भगवान का ध्यान कैसे करे ? | SB 10.2.37 | Juhu | 17 Jan 2020 | Srila Gopal Krishna Goswami

यह वीडियो एक विस्तृत आध्यात्मिक प्रवचन है जिसमें श्रील गोकुल कृष्णा गोस्वामी भक्तों को भगवान के ध्यान (ध्यान‑धारणा) की सही विधि समझाते हैं। प्रवचन में कई प्रमुख बिंदु शामिल हैं: (1) शास्त्र‑आधारित भक्ति (नाम‑संकिर्तन, सुनना, स्मरण) की महत्ता; (2) आधुनिक युग में स्मार्ट‑फ़ोन, इंटरनेट, जुआ, कसीनो आदि जैसी बुरे मनोरंजन के माध्यमों से उत्पन्न भौतिक आकर्षण और उनका आध्यात्मिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव; (3) शास्त्रों (भगवद‑गीता, श्रीमद् भागवतम) से उद्धृत कहानियों – जैसे यमराज की कथा, शिकार‑पक्षी की कथा, तथा हिरालकास्पूल की कथा – जो आसक्ति, मोह और आत्म‑विच्छेद के परिणाम दर्शाती हैं; (4) सत्‑भक्ति के लिये शारीरिक, मानसिक और सामाजिक बाधाओं को पार करने की रणनीति, जिसमें ‘बल‑जाप’ (जप) को निरंतरता से करने की सलाह दी गई है; (5) श्रोताओं के प्रश्न‑उत्तर सत्र में भक्ति‑वीडियो, वास्तविक ज्ञान की खोज, और परिवार‑सम्बन्धी बंधनों से उत्पन्न भावनात्मक उलझनों पर चर्चा; (6) अंत में, सच्ची भक्ति के लिये आत्म‑निरीक्षण, शास्त्र‑अनुशासन और आधुनिक तकनीक के सही उपयोग की दिशा‑निर्देश प्रदान किए गये। समग्र रूप से, यह प्रवचन आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ाने, भक्ति के वास्तविक स्वरूप को समझाने और आधुनिक जीवन की विचलनों से बचने के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन देता है।
Chapters
beta sa titniamoism जाए श्रीकृष्ण चेतन्या। तो आज आप जानते हैं और 1 महान सान का तिरोभाव तिरवा तिरोभाव चीती है, क्या नाम है? तो संक्षेप में हम नोजिरालकी चर्चा करेंगे, उसके पश्चात भागवत तो रोचना अभिभाव थिरभाव। अभिभाव का अर्थ है जब कोई महान सन प्रकट होता है। तिरोभाव का अर्थ है जब वो हर प्रकट हो जाए। हम अमीर भाव तीर भाव दोनों को उत्साह से मनाते है। क्योंकि इसके द्वारा हम इन संतों के विषय में ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। और जितना हमारा मन संतों का चिंतन करेगा, उतनी तेजी से यह आप ध्यान दे दी कर पाओगे। लोजन ठाकुर पृथ्वी पर थे, लगभग 500 साल पूर्वक, और वो थे या सरकार के सिर योजना। ठाकुर बचपन से ही वाह प्रभु के भक्त हैं। और बचपन से ही केवल उनके मन में यही भाव था। भाव प्रभु और भगवान ने नंदा का गुणगान तो बचपन से ही उनकी रुचि थी। अहा तो लोचदास ठाकुर चूड़ी उनका विवाह हो गया था, पर उदर में, कुटिया में विवाह होता था। फिर लड़की वापस अपने बाप के घर में जाती थी। लूजनाजठाकुर के भौतिक कार्य में कोई रूचि नहीं थी। तो उनके बाबा लड़की के उनके गुरु गुरु के पास गए और कहा कि के शिष्य ने शादी की थी। और गुरु ने पत्नी को साथ में रखा। गुरु ने कहा गांव पंचेबादलोचनदास को याद नहीं था, उस थान में कैसे पहुंचा जाए? तो जब वो उस गाँव में पहुँचा जहाँ की उनकी पत्नी रहती थी, तो वहां है पूछा। 1 औरज से माता। इस पद पर मैं कैसे पहुंचूंगा? और जब वो उस थाल में पहुंचे तो देखा कि वो औरत जिससे उन्होंने रास्ता पूछा था, उनकी पत्नी भी उन्होंने पत्नी को माता के रूप में स्वीकार किया। तो रोजना ठाकुर के नेक रचनाएं हैं। और रोजना ठाकुर ने हमें कई गर्द किए हैं, जिन्हें सबसे प्रसिद है चेतने मांगना। बिदावन ठाकुर ने हमें चेतन भागवत लिया है। और यह चेतन भागवत पहले उन्होंने रचना की थी चेत्रय मंगल के रूप में। और फिर जब उन्हें पता लगा लोचना ठाकुर ने इसी ग्रंथ को चेत भाव बाबू की इनाम को प्रकाशित किया है चेत्रिय मंगल के नाम पर, तो उन्होंने फिर बदलकर नाम बदलकर चेत में भगवान कर दिया। चेतना बंगल में अनेक लीलाओं का वर्णन है जिनका वर्णन ला चेत, चतरी और न चेतना बंगल में। उदाहरण के लिए 2 लीलाएँ हैं जिनको आप के मंन में प्राप्त करते हो, जो कि दूसरी इलाकों में दूसरे गंद समय नहीं है। जब महा बाबू छोटे थे तो अपने बच्चों के साथ खेलते थे, और वह अनेक पिल्ले थे। पपिdॉगतो नुमाईदे सबसे खूबसूरत पॉपी डॉन पिला उठा कर घर ले आये। मा हम बन है, घर में पिला नहीं ला सकते। महीने कहा आप पीले को घर में नहीं लेने दोगे, मैं भी घर में नहीं रहूंगा। मां के पास कोई उपाय न था। 1 दिन माए जाब गंगा में गए थे स्नान करने के लिए, उनकी मां ने पिल्ले के को छोड़ दिया। माना हुआ था घर में, तो निमाई को, उनके मिूनेहानिवानिवाई माता तो पिल्ले को छोड़ दिया कर दे बाहर निकाल दिया। भाई बड़े क्रोधित हुए मिसु को, कहा जाओ ढूंढो का ये पिल्ला? और फिर उन्होंने देखा क्या पिल्ला शेयर के बीच में 2 पैरों से नाच रहा था, 2 हाथों को उठा कर क्या कर रहा था। कृष्ण और आंसू भरे थे और सबके सामने 1 रथ आया। भगवान के धाम से उुलरतसआयाक्या करने। उस पीले को भगवान के धाम वापस ले जाने गए। वो पीला लरत से बैठ कर बायबाय करते भगवान को भगवान के धाम पहुँच गया। तो ये रचना के तने मंगल में है जो अगर कोई कहे भाई ने पिलाना रख सकते हैं तो आपको गारंटी देना पड़ेगा। आप उसे हार के सबद रचाओगे और शुध भक्त बनाओगे। 2 निवाई सन्यास लेकर जा रहे थे, जागीदार पूरी बंदर की तरफ और उन्हें प्यास लगी थी। 