पृथु महाराज का उपदेश | SB 4.21.33 | 25 Feb 2024 | Rohini | Srila Gopal Krishna Goswami

In this extended Hindi devotional lecture, the speakers elaborate on Prithu Maharaj’s teachings, emphasizing pure devotion (shuddha bhakti) expressed through mind, speech, body, and actions. They reiterate the scriptural basis for the four varnas and their duties, citing Srimad Bhagavatam 4.21.33 and the Bhagavad Gita. The discourse covers several practical initiatives: the mandatory Bhagavad Gita curriculum in Gujarat schools; international missionary work referencing A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada and Bhakti Vinod Thakur; and the ongoing construction of a new temple slated for inauguration on Ram Navami. A substantial portion of the second section focuses on the rapid expansion of temples in Delhi—highlighting fifteen existing temples, a forthcoming temple in Punjabi Bagh, and the vision of establishing a temple in every corner, regardless of size. The speakers describe plans for a library within the new temple, the “11 conditions” governing temple activities, and the encouragement for devotees to achieve at least sixteen rounds (malas) of chanting, with guidance on disciplined study of scriptures. Themes of humility, service, and the urgency of spiritual practice in the face of limited time are repeatedly stressed. The lecture concludes with calls for collective effort, modest conduct, and devotion to Krishna as the ultimate protector.
Chapters
चौथा अध्याय 33 अध्याय 21 लोक संख्या तेतीस तमेवयुजम भजतामवृत्तिभिमनो बचाकायगोलास्वकमधी
मायना का मधु
अमाइन कामदुगंग्री पंख जम अमाइन कामदुदादीपंख पंख जम। यथाधिकार अवस्ती अर्थ से दया रितु महाराज ने ट्रांसिशन पितु। महाराज ने अपने प्रजा जनों को उपदेश दिया। तुम सबों को अपने मन, वचन, दे तथा कर्मों के फल सहित सदैव खुले मन से भगवान की भक्ति करनी चाहिए। तुम सब अपनी समर्थ तथा वृत्ति पर कार्यों के अनुसार पूरे, विश्वास तथा बिना हिचक के भगवान के चरणकमलों की सेवा में सलक न हो। तब निश्चय ही तुम्हें अपने अपने जीवन उद्देश्य प्राप्त करने में सफलता प्राप्त होगी। कार पर जैसा की भगवत गीता का खाल में ध्यान में कहा गया है। सर्व कर्मात मनुष्य को अपने वृत्ति पर कार्यों द्वारा भगवान की पूजा करनी होती है। इसमें चारों वर्णों चारों आशयों के सिद्धांत को स्वीकार करना पड़ता है। अतः पृथु महाराज कहते हैं गुण स्व कर्म भी इस प्रदान की व्याख्या भगवत गीता में इस प्रकार प्राप्त है 4। पुर वर्ण नया सिस्टम गुण करम विभाग भगवान द्वारा प्रकृति प्राकृतिक गुणों तथा उन दोनों के अंतर्गत विशिष्ट कर्तव्यों के अनुसार चारों जातियां, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य तथा शुद्र बनाई गई है। जो व्यक्ति सतोगुणी होता है, वे निश्चित रूप से अन्यों की अपेक्षा अधिक बुद्धिमान होता है। अत ब्राह्मण के कार्य, सत्य, बोलना, इंद्रियों का संयम, मन का संयम, स्वच्छता, सहिष्णुता, आत्मज्ञान तथा भक्ति का ज्ञान कर सकता है। इस प्रकार यदि वह सच्चे ब्राह्मण की भांति भगवान की सेवा करता है तो उसके जीवन का अंतिम लक्ष्य पूरा हो जाता। ऋतु महाराज ने अपने प्रजाजनों को उपदेश दिया। तुम सबों को अपने मन, वचन, देह तथा कर्मों के फल सहित सदैव खुले मन से भगवान की भक्ति करनी चाहिए। तुम सब अपनी समर्थ्य तथा वित्ति पर कार्य के अनुसार पूरे विश्वास तथा बिना हिचक के भगवान के चरण कमरों की सेवा में सलग न रहो। तब निश्चय ही तुम्हें अपने अपने जीवन उद्देश्य प्राप्त करने में सफलता प्राप्त होगी।
