जैसी होगी इच्छा परमात्मा देंगे वैसा शिक्षा |SB 4.29.50 |19 Mar 2018 |Kharghar |Gopal Krishna Goswami

Gopal Krishna Goswami explains that God grants education matching your desires: true learning comes through devotion and hearing scripture, not worldly knowledge alone. Krishna acts as the devotee's best friend, guiding them toward liberation when their wishes align with God's will.
Chapters
मारी
हाई कृश्णा भक्तों का हालिक स्वागत ओम नमो भगते वासुदेवा व देवा भगदेसुवाओेवसदेवa भगदेवा। and for capret twenty nine ज्यादा कमजोर हो रहा है harihmsmasmasyam ईश्वर पादामलमकनम ataamonhाआईबतम आतमा स्वयं प्रगति ईश्वरा रजपदामुलमशनशेमोन mahatma smswrाcपदmuलम महातमा ईश्वर खुदा मुलम लगाये बोलना मिया
हर आत्मा अरियावना आतमा अरे आत्मा या बिना आत्मा स्वरा बाद मोलम राम बिहार
लाये हो
अरे बो
हे माता जीज सा
सराहे ा
या रहा
या रहा था
शब्द
हरी श्रीनी मेरा मिला में निर्धारित जीव का आत्मा आत्मा परमात्म स्वयं स्वयं परविदी मोदी पर इस ्वरकीशरानियम का उसका पारमोलममपाम शरणम चलन यथा जिस से सेवा सभागनिरमुरुशोका यहाँ इस संसार में भगवान की हरी, इस संसार के समस्त निधारित जीवों के परमात्मा प्रथा, प्रदर्शन ए प्रकृति के समस्त भौतिक आयु के कम नियामक है। वे हमारे देश सरथा तथा प्रत्येक बेटी को वजलअमूकीसरलरहोनी चाहिए। ऐसा परवेज जीवन में हो जाएगा। भगवान से हरी संसार के में समगदिहारिजीवोके परमात्मा तथा तथा प्रदर्शन में है। प्रकृति के समाप्त भोतिकारियोंके पर नाम में है। ये हमारे सरे शाखा भी नहीं है तथा प्रत्येक व्यक्ति को इंतजाम सरल परीचाहिए ऐसा करने से, ऐसा करने से जीवन जीव कल्याण नहीं हो जाएगा। पर भगवान की नवोदिता में कहा गया है की श्रासगुतारामहदकी सदी परमेशर हमारे ह्रदय विधित है। जीवात्मा शरीर के भीतर है और प्रमाता भी वही है। अत अगामीनथाजैतगुरु पढ़ाता है। जैसे भगवान की विश्व वभधितापंद्रह दिलाई पंद्रह में पढते है, वे हर 1 पद के नियंत्रण नियंत्रण करते हैं। समझा, मधितीजानहोहंचा, मसकानोकेबैटाहूँ और मुझी से। इस फिल्म की ज्ञान का हर पारी जरी के भीतर इसी प्रमाता द्वारा निर्देशित है। अतः लोग भी उनका देश राम भर लगा जाए। उनका आगे करने के लिए भंग होना आवश्यक है। इसकी पूरी भविता दसवां भादस में ली हुई है। देश सदेवताकाभतामीूरववम दानी पूरी होकर संकेलमामब्याजले जो भक्ति परायण है, अप्रेल पूरक करते हैं, कुल पुरी देता है, जिससे वे मेरे पास आ सकते हैं। यदि प्रभावना प्रदेश प्राणी निर्देश में है। ईश्वर जरभतानविलसतीयतवा केवल उन्ही भरतों से बात करता है जो उसकी सेवा में नियंतर लगे रहते है। इधर भागवत में अंक विधा हिस्सा अध्याय पैंतालिस मे कहा गया है तहाऐसेबढ़ीविद्या मंत्र अभियान पाल पदने 1 करायसीमन। जिसने किस के पास पदों ने अपना मर्ज कर दिया है, सबसे भी उसने सिर्फ विद्या परा कर ली है और सारे वेद का ध्यान कर लिया है। इधर भारत में अन धरण भी जू है। सेज