श्री कृष्ण जन्माष्टमी विशेष | SB 10.3.9-10 | 7 Sep 2023 | Delhi | Srila Gopal Krishna Goswami

Srila Gopal Krishna Goswami and other speakers discuss karma, suffering, and Krishna's divine play in Hindi. They explore why children suffer, the power of chanting holy names, and how Krishna lifting Govardhan mountain shows his grace addressing human hardship.
Chapters
जना सौदान
जना
जमना तीरा बना का
नमन तेरा थी देरा 4 नमनाराबनााआनरा
वा आ
गोपी बाला या गोपी जाना बला बला जाय गोपी जाना बाला भा ा राधा चौदा चौदारा
a
ई sre krisna राधा
सा
ksणारेnाृष्णा क्रिष्णा रे आरे हरे रामा रामा रामा रामा रे हरे कृष्णा कशणाकिष्णाकृष्णा रे हरे कृष्णा ksnाकृषणाकृषणारे आर रामा रामा रामा रामा रे आ रे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा रामा रामा रामा हरे कृष्णा काकृष्णा क्रेशन रे आरे आरे राम रे राम रमा मरे हर ेषणहरेेषररे hi krishna हाय हाय जब 2 या राज हर बा र बा र बा र
बा र बा
र बा र बा र बा
और को
सबका स्वागत आज बहुत शुभ दिन है। सब भगवान शीकृषन की शुभकामनाए को सरकार की जगा स्मार्टफोन है को निकाल सकते हैं।
बालक ममबुजेकनामलचतुर भोजम शंख गदा दुदायुधाम श्री वत्स लक्षम गलशौबिकोस्तुभम तामबरम सांदपयोदसवभगम महारेवेदूर्यकिरटे कुंडल सारे स्वक्तसास्त्र कुंतल उधम कंचंगदकंकोनदीभीविरोच माना वसुदेव छत कमान गोतम बालक मम बुजेषनमछतोरभोजम सं गदा जुदा श्री वत्स लक्ष्मन गलशोबिकसतभतमबर संद्रपयोदसभगममहा व दूर किरीट कुंड पर स्वत त्र कुंतला पदम कंचंगदकंकोनोदीभी रोचमान बसुदेव छत कम भोतमबलकमबुजछनम तुर भोज संग द धाम श्री वत्सलष्मम गल शोभिकोस्तुभतमबरम सांद्र पयोदसभगममहाहवे दूर किरीट कुंडल सा पर स्वक्तसास्त्र पतला
उद्दाम काम
चंगल कंकन दी भी विरोजमान बसु देव छत
राम बालक मां बुदे
दर बुजा शोभिकस्त
राम राम
किया रियाग
रोज दम
बस
रोज से आएगा कई श्मदजाह।
हम उस अद्भुतम, अद्भुत, बाल कम बालक को अमभुजएकछनम, कमल, जैसी आँखों वाले चतरु भुजम, 4 भुजाओं वाले शंख, गदा आदि 4 हाथों में शंख, चक्र, गदा तथा कमल लिए हुए उदा युधम, विभिन्न आयुद्ध, स्त्री वत्स, लक्ष्म, स्त्री वत्स से अलंकृत बालों का विशेष प्रकार स्त्री वत्स कहलाता है और यह भगवान के वक्ष स्थल पर ही उगता है। गल शोभी कौस्तुभम। उनके गले में वैकुंठ लोक में प्राप्त होने वाला कौस्तुभ मणि था। पीतम, अबराम, पीला वस्त्र, सांद्र, पयोद, सभागम, अत्यंत, सुंदर तथा श्यामल रंग का महा रह। वे दूर किरिट कुंडल, उनका मुकुट तथा उनके कुंडल मूल्यवान व दूर्यमणि से जड़े थे। किस सौंदर्य द्वारा परिस्वक्तसहस्त्र कुंतल, बड़े, बड़े, बड़े, बालों के द्वारा चमचमाता, उद्दाम, कांची, अंगद, कंकन आदि भी कमर में चमकीली पेटी। भुजाओं में बल, कलाइयों में कंगन इत्यादि से युक्त है। विरोजमान, अत्यंत सुंदर ढंग से अलंकृत वसुदेव कृष्ण के पिता वसुदेव ने 1 छत देखा। अनुवाद मेरे पीछे बोलिए। तब वसुदेव ने उस नवजात से सुख देखा, जिनकी अद्भुत आँखें कमल जैसी थी और जो अपने चारों हाथों में शंख, चक्र, गदा तथा पद में 4 आयुध धारण किए थे। उनके वक्ष स्थल पर स्त्री वत्स का चिन्न था और उनके गले में चमकीला कौस्तुभ मणि था। वह भी ताम्र धारण किए थे। उनका शरीर श्याम, घने, बादल की तरह उनके बिखरे, बाल, बड़े, बड़े तथा उनका मुकुट और कुंडल साधारण तौर पर चमकते वेदूर्यमणिके थे। वे करधनी, बाजुबंद, कंगन तथा अन्य आभूषणों से अलंकृत होने के कारण अत्यंत अद्भुत लग रहे थे। तात्पर्य प्रभु द्वारा शिला प्रभुपाद की जाए। अद्भुत शब्द के समर्थन में नवजात से सूखे, अलंकरण तथा ऐश्वर्य का वर्णन हुआ है। ब्रह्म संहिता 5, 30 में पुष्टि हुई है। बरहावतनसिमसितामबुध सुंदर अंग, भगवान का सुन्दर स्वरूप, श्याम रंग के घने, बादलों, जैसा, असित यानी श्याम तथा अम्बुद यानि बदल है। चतुरबुजशब्दऐसी स्पष्ट है की कृष्ण पहले 4 हाथों सहित भगवान विष्णु के रूप में प्रकट हुए। मानव समाज में कोई भी सामान्य शिशु आज तक 4 हाथों वाला उत्पन्न नहीं हुआ और क्या पूरी तरह बड़े बालों से युक्त कभी कोई शिशु उत्पन्न हुआ है। इसलिए भगवान का अवतरण सामान्य शिशु के जन्म से सर्वथा भिन्न है। वे दूर मणि कभी नीला, कभी पीला तो कभी लाल दिखता है और वे कु लोग में उपलब्ध है। भगवान का मुकुट तथा कुंडल इसी विशेष मणि से अलंकृत थे।
