क्यों मनाते है, गौर पूर्णिमा ? | SB.11.5.32 | Kharghar | 8 March 2020 | Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja

Gopal Krishna Goswami Maharaja explains the theological significance of Gaur Purnima and Krishna's manifold manifestations through scriptural references and devotional practice. He emphasizes collective kirtan and the Hare Krishna mantra as the primary means of bhakti, describing how chanting purifies the heart and unites devotees across social boundaries. The discourse weaves together mythic stories, moral instruction, and practical guidance for deepening devotional practice.
Chapters
krishna भक्तों का हार्दिक स्वागत। आज हम jwasकnबततीसवरोग पढेंगे krishna amisha krishna snरंगोpसpsयशाम के सम prayejantioskisna कृष्ण परहे made shani krishna n nam krishna कृष्ण जग जाती हू मै सहा क्रिश्ना वन म krishna
श
बस का विश्वास से
परे
तीसमसा
कृष्ण कृष्ण ष्ण कृष्णा पंगास या संकेत सुमेश
कृष्णा कृष्णा कृष्णा पाना संत प्राय आय हे सुने घसा। यही सुमेधा सा संगे ले माताजी
शाम
आए जल के सुमेसासेशा कल से ए ए शब्दार्थ हम आप में से कितने भक्त ने श्लोक को कंठस् किया हुआ
कृष्ण वर्मा ष्ण आये अक्षरों को धुरावशकलकीसी कृष्णा नहीं सुना संगिोसमेसेवगनसत हथियार। विश्वास पात्र साथी यज्ञ द्वारा सं मुख्य रूप से सामूहिक कीर्तन से युद्ध एजेंसी पूजा करते हैं। ये मिस्टर ही जुमेरजबुद्धिमान व्यक्ति हलवार मे से सुबह की रासशनेकाहो द्वारा स्पीड अनुवाद कलयुग में बुद्धिमान व्यक्ति विश्व के उस अवतार की पूजा करने के लिए सामूहिक कीर्तन या संकीरतन करते हैं जो निरंदतुष्ण के नाम का गायन करता है। द्वि उसका मन श्याम कृष्ण नहीं है, किन्तु साक्षात कृष्ण वह अपने संगियों सेवकों आयुक्तों तथा विश्वास पात्र साथियों की संगत में रहता है। रात बने ये श्लोक चतनजतामेंआवीला 3 दशमलव 52 में कृष्णदास कविराज द्वारा उतर किया गया है। सब इस श्लोक की टीका इस प्रकार की है। यह पाप सुबर भागनत या 30 में आया है। शिरजीवकोस्वामी ने भागवत पर की गयी अपने पिता करम संदर्भ में इस श्लोक की व्याख्या की है, जिसमें उन्होंने कहा है कि भगवान विष्ण सुनहरे रंग में भी प्रकट होते हैं। ये सुधर भगवान कृष्ण, भगवान चैतन्य है, जिनकी पूजा इस युद्ध में उद्वीवाहलोग करते हैं। इसकी पुष्टि सुर भारत में रंग मुनी द्वारा की गयी है। उन्होंने कहा था कि यजभीपालतकृष्णश्यामल है किन्तु वो 3 अन्य रंगों में लाल, श्वेत तथा पीले रंग में भी प्रकट होते हैं। उन्होंने अपने स्व तथा लाम वदनो का प्रदर्शन क्रम सह सब्जी में किया। किन्तु उन्होंने पीले सुनहरे रंग का प्रदर्शन तब तक नहीं किया जब तक वह भगवान से चलने के रूप में प्रकट नहीं हुए। जो बार हरी के नाम से विख्यात है। जिल जी स्वामी बतलाते हैं। कृष्ण वर्ण का अर्थ है सिर्फ कृष्ण, चैतन्य, कृष्ण वर्ण तथा कृष्ण चैतन्य। सम है कृष्ण, राम, भगवान कृष्ण, भगवान चैतन्य, कृष्ण दोनों में आता है। श्री जे महातम भगवाल है किन्तु वे कृष्ण का वर्णन करने में सभी ने लगे है और इस तरह वे उनके नाम तथा रूप का पतन करके तथा स्मरण करके 1 अमीर पाते हैं। स्वयं भगवान कृष्ण सर्वोच्च उद्देश्य देने के लिए जतन प्रकट होते है। वर्ण का अर्थ है कहता है, यह वर्णन करता है बना जैसे में से कृष्ण नाम का भेदन करते हैं और उसका गुनानुवाद भी करते हैं और जो