संपूर्ण विश्व की समस्याओं का एक ही समाधान | SB 10.1.13 | Punjabi Bagh | 2022 | Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī

In this Hindi devotional lecture, Gopal Krishna Goswami interprets Srimad Bhagavatam 10.1.13 and expands the teaching into a practical guide for modern seekers. He argues that the world’s myriad problems—material cravings, mental agitation, illness, and existential dissatisfaction—share a single root cause: the lack of true spiritual nourishment. By cultivating sincere interest (ruchi) in Krishna‑katha, practicing mind‑control and meditation, and forming devotional communities, a seeker can satisfy the “spiritual hunger and thirst” that underlies all suffering. The speaker repeatedly contrasts genuine, scripturally‑based bliss with the fleeting pleasure of material possessions, urging listeners to replace the latter with bhakti‑driven joy. He outlines a step‑wise devotional progression (five stages), stresses the importance of sharing scriptures, encouraging others to listen, and highlights the guru‑shishya relationship as essential for sustaining practice. Throughout, anecdotes, rhetorical questions, and vivid metaphors (e.g., hunger, disease, “real medicine”) illustrate how devotion can serve as a universal remedy, leading to inner peace, ethical conduct, and ultimately, liberation.
Chapters
m, s, a
स्तन 10 लांच श्रीकाल आरपार कमीच शिलो संख्या व
ना
ेशाशाउीगस्सखद उधम मुखआपोजदकथाआमक शा गुस्सा शुमान गुस्सा तो
मदिबा
खान हो जा, मैश की उुस्सहाकशुमान
तो न
हो जाए, हो चुका था निशा गुस्सा चुना
तो
कम हो गया
हो।
चुका हर कथा धन्यवाद श्रद्धा व काटने, इसी की ना नहीं, ऐसा है सर कहा साली में अत्यंत कटे सुगम भूख माँ मुझको त्यक्त उधम जल ग्रह करना,
छोड़ देने के बाद
अभी भी रांधदेबाधानहीं जाल। बंधन ले रहने पर मुख चूटमआापकेकमल लुक से निकला हुआ। परी तथा अमेरिकन विश्न तथा का मंजर निति पर बैठे हुए अपने व्रत के कारण मैंने जल्द करना भी छोड़ दिया है। फिर भी आपके बुक से निकले कृष्ण कथा रूपी अमृत का पान करने से मेरी असमय भूख तथा प्यास मुझे किसी तरह भी राधा नहीं पहुंचाएगी। बात 7 दिनों के भीतर हमले की तैयारी करने के उद्देश्य से महाराज परीक्षित ने भोजन तथा जल ग्रहण करना छोड़ दिया था। मनुष्य होने के नाते उनको भूख तथा प्यास लगनी स्वाभाविक थी। इसलिए सुने को स्वामी विश्व कथा बंद करना चाह रहे होंगे, किंतु महाराज परीक्षित उपवास करने के बावजूद भी फटे हुए नहीं थे। उन्होंने कहा मेरे उपवास से ऊपर दुख का व्यास मुझे नहीं सताते। 1 बार में तना प्यास अत्यंत जासा था तो जल्द पीने के लिए शमी होने के आश्रम गया था, किन्तु मनमनी ने मुझे जल नहीं दिया। अत मैंने मसमुनीकेकंधेकर साथ बेड दिया था, जिसके वनसूब्रामणदाला मुझे शाप देकर, किन्तु अब मैं स्वस्थ हूं। मैं भूत का प्यास से करने भी विचलित। इससे सूचित होता है कि यदि भौतिक स्तर में भूत का प्यास पर करती है, किन्तु आध्यात्मिक स्तर में थकान जैसी कोई वस्तु नहीं होती, सारा संसार आध्यात्मिक प्यास के कारण कष्ट उठा रहा है। हर जेल। भ्रम अध्या आध्यात्मिक आत्मा है और उसे अपनी भूख प्यास बुझाने के लिए अध्यात्मिक भोजन की आवश्यकता पड़ती है। किन्तु दुर्भाग्य ही कहेंगे कि संसार कृष्ण कथा के अंत से सर्वथा अनजान है। इसलिए कृष्ण भावनामृत आंदोलन, दार्शनिको, भर, विलो तथा सामान्य लोगों के लिए वरदान कृष्ण तथा कृष्ण कथा में निश्चित दूर में विशेष आकर्षक है। इसलिए परम कृष्ण अर्थात सर्वाधिक आकर्षक कहलाते हैं। अमृतशबचंदरमा का भी योजक है और अम्बुज का अर्थ है कमल, सुहाली, चांदी तथा कमल की सुहानी सुगंध मिलकर शुखदेव स्वामी के मुख से पिष्लपथासंदेमें आनंद प्रदान कर रहे थे। कहा भी गया है, बदीनपिशेपदरहसौदोवाड लिख अदाल को पिश्नाकमिस्तरत होने चलते। चलना भोडितावाली जीवन के प्रति, अंतिम हास के प्रति, अपने अनियंत्रित वेदियों के कारण नायकी स्थिति के पर ले जाते हैं और 1 बार जमाए हुए ना ना जमाते रहते हैं। उनमें न तो किसी के उद्देश्य से, न अपने आप ही, न ही इन दोनों के कारण के द्वारा कृष्ण के प्रति रुचि जाग। देश भाग 7, 5, 10 संप्रति द्वारा मानव समाज चरित करने में लगा है। नष्ट होने लोग 1 शरीर में जन्म लेकर बनने और