अनवाद
फिर से तब वसुदेव ने
उस
नवजात से सुख देखा जिनकी अद्भुत आँखें कमल जैसी थी। और जो अपने चारों हाथों में शंख, चक्र, गदा तथा 4 आयुध धारण किए थे। उनके वक्ष स्थल पर श्रीवत्स का चिन्ह था और उनके गले में चमकीला पोस्ट मनी था, वह पीताम्बर धारण किए थे। उनका शरीर श्याम घने, बादल की तरह उनके बिखरे, बाल, बड़े, बड़े तथा उनका मुकुट और कुंडल असाधारण तौर पर चमकते। वे दुर्ग मणि के थे, वे करधनी, बाजुबंद तथा अन्य आभूषणों से अलंकृत होने के कारण अत्यंत अद्भुत लग रहे थे।
ओ bose srekisnajeमै हाय कृष्णा। तो यहाँ भगवान के जन्म के विषय में और भगवान क्या है? पर भगवान है। भगवान शब्द उनके लिए उपयोग होता है की जिसके 6 प्रकार के गुणों से मास है, सुनाई पड़ रहा है। हे इसमें 6 प्रकार के गुणों से मासमहैऐश्वरसेसमागह जो कि सबसे बलवान हो, सबसे खुबसूरत हो, सबसे सबसे ज्यादा ज्ञानी हो, त्यागी हो भी हो और सबसे ज्यादा धनी हो ये 6 गुण जो कि पारस मुरी ने कहा है भगवान होने असीमसमेकेवतपरभगवान में प्रात से है। आजकल हम किसी सुधार व्यक्ति कोई चमत्कार करता है तो भगवान बुलाते हैं भगवान का दुरपयोग सो भगवान कृष्ण भगवान से भगवत गीता में अनेक श्लोक हैं। भगवान स्थापित करते हैं कि उनका पकटपकटहोनादोनोही दिव्यम है। दीव भौतिक गुणों के पार कहते हैं में जन्मा, करमा में जन्मा भगवान कहते है और प्रगट होना क्या है जीव जो व्यक्ति यह समझ आये, भगवान का प्रकट होना, प्रगट होना, दिव्यम है। वो व्यक्ति क्या लाभ होता है बंधन से। दूसरे शब्दों में भगवान प्रकट होते हैं, वे प्रकट करते हैं और उन्हें समझने के लिए हमें पवित्र नेत्र चाहिए या भगवान की अलभूवीलाकोसमस। भगवान में अनेक गुण हैं। समित में भी कहते हैं बना दिय रूप पुराना पुरुष के गुण में गुनी है का यह असिंदियाहैकोई आंसर नही है। और वो अपने आप को शेर और पुरुष के रूप में प्रकट हुए भगवान के रूप में मछली में प्रगट हुए। भगवान के लिए कोई कार्य, किसी से किसी और अंग का कार्य कर लेते हैं। जैसे की आप हो, गाते है, भगवान को आप कैसे हो? ये भोग भगवान के लिए है। भगवान ने खा लिया, हम प्लेट को उठाते हैं। थोड़ी देर के बाद वे भगवान ने खा मलिक दृषीसेतोआपका प्लेट। अब कैसे कहते हैं कि भगवान ने खा लिया और भगवान के अनेक रूप में क्या है। और न गीता में क्या करे दादा प्रकट होता हूँ अलग अलग में, अलग अलग में में प्रकट होता हूँ। और किस ने पान प्रकट होते हैं अनेक प्रकड किसलिए इस पुसिषलोकमेंभगवान क्या कह रहे हैं किसलिए पकड़ होता हूँ किसलिए धरम की स्थापना के लिए की सथापना के लिए भगवान जैसे ने क्या किया? महाराज साबित किया भगवान धर्म की सामना के लिए प्रकट होते हैं, धर्म का सामना करते हैं हम भक्तों के द्वारा। कृष्ण भगवान कौन है? भगवान है। हमें ये नहीं सोचना चाहिए। भगवान समान है। संभावाएं 1 समान नहीं है। ईश्वर परम कृष्ण ने ईश्वर है
में
सबसे पुसिस कौन है? स भगवान? ये सारे शास्त्रों का निर्णय है। क्या कि भगवान कौन है? पर हम भगवान और भगवान या प्रकट होते हैं। अलबूतलाकतेहै वो हमें कहने लगा तुम इस वन वाले का के कहते हो? केवल कृष्ण ही सुप्रीम है और बागी देवता है। हम सब भगवान हैं। मैंने कहा, अगर आप अपने को भगवान बुलाना चाहते हो तो यह दिव्य लीला। पकड़ लिए गोदान पर बस को उठाया था, वह हाल की चोटी के बल पर आप उठा सकते हो। कहने लगा, आज नहीं, पर कल सम्भव हो? जता है। तो ये ढोंगी भगवान है। भगवान शासन के आधार पर, भक्ता कृष्ण भगवान की फिल्म को जमा करना सो भगवान कृष्ण प्रकट होते हैं। इसलिए साधना के लिए, जैसे की भगवान हुए, माँ के रूप में, भगवान के प्रकट हुए थे। भगवान राम के रूप में। वो भी भगवान के स्वयम भगवान है। भगवान पर से हैं की स्थापना के लिए। और जब हम की चर्चा करते हैं, तो फिर उसका परम भगवान