सबसे ज्यादा भाग्यशाली व्यक्ति | SB 3.25.25 | Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī | 8 May 2022 | ISKCON Delhi

Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī and other speakers discuss bhakti yoga principles, removing ego and anger from devotees' lives, and practical strategies for temple establishment and youth engagement. They cite the Bhagavad Gita and Bhagavatam, address mental health and overcommitment issues, and emphasize weakening ego through devotional service while maintaining bhakti in the modern technological age.
Chapters
तो आप सब बैठ जाए
के बीच
में स्वागत करते हैं गोपाल कृष्ण गो
महाराज का
तो महाराज जी के बारे में जितना भी बताया जाए वो कम है फिर थोड़ा सा आप सबको बताऊँगा so is on opaiscosomimarag is a gps governing, corning, commison and also initiating is petrol master sाthisाथ gorुmaremtcoliicao का बात करे to maharaj is from maguvesecanita and from sopore महाराज जी ने ना बैजेस फ्रॉम डेरियस कॉलेज, महाराज जी ने दिन सर्विस सर्व किया इन pकसiकotnआफदेc गुरुमहराज पार, nintीn, सिxtynine camera पे और फिर उसके बाद से महाराज जी ने बहुत सारी जिम्मेदारियां निभाई महाराज जी उसके बाद से ही इंडिया के भी जीबीसी हैं और उसके बाद से लगातार गुरु महाराज और मिशन में सेवा में लगे हुए हैं और अभी करेंटली हमारे गुरु महाराज के ऑल ओवर वर्ल्ड में अराउंड थर्टी थाउजेंड प्लस साइकिल्स है तो इसलिए आज हमारे गुरु महाराज हैं हमारा बहुत बड़ा सौभाग्य है महाराज जी ने स्पेशली सभी निकाला सबके लिए के धन्यवाद देते हैं महाराज का तो ये सभी भक्त महाराज जी महाराज से पहले 34 बार पूछ चुके हैं मैं बताता हूँ गुरुवार से की जो हमारा पोस्ट पेशन है कने पर सोल टू कृष्णा जो के विपल फेस्टिवल करते हैं तो यही सब है जो कि प्रचार करके बच्चों को कनेक्ट करते हैं उनको राम चैटिंग करते हैं और हर इसमें से 1 फेसीलेटर के अंडर में अराउंड एवरेज टेन टू फिफ्टीन स्टूडेंट्स हैं जो कि चैंटिग करते हैं उनको डेली बात करना उनसे उनको कॉल्डिरेटकरना प्रोग्राम सी बुलाना और ये सारे डुबोटीजअक्रॉस एट स्टेट से आए हुए हैं 8 राजू से फ्रॉम मोर देन थर्टीफाइव एरियर्स 8 राज्य जैसे बात करें तो भी में हरियाणा, पंजाब, मुस्करा, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ सो इतने राज्यों से हमारे पास साथ ही हुए हैं और ये महाराज छोटा सा इंटोडक्शन है सभी भक्तों को और इन सब भक्तों ने महाराज प्लेज लिया है इस बार जो विपलोफेस्टिकल करने जा रहे हैं गोवरधन में, तो अबकी बार अबकी बार की बात 5000 भक्तों का काग लिया है भोतीपुरतामें 5000 भक्त जो कि कम से कम 2 से 4 मदद जब करते हैं और सब गोवर आयेंगे तो इन सब भक्तों ने महाराज क्रेजी लिया हुआ है ये सब भक्त सब स्टूडेट को जोड़ेंगे हमारा काशी वर्जन हम सबके
लिए थै hy कrs्naसंठीकहै प्रसाद खाया
ज्यादा
तो नहीं खाया ज्यादा दादा खाओगे तो फिर नींद न जाए
जायगा दम हव जब हार जायरा जब वा जब हार गोपी जाना वाला भा व धर जाना वाला भा व ध हरा जब जब हार सोदान दन बज जाना न जाना
शोध
बज जाना रनगनजमगतेरा बन 4
हम
तेरा बना 4
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बोले प्याला दादा
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रे हाय रामा रामा रामा रामा हरे
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से हरे हरे राम रे राम आम बार हर हरे हरे राम हरे राम राम राम ले ले रहले राम रे राम रामा राम हरे
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राम रमबारमारमा हरे रामा रे
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हमरामह हाय रामा बा हर
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राम रामा हरे राम रे राम
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हरे रामा रामा राराहरेरा राम राम
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राम राम राम माले रा
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रामरा god god s cusa as सब भक्तों का हार्दिक स्वागत ये प्रोग्राम जो ह for on तो आज हम को shrembgua पस लोग आप में से कितने भक्तों के पास smartphone sarmat स्मार्टpon⁇s प्रॉपर की किताबो को बिठा हो for the so ye he slogan atm संगम मामावरयाशांबिद ना सायना कथा यून
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शामदो था
सना
शदान
अच्छा सताम प्रसंग संविद था भवनतीिकरनरसायना था वर्ग वर्क मनी श्रद्धा भक्ति, रंक्रमिशतीरेसतान शुद्ध भक्तों के संग गति से मम्मा मेरे बेरियर अलौकिक कार्यों समविगजरकासेअवंती हो जाते हैं। हृदय को कर्ण कान को रस अच्छी ल करने वाला था। उठाएं तक उसके जोसड़ाअनुशीलन सी देवनसी आंसू तुरंत अपवर्ग मुख्य के वर्ग मनी मार्ग पर श्रद्धा विश्वास भक्ति, आकर्षण भक्ति भक्ति भक्त, अनुक्रम स्थिति परमस आएगी धन्यवाद,
शुद्ध
भक्तों की समिति में श्री भगवान के लिए लाय तथा उनके कार्य, कलापों की चर्चा, काम तथा हृदय को अत्यधिक रोचक एवं प्रसन्न करने वाली होती है। ऐसे ज्ञान के अनुसरण से मनुष्य धीरे धीरे मुख्य मार्ग में अवसर होता है, तत्पश्चात मुक्त हो जाता है और उसका आकर्षण सिर हो जाता है। तब असली समर्पण तथा भक्तियों का सुभारंभ होता है। अनुवाद अनुवाद पिछोर शुद्ध भक्तों की
संगति
में श्री भगवान के दिलाऊं तथा उनके कार्यकलापों की चर्चा, कान तथा हिले को अत्यादि रोचक एवं प्रसन्न करने वाली होती है। ऐसे ज्ञान के मनुष्य लडने मनुष्य धीरे धीरे मुख्य मार्ग में परिक्षण होता है, तत्पश्चात मुक्त हो जाता है और उसका आकर्षण सिल हो जाता है। तब असली समर्पण तथा भक्तियोग का समारंभ होता है। यहाँ पर कृष्ण भाव अमित तथा भर्ती में अवसर होने की बली वर्णित हैं। पहली बात है कि वह ऐसे पुरुषों की संगति खोजे, जो कृष्ण भक्त थे और भक्ति में सेवा में लगे हुए हैं। ऐसी संगति के बिना प्रगति नहीं हो सकती। मात्र कोरे ज्ञान या धन से यथेष्ट प्रगति संभव नहीं। मनुष्य को भौतिकता वाले पुरुषों की संगति त्याग कर भक्तों की संगति खोलनी चाहिए, क्योंकि भक्तों की संगति के बिना भगवान के कार्यकलाप को नहीं समझा जा सकता। सामान्य रूप से लोग परम शक्ति के निर्म पक्ष के प्रति आश्वस्त हो जाते हैं। भक्तों की संगति न करने के कारण वे यह नहीं समझ पाते कि परमशक्ति भी पुरुष हो सकता है, जिसके अपने कार्यकलाप में यह अत्यंत कठिन विषय है और जब तक परमसतकेविषय व्यक्तिगत जानकारी न हो, तब तक भक्ति का कोई मर्ज नहीं ना। किसी ने राडार की भक्ति या सेवा नहीं की जाती है, सेवा की वृत्ति की होती है। अभक्तगणणश्रीमतभागव या अन्य किसी वैदिक साहित्य में वर्णित भगवान के कार्य कलापों को पढ़कर कृष्ण भक्ति को नहीं समझ सकते। वे सोचते हैं कि ये कार्यकलाप काले थाएं हैं, क्योंकि उन्हें अध्यात के विषय में सही से शिक्षा नहीं दी जाती। भगवान के कार्य के लाभ को समझने के लिए भक्तों की समति करनी आवश्यक है। और जब ऐसी संगति के फल शुरू वह मना करता है और भगवान के कार्य कलापों को समझने का यत्न करता है, तो मुफ्त का माल खुल जाता है। और वह मुक्त हो जाता है। जिस व्यक्ति की भगवान में आस्था होती है, गोस्तिरहोजाता है और भगवान तथा भक्तों की संगति के लिए उसका आकर्षण बढ़ जाता है। भक्तों की संगति का अर्थ है भगवान की संगति। जो भक्त यह संगति करता है, उसमें भगवान की सेवा करने की चेतना करती है और फिर भक्त योग के दीप पद में स्थित होकर धीरे धीरे सिद्ध हो जाता है।
mega a danish bande ham shri
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rupmsgjaasdvetm स्वधuतmasitकिष्णa चेतने श्री राधा कृष्णा पद कृष्ण करुणा सिंधु दीन बंधु गोरांग debina
pa रे ररे
राम हरे राम राम
राम
आप भक्तों ने सुनाए पहले बा लोग आपको प्राप्त होता है। श्रीमान भगुतमके द्वारा आपको बहुत ही महत्वपूर्ण शिक्षा प्राप्त हो रही है। और इस शिक्षा का में लाभ उठाना पापाजी की इच्छा थी कि भारतवासी बागोदमपरेऔरअपनाये तो इस तीसरे स्कल में आपको पीले देव विषय में ज्ञान मिल रहा है। पीर देव कौन थे? भगवान के अवतार अवतार थे। भगवान के जो प्रामानिक अवसान है, उन सब का वर्णन शास्त्र में होता है। आज आप देखते हो कि कई व्यक्ति यह दावा, करेंगे और भगवान के अवतार हैं, पर उनका कोई प्रमाण नहीं है। जो प्रामानिक अवतार है उनके विश्व में आपको ज्ञान प्राप्त होता है। क सो की माता का नाम था devaki, पिता का नाम था बहुत ही तेज sci