1 व्यक्ति बड़के में लस्सी बेच रहा था नेमार को इतनी प्यास ने। निमाई ने कहा बस तो पूरा बड़का निमाई पी गया। पूरा मटका उसने हा पैसा। निमाई ने कहा मेरे पास पैसा नहीं है, मेरे मेरे पीछे मेरे मित्र है। वो पैसा देंगे। तो थोड़ी देर बाद भगवान ने वहां पहुंचे अपने साथियों के साथ। तो लस्सी वाले ने कहा तुम्हारा 1 सेरीासीआयाथालसी पी गया। वो कहा कि तुम पैसे दोगे, भगवान हमारे पास भी पैसे नहीं है। अरे ठीक है। उसने ना मैंने वो सी दान में दे दी। मैं अभी घर चलता हूँ तो मटका खाली हो गया था, मै घर जा रहा था। जब मटका उठाने गया तो बड़का इतना भारी था कि वो उठा नहीं पाया। तो आश्चर्य चकित हो गया था। या यह खाई दा मटका अरे भाई इतना भारी कैसे हो गया? उसने अंदर देखा क्या है? और यह खोला और देखा क्या हे रे होती सो शो से भरावा मटका तो उसने अखबार को थोड़ी सी दी। बजे में क्या मिल गया पूरा बडका। भगवान की सेवा करके कोई गरीब नहीं होता। तो चेतन मंगल में अनेक लीलाएं हैं। और ये भाई ने और कोचुना अगर गुरु से प्रार्थना की थी कि वो बड़े अच्छी तरह भगवान ने दद्दा का खुल कर सके। तलक अनेक लाय कथाएं उन्हने। और 1 उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना है। प अरमाकरूनाप्रापाजी ने इस प्रार्थना के ऊपर बहुत लंबा कमेंट दिया हुआ है। और प्रभा भरम कर खाते थे तो उनके निज से आंसू बहते थे। कई बार जो में अनुवादी पढ़ता हूँ। ये जो 2 भगवान है, भगवान के ददा गोरचंद, ये बड़े दयालु है, ये है सारे अवतारों के सबसे दयालु अवतार। इस प्रकार और ठाकुर जी क्या कहते आप सब अवतारों में सबसे दयालु हो। और उन्होंने 1 बहुत सरल माध्यम दिया है किसका भवतपापलेगा वो माध्यम क्या है? का चेंजिंग और नाचना गाना और नाचना ये है हम लोग का मेन काम न करो, नाचो भूख लग जाए तो तो क्या करो? ये मेरे भाई। मैं तुम से विनती करता हूँ कि भगवान चेतन महाप्रभु और नित्य दाजी की सेवा करो श्रद्धा के साथ और पूरे विश्वास के साथ। इसका क्या ये श्रद्धा रखो कि चेतन महाप्रभु स्वयं भगवान है। श्री कृष्ण, चेतन्या, राधा, कृष्ण, नये, आन्या राधा कृष्ण प्रकट हुए। चेतना। और भगवान नित्यनंद कौन है? भगवान नित्यदा भगवान के साथी हैं। सनातन भगवान राम प्रकट हुए थे, यही नीति धंदा प्रगट हुए थे, किस रूप में, लक्ष्मण के रूप में, छोटे भाई के रूप में, जब भगवान प्रकट हुए, अपने कृष्ण के रूप में, यही प्रकट हुए, बड़े भाई बलराम के रूप में, जब चेतन महा प्रमुख प्रकट हुए, यही प्रकट हुए। भगवान नेतेनंदामेभगवान नंदा महाप्रभु से, लगभग 12 साल आयु में बड़े से है। तुम श्रदा से यह स्वीकार करो कि चेतन महाप्रभु नितेनंदा कौन है, स्वयं भगवान है। अगर तुम कृष्ण भक्ति में सफलता चाहते हो, तो यही चीज तुम्हें त्यागना पड़ेगा। ये मत सोचो की वो त्याग बिग। भगवान का प्रेम मिलेगा क्या है? वो क्या देखना, पड़ेगा बहुत ही, जब तक तुम बहुत ही कांक्शन को नहीं छोड़ोगे, इंडिया किपरी भावों को नहीं छोड़ोगे, तुम भगवान की कृपा प्राप्त नहीं होगी। और व्यक्ति को निष्काम भाव से है। नाम का उच्चारण करना चाहिए। कृष्ण भक्त निष्काम व शांता भुक्ति, मुक्ति श्री का काली। जो भक्त निष्काम भाव से सेवा करते हैं, वो हमेशा शांत रहते हैं और जो की भावों के साथ करते हैं और सदा अशान रहते हैं, वो कहते हैं। या जिसका भाव से, वह मंत्र का भागवत, गीता के साथ ध्यान में भगवान कहते हैं। 4 परिस्थिति में लोग भी ईश्वर में आते हैं, चातुर क्या है? 1 जैसे धन चाहिए, दूसरा, जिज्ञासू, रोगी, पीड़ित यानी भगवान कहते हैं, इस पुन्यात्मा है। और इन सब में सबसे शुद्ध कौम है जो, जिसका भाव से ये हाई, राम का उचार, यही विचार है, क्या मैं दिशा भाव से वहाँ मुद्रा का उचारण? और ये 3 लोकों में भगवान नंदा चेतेेभाप्रगू के बराबर कोई नहीं है। वो इतने दयालु हैं और उनका उपदेश सुनकर, जो पशु है, चिड़िया हैं, पक्षी हैं, वो भी वहा मदद का उच्चारण करते हैं। जैसे कि चेतन महाप्रभु जब झारखंड जंगल से जा रहे थे, तो जो पशु हैं, उनसे भी उन्होंने क्या करवाया? both कहते हैं, ये हैं भगवान के भक्तों की विनम्रता। वो कहते हैं मैं इंडिया डिप्टी में जुड़ा हो। इसलिए मेरा आकाश भगवान के प्रति बहुत कमजोर है। और मैं यहाँ मैं जी से प्रार्थना करता हूँ कि मुझे कृपा दे के मैं नितिन और आप अपने प्रति आदर हो जाऊँ। हमें ये नहीं सोचना चाहिए कि वास्विकता में रोज ठाकुर माया, ये उनकी विनम्र है। हमारे संत में इतनी विनम्रता है कि वो कहते हैं और नामी मत लो, नामी लोगे, तो तो तुम्हारे सारे गुण समाप्त हो जाएंगे। तो इसी भाव से, इसी विनम्रता के भाव से लरचिनासाको क्या कह रहे हैं? मैं की मेरे में भौतिक आकर्षण है, इसलिए मैं भगवान के प्रति आकृष्ट नहीं हो रहा। और वो कहते अपने गुरु से कृपा दीजिये मुझे कि मेरा आकर्षण बड़े भगवान के प्रति। रोजिना ठाकुर ने लेख रचनाएं की हैं, जिनमें उचित मा का गुनगान किया जा रहा है। तो आज हमें लोचन ठाकुर से प्रार्थना करनी चाहिए कि हमें भक्ति में आगे बढे और हम भी प्रभु के आदेश के अनुसार क्या करे है। जरा ठाकुर की हो प्रभु, फिर आज का श्लोक। siwan bhagat canter ten chapter ten chart was a chapter to chapter to sokesantis हम का भाव है कम, सीधा, अनुवाद और तालपर में जाते है बह सोरने उड़ जाना चाहिए। you gay somebody work with