कि वे स्वयं कृष्ण है। अतएव जो भी उनसे मिलता है, वो स्वतंत्र कृष्ण नाम का वेतन ता है। बाद में उसका कथन करता है। वह दूसरे व्यक्ति में दिव्य कृष्ण भाव न प्रविष्ट कर देता है, जिससे कीर्तन करने वाला डीेआगंदमेंलीगहो जाता है। इसी लिए वह सभी तरह से हरेक के रूप में होता है, चाहे व्यक्ति रूप में हो या ध्वनी के रूप में। श्री का दर्शन करने से ही आता है। इस तरह उन्हें विष्णु करों के रूप में ग्रहण किया जा सकता। शब्दों में सीजन साथसाथ भगवान सूचना है। सालाना सभा सदन भी यह सूचित करता है कि सी जैटलनेवासषणहै उनका शरीर सभी चंदन के जनन विभूषित रहते है। अपने अधिक सौंदर्य से वे अपने युग के सारे लोगो को गणित करते हैं। अन्य अवतारों में कही गई भगवान ने असुरों का यो असुरों को परास्त करने के लिए किया था। इन युग में भगवान ने मारो जैसे आकर्षक रूप उन असुरों का दमन करते हैं। शिररजीकोस्वामी वैठक सौंदरय असूरों को दमन करने के लिए उनके स्तर है। क्यूँकि वे सवा आकर्षक है? सुना होगा कि सारे देव का उनके संगियो जैसे रहते थे। उनके कारण असाधारण के और सभी अद्भुत थे। जब उन्होंने संवेदन आंदोलन का प्रसार किया तब विशेषकर बंगाल तथा बिहार में अनेक विद्वान तथा आचार्यों को आक्रेश किया। फिर जैन साथ सदा ही उनके श्रेष्ठ कम सही जैसे
जी
ने वैदिक साहित्य का 1 श्लोक किया है, जिसमें कहा गया है ये पदर्शनों या उत्सुकों को बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है। वे टीका कहते हैं की ऐसे बाहरी वितलावडीप्रदर्शनों में न कर सारे लोगों को जाति साधन का भेद भाव त्याग कर भगवान चैतन्य की पूजा करने के लिए हरे कृष्ण महामंडल का सामूहिक के इस सूचित करता है वरियता प्रधान शिक्षा भी किया। इसी की पूजा करने के लिए सभी लोगों को मिलकर महामंत्र का हरे कृष्णा
कृष्णा कृष्णा
का बेहतर करना चाहिए। दिवाकर मंदिरों या मंदिरों में पूजा का प्रसार करना सम्भव नहीं रहा क्योंकि लोगो को इसमें रुचि नहीं है किन्तु हरे कृष्णा का वेतन कहीं भी किया जा सकता है। इस तरह से श्री चाहते पूजा करते हुए सर्वोच्च कर्म किया जा सकता है और रुकने का सर्वोच्च उद्देश्य पूरा किया जा सकता है। श्री की शूप्रसिद्धशिषय सिलसलो बाह है। जब बीवी भक्ति का सिदधांवलुच्त हो गया तो श्री कृष्ण चेतने भक्ति विधि को पूरा बताने हेतु प्रकट हुए हैं। वे इतने दयालु है कि क्रिस प्रेम का कर रहे है। हर व्यक्ति को चाहिए की उनके सर पर अधिकारी आपस को जिस तरह की गुनगुनाते दौरे हवनपुषीऔरआखरसोते सी के अधिकार का वर् श्री नाम ही हुआ है जो महाभारत के नाम जरवरमकेअध्याय जी। स्वामी ने इसका संघर्ष इस प्रकार किया
है
अपनी प्रारंभिक लीलाओं में हुए सुनहले रंग वाले स् के रूप में प्रकट होते हैं। उनके अंत सुदर है और उनका जननमेभशरीरिसहोने जैसा लगता है। उन्होंने यह भी उद्द किया है सन्यास संांतोनिष्ठाशांति परायण बाद की रिया में वे सन्यास धारण करते है और समभाव तथा शांत रहते हैं। वे शांति जगह बस्ती के सर्वोच्च घाव में क्योंकी से वादी अभक्तों को चुप करा देंगे। अनुवाद कलयुग में बुद्धिमान व्यक्ति ईश्वर के आप हमारे साथ है। कलयुग में बुद्धिमान व्यक्ति ईश्वर के उस संसार की पूजा करने के लिए करते है जो निरंतर के नाम नाम गायन करते है। यद्यति उनका वर्णन श्यामल ष्ण नहीं है, किन्तु साक्षा कुशन है। वो अपने समयों, आईओ तथा विश्वास पात्र साथियों क संदर्भ में रहे हैं
या न बस कागज मे न बुत ले पा कदम नानी बंदे हम सीरो
प