हर दिशा हे
आप में से कितने भक्तों के बाद श्रीमद भागुतमकाफैक्ट हैं? थोड़ा लाउड कितने भक्त हो? भागतों रोज पढ़ते हो। आप में से बहुत लोगों के पास ग्राम है की पढ़ते बहुत कम लोग हमे पढना चाहिए। श्रीमद भागवतम में सबसे उत्तम ज्ञान है। व्यास ने सभी ग्रंथों की रचना की थी, लेकिन उसके बाद भी उनको लगा था उनके कार्य में कुछ कमी रह गयी है। तो अपने गुरु नारक मुझ के पास
गए
तो नाराज ने कहा कि तुमने शुद्ध भक्ति का संदेश नहीं दिया, उसके बाद उन्होंने भारत को उपदेश दिया। अभी हम यहाँ पर केतु महाराज की जीवी शिक्षा की चर्चा कर रहे हैं।
प्रजा जन जीवन
पृतुमाराजहाँकी प्रजा को शिक्षा दे पृथमाराजानते थे। कि जीवन का लक्ष्य क्या होना चाहिए,
है? ना चाहिए। ऐसा कोई भी
तो कितने चुनाव हो चुके हैं, फिर चुनाव आने वाले हैं। अलग अलग नेता हैं। आपको कई प्रकार के वादा करते हैं, लेकिन आध्यात्मिक जीवनी का वादा कोई नहीं पड़ता कोई करता है। कुछ दिन पहले योद्या गए आप में से कौन कौन गएहोद्यालाखों,
कहा या है? उनके लिए
तो बताया की लाइक दशम। किसी भी प्रोग्राम में इतने लोग लाइक नहीं।
वर्ल्ड रिकॉर्ड
जय श्री राम बोलना अच्छा है। लेकिन उनकी शिक्षाओं का पालन करना उससे आप गंथों में पढ़ते हो कि राम राज्य के समय किसी प्रकार का क्लेश कष्ट नहीं था? क्यूंकि भगवान राम प्रजा को अपने पुत्र की तरह ट्रीट करते थे? क
मृत्यु बस हमें खुद चुन सकते थे? यहाँ आप देखते हो कि तुम राज देश दे रहे हैं और ये बता रहे हैं कि जीवन का उद्देश्य क्या है। तु महाराज कह रहे हैं कि वन के मन शरीर के द्वारा भगवान की सेवा करो, भगवान की सेवा करना। ये है भागवतम का 80 उद्देश्य। इसके द्वारा हम शुद्ध भक्ति प्राप्त कर सकते हैं।
तो काम करना।
जिस प्रकार प्रथम महाराज उद्देश दे रहे हैं, हमें उसको स्वीकार करना चाहिए।
प्राप्त करने
भागवत के द्वारा में शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए कि ज जीवन का उद्देश्य क्या है? अनेक पाठशाला विद्यालय है, लेकिन बहुत कम मेसेज थान, है, जहाँ के उद्देश्य दिया जाता।
पिछले हफ्ते गुजरात
में, पिछले हफ्ते गुजरात में था और वहाँ पर कई कॉलेजेस में गीता के कोर्स को कम्पल्सरी बना दिया गया। सारे स्कूलों में रुपाजी की इच्छा थी। सारे स्कूलों में भगवत गीता का उद्देश्य दिया जाए। छोटी आयु से भगवत गीता का अध्ययन किया जाए। और इस समय हम हरयाणा, हरियाणा, पंजाब, कई स्थानों में प्रयास कर रहे हैं। इस उद्देश्य को, इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए
नाम अज्ञानता में, पढते। अज्ञानता में, मृत्यु अज्ञात।
अक्सर आप देखते हो। लोगों का जन अज्ञानता में होता है, लोग जीतते अज्ञानता में और मृत्यु भी अज्ञानता में हो जाता है।
जो भाग्यशाली व्यक्ति है भक्ति का।
लेकिन जो भाग्यशाली व्यक्ति है, उसको भक्ति का बीज प्राप्त होता है।
भक्ति का बीज है। ये ज्ञान
भक्ति का बीज है। यह ज्ञान की जीवन का असली लक्ष्य क्या होना चाहिए?
और ज्ञान अनुकूल।
और यदि इस ज्ञान को अनुकूल नहीं करें तो जीवन को व्यर्थ माना जाता है। 1 प्रसिद्ध भक्त ने कहा है, मनुष्य जनपरियारादाकृष्ण नाबाजी जानिया, चुने, वे भाई
जान। ै यह पी रहा हूँ।
मैंने जल प्राप्त किया है। लेकिन मैंने लाल कृष्ण का भजन नहीं किया। तो इसलिए मैं जान बूझकर, विश खा
रहा हूँ,
हूँ खा रहा हूँ।
बोलो, यह
तो आज की आज, समाज की क्या स्थिति है, जब उनको बताओ कि आप जहर मत खाओ। अमृत पियो को भी। वो कहते हैं कि मुझे जहर खाने
में भाग्यशाली रहती है, वो अमृत।
लेकिन जो भाग्यशाली व्यक्ति है, वो अमृत को स्वीकार करते हैं। भाग्य आप सब जो यहाँ उपासते तो आप अत्यंत भाग्यशाली रहती हो।
क्यों?
