मनुस्य जीवन का क्या है, लक्ष्य || SB 4.29.37 || 26.11.2017 || ISKCON Kharghar

A spiritual discourse on human life's true purpose: transcending ignorance and attaining liberation through bhakti-yoga practices like chanting, seva, and guru guidance. The speaker warns against material ambition, criticizes secular education over spiritual knowledge, and calls devotees to join 16-week Gita study marathons and collective worship to awaken divine consciousness.
Chapters
hi krishna हमन मोबवसेवासदवाहमन मोबालबसेवासुदिवा। home some word me as and the word yeh is im redifon want in a bold wazuebagvatibati yoga smadajinaजaa ज्ञान शयतiवासदेवेभागवती
देवे
माहथा जाजञानशयतीवासदेवे भागव भियोंकासमाहताजनेना वेरा ग्राम जञानीजगीभकिोगा समाहतानेनावेराजम ज्ञाना आज ले ले ही आदियों का फायदा, आज के रेहही भक्ति योग समा
बासु देव भगवती बासु देवे हगवलीभक्तियोगा समाहता कियो समायता ने, नवराज सबनेराजा म चजनइशतीहजिसजरेवई
आती ा
सभी से है यम
यान जलेजलिआजगेहडी आधे साल हरेलहया राग
सी
मजेरेबहीबजियो का समाज
सरीखे म
सुंदरता
2 रही जीविका जी कभी रुचि वाले यह जिस से न वंचित वस्तुओं का कदम, श्र, सं, संसा पीछे हत्या हत्या गुरु परमेश्वर उसके प्रतिनिधि को वासुदेव वासु ने में भगवती श्री भगवान ही हो।
ग
समाजिक, समाज गागरचसगीचीबोरण या पूर्ण या श्तीरगट अलुवा जीव का वास्तविक हित इसमें है कि वह अविद्या से लगे, जिसके कारण उसे बारम्बार जन्म तथा मृत्यु सनीभरदीहै। इस 1 मात्र औशलीहैश्रीकवान के प्रतिनिधि के माध्यम से उनकी शरण ग्रहण का जब तक मनुष्य श्री भगवान वासुदेव की भक्ति नहीं करता, तब तक वह तो इस होती जगत से पूर्ण विरक्त हो सकता है और न अपने असली काम को भी कर सकता है।
जी
पितलिमहोबलिसिति से विरक्त होने का यही उपाय है। इस 1 मात्र औशलीहैा कृषि करना श्री कुमार बसदेव के भक्ति में निरंतर लगे रहे। प्रति व्यक्ति सुखी रहने का प्रयास करता है और इस सुख को प्राप्त करने के लिए जो भी ज्यापाईजातीहै, वह स्वार्थ कहलाती है। दुर्भाग्य वर्ष इस संसार के भीतर कतावदी नहीं चाहता कि उसके स्वार्थ का चरम लक्ष्य वासुवेरहै संस्कृति का प्रारंभ हो द्रस्देहातोंफजी से होता है और इसके पर स्वरूप अनेक वांचित वस्तुओं की श्रंखला प्रारंभ हो जाती है। यह वंचित वस्तु इंद्री वस्तुत मानसिक जाय है। इस प्रकार विश्व इस संसार में विभिन्न प्रकार के शरीरों को धारण करता है। मनुष्य को पहले मन को वर्ष में करना होता है, जिससे मन की आकांक्षाओं की शुद्धि हो सके। यह विवि भारत पंचरातमेसरआदीिकम तक परती नगर मदद के रूप में वर्णित है। जब तक मन शुद्ध नहीं हो जाता, इस भौतिक स्थिति से छुटकारा पाने का प्रश्न ही नहीं होता है। जैसे कि सुमित भागवत ने 1 साथ 6 मे कहा गया है अन साक्षात योग रोष योग से जान तो विक्षर साथ बनाने समझता जी होतेदेश, जो उसके लिए है। अपनी कली, अपना देश से दूर किए जा सकते हैं, किन्तु सर्व साधारण इसे नहीं समझ पाता। विधवान व्यासदेव ने इस वैदिक साहित्य का संग्रह किया, जो मर्म सर्वे से सम्बंधित है। अलर्ट अर्थात वांचित वस्तुएं 1 जीवन से दूसरे तक चलती रहती है। इस बद्दतसेनिकलनेे मनुष्य को श्री भगवान वारे की भक्ति करनी पड़ती है। इस प्रसंग में गुरु शब्द महत्वपूर्ण है। इसका अर्थ भारी या श्रेष्ठ के रूप में किया जा सकता है। श्री नक्षली ने अपने पुत्रों को भेज दिया था। गुरु न सस्या नमोजी। जब तक अपने शिष्य को जन्म मृत्यु के आवागमन से बाहर न निकाल सके। मनुष्य को चाहिए कि वह गुरुका स्वीकार न करे। भागवत 55 यह संसार वास्तव में विभिन्न प्रकार के कर्मो की क्रिया प्रतिक्रिया भारत प्रतिहार की श्रंखला द्वारा उत्पंन है। यह जन्म तथा मृत्यु का कारण है। इस क्रिया को वासुदेव की सेवा में लग कर ही रोका जा सकता है। भक्ति उन कार्यों को सूचित करती है, जो भगवान वासुदेव की सेवा व संपन्न किए जाते हैं। क्यूंकि भगवान वासुदेव सर्वश्रेष्ठ है। अत मनुष्य को अन्य देवताओं की सेवा न करके उन्हीं की सेवा में लगे भर्ती, कर, समारंभ, नवदीक्षित, अवस्था से लेकर भगवान की प्रेम भक्ति तक