भगवान् का संग हर क्षण कैसे करे ? || SB 10.80.03 || ISKCON Mira Road || 10.08.2017

The video is a devotional discourse delivered at ISKCON Mira Road that explores how a practitioner can remain in the association of the Supreme Lord (Krishna) at every moment of daily life. Drawing on Srimad‑Bhagavatam (Canto 10, Chapter 80, Verse 3) and the Bhagavad‑Gītā, the speakers explain that divine grace is dispensed only in proportion to a devotee’s capacity, and therefore one must cultivate sincere hearing (śravaṇa) of the Lord’s pastimes and names. They discuss practical ways to integrate bhakti into ordinary activities such as office work, emphasizing constant remembrance, chanting, and service (seva). The talk also addresses common obstacles—doubt, attachment to material comforts, and misconceptions about devotion—using illustrative anecdotes and stories. The importance of sanga (association) with fellow devotees, the role of a guru, and collective service in the temple are highlighted. Throughout, the discourse intersperses Sanskrit mantras, Hindi explanations, and repetitive chanting of “Hari Krishna” to reinforce the devotional mood. The overall message is that by aligning one’s thoughts, speech, and actions with the Lord’s name and by participating in community service, a devotee can experience the Lord’s presence continuously.
Chapters
عُمْ نَمُّ بَقْدِ رَسْلِ بَعْدِ عُمْ نَمُّ بَقْدِ رَسْلِ بَعْدِ عُمْ نَمُّ بَقْدِ رَسْلِ بَعْدِ عُمْ نَمُّ بَقْدِ رَسْلِ بَعْدِ عُمْ نَمُّ بَقْدِ رَسْلِ بَعْدِ عُمْ نَمُّ بَقْدِ رَسْلِ بَعْدِ عُمْ نَمُّ بَقْدِ رَسْلِ بَعْدِ عُمْ نَمُّ بَقْدِ رَسْلِ بَعْدِ عُمْ यक्शुन निरम्येना نَمُ तस्मे स्रीप्रभिरेना पित्रि जंग्ञान भुविष्णम् आपिरंदेन भूतरे सर्वन्तु भागता निरम् यताथी सापतात्रिका ہری کریشنا ہری کریشنا ہری کریشنا ہری کریشنا کریشنا ہری کریشنا ہری کریشنا ہری کریشنا ہری کریشنا ہری کریشنا ہری کریشنا ہری کریشنا ہری کریشنا ہری کریشنا ہری کریشنا ہری کریشنا ہری کریشنا ہری کریشنا ہری کریشنا ہری کریشنا کریشنا मगदुभी दस्वास्खन के इसके सासी बात है और एक सद्धाय में स्रिदाम ब्राहन की कथां प्रावत्वती है और स्रिदाम ब्राहन से परिशित होती है सर्वास्खन के सासी बात है स्रिदाम ब्राहन की कथां प्रावत्वती है और स्रिदाम
ब्राहन की कथां प्रावत् अस्ली वानी वही है जो बगवान के गुणों का वर्णन करती हैं अस्ली हाथ वे हैं जो उनके ये एक कारी करते हैं अस्ली मन वह है जो अत्केक जड़ छेतन के भीतर दिवास करने वाले उस बगवान का सदेव स्वर्ण करता हैं और अस्ली कान वे हैं जो निरंतर उनकी प�
वास्तविक
सिर्फ वही है जो जड़ चेतन के बीच बगवान की अभिवेक्तियों का नमन करता है अस्ति आंग वे हैं जो एक वात्र बगवान का दश्वन करती हैं और अस्ति अंग वे हैं जो बगवान या उनके बगदों के चर्मों को पकड़ पतारने से प्राप्त जल का नियमिक रूप से आधर करते हैं।
पूरे देदर भाई जी पूरे देदर भाई जी पूरे देदर भाई जी पूरे देदर भाई जी पूरे देदर भाई जी पूरे देदर भाई जी पूरे देदर भाई जी पूरे देदर भाई जी पूरे देदर जन्मस्ति उळ्छों के त्यारी दो सिर्गों से की जाती हैं एक तो है भाई के त्यारी जैसे आपके मंदले पंडा लगने गा और बाती विमंद किया जाया राज्यत के दौला जानों लोग आ सके जारिशन प्राप्र लेते हैं भकतों के ने एक और त्यारी यह है कि हम यह त मारे भाव क्या होना चाहिए कि हम भवान के अधिक्षनगत होने के सादन क्या है? एक सादन है श्रवनम किर्दना ठीक है न? ये कोई पहली बारे तो आप नहीं सुनते हैं श्रवनम किर्दना मतलब कि भवान के नाम और भवान के बक्तों की मीलां में जीवची पड़ाता है तो श्रीमान भगवदों के डस्वे स्कंध में भगवान कनेक दीलां को ज्ञान प्रात हो रहा है। परे नौ स्कंधों में शुरे विष्मों में स्थापित करते हैं। पर भगवान कौन हैं। वो भक्ति की दीलां को भी वन्मन हैं। डस्वे स्कंध में भग चौत्य दियाये में भगवान क्या करते हैं जन्मा कर्मचावे देवियों मेरा प्रकट होना तुम्हें क्या है देवियों देवियों का अर्थ है इससे हम पौतिक कारे दोरा उन्हां नहीं कर सकते हैं कैसे आपने देखें कभी कोई पच्चा पेला हुए चार नातों के साथ नहीं इतिहास में जो भगवान पर पिर्पो है दिले रूम में सजी होगी थे घेलों के साथ, धीलों के साथ, चाहालों के साथ में जो माथा पिदा ने कहा जो माथा पिदा कहा रही थे वो ने कहा की आप से धारन बच्चे में रूम प्रैंस कर लो सुना थी वो ने सुखा کسی विश्व के कोने में कोई बच्चा पैड़ा हो चाहता तो सजवा बुता बच्चे जब पैड़ा होते हैं इसमें गंद्यों से किस नाना पड़ता हैं यहां बोलों पड़ते हैं विश्व के लिए और पिर बग़ान के अलगों बीना हैं छोड़े से ही से ही जब की लाख्� अग्वाल का मुध करने के लिए उनका ही मुध हो गया है और मुझे मातर ने कहा तुमने क्या मिर्टी खाये किया ते समय कि उनकी भाई ने जूटी सिक्या तगा दी थी माने ने कहा माने थाल में इतना दुल है मखन है लसी है नहीं है तुम बिट्टी क्यों खाते हैं। मुझे भगवान ने कहा नहीं ये धूरी शकैत है क्योंकि खेलते सबे भाई किसी नहां खार देते हैं। परमिश्रात भी नहीं हो तो मूँख कहके मैं दिखा लेता हूँ। मूँख कहके दिखा लेता थायते कि इसके लिए देवनाम पर दर्शन और कि इसके लिए कर्मों को पड़ी नाम हो रहे हैं। कि इसके लिए बहुत बहुत बहुत हैं। तो इस अस्ली में, अध्याही में, परेक्षिन मुना पूछा, और घ्यान नहीं जिया बहुमान की लिलाव के मुझे। यह बह बवान के हम्देश में हम्देशी लेते हैं तो बवान क्या नहीं की लाई हैं तो जो स्टोक आपको पढ़कर सनाया उसका उचारण परेक्षिन महाज कर रहे हैं परेक्षिन महाज में मुझे तो समझ की आजा वोनों ने कहा ना कि वानित और द्वान की गुलों का वानन