विविध कार्यों में शब्द शिव निरंतर भगवान के विषय में सुनते हुए, निरंतर श्रवण के णन कीरतन करते हुए या सुनाते हुए, जंस्मर्यामस्मरण करते हुए, भगवान के चरण का प्रोतथाभगवामके स्वरुप के विषय में मे निरंतर चिंतन था या चिंतन करते भगवान के कारे कला नावाली दिव्या बाली रोपाई हुनके देवर शुरू जल का भी मंगलानी हलाली दिव्य होने से शुभ हो आपके आंसू हफ्ते में लगे रहने पर पर चरण दयोअपनेकर कमजोर पर भाविशचेरहाफूर्ण ली रहने वाला नहीं। वा भौतिक पद के लिए न दे रे योग्य है। धनबाद विविध कार्यों में लगे रहने पर भी जिन भक्तों के मन आपके चरण कमलों में पूरी तरह लीन रहते हैं और जो निरंतर आपके, दिव्य, नाम तथा रूपों का श्रवण ये चिंतन करते हैं तथा पंजों को स्मरण कराते हैं, वे सदैव दिव्य पद पर स्थित रहते हैं और इस प्रकाशन पूर्व परशु भगवान को समझ सकते हैं। लगाइए अगवाल धनवाद लगाइए विविध कार्यों में विधवा में लगे रहने पर भी जिन भक्तों के मन भक्तों के मन आपके चरण कमलों में आगे चरण पुरी तरह लीप रहते हैं, रहते हैं और जो निरंतर आपके दिल के नाम तथा रूपों का श्रवण की चिंतन करते हैं तथा अन्यों को स्मरण कराते हैं, सदविवपदपरस्थित रहते हैं और इस प्रकार से पूर्व भगवान को समझ सकते हैं।
प्रपाजकाथातपरी बहुत ही महत्वपूर्ण है और इस लोक की थातपरेकीसमाप्ति में प्रपात ग्रंथ की महिमा का चर्चा करते तब ध्यान से सुनिएगा।
इस शो में बताया गया है कि भक्ति योग का किस तरह अभ्यास किया जा सकता है। शुरू गो स्वामी ने कहा है कि जिस किसी ने मन से, वचन से तथा कर्म से कर्मणा मनसाद गिरा भगवान की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया है, वह चाहे जीवन की किसी भी स्थिति में क्यों न हो, वह बंध न रहकर मुक्त हो जाता है। ऐसा भक्त भौतिक शरीर धारण करते हुए भी अध्यात्म में स्थित होता है। नारायण पर सर्वे नदसचनवदीदिव्यकारयों में लगे रहने के कारण वह भौतिक नेरदारी बनने से भवित नहीं रहता। इस जीवन मुख अवस्था का निष्कांत प्रस्तुत करते हुए श्री चंदन महाप्रभु ने प्रकार है वह जन्म ने जन्म ईश्वरी भवताभकीरहीजमैं तो जन्म जन्म केवल आपकी अईदुपीभक्ति की कामना करता हूँ। यदि भगवान की इच्छा से कोई भक्त इस भौतिक जगत में जन्म लेता भी है तो भी उसकी भक्ति में अवरोध नहीं आता। जब राजा भरत से भूल हो गई और अगले जन्म में में विरम बंग तो उनकी भक्ति में अवरोध नहीं आया। यद्यपि उन्हें कोई क्षा के लिए थोड़ा दंड में नालीगली कहते है, कि यदि कोई भक्ति पद से चुप भी हो जाता होता है तो उसका विनाश नहीं होता, किंतु अभक्तों का सर्वनाश हो जाता है, क्योंकि वे भक्ति नहीं करते। इसलिए भगुद्विता में संस्तुति की गई है कि मनुष्य को चाहिए कि कम से कम हरे कृष्ण मंत्र का वेतन को किया करें सददबकीतलदोमानविधन जुड़ा होगा। मस्त सिमापादितेयका उपहास महात्मा लोग सदैव मेरे यश की कीर्तन यश का पतन करके, तृण संकलको प्रयास करके, मेरे समक्ष नतमस्तक होकर भक्तिपूर्वक मेरी पूजा करते हैं। मनुष्य को चाहिए कि 9 प्रकार की भक्ति योग का परित्याग न करे। इसमें से सबसे महत्वपूर्ण विधि है गुरु, साधू तथा शास्त्र के श्रवण करता साधु। शास्त्र गुरु वार चितेतवरियारा। हमें अभततोंकीइकाय तथा व्याख्याएं नहीं सुननी चाहिए, क्योंकि श्िरसनातकगोस्वामी ने वद्वपुराणसेउतरण उदरण देते हुए इसका विशेष किया है। अवैजसबलहोीनदूद भरी कहा अमृत श्रवण नयतव्यजरपुरसिस्टम था। पर हमें चाहिए कि दृणता पूर्वक इस आदेश का पालन करें और मायावादी निर्विशेष वाली। 0 वादियों राजनीति, क्यों अथवा तथा कथित विद्वानों से श्रवण करने का प्रयास न बने। हमें ऐसे अशुभ संघ से पूरी तरह बचते हुए शुद्ध भक्तों से ही सुनना चाहिए। इसलिए श्री गुरु को स्वामी ने कहा है। श्री गुरु आदारश्यअर्थात मनुष्य को चाहिए कि वह शुद्ध भक्त के चरण कमलों की चरण कोचि, क्योंकि वही दूर बन सकता है। श्री चंदन महागरिगुका उद्देश है कि जो भगवत जी ता के आदेशों का दिरताकूकापालन करता है, वही गुरु है। ब्यारेरेखतारेकह कृष्ण प्रदेश, वा, दू या मदारी या जादूगर कभी गुरु नहीं होगा। गुरु तो वह है जो भगवत विका प्रस्तुत करता है। कृष्ण के उद्देश्यों को यथा रूप में प्रस्तुत कर करता है। श्रवण बहुत महत्वपूर्ण है। अतः वैष्णव, साधु, गुरु तथा शास्त्र से ही श्रवण करना चाहिए। किस लोक का रितुल शब्द महत्वपूर्ण है। इसका अर्थ है शारीरिक। श्रम द्वारा या कार्य द्वारा। मनुष्यों को भगवान की व्यवहारिक सेवा करनी चाहिए। हमें कृष्ण भावना अमृत आंदोलन में, हमारे किस भावना? अमृत आंदोलन में हमारा सारे कार्य ृष्ण साहित्य के वितरण पर केंद्रित रहता है। यह आवश्यक है कि यह आवश्यक है। यह हत्या आवश्यक है। किसी के पास भी पहुंच कर उसे कृष्ण साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित किया जा सकता है, जिससे भविष्य में वह बन सके। इस ब्लॉग में ऐसे ही कार्यों की संस्तुति की गई है। रियास यस चरणचरणारविधयोग। ऐसे कार्य को भगवान के चरण कमलों की का सदा स्मरण दिलाते रहेंगे। कृष्ण विषयक स्तवकों के वितरण में चित्त एकाग्र करने से मनुष्य कृष्ण में लीन रहता है। यही समाजी है।
