे माफी मांगी, इस अपराधी कार्य है। और फिर इन्द्रा जी। यहाँ ऊंचे देवता में इंदिरा का नाम भी गिना गया है। इंदिरा जी क्रोधित हो गए थे? जब उन्होंने देखा कि ब्रिज वासियों के द्वारा भगवान ने इंद्र यज्ञ रुकवा दिया है। थोड़े ही हफ्तों में आप गोवर्दन पूजा बनाओगे। बंदर जब क्रोधित हो गए, उन्होंने क्या किया? अपने क्रोध को प्रकट किया। इस विचार के साथ उनके विचार क्या था? ब्रेट बालो को सबक सिखाया जाए और तेजी के साथ वर्षा बरसने लगी। पानी का जो मूड था। 11 खम्बे जितना भारी था। और भगवान ने बेड बाजी की सुरक्षा कैसे की? कैसे गोदान पर्वत को उठाया, बाय हाथ की छोड़ी उम्मीदें। बायें हाथ के नाखून के अंत में इंद्र समझ पाए कि वो बेड बाजों को नुकसान नहीं ले पाई। तो यहाँ शुकदेव को स्वामी कहते हैं कि शिव, ब्रह्मा तथा इन्द्र के ऊँचे देवता, ये सम्पूर्ण भ्रमण के भगवान के वर्ष में है। तब ये ऊँचे ऊँचे देवता भी भगवान के वर्ष में है। भगवान किसके वर्ष में आ जाते हैं? ह क्या कहते हैं? फिर भी भगवान का 1 दिव्य गुण भगवान के तो अनेक गुण है। भगवान के अनेक गुणों का वर्णन भी नहीं कर सकते। अनंत से हजारों दीपों के साथ ही भगवान के अनेक गुणों का वर्णन नहीं कर सकते। पर संतों ने उनके अनेक गुणों का वर्णन किया है। यह है की अनेक गुणों में 1 गुण यह है कि वो अपने भक्तों के वर्ष में आ जाते हैं। और आगे कहते है यही बात इस जिला में कृष्ण द्वारा दिखाए गए है। जब शुक्र देव, स्वामी जी करे इस लीला, इस लीला का अर्थ क्या है? ये दामदौलीलाक्यूँकी इस भाग के नौवे ध्यान में शुक्रदेव स्वामी जी भगवान की दामोदर लीला का न करे। और और शाम को हम दाम रसका आते हैं। तो ये दाम दर लीला का वरना स्वामी जी ने किया है। भागवत में और भगवान के अनेक अद्भुत लीलाएं हैं। और इन अदभुत लीलाओं के द्वारा क्या स्थापित होता है। यह वही है। पर भगवान कहते हैं गीता में, जन्म में, भगवान जब अपने आप को प्रकट करते है वो दिव्य लीला प्रकट करते हैं जिसकी तुलना कोई साधारण वक्ती या कर पाया है या कर पाएगा इसीलिए क्षेत्र मीता देवी कहा गया है कला, ईश्वर करिश्णा, आर सब 1 ही पर मैं श्वरबाकीसबजोहै उनके सेवक है इसीलिए हम जी ने भी हम में क्या कहा ईश्वर वाला क्रिष्णा सच्चे र सर्वर करना करना तो माता यूसी दासियों के साथ घरेलू काम में जुड़ी हुई थी और वो क्या कर रही थी हा ढाई ढाई का मंथन यशोदा माता के घर में हर कार्य को किया जा रहा था 14 के साथ वो ये था कृष्णा जी और वो कभी थी दई को मथने लगी और दई को मचने के साथ साथ अपनी जीत से भगवान की लीलाओं का गीत का वर्णन कर रहे थे सदर माता ने देखा भगवान की अदभुत लीला कैसे उतना आई थी पालने के लिए सूरत औरत का रूप न करके और कैसे उसने भगवान को गोद में लिया स्तन द्वारा दूध पिलाने गया और स्तन में क्या था और ना का फिर उन्होंने देखा की 1 समय जब यशोदा माता।
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