भगवान के प्रति असक्ति कैसे बढ़ाये? | SB 4.22.22 | 30 Jul 2023 | Delhi | Gopal Krishna Goswami

In this devotional discourse, speakers A and B explore how a devotee can deepen their attachment (asakti) to God. They emphasize that true devotion arises from hearing and chanting the divine name, studying sacred scriptures such as the Bhagavata, and serving the Lord’s lotus feet. The dialogue stresses the importance of associating with fellow devotees and seeking the guidance of a qualified guru to maintain consistent practice. Detachment from material attractions and cultivating dispassion are presented as essential for freeing the mind from worldly bonds. Practical obstacles—laziness, distraction, and lack of discipline—are identified, and concrete remedies are offered, including regular meditation, mindful breathing, and sincere service (seva). The speakers also discuss the role of prayer, ritual, and daily mindfulness in integrating bhakti into everyday life, urging listeners to adopt a steady, heartfelt approach to spiritual practice. Throughout, the tone remains earnest and encouraging, aiming to inspire listeners to adopt these practices and experience a deeper, more loving relationship with the Divine.
Chapters
lगाcisr for you so में तार निकालो
जल्दी, निकालो माइक वाला सेट
कamcaतaदेना e गला गा क ना ही गिरा आज हम 40 के myfs
होल
मे
साथ गया भगलनधमेहा साध्या सन का सवकदयापुन नया मंद शया हमने साथ दया धानहोनशयाय ये सरूपारनेशायसवाद
चाय या हरा हो या त्यमयोगसआालिय, सधयाभगधर्मचर्यया या योग या
श्वास, नयाचानित्यमलुेश्वर,
माता, जी या श्वरश्वरोआजयाम, उन, सा, देश या जिला, जाजोयायोएजोहारर हो
या जा,
जा, लगे, सरहाजयानेकाम, वो,
शाम, वह भक्ति, श्रद्धया, श्रद्धा तथा संकर ऐसी धारणा भक्ति चरम विवेक न से जिस ज्ञाता से अर्थात् सम्बंधी 2 वेस्ट ज्ञान में निश्चय से लोग भी भगवान की घोपासनयापूजासी तथा क्या ये रूप से पूर्ण रहा। इसे सुनने से या विलेन से, तुम या पुन से भी धनवाद भक्ति करने, भगवान के प्रति जिव्या करने, जीवन में भक्तियों का व्यवहार करने, पुरोशोतम योगेश्वर, भगवान की पूजा करने तथा भगवान की महिमा का सेवन एवं वेतन करने से परमेश्वर के प्रति आंसककीबढाईजा सकती है ये सारे कार्य अपने आप में परम। 2 विश्व शब्द भगवान श्री कृष्ण प्रधान के भक्तों के लिए योग होता है। देखा यह शब्द दुवा आया है। अठारहवें अध्याय 18, 78 श्री कृष्ण को भगवान हरी कहा गया है। कि समस्त योग शक्ति के स्वामी हैं। यह प्रयोग छद्यहैकंभीछसैंतालीस योग्य, श्रसंदकीव्याख्या, समय योग्य ना करते की गई है। युद्ध कम से सर्वोच्च योगी अर्थात भक्त गंगा बोध होता है। जैसे योग्य सर भी कहा जा सकता है। इस श्लोक में योगेश व वासना का अर्थ है शुद्ध भक्ति की सेवा करना तथा नरंतमदार ठाकुर। कहते हैं। छारिया नव सेवा, निस्तार वा। शुद्ध भक्ति की सेवा किए बिना आज जीवन में आगे नहीं बढ़ा जा सकता। राज ने भी भागवत साथ इसमें कहा है दिन ही साथ बाद कम मनुष्य को चाहे जो सदेव भर्ती में लगाएगा है और उसे संसार से कुछ लेना देना नहीं देता। केवल उसी की सेवा से व्यक्ति भवसागर
