जिम्मेदारियों को कैसे निभाए? | SB 3.9.6 | 11 Feb 2024 | ISKCON Juhu | Srila Gopal Krishna Goswami

Srila Gopal Krishna Goswami teaches from Srimad-Bhagavatam 3.9.6 on fulfilling responsibilities without fear or anxiety. He contrasts materialists with pure devotees, tells the story of Brahma visiting Krishna, and shares how a former chemist left his corporate job to build temples across India. The session ends with kirtan chanting.
Chapters
hi na sna किण कृष्णा हरे हरे हरे रामा रे रामा
रामा रामा रे
हर केशना रामार hi krishna hi krishna हाय हाय रामा हाय रामा मा मा हाय हाय hy krishna hy a हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हाय हाय पाबो पाला बाबो बाद बा
बो बाला
जा राजा राधा राधा hi
बाबा
ba i, i
boho
अरे
पर अध्याय 9 शलोक संख्या 6
में बगतेवसुेगेसुवाै आम लोक की चर्चा करेंगे तीसरे हैं
तो आज हम बड़े प्रसिद्ध श्लोक की चर्चा करेंगे। ये श्लोक तीसरे स्कंद से है। तावत भयम द्रविण देहसुरननेमेतम ताव शोकसप्रिह परि भबोविपुलस, चलो सावन, ममेतिअसदवग्रहआरति मूलम यावननतेनिग्रहमभयम प्रविणता लोक। तब भयम द्रविण देहसुरनमेतम शोक स प्रिय परिभवोविपुलचलोभम विपुल, तावन ममेतियसदबग्रहआरति मूलम यावननतेअनगहमभयम प्रमणित
लोक
ताव भयम द्रविण देहसुरननिमेतम शोकस्प्रिहपरिभवो चलो तावनममेतिअसदबग्रह आरति मूलम मेयाबन्नतेयंगरिहम मभयमप्रवणितलोकहाबोले
as
and
a
माताजी शब्दार्थ, तब तब तक बयमभयद्रविड, संपत्ति, दे, शरीर, सूरत संबंधि, जन, निमित्त के लिए, शोक, शोक, सपरिहा, इच्छा, पर, साज, सामग्री, व, पोल, अत्यधिक, लोभ, लालच, दावत, उस समय तक, ममा, मेरा इति। इस प्रकार असद, नश्वर, अवग्रह, दुराग्रह, आर्ति, मूल चिंता से पूर्ण यावद जब तक न नहीं, ते, तुम्हारे, अंग्रिया, अभयम, सुरक्षित, चरण, कमल प्रमाणित शरण लेते हैं। लोक संसार के लोग अनवतपरशलप्रोपजी द्वारा हे प्रभु। संसार के लोग समस्त भौतिक चिंताओं से उद्विग्न रहते हैं। वे सदैव भयभीत रहते हैं। वे सदैव धन, शरीर तथा मित्रों की रक्षा करने का प्रयास करते हैं। वे शोक तथा अवैध, इच्छाओं एवं साज सामग्री से पूरित रहते हैं तथा लोभवश, मैं तथा मेरे की नश्वर धारणाओं पर अपने दुराग्रह को आधारित करते हैं। जब तक वे आपके सुरक्षित चरणकमलों की शरण ग्रहण नहीं करते, तब तक वे ऐसी चिंताओं में चिंताओं से भरे रहते हैं। तात्पर्य कोई यह प्रश्न कर सकता है कि यदि कोई पारिवारिक मामलों के विचारों से उद्विगन रहे तो किस तरह वह सदैव भगवान के ही नाम, यश, गुण इत्यादि का चिंतन कर सकता है। भौतिक जगत का हर व्यक्ति इन विचारों में डूबा रहता है कि वह किस तरह से अपने परिवार का भरण पोषण करे, किस तरह अपने धन की रक्षा करे, किस तरह अपने मित्रों तथा संबंधियों के साथ मिलकर चले। इस तरह वह यथा स्थिति बनाए रखने के प्रयास में सदैव भय तथा शोक से ग्रस्त रहता है। इस प्रश्न के उत्तर स्वरुप ब्रह्मा द्वारा कहा गया यह श्लोक अति उपयुक्त है। भगवान का शुद्ध भक्त कभी भी अपने को अपने घर का स्वामी नहीं मानता है। वह हर वस्तु के सर्वोच्च नियंत्रण पर छोड देता है। अतः उसे अपने परिवार के भरण पोषण अथवा अपने परिवार के हितों की रक्षा करने में करने का कोई भय नहीं सताता। इस शरणागति के कारण उसे संपत्ति के प्रति कोई आकर्षण नहीं रह जाता। यदि कोई आकर्षण रहता भी है तो वह इन्द्रपति के निमित्त न होकर भगवान की सेवा के प्रति होता है। हो सकता है कि शुद्ध भक्त भी सामान्य व्यक्ति की तरह धन जोड़ने के प्रति आकृष्ट होता हो। किन्तु अंतर यह है कि भक्त भगवान की सेवा हेतु धन अर्जित करता है, जबकि सामान्य व्यक्ति अपने इन्द्रीय भोग के लिए इस तरह भक्त के लिए धन का अर्जन चिंता का कारण नहीं बनता, जिस तरह वह सांसारिक व्यक्ति के लिए होता है। चूंकि भक्त हर वस्तु को भगवान के सेवा भाव के स्वरूप में स्वीकार करता है। अतः धन संग्रह रूप विश्वदत्त उखाड़ दिए जाते हैं। यदि सांप का विश्व निकाल दिया जाए और तब वह किसी व्यक्ति को काटे तो उसका प्रभाव घातक नहीं होता। इसी तरह भगवान के निमित अर्जित धन के विषैले दांत नहीं होते और इसका प्रभाव घातक नहीं होता। शुद्ध भक्त जगत में सामान्य व्यक्ति की तरह रहते हुए भी भौतिक सांसारिक मामलों में मामलों के फंदे में नहीं फंसता। कृपया कृपया अनुवाद दोहराइए, हे प्रभु। संसार के लोग समस्त भौतिक चिंताओं से उद्विग्न रहते हैं। वे सदैव भयभीत रहते हैं। वे सदैव धन, शरीर तथा मित्रों की रक्षा करने का प्रयास करते हैं। वेश्विक शोक तथा अवैध, इच्छाओं एवं साज सामग्री से पूरित रहते हैं तथा लोभवश, मैं तथा मेरे की नश्वर धारणाओं पर अपने दुराग्रह को आधारित करते हैं। जब तक वे आपके सुरक्षित चरण कमलों
की
शरणग्रहण नहीं करते, तब तक वे ऐसी चिंताओं से भरे रहते हैं।
c ब्रह्मा जी कर रहे हैं,
इस श्लोक का उच्चारण ब्रह्मा जी कर रहे हैं। आप सब परिचित हैं। ब्रह्मा जी से
अनेक ब्रह्मा है।
1 समय गए, अनेक ब्रह्मा हैं हमारे जो इस ब्रह्मा पृथ्वी के ब्रह्मा हैं वो 1 समय द्वारका गए, द्वारका गये
भगवान,
वे द्वारका गए। तो भगवान के महल पर जब पहुंचे तो ब्रह्माजी ने द्वारपालों से कहा कि भगवान से कहिए कि ब्रह्मा आये हैं
ने कहा कौन से ब्रह्मा पूछो।
तो भगवान ने कहा कौन से ब्रह्मा है पूछो।
ब्रह्मा। सेवक ने पूछा आप कौन से ब्रह्मा और भगवान पूछ रहे हैं?
तो ब्रह्मा जी ऐसे सेवकों ने पूछा की आप कौन से ब्रह्मा है? भगवान पूछ रहे हैं।
े ओह भगवान ने कहा यहाँ क्यों आ रहे हो?