उधर दूसरा शरीर धारण कर वे विद्यु भोगने के लिए तैयार रहते हैं। मृत्यु से संसार इस तनविदुकेचरकोहोने के लिए कृष्ण कथा कृष्ण माना नेता आवश्यक है। क्योंकि जब तक शुधेगोस्वामी जैसे स्वरूप से, व्यक्ति से कृष्ण कथा नहीं सुनी जाती। तब तक सारी होने बाद को दूर करने वाले कृष्ण कथा के अंदर का न तो आनंद दिया जा सकता है, न ही आध्यात्मिक अस्ति में आनंद जीवन भोगा जा सकता है। जब हम कृष्णा भारत आंदोलन के बारे में सोचते हैं तो हम देखते हैं कि जिन्होंने कृष्ण कथा की अंगद का आस्वादन कर लिया है, वे सारे भौतिक इच्छाओं का परित्याग कर देते हैं किन्तु जो कृष्ण या कृष्ण कथा को नहीं समझते, वे कृष्णा भारत जीवन को मस्तिष्क बुलाई या मन नियंत्रण मे है। 1 और जहाँ भक्तगण अध्यात्मिक आने का अनुभव करते हैं, वही भक्तों को यह देखकर हैरानी होती है कि वे भक्तों ने भौतिक लासन का परित्याग कर दिया है।
आगे जाते जा रहे, जहाँ जहा भी
संबंधों के भक्त
a
a an,
an,
njnasaतam
is
a
परमाल को श्रिंगी नाम के साथ दिया था, क्या था सा समरा राज्य के समय पूरे समाज में धारमिक राजा से गए थे कि आज शिकार
ो
पीछे सुनाई दे रहा है प्रेशर मराज समाज थे और जंगल में गए थे। प्यास लगे वो प्यास लगी हो, चारों तरफ देख पानी प्राप्त करने की संभावना kota कुटा भगवान का चिंतन अब सुना कुटिया में थे। 1 साथ उन्होंने ये उम्मीद की थी कि उनका स्वागत किया जाएगा स में लिखा है आपके सामने आये और उनका स्वागत करना सबसे बेहतर है अगर आप उनका स्वागत करो पुशालमकेसाथ और अगर आप पुशाल सकते जा दे सकते हो, दे सकते हो कुछ तो सबसे बेहतर ुशादखिलाप्रॉपर्जी की थी की हर व्यक्ति जो कि इस मंदिर में बिठाकर उन्हें कऊंगपशादखाना स्वागत करेगा के साथ या पानी के साथ अपने सार के साथ ने देखा मिनी राजा के और इसका राजा थे उन्होंने अपमान महसूस किया राजा चल परवान थे, आगे चल रे थे, उन्होंने देखा शाम को उठाया और जाकर राजा के गले में उनका बेटा श्रिंगी क्या कर रहा था, खेल रहा था उसने देखा कि राजा पिता की कुटिया से कुछ तेज हो जिज्ञासी देखो क्या क्या क्या हुआ उन्होंने देखा क्या करे में उनके तेजी के घर में 1 मरवा शाम था उन्होंने पूरा मान या क्योंकि उनके पिता के गले में दिया तो सिंगर क्या उन्होंने शराब था श्राप सा पर उनका जाना जायेगा तो जब आपको सूचना मिलती है कि कोई गंभीर स्थिति आने वाली है हम घबरा जाते है डॉ डॉक्टर डॉक्टर कहता है आपको भयंकर कैंसर जा है तो इसी प्रकार के राजा ने राजा को खराब दिया घबराएंगे घबरा गए हो पर पर बिल्कुल नहीं है समय के हजारों हजारों संतों को बुलाकर यह महत्वपूर्ण प्रेशर पूछे प्रश्न जिस व्यक्ति क्या उपदेश होना चाहिए। 2 पर यह प्रश्न यह था यह पता लगा है कि what to be the golf? तुम्हारा का क्या उद्देश्य दूसरा प्रश्न है था इसकी मृत्यु आने वाली है तो सबकी आएगी जो सूचना है कि अब जल्द मृत्यु आ रही है क्या करती तो परेशना कर लिया कहा कि हमें क्या करना है उन्होंने ये निश्चित किया वो कुछ खाएंगे न पिएंगे। ये था परेशमराजाक्या करे बताते हैं। वहाँ के दामों की। भगवान के दावों गुण परी्षमाजमेअभाई ले। उन्होंने शाप स्वीकार कर लिया और वो जुड़े हुए थे। मैं भगवान के दामों को सुनने में। वो बड़े ध्यान से सुने थे। उपदेश से। तो इस श्लोक में कहा जा रहा है कि मैंने मृत्यु के निकट सा पर मैंने जल पीना भी रोक दिया था। और जल के बिना और कठिन है? उन्होंने कहा कि कठिन है, मुझे अनुभव नहीं हुआ, क्यूँ आनंद प्राप्त हो रहा था इस कार्य में, कथा में, इस विषय में, इस लोक में ही कथा की चर्चा की गयी है। और इस फ्लोट में 2 शब्द है कथा, वही कता है, सब समस्यों का उपाय है। hema का कि प्रभा to अत्यंत आनंद था थे। हरी कथा में। कई बार लोग सोचते हैं कि हरी का कुछ न नहीं है। हरी कथा में असली आनंद है। और ऐसे कई श्लोको में इस पीजे जाता है। या का। कथा में हमें रुचि ले ली है। कथा में रुचि लेंगे तो हम ध्यान क्षेत्र में आगे बढ़। सकेंगे। बोधि सिस्ता में आप देखते हो। समाज में वो लोगों बड़ा गहरा आकर्षण है, पर अपने को दोष नहीं कर सकते। आप अगर अपनी इंदियों को संतुष्ट करना चाहो। क्या है उपाय नही करना और इस अध्याय में आप पढ़ते हो। वन के शो पर ब्रेक सावधानी से सुनते थे, क्या सुन रहे थे। सुनने में इतना आनंद आया कि बहुत भूख और प्यास लगे तो हमें समझ जाना चाहिए। अगर में असली शांति, असली सुख चाहिए। क्या? यह उपाय तो यह है के द्वारा ही गत के कारण उनका जो प्यार था। दूर आप साधारण