aधasnabसागननकa हे कृजयागना सिन धू लेल होई गा का हो से भी गे का श्री श्री कृष्ण ा हो हरे राम राम राम, हे हे no one to satish। जैसे आप जानते हो कर है, वो शुvदinयपीमaपबू प्रगट हुए थे भगवान कहते हैं दाहदाह में अलग अलग समय प्रकट होता हो भगवान क्यों प्रकट होते हैं पैसे सालाना विदेशी धरमससबनारथआयासभ धर्म की स्थापना के लिए। तो भगवान के जो प्रामाणिक अवतार हैं, उनका उमहर्णनशास्त्र में प्राप्त हो तक आज के वातन में अनेक व्यक्ति ये दावा करेंगे कि हम सान हैं, पर देखा जाए उनमें कोई अलबू गुण नहीं होते। भगवान जो करते हैं अलबूलीदाभीपकड़ करते हैं। तो चेस महा प्रभु प्रगट हुए थे आज से लगभग 520 25 साल पूर्व। इसलिए परिदों का उद्धार करने के लिए। रोज ठाकुर जी करते हैं परी वन हेतू तो सारा आप पसारित हुए हो परिजों का उद्धार करने के लिए। तो परम भगवान की क्या इच्छा है? सबका उद्धार हो। तो चेत कौन है? स्वयं भगवान है पर की भगवान के साथ। इस फिल्म में कहा है ये है गुप्त, अफसार भगवान है पर। पर, ये स्वीकार नहीं करेंगे भगवान है क्या? कहेंगे भगवान है जो प्रगट हुए बग्स के रूप में, तो हमें यह नहीं सोचना चाहिए बुरी उसे है स्वयं परम भगवान हैं श्री कृष्ण, राधा कृष्ण ने, राधा कृष्ण पर हुए है भार रूप में। 1 भाग यह था कि लोगों का उधार हो ये हाई नाम के द्वारा। भाग यह भी था कि भगवान देखना चाहते थे रानी का कितना गहरा स्नेह भगवान प्रगट हुए है। वे तो उनके पिता का नाम भगवान के प्रकट होने से पहले उनके 7 दिन से ही प्रकट हो जाते है। जैसे भक्तों ने है। मान ने पूरी का वा माया, महा प्रभु के प्रकट होने से पहले, उनकी सौ ना दिन साथ ही प्रगट हो गए थे पूरी उसी प्रकार चेतन महाप्रभू के प्रगट होने से पहले। और ढाला का नाम था उपनयन। मिश्र के साथ बैठे थे, जिनमें केवल 1 की ज्यादा रूची थी। अध्यात्मिक कार्यों में का नाम था जगना और जगना। मिश्रा है मिश्रा की माता, माता और पिता का नाम बड़े, भाई का नाम था विश्व, रूप और और छोटे भाई का नाम था यह नाम दिया था उनके नाना जी ने, नाना जी ने। नाना जी तो थे वो ऊँचे कोटे की जोशी थे उन्होंने देखा ये जो लड़का है पूरे विश्व को संभालेगा बचा नहीं है। उन्होंने 1 नाम दिया विश्व। और ने देख लिया था कि वो भविष्य में ये सन्यास मिलेगा। पर उन्होंने माता पिता के सूचना हिमायत क्यों नीम के पेड़ के नीचे जन्म हुआ था। और गो तो बचपन से ही मां ने प्रकट किया उनका भाव, उनका भाव क्या था, हई नाम का बचा, म का बचा, जैसे की वो छोटे थे, रोना बन करते देखा हो नाम सुना जाता था। और जो दूसरे और होंगे द्वारा, वह भगवान जब प्रकट होते हैं, अलभूतलीलापकटकरते हैं, जिसकी तुलना को हिस्सेदार नहीं कर सकता। भगवान के अनेक लीला का ज्ञान आप क्षेत्र, क्षेत्र, मे में प्राप्त करते हो। जिसकी रचना कृष्णा ने की। पापाजी ने निवास किया है और आज आप उनको लगभग हर भाषा में प्राप्त कर सकते है। के नेक लीलाएं हैं। छोटी आयु में ही उसके बड़े विद्वान मन गे थे। 