तो भगवान के पास जब ब्रह्मा जी पहुंचे तो भगवान ने पूछा कि क्यों न हुआ?
मेरे प्रश्न पूछने से पहले मैं 1 प्रश्न पूछना चाहता मेरा ब्रह्म पी है क्या
आपके? इस प्रश्न से पहले मैं 1 प्रश्न पूछना चाहता हूँ की मेरे अलावा भी कोई ब्रह्मा है क्या?
पर तुरंत वहाँ लाखों ब्रह्मा उस हुए वाला और देखा हजार लाख करोड़ से अपने आप को देखा। भगवान हमारे भगवान की सृष्टि का भले क्या कह रहे हैं। गली से दादाजी इस लोगो का बड़ा उपयोग करते थे उन्होंने अनेक में लोग का उपयोग क्या है? मे क्या करे जो की व्यक्ति है व शोक में है, वो बहुत ही चिंता में है, सवाद है तो शोक समाप्त हो जाएगा, चिंता किसलिए है, क्या हो रा है, क्या हो जाएगा
मेरा
मन को चिंता से भरा हुआ है, क्या करे की हम मन चिंता से भरा हुआ है और किस प्रकार की चिंता है। कहते हैं की हमेशा भय में है, काम जो है वो मैं खोल ही दूंगा और इससे ज्यादा धनी हो उसे ज्यादा भय रहता है। जैसे कि आप धनी लोगों के घर में क्या देखते हो मैं दिवार ऊँची दिवार मे वायरिंग ऊपर से लिखा कुछ क्यूँ? क्यूँकि ये सुरक्षा करते तो 1 बार की चिंताएं हैं। और हमारा जीवन जो है शुरू से अंत चिंता में रहता है, तो भी कैसे वह चिंतित है? क्यूँ अरे धन को बचाने की कोशिश कर रहे हैं? धन को बचाने के लिए वकीलों के पास जाते हो कि धन कैसे बचाओ और धन को छुपाते हैं? जो वाह बैंक या कोई रोक रहा हो वो और छुपा दे, खोद कर मिट्टी के नीचे छुपा दे। क्यूँ वो चाहते ही की धन धन जो है आपके भाई समस्या भी होती है। 1 ब्राहमण था धनी साध में, वो बहुत कंजूस भी था, वो 1 पैसा न खुद घर अपने ऊपर, उसके पति और बच्चों को तो उसमें 1 ही भाव था, धन को बढ़ाया है तो उसके दुश्मन भी बन गया। दुश्मन मे पत्नी ने कहा तुम इतने धनी हो, मे
थे
हमारे धनी है, पर क्या पता चोर जो है चोर भी निशाना कैसे बनाते है, मेरा निशाना बना चोर थे, वो सोच रहे थे कैसे चोरी की है टैक्स वाले हैं, वो क्या कहते हैं यह सफलता प्राप्त हुई है जो अनेक थे और सरकार के प्रतिनिधि से मिलकर सारे धन को छीन लिया। और ये ब्राहमण तुरंत शोक में आ गया। तो बड़ी चिंता में था, मैं धनी था और मुझे पर हुआ था, मैं धन के पीछे अंधा हो गया था और उन्हें मोस्ट शोक था। बाद में यही शो को भगवान का सोचा नहीं, भगवान के हुआ और भग लोग कहते थे ये ब्राह्मण सफल हुआ अपने व्यापार में भगवान का भजन कर जाता है i तो यहाँ कहा जा रहा है हमारी चिंता है किसके लिए धन कमाया है उसकी सुरक्षा का, और ज्यादा धन नहीं है, कोई चिंता नहीं है और जो धनी है चिंता रहती है, चोरी जाए पुलिस वाले भी आ जाए चिंता है को बचाने और शरीर को चिता है को कोई बीमारी नहीं हो जाए। आजकल आप सिगरेट नहीं पी हो मेरे जैसे शेयर में आपके श्वास पर आप लोग समझ रहे हो
न?
तो
जिंदा है आज के 52 में नंबर 1 चिंता बन रही है। आज बीमारी है बतीपतिआएथेमुझे मिलने साल है, 3 साल की बेटी है, बेटी ओपन हाट ऑपरेशन हुआ था, छो बच्चों को भी मानी हुई है। ब्रह्मा जी कहते हैं तुम मन शोक में भरा हुआ है, मेशा भाई में रहते है, शोक लिमिटिंग इन हैंकिंग,
ये
2 मां यहाँ है, क्या हैंकिंग, इच्छा रखते हैं, हम रखते हैं, आज यह प्राप्त है कल तक ये प्राप्त हो जाता है, हम ही जाते हैं और और और सोचने और आयेगा इंडिया सी के विषय में इंडिया हम सोचते हैं, बहुत सुविधा प्राप्त होगी इंडिया चिप्पी के द्वारा से दुष्टा प्राप्त कर। सकेंगे कहा गया है चाहे आप कितना भी प्रयास करो हो गया ट्रांसलेशन
तो आप लोगो को आवाज आ रही है पीछे क्लियर सुनाई दे रहा है, समझ है समझ में आ रहा है की ट्रांसलेशन करना है
हमारे जीवन में शो
के शोक है, हमारे जीवन में शोक
ही शोक है और हमारे 2 बीमारी क्या है, इच्छा है और और और शोक, ये चीज हमारे पास नहीं है।
हमारे जीवन में 2 बीमारियाँ है शोक और इच्छा। इच्छा क्या है हमें और और और चाहिए। और शोक क्या है हमें कुछ नहीं मिलता है तो हम शोक करते है।
बाकी में भी इच्छा रहती है भक्त,
भक्त के मन में भी यह 2 इच्छाएं रहती है।
कैसे? कैसे, कैसे, कैसे इच्छा है कि हम सब को भक्त बनाये।
हमारी इच्छा यह है कि हम सबको भक्त बनाये।
हमारी इच्छाये हर घर में 1 भाग सेट पहुँचाये।
हमारी इच्छा है कि हर घर में श्रीमद भागवतम और 1 चैतनचरताअमृतका सेट पहुँचाये।
पापा जी ने 1 हा हाउस इन इंडिया यू, हैव से भागो।
रोब जी ने 1 पत्र में कहा कि भारत में हर घर में 1 चेतनचरताअमृतऔरएक भागवतम का सेट होना चाहिए। तो हमारी इच्छा है कि जा रे देखो। तारे कृष्ण पदेश जिससे भी हम मिले उसे हम कृष्ण का उपदेश सुनाए।
यह हमारी इच्छा नहीं है की हमें
भौतिक सुविधाएँ प्राप्त हो, यह हमारी इच्छा नहीं है की हमे भौतिक सुविधा प्राप्त हो। अपने स्वार्थ के लिए, अपने स्वार्थ के
लिए, भगवान के लिए महल बना देंगे,
भगवान के लिए हम महल बना देंगे,
अपने जीने के लिए कुटिया बर, अपने
जीने के लिए कुटिया बनाएंगे
गोस्वामी थे। उन्होंने सारे मंदिरों का निर्माण किया।
जैसे की वृंदावन के जो प्रसिद्ध गोस्वामी थे, उन्होंने सारे मंदिरों का निर्माण किया,
वो अपने लिए, अपने लिए महल बनाया,
महल बनाया,
कहते थे, आई कैन लिव,
रोबा जी कहते थे मैं तो ब्रिक्स के नीचे भी रह सकता हूँ बना
हजारो नहीं आने वाले थे।
और हम जब बड़ा मंदिर बनायेंगे, प्रसिद्ध मंदिर तो जो हजारों लोग वैसे नहीं आने वाले थे, वह भी मंदिर में आयेंगे।
तो मे नही की भक्ती इच्छा नहीं रहती। जो बोलीवाली है उनकी अच्छा है। बोल वाले व्यक्ति चाहता है के लिए, भक्त चाहता है, भक्त की इच्छा रहती है। भगवान देश को को बनाये।
तो क्या फर्क है। 1 भौतिक वादी व्यक्ति की इच्छाएं और 1 भक्त की इच्छा में भौतिकवादी व्यक्ति की इच्छा होती है। और ज्यादा से ज्यादा मुझे मिले इन्द्र तप्ति के लिए और भक्त की इच्छा होती है। ज्यादा से ज्यादा हम भगवान के इंद्रियों के लिए करें
शोक भक्त का क्या
शो गया, भक्त का क्या शोक होता
है, बक का शोक रहता है, शो क्या रहता है। मैंने इतने साल, इतने जन बिता दिए।
भौतिकवादी व्यक्तियों का शोक क्या रहता है। मेरा इतना नुकसान हो गया धंधे में और भक्त का क्या शोक रहता है। मैंने हजारो जन्म जो है वो बिता दिए हैं। भगवान से स्वतंत्र रहे का
जनक है भगवा,
इतने जन्म मैंने प्राप्त किए है लेकिन भगवान की भक्ति नहीं की है।
तो अब मुझे हर पल का उपयोग करना चाहिए। भगवान की सेवा।
तो अब मुझे हर पल का उपयोग करना चाहिए। भगवान की सेवा के लिए हमें 1
पल का भी उपयोग नहीं करना चाहिए।
हमें 1 पल का भी दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।
1 राजा थे, देवता का सहयोग दिया
था,
युद्ध करने में, 1 राजा थे, जिन्होंने देवताओं का सहयोग दिया था। असुरों के साथ युद्ध करने में।
राजा का नाम क्या था, खटवाराजआपकेबड़े भारी है। हमारे विजय प्राप्त हुए।
तो देवताओं ने उनसे कहा कि हम आपके बड़े आभारी हैं, आपके कारण हमें विजय प्राप्त हुई।
मांग, हमारे से क्या बारिश चाहिए?