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arkas तो देवहूती को पता था उनका बेटा कौन है? न करता। उन्होंने उनसे प्रश्न पूछे। इस 25 अध्याय में भक्ति योग के विषय में अब ज्ञान प्राप्त करते है। भक्ति योग की महिमा का ज्ञान प्राप्त करे। तो देवहूती ने पूछा। उन्होंने कहा तुम मेरे आध्यात्मिक नेत्र हो, ट्रांस और तुम्हारे द्वारा मुझे शिक्षा चाहिए। मैं इनको से कैसे छुटकारा प्राप्त करते है? जो बुद्धिमान व्यक्ति है वो क्या प्रयास करता है और ज्ञानता से बचने के लिए उसकी इच्छा रहती है। क्या असली ज्ञान प्राप्त था और रेवती को पता था बेटा कौन है भगवान तो भगवान सुना बड़े प्रसन्न हो। गे। प्री महाज ने पूछा स्कुदिवगुस्वमी ने जिस व्यक्ति का अंत आने वाला है, उसे क्या करना चाहिए? शकुदवसवमेहुथककि इस पूरे विश्व का प्रजा को लाभ पहुचेगा। जो भगवान के भागते हैं, उ केवल ध्यान रुचि लेते हैं। क्यूंकि इस ज्ञान के द्वारा आप भर सकते हो। तो इस अध्याय में भक्तियों की महिमा ज्ञान हमें प्राप्त हो रहा है लोगों के द्वारा। तोरे वो कह रहे कि शूल भक्तों की संगत, लोगे और भगवान की लीलाओं और उद्देश का लाभ उठाओगे को आपके, कान और हृदय सब संतुष्ट होंगे। दूसरे शब्दों में अगर आप आध्यात्मिक ज्ञान के का लाभ उठाओ तो क्या अपने आपको संतुष् कर सकते है? पौधे समाज में चाहे आप कितना प्रयास करो, कितनी भी सवा प्राप्त करो, आप निराश असती खुशी प्राप्त कर सकते है, कर सकते हो। है। रामाजी कहते हैं मेरा दिल हो। यह नहीं जानते कि असली सुख कैसे प्राप्त हो सकता है। आप सब जुड़े हो कृष्ण भक्ति के साथ। आपको पता है क्या जीवन में क्या अध्यक्ष होना चाहिए और सभा में आप हो। क्या े फेसिलिटेटर फेसले आप सब ने जिम्मेदारी उठाई है। दूसरों की अज्ञानता को दूर करने और हम सब ये जिम्मेदारी उठा क्या हम, हमारे जीवन को सुधारेंगे, हमने दूसरों का जीवन सुधारना है। बड़ा दुख दुख जो वैसा है तो वो देखता है कि व्यक्ति प्रयास कर रहे हैं। भौतिक कार्यो द्वारा संतोषण प्राप्त करने के लिए वो ही कैच होती है का उधार किया जाए। वो जो वैष्णव भक्त है, वो जानता है कि ध्यान ज्ञान के बिना जीवन सुखी नहीं नहीं हो सकता। आज सबसे बड़ी समस्या है कि समाज में हम चारों तरफ देख रहे हैं। हम ये ब्रिज जानने का प्रयास नहीं करते। जीवन का लक्ष्य बना है। कौन रूप स्वामी 2 भाई थे जो कि उस समय के सबसे धने राज्य के राजा का शासन करने चेतने महाप्रभु को मिले। तो उन्होंने कहा मेले में, समाज में लोग हमें बड़े बुद्धिमान समझते हैं। हम यह भी जानते कि हमारा असली शुरू क्या में तो जो भक्त हैं वो इस ज्ञान को अनुकूल करता है। वो चाहता है कि सब इस ज्ञान को का लाभ उठाये। तो यह कहा जा रहा है कि जो भक्तों की संघ में अगर हम भगवान वीराओं चर्चा करेंगे तो वो ज्यादा आनंद का होगा और ज्यादा तेजी के साथ अपना सकोगे। जैसे कि अगर आपने क्लास को सुनना है, दूसरे भक्तों के साथ बैठकर तो ज्यादा सरल होगा। तो हमे क्या करना चाहिए? उस की संघ की इच्छा रखी। तो कपिल देव भगवान ने अपनी माता को कहा कि भक्ति योग 1 साधन है जिसके द्वारा आप इन कसो सी छुटकारा प्राप्त कर सकते है। ये है शास्तों का निर्णय, श्रीमद भागवत का निर्णय क्या है? भक्ति योग? साधन है? भगवत गीता का निर्णय, क्या है? भक्तियां माम श्रीमद भागवत में शुरू से अंत तक आप देखते हो कि भक्ति के विषय में चर्चा की जाती है। प्यार से लेने। वैसे तो सारे सासों की रचना की थी, मुझे भी उनने लगा मेरे कार्य में कुछ कमी, मेरे गुरु। यासदेव उन्होंने क्या कहा? तुमने शुद्ध भक्ति के विषय में केवल शुद्ध भक्ति का वो नहीं किया। दूसरे शब्दों में वेदों द्वारा आपको ज्ञान प्राप्त होता है। पर साथ में इस ज्ञान में बहुत कम के विश्व में ज्ञान प्राप्त करते। जब पूछा क्या कहा शुर भक्ति का ज्ञान प्राप्त नहीं किया है? तो फिर उन्होंने हमें क्या दिया कि वि ज्ञान दिया। तो ये आध्यात्मिक ज्ञान बहुत आवश्यकता है और आध्यात्मिक ज्ञान के द्वारा आप अपनी सुख प्राप्त कर सकते हैं। तो भगवान ने माता के प्रश्न के उत्तर में क्या कहा? आपको शुद्ध भक्ति का ज्ञान अपनाना चाहिए। और इस अध्याय में नेक प्रसिद्ध लोग हैं जिनमें भक्ति योग के विषय में ज्ञान। उदाहरण के लिए इसी अध्याय में भगवान पिरदेवनेकहाकि भ जो है उसके क्या लक्षण होना चाहिए? क्या लक्षण होना चाहिए? कौन से श्लोक है ने पूछा था क्या है? भक्त का लक्षण के उत्तर में है। भगवान ने कहा भक्त हो क्या है? अत्यंत डिवोटी, वेरी टोल, अध्यन सें बोले, समाज में सुख, दुख, ये सब हमें मक्के में 1 गो ने क्या। करू ने कहा। करूँ ने कहा कि दया भावना, द दया 2 प्रकार की दया होती है। ध्यान भौतिक, भौतिक। दया का अर्थ है कोई दुखी है, कोई थोड़ी पीड़ित है और भौतिक रूप से उसका सहयोग। 2 जो असली वैसा है, वो कभी भी ने कहा द्वारा क्या समझते हैं उन्हें वो ज्ञान 2 जिसके पालन से जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करे। जैसे की आपने देखा होगा, जो भक्त है, वो हर अवसर का लाभ उठाते हैं का संदेश आगे पहुँचाने हो या देते हैं। क्यूँ उन्हें पता है बिना शंका के want real है। दया के भाव है सर्वा, भगवान के भक्त हैं, सभी उनके मित्र हैं, सर्वा सर सभी उनके मित्र है। वो किसी को शत्रु नहीं मानता, उन सब को क्या मानता है? सभी काल के प्रति मित्रता का भाव रहता है। क्यूंकि वो चाहता है? वो ये देखता है कि ये सब प्रजा जो है भगवान की बुलाता है। सूजासर किसी के प्रति भी मतभेद नहीं लगता। तो संक्षेप में भगवान ने साधु के गुणों का वर्णन है। तो भगवान ने यह साबित किया है कि हमें भक्तोंके संघ में उसका ये मतलब नहीं कि आप किसी रूप से 24 घंटे यही काम करना है और कोई काम नहीं कर सकते। नहीं, इसका अर्थ यह है कि भक्तों की संगत रखो समाज में आप की बहुत जिम्मेदारियाँ हैं। उसको भी निभाओ भक्तों के लाभ लाभ उठायेंगे क्या प्राप्त होगा? बड़ी थबसैकीभ दुआ से पूछा।
दुआ।
मेरे कारण तुम्हे इतना कष्ट ना पड़ा था? तुम मांगो में से क्या होना चाहिए ने क्या कहा? अगर आप मुझे वर देना चाहते हो, क्या दे दे जिसके द्वारा उन्हें क्या भक्तों की संगत भक्तों की संगत मे है, तो भक्तों की संगति केवल भाग्यशाली व्यक्ति को प्राप्त होती है। पापा ने कहा जो भक्त कृष्ण भक्ति में जुड़े हैं, इन सब के बड़े अच्छे संस्कार है, जी संस्कार नहीं होते, भक्तों के संग में नहीं। आते। जो की कृष्ण भक्ति में जुड़ते हैं वो नाम इत्यादि स्वीकार करते हैं। वो क्या है? वही फोर्चुनेट उनके पर अच्छा भाई है। तो भक्तों की संघ में रहोगे। तो आपको असली ज्ञान प्राप्त करे और उसके द्वारा भगवान की लीला और कार्य क्लब में रुचि रहेगी। जो भक्त है वो रूची किस में रखता है। आध्यात्म को तो ध्यान मे जीवन कैसे निभाते हो। राजराज ने नवधा भक्ति का ज्ञान दिया है। भक्ति में क्या कहते है? न साधन है जिनके द्वारा आप भक्ति योग कर सकते हो। और आराम होते कैसे सनम और जीव के द्वारा भगवान के नामों का उचार और सुन, जीव और क्या कान का बड़ा महत्वपूर्ण स्थान है। अगर हम जीप द्वारा भगवान के नाम का गुणगान करे तो उसे क्या लाभ होगा? कुछ लाभ होगा, क्या लाभ होगा। क्या का क्षेत्र मरे हृदय में मैल है और जो मैल है बढ़ते जाती है। और जैसे कि आईने में धूल हो तो धूल को आप कैसे निकालते हो, साफ कर लेकर निकालते, उसी प्रकार हमने हिजेकीमैल को धूल निकालना है और कैसे निकलेगा। प्रापा जी ने पहला बंदर खोला था। न्यू यॉर्क में प्रापा जी में कई अमेरिका, अमेरिकन भक्त रह रहे थे। आज मैं प्रापन कोई कड़क नहीं, उन्होंने केवल यह कहा चैन। 23 हफ्ते बाद भक्तों ने खुद ही आकर पूछा स्वामी जी, जोन वन फॉलो सम रूल्स, आप नहीं चाहते कि हम कोई नियमों का पालन करे। व दिस, वन वीडी फोर लोगो ने हर नाम किया। परिणाम के उचारण से जो बौधिक आकर्षण है, वो क्या आपका अपना अनुभव होगा? जब आप भक्ति शुरू की, चेन शुरू किया, आपको क्या लगा, माया से बचने की बुद्धि प्राप्त हो रही थी। सो साधु संग में रहना बहुत आवश्यक है और शातो में अनेक वर्णन है, अनेक लोगों का वर्णन है। जहाँ की इस विषय पर ये इस इस अध्याय के 3 स्लोक हैं, जिनमें कपिला देव, क्या कह रहे हैं, भक्तों की संगत रखोगे, तुम तो भक्तों की संगत रखोगे तो आपको दिवविज्ञान प्राप्त हो रहा है। कपिल देव भगवान कहते हैं कि भगवान के नामों को सुनकर हमें अत्यंत प्रशंसा प्राप्त होती है। और हमारे कान कान के द्वारा। क्या करते हो? सुनते हो कान, इमपोर्टेंट, धान कान और जीव महत्वपूर्ण स्थान है। जीप द्वारा, क्या करते हो, जी द्वारा, भगवान के नामों का उच्चारण, भगवान की चर्चा का वर्णन, जी के द्वारा और जीव के द्वारा। और क्या प्रसाद कसर का यह भाव रहता है। खाएंगे तो केवल प्रसाद खाएंगे। भगवान की। क्या कहते हैं भोखलगायबेनाखाएऔर क्या कर? ते पाप ह रहे है। तो कहते हैं कि इस अध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति से पालन करने से हम मोक्ष के मार्ग में आगे बढ़ते हैं। तो दूसरे शब्दों में भगवान क्या कहते हैं?
