ŚB 11.3.2 || Today’s Live Morning Lecture || ISKCON Delhi || Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja

Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja discusses bhakti practice and the difference between sin and crime, addressing how Maya influences the intellect. He answers questions from devotees about handling negative videos, job loss, and career pressure while maintaining spiritual discipline.
Chapters
heaaaadaarda राधा राधा शिवा शर हाई क्रिगर रे रे हरे राम राम राम राम मारे हर आये क्रिनारे रे आ रे आरे रामा रामा रामा रामा रे आ
रे
हाय किश्णारेकणाकृश्णा हा रे हरे रामा रामा रामा रामा रे आ रे क्रिश्ना कृष्णा हरे हरे रामा रामा मारा भरे हरे ेशटालआरे हरे रामा रामा रामा रामा हरे
कृष्ण
रे रे आरे रामा रामा रामा रामा हारे हरे रामा रामा रामा हरे आयराबारेरालबारे ले अरे रे रे आरे रामा रामा रे आ रे 4 आरे आरे रामा रामा रामा रामा हरे हरे ह म र र र राजा भर राज जाय गोरा गोल गोल जा बाबा
goris gori se ke
कृष्णा स्वागत है कृपया अपने अपने सभी मोबाइल बंद कर
दे
और बच्चों को भी शांत रखे
ओम नमो भगवते वासुदेवाय मलमों भागते वासु
दिवाय
man tes de on the bord jnuspिरूशनsmaन mचोहरीरसमृतम समा समसारा tapapाूतपजूशनमा को हरी कम तम सम स
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you you more ligtyua
होई
आ रहे या न रहे ह काला
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नान जुशनयुशमा बचों हरि का नाम रत
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सारदा बनिस्ततोहाmप्यस ताता पा भेषज
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अहोई क
रबादाजीरेरी रे सांग गा
मधु
ईला
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मध्य ा नंगे सहा
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शीरवाली न। मैं फिर भी नहीं हूँ जोश व्यस्त रहते हुए दुश्मन तुम्हारी बजहा शब्दों में हरी कथा भगवान हरी की कथाओं के अम्रत मृत को संसार संसार के ताप कष्ट से निस्तप्तहासताया मत्यहामरकशीमंश ततता उस पीड़ा की भेसजमऔषभीअनुवद बात ये द्युति में आपके द्वारा कहीं जा रही भगवान की महिमा
का
अमृत आस्वाद कर रहा हूँ। फिर भी मेरी प्यास शांत नहीं हुई। भगवान तथा उनके भक्तों की ऐसी अमरतमाईकभाएं संसार के भी काबू से सताए जा रहे मुझ जैसे वक्त जीवों के लिए आज भील का काम करने वाली है। आपको रियर द्वारा सुने सिलसील स्वामी के अनुसार यह तय किया जा सकता है कि चूंकि भगवत भक्त के लक्षणों का पहले ही विस्तार से वर्णन किया जा चुका है। अतएव पिछले श्लोक में वर्णित पद को प्राप्त करके मनुष्य अपना जीवन सफल बना सकता है, तो फिर आगे प्रश्न करने की क्या आवश्यकता है? लेकिन हरी कथा तथा भगवान तथा उनके भक्तों की कथाएं इतनी मनोहर तथा सुंदर है कि मोक्ष के बाद भी कोई उनका सुनना छोड़ नहीं सकता। इस सम्बन्ध में श्री चयतन महाप्रभु ने निम्नलिखित स्लो को किया है। आत्मा रामश्च करने पूर्व भक्ति में जो आत्मा राम है और बार की भौतिक इच्छाओं से आकृष्ट नहीं होते, वे भी उन श्रीकृष्ण की प्रेमा भक्ति द्वारा आकृष्ट होते हैं, जिनके गुण, दिव्य तथा कार्य कला अद्भुत है। भगवान हरि को कृष्ण कहते हैं, क्योंकि उनके अंग प्रत्यंग दिव्य रूप से आकर्षक है। भागवत के प्रथम संघ के सप्तम अध्याय के 10 वे लोग में बताया यदि 1 बार रोग अच्छा हो जाता है तो फिर आस्ति की आवश्यकता नहीं रह जाती। लेकिन परम पद पर कार्य तथा कारण भी नहीं होते। अतएव कृष्ण की महिमा का इसन तथा श्रवण दिव्य आनंद के कार्य कारण है। राजा निवी ने योगियों से क कहा। आप लोग भगवत प्रेम में लीन रहने वाले महान साधु पुरुष हैं। आप यद्यपि माया के बारे में कह रहे हैं किन्तु इसका अर्थ कृष्ंभावनामृत होगा। आप यह न सोचें कि आपने मुझे पहले ही सारी बातें बदला दी है। आपके उद्देश्यों के मादक अमृत ने मुझे भगवान के विषय में अधिकाधिक सुनने के लिए उत्सुक बना दिया है। राजा निमि भी महान भगवत भक्त थे। अन्यथा 9 योग्यता, जैसे महा पुरुषों से बातचीत करने का कोई प्रश्न ही नहीं था, किन्तु विनीत वैश्यों के रूप में उन्होंने अपने औभौविकउपाधियों से 1 सामान्य व दरजी समझा। इस तरह उन्होंने माया का वास्तविक स्वभाव जानने के लिए उत्सुकता प्रकट की, जिससे वे माया द्वारा भाव अपनी में गिराने के भावी प्रयासों से बचे रह सकें। सिर
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धन्यवाद की ये दिली में आपके द्वारा कही जा रही भगवान की महिमा का अमृत आस्वाद कर रहा हूँ। फिर भी मेरी प्यास शांत नहीं हुई। भगवान तथा उनके भक्तों की ऐसी अंतमईतथाएं संसार के 3 तापों से सताए जा रहे। मुझ जैसे बद्ध जीवों के लिए औ काम करने वाले।
home gantensajanjska श्री मन न भ swim rupa कदम ाती स्वा पदंदिकमबंदे हम श्री गुरु शीवतापदकमश्रीगुरु m s सगज सहागनरगुनतममतम जेव sबtmसवधuisashit
sri radha krishna
lalita sri हे कृष्ण करुणा सिन्धु दी
राधे बिदेश्वरी
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कृपा सिंधु बचा जय श्री कृष्णा चेतनतन
सारे सारे है।
रे शो का उच्चारण महाराज निम्मी कर रहे हैं। और आप ग्यारहवें ध्यान में पढ़ते हो कि किस प्रकार महाराज निम्मी महानिमिराजा थे। पर प्राचीन समय में जो राजा थे, उरिशीभीहोते थे, उनके पास पूरा आध्यात्मिक ज्ञान था। पर विनम्रता के 2 कारण विनम्रता के कारण वो यही सोचते थे। हमारे ास कोई ज्ञान नहीं है। जैसे इस लोक में भी आर्यों में कहा जा है भी है उनकी। तो महाराज महाराज ने पूछे हैं नव गेंद लव बगेंद कौन है? महाराज भी हैं, वो थे। परिसर देर बेटे विश्व देव कौन थे? महराज नबी भी कौन थे? महाराज प्रियता, महाराज प्रिय कौन थे?