वस्ती है। सभी अवस्थाओं का पभभिप्रायरभगवान व सुदेव को प्रसन्न करना है। जब मनुष्य वासुदेव की भक्ति में अत्यधिक अग्रस हो चुकता है तो वह शरीर की सेवा से पूर्ण विरक्त हो जाता है और इस प्रकार विरक्त होकर वह ज्ञान में प्रारंभ हो जाता है और भगवान वासुदेव की सेवा में संगत होता है। श्री केतन महाप्रभ का कहना है जीवेम स्वरूप है। कृष्मीयनदकेराज प्रदेश जी अपनी स्वाभाविक स्थिति के पल स्वरूप दृष्णकाचीवदास है। जो भगवान वासुदेव की भक्ति प्रारंभ करता है, उसकी स्वाभाविक स्थिति प्राप्त हो जाती है। यह स्थिति मुक्त अवस्था कहलाती है। उपकेलिवालिखरपम स्वरूप स्थिति मुक्त अवस्था में मनुष्य अपनी मूल कृष्णकी स्थिति में रहता है। वह मैं था। मेरा के मोह के अंतर्गत संपर्क में की जाने वाली अनेक प्रकार की सेवाओं, राष्ट्रीय सेवा, जाति सेवा, कुत्ते की सेवा, व सेवा आदि को विराली दे देता है। जैसे कि भागवत में 127 व्याख्या की गयी है। वासुदेव भगवती भक्ति योग प्रयोग जिला जनगियाजुवहरायगा जय हे श्री कृष्ण की भक्ति करके मनुष्य तुरंत, अहित्या तथा संसार से वक्ती प्राप्त कर लेता है। इस प्रकार विश्य को किसी भौतिक इच्छा, मानसिक चिंतन किया कर्म के बिना वसुदेव की सेवा में लग जाना चाहिए। खजुादरयस, अनुवाद जीव का वास्तविक हित इसमें है कि वह अविद्या से निकले, जिसके कारण उसे बार बार जन्म तथा पृथ्वी सहनी पड़ती है। इसकी 1 मात्र और सदी है श्री भगवान के प्रतिनिधि के माध्यम से उरवीशरणरहनकाका। जब तक मनुष्य श्री भगवान फसले नहीं करता, तब तक वह न तो। इस जगह से पूर्ण गेल तो हो सकता है वरना ने असली जान को
भी हो सकता है हम gajननजनश चेतन, मन वश जाय के कि केतन here are was सो इन 2 लोगों का उच्चारण नारदमुनी कर रहे है, कौन कर रहा है नारदमुनी जैसे आप जानते हो। शक्त भगवान के अफसानों के कई विभाग हैं। गुणावतार, पुरषाअवसार, नीरा, वतार, युगावतार शक्ति। उनमे से 1 हैं। शख्स विशमता। शलता के 2 भाग हैं 1 डर, 1 इंद्र, 1 जो भगवान खुद प्रकट होते हैं, जो भगवान किसी को शक्ति देते हैं। धर्म के साथ में उसे प्रॉपर्ली ने कहा था, जspराइजरताधारतबूनी उनका 1 ही कर्तव्य है। क्या उनका कर्तव्य नरायन की शिक्षा देना। यहाँ इस अध्याय में शिक्षा दे। रे 1 राजा को का नाम था प्रचीनापरिशर। महाराज। प्रचीन बरिश बहुत गहराई के साथ इंडिया जिप्ती के कार्यों में जुड़े हुए थे। उनके मन में सदा यही भाव था। भौतिक शोध प्राप्त करना। बुली उन पर दया की तो साधु है। जो संत है वो चाहता है। हर व्यक्ति असली शोक प्राप्त करे। वो ये जानता है कि अगर हमें असली शो के उसका साधन किया है। यदि यह नरादमुनी ब्रेक नरादमुनी ने ब्याज देव को ब्रेक। ब्याज देव ने अनेक वैदिक शासन की रचना की थी, उनके सार को प्रस्तुत किया था। 10 जेवी न्हें लग रहा था कि कुछ कमी रह गई है उनकी रचनाओं में जो वो विचार के थे, क्या कमी रह गई है और कौन पहुंचे कहा कि तोहार रचनाएं तो इतना सुन्दर है। और तुमने शुद्ध भक्ति पर बल नहीं दिया जिसके पश्चात उन्होंने हमें कौन सा ग्राम दिया और ना मूली जंगल में जा रहे थे और जंगल में या कई खायब फूले पूछा कौन है? 1 शिकारी था अपने करे जिसको आनंद दाता था पुरषों को घायल करके जब मर जाते थे वे मोदी की संगर से ऐसा परिवर्तन हुआ। इतना सुधार हुआ कि गार मेने देखे बिना कि कोई चीटी नहीं है। उन की बात मान तो ये है मुनी नाज। मुनिने देखा कि मुनि महाराज कुछ बड़े जुड़े हुए है। बात विचारों में उन्होंने उनको उपदेश दिया, पिछले वर्दी में उपदेश दिया। बरिश ने कहा आपका उपदेश तो मैंने सुन लिया है। वो बोले ठीक रूप से समझ नहीं आया कृपा करके और गहराई के साथ, देश दीजियेगा में और गहराई के साथ ले रहे है। वह क्या कह रहे हैं इन 2 लोगों में, इन श्लोकों में और तारपुर में बहुत ही महत्वपूर्ण संदेश दिया जा रहा है। जाने कह रहे कि हर जीव भाजपा का असली भाव होना चाहिए। जन्म मृति के बंधन से छुटकारा पा कर, ये होना चाहिए। हम सब का बसोसी बात है। यह बहुत कम व्यक्ति इस महत्वपूर्ण विषय को समझ पाते हैं। अगर आप की चर्चा करो। इस विषय की। लोग क्या सोचते हैं। आप मूल को सी स्मार्ट। हम सब का जब है। जवाब ऐसा कार्य करो जिसके