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साधु, साधु, साधु संग। 1 पल के लिए भी अगर आपको शुधभक्ती, संगन मिले, आपका जीवन सुधर सकते हैं। इस पूरे तारथपरमेंप्रपाजी देखा जाए। ध्यान से केवल 1 ही विषय पर बल देने क्या है? क्या वो साल पूरे। तातरियो 1 ही पॉइंट को बार बार कहा जाता। आप कई बार पूछ सकते हो। क्या कारण है कि भागवत में 1 ही विषय की चर्चा बार बार की जाती है। बर उदगीत में भी आप देखते हो और प्रश्न पूछे और भगवान कई बार। 1 ही मेन पॉइंट को एम्पोसाइजकरे बार बार क्या करना है। पापा जी कहते हैं तालपुर तो ड्राइव पॉइंट होम, बार बार सुनोगे तो विचार बैठा आप। ये नहीं शो है। 1 बार सुन लिए। सुनेंगे देश हमारे हृदय में बैठेगा, यहां परात्म कहते हैं पर हम भगवान के अनेक गुणों को समझने के लिए हमें बार बार भक्तों के संग में रहकर बार बार सुनना चाहिए। इसलिए आप देखते हो जो भक्त हैं वो गीता पढ़ते हैं, रोज ही पढ़ते हैं। इन्हें 1 दिन पढ़ लिया, गिरा बस रोज पढोगे। तो यह संदेश आपके हृदय में रोज पहुंचेगा और जितने ध्यान से सुनोगे, उन्हें ध्यान से उसी तेजी के साथ मै दूर होगे। यहां पापाजी पूरे ताप में ये कह रहे हैं, वो ये वर्णन कर रहे हैं कि हमें भक्तों की संघ में रहना चाहिए और भक्तों की संघ में रहोगे। तो क्या आप आध्यात्मिक जीवन ज्यादा सरल होगा? उदाहरण के लिए आप सब मंदिर जाते हो, मंदर आते हो तो क्या देखते
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भक्तों के संघ में रहते हो तो उत्साह और भक्ति भक्ती का पालन करना ज्यादा सरल हो जाता है। आपको बोला जाए तुम एकांत में रहो, एकांत में भक्ति करो। इतना सरल नहीं होगा। क सो साधु संगत पर सो श्रीमन भगत का या है कि आप 3 प्रकार की संगत लग सकते हो। 1 है उनकी संगत जो आपसे ज्यादा उत्तम है, दूसरा है उनके साथ संगत, क्योंकि आपके समान है उनकी संगत जो कि आपसे कम ज्ञान रखते हैं। इस प्रकार का व्यवहार होना चाहिए हमारा के जब आप उनसे मिला जो कि ज्यादा उत्तम है, आप है उत्तम होना चाहिए। e we should be happy on get some। नोज। जिसके पालन से जीवन के रक्षक परा कर so we me so more advance more happy जब अपने बराबर के भक्तों को मिला क्या भाव होना चाहिए, मित्रता का भाव, मित्रता का भाव कर थे हम, 1 साथ मिलकर भगवान की सेवा करते हैं, 1 साथ मिलकर प्रचार कर दे और आप से कम ज्ञान व्यक्ति मिलते हो तो क्या भाव होना चाहिए? दया का भाव, दया का भाव। तो संसद वाला क्या संदेश दिया जा रहा है। वह संदेश जो में यथा रूप प्रॉपर्टी होना चाहिए जी थे। और अगर हम यथा रूप संदेश का पालन करेंगे तो आप जीवन के दक्ष को प्राप्त कर सकते है। तो यहाँ इस अध्याय में यह हुमाध प्रश्न पूछे तो प्रश्न अगर आप पूछे, हमें किन से पूछना चाहिए कि से जो क्वालिफाइ हो? आप सर्जरी करानी है, आप किसी को भी पकड़ते तो सर्जरी कर, आप देखते हो तालीम क्या है, क्या रिकॉर्ड है? फिर आगे बढ़ते है। उसी प्रकार अगर हमने दिव्य ज्ञान प्राप्त करना है तो किसके माध्यम से प्राप्त करना चाहिए? भगवान के भाई जो की भगवान की शिक्षा का का पालन करे, योगी भगवान की शिक्षा का लाभ उठा तो वो सगर भेदी जाए। तो स्पेशल सोच लेना और देना। और अगर हम की संघ में रहेंगे तो फिर ये भक्ति की विधियों का पालन हो सो। हमें प्रयास करना चाहिए कि स्पेशल सोसिशनमसोजीशम लेते हैं और देते हैं, लेते हैं उनसे, आपके ज्यादा एडवांस है और देते हैं उनको। क्योंकि आपने कम ज्ञान रख दे। तो इस अध्याय के अनेक सलोगों में इसी विषय की चर्चा की गई कि भक्तियोग का पालन जब आप भक्तों के संग में गर करते हो तो फिर क्या लाभ आप ज्यादा सरलता के साथ भक्तियोग कर सकोगे। जैसे की ये जो प्रोग्राम आप लोग आते हो, हरदी से चौथे महीने। इसका उद्देश्य क्या है? उद्देश्य यह है कि आप भक्तों के सर में आओगे तो आप आपकी जो बैटरी वो मेरी 4 हो जाएगा। सब के पास सेल फोन है, सेलफोन में बैटरी चले जाती है, आपको फिर चार्ज करना पड़ता है, है कि नहीं? उसी प्रकार हमें पता है जीवन का लक्ष्य क्या है? अगर आप रेगुलरली मिलोगे के संघ में आओगे क्या लाभ होगा? बैटरी आपको फिर से याद आएगा क्या क्या जीवन देश होना चाहिए। तो साधु संग, इज, वेरी, इंपो स्वामी को ज्ञान दिया था भक्ति के विषय में, और काफी गहरा ज्ञान था। 5 पॉइंट्स को उन्होंने खास मत दिया, 5 पॉइंट्स में सबसे पैदा आदेश था। किस में रहे, साधु में सादुसगमेंरहगे। तो आपको ठीक उपदेश में क्या मिलेगा भाई नाम का लाभ उठाओ। इस शास्त्र में क्या लिखा है करी खाली किसने होता है योगा में? भगवान अपसारित होते से उनके दिवि नाम। तो आपको यह ज्ञान मिलता है। स्कूल भक्तों की संघ में आओगे तो क्या ज्ञान मिलेगा। ईनाम की मा। नाम जो है, उसके द्वारा आप अपने शुद्ध हृदय को श बलबन बना सकते हैं। रूप कहते हैं भगवान के जो नाम है वो चीनी जैसे मीठे हैं, भगवान की लीला है, वो चीनी जैसे मीठे हैं। भगवान के गुण है, वो क्या है, मीठे हैं, पर मीठे हैं। तो आप भी मीठा पानी महसूस नहीं कर पा रहे, क्यों नहीं महसूस कर पा रहे। क्या कारण है? वेदिया की बीमारी, वेदिया मींस, वेदिया की बीमारी है। और अब विद्या की बीमारी का अर्थ है बहुत ही आकर्शन है। हमारा वेदिया की बीमारी रहेंगी। जब तक आप मीठा पन नाम का महसूस तो
हो।
थोड़ा इनाम के विषय ज्ञान मिलेगा पापाजी की भगत गीता प्रकाशित हुई थी। किस नाम से भुत गीता या करो। कई बार लोग पूछते हैं तुम्हारी गीता में रूसी गीता में क्या है? तो बाजी दालपर समझाते कि उन्होंने उसी विचारधारा से उपदेश दिया है। इस विचारधारा से भगवान ने दिया और अर्जुन ने स्वीकार किया। तो विद्या की वाणी है। इसको दूर करना है और कैसे दूर करोगे की पालन के द्वारा। मा ने कहा साधु संघ का। 4 फिर आगे क्या कहा? श्रीमल भागवत का अध्ययन? श्रीमल भागवतम का अध्ययन भी आवश्यक रापिड फ्रूट और बेर। और इसका तो रोज सुबह भागोतम क्लास होती है। जो बंदर नहीं आ सकते, वो भी क्या सुन सकते हैं, पढ़ सकते हैं हमें। याद न कि हम इन गंधों को कैद पड़े। आप जैसे जानती हो, उसको ने भक्तों में उत्साह रहता है गंधों का वेतन करने के लिए। पर हमें वेतन करना 1 बात है। हमारा असली भाव क्या होना चाहिए? उसको पढ़ना भी पढेंगे तो उसको और अपनायेंगे अपने जीवन को धारा सो। इसके लिए सास अध्ययन भी आवश्यक है। श्रीमन भगत के में आप ये श्लोक को प्राप्त करते हो नस्रपरनिदियभगवत भगवती श्लोक के भक्ति भावित रोज ही भागवत को सुनोगे। तो आपके ज्ञान का क्या होगा की रोज कम से कम 1 गीता के श्लोक को पढ़ते हो। तो हमें इनको पढ़ना चाहे। जैसे आप कॉलेज में जाते हो। आप बड़े गंभीरता से शिक्षा का अध्ययन करते हो। क्योंकि आपको पता है अगर आपको अच्छे नंबर नहीं आए तो आगे पर आधार बना मुश्किल हो। तो उसी में इन ग्रंथों का क्या करना चाहिए। स्टडी एंड प्रैक्टिस। हमें यह नहीं सोचना चाहिए। ये जो शास्र ज्ञान है, यह माइथोलॉजी है। इमेजिनेशन जब अंग्रेजों का राज्य था तो उन्होंने कई स्कॉलर्स को संस्कृति, शिक्षा, दिलवाई, अनुवाद में यह बता दिया। ये सब मथोलोजी है, मिथ है, मानिक नहीं है। तो वेदिक शास्त्रों का अध्ययन आप किसी समाज में भी कर सकते हो। प्रभाजी के ग्रंथों का अनुमान 70 से अधिक भाषा में हुआ है। सारे विश्व में लोग इन सातों को पढ़ रहे है। तो संदेश चौदा क्या था भगवान के आजेविग्रहकी उपासना, श्रद्धा और आदर के साथ तो भगवान प्रगट होते। कैसे अपने आर्चय बिगड़ा के रूप है इस आर्चयबिगराभगवान में अंतर है अंदर नहीं है। इस ज्ञान में भगवान के विग्रह में भगवान मे कोई अंतर नहीं है। जब आप भगवान के मुर्गियो का दर्शन लेते हो में क्या सोचना चाहिए? here is god। यहाँ भगवान स्वयं उपस्थित है और यह भगवान, भगवान वर हमें सेवा करनी चाहिए। चंदन का जाए तो भगवान नाम के अवतारित होते और क्या और उनके जैसे कि आपने देखा होगा आज चन्दन चंदन के का पाउडर बना रहे है क्यों? क्योंकि परिजन का 1 उत्सव है चनादाचंदनीाता शुरू कैसे हुई शुरू हुई माधुपुर के द्वारा माधुपुर बहुत ऊँचे और जो की 24 घंटे जुड़े रहते थे भगवान की सेवा में तो 1 दिन उन्होंने विश्राम