मानू
अनेक पुत्र में 1 था मार लाभी माराज नाबी बड़े धार्मिक विचार के थे। 1 समय वो यज्ञ कर रहे थे, इस उद्देश्य के साथ कि उन्हें बड़ी अच्छी संतान प्राप्त हो। और पन की इच्छा थी की भगवान जैसा पुत्र प्राप्त हो। तो भगवान विष्णु देव बड़े प्रसन्न थे उनके यज्ञ से। और उन्होंने कहा अगर तुम मेरे जैसा पुत्र चाहते हो, ये तो संभव है, भगवान के जैसा कोई हो सकता है। मैं ही तुम्हारा पुत्र बन जाता हूँ। और भगवान पु बन गए। पग किस रूप में? रिशवदेव के रूप में को कहते हैं? द बेस्ट तो देखा जाए, पर भगवान है ऑलवेज द बेस्ट तो भगवान रिशवदेव के सौ होत्र थे। भगवान के लिए कोई भी कार्य असंभव नहीं है। और शौक सारे शॉप थे, बड़े धार्मिक विचार के थे। और महाराज रिशवदेव ने इन बेटों को और बेटों के माध्यम से हम सबको ज्ञान भी प्रदान किया है, यह ज्ञान प्राप्त कर सकते हो। कहा? भागवतम के पांचवे में। तो महाराज रिशवदेव ने सोचा कि हमारा कर्तव्य है। वो भागवत में कहते हैं व्यक्ति को पिता नहीं बनना चाहिए, गुरु नहीं बनना चाहिए, अध्यापक नहीं बनना चाहिए। जब तक वो अपने इंडिपेंडेंट को भगवान के धाम वापस नहीं भेज सके। इसलिए माता पिता के रूप में, गुरु के रूप में वह जिम्मेदारी बनती है। मैंने विज्ञान प्रदान करे तो भगवान कृष्ण देव के सौ पुत्र े, जिनमें सबसे बड़े थे कौन भारत। वार्ड भारत आज बडे प्रसिद्ध राजा थे। उन्होंने हर प्रकार का सुख त्याग दिया था। पत्नी और धन की कमी हैं। और पूरे पृथ्वी को क्या कहते थे भारत भाषा? आज जब हम आज हम भारत भाषा की चर्चा करते हैं, हम क्या सोचते हैं ये जो भारत इंडिया? प्राचीन समय में पूरे पृथ्वी को भारत वर्ष कहा जाता था। क्योंकि पूरे पृथ्वी में भारत महराज के राज्य के कारण केवल सुखी था। और किसी भगवान विश्वदेव का शासन चला। भगवान रिशव रिशवदेव ने जिम्मेदारी दी भारत को। उन्होंने शासन किया और प्रशासन करके कहा गए? जंगल में उन्होंने सोचा कि अब शासन कर लिया है। और जंगल में और जंगल में गए। वहाँ उन्होंने देखा 1 हिरणी का पीछा 1 शेयर कर रहा था, वो हिरनी छलांग मार रही थी। अभी जान को बचाने के लिए और मां मर गई, पर बेटा छोड़ गई। तो बात भारत ने सोचा। इसे भगवान की इच्छा है कि मैं इसकी देखभाल करूं और उसे पालने लगे। पर की बात उसके प्रति ज्यादा आकर्षित हो गए थे। जिसके कारण उन्हें भविष्य में इ पशु के रूप में जन्म ग्रहण करना पड़ा। भगवान गीता में भगवान कहते हैं अंतिम नारायण स्मृति। इस प्रकार से हमें जीवन का उपयोग करना चाहा की मृत्यु के अंतिम समय में आप क्या कर? सको क्या कर ते भगवान भगवान का स्मरण कर। पाओगे ने अभ्यास भी किया है
और
आप शुरू से करते यह नहीं सोच सकते। बार शुरू में हम सोचेंगे प्रकृति के नियम वैसे नहीं चल। आप अगर सोचो कि अभी हम खेलेंगे इनतान के बगैर थोड़ा पढ़ लेंगे से काम नहीं पाया तो इन्हें जलमग्न करना पड़ा। पर के रूप में भगवान यह भी कहते हैं की भक्ति है, बिलकुल व्यस्त नहीं होती। और फिर उन्होंने जन्म लिया ब्राह्मण को। मैं उस जल में। वो समझ सके क्या था। कारण कि उन्हें पशु का जीवन न करना पड़ा और उन्होंने निर्णय कर लिया था। नाव नाव गोंट रिपीट मिस्टेक english me fri ns bidens के पास जाओ तो भार महाराज वो मार बन बन गए। फिर से ब्राहमण खानदान में जन्म लिया। उनका नाम क्या था? जद भारत, जद भारत ने यह सोच लिया था। आज मैंने 1 गलती नहीं करनी और बड़ा डर हो। और और जद भारत रामगंगा। और उन्होंने बड़ा महत्वपूर्ण संदेश दिया था कि मार होगा था। तो भारत महराज बड़े प्रसिद्ध राजा थे। और उन्होंने महाराज होना को दिव्य प्रदान किया। तो सौ बेटों में 1 बेटा था महाराज भारत और 9 बेटोको उन्होंने
पृथ्वी