8 साल की उम्र में उन्होंने अपना पाठ साला खोल दिया। उन्होंने शिक्षा प्राप्त की गंगादास पद से और 8 साल की आयु में उन्हें बड़ा विद्वान माना जाता था। उन्होंने भारत के लगभग pndisकoआजसे 500 साल पूर्व stan जाओ तो भौतिक देशी देखोगे, साधारण भारत शेर पर 5 सौ साल pura भारत के सारे बड़े विद्वानों का निवास का स्थान था pndetनवाईपनडित नाम दिया गया था। ये छोटी आयु में बड़े विद्वान बन गए थे। कोई उनके सामने खड़े नहीं हो सकता था। उस समय 1 प्रसिद्ध विद्वान थे केश कश्मीरी केश कश्मीरी आये और मिले मां से और गंगा के तट पर किसी कश्मीर ने कहा मैंने आपकी बड़ी प्रशंसा सुनी है। मां ने कहा विनम्र भाव से ये प्रशंसा मैं से 1 लाइन में ठीक नहीं बोल सकता। पेपर सजा क्यों सुने? तो मां ने कहा आप अपने संस्कृति, ज्ञान का उधार तो कैसे? किश्वर ने 1 घंटे में सौ लोगों की रचना कर दी। इसमें गंगा की प्रसंसा फिर पूछा कैसा लगा? जमाई ने सारी सौस लोग वापस सुना दिए। यह व्यक्ति 1 सुनने में कंटेस्ट कर ले। उसको सुन भाषा में सूती धरा कहा जाता है। आश्चर्य हो गयी। देखकर किस प्रकार इस सुधारण में की सुधारण बच्चा। कैसे सम्भव है कि आज 1 बार सुनने से सौ लोग के मायके अनेक परसिडलीलाये हैं। मायने उदाहरण दिया महार बुने स्वयं ले ग्रंथ नहीं लिखे हैं। उनके द्वारा हमें अनेक ग्रंथ प्राप्त होते हैं, जिनकी तुलना कोई करनी सजा। उदाहरण के लि चीजिनमापबोकेव स्लो छोड़ गए। उन्हें म किस नाम से जानते हैं? और ध्यान से देखा जाए। यहाँ लोगों में पूरे वैदिक साहित्य का सार प्राप्त होता है। और से शोक में लोगो ने क्या संदेश दिया रोर। अगर तुम चाहते हो, नहीं का नाम सदा लिया जाए। अगर मैं आपसे पूछूं आप से कौन कौन चाहते हो की हर के नाम में लीन हो जाओ। सभी हाल उठाएंगे, पर उस को प्रात करने के लिए क्या भाव होना चा? वो ने इस लोक में कहा है सनी से ना, कहाँ से भी ज्यादा पीक, अत्यंत सेंशीआजकीमीदरखे बिना सेवा करो कल हमने आपको संक्षेप में माधंद्पुरीकीकसर सुनाई थी। पुरी की कथा में शायद आपको याद हो। आपने देखा की भगवान ने ही का प्याला चुरा लिया, किसी की खुशी के लिए, तो पुरी को जब पता लगा, भगवान ने प्यार चुराया है, मेरे मन में, मेरे लिए उनके मन में भय गया था। अब सारे शेयर के लोग मेरा गुणगान करेंगे सारे। शहर के लोग कहेंगे मैं हूँ पर देंगे, आ देंगे और इच्छा नहीं थी तोउन्होंने क्या किया? चलो यहाँ से चलते हैं। और जगरतपुर ये है हर का भाव। वे भाव से सेवा की है। भगवान की वह माँ को बुले हम उधारण विद्यार्थी केश केशिनी हंसी उड़ाने लगे। प्रश्नों का उत्तर नहीं दे पाए। और तो माँ ने क्या क्या रोक दिया ने क हा हो सके हैं, प्रभु अनेक हैं। तो महा प्रभु हमें उपदेश दिया था माय वालि की संगत से। क्या मवाली जो भाव है 1 बार अपराध है यह सोचना कि भगवान ने रखा है, भगवान रूप नहीं भुभागेभगातपाऊगे बड़ा अपराध है। हा प्रभु। वह नासी में आये और 1 भक्त चन्द्र शेखर के घर में। चंद्रशेखर जहा नीची जाती का व्यक्ति था, मतलब की ब्राह्मण जाति का नहीं था। माँ कब ने ये साबित किया ऊँची नीची जाति को देखते हैं। इस जर्सी से भगवान का भक्त कौन है? अगर वो भक्त हैं तो उसे कहते है सनास। ऊंची जाति का। अगर कोई भक्त है। क्या करते हैं? नीचे जाती तुम्हे प्रभु चंद्रशेखर के घर में रह रहे थे और उस शहर में पब जाओ सो सो माँ बाबू चंद्रशेखर के घर में से थे, घर में थे, रहे थे। 1 मां आश्रम ब्राह्मण था, जो आया महापाप को मिलने और उनके साथी भर थे। तपन मिश्रा सम्मन मिश्रा माप। उनसे। उन्होंने पूछा था जीवन का क्या लक्ष्य होना चाहिए? माँ पर ने कहा कि जीवन का लक्ष्य होना चाहिए। ग चपल मिश्रा और मारा और बार बार सुन रहे थे। महा प्रभु की निंदा निंदा कौन कर रहा था? वो है नासी के सन्यासी। वरणासी में 1 बड़े बड़े सन्यासी थे जिनका नाम था प्रकाश। उनके साथ लगभग 10 हजार शिक्षे थे जो की सादिर विधानत का अध्ययन करते थे। और वो कैसे थे कैसा