चैतन्य महाप्रभु की अदभुत लीलायें |SB 11.5.32 | ISKCON Juhu,Mumbai|Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja

Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja explains that Chaitanya Mahaprabhu is Krishna himself, citing Bhagavata 11.5.32. He emphasizes kīrtana, collective chanting of the Hare Krishna mantra, as the spiritual practice for this age, and illustrates guru-disciple relationships through stories of saints like Ramachandra Puri.
Chapters
हाई करिश्णा आप सबका हार्दिक स्वागत रिजशोपावसरपर a की शुभ कामना भवदेव
दे दे दे व से a को
relase शो का warton
शो
कल देखी होगा। कृष्णा कृष्णा मन बड़ा वीजा कृष्णा विशा कृष्णा गल गे गे
गे ना ही
आये जल्दी जल्दी हम कितने krishna is
krishna कisaकिsna जा जा
जा
जा ए नही है हा
मेरा
जा जल गा सारा का था
माधवी
ने जंगे हे मेरा visa किशन कृष्णा
करिश्णवरणमष्णम क्रिष्ण अफसरों को दोहराते हुए अंग भांति अब कृष्णम काला ले सुनहरा संग साथियों के साथ बांदा सेवक अस्त्र अस्त्र बाशदमबारशत विश्वस्त साथी। यग्हीयज्ञसे संकीरतन प्राय प्राय संकीरतन युक्त या जलती। वे पूजा करते हैं। निश्चय ही तुम नस बुद्धिमान, गद्दी पर तथा तात्पर्य अनुमान कलियुग में बुद्धिमान व्यक्ति ईश्वर के उन अवतार की पूजा के करने के लिए सामूहिक कीर्तन करते हैं, जो कृष्ण नाम का निरंतर गान रहते हैं। यद्यपि उनका शरीर श्याम वर्ण का नहीं
है,
किन्तु वे स्वयं कृष्ण हैं, उनके साथ उनके परिशद सेवक आयु तथा विश्वस्त संगी रहते हैं। तात्पर् यह श्लोक श्रीमद भागवत 11, 5, 32 से लिया गया। श्रीजीव को स्वामी भागवत पर लिखित अपने भाष्य क्रम संदर्भ में इस लोक की टीका करते हुए कहते है कि भगवान कृष्ण सुनहरे शरीर के साथ भी प्रकट होते हैं। ये सुनहरे कृष्ण ही भगवान चैतन्य हैं, जिनकी पूजा इस युग में बुद्धिमान मनुष्यों द्वारा की जाती है। इसकी पुष्टि गर्भ मनी द्वारा श्रीमद भागवत में की गई है, जिन्होंने कहा है कि यद्यपि बालक कृष्ण श्याम वर्ण के हैं, किन्तु वे अन्य 3 रंगों लाल, श्वेत तथा पीत में भी प्रकट होते हैं। उन्होंने श्वेत तथा लाल रंग के शरीरों का प्रदर्शन क्रमश, सत्युग तथा त्रेतायुग में किया। उन्होंने शेष रण पीला सुनहरा को तब तक प्रदर्शित नहीं किया, जब तक वे श्री चैतन्य महाप्रभु के रूप में प्रकट नहीं हुए, जिन्हें गौर हरि के नाम से जाने जाते है। छिलजीवगोस्वामी कृष्णवर्ण की व्याख्या श्री कृष्ण चैतन्य के रूप में करते है। कृष्ण वर्ण तथा कृष्ण चैतन्य 1 ही है। कृष्ण नाम भगवान कृष्ण तथा चैतन्य कृष्ण दोनों में आता है। श्री चैतन्य महाप्रभु पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान हैं, किन्तु वे सदैव कृष्ण का गुणगान करने में लगे रहते हैं और इस तरह उनके नाम तथा रूप का कीर्तन एवं स्मरण करके दिव्य आनंद प्राप्त करते हैं। भगवान कृष्ण स्वयं चैतन्य महाप्रभु के रूप में सर्वोच्च उपदेश देने के लिए प्रकट होते हैं। भगवान चंदन्या सदैव कृष्ण नाम का कीर्तन करते हैं और उसका वर्णन भी करते हैं। चूंकि वे स्वयं कृष्ण हैं, अत जो भी उनसे मिलेगा, वह भी स्वत कृष्ण के पवित्र नाम का कीर्तन करेगा और फिर अन्यों को अन्यों के सामने उसका वर्णन करेगा। वे मनुष्य में दिव्य कृष्ण भावनामृत भर देते हैं, जिससे कीर्तन करने वाला दिव्य आनंद में निमग्न हो जाता है। इसलिए वे हर प्रकार से, हर व्यक्ति के समक्ष प्रत्यक्ष शब्द द्वारा कृष्ण के रूप में प्रकट होते हैं। केवल श्री चैतन्य का दर्शन करने से ही मनुष्य को तत्काल भगवान कृष्ण का स्मरण हुआ था। अत मनुष्यों ने विश्व तत्व के रूप में स्वीकार कर सकता है। दूसरे शब्दों में, श्री चैतन्य स्वयं भगवान कृष्ण है। सांगो पामदास्त्रपारसदम से यह भी सूचित होता है कि श्री चैतन्य भगवान कृष्ण है। उनका शरीर चंदन के आभूषणों एवं चंदन