के 9 द्वीप लोकों में भेज दिया। वहीं को हरेक बेटे को जिम्मेदारी दी। ये तुम्हारी जिम्मेदारी है, यह उनकी जिम्मेदारी है। इस प्रकार 9 को उन्होंने राजा बना दिया था अलग अलग स्थानों का असली बेटे और जो थे उन्हें ब्राह्मण बना दिया। असी बेटो को बड़े च्छे ब्रामण बन गए। समाज में ब्राहमणों का होना वो महत्वपूर्ण है। प्यासी बेटे क्या बन गए ब्राहमण? और 9 बेटे। को ने बड़े गैर ज्ञान दिया और उनका नाम था लव गेंदर। 9 भाई थे औ और इन भाइयों का 1 ही भाव था। इन भाइयों का भाव क्या था? कि भगवान का प्रचार। तो ने गेंद जो हैं। ये हैं 9 भाई और भारत, भारत, जो 5 भाई वाइफ है न भाई, इनका व्यवहार, सदा, मानस, तुमाराजनिम्मी, महाराज निम्मी कौन है। महराज निम्मी राजा थे। पर धार्मिक विचार के। पापा जी कहते हैं अगर वो धार्मिक विचार के नहीं होते तो क्यों तरसते नौवे गेंदों की संगत प्राप्त करने थे। तो जैसे आप कुमार राज के विषय में पढ़ते हो। कुमार जो थे वो हर स्थान में पहुंच जाते थे। बिल्कुल नंगे क्यों। उनके पिता ने आदेश दिया था, प्रिय सालसा में प्रवेश करने के लिए कोई रूचि नहीं दी। उन्होंने कहा, हम उस स्थिति में फंसना नहीं चाहते, हम अपनी योगिक स्थिति के द्वारा बढ़े दिए होंगे। तो उन्होंने अपने शवीर को बड़े होने से रोक दिया। इसलिए जब उन्होंने भरत में प्रवेश किया और 6 द्वारा सातवें दौर में पहुंचे।
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के बच्चे, ऐसे नहीं जा सके। क्योंकि जो कुम्हार थे, अपने शरीर को बड़े होने से रोक दिया था, क्योंकि वो चाहते नहीं थे। किसी प्रकार से भौतिक आकर्शन बढ़े। तो फिर द्वार बार उन्होंने रोक दिया था। तो जैसे कुमार हर जगह पहुँच जाते थे। उदाहरण के लिए जैसे जब कुमार फृतुमजमहमेंपहुँचे तो पृथु मराज ने उनका बड़ा स्वागत किया, उनसे 1 निवेदन किया। अब बताइए जीवन का क्या लक्ष्य बना जाए। तो उ उसी प्रकार महराज निम्मी जो है। महाराज निम्मी की क्या इच्छा थी, उनकी इच्छा थी आया। तो इस अध्याय में महाराज निम्मी से पूछ न बिगिनर हैं, ये 9 भाई हैं, उनका नाम क्या है? कभी वीर अंतरिक्ष, प्रभुता, पीपा या ना अभी होता। मेला, चमस और करबोजनकरबोजनही, ऐसान है। तो ये 9 भाई है। और 9 भाई यात्रा करते रहते हैं। और संतों को द को ज्ञान दे दे। यह है साधु का मा की भगवान का संदेश। जब देवहुती माता ने पूछा कपिल देव, भगवान से साधु के क्या लक्षण होते हैं? उन्होंने क्या कहा? करुणनीकहा साधु साधु, जो साधु। या जो व्यक्ति सासों के अनुसार अपने जीवन का उपयोग भगवान की सेवा में, उसे क्या गोनेचाह बिल्कुल सेंश करुणिका? करुणिका का क्या है, दया की भावना वैश्व में दया की भावना होनी चाहिए। जैसे कि कै कहा जाता है। वैश्नव बढ दुख, दुख। दूसरों को दुखी देकर। तो समस्या यह है कि हमारा डेफिनेशन दुखी का भौतिक, वादी का डेफिनेशन में अंत। भारत ये सोचते हैं कि जो व्यक्ति पर भगवान की शिक्षा के आधार पर खड़े नहीं करते, वो जहर पी रहा है। बहुत दुखी है। मौलिक समाज में हम सोचते हैं, जिसको धन की प्राप्ति नहीं हो, खेल तो बहुत दुखी है। तो हमारे सिधांकेअनुसारअनाथ वो है जो कि परम भगवान की शिक्षा को नहीं स्वीकार करता। और यह हमारा है। तो भगवान के भक्त हैं। करुण ने कहा, उनमें की भावना होनी चाहिए। वो हर व्यक्ति का मित्र है। बौधिक समाज मे कहते हैं ये मित्र हैं, ये शत्रु है, ये हमारे दल में हैं, ये दूसरे दल में है। जैसे राजनीधिकारियों में हम डल बनाते रहते हैं। हमारी पार्टी में है तो भाग जो है, सूरा भाग जो है, सबको अपना मित्र मानता है। जो उसकी आलोचना करे उसे gul he doesnt se anyone s और उसके कोई किसी के साथ भी मतभेद नहीं होता। तो जो साधु है उसकी इच्छा रहती है। यह भगवान का संदेश हर्षा का है। तो महाराज निमी खुद भी। भगवान के भक्त ऊंचे कुटी के भगत थे, जो नविगेंदरथे वो भी क्या थे, उनका कार्य 1 कार्य था। हर जगह जाकर भगवान का सुदेश देना। तो यहाँ आ के के महल में पहुँचे तो ममी ने बड़े आदर के साथ स्वागत किया से तुमरा महल में
कुमार
तुमरा ने क्या कहा? क्या सौभाग्य हमारे बल में पहुंच रहे उनके और को पूरा आदर दिया। फिर उनसे पूछा क्या पूछा कि यह बताइए कि जीवन का लक्ष्य कैसे प्राप्त हो? ये हैं भक्तों की। तो यहाँ महाराज निम्मी। उसी प्रकार से पृथु राज ने कुमार की स्वागत किया। महाराज नमी और उनसे अनेक प्रश्न। और ये भाई जो भाई थे, सब ने टर्न उपदेश दिया। ये और सब बड़ी शांति से सुनते थे। तुम्हारा प्रश्न पूछे जा रहे हैं और किस प्रकार का प्रशनथा, सबसे उत्तम ज्ञान क्या है? वे दी हाइएस्ट नॉलेज। अक्सर हम जब किसी व्यक्ति को मिलते हैं तो हम जानना चाहते हैं कैसे? कुरवेपाराम करे जिससे ज्यादा कमाए हम प्रशन पूछते हैं, पर किस विषय पर जिसके द्वारा हमें आर्थिक लाभ प्राप्त कर। कई लोग आते हैं। स्वामी जी, आशीर्वाद दीजिये सो आप कैसे दे रे, पर किस विषय के बहुत म नहीं, बहुत देख तुम्हें आशीर्वाद