भगवान् कृष्ण की अद्भुत जन्म लीला | SB 10.3.9-10 | 11 Aug 2020 | Delhi | Srila Gopal krishna Goswami

Srila Gopal Krishna Goswami teaches that understanding Krishna's pastimes requires bhakti and sincere study, not just intellect. He describes Krishna's 16,000 palaces and butter-theft, and explains how chanting, surrender, and spiritual discipline help devotees overcome material desires and see the divine.
Chapters
home gatiandasjananjna shaka tanna a mano istam मेन भूतले पयनपकरामयरादिश्वा पदंदिकमबनदेहम श्री गुड़ो ता पद कम श्री गुणुणबठावमष्टम पाम सगायतम सहागनाअगुनाततम सम सु जेवसदबेतमसबधूतम ना सहित कृष्णा चेतन देव श्री राधा कृष्णा पदान सहलना ललिता श्ववजखनसमशा ये कृष्णा करुणा सिंधु दीन बंधु जगत पुदेपसागोपिकाकांता ध सखा कंचना गोरांगी राधे दुलावलेजुले। ban
a
कृपा सिंधु भैवचापुरितानबबले ने वो न मोनमaजयश्रीकृष्णा केसरिया raboedandaeeddad you go but हई कृष्णा, ओके और फैलना चाहिए तो इ लोग शोक में आप पढ़ते हो कि भगवान प्रकट हुए इस पीसी पर और वो प्रकट हुए उन धे हमारे समान नहीं। भगवान कहते है जन्म कर्म का मे दोनो ही दिव्यम शब्द में बहुते बुल्ली के पास परम भगवान प्रकट होते हैं अपनी इच्छा के अनुसार और परम भगवान अपने भक्तों को ही अपने साथ लेकर आते हैं प्रकट होते हैं क्यूँ भाई जनाया साधुराम बने दुष्का धमसंसाधामप्रगट होते हैं। धर्म की स्थापना के लिए है भागवत परिणाम भगवान जी ने तो आप पढ़ते हो की उसे देव की वाह हुआ था और कम घर छोड़ने जा रहा था और रास्ते में 1 दिव्य संदेश प्राप्त हुआ। हे मोर। तुम जानते नहीं, तुम्हारी बैन का आठवा बच्चा तुम्हारे मिस कर लेगा। सूरबुदीकेथे और ग धन का बंद करने के पति अपनी बुद्धि लगाई तो भी बच्चे का डर है न? बच्चे में ला दूंगा आपके पास हुआ। भगवान प्रकट हुए। भगवान के होने से पहले कई बाइपपरकटहुए थे ंगाबाद। ये है हमारे के प्रतिनिधि राम क्रोध जो मो मन अगर हम भगवान को संभालना चाहते हैं। सो हमें इन दोषों से कमजोरियों से बचना पड़ेगा और हम भगवान को समझना इतना आसान नहीं है समझे हमें प्रयास करना चाहिए। अगर हम चाहते है की काम पर लोग इत्यादि के प्रभाव में भी रहे हैं। भौतिक शुभी प्राप्त करे और धार्मिक सुखी सम्भव होगा। अगर हमें भक्ती महान में करना है से हमें बचना पड़ेगा और भक्ति की शक्ति से बच सकते हो तो अपने रूप में प्रकट होते हैं। shraparmakrishna मा से मिलन में कहा गया है अनेक ईश्वर हैं पर यही पर हम भगवान हैं जो कि बात चीत के कारण है वैसे अनेक देवता देविया है। पर हमें यह नहीं सोचना चाहिए। ये सब 1 समान है। हम रोज सुबह 10 नाम अपराधों का वर्णन करते हैं। मेरे कपाल क्या है ये सोचना की देवता भगवान 1 है। इस काल में आने से पहले हम पड़े थे। इस वातारण में यहाँ के हम सोचते थे सब भगवान 1 ही है। कोई भी रास्ता पकड़ो 1 ही नतीजा आएगा। जब आप सफर में आते हो पर थे हो। भगवान श्री कृष्ण ने भगवत से उदहारण दिया जाता है। ये के अगर आप पेड़ के जड़ में पानी डाल तो पूरे पेड़ में उसका प्रभाव पहुँच जाता है। कृष्ण भक्ति के द्वारा आप सारे देवता, देवी हो सबको पसंद और न होते हैं रूप में। तो यहाँ आप देख रहे हो की जब भगवान प्रकट हुए तो भगवान प्रकट हुए। किस की इच्छा को पूरी करने के लिए माँ बाप से भारत है। उन्होंने बहुत गहरी तपस्या का पालन किया था। 