का बना। भगवान या पकड़ होते हैं। परी भक्तों के साथ पकड़ होते हैं कि वासु देव देव के, देव की, भगवान के माता पिता से, और भगवान के माता पिता कैसे बनते हैं? वाषदेवकेउनकीबड़ी गहरी भावना थी भगवान को अपने पुस्तक रूप में। यही वाषदेवक हे भगवान के माँ बाप से और परिशिपिभगवानके परेशनी के रूप में पृषिकेरूमें, फिर यह प्रकट हुए जीती। यही वे प्रकट हुए हैं। वासुदेव और देवकी के माता पिता थे, और उन्होंने ये भगवान को पुस्तक के रूप में कैसे प्राप्त? देवी 1 ही इच्छा थी की हमें परम भगवान पुस्तक के रूप में प्राप्त हो, और भगवान उनकी इच्छा को पूरा किया। वकील ने कितने समय के लिए समस्या की? 12 हजार के युग के द्वारा इस प्रिथ्वी में और दूसरे लोगों में अंतर है। हमारा 6 महिना उनका घंटे के बराबर है। 10 के 12 हजार सालों के लिए कुछ नहीं खाया। आप 1 दिन निर्जल रखते हो, न ट्रेल साउल सेलेस्टी र्स के लिए तपस्या की लगातार सोच रहे थे। भगवान भगवान हो और खाने किसी पत्ते की पेड़ से गिरते थे, जो पेड़ से गिरते थे। ये थी उनकी खुराक बाजार देवताओंके वर्षों के लिए, और हवा हवा सी साजी देवताओं के वर्षों के लिए के लिए दिन रात चिंतन किया। इसलिए, भगवान प्रार्थ सो। अगर हम अहारमिकमार्ग में चढ़कर सफलता चाहते हैं, तो क्या आवश्यक है? तपस्या तपस्या का अर्ससंषेमें उन चीजों को त्यागना योगी भक्ति के लिए प्रतिकूल है, और उनको स्वीकार करना अनुकूल है। और आजकल अनेक धर्म के प्रचारक हैं और धर्म तपस्या सब का ज्यादा उपयोग नहीं करते, वो डर रहता है। भाई सा है तपस्या बोलेंगे चर्चा करेंगे तो कोई आयेगा नहीं। देवकी के उदाहरण से हम देख सकते हैं की तपस्या के लिए भी तो पर प्रकट होते हैं भक्तों के खाना में, और उनके भाई और रिश्तेदार वो भी प्रकट होते हैं उनके बड़े भाई बाला राम। बलराम जी को दाऊजी बुलाया जाता है जी का मतलब है बड़े भगवान और बाला राम के मन में 1 ही भाव रहता है क्या की भगवान की सेवा और हुए थे किस रूप में लक्ष्मण के रूप में भगवान के साथ आती है। उनके मन में सदा 1 ही बार रहता है भगवान के राम की सेवा करू पाशसे। अश्वन के मन में 1 ही भाव मन की सेवा और हम देखते हैं भगवान का विवाह हुआ था शीशा के साथ, तो शीशा इसी भगवान के महल में वो दुखी हो गई। उसने देखा की उसके लिए कोई सेवा ही नहीं है, जो भी सेवा करने जाती है। तो कवर पैले? चचा ने कहा मुझे कोई मेरी तो कोई सेवा नहीं है, सेवा में करने जाती। हूँ ने कहा यह बड़ा कठिन सीती है, सीता के पक्ष में, बोलूंगा सीधा दुखी हो जाएगी। चलो गुरुजी के बाद दे अपनी समस्या। लक्ष्य ने कहा 1 ही भाव था क्या सेवा? गुरु जी ने दिया क्या कहा गुरूजी ने घर की सेवाएं हैं, महल की सी का जो है वो लक्ष्मण रहेगा, ये उसकी तैयारी करना लक्ष्मण, इससे कोई नहीं। पर भगवान प्रकट हुए थे। बाल राम, राम लक्ष्मण ने कहा मैं भी छोटा भाई नहीं बना, छोटा भाई हर कार्य करना पड़ता है। बड़े भाई के रूप में प्रकट होना जाता। प्रकट हुए बाल बाल राम पर प्रकट हुए भगवान ने सेना के रूप में। तो भगवान जब प्रकट होते हैं, सनातन सासी उनके साथ प्रखंड होते है। और बाल राम भगवान के बड़े भाई थे उनके मन में। क्या था सरदार कृष्ण की सेवा और कृष्ण की सेवा और कोई इच्छा नहीं थी। तो परम भगवान प्रकट होते हैं अपने रूप में। तुमारी को कम से कम सब सूर भाव का और देवी देवकी के भाई से कम। तो बहुत जाल, बहुत बढ़ी 400 हाथी से सोने के साथ हैं। तो कब्ज का भाई था उसने, मेरी बहन का विवाह हुआ है। न को अपने नए घर में छोड़ कर आऊँगा रस में जा रहे थे। और पार जब पहली रात को ही शादी के परचार जा रहे थे, तो रास्ते में 1 कम तुम मूर्ख हो, अपनी बहन को छोड़ रे हो, नए घर में छोड़ने जा रहे हो और बहन के आठवे पुसे द्वारा मारा होगा। सूर ने ये सुना वानी में वानी में पूरा विश्वास कर लिया। देखा ये बड़ा भयंकर संदेश है। इस बैन जिसको मैं जा रहा हूँ, नए घर में, करेगा तो तो अच्छा है। वदकरदू ने काली के मैं पाना चाहता हूँ। वो समझ गए, समझ गये उसकी लाज के द्वारा। मेरा जो सुर भाव के व्यक्ति होते हैं, वो कुछ भी करने को तैयार है अपने इस बात के लिए की मृत्य है जैसे की आज के बाजार में देखते हो, पीछे सुनाई दे रहा