slokभामकेदससकन के दूसरे अध्याय में प्राप्त होता है। और इस अध्याय में आप देखते हो कि जो देवता थे उन्हें पता लग गया था कि परम भगवान अभी प्रकट होने वाले हैं और परम भगवान का है। देवकी के। तब देवताओं को पता लगा कि भगवान अगर होने वाले हैं और भगदमकेअनेअध्याय में आप पढोगे किस प्रकार भगवान प्रकट हुए रूप में 6 हाथों के साथ गैरों से सजे पर माता पिता को भगवान यकीन दिलाना चाहते थे। आज मैं प्रकट हो गया हो। पंजाब। माता पिता ने कहा भाई था, कंस को सूचना नहीं मिल जाए। उन्होंने कहा साधारण बच्चे का रूप। तुरंत उन्होंने क्या किया? न मचे रूप तो जो देवता थे बड़े प्रसन्न थे। पर बवाल प्रगट होने वाले हैं। और इन स्तुतियों में देवता परम भगवान के अनेक गुणों का वर्णन कर रहे हैं। क्यों भागता में आप देखते हो जो भक्त हैं सदा। पर भगवान का गुनगान करते हैं। देर आल लॉफगल आज के इस ब्लॉग में क्या करें देव साब सबसे पहले तो ये कह रहे हैं, जो भगवान के भक्त हैं, उन्हें कार्य में जुड़े रहते हैं। यह नहीं कि हम भगवान भक्त हैं तो कोई कार्य नहीं करेंगे, हम विश्राम करेंगे, पैसा खाएंगे, फिर विश्राम करेंगे है। या कहते हैं, भगवान के जो भागते हैं, अनेक कार्यों में जुड़े रहते हैं और साथ में मन द्वारा क्या करते हैं। और निरंतर भगवान के नाम को सुनते हैं, चालन करते हैं और दूसरों को भी प्रेरणा देते हैं मार के नामों का उच्चालन करने के लिए। और ऐसे व्यक्ति पर भगवान को सुन समझ सकते हैं। भगवान ने है अर्जुन से इन में क्या कहा? अर्जुन की इच्छा थी कि युद्ध में नहीं लड़े। अर्जुन ने कहा, इन लोगों को मैं इतना आदर देता हूँ, मैं कैसे युद्ध में लड़ सकता हूँ? तो भगवान ने कहा, दसवा सर्वेश कलेशो। मन, बोले, मन और बुद्धी को मुझे अर्पण करते हुए तुम अपना कर्तव्य निभाओ। उनका कर्तव्य क्या था? सत्या के रूप में युद्ध में न। तो taahac तो बवाल यहिके तुम कुछ मत करो करो युद्ध में रहो। हम मन बुद्धि द्वारा क्या करो। मेरा चंदन रुपगुस्वामी की रूची नही थी सरकारी नौकरी करने के लिए, पर उनके बाइलाज को जबरदस्ती लवाबुसेशानेजोड दिया था नौकरी में शो चीथनमाप्रभूइंदो भाइयों, जो हार के लिए, रवा के लिए आए हैं, रबर के लिए। इस समय बांग्लादेश में है। तो? क्योंकि वो बड़े प्रसिद्ध व्यक्ति थे, तो अपने आप को ढक कर। रात के समय महा बबू को मिलने आए। और ने कहा, मेरी कोई रूचि नहीं
है
सरकार की नौकरी करने में। मुझे। अब आदेश देजेगा कि मैं इस नौकरी को क्या करू। महाभमूने कहा, उन्होंने उद्धरण दिया। और प्रापर्टी इस धारण का उपयोग करते हैं। भागलकीलगीभूमिका में हा खबू ने कहा, तुम इस समय मत छोड़ो और जिस प्रकार 1 विभावित, त्वी अगर कोई प्रेमी हो बाहर से, तो बड़ी सावधानी से कार्य करेगी और मन में यह सोचते रहिए, मैं प्रेमी हो जाऊंगा। जाऊंगी। तो ये उदाहरण दिया। ये बता दे शो में था, नौकरी है, करते जाओ, बंधवाया सदा क्या सोच लो, बंधवाया भगवान का चिंतन करते जाओ। यही भाव भगवान ने अर्जुन को दिया था। यह आदेश भगवान ने अर्जुन को दिया था। यही भाव यहां प्रकट हो रहा है। देवता कहते हैं जो व्यक्ति आपके सेवा में जुड़े हैं, वो अनेक प्रकार के कार्य करते हैं। यह नहीं कि आप दुभाग सेवा में जुड़े हो। अब अनेक प्रकार के कार्य नहीं करो। पर कार्य करते समय मन द्वारा हमें क्या करना चाहिए? भगवान का चिंतन और श्रवनम और भगवान के नामों को सुनो। भगवान के नामों का उचारण। तो ये है भक्तियों का सामान। अभी हमने कुछ समय पहले रचना ठाकुर की के विषय में चर्चा की थी। लूचनाजठाकुर अनी रचनाओं में यही इसी विषयको की स्थापना कर रहे हैं की अगर हमें असली सुख चाहिए। हमें क्या करना चाहिए? अखबार के नामों का शाल या नम? इस विषय के ऊपर आप बार बार इस विषय की चर्चा की जाती है। अगर हमें ध्यान बोलनी चाहिए, ये सबसे महत्वपूर्ण है। तो यहाँ देवता कह रहे हैं? आपके जो भक्त हैं वो नेक प्रकार के कार्य में जुड़ते हैं। जैसे कि हवाई वैदिक संसद के अनुसार समाज का विभाजन किया जाता है। 4 गोल्ड और सारा आश्रम ब्रह्मचारी ब्रह्मचारी आश्रम में उनका कर्तव्य रहता है, भगवान की सेवा करे, सारा जीवन मिलता है, आश्रम में रहे और रेयसथारियसाआश्रम में। व्यक्ति धन कमाने के लिये कार्य करता है और पार करता है। नौकरी घर है, यो स्त्री है, घर में कार्य करते हैं, पर साथ में उन का भाव होना चाहिए। इस सेवा कार्य करे। ये संभव केवल जब हो पायेगा, जब आप होर्गनागोका, उ्चालनकरेहो और अनुचान को सुनते हो। और साथ में भगवान की अनेक लीलाओं का, तो नवधा भक्ति का ज्ञान हमें भार बांध दिया जाता है। यह नहीं कि ये पहला श्लोक है जिस में ये भाव प्रस्तुत किया जा रहा है। भहोदम के दसवें घर में आ पहुंचे हों। इस समय पसंस्घरमें भी इसी विषय का वर्णन किया गया। भर भार क्यों इस विषय की चर्चा की जाती है। इससे की आप बार बार सुनोगे तो शेयर आपके हिले में टिक जाएगा। और हम क्या देखते हैं, बार बार सोने से भी नहीं देखता तो बार बार सोना। तो सो न मरे से उनके पिता ने पूछा बेटा, तुमने क्या सीखा ले? वे अध्यापक के लिए अनेक विशों की चर्चा की। सबसे प्रसिद्ध क्या था भक्ति का पालन किया। तो जो व्यक्ति भगवान के नामों का उच्चारण कर रहा है और सुन रहा है और वो चिंतन भी कर पाता है, भगवान के विषय में चिंतन करना बहुत महत्वपूर्ण है। भगवान गीता के अंत में क्या करते हैं? बल मन भावा मन, भक्तों बंध्या जी, मन न मजदूर, बल भाषी सत्यम के प्रति जले, जो व्यक्ति बन द्वारा यह भाग्य बना है, मेरा चिंतन करता है, मेरा समानन करता है, मुझे प्रणाम करता है। बिना शंका के वो कहाँ जायेगा? कहाँ जायेगा में आएगा? तो विष्णु जिसका अर्थ है भगवान का चिंतन करना। ये संभव है केवल अगर हम शबनम कितली ध्यान से करे। इसलिए जब भक्ति आरंभ होता है, किस के साथ श्रम और केतन और उसके पश्चात, उसे शरम केतल बहुत महत्वपूर्ण है। और जैसे प्रापा जी कहते थे, भौतिक संसार में हम सब 1 ग्रुप से शरम के तम करते रहते हैं। कुछ न कुछ हम सुनते रहते हैं। पर इन चीजों का कोई लाभ हमें सुनना चाहिए। क्या? भगवान के नामों का उच्चारण भगवान के नामों के उच्चारण के विषय में कई बार भौतिक वादी व्यक्ति कहते हैं तुम 1 ही नाम का उच्चारण बार बार करते हो। थकते नहीं क्या है। इसका उत्तर नहीं थकते। क्यूँ क्यों नहीं सकते? क्योंकि भगवान के नाम अभि है। आप भगवान के नामों को दिन भर कर सकते हो। और सकोगे क्यों ये नाम भगवान ने इलाब में पूरी शक्ति लाल श्रीमद भागोतम के भार्वे स्कंद में कलियुग के लक्षणों का ज्ञान भारवे स्कल को पढ़ोगे। आज आपको ऐसे लगेगा कि इसकी रचना कल हुई थी। 