भक्तों को इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए | SB 3.29.18 | 20 Jan 2024 | Gopal Krishna Goswami

In this devotional group discussion recorded on 20 January 2024, several speakers (A‑F) examine Srimad Bhagavatam 3.29.18 and related Vaishnava teachings. The conversation begins with a scholarly exposition of the verse, highlighting the importance of renunciation, simple living, and high thinking as the foundation of true bhakti. The speakers recount Lord Rama’s exile, his humility, and the ideal of Ram Rajya, using these stories to illustrate how a devotee should conduct daily life. The dialogue then shifts to contemporary Ayodhya, warning against the political exploitation of Rama’s name and urging devotees to keep the spiritual purpose of such activities clear. References to the Bhagavad‑Gita’s four categories of seekers are woven in, as are practical instructions on chanting the holy name, choosing one’s time of death with awareness, and maintaining devotion amidst modern distractions. Throughout, the tone remains reverent and instructional, with occasional cautionary remarks about politicisation. The session concludes with chants and a call for devotees to focus on the described principles in their personal practice.
Chapters
जल गा राधा सवा गो से
ा a
हे
हे राम राम
का
hi krishna kris हरे रामा हरे रामा रामा रामा हाय हाय गाय का बो पाला बोपारा का पारा का बोपारा रहे गो ग
हो
जाए रा जागे ना जागे रा रा जाई जा ग ने जग ई बा हाई बोल हाई बा हेलो
बहु देवा twenty five exe e
ह
o
ा
हम सभी
आहार
ह
बालाजी
हा
हा हा
से दे
10 हर
ह
सूर्य या सूर्य तथा सूर्य के बीच जो अंतर है, वह उनकी आध्यात्मिक प्रगति के तरों में अंतर है। ऐसे व्यक्तियों की संगति वर्जित है, जो आध्यात्मिक दृष्टि से उन्नति नहीं, उन्नत नहीं है। भगवान चैतन्य का उपदेश्य था असत संग त्याग। जो लोग नाशमान वस्तुओं के प्रति अनुरक्त हैं, ऐसे व्यक्तियों को त्याग करो। असत वह है जो भौतिक दृष्टि से अनुरक्त है और जो भगवान का भक्त नहीं है तथा स्त्रियों तथा भोग्य वस्तुओं के प्रति अति अधिक आसक्त रहता है। वैष्णव दर्शन के के अनुसार ऐसा व्यक्ति अप्रिय पात्र है। भक्त को अपनी कमाई पर गर्व नहीं होना चाहिए। भक्त के लक्षण हैं उसकी विनयशीलता तथा शैंशुलता, भले ही वह आध्यात्मिक दृष्टि से इतना ही उन्नत क्यों न हो, वह सदैव, विनित तथा सैसल बना रहता है, जैसे कि कभी राज, गोस्वामी तथा अन्य वैष्णव ने अपने उदाहरणों द्वारा हमें शिक्षा दी है। जय ने महाप्रभु की शिक्षा दी, कि मनुष्य को रास्ते की गाज से भी अधिक विनित तथा वृक्ष से भी अधिक सैंसुल होना चाहिए। उसे न तो गर्व करना चाहिए, न जूते ही फुला रहना चाहिए। इस प्रकार वह आध्यात्मिक जीवन में निश्चित रूप से प्रगति कर। सकेगा। प्रपात की जाए
यस गुण
गुण
was थोड़ी cmजorहै मैं दूँगा वो रिपीट करेंगे, वो पीछे सुनाई दे रहा है, आप
सबको पीछे सुनाई दे रहा है।
हे कि
हम पर फीचर लगायेंगे, पूरी चर्चा की।
हम इस दिस क्लियर, हम इस श्लोक पर चर्चा करेंगे। जिस स्लोक पर भगवान ने चर्चा की
है,
सुनाई दे रहा है, वे समय में आया है तो ये श्लोक का पीला चयन कर रहे हैं।
यह श्लोक भगवान का फील चालन कर रहे है।
लोग हुए।
इस लोक में। भगवान कपिल देव की शिक्षा है, प्रस्तुत किया जा रहा है।
कपिल देव, भगवान कौन, कपिल देव, भगवान
कौन है, भगवान क्या उतार है और बड़ी गहराई के साथ वे यह भक्ति की शिक्षाएं हमें प्रस्तुत करा रहे हैं।
क्या उपदेश दिया जा रहा है?
भगवान क्या यहाँ पर उपदेश, यहाँ पर क्या उपदेश दिया जा रहा है।
ये भाग हैं, रुचि होनी चाहिए, भगवान के
भक्त हैं। उनकी इस प्रकार की रुचि होना चाहिए, जो भगवान की ओर उन्हें ले जाए,
स्वयं
और स्वयं भी हरी नाम का उच्चारण करे।
व भक्त और भक्त में क्या अंतर।
अब भक्त और भक्त में अंतर क्या है?