लेप से सदैव अलंकरित रहता है। वे अपने पूर्व सौंदर्य से अपने युग के सारे लोगों को वशीभूत करते हैं। अन्य अवतारों में भगवान ने कभी कभी अफसरों को परास्त करने के लिए अस्त्रों का उपयोग किया, किन्तु इस युग में भ भगवान अपने सर्व आकर्षक स्वरूप। श्रीचंद ने महाप्रभु के रूप में उन्हें परास्त करते हैं। चिलजीवकोस्वामी बताते हैं कि उनका सौंदर्य ही उनका अस्त्र या हथियार है है, जिससे असुरों का दमन होता है। चूंकि वे सर्व आकर्षक हैं, अतएव यह समझना चाहिए कि सारे देवता उनके संगियों के रूप में उनके साथ साथ रहते हैं। उनके कार्य साधारण तथा उनके संगी अलौकिक थे। जब वे संकीर्तन आंदोलन का प्रचार कर रहे थे, तब बंगाल तथा ओडिशा के अनेक महान, विद्वान तथा आचार्य वन के प्रति आकृष्ट हो गए। चत्र महा प्रभु सदैव अपने सर्वश्रेष्ठ पार्षदों या नित्यानंद, अद्वैत, दगादार तथा श्रीवास के साथ रहते हैं। शिल जीव गोस्वामी वैदिक साहित्य के 1 लोक से 1 श्लोक प्रस्तुत करते हैं, जिसमें यह कहा गया है कि यज्ञों के प्रदर्शन या उत्सव संपन्न करने की कोई आवश्यकता नहीं है। उनकी टीका है कि ऐसे वाहियात दिखावों में लगने के स्थान पर लोगों को जाति, रंग, वर्ण आदि का भेदभाव न करके चैतन्य महाद्रव की पूजा करने के लिए 1 साथ एकत्र होकर हरे कृष्ण कीर्तन करना चाहिए। कृष्ण वर्ण दिशा कृष्ण बतलाता है कि कृष्ण नाम को प्रधानता दी जानी चाहिए। भगवान श्री चैतन्य ने कृष्ण भावना अमृत की शिक्षा दी और कृष्ण नाम का कीर्तन किया। अतएव श्री चंदन की पूजा करने के लिए सबको मिलकर महामंत्र का कीर्तन करना चाहिए। हरे कृष्ण गिरिजा, घरों, मंदिरों या मस्जिदों में पूजा का प्रसार संभव नहीं, क्योंकि लोगों की रुचि इसमें नहीं रही किन्तु हरे कृष्णा का किलकन कहीं भी और कभी भी किया जा सकता है। इस प्रकार की चैतन्य की पूजा करते हुए लोग सर्वोच्च कर्म कर सकते हैं और परमेश्वर को प्रसन करने का सर्वोच्च धार्मिक प्रयोजन पूरा कर सकते हैं। भगवान श्री चैतन्य के सुप्रित सुप्रसिद्ध शिष्य शिलसारुभडचारय ने कहा दिव्य भक्ति योग के सिद्धांत के समाप्त हो जाने पर भक्ति विधि का पुनर उद्धार करने के लिए श्री कृष्ण चेतन में प्रकट हुए। वे इतने दयालु हैं कि वे कृष्ण प्रेम का वितरण कर रहे हैं। हर 1 को उनके चरण कमलों के प्रति अत्याधिक आकृष्ट होना चाहिए, जिस प्रकार गुंजार करती मधु मक्खियां कमल के फूल के प्रति आकृष्ट होती है। अनार दारा कलयुग में बुद्धिमान व्यक्ति ईश्वर के उन अवतार की पूजा करने के लिए सामूहिक कीर्तन करते हैं, जो कृष्ण नाम का निरंतर दान करते हैं। यद्यपि उनका शरीर श्याम वर्ण का
नहीं
है, किन्तु वे स्वयं कृष्ण हैं। उनके साथ उनके पास सेवक आयु तथा विश्वस्त संगी रहते हैं।
हो गया। 10। ध्यान जरा सा या स्ट्रक्चर कर लेगा।
ठीक है, कि मन का नेग या स
बंद हीरो हिरा ही झर झर
कर स। मन सरम कृश
क्रिश्ना पधान सा। हे कृष्ण।
हे
हे होरेस। राज का
तब
रहे ना से
मचा श्री होने जाने की केसे
है
है।
krishna nnamkisnakishna ा प्रसिद्ध श्लोक है जो कि 11 वीं स्तर में प्राप्त होता है। ग्यारहवें स्कल में ने पूछा कि बताइए किस किस युग में भगवान किस रूप में पकड़ है और कौन से जंग में पगले? उन्होंने कहा सदी मे मन पकड़ते और करी पगडतेहै शासन कहा गया है कि चेतन माको स्वयं भगवान श्री कृष्ण चेतना राधकृष्ण हान चेतनेमाकबक्यूं प्रगट हुए जो का 1 कारण था। परीलोक जैसा कि कहा गया है राय राम दर्द कराने में अलग अलग युगों में अलग अलग समय सारे भगवान क्यों सारे कुछ खाद है के मूड के ऊपर डिपेंड करता है क्या पानी का है साल है इस प्रकार अलग अलग बीमारी का अलग अलग इलाज है उसी प्रकार अलग अलग युग में अलग अलग साधन हैं। तो भगवान पकड़े ये वईनामकबचान है इसकी जो सीमा का बदन के छातीसगढ में लाल के वश में ला हे भगवान आपने आप को लेक रुपोमें पकड़ करते हो और आपके net नाम है three yoga आप 3 युगों में