क्योंकि आप शुद्ध भक्ति में जुड़े हो,
ऐसे संस्कार नहीं हो, भक्ति योग में नहीं जोड़े।
प्रहुपात। कहते थे, जब तक आपके बड़े अच्छे संस्कार न हो, तब तक आप भक्ति योग में नहीं जुड़ सकते।
प्रभाग है
तो आप सब का सौभाग्य है। आप शुद्ध भक्ति प्राप्त करे हो। प्रभुपाद की कृपा से।
अब या
युरोप जी ने वृंदावन को त्यागा।
70 वर्ष की आयु में आदेश ले जाओ।
उनके गुरु जी ने आदेश दिया था, ले जाओ चेतने महापु संदेश को खाजाते देशों में और जैसा आप जानते हो। रास्ते में उनको 2 हर्डरटाइप हो गए,
सफल नहीं।
तो प्रपात सोच रहे थे कि मेरी योजना सफल नहीं होगी। उस रात को प्रपात को 1 सपना आया।
अरे बाबू घबराओ मत हो।
जिसमे भगवान ने उनको बोला। अबे बाबू घबराओ मत, तुम्हारी योजना सफल होगी।
हम
हमारे सपनों की कुछ खास नहीं है। आपको सपना आया है कि आप राजा बन गए,
दर है।
लेकिन शुद्ध भक्तों के सपनों में कदर है? भगवान ने कहा घबराओ मत, तुम्हारी योजना सफल होगी। तो जैसे प्रपात न्यूयॉर्क पहुंचे। उन्होंने प्रचार शुरु किया।
देश में हो गई थी।
तो उसके बाद जब पश्चिमी देशों में प्रचार की स्थापना हो गई थी, 1 बार बार लॉंच एंजिलेस में थे, वहाँ पर भगवान के विग्रह हैं। शीशी राजा नी। बहुत ही खूबसूरत बेरा। आप में से कोई भाग गये।
लासाइलेभगवान ने तो बाज से कहा आपने
विदेशों में कृष्ण भक्ति की स्थापना की। अब आप भारत में करो। प्रपात विदेशों में स्थापना करने के बाद भारत लौटे।
वैसे तो विदेश जाने से पहले,
वैसे तो प्रपात विदेश जाने से पहले काफी लंबा लंबा। समय काटा आपके दिल्ली शहर में जैसा आप जानते हो। प्रपात पहले निवास कर रहे थे। वृंदावन में राजा राम दंधे और आपके दिल्ली में आते थे। प्रचार के लिए, ग्रंथों को प्रकाशित करने के लिए और प्रकाशन के लिए चंदन
वन मेन आर्मी, वन मेन आर्मी
में
प्र ग्रंथों का अनुवाद करते थे।
वृंदावन में चौपाल जी ग्रंथों का अनुवाद करते थे।
और आज के बार में जो कंप्यूटर है
और आज के भातर में आपके पास कंप्यूटर है, जिसमें आप डिपटेशन दे सकते हो, क्या कह और कंप्यूटर पहचान
लेगा, क्या कह रहे हो, सुविधा नहीं।
लेकिन उससे में यह सुविधा नहीं थी।
बाजी के बाद 1 टूटा हुआ टारेटररहबाजी
के पास, उस मे टूटा हुआ टाइप
था, मैन था, इलेक्ट्रॉनिक नहीं, वो इलेक्ट्रॉनिक नहीं था, मैन मैन था।
और उसपर पवार ठपठप साइट करते थे।
जी
जी टांगे स्टेशन पे आते थे, मथुरा आते थे। उस मे का
ग
और थर्ड क्लास डब्बे में दिल्ली आते थे। थर्ड क्लास सेकेंड, थर्ड क्लास सेकेंड क्लास ने। आजकल थर्ड क्लास जब्बा उड़ा दिया गया है रेलगाड़ी में से। लेकिन उस समय थर्ड क्लास सेकेंड क्लास, फर्स्ट, क्लास पाजी, थर्ड क्लास में आ रहे हैं। और वे दिल्ली पहुंचकर फिर छिप्पी वाड़े जा रहे है। तो छिप्पी वाडे में उनका 1 कमरा था।
आप
जिसको करपाजी ने अपना घर और ऑफिस बना लिया था।
जी को पूरा विश्वास था।
पाजी को पूरा विश्वास था कि चैतन्य महातम की भविष्य वाणी सत्य हो।
गी दादाजी ने पहले मुलाकात में
जब पोपाली 1922 में भक्ति जी से मिले तो भक्ति संत जी ने उनको पहले ही मुलाकात में पहचान लिया।
ये है वो
ये है वो युवक जो माप लोगों की भविष्य वाणी को सफल बनाएगा।
कई संत
तो पहले कई संतों को भेजा था भक्ति सिदांत जी ने।
बहुत ही ऊँची कोठी भक्ती।
