क्यों मनाते है, गौर पूर्णिमा ? || SB.11.5.32 || ISKCON Kharghar|Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja

Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja explains why devotees celebrate Gaur Purnima, the appearance of Chaitanya Mahaprabhu. He describes Krishna's different divine forms and teaches that collective chanting of the Hare Krishna mantra is the primary way to connect with the divine in this age, regardless of Krishna's physical appearance.
Chapters
नरमो। he kisna हार्दिक स्वागत आज हम पढेंगे है can even chapter five take krishna isha krishnam esasngopspsa sam के sryejantisomeshkrisna krishna made krishna onam krishna krishna sango kिsnनम isha
a विश्व
के प्राय सभी आये
ती दे, सुमेरा कृष्ण, व, मुक्ता, कृष्णा,
कृष्ण व कृष्णा, कृष्णा
का, जन दे
सुमेदसुेशाक कृष्ण, राजा कृष्णा को पंगा सदर
सागो
सुने घसालहीसुमेजसा, कृश्णराकृश्ना ंगतपागमसंगोबांगा, राम ने, संगे राह, सुेसारसगोबांगा राम ये सभी भाई
राजधानी जा माताजी
सभी ए जललेहुेजाशजकिश गली से सािशणकसाकृश्णा सा।
s शब्दस हम में आप में से कितने भक्तों ने इस श्लोक को कंस किया हुआ
कृष्ण वर्ल कृष्णों में आए अक्षरों को दौरान निशा कांटी से कृष्ण माना? नहीं सुनहला सब अंदर संगियों समेत गोबांगा ेवकगलहस्त्रहथियार पार सदर विश्वास पात्र साथी। ये ये द्वारा संकीर्तन प्राय मुख्य रूप से सामूहिक कीर्तन से, युद्ध एजेंसी की पूजा करते हैं। मिस्टर हीसुमेसबुद्धिमान व्यक्ति अनुवाद इगलैडेसीशीभतीराम स्वाम प्रा महाराज की अनुवाद कलयुग में बुद्धिमान व्यक्ति ईश्वर के उस अवतार की पूजा करने के लिए सामूहिक कीर्तन या संकृतन करते है, जो निरंतर तुष्टा के नाम का गायन ता है। यद्यपि उसका बदन श्याम कृष्ण नहीं है, किन्तु साक्षात कृष्ण है। वह अपने संगियों सेवकों आयु तथा विश्वास पात्र साथियों की संगत में रहता है। रातभर 1 श्लोक चैतनजतामेआविीला 3 दशमलव 52 में विश्वास विराज द्वारा उतर किया गया। इस लोक की टीका इस प्रकार की है। यह पाक शिवर भागवत ग्यारमस्कनपांचवा अत्या बतीस में आया है। शील जीव गोस्वामी ने भागवत पर की गई अपने टिका क्रम संदर्भ में इस श्लोक की व्याख्या की है। जिसमें उन्होंने कहा है कि भगवान कृष्ण सुनहरे रंग में भी प्रकट होते हैं। यह सुनहरे भगवान कृष्ण भगवान चैतन्य है, जिनकी पूजा इस युग में मुदीवारलोगकरते है। इसकी पुष्टि स्वर भागवत में गलने द्वारा की गयी है। उन्होंने कहा था सभी बालकृष्ण श्यामल है किन्तु व 3 अन्य रंगों में लाल, स्वेद तथा पीले रंग में भी प्रकट होते हैं। उन्होंने अपने स्वेद तथा लाल वर्दनों का प्रदर्शन क्रम सब्जियुककयुगमें किया, किंतु उन्होंने पीले सुनहरे रंग का प्रदर्शन तब तक नहीं किया जब तक वह भगवान ले के रूप में प्रकट नहीं हुए, जो गौरहरी के नाम से विख्यात है। सिलकजीकोस्वामी बतलाते हैं कि कृष्ण वर्ण का अर्थ है सिर्फ कृष्ण, चैतन्य, कृष्ण वर्ण तथा कृष्ण चैतन्य सम है। कृष्ण, राम, भगवान कृष्ण, भगवान चैतन्य, कृष्ण दोनों में आता है। श्री क्षेत्र के महातम भगवान है किन्तु वे कृष्ण का वर्णन करने में सदेव लगे रहते हैं और इस तरह हुए उनके नाम तथा रूप का वितरण करके प्रथा स्मरण करके दिव्य अनंत पाते हैं। स्वयं भगवान कृष्ण सर्वोच्च उद्देश्य देने के लिए चेतन होते है। वर्णन टी का अर्थ है कहता है, यह वर्णन करता है। वरन कहते में सदेव कृष्ण नाम का जतन करते हैं और उसका गुनानुवाद भी करते है और जो कि वे स्वयं कृष्ण है। अतएव जो भी उनसे मिलता है वो स्वतंत्र कृष्ण नाम