3
चौथे ा छुपीओयाबदारहो छना बदा भगवान प्रगट होते हो भाग के जो जीतने पर भगवान 1 कान का धर्म की धर्म का प्रचार इस युग का संदेश का हो। दूसरी तरफ से भगवान जानना चाहते थे कि राजा रानी का कितना गैरा से है। उनके प्रति जरूर समझे फिचेतमारकूस्वम भगवान केवल हमा विचार शास्त्र का प्रमाण है। इस श्लोक पढकर सुनाया है हो भागवत और इसी भाग में आज फिर भगवान कितने तो वर्णन है।
वर्णन
आपको हम भगवान है और आवेदन चला। भगवान के प्रकट होने से पहले भगवान अपने भक्तों को देते जैसे जब किशन भगवान प्रगट हो गए है। उनके प्रकट होने से पहले उनके भाई पकड़ हो गये थे। बड़े भाई माता पिता को चेत महाप्रभु के प्रगट मुझे कई बार प्रगट हो। da बानंदपुरीा परसना बात पकड़ो ने देखा इस समाज की सीती है, बोल बिगड़ गयी है और बहुत कम लोगों में शुद्ध भक्ति क्या पूछता है वेद महाविश भगवान स्वयं प्रकट हो तो अलवेला
तुलसी
के पत्ते ले गंगा के जल के साथ अपने सारे काम चलाते उपासना और जोर जोर से हाई नाम का उच्चारण करते है और उनके हृदय में 1 भाषा और भगवान आप प्रकट हो जाओ। परियों का सुधार करने के माधुजी
प
छात्र कहते हैं कि धयाकोडहोलेतोवबिना के दयालु पतित बता वो समलीत आप प्रकट हो कैसे पतितों का उद्धार करने के लिए कलयुग में हम सब पति थे ही नहीं, हर बड़ा वन है तो पति हो गये आगे हेलो जिस में सभी लाभ सुन्दर मान तो कर चाय और हरिलाल साहब उनकी प्राथना के भगवान आप स्वयं प्रगट हो जाओ। तो प्रगट हुए भगवान प्रकट होते हैं
अपने भक्तों को
माता पिता के रूप स्वीकार के पिता का नाम था जगनाथ
मिश्रा
जगलान के पिता का नाम था उनके साथ बैठे थे जिनमें सबसे फरसे
और जग
में उनका धान रूची थी और दिलवर चक्रवाती जिनमें जोशी की योग्यता थे। a to a पुकार के में बेटी का नाम उनके नेक नाम है आपके हमारे 12 नाम होंगे, भगवान के हजार, गुड, हारी, गुड, गुड, हरे रंग का सुना, उनका भाव क्या था, अरे नाम, 2 नाम, 2 नाम लो जैसे की कोई रोनaचoपकरतेtecavle का जल, और की शानदार कई मीटर मृत्य हो गयी थी। सीता ठाकुर आने की इच्छा थी
ने
बंगाल माना जा रहा है नीम का बता हो नजर नहीं लगे तो छोटी आयु में उन्होंने अपनी अबु जिला अगर आराम कर। जनमाकरमाचामें प्रगत द्वारा bregodhोलादोनो ही व्यू में आज के वातन में आप को अनेक व्यक्ति मिलेंगे जो कहेंगे हम जो भगवान के अवतार है और अलीना पूछो आप कोई अलगूजीलपगकरसक भगवान के shrsasmagrsia में 6 गोल, असीम मााने, 1 साथ और या जेब, सबसे धनी, सबसे प्रसिद्ध, सबसे खूबसूरत, सबसे वीर, सबसे ज्यादा ज्ञानी और आगे बनो 1 साथ बिल है। तो ये भगवान तो छोटी नहीं है अलगू जीला। उदाहरण के लिए 1 से उनके घर में 1 ब्राहमण आया, वे पिता ने उनका स्वागत किया, उनसे निवेदन किया। आप खाइए और अमर ने कहा ठीक है, हम भोजन को मना वो भोजन बनाकर भोग लगा रहे थे, है
दूसरी
बात, फिर झूल कर दिया जाता
जीती,
मैं अभी भले को 2 भील की दूरी बर्बाद कर दूंगा। कम कोई होगी जब तीसरी बार उन्हें भोग लगाने का प्रयास है मारे फिरवा और my on a sanसंर राम ने देखा ये शाम सुंदर भaलगादलानेपीदो दे का पानी ने बाल छोटी आय मेरी संस्कृत भाषा के उम्मीदवार मन, संस्कृत शिक्षा देवेदी विद्यार्थियों को पर हाडवीमआशबकेसाथ
नाम
वो ने सलसिशिक्षारातकी संसद में से नम और जैसे आप कह चुके हैं, नमदेव सबसे प्रसिद्ध स्थान माना जा रहा था। 1 समय 11 पद विधायक है। उस समय की सबसे पस उन्होंने सुना
था,
बड़े से विधान के पालन मिले बीमारी से गंगा की तट पर तो खेल बंद की आती हो से बंद। 1 दीदी प्रशंसा ने सुनी है मेरे इतनी कविया हैं, 2 भी ठीक नहीं बोल सकता है आप बड़े विमान देखे। उन्होंने समय पर शोर लोकों की रचना की, जिसमें गंगा नदी का उन्होंने पूछा कैसी लगी आप का rely god पर श्लोक में vinati soksho वापस ना छूटी जरा, इसे कहते हैं सुनने मे भगवान को। 1 बार सुनने से, जब इंटरकशमीरनेदेखा की, 1 बार सुनने से नेमार ने सारे शोकों को खंडसकरलियाहैवह आश्चर्य हो गए,