है,
समझ आ रहा है, नहीं तो जरूर में से सर को ये विश्वास दिलाया। तो मेरी बहन को मत मारो खर्चा तो तुम्हे किसी से तो कोई चिंता की बात नहीं है। तुम्हारा बच्चा पैदा होगा आप मुझे दिखा ना ले जाओगे। बेटे को वापस घर जो देवकी बड़ी खुश हुई की मुझे मारने का सोचा को कह दिया बेटे को घर ले जाओ। पर फिर जोर मंसीमसके नहीं हम जो हो गए हैं हमें कौन है बच्चा स्किल द्वारा उनके जीवन को खतरा हो तो हमें तो सब बच्चों को मार देना चाहिए। सो कम्स की सुरक्षा के लिए उन्होंने क्या किया? बच्चों को मारना शुरू किया तो काम जो है सुर भाव था भगवान प्रकट हुए कैसे से भगवान उनसे पहले गे भाई बलराम प्रकट हो गए थे भगवान प्रकट हुए और कम से कम मद हो गया था। पर भगवान जो हैं वो क्या मेरे कोई के सम्भव नहीं आप। भागवत के 10 स्कंमेंपढतेहो भगवान की लीलाओं के विषय में सो। कई बार हम देखते हैं जो व्यक्ति भगवान कृष्ण लीलाओं का वर्णन करते हैं सीधा वो पहुंचते हैं कहा रास लीला के ऊपर जो राशि लीला है भगवान की, वहीं अदभूत है, दिव्य है और जो गोपियां हैं भगवान की सीरिया नहीं थी, गर्लफ्रेंड नहीं थी ऐसी औरतें जिन्होंने हजारों सालों के लिए तपस्या की थी संगरप्रापरनेकेलि गोपाल थी बड़े ऊँचे कोसी को 24 घंटे उनके मन में है या कृष्ण की सेवा तो कम बुद्धि के व्यक्ति, यह समझने बात है वो सोचते हैं जो भगवान की हमारे आनंद के लिए है। जिस भगवान लड़कियों के साथ नाच रहे हैं तो हमें भी लड़के घूमना चाह तो वो भगवान के दिव्य लीला का निरुपयोग करते हैं ब्याज दे हमें श्रीमद दम का ज्ञान दिया जी ने अनेक सासों की रचना की थी भी वो संतोष नहीं थे। और पहुँचे अपने गुरु मोदी ने क्या कहा तुमने भक्ति पर केवल बल दे दिया की स्थापना की है उसमें और वहाँ के गवर्नर तो है पर मन इत्यादी का भी वर्णन है। शुधभकतिकाउपदेश 2 क्योकि उन्होंने दिया की तो 10 वर्ष के है में भगवान की अलभूतलीलाओं का वर्णन होता है और हमे पढ़ते हैं भगवान की बाल लीला बाल लीला के द्वारा आप हो भगवान के जिला है। अलभुतहैऔर इस नियम का वर्णन के पश्चात पे जा के व्याज से भगवान की सिविल वर्णन करते हैं तो हमें धन को पढना है। तो पसमसकंदऐसीपढ़ना चाहिए। तो इसके द्वारा जब आप पहुँचोगे आपके मन में कोई शंका नहीं होगी। भगवान कौन है पर भगवान प्रकट होते हैं और दिव्य लीला करते हैं
हैं
हैं। जैसे की भगवान ने पूजा पूजना भगवान गोकुल में से लोग आश्चर्य हो गए थे। भगवान ने अपनी किया कम है क्या मेरी मृत्यु हो जाएगी। आठवे उसके द्वारा और प्रकट हुए प्रकट हुए अपने दबे रूप में माता पिता ने कहा दबे रूप क्या कहा गया? आपने भी देखा हाथके बच्चे को जन्म देते हुए इतिहास में देखा है बच्चा माँ के गर्भ से निकलता है
और
उनकी छाती में क्या था शी व और उनके पास से सजा व किसके साथ में धुरिया मनी के साथ। ये जो बधूरामानीहै कोई साधारण जूलरी स्टोर में नहीं खरीद सकते। ये जो बदुरिया मानी है हर पल बदलता जा रहा है। अभी लाल पी रंग है, विंडो में पीला हो जायेगा, विंडो में लाल हो जाएगा, में में ब्लू हो जायेगा। बदल दे जाता है और कैसे है ये जो मन है आप प्राप्त कर सकते हैं। लोक में जाओगे तो मनी आपको भी प्राप्त हो सकता है। भगवान प्राप्त प्रगट हुए रूप में क्या कारण है? क्योंकि उनके अनेक पतों का वध हो गया था। किसके द्वारा कारण भगवान अपने माँ बाप को यकीन दिलाना चाहते थे। मैं प्रकट हो गया हूँ डोंट वरी बद हो गया था। भगवान प्रकट हुए अपने जीव रूप में और देवी कैजमेथेहेनमे कैदी थे। 1 समय हम किसी को पुचार करने थे जो जेल का सा हो गया। हम भगवान के मामा जेल में थे, हम भी जेल में काम करते हैं, वो उनको वो कैदी बना दिया था। तो वासदेव ने देखा की भगवान अब प्रकट हो चुके हैं, भगवान को देखा रूप में, तो उन्होंने क्या कहा उन्होंने सोचा बेटा जनम दिया है मुझे ध्यान करने। 2 ने अपने मने मन में 10 हजार गायों का दान किया किसे ब्रामणों को गाय के 10 मन में समर्पण कर दिया कैसे? तो शुर ब्राहमण का समाज में होना बहुत आवश्यक है। साथ में कहा जाता है वरना समाज का विभाजन होना चाहिए। 