5 साल पूर क्यों? क्योंकि इतने जो भविष्य वाली थीं, वो आज सत्ये निकल रही है। तो बारहवे स्टन में परीक्षण वा ने फिर से पूछा कलयुग में लोगों का उद्धार कैसे होगा? तो क्या कृति? विश् पर जो लाभ सतयुग में प्राप्त होता था, भगवान का चिंतन करके, जो लाभ से प्राप्त होता था बड़े बड़े यज्ञ कर के जो लाभ भारतीय योग में प्राप्त होता था, भगवान के चरणों की शरण में महंगी भेडप्ररके, वही लाभ सकल में प्राप्त हो सकता है। किस मन के द्वारा नवेश्रनेमें संतों की सभा चल रही थी, संतो की चिंता थी किस प्रकार लोगों का उधार होगा और जो संत है वो साला यही सोचते हैं। समाज का उद्धार कैसे हो? तो वहा उन्होंने ये निर्णय किया। कलयुग में क्या के ध्यान में बहुत कम रची होगी, लोग झगरेलू होंगे, ध्यान बहुत कम रूचि होगी और दरभागयशाली होंगे तो कलियुग के लक्षण हैं उनका, उनके विषय में आप भगवत ज्ञान प्राप्त कर सकते हो। और ये कहा गया है कि इन हरी राम के द्वारा वही लाभ प्राप्त होगा जो दूसरे युगों में दूसरे साल से प्राप्त होता था। आगे पर भागते। यह भी कहा गया है करेदूसेदरेराजन। हे राजा। कलयुग में क्या है, क्या है, सी का महा गुल पर गुल है। इस कलियुग में क्या है? और इसके क्या परिणाम होता है? जिसके द्वारा ह हाल के धाम लौट सकते हो। तो इसी विषय की वर्ड विषय की चर्चा आज के श्लोक में भी की जा रही है। यहाँ देवता कह रहे हैं हे परम भगवान। जो व्यक्ति चाहे व्यक्ति किसी प्रकार के कार्य में जुड़ा हो, अगर वो अपने जीप द्वारा आपका उच्चालन कर रहा है, खालो द्वारा आपका उच्चालन सुंदर है और मन द्वारा आपके अनेक दिन की का चिंतन कर रहा है, वो व्यक्ति बिना शंका के आपको समझ पाए वो भगवान को समझने के लिए कि चीज धन की, बहुत ही ज्ञान की, अब सुर्ती की जीव सेवा की सेवा आरम्भ होती है। श्रम कितना यह सबसे महत्वपूर्ण कार्य है और है। नाम का उच्चारण आप किसी स्थिति में भी कर सकते हो। पर अगर हम अपराधों से रहित ध्यान पूर्वक है न करे तो इसके द्वारा क्या लाभ मिलेगा? क्या क्या होता है जिसके माध्यम से अब भगवान को समझ सकते हो। क्योंकि जब आप महामंगा उच्चारण करते हो, जो हमारे हृदय में गैरी मैन है। पापा जी कहते थे हमारा हृदय कोले से भी ज्यादा काला है कोला मन लगा काला पता है। हमारे हृदय में ने प्रकार बहुत इच्छा है और इन इच्छाओं को दूर करने के लिए क्या है। उपाय हम तो तातवरमेप्रौपर्जी यही कह रहे हैं कि जिस व्यक्ति ने अपने जीवन को समर्पन किया है, भगवान की सेवा में जो भगवान के नामों का चयन कर रहा है, वो व्यक्ति चाहे भौतिक जगत में हो, पर भौतिक जगत से मुक्त माना जाता है। क्योंकि वो तन मन धन से क्या कर रहा है। रे महराज को 1 श्रिंगी ने श्राप दे दी थी। क्यूं ग्राम बालक ने देखा किस राजा ने राजा जंगल में था, प्यासा था। पानी खोज में 1 संघ की कुटिया में पहुंचा संत को राजा का स्वागत करना चाहिए था। ये राजा राज शी थे, उस दून की तरफ देखा भी नहीं। राजा ने अपमान महसूस किया और निकलते समय 1 मे शाम को हार के रूप में चढ़ा दिया। बस के बेटे ने देखा या क्या करे? उन्होंने श्राप दिया शादी 7 दिन के पश्चात क्या हो जाएगा, वह मृत हो जाएगा। और राजा घबराया ने। राजा ने उसी समय संतो को निबंधन लिया और लगता है कि उस समय कोई सुविधा थी। तो आज के समय से ज्यादा तेज थी। क्यूंकि मिनटों में ही चौसठ हजार संत उपस्थित हो गए। चौसठ हजार मिनट में। और आज का प्रश्न क्या था? जिस व्यक्ति का अंत आने वाला है, उसे क्या कर रहे थे? तो 10 में परिक्षम ने कहा हालांकि वर हूँ जल भी न पीटा। आँख के द्वारा इस किशन कथा को सुनकर मुझे इतना आनंद आ रहा है। वे भूख भी समाप्त हो गई और प्यार भी समाप्त हो गए। तो जब आप आध्यात्मिक कार्य में जुड़े हो तो उसके कारण आप बहुत भूख और प्यास से बन सकते हो। तो भगवान ने गोहर दाल पर्वत को उठाया बृजवासी सुरक्षा के लिए शायर ब्रजवासी। बोले ध्यान से भगवान के चेहरे को देख रहे थे और उस समय उन्हें ना भूख लगी, न क्लास लगेगी। तो अगर हम जुड़े हैं भगवान के सेवा में, तो आप बहुत आकर्षण से बच पाओगे। चेतन। मा प्रभु जब दक्षिण भारत की यात्रा करते थे, वे भर को मिले। उनके नाम रामनंद राय। दक्षिण भारत की यात्रा आरम्भ करने से पहले सब मर ने उन्हें सूचना दे दी थी। यह भारत में 1 बड़े सिद्ध भक्त, मिलोगे वो भाई का नाम क्या है। वह पुन मिले जावली के तट पर, वह उस थाल। पर इसका भी केंद्र है। माह पपू ने अनेक प्रश्न पूछे। रामराय के वह प्रभू तो भगवान है। उन्होंने प्रश्न क्यों पूछे भगवान भक्तों की महिमा को बढ़ाते हैं। भक्त वान की महिमा को बढ़ाते है। वे। 