कलियुग में ध्यान की सर्वोत्तम प्रक्रिया | SB 12.3.52 | 25 Sep 2022 | दिल्ली | गोपाल कृष्ण गोस्वामी

यह वीडियो एक आध्यात्मिक व्याख्यान है जिसमें मुख्य वक्ता कलियुग में आध्यात्मिक प्रगति के लिए सर्वोत्तम साधना के रूप में हरे‑कृष्ण (हरि‑कृष्ण) महामंत्र (नाम‑कीर्तन) को प्रस्तुत करता है। व्याख्यान में विष्णु पुराण, पद्म पुराण, भागवतम आदि शास्त्रों के उद्धरणों के माध्यम से यह स्थापित किया गया है कि पूर्व युगों (सत्य‑युग, त्रेता‑युग, द्वापर‑युग) में योग, यज्ञ, पूजा आदि के माध्यम से प्राप्त होने वाले फल आज के कलियुग में केवल नाम‑कीर्तन द्वारा ही प्राप्त हो सकते हैं। वक्ता विभिन्न श्लोकों और ग्रंथों के उदाहरण देकर इस बात को स्पष्ट करता है कि नाम‑कीर्तन से आध्यात्मिक शुद्धि, मन की शांति, सामाजिक कल्याण और मृत्यु‑परिणाम में लाभ होते हैं। साथ ही वह दैनिक अभ्यास, मंत्र का उच्चारण विधि, और व्यापक प्रचार‑प्रसार की आवश्यकता पर चर्चा करता है, यह दर्शाते हुए कि यदि इस मंत्र को समाज में व्यापक रूप से प्रसारित किया जाए तो कलियुग की अंधकारमय स्थिति से मुक्ति संभव है। व्याख्यान के दौरान श्रोताओं के प्रश्न‑उत्तर, छोटे‑छोटे भजन‑कीर्तन, और कुछ असंबंधित बातचीत भी शामिल हैं, पर मुख्य संदेश स्पष्ट है: कलियुग में नाम‑कीर्तन ही एकमात्र प्रभावी साधना है।
Chapters
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दारायाजेजाराधा हर 4 हरे हरे राम राम राम राम ये हार हर 44 हरे हरे रामा रामा रामा रे ह रामा रामा रामा रामा ह हरे हरे हरे हरे राम रे राम हमारा हर हरे
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बहुत है आप सब भक्तों का हार्दिक स्वागत तो पिछले 1 हफ्ते से हमारे नाम की महिमा के विषय में चर्चा करते आ रहे है आपको सुनाई नहीं दे रहे तो शा a a a peeteksupetochaprer the can cristi
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शब्दार्थ करते सदी में किया गया। जो दया से विष्णु भगवान श्री कृष्ण का, भगवान का या नेता में पूजा करने से करने से, वह भरे भरे पर युग में रिरियाया भगवान श्री कृष्ण के चरण कमलों की की पूजा करने हलो हरियोग प्राप्त किया जा सकता है। हरी ना केवल हरे कृष्ण महामंत्र के तन से करे सतयुग में श्री विष्णु का ध्यान करने से, श्रेता युग में यज्ञ करने से तथा द्वापर युग में श्री भगवान के चरण कमलों की सेवा करने से जो फल प्राप्त होता है, वहीं कलयुग में केवल हरे कृष्ण महामंत्र का कीर्तन करके प्राप्त किया जा सकता है। तात्पर्य जग लफबाजी के द्वारा के तार श्रवण करे। ऐसा ही श्लोक विष्णु पुराण में और पद्म, पुराण तथा ग्रहण नारदीय पुराण में भी पाया जाता है। भ्यायनकृतेयजनयज्ञ स्ट्रेट या द्वा परिय द्वापरिएचनमयदाप नौती तदापनौतीकलौसंकी केशव सद्युग में जो ध्यान के द्वारा क्रेता में करने से तथा द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण के चरण कमलों की पूजा करने से प्राप्त किया