मांगो, आपको क्या वर चाहिए हमारे से।
अगर आप बॉयज देना चाहते हो, ये बताइए मेरी जिंदगी में कितना समय और है?
तो महाराज खटवांग ने देवताओं से कहा अगर आप मुझे वर देना चाहते हो, तो मुझे ये बताइए कि मेरे जीवन में और कितना समय बाकी है।
तुम्हारे जीवन में 1 पल बच गया है बस।
देवताओं ने कहा तुम्हारे जीवन में 1 पल बच गया है।
बस।
उन्होंने कहा कृपा करके मुझे तुरंत पृथ्वी पर लुटा।
2 तो महाराज ने कहा कि कृपा करके मुझे तुरंत पृथ्वी पर भेज दीजिये।
तो पल का विचार है। अगर 1 पल का करेंगे तो इससे सारे विश्व के धन से वापस नहीं ला।
तो ये विचार है भक्तों का की। 1 पल का भी हम दुरूपयोग करेंगे। तो विश्व के सारे धन से हम उस पल को वापस नहीं ला सकते।
11 पल को भी आप पृथ्वी के
पूरे धन को इकट्ठा करके भी वापस नहीं ला सकते।
तो मा जी कहते है ये जो भाव है मेरा और मैं, मेरी मोटर है, मेरा मकान है, मेरा व्यापार है।
पा जी कहते हैं ये जो भाव है मैं और मेरा, मेरा घर है, मेरा व्यापार है,
ये गलत है, ये गलत है, मेरा मकान है, आपका कोई मकान नहीं है, मैं हूँ। मालिक इस मकान का मालिक हो,
आप कहते हो की यह मेरा मकान है, मैं मालिक हूँ। लेकिन ये गलत बात है, क्यूँकी? आप मालिक नहीं हो, आप मालिक हो थोड़े समय के लिए
असली वाले कौन है?
असली मालिक कौन हैं
हम नकली मालिक बन कर खुश रहते हैं, हम नकली
मालिक बनकर खुश रहते हैं।
तो ब्रह्मा ये कहते हैं कि जो बोले वाले व्यक्ति हैं वो शोक में है, क्यूँकि और चिंता से भरे हुए है। आज कल सबसे ज्यादा है, तुम्हारी जो बिकती है, सोने के लेते हैं, नींद, जो फैली है, को नींद नहीं आती।
तो ब्रह्मा जी यहाँ कहते हैं कि जो शोक है शोक, सारे, संसार में हमें देखने मिलता है, आजकल 1 नई बीमारी है, जो हमको सोने नहीं देती, हम सो नहीं पाते, इसलिए नींद की गोली खाते हैं।
कहते हैं बलवाली व्यक्ति हैं, सलाह अपने धन को, शरीर को और मसलों को सास के लिए चिंता होती है।
तो ब्रह्माजी कहते हैं कि जो भौतिक व्यादि व्यक्ति होते हैं, वो अपने धन को, अपने शरीर को, अपने मित्रों को, इन सबका स्वास्थ्य ठीक रखना चाहते हैं और
विपरीत हैं।
और भौतिकवादी व्यक्तियों की ऐसी इच्छाएं रहती हैं जो शास्त्रों के विपरीत है और
कुछ भी, उनका भाव है कि भौतिक
सुख मिले और वे भौतिक वादी व्यक्ति कुछ भी करने को तैयार है। उनका भाव है कि भौतिक सुख मिले,
भौतिक सिद्धांत निर्भर है मैं और मेरा
और ये सारा भौतिक विचार निर्भर है। इस विचार पर मैं और मेरा तो
आगे कोई उपाय है।
तो आगे कोई उपाय है?
शास्त्र में आप पहले पढ़ते हो, क्या समस्या है? फिर समझते है उपाय क्या?
शास्त्रों में आप पहले पढ़ते हो कि समस्या क्या है? और फिर उसमे दिया रहता है कि समस्याओं का उपाय क्या है।
जैसे की इस लोक में ब्रह्मा जी कहते हैं आपकी समस्या क्या है?