1 ही रूचि रहती है। विश्व में
भक्त का रुचि रहता है, कि विष्णु भगवान के प्रति वो अपना रुचि बढ़ाया।
योग
करने वे हमेशा इस प्रकार के प्रयास में लगा है, जो की जीवन के लक्ष्य की ओर लेकर जाता है,
श्रद्धा होनी चाहिए। हम भगवान के नामों का उठान
हमें यह पूरा श्रद्धा होना चाहिए की भगवान के नाम का उच्चारण करेंगे तो हम भगवान के धाम लौट जाएंगे के आगे
व्यक्ति को समय का चाहिए।
व्यक्ति को अपने समय का सदुपयोग करना चाहिए किस माध्यम से हरि नाम के
उच्चारण से समय निर्णय क्या है, शास्त्र
का निर्णय क्या है?
लो है हम लोग
की हरी नाम, हरि नाम, हरि नाम
जुड़ा है से धान से रूस
यहाँ पे बताया जा रहा है कि उन्हें विषयों से दूर रहना चाहिए।
तो लोग को क्या लाभ मिलेगा।
अगर हम भगवान के नाम लेंगे तो क्या लाभ होगा? कौन बताएगा, कौन बता पायेगा भगवान का नाम लेने से क्या लाभ होगा?
मन की आप क्या हैं? आपके
तो दरपन मार्जन बहु महान गवजनेनिरबारपण पहला लाभ क्या है? हमारा रूप दरपन है, वो शुद्ध हो जाएगा।
ओ हारा है। कोयले से भी ज्यादा कहा है
हमारे हृदय जो है कोयले की तरह, काला
है तो जब करते हो, देखते हो कि कम हो जाता है, जब करते
करते वो कोयला जो है धीरे धीरे साफ हो जाता है हीरो की तरह।
हमें
जस्ट मिस
लोक में, हो में मेरे प्रवेश की चर्चा है।
इस लोक के तात्पर्य में प्रोपर ने बहुत सारे गहरे विषयों पर चर्चा की है।
आगे बिhavिशुdआवरभी स्टेट फॉर।
आगे चर्चा किया जा रहा है कि भक्त को जो है एकदम सीधा और सरल होना चाहिए। जो भक्त होते हैं उन्हें चाहिए कि वो एकदम सरलता और सीधा, उनका आचरण होना चाहिए।
ये देखिये 1 बार 1 से दूसरी बार किसी और से गए।
ऐसा नहीं की हम जो 1 बार 1 बात कहें। दूसरी बात कहें
वे स्ट्रेट फॉरमर्ट रूपा
जी इस बात पर जोर दे रहे हैं की हम सबको 1 दम सीधा स्ट्रेट फॉरवर्ड होना चाहिए। क्या हम सब स्ट्रेटफॉर्वर्ड रह सकते हैं? हम खास करके भक्तों के साथ सम्बन्ध रखते हैं। क्या हम इस प्रकार से अच्छी तरह से स्ट्रेट फॉरवर्ड सम्बन्ध रख सकते हैं?
हमें
जस्मिन
कुछ बोले,
किसी को कुछ बोले और किसी को कुछ बोले। ऐसा नहीं होना चाहिए।
आगे भगवान और सारा जीवन हो जाए।
और आगे भगवान कहते हैं सरल जीवन होना चाहिए। सिम्पल सिम्पल लिविंग, हाई थिंक सारा सरल जीवन ऊंचे, विचार
को सारा जीवन बिताना
शास्त्र में लिखा है। व्यक्ति को सरल जीवन व्यतित करना चाहिए।
हम क्या देखते?
हमको जो है आज की बात में क्या देखते है? आज के बतौर में, हम क्या देखते हैं?
राजा जैसे उस देर, पशु जैसे यहाँ पे।
आज की बात में हम देखते हैं लोग जो है पशु जैसे व्यवहार करते हैं। और यहाँ पर जो है आई लिविंग, हाई लिविंग होता है और पशुता की ओर जा रहा है।
क्या ये सोचते हो? जीवन का क्या होना चाहिए?
हाई लिविंग का अर्थ क्या होता है? हमें यह सोचना चाहिए कि जीवन का लक्ष्य क्या है?