सिदांत जी बहुत ही ऊँची कोटी के प्रचारक थे। यह साल हम उनकी 150 भी साल ग्राम मना रहे है।
सबसे पहले प्रधानमंत्री आए थे।
कुछ समय अभी कुछ दिन पहले आपकी दिल्ली में 1 प्रोग्राम हुआ था जिसमें जिसमें आप भी प्रधानमंत्री के लाए थे। भर्ती धानतेजीकेटिकट असली में चक असली में भक्ति विनोद ठाकुर ने चेतन महाकुर की शिक्षाओं की स्थापना की थी। असली शिक्षा की स्थापना की।
हे भगवान
और भक्त ठाकुर ने भगवान से प्रार्थना की थी कि हे भगवान, ऐसे भक्त को भेजे जो इस कार्य को आगे बढ़ा सके और भक्ति सिद्धांत।
वो व्यक्ति थे किरण माना जाता है
जिनको विष्णु की किरण माना जाता है
सफलता के
जिले कई सारे शिष्यों को विजाता विदेशों में जो बिना सफलता के लौट आए थे।
हाँ बाबा जी वाली तो है शायद पूरा
वो।
वो शिष्य कहते थे कि हाँ यह भगवान की भविष्य वाणी भविष्यवाणी तो हैं, लेकिन ये शायद पूरी नहीं होगी। लेकिन वक्त सिधांत जी को पूरा विश्वास था और प्रपात को पूरा विश्वास था
गुरु की वाणी में वो अपने गुरु
की वाणी में, तो प्रपा जी ने बड़े संघर्ष के साथ में प्रयास किया। ऐतिहासिक ये जो आपका दिल्ली है, जिसको हस्तीनापुर कहा जाता है, ये 1 ऐतिहासिक जगह है। इस थान पर रोपा जी के कई चरण पड़े। पाल जी ने। आपके दिल्ली शहर में बहुत समय का
प्रकाश
गंधों को प्रकाशित करते थे, दिल्ली में जाते और वे वितरण करने जाते
थे,
रुपाजी लाइबरलीज में जाते थे। मुझे पूरा विश्वास है की प्रपात जी बहुत प्रसन्न है। आप सबके प्रयासों से, आप सब भक्तों के प्रयास से, आपका रोगी मंदिर समाप्ति की ओर जा रहा है। जानते हो इसका उद्घाटन कब होगा? राम नमी के शुभ अवसर पर का उद्घाटन होगा।
इस बना है क्या,
ये सब बना है। आप सब भक्तों के प्रयास से
सहयोग दिया।
वे जया ने बहुत सहयोग दिया मंदिर क्यों बनाया गया,
क्यों बना रहे हैं बना?
और हम मंदिर क्यों बनाते है?
तो माप के निर्माण पर।
वैसे तो चर्च ने महाबंधन के निर्माण पर बल दिया।
जब रूप और सनातन ने आएगी मापने का आदेश दिया, तो जब रूप और
सनातन ने सरकारी नौकरी दी तो मां पोगो ने उनको 3 उपदेश, 3 निर्देश
दिए, 1 ग्रंथों की रचना, ग्रंथों की रचना। माँ
माँ पर ने रूप को रूपस्वामी के भाई को शिक्षा दी थी और उसके आधार पर ग्रंथों के ना करना। फिर उन्होंने उन स्थानों को खोजो जहाँ भगवान ने अपनी लीला को प्रकट किया था। और तीसरा क्या था मंदिरों का निर्माण।
मंदिर निर्मान
विंदावन में जो 5 सौ साल पुराने जितने बंदर हैं, सबका निर्माण भूप गोस्वामी द्वारा किया गया था।
मानो खंडन हो गया था।
कई मंदिरों का तो खंडन हो गया। उस समय मुसलमानों का राज्य था।
अनेक गंजों को, अनेक को खंडन हो
गया और अनेक बंदरों का खंडन हो गया था।
इसे पुजारियों ने मूर्तियों को छुपा लिया। कई लोग पुजारी मूर्ति तो कई कई
पुजारियों ने मूर्तियों को छुपा लिया और कई मूर्तियों को जयपुर ले गए थे। इसलिए जयपुर का नाम है गुप्त। वरदान तो मंदिरों का निर्माण शास्त्रों में है का निर्माण, प्रवफाजीकीविच्छा दी मंदिरों का निर्माण हुआ। क्यों तुम, अगर मंदिरों में रहोगे तो
हजारों लोग आकर्षित होंगे यह हमारा अनुभव
है, यह हमारा अनुभव है
में
आपके जब रोहिनी में प्रचार शुरू हुआ था तो अलग अलग भक्तों के घर में प्रोग्राम होते थे
जमीन तो फिर भक्तों
के प्रयास से हमें जमीन प्राप्त हुए
द्वारा
डीडीए के द्वारा ये मंदिर बना है कई भक्तों के प्रयास से बहुत