द्वारा जन्म से मुक्त हो सको। यह जीवन है। पापाजी भकतिसीधाताजीको मिले थे। पहली बार कब 1922 में पापा जी के मित्र थे। उन्होंने कहा यहां 1 बहुत प्रसिद्ध साधु है। मैं चाहता हूँ कि तुम चलो से मिलने पापाजी बोल दे। मुखिया संतो की सेवा करते थे तो प्रभाजी का पोत परिचय था। साधुओं के साथ। रामाजी ने कहा मैं तो अनेक साधु को मिल बैठा हूँ। मैं किसी से भी इतना प्रभावित नहीं हूँ। पर उनकी मृत्यु में कहा नहीं नहीं। ये साधु दूसरे साधु जैसा नहीं है। तो प्रापा जी जब पहली बार मिले पहली मुलाकात में भाकीजिदाजीपेचान गए। ये है वो प्रसिद्ध साधु, ये है वो युवक जो कि मारा की विषय वाणी को सबल कर सकता है। तो उन्होंने प्रापा जी से कहा तुम पढ़े लिखे युवक हो, अच्छी अंग्रेजी बोलते हो, ले जाओ छेदीरेमापोकेसंदेश को कहा। पश्चिम देश। बाबाजी ने कहा पहले हमारा देश गुलाम देश है। इस समय पहले हमारे देश को स्वतंत्र बनाने जा। फिर लोग इस संदेश को सुनेंगे। तो दादजी ने कहा असली स्वतंत्रता है जनामृतिकेबंधल से छुटकारा राजनीतिक स्वतंत्रता ली। तो ये है शास्त्र का निर्णय। यही विषय राजमुनी फिर से स्थापित कर दे। आप शास्त्र में देखते हो कि जो महत्वपूर्ण विषय हैं, उनकी चर्चा बार बार की जा रही है। इन्हें ये पैला संदेश लोक के परवर्तन में, जहाँ कि यह संदेश दिया जा रहा है, अब किताब पढ़ो दूसरी दहाई में अनेक स्टोको द्वारा भगवान के विषय की स्थापना कर रहे है। बहुत। तो बार बार हमें क्यों सुनाया जा रहा है। क्यों? कौन बताएगा भूल जाते हैं, सुनते हैं तो भी स्वीकार नहीं करते। बार बार बोलने की है पापाजी गीता। repitition is drag the point। सो हम सब का असली उद्देश्य होना चाहि। और वो आगे कहते हैं असली उपाय क्या है? पर हम भगवान के शरणगत होगा। और आगे धोनी। यह भी कहते है शरणगत कैसे होना चाहिए? कैसे होना चाहिए उनके के प्रतिनिधियो के द्वारा? तो ये है श्रीमत भगवत का निर्णय। भारतीय परम भगवान के शरणगत चर्चा कल रात काम कर रहे थे। और ये है गीता का निर्णय में हम थोड़े दिनों में गीता जयंती बनाओगे। गीता का भी निर्णय क्या है? भक्ति या प्राप्त होता है। प्रति हो। इन सब समस्यों का उपाय क्या है? पर भगवान कृष्ण नगर होना। और ये नगर कैसे होते हैं भगवान के प्रति? निधियों के द्वारा? तो शास्त्र कहा गया है भगवान की शिक्षा ग्रहण करो। और सालन क्या है? वार के प्रतिनिधि द्वारा विज्ञान प्राप्त होता है। तो ये शासन प्रतिनिधि की क्या तालीब होनी चाहिए? वह को बेगम क्रोध, वेग मन बु वइशहोनाचाहेदेने की हम ये दावा करे। हम भगवान के प्रति भी है। हवा। आज होना चाहिए, अचानक होना चाहिए। वो है भगवान का, भगवान के प्रतिनिधि का गुण क्या होता है? कोई शिक्षक जो कि परम भगवान उधाहरण के लिए अगर आप कहापर के ग्रंथों पर उपदेश को सुनो तो यह देखोगे क्या? वोह उद्देश जो कि परम कई बार लोग पूछते हैं आप के गीता को यथारूप क्यों बुलाया जाता है? उसे सारे पूछे तो क्या कारण है? प्रापा गीता की भूमिका यथररूपइसलेकहा गया है, क्यूंकि? देश गीता का दिया है? जिस भावना से भगवान ने दिया और अर्जुन ने स्वीकार किया? नारदमुनि। सबसे पहले तो कहते हैं कि अज्ञानता से हमें बचना है, अब जन्म लेते है। अज्ञान मात्र में। 1 मंत्र का उच्चारण करते है। ओम ज्ञान 3। वह जन्म हो अज्ञानता में। जैसे की हम सब जन्म लेते हैं, लिखना पढना नहीं जानते, पर जाते हो, सीखते हो। उसी प्रकार यह आवश्यक है कि हम छोटी आयु से आध्यात्मिक ज्ञान को भी अनुकूल करे। आज के लोग के तार में प्रापति ने निशेदेभगवानकेदेश की चर्चा की है। ये उद्देश्य भागवत के 5 विस्कंडकेपांचवे अधिहाई में प्राप्त होता है। ऋिशपशब्कारहै सबसे प्रसिद्ध, उनके पिता का नाम था महाराज रावरी, माता का नाम था। तुम्हारा पिता ने बड़ा यज्ञ किया था, इस सुदेश के साथ कि भगवान प्राप्त हो। पुत्र के रूप में। भगवान उनकी यज्ञ से इतने प्रसन्न थे। उन्होंने कहा, अगर तुम्हे भेजा सा पुत्र चाहिए। ये तो असम्भव है। मैं तुम्हारा बुद्ध। तो भगवान ऋिष्णदेवने बहुत ही महत्वपूर्ण शिक्षा दी है। भागवत का। े हे मेरे प्रिय पुत्र। ये दुर्लभ मनुष्य जीवन को पशु के समान मत उपयोग करो। तो आप कहोगे किस