जाता है, उसे कलयुग में केवल भगवान केशव के नाम कीर्तन द्वारा प्राप्त किया जाता है। शिलाजीत को स्वामी ने कलयुग में लोगों की पतित अवस्था के विषय में ब्रह्म वैवर्त पुराण से उद्धरण दिया है। अतः कल तबो योग, विद्या, यज्ञा दिवाकर सांगा भवन की नाकदा कुशल पलैरअपिदेवी। इस तरह कलयुग में अत्यंत कुशल दे धारी आत्माओं द्वारा भी तप योग, ध्यान, अर्चा, पूजन तथा यज्ञ के साथ साथ अन्य दौड़ कार्यों का अभ्यास ठीक से नहीं चल पाता। शीलजी गोस्वामी ने इस युग में हरे कृष्ण कीर्तन की आवश्यकता के विषय में स्कंद पुराण के चातुर्मास महत्व का भी उद्धरण दिया है तथा चेवो ममम लोके तब श्री हरी की तनमकलयुगेविशेषसेणा विष्णु रीतके समाचरे। इस तरह इस जगत में जो सर्वाधिक पूर्ण पूर्ण तपस्या की जानी है, वह श्रीहरि के नाम का कीर्तन है। विशेष रूप से कलयुग में संकीर्तन द्वारा भगवान श्री विष्णु प्रसन्न किए जा सकते हैं। निष्कर्ष यह है कि सारे संसार में हर 1 विष्णु मंत्र का चेतन करने के लिए लोगों को प्रेरित करने हेतु व्यापक प्रचार की आवश्यकता है, जिससे मानव समाज को कलयुग के भयावह समुद्र से बचाया जा सके। इस प्रकार श्री भागवत के द्वादश के अंतर्गत भूमि गीत नामक तृतीय अध्याय के ऐसी भक्ति विधान स्वामी पाद के सेवकों का वितरित तात्पर्य पूर्ण हुआ। अनुवाद का या पीछे दौराए सतयुग में श्री विष्णु का शान करने से, नेता युग में यज्ञ करने से तथा वापर युग में श्री भगवान के चरण कमलों की सेवा करने से जो फल प्राप्त होता है, वही कलियुग में केवल हरि कृष्ण महामंत्र का पतन करके a, a, a,
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श्री मिश्रा है कृष्णा करना सिंधू हीरबंदूजपे
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जाए शेकशचेतनभोनितनंद वेद दाग तो ये भगत का बड़ा और ये प्राप्त होता है के बारे भगवत बारहवें स्थान में भगुदमकेबारहवेस्कन में गिरेगुस्वामी करीब के लक्षणों का वर्णन करते हैं। गराबोतसुनोआपणो और आज के वातावरण से तुलना करो आपको लगेगा जिस की रश कुछ दिन पहले तो स्वामी ने ली के लक्षणों का वर्णन किया है और इस रहा शो में क्या कहा जा रहा है। इस शो में सुने हैं जो लाभ प्रजा को सत्य प्राप्त होता था भगवान का चिंतन करके यादा साल शती में लोगों की अवधि 1 लाख साल तक होती थी और 8, 17 हजार का पे सारी से पायका चिंतन करते थे। पर बाद का ध्यान करना और उसके ऊपर इसके बाद आया क्या रोका और साधन जिसमें शुद ब्रामण की जो ब्रा वो मंत्र के जलन से अग्नि पैदा करते है और इस ने शुद्ध वस्तुओं को जाता था। ये तो st t com a 10 बिना और कम हो जाती है। r में प्रति का साधन किया था, क्या था तुम्हारे चरण कम होगा