का कितन करता है। बाद में उसका कथन करता है। वह दूसरे व्यक्ति में देवकृष्ण भाव प्रवेश कर देता है, जिससे कीर्तन करने वाला दीवे आंगन में लीक हो जाता है। इसी लिए वह सभी तरह से हरेक के समक्ष कृष्ण रूप में प्रकट होता है। चाहे व्यक्ति रूप में हो या धनी के रूप में। श्री चैतन्य का दर्शन करने से ही वंतशसानोआताहै इस तरह विश्णु तत्व के रूप में ग्रहण किया जा सकता। श्री जैटलनेसाक्षात भगवान कृष्णा साल पाला सभा सदन भी यह सूचित करता है कि सी जेटल ने भा। उनका शरीर सभी चंदन के आभूषण तथा जनन ले से विभूषित रहते है। अपने अधिक सौंदर्य से वे अपने युग के सारे लोगो को गणित करते हैं। अन्य अवतारों में कभी भगवान ने असुरों का उपयोग असुरों को परास्त करने के लिए किया था। इनविस युग में भगवान चैतनेमारमूजैसे सर्व आकर्षक रूप उन असूरों का दमन करते हैं। शिव जी गोस्वामी व्यक्त का सौंदर्य असूरों को दमन करने के लिए उनके अस्त्र है। चूकी हुए सर्व आकर्षक हैं। अति सोचना होगा कि सारे देवता उनके संगियो जैसे रहते थे। उनके कारण असाधारण के और सभी अद्भुत थे। जब उन्होंने संवितनआंदोलन का प्रचार किया, तब विशेषकर बंगाल तथा बिहार में अनेक विद्वान तथा आचार्यों को आक्रेश किया। फिर जयते के साथ सदा ही उनके श्रेष्ठतम संगीत जैसे कि निध्यान सिलजीवोसमेनेबेजिक साहित्य का 1 श्लोक किया है, जिसमें कहा गया है कि ये प्रदर्शनों या उत्सवों को बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है। वे टीका करते है की ऐसे बाहरी वितलाीपदरशनोमें न कर। सारे लोगो को जाधिथारनकाभेडभाव त्याग कर भगवा। चेतन की पूजा करने के लिए हरे कृष्ण महामंत्र का सामूहिक इसका सूचित करता है कि कृष्ण नाम वरियता प्रदान किया। इसलिए चैतन्य की पूजा करने के लिए सभी लोगों को मिलकर महामंत्र का, कृष्णा,
कृष्णा, कृष्णा, हरे, मेरा है का वेतन करना चाहिए।
विद्या मंदिरों या मंदिरों में पूजा का प्रसार करना सम्भव नहीं रहा, क्योंकि लोगों को इसमें रुचि नहीं है किन्तु हरी कृष्ण का वेतन कहीं भी किया जा सकता है। इस तरह से श्री चकने पूजा करते हुए सर्वोच्च कर्म किया जा सकता है और न पुरुष करने का सर्वोच्च धार्मिक उद्देश्य पूरा किया जा सकता। श्री चैत्य ने आप लोगों की सुप्रसिद्ध शिष्य सिलावट कहा है। जब दिव्य भक्ति का सिद्ध हो गया तो श्री कृष्ण ने भक्ति विधि को पूरा बताने हेतु प्रकट हुए हैं। वे इतने दयालु है कि कृष्ण प्रेम का कर रहे हैं। हर व्यक्ति को चाहिए कि उनके चरण कमलों की और अधिकारी आकृष्ट हो। जिस तरह की गुनगुनाते, बोरे, भवन, पुष्टी और आकेशहोतेहैश्ीचैतन। महातल के अवतार का वर्णन श्री विश्णु संस्क नाम में भी हुआ है, जो महाभारत के दान धर्म परम के अध्याय वन श्री जी स्वामी ने इसका संदर्श इस प्रकार किया है सुबधवालोंमेमाम को वररादष्टनामनदी अपनी प्रारंभिक लीलाओं में हुए सुबह में रंग वाले हरिस्त के रूप में प्रकट होते हैं। उनके अंत सुन्दर है और उनका जंगल ने भी शरीर ने जैसा लगता है। उन्होंने यह भी उत्तर किया है सन्यास पक्ष शांतो निष्ठा शांति पराया बात की। लीलाओं में वे संन्यास धारण करते है और समभाव तथा शांत रहते हैं। वे शांति दा भक्ती के सर्वोच्च धाम में, क्योंकि वे विशेष वादी भक्तों को चुप करा देते हैं। बाद की अनुवाद कलयुग में बुद्धिमान व्यक्ति ईश्वर के उस तार आप हमारे साथ हो रहा है, हमारी बात हो रहा है। कलयुग में बुद्धिमान व्यक्ति ईश्वर के उस अवतार की पूजा करने के लिए साधिके या संगीत कहते हैं। जो निरंतर किस्मत के नाम नाम अग्रायमकरते हैं, यद्यति उनका वर्णन श्यामल कृष्ण नहीं है, हिंदू साक्षात रोशन है। वो अपने संयोग, धीवकोआइयो तथा विश्वास पात्र साथियों की संगत में रहते हैं।