को पार कर सकता है।
इस श्लोक में संगति की गई है योजना को पाया कि व्यक्ति को चाहिए की सर्वोच्च होगी या भक्ति के चरण कमलों की सेवा करे। सर्वोच्च भक्ति की सेवा का होता है। उससे भगवान की महिमा का सेवन करना। शुद्ध मुख से, भगवान की महिमा के सेवन से पवित्र जीवन जीवन का का मिलता है। 7, 28 में भी गया है कि पवित्र हो मेरा व्यक्ति भक्ति में नहीं हो सकता। इस मेरा नाम के भर्ती होने के लिए प्रकृति के समस्त के रस को पूरी तरह भूला धो डालना होता है। भक्ति के बारे में पहली बात है आरोप बरवासयमव्यकतिको चाहिए के सामान ग्रुप बनाए और उन दिल मेवृतिपरसपिक्षा के विषय में पोस्ता करे और फिर सायं पुरुषों तथा भोंके का अनुगमन करे। 7 मार्ज अनुगवनमरूस्वामी भी सिंधु में यह आदेश दिए गए हैं। जिसका ने कहा कि भगवान के प्रति अनुरति बढ़ाने के लि पहले मान गुरु बनाना होता है और उसे भक्ति की विधिया सीधी होती है तथा भगवान के संदेश एवं महिमा के विषय में सुनना होता है। इस प्रकार के को भक्ति के विषय में अपना निश्चय बनाना होता है। भगवान के प्रति अनतिवनानेमें बहुत आसानी होगी भक्ति कर रहे हैं। भगवान के प्रति विद्यासा करने है, दौरे दौरान के लिए भक्ति करने है। भगवान के प्रति, भगवान के प्रति दिया, ऐसा करने, जीवन में भक्तियोग का आभार करने, श्रोत भगवान के पूर करने तथा भगवान की हिमा का सेवन एवं के करने से देश के प्रति स बढाई रह सकती है। ये सारे अपने आप मे
gan chetan srkshnaचे रेारेसारसरसारे, हरेरा श्लोक, उचार कुमार के
है,
mar mar mar mar pit, राज pit उनके जो बेटे थे, मेरा बड़े नासिक भाग्य थे, आज मेरा राजा बने और उन्होंने रमन को आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तुम्हें मुझे पूजा करनी चाहिए, तुम भवानी पूजा कर रहे हो ने हर प्रकार का यज्ञ रुकवा लिया था, जिसके कारण सागर सूख गए। फिर में जल नहीं था और माल की प्रजा बिल्कुल दुखी है। सो भ्रमण ने देखा की क्यूंकि राजा नासिक भाव का है, इस कारण इस कारण पूरी प्रजा दुखी थी और प्रजा दुखी लेकर ब्राह्मण थे। ब्राहमण ने क्या कहा? पिसमा ने कहा कि प्रजा ने कहा कि हमें जब शर्त में आप पढ़ते हो, जब नेता नहीं हो। पूरी प्रजा। राजा ने कहा करोगे भगवान की उपासना पिठुमराुमाराज का स्वादन किया। उनसे प्रश्न पूछे तो फिल्म ने प्रश्न पूछे तो कुमार बड़े पसंद थे, पुराना है। कुमार ने कहा आपके पास पूरा ज्ञान है आप समाज की, भलाई के अर्जुन। भगवान के सनातन साथी है और सनातन साथी है। और अर्जुन ने भी प्रशन पूछे सो भगवत गीता में विज्ञान प्राप्त करते हो तो वतसैपभगवानकेान वो समाज की समाज। तो भगवान ने अर्जुन को इस बाला बोलना चाहते थे। कुमार ने कहा प्रश्न पूछे जा। प्रश्न प्रश्न यही था कि क्या है मानव जीवन का उददेश्य? बड़े से प्रश्न