से विद्या होना, विषय से से विद्या होना जारी नही चाहा यूज जिंदल राय शिक्षा का उल् है कि अनकोविशकेपलोमे लगाया जा। दिकविजकरीबविज्या कार्य नए ईश्वर बडीलेसेविज्यास रहे। भौतिक शिक्षा द्वारा संसार लेना आश्चर्य नहीं है। यदि मनुष्य अपने को अभी लगाता है तो उसकी शिक्षा साधन बड़े। केवल लोक किश्भतीगानीवार से दी दहीददबेविद्याभी करे। शिक्षा का उद्देश्य दान। दी भरना हे। यदि मैं ऐसा नहीं करता तो उसकी शिक्षा जूझी है। कहा से बड़ी धर्म कर्म। 4 ईश्वर से पिती दर मे समस्त सवाल सुसुसितशिक्षित सक्रिय धारी होने का है। इस के लिए सुहारीपेविजित करना प्रत्येक व्यक्ति किस के लिए प्रचंड पे रहता है और उसे द्वारा दलित करना होता है। इस बनाने आंदोलन का ही देश है। 1 बार हुआ चित दे राहुल राय कृष्ण का इस शिक्षा का काम किया है। तो उन्होंने उत्तर दिया कि की चिता
में समझ सना ध्यान से shgetamnoesndhm siguraीग यह हर हर कमसाहीयह
हे
डाक्टर कतना गौरानी ये
गे
हां यह भारी आएगा hi kishna हइ देह रितम आत्मा स्वयं प्रगति ईश्वरा सतपदा मूलम शरणम sa नमूने कर रहे है। और मूली वहाँ प्रचीन बारी को बेचते और पिछले 45 अध्यायों से पुरंजन की कथा सुनते आए हो। 1 रूप से हम सब पुरंजन है। आज प्रतिनाभाईयुडेथे बड़े राय के साथ इंद्रा कार्य में जब नाद मुनिन के महल में आये है, भगवान के जो भक्त हैं, आज कल के नाल मुनि, उनके मन में 1 ही भाव होता है। पतितों का उद्धार कैसे किया जाए? और नाल मुनी यही सोचते रहते हैं। कैसे पतितों का उद्धार हो? ना मुली थे कैसे महाराज उन्होंने 1 एरेगॉरिस्टोरी सुनाई महाराज पुरंजन पुरजन हम सब महाराज पुरंजन है, क्यूँकी पुरंजन का है जो कि बोधि का योग। तो इस अध्याय के आर में पसीना बाई ने कहा आपका ज्ञान भी समझ तो आया है, आपका ज्ञान समझ आया है तो पूरी तरह समझ नहीं आया। छिप करके और गहराई के साथ शुभ देश के लिए तो भगवत हम देखते है। जतपातनेशिक्षा ली ने शिक्षा ग्रहण की, फिर कहा कि मुझे और गहराई के साथ ये देश दीजिएगा। तो इससे हमें क्या शिक्षा मिलती है? कि अगर हम इस दिव्य ज्ञान को समझना चाहते हैं, हमें बार बार सुनने की आवश्यकता है। यह नेकी 1 बार सुन लिया। तो हम समझाएंगे कई बार भक्त कहते हैं। जो हम पढ़ते हम भूल जाते हैं। तो इसके लिए क्या है? निरंतर? पढ़ते, रहो, ns भगवत, सेवा, भगवती, उत्पल, शोके, भक्ति, भगवती। कई बार लोग कहते हैं कम बुली। इनकी क्लास में 1 ही संदेश मिलता है या खराब है। भक्ति सुंदर है, चाहे कोई भी उपदेश दे रहा हो। हाँ संक्षेप में आप चाहे प्रंजजपंजनकी कथा पढो जद भारत का उपदेश पढ़ो आपको संदेश 1 ही मिल रहा है। भर्तियों के अलावा हर कार्य कमाए केवल माना जाता है। रोज 18 हज़ार लोगों का निर्णय क्या है? शुद्ध भक्ति? तो नाद मोनी बड़ी गहराई के साथ भक्ति, योग और परम भगवान के विषय में ज्ञान दे रहे हैं। पुलिस इस लोक में क्या कह रहे हैं? शहरी जो हैं वो परम भगवान है। ईश्वर, फार्मा, कृष्ण, रानी, राम है, गोविंदा केवल भगवान नहीं। plmbgvanagol