1 वजनी था जिसका आज शोक से संबंध है। वह था व्यक्ति को किस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए? और हम रहे न उधर देखा। हमें उस मंत्र का उच्चालन करना चाहिए जिसके द्वारा अब परम भगवान राधा और कृष्णा का गुणगान कर सको। वो है। क्या यह हर 1 कृष्ण मान, हर कृष्ण महामना उच्चारण करते हो। इसके द्वारा आप परम भगवान का गुणगान कर रहे हो। और आगे 1 प्रश्न था जिसका आज के श्लोक से संबंध है। हमें किस विषय का चिंतन करना चाहिए? क्यूंकि यह से आप सब का भ्यास है? बरस बड़ा है। अगर आप मन में आध्यात्मिक भाव िषय को नहीं बिठाओगे मन में क्या रहेगा? क्या रहेगा? बहुत विचार। तो इसलिए प्रशन में राम राय ने कहा हमें भगवान के नामों का, भगवान के गुलों का, ववार्गेवीलाओं का, भगवान के बिगड़ा का चिंतन करना चाहिए। कई बार भागपुर से हमें किस विषय का चिंतन करना चाहिए? भगवान के नामों का, नामों के विषय में क्या स्मरण करोगे? क्या करोगे 1 भाव है भगवान अपने नामों से अभेद भगवान के नाम में इतनी शक्ति है को ध्यान पूर्वक लेंगे चे। आपके हृदय में जो वैन है। जो बहुत आकर्षण है, वो मिल जाएगा। छात्र भी अपनी रचना में इसी विषय की स्थापना कर रहे हैं। और ये भक्तों का अभ्यास है, अनुभव है। जो कि ध्यान से नियमित रूप से जाप करते हैं, उनके जो बैल है, रहती है, नहीं पिगलते जाती है। और आपका यह भी अभ्यास है। जिस दिन न बड़े ध्यान से जाप इत्यादि करते हो, आपका ध्यान भी उत्साह ऊंचा रहता है। और जिस दिन आप के आप आलसी बन जाते हो और कुस बन जाते हो, तो उस दिन क्या परिणाम होता है? भाया के प्रति आकर्षण बढ़ जाता है, भक्ति के प्रति आकर्षण कर जाता, यह का प्रयास है। तो आज इस देवता कहते हैं कि अगर आप आपके भक्त कार्य करते समय आप के चरण कमलो का समर्थन करें, आपके नामों को सुने, आपके नामों को पहचान करें और चिंतन करें और दूसरों को भी ज्ञान दे। यह 1 बड़ा सुंदर भाव है। दूसरों को भी ज्ञान दे, वो आपको समझ पाओगे सोए। लोक के तारपुर के समाप्ति में यह बड़ा महत्वपूर्ण श्लोक है। यह समाप्ति में क्या कहा जा रहा है? prochnyportinindesim to ritkrisnasonat in a future, you become a dbody, सच activity the recomend in this word, such aceites will always remain the the body on a los, lordes feed, why fully consentiting on distpeting, books of krishna, fully obsorvdincrishna this की, यहां जी क्या कह रहे हैं आप किसी व्यक्ति को मिला, उसे कहो, कृष्णा का साहित्य पढ़ो तो क्या होगा? उसका जीवन सुधर सकता है। और इन प्रकार के कार्यों के द्वारा पर भगवान के चरण कमलों का स्मरण होता है। और जो व्यक्ति गंधाने विटसन की सेवा में जुड़े हैं, राम जी कह रहे हैं यहाँ क्या कि वो सदा भगवान का स्मरण कर पाएंगे। और इस कार्य को क्या कहते हैं? ये है समाधि। समाधि का ये अर्थ नहीं, आग बन करके सो जाओ। समाधि का अर्थ है कि आप दूसरों के हृदय में भक्ति की भावना जागृत करो। अब हमारी सेवा में जुड़े रहा हूँ। यहाँ प्रभाजी कह रहे हैं कि हमारा कर्तव्य क्या है? इन ग्रंथो के माध्यम से लोगो को क्या देना, ध्यान देना। और ये जो कार्य है प्रचार का, ये असली सुभानी जो परसो हमने इस हरेकेशलैडकी साल कला का उत्सव बनाया था। फोर्टी सेकेंड तो आपको शायद पता हो कि मंदिर बनने से पहले वो सी समस्या आ रही थी, क्योंकि जिस व्यक्ति की जमीन थी, यह जमीन थी, उसका ये भाग भी था। होटल बनाया जाएगा तो कई बार हमे एप्लिकेशन दिया, वो रिजेक्ट हो लेगा। तो प्रभाजी ने कहा ठीक है, बंदर बनाने नहीं देंगे तो हम क्या करेंगे, बस टैन बना, बुकेन बनाने बस, हम बसते रखेंगे, ग्रंथों को जाकर बाँटेंगे और जब ग्रंथ बिक जायेंगे, वापस आयेंगे, फिर से भरकर, फिर प्रचार हो जाए। दूसरे शब्दों में पापा जी ने कहा किसलिए गरंचोंकवितनके माध्यम से दिनों का उदहारण हो सकता है। ये क्या कारण है कि इतना बल दिया जाता है? इस संस्था में करन की वेतन सेवा के लिए और जो भक्त हैं, वो हर प्रकार की सुविधा का लाभ। उठाते सड़कों में जाते हैं, दुकानों में जाते हैं, फैक्ट्रियों में जाते हैं, विदेश में हुए भर बर्फ में जाते हैं। ग्रंथों को बारे में केवल 1 ही भाव से क्या लोग? ग्रंथों को पढ़ेंगे, जीवन को सुधार प्रवर्ति? क्या करे? ये है संभाली। असली समाधि है। भगवान की सेवा में जुड़े रहना। तो ये महत्वपूर्ण काय है ये भाव कि हम सदा भगवान की सेवा में जुड़े रहे। ये भाव हेव जब अनुकूल हो सकता है, जब हम प्रयास करें, हमारे हृदय को शुद्ध बनाने में, अगर हम प्रयास नहीं करेंगे। इस शुद्ध बनाने में ये भाव ने न प्रकट होंगे। और इस लोक में रपरजीतापलमेंयेभी कह रहे हैं कि हमें गुरु साधु शास्त्र के द्वारा वेदिक सहित्य का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। शास्त्र का अर्थ है भगवान की वाणी। धवामकीसाक्षातभगवात। परिदा यह नहीं कि आप शास्त्र बनाना, हम शास्त्र बना रहे। शास्त्र अर्थ है भगवान की वाणी। भगवान की वाणी में कोई अपूर्णता नहीं, कोई कमी नहीं। आज भी आप भागवत गीता को पढ़ते हो। आपको। ऐसा लगता है ये काली से ने कभी लिया। और ये संदेश है पूरे मानव समाज के लिए। इसमें कोई किसी प्रकार का दोष नहीं। आप भागवतम को ध्यान से पढ़ो और भगवान को पढ़ने से क्या, नस्तर से भगवत। भक्ति भगत। अगर अब ध्यान से भगवत