आप
सुख चाहते हो, भाई में रहते हो, चिंता से, आप धन को बचाने की कोशिश करते हो, शरीर को बचाने की कोशिश करते हो। आपके उपाय क्या हैं? अब दिया जा रहा है।
तो ब्रह्मा जी जैसे इस श्लोक में कहते हैं कि भौतिक वादी व्यक्ति संसार में किस चीज से परेशान रहते हैं, वो चिंतित रहते हैं, अपने धन को लेकर, अपने स्वास्थ को लेकर शोक में रहते हैं, दुख में रहते हैं। और अभी जो है ब्रह्माजी उसका उपाय।
बताएंगे कहते हैं जब तक तुम
परम
भगवान के हो, तुम चिंता से रहित नहीं हो सकते।
ब्रह्मा जी कहते हैं जब तक तुम शरण नहीं लोगे, परम भगवान की तो चिंता से रहित नहीं होगे।
ऐसी हो तुम की शरण हो, चिंता से बचो।
तो ये विचार हमारे आचार्य ने दिया है की अगर तुम भगवान नंद महाराज के जो पुत्र है, भगवान कृष्ण, उनकी शरण लोगे, तो चिंता से मुक्त हो जाओगे।
मे बाबा जी अनेक महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा करे।
असम बाजी तात्पर्य में अनेक महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा करते हैं।
वो क्या हे भक्ति योग 1 माध्यम है जिसके द्वारा आप शांति प्राप्त कर।
या रोपा जी कहते हैं द्वातपहरे में भक्ति योग 1 माध्यम है जिसके द्वारा आप शांति प्राप्त कर सकते हैं।
कई बार मंदिर में आते हैं तो
कई बार लोग कहते हैं हम आपके मंदिर में आते हैं तो बहुत शांति मिलती है।
आप भगवान के चरण कमलों का स्मरण करो। तो भगवान के नामों का उचारण। अब शांति।
तो जब आप भगवान के चरण कमलों का स्मरण करते हैं और भगवान के नामों का उच्चारण करते हैं तो आपको शांति मिलती है।
तो समय अमेरिका
में
प्रोप जी पहली बार अमेरिका गए थे। उस समय अमेरिका जो था, वियतनाम युद्ध में जुड़ा हुआ था, वो कह रहे
थे, जाते थे शांति शांति।
शांति के लोग मोर्चा निकालते थे। वहां पर सड़कों पे और कहते थे शांति, शांति शांति चाहिए।
पापा ने 1 लेख लिखा, द पीस
फॉर्मुला, रौपा जी ने 1 लेख लिखा द पीस फार्मुला, शांति का फार्मुला,
अरे तुम्हे शांति चाहिए।
प्रपा जी ने कहा अगर तुम्हें शांति चाहिए तो भगवान के नामों का उच्चारण करो।
असली शांति प्राप्त हो सकती है। जब भगवान को के बनाए आपको असली
शांति तब प्राप्त हो सकती है जब भगवान को आप अपना मित्र बनाए।
अगर हाँ, यह सोचोगे हथियारों द्वारा आपकी सुरक्षा होगी।
अगर आप यह सोचो की हथियारों द्वारा आपकी सुरक्षा होगी तो यह गलत है।
आजकल हथियारों को बनाना विश्व का सबसे बड़ा धंधा बन गया है।
आजकल हथियारों को बनाना विश्व का सबसे बड़ा धंधा बन गया है। लोग हथियार क्यों खरीदेगा, हथियार क्यों खरीदना,
कोई युद्ध हो, कोई युद्ध हो, कोई भय हो, कोई भय हो, शांति का समय ज्यादा है तो हम हथियारों का नहीं सोचते।
जब शांति का समय ज्यादा है तो हथियारों का नहीं सोचते।
इस समय युद्ध में अनेक स्थानों में लम्बा युद्ध हो रहा है।
इस समय विश्व में अनेक स्थानों में लम्बा युद्ध चल रहा है।
ऐसे उक्रेन और रशिया का जैसे युक्रेन
और रशिया का 2 साल से चल रहा है, 2 साल से चल रहा है।
इजरायल, फिर इजरायली, मेडलिस् दुनिया के हर कोने में हथियार भरे हुए हैं।
दुनिया के हर कोने में हथियार भरे हुए हैं।
हथियार क्यों खेलेंगे, हथियार युद्ध के लिए
क्यूँ, हथियार क्यों खरीदे गए हैं? क्योंकि हर कोई युद्ध करने के लिए तैयार हैं।
तो भवाजीकहरेहैंअगर तुम्हें शांति चाहिए। क्या?
बाजी कहते हैं अगर आपको शांति चाहिए तो परम भगवान के शरणागत होना चाहिए।
तो शरणागत कैसे होगा?
शरणागत कैसे होंगे? भगवान की शरण कैसे लें? बोलिए
पहले हमें शास्त्रों में पूरा विश्वास होना चाहिए।
सबसे पहले हमें शास्त्रों में पूरा विश्वास होना चाहिए।
भगवान कहा गया है, भक्त जुड़ना है। अगर आप भगवान के जाने के भक्त, पूरा शददाहनाचाहिए, ये जो शास्त्र है, उनका उपदेश असली मार्ग है।
तो शास्त्रों में दिया हुआ है। अगर आप भगवत दाम जाना चाहते हो तो भक्ति योग में पूरा विश्वास होना चाहिए। और भक्ति योग में विश्वास है की शास्त्रों में हमारा पूरा विश्वास होना चाहिए।
देखिये, हम सोचे शायद सच है, कल्पना भी हो सकती है।
यह नहीं कि हम सोचें शायद सच है या कल्पना भी हो सकती है।
जैसे की अब अंग्रेजो का राज्य था, डिप्लोमेटिक थे।
अच्छे, जब अंग्रेजों का राज्य था तो अंग्रेज बड़े डिप्लोमेटिक थे, वो शास्त्रों को परिवर्तित करते थे, मुसलमान
कर दिया।
मुसलमानों ने तो मंदिरों को खंडित कर
दिया और ब्रिटिश है।
ज्यादा होशियार थे, जो ब्रिटिश थे, वो ज्यादा होशियार थे। अपने को बढ़ाये, उन्होंने अपने जो सिद्धांत लोग हैं, उनको संस्कृत पढवाया,
उनहोंने अनुवाद किया। वह तो माइथोलोजी है। और ये तो सच नहीं हो सकता। यह किसकी कल्पना है।
और फिर उन फिलोसॉफर्स ने जो वेदों का अनुवाद किया और ऐसा बताया कि ये तो सच नहीं हो सकता। ये सब झूठ है, मिथ्या है।
ये पीएच डी कह रहा है। हमें पूरा विश्वास होना चाहिए। जो आपको दी जा ही है, वो रोमानि।
हमें पूरा विश्वास होना चाहिए कि जो शिक्षा हमें शास्त्रों द्वारा दी जा रही है, वो प्रामाणिक है, असली है।
आप शास्त्र में पढ़ते हो की बार बार अनेक श्लोक हैं जिनके द्वारा यह साबित हो रहा है। भगवान के नाम भगवान, आप
शास्त्रों में पढ़ते हो। कि बार बार ऐसे कई श्लोक हैं जिनमें ये सिद्ध किया गया है की भगवान और भगवान के जो नाम है वो अभेद है।
हमारे, हमारे नाम में अंतर है, हमारे
और हमारे नाम में अंतर है।
आप यहाँ क्लास में बैठे हो, आपके घर से फ़ोन आ रहा है।
और
अभी आप यहाँ बैठे आपके फ़ोन आता है तो कोई और जवाब नहीं दे सकता।
भगवान के नाम को अंतर है।
भगवान और भगवान में नाम में कोई अंतर नहीं।
कृष्ण भगवान का नाम है। क्या है रानी, जिसको छू के सोना बन जाएगा। 1 में शिवजी को बड़ा आशुतोष है प्रसन्न होते हैं हो जाते है। तो मैं बडा किया ने कहा मने कोई वर्ल्ड चाहिए मैंने उनको 1 पता दे दि ा जो कि हर चीज को छूते ही सोना बना रहता है रावण बड़ा खुश हुआ सोना बना तो 1 व्यक्ति को सोना कैसे बना रहे हो क्या सकती है पसंद किया था यह परिणाम प्रा सभा और बुलवा उस
ने
दिया है उसके पास और शक्तिशाली वस्तु