भगवान शब्द आज के वातरा में बन गया यह परम भगवान और ये है शासन और भगवत। गीता में भगवान अश्विन ने क्या कहा? आप भगवान, ये मेरा नहीं, सीता, ना दे, प्यार सब मुनि 1 बार फिर से यह साबित करे। यह परम भगवान। वैसे तो भागवत में ना बुनी भगवान बुलाया गया है। ब्रह्मा जी को भगवान बुलाया गया है। क्योंकि वो परम भगवान के संदेश रूप प्रस्तुत कर रहे है। इसलिए उन्हें भगवान जा लाया जाता है। पर श्रीहरी कौल है? ये परम भगवान है, ये है, ये शासन निर्णय है, यह है, वो है। परमात्मा के रूप में वो प्रदर्शन है। वो हमें उद्देश्य देते है, ये जो श्लोक कतार आपने सुना होगा कि तातप्रेप्रपजी ने 7 लोगों का उपयोग किया है, 7 और 45 लोग हैं के दिन भगवते उन सब का निचोड़े की है। असली शिक्षा क्या है? भक्ति का ज्ञान? तो परम भगवान है, वो असी प्रदर्शक है। और जो व्यक्ति बहुत प्राप्त किए उनको भगवान बुद्धि देते हैं। तो भी यह कहा गया है प्राण प्रदर्शक हैं। और हिंदी में विराज मान परमासभाकेरूपमें तो क्या कारण है? 1 व्यक्ति को शिक्षा देते हैं, यह भगवान की शरण में जाओ दूसरे को प्रेरणा देते हैं। भूलो भगवान को। 4 व 4 हिंदी सानवोमताहासज्ञान भगत गीता में भगवान कहते हैं कि मेरे द्वारा ही तुम्हारी शक्ति आती है। उपहान मेरे द्वारा ही भूलने की शक्ति भी आती है। मैं आर के हृदय में मैं राजबान हूँ। परमात्मा के रूप में, चेतक, गुरु के रूप में अंतरिम। जिस प्रकार अगर आप 1 बगीचे से गुजर जाते हो, सोने से आप पहचान लेते हो, कौन सा फूल है तो उसी प्रकार भगवान जो की क्षेत्र गुरु परमात्मा अंतराल में उपस्थित है। हमारे में इच्छा के अनुसार हमें शिक्षा देते हैं। इच्छा के अनुसार अर्जुन ने कहा, दूसरी दहाई में में आप के शरणागत होता हूँ। और ये मान लीजिये। भगवान ने इसके पश्चात उपदेश देना आलम किया और हर अध्याय में पूछा, क्या तुम्हें यह ज्ञान तब दूर हो गई है? जी ने क्या कहा, अभी के अंदर दूर हो गई है और मैं मोह से मुक्त हो गया हूँ। अब मैं आपके आदेश का पालन करने तैयार हूँ। भगवान ने कहा करो, जैसे ठीक लगे तो भगवान ने आप सब को छूट दी हुई है और उसके अनुसार भगवान हमें मान दर्शन देते हैं। जिनकी इच्छा हो कि हम भगवान के शरणागत होना चाहते हैं, उन्हें उसी प्रकार उसी प्रकार की बुद्धी प्राप्त होती है जैसे अगर हम देखे कि हम कैसे जुड़े, कृष्ण भक्ति के साथ। तो आप देखोगे कहीं जुड़े? क्योंकि किसी ने निमंत्रण दिया, कहीं जुड़े, क्योंकि किसी ने उन्हें दिया, ग्रं पढना आरंभ किया, उसके द्वारा ध्यानिक जागती, उत्पन हुई। तो ये माध्यम बन जाते हैं। और जब आपके हृदय में इच्छा हो, भगवान कृष्ण ने भगवान उसी प्रकार की बुद्धि दे दे और जो भूलना चाहें उन्हें भी भूलेंगी शक्ती दे दे। आगे कहते है नानी वो हमारे असली मित्र हैं। भगवान आपके असली मित्र हैं। तो भौतिक समाज में आप मित्र कैसे मानते हो? कैसे मानते हो? ha mitra, जो हमे इंडिया तितर की मार्ग में सहयोग दे, हमारा mitra, जो हमें बहुतिक सुविधा प्राप्त करने