सन्यासी है हमारे सम्प्रदाय में दीक्षा लिया है, जैसे नशा है हमारे साथ आ गए। वैसे। तो महताब ने कहा था मां वालों की संगत से दूर रहना भी बार बार सुना जा रहा था। हाँ वो सैनी सके भगवान के जो भक्त हैं, अभी बेचती से लेंगे को जब दूसरे की बेचते कोई कर रहा है, उस शैली से ले। तो तपन मिश्रा चंद्रशेखर उनको किस भाव का था दि था यह भगवान की निंदा हो रही है। तो उन्होंने कहा अब चलिए हमारे साथ। माया वालियों की सभा में। तो वैसे तो ने कहा था किसी माह वाले के पास नहीं जाना देखा के भक्तों की इच्छा है। तो भगवान चल पड़े। जो भगवान पहुंचे उनके घर महल उनके पालन से सन्यासी ऊंचे मंच पर बैठे थे। महाप्रभु आये वो बैठें कहाँ जिस सान में आप पाउंड होते हो मंदिर में प्रवेश करने से पहले। और वहाँ उन्होंने अपनी अद्भुत किला पकड की। क्या उनके चेहरे से इतना प्रकाश प्रकट हुआ कि ऐसे लगा कि करोड़ सूर्य की रोशनी 1 साथ जुड़ गए। तो जब इन माय वाली सुन्यासियों ने ये देखा की इस सन्यासी के चेहरे से इतना प्रकाश पकट हो रहा है, तो समझ गए ये कोई साधारण सन्यासी नहीं है। होंगे गुरु आये नीचे और महापबूके हाथ को पकड़ कर कहा आ गए ऊपर ले आए। जब ऊपर ले आये तूने बिठायादसेमैयवाली सन्यास सा। माँ बहू से पूछा ने बड़े विद्वान हो, हमारे साथ बैठ कर विधान सूत्र पढ़ना चाहिए। क्या सा गाते हो? हम मानते हैं की आप बड़े प्रति सन्यासी हो, परमा पढ़ते क्यों नहीं? लोगों ने कहा। गुरु ने का देख बोल कहा तुम भूल हो तुम्हारे में ज्यादा गोल नहीं है के वो ना हो। और महा बाबुने असोक द्वारा हरिनाम की महिमा का प्रचार किया। इसका यह परिणाम हुआ। ये पूरी सभा 10 हजार ग्रामीणों की मोबाइल फोन को बंद भी नहीं करते हैं। हाजी बोले ऐसा असर पड़ा कि सब बगल सब नाचने लगे। 1 समय जब प्रचार कर रहे थे, 1 बuजsगरूजेेमeहरा दिापजिहै उन्होंने बड़ा अपमान महसूस किया, इस में लिया, इसका बदला लिया तो उन्होंने क्या किया तो उन्होंने
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खाने को 1 थाली में दाल कर महा भाव को पुचा। ये महा प्रसाद हम आये हैं आपके लिए। जैसे ही वो माँ पीछे से बाल शराब a a, a, a
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बड़ा पछतावा हुआ हमारे कल विचार होगा, यह परिणाम हो और से माफी मांगे और पूछ कर 2 होशे मने क्या कहा कानो में क्या बन ने पूरे भारत में सबको आकर्षित कर दिया था। ये है नाम के पद जो माया वाली से उन्हें आकर्षित किया। 1 बड़े प्रसिद्ध माया वाली से का नाम सर चाय चाया बलूची कोडी के विदवान थे और उन्हें सब हाल देते थे और बंगाल में मुसलमान राजा था को छोड़कर आगे आना पड़ा और समय यहां हिंदू राजा तो सो वो चाय के 1 रिश्तदार थे जिनका नाम था गोपीनाथ चाय। गोपिनादाचायया बार बार कहते थे ये वहा बबू जो है। ये कोई सुधार सन्यासी नहीं है। यह कौन है स्वयं भगवान हैं। उसे ये प्र सन्यासी है और भगवान नहीं हो सकता। इनमें भगवान के गुण नहीं है। तुम्हारा वो सन्यास लेकर आये थे, जगह पूरी न जगना दर्शन लेते ही जगह जगह जगह कै कर हो बेरोज और उन्हें उठा कर ले जायेगे। जब थोड़ी देर बाद नंदा ने भक्त साथ खोजे है, कहाँ है ये सन्यासी जो जो कर मंदर पहुँचे। उन्होंने सुना लोग चर्चा कर रहे हैं। 