ये सोच रहे हो।
हम यहाँ सोचते हैं। आज के समय पर की भोगी जीवन बिताना चाहिए।
सारा जीवन ऊचा, ये विचार है।
भक्तों का विचार है कि हमे सरल जीवन व्यतित करना चाहिए। विचार का क्या हो ऊँचे विचार होना चाहिए। अर्थात भगवान के बारे में
ो प्राप्त कर सकते हो।
इस प्रकार से हम जो दिव्यता को प्राप्त कर सकते हैं,
मनुष्य जीवन प्राप्त हुआ है या सदुपयोग करो।
हमें जो है ये मनुष्य जीवन प्राप्त हुआ है, इसका हमें सदुपयोग करना चाहिए।
सारा जीवन बिता और 1 दूसरे से स्ट्रेट फॉरवर्ड।
तो यहाँ से बताया जा रहा है सरल जीवन ओपन करना है। और जो है स्ट्रेट फॉरवर्ड यानि की जो है सीधा, सीधा, स्ट्रेट फॉरवर्ड है आपस में संबंध बनाए रखे।
किसी के पति,
वह किसी के प्रति नशा नहीं करता है। वह सबसे प्रेम करता हैं। व शत्रु है, देश हमारा शत्रु है। जैसे हम लोग चकमा 1 कथा सुनते
है वो
वनीसमह वो 1 बहुत बड़ा प्रसिद्ध मायावादी है। पटाचारा बहुत बड़ा जो है मायावादी 1 बेटी थी उनकी 1 बेटी थी,
पती का नाम था
और बेटी का, पती का नाम था। तो पूरी में सन्यास लेकर जब चयतेनेमहाप्रभु संन्यास लेकर जगनादपुरी आये ओ
का दर्शन
ले जा तो तब बटाचर्यजोसं्यासी की तरह महाप्रभु का दर्शन किए।
जैसे महा बाबू ने जगह जी का रूप देखा वो बेहोश हो गए।
जैसे ही कहते महापुर जगनपुरी आये जगना जी का दर्शन किए वो भाव पर हो गए
और राजा को न करने के लिए लगा था।
तो उस समय जो था भगवान को जी को भूख लगना था और चेतन महा प्रभु भावी चुके थे
सन्यासी हो
वहाँ पर 1 सन्यासी बेहोश पड़ा हुआ था।
भगवान को भूख लगना। सन्यासी उठाकर
तो लोगों ने देखा यहाँ पर भगवान को भोग लगाना होगा। और इस सन्यासी को उठाकर साइड में बटारे के पास लेकर गया, उठा कर ले गए। सर्वम भटाचार उनको उठाकर लेकर गए। भगवान
आये पीछे और कहा कोई सन्यासी
में देखा है तो सममबटटाचार्यइनको देख कर कहा कि इस प्रकार का सन्यास ही मैंने अभी तक नहीं देखा।
समझ गए
तो चेत ने महा को सम बटाचारयाकेघर लेकर गया था।
हम उठा होश में
महाप्रभु के घर पर गए तो हरि नाम का उच्चारण हुआ और चैतनेमाप्रभुका होश वापस आ गया।
मर जाय प्रभावित है। इस सन्यासी
महाप्रभु ने महाप्रभु जो की संन्यासी थे उनसे कहा दक्षिण भारत के
मोबाइल छाया 1 बेटी थी तन मा
प्रभु दक्षिण भारत की यात्रा के फिर वापस आये तो सब बटाचारकेएक बेटी थी।
1 दिन आप को दिया के लिए
महाप्रभु को सब बता चला अपने घर पर महा प्रसाद के लिए आमंत्रण किया
थे
महा प्रसन्नता के लिए बहुत सारे व्यंजन बनाये थे 80 80 90 आइटम बनाए थे
2 घंटे में भी प्यार
किया यह सब उन्होंने 2 घंटे में तैयार किया
जा एक्रूपमेंटहोगा
आपके माइक्रो वेव से भी ज्यादा तेजी और और अच्छी तरह से उन्होंने
लोगो को भगवान नहीं मानता।
हम भटटाचार्य ने सोचा मेरा दामाद चेन महाप्रभ को भगवान करके नहीं मानता है। शाद खास चैतेनमहसबमबटाचरि चैतन महा को प्रसाद परोसा
महा भाव को प्रसाद दिया जा
रहा था
डंडा लेकर दरवाजे पर खड़ा
रहता जब महा प्रभु प्रसाद पा रहे थे चेतन महाप्रभु डंडा लेकर दरवाजे पर खड़ा था
पर आम थोडा
चैतन्य महाप्रभु को 80 90 आइटम दिया गया था, पर वो खाते थे। बहुत थोड़ा
जाना पड़ा उस सेवा के मोगा को चांस मिल गया।
थोड़े समय के लिए सब भटाचार्या को कहीं जाना पड़ा। अमोग को जो है अंदर झांकने का मौका मिल गया।
दे मीठा
तो ये देखो महाप्रबल सन्यासी हैं और उनके सामने 70 80 का वजन है। वो मीठा है और अलग अलग आइटम है।