में सहयोग दे। और यह नहादमुनीकैसे हैं। पर भगवान आपके सबसे प्रिय मित्र है, सबसे प्रसिद्ध मित्र हैं। भगवान कहानी कहते? bodiinidilyurop कहते महाकोता? तो परम भगवान हमारे असली मित्र हैं। क्यूंकि वो हमें शिक्षा दे रहे है, क्या ज्ञान दे रहे हैं, जिसके द्वारा आप असली सुख प्राप्त कर सकोगे। ठाकुर भी जी ने अनेक सुंदर रचनाएं दी हैं। अगर भगत को क्षेत महा प्रबुद्धि की दिवि शक्ति माना जाता है और उन्होंने क्षेत महापरब के असली संदेश को ठीक रूप से प्रस्तुत किया और कई प्रसिद्ध रचनाएं की हैं। ग्रंथ लिखे हैं, नगर निर्णय है, वहाँ प्रभु तो 1 प्रार्थना है, उनकी जीव जागो, जीव जागो, घोडाचनरबोले जा। वो कहते हैं कि क्षेत्र महाप्रभु हम
सब को
जगा रहे है, ये शिक्षा है। tmaतुमनालीकासे भौतिक, कार्य में जुड़े हो, अब हम आगे और आगे। वो कहते हैं हमे बिना बंद ना, हे मे लावा तुम्हारा और कोई असली मित्र नहीं है। तो असली बंधू असली मित्र वो व्यक्ति है जो की आपको उपदेश देता है जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए। और यहाँ न नगरी कहते हैं कि फल्म भगवान जो हैं वो आपके सबसे फिरसे भक्त है। बेस्ट फ्रेंड, बेस्ट फ्रेंड, school me the hoga, my best friend hai best friend स्वीकार कर, krishna is my best friend, then you know what krishna want you to do। तो पल भगवान हमारे और असली मित्र हैं। और इसलिए इनकी जो शिक्षा विधि प्राप्त होती है, उसके आधार पर हमें चलना चाहिए। और आगे कहते हैं क्या वह हर व्यक्ति को उन के शरणागत होना चाहिए? भगवान गीता के पश्चात क्या कहते हैं माँ में में, हम तो सर को छोड़कर, मेजर में आओ, मैं, तुम्हारी सुरक्षा करूँगा, घबराओ मत। तो यह है असली मित्र का संदेश कि हमें भगवान के शरणागत होना चाहिए। भगवान के शरणगत होने का अर्थ क्या है? उनकी शिक्षा का पालन, नाम के लिए शर्त होने का कोई खराब नहीं। जब हम उनकी शिक्षा का पालन करें और आप पूछोगे, उनकी शिक्षा कहा प्राप्त होती है? रामसुती कहाँ ग्रंथों में में, भागवत में कहा गया प्रसंसक भगवान लोग हैं, उनकी जो वाणी है, कहाँ हैं श्रीमन भगवन? दूसरे शब्दों में, वाणी और भगवान में कोई अंतर नहीं ै आप भागवत में पढ़ते हो कि विश्म देव को ये वर प्राप्त हुआ था कि वो चुन सकते थे अपने शरीर त्याग में है। तो विश्। तो मे पर भगवान पांडव भाई देखा, सब वहाँ उपस्थित है। और भगवान के चरण का दर्शन करते हुए उन्होंने कहते है अगर हमारा सौभाग्य हो जीत भगवत नाम सुनते हो को त्यागे तो आपको वो ही लाभ मिलेगा जो बल प्राप्त हुआ को त्यागा। भगवान के जल का समान करते हुए क्यूँ क्यूँकि भगवत वाली भगवान को यंत गीता के संदेश और भगवान में कोई यंत्र है, ना भगवान में कोई अंतर। कई बार लोग पूछते हैं ही नाम का जाप करते भगवान नामों में कोई नाम चिंतामणि चेतनराज पूर्ण में नाथ नाम नाम है। भगवान के जो नाम हैं पर पर चेतावनी के सवाल और भगवान से अभी है। तो यहाँ नादी भगवान तुम सबसे प्रसिद्ध मं। तो हमें ये कभी भूलना नहीं