समाज में हो। कई बार कोई व्यक्ति खेल का मैच देख रहा है। मैच में पूरा कॉन्संट्रेट करता है। को प्यास महसूस नहीं होता। कई बार बार कार्य में जुड़ जाते हैं। बड़े गराई के साथ को भूल जाते हैं, क्या भूल जाते हैं, भूल जाते हैं। प्यार हरी कथा सुनोगे तो आप इससे बच सकोगे। तो इसलिए कहा गया कि हरी कथा वो आवश्यक है। हर समय का कहा करोगे। कहते हैं इस बौद्धिक संस्थान में वो की आयु ज्यादा लंबी नहीं है। वो अपनी छोटी सी आयु है। इसलिए कहा जाता है कि हमें शुरू से ही लेनी है। पर में प्रभाजी कह रहे हैं कि श्रीमद भागवतम के द्वारा हमें परी कथा की का ज्ञान प्राप्त होता है। और ये श्रीमत भगवत में क्या है। हरी कथा शुरू से, अंत प्यार से दिल है। अनेक सासु की रक्षा की थी, उनके दाग को प्रस्तुत किया था श्रील भगत में। क्या शुद्ध हरी का है। शुरू से तो इस रोग के द्वारा प्रेशर राय हम सब को महत्वपूर्ण महत्वपूर्ण संदेश दे रहे। वी शुड, बी इंटर अरे कथा में रुचि नहीं लोगे तो किस कार्य में आपके? कहते हैं कि बाद के द्वारा भक्ति जो है, कमजोर हो जाएगी ा और ही कथा में रूची लेंगे तो क्या? तो ही में रूची बोलेंगे। तो हमें इस प्रकार की योजना करनी चाहिए। इसके द्वारा ही कथा में रूची और प्रयास करेंगे संभव होगा। तुम 1 कदम लो भगवान की तरफ भगवान 10 कदम लेंगे। तुम तो हरी कथा में हमें रुचि लेनी चाहिए। श्रीमन भगत में शुरू से अंत तक 1 ही महत्वपूर्ण विषय की चर्चा की है। क्या है हर कथा वो हरी कथा भाग में, इन गल में द्वारा क्या लाभ होता है, आक है शशासरकेस्लोकहुए और सबसे पहले लोक में आप लोग क्या कहते हैं लाभ क्या है मैल दूर हो है ये मैल किस काम इन्हें कहा जाता है। और इस समय हमारी रुची है भक्ति के बल पर उन्हें दूर करना। तो अगर हम शो रुचि लें
तो
हरे कता में रूची बोले और हरे कथा के द्वारा केवल लहा भी है और जो भक्त हैं वो रुचि लेते हैं में भगवान हमें अनेक स्कोक है जिनका मूल संदेश यही है नामा चेतावनी कृष्ण 2 नाम बना है वार के जो नाम है क्या है पर प्रेस पत्र को क्या क्या बन जायेगा तो वहा के है, लीला है सब का है। हर कथा तो हरि कथा में रूचि लेनी चाहिए। माल भक्ती के पक्षों के सम्बन्ध में आते है तो हरी कथा में रूचि नहीं रहती और अगर हम रूप से शाल करके ही कथा को बढ़ाने का प्रयास करें करता बढ़ेंगे और ये है शास्त्र का, शास्र का उपदेश है वो किसलिए है ruchi मुझे वैसे तो भूख को प्यास लगती थी और जब से मैंने इन स द्वारा भगवत अब सुनना शुरू किया है। ये भूख और प्यास दोनों ही समाप्त हो। घर कथा इतनी रुची है। कई बार बोधिवालीव्यक्ति हमें भले तुम लोग यह है कि नाम जॉब करते हो सुबह शाम थकते नहीं हो, थकते नहीं हैं, क्या है हम थकते थकते ही
है,
छुट्टी चाहिए वो 5 दिन करेंगे तो दिन सारी छुट्टी, स्कूल में स्कूल के विद्यार्थी छुट्टी जस बहुत ही अच्छा लम्बी। छुट्टिया मिलती है तो छुट्टी क्यों लेते है? क्यूँकि हम जो कार्य करते हैं उसमें मरी रूचि न हम थक जाते है बार बार बार बार। आप किसी बौधिक धूल को बार बार नहीं सुन सकते। बौधिक नाम कहानी हम थक जाते है। इसके लिए उ छुट्टी मांगे और जो भक्त है आप कभी ये कहते हो हमारे नाम करेंगे, जैसे सोचते हो, हमारे नाम करेंगे। थोड़े साल में 4 क्यूँ, हर रूचि। तो हमें इस प्रकार के अपयासकरनाचाे म्हारी कथा में रूचि बुलाए साथ पर में प्रभाजी अनेक महत्वपूर्ण विश्व की चर्चा कर रहे वो कहते हैं कि कृष्ण भक्ति का जो संस्था है क्या करे और भगत द्वारा क्या क क्या किया जा रहा है, कृष्ण गदा को बढ़ाया जा रहा है। भागवत गीता में क्या है भगवान का से, भागवत क्या है भगवान की और इसका इन जिन्दा पढ़ोगे उदार रुचि होगी। और पढ़ने के लिए आपको कभी ऐसा नहीं लगेगा कि हमने शेष भार पढ लिया है। रुची ले तो कृष्णा कदम, रूची बढ़ाने और ये कैसे होगा? पढने है। कई बार भाग पूछते हैं महीना में रूची कैसे बढ़ेगी, कैसे बढ़ेगी? लोगे तो आपकी रूची बढ़ेगी, नहीं लोगे तो रूची नहीं, बढेगी शास्र में रूची कैसे बढेगी? शास्त्र पढोगे, c to a
to