और
मारी के विद्यार्थी ने देखा की केशकिजमेणीदिभाय के प्रश्न नहीं, मूल की हंसी उड़ाना है।
नी ने
रोक दिया आज ये थके हैं, कल उतर देंगे, जब बंद घर में सासवाद पूजा किया था, अब हमेशा द्वारा सुरक्षा कर रहे थे, आज देगी देवी सती ये लड़का दिवा परजिला लड़का नहीं है। भगवान कल की ने ने यह मायावादी भाव। के की से दूर के महाकु कई से और उन्होंने अपने प्रसिद्ध फीस के माध्यम से ribosamiलनस्वामी जीवगोस्वामी राज किए हैं। उनकी तुलना कोई नहीं कर रहा। हम लोगों ने शिक्षा दी, मैंने कहा अभाव आकीसभावहाेथा hi nanga है श्रीवाजसंगनमें, अब कि धारा शीवाजं्गनहमारे हिस्पलकेमंरसे। पूरी दूरी पर रोज।
वहाँ
संकेत किया जाता था, शाम पर शुरू होता था, सुबह तक जाता था। और इस सभा में केबल जो प्रसिध क्रियर नेक के बढ़ से उन्हें आने का अधिकार है। 1 से 1 ब्रामण था इसे कभी कुछ खाया नहीं था रोज शिवाजी कहता था मुझे दरसन खिरति्मलीलाा और ने संभव नहीं आप अब भी जारी है अच्छा तुम्हारी इतनी इच्छा है तो उस दरवाजे के पीछे खड़े होकर छोटा सा केक है छोटे से सकते है अपना कीर्तन कर रहे थे रोगी यहाँ कोई ऐसा व्यक्ति है जिसे नहीं होना चाहिए। शी वाज घबराहट 1 ब्राहमण है जिसने कभी अन नहीं खाया बडी इच्छा थी मैंने उसे छुपकर ने का इजाजत और उन का केवल अन्न काने से उपजी वहाँ पर वि मोबाइल। 1 दिन महा बहु गंगा में जा रहे थे स्नान कर 1 ब्राहमण था मुझे अंदर जाने की इजाजत नहीं मिली
थी में
मैंने कल प्रयास किया था व केचलमनीमेआने दिया देता हूँ वह कभी बहुत सुख नहीं मिलेगा
थैंक यू
को बहुत सुख नहीं मिलेगा तो आपको दुखी नहीं होना चाहिए आप खुश होना विश् द्वारा दुखी सुखी बन जाते हैं। 1 और थी वहाँ लोग के सेवा कर रहे थे उनका नाम था दुखी दासी वह लोगों की सेवा से पसंद नहीं आप के पास काम है सुखी दासी तो मति के द्वारा दुखी दास दुखी दासी बनते हैं। सुखी रात शिव में केतन होता था। और 1 दिन भक्तों ने कहा हमें भूख लग रही है। वह भू ने 1 और अदभुत
पोया
जो मिनटों में बड़ा पेड़ बन गा उस पेड़ में 200 पके आम से 1 आम लडकी के भोजन हो जाता था और ये आम बड़े मीठे तो वह भूल जाना कि कई उनका विरोध
किया
तो मुसलमानों ने विरोध किया ने कहा काजी से अली राजा का प्रतिनिधि
ऐसे डिस्टिक
राजा था वह बंगाल तो अगर हम दिलाएंगे सबकी नहीं रोकेंगे
तो
सारे मुसलमान हिंदू बन जाएंगे
लोग दे
दे रोज इतनी भीड़ होती थी जो मुसलमान अधिकारी थे वो समझ गए अगर इसको रोकना नहीं तो हमारा और साथ में वे हिंदू भाइयों ने भी उपयोग किया उन्होने विरोध क्यों किया पहले ब्राहमण की आमदनी के द्वारा चंदा मिलता था अब अब उनकी आमदन ये नया दर में से पैदा किया है का हमारे साथ में तो न अपने प्रतिनिधि सिपाहयो जा कर उन्हें सूचना दे। 2 भाई राम बन कर नहीं तो उनकी मृदा
ने
सलमान बना रहे है ये जो समझती है सब ले रहे
है
राजा के निकाल के प्रतिनिधि आये मृतका तोड़ दिया शायद भगत हमला हो गया यह सूचना पहुंची है के बाद भाग कम देखते है कैसे रोकेंगे वो बहुत बड़ा मोर्चा बहुत से ज्यादा 1 लाख से ज्यादा मत दे कितना बड़ा मोर्चा हरा है
तो
दोनो की चर्चा और भगवान ये क्या धर्म है जिसमे गाय माता की सुरक्षा रही होती आयमदमानेसालमा
1
वाला लीजिये भविष्य में कभी भी आप भी फिरदिलबंडी को नहीं रोकोगे। तो जिस दिन मैंने अपने आदियों को भेज कर तुम्हारे दंगा चुराए थे वो दिन रात को मुझे ये सपना आया सपने में शेर ने तेज नाखून के
साथ
छाती चीर हो और कहा visa hrt
to
और 8 घंटे कीर्तन किया उसके बाद उसे प्यास लगी 1 उनके भर से जिन नाम को जिनका
छोटा