चाहिए कि परम भगवान हमारे सबसे प्रसिद्ध मित्र हैं। इस में भगवान कहते हैं माता, पर दस्ती जाए भी भगवान कहते हैं कि मेरी वाणी से ऊँचा और कोई वाली और कोई सब्जी है, ये सबसे ऊंचा सत्य है। तो जब आप यह स्वीकार कर लोगे, पर भगवान हमारे शुभ चुनक हैं, वो हमारे असली मित्र हैं, ये भी स्वीकार करोगे, उनका आदेश है, वो ही है। असली आदेश ये नहीं कि जो आपका मन कहता है, ये नहीं कि जो आपके भौतिक है, जो कृष्ण ने प्रतिनिधि द्वारा संदेश देते हैं, वो ही है असली संदेश। तो अगर हम पर हम भगवान की शरण ले। नामनी क्या कह रहे हैं? अगर आप परभाबालकीशरणलोगे तो आपका कल्याण हो जाए। ये है असली शुभ कार्य। तो प्रपातो प्रा जी तादपरेमेंरसेसलोकों का उपयोग किया है। दसवीं में श्लोक है कि शाम का नाम दान बुधि भगवान कह रहे हैं, जो कि सदा मेरी सेवा में रहते
है
और जो कि प्रेम के साथ मेरी उपासना करते हैं, उन्हें मैं बुद्धि देता हूँ, जिसके द्वारा वो मुझे समझ ले। तो अगर हम भगवान को समझना चाहते हैं तो इस लोक में क्या कहा गया है? बड़ा प्रसिद्द लोग है दसवे दिहाई इस आंसर को जो प्रेम और भक्ति के साथ मेरी सेवा में जुड़ते हैं, उन्हें बुद्धि देता हूँ। जिसके द्वारा उम्मीदें समझ सके। क्योंकि जब आप भेमऔरभक्तिके साथ सेवा में जोड़ते हो तो इस सेवा के माध्यम से आपका शुद्ध हृदय शुध बन जाता है। जैसे वह बहू ने शिशासयकेेक्या प्रभाव कहते हैं में भगवान के 2 नाम हैं, चीनी जैसे बीते है, भगवान के जो लीलाएं हैं, चीनी जैसे बीते हैं। पर हमारे जीव में क्यों की और विद्या की बीमारी है। हमें मीटर पर महसूस नहीं कर सकते, थोड़ी देर जाब करती है और नींद आ जाती है। वह बड़ी कठिनाई से जॉब करने में भी मन को लगाते है, पर रोबगसमेंआगेकहते हैं हम है नाम को ध्यान से लेंगे तो यह विद्या की बीमारी दूर हो जाएगी। और फिर आप भी नाम का मीठा पान मसूर होगा। और जैसे की हम सब का व्यास है जब आप शुरू में भक्ती में जुड़ते हो, आपकी बहुत कम रूचि रहती है। और फिर समय के साथ जब आप जॉब करते रहते हो, साथ पढ़ते रहते हो, रूची भी पढ़ते जाते है। इस लोक के तारपले में पापाजी ने चेतन भगवत के 5 प्रतिशत श्लोकों का उपयोग किया है। जिन के द्वारा 1 संदेश दिया जा रहा है। वो संदेश a real education is noleg about desialsevesesisa hawa? शिक्षा, जिसके द्वारा अब भगवान कृष्ण नगर हो जाओ। इसलिए भगवत गीता के नौवें अध्याय में भगवान क्या कहते है? this is the king of education होगे? how is the किंग ऑफ एजुकेशन a m smake ication? असली द्वारा आपको ये शिक्षा मिल है। भगवान आप कैसे असली सुरा जो शिक्षा को पांचला महाविद्यालय में मिलती है, जिनके द्वारा संदेश क्या है? जीवन का लक्ष्य भौतिक शो के लिए वो असली शिक्षा नहीं है। मेरी यह के लाभ था और यह भूलो मत। that is not be an education, education is a son की समापति में ramnandrroyऔर महा प्रभु की बरसात में चर्चा करते हैं कि जिन महा मूल है। पर सिर्फ भगत सर वो बचाया, क्योंकि बहुत ही उच्च