थे
बहुत खूबसूरत वाला आया हुआ वाले ने कहा तुम भूखे प्यासे नजर आते हो या ले पियो मैं लौटूंगा के लोटे को लेने की याद न आए, उनको हल्की सी नींद आने नींद में वो ही गोवाला जिसने बुझाया हुई गौरव पाया सब में गोले ने क्या अबे पूरी भक्ति से बहुत प्रसन्न हूं और मैं चाहता हूँ कि तुम जाकर मुझे इस सथान से निकालो। प्राचीन 500 साल पूर्व मुसलमानों का राज्य था और कई मुसलमान। इन मुसलमानों ने कई बंदों का को खंडित कर दिया था और पुजारियों को छुपाना पड़ा मूर्तियों को तो मान पुरी
ने
जो आदेश में आदेश दिया था गांव लोगों का देखते हैं गोपाल लगा इधर है या नहीं? सबने खोदा क्या देखा गोपाल जरा प्राप्त हो गया। उसी समय तो पुरी ने 2 दिन में योजना के और उनकी स्थापना हुई तो वे मान पुरी के भगवान ने 1 और आदेश दिया सपने में क्या तुमने स्थापना की है मुझे अभी भी गर्मी लगी है तो क्या करे? मैंने क्या लेके रा पुरी भगवान की प्रशंसा के लिये इतनी मे यात्रा की उन्होंने उन्होंने ये नहीं कहा प्रेन की टिकट चाहिए प्रेन उन्होंने पूरी यात्रा पैदल और फिर वो पहुंच में 1 मानक मंदिर है जिसका नाम है राधा और मान। पूरी के मन में यह विचार था अगर मुझे एस मंदिर के खीर चखने का मौका मिल जाए। मैं अपने लौटकर, अपने विधा के लिए ऐसे बनाऊंगा भावना प्रगट हुई जबकि भूख लग रहा, भूख लग रहा था शर्मिंदा हो भगवान को भोग लग रहा है खाऊँगा गए, बाजार में गए और भगवान ने क्या वो जो गोपी रोज 12 प्यारे खीर की भगवान को भोग लगाई जाती है। तो भगवान ने क्या किया खीर के पारा चुराकर पर्दे के पीछे छुपा ली। और यही पूरी जब लोगों को पता लगा कि भगवान उनकी खुशी के लिए चुराया था तो जहाँ भी जाते थे भीड़ हो जाती थी। वैसे तो बौद्धिक समाज में हम चले हमारी प्रशंसा हो जो भरे वो प्रशंसा नहीं जा रहे को चिंता थी कि मैं यहाँ सब मे गुणगान करेंगे तो वो कहाँ चले गए? और फिर जो वो वापस लौट रहे थे तो 1 रात के लिए रुके उसी गोपी में और सपने में भगवान ने क्या कहा? मेरे में गोपीनाथ को चंदन नहीं, तुम ही उपयोग करो। किसके लिए गोबिना गोप ने उन्हें सिखाया कैसे भगवान की स्थापना की जाती है, पूजा की जाती है तो भगवान है। भगवान में कोई अंतर नहीं है। और जो भक्त हैं, उनकी की भी सेवा करते हैं। जैसे मन में हो जाते हैं। चंदन सीने के फैसले के लिए। तो भगवान की भगवान में अंतर है। कम बुद्धि के व्यक्ति हैं, जो स्कूल से ही अंतर है भगवान की परा चुराया भक्त की खुशी के लिए। इसी प्रकार भगवान अपने उनके और जब आप भगवान की सेवा करो तो हमें क्या सोचना चाहिए? this is on fri, go और पांचवां आदेश का था, दाम वासी बनाओ तो महल चेतना ने बडे सरल तरीके से भक्ति की शिक्षा हमे दी है। और कलयुग में क्या सब से सरल उपाय नाम चेतन मा प्रभु की भविष्यवाणी थी, क्या पीते पीते, आज से ज्यादा देगा 1 दिन विश्व के कोने कोने में क्या होगा? मेरा नाम ा? तो पापाजी का ये आदेश था। और इस संस्था का यह आदेश है क्या कि कोने कोने में क्या आई, नाम का विचार करना चाहिए, इसका उन की खास योजना है। अभी कि भारत में कितने गाँव हैं, कितने साढ़े 6 लाख साढ़े, 6 लाख गाँव हैं, सब जगह क्या करना है? भाई को बचाना है। तो बारे। तो अगर हम कोने में प्रचार करेंगे तो इस प्रचार के द्वारा लोगों का उदार होगा। अगर असली शोक चाहिए तो क्या है उपाय, यह ध्यान में ज्ञान की आवश्यकता है। तो यहाँ इस श्लोक में कपिलदेव भगवान कह रहे है? भगवान के भक्तों की संगत में रहकर भक्ति का पालन करना ज्यादा आसान है। और यही विचार आप अनेक स्थानों में पढ़ते हैं। और सालुगमे रहेंगे तो भक्ति का पालन ज्यादा सरल हो जाएगा। सो, श्ीमभगवजनेज, राइपन, फूड, वेदिक नॉलेज। और ये वेदिक नॉलेज जो आ रहा है, कहाँ से आ रहा है? और श्रीमन भगुधममेंशुरूसे। अंत तक यह ज्ञान प्राप्त होता है। हमें श्रीमन संदेश का लाभ उठाना चाहिए। आप सब जो भक्त उपस्थित सभा में आप सब कृष्ण भक्ति को स्वीकार किया है और कृष्ण भक्ति का प्रचार भी कर रहे हो। और भगवान गीता में क्या कहते हैं? सब भक्तों में सबसे प्रिय कौन है? कौन है वो उनसे ज्यादा पी क्यों हुआ है? कई बार लोग पूछते हैं आपकी संस्था में कोई शॉर्टकट नहीं है, शॉर्टकट है। वो क्या है? राम का, प्रचार की महिमा का अगर भगवान को प्रशन करना चाहते हैं।
ये
तो हमने यह संदेश आगे पूछना है। लोग ज्ञान में है और बाकी इच्छा क्या है कि ध्यान में ज्ञान को में पहुचाना चाहिए। प्रधान राज ने ने प्रधान राज को भी कहा था प्रधान, मेरे कारण तुम्हें इतना कैश भुना पड़ा था, मांगों में से क्या हुआ? चाह? तो प्रदार ने क्या कहा? अगर आप मुझे कोई वर्ड देना चाहते हो तो ये वर दीजिये, मेरा बौद्धिक आकर्षण बिरको समाप्त हो जाए। क्यूंकि ये है प्रात की विरता? बौधिक आकर्षण बिल्कुल नष्ट हो जाएगा। तो भक्ति योग के पालन से आप भौतिक आकर्षण को। दूर कर सकते हो। इस रिहाई में पले भगवान ने कहा है वही आकर्षण जो आपका है किसी बौद्धिक कार्य में, उसको क्या करें, ट्रांसफर करें और मिक आकर्शन बढ़ाए हमारा लक्ष्य क्या है? पौधे की आक्शन को घटाए और अध्यात्मिक आक्शन को बढ़ाए बोले कर्शन, कैसे घटेगा, कैसे नियमों का पालन कर के गीत में इस माया का विरोध करना, इस वेरी डिफिकल्ट। तो भगवान फिर आगे ये भी कहते हैं पर मेरे शहर में आ गए तो ये बन जाएगा। दूसरे शब्दों में भक्ति योग दुहारामोदाकिसके साथ, पक्षियों का पालन थोड़ा सरल है। और अगर हम भगवान के शरनागत होंगे तो क्या लाभ होगा? फिर आप भगवान के सरनगत हो सकोगे, फिर आप माया का विरोध कर सकोगे तो आप भी संदेश रोज सुनते हो कोई और हमारा दुर्भाग क्या है? रोज सुनते हैं, जब भी भूल जाते हैं, रोज सुनते हैं, जब भी भूल जाते हैं तो माया में भी विचलित हो जाते हैं। तो हमें साधु संघ का लाभ उठाना चाहिए और सोन के भक्तों के द्वारा प्रचार लगभग हर कोने में हो रहा है और भारत के हर स्थान में आम भक्तों को प्राप्त कर देगा। और अभी इस की योजना है। क्या जो ट्राइबल रिया है और फोर्स और ट्राइबल एरिया और जो गाँव है सब जगह क्या करना है। तो जो भक्त हैं क्या चाहता है? भगवान का संदेश पहुँचा। तो यहाँ हर कहते हैं जो भक्त हैं वो भगवान के संदेश को नहीं समझ सकते। हमें भगवान के संदेश को समझना है। तो किसके माध्यम से? भक्त ने से क्या कहा? मैं तुम्हें ज्ञान दे रहा हूँ। क्योकि तुम क्या हो? तुम भक्त हो, वो मित्र हो। इसलिए तुम इस ज्ञान के रहस्य को समझ पाओगे। तो भगवान के संदेश आगे पूछाना बड़ी महत्वपूर्ण सेवा है और हम सब को प्रयास करना चाहे। और ये जो प्रोग्राम है जिसमें आप डिरेक्शन में थे, सुंदर, गोपाल और दूसरे भक्तों से इनका भाव क्या है? का भाव यह है कि आप दीर्ध होकर इस संदेश को कम और अगर हम थोड़ा सा प्रयास करेंगे, भगवान का प्रयास करेंगे। पापा कहते थे तुम। 