1 परसि संन्यासी आया था, फोलकबसूरतभगवान के दर्शन लेते ही बेहोश हो गया से उठाकर तो दिन समझ गए ही कौन पहुंचे या गया किसनिया होश में आ गए भरा ये नीला देकर बड़े आकर्षित हो गये थे, वे होश पढ़े थे। हाई, नाम सुनते ही होश में आ गए। तो सोचने लगे शायद जो गो पिनाना चाय का स्टाल सच भी हो जो जो मरिचाइ सोचते थे। ये सन्यासी केवल 24 साल का है। इतना खूबसूरत सोने ने नाके थे लम्बे हाथ जो सोचते थे। कहीं तुम्हें माया का प्रभाव नहीं आ जाए? तो उन्होंने कहा तुम बड़े जवान से न्यासी हो। 24 साल के उन्यासी में माया ने मेरे साथ रहो थोड़ी देर, तुम्हे अच्छी शिक्षा दे दे। तो उन्होंने विदांता सुता का उचारण किया कितने दिनों के लिए दिन और रात। और हा को ने कुछ भी नहीं पूछा। केवल सुनते तो साल के पश्चात पूछा महापुर में 7 दिन से सूत का इस प्रशि्लोककी समझा रहा हूँ। पर तुमने कोई प्रश्न ही नहीं पूछा। तुम्हे समझ में क्या कर रहा हूँ की समझ नहीं भूलेगा विधान सूत्र का जो संदेश है b्rाitसuनतेज प्रकाश के समान है, रोशी तेज प्रकाश हो, हर चीज साफ नजर आती है कि नहीं? अंधेरा बन हो तो साफ नजर नहीं आता तो विधान संदेश बस पस्त है पर तुमने अपने इच्छायों को जोड़ दिया है विधान से संदेश के साथ। इसके लिए असली संदेश है वो ढक गया है बादल सूर्य को ढक देते हैं फिर माँ को बोले हैं। 1 आत्मा नाम श्लोक पर चर्चा की और माँ या बड़े विद्वान थे तो उन्होंने 9 अलग अलग रूपों से उस शो की व्याख्या की और उसके पश्चात उन्होंने कहा आप कीजिये आप हो क्या क्या बोले शो से अलग टीवी कौन से 1 ही श्लोक व्याख्या की थी 64 श्लोक व्याख्या की थी सब बिल्कुल इंडिपेंडंट था ने 1 से दूसरे श्लोक में ने देखा 64 अलग तरीकों से 1 स्लो की व्याख्या कर रहे हैं में हर श्लो का बिलकुल स्वतंत्र है तो समझ गए क्या सुधार कि नहीं कर सकत यह कौन कर सकता है केवल भगवान कर सौ स्कूटियों का वर्णन किया जिसमें उन्होंने महा की गुना का वर्णन किया ने किया दर्शन दिया अपने सबुज रूप का सबुज रूप देखा तो समझ गए भगवान। तो भगवान जब प्रकट होते हैं अलभूतहीलापगड़करते हैं और आज बोध रूप भी प्रगट करते है जैसे की 6 हाथों के रूप प्रगट हो गे ओकेशन और तो आप किसी से कहो हाँ भगवान का आप सदबुज रूप प्रगट कर सकते हो कोई कर सकता है भगवान कृष्ण प्रगडहोसेै विश्णु हाथों सजा वाला गान हो और क्यूँ थे भगवान बताना चाहते थे मैं भी प्रगट हो गया हूँ घबराने। और जब माता पिता का ये रूप
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सूचना मिल जाएगी तो भगवान ने तुरंत ही साधारण बजे रूप। तो इसी प्रकार शास अनेक घटनाएँ हैं अपनी अदभुत लीला पकड़ के जो छोटे से बच्चे थे जब भी लीला पकड़ ली। उदाहरण के लिए 1 समय 1 ग्राम आया था उनके पिता के घर में अतिथि के रूप में निवास करने के लिए। जगराज मिस्र ने अतिथि का स्वागत किया और कहा बैठिए कुशाल न कीजिये और अतीत ने है जो ग्रामीण हैं अपना भोजन खुद ही बनाते हैं। सो उस ब्राहमण ने भोजन बनाया था भगवान को भोग लगा रहे थे वो शेतान माय ने आकर झूठा कर दिया। ब्राहमण ने कहा दूसरी बार पिता के ने किया फिर ये तो बड़ा अपराध है अतिथि आया हमारे घर में, हमारा श्वेता लड़का उनके प्रशासन को झूठा कर देता। उन्होंने 2 मील की दूरी पर उन्हें 1 कमरे में बंद कर दिया। रात के 12 बज गए थे घर के सब सुदेस सो गए थे। जब टीसी ब्राहमण ने भोग लगाया तो निभाए फिर से वहाँ पहुंच गए, फिर से निवाई फिर से पहुँच गए। यकीन नहीं बंद कर दिया है आखिर यह भोग किसको लगा रहे हो? मुझे तो लगा रहे हो क्या? भगवान ने अपना श्याम सुंदर गल्लू प्रगट किया जब जान से न हो ग्रामीण समझ गए। ये कौन है पोला ने किसको ह 1 चोर आये थे के घर