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लाभ जो कि सदी में प्राप्त होता था, वारगेंटननकेद्वारा रोते प्राप्त होता था, प्रावी युवा प्राप्त होता था वर्गेचरनकबलगाय पूजा वही लाभ आपको प्राप्त हो सकता है। कैसे हरिनाम के तो शास्त्र में हरिनाम के विषय में आप अनेक श्लोक प्राप्त करते हैं और इन लोगों द्वारा के आर्थिक देश है कि हर नाम जो है सबसे सरल साधन है कली कली राव भगवान दिवि नाम तो भगवान के नाम में और शासन में आप नाम की महिमा के विषय में कई जगह कई शो है के द्वारा जिनमें नाम महिमा का ज्ञान भारत होता है तो परमार को कैसे नाप के द्वार भगवान के नाम अभिन उदाहरण के लिए एक्टर प्राप्त होता है ना पूरे शोले मुक्त विदा। तो भगवान के जो नाम है वो क्या है चंदा कि वो वो क्या बन जाता है भगवान के नामों के विश्व में कहा जाता है ज्ञान या ज्ञान से जो भी नाम लेगा s नाम के 4 के दवारा आप मुख्य प्राप्त करे तो ही राम की महिमा के विषय में यिदापडउतनाहीकमहै और ये हरी राम जो है कहा से प्रकट होता है। आगे धीरे राम। तो आप 1 श्लोक पढ़ते हो जिसमें माम का ज्ञान होगा। श्रोता सामी कहते हैं श्रोता स्वागत कृष्णा गार के जो नाम है वागा के नाम। आप सुनोगे नामों में भी ध्यान रख सकती है। सुनने से क्या प्राप्त होगा जो कलयुग में नाम का उच्चारण बड़ी सरलता के साथ किया जा सकता है। उन्होंने और बना दिया चीते के हरी राम को का प्रचार बढ़ा देंगे और द्वारा हर नाम को बुक भवi्यवनीेयापृथ्वी तहार से ज्यादा के कोने को भगवान के नाम है बिलकुल प्योर देर कम्पीट बगवान के नाम के 4 से किया बहुत आकर्षण है जिसके कारण हम आगे लगा नहीं होते। वो तुम्हारे नाम जो है ये परिवार का p i श्री कहते है भगवान के जो नाम है वो अत्यंत मीठे है। mela ka gun anime आज्ञानता का प्रभाव है इसलिए हम इसका मापन महसूस नहीं कर सकते। यह है भरगेन मीठे हैं मीठे का मतलब है कुछ मीठी होती है आप को पसंद करता है, मीठे है हमें दिन रात ना चाह
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a, a, a, a bete लीला, beti krishna is रोज भगदमसु कभी आपको ऐसा लगता है हमने सुन लिया है बस और नहीं सुनना आप भगलगिधररोजपढते हो लगता है मैं और नहीं सुन भगवान के नाम मीठे पर हम ये मीठे बनाने हैं। mass, vida, joins, bimari, meta, मारी, tekoatye तो साधारण स्थिति में अगर कोई अच्छा बना, खाना भी हो, अगर आपको बीमारी हो। आएगा कहे हैं मारे के नाम नीला अवधिया की मारी है, क्या है वेदिया की विमारी, काम कहते है और कारण हम भगवान के दामों के प्रति आगे नहीं तो प्रश्न यह है कि कोई
उपाय है
ऐसी मस्या, कोई उपाय है है क्या है? उपाय है राज्य के राज्य का शासन ruchi पहुँचे वृंदावन जाओ भक्ति से 10 दिन के लिए बाकी संबंध, शिक्षा का ज्ञान जान। उन्होंने कहा था कि प्रति सादर गंध की रचना कर। यूरोप सभी ने अनेक घंटों की रचना की है। शुभ दिन आएगा है, भगवान के हते हैं अविध्या के कारण हम भगवान के नाम का मीटर उपाय क्या है अगर ध्यान परगे जॉब करोगे। मेरे जॉब के उचालनसेयेजोमैल है अब सबका अनुभव है वक्त जुड़ने से पहले गहरा है जो भक्ति की विधियों का पालन आराम करते हो, क्या महसूस करते हो दिन बिदेनमीहरीनाम के प्रभाव का माया का प्रभाव कम होता है। तो 1 हरी राम है