देखो इस सन्यासी को, ये बुर से, सन्यास से भी ज्यादा का रहा है।
देखो यह सन्यास को, यह भार से बैरागी का प्रदर्शन करता है। अंदर से, ग्रस्त से भी ज्यादा है। जो है भोग कर रहा है
की बीमारी हो गयी।
तो इसके बाद जो है मोगा की भयंकर बीमारी हो गई, वो बहुत बीमार थे, वो बहुत बीमार हो गए।
माँ
है माँ प्रभु ने पूछा की
माँ बहु को हुशाम
तो पता लगा कि मोगा का जीवन जो है खतरे में है
कुटिया में हाँ पर आए
हम, 1 अमोग की कुटिया में
मा है, रोगी है पीड़ित है के तरफ जा रहा है।
अमोग अमोग बीमार है और वो है अपने कुटिया में जो है लेटा हुआ है े द्वेश रहेगा और न होगा हम चेते ने। महाप्रभु ने कहा जब तक हृदय में द्वेश रहेगा तब तक भगवान जो हृदय में नहीं आएंगे।
भगवान आपको अच्छा लगता है
क्या आपको? क्या आपको कचरे के डिब्बे में बैठना अच्छा लगता है। कचरे के डब्बे में बैठना किसी को अच्छा नहीं लगता।
हे आप को गया है।
अगर आपको स्थान दिया जाए तो आप कचरे के डब्बे के स्थान पर नहीं जाओगे। अच्छे जगह पर जाओगे
को जगह नहीं आया। थैंक यू चावल।
इसी प्रकार भगवान को भी स्वच्छ हृदय का स्थान पसंद होता है। मोगा महाप्रभु ने कहा अमा ये जो इरछाहैअनदरउसे त्याग 2
परिवर्तन हुआ, नाचने लगा, माँ का माल बन गया और
स्पर्श से वो पवित्र हो गया और वो नाचने लगा और भगवान का शुद्ध भक्त बन गया।
हम भक्त में भी वेश रहता है,
ह हम भक्तों में भी वेश रहता है।
भक्त में योग्यता है। आपके
तो हम देखते हैं। कोई भक्त के अन्दर योग्यता रहता है। बाहर से तो प्रशंसा करते हैं, पर अंदर से बेच सकते हैं
या नहीं रखे।
हमें एशिया नहीं रखना चाहिए।
आपके कर्मो के अनुसार हमें सुख दुख प्राप्त हो रहा है।
अपने अपने कर्मों के अनुसार हमें सुख दुख प्राप्त होता है।
पास जीवन में भी देखते है की
हर के बाद हम भौतिक जीवन में भी देखते हैं। किसी के पास मर्सी डिस्कर है, नहीं
देखते हैं सबके पास है
हम हम नहीं देखते हैं कि सबके पास मर्सी
डिस्कर है, ली है किसी को की वो आधा दे। भाल ने कोई सुविधा दी है, किसी को हमारे पास नहीं है, हम करते हैं।
भगवान ने किसी को अगर सुविधा दिया है तो हमें उनके प्रति रिशा नहीं करना चाहिए। उनके पास यह है, हमारे पास नहीं है। आगे भगवान कहते हैं भक्तों के संग से दूर रहो। सत्संग का अर्थ क्या है? सत्संग का अर्थ होता है जिनका मन स्त्रियों में रहता है या भौतिक कम में रहता है।
दिल की रूची नहीं है।
तुम्हें बकती में रुचि नहीं है। उनके संगत से हमें बचना चाहिए।
अब आप कहोगे
जी,
आप कहोगे स्वामी जी, हमको भौतिक वाद की संगति में रहना पड़ता है। हम लोग मुक्त जीवन नहीं हैं। हम जब बुकरष्टीबिशन के लिए जाते हैं, भौतिक वादियों का संग करना होता है।
उतना ही लो जितना की आवश्यक हो।
इतना ही मिलिए पर इतना ही संग कीजिए जितना आवश्यकता हो
और बात कर, बात या चर्चा कर।
जैसे हम किताब बढ़ते हैं, भौतिक वादियों से मिलते हैं। इतना ही संग करो। जितनी आवश्यकता है। ऐसा नहीं, उनके साथ ज्यादा गुल मिल जाए।
ये लोग बड़ा गहरा है।
इस श्लोक श्लोक का बहुत गहरा अर्थ
है
की चर्चा करते और
और आज
करते है। गहराई।
हर किसी को इस श्लोक के पर गहराई से जो है। चर्चा करना चाहिए, विचार करना चाहिए तो कौन कहेगा?
मेरा पॉइंट क्या था? यह श्लोक मेरा पॉइंट ग्या था।
वन सेगन गुरु
हो, उसे क्या करना चाहिए? कोई वनसेगनजोभकतीके बारे में जुड़े हैं, उसे क्या करना चाहिए?
जो भक्ति के मार्ग में जुड़े हैं, उन्हें क्या करना चाहिए?
मेरा क्या पॉइंट है?