home a na चेतन मन स न भूत रे रूपा कदा माया बंदे हम सीगड़ोीतापदकबन तल व तम स raधsnabsाnta करना सिनदूरध ो
से चलो रही साढ़े परी साल से पानी ले वह क्या का
क्या कप से श्रीकृष्ण के rera krishna a जैसे आप जानते हो कल हैं वो शिप दिन मां बाबू प्रकट हुए थे। भगवान कहते हैं दाह दाह बहुत भा। यूसर धर्मा सज ा में अलग अलग समय प्रगट होता हो। भगवान क्यों प्रकट होते हैं पहितहैंसालुना धर्म सं सपनारथआयासमहन धर्म की स्थापना के लिए। तो भगवान के जो प्रामाणिक अवसान हैं, उनका वर्णन शास्त्र में प्राप्त हो जाए। आज के वतन में अनेक व्यक्ति ये दावा करेंगे कि हम सान हैं। पर देखा जाए उन में कोई अलबू गुल नहीं होते। पर भगवान प्रगट करते हैं। अलबू लीला भी प्रगट करते हैं। तो चेंज प्रगट हुए थे आज से लगभग 520 25 साल पूर्व। इसलिए परिदों का उद्धार करने के लिए ठाकुर जी कहते हैं परिवन हेतू का सारा सारे हो पलीतों का उद्धार करने के लिए। तो परम भगवान की क्या इच्छा है? सबका उधार हो तो चेतना। परम कौन है? स्वयं भगवान है। पर जन की भगत 7 सिर में कहा है? ये है गुप्त था, छुपे आप सा भगवान हैं पर पर ये स्वीकार नहीं करेंगे, भगवान है क्या? कहेंगे भगवान है जो पग हुए बग्स के रूप में। तो हमें ये नहीं सोचना चाहिए कि माँ बाबुजी से धारा है, स्वयं परम भगवान हैं। श्री कृष्ण के राधा कृष्ण ने ही राधा कृष्ण प्रकट हुए भार प्रभु के रूप में 1 भाग्य था के लोगों का उधार हो। ये ही नाम के द्वारा। दूसरा भाग ये भी था कि भगवान देखना चाहते थे राधा रानी का, कितना गहरा से भगवान पगहु। तो उनके पिता का नाम भगवान के प्रकट होने से पहले उनके 7 जाते। जैसे का भक्तों ने मानन पुरी का अभाव मनाया था भाव महाप्रभु के प्रकट होने से पहले उनके सनातन साथ ही प्रकट हो गए थे। अवेताचायामालपुरी उसी प्रकार ने महाप्रभु के प्रकट होने से पहले और धाला का नाम था उपनयन। मिश्रा के साथ बैठे थे, जिनमें केवल 1 की ज्यादा रुचि थी। आध्यात्मिक कार्यों में उनका नाम था जगनाल मिश्रा और जगना मिश्रा में जगना मिश्रा और सच्ची माता। माता पिता का नाम बड़े भाई का नाम था विश्व रूप और और छोटे छोटे भाई का नाम था विश्व, ये नाम दिया था उनके नाना जी ने नानाजी nana code, joshi, la, a, pure, vis, o बचा है। उन्होंने 1 नाम दिया विश्व
और
उन्हें देख लिया था कि विषय में ये सन्यास मिलेगा। पर उन्होंने माता पिता को सूचना हिमायत क्यों नीम के पेड़ के नीचे उनका जन्म हुआ था और गुप तो बचपन से ही मां। बाबू ने प्रकट किया। उनका भाव, उनका भाव क्या था, है नाम का बचा, नाम का बचा। जैसे कि वो छोटे थे, रोना बंद करते थे। कब जब नाम सुनाया जाता था और तो दूसरी और दोंगे द्वारा, और भगवान जब प्रकट होते हैं, अलभूतमीलापकड़ करते हैं, जिसकी तुलना को हिस्सेदार मर्जी नहीं कर सकता। भगवान के अनेक लीला का ज्ञान आप क्षेत्र, क्षेत्र, मीत में प्राप्त करते हो। जिसकी रचना कृष्णा ने की, पापाजी ने अनुवाद किया है और आज आप उसको लगभग हर भाषा में पर सकते। चेतिलभाकोकेनेक लीलाएं हैं। छोटी आयु में ही बड़े विधवा बन गए थे। 8 साल की उम्र में उन्होंने अपना पाठ साला खोल दिया। उन्होंने शिक्षा प्राप्त की गंगादास पद से। और 8 साल की आयु में उन्हें बड़ा विद्वान माना जाता था। उन्होंने भारत के लगभग hrpnधtकoाआज से 500 साल पूर stan था। आज न जाओ तो भौतिक, दिसे देखोगे तो साधारण भारत शेयर पर 500 साल पूर्व, जो भारत के सारे बड़े विद्वानों का निवास का स्थान था, वाipnetनिवाइपननित, इसलिए उनको ये नाम दिया गया था। ये छोटी आयु में ही बड़े विधवान बन गए थे। कोई उनके सामने खड़े नहीं हो सकता था। उस समय 1 प्रसिद्ध थे। वो विदवान थे, नाम केशर कश्मीरी केशर, कश्मीर, आए और मिले, माए से और गंगा के तट। पर केसे। कश्वी ने कहा मैंने। आपकी बड़ी प्रशंसा सुनी है। मा ने कहा विनम्र भाव से ही प्रशंसा। मैं 1 लाइन में ठीक नहीं बोल सकता। हे पर। सजा क्यों सुने? तो ने कहा