सा धंधा था, प्यारे से भूल जाती वहाँ हु कह ते थे तुम बहुत धनी हो। 1 दिन मैं पूरे पेज को बताऊँगा कि धनी विचार 1 कमरा था लेने के लिए दिल में छत और जब बारिश आती थी और विवाह के साथ चिपक जाता था। और 1 धोती पहने और पूरे घर में 1 ही टूटा बरतन माह लोगों को प्यास लगे माँ को पानी मिले ले खोल मुझे जिला और वो टूटे वो प्यारा जिसमें आधा पाव झूठा पानी था खोले जिला ने पिया मा पीने गए खोलो बेटी सिर क्या कर रहे हो मेरा जूठे और पढते से जूठी पढ़ते से जूठा पानी पी रहे हो ने कहा मैं अपने आप को पवित्र बना रहा हूँ तो बोले पूरे यूटा पानी में भरत का महा। प्रभु ने भक्तों को बड़ा आदर दिया। वह बहु ने बताया ये असली कीमती चीज क्या है और मा है घर में जाकर छूटे प्यार
माँ
बताओ तुम कितने धनी सस्ती धन क्या है भगवान की कृपा, भगवान की महा कुँवर ने दिखाया कि कैसे उन्होंने ने भक्त जुटे प्यार उन पे भर को इतना आदर देते है। भाई उनका रानी भक्त snाtnbsवामी दर्शन लेने आ रहे थे मारगो का उसे महाप्रभु जगरतपुर में है रास्ते में आ रहे थे जा खंड जंगल से गुजरते हो और उन्हें खोल की बीमारी होगी। पूरा शरीर पस से भर गया। श्री का क्या करूँ मैं क्या
अब
तो ये पूरा पस से भर गया है। वहाँ पर भी तो स्वयं भगवान है भागपुर सब तो आप जगनपुर जाऊंगा और जगह आएगा उस में के सामने अपने आपको फेक कर हाथ का वो जल्दी आये थे जो गरम मिटटी है जो बीच में है उसमें नंगे पैर चल के आ रहे है। मा से पूछा जो मिटटी कर मिटटी में चलकर आए। कोई भी नहीं चलता की मिटीआरह पहले 2 टी में चलते हैं। मेरा शरीर पस से भरा हुआ है मैं ज्यादा नहीं था। अगर मैं दूसरे रास्ते से आता तो कई किसी की पूजा पर रश्मी लग जाता भी अपराध ये सुना सो
मैं
आ कर लूंगा तो ठीक है। समझा क्या बात है। तुम छोडते श्री तुम्हारा है। ये श्री तुम्हारा नहीं है, तुम हत्या नहीं कर सकते। अगर आत्म हत्या करने से भगत प्रेम प्राप्त हो जाए। यह शरीर तुम्हारा रही है, मेरा है और मैं तुम्हारे शरीर को इस्तेमाल करूंगा। धरम की साधना के लिए भगवान किसे आगे बढ़ा देगी और इससे हमें शिक्षा मिलती है।
हम
हमारा शरीर है, बोलते है। तुम्हे हम ने बल दिया अभी तुम्हारे ऊपर के सवाल के बाद मिले
आप
उनको खेती समझाना कहा श्री तुम्हा रही है, ये मेरा है और मेरा शरीर का उपयोग करना है धनमकिस्थालकी स्थापना के लिए और भवान संदेश का। सना के मन में जो आत्म हत्या का भाव रहा है वो वहैदाजठाकुरएऔर सम थे जो की परंपर मा से मिलने जाते थे। राज ठाकुर का द हैजा, को का 4 है, वो प्रचार नहीं है, करों का प्रचार है, धूल अच्छा भी है और इसलिए तो सारे विश्व में हमारे 4 और प्रचारक में अचार भी होना चाहिए। और तुम मुझे महापुरण भक्तगत संदेश में प्रचार किया। उनके 1 भक्त है कपल बिसाबर संदर्श संदर्श थे, बहुत ही बिजी से नीची
जाती,
जैसे जाल गला। हम लड़ते हैं भारत में ही जारी
लीज
पर उनके घर में रहते थे, क्यूँ क्यूँ कोई गुंसाहोबगानके क्यासे बुरा यही रहेगा निजी जाती हु। और 1 और तपन मिस जिसके घर में वो लोग प्रसाद पर मिले थे। बंग्लादेश में ने पूछा था जीवन का क्या लक्ष्य होना चाहिए माँ को? तो वह बबुजबायऔरचंदशिर घर में थे, और ब्राहमण आप लोगों से मिले। अब जानते हैं की आप ने कहा है कि हमें मायावती की संगत से दूर रहना चाहिए। हम मायावती की संगर से दूर रहना चाहते हैं। पर हम देख रहे हैं। ये आपकी बोध जिन्दा हो रही है। हमारी निंदा हम सह सकते हैं, पर आपकी निन्दा। जब महाकुर देखा बधाई ने पत्थर भेजा
है,
महागुन दुखी हो गई जोड़ना पहुंच सुदर्शन चक्र के साथ क्यों नंदा की जरूरी थी। तो हर तुम ने कहा हम लोग से की हमें दुख होता है। देर जिंदा आम को पहले कहा गया कि आँखे निंदा कर रे है, वो हसने लगे कर दे जैसा करने। और जब उन्होंने देखा भक्तों की बात बड़ी है तो वो मान गया नवलेसासिकोमिलरे है। और 1 ग्रामीण के हो गये। वे मायावनी, सन्यासी सब ऊँचे मंच पर बैठे हुए थे। और सभा में आये। उन्होंने अपने आप को बलेवनमराभावसे वहाँ बिठाया यहाँ की पैर पर होते हैं। जी हा, पैर धोते हुए। अंदर ने खेला गया तो उधर बैठे है उन्होंने यहाँ 1 और अद्भुत लीला पकड़ के। उन्होंने
क्या किया?