पूरी माया वाली थे, उनको वैठना बनाया जिसके पश्चाद उन्होंने उनकी या और उनकी इजाज़त लेकर दक्षिण भारत की यात्रा शुरू की। जब वो दक्षिण भारत की यात्रा शुरू कर दे थे तो सब चाय ने उनसे कहा, दक्षिण भारत में आप प्रसिद्ध भक्त को मिलोगे जिनका नाम है और उनको मिले गुलाबी के तट पर जिस हाल में रामजंद्र रॉय और चेतन माकोतो बरसा हुआ उलiसाscoनकबड़ा sुndrmnतोrामnn वैसे विशाखा के अवतार माने जाते हैं। वो उस समय मद्रास के राजपाल थे और राजा था मयाजपपुद जो कि बहुत ऊँचे कोडी के चेतन महापुरान तो उन्होंने उनसे अनेक प्रशन पूछे हो। भगवान के प्रशन पूछ रहे हैं, विश्मदेशकोत्याग थे भगवान ने से कहा पूजो से क्या होना चाहिए जीवन गलत? भगवान ये बताना चाहते थे मेरा कठिन स्थिति हो? जल की बुद्धि तेज ग। हमने देखा कि पर पर अपने अंतिम दिनों में रंतमअनुवादरहालांकि बोती में था और उन्होंने अनुवाद किया भगवान बता रहे हैं उन प्रसि हर स्थिति में तैयार रहते हैं। तो महापबूने अनेक प्रश्न पूछे जिनमें 1 प्रश्न था जिसका वर्णन किया है वह इस रेल ेजुकेशन असली शिक्षा किसे कहते हैं? असली ज्ञान किसे कहते है? और रामनंद रॉय ने कहा असली ज्ञान वो है जिसके माध्यम से हम भक्ति योग है तो इस्कॉन संस्था के द्वारा भक्ति योग का ज्ञान प्राप्त होता है। हमें यह नहीं सोचना चाहिए this is सेnटimentl ये सिखा रहे हैं केवल घंटी बजाना मन है, ये ऐसी शिक्षा दे रहे हैं। अति सुख कैसे प्राप्त कर सकते हो? और किस प्रकार आप जन्म मृत के बंधन से मुक्त हो सोच केशन तो यह असली ज्ञान, यह ज्ञान प्राप्त करना और भगवान कैसे हो सकते है? 1 और प्रश्न पूछा कौन सा गीत हमें सदा गाना चाहिए और रामनंद रॉय ने कहा कि हमें वो भी करना चाहिए जिसके द्वारा परम भगवान का गुणगान हो। वो किसमें है ये गीत को 24 घं की है और आप कवि खरोगेभीमकृष्ण? आगे उन्होंने पूछा इस संसार में सबसे अधिक कष्ट कब प्राप्त होता है? भक्तों की संगत से जुडा हो जाना this the most pedpolexperiयenस। भक्तों की संगत से जुदा जाना, ये है सबसे दर्द तो हमारे मन में इस पेशे पर शंका नहीं होनी चाहिए। ये जो ध्यान है इन ग्रंथों में, ये केवल थ्योरेटिकल दिया है साइटिक और हमें ज्ञान को पुल करना चाहिए। इसलिए प्लान महान ने कहा है com जनम व 5 साल की आयु से गति ज्ञान करना, आराम क्यों उन्हे बड़ा है और आज समस्या क्या है मन क्या प्रमाण है तुम्हारा वास आत्मा का ज्ञान 2 क्या क्या प्रमाण है मारा प्रमान है शासन का ज्ञान, मादाद्वारापिता का ज्ञान प्राप्त होता है, कौन है शाम द्वारा ज्ञान प्राप्त होता है कौन है? तो हमें ध्यान से भागवत को पढ़ना चाहिए, सुनना चाहिए और ये है असली ज्ञान और हम रहे बोधि ज्ञान को अनुकूल नहीं और बोध ज्ञान के साथ बोधि ज्ञान तेरे अधूरा माना जाता है। और बोधिज्ञान के साथ अगर आप अध्यात्मिक ज्ञान जानकर करोगे लाज रियल एजुकेशन तो ये ज्ञान भी बोल है। तो आज के इस शोक में ना लगली भगवान के नेक गुणों का वर्णन किया है और ये साबित किया है कि