प्रकार उपयोग करना चाहिए? हमें क्या होना है? जीवन का उद्देश्य है। मे क्या कहते है? तो देवम को, हे मेरे पुत्र, तपस्या को जीप की, तपस्या मन की। तपस्या में की तपस्या तपस्या करो। कैसे देखा जाए आज के बातल में रहना ये भी को आज के वतन में रहना, वो भी तपस्या है नहीं, बॉम्बे में पोलूशन की कमी है, ट्रैफिक में जाना, यह भी तपस्या है। सुबह 6 बजे निकलो घर से पैसा कमाने के लिए रात को लौटा ये छोड़ी तपस्या, कइयों को 33 नौकरी करनी पड़ती है खर्चा जलाले अमेरिका में भी मुझे 1 सजन मिले थे रहा था 3 नौकरी करता खर्चा निकालना के लिए तो ये भी तपस्या है। पर रेश देव जी कहते हैं देव मतलब कि भगवान की खुशी के लिए द में भगवान कहते हैं जीव की तपस्या ये भी क्या तपस्या है। जीव द्वा सत्या का उच्चालन करो। जीव द्वारा मीठे रूप से चर्चा 2 जीव का उपयोग करो। से भगवान के नामों के उचारण रूपक स्वामी जी 1 महान संत थे, जिसने हमें अनेक प्रसिद्ध ग्रंथ लिए, जिनमें खासकर के 2 ग्रंथ बड़े प्रसिद्ध है, जिनका अनुमान प्रॉपरली ने किया है। कौल कहते हैं भगवान आपके गुण इतने नेक है। आपके गुणों का उच्चारण करने के लिए हजारों जीव होती है तो जीव का उपयोग करोगे। इसलिए भगवान के नामों का, उपचारण के द्वारा भगवान का चिंतन करो। भगवान के विग्रह का चेतन को, भगवान के देश का चिंतन करो। मोबाइल के शिक्षा का सार, भेद का उपयोग लोग हमार की सेवा में, इस विषय में हमारे सामने है। भाया आज अमरीश का बड़ा सुन्दर उदाहरण है। सब मन कृष्णा प्रधान मान का उपयोग किया, कि इसलिए उन्होंने भगवान का चिंतन के पैरो का उपयोग किया। किसलिए के मंदिर पैदल पर आप बैर हो, मोटर स्कूल लाने और मंदिर पहुंचे आतंक उपयोग किसलिए तुम्हार के मंदिर पर साबका सेल का उपयोग किया। किसलिए भगवान के सामने झुकने के लिए जीव का उपयोग किया। भगवान के नाम का उचारण विशाल लिए। ये उदाहरण है। किस प्रकार अगर हम चाहे तो हमारे मन बुद्धि धियों का उपयोग कर सकते हैं। भगवान के से सुरेश भगवान आगे उपदेश देते हुए कहते हैं इसका उपयोग पापाजी ने आगे किया है। कि व्यक्ति को गुणी बनना चाहिए, पिता ने पढना चाहिए। माता ने जब अपने डिपेंडेंट्स को कहाँ भेज सके भगवान के गुरु है। गुरु का कर्तव्य है या था रूप? भगवान के संदेश को प्रस्तुत करना। हम अपने आचरण द्वारा शांत शिक्षा को और माता। वेद उनका कर्तव्य बनता है। कि हम बच्चों को दिव्यज्ञान प्रदान करें। जिसके द्वारा वो जीवन के लक्ष्य को खराब कर सके। हम सोचते हैं, वह कर्तव्य है। बच्चों को विदेश अमेरिका भेजो शिक्षा प्राप्त करे। पर आप ने अध्यात्मिक ज्ञान ले लिया तो बहुत ज्ञान के का क्या लाभ। तो रिज यहाँ अज्ञानता से मुफ्त हो। अज्ञात से मुक्त होने का साधन क्या है? भगवान के प्रतिनिधि द्वारा ज्ञान प्राप्त करना। इस विषय में कहा गया है कि साधु की संगति का बड़ा गहरा प्रभाव है। शिमरभगुदमगतीसे करने, आप देवहूती और कपिल देव। भगवान की चर्चा पढ़ते कपिलदेव भगवान के अवतार थे, उनकी माता को पता था मेरा जो बेटा है, भगवान का अवतार है। इसलिए उन्होंने उनसे मैंने 1 महत्वपूर्ण प्रश्न। पहले उन्होंने पूछा बेटा ये बताओ किस प्रकार जन्म मृत्यु के बंधन से हमें छुटकारा मिल सकता है। तो मेरे 1 खिलाड़ी नारी हो। एक्स ले वि ज्ञान से ज्ञान दादुर। बेटे ने कहा भगतीयोकेमाध्यम से आगे माता ने पूजा भारती हो, कैसे प्राप्त हो? तो बेटे ने कहा साधु संगत के माध्यम से और 5 बड़े प्रसिद्ध लोक है जिसमें 1 ही विषय पर बल दिया जा रहा है। साधु संत। जब धुअमराज से भगवान ने पूछा धोवा।
ईदी।
तपस्या तुमने उठाई थी, मेरे लिए भागो क्या वर्ड चाहिए? तुम्हे जो क्या, हे भगवान। अगर मुझे वर देना चाहते हो तो ये वर दीजिये कि मुझे सदा उद्दम भक्तों की संगत प्राप्त हो, उस बच्चों संग प्राप्त होगी। तो क्या अात्मिक अज्ञानता दूर होगी। और लाल भरा। लाल लाल भी महाजन है और लाल। मनाने अनेक कठिनाइयों का सामना किया। यह नहीं कि आप अगर दहातमीडियोमें जुड़ते हो तो आपको कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। कई बार भगपुरसेहैहवरबनगय दीक्षा ले ली। ये दुर्घटना क्यों बीती हमारे साथ पर फैल रहा है। मारे बच्चों हमारे बच्चे बीमार