इतना प्रकाश पकड़ लिया। उनके चेहरे से। ऐसे देखा कि करोड़ प्रकाश सूर्य के प्रकाश जुड़ गए हैं। 1 साथ इतनी रोशनी आई। जब इन भक्तों ने ये सब रोज की देखी तो लगा ये नया तो नही है। इतनी रोशनी इतना ऐसा तो ये गुरु देप्रकाश नजर आ ते प्रकाश साल देखा कि देखा 1 प्रकाश समय नारायण। उनको हाथ पकड़कर वो ऊपर ले आए। और उन्होंने कहा हम सन्यासियों के तो होना चाहिए बिना सुर का अध्ययन करे। यहाँ हमारे साथ बैठ कर है। ना की बैठकर जाना पढ़ना चाह क्या यह हर काम करने ा। तो जमाली ने कहा ्छेदेमाबामेरेजो गुरु है। उन्होंने क्या कहा अनेक श्लोक हैं। मैं समझी पढ़ूंगा गुरु ने कहा तुम मुर्ख हो। और तुम्हारे में और कोई योग्यता नहीं है। और सारे वेदों का सहारा क्या है? नाम का तो अनेक श्लोक हैं जिनके द्वारा बार भूलिएगा ये इस कलयुग में क्या है? न
क्या है? और उन्होंने
दोनों की चर्चा होगी।
माँ
ले शोक द्वारा ये नाम के मेवा
ठीक है। ना
और विधान था। क्यूँ नहीं पढ जो विदा सुधरा है उसका जो अर्थ है वो बोल स्पष्ट है। यहाँ लोगो ने, शंकर ने दोहा 2 आप शंकर ने अब द मायावनी सिद्धांत बंदपोलदोडकर को छिपा दिया है। इसके पश्चात क्या हुआ? जब मायवाजनेवहप्रभु के द्वारा हैना। महिमा सुनी। वहाँ लोगो ने कहा जब से ये पंस मुझे मिला है मेरे गुरु से मैंने गुरु को बोला क्या दवाई दी है। ये बदली अब ने हसी दवाई दी है। 4 रुकते नहीं म मुगल ने कहा ये है धरम में ये सारे जो माया वाली सभी आदि सब के सब क्या बंद है जब चांद का जी यहाँ शिकायत थोड़ी थी। 1 मुसलमान बोला था वो बार बार आकर कहता था आदिमाएगेजबकरो मान निमाई ने कहा वह कालीन तुम लोग जाकर से कैद करते हो रोको रोको रोको मैं तुम जो देता हूँ तुम्हारे नाम ले
ले लो
तुझे क्या समाचार के गा ये बात सच है जबसे मैंने हाइना सुना है ये हाना ह। मैंने बहुत बार कोलयूस
सुना मा
पुरी पुरे समाज के लोगो को परवान किया नाम 1 समय 1 बुद्ध सो सभा चल रही थी जिसमे महाप्रभु पहुँचे और वह
में गुरु
जब गुरु या और भी जो ध्ारती थे उन्होंने बड़ा अपमान किया उनेका गुरु का तुम्हे क्या किया से प्रेशर खाने को पीटर की थाली में और कहा ये महा परीक्षा है आप के लिए रिया से वो खाली दे है ऊपर से बाहर वहाँ ले वो सडवआथानाखालिया खा लिया और थाली को गिरा लिया रोड
लो
क्या किया जाए और हम ने अपमान किया है माफ कर। 2
बात
जा गुरू के कानों में नाम प्रचालन किया गुरूजी बज गये
को
हर प्रकार के व्यक्ति को प्रति माह पर ने 4000 मील की यात्रा थी। 4 जहा जहाँ जहाँ जाते थे दूर दूर से लोग आते थे देखने के लिए के देखते ही प्रभावित बुलाते है वायरस की चिंता wारesकहमसाकानाम व करीना का अर्थ क्या होता है तो लोगों को डर है ये वायरस आ जाएगा तो पूरे शहर में बीमारी।
पर