में और उनके वो भगवान ने इनका शरीर सजा चोर आये थे वो चोर उठाकर ले जाने थे भगवान को दूर ले जाने गा इस भाव के साथ की दूर जायेंगे और गहने सब चुरा देंगे। फिर बच्चे देंगे भागते थे। आज में क्या देखे थे, वापस पहुँच गए माँ बाप। इन चिंता ने हाँ बेटा, कहा गया? कहा गया? चोरो ने उठा लिया था, वो चोर ले जा रहे थे घर से दूर, इस उद्देश्य के साथ खान को चुरा लेंगे, बच्चे को छोड़ देंगे और जहाँ भी उनका प्रयास था, कहाँ पहुँच जाते थे तुम्हाई के घर के सा। और अंत में वो घबराकर जगवानी छोड़ दिया गए, उचित दिया। महा बाबू ने अपने शिष्यों को ये आदेश दिया, जैसे कहा माह बहू ने स्वयं को केवल 800 के पर शिशु को क्या शिशु का देशिया भक्ति, सम्बंधित ग्रंथों की रचना करो और उन सान को खोजो। यहाँ के भगवान ने अपनी देवी लीला पकड़ती थी, और मोगा निर्माण या माँ काले तो, जो छे को स्वामी वृंदावन के उस समय के सबसे प्रसिद्ध भक्त है। रूपों और सनातन लिए बहुत बड़े विद्वान थे। बचपन से ही दिन रात शासन का अध्ययन करते थे और समाज में उन्हें बड़ा आदर दिया जाता था। क्यों क्यूंकि उनके पास बड़ा गया ज्ञान था? और क्यूंकि समाज में इतना उचा स्थान था इसे। जबरदस्ती उन्हें जोड़ा गया की सेवा में अनेक गंधोंरजोमे लगना। दास को स्वामी। उस समय के सबसे धनी खानदान के फूस उनके पिता की आमदन कितनी थी, माल उनके पिता की आमदन थी, 10 लाख से ज्यादा हर महीने के और सब कुछ त्यागा था। इसलिए में तो सनातन गोस्वामी वहाँ लोगों को मिलने जगनपुरी रहे है। गोस्वामी छुप छुप कर चल रहे थे, कि कोई उन्हें बचाने नहीं, क्योंकि समान लगभग प्रधानमंत्री के समान थे। तो वो चाहते नहीं थे। मुसलमान राजा को पता लगा की वो कौन है। स्वामी झारखंड से गुजर कर आने से कहा जगन पुरी में महाप्रभु को मिलने के लिए जगनपुरी में आनाज ठाकुर के निवास का स्थान था। अरेराज ठाकुर जन्म था, सलमान खानदान में थे। ऊंचे कोटी के भगवान से ब्रह्माजी का अवतार माना जाता है। तो स्वामी थे माँ लोगों को मिलने से भारत में स्टेट तो झारखंड से गुजर कर आ रहे थे। वह चलते थे जंगलों में जो वो चल कर आ रहे थे। पूरे शरीर में बस आ गयी। बदबू ने लगी स्वामी मेरा शरीर बेकार का हो गया है, निकम्मा पुरे शरीर में पुलसिया हैं, पसरी है। मैं राज यादव के अवसर पर भगवान जगना जी के लत के पैर के नीचे क्या कर लूंगा, आत्महत्या कर लूंगा। तुम तो स्वयं भगवान है। आंसर में आये ने गले लगा लिया, गले लगा, सुनाने लगा क्या कर रहे हो? मेरा शरीर बिल्कुल गंदा है, आपके शरीर में गंदा हो जाएगा। माग ने कहा नहीं, मैं अपने आप को बना रहा हूँ। सनादगसामेआजकूंजयो से भरा हुआ या शरीर का क्या बन गया। 1 खबसूरत शरीर शरीर बन गया। भगवान ने कहा। भगवान ने कहा अगर आत्म हत्या करने के द्वारा का क्या भाव था। जा कर आत्मा हत्या कर लूंगा। पर आत्मा हत्या करूंगा जगराज लाभ होगा। माँ बाबू समझ गए थे की क्या माँ बुझा सना सर। अगर आत्मा हत्या करने से लोगों का उधर होगा तो हम सब कर लेते। पर आत्मा हत्या कार्य नही है। ये जो तुम्हारा शरीर है, इसका उपयोग मैं करूंगा किस लिए? धन को बचा के लिये और मंदर के निर्माण के लिए। सनातन। को ने कहा, ये जो तुम्हारा छीनी है, नहीं है, यह मेरा है। न, ये मेरा शवीर है। अभी पुलसियों से भर गया है, तो यह तुम्हारा शरीर नहीं है। ये मेरा शरीर है। और मैंने शरीर का उपयोग करना कि सलिए? तो हमें यह नहीं सोचना चाहिए। यह हमारा शरीर है, यह हमारी सम्पति है, यह हमारा धन