सारी है
भगवान साक्षी है जब जिन भक्तों ने सहयोग दिया
का उद्देश्य है
ज्ञान देना तो इस स्थान का उद्देश्य क्या है? लोगों को ज्ञान देना
एजुकेशन इस कॉल
इस रुकेशनल सेंटर
किस प्रकार के ज्ञान की कमी है।
आज समाज में इस प्रकार के ज्ञान की कमी है या अध्यात्मिक ज्ञान की बक्सी। सिद्धांत जी कहते थे कि किसी भी चीज की कमी है वो अध्यात्मिक ज्ञान,
राजा भैया, राजा, राज्य, विद्या, राज्य जो ज्ञान है ज्ञान से,
ये जो ज्ञान है, सभी ज्ञानों से महत्वपूर्ण ज्ञान है
हम सोचते है जो इंजीनियरिंग, डॉक्टर की देवी,
हम सोचते हैं इंजीनियरिंग और डॉक्टर की जो डिग्री है यह असली ज्ञान
है हमें शिक्षा का विरोध।
हम इस शिक्षा का विरोध नहीं करते।
अपना है आप अपनाइए साल में आध्यात्मिक
ज्ञान अनुकूल, लेकिन साथ में आध्यात्मिक ज्ञान
भी अनुकूल कीजिये देखे बुरी स्थिती।
आज आप देखते हो 5 सालों में बहुत बुरी ती है।
आप जानते हो आप जानते हो युवक वायर युवक जारी के प्रति है, भारत
के युवक पाश्चात देशों के प्रति आकर्षित हो रहे है,
युवक
भारत के युवा गलत कामों के प्रति आकर्षित हो रहे हैं।
तो वो असली ऐलान की प्राप्त है।
और जब वह बंदर में आते हैं तब वो उन 1 असली वातावरण की प्राप्ति होती है। पहला महाराज कहते हैं न नतीविधुसवारतिभीविश्ण लोग,
असली आनंद कैसे लोग ये नहीं जानते
की असली आनंद कैसे जानती।
असली आनंद का क्या।
लेकिन आप सब जानते हो असली आनंद का क्या मार्ग है।
बी मार्ग में हमें सावधान रहना पड़ता है।
लेकिन भक्ति के मार्ग में हमें सावधान रहना पड़ता है।
क्या?
उसका क्या अर्थ है हमें कि हमें प्रयास करना चाहिए। भक्ति के नियमों का पालन करने का।
1 वा
ले रहे थे, 1 बार परमपाल जी डीटीज का दर्शन ले रहे
थे, लंदन में, लंदन में और कुछ
और कुछ प्रार्थना कर रहे थे।
बाबा जी आप क्या प्रार्थना कर।
भक्तों ने कहा करपाजी आप क्या प्रार्थना कर रे। तो प्रभाजी ने कहा वज प्रेम टू क्रिशना ने
अपने उधार के द्वारा,
भक्त भी हैं, अपने धारण के द्वारा में शिक्षा देते हैं कि ह कैसे पालन करना चाहिए।
शिक्षा क्या है? शिक्षा आज ही संदेश क्या है।
तो शिक्षा का, इस शिक्षा का असली सन्देश क्या है? जुड़ना चाहिए क्या में, भक्ति, मार्ग में जुड़ना चाहिए।
शुद्ध भक्ति और काम भाव से। काम भाव,
सकाम भाव। आप सकाम भाव से भी सेवा कर सकते हैं और निष्काम भाव से भी।
लाभ तो मिलेगा, पूरा लाभ से, सकाम
भाव से सेवा करो में लाभ तो मिलेगा, लेकिन पूरा नहीं।
निश्काम भाग से करोगे तो
लाभ, निष्काम भाव से करोगे तो पूरा लाभ प्राप्त होगा।
भागवत में आपको काम
तो भागवत में आपको निष्काम भाग से सेवा करने का ज्ञान प्राप्त होता। प्रपाजीसातपदेमें 4 वन और 4 आसन की चर्चा करते हैं। 4 पांस, सौ, सन्यास और ब्राह्मण, शक्ति वैश्य शूद्र
भगवान को प्रसन्न करें।
चाहे हम किसी भी बाल और आश्रम में हो, हमारा उद्देश्य क्या होना चाहिए कि हम भगवान को प्राप्त करें, प्रसन्न
करे, प्रसन्न करें, बजिकसमाखेहोप्रयास करते हो। प्रसन्न करने में हर कोई खुश होता है।
आप बोजिक संसार में देखते हो, आप प्रयास करते हो। 1 दूसरे को प्रसन्न करने का। लेकिन फिर भी कोई खुश होता है? नहीं
क्या क्या तुमने हमारे लिए।
जब बच्चों को आप बड़ा करते हैं, तो बच्चे बड़े क्या कहते हैं? क्या किया आपने मे?