12 हजार देवताओं के वर्षो के लिए कुछ खाया नहीं, कुछ पिया नहीं, केवल जो पत्ते गिरते थे पेड़ों से, और तो हवा में दीदी, ये था उनका भोजन। आपको ये भोजन लिया जाए। स्वीकार करोगे रसोई को बंद करना पड़ेगा। तो बाहर हजार। देवताओं के वर्षों के लिए इतनी गहरी तपस्या थी, और 11 ही चिंतन था। क्या ये हमें पर हम भगवान प्रसन्न हो? पुस्तक भगवान को प्रशन करना इंसान है, और कठिन भी है, इसान है उनके लिए विशाधा से प्रयास करते हैं। और पैसे द्वारा ही आप उन्हें आकर्षित कर सकते हो। ब्रह्मा जी कहते हैं तपस्या पर जोती भावदाऔधोकभगवान जो है, धोकसुजाहैउन्हे, समझना, बड़ा कठिन है। और तपस्या के माध्यम से आप उन्हें समझते हो। तो वसुदेव और देवकी से उठाए। पर पकड़ हो चुके थे उनके माँ बाप के रूप में के रूप में। तो परम भगवान भैया। भगवान ने माता पिता के रूप में स्वीकार किया। क्यूंकि उन्होंने सुपरसियर द्वारा उनको पसंद किया? भगत के कई स्थानों में उधार के लिए। महाराज नाम उनकी पत्नी ने मेरू देवी पर कर रहे थे भगवान को पुस्तक के रूप में प्राप्त करने के लिए। और जिसके उत्तर में भगवान शिव जी के रूप में प्रकट हुए, यह पुस्तक के रूप। तो यहाँ पड़े हो। भगवान प्रकट हुए 4 हाथों के साथ, और हाथ में क्या था? आपने बौद्धिक समाज में देखा है? कोई बच्चा पैदा हुआ है 6 हाथों के साथ, और केवल 4 हाथ ही नहीं, हाथ में कुछ है शांत उनका पूरा शरीर सज्यावाधाअक्सर मौलिक। समाज में। जब बच्चे पैदा होते हैं तो पैदा होते है रोते हुए, और पूरा शरीर गन्दा होता है। तो पैदा होते ही निर्जल पड़ता है। और यहाँ न प्रगट हुए। 4 हाथों के साथ, और पूरा शरीर सजा साथ में उनके शरीर में दूरिया मनी के साथ सजा साबयेमेदुरिया मनी है उसे आप किसी दूरी शोर में नहीं खरीद सकते। शो में जाओ बिजुरिया मनी में मनी 1 गुण ये है की हर पल उसका रंग बदल रहा है। 1 मि ला, अगेन, पीला, नीला, काला, सारे रंग बदलते रहते हैं। आप पूछोगे इसका भाव क्या है? मनी के धाम सो आप यहाँ के जूलरी स्टोर में नहीं खरीद सकते। भगवान के धाम होता है तो उनका पूरा शरीर सजा था गहनों के साथ, हीरो के साथ, क्योंकि परम भगवान अपने माता पिता को की दिलाना चाहते थे, घबराओ मत मैं प्रकट हो गया हूँ। और जब सेल ने यह रूप देखा तो समझ गये भगवान प्रकट हो चुके हैं। और उनकी इच्छा थी। अब मैं दान दूं। कुछ क्यूँ की ये प्राचीन रिवाज है, बेटा पैदा होता है तो माता पिता दान देते हैं कि नहीं। पर साथ उनकी चिंता यह थी कि कम से कम सूचना नहीं मिले के वो पागल हो चुके है। तो बाते में क्या क्या? मने मन में 10 हजार गाये ब्राहमण को दान में दे दिया। और ये 10 हजार गाय जो थी सरजूजी उस समय समाज की संपत्ति उनकी महंगी जाती थी, देखी जाती थी ये देखे की कितने गाय हैं की मन शोदौननमरा उनके पास 9 लाख गायें थी, सजी हुई और गायन में कई गायें थी जो सुगंधे दूध देती थी देखा है दूध पी या सुगंध डालना है तो फ्लेवर डालना पड़ता है ना शो बड़े चॉकलेट और ये जो ननमालकीगाये थी दूध दे रही थी की कई गाय थी, उन्होंने रिजर्व किया था, रखा हुआ था भगवान के दूध के ले तो 10 हजार गाय में मनी मन में दान के रूप में दे दिया। इस में पर कहते हैं कि अगर आप ऐसी स्थिति में हो यहां की आप शरीर के द्वारा सेवा नहीं कर सकते तो मन के द्वारा कर सकते हो तो ये नहीं कि अगर शरीर के द्वारा कर सकते हो तो मन द्वारा करे और बाकी में पढते हो। 