पढोगे तो हिंदी बाल क्या होगा? निकल जाए और हरीराम को ध्यान दोगे तो क्या लाभ होगा? मैल दूर हो जाएंगे। तो गुरु साधु, शास्त्र साधु जो सं प्रस्तुत हुए हैं, गुरु को मार दे रहा है। गुरु का कहते तो क्या गुरु का करते? क्या बनता है? वही सन्देश दे जो उर्दू से शांत उदहारण के लिए प्रॉपर्टी के, ग्रंथों के उनके उपदेश में आप क्या देखते हो? वही उपदेश है। जो भक्ति से दादाजी ने दी, उन्होंने वो ही दिया जो कि ठाकुर दिया। ये परंपरा तो हमे गुरु साधु शास्त्र के अनुसार कार्य और ताल पर प्रॉपर। ये भी कह रहे हैं। माया वाली विचार के लोगों से हमें ज्ञान प्राप्त नहीं कर। मायावाणी किसे कहते हैं? कई बार लोग कहते हैं जो माया में है। माया वाणी के द्वारा यह समझा जाता। भगवान के शुरू को स्वीकार नहीं करते। जो कहते हैं का कोई रूप नहीं है। फार रूप भगवान लगे लोग। भगवान के पास भी सारे अंग है और भगवान के जो है क्या है दिव्य जन्म कर्म चामे देविया वाल दोनो ही है। बवाल के लिए कोई कार्य सम्भव नहीं। 1 हाथी को फुकचे से निकाल सकता है, हाल के 10 की अद्भुत जिला को पढ़ते हो तो क्या देखते हो इन लाम की तुलना, कोई कर सकता है? आप भुहभुखोलोगे, अंदर, बलगम, दिखेंगे और भगवान जब मुंह खोलते हैं तो पूरे विश्व का दर्शन मिलता है। भगवान के लिए। 1 बहन पर्वत को उठाना संभव है। और ये भी नहीं कि 2 हाथों से उठाते हैं। 1 छोटी उंगली के नाकों के भगवान को समझने के लिए हमें सेवा के मार्ग में जोड़ना है और वो सेवा आरंभ होती है। शवनमकिदमकेसाथ हम सब भक्तों के लिए ये सबसे महत्वपूर्ण सेवा है। कई बार भाग पूछते हैं, हम क्या सेवा कर सकते हैं। हम कहते हैं भावंतर, इसमें रूची बढ़ाओ, महामंत्र में जब रूची बढ़ेगी, आय में रूची घटेगी और वहा की रुचि घटाना है। महा कहते हैं मीठे हैं और अविद्या के खादर हम पर महसूस नही। इसलिए हम सुनते हैं तो नींद आ जाती। जब कहते हैं नींद आ जाती है। पर कुशाल खाने मे नींद आती, तो हमें इस अभिगर की बीमारी का इलाज कैसे करना है? यह उद्देश्य आज किस रोग में दिया जा रहा है और क्या क्या है? इलाज श्रम कितना और विशेस, यह भी महत्वपूर्ण है। यह नहीं, शमकितमकरोऔरबंदवार कुछ और सोचते। रहो बाबाजी सुनाते थे। 1 समय वैसा का घर था और उसके सामने 1 ब्राह्मण का घर था, दु वैश्या थी, उसका पाप का धंदा था और वो सोचती रहती थी। मेरे बुरे संस्कार थे में इस कारे में जुड़ी मुझे भी अगला जीवन व ब्राह्मण जैसा प्राप्त ह, जो हमेशा शासको पड रहा है। और जो ब्राहमण था बनाने में बैठ के लोगों को दिखाता था कि मैं शास्ता पड रहा। ऊ मर मे सोचता था। हाँ, उस शिया को कौल गिरारा क्या हो रहा है। उस इलाके में आग लग गई थी। इसमें 2 माया वाले विचार के ब्राहमण को पता लगा के हाथ को छू के चेक से निकाल सकता है। तुम झूठ बोल तो भगवान के अनेक गुण हैं और इन सब का ज्ञान प्राप्त हो सकता है। सेवा के माध्यम से। जिस प्रकार आंख में जब कैटरेक हो तो आप कैटरेक की कार देख नहीं सकते, जब कैटरेक ऑपरेशन हो जाता है, फिर से देख सकते हो, तो हमारा अशुद्ध हृदय। मन, बूधी को हमने शुद्ध बनाना है। और उसका उपाय क्या है, उसका उपाय इस रोग में दिया जा रहा है और भगवत के हर्ष लोक में दिया जाता है। हमें भगवत को ध्यान से सुनना चाहिए, पढ़ना चाहिए। भाव मन माया का तेज प्रभाव है। सच पर भगवान ने हमें हथियार दिए हैं। जिनके द्वारा आप इसका विरोध कर सकते हो, उसे भगवान कहते हैं। देवी से गुल भाई वो माया। मेरी माया का विरोध करना बहुत कठिन है। और माँ में माया जो मेरी में आएगा, उनका विरोध कर सकता है। भगवान के सर में कैसे आना वो पाय दिया जा रहा है? और पापा जी क्या कह रहे हैं? रात्रे की हफ्ते में जो व्यक्ति ग्रंथों को बांटता है, वो क्या किस सेवा में है? वो किस भाव में है। तो आप सब भक्त जो कि चाय की सेवा में जुड़े हो, आप सब को असली समाधि में। और समाधि का अर्थ है सदा हवाल का चिंतन करते रहना। और अगर हम प्रयास करें तो आप सब इसको प्राप्त कर सकते हो, क्या अगर प्रेम को प्राप्त कर सकते हो। हम सब का उद्देश्य क्या है? हरदा में रूची बढ़ाए, भगवान के शास्त्र में रूची बढ़ाए, कृष्ण में रूची बढ़ाए और अगर इस विषय में रूचि, बढ़ाओगे में क्या प्राप्त होगा? कृष्ण प्रेम जो कि प्राप्त होता है, क्या के द्वारा re gita कोई प्रेशर है प्रेशर? yes its a late today ever to class
मंडी में आते है, न, होते हैं तो हम लोग बहुत जो साथ लेकर आते हैं जिससे हम अगर शवर्बकीकमकरते है तो हमारा ही होता है उसमें और ध्यान से नहीं कर पाते हैं तो ऐसा कहा जाता है कि अभी हमको बहुत महनत करने की सीधा तो फिर वो कम हो जाएगा और फिर हम जाके शोर की तरफ में कुछ स्तन स्वार्थ के कर सकते है कहते है की हमारा भी ज्वाइंडिस जैसे बीमारी है और जब हम 1 तो बीमारी भी टेस्ट नहीं है लेकिन हम शरकी करेंगे तो फिर उससे टेस्ट चाहे ऑन करेंगे तो फिर से टेस्ट को कैसे समझ में क्या करना चाहिए अगर जो प्रारंभिक स्तर में आता है तो उसे खूब मेहनत करना चाहिए और या फिर कुछ समय निकाल के पापाजी के गर्द पढने चाहिए और पापाजी से चाहिए की बीमारी हमे