आप
अपने संस्कृति, ज्ञान का उधान। तुकैशरकश्वीरी ने 1 घंटे में सौ लोकों की रचना कर दी। इसमें गंगा की प्रशंसा हो। और फिर पूछा कैसा लगा? जमाई ने सारे सौस लोग वापस सुना दिए। यह व्यक्ति 1 सुनने में कंस कर ले। उसको संस्कृत भाषा में सूती धरा कहा जाता है। आश्चर्य हो गई। देखकर। किस प्रकार इस सुधारण की सुधारण बच्चा। कैसे संभव है कि आज 1 बार सुनने से सौ सौ मायके। अनेक परसिलीनआय हैं। निमाय ने विनर का उदाहरण दिया। महा पर बुने स्वयं तो अधिक ग्रंथ नहीं लिखे हैं। उनके द्वारा हमें अनेक ग्रंथ प्राप्त होते हैं, जिनकी तुलना कोई कर नहीं करता। उदाहरण के लिए चीन महापबोकेवसलोग छोड़ गए, उन्हें किस नाम से जानते हैं और ध्यान से देखा जाए। यहां लोगों में पूरे वैदिक साहित्य का सार प्राप्त होता है। और तीसरे श्लोक में लोगो ने क्या सुने किया, अगर तुम चाहते हो के नाम सदा लिया जाए। अगर मैं आपसे पूछूं, आप से कौन कौन चाहते हो? कि नाम में लीन हो जाओ? सभी हाथ उठाएंगे, पर उस आक्शन को प्राप्त करने के लिए क्या भाव होना चाहिए? बोल ने इस लोक में कहा है, ीनादबिसुनीसेनाकहा से भी ज्यादा प्रतीत अत्यंत sence, आदर की उम्मीद रखे, बिना सेवा करो कल हमने आपको संक्षेप में मालिंदपुरी की कथा सुनाई थी और पूरी की कसम है? शायद आपको याद हो, आप ने देखा की भगवान ने खीर का प्याला छुड़ा लिया, किसी की खुशी के लिए तो बाल पुरी को जब पता लगा, भगवान ने का प्यार चुराया है मेरे मन में, मेरे लिए, उनके मन में यह भय आ गया था। अब सारे शहर के लोग मेरा गुणगान करेंगे, सारे शहर के लोग कहेंगे मैं बड़ा हूँ प्रति देंगे, आदर देंगे। और ये इच्छा नहीं थी तो उन्होंने क्या किया? चलो यहाँ से चलते हैं। और जगाते है भग का भाव के भाव से सेवा की है। और वहां पर बने पयमउदारणलविद्यार्थी केश कश्मीर की हसी उड़ाने लगे कश्मीरी प्रश्नों का उत्तर नहीं दे पाए। और तो माँ ने क्या क्या रोक दिया ने उनका है वो थके हैं बाद में महा प्रभु की अनेक जिला है। तो चेतन महा प्रभु हमें उपदेश दिया था माया वालियो की संगत से, क्या मायवाद भाव है। 1 महान अपराध है यह सोचना कि भगवान मेरा कार है भगवान क रूप नहीं भगवान के बाद पाऊनेबपराधहैतमहा प्रभु नासी में आये और 1 भक्त चंद्रशेखर के घर में रह रहे थे। चंद्रशेखर जो था नीची जाति का व्यक्ति था मतलब कि ब्राह्मण जाति का नहीं था माँ कबू ने ये साबित किया कि हम ऊंचो नीची जाति को देखते हैं। इस दृष्टी से भगवान का भर कौन है अगर वो भक्त है तुम उसे कहते हैं सनाथ ऊंची जाति का अगर कोई भक्त है। क्या कहते हैं अनाथ और नीची जाती तुम्हारा प्रभु चंद्रशेखर के घर में रह रहे थे। और उस शहर में ओ बाबू कहाँ जाओ सो सो वहां पाबू चंदर शेखर के घर में थे थे में कहे थे। 1 महा आश्विन ब्राह्मण था जो आया महा पाप को मिलने और उनके साथ 1 और भग थे तपन मिश्रा जर्मन माप को और उनसे उन्होंने पूछा था जीवन का क्या लक्ष्य होना चाहिए? और मापने कहा कि जीवन का लक्ष्य होना चाहिए भ misra और मारा और बार बार सुन रहे थे महा प्रभु की निंदा निंदा कौन कर रहा था वह हांसी के सन्यासी वरणासी में 1 बड़े बड़े से सन्यासी थे जिनका नाम था प्रकाश अंदर उनके साथ लगभग 10 हजार शिष्य थे जो कि
सा दिन