करना �
जीव है सब के बाद। सब के बाद। जीव नहीं है। जीवन के नामों का होता है। और मन द्वारा तुम्हार का जैसा है। आत्म द्वारा तुम्हार के सीवा। ये पहले बाद भी ये संदेश नहीं है। तो इस परकारण वड़न करने के बच्चार शिवले वज्वामी एक कथा सनायी जो की जिसका विशेदा नाम ब्राह्मन कास में नाम ब्राह्मन बहुति बिश्चित्वें गरीद थे तो जब ये जबों संतोष थे जो ब्राह्मन हैं वो हर सिति में संतोष देता है आज तो प्रामण बन चाहते हैं दो पैसा करते हैं नो करीद करते हैं तो जो अस्तिति प्रामण हैं उसमें कहीं कोल होने चाहिए हैं जिनका मनन बापड़ी का में प्राप्त होता हैं तो सदामा प्रामण का वेदिक शास्ता था भोग घेला क्यान था और हर स्कृति में प्राम आज से राम सन्तुर्ष कब रहते हैं? कब? कब सन्तुर्ष होते हैं? जब हमें मन की इच्छाएं प्रात हो, मन की इच्छाएं प्रात हो, मन की इच्छाएं प्रात हो, मन की इच्छाएं प्रात हो, मन की इच्छाएं प्रात हो, मन की इच्छाएं प्रात हो, मन की इच्छाएं उसे कठिनाई में भी लेना पड़ेगा वो संत्योस लेता है पूर्ण सुदावा ब्राह्मान बेपुल संत्योस से लेने के लिए केवल एकी कमड़ा था और पत्ती थी दिन के बाद एक लिए एकी सारी थी और कोई खास आंदल नहीं थी हाँ कहते देशे नवीना पढ़ते हो एक बात थे हैं खोड़ा भी जिन्स्पीदा जिन्दी बहुत छोटी आपना थी और उसका भी वो 50 परिशार करते थे गंग की सेवा में तो जिन्दी लाद नवान का नाम मेरे देखते थे इतना था कि बडोसी थे वो कहते थे � جسے کھانی کے لئے کچھ نہیں ملتا تو موڈ سے تانے جسے جو ساری راہ ڈھڑھے گے ڈھڑھے گے ڈھڑھے گے ڈھڑھے گے ڈھڑھے گے ڈھڑھے گے ڈھڑھے گے ڈھڑھے گے ڈھڑھے گے ڈھڑھے گے ڈھڑھے گے ڈھڑھے ڈھ� आगे गाओं मुझे मर दिना चाहते हूं। ऐसा वर दीजिए कि अनवरीश में आपकी संग रह सकते हूं। उन्होंने ये नहीं कहा। मुझे दान देते हैं कुछ। तो उसकी मुझे कर सुधामा ब्राहमन मिलको संतोष से। और वेडिक सास्वरकार बड़ा गहरा ग्य कि उनके पती काई पड़ा धानी मेंत्रा थे। कौन। मुझे पढ़ा था कि उनके पती जब चोटे थे वो अपने गुरु की आंच्छे में थे। विद्णादर संविद्णादर संविद्णादर संविद्णादर संविद्णादर संविद्णादर संविद्णाद आप जाकर अभे धनी में तुर्वतरी मिले। देवि लक्षनी का पत्ती। पत्ती की इच्छा थी कि पत्ती जाकर कृष्ण को मिलेंगे तो कुछ आधिकता प्राप्त हो जाते हैं। पर सुधान ब्राह्मन के बाद में ये भाव था। हाँ अगर वे जाओं तो कृष्ण म तो ये तरहोंता था तो पती ने पती ने कई बार कहा जाओ अपने धनी मिछलों को मिलाओ पान्त में सुनामा ने कहा ठीक है मैं चलता हूँ जिन्दिये के लिए पर धन से चलने से प्राजार उठाता था तो कोई भेट है उनकी ने खालिया जाना चलने के लिए खालिया پھلے ہی دھرموں میں