4 वर्ण और 4 और 4 सो ब्रा समाज में होना बहुत आवश्यक है। ब्राह्मण उसे कहते हैं निष्काम भाव से भगवान की सेवा में जुड़ता है। भगवान राम का राज्य था तो उन्होंने ब्रा को ला कर अनेक भेज दी है। न पूछा कितनी जमीन आपको चाहिए। ब्राह्मण ने कहा उतना जितना की आवश्यक हो। उससे ज्यादा और ब्राहमण जो थे उनको मिले थे उन्होंने सारे गहने लुटा दिए। भगवान ने कहा हम आपके चरण कमलो का स्मरण करने से तुझे बामन हैं। उनके बाद ध्यान में ज्ञान होता है का उद्देश्य आगे देते हैं के गुणों का वर्णन किया जाता है। 10 हजार गाय दान में दे दी। अगर आप कभी ऐसी स्थिति में हो कि आप शरीर के द्वारा सेव नहीं कर सकते तो मन में कर सके गा में 1 उदाहरण देते हैं में 1 बहुत गरीब ब्राहमण राम जो हैं वो हर स्थिति में संतोष रहते हैं सुख हो या लोग तो वो बहुत गरीब था। वो कथा में से 1 कथा ले गया था जिसमें कथाकार ने कहा कि अगर आप ऐसी स्थिति में हो या फिर वाला सेवा नहीं कर सकते तो मन द्वारा कर सकते है। मन ने मन मन में 1 सुन्दर मंदिर बना लिया और सुन्दर मूर्तियों की स्थापना की और बड़े नियम के अनुसार दिन में 7 बार आरती करता था और खुद अनेक पवित्र नदियों में पहुँच कर से जलता था। वाह के अभिषेक के लिए जैसे कृष्ण है उनको वन के अभिषेक होती है। अभिषेक अभिषेक नतीजा है वो प्राप्त करते है ना मेंट के रूप में रूप में, जल में वो है जिसे हमने भगवान को तो रोज भगवान का अभिषेक करता था और भगवान का भोजन भी अकेले बनाता था कई सालों तक किस प्रकार भगवान की सेवा करता गया मन मन में है उसका अंदर सा भगवान इतने प्रसन्न हो गए थे रामन की सेवा के द्वारा भगवान 1 दिन क्या हुआ वो देखना चाहता था कि जो खीर बनी है भगवान के लिए ये घर है या उसने अपनी ऊँगली को
दाना
प्याले में उसका जो जल गई
में
कैसे संभव है वो भगवान इतने पसंद से लीला को देख रहे थे और ब हमने अपने गले को देखा की ऊंगली जल गई है के साथ ने अपना हवाई हवाई भेजा जा में लाने के लिए तो मन भी आप सेवा कर सकते हो ये नहीं की आप कहोगे से अगर आप ऐसी स्थिति में हो ऐसे वाले थे वो जेल का है अगर आप ऐसी स्थिति में हो आप से सेवा नहीं कर सकते कैसे होगा? तो भगवान जो हैं वो तो इस भगवान की आने के लिए लाये हैं तो इन हिला क्या दे कैसे भूत है। जैसे 1 छोटे बच्चे ने पुतना का वध कर दिया तो बिल्कुल पुतना राक्षस राक्षस जो थी उसने अनेक बच्चों का गायक की मिट्टी हो गयी थी बिल्कुल स्कूल थी सुन सब बल किया जाए और जो राजा थे वो राजा थे इस देवी का बेटा आगे है वो मना नहीं है उसने स्कूलों को भेजा के बाद 1 करने के लिए पूजा पूजा ने अपने आप को औरत के रूप में सब सब खुश थे और सब और ने सोचा ये तो बड़ी रिस्पेक्टेबल दिखती है क्या क्या थे यह क्यों आ रही है? और क्या हुआ कि जीवन समाप्त हो गया तो जो बजा वो समझ नहीं पा रहे थे ये छोटा बालक है कृष्णा मेंबर का रखती है। 1 सा चार्ट उसको ने हाथ लगाया ऊपर से नीचे हमने कैसे आया और तुम्हे बच्चे ने काम पर मारा नीचे आ गया वो इतना मदर सोचने लगे यह कैसे संभव है। ये छोटा सा बच्चा 3 महीने 5 महीने का नीचे आ गया सोचते थे अब क्या किया जा है लगता है ये जो बालक हैं यह कोई खास बालक है साधारण बालक नहीं है क्या खास बालक है इसलिए छोटे बच्चे के द्वारा उसका भी वध हो गया सोचने लगे जो बाला कृष्णा है उसमें कोई दिव्य शक्ति है, देवी शक्ति है क्या देवी शक्ति है या नहीं? गाँव वाले हो तो भगवान पर करते हैं को केवल भगवान कर सकते हैं वो कोई देवता देवी नहीं। इसी प्रकार जो बृजवासी थे भगवान की लीला को देखकर लेकर आश्चर्य हो रे थे। 1 समय भगवान खेल से अपने मिस्र के साथ सो बालाराम उनके मिस्र हार गए हमारे किसान तो उन्होंने शिकायत लगाई की आपका बेटा जो है मिट्टी खाता है माँ बड़ी घबरा गई मेरे में की कमी है क्या न राज के पास क्या सम्बधी 9 लाख, गायें थी कितने 9 लाख और इन गायों के दूध में 20 गाय थी, उनमें उनका दू ता था, सुगन्धित होता था। आजकल अगर आप फ्लेवर आ सकते हो। राज्य के समय 20 गायों के खास नाम था और खास और इन गायों के द्वारा सुकनेधूभीआताथा सो भगवान के ये हैं