विधान का अध्ययन करते थे। और वो कहते थे इन माई कैसा सन्यासी है हमारे सम्प्रदाय में दीक्षा लिया है ना हमारे साथ आ गए। वैसे तो महा ने कहा था माय वालों की संगत से दूर रहना। पर बार बार यह सुना जा रहा था है सो वो सैनी सके भगवान के जो भक्त हैं अभी बेस्टी से लेंगे और जब दूसरे की बेचती कोई कर रहा है उस सैनी तो तपन मिश्र उन को किस भाव का दिया था ये भगवान की निंदा हो रही है। तो उन्होंने कहा अब चलिए हमारे साथ माह वालियों की सब हम तो वैसे तो ने कहा था किसी मवाली से दूर के पास नहीं जाना देखा कि उनके भक्तों की इच्छा है हो भगवान चल पड़े जब भगवान पहुंचे उनके घर उनके समय सन्यासी ऊंचे मंच पर बैठे थे। और जो महा प्रबु आये वो बैठेंगे कहाँ जिस सान में आप पाउंड होते हो मंदिर में प्रवेश करने से पहले। और वहाँ उन्होंने अपनी अद्भूत हिला पकड की क्या उनके चेहरे से इतना प्रकाश प्रकट हुआ कि ऐसे लगा कि करोड़ों सूर्यों की रोशनी 1 साथ जुड़ गए तो जब माय वाली सुन्याजियों ने ये देखा की इस सन्यासी के चेहरे से इतना प्रकाश प्रकट हो रहा है तो समझ गए ये कोई साधारण सन्यासी नहीं है के गुरु ्रका आये नीचे और मां बहू के हाथ को पकड़कर कहा गए? ऊपर ले आये तो जब ऊपर ले आये तूने बिठाया उसे माया वाली सन्यास सा मा बाबू से पूछा आप इतने बड़े विद्वान हो, आप हमारे साथ बैठ कर विधान सूत्र पढ़ना चाहिए। क्या सा सी गाते हो? आप जानते हैं कि आप बड़े प्रतिशत सन्यासी हो। रमा सर पढते क्यों नही लोगो ने कहा गुरु ने कहा देखा और कहा तुम मूर्ख हो तुम्हारे में ज्यादा गोल नहीं है। टॉम के हो और महा बबूने अनेक श्लोक के द्वारा हरिनाम की महिमा का प्रचार किया। इसका यह परिणाम हुआ कि पूरी सभा 10 हजार ग्रामीणों की लो मोबाइल फ़ोन को बंद क्यों नहीं करते। ऐसा असर पड़ा कि सब बन ग वाइफ सब नाचने लगे। 1 समय जब माँ को प्रचार कर थे 1 buds गुरू थे दिभेरमेंहरादिया तो जो boli उन्होंने बड़ा अपमान इस में हरा दिया सो इसका बदला लिया तो उन्होंने क्या किया तो उन्होंने लि सर हो खाने को 1 थाली में दाल महा बहु को पोच ये महाप्रशाद हम लाये हैं आपके लिए। जैसे ही रखा महा बहु 1 बार आई पीछे से बारिस गया और थाने को गिरा दिया, कहा वहाँ के माथे गुरुजी के माता जब बाते पर गिरा तो गुरुजी भी होश हो गये सारे जो बुद्धि से में बड़ा पछतावा हुआ हमारे कल विचार होगा यह परिणाम हो। और सब ने माफी मांगी और पूछा हमारे गुरु माफ़ कर 2 होश में ले मैंने क्या कहा कानो में सारे बुजी क्या बन गए पूरे भारत में सबको आकर्षित कर दिया था। ये है नाम के पद जो माया वाली थे उन्हें आकर्षित किया। 1 बड़े प्रसिद्ध माया वाली थे नाम sro a, a, a, a, a
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ओसामेंयहाँ हिंदू राजा को सर वो चाय के 1 रिश्तेदार थे जिनका नाम था गोपिनादाचाया गोबिना चाया बार बार कहते थे ये महाबबुजोहैये कोई सुधारण सन्यासी नहीं है। ये कौन हैं स्वयं भगवान हैं, नयी है और भगवान ही हो सकता इनमें भगवान के गुण नहीं है। तुम्हार हो जब सन्यास राज है जगह कुरी भगवान जगना जीका दर्शन नीति ही जगह जगह जगह कै भी हो रोज और उन्हें उठाकर जायेगा। थोड़ी बाद नंदा अपने भक्तों के साथ खोज रहे थे का है या तो जो वो पुरी पहुँचे उन्होंने सुना लोग चर्चा कर रहे हैं। 