ڈھونڈ ہے अप भी सاتھ पर विलओ तो पादर कोई पेट रहा थे तो जिनावा ने कहा हाँ आप मुझे कहरे हो जाकर विला उतने मित्र से मितर करे कोई प्रेज़ेट है पिर पेट है तो पत् माں था पत्ती इतनी अच्छी सेव अपनी पत्ती की कि परोज से गी मांगी थी पती वो भजन खा रही थे खुल भूखी रहती थी एसी देवी थी पत्ती ने परोज के मुकानों से चान, मुठी, चुड़ा जो दोनों ने जोड लिया है ایک کھپے میں سے پیٹھتا پتی چلے دوارکا کے اور کسے ملنے کے لئے بچپا کے محسوسوں کے لئے ملنے کے لئے کسے ملنے کے لئے بچپا کے محسوسوں کے لئے کسے ملنے محسوسوں کے کسے لئے بچپا ملنے کے لئے کسے ملنے کے لئے کسے ملنے کے لئے کسے ملنے کے لئے کسے ملنے کے لئے کسے ملنے کے لئے کسے کے لئے ملنے لئے کسے ملنے کے لئے کسے मौने सनद्गे ملنے मौते کے لئے वातर में कही वातर हो गयते हैं अब भगवान ये अवतार है तो उनसे पूछिए भगवान जब प्रकट होय थे सोरा आजाल महेनाओं में एक साथ परसेद हैं हम दो मुखानाओं में एक साथ परसेद हो सकते हैं क्या कहेंगे वाँ � तो वो स्प्यम पी तो बहुबान तो स्प्यम उपर से थे अर्मेल नाज मुरी ने इसका प्रवान दिया तो बहुबान पहुचे तो इस नावतां पहुचे बहुबान के माल में तो बहुबान बैठे वे थे रुपनी के साथ कीन द्वारों से देखा अगर आगे पढ़े जब नमान ने देखा दूर से ओ मेरे बच्पर लगने तरादा है सराभान नमान ने मुखने को छोड़कर एक नमान के बड़े किसको मैंने के ले और बड़े आदर नी साहत मिलें धले लगाकर साले योगो साथी के जो द्वार पालते हैं वो एक याली सब यहाँ हो रहे हैं अरे यहाँ भी तो भंगी जैसे लिपता है हम बहुत वाद उसको गले लगाने के लिए क्यूं? पास व्यक्ती होगा गले नहीं लगाया घर्वान ने उसे विठाया पिस्ट्रे में चर्ण धोय चर्ण में जन देखने हैं अगर सिर्फ हो रहा था या क्या बच्चपर की लिला वो बस मनन दिया है हम भी कभी किसी पढ़ाने में सो तो मिलते हो जो बच्चपर की बातों की चल्चा करते हैं कर दिया नहीं अभी तौतर बंद होते हैं इंसान होता करने का कुछ लाव देते हैं मनन नहीं होता त्यार जो मैं बच्चपर की लिला ورنہ کیا اور ورنہ نے یہ ترچہ کی کہ ہم چھوڑے سے یاد رہے ہمارے گروہ نے ہمیں بھیلا تھا بڑا کشک کاریاں نے پانے کے اور پھر سدا کا ہم جب گئے توفاں آیا تھا ہندی آ گئی تھی اور ورنہ کی گروہ نے پھونک کر اُن کا بچایا پھر سدا چاچا کی ہمارے بھگواں سے پوچھتے ہیں सिधामा तुम मेरे मेरे मिशला है और क्या? खाली आता है सिधामा लाइन की चार मोटी चुड़ा ले गया था वो ही चक्रा था ये लेले से वो ने दाना की बगवान करते बड़े महत्वित करें पर एक महत्वित आजार और महत्वित है उनको मेरे चुड़ा पे कहां से दोपा तो भवान दे, भवान समझ दे इश्वा सर्वा पुर्धाना पिर्देश्वे नर्देते हैं। भवान हर्दे के हिल्दे में बिराजमान हैं। अब भवान हमारी सारी च्छों को सबां देते हैं। बगल की तरुब भवान कहते हैं। सर्वा से चाहर विर्दी साने विश् میں نے دوارا سمند کی شکتی آتی ہے، میں نے دوارا بھولنے کی شکتی آتی ہے۔ جو گھڑی بھگوان کی شرم میں آنا چاہے، اُسے سمند کی شکتی لیتے ہیں۔ جو بھولنا چاہے، سارے دنوں سے بھولنے کی شکتی नाज पर सब बोलने के नेक मादियम लेते रहे हैं। हैं ये नहीं। सबके बास स्मार्ट पॉन से हैं चेहिए। ये एक बड़ा सब मादियम हैं। वहाँ सब बोलने जाएं। आप लेने जाओ, किले भी जाओ, बसों पर जाओ। सब स्मार्ट पॉन से के लिए लेते हैं। स� मैं نے हर देश में हमेरे गाथ के लिए नाया चाहिए चाहिए सब जब एक वाक्तना सरस्मात मौन के साथ के लिए बड़े ऐसान ही जब भगवान को पूर देते हैं और इसके लिए मौन का ऐसास है पढ़ा है कि सब लोग चुदा हो रहे हैं एकान्त में रहते हैं तो स� तो मैंने कुछ लाइना हूँ तो बहुती चक्तियों हुए स्विराहं ब्राह्मन ने वो कप्रा खोला और चूड़ा दे दिया मुटी तो चूड़ा था वो दे दिया तो मानने एक मुटी था तो जब सी मुटी खाने लगे ले और क्या आवशर दने के लिए हमारे तो एक दाने से लिए प्रसन हो जाते हैं हम जैसे पेड़ की जरण में पानी दाला तो मुझे व्रिक्ष के विद्धां पहाँ पांच रहा हैं तो आप कृष्णा की सूरीज के लावे तरह करते हैं उसके द्वाहा सत्यन सोच प्रतिजस के तो वो भगवान से बच मांगे भिला सिथावा राम से कहाने चले हर की वो जासने मुझे सोच रहे थे मुझे पत्ती ने कई बार कहा चाओ मिला उपित्धाली बिस्पस में मिला बच बड़ी चले स्पीना मुझे अस्माल किया मैंने कुछ मांगा ही नहीं कुछ मांगा ही नही ہمیں پتنے سے کیا کہوں گے؟ تو بھگوان سمجھ گئے تھے शदआमा की इच्चा जस प्रगार आपगार किसी पगीचे से जाओ तो फूल सूने से ही आपको पता जाता है कौन सा फूल है असी प्रगार भगवान जो हरे के यहते हैं विरुलाजमान है अरे की इच्छों को सूम लेते हैं। जैसे आप इदर हो आपकी इच्छाय सेवा कर लेंगे। बरुभाण में समझ आए हैं। आपको बोला भी बोले देगा जिन आपको सुच्चा लेंगे। बहुत सुच्चा लेंगे। बहुत सुच्चा लेंगे। बहुत सुच्चा लें पर भुमारे पे प्रसंद थे नामा की सिवा भावना से उन्होंने निलने कर दिया था इसको मैंने ऐसा एशवर्य देना है जिसकी तुमना देवता भी नहीं परस पाईगे सुदाम रामने अपने स्थान में लोड़े मैं उन्होंने क्या लेका? क्या लेका? इस लाइन कुटिया बहल बन गई थी बहल नहीं कुटिया के चारे तरफ और महयां बन गई थे और महल में अनेक सेवाग उपस्थ थे उनकी पत्णी संज्योगी जी गेलो के साथ और नेश्वी साइव के साथ पत्णी को पता था ये सब संभव हुआ हैं किसी किपा से तुम्हें पती की मेंने सुब्रितनती किपा के लाग हैं तो जब सिदाम बाहुत में पहुंचे तो समझ पाए कि ये संभव हुआ हैं किसी किपा से तुम्हें में संभव हुआ हैं आप सोचोगे या पूछोगे हम भी उमीद कर सकते हैं यहाँ जब हम घर लोड़ेंगे हमारी पुठी नहीं है हमारी पुठी नहीं मन गई होगा तुम नहीं कर सकते हैं क्यों? तुम नहीं कर सकते हैं तुम नहीं कर सकते हैं क्या कारण है? यहाँ हमारी पुठी पुगचला