तो भगवान का नाम कैसा है चिंतामणि पारस पत्थर के समान है। 1 बार 1 ब्राह्मण ने भगवान शिव को बड़ा प्रसन्न कर दिया और शिव जी से वरदान मांगा शिव जी जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। तो शिव ने वरदान दिया उन्होंने कहा की मुझे वरदान चाहिए कि मेरे पास ऐसा कुछ हो जिससे मेरे पास बहुत धन आ जाए। तो उन्होंने उनको 1 संत के पास भेजा और संत ने उनको पारसमणी पत्थर दिया छूते ही लोहे को सोना बन जाएगा। तो किसी 1 विद्वान व्यक्ति ने ब्राह्मण से पूछा कि संत ने अगर आपको जो है पारसमणि का पत्थर दिया है और जिससे सोना बन जाता है लोहा तो उनके पास और भी ज्यादा महत्त्वपूर्ण वस्तु होगी
ठीक हो क्योंकि जब मैं उसे मिला तो रखा था कचरे के दबे के लिए सो।
ब्राह्मण ने कहा आप सच कह रहे हो जब मैं उस संत से मिला और मैंने उनसे पारस मणि पत्थर लिया तो उन्होंने इसको कचरे के ढेर में रखा था
ज्यादा हो गया जरूर उनके
पास कोई ज्यादा कीमती वस्तु होगी वो
वापस लौटे अगर ये सबसे कीमती वस्तु थी अपने कचरे के डब्बे के नीचे
क्यों रखा वे ब्राह्मण और संत के पास वापस पहुंचे और उन्होंने कहा कि अगर ये सबसे कीमती वस्तु है आपके पास, तो आपने इसको कचरे के डब्बे में क्यों रखा।
संत ने कहा असली जी चाहिए फेंको।
इस पर पत्थर को तो संत ने कहा अगर आपको असली चीज चाहिए तो फेंक 2 इस बरस वाणी पत्थर को
ही जगा था।
तो इस ब्राह्मण ने फिर वो पत्थर को यमुना में फेंक दिया हो क्या
दिया वो संत वस्तु।
फिर ब्राह्मण को। संत ने क्या दिया हरिनाम जो है सबसे कीमती वस्तु
चेतावनी जैसा है। ज्ञान ज्ञान से कई माह हँसी उड़ाते है। कई लोग शाम को बीच में जाते हैं, नाम करते है हम सब को जाना बीच में हजारो लोग आते है सुनेंगे केवल कृष्ण
तो भगवान का नाम चिंतामणि है। कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार से नाम का उच्चारण करेगा तो उसको लाभ मिलेगा। कई बार लोग जैसे हमारे निंदा करते हैं या हरे कृष्ण वाले ऐसे हैं तो उनको भी लाभ मिलता है। तो हरिनाम करने जाते हैं जैसे आज इतवार को भक्त लोग जाते हैं सभी भक्तों को जाना चाहिए जो बीच में शाम को वहां पर हजारों लोग हैं और हरे कृष्ण महामंत्र सुनने से उनका
लाभ मिलेगा उनको पूर्ण भगवान जो हैं हर रूप की, नाम के इलावा और किसी चीज की आवश्यक नहीं।
भगवान जो हैं वो पूर्ण है। तो हर रूप में भगवान जो है पूर्ण है। इसलिए भगवान के नाम के अलावा ऐसा नहीं है कि कुछ और प्रोसेस की जरुरत है। नाम पूर्ण है। हमें भगवत भक्ति देने के लिए हमें
हर मंत्र के अलावा किसी और मंत्र की आवश्यकता नहीं है।
हमें हर 1 कृष्ण मंत्र के अलावा और किसी मंत्र की आवश्यकता नहीं है।
नहीं, नहीं, बाहर हमारे नाम कर, चोरी।
जैसे बाहर से हमारे नाम जप करते हैं और चोरी चोरी दूसरे मंत्र जप करे।
शुदो
नाम है।
भगवान के नाम बिल्कुल पवित्र हैं, शुद्ध हैं, नाम
लेगा।
भगवान के नाम इतने पवित्र हैं कि कोई अज्ञानता से भी लेगा तो उसको लाभ मिलेगा।
आपको
छुटकारा भगवान का नाम नित्य मुक्त हैं। भगवान का नाम जप करने से हमें भौतिक संसार से छुटकारा मिल सकता है। अभिन्न तो नाम, नाम, भगवान और भगवान के नाम जो है वो अभिन्न है।
शास्त्र में अनेक श्लोक हैं जिनके द्वारा ये सन्देश दिया जा रहा है। भगवान के नाम में।
शास्त्रों में अनेक श्लोक हैं, जिसमें यह संदेश दिया जा रहा है कि भगवान के नाम में वो भगवान जैसी ही
शक्ति है, का पूरा लाभ उठाना चाहे। अपराधों से रहित उचारण करना चाहिए।
अगर हम भगवान के नाम का पूरा लाभ उठाना चाहते हैं तो हमें अपराध रहित होकर भगवान के नाम का है।
बहुत जन्मा करे। यदि व अनेक जन्म में ऊचा कर सकता है, करेगा, पूरा लाभ नही मिलेगा।
व्यक्ति बहुत जन्मों तक अगर नाम जब कर रहा है, लेकिन अपराधों से रहित नहीं हो रहा है तो नामों का पूरा लाभ उसको नहीं मिलेगा।
भाग्य है कि कौन संस्था में
हमारा ये भाग्य अच्छा है कि प्रौपर्जी ने इस कॉनसंस्थामें असली संदेश दिया है।
कोई बनावटी नाम नहीं दिया, यह बनावटी नहीं है। कहा जा रहा है कि अगर आप सोचते रहे होगा। भय क्या है? भाई ये है, कुछ हो नहीं जाए।
इस भौतिक संसार में जब तक रहोगे तब तक भय में रहोगे। भय क्या है की हमारा जो इच्छा हैं, हमारा शरीर, हमारे रिश्तेदार, ये सब जो है, ठीक रहने चाहिए।
भगवान की शरण लो गे चिंता से रहे हो जाओगे।
अगर आप भगवान की शरण लोगे तो इस चिंता से मुक्त हो जाओगे। यह हमारा अनुभव भी है, यह हमारा अनुभव भी है।
श्रीमत द्वारा आपको उत्तम संदेश मिल रहा है।
श्रीमत भागोतम के द्वारा आपको उत्तम संदेश मिलता है,
सबसे उत्तम ज्ञान है।
श्रीमत भागोतम में सबसे उत्तम ज्ञान है।
ज्ञान कहाँ से आ रहा है?
यह ज्ञान कहाँ से आ रहा है?
भगवान के द्वारा। परम भगवान के परम भगवान अवतरित हुए। व्यास देव के रूप में हमें इन शास्त्रों का ज्ञान देने के लिए।
परम भगवान अवतरित हुए। व्यास देव के रूप में हमें इन शास्त्रों का ज्ञान देने के लिए
सारे शास्त्रों की चर्चा किया।
वेदव्यास जी ने सारे शास्त्रों को प्रस्तुत किया और सारे शास्त्रों का सार जो है वो प्रस्तुत किया। वेदांत सूत्र में और उन्हें यही लग
रहा था मेरे कार्य में कुछ कमी
रह गयी है, पर उन्हें यह लग रहा था कि मेरे कार्य में कुछ कमी रह गयी। है।
हो गए। अरे गुरु,
वे गए अपने गुरु नारद
मुनि के पास, मुनी ने कहा, तुम्हारे बेचैनी का कारण है। तुमने केवल शुद्ध भक्ति का बल नहीं दिया और चर्चा की शुद्ध भक्ति का ज्ञान नहीं दिया। यह तुम्हारी निराशा का कारण तो नारद।
मुनी ने कहा, तुम्हारी बेचैनी। तुम्हारी निराशा का कारण यह है कि तुमने शुद्ध भक्ति पर बल नहीं दिया है। कर्मकांड और दूसरी वस्तुओं पर भी तुमने उतना ही बल दिया है।
इस पूरे 18 हजार श्लोकों में कहा भी आपको नही मिलेगा।
तो इसलिए आप देखते हो श्रीमद भाग दम के पूरे 18 हजार लोक में कहीं पर भी आपको भौतिक कर्मकांड का चर्चा नहीं मिलेगा। शुद्ध भक्ति का ज्ञान हर जगह शुद्ध भक्ति का ज्ञान है।
पढ़ते हो लोगों ने इन का प्रयास किया।
अब अनेक कथाएं पढ़ते हो। किस प्रकार लोगों ने इन्द्र दिप्ति का प्रयास किया। जैसे महाराज, ययाति 10 हजार सालो के
लिए हर प्रकार की भौतिक सुविधा ने
प्राप्त, उनको 10 हजार साल के लिए हर प्रकार की भौतिक सुविधा प्राप्त हुई
ने क्या कहा उन्होंने?
