नित्यानंद प्रभु की मधुर लीलाएं | SB 4.30.36 | 2 Feb 2018 | Ekachakra Dham | Gopāla Kṛṣṇa Goswāmī

The lecture is a devotional discourse centered on the divine pastimes (līlā) of Nityānanda Prabhu and the transformative power of chanting the holy names of Narayana/Krishna. The speaker repeatedly emphasizes that sincere nama‑sankirtana liberates the practitioner from material karma, brings inner peace, and leads to the ultimate state of Nitya‑Ananda (eternal bliss). The talk explores the role of sannyāsīs (renunciates) in the Vaishnava tradition, praising their devotion while warning against equating ordinary humans with the Supreme. Scriptural verses are quoted to support the view that Narayana is the ultimate refuge and that every devotee is a temple of the divine, yet true reverence requires humility and surrender. Several narrative anecdotes—such as thieves attempting to steal ornaments, a brahmana’s moral dilemma, and various encounters with divine protection—illustrate the consequences of material greed versus bhakti. The speaker also highlights the importance of the guru‑shishya lineage, invoking the blessings of Shri Gurus and describing how their guidance shapes devotional practice. Practical instructions are given: frequent chanting of “Hare Krishna, Hare Ram,” service to the deity, and avoidance of ego‑driven actions. Throughout, the tone remains reverent, enthusiastic, and instructional, aiming to inspire listeners to deepen their devotion, adopt the practices of Nityānanda Prabhu, and seek the grace of the Supreme.
Chapters
विश्वाते वासु देवाई होमनमोभगवतेवासदेवाया होमनमोभगवतेवासदेवाया होमनमोभगवतेवासदेवाया होमनमोभगवतेवासदेवाया हुमनमोभगवतेवासदेवाया हुमनमोभगवतेवासदेवाया हुमनमोभगवतेवासदेवाया हुमनमोभगवतेवासदेवाया हुमनमोभग�
अध्याय
का
शीक्षेक है प्रचेताओं की क्रिये हैं यत्रनारायन ताक्षा भगवान्यासिनांगति संस्तुयते तत्कधासु बुत्तसंगे पुनह पुनह यत्र चहाँ पर नारायना भगवान नारायना साक्षात भगवान नयासी नाम सन्यासियों के गति संस्तुयते मुझे जाते हैं सत्कथासु दिव्य द्वणि की चल्चा द्वारा मुक्तर संगेव उनके द्वारा जब भौतिक कर्मस से मुक्त हैं पुनहः पुनहः बार बार अनुबात एवं तात्परेश्र एसी भक्ति विदानत स्वाहि ब्रहुपार द्वारा भगवान नारायन उन भक्तों की भी जो उपस्थित जो उनके पवित्र नाम के श्रवन और कीवतन में सालगन हैं। भगवान नारायन जो हैं सन्यासियों के अंतिम गती हैं और भगवान नारायन के आराधना संकीवतन आंदोलन द्वारा उन विक्तियों के द्वारा की जाती हैं जो भोतिक कर्मस से भुक्त हैं। वस्तुत वे भ वो मिठ्या रूप से अपने आपको नारायन मान बेटते हैं। मायाबाद्यों सन्यासियों के अमिसार एक दुसरे को नारायन कहा जाते हैं। यह कहना कि हर एक विक्ति नारायन का मंदिर हैं यह तो सही है। लेकिन दुसरे मानव को नारायन के बराबर मानना यह बड़ा � उनको भी नारायन के समान मानना एक अपराद माना गया है। यस्तु नारायनं देवं ब्रह्म रुद्राजि देवतः समत्रेने मविक्षते सप आर्शनन्दी भवेत्रों। जो वेक्ति बग्वान नारायन को ब्रह्माजी और शिव्ये से देवताओं के समान समश्चता