पूछे गए, आपसे पूछता है, खुश होते है। पर श्रीराज पता था कि उन्हें उनके पास पूरा ज्ञान था। पर पूछा क्या? जिस व्यक्ति का अंत आने वाला है, मुझे क्या करना हे तो भक्त है। उनके मन में सदा ये भाव रहता है कि हम समाज को सुखी बनाए और वो जानते हैं कि आखिरी शोक प्राप्त हो सकता है कि अगर आप हमारी शिक्षा को अपना तो इस शोक में कहा जा रहा है भगवान के प्रति आशक्ति कैसे बना बाय। तो समाज में आप देखते हो कि किसी के प्रति आ सकती तो होनी चाहिए। सो भगवान की तरफ नहीं है, आ सकती, आसक्ति किस की तरफ रहेगी। माया की तरफ। ये फैशन बन गया है कि हर घर में, पश्चिम देशों में तो ये फैशन बन गया है कि हर घर में यह कुत्ता होना चाहिए। बिल्ली होने और अगर कुत्ते बिल्ली नहीं है। खानदान सोचता है कि हम सुखी नहीं है तो आ सकती। प्रभा जी कहते हैं लोगों को यहां शक्ति बढ़ानी चाहिए भगवान की तरफ। आज ऐसी स्थिति है पश्चिम में कि जब कोई इंशोरेंस इंशोरेंस भी बेचता है। सो कैसा है इंशोरेंस डॉ अभी ऑफिस में 1 रूम रखा है बड़ी कंपनी में, जहां वो कुछ को ऑफिस मे शो कहने का तार पर यह है कि अज्ञानता में हम ऐसी आशा की रखे जिससे कुछ लाभ ले। तो यहाँ सदर कुमार कह रहे हैं आप भगवान के प्रति आशक्ति कैसे बढ़ाओ? हम सब का भाग्य है कि भगवान के प्रति आशक्ति बढाए। जैसे कि महोदि समाज में अगर आप नौकरी हो। आपकी क्या इच्छा है की है कि आपकी सरकार में कम होते जाएगे और बढ़ते जाएंगे। तो उसी प्रकार जो भक्ति योग में जुड़ते हैं, उनमें यह भाव लेना कि हम भगवान के प्रति आशक्ति बढ़ाए। और सदर कुमार ये उपदेश दे रहे हैं। वह के पति आसक्ति कैसे बढ़ाओगे? ये यहाँ कहा गया है भक्तियोग के विधियों का पालन करने के द्वारा। भक्ति योग है। सारसों का निर्णय शासन क्या है? भक्त द्वारा प्राप्त कर सकते है। व्यासलेमे अनेक ना की थी, उनके सार को प्रस्तुत किया और जब उन्हें महसूस हो रहा था, मैंने कार में कुछ कमी रह गई है। वो कहाँ गए गए गुरु नाम? मुले ने कहा तुमने सी भक्ति पर बल नहीं लिया। निष्काम भाव से, कृष्ण भक्त, निष्काम निष्काम भाव से। हमें कार्य करना चाहिए। यहां संत कुमार कह रहे हैं कि भगवान के प्रति आशक्ति बढ़ाओ। और ये संभवता कैसे प्रैसिंग भी की सो हमें अशक्ति बढ़ानी है। और भगवान के विषय में प्रश्न पूछने से और की उपासना तो हो। वर्ष क्या होना चाहिए? सर बीमार हो, मैं बीमार हो, tak gaba, जाते उसी प्रकार हमें बढ़रीे जो भक्ति योग की। जब हम चर्चा करते हैं कि मन बुद्धि नदियों का उपयोग करें। भगवान की सेवा में मन बुद्धि के द्वारा। भगवान के अनेक नाम हैं। 1 नाम है किया, ऋषिकेश, भगत कंट्रोल हो? तो ये 1 माध्यम है जिसके द्वारा
आप