के होते हैं, हम भूल जाते हैं कि हम सब का कर्मों का इतिहास है। जब हम भगवान से जुडते हो तो परिणाम घट जाता है। पर जीरो नहीं होता। तो प्लान महाराज को भगत वो दीर्ध होकर जुड़े हुए थे। भगवान की सेवा में जब वो माता के घर में थे, उन्होंने दिव्य ज्ञान प्राप्त किया था तो छोटी आयु से ही वो प्रचार कर रहे थे। उनके पिता कभी समझ नहीं पाये। मेरे बेटे को कौन ज्ञान देता है। पिता ने शानदार मर का, लाल के अध्यापक थे। उनसे कहा लगता है संत बैशनोवापेशबदलकर आ रहे हैं। शिक्षा देने के लिए। तुम लोग अपना। तुम लोग के सावधान नहीं हो और सदामरकरेगाअबराजा हो। पर हमें कल दोष। मत 2 हम भी ब्राह्मण हैं, हमें खुद नहीं समझ आता। आपका बेटा ये ज्ञान कहाँ से प्राप्त कर रहा है? प्राप्त किया। दमा लगेगा तो प्रात महाराज को भी नेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। आप सोच की तुलना मेरी सपना भी देख पहाडोगीचोटीसेब्रेका। घेरू सापों ने घेरा आती चले। रा के कृष्ण वारे के मारे, कृष्णा के तुझे भगवान बचाना चाहे। कोई मार नहीं सकता। जमाना चाहे कोई। भगवान ने फराह से हुए पूछा राज मानगो मेरे से क्या वर्चचभालगो? मेरे से क्या बर्ज? लाज ने कहा हे भगवान, सबसे पहले मुझे मेरी कठिनाई के बदले में कुछ नहीं चाहिए। मैं आप से व्यापार नहीं कर रहा। मैंने कष्ट भुगला हमे मिलना। ये हमारे मन में भावना बच्चों को भावना से पार नहीं कर। अगर आप वर देना चाहते हो तो ये वर दीजिए कि मैं सदा भक्तों की संगत, ये बहुत आवश्यक है। अगर हम अध्यात्मिक ज्ञान को अनुकूल करना चाहते हैं। साधु संदक में रहना, भक्तों की संदक और भक्तों की संगत से दूर रहोगे। नुकसान हमारा भक्ति को अपनाओगे। वह आपका लाभ है। भक्ति विधियों का पालन नहीं करोगे तो अंत में देखा जाए। नुकसान आता। तुम साधु संगत आवश्यक है। तो नारद मुनि कह रहे हैं अज्ञान दसे बद सकोगे जन्ममृद्केबंधन अज्ञान से बचो, क्योंकि जन्म अमृत के बंधन से उन्हें बचना। अज्ञान ज्ञान अज्ञान 2 प्रकार के ज्ञान है भौतिज्ञान और अज्ञान ज्ञान। भुतिज्ञान की कुछ कमी नहीं है। कोने कोने में पाच है, महाविद्याल है, पर ध्यात्मिकज्ञान की कमी है। कम स्थान है। यहाँ किया कुशल देश प्राप्त होगा? प्रापाजीअमेरिका में महाविद्याल में थे। यहाँ के प्रापर्टी ने पूछा आपके इतने प्रसिद्ध महाविद्यालय में कोई ऐसा अंग है? यहाँ के आपको ये ज्ञान मिलता है। जीवन के लक्ष्य क्या है? और कोई उत्तर नहीं दे पाया। तो ना। तो उन्हें हमें फिर से याद दिला रहे हैं। और ज्ञान से दूर बचना है। यह मिले बदले बचना है। और उपाय क्या है। पर हम भगवान, भगवान के गत होने का अर्थ क्या है? उनकी शिक्षा का पालन, यह नही हम धाम के लिए है। हम कृष्ण भगवान के भागते है। हम करे। मनमानी कार्य शणनगतहोनेकाअर्थ किया। ै भगवान के शिक्षपालशणनगत होने के विषय में स्वामी ने सनातन स्वामी को इस प्रकार से कहा, भगवान के शरणगत होने के लक्ष्य क्या है? सबसे पहले उन कार्यों को स्वीकार करो जो भक्ति के लिए क्या है। और अनुकूल कार्य के क्या उदाहरण, नाम को अपनाना, सादसकमेंरहनाशासो का अध्ययन करना, विनम्रता का भाव अनुकुल करना, यह बहुत महत्वपूर्ण है। इस लिए के तेरे महाबोब ने कहा तुरादपीसुनेचेना रोड पीचाइनाअमारीना बना देना, ना देना। अगर आप चाहते हो कि हरी नाम सदा, आपके जीप से निकले, तो क्या भाव की आवश्यकता है। इसलिए कृष्ण राज कामराज कहते हैं। ये श्लोक इतना महत्वपूर्ण है कि हमें श्लोक को गले में रखना चाहिए। दूसरे शो में सदा स्मरण करते रहना चाहिए।
तो
विनम्र का भाव हो आवश्यक है। सेवा का भाव। हम भक्ति में जुड़ते हैं, भगवान से प्रार्थना करते है, महामंत्र का उच्चारन करते हैं। महामंत्र के द्वारा। हम से क्या कह रहे है? कृपा करके हमें सेवा सेवा है, हमारे लाल, ये अनुकूल कार्य है। विनम्र भाव। कई बार हम सोते हैं। हम विनम्र भाव रखेंगे। लोग हमारा फैला उठायेंगे तो हमें शेर बनना पड़ेगा। 