चाहिए। पर ये आशीर्वाद का मतलब यह है में ऐसे आशीर्वाद 2 कि जहाँ भी हम छुएंगे सोना बन जाएगा या हम तुम्हें आशीर्वाद दे ते जिसके द्वारा भाव प्रेम प्राप्त हो तो क्या करें? वो जब किसी संत को मिलता है, वो क्या पूछता है? हम जीवन का लक्ष्य कैसे बात कर सकते हैं? महाराज ने उनका स्वागत किया। आप बताइए कि जीवन का सबसे उत्तम गोल क्या होना चाहिए? सबसे उत्तम हो का होना। ये पूछो कि हम कैसे जीवन में सबसे ऊँचा लक्ष्य किस विषय का हो? और धर्म के क्या क्या अर्थ है? शास्त्र में कहा गया है धर्म का अर्थ है भगवान की वाणी। धर्म कोई ऐसी चीज नहीं है। क्या? आप कह सकते हो the real p्rिnciपl और दूसरा व्यक्ति ही तो धर्म का मतलब है। भगवान की वाणी में कोई दोष नहीं, कोई पूना नहीं, नो शो कमिंग जिसे आज भी हम भागवत पढ़ते हैं। a log जब से इस संदेश का ताजा पर महसूस होता है, fresनहीं h e s bar everytime you read you feel the fresh why disater gon bagwitgitaagan jan gan bagan a o। जिया तो धर्म भगवान के वाले तुम्हारा प्रश्न था। जीवन का सबसे ऊँचा क्या लक्ष्य होना चाहिए? what s his वो होना चाहिए, क्या कि हम कैसे जन्म मृत्यु के बंधन से प्राप्त ये है सबसे महत्वपूर्ण 1 समय प्रापा महाविद्यालय में लक्ष्य दे रहे थे और उन्होंने विद्यार्थियों से पूछा, is any department the teachers, what have a? कोई ऐसा अंक है आपके बाहरी माम विद्याल में यह शिक्षा मिलती है bad विदेश bat हिंदुस्तान में भी है। thode hrm ke charcha kroge to this are religio were secular country to them mens words god and the no short coming in real religie। तो ये जानना चाहते थे जीवन का लक्ष्य क्या होना चाहिए? फिर उन्होंने पूछा कैसे हमारा व्यवहार होना चाहिए? साधु का व्यवहार कैसे होना चाहिए? और ये उन्होंने पूछा महाराज ने प्रश्न पूछ रहे हैं, किन से पूछना है तो किससे पूछना चाहे, जिसके बाद खुद ज्ञान हो। अगर आप अंधे व्यक्ति को कहोगे,
रास्ता,
दिखा, दिखा, पायेगा, सो, वी, शूरपोसमबरी, वो, फुल, वोनफाiuहैसpet और जैसे भाई, इनके बाद पूरा ध्यान में ज्ञान था और जुड़े हुए थे। भगवान के परदेशी से ही उनके माँ बाप ने उन्हें अध्यातम ज्ञान दिया। सो is क्वालिफाइड? उन्होंने पूछा ये बताइए धर्म का असली हल क्या है? और धार्मिक शासकों के मो का क्या? मतलब आगे कहते हैं भगवान के अवतारों के विषय में ज्ञान 2 तो भगवान के अनेक tar rupa, भगवान अपने आप को अनेक रूपों में, आप अपनी इंद्रियों से ये अंदाजा नहीं लगा सकते। भगवान की तारों के विषय में, आप अवतारों के विषय में ज्ञान कहाँ प्राप्त करते हो? का शास शास में भगवान के परमानिक अफ्तारों का वर्णन है। अवतार मे से। ऐसे तो आप जानते होगे holiwud ने ए film बनाई थी उसका नाम था hota का असली होता कोई तो या जब हम अवतार का means the real avatar तो महाराज ने मीने भगवान के जो अवतार है, उनका वर्णन करो और भगवान के अवतारों के विषय में, शास्त्र में ज्ञान प्राप्त कर सकते है। खास कर के श्रीमद भागवत में श्रीमद भागवत में क्या प्राप्त होता है सबसे उत्तम ज्ञान प्यार देने सारे शास्रों की रचना की थी, उनकी सार को प्रस्तुत किया था। जब भी उन्हें लग रहा था क्या मेरे कार्य में कोई कमी रहे। जब वो पहुंचे मुरी के बाद ासदेव उन्हें क्या शुद्ध भक्ति पर बदली हुई है। श्रीमत सpोटलेसपुराना जैसे जानते भक्त प्रयास कि सीमन भागवतम पृथ्वी का सबसे उत्तम ज्ञान है। गलिदमफलविरि साहित्य का सबसे पकावा फल पका फल निचे पोनचट्राकैसेएक संध के माध्यम से दूसरे सं बाजी कहते हैं अगर आप पेड़ की चोटी पर चढ़ जाओ, वहाँ से से फेंकोगे नीचे तो नीचे टुकड़े टुकड़े में प्राप्त होगा।
अलग अलग