do शाम को गीता बोला और अगर अभी 4 सो परोगी तो क्या लाभ होगा। आप की हरी कथा में रूची बढेगी। तो इस लोक के साथ में पापा जी भदमकेसादवेशकनके 1 प्रसिद्ध श्लोक का वर्णन करते हैं। हम जाने कौन सा शो में कहा गया है मार्केट द्वारा ही क्या है हम फिर से चबाते हैं और सोचते हैं इतना आनंद नहीं मिला था। मिलेगा क्या क्या अनुभव होता है कि द्वारा आपको आनंद लाभ नहीं मिला। तो यह कहा जा रहा है। पर आज कहते हैं कि धान को फिर से चलाने का कोई फुल फैला नहीं। हम देखते हैं लोग गन्ना देते हैं, जूस पीते हैं, फिर करने को फेंक देते हैं। दूसरा व्यक्ति आता है, उठाता है उसे क्या मिलता है। वो 1 बार वो किसी प्रकार प्रधान राज। कहते हैं कि सिम्पली चुइंग छू अपने रस निकाल लिया है और सोचते हो ऑर्डर्स मिलेगा तो मिलता है, नहीं तो 1 बार तो लाल सारेसर चाहे आप कितना भी प्रयास कर लो, पोलिस जीवन में आपको बहुत कम आनंद। मिलेगा प्रयास कर किधर प्रयास करो जो आपका कोटा है उससे 1 बून ज्यादा, 1 बून। हम उम्मीद करते है।
ad
una la r न बचना चाहते हो में क्या कहना चाहिए, क्या कहना चाहे कृष्ण कथा में तो इस लोक में बड़े महत्वपूर्ण देश तो आप कहोगे, हम सब की रूची तो है पर रूची को बढ़ाने के लिए प्रयास करना पड़ेगा। इसलिए ग्रंतों का अध्ययन बहुत आवश्यक है। अब इस में कोर्स डिजाइन हो रहे हैं जिसके द्वारा हमारे भक्तों को मौका मिले रेगुलरली क्या करनेगा गरंटेसफोरलि 1 तरफ से प्रयास कर रहे है। जो घंटा बाटे अभी लगभग 4 लाख बी। हम चाहते है कि हम चाहते हैं कि लोग इन गंधों को पढ़े भी। यह बहुत अच्छी बात है। यह बात देते हो हमारे अभी इस में क्या उद्देश्य है। ऐसा प्रबंध करे लोग इन को पढ़ेंगे पढेंगे तो फिर जाता दूर होगी उस साथ में जो भक्त हैं इस में उन्हें भी प्रॉपर के ग्रंथों को बकैदा पढ़ना चाहिए। यह अनुभव किया गया है कि भक्त जितनी गहराई के साथ, जितने, रुची के साथ ग्रंथों को पढ़ना चाहिए के भक्त भी नहीं पढ़ रहे हैं। तो इसलिए अभी एस्पेशल मिनिस्ट्री बनी है जिसकी देखभाल सफल मिश्र नाम के 1 भगत कर रहे है। और इसका उद्देश्य क्या है? to incres the interest in this can boris to win probl। आप पढोगे तो फिर आप उस संदेश का पालन भी करे। बाबा जी कहते थे तुम पढ़ते नहीं, उसे बाटते हो। कोई आप से पूछे क्या संदेश है इसमें आपको आई डोंट नो, वो मैं नहीं जानता तो आप किसी को प्रभावित कर। सकोगे तो ये आवश्यक है कि हमें गंध में रूचि बना दी है। और यह है सबसे सबल सेवा। और ये सम्भव है कैसे प्रयास करने नेवर टेक न। हमें कभी यह नहीं सोचना चाहिए। सम्भव है हर का सम्भव है। अगर प्रयास करे। भगवान देवी माया, इस माया का विरोध करना बहुत ही कठिन है। भगवान खुद कहते हैं बहुत ही कठिन है। हमारे प्रयास से क्या होगा? आगे भगवान उपाय भी ले ले। शास्त्रों में जो समस्या है, उसकी चर्चा है, साथ में उसका उपाय भी। जैसे बौद्धिक समाज में मान लो आपको कोई गहरी बीमारी है डॉक्टर को कहते हो वह बीमारी का क्या इलाज डॉक्टर कहता है? कई बार सौरी नोक्योकोइलाजले, ध्यानिक क्षेत्र में हमारे ऋषि मुनि जो है वो हमें ये बता रहे हैं। क्या है समस्या और क्या है? क्या है उपाय। तो यहाँ आज के लोग में कहा जाता है कि सबसे महत्वपूर्ण हो की में रूचि रूचि लोगे। तो फिर है वो भूख प्यास और स दिन के लिए 1 साथ कुछ खाना नहीं पीना। ऐसा नही पर क्यों वो क्यों रोक सके? क्योंकि ध्यान से सुनते थे क्या ही का। तो हरी कथा में हमें रुची बुलानी चाहिए। और प्रयास करेंगे बाबाजी श्लोक में कह रहे हैं आगे की भौतिक इच्छाओं को हम दूर कैसे कर सकते हो? कैसे कर सकते हो? बोली कहते हैं यू लूयूमtी ho na ha k yog brenwosingआपने शब्द सुना बेनवा हिंदुस्तान में भी आजकल बहुत पॉपुलर हो गया है। प्रॉपर जी कह रहे हैं तुम बौतरीगाकेशको तोड़ना चाहो तो क्या करना चाहिए हमें ब्रेन वॉश जबसकानसंसथा पश्चिम देशो में खुली थी, ने बहुत बड़ा आरोप लगा है। ये लोग ब्रेन वॉशिंग करते हैं, बच्चों के दिमाग को बल देते हैं। वो धो रहे हैं हमें 2 के, हम धो रहे हैं। जैसे बिल बोर्ड एड्वेटेजमेंट देखते हो, एड्विटेजमेंट में क्या क्या किया जा रहा वो इतने द्वारा अपने दिमाग को धोले। 2 कि तुम हमारे इस में भी विश्वास करो। हमारे साथ शिक्षा में ने पर असली वॉशिंग है जब हम आध्यातमिक के द्वारा उनके वाली तोड़ रहे हो। प्रभुजी 1 बुरा 1 कथा सुनाते थे। उन्होंने कहा कि 1 बहरा व्यक्ति था डे बहरा व्यक्ति। जैसे हम जानते है, सुन नहीं सकता है। वो अपनी पत्नी को बुला रहा था आओ। तो पतली ने कहा रसोई बना रही हूँ, आती है। थोड़ी देर में 1 बार हो गया नहीं आई। उसने कहा मैं ही हूँ थोड़ी देर देर बाद दूसरी बार चलाकर कार तुम बह रही हो। तुम सुनते नहीं हो। कब से बोला हू। बाबा ने कहा मेरा वो था, वो हमें दोष दे रहा था, वो
ब्रेन