और नाम कहाँ से आ रहा है? रा ज्ञान दिया है तो भगवान के जो नाम है वो भगवान से म a r, e, e, o, a, e, a, e, a, e visvsiune और जीना इतना कठिन कर दिया है जो बच्चा और औरत के घर में कोई नहीं ना मुनी नहीं तुम बच्चे को कोई नुकसान नहीं दे सकोगे नादुन उन्होंने राज की मां को राज की मां मिराज मुरी ने सान लिया में मुनि ने क्या किया था ज्ञान दिया, ला ने ज्ञान प्राप्त किया। कब अपनी माता के र सो। आज नव भक्ति का ज्ञान है न भक्ति। ज्ञान का वर्णन आरम्भ कैसे होता है नाम लेना और सुना तो श्रम कितना दोनो बहुत महत्वपूर्ण है बड़ी गंभीरता से संदेश को सुनता हूँ क्या, बड़े धन। ये भक्त बहुत सावधानी से सुनता है। वो सावधानी से 4 तो शोर कितना अनेक साधन है यह इसका वर्णन है। भगवान के जा तो शुरू करेंगे, ध्यान से उसका पूरा लाभ है। सो आगे शुक्र इसी विषय पर वास करने का क्या करे के सेराज से clugmedosedosajha kya, na india e krne prayas, so,
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क्या क्या है भगवान के नाम और इसके द्वारा क्या? तो भगवान के नाम में कोई हमारा प्रयास, हर हार, हम रुचि बढ़ाए, हर नर, नही, जीते, रुचि ब्रेकिं, उल्दीतेजीके साथ ही पदिकाकर्शमेआपका कम होगा। दक्षिण भारत की यात्रा कर रहे थे या निकलने वाले थे? सर बचा मायावती उनको करोगे वहा 1 भग जिसका नाम है तो वह उनसे अनेक प्रश्न पूछे और ये 1 था। हमें किस विषय का चिंतन करना चाहिए? न के नाम की महिमा चिंतन करना क्या महिमा है उसका चिंतन करना च तो भगवान के नामों के विषय में जितना सोचोगे ने तेजी के साथ जिंदगी मजदूर सबसे महत्व पर भगवान, आसानीसे किसमें नामों आप में अनुभव है आज समाज में ला के साथ नाम का और इस नाम के द्वारा आप पढ़ते हो। hata thakur got hit nce 1 is so dene ke liye do to te होशियार के वैश्यों को बुलाया और पूछा हमारा उद्देश्य है कि हम करें। लोगों को पता लगा कि वो इतना ऐसा संत नहीं है लोगो द्वारा। उन्होंने कई वेशोनेबुलाकर पूछा तुम से कौन ये नारे देने को तैयार है उसे विश करने के लिए शाम वाशोंनेकहाहमतो उसके सामने नहीं जायेंगे।
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a उस साल को छोड़कर अगले साल में जाने वाले थे, जब देखा क्या मुझे इसे उधार करने 2, इसका सुधार करने, 2 भैसों का भाव का काम करने 2 so ja a prirtnoऐsaivartn rasa than सुन उसे खुद ही करना शुरू मे 1 प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन दिनों में बंगाल में मुसलमान राजा था और चान काजी में बहुत चानकाजीने प्रयास किया था। हरिदास को हरिनाम से लूले जाने पर हरदास ने कहा किसी हालत में है, ये बद नहीं। हरीदास को राजा ने बुलाया। राजा ने कहा तुम जानते नहीं, हम लोग सलमान खान से है। हम लोग किसी हिंदू के घर से चावल का दाना नहीं लेते और उनके भगवान का नाम स्वीकार नहीं किया। इसको राजा बोले गए। उसने कहा हरदा साब मुसलमान है, हिंदू राम नहीं जो हीरा से इनकार कर दिया। टोटल। राजा