1 समय 1 गरीब ब्राह्मण था, उसकी बड़ी इच्छा थी कि मैं भगवान के लिए बड़ा मंदिर बनाऊँ, बहुत सेवा कर। वो गरीब ब्राह्मण 1 कथा सुन रहा था जिसमें कथाकार ने कहा अगर अब ऐसी स्थिति में हो यहाँ की श्री सेवा नहीं कर सकते, सामन द्वारा कर सकते हो। भाव को लेकर। 1 बहुत बड़ा मंदिर बना लिया और उसमें मूर्तियों की स्थापना की और खुद रोज भारती पवित्र नदियों में जाते थे जल लाने के लिए अभी से खिले। अक्सर हम अभिषेक करने के लिए बंधों का उच्चारण करते हैं, तो ये ब्राहमण खुद जाता था इन नदियों में और कई सालो के लिए रोज अभिषेक करता था और भगवान को भोग लगता था खुद ही खुद सारी आरतियाँ खुद करता था तो कई साल बीत गए, 1 दिन उसने खीर बनाई थी भगवान और उसकी इच्छा थी की जैसे आप जानते हो पहले गरम बनती है, ठंडा होने पर भगवान को भोग लगाते है तो मने मन में ऊँगली डाली खीर में और देखने के लिए की ठंडी हुई कि नहीं उंगली जडगत जल गई वो आश्चर्य हो गया, क्या हो गया मैं कल पर भगवान मे साथ। भगवान ने जब देखा कि उनका भक्त आश्चर्य हो गया है इस घटना को देख कर तो वो हंसने लगे लक्ष्मी जी ने पूछा क्यों हँस रहे हो? उन्हें जवाब दे दिया उन्होंने अपना जहाज भेजा उस ब्राह्मण को अपने धाम में लाने सो। अगर आप ऐसी स्थिति में हो, आप ऐसी स्थिति में हो जहाँ की श्री द्वारा सेवा नहीं कर सकते, मन मन के द्वारा कर सकते, नहीं कर सकते हो, मन द्वारा कर कई भक्त आपके मन के दुखी है, रिस्ट्रब्यूशन नहीं कर सकते। हम तो चाहते हैं सब जाए में जाएंगे तो कहीं प्रभावी तो वो दुखी है, हम मन ही मन में मुंग डिस्ट्रिब्यूशन कर सकते हो। आप में मजबूर तो वासदेव ने देखा की मेरा बेटा प्रकट हो चूका है, तो और भगवान भी इस रूप में प्रकट हुए क्यूँ क्यूँकि वो चाहते थे की उनके बेटे को पता, उनके माता पिता को पता लगा, क्या तो भगवान हो चुके हैं घबराओ मत भगवान ने कहा अब तुम साधारण बच्चे का रूप ग्रहण कर लो और उन्होंने साधारण बच्चे के रूप में लिया तो कृष्ण भगवान परम भगवान है। शधाणसधारण नेता देवी ने कई बार साधारण व्यक्ति भगवान की तुलना करने का प्रयास करते हैं। वो कहते हैं कृष्ण भगवान जब वो दिव्य अजभूतलीलापकडकरते हैं, ओ सरदार। तो सारे शासक निर्णय क्या है? कृष्ण भगवान स्वयं ये कुछ ट्रप की कल्पना नहीं थी, ये शास्रों का निर्णय है। कृष्ण भगवान जो हैं। और भगवान ने भी यही कहा। यदा यदा धर्म, अलग अलग समय में। परम भगवान प्रकट हुए, उन्होंने देवी लीला भी प्रकट की। भगवान जब पकड़ होते हैं, अजबूत लीला पकड़ करते हैं। अरे आप कहोगे, आप कहोगे, हम भगवान हैं, तुम भी आप परीक्षा ले सकते हो, आप क्या की अद्भूत हिला के वर्णन की तुलना कर सकते हो। तो परम भगवान जब पृथ्वी पर होते हैं, दिव्य नीला पकड़ करते हैं। और भगवान जब पकड़ होते हैं, तो हमें दिव्य वाणी भी देते है। जैसे भाग गीता में क्या है पर हम भगवान का संदे और ये संदेश क्या है? भगवान ने अर्जुन से कहा कई बार तुम प्रकट हो चुके हैं और मैं अपने सब जन्मों का स्मरण कर सकता हूँ। तुम तो कृष्ण भगवान, परम भगवान हैं और उनकी जो अद्भुत लीला है, उसका भी बडे सुन्दर रूप से वर्णन है। श्रीमन भगत बुत के पदम स्पन में परिश्रम ने कहा कि मैं तो भूखा था और प्यारा