वोशिंग कर रहा है, कौन हम दोष देते हैं। संस्था कहीं ने कोर्ट केस वगैरह भी किया। तो पापा जी कह रहे हैं कि हमें क्या करना चाहिए, कृष्ण कथा रुचि देनी चाह। और हमें मन को थिर बनाना चाहिए। और फिर पापा जी कहते हैं यू शुड प्रैक्टिस, माइंड कंट्रोल। और अगर आप करोगे तो भी आपको क्या मिलेगा? असली आनंद मिलेगा ब्रह्मा, वीर सो, असली आनंद अगर आपको चाहिए। क्या है ये बौधिक समाज में जो आनंद मिलता है, असली है, क्या है नकली आना साधारण स्थिति में आप जब किसी वस्तु की दवाई को फेकते है, आपका क्या भाव रहता है, असली असली दवाई चाहिए, असली नोट चाहिए, जाली रोज। तो उसी प्रकार। who prasanag to discover relspirtillisproba, including lines, we should fire for real pirtulhapenenfor, real picialhapene posible व नव द भक्ति का ज्ञान दिया था। और अब यह ज्ञान सबसे पहले प्रात की माता को प्राप्त हुआ था। और ये नव द भक्ति का ज्ञान प्राप्त ग्या मोदी के द्वारा। तो क्या कहा जाता है शहर कितना विश्, शरणम कितना का मार्ग है। ये अंतर्राष्ट्रीय मार्ग है। किसी कोने में जाओ आप शो कितना का प्रैक्टिस करोगे। तो क्या देखोगे कि हर कथा में रुचि पर है और जो भौतिक आकर्षण है वो घटेगा। तो ये संभव है। अगर आप प्रयास करो। हम जब ग्रंथों को बांटते भी हैं, वह प्रयास कर लेना चाहिए। उन्हें ऐसी प्रेरणा दे कि वो इन ग्रंथों को पढ़े और हम प्रयास करेंगे को सफलता पा प्राप्त कर। तो हरी कथा कुछ कथा में रुची देनी चाहिए। फिर आपको असली आनंद प्राब्लम होगा। और असली आनंद को प्राप्त करने के लिए प्रयास करना पड़। god have those to have? उनका सहयोग देते हैं। क से जो प्रयास करते हैं। तो हमें प्रयास करना है कि बुलाने में अनेक गति प्रभा जी ने उनके 2 ग्रंथों का अनुवाद किया। कौन सी है? तो इन ग्रंथों के द्वारा शिक्षा मिलती है। इस प्रकार भगवान के अनेक नियम दिए है। इसका पालन करना इस बार नहीं करना में क्या कहते हैं स्वामी? इन सब नियमों का 1 ही चोर है। क्या
कृष्ण
पापा जी कह रहे थे 1 लेक्चर में जैसे आप गंध के वेतन के विषय में आप सोच रहे हो। कैसे हम होगा वेतन बढ़ाए कैसे लोगों को प्रेरणा दे के ऊपरे। ये हैं समक रियल समान। आप क्या सोच रहे हो? कैसे? तो भक्तों का यह भाव रहता है कि अगर लोगों को असली खुशी चाहिए। क्या इन गंजों का अध्ययन करना है और आगे दूसरों को भी दे रहा है। यह होना चाहिए। तो इस महत्व आप पढ़ रहे हो। परीक्षण मान का है में भूख थी, प्यास थी और मुझे बिल्कुल अनुभव नहीं हो रहा। क्यों भगवान की हरी कथा सुनने में इतना आनंद ला है? साथ में असली आनंद अनुभव कर रहे हैं, ये भूख प्यास मिट गई। तो आप देख सकते हो। यह असली उपाय, ये असली, अश्वनी, हर बीमारी का, क्या का, अनेक जीवों का वर्णन किया है और नेह का वरन किया। वह असली उद्देश्य होना चाहिए। कृष्ण कथा में तो शासक पढ़ोगे तो रूचि, बढ़ेगी और किताब का भाव होना चाहिए। हम ऐसा प्रचार करें कि लोगों में रूचि बढे पढ़ेंगे। वे तो कृष्ण के रुचि लेना। और यह संभव होता है। अनसन के द्वारा रचे बने 5 महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा की। सबसे पहले क्या करते हैं? अगर शुसभक्तोंकी संगत मिलेगी तो क्या प्राप्त होगा? जो भक्त है, उसकी इच्छा रहती है। यह कथा सी बड़े कैसे पुरुषों द्वारा भगवान धु, धु, तुम्हें मेरे कारण इतना कैश भुगतना पड़ा था। मांगो क्या चाहिए अगर आप मुझे बर्थ देना चाहते हो तो ऐसा वर दीजिये। मुझे उत्तम भक्तों की संगत मिलेगी, क्यूँ उत्तम भक्तों की संगत मिलेगी तो आपको असली ज्ञान भी मिलेगा। तो नुमा ने कहा अगर आप मुझे वर देना चाहते हो तो ऐसा वर दीजिये जिसके द्वारा मुझे plan par s a राधे का। अगर आप मुझे वर देना चाहते हो तो ऐसा वर दीजिये। मैं मुझे उन संग में मेरा भौतिक आकर्षण समन् हो जाए। राधे का अगर आप मुझे वर देना चाहते हो तो ऐसा वर दीजिये क्या मेरा बौधिक आकर्षण क्या हो जाय। तो ये होता भक्त का भाव। भगवान ने हमें कोई वर देना है तो ऐसा वर प्राप्त हो जिसके द्वारा हम भगवान के भक्तों की संगम तो बार बार क्या सुनोगे। तो श्रीमान भगत में शुरू से अंत यह ध्यान में संदेश मारा भाव होना चाहिए। इन उपदेशों को लाभ उठा। तो साल सक में रहोगे। तो आपको नाम माया का ज्ञान मिलेगा। असली साधु है। वो आपको वही शिक्षा देगा जो कि शासुमेजैसेकीसोनी किसी केंद्र में चले जाओ। वो यही कि संदेश मिलेगा असली साधु जो है देश किस शासुभरनाहै। और तो आप भक्तों के सर में रहोगे। तो नाम की महिमा का नाम की महिमा पढते हो। और मार नाम जो है भगवान से करे तो से राज करियर में दोषी दोष है। परेकगुलनाहै इस करिया में क्या है?