व्यक्ति द्वारा पुछा तो वैसे ही प्राप्त होगा। तो उसी प्रकार जो भागवत का ज्ञान या प्राप्त करते हो इन ग्रंथों में, यह हमारे पास कैसे पहुँच रहा है? गुरु परंपरा के द्वारा और क्योंकि गुरु परंपरा द्वारा प्राप्त हो रहा है, यह ज्ञान और भी मीठा बन गया है। so इच्छा तो था ही संतों की वाणी जुडी। तो आपको जानकर खुशी होगी ये बंदा पूर्णमा के संबंध में जो मारता से ऑल इंडिया india इंडिया 24 24 हजार, आगम के शेड वाले 24 25 हजार और मायापुरी धाम में bade ca, i want that every house ol should have agat यह मेरी इच्छा है कि भारत के हर घर में कम से कम 1 भागवत का आप मेसे कितने भक्तों के घर में भागवत का से में क्या है? सबसे उतम ज्ञान? तो मरा हमें ज्ञान। 2 भगवान के अवतारों के विषय में वन के कौन से हैं? और भक्तों के भक्तों के लक्षण हमें बताओ इसका। इस प्रकार महान मीन अनेक प्रश्न पूछे कि राहुल तो आज के स्टोक में में क्या करे? वो कह रहे हैं a man s de sunte i 10 कर्मी पढ़ते हो। फिर परीक्षण मराज सुन रहे थे भागवत का उपदेश, और उन्होंने टोटल फासले की थी। जब परीक्षण महाज को सिंह ने श्राप दिया, 7 दिन के पश्चात बाल मृत हो जाएगी। तो मे, मेरे पिता की इतनी गहरी बेच ली। अगर वो चाहते तो इसका विरोध कर सकते थे। और उन्होंने सोचा यह भगवान की इच्छा है। और थी भगवान की इच्छा। क्यों अगवान चाहते थे कि शीवनभगुतमकोबदेश दिया जाए इसके लिए आम जी वन के भाग। तो फिर भगवान ने ऐसी सिचुएशन बुलाया कहा कि भगवदम को संदेश देने का अवसर भागवत गीता अर्जुन को भगवान के सनातन साथ और संभव नहीं, वो ज्ञानता में आ गए। पर अर्जुन को भी ज्ञान दे कि भगवान चाहते थे कि उनके माध्यम से क्या गीता का संदेश दिया। गीता का संदेश है सबसे महत्वपूर्ण। गीता में। भगवान ने पूरे, वेरका स्टार्ट किया तो बात रखे, पूरा कोई जल्द नहीं, कुछ खाने के लिए नहीं। और वो कहते हैं मुझे आपका उपदेश्य सुनने से इतना आनंद आया है, भूख नहीं लगी। अक्सर 9 दिन कुछ खाओ, नी सा दिन को भूख लग जाती है। परीक्षण को ने कहा, मुझे कोई भूख नहीं लगी है। ये आपके द्वारा कथा सुनने में इतना आनंद आ रहा है। उसी प्रकार रानी कि मुझे आप भाइयों के द्वारा उद्देश शुन्य में इतना आनंद आया है कि मेरी इच्छा क्या है? और सुना दे। तो ये हैं भाग का भाव। स्वभाव क्या है? भगवान का संदेश करे और जो भगत वो दावे। तो भागों की इच्छा क्या? और ये है शादी का असली। उपाय क्या है? यह चैन तो मुझे इतना आनंद आ रहा है। आप भाइयों के द्वारा संदेश सुन कर कि मुझे किसी प्रकार की इच्छा नहीं रहे। हरी कतमरहनीकीकदाकरने में आनंद। तो ये है भागोतम ये है कि क्या हरी कथा में, हरी कथा में क्या गिना जाता है, क्या गिना जाता
है
भगवान के नामों का, कुछ कली का नाम रूपा। हम लोग भौतिक विषय में बहुत रुचि लेते हैं। आश्रम कोई भौतिक विषय की चर्चा करें, हम जाग जाते हैं। और कृष्ण कता की चर्चा करें तो क्या होता है? नींद आ जाती है। क्योंकि उसमें ही तो हम सब का उद्देश्य क्या है। उद्देश्य यह है कि हरि कथा में रूचि बढ़े। हरी कथा के पति हो। यह कैसे संभव होगा? कोई उपाय है है? उपाय क्या है? उपाय सोनम कितन करोगे रुचि बढ़ेगी। रुपगसामीअमभक्तों को रुपननुगाभीकहा जाता है। उसका अर्थ है रुपगुस्वामी। के के ने वहा प्रबु रूप और को दान न्होंने। उनको 3 प्रसिद्ध उद्देश्य दिए थे। 1 था उन सालों को खोजों या भगवान ने अपनी नीविलीलापरगडकी थी दूसरा बंदरों का निर्माण करो कि लगभग सारे मंदिर नष्ट हो गए थे। मुसलमानों के अत्यचार के प्रतिषा भारतीय संबंधित ग्रंथों की रचना और फितिमा स्वयं संसाधन को अलाहाबाद में देवी ज्ञान दिया और ज्ञान के आधार पर उन्होंने नहीं ग्रंथों की रचना की। देश में कहा गया है भगवान के जो नाम है वो क्या है? चीनी जैसे मीट, भगवान की जो कथा है, वह भी चीनी जैसे मीट है। कई बार सुनने में आता है, रूची नहीं है। कथा में रूची नहीं है। क्योंकि हम बचपन से रूचि पकड़कर तैयार रहे हैं। किसमें पंजाला कहते हैं पिजालपरयहमांगा पर जनबा के द्वारा भक्ति नष्ट हो जाती है और कृष्ण गाता के द्वारा क्या भक्ति
है।
वो कहते हैं भगवान के नाम 2 बड़े मीठे हैं, पर हवाई जीप में और विद्या की बीमारी है, उसका क्या रथ पानी जीव में बॉलिंग आकर्षण है। का क्रोध हो? मोह मन मन रिया। जैसे अगर आपकी आँखों में कैटरेहोजाएआपठीक देख सकते हो? अगर आप कैट का ऑपरेशन करा हो तो फिर से आपकी नजर ठीक हो जाती है। उसी प्रकार जो रोगी व्यक्ति उधार कैसे होता है। दवाई के दवा तो नाम जो है, देर स रियल, मेडिसिन फॉर कलिगा हारी, नाम जो है वह असली उपाय इस करिएगा में और हमें किसकी कृपा से प्राप्त होना है। कितने तो ये है असली शादी तो कितना तो स हरी नाम के द्वारा हिंदी रूप भगवान के नाम जो हैं वो मीठे हैं। पर क्योंकि अविद्या का प्रभाव है, वो हम नहीं करते। पर अगर हम नियमित रूप से जॉब करेंगे तो क्या होगा? ये जो बल है वह दूर हो जाएगी। 