पहला पॉइंट क्या है? अपने गुरु से जो है। आध्यात्मिक बातें श्रवण करना चाहिए।
पहला प्वाइंट प्वाइंट
नाम संकीरतन करना चाहिए। दूसरा पॉइंट नाम संकीरतन। bescafoosrabes food arjun सरलता
के फॉर्वड जाना चाहिए।
हम जो हैं भौतिक जगत में, देखते हैं कि भौतिक जगत में स्ट्रेट रहना बड़ा मुश्किल होता है। सिम्पल जीवन, सरल जीवन होना चाहिए।
सबके प्रति सारा भाव हो।
आपके पति, सबके प्रति मित्रता का भाव होना चाहिए
था। यह मेरा दुश्मन है, यह मेरा है।
इस प्रकार का भाव नहीं होना चाहिए। ये मेरा मित्र है, यह मेरा दुश्मन है।
केला
प्रलाद महाराज लाज महाराज के पिताजी बहुत प्रयास कर रहे थे। प्रलाद महाराज के दिमाग को बदलने का
राजनीति लेना चाहते हैं। कोई भी मेरे हैं।
और प्रलाद महाराज ने देखा, मेरे पिताजी मुझे राजनीतिकता सिखाना चाहते हैं। यह मित्र है, यह दुश्मन है। पर प्रलाद महाराज ने सीखा नहीं बात। भक्तों को देशभर से दूर रहना चाहिए
और भाव हो रहे हैं।
और सबके प्रति मित्रता का भाव होना चाहिए।
गो को अनुकूल करने को, सियार हो को अनुकूल करने का
आप सब इन गुणों को अपने जीवन में अनुकूल करना चाहते हो। बहुत धन्यवाद
बाल।
अभी हम भगवान राम के विषय में थोड़ी चर्चा।
पुरे भारत में ये भावना होगी।
पूर्व भारत में। इस समय यह भावना जागृत हुआ कि राम का जो है, अनुस्ठान होने जा रहा है।
राम कौन हैं?
भगवान राम कौन है? वो स्वयम भगवान है, वो स्वयं भगवान है।
भगवान रूप में प्रकट होते है।
भगवान अलग अलग समय में अलग अलग रूप में प्रकट होते हैं।
जैसे की राम प्रकट हुए।
जैसे की भगवान राम प्रकट हुए। त्रेता युग में
बड़े भाई
ने छोटे भाई और दॉपरिगमेंकरृष्ण के रूप में प्रकट
हुए हुए मप्र के रूप में और
कलयुग में इस युग में चेताने महाप्रभु के रूप में प्रकट हुए।
भगवान के अनेक अवतार है।
भगवान के अनेक अवतार हैं।
इन अवतारों का वर्णन शास्र में है।
इन अवतारों का वर्णन शास्त्र में है।
आज के में भगवान है।
आज के बातल में कई लोग यह घोषित करते हैं कि हम भगवान हैं, हम भगवान है, हम भगवान हैं।
भगवान
रोगी, भगवान,
भगवान शब्द इतना सरल नहीं है।
भगवान बनना, इतना सरल नहीं, भगवान उसे
कह सकते हैं के गुर हो अरे
में जो भगवान उन्हीं को कहा जाएगा। जो जिनके अंदर, ये गुण है। असीम मात्रा में। क्या है अच्छे, ऐश्वर्य से, समग्र से वीर्य
सबसे खूबसूरत, सबसे खूबसूरत, ऑल अट्रैक्टिव,
भगवान सबको आकर्षित करते हैं, ऑल अट्रैक्टिव है
गो, ल, ट्रक और भगवान का सब से खूबसूरत हैं।
भगवान सबसे खूबसूरत है,
ा, सबसे वीर
और सबसे वीर हैं। बल है सबसे स्ट्रोंग, सबसे स्ट्रोंग, सबसे बलवान। भगवान ने पायाहाथ के छोटी उंगली में बड़े पर्वत को उठा दिया था
ये पहाड़, फिर जाएगा ये छोटे बच्चे के
हम, ये पहाड़
पहाड़ भी है पहाड़ इतना भारी है, छोटा बच्चा, कैसे उठाएगा, छोटा बच्चा कैसे उठाएगा, उसे था गिर जाए, गिर जाएगा।
सबको लग रहा था, ब्रजवासन को, लग
रहा था ये गिर जायेगा, घबराओ मत नहीं गिरेगा।
भगवान ने कहा घबराओ मत नहीं गिरेगा सुनो वहाँ भगवान का युद्ध हुआ अनेक सुरों के साथ।
गान
भगवान हमेशा युद्ध में उन सरों को मार रहा है। भगवान ने सबसे शक्तिशाली है, सबसे प्रसिद्ध है, फेमस है
न यार आई म, गिरा मोबाइल,
हजारों साल। भगवान ने ये गीता सुना जा ban
हजारो साल प