वो
तो ये सब आरंभ होता है। तो हमारा उद्देश्य यह होना चाहिए कि हमारी कथा में रूचि बुला। ruchi बढ़ाएगे क्या क्या होगा? bimari मारी ilase दवाई क्या है दवाई? is the solution to all problem? सो हार नाम का ध्यान ऐसे जॉब पे तैयारी करोगे तो समस्या हल हो जाएगी। अगर नहीं करोगे तो समस्या बढ़ जाएगी, 11 ही चीज उपाय, 1 ही चीज का कारण मिले। तो इसे हमें शुरू से अंत तक का की महिमा पड़ता। जो भक्त हैं उनके यह भाव रहता है और जो भक्त हैं उनकी इच्छा क्या रहती है? भक्तों के साथ चेताराकस्वामी नौकरी छोड कर गए लालस की ओर फिर से मिलने जाते जाते रास्ते में कोड की बीमारी हो को बसाने से मिले के गले को हाथ लगाया ने गले लगाया, स्नातर ने कहा क्या खेलते हो में आज शरीर से बड़ा अपने शरीर को गले लगा कर अपना स्पेशल एडवांस पर करना किसे अपने सादुसकमेंरहोगे। तो आप ये भाग इस ज्ञान को भी प्राप्त है। मुझे बढ़ानी चाहिए और कातर संदेश दिया और हम सबको क्या हद कारका क्या करो तो वह का रूची पढ़ानी चाहिए और साल संघ में रहोगे। तो ये संभव है सारी संगत ये 3 माध्यम री स्टेज है। आप उनको मिल सकते हो। वो आपसे कम ज्ञान रखते हैं। दूसरा आप के बराह तीसरा आप से अरे। जब आप उनको मिला जो कि आप से ज्यादा एडवांस्ड है। तुम्हारा क्या भाव होना चाहिए, हमें प्रसन्न होना चाहिए happy you could be happy। और जब उनको मिला जिनके पास सबसे कम ज्ञान है, फिर क्या उपाय होना चाहिए? दया की भावना और दया प्रस्तुत करते हो कैसे 2 बार कर ले आप के बराबर है। क्या व्यवहार होना चाहिए हमें मित्रता का भाव होना, यह मित्रता का भाव पूरा आवश्यक है। आप श्रीमद भागोधमकेचौलीस में कथा बढ़े और 10 हजार साल तक पूरी घर से ही भगवान उन्हें अपना दर्शन दिया तो भगवान ने सब भाइयों से संतुष्ट हो। क्यूँ भाइयों में 1 ही भावना है, भाइयों का 1 ही धन क्या है। वो बजी। तो भक्तों को नेता का भाव रखना चाहिए जबकि ने समान के भक्तों को मिले मृत का भाव है। 1 साथ प्रचार कर रहा है। 1 साथ बावा की सेवा करना और मित्र भाव रखे तो बंधन में बात भी बड़ा अच्छा रहेगा। तो भगवान ने कहा तो तुम भाइयों से संतोष को तुम सब भाइयों में 1 ही मूल भाव है क्या? a o o में हा री bok pयasबिलकुलमेर मने इतना आनंद आ रहा था गरगस्वामिकेद्वारा आनंद हरा कई बार लोग पूछते
है
में आनंद है, इसमें असली आनंद है और ये असली आनंद प्राप्त हो कैसे? श्रमक श्रम कैसे सबके लिए बहुत mhtवapूrgodhasdo तो सहयोग करते हैं जो स्वयं प्रयास करते कृष्ण कथा में रूचि लेनी जा, कथा में रूची ले ली जाये तो लेंगे तो बहुत बहुत ही आकर्षण घटेगा वह अध्यात्मिक आकर्षण बढेगा जिस प्रकार बौद्धिक समाज में आपकी इच्छा रहती है, बुखार कहा जाए वह आध्यात्मिक क्षेत्र में प्रयास रहना चाहिए। जो भौतिक बुखार है वो क्या हो? मोजा सम्भव है किसके माध्यम से कृष्ण कथा के द्वारा तो ये श्लोक में यह सूचना दे रहे हैं की अगर हम कृष्ण कथा में रुचि लेंगे तो फिर कथा बढ़ेगी कथा बढ़ेगी पे आपका के बंधन से क्या हो जाएगा। असली अब सबका असली उद्देश्य क्या है? 1 व्यक्ति का क्या देश होने से, मृत्यु से क्या करना च? so so, we should take interest, nd, take inte happen के जो नाम है, वो भी पीते है, जैसे वां गोल है, मीठे हैं कैसे जानता के कारण,
हम,
उनका कांदा के कारण, तुम्हारे नाम का मीटरपनहमेंमसूस नहीं, पर महसूस हो सकता है मीटरपर अगर हम ध्यान से hi we should take tested hayata isakaa and then we were krishna, a we save a little time for a report state of the union message, united, sis president, he is call a state of the union message, okay yes puja, this was a very sweet word, quickly quickly।
भारत प्रश्न है की बा, उनकी साथ में मृत्यु होने वाले कर में जल्द, आवाज में जल्द त्याग कर ये व्रद्ध लेलेते है किसने कथा सुनी तो आपने जल्द त्याग कर सोने से क्या लाभ है। बिना प्यार सुनने से प्रसाद पाते हो सुन।
जितने ध्यान से सुनोगे, उतना अधिक समझोगे। ध्यान इसके लिए में रूप में कहते हैं। वो ये नहीं कहते हैं, केवल सुनो वो कहते हैं। ध्यान से सुनो, फिर आपका हृदय का मेरा, दु बाबा, जी हाँ, क्या
खाना
पीना बंद कर देंगे। अच्छा सुना