1 कदम उठाओ किशन स्टेप शोर भगवान कहते है कि कुछ कमी भी हो तो क्या करता हूँ, दूर कर देता हूँ। तो भगवत में आप बड़ा गहरा ज्ञान प्राप्त करते है और इस ज्ञान द्वारा ज्ञान दूर होती है। श्री भगवत हमें पढ़ना चाहिए और आप बार बार यही पढ़ते हो क्या साधु संग में रहो? तो आप सब बड़े भाग्यशाली हो कि आप इस कार्य में जुड़े हो। और ये जो संदेश है इसकी बुध आवश्यकता है। समाज में हमारे परम गुरु कहते थे अगर समाज में किसी चीज की कमी है तो किस विषय की कमी है, विज्ञान की कमी है, हमें प्रैक्टिस भी करना है, प्रैक्टिस होर, प्रचार करते हैं तो उनका अचार नहीं है, वाकई उनका अचार है। और पूछा नही में दोनों ही गुल है, अचार भी और 4 आप भाग या प्रचार करते हो तो आपका अचार भी होना चाहिए, बाद में बड़ी बड़ी करता है। उदाहरण ही तो हमारा 4 भी होना चाहिए और प्रचार भी होना चाहिए। फिर आप प्रचार का तेज प्रभाव पड़े। तो श्रीमद भागवतम इन श्लोकों में आप ज्ञान प्राप्त कर रहे हो। भक्तों के संघ में रहकर भक्ति का पालन तेजी के साथ हो सकती है, खास कर के उत्तम। भक्तों की सजल मिले और प्रयास करोगे तो क्या होगा? गॉल गॉल हvदोदोहैवदमसआमने सुना है, भगवान न का सहयोग करते हैं तो स्वयं प्रयास क? take advantage of this wars and we like some time for question मेरा मेरा अनुभव है, यहाँ भक्तों का अंक से जिज्ञासा रहती है। प्रश्नों का उत्तर प्रश्न पूछना चाहते है।
तो किसी का कोई प्रश्न है तो पूछ सकते हैं। गुरुवार से 7 से रिलेटेड, प्रचार से
रिलेटेड,
yes le सेकेंड जो भी है
री
कहा,
humility out in uiliयेभन तो का भाव आप सबको आदर 2
मैने
किसी आदर की उम्मीद रखे हुए, जैसे बाद पुरी को भगवान ने सपने में कहा था, चंदन लेकर आओ। यदि हमें यात्रा और जब वो डर था लोगों का गुणगान करेंगे तो वहां से चले गए। तो भक्तों को क्या सेवा करो? सबको आदर 2 व आदर की उम्मीद मत रखो। हमारी समस्या यह है कि हम थोड़ी सेवा करते हैं और सोचते हैं कि अगले दिन से सबको हमारा गुणगान करना चाहेगा। गुणगान की उम्मीद मत रखो।
भारत मेरा कुशन है कि वह प्रचार के जाते वार रिजल्ट। स्टार्टिंग में बहुत सारे वाले बिजी करते हैं। पर आप लोगों को का स्टूडेंट से तो हमारा कॉम्पटेंस दूजा उसके लिए कैसे
अपने
में प्रैक्टिस करता है और 4 के लिए कांटे का
संख्या कम हो जाती है। शुरू में सौ लोग आते हैं और संख्या कम हो जाती है। तो कॉन्फिडेंस कम हो जाता है।
प्रोग्राम पक्षी सिद्धांत जी ने खा है, कोई नहीं है प्रचार के लिए, तो दीवारों को प्रचार करो। तो आप को लगता है कल प्रोग्राम सौ लोग आये थे, आज केवल 20 लोग आए, कोई बुरा नहीं मान ना आप दीवार जो है वो तो सुन री है। तो मतलब है कि 1 व्यक्ति भी हमें संतुष्ट रहना चाहे। 1 समय पर बजे का प्रोग्राम किया था भक्तों ने, न्यूयार्क में अब विस कौन? lojitanaayouron join the get to
जब आप
प्रचार करते हो, जब आप हरी राम कर रहे हो, तो भगवान वहाँ उपस्थित है, वो उपस्थित होते हैं। तो हमें यह नहीं सो हम वहाँ पर 4 नहीं जायेंगे क्योंकि वहां 2 दिन भी चाहे, 1 आदमी भी आए, चाहे, कोई भी नहीं आए प्रयास प्रचार करना हमारा प्रस् है is a duty? और अगर हम इस भाव से प्रचार करते जाएंगे तो फिर सें शील भी बन जाओगे, मन भाव भी प्राप्त होगा। और मार सबसे बड़ी समस्या ये है। हमें सोचते हैं कि हमें आदर मिलना चाहिए, ये मिलना चाहिए। मैनेजर इगो अहंकार को खुश करना चाहता है।
हम जीवा से अपराध करते हो, लेकिन
मन से अपराध करते हो,
जीवा से
अपराध हो, जीव मन से करते हो,
जीवा से अपराध नहीं कर, मन से करते है।
अपराध
मन से अपराध कर। हमारा प्रयास मन, अपराध मन के द्वारा जो अपराध है, वो भी अम बन करे थोड़ी छूट है। कलयुग में, मन में, मन के द्वारा गलत सोच हो, उसका परिणाम नहीं भुगतना पड़ेगा। पर हमें इसे भी बचना चाहिए। क्योंकि मन के अपराध की आदत पर जाएगी, वो बढ़ते ही जाएगा। और मन में अगर आप सोचते। कुछ नेगेटिव पॉइंट क्या होगा, वो ही वो ही कार्य को और अटैच जाओगे। शी द्वारा करोगे काम जो सबसे बेहतर उपाय है कि आप हर बैठा को आने 2 और सब के साथ वेल में लगाओ। this question न okay rit
yes,
and
then they get more interest eigatingtherliv in
more timing, so they get caring from the parent parent।
शुरू में, जब आते हो मा पैरेनस प्रयास करते हैं विचलित करने के लिए। भाग्य की बात यह है कि पेरेंस को खुश होना चाहिए। वो देखते हैं कि उनके बच्चे अच्छे वात में जा रहे हैं। आज आप जानते हो चाहे ये ड्रग ब्यू वगैरह कितना फैला हुआ है। और जब बच्चे भक्ती में रूचि लेते है, पैरेंसइसका विरोध करते हैं, कहते हैं क्या? कहते हैं तुम पहले ठीक थे, पहले ज्यादा अच्छे थे, भक्त उनसे बहुत बढ़ गया। तो वो क्या करें? आप भगत राज महराज भक्ति में रूचि दे रहे थे, भगवान हो रहे थे। उनके पिता को यह नही पूरा प्रयास किया। क्या के विचारों को बदलने के लिए तो अफसोस की बात है। खुश होने की। वजह माँ बाप दुखी हो जाते है। वो देखते हैं कि उनके बच्चे भक्ती में रुचि है।
पर कई
खुश भी होते हैं, कई देखते हैं कि बच्चे कैसे सुधर रहे हैं। और वो तो खुश भी होते है। बच्चों का चित्र बन गया। पर यह बात सच है। मजोरिटी के पैरेंट्स is please जाते है, उनको बोलो हम जॉब करते हैं, ये करते हैं। उसके बद में हमें इतना ठीक हो जाता है। मोर केन रवीश
जी प्रचार करने जाते है। तो प्रचार में जो नॉलेज है सोसाइटी में तो नॉलेज को स करते हैं। प्रचार मतलब जैसे ही कहे जाएंगे तो बोले आपका नॉलेज अच्छा है। लेकिन जो आपका जो अचार है उसको फोकस करते है। तो ले टीका 2, ये थोड़ा सा िकलटलगरहाहैकॉलेज पर प्रचार को करते है। लेकिन आचार में वो वाइट कर चाते है। बोलते है की हमारे यहाँ थोड़ा किस तरीके से माता थोड़ा को
शर्म आती
है तो से बलू सकते है।
आपने शर्म ती कि वो देखते हैं। हम धोती कुर्ता पहनना है। इस कॉल में कई भगत हैं, धोती कुर्ता पहने। पहली बार इस कॉल में आ गए तो अजस्ट कर सकते हो की कभी कभी बाग जब घर जाते हैं तो को वो होना चाहिए। के धोती कुरता कौन से देश की यूनिफॉर्म है। भारत देश में सभी धोती को पहले आये हैं। शुरू से बाबा मॉडल बन गए हैं। जिन से अभी इंडिया में क्या है जीन कल्चर जीन? समस दुकानदार कहते हैं मेंबर कहते हैं औरतों के लिए स साड़ियों को कोई नहीं लेता। और भी क्या है जीन कल्चर है हम संस्कृति की नकल करना चाहते हैं। पापाजी जब नाग में गए थे पहली बार तो उन्होंने तो माने से दान दिया। कई सन्यासी स्वामी सन्यासी ने जो बार से आये थे उन्होंने 1 दिन मीटिंग की प्रॉपर के साथ और कहा आप धोती कुरता पहनते हो स्वामी जी आप को कोई नहीं सुना हमारे जैसे पेनशर पहनना शुरू no comprवiापाजीसकॉन संस्था की स्थापना कर रहे थे उन्होंने नाम दिया इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर, some, नो विल फॉर, यू कॉल, सोसाइटी पर, गॉड कॉन
no
commit सो आप लोग को थोड़ा बोल होना
चाहिए
कि जब कोई कह रहा है क्या कहेंगे वो आपको कहना चाहिए। पार्ट ऑफ वेरिकेशन मो
महाराज राज का है जहाँ महाराज विश् प्रचार करते है तो वहाँ की जो टीचर है तो तुमसे महाराज करता हूँ कि आप
जो
है कि स्कोर विदेशी संस्था है विदेश वास हो जाता है इसे कहते है
इस कम विदेशी संस्थान तो महाराज मैं महाराज को बताता हूँ विदेशी विदेशी
भारत का फिर महाराज के प्रभास देखो अंग्रेजों की उन्होंने 4 और तो महाराज जी
बोलते हैं तो मैं उनको बच्चों को
मारा क्यों सुनना चाहता हूँ ताकि उसके तो टीचर को महाराज में गंभीर करता हूँ लेकिन महाराज को मतलब
नहीं है
तो मतलब महाराज चाहते हैं कि महाराज टीचर में महाराज मायावादी महाराज किस प्रकार
से