1 में 1 बग ने पापा से पूछा भाव रखेंगे तो विचार कैसे करेंगे? ग्रंथों में कैसे बाटेंगे? पापा ने कहा घर में में जमा का भाव रखा, बाहर शेर बोला 4 पर हम क्या करते हैं, घर में शेर हो जाते है, बाहर में मर जाते है। तो विनम्र भाव, सेवा का भाव। कई बार हम सोचते हैं। भगवान की सेवा करेंगे, गुरु की सेवा करेंगे। क्या भावना सब सब के अनुकूल जो प्रतिकूल कार्य है, उसके क्या करो? प्रतिकूल कार्य के क्या उदाहरण है? क्या उदाहरण है? जल्दी जल्दी दे, प्रजा पर ध्यान प्रवुजापरीकरना, भक्तों की संघर्ष से जुदा रहना और भक्तों की संघ बढ़ा लेना। फिर आगे यह स्वीकार करना कि परम भगवान आपकी सुरक्षा है। परम भगवान हमारे सुरक्षक है। कोई भौतिक भ अपने विचारों को भगवान की इच्छा के अनुसार रखना। अक्सर हम क्या सोचते हैं, हमारी इच्छा भगवान की च्छा होनी चाहिए। जो हवा बन गये, वो भगवान को पूरा करना चाहे। और ये है अब भक्त का विचार, भक्त का क्या विचार है? god dizarsmaydezare जो भगवान की इच्छा है, वो हमारी साहब, हमें कैसे बता, भगवान की चाह उसका क्या साधन है, इस लुक में दिया जा रहा है। भगवान के प्रति मीटर के द्वारा और शांत द्वारा। तो वादे, जब तक तुम भर्ती नहीं करोगे, तुम विराजा होगा और से ज्ञान को नहीं समझ पाओगे। पापाजी ने आज इस सा सकल के परेप्रशेलोकाकेरचन वासले में भगवती भक्ति योग, भक्ति योग्य पालन से विराग प्राप्त होता है। भारतीय में जुडते हो। तो फिर पापा जी जब अमेरिका गए, पहले साल वहाँ बड़ा संघर्ष था ने पहले इस पर केंद्र की स्थापना के कौन से शहर मे तो प्रॉपरली ने मेरे भक्तों को कहा, chand कोई नियम नहीं दिए, भगत है नाम का जाप शुरू किया। col to hftebadamemर baba swami, dont you wanted to follow some luv nem का पालन करे rapa this is मीटिंग फॉर खुद, कुछ नियम देने शुरू किया तो कहने का तात् है। ये सबक कैसे हुआ है नाम के जाप से? जब हम भक्ति युग में जुड़ते हैं, जब हम भक्ति की विधियों का पालन करते हैं, उसके द्वारा हर्दिकी शुद्धि प्राप्त होती है। जैसे श्रीमद भागवत के विषय में कहा गया है नास्ता परेश नित्य भागवत भागवती। ध्यान से ये श्रीमद भागवत को सुनेंगे। तो क्या लाभ होगा? कौन बताएगा, क्या लाभ होगा, क्या दूर होगा, मैं दूर हो भी भावना। इसलिए हमें प्रयास करना चाहिए। अब भगवत हम पढने सुनने आये तो किसी का नहीं सुन सकते। घर में पढ़िए पर भगवदम को गुर पढिए। मनी कहते है की भक्ति योग में जोड़ने के द्वारा, ये आगे मेल जो है, ये दूर होती है। इस में शीशम के सातवेशलोगमेंरगसामी क्या कहते हैं। कहते हैं भगवान वर के जो नाम
है
अत्यंत मीठे है चीनी जैसे मीठा बाद है ना लगता है आप लोगो को अच्छा नहीं लगता है। लगता है इसे लोग दाकेलियआज भगवान के नाम। चीनी जैसे मीठे भगवान की लीला है वो भी मीठे है। भगवान का जो उपदेश है वो भी मीठा है। तो क्या कारण है? हमें मीठा पन मसूस नहीं होता। थोड़ी देर आप जाप करते है तो आपको नींद आ जाती है। थोड़ी देर भागवत हम सुनते है। लीन आजादी क्या कारण है? क्या कारण है? अविद्या हम सबके पास 1 अविद्या की बीमारी है, अज्ञानता की बीमारी है। इसलिए हमें मीठापन महसूस नहीं होता। तो आप पूछोगे ये रोग पीड़ा उपाय है क्या कोई और दी है है और दी रूपा कुसमी? क्या कहते है? पहले रूप कुसामीनेकहावारी समस्या क्या है, विराग कहते हैं इस समस्या का हल कैसे होगा? तो क्या कहते हैं कौन कहेगा ध्यान पूर्वक जॉब करोगे तब जाना की बीमारी दूर हो जाएगी। तो भक्तों की संगत में हम ज्यादा है। नाम की। महिमा सुनते हैं। भक्तों की संगत में हम भक्ति के महत्व को सुनते हैं। इसलिए हमें भक्तों की संगत में रहना चाहे। तो क्या बजे रात। प्रेम में काफी नंबर 7 था। यही कहा है कि कृष्ण भक्ति के उपाय है। हमें निरंतर भगवान की सेवा में जुड़े रहना चाहिए। भौतिक समाज में कोई कार्य हम निरंतर करते हैं। अब स्कूल जाते हो, पढ़ने के लिए 23 महीने पढ़ाई होती है। फिर तो हम 1 महीने की छुट्टी है। ना सच वाले नहीं सारा सांस कूल चलता है। फैक्ट्री में जाते हो, दफ्तर जाते हो, 56 दिन काम करते हो। छुट्टी क्यूँ छोटी को हमे वो काम ज्यादा पसंद नहीं है। इसलिए हम 5 दिन बाद के जज साहब को छुट्टी। छुट्टी को क्या हो गया ह। this is this is on badly hi, clea hi to wo। तू यहाँ भगत भगवती चौदेसकरमेधोमनक का अपमान हुआ था, तो मेरी तो रोते रोते अपने माता सुनीति के भगवान को आप जंगल में प्राप्त कर सकते