पर अंत में क्या कहा उन्होंने मैं
तो 1 काम बकरी के समान, मैं
तो 1 जो काम के वश में बकरी है, उसके समान था।
वो जो है के बाहर घास खा रहा है।
आप देखते हो जो बकरी होती है, वो जो कतल खाना होता है, उसके बाहर वो घास खा रहे हैं। उनके बारे आलेवालेहै, उनको यह नहीं पता होता कि बहुत जल्दी उनकी बारी आने वाली।
हमे ज्ञान में नहीं जीना चाहिए तो
हमें अज्ञानता में नहीं जीना चाहिए, अज्ञानता में नहीं रहना चाहिए, अज्ञानता में नहीं रहना चाहिए।
ज्ञान को अनुकूल कर।
जो हमें ज्ञान है वो अनुकूल करना चाहिए।
अज्ञानता में जन्म लेते हैं, ज्ञान में पलते हैं और अज्ञानता में मृत्यु हो जाती है।
कई लोग हैं जो अज्ञानता में जन्म लेते हैं, अज्ञानता में बढ़ते हैं और अज्ञानता में ही मृत्यु हो जाती है।
जो भाग्यशाली है वो भक्ति योग में
आते है और जो भाग्यशाली हैं वे भक्ति योग में आते हैं।
बाबा जी ने कहा कि जब तक तुम्हारे पूर्व जन्म, ऊँचे संस्कार नहीं हो, शुद्ध नहीं जुड़ सकते।
बाबाजी ने कहा जब तक आपके पूर्व जन्म के अच्छे संस्कार नहीं है और तुम शुद्ध भक्ति से नहीं जुड़ सकते,
आप सब को असली ज्ञान मिला है
तो आप सबको असली ज्ञान मिला है। लाभ उठाओ, इसका लाभ उठाओ, खुद स्वीकार
करो,
खुद स्वीकार करो और ये उपदेश दूसरों को भी। 2
तुम प्रसन्न हो गये और भगवान प्रसन्न हो गए।
इसके द्वारा आप भी प्रसन्न हो जायेंगे और भगवान भी प्रसन्न हो जायेंगे।
तो आज लोक में ब्रह्मा जी उचारन क्या उचारण।
आज किस लोक में ब्रह्मा जी क्या उच्चारण कर रहे हैं।
जीवन में चिंता ही चिंता है और जीवन में आप चिंता से रहे।
भौतिक जीवन में चिंता ही चिंता है और आध्यात्मिक जीवन में आप चिंता से रहित हो सकते हो।
आप मंदिर वाले चिंता नही हो, आप
कहोगे, मंदिर वाले भी तो चिंता में रहते हो।
चिंता किस चीज की चिंता।
हम भी रहते हैं चिंता में, लेकिन किस तर की चिंता होती है।
भगवान को कुछ की सेवा में सब जुड़े।
भगवान की सेवा में सब जुड़े, हम
ये चिंता रहे की हमें
यह
नहीं हो गया।
अगर हम ये चिंता रखते हैं कि हमें यह चाहिए, यह चाहिए, यह चाहिए। अपने स्वार्थ के ले, तो फिर आप चिंता से रहित नहीं है।
भक्त का यह विचार है। स्वामी कौन है?
भगवान तो जैसे भक्त का क्या विचार होता है? हर जगह स्वामी कौन है।
परम भगवान सुविधा प्राप्त हो, सफलता प्राप्त हो, हम क्या सोचते हैं इसका उपयोग किया जाए।
भगवान की सेवा में हमें कोई सफलता प्राप्त हो, तो हमें क्या सोचना चाहिए की कैसे हम इसको भगवान की सेवा में उपयोग कर सकते हैं?
ऐसे नहीं सोचो तो आप चोर हो,
अगर आप ऐसे नहीं सोचो तो आप चोर हो।
ये विचार आयेंगे। अगर आप जॉब करोगे के संघ में
रहोगे, तो ये विचार आयेगा। आपका जब आप जब करोगे और भक्तों के संग में रहोगे, ठीक है, किसी का कोई प्रश्न है, प्रश्न है तो हाथ उठाइए माइक, आएगा कल चंपा व वायर वाला माइक बन होता। for the nice gas marg in transation, it was mentioned the sमtanस me developed some on lo ful desis
yen when
somebody comes in devotional life, he may have सम unlawful desis i m the
point in to indian es enjoyment throu animes in liga o actually what brahma saying that love ful desire is also in the stage thats on exit i⁇mgryingto save money exit expose। ये
और कोई प्रश्न है, हरेक
1
प्रश्न है इधर maharaj when we डिजायर दन गodgosasdivosion
a gaa krishna s, i many hard ever everyone no the one, i remember me i give in bukti, one of for get me i m a god seas, we have a desire site, lodbighein body found bing a book
item तो प्रश्न यह है कि हम अगर इच्छा करते हैं, तो क्या भगवान हमें भक्ति देते हैं? सो उत्तर है कि भगवान हम सबके हृदय में बैठे हुए हैं, हम अगर भगवान को प्राप्त करने की इच्छा करते हैं, तो भगवान हमें ऐसे लोग उपलब्ध कराएंगे जैसे कोई व्यक्ति हमें आके बुक दे देगा या कोई भक्त आप आके हमसे मिलेगा, भगवान हमको अपने से जोड़ेंगे। और अगर हमारे हृदय में इच्छा है कि हम भगवान को भूलना चाहते हैं तो भगवान वो भी अरेंज करेंगे। और आपके हृदय में ज्यादा से ज्यादा बहुत किच्छा अरे कृष्ण महाराज धन्यवाद महाराज, महाराज आप बताए थे, महाराज आप बताए थे, बागोतम में शुद्ध भक्त के बारे में बताया, टोटल, शुद्ध भक्ति के बारे में बताया महाराज हम पढते है बागोत रेगुलरली बट जो प्रिंसिपल स दिया है तो वो अप्लाई नहीं कर पाते महाराज प्रिंसिपल बागोत में दिया है वो अप्लाई नहीं कर पाते महाराज तो क्या करें
ट्राई अगेन प्रयास करते जाओ, प्रयास करोगे। क्या कहते है जो श्रद्धा से प्रयास करते है में कमी भी दूर करता हूँ, so go देंगे
तो आप प्रयास करते रहिए, भगवान आपको जरूर सफलता देंगे। गीता में भी भगवान कहते हैं। तो जो श्रद्धापूर्वक प्रयास करते हैं वो मुझसे दूर नहीं है
महाराज दंडवत प्रणाम मेरे को जानना ये है अपना बॉडी में कितना आत्मा रहते है?
क्या हमारे शरीर में कितनी आत्माएं रहते है? 1 आत्मा 1 आत्मा रहती है न
मैंने सुना हूँ, सुप्रीम सोल और इंडिपिडेंट सोल दैट्स वाई आइ आस्किंग
इंडिवि आत्मा
1 है और 1 बार महात्मा है।
thank you very much okay es na।
महाराज करिश्णा ses इन बglgetathatosu srेndrtकैnक्रॉस ईजीली सो what is men by सरेंडर, what
act should be performed to so serendrcrisanwanc?