भगवान ने भगवत गीता का ज्ञान दिया था, हजार साल पहले। और यही ज्ञान आज हम लोग पढ़ने के लिए हमें बहुत समय लगता है। वही ज्ञान हमें भी आज प्राप्त हो रहा है। परम भगवान बोले हम भगवत गीता में पढ़ते हैं। श्री भगवान वाचाश्रीभगवान, कृष्ण जो हैं परम पूर्ण पुरषोतम भगवान है।
जाए
भगवान गीता में किंची मेरे बराबर कोई नहीं है, मुझसे बढ़कर भी कोई नहीं। 424 साधारण व्यक्ति में 4 दोष हैं। गलती के गलती करने का
वो कने
की इच्छा होता है, जाता है, वो धोखा खाता है और मोहग्रस्त होते होते है। और इंदिरा गलती करते हैं, गलती करते हैं, इंद्रिय पूर्ण होते है, मोहग्रस्त होते हैं और ठगते हैं।
2 नहीं है।
भगवान में यह दोष नहीं है।
बाल भगवान इसी लिए वो है।
भगवान।
भारत में कहीं लोग कहते है तो अच्छे व्यक्ति थे।
भारत में भगवान ही थे। कुछ लोग कहते हैं अच्छे व्यक्ति थे। वो भगवान नहीं है।
कृष्ण भगवान हैं।
राम और कृष्ण स्वयं भगवान है।
लग है
भगवान अलग अलग युग में प्रकट होते हैं।
उनके रक्षा की स्थापना कर।
धर्म की स्थापना करने के लिए।
तो हमारे राम परम भगवान है।
हमारे शास्त्र में वर्णन आता है कि भगवान राम जो हैं परम पुरुषोतम भगवान पुर पुरषोतम भगवान है,
मूर्ति है। परथरकीकै
यहाँ पर हम लोग देखते हैं, कहते हैं कि ये तो मूर्ति है पत्थर की। यह कैसे भगवान हो सकता है।
हम भूल जाते हैं भगवान का कोई का असंभव है। अब देखते हैं कि भगवान या असंभव रही है।
हम देखते हैं कि भगवान के लिए कोई कार्य असम्भव नहीं है। वह भगनस्वीके छेद से हाथी को निकाल सकते हैं।
होते हैं। मूर्ति के रूप में क्या
तो भगवान इस पत्थर में विग्रह में प्रकट होते हैं। भगवान के लिए नामुमकिन नहीं है।
जो रोज भोजन खा जाता।
अयोध्या में 1 ब्राह्मण था। रोज भगवान रामचन्द्र जी का दर्शन करता, फिर करने के बाद वो प्रसाद पाता था। 1 बार भगवान राम यात्रा में गए तो ब्राह्मण ने 10 दिन के लिए कुछ नहीं खाया और
भाई लक्ष्मण से कहा ये ब्राह्मण इतना तपस्वी है, क्यूकी? यहा पर 10 दिनों के लिए कुछ खाया?
तो भगवान लक्ष्मण ऐसी ब्राह्मण इतना तपस्वी है। 10 दिन में यात्रा में गया था तो 10 दिन के लिए उसने कुछ खाया नहीं।
अभी अलमारी में
प्रभु रामचंद्र जी ने अपने जो है अलमारी से उनके विग्रह निकाले और उनको प्रस्तुत किए व भगवान
राम ले दे दिया करो। मूर्ति कोई अंतर नहीं है।
और प्रभु रामचंद्र जी ने उस मूर्ति को ब्राह्मण को दिया। रामन से कहा इसका दर्शन करूँ प्रसाद पवन मुझमें। और इस मूर्ति में कोई अंतर नहीं है। भगवान का विग्रह और भगवान के नाम में कोई भगवान में अंतर नहीं है।
भगवान के 2 अध्यायों में
श्रीमद भागवतम में, 2 अध्याय में प्रभु रामचन्द्र जी का वर्णन आता है।
क्यूँ देव गोस्वामी ने कहा अनेक
ने
सोने
का क्यूंकि सुगदेव। गोस्वामी महाराज ने कहा कि भगवान राम का वर्णन अनेक संतोने किया है। मैं करूँगा मैं इसे संक्षेप में कहूँगा
वो भगत भाव रहता है। अगर किसी और संत ने इस विषय की चर्चा की है वो उसकी चर्चा
नहीं करता तो संत होते हैं। अगर पूर्ति महात्मा ने विशेष चर्चा किया है तो उसकी चर्चा नहीं करते हैं।
जैसे की कार, राज, विंदावन दास ठाकुर।
जैसे की कृष्णदास, कविराज, स्वामी और वृंदावन दास ठाकुर
का वर्णन करते है। चर्चा
की वृंदावन दास ठाकुर ने जिस चर्चा किया स्वामी चर्चा नहीं करते हैं। और शलकृश्णदासकजगोस्वामी ने में जो महाप्रभु का लीला वर्णन किया उसे वृंदावन ठाकुर ने नहीं किया।
ह भगवान प्रकट होते हैं लीला प्रकट।
जब भगवान प्रकट होते हैं, वो अद्भुत लीला प्रकट करते हैं।