नहीं है हमान में पता कि अगर हमें के सुविदाद देंगे हम बड़ी चलती से में पूल देंगे तो इस जब भगवान हमें उतनी सुविदाद नहीं देते हैं उतना ही देते हैं जितना की आवच्छत हो तो प्रिक्षित भगवान क्या कहते हैं कहते हैं कि हमारे भगवानी � भवान के अनेक गुन्दे अनेक लिलाएं हैं ये दोने से शेर्दने आपको एक लिला का मदन हैं बहुत भवान के आजारों लिलाएं हैं इसकी लावा खेतिने मानों के लिलाएं हैं इसकी लावा रावा जैसे शुर्ण बंगन के लिलाएं हैं जीव दोने क्या करना � तो उसकी बादे हम क्या करते हैं। हम करते हैं। क्या करते हैं। प्रजानपा। पून रहे हो। प्रजानपा जानते हो। इसका आरता है उस मेशे की चर्चा जिसका भवाज़े कोई संवंति नहीं है। प्रजानपा की त्यारी में आपका एक दिर्ण है यह होना चाहिए कि मैं कुछ नहीं करता भी उच्छी भी भी और आप एक उच्छी दिर्ण चर्चा करते हैं पर दिहाद में उच्छे की चर्चा करो एक दिर्ण के लिए प्रशन मुझे पुछा था साथ हम दाफतर जाते हैं महां थोड़ हमारे जवकात्यों हैं सद्ध भगवाण के सेवा में। आप चेतने चलने के लिए पढ़ते हों। चेतने महात्मों के साथ भी गुडीचा मंदल के सपाई कर रहे थे। साने भक्त हातों से पर्श को लगा रहे थे। च्छत को दिवारों को भजर लें मिठी निकाल रहे थे। मुझे चेतने माँगो भाईस्थान में खाल कर देखते थे कि कौन जाने मिठी निकाल रहे थे। आज जब आपके मिनारोड मंसर आते हो, कोई ज़ारू देता है यहाँ? किन्दे रोद आपके से ज़ारू देत और कितने लोग आप ऐसे आखर यहां बरतल मांस्ते होते हैं। जब आप भगवान की मंदन हैं हो तुछ कहा पर करने को त्यार रहना ते हैं। यह नहीं। हम किवल साथ पर सेवा करेंगे। सेवा करेंगे। हम नहीं नहीं करेंगे। बिल्मातर से सेवा करेंगे। खे कि मराजपत प्रभुद्र जाजा होते होए सरंग में जाड़ू दे रहे हैं भो रहा हैं हमें आतुरस्ते हैं वो बड़े प्रस्तित हैं मांक्षांस्त्र में अम्रेजवना तो थालत पढ़ते हों कि किस वकार अम्रेजवना मंदर में जानकर जाड़ू दे देते हैं मंदर को स तो यान करा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा जा � गीता में भी प्रतित स्लोप है मन मन बाहु मन प्रतित स्लोप प्रतित स्लोप प्रतित स्लोप प्रतित स्लोप प्रतित स्लोप प्रतित स्लोप प्रतित स्लोप प्रतित स्लो� क्या करें आगे क्या आगे प्रण्शनारी कहते हैं कि हर वर्षन पर प्योग करें हमारे के सेवां करें तो ये होना चाहिए हमारा पाक आगे ये हमारा सेव है विद्धो क्या करना चाहिए मग्वान के साथ हमने आप से नावत हैं श्रीमां पापा तुम्हें कहा ज्या है बोलना मेरे जगे मुझे अपने मग्वान के साथ हैं आपके कहते हैं कि जो उसके मग्वान के साथ में चुके नहीं उसे क्या कर देना ते आप सिर्फ से जुदा सेव के द्वार जिवना चाहिए हमें जिवना चाहिए हैं। बागे बागती साधर भगवान की सेव मेच्रो द्वार मेच्रो द्वार क्या करना चाहिए हैं। भगवान के लूप पर तरशें। भगवतम के जूस के अच्छाए में जुने