जान सकते हो। कुमार क्या कहते हैं श्रम के द्वारा, तो कीमत में शुरू से अंत तक इस wiciecरचाesimad वर्णन शास्त्र में बार बार किया जाता है। तो लगभग हर श्लोक के दावे में के की चर्चा होती तो आ सकती है बढ़ाना और बहुत जगह से आ िटेेंकॉल्चिबेट करना। तो चेतने रूप भगवान जी भी रहता है। भक्ति का बीज हर व्यक्ति को प्राप्त हो, यह प्राप्त होता है। भक्ति का बीज सुझजैआपप्रचारकरते प्रचार करते हो, दूसरे व्यक्ति में भक्ति का ज्ञान प्राप्त होता है। सो बक्सी का बीच तो मिल गया, पर हमें इसको उगाने के लिए क्या करना चाहिए? गाने के लिए, बगीचे में पौधे पौधे को उगाने के लिए क्या करते हो, पानी लेते हो तो हमें क्या करा? शव आपका अनुभव होगा। जब आप बक्से में जुड़ते हो तो आपको बी में जुडते हो, आप हाना उचारे के पश्चात आकर्षण कम होता जाता है। सो ने की भरती, बीज उगेगा कैसे रम के द्वारा, के द्वारा। ये भर्ती। तो यहाँ कहा जाता है कि फलशुबीजीउगेगा और हमें सालुसंगमेंरहना चाहिए। सालुं, सालु संग बड़ा महत्वपूर्ण है। अगर आप भर्ती में आगे बढ़ना चाहते हैं, और साल भी 3 प्रकार के होते हैं। उनकी संगत जो आपसे उत्सव है, उनकी संगत जो आपके बराबर हैं, उनकी संगत जो की आपसे कम ज्ञान रखते हैं। तो भक्त जो है। सर यही चाहता है कि मैं उन भक्तों की संगत में आहूं जिनके रंग से जीवन आगे बढ़ सकते हैं। यहाँ कुमार करे आ सकती कैसे बढ़ाए बॉलिक समाज में अगर बीमार हैं और श्री ठीक नहीं हो रहा। हम घबरा जाते हैं तो उसी प्रकार है हमें। हमारा लक्ष्य क्या है? लक्ष यह है कि हम गाय के प्रति बढ़ा और जगह के प्रति बना सकती हो। िटैजमटहोयेसंभव है। मामा माया है। भगवान कैसे गीत ह। मैं इस माया का विरोध करना बहुत कठिन है, उस का विरोध कर है। जैसे कि रूप कुशवा, महिमा का गुणगान करने। मैंने क्या कहा? भगवान के जो नाम हैं, वो दिव्य है। भगवान की जो विधाएं है, वो भी दिव्य है। भगवान के जो गुण हैं, वो भी दिव्य है। पर समस्या क्या है? हमारी जीप में अविद्या की बीमारी है। wide bimari se सो भक्ति योग इस टिवेट सो बिहार वो कहते थे कि सालु संग में हमें और खास करके अपराधों से हमें सावधान रहना चाहिए। वेशर जीवन में पाल से सावधान रहना चाहिए। और आप अनेक उदाहरण देखे। उस शास्त्र में यहाँ की इस विषय का वर्णन किया कितनी मा गंभीर स्वीकार किया, कि चेतन माह प्रभु माता के संबंध में थोड़ा उदाहरण दिया। कैसे हमें सामना रहना चाहिए? चेतन वा माता जो थी, सच्ची माता। उनके मन में थोड़ा क्रोध था, किसके प्रति मेरे चाय ही वो सोचते थे, कि मेरे चाय ने बड़े बेटे को शिक्षा दी, उसको ऐसा बना लिया, घर से भाग गए, घर से चले गए और छोटे बेटे को भी सो। माँ को उस बड़े दयालु हैं। मोर वहाँ पर। वो सब पर दया भर बोर्डर्स हुए थे। तो भक्त कहते थे, अब सब पर दया भी माता को कुछ नहीं। वास माफ बोलेगा, माता ने अपराध किया है। क्या था, अपराध सो भगवान नाम के थे। और सचिन मादा ने पीछे से देखा कि चारा के चरण है, चरन से धूल ले। भगवान बड़े प्रसन्न हुए। भगवान ने कहा भगवान के उर्दीमादानेह अपने अपराध का अपराध का कर दिया। तो कहने का तर्क यह है। अपराध से सामना ना चाहे, आप भागवत अमिश मना जवानी। 