है वो कल युग में भगवान नारायन चेतन महाबुर्थ के रूप में आयी चेतन महाबुर्थ के बारे में भगवत में एक शलोक है कुष्ण भर्नम कुषा कुष्णम संगो पांगाश क्रपार शगन यग्य संकीत नप्राये यजन तिही तुवे दिशा इस कल युग में बुद्ध जो कृष्णा का नाम सतत गा रहे हैं, अलग कि उनका रंग काला नहीं है, वो स्वेम कृष्णा है, वो अपने पार्शदों के साथ, सेवकों के साथ, अस्तर, शस्त्रों के साथ हैं, मानव जीवन जो है भगवानारायन को प्रसनन करने के लिए, और वो संक्युत्य नक्य के द जहां पर भगवान के पवित्र नामों का कीतन हुता है गोर नारायन भगवान अर्थात भगवान नारायन जो चेतन महात्व के रूप में आए हैं वो तुरणद प्रकट हो जाते हैं और वो संकीत जगी के द्वारा पूजे जाते हैं इस शलोक में बताय गया है कि नारायन के � इसी लिए एक वैश्णव सन्यासी अपना जीवन नारायंड की सेव में अत्वन करते हैं. वो अपने आपको नारायंड नहीं कहते. जो वेक्ती नारायंड बनने का प्रयास करता है वो निर्वेर बनने के बजाएं भगवान से इरिशर करने लगता है. तो इसी लिए नारायं� वास्तव में जब व्यक्ति भगवान की दीव दीवां की चर्चा करता है या उसका गान करता है तो अपने आपको इरिशा से मुक्त हो जाता है इस भौतिक दुनिया में हरे एक व्यक्ति को दुसरे से इरिशा होती है लेकिन भगवान के पुवित्र नाम का गान करने से व्यक् भगवान दिर्शन नहीं करते तब भी सच्ची, शान्ती, एकता और मित्रता की भावना मानव समानी हो सकती हैं. बिना भगवान नारायने संग्रितन देग्गे के इस भौतिक दुनिया में सुपन, शान्ती नहीं हो सकती हैं।
होम घ्यां तिम्नां दास्यां घ्यानं जनाशाक तस्माई श्रीगुरवेनमः श्रीचेतन्यामणवेस्तम् साविदामेन भूतले स्वयं रुपाकड़ामयं जाति स्वाप्रण्दिकं बन्देहं श्रीगुरु श्रीवुतापदकम्रण श्रीगुरुन्वहिष्णावंश्रः श्री रुपां सराजतां सहाजनारगनातर्मतंतंसजेवं सद्वेतंसवधूतं परिणासायं श्रीराद्हा कृष्णापदान श्रीराद्धा ए कृष्णा करुणासिंधु दीनबंदु जगतपते गोपेशा गोपिगातांता रादा कंता नमसुते सब्ता कंचना गोरांगी राधे विन्दावनेश्वरे।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।। विश्णेव्योन मुनमः जाय श्री कृष्णाचेतन्यः प्रभोनि चनान्दाः श्री अध्वेत गदाधर यो जिदोर भक्त विन्दार। हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम अध्वेताः आराम हरे हरे हरे हरे हरे हरे राम अध्वेताः � अच्यन सभागशील हो। क्यों? क्योंकि आप एक चक्रद्धाम में सेवा कर रहे हो। और एक चक्रद्धाम क्यों है? कि वो यहां कौन प्रकट हो गए थे? भवानितनन्दर। जो कि भाराम जी के अवतार है लक्षवन के अवतार हैं और जब भगवान कृशन प्रकट होते हैं उनकी भाई भी प्रकट होते हैं साथ और नित्यनन्दा जी अच्छे अंध्याल्म है हाँ प्रभु नित्यनन्दा प्रेम्णन्द सुखी कृपा कान कोने हमें बोलो भगवान नित्यनन्दा आप सदा सु नित्य अनन्द नित्य का अर्थ है सनातन अनन्द का अर्थ है आनन्द या आनन्द तो बहुत एक समाज में हम सब आनन्द की खोश में हैं पशुबी आनन्द चाहते हैं एक बिल्ली को दूद मिल जाये तो वो भी खुश होती है چھیٹیوں کو چھینی مل جائے، وہ بھی بہت خوش ہوتے ہیں۔ تو اور بہت ایک سماج میں ہم سب آنند کی خوش میں ہیں۔ پر اگر ہمیں اصلی آنند چھئیے تو ہمیں بھگوانیت دلانا کے شہنگت ہونا چاہیے۔ راد مراد نے کہا ہے नहनते विदुं स्वधे कते में विश्णुं लोग ये नहीं जानते हैं कि ऐसी आनन कैसे प्राप्त होगा? तो नित्य अनन्दर अनन्दर करते हैं आनन्द या आनन्दर नर्वतन्दर सागो कहते हैं हाँ प्रभु नित्य नन्दर प्रेम नन्दर सुखी आप सुखी हो क्यों? क्योंकि आप भक्ती में जुड़े हो तो जो भगवान नित्यनन्द के शरन लेगा, वो क्या अनुभव करेगा? सुखी सुख। कृपा करो, कहाना को नहीं। आमी बोलो दुखी। हमारे पर कृपा कीजिए। क्यों? क्योंकि हम अतियंद दुखी हैं। बोधिक समाज में हम सब दुखी हैं। आप चाहे, बिल्ला बन जाओ, अम्बाणी बन जाओ, टाटा बन जाओ, बिल्ल गेच बन जाओ हम एक कश के परिशाद अगला कश अनुभव करते हूं जनमर्ण मुडापर विमानी से कोई बच सकता है कोई नहीं बच सकता तो बौधिक समाज में हम सब दुखी हैं पर अगर हमें सुख च भगवाने दिननन्द की शुराम।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।� चेतिर महा प्रमु क्यों पतीत पगट हो रहे हैं पतीतों का उध्हार करने करें तो कलियोगा में हम सब पतीत हैं हम सोचते हैं हम उची जादी के हैं वो नीची जादी का है भारत में हम सब यही सोचते रहते हैं कौन जी जादी का कौल है पर शास्तम में कहा गया है कलो सुद् नीजी जादे के हैं। सुद्ध समार्थ। पन्योधन्दा शाकुर कहते हैं, आप अपतारित होए हो पतीत में उधार करने के लिए। और सब पतीत में सबसे पतीत कौन हो। मैं हूँ। तो ये है वैश्वा का सिधान कि आम हैं सबसे पतीत। भौत एक समाज में हम सोचना चाते हैं हम सबसे उत्तव व्यक्ति हैं सबसे खर्सूरत सबसे धनी पर हैं पर भग सोचता है मैं सबसे पतीत हूँ किर्षनलास काविराज्य कहते हैं मेरा नाम ही मत लो मेरा नाम ही लोगे तो तुम्हारे सारे कुन समाफ्स जाएंगे तो च स्वयं भगवान हैं। श्री कृष्णा चेतनिया रादा कृष्णा नहें आनिया। रादा कृष्णा प्रकत हुए किस वूप में? चेतने महाप्रभुः के वूप में। तो चेतने महाप्रभुः जी की भविष्व वाली थी कि विष्व के हर कुर में ये नाम पहुंचेग और प्रावपर्जी उनके प्रतिनीदियों के प्रयास से आज उन्यां के कोने कोने में महाप्रभु की उपासना की जा रही है प्रसाद में निते नन्दा जी की उपासना की जा रही है छेते हैं महाप्रभु और उनके साथ निते नन्दा ने अनेक लिलायें प्रकड की मि अपने आपको गेहन, बड़े-बड़े महेंगे गेहनों के साथ सजाते थे। तो उस समय एक ब्रामन था, तो बड़ा चोर भी मन गया था। जगाएं मदाई भी वे, एक समय ब्रामन थे, ब्रामन खानान में जन हो थे। तो महाप्रण, भगवान इतने नन्ना थहरे थे हिरानिया पंदित के घर में। उनके घर था एकांत के स्थान में। तो चोरों ब्रामनों का जो नेटा था। था चोर, डागू। उसने अबने साथियों को कहा, देखो वाई, हम चोरी, चोरी, चोरी करते हैं। मैं तुम्हें کوئی بڑا سوڈا دیتا ہوں یہ نتی نندہ جو ہے آوہ دوس مہنگے مہنگے گہنوں پہن کر گھومتا ہے کروڑ روپے کے گہنے ہیں اگر ہم یہ گہنے چھڑا لے تو سب دھنی بن جائیں گے ہمیں یہ چھوڑی چھوڑی چھوڑی کا دھڑا چھوڑ دیں گے ہم نے تیار ہو جائیں گے چھوڑی کے اندر سے۔ تو ساتھ ہونے کا تھیک ہے، اچھا۔ تو یہ جو جاکو برامن تھا، کئی دنوں کے لیے نیت اندر کے ساتھ گھوم رہا تھا یہ دیکھنے کے لیے مہنگے گہنے کیا پہنتا ہے؟ کیسے گھومتا ہے؟ یہ چوڑ لوگ جو آپ کے گھر میں چوڑی کرتے ہیں پہلے تین چار دن ایک ہفتہ آپ کا پیچھا کرتے ہیں دیکھنے کے لئے آپ کا کیسا کس وقت آپ گھر کے باہر رہو گے کہ وہ اندر آ سکیں؟ یہ چوڑوں کا جو نیتا تھا وہ نیتے ننہ کے ساتھ گھوم رہا تھا دیکھنے کے لئے ये दिनना का क्या शेडूल है? कभ आश्राम करता है? कभ भगतों को मिलता है? पुर्णिते ननजी समझ गए थे किस नियत से मेरा साथ कर रहे है? जैसे हारी दाज थाकुर अपनी कुट्या छोड़कर दूसरे स्थाल में जाने वाले थे जिवनाम जिन से खाने उस वैशे को भ حریدار صاحب کو سمجھ گئے کیوں بھیجائے؟ تو وہ رک گئے اُن کا اُدھار کرنے کے لئے۔ تو یہ چھوڑ نے ساتھیوں کو کہا، پہلے اُن نے اپنے بھقت کو بھیجا۔ دیکھو تیتے نندا کیا کر رہا ہے ایسے میں؟ تو اُن کا ساتھی گھر کے اندر آئے جانے تے، نندا جی تے رہے تے۔ اور دیکھا نیتے نندر کھانا کھا رہا ہے پرشار ان کے صدیوں سب ادھر بیٹھ رہے ہیں تو اُس نے جا کر اپنے نیتے نندر کو کہا اپنے نیتہ کو کہا نیتے نندر جو پرشار کھا رہے ہیں ان کے انیک بھاگت ہری نام کا اچارن کر رہے ہیں پھر چھوڑ کے نیتہوں نے کہا ڈاکو نے کہا تھیک ہے جب وہ گھر کی بطی بجھ جائے گی یہ تو دور سے دیکھ جاتا ہے بطی بجھ جائے گی ہم اندر جائیں گے وہ نیتے نہ کہ سارے گہنے چھڑا رہیں گے وہ چھوڑ نے یہ نمک کر لیا ایک چھوڑ نے کہا مجھے اس کا یہ ہیرا چاہیے دوسرے چھوڑ نے کہا نہیں نہیں مجھے یہ ہیرا چاہیے تو وہ راہ دیکھ رہے تھے کب نتی نندر سوے گا تو اُن کے گھر میں جائیں گے اُن کے سارے گھیہنیں چھڑانے گے پھر آہ دیکھتے دیکھتے اُنہیں نین آگئے اور سو گئے سارے ایک اوپر ایک سارے چھوٹ چھوٹ سو گئے اور صبح جب کبوں کی پکشوں کی آواز آتی ہے तो अनाम की घड़ी है ये तो वो उठ गए वो ने देखा हम सब सो गए तो सब एक दूसरे को दोश देने लगे पहले तुम सो गई थे फिर मैं भी सो गया दूसरे थे कहा नहीं नहीं पहले तुम सो गई थे मैं नहीं तो वो जघड़ा करने लगे तो उनकी गुरू ने कहा देखो जगड़े करने का कुछ लाब नहीं हमने चंदी देवी की सेवा नहीं की अच्छी तरह डस दिन सेवा करेंगे बड़े ध्यान से फिर चंदी की कृपा से हम सपत होंगे हमाई होईना तो डस दिन उनने पूज़ा की पर एक बात फेर गए जिसें जिनना के घेहनों को च जब पहुंची नितिनन्डा के घर के पास, तुमने देखा, बड़े-बड़े सिपाई खड़े हैं, बड़े-बड़े चाकु, बंदू के साथ, वो डड गए। अले, बड़े-बड़े चौकिदा खड़े हैं, बंदू के साथ, नितिनन्डा को कैसे पता लगा कि हम आने वाल اُن کی تو سارے چوڑ ڈڑ گئے تو اُن کی نیزر نے کہا لگتا ہے نیتے نندہ کوئی سوچنا مل گئی تھی کہ ہم آنے والے ہیں تو اُنہوں نے چوکی داروں کو بلایا اُن کی سراکشہ کرے اور دوسرے نے کہا نہیں نہیں نہیں یہ نیتے نندہ تو آوہ دوس ہے بڑے بڑے لوگ اُس کو ملنے آتے ہیں کوئی بڑا بیاکتی آیا ہوئے گا تو اپنے چوکی داروں کو ساتھ لے آیا۔ تو انہوں نے کہا چلو آج نہیں چھوڑائیں گے کل ہم آئیں گے۔ تو کل رات کو پھر چھوڑ آیا اپنے ساتھیوں کے ساتھ نیتن نیتن کے گہنے کو چھوڑانے کے لئے۔ जब वहाई नहीं थे ननने को, गेहरों को चुपाने के लिए सब अन्धे हो गए। एक खड़े में गिर गिया, जिसमें अनेक कीरे थे, सब मच्चर कीरे को काटने लगे। एक एक और पत्थर पत्ते, एक और काटों पर गिर गिया, काटे चुप रहे थे, सब अन्धे हो गए ساتھ میں تیجی کے ساتھ اندھر دیوتا نے ورشہ بھیجی وہ تیجی کے ساتھ پارش آرہی تھے سب بھیگ کر اندھے ہو گئے تو اُن کی گروہ نے کہا دیکھو مجھے لگتا ہے یہ ہی نہیں دل اندھا بھگوان ہے ہم جب پہلے بار چھوڑانے گئے ہمیں نیند آگئے دوسری بار ہم چھوڑانے گئے چوکیدار تھے اُن کی سرکش کرے تیسری بار ہم چھوڑانے گئے تو کیا؟ اندھے ہو گئے ہم لوگ پیچھے کے ساتھ بارش پڑسنے لگی ہم سب بھیگ گئے یہ کوئی سہاراً بیگتی کی دیدار نہیں ہو سکتی. تو انہوں نے بھگوان نیتے نندہ کی اسمارن آرم کر دیا اور جیسے نیتے نندہ جی کا اسمارن آرم کیا آنکھیوں کی واپس آ گیا. سب اندے ہو گئے تھے. تو پھر جو چھوڑوں کا نیتہ تھا وہ گیا بھگوان نیتے نندہ کے پاس اس نے اپنے برے کارےوں کی پوری سوچنا دی اور اس نے کہا کہ جب ہم نے آپ کا سمجھن آرم کیا جب ہماری آنکھیں ہم کوئی کلتی نہیں کرنا چاہتے ہم آپ کی شرن لینا چاہتے ہیں और फिर भगवानी देननदा के एपास एक हार था। हार उन्होंने छोड के नेथा को पैना दिया है। और ये सारे छोड क्या बन गये। भगवानी देननदा के बागव बन गये। तो भगवानी देननदा और चेतिन महा प्रभूँ अच्यान द्यालू हैं। जो पकट हो एक दिन चेतने महाप्रभुने निर्तेनन्दर हरिदास को बुलाया और कहा है निर्तेनन्दर हरिदास सुनो जाओ घहर घहर और लोगो को ये संदेश दो बोलो कृष्णा बाजो कृष्णा कुलो कृष्णा सेच्छे सु महाप्रभु के अदेश के अनुसार नितिन्ना हरिदास ने जोडी बनाई, सब लोगों के घर जाना शुरू कर दिया। और हर घर में जाकर क्या कहते थे? क्रिपा करके बोलो कृष्ण, कृष्ण करना उदो, भजो कृष्ण, कृष्ण के उपासना करो। कुरु कृष्ण सिख्षा कृष्ण की जो सिख्षा है नीदा भगवतम में उसको अपना हो। महाप्रभु के अदेशे अनुसार भगवान निते जंदव हरिदास खार गर जाना उन्होंने आदम कर दिया कई घर वे हो गए उन्होंने बड़े आदर से सुवागत किया जाता थ ओ शुर्द ब्रामन महात्मा आ गए बैठो हम क्या कर सकते हैं। वो कहते थे बोलो कृष्णवाजु कृष्णवाजु कृष्णवाजु कृष्णवाजु कृष्णवाजु कृष्णवाजु कृष्णवाजु अभी हमको भी पागद कृष्णवाजु कृष् बनाने के लिए इन पागदों को बेड़ते हैं। हरी नाम करते हैं। कई लोग कहते हैं, तुम में पागद हो। कई घर में गए लोगों ने कहा कि जब हमने प्रयास किया था शीवा संगल में प्रभेश करने के लिए तुमने हमें अंदर आदे नहीं और वहाँ केवल जो उनके प्रियभक थे उन्हें अदिकार था अंदर आने का तो कई ब्रिजवासी, कई व्यक्ती, नवद्वासी उनके शत्सु बन गए थे कैनन का स्वागत उन्हें अंदर आने नहीं दिया तो आप लोग जो प्रचार करते हो आपका भी यही अभ्यास रहता है कही स्वागत करते हैं आओ स्वागत जी बैठो कही कहते हैं वो कोई काम धन्दा नहीं है क्या आ जाते हो बार बार वो जब नित्यनन्दर हरिदास جب انہوں نے پرچار شروع کیا انہیں تو پتہ تھا کہ چیتن مہا پھر پھر سوئیم بھگوان ہے انہوں نے کھوجا کون ہے اس شیعہ کا سب سے پتیت بیشتری اور ان کا بھاو یہ تھا کہ اگر ہم اس پتیت کا ادھار کریں महा प्रभु की महेमा बढ़ जाएगी है। तो उनको पता लगा कि इस शहर में जो भाई हैं जिनका जनब हो था ब्राविन खांदान में पर उनकी हरकतों को देखकर मामाब ने उन्हें घर से निकाल दिया है। वो भाई शराबी बन गये हैं हर प्रकार का पाप किया उन्होंने किवल वाईश्णाव को काइश नहीं पुछाया तो नितिनननने सोचा किसी प्रकार इनका उधार हो जाये तो महाप्रभुव की महिमाव बढ़ जाएगी हो गए सबने उनको बोला किसी के पास भी जाओ वो दो शुरावी भाईयों के पास म جہاں تھا اُن کا نام مہد بھائیوں کا? جہاں بھی جاؤ پہ اُن کے پاس میں جانا. پھر اُنہوں نے پربار نہیں کی اس کی. جہاں ملی تینوں نے ہری جاس کا کہا. کرپا کر کے ہری گناہ لوں. کہا ہیں ملائی کو اتنا غصہ آیا. ہمیں سکشہ دے دے ہیں. بے شرف لوگ. खेले बगवाई कर आप लो। भागो यहाँ से। मानने को आए। जब मानने को आए, तो दोनों को भागना पड़ा। नितिननदा तीजी से हो, हरिदा तीजी से भागे थे। पर दो भाई शराबी थे, तो मोटे पेट के थे। तो वो एने पकर नहीं पाए। महा प्रभु के बाद जा कर उन्होंने महा प्रभु भगतों को प्रचार के लिए भेजते थे फिर पूछते थे क्या प्रचार किया, क्या है