प्रश्न है कि भगवान कहते हैं तुम मेरी शरण लोगे, तो मैं तुम्हें माया से पार करा दूंगा। तो शरण लेने का मतलब क्या है? सो उत्तर है शरण लेने का मतलब है वो कार्य करना जो भगवान हमें चाहते हैं करना, जैसे नाम जप करना, गीता पढना, भगवान की सेवा करना, ये सब हम करेंगे इसको शरणागति के इधर इधर, इधर। यह दे।
2
यस की
माइक बंद, मत कीजिये चालू ही रहने हरे कृष्णा महाराज जी जैसे आपने कहा कि भगवान में और भगवान के नाम में कोई अन्तर नहीं है। लेकिन ऐसा अनुभव होता है जब हम भगवान के अर्चा विग्रह की जब सेवा करते हैं तो मन बहुत अच्छी तरीके से लगता है। लेकिन हरिनाम लेने बैठे हैं तो हमारा मन यहाँ वहाँ भटकता है। तो इसके लिए हमें क्या करना चाहिए में नाम भटकता मन भटकता है।
तो क्या करना, यह मन भटक रहा है। पापा ने कहा इग्नोर पापा से
पूछा है कि जब करते वक्त मन भटकता है तो क्या करे? तो बाबा जी ने कहा इग्नोर उपेक्षित कर। 2 उसको ध्यान मत। 2 जो मन बोल रहा है और जब करते हो पीछे है।
हरे हरे सा महाराज जी धन्यवाद महाराज आप अपने लेक्चर में बता रहे थे कि इस भौतिक संसार के अन्दर कोई सुख नहीं है, इनदेतिप्तीकरनेमें कोई सुख नहीं है। आप थे, महाराज का एग्जाम देकर बता रहे थे। तो हम कई बार इसको सुनते हैं। तो कनेक्शन कैसे डेवलप होगा की इस संसार के अन्दर कोई सुख नहीं है। भक्ति में रियल टेस्ट है।
भगवान भक्तों को भी कष्ट देते हैं। भक्तों को यह साबित करने की कष्ट कष्ट है? भाई बन गए, कोई बीमारी नहीं हुई, निशाना नहीं हो। आप का कष्ट जब आप कष्ट अनुभव करते हो तो आप देखते हो। भगवान के भक्त बनने में भी ये ही कष्ट नहीं आएगा
सो भगवान का भक्त बनने पर भी हमारे जीवन में कष्ट आता है। ऐसा नहीं कि आप भक्त बन गए तो बुढापा नहीं होगा, बीमारी नही आएगी नहीं। तो फिर आप बोलोगे की कष्ट कहाँ पर है? पिछले कष्ट आते हैं? उनसे हम समझ सकते हैं कि इस संसार में कष्ट हैं? संसार जेल खाना है, ये संसार जेल खाना पीछे आदित्य।
हरी कृष्ण, हरी कृष्ण महाराज बोले, महाराज श्रीमद भागवतम में, महाराज श्रीमद भागवतम में।
तो उठाओ कौन बोल रहा हूँ।
महाराज श्रीमद भागवतम में। टू प्वाइंट नाइन पॉइंट थ्री में, प्रपात पर में लिखते है की प्यार डिउटी कभी पड नहीं होता है। एंड उसी परवर्ट में प्रपद ये भी लिखते हैं कि ब्रह्मा जी प्यार डिवोटी है। फिर हम लोग यह भी देखते हैं कि जब ब्रह्म विला होती है जिसमें ब्रह्मा जी बेसिकली कृष्णा को नहीं समझ पाते है और बहुत सारी मिस्टेक्स करते हैं। तो महाराज मेरा प्रश्न यह है कि हम कैसे समझ सकते हैं कि प्यार डिवोटी कौन है और क्या लेवल होते है प्योर डिवोटी और उमर। हमारे सराउंडिंग में भी हम कैसे देख सकते हैं कि वैश्नव प्यार डिवोटी है
या नहीं है राउंडgमेंा्फॉलो प्योर प्रोसेस। तो अगर आप देखते हो ये भग सब नियमों का पालन कर रहा होगा। हम कह सकते हैं वो उसके संग में लाभ होगा। हम देखते हैं वो बड़ा बड़ा सिधान का दे रहा है और लोगों से ठीक चर्चा नहीं करता है। ऐसा है। तो फिर आप देख सकते हो।
तो कौन शुद्ध भक्त है? कैसे पता पड़ेगा सु। प्रोपज ने कहा कि मेरे सारे शिष्य जो हैं, वो शुद्ध भक्त हैं। अगर वो जो नियमों का पालन करते हैं तो हम अपने आस पास देख सकते हैं। भक्तों को अगर नियमों का पालन करते हैं तो उन्हें हमें उनके संग का लाभ मिलेगा। ऐसा नहीं कि कोई व्यक्ति बड़ा बड़ा लेक्चर दे रहा है, लेकिन इरचाहृृदयमेंघमण्ड है तो फिर वह उतना ठीक नहीं।
थैंक।
यू महाराज
उधर
हरे कृष्ण, हरे कृष्ण महाराज।
हम अपने चैटिंग, हम अपने चैंटिंग की
क्वालिटी कैसे इम्प्रूव कर सकते हैं?
प्रयास करके
प्रयास करते रहिए। हरे कृष्णा महाराज, मैं भी अभी अभी मैं गाड़ी से
है।
अभी अभी मैं गाड़ी से ऊपर उतर रहा था तो कोई जो ड्राइवर था
वो अलग धर्म का था।
तो मुझे पूछने लगा आप ये माला जपते हो, लेकिन ये माला आप घर में क्यों नहीं कर सकते? आप शो आप क्यों करते हो? बाहर ले के, क्या आप शो आप क्यों करते हो? जब कर रहे थे क्सी में, तो उस धर्म का ड्राइवर बैठा तो उसने बोला घर में जप करो। इधर हर जगह क्यूँ दिखाता है?
जी हाँ भगवान।
क्योंकि हम हमेशा भगवान के नाम का जप करते रहते है। जहाँ पर भी रहते हैं, जितना करो उतना कम है, जितना करो उतना कम है। माइक इधर भेज बोलो हरे कृष्णा गुरु महाराज जी महाराज जी, पाप पाप, कार्यों में मेरा मन और इन्द्रियाँ बहुत अच्छे से लगता है। लेकिन भक्ति में मन और इन्द्रियां लगता नहीं है। मैं क्या करूँ?
ये कोई नई बात नहीं है,
यह
कोई नई बात नहीं है, यह सबकी समस्या है। ये सबके साथ, यही है। केवल आपकी समस्या नहीं, केवल आपकी समस्या नहीं, सबकी समस्या है।
इंग्लिश में मेरी लव्स कंपनी। जो व्यक्ति दुखी है, दूसरे व्यक्ति को दुखी देख खुश होता है, जो व्यक्ति
दुखी है वो दूसरे व्यक्ति को दुखी देता है। तो देखता है तो खुश हो जाता है।
सभी आपकी स्थिति में है, दूसरे से आपकी स्थिति में। उपाय सबके लिए दिया जा है, उपाय
सबके लिए दिया जा रहा है। ओके लास्ट क्वेश्चन लास्ट क्वेश्चन
है
आएगा आएगा लोग,
हरे कृष्णा, हरे कृष्णा महाराज, डाउनलोड प्रणाम महाराज। मेरा यह प्रश्न है की
बोले बोले
प्रश्न बहुत हरी कृष्ण महाराज। मेरा यह प्रश्न है की भक्ति में आने के बाद माता पिता बहुत पोस्ट करते हैं, इसको सहयोग नहीं देते हैं। प्रयास करते है कि हम भक्ति से हट जाएं,
गंगा में है वो सोचेंगे बच्चा घर में हो तो कमायेगा और विवाह करेगा तो हमारे मन में भाव हो न जाए, भक्ती नहीं छोड़ने की है। अगर आप भक्ति करोगे उसके द्वारा तेरा पीडी तक हम आप सबका उद्धार कर सकोगे
तो ये
ओके सुरिल स्टॉप नो।
ओके हम यहाँ पर विराम देंगे। अरे कृष्ण परम बुज गोपाल कृष्ण को स्वयं महाराज की शिला प्रभुपाद की तो दोपहर में 1 बजे वृंदावन हॉल में दोपहर में 1 बजे वृंदावन हॉल में भी परम गोपाल कृष्ण को स्वामी महाराज का लेक्चर है तो वहाँ पर सब लोग आ जाइए।
बंदे हं श्री गुरु श्री जुता पदकमल श्री गुरु बस सीरुपंरागरजातं रा ना ना कान tan tan sadevam satta sabahutanprjna sहtmksnattnaधeवan श्री राधा kitna bada sabana lalta semsakancamca ragsslacatरभुका
कषनाजेगगा अगर कनायगेगागिगाचर
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हरे रामा हरे रामा रामा रामा
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हरे रामा आरे रामा रामा रामा
हरे कृष्णा कृष्णा केश्णाहरहारे हरे रामा हरे रा रा
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राम हरे कृष्ण ना कृष्ण केषणाआरेहारीहरे रहा राम हरे
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हरे देशा कृष्ण देश हरे हरे हरे राजा रा रामा हरे हरे