1 कथा पढते की। इस प्रकार अमृाबड़ेधामेराजा है, बड़े धान में और 24 घंटे भगवान का चिंतन करे। अमेश मराज ने अपनी बंदी के साथ वन और वाली को तोड़ने वाले थे कि वहाँ कौन पहुंच गए, बनी के विषय में पढ़ते हो सर, क्रोधित हो, गे खुशी हो सो। जब हम पहुँच गए, वल्ड तोड़ने निमंत्रण दिया, मैं आता हूँ मुझे। मुझे स्नान करे स्नान करने गये और वो भूल गए कि अमरीश मराज तोड़ना है। सो अमीराज ने देखा कि समय बीता है, तो उन्होंने क्या किया? मुझे क्या करना चाहिए? इस स्थिति में? क्या करना चाह? आप जल्द पी लो, जल्द पीना। 1 आप खाना है, और न भी खाना जल्द पीलिया। बड़े े समझ गए कि अमरीश बनाया है उनसे। उनकी देखे उन्होंने खा लिया, क्योंकि अक्सर अपने मत किसी को खाने के साथ। तो ये यहाँ पहले सो। मुरी बड़े क्लोज है? वो कहा कि भुलाया था प्रसार के लिए, मैं पहले खाली तो वामनी बाहर की सीके निकालकर। उसने 1 अक्षर डीमन पैदा कर दिया। वो जीवन जो है डीमें पैदा कर दिया। उनकी इच्छा थी की अमनाज सुझा तो घबराये भगवान के चरणों का चिंतन करते हुए जो है हमेशा विश्वासक है परम भगवान उनकी रक्षा करेंगे सो भगवान और भगवान क्या किया कौन जाने तुम सारे को सूचना में कभी नहीं खुशी। भगवान का चिंतन करे थे और मा भी सुलेशन छोड़ से इतनी हीट पैदा हो रही थी विभासा गए ब्रह्मा जी की बात की बात ने कहा मैं जा नहीं सकता क्यों किशन भगवान जी की बात सो उनने भी कहा मैं कुछ नहीं कर सकता और फिर वो मैं भी तुम्हें माफ नहीं कर सकता कौन माफ़ कर सकता है मे अमेश माय ने mafia तो के ब्रा बचना चाहिए हमें क्या करना चाहिए? हमें प्रयास करना चाहिए कि सौभाग मेरे होम के द्वारा विज्ञान सो अपराधों से बचना है और क्या प्रॉपर्टी वी शुड बी मधुमखी जैसे मधुमखी जो है वो केवल सावन में रहना चाहिए। सो इस शोक में ये कहा जा रहा है हमें भगवान के प्रति आशक्ति बनाने जाए तो हमें यह ज्ञान प्राप्त होता की आशक्ति बढ़ेगी कि शवनम कि का लाभ उठा। श्रम कितना सबके लिए सबसे महत्वपूर्ण है और भक्तों की संघ में आप ही की महिमा और कैरा सुनते रहते हो तो इसे यह भी कहा जाता है उन्हें भक्तों के संघ में वो भक्तों के संघ में रहोगे तो असली ज्ञान प्राप्त हुआ। चीजें मा 5 कार्य जो है बहुत आवश्यक है। उसमे सबसे पहले क्या कहा था साली संग साल से अगर आप 1 पल के लिए भी आपको साधु की सजा मिल जाए आपका जीवन सफल हो सकता है। सो साधु संग इस वेरी इम्पोर्टेट तो कलिकाल की भगवान स i am to ye hai ये भगवान से इसलिए hina तो क्योंकि भगवान से सबसे महत्वपूर्ण मारे गए जिसके द्वारा आप भगवान को पर कर सकते हैं तो अंपाजीनेकेदीथापना की सारे विश्व में आज बड़ी सरलता से प्राप्त कर सकते है में अनेक मंदिर है। 1 समय था जो पापाजी अकेला संघर्ष कर रहे और संघर्ष कर रहे थे मक्सी की स्थापना क और इसी सफलता प्राप्त नहीं हो तो बाबा जी श्री मुजलेयहाैऔरपाबाजी प्रचार कर रहे थे और इस काल की स्थापना के पश्चात हुआ फेल विदेशी भक्तों के साथ चाहे कि 1 केंद्र बन जाए। कि संदेश दे सके सो प्रभाजी का प्रयास था और जैसे
देली