था, परिश्रम सिमिलर सी के आश्रय में प्रवेश किया, प्यासे थे, पानी की खोज में थे, और उन्होंने देखा यहां 1 संत की कुटिया है। तो उन्होंने सोचा कि वो जरूर कम से कम पानी के का स्वागत करेगा, तो कुटिया में चल पडे, शास्त्र कहा गया है, अगर शत्रु भी आपके घर में आये तो आपको उसका स्वागत बड़े आदर से करना सबसे बेहतर है। अगर का स्वागत पर शाह के साथ करो, ऐसे कई गुर्धवारों में, मदों में सब अतिथियों का स्वागत करते हैं, मन बना रहे थे। और अगर आप शाह से नहीं कर सकते, जल्द से करो, जान से भी नहीं कर सकते, तो मीठे शब्दों से करो, मीठे शब्दों से भी नहीं कर सकते। तो 2 कुछ तो करो ने कुछ नहीं किया, पद की इच्छा थी हार्दिक की हर अतिथि जहा 1 बंधन में आये, उनका पसार के साथ स्वागत किया जाए। मायापुर में 1 रूप से शुरू किया। तो जब राजा और राजा कौन थे, राज सरधार राजा नहीं थे, रिषी भी थे, संत भी थे, भक्त भी थे, तो जब उन्होंने देखा कि समीर रिशी ने उनकी तरफ देखा भी नहीं, तो उन्होंने बड़ा सा देखा, क्योंकि उन्होंने छुड़ा दिया, मार के रूप में, उसके बेटे ने देखा ये अपमान व उनके पिता का, उन्होंने अपनी ब्राह्मण शक्ति का जरूर को किया और आज को खराब किया। प्लीज 10 कम के में परिवार कहते हैं की मैं तो भूखा था और प्यासा था, मैं ऋषि की कुटिया में गया था पानी के लिए, और ये भूख और प्यास उन्हें सूचना मिली थी, श्राप मिला था शाह दिन के पश्चात तुम्हारा आंसर जाएगा। और ये भूख और प्यास थी, वो अनुभव नहीं कर रहे थे, क्यूँ? क्यूँकि शुगर में 1 कमल मुख से जो भगुतना संदेश प्राप्त हो रहा था, तो सुनने में इतना आनंद आना था कि भौगिक, भूख और प्यास का निशाना मेलिसा बिल्कुल तो प्रभा जी कहते है की अगर इसी प्रकार हम अध्यात्मिक सेवा में रुचि लेंगे, तो हम 1 भौतिक प्यास और भूख से के गोल लीला में देखते हो। बिजबासयनेतोभगवान की शरण ली और भगवान ने पर्वत को उठाया की सुरक्षा के लिए, और इंद्र ने खुद होकर तेजी से बारिश बरसने लगी और ब्रिज बाजी में क्या क्या केवल भगवान कब देखे थे और भगवान कब देख रहे थे, उसमे इतना आनंद था कि 7 दिन के लिए उन्हें ना प्यास लगी। तो उसी प्रकार अगर हम श्रवण के माध्यम से भक्ति में जुड़े रहेंगे, तो हम बौद्धिक प्यास और बौधिक भूख से बच सकते हैं। और अगर हम इस दिव्य मार की तरह नहीं ले, हम बौद्धिक भूख और प्यास में के प्रभाव में रहेगा शब्दों में वह सदा यही प्रयास रहेगा। और और और अब कभी अपने आप को संतोष नहीं कर सकूंगा। तो परम भगवान की जो लीलाएँ हैं, उनका जो संदेश है, ये है आज की असदी का सी पार। हमें कृष्ण कथा में ऊंची बढ़ाने के जब भागवत में कहा गया है यही है उपाय, तो हमें इसका सार। तो आप भागवत में भगवान के अनेक लीलाओं का वर्णन पढते हो, भगवान लीला प्रकट की जिसकी तुलना कोई देता देवी न कर पाये न कर पाये। कई बार किसी बौधिवाली व्यक्ति को अगर ये बताओ इलराम के बारे में वो कहेंगे, ये कैसे सम्भव है? तो ये संभव है उनके लिए जो भक्ति के मार्ग से जुड़ते है। और अगर हम भौतिक बुद्धि के द्वारा, बहुतिक प्रयास के द्वारा भगवान की अलगूतलीलाको संभलने का प्रयास करे नहीं समझ पाए। उदाहरण के लिए, कई विदेशी स्कॉलर्स ने मेरे सारों का अनुवाद किया, उसमें यह स्वीकार नहीं किया। यह परम भगवान है, उल्टा यह बताने का प्रयास किया। ये जो शिक्षक हैं, ये थोलॉजी है, इट, इस कम, इमैजिनेशन माई थॉलोजीमईथोलोजी नहीं है, ये बात है। तो आप भगवान के अलगू लीला के विषय में पढ़ते हो और जितना हम पढ़ेंगे उन्हें के राय के साथ वह रूखी पढेंगे और हमें इन्हें पढ़ना चाहे सेवा के माध्यम से हमारे बहुत से भगवान को नहीं समझ सकते और सेवा के माध्यम से समझ सकते हो। तो परम भगवान प्रकट हुए धर्म की स्थापना के लिए उनकी जो मिला है वो अलभूतथेउन्होंने छोटे से थे। 