भगवान आप को प्रकट हो जाएंगे।
आप आजकल के भगवान से पूछो क्या आप अद्भुत लीला प्रकट कर सकते हो? तो दिखाओ
आज नहीं कर रहे है।
वो बोलेंगे आज नहीं करूंगा।
भगवान जब भगवान के रूप में प्रकट हुए थे, वो 4 हाथ
न सेकंड भगवान न जब हुए थे, उनके 4 हाथ में प्रकट हुए थे,
सजा हुआ
था, उनका पूरा शरीर सजा हुआ था। भगवान राम ने भी अनेक अद्भुत लीलाओं को प्रकट किए। 1 बैरज्ये
आम के पिता बहुत पिता बहुत प्रेम करते थे।
जैसे कि भगवान के पिताजी दशक जी ने प्रभु रामचन्द्र जी से बहुत प्रेम करते थे।
कहीं ने पति को सहयोग दिया था,
वो
ही ने पति का सहयोग दिया था। ो
1 बार कैकेई ने अपने पति का खूब सेवा किया था। इसके बदले में दश्त महाराज जी ने वरदान दिए थे।
क्या चाहिए।
महाराज ने पूछा, तुम्हें क्या चाहिए? तुमने मेरी जान बचाई तो तुमने मेरी जान बचाई है। क्या वरदान चाहिए और
आज नहीं मैं
ठीक समय पर मांगूंगा आज नहीं मैं। ठीक समय आने पर मांगूंगी ओ पूरी
आयोध्या जाई पर राजवी प्राप्त करने लगे थे।
पूरी अयोध्या जब सजाई गयी थी कि प्रभु रामचंद्र का विशेक होने वाला है तब
आगे पूछा इधर सर याद हो तुमने 1 बर्ड दिया था मुझे आप
लोग ने ध्यान से सुना। राज ने बताया कि दश आपने 2 वरदान के बारे में सुनाया था, अब वो समय आ गया है। मुझे याद है मैंने आपको वरदान 2 वरदान दिया था।
कोई आदर नहीं करता आज कल कोई लेकिन एग्रीमेंट भी हो नो, वैल्यू आजकल
जो है लिखित एग्रीमेंट भी हो तो लोग उसे स्वीकार नहीं करते हैं।
मैं 1 बार वाणी बोल दिया है
तो इस त्रेता युग में 1 बार वाणी से कह दिया तो उसे वो अपना पालन करते ही हैं।
तो मैं चाहती हूँ की तुम काम को 13 साल बाद मास में भेजो और मेरे बेटे भारत को राजी में बिठा।
तो मैं चाहती हूँ कि प्रभु राम को जो है वनवास भेज दिया जाए और मेरे बेटा भरत को जो है सिंहासन दिया जाए।
वे कैसे भाग सकते हो?
दर्शत ने कहा ऐसे कैसे बात कर सकते हो?
आप अब राम को मेरे से दूर नहीं भेज सकते।
आप राम को मेरे ह्रदय से दूर नहीं बेच सकते हो।
पूरे अयोध्या में तैयारी हो रही है, कल राज गली दी जाएगी।
आपको पूरे अयोध्या में तैयारी हो रही है। प्रोग्राम के विषय था ने कहा, आप
ने वादा दिया था सो पूरा करना चाहे। आपका वादा।
के ने कहा आपने वादा किया था वो वादा को पूरा करना होगा। आपको
अपने बच्चन का पालन किया। राम का सोचा हम क्या कहेगा मेरी स्याही बैठने के लिए। अब मुझे हाँ से
तो जी ने जो है। ये सुनकर प्रभु रामचंद्र जी को जो है वनवास के लिए कहा, अगर उनकी जगह पर कोई और होता। इस प्रकार कर पाता रामजी ने विनम्रता का भाव प्रकट किया था।
क्या देश का पालन किया।
उन्होंने अपने पिता के आदेश का पालन किया था। ये है परम भगवान, ये है परम भगवान
राम राज्य की चर्चा करते।
आज भी हम प्रोग्राम जी की चर्चा
करते हैं, हम राज्य की चर्चा करते,
हमें रामराज्य का चर्चा करते हैं। राज्य हम राम राज्य चाहते हैं।
भक्त
सारे अयोध्यवासी राम के उपासक थे
और समाज में
और वहाँ पर किसी प्रकार का क्लेश का संभावना नहीं था।
जो जनम नहीं, मरा नहीं,
वहाँ पर जन्म नहीं होता था, न मरण होता
था, कोई हॉस्पिटल की ही वहाँ पे,
कोई हॉस्पिटल की आवश्यकता नहीं होता था। डॉक्टर अनम्प्लॉयडथे सारे, डॉक्टर अनएम्पलाइड थे,
बीमारी
नहीं हो जाता, क्यूँकी किसी को बीमारी नहीं होता था।
मृत्यु के समय भी आप खुद चुन
सकते थे और मृत्यु के समय भी वो चुन कर स्वीकार करते थे।
कब आप मरना चाहते हैं?