को प्रकाशित करने के ल सो प्रॉपर्टी के लिए जो तुपस्याथी उसका हम नाम उठाते है तो साली संग रहोगे तो आपको हर नाम की महिमा है मिलेगा ई नाम की महिमा हो गया है यह हर नाम जो है कहाँ से आ रहा है भगवान के ध्यान से और में लोग चौसर ने देखा तो पापा ने, बंस ने कहा पापा से प्रापारी चौथे मना करना मुश्किल है, पापा ने कहा ओके बरती मना करना। बंक ने कहा फाइनल तो ये 16 पालन करोगे ने go back to god से जीते मापी कृपा से भगवत परापति मोदी स हो गया है कृषि है तो विष्णु से ही वहां पर परिचय इस कलयुग में आपको नाम के माध्यम से वही लाभ प्राप्त होता है जो पिछले युगों में दूसरे रास्तों और चिंतन करते थे। पहाड़ों के ऊपर जाकर और सौ परसेंट पानी और लोगों की आयु थी लगभग 1 फिर आया। साधन क्या था, क्या बड़े बड़े लोगों की थी 10 साल, 10 हजार साल और ्वापरयुगमेंहोगया हजार हजार साल। ज्यादा सौ सो में प्रॉपर का साल बड़े करे और वही लाभ सकल में प्राप्त हो सकता है तो में प्राप्त होना है। शासन द्वारा हमें ज्ञान मिलता है कि भक्ति होगी उपाय है। और हम जितने ध्यान से करेंगे उतना ही आशक्ति पड़ेगी। और अगर आशक्ति नहीं बढ़ी तो हमें क्या करना चाहिए? रूप कहते हैं 6 प्रकार के सम्बन्ध होने, चाहे भर, सुनते, 6 प्रकार के संबंध होने में e a main other more and is to बढी तो बड़ा जाना चाहिए। अभी कई बार लोग पूछेह हम इतने साल से जा न सकी कारण है आप ध्यान से जाकर। कुछ कुछ कमी है, ध्यान पर नहीं, इसलिए अपराध कर हो। इसलिए सो हमें अपने मन की बातों को करना चाहिए, जो ज्यादा एडवांस है और उनसे देश लेना चाहिए, ध्यान देना चाहिए। सो अगर हम प्राप्ति कैसे इस कौन संस्था की स्थापना की। इसी लक्ष्य के साथ ही 2 प्रश्न पूछेंगे उत्तम मकसद से जो उनके ज्ञान पाप करेंगे, उनके द्वारा उसका लाभ। मनार ने अनेक प्रकार की तपस्या की थी। बड़ी देर, सपस्या चपस्याकेपहले महीने में वो खाते थे, क्या 1, 30 वहीं खुराके 3 खुराख वो खाते थे, 3 क्या खाते थे
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de mine उन्होंने बन कर दिया जल पी और आगे के बाद सांस ले, हर सेकंड सांस लेते। और 1 बार तो भगवान से बड़े पसंद है। उम्र भगुदेभासमंजर का भी उच्चारण करते थे ने प्राप्त हुआ था भुनी हमेशा ठीक स्थान में पॉइंट जाते हैं, ठीक समय पर। और उन्हें गया भी कहा जाता है। सो a a a a a, ये उम्र नहीं है। भगवान ने कहा अगर आप मदद करना चाहते हैं की जो तपस्या से भगवान बड़े शो ने पूछा हुआ तुमने मेरे लिए इसी तपस्या की है मांगो मुझे क्या। और उन्होंने कहा अगर आप मुझे कोई वर्ड देना चाहते हो तो ऐसा वर दीजिये कि मुझे उन भक्तों की संगत मिल, उन भक्तों की संगत मिलेगी। उसका अर्थ है ये हमें ज्ञान प्राप्त हो रहा है। जिसके पालन से, हम के बंधन से मुक्त हो सकते हैं। तो मुझे बर्थ देना है। तो ऐसा वर दीजिये कि मुझे उन बक्सों की संगत में प। लाल से पूछा लाल को 1 प्रकार की तपस्या करनी पड़ी थी। भगवान मेरे कहा तुम्हें इतना कष्ट करना पड़ा जी वार्ड लू ने कहा अगर आप मुझे वर देना चाहते हो सर से वह लीजिए कि में हृदय में किसी प्रकार का भौतिक आकर्षण नहीं रहे। वर दीजिये बहुत हि। आक्शन जो है बिल्कुल न शो। तो जब आप उत्सम बक्सर के सर में रहोगे तो आपको यह ज्ञान प्राप्त होगा किया कि हमें मई को प्रेम कैसे प्राप्त क? इसलिए साल तो आशकी बढ़ाना हमारी, यह हमारे