हो। जनकर भगवान की सेवा में लोग। भगवान का प्रश्न ये होना चाहिए। हां आप जो कि प्रॉपर जी कह रहे हैं में रत। हम भगवान की सेवा में जो है आईए। प्रॉपर जी कहते हैं हम सब खुशी की खोज में हैं। पर हमें क्या खुशी प्राप्त हो रही है। आज खुशी चाहिए। तो क्या है उपाय भक्तियों? हाई अजी खुशी के तो क्या है। उपाय के अठारहवे दिखाने में भगवान 3 प्रकार की खुशियों का वर्णन करते हैं। कौनसे हैं 7 वे शो, राज्य सिक शोक। तो राज्य सिक शोक। के में क्या कहते हैं शुरू में so क्यूंकि इन द्वारा प्राप्त हो। पूरा ध्यान मिक पहले करवा देता है, बाद में मीठा बन जाता है। और जिस लक्ष धान देखो न की। तो जब आप भक्ति में जुड़ते हो, शुरू में ब आपको नियम दिये जाते हैं। ये जा कर कडवे दिखते हैं। जमीन का पालन करे दिल वह महत्वपूर्ण है। कर रात्रि में क्रापीनादपजरा वैसे स्लो का भी उपयोग कर है। सर्व पाते भुगतान के से भगवार के नेक नाम है में नाम है तो जीवन की सफलता प्राप्त होती है। जब आप मन बुद्धि दियों का उपयोग करो। न कोई ऐसा कह सकता है। ये तो बड़ा कठिन उद्देश्य है, है कठिन प्रयास करेंगे तो भगवान से देंगे। बाबा जी कहते थे अब 1 कदम उठाओ भगवान की तरफ भगवान 10 कदम बनाएंगे। आज के लोग से जहां दमन हमें महाराज प्रचीन बरेसर के माध्यम से देखते रहे। ज्ञानता से बचो भक्ति योग में जुडो भक्तियोग का ज्ञान साधुसंग गुरु के द्वारा प्राप्त होगा और भक्तियों जोड़ने के द्वारा वैराग्य की भावना होगी। आज आप देखते हैं इस फन में हजारों भागे जो विदेशों में जिनका जन्म हुआ। जन्म तो जब से कृष्णपति अपनाई है, ई नाम के माध्यम से ध्यानिक शक्ति प्राप्त होती है। इसके सहयोग से, प्रतिकूल, कार्यों से, यह हम सब का प्यास है। अगर हम सो अच्छी साथ न रखें, ठीक समय जागे जाप करें तो सारा दिन आपका ध्यान सा ऊंचा रहता है। सच है यह जूड और मान लो आप अच्छी साधा नहीं रखो। जॉब इत्यादि नहीं रखो करो टी तो क्या सारा दिन माया के विचार आपको सता देना। ये हम सब का अनुभव है। अगर हम इन वीडियो का पालन करें। मा। जब महा चारियों शिक्षा का पालन करें और ध्यान में जीवन बहुत सरल हो जाता है तो ये निवेदन है कि हमें प्रयास करना चाहिए इन 10 लोगों के संदेश के पालन के लिए। और भगवान गीता क्या कहते है। जो प्रयास करते हैं मुझे सेवा, उनमे कुछ कमी भी हो, तो मैं क्या करता हूँ, प्रयास करोगे आवश्यक और का क्या कहना है? जो भी चीज जागने। पड़े कृष्णा भरती ह। तो कल रात को भी आपसे भरत से निवेदन किया था? कि ग्रंथों के मैराथन? हम सबको ये भी प्रयास करना चाहिए कि आप बाटने के लिए कल शाम के प्रोग्राम में कितनी गीता बढ़ी 706 सौ सो, कल रात को 706 सौ की का बडी। और तो प्रयास करो आंसर। रामजी ने ग्रंथों के वेतन की सेवा पर बहुत बल दिया है। इसीलिए क्योंकि ग्रंथों के माध्यम से लामिक जागती, उत्पन हो ती है। यह नहीं कि कुछ नाफा कमाए गए। ये जो है प्रचार का कार्य, सब सेवाओं में सबसे आवश्य। और भगवान खुद कहते हैं दान में, सब, भक्तों में, सब रुपये कौन है? कौन है उसे ज्यादा पीना का हुआ है ना। तो यह है सास का, सब इस विचार की सेवा में जुड़े हैं। कॉल में कोई न कोई मैनतौनरहताहैदोगा मैं, मैनतौनमंदिर बनाने का मेनतौन, कोई न कोई मैनतनरहाकईबार भाग। इस कॉल में तो बहुत सेवा है। ये तो भगवान की कृपा है। माया का मेनसन कितने दिन चलता है,
है
24 घंटे या 12 घंटे, 24 घंटे, मैराथौन 24 घंटे चल सकता है। 300 पैसे दे, तो भक्ति का, उसे भी तेज होना चाहिए। और जुड़ी सेवा में। और भगवान जब देखते हैं कि मेरे हर प्रयास कर रहे हैं मेरा सदेश पहुंचाने के लिए। भगवान आपको बुद्धि देंगे, क्या उदेश देना, क्या चर्चा करना, कहा जा? ईश्वर, सर्वा बूद, देश अरे, ये कौन है? आप सब से निवेदन है, इन ग्रंथो की सेवा में जुड़े है। सारे विश्व में भाग गीता जल्दी उपलब्ध प्रयास करते हैं। अधिक से अधिक मात्रा में। 1 विजन नहीं है। केवल केलिए प्रावार और महान अचारों ी इच्छा थी, उनकी इच्छा क्यों थी? मन में 1 भाव पर दुख, दुखी, दुखी लोगों को सुखी बनाना, पर असली शोध प्राप्त होगा। केवल अगरा ज्ञान को अनुकूल करें। आप सब से निवेदन है की अनुकूल कीजिये, ज्ञान की महिमा घर घर जाकर। जब ने हरिदास ठाकुर से कहा जा घर घर प्रचार, बोलो कृष्ण, बाजु कृष्णा को कृष्णा से, तब घर में जाकर लोगों से, तो कृश्णागनहमलोकृष्णा की उपासन कृष्णा, शिक्षा, शिक्षा का प्राप्त होती है। लोग भी भी हमें घर कर जाना चाहिए। और हां, आप जो कारगर मंद्र से जुड़े हो। आपको इन 3 देशों की जा जल्दी से बंदर बनाओ, बंदर को निर्माण, जल्दी होना चाहिए। तो महा प्रभु के आदेश के अनुसार हर शाकर घर घर जा रहे थे। कई घरों में उनका बड़े उत्साह से स्वागत हुआ। लोगों ने कहा, संत महात्मा आ गए हैं। हमारे घर को पवित्र बनाने के लिए।