आप अपनी तरफ से प्रयास करो और प्रयास करते जाओ नतीजा आपके हाथ में नहीं है और लोगों को खुश करने के लिए हम सिद्धांत नहीं बदलेंगे सिधांत दिया जाएगा लोग लोग डरपोक है में संस्कृति के विश्व को डिफेंस नहीं करेंगे में लोग स्वीकार भी कर रहे हैं। अब 1 जमाना था विशोन के लगभग कोई भागे आप किसी मंदिर को कभी खाली देख हमने पहला मंदिर खोला था यह 1 ही मंदिर था बनाओ और सदय का प्रचार का ये मत सोचो कोई हसेगा और आप लोग लीडर हो आप दूसरों को ट्रेनिंग दे रहे हो आप सबके अंदर 20, 25 और वक्त है तो आप कनविनसोगेतोदूसरों को कनविंस कर सकोगे और अगर आपको लगे कि कोई प्वाइंट नहीं है आपके जो काउंसलर हैं उनसे आप पू। sakte if we should not come mit on the philosophy correct
yes प्रणाम महाराज
जी मेरा कुशन है की जब मैं किसी से बात वगैरह करता हूं किसी के बारे में किसी से तो मैं
बहुत एजुकेट हो जाता हूँ बात करते
करते तो जिससे की मतलब छाने वाले
का अच्छा पेश नहीं जाता लेकिन जब मैं आप लोगो को देखता हूँ तो फिर हमेशा बहुत शांत र प्रचार करते हो अगर व्यक्ति हा में हा मिल आए तो आप खुश होते हो वो आप की बातों को काट रहे तो फिर आप खुश हो जाते हैं सो गुस्से होने की जरुरत नहीं है भगुलगीतमेंभगवान कहते है last ang n grid हाइवेज पहुँचे तो क्रोध से हमें बचना है हमें क्रोध आता है कई कारण 1 से आप ने कहा आपकी बात नहीं मानता तो आप क्रोधित हो जाते और दूसरा कोई चीज आपको चाहिए और प्राप्त नहीं हो रही वे हम क्रोधित हो जाते है हमें क्रोध से बचना है। न कहते हैं क्रोध लोग काम और क्रोध ये दिन रास्ते हैं जो कहाँ ले जाते हैं ना की और मतलब कि हम शुरू से इनको रोकना चाह पर प्रचार करते जो गुस्सा आता है तो भी प्रचार करो पर प्रयास करो की close
जब हम करते हैं सम्मान
का भावना या
सम्मान की भावाहा,
ये कमजोरी सब में है यह कमजोरी की हमें आदर मिलना चाहिए, हमें ज्यादा प्रेशित होना चाहिए पर प्रचार करते जाओ और हई नाम का उचारण ध्यान पर जाओ और जैसे आपके हैनाम रूची बढेगी हर
नाम
के प्रति आगे बढेगा वैसे जो अनाथ हैं वो कमजोर हो जायेंगे। ये जो है सारे विश्व में आप जहाँ भागती पूछते है, how can i become more mb, can i become more determin? ह क कम? or the same question के किसी कोने में जाओ प्रशन पूछते हैं नाइटी नाइन परसेंट से सो भगवान ने गीता में उपाय दिया सब, समस्या के थे सो weiteren improve the क्वॉलिटी और चास को रोज आप सब जो कॉर्डिनेट हो one of your educated तो आप dnd in
महाराज मेरा है जैसे की वो पानी जाने जाते थे साथ के मन हो तो उस टाइम के बताते हैं इस
पार्टी में जाते हैं तो नॉनवेज ड्रिंक कर लेते हैं भाग लो इसके डर में तो उनको बताते हैं बाद में तो कैसे होता हैंडल करना चाहिए
प्रोग्राम
में जाते हैं कहीं जैसे भक्त लोग प्रचिन करते हैं जिनको वो भक्त अंडर दे दे गो टू समवेयर आप जब
प्रचार शुरू करते हो में भी मत रखो कि 1 दिन में वो सब शुद्ध भक्त बन जाएंगे और आप प्रचार शुरू करते हो तो अपनी तरफ से अपने असली ज्ञान दे या उनको आगे बढ़ने के लिए कई रोग तुरंत बन जाते हैं भग किसी ने प्रपा से पूछा था हाउ कैन बिकम कृश्न प्रापा से और 1 मिनट भगवान हो सकते हो और लाइफेंस भी लगाकर निर्णय कर लो चले won going to do कsnaवon्स मी डू वैसे ही चलो तुम पहले दिन भगवान गत हो सकता है या yes
रेशमा महाराज जी काफी सारे लोग
जो शुरुआत में आते हैं तो मंदिर में आते है काफी जल वगैरह में
करते है और 1 रिचुलस्ट्रिकरूम में करते है उसे अगर आगे से कुछ किया
जाए तो वो नहीं करते तो ऐसे लोगों के साथ कैसे
भरे को से अप्रोच करो और प्रचार करो हर व्यक्ति और अपनी तरफ से यू बी हंबल भगवान से प्राथना करो आपको माध्यम बनाए उनका उधार करने के लिए में यही सोचना चाहिए भगवान े जे है प्रचार के लिए भगवान की कृपा से आप निमित्त मात्र बन सकते हो उनका उधर को
तो जैसे हम लोग रूम में अलग अलग ड्यूटी से मिलते हैं तो कई लोग होते है जो डाले विदाव जाना चाहते हैं जब पहले से वृंदावन की गंदी आदत होती है तो हमने सोचा था कि हमें अकेले वृदामंदीजाना चाहिए करना चाहिए जैसे जाने और वो मंद ने के बाद भी साल डिवोशन में होने के बाद भी वेदावनमखेलेजाना चाहते हैं
गाना
है तो ऐसे क्या बताना चाहिए
मंदिर के ब्रहम की चर्चा कर रहे हो
वो लोग
वो किसी और के साथ नहीं जाना चाहते अकेला जाना चाहते
हो
प्रयास रहना चाहिए या बाहर भी जाते हो, इत्यादि माया का दर्शन लेते हो और भक्त के साथ हो गए। यह सुरक्षा रहती है। अक्सर हमारे भक्तों को यात्रा भी करें तो किसी को साथ लेना जाए
और
टी मोटी गाते हैं स्टिंग वो बहुत अच्छे होते हैं और और स्टार्टिंग में फॉलो भी करते हैं। 16 माला भी करते हैं पर 12 साल बाद उनके प्री संसार आम हो जाते हैं और वापस से वो इंस्टाग्राम पर जाने हैं। मुख जाना, फिर गलत चीजों में चले जाते हैं, धीरे धीरे भक्ति में लूज हो जाते हैं तो वो कई बार जाते हैं। तो फिर ऐसे में कैसे डीकरमकरे
हमारा प्रयास है? ना चाहिए हरेक को प्रेम के साथ, मल के साथ सारा करे और हम ढीले क्यों हो जाते हैं? हम जब बकती के पालन में, नियमों के पालन में ढीले हो जाते हैं तो फिर हमारी न भावनाएं जो होनी चाहिए वो नहीं होते। सो हमे प्रयास करना चाहे। सामी ने क्या कहा? उस भक्ति आप भर्ती कैसे है? उसका वर्णन है, कैसे होता है उसका वर्णन है। कई बार क्या होता है हम शुरू में गंभीरता से नियमों का पालन कर रहे हैं, पर फिर हम ढीले हो जाते है, साना में ढीले हो जाते है। और फिर क्या परिणाम होता है वो किशन फिर से दर्शन देता है। माया हमेशा तैयार रहती है विचलित करने के लिए। आपको कभी ये नहीं सोचना चाहिए। आप ऐसे स्टेज में पहुंच यहाँ की माया का पापा जी 1 समय का प्रणाम करके कुछ कह रहे थे, पर से पूछा आप क्या प्रार्थना कर रहे थे? i was praying to krishna फोन माया मैं यह भी माया में ने तो जो एडवांस रिवोली हैं वो क्या सोचते हम सबसे पी है और जो नियम हैं उनका पालन करे
जैसे कई भी जाते हैं इनसे साल में बहुत फ्लाइन होते सारे साइड के लिए, फिर बाद में वो अपना वसा की तरफ जाना चाहते है तो हमारी नहीं होती है कि अगर उल्टा लिया अच्छा आएगा तो ऐसे चोटी को उल्टा बनाने के लिए इंस्पायर करना चाहिए के लिए इंस्पायर करना चाहिए।
आप के बाल कर रहे हो कोकेशन यू फॉर्म में ब्रह्माचारी जीवन में आप सबकी सबसे सरलता के साथ सेवा कर सकते हो और ब्रह्मचारी जीवन में भक्ति योग का पालन सरल होता है क्योंकि आप ब्रह्मचारी की संगत में रहते हो पर साथ में हमें यह भी पता है हर वक्त उसे नहीं अपना सकेगा हमारा फर्ज है यह प्रचार करें शिक्षा की भक्ति किस वातरा में आप सबसे सरलता के साथ कर सकते हो। पर अगर कोई नहीं मान रहे हम क्या कर रहे है शास्रों के शिक्षा के आधार पर के साथ के में फैमिली लाइफ आप कैसे pक्तiरकतेहोचाहe आप किसी भी लक्ष्य का होना चाहिए rucishamruci ruchi m
में अपने ईगो को कम करने के लिए क्या करना चाहिए? बहुत ज्यादा होता है तो बनाने का मन नहीं करता है तो
क्या करे
हंकार, अदर, आदर और इन सबके इन सब से हमें बचना है और इन सब का उपाय क्या है? उपाय है कि हम भक्ति योग का पालन करें। बड़े सावधानी के साथ वह प्रयास है। अच्छी साध न रहे, हम जब मन करें, सु और शासन को पढे। अगर आप प्रयास कर रहे हो, इन चीजों का लाभ उठा कर, तो फिर आप इन अपराधों से बच सकोगे है। कैसे कमजोर, कैसे बनाओगे? बग क्या कहते है? बजन ध्यातआध्यात्मदवाई ह, आप दवाई नहीं लोगे। तो फिर अनस भक्ती को कम कर देगा।
भक्तों के सजे रहने का मन नहीं करे। तो उनके साथ मतलब अच्छा ने उनके साथ में रहने के लिए हमें क्या करना चाहिए?