है, हमें सोचना चाहिए। पर भगवान का धन है। कई बार हम कहते हैं हा, सब कुछ भगवान की है, हा बर है। हमारे में भगवान के नाम के लिए। भगवान ने कहा, ये देह तुम्हारा नहीं है, यह देह मेरा है। तो भगवान ने सन आतंकवाद से वृंदावन जाओ, मनों का निर्माण करो की रचना करो। और आज आप हम ब्रज में जाते हो, तुरंत देख लेते हो। यह स्थान का क्या जिला जी, ये संभव है। कोस ने आप लोगों के संदेश के अनुसार इंसानों को साबित, खोजा और स्थापित किया। कुछ दिन हम आप लोगों के से किश र जगह हैली के दिन दक्षिण भारत की, कभी आशा में थे। 1 भगत को मिले, जिसका नाम था रामनंद रॉय, रामनंद रॉय बड़े राजपाल थे किधर के, मद्रास के और पुरी से निकलने से पहले उन्हें मोटे जान है सूचना दी दी जा। तब दक्षिण भारत की यात्रा करोगे। वहाँ बड़ा संत मिलेगा, माँ, मिले, रामद्रवॉईसे, उनसे अनेक प्रश्न पूछे, वैसे होगे हम भगवान से क्वेश्चन पूछते है? तो भगवान ने पूछा क्यों? भक्त की महिमा को बढाने के लिए वे 1 प्रश्न था, फर के लिए कौन सी सीधी सवक से कठिन है? और रावन के लिए सबसे कठिन कौन सी सीती है? भजोगी संघ से जुदा हो रहा कि भग्धोकीअंघर से जुदा हो जाना, सबसे ज्यादा दर्द का स्थान हमारा भाव होना चाहिए। भक्तों के संग में है। सर। उन्होंने पूछा की हमें कौन सा गीत गाना चाहिए, कौन सी फिल्म का पूछा, कौन सी गीत वो गीत जिसके द्वारा राधा कृष्ण का गुणगान हो और उनका गुणगान कौन से मंत्र में होता है? माह पबूजी, आज जैसा नगराली, ग्राम विश्व के खोने को में यही नाम पहुंचेगा 3 माह बहुजी की कृपा से दुनिया के खोने को नहीं है। नाम का प्रचार हो रहा है। जैसे मैं कल रात को कह रहा था, आज करुणा वायरस है। यह नाम की महिमा, यह है करुणा का अर्थ जानते हो दया। तो अगर आप दया करना चाहते हो, क्या करो, ये है नाम जा, ये है असली दया, पर, ये है असली। वायर के दिन हम आप लोगों ने पूरे समाज को आदेश किया। उनके प्रति हम आप लोगों की अनेक ली लाए हैं। हमें उनको पढना गो लीला गोलिलाजिदासुना गए, उतना ही कम है। और अगर गोला सुनेंगे तो क्या लाभ होगा। भक्ति में आकर्षण बढेगा तो माया में भरेगा देश क्या है। हम भक्तों के लिए जायजा कोतयकह प्रचार और जैसे मेरे उसी आदेश भारतीय को की क्या आदेश दिया उन्होंने भारत में जन्म ले, उसको क्या सोचना चाहिए। अमेरिका का वीजा कब मिलेगा, क्या सोचना चाहिए, उसे क्या करना चाहिए अपना उधार। और तो ये भारतवासियों का खास है। क्योकि आज भारतवासी इसका लाभ नही उठा रहे है, इसका पालन नहीं कर रहे थे। आप क्या देखते हो खोले गोले में इसाई लोग इसलाम जोड़ रहे हैं, उधर करो दूसरा बोल रहा है। तो इस शुभ अवसर पर हम सब को, वहाँ आप लोगों की श्रनागादहोनाचाहि असली उदार है। यही से ग, वहाँ पर उन्हें अपने पंचे तत्व के साथ भक्ति का जो खजाना था, उसे तोड़ दिया और खुले रूप से बाटा ये देगा कौन योग्य है, कौन नहीं है। जैसे की यह बारिश बरसती है, बारिश बरसती है, वो भेदभाव करती है, सागर में नहीं, बस में नहीं, हर जगह बारिश बरसती है। तुम बुरे भक्ती को बजाना खजाना छोड़कर सबको है नाम बा। नाम के माध्यम से स्वयं भगवान दयालु है पद। इसलिए पदिधोंकाउधाे जीवन में सफल बनाना चाहते हैं। और क्या कहना चाहिए, लोगों की शिक्षा चलना चाहिए। माँ ने क्या कहा नाम और नाम का उचारण करो। ये है सुख शांति का सी साल हाई, क्रिष्णा हार किशना क्रिश्ना हारे हारे हाल लहलनमराहलेहाले।
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