ये आपके सबसे prsitryourbestfriend कहवाद से ये सोज shoru my best friend, s krishna every far wo सुखी रहेगा hykrsnaकoypeson any quesion है भूले से भी क्यूँ लोग कहते है भगवान ने माया बनाई है हमारा क्या दोस्त माया होती नहीं तो माया भगवान माया बनाई है। तो इसका उत्तर क्या है भगवान ने हम सब को छूट दी हुई है येस येस सिटिजन ऑफ इंडिया, you have fred। सरकार के नियम का पालन करो या न करो, अब नौकरी कर दे तो आपको छूट है, ठीक करो तो 1 नतीजा मिलेगा, गलत करोगे तो और नतीजा मिलेगा ये हमारी छूट है हम भगवान के घर हो सकते हैं उन्हें भी हो और जब भगवान देखते हैं इस व्यक्ति भी श्रद्धा है, भाव है थोड़ा आकर्षित है माया के प्रति अगर छाला हो तो वे भवान बौधिक आगे को युविदसीतोड़देते है सब चीज सुविधा को ले लेते हैं जिसके द्वारा भाग उनके ऊपर पूरा निर्बर हो जाएगा ओके और geeseoetek jan ha yes
मे है कुछ लोग
ये करते की बहुत जादा
खुश
तो
क्या क्या जाते बहुत तो कहते है की कृष्ण भक्ति को बोली मैं आपकी मदद करूँगा
सबसे पहले अनेक देवताओं के द्वारा ब्याज देगी द्वारा यह स्थापित हो गया है कृष्णा भगवान सोया किशन भगवान परम भगवान और भगवान कहते हैं मेरे में में शिक्षा का पालन कर रहा हूँ क्यूँ ये परम भगवान है उन्हें बोलने का है कहते हैं कि जो देव की उपासना करते हैं उन्हें इतना मिलता है जो बेटी उपासना करते है उन्हें अलग मिलता है तो भगवान स्पष्ट करे यहाँ की देवता देव यहाँ तो देव की पूजा मेरा देवता के पास जायेगा मेरी पूजा करेगा वह मेरे नाम में आएगा भगवान हमें स्पर्श रूप से समझा रहे हैं कि क्या लाभ मिलेगा इस बार के लाभ भगवान ये करे यो भी मारक पकड़ोगे 1 स्थान है यही था आपका प्रश्न कि रेलो में स्पष्ट स्थापित हुआ है पर भगवान का परिचय भगवान कौन है हम किसी श्रद्धान व्यक्ति, देश पर नहीं मानते गोहलादिपरुसममामहा मजा प्रापा समय अपना नया हराम किया करते हुए we are we the real go in the real god not as god हम असली भगवान को पा कर असली भगवान कहते है में मान ना चाहे हमारे भाई okay okay year talk on word ke 11
हे ईश्वर से बीजने
चतेनमरीताीआप कहाँ से कोर्ट कर रहे हो फिर से बोले अच्छा हाँ हाँ समझ गया की by the is culture कोई आदमी अच्छे कपड़े पहने sut गली में goma he the gentle man very culture we, but the erculcadmanis not on a way the night shot culcadmaninono understand the bosons god of life so e bda gentleman है क्यो अच्छी गाडी coti care gentleman who had, जो कि भगवान के शर में आना चाहता so this was is saying culture educated means अnderstanding whotinmydouty to gomenपराबजी कहते थे उदाहरण देते थे 2 जीरो साल जीरो no meaning so be adetigeronand ten hundred thousand so without speritoleducation the till education simply som imply so one must galtyaspertial education sid sid okay so thank you in।
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