बुछों भी कहते हैं। जे नेट्रन वाला भगवान का दर्शन ने करो। वो नेट्रन है। लैकिन तुम तो होती पकुता है। जो मोट पकुता हैं। उसे हां जर्म दिखती हैं। वो जानस्यात देखती हैं। दूसरे शब्दों में परिक्षिन मनार्ण में ये सतेज दे रहे हैं। मन बोलते हैं कि तो जनवश्वी के प्यारी कारत है ये सोचना की हमें बगुबाण के शरनगत बना हैं वहाँ कुछ करते हैं वहाँ कुछ कैसे करोगे नेट्रो द्वारा, मन द्वारा, बुदी द्वारा हम सबका प्रयास होने चाहें कि हम कृष्ण करते हैं नदी की पुरा है और अन्याद्मिती होने आनम होता है किर्ति साथ स्वधम और किर्ति साथ नहीं नहीं कि आप ये संदेश पहली बाद सुनते हैं एक बाद आप सुन पहते हैं करहा हम इदे धी हैं हम सौ बाद सुनने के बाद भी आनम करने में देचते हैं इसलिए सादव संगत की आहुत हैं। सादव संगत की आहुत हैं। तो कैसे देशों देशों से जाओगे। तो जन्मस भी उपलाज है। अने एक परकार के सेवाई होती हैं। क्या क्या सेवाई हैं। कुपन कोई सेवाई हैं। क्या क्या सेवाई हैं। प्रसादवी स्थिनि� पित्री साथ केते भक्षनें जन्मस्वी की उप्राक्षेवा की जी? कहते हैं कि यहाँ के उप्राक्षेवा पड़े बेदं बड़े हैं। देवा करते हैं बताते हैं कि इसका सिर्फ करती हैं इसमाल की जर्मास भी बहुत पिछे जर्मास में जो टीवी वाले हैं सबसे पहले इसमाल मतल की जर्मासे देखाते हैं यह साथ जन्मस्वी की विदायां से परिवर्तना तालिक होता है। तो ये सब आप उम्हीन रह सकते हो, कि और भी ज़्यादा देड़ होगी। और अच्छा जन्मस्वी कुछ सब करने के लिए जन के भी आपको शब्द रहती हैं, तरभी नहीं रहती हैं। और जन करता होता है आप चेतने मुझे मुझे देखते हैं। इसको मैं चेतने माहरोग सिन्यार से कर जा रहे थे। जैंग अतूरी दर्शन के लिए। जास्ते लड़ने प्यास लगी। एक वाला लसी बेच रहा था। उन्होंने पूरी लसी कमण तक भी बेच रहा थी। और उस वाले दे پیسے؟ پیسہ کون لے گا؟ اور چھپی ماں کو لے گا میرے پاس کوئی سومتی نہیں ہے پھر میرے پیچھے میرے ساتھ ہی آ رہے ہیں کہ آپ کو چھپی لیں گے کیوں؟ وہ تھوڑی پیچھے مہمہ جنہوں نے نہاں رہتے اپنے پتھلے ساتھ تو اُن کو آ لے لے گا تب آ رہے ایک سنیاسی نے میری ساری لسی پی لی اور کہا کہ تم اس کی رقم तो दिखना लगी ने कहा हूमारे बाद ये रक्षम लगी है तो तुम्हार ने कहा ठीक है बोल देना उस नियाजी को ब्रेव लसी दान में दे दिये तो मैं भी खर जाता हूँ तो अपना मठ्ता उठा करता चारी लगाता मठ्ता तो खाली हो गया था सब लसी पी ली जो वो मट का उठाने गया इतना घारी था जो वे कोई हिलाई नहीं से रहा था तो वो आज चलिया हो जाता था क्या हो जाता था तो अन्दर मंटी के देखा तो क्या रहता था पुरा मंट का गेहनों कैसे अपने के लिए हो जाता था क्या हो जाता था पुरा मंट का गेहनों के तो बहुत किसे होते हैं कि वो सहाब नहीं है तो पड़िक्षि मनन हैं हम सबको तोना घेहरा उब्रेईश दे रहे हैं तो उब्रेईश दे रहे हैं थीर द्वाला