ने कहा, नहीं जाओ बजार को कितने बजारों से घसीदाबाइस बजारों से में घसीटा मगर। ये अभ्यास था कि दूसरे, तीसरे बजार में गुजरे। यहाँ उन्होंने देखा कि हर 10 कंपीट रहे इतने तेजी के साथ और कोई निशाना नहीं दर्द का कोई किसी प्रकार का दर्द। तो 22 बजार में पहुंचे 10 ने सुन लिया था। जो सेवक उनको पीट रहे थे या क्या कह रहे थे। अब राजा जो है हमें जिन्दा नहीं, छोड़ेगा को मार नहीं पाए। सो दास ने, भाव ने ऐसा विवाह किया। खुश होकर राजा को सूचना मिली कि हरिदास का कीमत हो गई है। राजा ने कहा कि वो समान नीतियों के अनुसार ppi किस का फायदा दिया। das shri सूचना बन गई। वो है दास, जिसे सर्फ ने कल मर गया है तो नाम को अपनाया है। वो राजा तोहार नाम जो है, हमारी सुरक्षा है। किस के साथ माया से। अगर हम बचना चाहते हैं तो सबसे सरल हथियार क्या है? यह माया देवी 1 समय थी। इलाज को। आकशुतकेनेगेऔअब देखते हो कि माया देवी प्रयास करती रहती है। भक्तों को विशेष करने के लिए माया देवी ने बड़े खुबसूरत रूप से करने का प्रयास किया। वे जुड़े हुए थे, बड़े ध्यान से। तो क्या, so a, dos, os, a con a ये हाई नाम का सो। भगवान ने अपने नामों में पूरी शक्ति दी है। हर नाम के विषय में, जिद्दा सुनो में हमारा उदेश्य क्या, हम रुचि बुलाए, सो चेतन बापू उन्होंने हर कोने में दिया था और सब क्या मे चेतन मा। gssaprgsesकesat, hzारomayovani, pad, myovaliie, asi ये सुन सकते थे। बर्दाश माँ तो उनके माँ पर विनम्रता के साथ बैठे बैठे, जहाँ की लोग पान को होते हैं। मंदिर में जाने पर उन्होंने अपने दिन में नीला ऐसा प्रकाश पकड़ा जिसके हजारों का प्रकाश तो वो पूछ रहे थे आप तो हमारे संप्रदाय के हो और आप हमारे साथ बैठकर दादा। क्यों नही क्या पागल हो। गुरु ने देखा और क्या कोई गुल नहीं है। मैं मूर्ख हूं, इसलिए हमें क्या दिया। फिर वे हो गए थे कि सारे हजारों बन गए। इस परकार शरपाजबविदेगएवसाथ लगा के कोई नहीं था। प्र नाम के उचारण से कितने ल जुड़ने लगे से जुड़े जो इस कलियुग में यह नाम जो है सबसे संसाधन इस कलियुग कलयुग में। अब चिंतन करने का प्रयास करोगे। भगवान का आप कर। पाओगे पहाड़ों के ऊपर से हार जाते हैं। henan प्रैक्टिकल। तो चेत राम को राम के कुछ व्यक्ति में उसका उधार हो सकता है। to har राम के can के then stages of pre and or e ka e o, n, o, e a simple plis set jude करने में और से से अनुभव करते हैं क्या कि हाय राम के उच्चारण से सचमुच हमें कुछ ऐसा धन प्राप्त हुआ भाग के नामों के उच्चारण से क्या लाभ हाय राम तुम बहुत ही आकर्षक है ध सो हाई राम जो है कोई कल्पना e s real thing और आप खुद पापा से पूछा गया था स्वामी जी आप कुछ जादू कर सकते हैं। स्वामी जी ने कहा नहीं है कोई जादू कोई जादू नहीं कर सकता ने आगे पर 1 जान मैं तो पूछा क्या जानोगे मैंने हजारों बच्चों को ब्राहमण बना दिया।
जो व्यक्ति