1 राक्शसरीउतनागामद किया, सिनावमरताकाबद किया उन के भाई ने ने, माता को शिकायत की। खेलते समय आपके बेटे में मिट्टी का भगवान के अनेक नाम है जिसमें 1 नाम क्या है मक्खन छोर अगर आपके नाम के आगे शोर जोड़ दें आपको अच्छा लगेगा, आपके नाम के आगे चोल जोड दे मैं क्या चोर हूँ क्या और भगवान के नाम के आगे छोड़ जोड़ते हो। तो भक्त आनंद अनुभव करते थे और भगवान ऐसी चोरी करते थे की कोई कभी उन्हें पकड़ नहीं पाया। ये है उनकी देव। भगवान पड़ोसियों के घरों से नहीं चुराने में मक्खन चुराते थे और पड़ोस की गोपियाँ शिकार करती थी हमारे घर से मन चुरा रहा है, चुरा रहा है के महीने में भगवान लीला का भुगतान करते हो तो माता मन में सोचती थी से पड़ोस के घरों में जो दूर है, उसमे ज्यादा मिठास है। तो वो तो कहती थी, का है प्रमाण मेरे बेटे ने चुराया मन में थोड़ा फर्क होता था, बड़े ध्यान से प्रयास करती थी, और भी मीठा सी दूध, इत्यादी तो कई शिकायत की थी। तो माता ने कुछ किया, नहीं तो उन्होंने यही शेयर कर दी। बेटी खाई। तो जो भगवान आये तो उनकी माँ ने, तुम ने क्या मिट्टी खाई है। आज माने क्या कहा नहीं, ये यूटी शिकायत की है। यो ने, अपने भाई ने, मिलकर जो चाहते थे, आप डाटा हमें और आपको विश्वास न हो, अपने मुँह खोल कर निकाल देता हूँ। और जो उन्होंने मुह खोल कर दिखाया, क्या देखा, क्या देखा वह विश्व का दर्शन, शायद देका, देवियों का दर्शन मान लेगा। मन का दर्शन तो सोचने लगे। ये तो असंभव थी, चीज है, सोचने लगी, कहीं सपना तो नही लेने में यह सपना तो नहीं है। तो परम भगवान की जो लीलाएँ हैं, ये दिव्य है। और हमें श्रद्दा से इंगुईस्वीकार करे। क्रपा की इच्छा थी कि हम 10 बड़े ध्यान से पढे और क्यू जस्स्कनने भगवान की लीलाओं का वर्णन है और रासिला का भी वर्णन है। क्या कारण है व्यास देव ने रासिला और गोपियों का वर्णन नहीं किया। पहले नमस्कार मै, क्यूँकी वो चाहते थे, उन्हें पता था जब पहुँचेगा मे कोई शंकरी लगे। परम भगवान कौन है वो भगवान के लिए कोई कार्य असमी ऐश्वर शाम गेसिया मन ने कहा है कि भगवान सब उन्हीं के लिए उपयोग कर सकते हो। जिसमें 6 प्रकार के गुणो से क्या है, 6 प्रकार के गुण, ऐश्वर, अस्या, सबसे धनी, भगवान जी ज्यादा धनी को द्वारका में गये, देखा भगवान कितने महल
हैं,
16 हजार से ज्यादा महल और हर महल सजा वाधा गेनो के साथ हे भगवान ने अपना विस्तार किया था, उपस्थित थे हर वह में, हर मेल में उपस्थित थे और अलग लीला में जुड़े हुए थे। तो भगवान सबसे है, वीर ऐसा सबसे वीर जैसे छोटी उम्र में उन्होंने bade se hi, the strongest, the most beautiful, the most famous, सबसे प्रसिद, सबसे खुबसूरत, भगवान खुबसूरती से तुलना करते है, वहाँ की खूबसूरती, भगवान सबसे खूबसूरत है, उनकी खूबसूरती हर मिनट बढ़ते जा रही है। सबसे ज्यादा ज्ञानी ये जो शास्त्रों का ज्ञान है, ये सनातन ज्ञान है उधारण के लिए