लिए श्रीमन भागवत, यह दिलवीज्ञानआपको प्राप्त हो रहा है, यह ज्ञान प्राप्त हो रा है। हमें का राहठानाचाहिएइसलिए भागवत में कहा गया है। और निरंतर रूप से क्या? क्या लाभ होगा, ै और दूर हो जाएगी। भक्ति की भावना स्थापित होगी। तो हमारे यहां चारियों ने हमें प्री शिक्षा दी है कि कैसे बढ़ेगी हमें साल चाहिए है, नाम का उच्चारण करना चाहिए, शास्त्रों का अध्ययन करना चाहिए। शास्त्रो का अध्ययन वह महत्वपूर्ण है। क्यूंकि सास में है? क्या भगवान की वाणी, भगवान की वाणी में पूरी दोष या कमी है। आज भी हम पढ़ते हैं, उसका ही भगवान ने लिया था। सबसे पहले, सूर्य के लिए सभी। और यह ज्ञान समय के साथ खो गया था। भगवान ने फिर से दिया है। इसलिए तुम विज्ञान के राशि को सम सो भगवगिरऔरभगनररपढ़ोगे बिना शंका के आपकी आशक्ति बढ़ेगी पढना चाहिए, उजला नहीं पढ़ते। पर हमें निमित रूप से पढ़ना हो पढो देखो की आपकी आसक्ति कैसे बढेगी? और आज के बढ़ाने के लिए अपराधों से भी हमें बचना चाहिए। और जो बागान देखते हैं ये व्यक्ति मुझे पसंद करने का प्रयास करता है को भूली देते है और निश्ठा ले दे रूप हमें कैसे है। अगर आप बचने के करोगे तो उसके द्वारा क्या प्राप्त होगा?
निश्चता?
कई बार भगपुरसेनिश्टा कैसे प्राप्त करें तो निष्टा प्राप्त समझिए। इसलिए मजे वेरी मपोर्टेnटऔर कल में इस विषय पर बल दिया जाता है। और बचा क्या करोगे? ना को ना आप भी भक्ति से नहीं होगा। और फिर करते तो फिर क्या आएगा? तो सरल उपाय है कि सरल उपाय है कि हम वजरकियाकोध्यान से देखे और साधना मे ठीक रहे। तो इस लोक में सनत कुमार उपदेश दे रहे हैं की भगवान के प्रति आसक्ति कैसे बढ़ा गया? पर भगवान श्री कृष्ण की उपासना करो, ईश्वर ेशवरोगेश्वर की उपासना करो और उपासना करोगे। तो फिर क्या प्रार्थना आसक्ति? भगवान की बली बढ़ेगी और बढ़ेगा और सक्ती में नहीं जुड़ा पारा। मेरा पूछना चाहिए, क्या करना चाहिए, क्या करना चाहिए? i should deve you in the class, i should deve हे काहे हारे है, हे राम, हे हे प्रशहै, हरी कुमार
धन्यवाद विभाग आपका बहुत अच्छा प्रश्न है
की सास बताया गया है की भला
की रक्षा करते सदा तो हमारी जो स्थिति है उसे आवाज क्या है।
आप भरत के मार्ग पर हो। हमें यही सोचना चाहिए कि किसी प्रकार का क्लेश नहीं आए कि प्रकार का कर के आए और जाए हमें कर क्यों? हमने क्या कर दी। हम यह सोचे कि शिक्षा के द्वारा आप के सारे लोग कर्मों का परिणाम है, वो मिल जाएगा। जब आप भक्ति में आते हो तो आपको कैश का प्रोग्राम कोटा कम हो जाता है। और जो पंख पंख देश कर रहा है वो we the man s s।
हम अपने अनर्थों से कैसे करे। हम मतलब प्रयास करते हैं कि ऐसा लगता है की हमारे मेरे प्रयास जो है पर्याप्त नहीं है और जितना प्रयास करते हो और ऐसा लगता है की अन्ना पॉवर बढ़ते
लगता है। पूरा बढ़ती जा रहा है। सफर में 1 घंटे ब las
हेलो, दोस्तो गुरमा गुरुमाराज आपने बताया कि स्रवना जो है ये टॉपमोस्ट और बहुत ही सही उपाय है। लेकिन महाराज ऐसा देखते हैं कि बीजी स्केल के कारण कई सारे ब्यूटी होते हैं और कई सारी सेवाएं भी रहती है और बाहर भी ड्यूटी तो उसमें महाराज आपने सही बताया कि जो है हम सफिसिएंट री भी कर पाते तो