2 दरपन क्या अरे राम का 1 लाभ क्या है जो बल है दूर हो जाएगा। हम सब का आकर्षण कहा और आगर बदलना है, उसका उपाय है देवी गुनमाएमममामाया। इस माया का विरोध करना बहुत ही कठिन है। पर अगर कोई मेरे हशनगतहोजाएवोफिर इसके बाहर जा सकता है तो यह माराजनिमी इनके पास तो पूरा ज्ञान था। और जब भी उनकी इच्छा थी और ज्ञान प्राप्त करने कई बार हम सोचते हैं। हमने इतनी भगत, सुन ले और सुनने के क्या आवश्यक था? जितना सुनोगे उतना ही कम है जितना सुनोगे उन्हीं तेजी के साथ आपका बहुत ही आकर्षक और सुनोगे ध्यान से उसका क्या प्रभाव है? सो इसके श्रवण कितना यह आवश्यक है। तो आज का है कि मैं इतनी कथा सुनते आ रहा हूँ। जब भी मेरा दिल भरा ने और बना होना चाहिए, हमारा भाव और शो के में रूची लेंगे तो क्या लाभ होगा? 1 लाख होगा, हिंदी में दूर हो तो हम सब के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण सेवा है। और अगर आप भगवन को पढ़ो बार बार इसी बेचे पर बल दिया जा रहा है, यह कोई पहला श्लोक नहीं है। हालांकि आपको ये संदेश आप सुनते, आ सखननेकहागयाश्ामदस कृष्ण या से भगवान के पवित्र नामों को सुनोगे तो क्या प्राप्त होगा? हे अगर। आप सच और हिलेगी मेहर को दूर करना चाहते है। आप कितने भक्त हो, मैं दूर करना चाहता। बोर्ड लगा यहाँ ये केवल शूल भक्तों की दवा है। शोर बच्चों को तो अंदर आ सकते है। थोड़ी देर बाद घर जाओगे वहाँ चल रहा है। हम जब अंदर आते है, बहुत ऊँचा जाते का हो जाता है। सज वाले तो क्या है उपाय उपाय 1 ही है। तो रूप रूप को स्वामी कहते हैं। ध्यान से सुनोगे तो हिंदी मै दूर हो। तो मीडिया प्रश्न पूछ रहे हैं वो परेशन हमें पूछना चाहिए जब पर्सन रामा के लिए पहुँचे, पहुंची दे, रामा केले में किस को मिलने के लिये। वहाँ प्रभु प्रभु खास करके रामा केले पहुंचे दे पर सनातन को दर्शन देने के लिए। इसलिए उन्होंने बहुत लंबी यात्रा की। क्योंकी उनका उधार छा देते। जब उनको मिले तो उन्होंने क्या कहा के समाज में लोग सोचते हैं, मेरी नॉलेज जानते है अमेरिका, ये है विनम्रता जो आप देखते हो तो में विनम्रता का भाव रहेगा तो ना का पूरा लाभ हो। जैसे कई संतोष से सुन बैठे हैं, उनके बाद देवी ज्ञान की कमी नहीं है। पर वो क्या कहे? plis plis me what should be the god like a the quality to log? आदमी न पूछें। उसी प्रकार हमें भी रहालमेशोमेंहनारी, रूची मिलनी चाहिए। वरानेमेक्या चाहते हैं, कह रहे हैं ये ज्ञान जितना सुनोगे, उतना ही काम। हमें यह नहीं सोचना चाहिए। हम भगोदमकलासकईबार सुन बैठे है। और फल में क्या जिदा सुनोगे उतना ही कम है। के 3 महा पूछा गया। अभी उत्सा ह नाम पर थे, महा मैंने गुरु ने ऐसा मंजर दिया है। निकलता ही नही जी से ये मेरे गुरु की मुसलमान काजी के बाज नौकरी। बार बार शिकायत ये निमाई को रोको, नहीं तो सारे मुसलमान बन जा। जी ने कहा तुम दिन दालाके शिकायत करते हो, मुझे भी मैं देखता हूँ। तुम हरी नाम का जाप कर रहे हो। यह क्या है पोक्रेसी शिकायत भी करते हो और ना ही लेते हो। न कहा जब से मैंने यह नाम सुना है, ये हार नाम जीप से निकलता ही नहीं। तो ये है हीना। तो ये होना चाहिए। हमारा प्रयास। यह हरीनाम ऊख से 1 ट्रेन उधर का या ना में रूची बुलाने। कई बार पूछते हैं ना में रूची कैसे बुलाये? शाद में रूची कैसे? बुलाए? माया से हम कैसे दौडे? क्या है उपाय उपाय, यही है न। ये है उपाय। सब समस्या के ले तो इस अध्याय में यही शिक्षा दे रहे हैं। यानी कि उनकी शिक्षा कुमार के शिक्षा से अलग है। वह क्या शन शुरू से अंत तक कदम के द्वारा यह 1 ही संदेश दिया। यह नहीं कि पापा ने 1 संदेश दिया। हमारे चारियों ने दूसरा व चारों ने सामने 1 ही प्रकार की शिक्षा दी था। सो देर जरबिल तुम्हारा निमी का प्रश्न बड़ा महत्वपूर्ण है। वो जानना चाहते हैं। क्या है जीवन का लक्ष्य? जी क्या बेचान भगती के मार्ग में आगे बढ़ना चाहे तो क्या भाव होना चाहिए? या भाव? मिलमनतका उभाव। बहुत वश्यकहैहमें मन में यही सूचना चाहिए। हम सब भक्तों के क्या हैं, दास है, सब भक्तों के दास हैं। दास के विचार से चलोगे तो भक्ति में आगे बढ़ोगे। अगर आप यह सोचें नहीं, हम हैं सबसे में सबसे ज्यादा बुद्धिमान ने परिणा बोला की में आगे नहीं तो इसलिए आप बार बार पढ़ते हो सातवें में, क्या नीचे, ये हैं भक्तों की विनम्र। यह सोचते हैं वह में बिल्कुल घुल नहीं, सारे अंकुनहमारेमहै और सारे गुन दूसरों में है बिलकुल नीचे। संक्षेप में। आज के लोक में हम देख रहे हैं मानिबी गेंद प्रश्न पूछ रहे हैं। फोन के प्रश्न थे। 