भगवद गीता जिसका मध्य करते है, भगवान ये ज्ञान दिया कैसे सूर्य के देवता हजारों साल पूर्व और ये ज्ञान दिया और हम 5 पढते आ रहे है और आप कई भक्त हैं जो रोज गीता पढ़ते है और आपको लगता है हम ने इतनी बार पढ ले या तो और पढने की जरुरत नहीं इच्छा होती है जब आप पढ़ते हो हर बार पढ़ते हो आपको इसका ताजा पन महसूस होता है हर बार जब आप महा मंत्र जाप करते हो हमको महा मंत्र का राजा पन महसूस होता है। ऐसे में होने वाली व्यक्ति कई बार भारत में भी वे पूछते हैं सेम नाम दे डोंट यू गेट था न। because holy name sending from the s prison, holy name on different om te lo भगवान से। भगवान ने अपने पूरी शक्ति डाल दी है। नाम में शीशास्रमेंआपपढते हो, भगवान ने पूरी शक्ति डाल दी है। अपनी। तो परम भगवान होते हैं धर्म की साधना के लिए और उनके शिक्षा है, वो हम प्राप्त करते हैं। भगवान की अनेक मिला है गालील, इतिहारी औइंटसबमिलामें। आप देखते हो कि परम भगवान लीला जो हैं बलपुर सी, उनका प्रकट प्रकट होना। दोनों ही देवियों में हम भक्तों को इस जन्म तैयारी के ऊपर ये निर्णय करना चाहिए ने। भगवान के सरनगत और भगवान के शरणगत होने का क्या अर्थ है? उनकी शिक्षा का। और अगर हम राई के साथ करेंगे, गंभीरता के साथ, ध्यान से जाप करेंगे, सब करेंगे में रहेंगे। जिस प्रकार पर माँ ने कहा की बौद्धिक भूख और प्यास से बच गए, हम भी बौद्धिक भूख और प्यास से बौद्धिक भूख प्यास का क्या अर्थ है? बोधी आकर्षण भौतिक केशन विचलित कर देता है। और अगर आप इससे बचना चाहो तो यही 1 उपाय है। श्रम राज कहते हैं भरत भक्ति का ज्ञान देते हैं। श्रम। कितना विश्वा भक्ति का ज्ञान सबसे पहले मुनि द्वारा प्राप्त किया था। जब उनके पिता ने पूछा ये बताओ क्या सीखा है में ज्ञान का पालन आवश्यक है। और फिर हम को समझ सकेंगे। तो अगर। आज जैसे भी सिधाना कहते थे किसी चीज की कमी है, ज्ञान की कमी है। तो हमें ध्यान से इन गधों को पढना है। वह लीला को समझना है। और महा मंत्र के उच्चारण से क्या लाभ होगा? का? भगवान कहते हैं काम, काम, बसने के कारण हम हो जाते पर से। अगर आप बचना चाहे तो क्या है? वो उपाय क्या है? यहाँ की तलवार से स्थिति का वध करना, यहाँ की तलवार का क्या, भागवतों को पढना, जगह पढ़ना, शासन को पढना, कुछ कथा में रुचि लेना, हर नाम में रूची लेना, हर नाम में रूचि बढ़ाना है। और प्रयास करें। फिर भगवान को आप, समझ, पाओगे, सो सबका सबसे बेहतर अगर ने भगवान के होना का salsas higia okay nygesionseकsाजी ने शादी में बताया जैसे देवी की मदद, तो उन्होंने तपस्या के भगवान प्राप्त करने के लिए। तो आपने बताया कि तपस्या के 5 दिन से भगवान को पा सकते है। तो कई बार मरा बोलते है की तपस्या के द्वारा भगवान नहीं प्राप्त होते, आप से भगवान प्राप्त होते है। तो इन दोनों को कैसे सकते। लोग कहते हैं तपस्या द्वारा पाप भी होते हैं, भक्ति द्वारा। राम कैसे हैं तपस्या उसका ये अर्थ नहीं। अनमनी तपस्या जैसे जी की तपस्या क्या है? भगवान का नाम लेना, ये वितपजाक्या है। कृष्णा का चालन करना, तपस्या होनी चाहिए। सास पर आधारित छात्र पर आधारि, त पस्या हो ये थोड़ी अमननानी, तपस्या करे शी in proposes हम प्रशादी खाएंगे वो कोई जात न खाना खाओ, व प्रशाद खाओ, ये जीप की तपस्या तपस्या होना चाहिए। sales misia bimsicathepux should be worked to right हाई थैंक यू भारत साहब में लीला करते हुए और 1 पैक्टिकल साइड दिया तो उसने जो की हमा