आपको ऐसी भूख लगेगी ही नींद आ जाएगी, नहीं तो प्रेक्षण में प्रेशर में ले। 2 ध्यान से सुना। कई बार हम पापा से पूछते थे कि आप में इतना गुस्सा है प्रचार के लिए i heard my person must attentively herd peaching attentively। सो आप ध्यान से सुनने में और धान से सुनोगे la sुनoगेlaभतoथोड़ा रहेगा, पूरा लाभ उठाना। take medisin as a doctor prescribers, you take the prescription case, the doctor s adifhepresciptin work a a
a
a a
hot men that question from arjeossmasiti
जल्दी
जल्दी
से लिखा जाता
very selected बाई,
but dont me so that you end up। not hearing anybody so that i think and i krishna gases movement the many senior peaches giving the same message, you not think, he he is the short, it is any body was giving the por message asitis chetan tolhathastakur। कहीं में अचार है, प्रचार नहीं, कहीं प्रचार है, उनमें अचार है में दोनों ही गुण प्राप्त हो रहे हैं, प्रचार और प्रचार में सो आनली। for this example। अचार प्रचार हम जो संदेश बोल रहे हैं। we practice krna jay, who practise practis, we have seen a new, but that joins the moment, he s not so convensiblthe philosophy repeating, everything he heard by his repeating in your herein, people get tragen yes।
महाराज के प्रशन जो बहुत महान है, जरूरत है उनके जीवन में जो कोई समस्या आती है तो वो उसको भगवान का आशीर्वाद की तरह करते है तो वो वो बहुत खुश हो जाते है और फिर भगवान को जो कार से जाते हैं और भी इंटेनसिटी के साथ भी, लेकिन महाराज जब मैं अपने जीवन में देखता हूँ कि मेरे लिए कोई समस्या आती है, कुछ प्रॉब्लम आती है तो मैं तो भगवान को ऐसा बोलने जाता भगवान मेरे जीवन से समस्या को आप 2 अच्छा भी कर सकते थे आप क्यों नहीं कर रहे हैं और मेरा तो भक्ति और का तो मैं कैसे सेम हो सकता हूँ हमें हर
चीज के सिद्धांत को समझ और हमें यह समझ लेना चाहिए भक्ति में जुडते हो कि हम भक्ति में इस भावना से नहीं जुड़ रहे की कोई समस्या नहीं आएगी, कोई कठिनाई नहीं आएगी जिसको हम छुयेंगे को सोला मजा आएगा हम परिमल भगत में प्यास देव ने क्या कहा शुद्ध भक्ति पर बल दे दिया तो जो भक्त है कुंती देवी ने क्या कहा भीपाद आमिर किस को बढ़ाओ बढ़ाओ क्यूँ बढाओ बढ़ाते हो इतने गहराई से मैं आपके चैनल को का
जल्दी
क्या होगा जितना प्रयास कर माल दूर होगा और के बंधन से छुटकारा मिलेगा तो आप सोच सकते हो भगवान गीता में कहते हैं 4 परिसी लोग मेरे शेर में आते है नहीं 1 जैसे धन चाहिए तो आप सोचो चाहे कोई भी कारण हो धन चाहिए रोगी पीड़ित गाली तो 4 स्टेज में आते हो भगवान के हर र पुण्यात्मा एंड
इस
विषय में अक्सर अब मनाज का उदाहरण मराज पहले भाव के साथ कि बड़ा विशाल राज्य भान ने कहा धूप मांगो भी क्या चाहिए, लू ने कहा क्या
था
मुझे असली सो practis
यस, यस
मेरे कुशन
येस हमारे दिल कुश नहीं
आते है तो में बहुत रुची होती
है और देखते साल साल बितते तो रूची कम होती है तो रुचि को घटने की वजह पढ़ना चाहिए मे रुची बढ़नी चाहिए तो क्या देखते हो कभी भी कम हो जाती है तो कम क्यों हो रही
है।
कई बार मरीज व्यक्ति सोचता है मेरा इलाज हो गया दवाई खाना कम कर देता है, बंद कर देता है, फिर से लैप्स हो जाता है तो कई बार आप सोचते है हम को इतना समय हो गया इतने साल हो हम जब हम लेजी हो जाते है many god so we should never compromise on a minimum satna satna। jo, he is most important or your minimum, sanand, see now all we should never compromise, the fate will all go down। yes tank। बताया की जो हरी की
फर्स्ट
तो
साथ ही साथ वेल्स साथ ही साथ का नंडेडवीलउकोजबिल्कुल रूट आउट करने के लिए
क्या करना चाहिए
ये जो साधना भक्ति का ध्यान दिया और साधना भर्ती दी जाती है, वो इसी कारण दी जाती है। अनमूडेरबीच को निकाल ने फंक्तोंकी संघ में रहो और भक्तों की संघ में अपने साथियों से पूछो इनमें क्या कभी दिखती है? तुम? मुझे सुधारना चाहिए आखिर कोई आपको py to me kya you more on, तो ये भक्तों के संग में रहोगे पूछो हमें क्या सुधारना चाहिए आगे बढ़ने के लिए और फिर ट्राय
थैंक यू फॉर
हम जब जोड़े के साथ ऐसे कैसे रखना चाहिए?
सबसे अच्छे से हल मिलना चाहिए।
पर हम साथ रहते हैं, जो हमारे वो भी घटना, उनके साथ कैसे जैसी? जो यहाँ के में आते हैं तो उसे करते है, उसे कैसे देखा गया?