1 ही विषय पर हमारे आदमी ऐसे कर सकते हैं। और यह होना चाहिए। आप के मे प्रोग्रेस स्परिट प्रोग्रेस नहीं पूछा, उनको बुखार है। वो बुखार कम नहीं हो रहा। आप घबराते हो नहीं घबराते, बुखार नीचे नही जाता। सो बुखार को तोड़ना है। और उपाय क्या है मोस्ट इम्पोर्टेंट और रीबन मुझे ध्यान से करोगे पता तेजी से का प्रभाव होगा। और जैसे बनाने में पूछ रहे हैं, हमें भी प्रशन पूछने। अब यह नहीं जानना चाहते हैं। स्टॉक मार्केट में कैसे करवाएंगे ही जाना चाहते हैं आखतीमेंकै भगवान के नगर, ये है राज के media हर बीमारी का कोई इलाज होता है। आप जब डॉक्टर के पास जाते हो दवा खाना में आग बन कर के कोई खास बीमारी का खास इलाज, तो इस कलियुग की बीमारी का क्या इलाज है? शो नाम के कृष्ण, अनेक दोष नाम चेतावनी, रात, पूर्ण मुक्त हो, फिर नाथ नाम तुम्हारे, तन के नाम अभि। इसलिए आप देर रात ले सकते हो। भगवान के नाम क्य चेतावनी परस्पतर पर स्तर को या भी आप शोगेकुसतान क्या बन जाएगा। क्या ध्यान ज्ञान से जो भ्कतिरीहरनामकोचारन करे, उसे न जाते कितने लगाते सुन लिए सब को लाभ पहुंचा है। मैं 5 छ कृतं पार्टी रोज जाती है हरी नाम करने के लिए ज्ञान यहां फिलोसफी में to make pesialprogayes क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हो। yes no hi krishna opresion okay yesawas की थी आप, जगाने के लिए कई बग हो रहे थे पूछिए alamclokyes quik
जोर से बोलिए
का question
हर माह
है की हम किस कदर से भक्तों में दोष को न देखें।
क्योंकि कई बार ऐसा होता है जब
करते है दोष देखते हैं, करक्शंसकरते हैं। हमें कैसे से बचना चाहिए और किस प्रकार से में अच्छी क्वालिटीज देखनी चाहिए, किस प्रकार से करना चाहिए।
दूसरे शब्दों में, हम इन गुणों को प्राप्त करने के लिए हमें क्या करना चाहिए? ये आपका प्रश्न है। तो जैसे आप सुन बैठे हो और रोजी सुनते हो। इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए ई नाम में रुचि बढ़ानी चाही। hai name is the man instument तो विच वी कैन मेक पेरिशुलप्रोग्रा कोई शोर्टकट नहीं है। और पापा ने आगे शॉर्टकट बना दिया। प्रावा की गुरु, महाराज ने कहा छोड़ सिर मादा करो, नहीं तो राबा ने आपको डिस्काउंट दे दिया, चौसर को बना दिया कितना सोना ये सोना बना का जब ध्यान पूर्वक करो जिंदगी में दूर दूर
y
अच्छे से क्या
किस तरह के महत्व अध्यात्म के लिए और सब का मार के कई साथ बिताने वाले समस्या हो जाती है कि सवभयकभावलाहाभीमुझे दल बताया और फिर रोज सुनना या सुनने के महत्व को कम करन की भावना। तो किस खता से यह सुनना शरमन के करने को बहुत सही किया जा सकता है।
आप का कहना है कि बहुत बार क्या क्या
सुनते है तो कई साल बने
और फिर राजा जा राजा पर महसूस नहीं हो रहा। आपको लगता है कि यह तो बासी है। कई बार सुन बे तो ये गलत भाव है। हमारे में इसका मतलब है। आप सोचते हो ये हर नाम इस कल्पना आप पूरा विश्वास होना चाहिए। हर नाम कहाँ से आ रहा है, कहाँ से आ रहा है। मेल अमेरिका से, भगवान के देवी धाम से आ रहा है। तो मेरे ख्याल से कोई भगत भी ऐसे नहीं महसूस। करता रीराम का प्रभाव, माया का प्रभाव इतना तेज हो जाता है कि आपकी बुद्धि नष्ट हो जाती है। बुद्धि को आपको कंट्रोल करना चाहिए? आप अपने आप को कंट्रोल में डालते हो। buddy wits main मन को वश में लाना चाहिए और मगोंगे संघ में रहोगे। तो आपके विचार गलत हैं, दूसरों के विचार सुन कर। आप भी सुधार सखोगेyes
गुरु महाराज। मेरा प्रस् कि जब हम भक्ति करते हैं तो जब भक्ति करते हैं तो हमारा मतलब मतलब उतना प्योर भाव नहीं है तो थोड़ा थोड़ा तो ही जाता है। जैसे हम स्टूडेंट है तो हमारे प्रेस में यह भी आ जाती है भवन एग्जाम र। तो जब हम इस भाव के साथ थोड़ा थोड़ा भर्ती करते रहते है। फिर जब एग्जाम होता है जाम में अगर मान लीजिए किसी भी वजह से अगर मार्क्स कम हो जाए, खराब हो जाते हैं। तो फिर जो है सालो बोलने लगते हैं कि तुम हर से कर रहे हो, इस वजह से ही हो रहा है। और फिर हमारा बीमा जो है कि इस बात को कभी कभी सपोर्ट करने लगता है। तो ऐसे सिचुएशन में कैसे डील करें।