हर प्रकार के बुरे काम में जुड़े थे उनको पूरे काम को छुड़ाकर जाने व्यक्ति बना। तो ये ही वो पहला स्टेट जो है अपराध करते हो आपका ज्ञान बढ़ता है जब आपका परिचय होता है 10 अपराधों से और प्रयास करते हो उन्हें बातों से बचने के लिए स्टेज में पूरी का प्रयास होना चाहिए में रुचि बढ़ाए और हरि राम के प्रति आखिर बढ़ना चाह हिया में रूचि कैसे बनेंगे राम का उजार तो और वहां के जो नाम है उनका लाभ तो हर स्थिति में है। अगर आप अपराधों से रहे थे जॉब करोगे के की 10 म अपराध है। अगर आप अपराधों से रहित जॉब करोगे तो क्या बुरा ना पाए। तो हाय राम का उच्चारण हमे ने ध्यान से करना जाए और भाई ना भगवान में कोई अंतर न और अपराधों से बच सका मतलब हम 10 अपराधों का वर्णन करते हैं। रोज क्यों पूरा लाभ अनेक a प्रणाम होगा के 3 ने अपनी माता उधार और बिना भेदभाव के सबको ज्ञान देते तो भर कर ते थे अब सब पर दया बरसरे हो अपने माता प a man अपराध क haa the rd क्या उनके मन में थोड़ा क्रोध था किसके प्रति सोचा कि बड़ा बेटा घर से गया, इसलिए में छोटा बेटा भी थोड़ा कोजथाा मन। जब भक्त उनकी मां को कहते थे कि ने अपराध किया तो कैसे संभव तो जब भगवान को प्रणाम कर रहे थे सो अच्छी बात ने क्या किया भगवान के की धूल को लेकर बापू देखा। prem apradh शिव जंगल में हरिनाम शुरू किया था तो फिर वहाँ से चुने भक्तों को निमंत तो 1 ब्रामण था जिसने प्रयास किया था मा मा ह ना में उपस्थित होने के लिए और रो दिया था गंगा में जा रहे कल मैंने प्रयास किया था तुम्हारे केतन में उपस्थित होने के लिए और तुमने हमें भक्तों ने रोक दिया तो मैं तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हे कभी भी भौतिक सुख नहीं मिलेगा तो हमें अपराध से बचना और प्रयास करने पर हर का समूह तो माह बहू है। नाम का प्रचार बहुत आवश्यक है। यह लिखा है कि है राम का प्रचार करेंगे और बी के दास समाज सुखी तो हम सबको क्या करना चाहे गंभीरता से प्रचार करें और अपनाए सनातन की आयदाबसागुरको मिलने जाते थे सागु सलमान खून में था की अंदर नही है, वह सनातन कह का प्रचार है, अचार ने होगा, अचार है और प्रचार पर आप में दूरी गुण प्राप्त है। अचार में तो यह होना चाहिए, भक्त भाग में अचार भी होना चाहिए और 4 भी होना चाहिए, 4 भी होगा, प्रचार भी होगा तो क्या प्रचार का अच्छा तो भक्त द्वारा क्या सुन उधार कैस उसे कहते हैं जिसका कुछ भीतरी हो कोई अच्छा नहीं है। और बुरे काम में तो उनका प्रश्न इनका उधार कैसे होगा? ठाकुर ने क्या कहा हा हा पबूचितनकरिया, यह चिंता मत करो, उधार कैसे होगा? है ना मालिक राम करेंगे उसे क्या होगा? तो सबसे महत्वपूर्ण है। अगर हम ध्यान क्षेत्र में प्रगति करना चाहते हैं और अगर हम पुजलपातिादि में जुड़े रहेंगे ऐसे देखा जाए। शुरमकेतनमके कई है 11 से 1 समय था हम भारत में कोई चैनल टेलिविजन चैनल नहीं था और आज रूस से ज्यादा चैनल है उनका भी भगवान के