है
के बाद 9009 लाख गाय दी मेरे घर में क्या किसी प्रकार की कमी है। मेरे पाती के 9 लाख गायें हैं। तुम जाकर मिटटी क्यू का आज में विश्वास नहीं है की मैं मिट्टी नहीं खाई, मैं मुँह खोल कर लिखा, आपको माता ने ठीक है दिखाओ जब मुंह खोला मुँह में क्या देखा, माता ने पूरे ब्रह्मण का दर्शन पूरे और किस प्रकार जो व्यक्ति हैं, कष्ट अनुभव करते हैं। और जब उन्होंने बेटे के मुह में अनेक प्रकार के का दर्शन किया और क्या सोचने रही? मैं कोई सपना तो नहीं देख रही, कोई सपना नहीं देख क मुह के बेटे मुह में दर्शन तो आप अगर डॉक्टर को हो। मुह खोलते अपना आपको के दर्शन प्रात होता है। भगवान जो हैं जन्म कर्म शामिल होना बिल्कुल दिव्य है, भगवान के जिला है उन्हें भगवान के अनेक प्रापा बहुत इच्छा थी कृष्णा उन्होंने प्रस्तुत किया है जिसमें प्रकाशित किया है भगवान के लीला का वर्णन है इसकी। इसकी जल्दी प्रकार किया जाए तो प्रभा जी ने अपने भक्तों को भेजा था इंग्लैंड में प्रचार लंदन में और उनका परिचय हो गया। 1 बीटल्स के साथ बीटल का नाम सुना है। 1 समय सड़क के समान पूजा करते तो बाजी को मिलने आये थे श्याम न्यूयॉर्क में उन्होंने कहा कि आप बहुत अच्छा भक्त बन गया है। रोज हर दे परिजन भगवान की लीलाओं को प्रकाशित किया जाए, वही धूम धाम से जॉर्ज को printing jorge new to body हो मिस न स। now no boy was set marta, ants, you book a very levis और यूनि का सार रूप में प्रस्तुत किया है। कृष्णा बोग द्वारा। कृष्णा बोग हमें बड़े ध्यान से पढ़ना चाहिए, भगवान की लीला है। 1 बड़ी मधुर लीला है हम भगवान की माता के साथ सदा माता हम बड़े ध्यान से। 1 दिन भगवान के लिए दूध बना रही थी और सो थे मजा अपने मन में क्या सोच रही थी मेरा जो बेटा है उसे लोग कहते है लोगो के घरो में जाकर क्या दू चुराता है, नहीं चुराता है, चुराता है मेरे घर में क्या किसी चीज की कमी है और शायद मेरा बेटा में पड़ोसियों के मकान से ज्यादा खुश है। बड़े ध्यान से स दूध की तैयारी कर रही थी और यही सोच रही थी बेटा लीला में क्या करते हैं, भगवान की गोपिया करती थी तुम्हारा बेटा हमारे घर में आकर मन चुरा भगवान का नेक नाम है इनमें 1 नाम क्या है माखन चोर आपको चोर बुलाया जाए आपको आपको अच्छा नहीं लगेगा, आपके नाम के साथ जोड़ दे और भगवान को हम मन जोर बुलाते हैं और इसमें कोई अपमान नहीं है भगवान को बुलाते हैं गोपियों के घर में जाकर मन चुराते थे तो भगवान की है। 1 समय भगवान जो है गान मिस्र के साथ रोज की, गोपी के घर में गए। सारा की ये गोपी रोज इस समय या नदी के किनारे जाती है और भगवान परोसी बेटे के साथ मिलकर उनके घर चला रहे थे। और ये जो गोपी है जल्दी घर लौट गए। पकड़े को पीने का तुम्हारी माँ, हमेशा कहती है कि तुम लोग मेरे बेटे को जोर दे रहे हो, प्रमाण है आपके पास ए प्रूव उन दिन में कैमरा नहीं थे? तो गोपी ने पकड़ लिया अपने हाथ से, तुम्हारी माँ हमेशा के लिए प्रमाण कहाँ है? और मैंने तुम्हे पकड़ा है, चलो वह माँ को मान लेना चाहती हूँ। वो तो गोपी भगवान को पकड़कर जा रही थी सो मजा को मिलने के लिए और उनके साथ गोपी बैठा वो भी था भगवान जी से अपने हाथ को उठा निकाल लिया, बेटे को या में पहुंची गोपी तुम कहते हो तुम्हारे बेटे का कोई प्रमाण नहीं है। यह देखो मान तुम्हारा बेटा मेरा बेटा हुआ है। भगवान मन चुराते थे और कोई पकड़ नहीं पाया। 