क्या किया तुम ने?
अपने दफ्तर में इतना परिश्रम करते हो? और उसके बाद बॉस क्या कहता है? क्या किया तुमने? सच बात है। तो बहुत संसार समाज में आप किसी को भी संतुष्ट नहीं कर। लेकिन भगवान से, कुछ से बस भी संतुष्ट हो जाते हैं।
ये है,
ये है भक्ति का लाभ।
1 महान सनशीलास्वामीकहते है, मार्ग में आग बंद जोड़ोगे तो भी गिरोगे नहीं।
1 महान सं शीला स्वामी कहते हैं कि आप भक्ति के मार्ग में आप बंद करके दौड़ोगे तो भी नहीं, गिरोगे
प्राप्त हो रहे हैं।
तो यह हमारा यह आपका परम सौभाग्य है कि पपाजी की कृपा से, आज, आचार्य की कृपा से, हमें ग्रंथ का हुए है
र।
तो ये जो, वेद शास्त्र, यदि इनका अनुवाद नहीं होता तो क्या आप पर वादे, वेदिक शास्त्री, रगेदा, रिग्वेदा, क्या लोगों को समझ सकते हो? नहीं
शोको।
तो हमारे आचार ने क्या किया? इन श्लोकों का व्याख्या किया। तो उन्होंने क्या किया? उन्होंने बताया इस लोक का असली याद किया है।
ये।
जैसे आपके पास टैक्स बुक होती है, होंगे, आप टेक्स बुक पढ़ने से तो पास नहीं होंगे। वो टीचर की, आवशकता, आपको टीचर की आवश्यकता है। उसी प्रकार हमारे आचार ग्रंथों के द्वारा पे विचार पकर किए है। तार जोड़ा और पा जी ने उन्हें अपने अपने तरपालों में राजायों के तरपालों महत्वपूर्ण संदेश को जोड़ा। सरल भाषा, सरल, भाषा,
बारबार, जीवन।
जब हम इन ग्रंथों को पढ़ेंगे तो समझ सकेंगे कि क्या होना चाहिए जीवन पर?
सुंदर मंदिर के मान देखोगे बक्स जाएंगे। आप देखोगे कि मंदिर निर्माण की वर्षा
संख्या बढ़ेगी और आप देखोगे की मंदिर के उगने के बाद आपके मंदिर में बातों की संख्या बहुत अधिक रूप से बढ़ जाएगी।
आपके ये हॉल है, यह मंदिर गाडी कम है,
ये जो हॉल है, यह आपके आपके मंदिर का टेमपुलटेम्पुल गुम तो नहीं है?
हॉल क्या फुल है?
ये हॉल इस समय फुल है।
हाउस हाउस फुल। हमे उम्मीद है कि मंदिर खुलने में हाउस हो रहे।
और हमें उम्मीद है कि जब आपका मंदिर खुलेगा तो आपको मंदिर का टेंपल हाल भी हाउस फुल रहेगा।
छोटा है।
और फिर कहेंगे मंदिर थोड़ा छोटा है। और वे कहेंगे की कॉल के सारे बंदे छोटे बने। तो हमने जब मंदिर बनाया है तो अंदेशा लगाया था की इतने में भरलो जायेंगे। तो जब पहला मंदिर खोला था, राधा पार्ट सार देखा, दूसरा खोला पंजाबी बाग में, तो हमें लगा कि जब पंजाबीबाग
का मंदिर उस समय जब हम बनाये थे और मंदिर खुल रहा था, खुलेगा संत नगर में कम होगा।
उस समय जब जब हम मंदिर बनाने थे तो हमें लगा था कि जब पंजाबी बाग में मंदिर खुलेगा तो संत नगर में कम भक्त हो गाएंगे
पंजाब।
लेकिन उससे हमने देखा की संधदरमेंभी बहुत बतलोगआरहेहैऔर। पंजाबी बाग में भी बहुत वक्त होगा,
है
फूल ग हसते हसते प्रचार बढ़ता गया और मंदिर खुलते गया।
आज हम देखते है हाउसफुल है।
आज हम देखते हैं कि दिल्ली में पंद्रह मंदिर और सब हाउसफुल है।
ना हो गया।
पंजाबी बाग में 1 और मंदिर का निर्माण होने जा रहा है। भक्तों ने बहुत प्यार से बहुत सुन्दर जमीन प्राप्त किया। उस समय मैं इस दिल्ली में था।
भक्तों ने प्रयास से वहाँ पर बस न जमीन प्राप्त किए। मे रोड पर
कोल को कोल,
हमारे हर कोने में मंदिर होने चाहिए।
कोल
तो हम लोग देखते है की हर कोने में पुटवाले है कछ और मसजिद मिलेगी। हमारा प्रयास होना चाहिए कि हर कोने कोने में भगवान का मंदिर हो, चाहे छोटा हो, छोटा हो या बड़ा हो, उसके द्वारा जो शुद्ध संदेश हर जगह प्राप्त होगा।