हमें भगवान को हमारा ऑर्डर सप्लायर नहीं सोचना चाहिए। हम सोचते हैं गौर इज, बाई, ऑर्डर सप्लायर जो हम इच्छा प्रकट करेंगे, भगवान को पूरा करना पड़ेगा, यह विचार नहीं करो और अब ट्राई करो। वैसे तो मराज ने भी अमित तपस्या आरंभ की थी। 1 बौधिक इच्छा के अनुसार राज इतने गिराई से भगवान का चंदन कर रहे थे। जब भगवान ने कहा मांगो क्या चाहिए ने कहा निकला था टूटे शीशे की खोज में अब मुझे हीरा प्राप्त हो गया है। तू चाहे भगवान कहते हैं गीता में, अध्याय में है। 4 प्रकार के व्यक्ति में ही सर मिलाते हैं। कौन है 4 प्रकार के। इसे धन चाहिए और चारों में सर्वशेष्ट कौन है। ज्ञान के आधार पर। तो भगवान खुद कहते हैं धन भी चाहिए। तो मेरे पास आओ। अगर तुम्हें देवताओं की कृपा चाहिए तो मेरे पास आओ मैं वरदान और देवता दे रे मेरे द्वारा आ रहा है। क्योंकि भगवान का पता आप जुड़ोगे तो पा से से प्यूरीफाइ पर भागती को किसी हालत में नहीं छोड़ना चाहिए। ok
जी,
जब,
तो कीर्तन में तो ऐसे कोई प्रॉब्लम नहीं होती, जब माला जप कर रहे होते हैं तब हमारे से हमारे विचारों में कुछ ऐसे पाप के भी आते हैं और अपराध के
बहुत भी होते है।
तो हम इसे कैसे अलग अलग चीजों को देख सके कि क्या अपराध है और क्या बात है और किस तरीके से उनसे डील कर सके। कई विचार ऐसे होते है जो पाप की श्रेणी मे ते है। कई अपराध भी होते हैं तो उनसे कैसे ब कैसे भी
अगर आप केवल मनवारा सोच रहे हो तो इस कलयुग में आपको थोड़ी छूट मिली हुई है मन द्वारा अगर गल्त भी समझोगे आप बच जाओगे परिणाम से अगर आप कहोगे ये कहा मुझे करना है और करोगे गल्त का परिणाम होना पड़ेगा ऑपरेशन क्या है।
प्रश्न क्या प्रश्न यह है कि हमारे जब हम बालाजी को होती है तो हमारे विचार में कुछ ऐसे विचार आते हैं जो आप होते है। मतलब किसी माताजी के बारे में कुछ गलत विचार आते हैं, ऐसे विचार आते है। कभी ऐसा होता है कि कोई चीज है तो हम पाप और अपराध में डिफेंस नहीं कर पाते क्या अपराध को
गाली होती है apradh होता है। but you execute that long action, just thinking is not so when you execute आप एग्जीक्यूट मत करो कल विचारों को और आप जानना चाहते हो क्या अपराध है, क्या पाप है तो हर केस को इंडीविजुली एग्जामिन करना पड़ेगा के individually yes पीछे
प्रति हमा हमारे जो 2 भाई है उनको भी थोड़ा करते थे,
बार बार बोलता हूँ
वो करते तो बोलने के बाद भी
उनका दुर्भाग्य है कि वादा दिया था हम करेंगे और वो नहीं करे भाग है और जो करे वो भाग्यशाली है। कइयों को बौधिक समाज बहुत पसंद आता है वह से गुना दाम क्यों जाएं या गंजा दाम। आपको भगवान का धाम चाहिए तो कीमत भी भरनी पड़ेगी l question पूछिए पूछिए जल्दी थैंक यू महाराज जी, बहुत बहुत
धन्यवाद आपका महाराज मेरे मन में प्रश्न है कि जिसे आपकी ओर भोपाजी से पूरी दुनिया में बहुत अच्छा प्रचार चल रहा है। यू ट्यूब से ऑनलाइन ऑफलाइन लेकिन कुछ असमाजिक तथा ऐसे से अपने मंदिर की वीडियो बना बना कर भेज देते हैं। वो जन मानस से ज्यादा लोग उनसे प्रश्न करते हैं, तो उनको कैसे रोका जाए कि हमारे स्कोर के प्रति लोग न फैलाना, ना फैले।
जो भगवान के विरोधी हैं वो ऐसे वीडियो बना कर डालते है, वो भगवान के भाग से है। वो कभी ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि ये महा अपराध है। जब आप झूठी खबर को बल दे रहे हो, वो महा अपराध है, उसका परिणाम भुगतना पड़ेगा मन। when a do more questions so he
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कई
बार होती है भगवान की इच्छा आप भगवान को किसी प्रकार से दोष मत। 2 यह नहीं सोचोगे ये बीमारी हुई है भगवान की इच्छा के अनुसार भगवान की इच्छा है और लॉजिकल भगवान बिना कारण किसी को नहीं नाम भुगतना तो हम भक्त बनते हैं तो ये दम नहीं कि पापों का परिणाम जीरो बन जाता है, कम हो जाता है और जीरो नहीं बनता पर हाई कोर्ट आपको 10 साल की सजा दे दी है आप सुप्रीम कोर्ट में जाते हैं वो उसको कम कर देते हैं हम भक्ति में आते है और पापों का परिणाम कम हो जाता है पर जो नहीं होता जो हो जायेगा तो कोई कष्ट किसी को उंगदानीपड़ेसबकेगे का ओके to ye vzauraakteकिa kia tha tank tik
अरे दुस्ता हाथ दरापुर।
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