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के मा bad to as भक्तों को बड़ा जरा उदेश दिया और सबसे पहले क्या sbse meहtवapूrn कि हम सब के लिए सबसे महत्वपूर्ण सेवा है और जितना आप करोगे उतना ही करे से मिलने। कई बार प्रापा जी ने इस संस्था की स्थापना की थी। निक में भक्तों को कहा था रोज करने को कोई swami sami 32 वाला गो गया kota ba discount और किसी हालत में भी जॉब करोगे तो पिछले 1 हफ्ते से सुनते मारे नाम की महिमा के विषय में जितना सुनोगे उतना ही कम है और शोर के करोगे इस विषय की महिमा का उनका भाव भी प्रभावी हो रहे हैं। 1 समय प्रभाजी के 1 गुरु भाई थे पापाजी 1 ड्रक टॉनिक बनाया था पापा जी for farmer tonic बनाई है सो, अबे बाबू drकचoनीमेरीरuci नहीं भगवत प्रेम पास formul modi formula formula to reward to do i rs pura lab to kya krna sbko छोडकर ke sat jan kya koi na e nam e आप परफर्जी के ग्रंथ में देखते हो, लगभग हर श्लोक के तार पे महिमा और अपराध से कैसे बचा के क्या आपका भक्ति का सुन्दर बगीचा नष्ट हो जाता है। जब 1 पागल हाथी हो छोडदाउेशब्दंमे अपराध होगा पूरा पूरा लाभ प्राप्त प्रयास करना। अपराध तो इस शो के तहत चंपाजी स्वामी का वर्णन करते हैं स्वामी और लोगों के द्वारा यह स्थापित कर रहा है क्या कि हमें इस कलयुग में बार के लाभ से कोई लाभ प्राप होगा जो दूसरे युगों में दूसरे साधन के द्वारा। दूसरे शब्दों में कई श्लोक हैं जहाँ कि भैना महिमाओं का पढ़ेंगे तो क्या रूचि मोस्ट, इम्पोर्ट और हमें को मिला जब पूछना चाहे प्रभु जी, आपको मेरे में कुछ कमी दिखती है, कुछ सुधार मुझे करना जाए। 1 दूसरे भक्तों को मिला हमें उम्मीद करते हैं हमारी तारीफ करेंगे तुम कितने अच्छे को कितनी अच्छी सेवा कर रहे हो। पर हमें ये भी प्रयास करना चाहिए पता लगाने में क्या कमी है जिससे मैं बन सकता हूँ तो पूछोगे आपको ठीक होते भी बोलेगा हमारे मन में यह भाव रहता है लोगों की तारीफें तारीफ तारीफ नहीं होनी चाहिए पर हमें ये पूछने में क्या सुधार मैं कर सकता हूँ इसके द्वारा लाइफ में आगे बढ़ सके हम सब का उद्देश्य क्या है जीवन में जुड़े तो jan purnima purnia okay, what you words the second so sol me बहुत जल्द गीता का menatsui gekr k
hl krishna tलepnामgrwaज हर सो इट विद, द ब्लेसिंग ऑफ गुरुमान, जो, ली, मैं, कर, पाई, श्रीमद, भागवत, मारिता और गुरुमाराज हमेशा से जब से लॉकडाउन हुआ है वो ही हमेशा जब टारगेट देते हैं तो ब्लेसिंग भी देते हैं। तो हम सब को कभी भी ब्लेसिंग लेने के लिए कंजूसी नहीं करनी चाहिए। वि, शुड, बी, आलवेज, हर, विद, हिम, सीकिंग, इस, ब्लेसिंग, फॉर, बुक, डिस्ट्रीब्यूशन, बिकज जितना हम प्रचार करते हैं होली नाम का अगर हम भागवत हर घर में नहीं बन जाएंगे तो यह कैसे सब लोगों तक ले जाएगा। तो इस पर जो आज हमने श्लोक, सुना और गुरुमाराज के जो आदेश हैं उसी को आए फॉलूआंड। लोगों को हम यही समझाते हैं कि जब मैं कर सकती हूँ तो कोई भी कर सकता है। आप सब कर सकते तो अभी भी समय है, आप सब कर सकते हैं। पा करके आपसे जुडिए।
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