पक्षों के साथ रहना नहीं चाहते
हो।
कभी कभी हर्ट होता है
गो हर्ट।
जैसे हमने कहा अहंकार जो है, वह शत्रु है। हमारे शत्रु। इन सत्रों को हमने कमजोर बनाना है। और उन कैसे कमजोर बनाओगे। भक्ति की शक्ति के द्वारा आपका अनुभव होगा। जब आप अपनी साधना सुधारते हो और ध्यान से प्रयास करते हो। जब करने का कद ऊंचा रहता है, है। और जैसे ही आप कमजोर हो जाओ, आपका आध्यातमिक गुस्सा कम हो जाता है। itr right
हरेकृशबारजी सेवा और साधना को कैसे कम कर सकते हैं?
सेवा और साधना सेवा साधना दोनों इम्पोर्टेंट है। अब ये नहीं कह सकते हम साधना में कॉंसिल करेंगे, सेवा में ने साधना, मतलब, मंगलाजी बनता और सेवा। जब आप सेवा भी महत्वपूर्ण है। आप जब भाई भगवान को क्या कह रहे हो? मिस सेवा दीजिये, सेवा दीजिये, सेवा दीजिए। जब सेवा मिलती है भी मार हो जाता है, तो हमें तो प्रसन्न होना चाहिए। राहुल सेवा का मौका मिल है। चाहे तुझ सेवा भी हो। कई बार हम सुन भक्त भक्तों को लगता है। ये तुझ सेवा करने या थोड़ी आये हैं। हमें बंगी बंगी बनने थोड़ी आये हैं। बंगी की सेवा भी मिले है। हमें खुश होना चाहिए। ठीक है, भगवान की छोटी सेवा हो। झाड़ू मारने के लिए यह कुछ सो, उसमें भी हमें खुश होना चाहिए।
दूसरे भक्तों में दोस् दर्शन।
इसके लिए पापाजी ने कहा, वहाँ हमें प्रयास करना चाहिए। सब के गुणों को देख रहे रहे है। अब गुणों को नहीं। आप। गुणों को देखोगे तो वे यही सोचोगे मैं कितना अच्छा हूँ कितना गिरा हुआ है। हम सब अपनी गुणों को मल्टीप्लाई करते हैं और दूर से के गुणों को रिवाइज करते है। हम बड़े बह जाते हैं और दूसरे छोटे हो जाते हैं। ओके अरे। तो मोबाइल करो।
हम स्टूडेंट्स को कॉलिंग करते हैं, उनसे
बात करते हैं तो अपने हार्ड को रिव्यू करते हैं और अपने 5 लाख
के बारे में बताते हैं।
तो
क्या
बला का
जब काउंसलिंग करते हैं तो बच्चे अपनी बुरी आदतों को शेयर करते है तो उनका दूषित होता है।
आज जब प्रचार शुरू करते हो तो आपको सब कुछ होने में सोना पड़ता है। और आप ने क्या कहा? आप उसके प्रति क्रेक हो जाते हो।
मन दूषित हो जाता है।
आप सब समझे से बच साधना भक्ति को स्ट्रॉंग, साधना, भक्ति को स्ट्रॉंग रखोगे। तो आपको बजार में इस प्रकार का चल नहीं आएगा। हाँ,
भारत मेरा प्रश्न है कि रीचिंग को बीजिंग तो इंस्पिरेशन भी खत्म हो जाता।
वीरडाउनmsory
जैसे हम ब्लीचिंग करते है तो इंस्पीरेशन वीयर डाउन जाते जैसे अटैक होता। हमारा तो हमारा बीचिंग में जो इंस्पीरेशन है वो वीर डाउन हो।
टैग कौन करता है?
जैसे हम जाते है तो लोग बताते हैं। तो अभी भी थोड़ा मुश्किल होता है उनको बताने के लिए। सामने से काम चीज में हमारे कोखुडॉ
आप अगर
किताबों को पढ़ोगे। इन किताबों को पढना बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि पहले हम सोचते थे सो बाटना, बांटोगे और प्रैक्टिस करोगे आपके लिए भक्ति ज्यादा बलवान बन जाएंगी। और हमें यह नहीं भूलना चाहिए। माया का प्रभाव 24 घंटे 300 पैसे दिन चलता है। हमें यह नहीं सोचा हम सन्यासी बने हैं, ये बने हैं। अब माया सदानी किसी भी आशा में विवि है, वो आपको विचलित कर सकते हैं। हवाएं सामने हरिदास ठाकुर का उदाहरण है कि माया देवी ने किस प्रकार प्रयास किया था। उन्हें विचलित करने के लिए। हरिदास जुड़े हुए थे। नाम के उच्चारण में उनकी सुरक्षा होगी। जिस प्रकार इलाज की सुरक्षा हुई है, नाम के द्वारा हमारे भी सुरक्षा होगी। कैसे? अगर हमारे नाम है। पूरी श्रद्धा से साथ पड़े। प्रापा जी ने हमें माया का विरोध करने का के सारे हथियार दिए हैं। केवल हमें उनका उपयोग करना है। इस काल में आपके बहुत सुंदर बंदर हैं। सुंदर विग्रह है, अनेक सन्यासी भक्त हैं। सुंदर ग्रंथ है। हर चीज जो आपको चाहिए आएगा रोध करने के लिए सारे हारा है। केवल हम उनका उपयोग नहीं करते हैं। वो हमारी सेना से मेजोरिटी करते हैं। जोडी नहीं करते तो आप मन को खाली देखते है। ये। जब हम कई बार यूज किसी करने
जाते हैं तो हम लोग देखते हैं की ऑलरेडी किन्ही और संस्थाओं से रकफुेंसहैवोशो ब्रह्म कुमार या आजकल के लिय मेडिरेजिनल स्पीकर्स जो वैदिक शात्रों को गलत तरीके से पढ़ाते हैं या गलत नॉलेज देते हैं।
ऐ।
ऐसे में जब हम युद्ध को प्रोपाकीफिलॉस्ी समझाने की कोशिश करते हैं तो युध को हम ऑपरेट करता है और इसे परिसिकोहमसेकटाजाता है। हम को कैसे किस करेंगे
आप पर चाय करते हो, आप देखते होगे 10 आदमी को प्रचार करोगे 1 थोड़ी रूचि प्रकट करेगा तो घबराने की कोई बात नहीं, भगवान गीता में क्या कहते हैं भहुनामजमनमअनेकी जन्मों के पश्चात बागी सभी व्यक्ति हैं जो यह समझेगा वाल है। krishna s a call of war तो हमें कोई न मान लो, आपने सारा दिन प्रचार किया और किसी को नहीं milairugitidon⁇t field escribe you speak the truth and practice word you peat or practice to log ke se sau।
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फ्रॉम लोग कंफ्यूज हैं we now that जब पापाजी गए प्रचार करने उसमें थे, आज भी है रूप से माया के द्वारा टेक्नोलॉजी के कारण माया को प्राप्त करना आसान हो गया है। पहले आपने सिनेमा देखना होता था तो लाइन में खड़ा होना पड़ा है। ब्लैक ब्लैक मार्केट में लोक टिकेट ले देता है। आपके सेल फोन में की फिल्म देखनी है जो जो प्रोग्राम जियो टीवी, जियो टेलीफोन प्रोग्राम था वो धीरे से 1 लाख मोस्ट फिल्म में गाने हैं और कितने हजार मुसकी फिल्म तो 1 जो बना था। ये सब सुविधा नहीं थी। आप अगर आपको क्रिकेट मैच भी देखा, फोन देखे तो 1 रूप से माया कम मोर।
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हम घर बैठे बैठे फोन सकते हैं। पर जो भक्त हैं पक्षी सदा क्या कहते थे, वो आधुनिक सुविधाओं का उपयोग करते हैं। किस लिए भगवान की सेवा करे सो हम जो भक्त बाद सेल्फो रहता है, उसे हम क्या प्रावार की किताबों को दालते हैं, दाल दे, टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हैं। भगवान की सेवा में गाज बिकॉज लोग, फिलहाल फेस लोगों के पास असली फिलॉसफी तो है नहीं, आप किसी धार्मिक गुरु से भी बात करो, पापा सीधा करेगा। हमने देखा कृष्णा का सिधांत का है, सो बोली गोnpreciओ
तो कमजोरियां उनके ओवर
नहीं, ओवरपॉजजीहोजाता है। जो स्टूडेंट्स आते हैं विचार करने पर, तो उनके प्रति ओवर पॉजि हो जाता है।
व मीन ओवrpoजिटिहमरा पाया की नहीं।
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अपने से ज्यादा उसका ख्याल रखे रहते हैं।
जब नए लोग आते हैं आपके मंदिर में, आप, हर उनका मेरे प्रेम से वार हो, उनकी देखभाल कर, वो जल्दी ही वो देखते हैं। देखो यहाँ कितने अच्छे भक्त है, हवा इतनी अच्छी खातर कर दे तो अगर आप दीदी, जब आते हैं मंदिर में, या आपके यूथ प्रोग्राम में, आप जो गैस आते हैं by that s i काम करते जाए, इग्नोर करे, हमे खास के अतिथि बड़े आदर से जा।
हरे कृष्ण गुरुमहाराज महाराज मेरा ये प्रश्न है कि ब्रीजिंग करते समय हम अपना विजन जो है, आगे के ब्रीजिंग को पढ़ाने का विजन, हम कैसे बढ़ा सकते है? अपना विजन क्यूंकि गुरुमाराज? ऐसे लेकर शीला करे कि अगर मेरे सारे डिवोटीज मेरी तरफ पूरे मतलब सिलेंडर होते हैं तो हम लोग 3 फेज में पूरे वर्ल्ड को पेकओवरकरलेंगे और प्रोजी देखा गया है और महाराज भी देखा गया है कि जैसे सुन्दर कुमार प्रोजी न्होंने पोस्ट ऑफ मिशन। अब ये स्टार्ट करे तो हम लोग साल के एंड तक इस साल के तक फाइवफामडेमोटिस कवर करेंगे। अधिकतर सवाल स्कूल स्टार्ट कर रहे है। डेली गाजी वार के डिवोटी उन्होंने ऑनलाइन प्रीचिंग स्टार्ट करी है। तो इस हफ्ते कोई न कोई विजन लेकर के स्टार्ट कर रहे है। ताकि प्रीचिंग में बहुत जल्दी हम लोग रैपिट आगे बढ़ पाएंगे। तो महाराज हम कैसे अपना विजन जो है, बोर्ड कैसे ना विजन आगे बढा सकते है।
बड़ा विजन कैसे देख
सबसे महत्वपूर्ण है। साधना साधना रखो और प्रयास करो। और आप क्या आप विजन बनाना चाहते हो? विजन शोर आlसोबीपrac्टिकo प्रैक्टिकल विजन बनाना चाहते हो। यू कैन कनफर्म दिस? with his sins, ne direct, ive something is a clear pu। ओके
ना
क्या करता हूँ, मैं तो होता क्या है की जोर ताकि जो भी कर रहा है उसे मुझे बहुत ट्रॉंगली फॉलो करना अपने अप्लाई करना है,
और कुछ समय तक करते भी हैं,
लेकिन कुछ समय बाद फिर ठंडे पड़ जाते हैं, वही चीज जो है वो खुद हम फॉलो नहीं कर पाते उसका कंस्टेंट?