1 से सन्यासी आया था फुल खबसूरत और भगवान जयराज के दर्शन देते ही बेहोश हो गया और उसे ले गई उठा कर है तो भगवान समझ गए। असली कौन है? तो जो पहुंचे गया गया किलसमकियाजैसे किलसमकिया महानुभव होश में आ गए। तो ये लीला देखकर बड़े आकर्षित हो गए थे, वे होश पड़े थे। हाई नाम सुनते ही होश में आ गए। तो सोचने लगे शायद जो शायद सच भी हो जो बरचाइयाकैरेसोचरे थे। ये सन्यासी केवल 24 साल का है। इतना खूबसूरत सोनेरी रंगे थे लंबे हाथ मे जो सोचते थे, कहीं इसमें माया का प्रभाव नहीं आ जाए? तो उन्होंने कहा तुम बड़े जवान से नया सी हो 24 साल के तुम्हें माया ने मेरे साथ रहो थोड़ी देर। तुम्हें अच्छी शिक्षा दी ने। तो उन्होंने विदांता सुस्ता का उचारण किया कितने दिनों के लिए दिन और रात और आप ने कुछ भी नहीं पूछा। केवल सुन। तो 7 दिन के पश्चात पूछा महापुर में 7 दिन से ये विधान था सूत्रा का। इस प्रश् श्लोक की समझा रहा हूँ। पर तुमने कोई प्रश्न नहीं पूछा। तुम्हे समझ रहा है मैं क्या कर रहा हूँ की समझ ने तुम्हा भूलेगा विधान सुधा का जो संदेश है
ब्राइट
सन तेज प्रकाश के समान है। पर रोशनी तेज प्रकाश तो हर चीज साफ नजर आती है कि अंधेरा बन हो तो साफ नजर नहीं आता। तो विधान का संदेश बड़ा स्पष्ट है। पर तुमने अपने विचारों को जोड़ दिया है विधान के संदेश के साथ। इसके लिए विधान सुधर का असली सुदेश है। वो ढक गया है जैसे बादल सूर्य को ढक देते हैं। माँ पर बोले 1 आत्माराम श्लोक पर चर्चा की और माँ पहले विला चाय बड़े विद्वान थे तो उन्होंने 9 अलग अलग रूपों से उस आत्म शो की व्याख्या की और उसके पश्चात उन्होंने कहा आप कीजिए आप शो ने क्या किया े 64 अलग की कौन से 11 श्लोक की व्याख्या की और चौसठ श्लोक व्याख्या की थी। सब बिल्कुल इंडिपेंडेट था। दूसरे श्लोक में चाय ने देखा वहाँ वो 64 अलग तरीकों से 1 स्लो की व्याख्या कर रहे हैं में हर श्लो का बिलकुल स्वतंत्र है। तो समझे क्या यह कोई साधारण व्यक्ति नहीं कर सकता? यह कौन कर सकता है केवल भगवान कर सौ स्तुतियों का वर्णन किया जिसमें उन्होंने महा लोगों की गुणों का वर्णन किया। और फिर हमने क्या दर्शन दिया अपने सबुज रूप का? जैसे जाए ने सदबुजरूप देखा तो वो समझ गये भगवान। तो भगवान जब प्रकट होते हैं, अजबूत हीला कर करते हैं और मजबूत रूप प्रकट करते हैं। जैसे कि 6 हाथों के रूप के और लोकेशन भगवान। और तो आप किसी साधारण से हो। हाँ भगवान का आप सदबुजरूपककर सकते हो, कोई कर सकता है। भगवान कृष्ण हुए थे, प्रगड होए थे, विश् 4 हाथों के साथ भगवान बताना चाहते थे। मैं अभी प्रगट हो गया, घबरा नहीं। और जब माता पिता का ये रूप
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सूचना मिल जाएगी तो भगवान ने तुरंत ही साधारण रूप तो। इसी प्रकार शास अनेक घटनाएं हैं। महारों ने भी अपनी अद्भुत लीला पकड़ ले। तो वो छोटे से बच्चे थे। जब भी ये लीला पकड़ ली चे से। उदाहरण के लिए 1 समय 1 ग्रामीण आया था उनके पिता के घर में अतिथि के रूप में निवास करने लिए, जगनानमेसने अतिथि का स्वागत किया और कहा बैठिए विशाल, जिए और अतिथि ने है जो ब्रामण है, अपना भोजन खुद ही बनाते हैं। सो उस ब्राहमण ने भोजन बनाया था, भगवान को भोग लगा रहे थे। वो शेतान माइने आकर झूठा कर दिया। राम ने दूसरी बार पिता के करे या फिर झूठा या सोचा, यह सब बड़ा अपराध है। अतिथि आया हमारे घर में, हमारा शैतान लड़का उनके प्रशासन को झूठा कर देता। उन्होंने 2 मील की दूरी पर मैने 1 कमरे में बंद कर दिया। रात के 12 बज गए थे घर के। सब सदस्य हो गए थे। जब तीसरी बार ब्राहमण ने भोग लगाया, सुनवाए फिर से वहाँ पहुंच गए। वे फिर से पहुंच नेमा फिर पहुंच गए। यकीन नहीं लाया था बंद कर दिया नेमा आखिर ये बोग किसको लगा रहे हो? मुझे तो लगा रहे हो क्या राम को भगवान बुला माय ने अपना श्याम सुंदर का रूप या जब शाम सुंदर रूप प्रकट किया तो ब्राहमण समझ ये कौन बोला ने किसको इस पर भगवान ने चोर आए थे के घर में और उनके वो भगवान ने इनका शरीर सजाद चोराय थे। चोर उठा कर ले जा रहे