आप मेरे ने सहयोग दिया है और
जिन जिन जिन लोग, जिन भक्तों ने, जिन भक्तों ने सहयोग के आपको भगवान की असीम कृपा का होगी।
यह सुधार क्षेत् नए ने वर कैप्टन जिन वश्यकता होती है इतालिया बनाने के लिए।
जिस प्रकार भौतिक समाज में किसी भी चीज को बनाने के लिए लैंड लेबल, कैपिटल ऑर्गेनाइजेशन की आध्यात्मिक क्षेत्र में भी
हमें सुंदर बना लिया है। अभी हमें ज्यादा भर सुंदर होना चाहिए
तो हमने 1 सुंदर मंदिर तो बना दिया है और भक्तों का व्यवहार भी सुंदर होना चाहिए, नहीं तो वक्त नहीं तो बाहर के लोग कहेंगे इतना सुन्दर मंदिर और भक्तों का व्यवहार देखो। उन्होंने बड़े मंदिरों की स्थापना की। गोस्वामी ने बड़े मंदिरों की स्थापना की। जैसे की बदन में हम का मंदिर बहुत पहले बहुत ऊंचा था और दादा दामोदर सब मंदिरों का। लेकिन अपने रहने के उन्होंने क्या किया, मन बनाया, महल बना या नहीं, ब्रिक्स के नीचे सोते थे
भगवान भगवान के
लिए बना ये हमारा भाग लेना चाहिए। हम ब्रिक्स के नीचे भी ले सक तो भगवान के लिए हम बनाएंगे। हर 1 सुविधा तो
हमारे लिए बहुत
महत्वपूर्ण तो ये जो पृतुमाराजकाउद्देश है हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
तुम किसी भी वर्ण में
तरौपाजीभीतसकर समझा रहे हैं कि हम चाहे किसी भी वर्ण आश्रम में क्यों न हो, हमारे अंदर 1 ही भाग होना चाहिए। भगवान भगवान सनगत किस प्रकार हो
होने
का साधन क्या है और नागत होने का साधन क्या है? हरी नाम का उच्चारण कर कर काले
नाम रूप कृष्ण भवतरद्वाराभवनकपट होते है अपने
दिवी नामों के द्वारा तो मेरे खयाल से आप सब हरी नाम का उच्चारण करते हो करते हो
थोड़ा मना कौन
करे सोला खाना कौन कौन करता है
या
तो मंदिर में पान की खुशी में जो जो लोग 16 माला से कम करते हैं उनके भी प्रयास करना चाहिए कि 16 माला तक पहुंच जाए और जो 16 माला करते हैं उनका प्रयास करना चाहिए और ध्यान से करे और साथ में ग्रंथों करते।
सुंदर मंदिर में 1 लाइब्रेरी होगी जहाँ की आप पढ़ सकते हो और इस
सुन्दर मंदिर में लाइब्रेरी होगी जहाँ पर आप घंटों को पढ़ सकते हैं।
ये 11 नेशन लाइडर।
हमारे जु के मंदिर में 11 कंडीशन
लाइन जरी है उसको 1 निदेश दे
और उसको 1 कंडीशन इसलिए किया गया ताकि लोग वापस से तो वहाँ के आके ग्रंथों को पढ़ने के चौपाल जी की इच्छा थी कि लोग ग्रंथों का वितरण करें लेकिन अध्ययन भी करें।
आप
आप सबको यह संदेश दिया जा रहा है जो आचार्य ने दिया है
में प्रस्तुत किया।
पाजी ने साल रूप में प्रस्तुत किया है।
आप है
जीवन, तो आप सबसे निवेदन है कि मनुष्य जीवन जो है, दुर्लभ है।
और समय तेजी से बीत रहा और
समय तेजी से बीत रहा है।
यह बात सच है।
यह बात सच है,
है करोगे न फील नहीं।
यदि आप 11 पल कर भी 2 रूपयोग करोगे तो सायलेट पृथ्वी के धन से इसको वापस नहीं सो प्लीज। डोन वेसdामबीसीएस
देवता सहयोग दिया।
इस समय मारजपठवाल ने देवताओं का सहयोग दिया था।
युद्ध में
उस युद्ध में देवताओं की विजय हुई तो देवताओं ने महाराज से कहा कि मांगो तुम्हें क्या चाहिए
मुझे ये बताइए में कितना समय महाराज।
कठवा ने कहा कि मुझे यह बताइए कि मेरी जिंदगी में कितना समय रह गया है। कदवा पूछा
देखता हूँ से मेरी जिद
मेरी जिंदगी में कितना समय रह गया है।
उन्होंने क्या कहा है?