इसके महाराज कैसे स्ट्रॉ पर आपको आपकी कितनी भी सेवा हो जो शाला अरे
महाराज आपने बोला की इस विचार ने
का पोता से बात करे और सुनवाना करे तो हम जा सकते हैं तो
सोना वाला के ध्यान मे वो बहुत
चली करता है ये जगह करना
बहुत
प्रयास करते हैं पर फिर भी आप भी कोई चेन बना हुआ है तो कैसे कर सकते है कैसे
सब लोग
जब कैसे क्या है उस के 1 साल में बैठो और कार्य करो तो सेक्शन लिए जब आप प्रसाद खाते हो प्रशाद बा बना के आप से प्रश्न पूछे क्या कहोगे मेरी शांति में खाने 2 मन भटकेगा की मोटर चला ले चेटिंग कर सकते हो पर
हल की हम कई बार प्रात किया तो इन अपराधो से की हम जाने और अनजान में गलती से मिला कर देते हैं और कंपनी को पर बालिका हो जाती है तो उसको भी कैसे खत्म किया जाए फिर बोले निंदा कैसे खत्म करे और अपराधी को कैसे खत्म करेंगे।
हम इसे कहते हैं जैसे हमने कहा ने कहा कि हमने ब्लूमी जैसे ब्लूबी जो है बिल्कुल साफ तो हमें भक्षक गुल्लू ऐसी कमियाँ है गुल है वह इस मां प्यार जुड़े है मरको सुधारने के लिए अपनी से बात करते है। हाई कृश्णपुरमाराज ऐसा होता है कि सुर में भक्ति आते हैं तो हम बहुत विनमरहतेहै लेकिन जब धीरे धीरे आगे बढ़ते है तो विनता कम हो जाती ो ऐसा कैसे करें के हमेशा बिना बने है।
इस बात
ने तीसरा शो से अपने गले में आपको 24 घंटे जानी करने थे। और आप भले उदाहरण पढ़ते हो कि भगवान कैसे विनर के द्वारा
रशमरसान
घमण्ड हो गए और मन के चाहिए तो
हर महाजी धन्यवाद आपने अच्छा माजीकरप्रशयहहै कि जैसे ही हम भक्तों के साथ सेवा करते हैं और हमें ये बोला जाता है कि हम भक्तों का सम ले पर उस पर में कभी कभी हम भक्तों के भी अपराध करने के के भक्तों से बहुत ज्यादा फेलियर हो जाते हैं। तो गुरुवार से मेरा प्रश्न यह है कि हम किस प्रकार से हमारा भाव होना चाहिए जो भक्तों के साथ जब भक्तों के साथ सेवा करे।
सबसे पहले हमें यह चाहिए जो सेवा का मौका मुझे मिला है। ये न भाग ये नहीं सोचना चाहिए कि सेवा जो मेसी मांग रहे हैं यह अच्छी नहीं लग रही है भागवान व्यक्ति है जिसे मौका मिलता सेवा करने पर आगे क्या।
तो फिर हम उनसे बहुत सेमेलियहोजाते है और टी वी सन्डे बहुत ज्यादा हमारा ये प्रोफेसर जाति अपराध कर देते हैं।
जाने जाने हमें बूली का उपयोग करना चाहिए में किस समय के साथ फेमिली बढती रहेगी ले
जा ने बताया कि
मालिस वो बहुत बोलें
कंसिस्टेंट नहीं कर पा।
सो student
क
to become consistent in morning in prensifoydegermination ans okay कृष्ण थैंक्यू
सो मच महाराज प्रश्न है कि 16 चैंपियन, पालन, रेली और प्रैक्टिकल सेवा के अलावा भी ऐसी सी चीजें आने दे ताकि वहाँ प्रति वसीबरतकरसकेसेवा practic
भाले के समान लाभ करते हो तो हवा से प्रार्थना कर रहे हो। बरफाकैसेेबिमारी लाज कराना तो आपको 22 चीजें मेनिसन डाय meri usa and is iso guys thank you and for a a a a a a o। महाराज
अरे रे रे आ।
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