हैरान करना चाहिए और नसों को सुनना चाहिए अगर आप मंदिर में रहते हो तो भगवान बगल क्लास में आओ, गीता क्लास में आओ और घर में रहते हो तो भी ग्रंथों को पढ़ो अगर हम भाई राम को करे ध्यान से और गंधों को पढ़े और सुने बिना शंका के हलके मे निकल ली जाएगी। अगर हम कभी माया के प्रति आकर्षण बढ़ जाता है उसका 1 ही कारण है हम श्रम के में ढीले हो जाते तो हम ढीले हो जाते माया एकदम पकड़ लेती है तो जिस प्रकार आप ये उदाहरण मैंने पहले भी दिया है आप बानो स्टेशन में खड़े हो अपने सामान के साथ या 1 मे भी दूसरी तरफ देखोगे चान से कोई छूरा रहेगा हमें सदा सावधान लेना चाहे okay okay i more r cypress more pression yes yoginaspressions in inglish also everyone
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सेवाकर और अगर उनकी मात्रा में श्रमण या रूबी
नहीं किया हो या कम के तो
सेवा करते समय बुरे विचार में रहे
है प्रकार बोले विचार आये और आप उनका पालन मत करो और आप अपनी सेवा करते जाओ कि करते जाओ तो आप खुद ही एडवांस करोगे ignore the mind so, ignore me egnorwercomesin the mind go can in
करने के लिए भी
सी रहती है है फिर भी पूरी राइट और वो शक्ति आ सकती है। दवाई ले आप बीमार हो डॉक्टर कहता दवाई लो परे रखो हम दवाई नहीं लेते तो बीमारी का इलाज कैसे होगा तो हमारी बीमारी का इलाज हमारे पास इलाज क्या है सो मारा करो ध्यान से सुबह भागो दम पड़ो गीता, पढ़ो, सुनो और भक्तों के संग में रहो अगर आप इन कार्यों का पालन करोगे बिना शंख के इलाज हो जाएगा गेरेंटी medisin
की जो वो कितनेी 1 चीज
मुजे
और साथ साथ दूसरों को बदले मुझे महाराज आप मेरे लोक सेवा में
दृढ़ है और प्रसाद दे सब सब बन सकते यह बड़ा क्या श्लोक है 100 प्रचार के लिए भी बहुत अच्छा है और की शुरुआती में पापा जी कह रहे हैं बुक समाधि
है की
सेवा
हमारी सेवा से हुई वो बिल्कुल रेडी वगैरा सा छोड़ी
का मतलब है कि हम बल जाप में नीले हो जाए किसे देश बढ़ाने के लिए जैसे आप लोगों ने 2 ढाई लाख ही था अगर बॉडी तो बेशक 2 ढाई लाख लोग नहीं पढ़ेंगे और कम से कम आधे या 25 प्रतिशत तो पढ़ेंगे तो वर हमें प्रयास करना चाहिए बरस में भी थोड़ा पड़े anymore question है
कि हम आध्यात्मिक वार्ड में लगे हुए हैं लेकिन उसके बावजूद भी हमारा आकर्षण बढ़ रहा है
बढ़ रहा है पर ध्यान मत 2 आप ध्यान आकर्षण में बढ़ाते जाओ यह तो हम जानते हैं कल में माया भी दिन पे दिन बरबाद होती जा रही है। sel्ffोल स्मार्टफोन्स में कई बार यह उदाहरण दे चुका हूँ स्मार्tphon द्वारा
या
कार्य बहुत सरल हो गया है मैंने आपको सिनेमा देखना होता था तो बह जाओ टेलर में टैक्सी लो, स्कूटर को फिर लाइन में खड़ा कर टिकट लो, ब्लैक मार्केट में टिकट लो आप तो आपके जेब में जो सिलमा देखना देख सकते है की नहीं आप लाइक जुआ खेलना चाहते हो तो किसी ने जाकर कैसीनो में भी नहीं जाना इंटरनेट पर कर सकते है और सेसिंग करना है वो भी कर सकते है। आजकल तो आप घर बैठे बैठे हर बुरा काम कर सकते हो देखा है वो भी देख सकते है। तो 1 माया कितना आगे बढ़ गए और उसके साथ जो असली बुद्धिमान स्मार्ट लोग हैं वो स्मार्टफोन में पावर के ग्रंथ को बिठाते हैं, हाल के विग्रह को बिठाते हैं और स्मार्टफोन्स का उपयोग करते है और कई लोग इसका दुरुपयोग करते हैं। so the choices on my strong, but woselservisis stronger okay question okay last
so आप भी भकतिकासरीके बारे में बता tata
संसार मे भी बस्ती में जुड़े हुए
है लेकिन भी बहुत कासमी जैसे हमारे माता पिता तो उनमें भी इतनी आंसरकी जैसे वो ओवर डोज है तो सिक्सी लेकिन वो थॉट जब आता है रिया भी वो चले जायेंगे तो वो थौर्ट से ही पूरा शरीर जना का जाता है तो इतनी आ सकती जो लोग मतलब पत्नी में तो जैसे बो श्रीनंद चलना है तो जो भरती करता है उसके दिल में, मैं आगे विधयतोपूराभेआप ठीक
कह रहे हो, आप सच कह रहे हो कि आप भक्ति कर रहे हो, पर आप इस समय शिल् नहीं बने और आप भक्ति के वीडियो का पालन करते जाओ। भगवान गीता क्या कहते है वाइसमैन हम इतिहास को देखते हुए देख सकते हैं सारे पिता, माता, दादा, दादी, दादा, दादी सब समय के साथ सब जुदा हो जाते हैं। तो वो इस प्रकार की आसक्ति रखने का क्या लाभ? जो आपको पता है आप उससे बच नहीं सकोगे। हमें पता है दादा पिता या किसी को भी रोक नहीं सकेंगे से है की नहीं तो हमें भी असली ज्ञान को समझना चाहिए। भगवान क्या कहते हैं आत्मा करना जरुर है, न है तो हमे हर चीज सातवें सिकंद में आप पढ़ते हो या हिराला गरबा का देहांत हुआ उनकी पत्नियां बच्चे बहुत दुखी थे तो हिरालकासपूलको प्रचार करने गए और हिरालकास्पूल ने 1 कथा सुनाई कि 1 समय राजा युद्ध में मारा गया था तो उसके जो रिश्तेदार थे पत्नियां थीं उनका इतना आकर्षण था कि वो शिविर को संघ ले जाने से रोक रहे थे। तो यहाँ में ह बच्चे का रूप यामा ने कहा ये से दूरी है ये सोचिए कि वो अपने मरे हुए पति को जीवित कर सकेंगे। फिर उन्होंने कथा सुनाये आगे 1 शिकारी था और कई पक्षी थे वो पक्षी के मा यो पति मेल था और पत्नी को पकड़ लिया अपने जाल में पति ने कहा पत्नी जाल में फँस गई और सोचा सोने वो भी जाल में फस गया तो यामराज ने कहा रोने पर रोने का क्या फायदा उसी प्रकार आकर्षण है पर हमें यह भी समझना चाहिए kisan किसी में ये भी भूल नहीं चाहिए किसी से भी nda anymonquestion
जल्दी से काम चाहिए
आप भक्ति की वीडियो का पालन करते जाओ हसते से हैं की टेकिंग iसपrचlमedिसoन ओके हारे क्रिश्ना हारे किशना क्रिष्णा हारे हारे हार ह caहlललe।
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