1 समय हमारे इस कान के केंद्र में देश में खोला था, पहले तो परउसके ऐसे में उन्होंने देखा की उनके बगीचे से फूल रोज गुम जाते हैं, और ये समझा गुम कैसे रोते देखा आते है और फूल चुराकर ले जाते हैं। तो उन्होंने शिकायत की तो पापाजी ये सूचना मिली की उनके पड़ोस के घरों में जाकर फूल कर चुराते हैं, भगवान को भोग लगा रही है। पापा ने कहा गोटकॉटोसी चोरी करना तो कृष्णा जैसे रहो कोई तुम्हें पकड़ नहीं पाये नहीं कर सकते। तो चोरी मत करो सर। दूसरे शब्दों में थे चोरी मत करो भगवान की, भगवान की अनेक लीला में गोधन पूजा की बड़ी प्रसि। भगवान के माता पिता इन जग की तैयारी कर रहे थे, भा के पिता से किसान और किसान सब प्राथना करे थे, ये प्राथना कर रहे थे कि हमें वर्षा प्राप्त हो, वर्षा के बिना कोई जी सकता हे। जैसे भगवान की समय कहते हैं न की प्राप्ति होती है, वर्षा के कारण वर्षा की प्राप्ति होती है और धर्म के नियमों का पालन करो। आजकल आप क्या देखते हो ये देखते हो की कोई यज्ञ तो कोई करता नहीं, इसलिए बारिश कभी कभी टाइम पर आती है, कभी ज्यादा हो जाता है, आ जाती है और कभी कभी केवल सूखा रहता है। ये है क्यूंकि? पृथ्वी पाप का बोला बहुत बढ़ गया है। तो भगवान को दूसरे किसानों को ये विश्वास नहीं लाया की ये जो है कर्मों के कारण हो रहा है। लोग इंद्र की की सेवा क्यों कर रहे हैं। वे बताना चाहते थे की देवता की पूजा में, परवान की पूजा में आंसर है। तो इंद्र ने जब देखा की इस छोटे बादल के कारण, इन्द्र ने छोटे वाले कारण उन्होंने रोक दिया था, उन्होंने के साथ बारिश के मजा का बादल ऐसे हैं, वो हिलते हैं, तो वे जोर से आवाज आ रही है। ठंडे बादल भेजे मगर ये उद्देश्य किया की डूब जाए क्रिमनल भाव। भगवान ने देखा तेजी से बाइक बरसने लगे बृजवासी थे, घबरा गए। उन्होंने कहा कि अब हमें बड़ी कठस्ितीमेंदलरहे भगवान समझ गए कि जो भक्त हैं उन्हें राज है। गोल पर्वत आप सब ने गोलन प्रबंध का दर्शन किया तो गोल्डन प्रबध आज जो है वो छोटा है। तो भगवान किसी से गोदान की ऊँचाई बदल तक थी। बदल तक भगवान ने गोदान पर्वत को उठाया बायें हाथ के कौन सी उंगली से छोटी उंगली के नाखून के बल पर अभी ये लीला कोई सुधार न व्यक्ति कर सकता है, कोई देवता कर सकता है। और 7 दिन के लिए भिजवादी थे, लाइन पर्वत के छत के नीचे थे और वो क्या कर रहे थे, गान के चेहरे पर ध्यान से देख रहे थे। वह वहाँ के चेहरे पर ध्यान से देख रहे थे, जिसके कारण उन्हें न भूख लगी, न प्यास लगे, देखा की उनकी योजना सफल नहीं हुई। क्या किया बंदर ने वहाँ से माफ़ी मांगी और द्वारा उनका गुणगान किया। पर भगवान श्री कृष्ण जो है वो करते हैं उनकी तुलना कोई कर नहीं सकता। तो आज आज गोदान पहले की तुलना में बहुत छोटा था। तो वह देने के लिए। तो अगर आप भगवान की जिला में लीन हो जाओगे तो आपको भी भूख नहीं लगेगी और प्यास नहीं लगेगी। इसमें हम भूखे भी हैं, प्यार से भी है भूखे किस लिए? किस लिए? इन चिली के लिए हमें हम सोचते हैं कि भौतिक कार्यों के द्वारा सुखाएगा सुखायेगा ऐसी शुल्क क्या है कि हमें भगवान कृष्ण के होना चाहिए। भागवत में आप देखते हो कि स्वामी को ज्ञान दे रहे थे। जब वो 10 वे स्कैन पर पहुँचे तो परेश ने कहा, मैं 7 दिन अपनी तैयारी कर रहा हूँ और 7 दिन ना, मैंने कुछ खाया है या पर मुझे इतना आनंद आ रहा है, वहाँ के नेताओं को सुन कर। मुझे भूख भी नहीं लग रही। और para o, if you take set you will free ourself rom mail and free yourself from the sicos, my bag gita। मे भगवान की, भगवान का सन्देश है में भगवान क्या कहते हैं? कौन सा है वो पसशलोकवसमीकतेहैं लोक का अर्थ है क्या मैं। इस समर्पण करके कृष्ण, भगवान और सर्व धराओं का मतलब है भगवान कृष्ण के हो। और तो आज क्या भाव रखना चाहिए? क्या भाव रखना चाहिए? भगवान के हो सके सौ प्रतिशत हंड्रेड persent with a body in an इंटेलिजेंस user the lord that is real। सomrpnntisossav वी शुड परेटो यहाँ भक्ति में आकर्षन बढे और हम भक्ति में ज्यादा रूचि रेट, जन सनी का असली लाभ उठा रहे हो। आज शुभ दिन है, न हुए थे। भगवान प्रगट होते हैं या स्थापना के दौर भगवान होते हैं। इस रूप से अपने नाम के नाम है। भगवान से मिल नहीं, अभिन है। का उचा जी में नाचते हैं। बॉलीवाल व्यक्ति कैसे हैं? 1 नाम का नहीं। आप सके हो कभी हरिनाम करके सच बोलिए नाम के द्वारा। आपको लगता है। कोई आनंद नहीं। बुरी कैसे हैं। नाम के उचारण का 1 लाभ है। जो आनंद है वो क्या बढ़ते जाएगा। बढ़ते जाएगा, फुल फेड इन स्पेशल पोटेंसी द होली नाम होली ने उसका क्या लाभ है? हम सब आनंद की खोज में हैं। असली खोज, असली आन, असली आना। चाहे तो क्या करना, क्या उपाय पॉधिकाकशनजितना घटेगा उतना धार बढ़ेगा सो लो शख्ती send your body minins ot करते हो, कैसे है जमीन उपस्थित हो, भगवान के भक्त हो, आपके पास होनी चाहिए। और गहराई के साथ भगवान के चरण कम हो गई। श्री कृष्णा जनवसमीसबकीा आप सबको पीछे सुनाई दे रहा था, कोई क्वेश्चन