इसलिए आपको बक्तों के संघ में रहना चाहिए, हम बक्तों के संघ में रहना चाहते हैं, इस दृष्टि से नहीं की वो हमारी तारीफ करेंगे कहेंगे कहेंगे। और तुम तो बड़ा गैर इस जस्ट से, आप से पूछो में कोई कमी दिखती है, आपको कमी दिखती है तो प्रयास कर उसको दूर करने में। कहते हैं। 6 प्रकार के होना चाह। 1 उनकी ो जब से आगे हम बक्से में और हमें ये उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि से हमारी तारीफ करें और हमारी कमजोरियों को नहीं बताए। हम सब चाहते क्या है कि लोग हमारी प्रससा करे है कि नहीं करें, तारीफ करें तुम कितने अच्छे भक्त हो, पर हमें सोचना चाहिए। हम क्या हैं सबसे सबसे पतित अगर आप वैसे और सिद्धांत पड़ो तो आप देखो कि जितने परसिद्ध भक्त हैं। सब यही कहते हैं मेरे में कोई गुल नहीं, कोई गुल नहीं, ओह वो करे, हमारा नाम ही मत। 2 हमारी क्या स्थिति है, नाम नहीं, लोगे तो का मतलब है, मुश्किल है पर प्रयास करने से हर चीज संभव है। हम ये उम्मीद नहीं करते तो आगे जुड़े हो बंदर के स्कल के साथ। 6 महीने, 8 महीने एकदम सारे गुण आ जायेंगे उन्हों को अनुकूल करने के लिए प्रयास करना पड़ता है और शर्म के को ज्यादा ध्यान से बढ़ाना चाहि। okay okay, i
o
पर मैं ये
चाहता हूँ जैसे कि आपने बहा। 4 या करो।
वो मजा कुछ आचार चाहिए मदद इसक
पहले अपना आचार नहीं कर और फिर मतलब उसके बाद सचार करो।
car ho car sidant, sedan, sinema practice book please लेकिन गुरु की जब खुद
अच्छी के साधना के साथ नहीं कर पाते है तब फिर दूसरे को बताते हैं। तब से यह होता कि बताने में
ये लगता है,
बंद नहीं चाहिए।
अच्छा करे।
मैं मंदिर में बता रहा हू,
दूसरे को खुद ही नहीं कर पा रहे हैं। दूसरे को कैसे बताए िजिटेशनयहबात तो सच
है क्या हम खुद ही नहीं कर रहे हैं। 1 समय। 1 माँ माँ के बेटा था, बड़ी डायबिटीज थी तो माँ बेटे को बार बार कहती थी। मेरी चीजों को खाना बंद करो बेटा छोड़ता नहीं था गुरुजी के पास से बड़ी आप, इसको आदेश 2 प्लीज आप जरुर मनाएगा। गुरु ने। आज मैं आदेश नहीं दूंगा से बाहर आये और गुरु ने लड़के से कहा बेटा मेरी चीजों को मत खाओ के गुरूजी हैरान हो गए न मैं दिन रात बोलती हूँ। सुन ने 1 बार बोल तो माँ ने पूछा यह बोलना था 2 हफते पहले बोले 2 हफते पहले में कोई मीठा खा रहा था। र हरे
मंत्री कभी बार ऐसा होता है कि जो बहुत कलेक्टर कैटेगरी के लोग होते हैं तो हम सारे सिद्धांत को पता होते हैं। हम सारे शास्त्रों में पढ़ते हैं और चीजें प्रेजेंट भी करते हैं शास्त्रों के सिद्धांतों को। लेकिन जब हमारे खुद के प्रैक्टिस की बात आती है तो हम उसको किसी जी डीजल दे दे। मतलब जस्टिफाई कर देते। फिलहाल में इसको नहीं कर पा रहा। लेकिन सिद्धांत तो यही है तो इस इंटलेक्ट सर्टिस्ट्ैक्टिंग के प्लेटफार्म पे और डीजल बार की इंटलेक्ट्वली सर्टिस्ट्ाइट हो जाते है। लेकिन उसको फिर हमारे प्रदर प्रैक्टिस भी नहीं कर पाते। तो प्रैटली गंभीर राग लगे। ती है लेकिन हम बने रहते हैं ऐसा नहीं चले जाए क्यूंकि वो मिला
अगर। हम प्रयास करें तो सारे बगुले में कमजोर हो जायेंगे। पर प्रयास तो करना पड़ेगा। अगर आप प्रचार करना चाहते हो, सो भी example इसके लिए हम व्यक्ति जुड़े में पहले साल 2 साल क्लीनिंग में डालते हैं व सिधांत को ठीक समझे और एक्जाम्पल बन स। पर ये जो संदेश है इसमें इतनी शक्ति है कि अगर कोई नया भक्त भी संदेश को बाटे। जैसे मैं कई बार विदेशों में भी भक्तों को मिला हूँ। जो की बिल्कुल नए भक्त हैं, उनको पता है इम्पॉर्टेंट है वह। वो आगे जाकर गीता बांटते हैं और लोग खरीद लेते हैं। वो व्यक्ति ने एग्जामपल था, उसे विश्वास था क्या गीता संदेश ने, दूसरे व्यक्ति ने खरीदी की था, उनको पढ़ा वो प्रभावित बन गया। तो ये कृष्ण भक्ति का संदेश किसी कोने से भी मिले उसका लाभ पहुँचेगा। आप अच्छे प्रचार प्रचारक बनना चाहते हो, फिर जरा ज्यादा प्रयास करना पड़ेगा। इस नाम में जाते है। विदेशों में कई लोग हंसते हुए ना shakti jan jan से सुनोगे हम 12
प्रश्न और लेंगे लास्ट on
है और घर से बहुत समय से पूछ रहे हैं।
दूसरा min
महादाजी पहले अपने हाल के बारे में मेरे मन में
पूछे।
crisis normal i mean, thoडabहut row hoga, sabko moving
oconee कोन मेरे लिए कुछ रिपोर्ट होते हैं। 34 साल तक हमारे साथ प्रेचिंग मूमेंट में यह चीज में लगे रहते हैं। पर पता नहीं अचानक क्या हो जाता है कि वो अपना फॉर्म मे बंद कर दे। कुछ फोन खाना बंद कर देते हैं
और भाग जाते हैं।
खाते उनके घर को पूछो तो बात करने के
दबाने कई है जो बिलकुल अगर उनको भक्ति नहीं चाहिए। सब जबरदस्ती तो नहीं कर सकते, प्रयास कर सकते हो, विनम्र बिहेवियर रख सकते हो, सबके दास बनने का प्रयास कर सकते हो। और कोई व्यक्ति मिलेंगे जो करना करो, पर वो वही करेंगे जो वो करना चाहते हैं। माया तेज है, सो कई हैं जो माया के वहा में रहते हैं या आ जाते हैं। इसके लिए मैंने कहा माया में आलवेज भी ट्रेक्टर औलवेसट्राइकइसलिए वो यू शु डू, आपका मीशा सावधान रहना, प्राप बाद का उदाहरण दिया। प्रा बाद का मुझे कभी माया नहीं छू। चाहे के
थैंक यू सो मच महाराज प्रश्न था कि जैसे हम हमारे साथ पहले बच्चे बोलते हैं, कुछ सो दे तो मतलब सब कुछ करते हैं। माला वगैरह सब कुछ करते हैं। यात्रा में भी सबचीवीले जाते हैं हमारे साथ सब कुछ। वेरी बट। जैसे उनको सेवा मिलता है। थोड़ा मतलब अपडेट करे। जैसे आप सेवा करने थोड़ा नली होता है। सेवा करने के लिए सो दे स्टार्ट। तो भारज उस सिचुएशन में कैसे आपका।
मतलब यह है कि पैले जुड़ते हैं, साइट होते हैं। जैसे आप उनको सेवा देना शुरू करते है, वो पीछे हट जाते है। तो इसका मतलब यह है कि तो उनको इग्नोर करने की वजह आप हर व्यक्ति का इंगेज करो, उसकी श्रद्धा देखकर। अगर आपको लगता है कि सेवा करना ज्यादा है और बड़ा उतसाइदहैतोउसको सेवा 2 पर अगर आपको मिलता है, कोई व्यक्ति सेवा नहीं चाहिए। नाम हम करेंगे सोना, तुम वैसे करने 2 नहीं, तुम नहीं करोगी सेवा तुम्हारा
में
something is better a nothing to body is happy in police run, wild we do on to police run, let me is the prcomolike
अधर केशन जैसा कि आपने बताया कि वि शुल् भी वेरी, हंबल, बाई, बीआर, अप्रोच, सामान जैसे किसी को अप्रोच कर लिया तो कुछ एकस्ट्रा कांशस िसके साथ हमारे फिलोसॉफिक के साथ अप्रोच करते तो हमें हर रोज में बट, अक्सर कॉलेज की में देखा जाता तो college to the very asian about their things, there s so and हमने सुना i we should rod like line out there so, how should be be have also
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ea e sa sc ha, we should read and we should regayisoce lok at a logo, ne one point being sossin keep trying या बहुत आगे बढ़ गई है। अब लगता है कोई सुनेगा 1 तरफ से चेत, गोल एज भी चलेगा, दूसरी तरफ माया का एज भी चलेगा, जैसे आज लगभग हर कोने में माया माया ये सभा में कितने कोर्डिनेटर हैं।
वन थर्टी
कौन
फेसिलेटर
सो बहुत बहुत धन्यवाद हम करेंगे गुरु महाराज का os गुरुवार स्टाrtेdantty no its leven twelv सो इससे आपलोग को समझ में आता है
कि हाव पर रलिसडय
हम थोडा ने सेशन हो गया।
सबसे ज्यादा इतने सारे सारे उन सब को होने के बावजूद भी गुरु महाराज आप सब के सब के लिए समय निकाला तो आर, यू, ऑल, फीलिंग, प्रबलिस्ट, स्पेशल, प्रबल, आप सब के समक्ष गुरु महाराज आये है और गुरुवार ने आप सब को संदेश दिया इसके लिए गुरु का हृदय से धन्यवाद करेंगे 1 बार जोर से हरी कृष्ण महामद
हरे कृष्णा
कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे
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