थे। भगवान को दूर ले जा ने गा इस भाव के साथ ही दूर जायेंगे और ये सब चुरा लेंगे और फिर बच्चे को छोड़ देंगे। तो जा भी भागते थे। अंत में क्या वापस पहुँच गए। मा माँ हाँ बेटा कहा गया? कहा गया? चोरों ने उठा लिया था और चोर ले जा रहे थे घर से दूर इस उद्देश्य साथ को चुरा लेंगे, बच्चे को छोड़ देंगे और जान भी उनका प्रयास था। वो कहाँ पहुँच जाते थे कुम्हार के घर के और वे अंत में को घबराकर बजवानी छोड़ दिए गए। उचित महा बाबू ने अपने शिष्यों को ये आदेश दिया गर्दन की रचना करने जैसा हमने कहा। माँ बहन स्वयं को केवल 8 लोग थे, पर उन में शिशु को क्या ले, शिशु को ले या भक्ति संबंधित ग्रंथों की रचना करो और उन सर को खोजो। यहां के भगवान ने अपने देवलीला पकड़ती थी और बंदों का निर्माण करो। मा गा तो, जो छे को स्वामी और वृंदावन के उस समय के सबसे प्रसिद्ध भक्त थे, रूपों और सनातन। उदाहरण के लिए बहुत बड़े विद्वान थे। बचपन से ही दिन रात शासन अध्ययन करते थे और समाज में उन्हें बड़ा आदर दिया जाता था। क्यों? क्योंकि उनके पास बड़ा गहरा ज्ञान था। और क्योंकि समाज में इतना उचा स्थान था, इसलिए जबरदस्ती उन्हें जोड़ा गया राजा की सेवा में और पढ़ा अनेक ग्रंथों के रजा है। लगना दास को स्वामी। उस समय के सबसे धनी खानदान के पुस उनके पिता की आमदन कितनी थी, मान उनके पिता की आमदन थी। 10 लाख से ज्यादा हर महीने और सब कुछ त्यागा। इसलिए वन के फेर में तो सनातन को स्वामी वहाँ लोगों को मिलने जगनपुरी आ रहे है। नादनगोलस्वामी छुप छुप कर चल रहे थे कि कोई उन्हें बचाने नहीं, क्योंकि समाज में वो लगभग प्रधानमंत्री के समान थे। तो वो चाहते नहीं थे कि मुसलमान राजा को पता लगा कि वो कौन है। परसनादनगोलस्वामी झारखंड से गुजरकर आ रहे थे। का जगतपुरी में महाप्रभु को मिलने के लिए पुरी में आयदाजठाकुर। का निवास का स्थान था। अहिराज ठाकुर खबर से जन्म हुआ था। वो सलमान खान दान में थे। ऊंचे कोटी के भगवान से ब्रह्माजी का अवतार माना जाता है। तो सा स्वामी आये थे। माँ बाबू को मिले झारखंड से। अभी भारत में 1 स्टेट है। न झारखंड तो झारखंड से गुजरकर आ रहे थे। तो वहाँ चल रहे थे। जंगलों में वो चल कर आ रहे थे। पूरे शरीर में बस आ गई, बदबू आने लगी गोस्वामी। अब मेरा शरीर बेकार का हो गया है। निकम्मा पुरे शरीर में पुलिसिया है, पस री है। मैं पुर में राज यादव के अवसर पर भगवान जगना जी के लत के पैर के नीचे क्या कर लूंगा, आत्महत्या कर लूंगा। तुम्हारा रूप को स्वयं भगवान है। आंसर में आये हैं। वह ने गले लगा लिया, गले लगा, सुनाने लगा, क्या कर रहे हो? मेरा शरीर बिल्कुल गंदा है। आपके शरीर में गंदा हो। जाएगा ने कहा, नहीं, मैं अपने आप को पवित्र बना रहा हूँ। और सनातन को स्वामी। आज कुंजियों से भरा हुआ शरीर का क्या बन गया। शरीर शरीर बन गया। फिर भगवान ने कहा, भगवान ने कहा, अगर, आत्म हत्या करने के द्वारा सनातन का क्या भाव था। मैं वहाँ जाकर आत्मा हत्या कर लूंगा। पर आत्मा हत्या करूंगा। जगराज ध्यात्म माँ बाबू समझ गए थे। इसके मन में क्या माँ बबूना, सुना सर, अगर आत्मा हत्या करने से लोगों का उधार होगा। कम सब कर लेते पर आत्मा हत्या कार्य नही है। ये जो तुम्हारा शरीर है, इसका उपयोग मैं करूंगा किस लिए? धरम के पचार के लिये और मंदर के निर्माण के लिए। तो सनातन को ने कहा, ये जो तुम्हारा शरीर है, तुम नहीं है, यह मेरा है। न सोचे देना, ये मेरा शरीर है। अभी पूंजियों से भर गया है, तो ये तुम्हारा शरीर नहीं है, ये मेरा शरीर है। और मैंने शरीर का उपयोग करने के लिए रंग बचा। तो हमें यह नहीं सोचना चाहिए। यह हमारा शरीर है, यह हमारी सम्पति