मिले
तो ऐसा हम सब जानते है की सारे लोगो को हम कर पाएंगे और खासकर हमारे पास मंदिरों में 1 वेस्ट रिसेप्शन टीम है वो है वेस्ट रिसेप्शन की जो कहती थी को रिसेप्शन करने के लिए क्यूंकि जैसा हम मारे को रिसेप्शन करते हैं करते हैं और तो इसी प्रकार से अगर हमारे पास फरमान की बाहर से न कराए और साथ में कुछ प्रसाद देकर के रेगुलर टीम जो है पर आज के रहना पड़ेगा थोड़े समय embidencemaemvidensy evidenci smejesकरनाpdा so i com so on ger that is tempty उम्मीद है जल्द से जल्द इस समस्या हल जाइए और आप सब पैसे जैसे हलापचारकरदगो, प्राथना इमजेंसी। thank you so much for to asti question what micresistanydibopis cause restriction i to make us tap so what is the message from your holinrsforthe mouslarcilibrat, what the sod doing on the dewoginsonot coming as house sir g is not stop online teaching is there and is online teaching is good in many it s a blessing in is guys and now modi online teaching is online teaching is going on a de okay san helped on online facing a online facing and gis आltोso nebaguatamsays beautiful pain mike you with i mean you get inspiration pista okay to online breathing is open the doors or many devotes body, yes jpitagasofonme so oginglesayng japan on for one day and a one day now you all the centre everyday on also yes
good mars trading hain, but then in march in the doctor has then i just come from lovdedintedhen march lokter started from the trendy second mars set, because not people quiding o the word is something is so the best time for us to go had wide market so i started online pesa started sources and the warning deppssidowithmy sistem i was tube chanel cons i was not being the the sad release that time and in a facebook page my facebook page as the stones people start watching my lectures today
in
those days, it was to don t to six nrt watching you like to on the my channels and of sixty five thous some times and then i state asiento come to my whatsapp no a starting making whatsapp, whatsapp so we london on me so the all to t to share the mega whatsapp to सो again to fifty people come in one whatsapp do so have to go had three whatsapp is the dating app to your whatsapp to सो adteमीtिे and then send a message they come to managers when a life send the notification or the one come to the life so now i started in fifteen minutes with bloaeiinthemorling putin fifteen mints with so so with a r storia storia be fine get so it amazing got so hard सो people कमिंग से पाव and i keep on taking not of that and i got so many made from anika from agisitanfrom musket somebody from ostraliaandwer and on me she was so have to get she golave gotidamerica she said w from mai possible to to her mom medito india and then from the she got it ship and she s got it america s from him she s, she s twenty thousand to atms