उन्होंने क्या कहा? 1 बार बस 1 पान बस। तो उन्होंने कहा कि मुझे बहुत तेजी से पृथ्वी पर आने।
2
उन्होंने देखा कि ऑनली वन मिनट इस लेफ्ट इन माई लाइफ में हमें
यह सोचना चाहिए ज्यादा समय नहीं बचा
ज्यादा समय नहीं बचा तो आप गंभीरता से हर कार्य को करोगे हो कल? तो यदि आप कहोगे कल, कल कल तो पा जी कहते हैं कि ऐसा कैसे से काल आ जाएगा, कल भी आ सकता है, कल भी आ सकता है।
मंडल में पानी की ही लेता था
1 बार 1 लोज जगना जी के मंदर में पानी की सेवा करता था लेकिन वो अंदर दर्शन के लिए नहीं जाता। वह पानी छोड़ कर कहता था कल करूंगा, कल कल, कल कहते कहते काला गया। 1 समय प्रोपज व्यक्ति को पचा कर रहे थे। उस व्यक्ति ने प्रोपज स्वामी जी यू डोंट नो हाओ bizy उसने कहा कि मैं बहुत व्यस्त हूँ।
no
नो टाइम फर्स्ट पर गीता
अगले
दिन उसका हार्डटैक हो गया।
s
और ये असलियत है
भक्ति का ज्ञान मिला है मैं ज्ञान को बढ़ाना
चाहे तो आप सबका सौभाग्य है कि आपको यह ज्ञान प्राप्त हुआ है और सना द्वारा इस अध्यात्मिक ज्ञान को बढ़ाना चंदन। महारोग ने कहा कि भक्ति का बीज हगेगा अगर आप सब हमें अपराधों से बचना चाहिए ेशनल अपराधों से बचना वैशनवोंकी
निंदा करने से बचना चाहिए विनम्र भाव
अनुकूल करना चा और विनम्रता का भाव
अनुकूल करना चाहिए ने कहा 6 आवश्यक कार्य है
चतनेमहदूनेकाछे आवश्यक कार्य है। भगवान के प्रति शरणागत होने के लिए
कुल कार्य है उनको लेकर 1 है।
जो प्रतिकूल कार्य हैं उनको नहीं करना,
प्रतिकूल कार्य है उनका पालन, जो अनुकूल
कार्य हैं उनका पालन करना और ये परम विश्वास होना कि जो भगवान है वो मेरी रक्षा करे।
परम भगवान
और ये विश्वास ना कि देखता नहीं पर कृष्ण परम भगवान
और
विनम्रता का भाव भगवान है। इससे भगवान खुश होते है।
क्या
और प्रसिध श्लोक जनागतीसुनिचने भगवान क्या
कहरे
कि हमें अत्यंत सेंचिल होना चाहिए और अपने को घर से भी अधिक अधिक पति मानना चाहिए और दूसरों को आदर 2 बिना किसी आदर के ब्राशर दरें यह है।
ये है फॉर्मूला टू डवलप नबरवॉल्टॉलिक बनाया
था, टोपा जी ने 1 समेत टॉनिक बनाया था लाहाबाद में टोपा जी की पामसी थी
देखिये, टॉनिक बनाया तो प्रभा
जी ने 1 गुरु, 1 गुरु भाई से कहा ये देखिये मैंने 1 टॉनिक बनाया है।
अरे बाबू
अरे बाबू मुझे टॉलेट तो भगवत प्रेम प्राप्त करने
क।
पापाजी ने कहा फॉर्मूला पता है लेकिन दवाई प्यार नहीं है। ये पापा जी की विनम्रता है।
क्या है फल बताइए?
तो उन्होंने कहा कि क्या है फॉर्मूला बताइए, मुझे क्या। तो पापा जी ने क्या किया? नाती सुनील चैनल का उच्चारण कर दे। पाजी ने कहा किस दे फॉर्मुला टू डवलप तो इस शो का संदेश हमेशा अपने सामने रखना चाहिए। अरे कुश रे कृष्णा तुम्हारा के ना
करेंगे रीबो,
बहुत सारे प्रश्न ले सकते हैं, ज्यादा नहीं।
hryisagromard these axepnofsenses maragivinafter having somanyinstructions that
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ठीक है तो बहुत बहुत धन्यवाद, हम
लोग ना तो आज।
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