क्वेश्चन है
किसी का तो आप पूछ सकते हैं।
hendrasrohरीकरृषna गुरु p्rणामथैंकयू for the वेंडरफुल लेक्टर गिविंग सयो बैuटिफुल एसोसिएशन गुरु महाराज मेरा प्रश्न था कि जैसे भगवत गीता के फोर्ट चैप्टर की नाइन टेक्स्ट में कहा गया है जन्म कर्म च मे हो बेटी तत्व, तत्व एवं पुन नेती मामेति। तो भगवान कहते है की उनके आवभाव जन्म को समझने के बाद हम इस मतलब, हमें दुबारा से न, शरीर त्यागने के बाद हम वापस नहीं आयेंगे। लेकिन जब हम उनकी लीलाओं को पढ़ते हैं तो उनमें बहुत ऐसी जैसे रास लीला भी आती है, और भी बहुत सारी लिया था। तो उन्हें समझना भौतिक दराज तल से थोड़ा मुश्किल है क्योंकि हम भौतिक जीव तो उनकी आध्यात्मिक चीजों को कैसे समझ पाएंगे
भगवान को समझना चाहते हैं माँ के नाम हो गए उच्चारन के द्वारा हो आपके दूर होते जाइए और फिर भगवान की दिविलिलाको समझ सकते हो। बहुत ही गिंदियोसीआपभगवान की जिला को नहीं समझ सकते। जैसे आप है की समीर देखो आधे पुरुष आले अंडरसा। इसके लिए कई लोग कहते हैं meniximitoogलोजी
मतलब
इमेजिनेशन, क्योंकि वह भक्ति के माध्यम से
हरे कृष्ण महाराज जी 2 महाराज
जी क्वेश्चन यह है कि महाराज आपने
कहा था न की जो मन से सेवा करते हैं आपने एग्जामपल दिया था। हा भक्तीयासामिर सिन्धु तो महाराज जी उसका कोई क्वालिफिकेशन होता है क्या कि मतलब कोई पर्टिकुलर कर सकता है,
भगवान गीता देते हैं, सबके लिए देते है। तो अगर आप मन वाला भगवान के इच्छा ध्यान करो या कोई तो आप भी
महाराज जैसे हर कोई कर सकता है। मतलब अगर भगवान चैटिंग करता है
सबके लिए
है।
मूल्य पूछिए
हरे कृष्ण प्रभु जी, राधे राधे मैं आपसे ये सवाल पूछना चाहता हूँ की जैसे सड़क पे जैसे बच्चे भी मांगते हैं छोटे छोटे बहुत छोटे छोटे ठीक है और जो हॉस्पिटल में 22 साल के बच्चे होते हैं और उनके माँ बाप बोलते हैं। यह लोग बाग बोलते हैं कि नाइनटी परसेंट लोग यह कर्म की वजह से हुआ है तो ये सत्य है या फिर लोग बना के बोलते हैं और सत्य है कि कर्म की वजह से होता है। तो फिर ये अगर कोई टीचर होमवर्क। अगर कोई स्टूडेंट स्कूल में होमवर्क करके नहीं आता तो उसे स्टूडेंट को पता होता कि उसे मार इसलिए पड़ रही है कि होम करके नहीं आया। तो फिर तो फिर प्रभु जी उस बच्चे को भी पता होना चाहिए कि वो उसे किस बात की मार पड़ रही है। अगर ये कर्म की वजह से होता है तो उसे क्यों नहीं पता क्या
होगा
जो छोटे बच्चे होते है। ओके
शॉट समय सर ये है कि हम सब का, हम सबको सुख जुका कोटा मिलता है। कर्मो के आधार पर हर व्यक्ति भारत में बिना टाटा क्यों नहीं बनता। इतिहास हम सुख जु वो भूलते हैं। यह सब हमारे कर्मों के आधार पर जैसा करोगे, वैसा भरोगे। और कोई बच्चा मान, लो, गरीब, खाना का है तो उसका भी कारण है। और हमें भूलना नहीं चाहिए। ये कर्मों के आधार पर हमें सुख, मिलेगा और दुख मिलेगा। भगवान को लोक से नहीं, आवश्यकता नहीं, हम से है। मुझे यह कष्ट युग मुगलनापड़ासीूसो भुगना पड़ता है। भगवान घटा दे ते हैं, डिस्काउंट कर देते। पर यह इसलिए है प्रथ्वी को क्या कहा जाता है? 1 ओके थैंक यू हरे कृष्ण प्रभु जी, सास्टांग प्रणाम और मेरा सवाल यह है कि जैसे कोई यंगस्टर्स भक्ति करते हुए कम उम्र में अपनी देह को
त्याग कर देता है, तो क्या उसे गौलोक धाम की प्राप्ति हो सकेगी?
ऐसे बोलिए प्रभु जी जैसे कोई यंगस्टर्स कम उम्र में भक्ति करते हुए अपने
देह को त्याग देता है तो क्या उसे गौलोक धाम की प्राप्ति हो सकेगी?
इतिहास पर सवाल किये हाई
हरे कृष्णा
तो 1 बार जोरदार धन्यवाद देंगे हरे
विश्व मंत्र के द्वारा गुरु महाराज का
जोर से हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे।
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