so manedyworithat doing that so one hand, we have some restriction, but is also opening a mew channels of fleecing, as you go come the temple, he go online and my many tample reading online dordosinshear that benda oppertunity jason excuses that also open okay anymore yes pucabuca बेसिकली service about advance, then in direct
सो
ी can you have to do inteligence the s no stand montre speak this mantra regarded of who taking so you to boy tenalsyouhaveto jud advinseinsremoty। as some modi, you will have to ger wainsiartrop and with get you have to use your inteligence will now stand mantra its my advise go down। wording constan okay yes जी, आज आपने कहा को कोट करते हुए भगवान जूषामेंहैक और उसने भगवान सुरेश नहीं लगाता है सनातन में बहुत सारे कार्ड उनके लिए भी लोग लगाते हैं तो इसकी वजह से कंफ्यूजन हो जाता है ऐसा प्रयोग किया देवता की बात छोड़ो अपने नामों के साथ भवानजोा में जाओ सब के आलम में आगे लिखा भगवान 100 8 से तो अगर आप उनको बिल गिनोगे करोड़ो मिल जाए तो हमें सास के आधार पर संभल जाए असली भगवान े पापा ने किया pull real god prop कहते थे krishna megrin god गो okay yes ओके कलम बने जल्दी है बोले की है की जो हमारे सेक्टर उनके कुछ लोग है और माइथोलॉजी के साथ वो माटी च कुछ ऐसी चीजे होती है करियर इसको बना फिल्म लास करते हैं स डेशन सोसाइड हम ज्ञान प्राप्त करते हैं, हम फरमाने मoनeफाइलजोलोग स्टार करते हैं, उन के वनाम करते हैं बीरोनदेसं sony sony people get e form, just like a abus, we went competing no in one time, but then brave started the moment preaching gadi re c ठीक है, करते जाओ और ज्ञान लोगों का ज्ञान पड़ेगा ओkेनइtगामासुधामा i do a time and mani thank you taking action for case for case mein modi and is on gerast better we prech and si si now and be speaking to teaching and be speak analdin on the teaching yes a son। हाय करिश्णा हार शना क्रिश्ना हारे हारे
हार
नामराहाहलेहाले।
More from PRASAD

Rare Pastimes & Timeless Lessons of Guru Mahārāja | Stories Every Disciple Should Hear

ISKCON Legends- pure devotees meet-HH Jayapataka Swami, HH Gopal Krishna Goswami, HH Radhanath Swami

Jagannātha Ratha-yātrā Through Śrīla Prabhupāda's Mercy | 29 April 2006 | Nairobi, Kenya

Lord Jagannātha's Appearance Pastime | 21.07.2019 | ISKCON Calgary | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

The Ācārya Teaches by His Own ExampleGuṇḍicā Mārjana by Guru Mahārāja #shorts

Guṇḍicā Mārjana – Lord Jagannātha's Pastime | 21.7.2019 | ISKCON Calgary |Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

H.H. Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī Mahārāja - Exemplary Sādhana and Deity Worship # shorts

भगवान की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? | 11 Jan 2014 | Punjabi Bagh | Srila Gopal Krishna Goswami

Material Education vs Spiritual Education | Srila Gopal Krishna Goswami #shorts