बहुत मनकान करो आना द्वाला मनकान सनो हातों द्वाला थुच्चेवा कह रहो तैनों द्वाला बहुत मनकान भवान के साने जुखाओ बेतुन द्वार भवान कहते हुए हैं पैशन प्राप करो और स्वीरी में जो भी अगने हैं तो प्रियो करो भवान मिष्ण नहीं होगी तो ये इसपकार भवान मिष्ण नहीं होगा पापने तो भवान कहते हैं घीतर में सरवा जमान पढ� اس کا یہ ارض نہیں کہ آپ اسلام چھوڑ دو، سائی دھرم چھوڑ دو، ساری دھرم چھوڑ دو اور ہندو بن دو۔ یہ ارض نہیں۔ اس کا اصلی ارض ہے، دھن مال دھن کو گوھر کے چڑڑوں میں آنکھل کرو۔ وہ ہے سپورتہ۔ وہ ایک حدیث کروں جو آپ پڑھتے ہیں۔ आत्मा द्वार आपकर द्वार आप सब अंगों द्वार क्या चाहते हों मांगीत द्वार और ये इस विच्चे में मुझा प्रसेद अंगारण है विश्वानान कभी विश्वानान कभी विश्वानान कभी विश्वानान कभी विश्वानान कभी विश्वानान कभी विश् आप सबसे देवेन हैं, जाज़ पर होंग जाख कीजे, साथ लोग, और ये आप मंदर का बाव उठाते हों, मंदर की सेवा भी कीजे, अगर मंदर में बहुत दर्शन लेंगे, तो आप दर्शन लेंगे तो सेवा भी करेंगे, ठीक हैं। आज पिलोग महारे में GST आ गया हैं। हमें भी GST लगा रहते हैं। मैंने मेरे दर्शन के लिए आ रहे हूँ। हम GST के लिए लगा रहे हैं। हम प्रेंट से हैं। ताप से जुड़िया हैं। जन्मश्वी के एक माइने मैं तौपर देखता हूँ। हमें बहुत देखी हैं। اگر میں ڈالوں گا تو میں ڈالوں گا ڈالوں ڈالوں گا ڈالوں گا ڈالوں
گا
हर काम में हम भवान को कैसे देख सकते हैं अभी समझ हम लोग आफिस में काम कर रहे हैं, सेवा तो नहीं करते हैं, कोई बिलास तो आफिस में काम कर रहे हैं, तभी भी वो भगवान का दर्शिन कैसे कर सकते हैं। एक दम हमें, चाहिए हम प्रामचारिया या प्रियास्तर हो, भगवान की नाम का उचारान प्रियास्ता प्रियास्ता प्रियास्ता प्रियास्ता प्रियास्ता प्रियास्ता प्रियास्ता प्रियास्ता प्रियास्ता जय अन्दन्दार्ज़ वर्षों की तरहो रहे हैं। पर अपने नन्दी का मुझे नहीं हैं। ये बागवास्था में हैं। इतने पिरास्था को नन्द कमा कर नन्द वालें अमान के सेवा के तरह नहीं करेंगे। तो अगला प्रश्ण ये हैं। तो हमको ये टाइडिनस कोन � प्रियास्ता अगर जीवर को समझ मनाना चाहें मुझे पीर कार्या करने के लिए एक नौन लाइक्री होद। दूसरा मुझे पीचा है कि मुझे मौन के सेवार करो। दूसरा सादु संग्जवाला सिख्षा करें करो। कैसे मुझे मौन के सेवार करें। बार जीवर करें प्रस्तुत करते हैं प्रस्तुत करते हैं प्रस्तुत करते हैं प्रस्तुत करते हैं प्रस्तुत करते हैं प्रस्तुत करते हैं प्रस्तुत करते हैं प्रस्तुत करते हैं प्रस्तुत हैं प्रस्तुत करते हैं प्रस्तुत करते हैं प्रस्तुत करते हैं प्रस्तुत करते हैं प् کرشنا کرشنا ہارے ہارے ہارے رامہ ہارے رامہ رامہ رامہ ہارے ہارے ہارے کرشنا ہارے کرشنا کرشنا کرشنا ہارے ہارے ہارے رامہ ہارے رامہ رامہ رامہ
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