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हरे रामा हरे रामा रामा रामा रे हर देश
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हरे राम हरे राम राम
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हर हर दिशा हर हर हर हर हर हर
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हर हर हर राह हर राह हर हर
हर रामा रामा रामा
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हरे देना हरे हरे हरे राम हरे राम हरे हरे हरे रा
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हररारदिरा हरे हरे हरे राम हरे राम हरे आहर राम
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हर देश दिशा या हरे हरे रामा रामा रामा रामा हरे हरे हरे
राम हरे राम राम
हरीश हर हर राह हर हर हरे
रामा हरे रामा रामा रा
दिशा हर राह हर राग हर गे
अरे कृष्णा हरे कृष्णा 1 मिनट अरे कृष्णा हरे आवाज हरे कृष्णा हरे कृष्णा आवाज नहीं आ रही है
और बड़ा
हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे
क वन मिनट माइक चेक कर रहे
हैं हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण
हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
ठीक है
तो
धूप
दीप, गंध पुष्प नबिये 5 हो गए 5 होना चाहिए गंध म मतलब चंदन थोड़ा चंदन घिस के फूल के ऊपर छिरक दिए, पहले धूप से, फिर दीप से पंच प्रदीप या 1 प्रदीप, फिर फूल से फूल में चंदन और बाद में थोड़ा नई नई विद में जो भी हो रसुगुल्ला रस्म या थोड़ा फ्रूट्स और दोपहर को जो खाना
जिसके पास
भी हाथ हो हाथ पर करो और आगे आज द grlsondrritsaid कम कम cm
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lovely हरे kisna
आवाज
नहीं हा hre krsna
श्रीराम
इतनी आवाज
निकालना है आपको कृष्णा कृष्णा
हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा
रा
मा रामा हरे हरे
लास्ट वन हरे
कृष्णा हरे कृष्णा
कृष्णा कृष्णा
हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे जाए, श्रीराम जय, श्रीराम जय रामचन्द्र भगवान की, श्री श्री सीता राम लक्ष्मण भक्त वान की, श्री राधा राज बिहरि ललिता, विशाका देवी की, श्री श्री गौव्निताभगवान
की, श्री प्रभु पात की।
प्रोप की। दर है, प्रभात की है, इस प्रपात के धर है हरे कृष्णा रोपात ने। 70 साल उम्र में, शिप में अमेरिका गए, नाइनटीन सिक्सटी में किस में गए, फ्लाइट में नहीं, पानी में गए। when you as passing through for his business, purpose, he was a camist, he
was
सोल रीटेलर फॉर नॉर्थ इंडिया ऑफ boslebitry kalkata, there was a medical medical bos, कmicsइनकैlकatा इंडिया का सबसे लुपिन ग्रुप ग्लेनमार्क है, कैडिला है, सिपला हैं, वित हैं कितना सरे प्रोप जिधर काम करते थे। as a manager bos, द फर्स्ट केमिकल इंडस्ट्री इन इंडिया। फिर उन्होंने उस काम छोड़ा, उनके दवाई नौरतिनडेमेंबेजते थे तो गोरखपुर कानपुर डेली बॉम्बे घूमते थे दवाई लेकर, तब जगह देखा, बोले जगह मुझे मिलेगा तो 1 दिन में मंदिर बनाऊंगा। आज देखिये अरे क्या था पूरा जंगल, पूरा जंगल, आज वे मंदिर बन गए। इनकी इच्छा था यह राज ने राज बिहारी को बोले आकाश गंगा होटल में आकाश गंगा होटल है, अभी डाउनटन में आई डोंट नो तो होटल में राजबीरी
थे,
तो उनको बोले इधर झोपड़ी बनाये उनके लिए झोपड़ी था, जिधर लाइफ मेंबर ऑफिस से उनको बोले राजव्यरीएक दिन आपके लिए मैं मंदिर बनाऊंगा। अभी इधर झोपड़ी में रहिए तो गिरिराज महाराज ने 1 बुक लिखा आई विल बी डू टेम्पल, पूरा जुहु हिस्ट्री,
ये
राजबीरी जो मूर्ति है, भारत में, डेढ़ सौ मंदिर है, सबसे प्यारा, सबसे कृपालु डी टी आई है मायापुर में राधा माधव, वृंदावन में राधा श्याम सुंदर मीरा रोड में राधा गिरी धरी गिरगाव चौपाटी में बाबुल, नथ के पास राधा गोपीनाथ, पूने में राधा कुंज बिहारी हैदराबाद में राधा मदन मोहन। ऐसे हमारे डेढ़ सौ मंदिर हैं। इंडिया में सबसे प्यारे और मोस्ट मर्सिफुल डी टी राधा, राजबीरी, राधा राजबीरी की। तो अब हम जो मंत्र बोले हरे कृष्णा इस को गायेंगे अभी ठीक है और सन डे है। ये होली डे है और होली डे भी है। होली डे को होली बनाना है। कैसे मंदिर में आके बहुत लोग बाहर जायेंगे खाने के लिए
हरे कृष्ण हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे
हरे सिक्स्टीन नेम्स अब 16 बार बोलेंगे तो 1 मोटी हुआ। ऐसे 100 8 बार बोलना है। आपको कितना बार बोलना है 100 8 तो 1 माला हो जायेगा। अभी सबका एग्जाम आ रहा है सिया का एग्जाम, सीएग्जामनिकलगया अभी टेन का ट्विल सबका एग्जाम आ रहा है आप 1 माला जब्त नहीं करोगे तो नंबर कम आएगा पढ़ाई के पहले मोर फोकस मोर कॉन्सेंट्रेशन उसके लिए 100 8 बार बोलो कितना बार बोलना है। वन जीरो लाकिंग नंबर टेन मिनट्स ओनली ओके और गोपालजी को भोग लगाओ। गोपाल जी को थोड़ा आरती करो। तुलसी को प्रोडक्शन करो तुलसी में पानी 2 फिर कॉलेज जाओ पढ़ाई करो। अभी कॉलेज नहीं है घर पर पढ़ाई करो पढ़ाई के पहले 100 8 बार बोला है। मैं पढाई नहीं कर तुम्हें जॉब करता हूँ जॉब जाने के पहले नहीं तो आने के बाद कम से कम सोने के पहले यह हमारे ब्रुसली है। ब्रुसली देखो पीछे है आपका हरे कृष्णा
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रा म हरे रामा रामा रामो हरे हरे एवरीबॉडी
र
लाउडली जो जोर से नहीं बोल रहा था नम्बर कम आयेगा लाउडली
ृष्णा कृष्णा हर हारे हरे राम हरे रामो राम राम
रे
हरे कृष्णा हरे कृष्णा
राम
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम ह हरे रामो राम राम हरे हरे ललीर
आवाज नहीं आ रहा है
हर रामा
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हारे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हार
जोर
से
हरेक ना हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा
हरे हरे हरे रामा नहीं हो रहे
आपका हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष ना
मेरे साथ,
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे
हरे हरे राम नहीं हो रहा है
राम राम राम हरे बंद करो मत
बताओ गाओ बोलो
बताओ मत
रह
हरे कृषणा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम ह हरे रामो राम राम हरे हरे
बोलो
गा
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हारे हरे रामो हरे रामो रामा राम हरे हो रे
lovely
everybody
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे
हरे
हरे राम हरे राम राम राम
हरे
राम राम राम हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम ह हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।
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