है, यह हमारा धन है, हमें सोचना चाहिए। ये परम भगवान का धन है। कई बार हम कहते हैं है, सब कुछ भगवान की है। हाँ बर है, हमारे निर्णय में है। भगवान के नाम के लिए। भगवान ने कहा, ये दे तुम्हारा नहीं है, यह देव मेरा है। तो फिर भगवान से, आतंकवाद से या वृंदावन जाओ, बंधों का निर्माण करो, करो की रचना करो। और आज हम ब्रज में जाते हो, तुरंत देख लेते हो। ये स्थान का ज्या दिला दी। यह संभव है क्योंकि गोसविमोने मां लोगों के संदेश के अनुसार इंसानों को स्थापित खोजा और स्थापित किया के दिन, आप लोगों के 4 से फिशमककीहरजगहहैले के दिन मा को दक्षिण भारत की कभी आशा में थे, तो 1 भग को मिले, जिसका नाम था रामनंद्र रॉय। रामनंद रॉय बड़े राजपाल थे किधर के, मद्रास के और पुरी से निकलने से पहले उन मोटे चयन है। सूचना दी जी, जब तुम दक्षिण भारत की यात्रा करोगे। हाँ 1 बड़ा संत मिलेगा महा हू। मिले उनसे अनेक प्रश्न पूछे। वैसे तो आप कहोगे हम भगवान से प्रशन पूछे। भगवान ने पूछे, क्यों भक्तों की महिमा को बढ़ाने के लिए वो 1 प्रश्न था? फक के लिए कौन सी स्थिति सबसे कठिन है? और राम रोहे ने कहा, पक के लिए सबसे कठिन कौन सी स्थिति है वह भक्तों की संघ से जुदा हो रहा। कहा कि भक्तों के अंग से जुदा हो जाना, सबसे ज्यादा दर्द का स्थान हमारा भाव होना चाहिए। भक्तों के संग उन्होंने पूछा कि हमें कौन सा गीत गाना चाहिए, साफ ये कौन सी फिल्म का पूछा, कौन सी वो गीत जिसके द्वारा राधा कृष्ण का गुणगान हो और उनका गुणगान कौन से मंत्र में होता है किसी नगर, ग्राम, विश्व के खोने को में यही नाम पहुंचेगा आज कितने माह मुझे की कृपा से दुनिया के खोने को है नाम का प्रचार हो रहा है जैसे मैं कल रात को कह रहा था असी करुणा वायरस है ये आई नाम की महिमा लाना, ये है करुणा का अर्थ जानते हो दया। तो अगर आप दया करना चाहते हो तो क्या करो, ये है नाम का जाप, ये है असली दया और ये है असली वायर के दिन आप लोगों ने पूरे समाज को आरविशनदिया, उसके प्रति आप लोगों की अनेक लीला है हमें को पढना गोलीलागोलिला जितना सुना गए उतना ही कम है और अगर गोली सुनेंगे तो क्या लाभ होगा भक्ति में आकर्षण बढेगा और माया में भर लेगा परमार का आदेश क्या है हम भक्तों के लिए जायदाकोतायकहो यह प्रचार का उत्स और जैसे मेरे को 1 आदेश मा भारतीयों को क्या आदेश दिया उन्होंने जो भारत में जन्म ले उसको क्या सोचना चाहिए अमेरिका का वीजा मिलेगा क्या सोचना चाहिए उसे क्या करना चाहिए अपना उधार और तो ये भारतवासियों का खास है क्योंकि आज भारतवासी इसका लाभ नहीं उठा रहे है, इसका पालन नहीं कर रहे है आज आप क्या खोले खोले में इसाई बने लोग इस्लाम को जोड़ रहे हैं अपना उधार करो दूध हो रहा है तो इस शुभ अवसर पर हम सब को वहाँ पलगोंकीशनागाद होना चाह बगवान हेतु दावा बोल रहा है वहाँ लोग प्रगट हुए परीतोंकोउधार असली उदार है या है को स्वीकार कर वहाँ पर उन्हें अपने पंच तत्व के साथ भक्ति का जो खजाना था उसे तोड़ दिया और खुले रूप से बाटा ये तेरा कौन योग्य है कौन नहीं है जैसे कि जब बारिश बरसती है बारिश बरसती है वो भेदभाव करती है सागर में नहीं बस नहीं हर जगह बारिश बरसती है तुम प्रबल बकती का बजाना खजाना तोड़कर सबको यह है नाम, बात और ही नाम के माध्यम से सब कुछ मा प्रभु स्वयं भगवान है सब हफ्तों में सबसे दयालु हैं और वो पद प्रकट हुए हैं इसलिए पदिधोंकाउधार ू जीवन में सफल बनाना चाहते हैं और क्या कहना चाहिए लोगों की शिक्षा के धार पर चलना चाहिए लोगो ने क्या कहा आयाम और हरी नाम का उजाला करो ये सुख शांति का सी साल हे कृष्णा।
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