इस प्रकार से अपनी मृत्यु के समय वो लोग चुन कर जो है स्वीकार करते थे।
अगर ये मिल जाए, बंद हो जाए,
हमें इस प्रकार का अगर सुविधा मिल जाए। तो क्या हम क्या करते? सारे समान बंद हो जाता है।
प्यार नहीं होगा, क्यूंकी कोई भी मरने
के लिए तैयार नहीं होगा।
आज की भाषा में पॉलिटिशन को कहते हैं वोट 2 हम राम राज्य देंगे।
आज के वातावरण में पॉलिटिशन्स कहते हैं हमें वोट 2 हम राम राज्य लायेंगे।
राम राज्य के में
राम जी के इस अयोध्या में सभी जो है राम जी के उपासक थे।
राम जी की स्थापना की जा रही,
कल रामजी की स्थापना की जा रही है।
इसके पीछे कम से कम का नाम लिया जाए।
क्या है इसका भाव कम से कम यहाँ पे रामजी का नाम तो लिया जा रहा है। चाहे पॉलिटिकल भाव हो, चाहे वो पोलिटिकल भाव हो फिर भी रामजी का नाम लिया जा रहा है।
भगवान कहते हैं गीता
भगवान भगवत। गीता में कहते हैं 4 प्रकार के व्यक्ति मेरे शरण में आते हैं। 4 प्रकार के है। 1 दुखी व्यक्ति जब हम दुखी हो जाते है तो हम भगवान का स्मरण करते हैं। धन चाहिए 1 है जिन्हें, धन चाहिए
है जिसे वो जिज्ञास नाम के 1
जिनको जिज्ञासा होता है। 1 काम पे सुख में लगा ज्यादा
कोई भी भाव हो
तो कोई भी भाव हो और ईश्वर के पास आओ
चाहे कोई भी भाव हो, राम जी की मुल्की साना हो है। चलेगा भगवान राम का नाम लो बनाएंगे,
चाहे कोई भी भाव हो, रामजी का यहाँ पर मूर्ति का स्थापन हो रहा है इससे लोगों का भला होगा,
राम का नाम लेंगे का करेंगे जायेंगे
और इस स्थापना में रामजी का नाम लिया जायेगा और रामजी का नाम लेंगे तो हम लोग जीवन साथ जाएगा।
अगर भी 1 वोट मिलेंगे अगर आपके मन में ये विचार है हम राम जी की थापना करेंगे हमारे होगा। ठीक है।
अगर हम इस भाव से रामजी का स्थापना करेंगे तो इलेक्शन में जीतेंगे तो ये भाव भी ठीक है। क्योंकि इससे राम जी का नाम का उच्चारण पूरे देश में हो रहा है।
भगवान श्री राम की जय
गोपाल किसी का कोई प्रश्न है,
बिल्कुल
को के प्रश्न हैं प्रश्न क्या 2 वरदान क्या है वरदान जो है go vardan the to edicion ns asking the to benेdicnसो fortin exiैnड भारत शुड भी नहीं, इस क्वेश्चन क्या, वरदान क्या है तो उसका 2 वरदान महाराज। गुरु महाराज जी ने कथा में बताया कि राम जी को वनवास 1 हो गया, बात समझ में आया वनवास का र त वन में वास करना। वरदान का अर्थ क्या है? वर्दान का अर्थ होता है आशीर्वाद, ब्लेसिंग्स बोलत है, वर्दान कार्थ वर्दान होता है।
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my confidence reflected in my smile, but while brushing, if you see blood, you may have gone problems, black builds up on the gomelineandwekansid, it may warson over time leading to to tlosusetateton tax to based its four times more effective in removing पैरुडोn टेक्स ेशनाकिशनाहरिहरि
हरे रामो हरे राम राम राम रे हरे हरे गशनारकष्ण कुशना कुशन हरी भरी आरे रामू आर राम राम राम हरे हरे कशना
आरे कुशन
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आरे रामा आरे रहो रामा रामा हारी हारी जा
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माधब कुंज बिहारी जो योरा कुंज बिहारी रा मा धबा कुंज बिहारी ज़जराा हाल पंजाब हारे है। गोपी जनवललाभा गिरवरधारी गोपी जनवल
गिरवर
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गोपी जनबल भो क्रिव धारी जलरहोपीजनबलला।
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