हम कहते हैं ये करीना वायरस है 80 करुणा, उसे तो फैलना चाहिए करुणा वारेज मतलब हर बच्चा करना मतलब दयालु जो हैं वो दयालु होते हैं। ये वायरस तो फैलना चाहिए। जो दूसरी वायरस है उसमें थोड़ा खतरा है करना इसमें कोई करता है और आप सब दुनिया बैठ सबको करना वायरस बना से हमें वायरल की क्या चिन्ता है कि वायरस का कोई मरीज आ जाएगा। पूरा शेयर वह जब दक्षिण भारत में प्रचार कर रहे थे, दूर दूर से दौडाने थे उन्हें देखने के लिए, उनको देखकर सब जाम लेना शुरू कर दिए थे। इस प्रकार पूर्ण दक्षिण भारत वह वन से भारी गया
और वहाँ
1 ब्राहमण कुर्मा के घर में गए रहने को ग्रामीणों के चंद हो क्या सौभाग्य है हमारा यह आप हमारे घर में उनहोंने इच्छा की मैं आपके साथ चलना चाहता हूँ।
हे
ना करो मरे नाम की महिमा का प्रचार करो, गीता पढो गीता के संदेश का प्रचार करो। इस प्रकार तुम हो का बे रहोगे मैं भारत इसमें महापे पूरे दक्षिण भारत को एबलेशन मावली से बहुत ही
बड़े
विद्वान थे पर और इस समय
राजा था
बंगाल में मुसलमान, राजा था बंगाल अच्छा उनके ा रोबिन जी 4 बार बार कहते रहे हैं यह शो भगवान नही नहीं, भगवा नहीं और जगनाजीकेदरशनकोेखे क्या हो हो गई सबेदार दरवाजे बंद करने जैसे अभी दरवाजे व कि हो गया। ै पुजारी चिंता पिता क्या किया जाए? बड़े यांसी लम्बे हाथ है क्या किया जाए? सुनियाजीउठ बोले थोड़ी देर बाद नंदा जी लोग दूसरे साथ पहुँचे। उन्होंने पूछा बोले यहाँ कुछ सन्यासी आया था। उन्होंने कहा 1 सन्यासी आये थे। उन्होंने बातें करते सुना तो पहुँच गए, चल जाएगी यहाँ की। उन्होंने महा बक को और उन्होंने देखा बहुत ही सुन्दर स्नेहा तुम ये डर था कि कई maha prभाia मैं तुम्हे विधान सूत्र सुनाना चाहता हूँ। तुम्हे गदर सुनोगे और अपनाओगे तो
7
दिनों 7 लाख और चना करते गये। महाबरगोनेकुछ भी नहीं कहा
आप
बड़े shanti कुछ भी पूछा, तुम्हे समझ आ रही है कि वो क्या बोल रहा हूँ लोग विधान सूत्र का जो सन्देश है, सूर्य के समान, तपने भाव बदल दिया। गुल भीता जवान ने अपने पने भाव को जोर दिया।
इसलिए
प्रकाश की क्या नाम लिया तो भाग बने। क्या कहा जो विधान का सन्देश है, वो तो बड़ा सिंपल है कोई 2 तुम अपने भावो को जोड़ उसके पश्चात आत्मा लोग भगवन
और
2 ने कुल से 1 शो की व्याख्या की। यह महाप्रभु की बारी आई ने किले शो से ज्यादा क्रीकोलसेएकएक शो की व्याख्या की जाए। हे, सुना, इस, bca, चौसठ, लो, का, बिलकुल, independent, अलग अलग वो जो
1
और अजबूरीलायापकेोइस लोगों की अनेक ने खिलाए हैं। बेटे से 1 बेटी थी, पति का नाम था मोगा मोगा के मन में सदा इशा
भारत
कुछ कोई लुक्स निकाला जाए तो पोस्ट को मिला 1 दिन जब प्रचार जा रहे थे तो 1 मिनट के लिए दरवाजा छोड़ना पड़ा। प्रतिक गुगल ने अंदर जा के ले लिया। इधर बर सामने और कहने लगे देखो आज कल की सी खाते
से जाता
बाद दुखी हो तो क्या परिणाम हुआ?