बोलिए।
हम अभी क्या सेवा कर सकते हैं? वो क्या देते हैं? वो, वो क्या देते है? हम जरूर भर राम करेंगे। कई घर में हो गए। लोगों ने उनको देखते ही कहा, अरे, ये तो निमाई के प्रतिनिधि हैं। खुद भी पागल हो गया है। हमें भी पागल बनाने के लिए। यह आदमी भेज रहा है। सी उडादे कई घर में गए। तो ने देखकर कहा, हाँ, लगता। है, ये जासूस है। संतों के सन्यासी के कपड़े में देखने आए हैं। हमारे घर में क्या सम्पत्ति है, वे लौटेंगे चोरी करने के लिए, तो यह आरोप किसको दिया जा रहा था, किस को दिया जा रहा था।
और
कई घरों में, हम उनको अन्दर नहीं आने देंगे। क्योंकि जब हमने प्रयास किया शिवा जंगल में प्रवेश करने के लिए, लीला प्राप्त करने के लिए, हमें अंदर आने भी दिया की जब महाप्रभु अपनी अनभूलवीलाप्रकट कर रहे थे, शीवानंगनमेंकेवलू के प्रसिद्ध भक्तों को अंदर आने की सुविधा दी थी, और इस प्रकार का व्यवहार किया था किस के साथ हदासहोने, वह हमारी क्या स्थिति है। इसी प्रकार का अनुभव है। आप जब प्रचार जाते हो कभी, तो कहते हैं हाँ आ गए क्या भाग्य है हर साल आ जाते है कितने के बारे कि गीता हमें लेने so so कई साल जाओगे, हर साल आ जाए। तो ओवर कम धन क्या तुम्हे क्या कमीशन मिलती है और बोला है कमिशन मिलती है कैसे भगवान की कृपा जो अरबो रुपये से नहीं खरीद सकते है। तो हमें कई दरवाजा भी शायद नहीं खोले। हमे बुरा नहीं मानना चाहे जब नितिन खरीदा ठाकुर के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता। हमारी तो बात ही छोड़ है कि नहीं। तो हमें देर हो कर इस मैराथन की सेवा में जुड़ना चाहिए। सब तैयार हो आप भक्तों के लिए। 2 मैराथन है 16 हफ्ते की गीता के और दूसरा मेरा धन क्या है? हा हा ये भी आपने करता है तो सब जुड़े इस रोग में और दामन है कृश्ण? question ka जल्दी जल्दी मुझे जाना है,
जो देना है जनता के कारण रितु जगह में फंसा रहता है और हवा से करने से ज्ञान और वेरा प्राप्त होता है। 1 अजीब जगह किस प्रकार का वर प्राप्त करना है,
गलाम किस प्रकार आ गया? भगवान यही कहते है अच्छी ही जम कपड़े आगे करो, जो गल्तहीलेहैं उन से बचो, जो गलत काम है, जो प्रतिकुल काम है, उन से बचो। मेरी कहते है प्रायरी करो, नौकरी करो, धनानी करो और जो कोई भारत कार्य का उद्देश्य स्कूल कार्य है, उनसे क
हरीश
जी की टेक्निकली कंडीशन सोर्स मतलब क्या होता है? व जी कंडीशन हम सब हरियाणा में, भालिक संस्थान में जन्म मृत के चक्कर में फंसे, कभी किसी रूप में, कभी किसी रूप में, तो ये कंडीशन शो हैं, ये अनकंडिशन बन सकते हैं। जैसे आपको जेल की सजा है, राकडीएलमेंयहा अच्छा व्यवहार करोगे, तुम छूट भी सकते हो, उसी प्रकार हम सब बची है। तो भगवान की शिक्षा का पालन करके हम इस कठिन थिरी से मुक्त हो सकते हो। वह है सासद संदेश। a be shoping now if not erymorquestion
होते
है तो कैसा बीता है? 2 प्रोबलम 1 र गीता किसी और को बाट, 2 किसी और को भेट के रूप में, 2 की नहीं आज किसी और को बाट दे। 2 लोग कहेंगे क्रिस्टन और मुफ्त में बाइल बाटने तो मुक्स में क्यूँ नहीं बाटे। लोग कहते हैं कि अगर हमें मुफ्त में किताब मिले, हम खुशी से मुख में बढे, पर हमें आखिर का पेमेंट देना पड़ता है। पर आज का भाव थोड़ा बढ़ गया है। उसका कारन पता क्या है जी एस टी की कृपा हमारे जो छापने वाले हैं उन्होंने बिल बढ़ा लिया। जिनसे हवा पेपर खरीदते हैं, उन्होंने बिल बढ़ा लिया। हम क्या करें ओके थैंक यू हाय कृष्णा हाय क्रिश्ना हार किशना क्रिश्ना हारे हाहे नमाराहलेहाले।
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