आज का रिपोर्ट है? हैसे हमने प्रावपत के समय भी जब आते थे प्रावपत पूछते थे, आज कैसा प्रचार किया? इस کیا بھیاد تھا. उनने कहगे इनश्राजियों ने हमें भगा दिया. पतर फेक रहे थे हमारे पीछे. आप उनने कहा फिर से जाओ. तो वो फिर से गए. जल जगाएं मदाई ने देखा. फिर से आ गए ये जिनकी ये हिमत हमने उनको काली दे के भगा मदाई ने क्या किया पत्थर फेका यो की नितिननदा के माथे पर लगा महा प्रभु तो अंतर यामी है वो समझ गए क्या घटना बीदी है महा प्रभु वो पहुंचे सुधाशन चकर के साथ पर नितिननदा ने क्या किया रोग दिया नितिनननन कहा ये एक उधारन है कली उगा का और जब जगाईने देखा माधाईने कि हाले पत खून निकाला है इसके माथे से और ये नितिनननन रोक रहा है अबने सदाशन चक्र का उप्योग करने से माधाईन समझ गए ये बड़े दियालू अवसार हैं। उनके शनगत हो गए। और मदाई ने फिर पूछा, मैं क्या सेवा कर सकता हूँ, क्या पच्तावा कर सकता हूँ। तो वहाँ एक घाड थी, कहा कि घाड को साफ करो। घाड का नाम क्या था? मदाई घाड। और उन्होंने फिर दो लाख बार रोज हरी राम को जाप कर दे थे और हजारों बार मुणाई कार के सभाई तो चेतने महापरभू नितननदा अनेक दयालू हैं जब चेतने महापरभू जाकर जंगल से गुझर कर जा रहे थे तो उन्होंने क्या किया परश्यों से भी हरी राम करवाया हाथियों سے, शेर से, टाइगर से उन्हें नचाया उसी परकार जब चिलर प्रापा विदेश गए थे चिलर प्रापा ने जो अत्यन पतीत प्रजा थी उनको भगत मना एक समय किसी ने प्रापा से पूछा स्वामेजी आप को जादू कर सकते हो स्वामेजी ने कहा जा व्यक्ति में बड़ी जग्यासा थी क्या जादू किया है स्वाभी जी ने तो वे कहा मैंने अजारों मिर्चों को रामन बना लिया है तो ये कोई छोड़ा जादू है तो आज के स्लोक में कहा जा रहा है कि भगवान नरें जो हैं वो प्राप्त होते हैं भगवान के नामों के � और हम सब का लक्ष क्या होना चाहिए? भगवान नरेन के सेवा और ये सेवा हम कैसे करते हैं? उनके संक्रित अंडोरन के दुबारा और वो भगवान के नाम का उचारण बार बार करते हैं बहुती बहुती व्यक्ति कही बार कहते हैं तुम लोग एक ही नाम का उचारण करते हो ठकते नहीं हो। इकी नहीं। पूछते हैं ना लोग। एक चक्र पर कम पूछते होंगे, बड़े शहरों में ज़्यादा पूछते हैं। और विदेशों में तो बहुत ही ज़्यादा था। तो पूछते हैं, एकी राम को चालड करते हैं, ठकते नहीं। नही भगवान उनके नाम अभेन है। तो चेतने महार प्रभू के अनेक लिलाई हैं, जब वो छोटे थे, घेनों से उनका शरीर सज़वा था, और एक दिन एक छोड ने छुरा देया। छोड का यही इरादा था, मैं थोड़ी दूरी पर जाओंगा, वहाँ जाकर साले घेहरें चुरा लूना। जिधर भी वो भागते थे निमाये को उठाकर, वो पहुंच जाते थे उनके घहर के सामने। भागते थे, सोचते थे ये साल मैं रोकच्चु चुराओंगा। पर वो स्थान उनके घहर के सामने आ जाता था। एक समय एक ब्रामनी � اُن کے گھر میں، جگرال مصرہ کے گھر میں، جگرال مصرہ سنتوں کی سیوہ کر دیتے تھے۔ تو بھرامن جو ہیں، اکثر اپنا بھوجن کھل بناتے ہیں۔ پھر بھرامن اپنا بھوجن بنا کر بھوگ لگا رہا تھا۔ جب نمائی نے آ کر کیا کر دیا؟ جھوٹا کر دیا۔ بھرامن نے کہا، او، جھوٹا ہو گیا۔ चलो भगवान के इच्छे मैं भूका रहा हूं। ब्रामिन किसको दोश नहीं देता हम तो बौदिक समाज में दोश देते रहते हैं। तुमने ये किया, तुम्हारे कारे पर ये हुआ। ब्रामिन सोचता है, मेरे अपरादों का परिनाम है। तो जगरल मेंसल ना कहा, तुम ह उसे बाद जब ब्रामन भोग लगा रहा था, निमाई फेर पहुंच वर था, खा लिया। तो जगराल मिसा को बड़ा गुसा आया। आदी रात हो गई थी, जगराल मिसा ने निमाई को बन कर दिया एक कम्रे में दूदी पर, और सब सो गए घर के सदसे। और निमाई को वो ब्रामन फिर से भोग लगा रहा था। मुझे भोग लगा रहा था। निमाई फिर बाप पहुंच गया। फिर पहुंच गया तो पिताले लगा रहा था तो वे बन कर दिया है। तो निमाई ने कहा तुम्हें भोग किसको लगा रहे हो। मुझे ही तो लगा तो ब्रामन ने गा विष्णविष्णविष्णविष्णविष्णविष्णविष्णविष्णविष्णविष्णविष्णविष्णविष्णविष्णविष्णविष्णविष्णविष्णविष्णविष्णविष्णविष्णविष्णविष्णविष्णविष्ण एक पंदित था केशमीरी, केश केशमीरी जिसके मन में बड़ा घमन था केश केशमीरी ने भारत के सारे पंदितों को हरा दिया था उन दिन हमें नबदिप शेहर में बड़े विद्वान रहते थे केश केशमीरी ने सूषना भेजी मैं नवदे में आकर मारे सबसे प्रसेद पंदित से डिबेट करना चाहता हूं। तो नवदे के ब्राह्मनों ने सभाव बुलाई। मारे शेहर से कौन उनके सामने खड़े होगा। सब डर गए। सब ने ये निर्ने किया। हमारे शेहर का जो सबसे छोड़ा पंदित है निमाई पंदित उसको हम आगे कर देते हैं। अगर निमाई पंदित उन्हें हरा दिया, तो हम कहेंगे, अगर हमारे शेहर का बच्चा हरा सकता है, निमाई पंदित ग्यादा साल के विए से, हमारी क्या, हम तो। और अगर केश-केश में निमाई को हरा दिया, हम कहेंगे, � तो निमाई उस समय अपने निमाई ने ग्यारा साल की आयु में संसिद का महा विध्यारा खोल दिया था। निमाई सिख्षा दे रहे थे अपने विध्यारतियों को गंगा के तयत पर। जब केशा किश्मीनी वहाँ पहुंचा अभे चम्चों के साथ, केशा किश्मीनी जहां भी जाता था जंडे साथ होते थे और कई सेवक तो केशे किश्मीन ने पूछा जहां भी हो वो प्रसेद निमाई पंड़ने जिसकी बड़ी प्रसंसा मैंने सुना है मैंने कहा हाँ पर मैं तो कुछ एक पंक्ती में ठीक नहीं लिख सकता क्यों लोग प्रसंसा चल आप सुनाये कुछ स्लोकों की रचना करके। निमाई ने कहा, आपके सामने मैं तुछ हूँ। आप सुनाये। तो केशर किश्मिनी ने सो स्लोकों की रचना की एक घंटे के अंदर। और फिर निमाई से पूछा, कैसे लगा मेरी रचना हैं। निमाई ने साहे सो श्लोक वापर सुना दिये। मैंने केश्यों केश्मीन ने देखा। ओह। साहे श्लोक इन्होंने एक बात सुनने में कंटस कर लिया था। तो वो आश्टरेव चक्रत हो गया। जो व्यक्ति एक बात सुनने में कंटस कर ले, उसे क्या कहते हैं। सूती था। जैसे ज� भगवत की रचना कर रहे थे। वो सफा में हाँचारों संतों पस्ते थे। जिन में एक थे सूता कोसोमी। तो नमश्रायद के बन में, जब संतों की सफा चल रही थी, और उन्होंने सूता कोसोमी से कहा, आप हमें माग दर्शन दीजिये, खलियुग में क्या है हमारा सबसे उत्तम कारिय शुता कुष्वामी ने वो ही अठा हजार स्वलोग जो कि उन्हें सुने थें शुक्रे कुष्वामी से आपस सुना जो इसे जब भगवतम पढ़ो आपको देखते हो कही जगए शुता हुआ चात कही जगए शुक्रे कुष्व तो ये शुरूदी धरा तो केशे किश्मी ने सौ स्लोकों की रचना कर दी थी निमाईन तो पुछा कैसे लगा में ही रचना है निमाईन ने कहा बहुत अच्छा पर इन इन स्लोकों में ये ये कमी थी जब केशे किश्मी ने देखा कि एक बार सुनने से निमाईन ने सौ स्ल وہ آشتیر چکت ہو گئے میں نے تو وائیوں کی تیجی سے یہ سنایا تھا ایک بار سننے سے تم نے کیسے کنٹس کر لیا پرن کیشہ کشمیری نیمائی نے جو کمیاں نکالی تھی اُن کا اُتر نہیں دے پائے تو نیمائی کے جو ودیادی تھے وہ ہسی اُڑانے لگے نیمائی نے کہا نہیں मत ہسو! آج کیچھا کشمیری تھکے ہوئے ہیں کل اتا دیں گے۔ تو نمائی نے یہ کہا کہ ہمیں کس پاکار نمڑا تھا کا بھاو پہنے چاہیے۔ کسی کی ہسی نہیں مرانے چاہیے۔ تو کیچھا کشمیری شام کو گھر میں جائے۔ چھار سوتی دیوی کے بھکت ان سے کہا آپ نے ہمیشہ میری رکھشا کی ہے، آج نہیں کی۔ کل میں رکھشا کی جائے گا۔ ہارتوتی دیوی نے کہا یہ لڑکا نمائی سویب بھگوان ہے۔ میں ایسا یوگ نہیں لے تھا۔ پھر آگے دن کیا ہوا؟ کیشے کشمی نہیں، نمائی کیشے इस वगर महा प्रभोन गरने तिननना की अनेक लिराय हैं। जब निमाई छोटे थे एक पिल्ला को उठा कर वो घर ले आये। पिल्ला समस्ते हो। पपी डॉग। तो सच्ची माता ने कहा हम ब्रामन हैं पिल्ले को घर वे रखोगे। असंबव। निमाई ने कहा پلے کو رکھو نہیں رکھو گے تو میں بھی نہیں رہوں گا جہاں میں اور وہ جو نمائی کے دوست تھے انہوں نے کہا نمائی تم نے بیواری کر کے سب سے خوبصورت پلے لے لیا ہمارے لئے بہصورت پلے چھوڑ گئے تو نمائی کی ماں تو روز نمائی کی ماں خوش نہیں تھی پلے گھنے میں رکھنا تو ایک دن نمائی سنان کرنے گئے تھے گنگا میں جب ایک اُن کی متر نے کہا نمائی نمائی تمہیں ماں نے وہ پلے کو گھر سے نکال دیا ہے نمائی نے کہا کیوں بڑے گُسے ہوئے نمائی نے اپنے متروں کو بھیجا घर घर जाओ देखो निमाये ये पिला मेरा कहा है। तो सब खुज़र देखा हैं ये पिला। पिर उनने देखा। बजार के बीच में ये पिला दो पैनों पर नाच रहा था। तो वो हातंगो उठाया था। नेतों से आंसु भहरे थे। शुद भक्षी के लक्षन पकट वो क्या कहा रहा था? हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, हरे कृष्ण سب کے سمکھ سے ایک بھگوان کا رتھ آیا پندے کو دینے کے لئے پندہ اُس رتھ میں بیٹھ کر سب کو بائے بائے بول دے بول دے بھگوان کے دھاں پے سب سے نمائیں کی ایک نیک لیلہ ہیں اس وقت چھتری نمائیں پر محبت کی ایک نیک لیلہ ہیں چھتری نمائیں پر ہم بھگوان ہیں ہمارا ایسا بھاگیا ہے کہ پراپا جی کے کرپا سے ہم چیتن مہا پبھو نیتن اندھا کے شننگت ہو گئے ہو جب بنگال اور اس طرح میں جب لوگوں کے پاس سوچنیاں تھیں مہا پبھو کے بارے میں باقی ستھاروں میں بھارت کے مہا پبھو کی کپڑچاری تاں گہرا نہیں تھا وشل پراہ پاد چیتن مہا پبھو نیتن اندھا کو لے گئے ہیں کہاں؟ وشل کے ہر کونے میں وشل کے ہر کندر میں مہا پربھو کی لیلہ مرتی ہے اور کہاں بھگ بڑے صبح کے شادے ہو ایک چکر دھامے سیوہ کر رہے ہو۔ اچھا سے سیوہ کیجئے۔ آپ سب نے ملکہ بڑا سندھر مندر بنایا ہے۔ اور میں نے سنا ہے کہ ابھی اور بھی یوجنہ ہے۔ اس کو بڑھا لے کے لئے۔ اور بھگوانیت نندہ کو پرسن کرنا بڑا عیسان ہے۔ کیا کرنا چاہئے؟ حینام کو اچھا لے۔ تو جیتی نے مہا پھون نے پانچ مہد پول مرشد پر پہل گیا سادھ سنگھر نام کرتن آگے بھاگوچھو نم ایک اچھا کا باز اور نمولتی کے سیوہ آدھر اشرادہ کے ساتھ ये विश्वास, ये स्वया बागवान है, हमें इनकी शरन देनी चाहिए। इनी ये मुर्ती है। तो आज के स्लोक में ये कहा जा रहा है, कि सब भक्तों को बगवान के नामों का उचारन करना चाहिए। और इस खल्योग में क्या है बगवत प्राप्ति का सादन। है नाम है नाम है नाम एवा केवलाब खलाओ नसेवा नसेवा नसेवा एवा केवलाब। आप सब है नाम ले जिये, महाप्रभू की शरण ले जिये, जितनान्दर जी की शरण ले जिये, और इसपकार ने जीवन को सपर बनाएगे। हाई कृष्णा। कोई प्रशन है? No questions? नहीं? कोई प्रशन नहीं है? करते हैं। हाई क्रिष्णा!
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