मोगा
क्या हो गया। कोर्ड की बिमारी 1 दिन महा बाबा ने वो बनाना चाहिए। मोगा कैसे वो बिना चाहेगा कोर्ट की विमारी हो गयी है। जाएगा माँ को अपने हाथ से ज्यादा तुम्हारे हृदय में महल रहेगी। भगवान ने वाद से े अब जाते वरमा निवास कर रहे हैं। आपके हृदय में वो हृदय को क्या करना पड़ेगा। शुद्ध बनाना पड़ेगा आपको कचरे के डब्बे के पास ही बैठना अच्छा लगता है। बोन प्रसाद के डब्बे के पड़ोस के। उसी का भगवान को अच्छा नहीं लगता। गन्दे साल में बने। इस प्रकार यह सुने और शो हम भक्तों ने मानपुर का फिर आप सीडी बनाएगी। पुरी थे। ईश्वरपुरी के गुर वदर पुरी के चाहि ए थे।
पुरी।
रामजंद्र ईश्वरपुरी में सेवा की भावना है। वो अपने गुरु की खुशी के लिये उनके बल को साफ कर देता है। पिश्याको साफ कर ता है। गुरु को उठाता राम लुक्स निकाला। तो पहले तो सन्यासी थे, सन्यासी जब उनको प्रचार, जब सुनेयासीकेैअरे भाई इतना मत सजा चुके हैं। ये तो वहाँ प्रचार है। अब नहीं खाओगे तो अपमान हो जायेगा, ना खाते है। देखो आज कल के जने खाते है।
तो
रामचंद्र पुरी ने बहुत ब्यांस किया। वहा प्रभु की कोई कमी न। म देखा दिमाग कोई औरतों से बात। पर जिस प्रकार 1 बीटचालरमे काला निशाना दूर से दिख जाता है, उसी प्रकार सन्यासी के आचल में कुछ कमी होगी तो पूरी गए वहाँ पर हो कमरे में बहन ने देखा चीटियाँ चल रही है। उनके व चीटियाँ अक्सर आती हैं जब गर्मी हो या मीठा हो। ये चीटियां आरी थी गर्मी का मासूम था और बोल ग्रामपुर ने सोचा लिया से देखा चीटियों को घूमते देखा हमारे सियासी मीठा बहुत खाते हैं पर मीठा खाया लगा। आज ये देखो 1 दम चिड़िया घूम रही है तुम पर है इतनी गंभीरता के साथ इसको स्वीकार किया उन अपना खाना 5 गुना कम कर दिया और तू ने देखा खाना 5 गुना कम कर ले। उन्होंने 5 गुना कम कर दिया और सब रामचंद्रपुर को दूध देने लगे। माँ के बारे में रामचंद्रपुर की बात बताऊ ये रामचन्द्र पुरी पहले से सब की कमी निकालता था फिर महाप्रभु की कमी निकाल फिर और गुरु की कमी निकालने लगा है। मन भाव से गुरु कह रहे थे हमें समाप्त जीवन समाप्ति का समय आ गया है। मैं भगवत प्रेम अनुकूल यह क्या हम भी विजरा मांगे पूरी बैठे के दिन ला नाम कर देते है और बिना मांगे कुछ खाते कभी कम मानते। सा दिन अकेले भगवान की देखभाल करते थे। नाज को भगवान को सुनाने के पश्चात अपना विश्वास करे सर बोले सेवा करो। वो भगवान जब सोयेंगे उसके बाद था भागलपुर सारा दिन गोपाल रेल की सेवा करते थे और कुछ नहीं खाते थे सब अकेले सो जाते भगवान थोड़ा सा दूरसेे ये जान मूड अपने गुरु के विल विलंबन के भाव को समझ नहीं पा रहा तो आप ब्रह्माण का चिंतन क्यों नहीं करते हैं? मावली जब ने ये तो चले जाओ भी से दूर तुम्हें देखते हुए अगर मैं सुमित यागूंगा व्यस्त माना जाएगा। औ उन्होंने ईश्वरपुरी को वर्ड किया तुम भक्ति अच्छी है ईश्वरपुरी सारे में किया जिस के माध्यम से
मा
बीते विश्व के कोने कोने नाम और उस भक्त के पास खोले का नाम हो वहाँ पर कौन है। और हम भगवान आप से परे केवल करोड़ बनाना है। वो करोर बजी ग हम रोड हम सो है वो चिंता आगे
तुम वो
भी पी लाख जाप करता है दिन के बाद जो हो मुंबई के रोड
यहा
वहाँ को अनेक जिला बोल सकते है, अमीर को बनना है। वहाँ लोगों ने उदाहरण दिया किस प्रकार सेवा का बड़ा वहाँ शिक्षकों का बाकी समान राज स्वयं महावर को क्या दे है। और हम 8 लोग दे गए जिसे आप किस नाम से जानते है। महापाप केवल 8 लोग गुरु, शो, इतना सिद्धांत, मे प्यार लोगों को ध्यान से भरा हो। इनमें पूरे वैदिक साइट का प्राप्त होता है। और इसमें
मान
नाम का लाभ क्या है। बयान में महिला का पूरा लाभ उठाने के लिए अपराध रहे। ये नाम करना है। और आनंद बोली ऐसे हम आप लोगो ने क्या कहा अगर तुम चाहते हो इस का नाम लो क्या होना चाह को बना ले ै ये राज्यों तक पूरी दिन रात गयाजोगी, निंदा करता था दिन रात बातको की निंदा करता था। महा अरे प्रणाम कर रात जिलबुरेकोप्रणाम करनने
के
उन्होंने जब उन्होंने देखा उनके विद्यार्थी हाजी रोकदिया हमें यह। विनमनतकाभाव, अध्यन वसी पेड़ के विचार आधे। 2 हद्रेकेमिलके तो राम वह भारी है राम ने रूचि बढे और किसने काटे माया माया कहते है देवी जल गुनवान माया का विरोध करना बहुत मुश्किल है और जो मेरे छनना हो जाए वो विरोध कर सकते हैं। ये हथियार नाम का और मा जी का से हरी नाम खुले रूप से पाटा जाता है। उन्होंने भेदभाव नहीं किया जिस पर जब वर्षा गिरती है, भेदभाव होता है सबको ये ही नाम लिया हमें हरी नाम लेना और ये करना वाले को कला है खिलाओगे तो हम मुझे बड़ा है हमें भगवान से प्राथना करनी चाहि
और
प्रयास तो क्या कह रहे है ठीक वन स्टेप परे ये आप सब तैयार हो। हाँ बेटे कितने भक्तों ने 2 लेक्चर दिए थे, 2 क्षण में सेल पर
है
1 ला ने 11 साल के पास और यहाँ से और प्रयास कर
सकते हैं आगे
taaoguca।
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