उसमे भी आवाज से अपराध होगा उनको
कैसे
हमारे घर में हमारे
बीजकटमट? वैसे तो आप फेमिली बढ़ेगी जाना में आप नए होते हो, फिर frenship होती है। we should not we should always be respectful to devo। और सबके प्रति मित्रता का भाव रखना चाहे।
जो फैमिली पर वेज जीविका उनसे बेहतर कर रहे हैं, वो कहना नहीं वो
सीन आज कर पाता जो हमे में
आते है, जो सबके साथ भेजे रखते
हैं,
सबके साथ आदर का भी रखो, सबके साथ आदर से फिर नोट बिकम कैशulभक्तमें कमी ही है कि आप थोड़ी देर के बाद 1 दूसरे की डीलिंग में कैशुअल हो जाता है। a toes पहले हम सोचते हैं कि सारे स्वर के भक्त बाइकों धाम से आ रहे हैं, सब लगते हैं भगवान विश्, फिर थोड़ी देर बाद हम कहते हैं हमने सोचा था बाइक से आ रहे हैं, वो भी हमारे जैसे हैं तो निकाला बुलाते है। proper can you should be like the b and other में कल आपने हमे वर्ड दिया तो नदी के कृपा का नाम पुकारा था। gas me se citdosixindhidren twenty se में 626 से कैसे बाते वो आप उनसे पूछना प्रयास करोगे तो हर चीज संभव है। thank you so this car, sold be deblethecotokay। thank you any more question please
holy
name and has only holy name in most important to do you can the holy name clenstehand नाम का उचारण सासों का ध्यान बहुत महत्वपूर्ण है। अगर आप की साधना अच्छी रहे तो फिर आपका भक्ति का फाउंडेशन स्ट्रॉन्ग रहेगा। अगर आपकी साधना कमजोर है, इंगिजॉबकरलिया 1 दिन नहीं किया तो तो फाउंडेशन बनना cmzोrabilding foundation week तो बिल्डिंग गिरने की संभावना हो। so he want you foundation to be strong, then i go yonthankyumarाज select electi और के ऊपर selective sl pro nisan from relissonliomi। we can not you cannot relish ndsandwehavepropa
books
the book and then we help
you
and lets the new and man me woh shiv लिखे banta the you can say yes that a somebody beating exactly। what he heard that he is but
you want is life,
you and it means and the practicing and you believe
it,
i believe the off and he practicing in if you have a teacher teacher example। mr माँ ने बहुत बेटे को चीनी खाना, मीठा खाना बंद डाibutyामाँनेकहा, चलो गुरुजी के जाती हूँ, गुरु जी का कम ना मानोगे बोला इसको बोलो की मीठा नहीं खा, बहुत अच्छी डाइपर गुरुजी ने हा आज नहीं 2 हफ्ते बाद बोलूंगा तो दोनो से बाहर आये तो गुरु ने बेटे को बेटा बेटा खाना बंद कर 2 कि गुरुजी, अब माँ थी गुरु 1 सर बोला माँ ने गुरु से 1 ही शब्द बोलना था, 2 हफ्ते पहले बोल देते, 2 हफते बाद किया बुलाया तो 2 हफ्ते पहले मैं भी मीठा बोल नहीं सका और मैंने भी मीठा खाना बंद कर दिया है मै बोल सकता मुलक
में आश्रम जीवन चाहिए जिसे आज अपने 1 बहुत बड़ा सेस किया कि हम शास्त्र मे पढने में बेची को बढ़ाए तो मैं की में आरशमदीनेसुबेमॉनि के बाद हमारी बस सेवाएं सेवाओं में हम इतने व्यस्त हो जाते हैं अगर सब निकालते शासन पर ले तो मर नहीं लग पाता है या फिर नींद आती है तो यह समझ में आता कि से बैलेंस किया जाता कि अच्छी तरीके से जैसा ध्यान पूर्वक अपेंटिीशास्री को पढ़े समझ, सके रुचि बढ़ा सके। इसी से हमारे बहुत ही कम तो बीमारी से तुम्हार में आपसे जानना चाहता था कि में शुक का करे हम अच्छी तरीके से जोहरी था हरी नाम और वो तुरंत को पढके, अपने आप को शु जरशीडूलबनाओ।
have you time for everything, but
is
sinsitiotiha smart, he there get over lola susan cm s, or make you time for reading time for it im, so you have done a।
गुरु जैसे आप बता रहे थे कि हमारी जितनी भी समस्या है उसका समाधान है हरी का था और हर काम
कारण, लेकिन जैसे समुद्र का कारण क्या है नई कथा ने
मार देता हूँ तो समस्याएं आती हैं। तो आप इस बात को हर नजर में दौरा करेंगे अगर किरण लोग। लेकिन जब समस्या से कुछ बहुत ही समाधान है मेरी समस्याओं का हल निकाल सकता है, लेकिन हरी नाम भरी कथा ये इसमें कितनी शब्दा नहीं होती तो
हम
बढेगी
get strong बुझने करोगे तो निशा प्राप्त होगी हमारे चाय ने प्रेशन को उत्तर दिया very dev with fan sikar, krna na, hi krishna so, now you a state of the union message।
More from PRASAD

Rare Pastimes & Timeless Lessons of Guru Mahārāja | Stories Every Disciple Should Hear

ISKCON Legends- pure devotees meet-HH Jayapataka Swami, HH Gopal Krishna Goswami, HH Radhanath Swami

Jagannātha Ratha-yātrā Through Śrīla Prabhupāda's Mercy | 29 April 2006 | Nairobi, Kenya

Lord Jagannātha's Appearance Pastime | 21.07.2019 | ISKCON Calgary | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

The Ācārya Teaches by His Own ExampleGuṇḍicā Mārjana by Guru Mahārāja #shorts

Guṇḍicā Mārjana – Lord Jagannātha's Pastime | 21.7.2019 | ISKCON Calgary |Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

H.H. Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī Mahārāja - Exemplary Sādhana and Deity Worship # shorts

भगवान की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? | 11 Jan 2014 | Punjabi Bagh | Srila Gopal Krishna Goswami

Material Education vs Spiritual Education | Srila Gopal Krishna Goswami #shorts

