कठिन सेवा से भगवान् की कृपा अधिक मिलती है || ŚB 4.31.19 || 13.11.2021 || ISKCON New Delhi

A speaker urges devotees to distribute Krishna books despite the difficulty, arguing that hard service brings greater divine grace and develops compassion and humility. He covers logistics like pricing, volunteer coordination, and handling rising printing costs, emphasizing that perseverance in spreading Krishna consciousness benefits everyone.
Chapters
हज या का भगतों हार्दिक स्वागत ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम ते वासु देव ओम नमो भगवते वासु दिवा
वासु देव
ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम भगवते वासुदेव। some आपकी जो सबसे बडी पार्टी है moral सो, हमने आज की क्लास के लिए समकितnसमबंधित sok चुना cant for capret thertyone नाइनटीन word liखaweopररयासरवा देश संतुष्टियाबेना in santa पांत्या सवा भूतेश, चा, दया, दया,
दया सब भूत सू
के दवा के
दवा
या मुझे या भुले
ने हवा
खाचा खुशी
हो, संचार नगर दया सारे
बाते जीज संतु रहा,
हर जगा दया हो से रहा।
देर
कागज सरभोकेशुसवुसतुष्ट होने से, ये केलवा किसी न किसी तरह सोने सम। सुंदरिया। शाक्या का तो शरीर शरीर संतुष्ट होता है। आंसू तुरंत जनादर सब जीवों के स्वामी अनवार समस्त जीवों पर दया करने से, रेल के प्रकार से, संतुष्ट रहने से तथा इंद्रियों को वर्ष में करने से मनुष्य भगवान जदातर को बहुत शीघ्र संतुष्ट कर सकता है। तब ये कुछ विधिया है जिनके द्वारा भक्त भगवार को संतुष कर सकता है। इनमें सबसे पहली है दया सभ अर्थात सबुपजियोपर दया, दया, दिखाने की सफल भी है। कृष भक्ति को फैलाना सब पूर्ण संसार। ज्ञान के अभाव से पीड़ित लोगों को जानना चाहिए कि भगवान सभी वस्तुओं का मूल कारण है। ऐसा समझ कर कृति को भहुमतभरतीआरलगजाना चाहिए। जो लोग वास्तव में विधवा है और आध्यात्मिक याता प्रकृति कर चुके है, उन्हें संसार भर में कृष्ण भक्ति का पेश करना चाहिए, जिससे लोग उसे करके अपने जीवन को सफल बना सके। सर्व द्देश्य स्व सार्थक है, क्योंकि यह न केवल मनुष्यों के लिए 84 लाख योनी में प्रकट होने वाला सब जीवों के लिए आया है। भक्त न केवल बादल जाती को लाभ बचा सकता है, तो सब जीवों को भी प्रत्येक हरे विश्व भाप की तरफ से आध्यात्मिक लाभ उठा सकता है। जब हरे विश्व की दिवध्वनि का उपचार किया जाता है तो पौधे, पशु तथा कीड़े तब तक लाभावित होते हैं। इस प्रकार धरिकश्भामत्र का उच्च स्वर से की तर करके मनुष्य सब जीवन को तैयार कर सकता है। करता है। संसार भर में कृषि भावना आगमों को फैलाने के लिए वो को सभी परिस्थियों प्रसद नारायणा परा भने। अब तो सर विव्यतिस्वर्गअपवर को देश कार्य के लिए यदि दर्द में भी जाना पड़े तो उसे भगवान कि तुम सुबह के शरीर में भी वास करते हैं। दर्द का उद्देश्य करते भी सुध ना है। क्यूंकि वह दिल पर भगवान की संगति पर रहता है। इस दशा को प्राप्त करने के लिए मनुष्य को अपनी दरिया वर्ष होती है। जब उसका भगत होता है तो इद्रियाँ सतह वर्ष हो जाती है।
हमे ज्ञान ंदसयज्ञानंजनाशलकया हम श्री
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सदवेतम सब धूम हे कुस करना, सिंधू। नीना मंजू का गौरी जायज
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n राजमुनी कर रहे हैं और इस अध्याय में अध्याय में रांधमुनीउदेश दे रहे हैं। कैसे 1 रूप से शीत के द्वारा, हमें दे रहे हैं। नारद मुनि कह रहे हैं कि 1 व्यक्ति यह बता रहे हैं, भगवान को कैसे प्रश्न कर सकते हैं? और मुनि के अनुसार 3 साधन हैं, जिनके द्वारा आप भगवान को है। मेरा क्या है सब पर दया दूसरा संतुष्ट के संतुष्ट रहना और तीसरा इंडिया को तो प्रपोज कहते हैं कि ये जो दया सर्वा बुते, सब्जी आत्मा के ऊपर दया दिखाना। तो जैसे कई बार सुन बैठे हो। असी दया क्या है? असी दया लोगों को ज्ञान देना, वो ज्ञान देना, जिसके द्वारा जीवन के उद्देश्य को प्राप्त कर सके। यह है और चास में इस विषय की चर्चा। कई स्थानों में गीता क्या है। अठारवें रिहाई में क्या कह रहे हैं? सब में सबसे प्रिय कौन है? जो मेरा उससे ज्यादा हुआ है न हो। कई बार लोग पूछते हैं आपकी संस्था में कोई शार्टकट नहीं है। ये है शौरकर्चयादयादया करो किस पर ये बात नहीं हो। तो अनेक प्रकार की दया होती है। सबसे ऊंची दया क्या है? ये कृष्ण भक्ति का ज्ञान प्राप्त है। तो इसलिए हमारे जो वैश्य हैं, वो क्या चाहते हैं, वो चाहते हैं कि मार का संदेश करा जाए। ये बुक डिस्ट्रीब्यूशन करते अभी कल सुबह निकले ट्रैवलिंग के लिए इसका मूल उद्देश्य क्या है? है आप लोगो को और भागवत में भगवान की। माता ने पूछा था ये बताओ कि साधु के ख्याल लक्षर होने चाहिए। और इसके प्रश्न के उत्तर में ने क्या कहा कर, दया की भावना होती है। इसलिए वैश्णव को कहते हैं, बड़ा दुखा है। जब वो देखता है कि किस प्रकार परिवादी व्यक्ति प्रयास कर रहे हैं। दुख की स्थिति को सुखी बताने के लिए। वो अफसोस करता है। उसे पता है की चाहे आप कितना भी प्रयास कर लो, बुतिक जगत में असली सुख प्राप्त नहीं हो सकता। वो जानता है कि अगर ऊपर असली उपाय तो क्या है। साधन चेिनेवापरभुभारत की यात्रा कर रहे थे, तो वो पहुंचे 1 ब्राहमण के घर में है, जिसका नाम था और उस का। ब्राहमण ने कहा, मैं भी आपके साथ चलना चाहता हूँ। माँ को। माँ ने कहा, मेरे साथ चलने की आवश्यक कमी है। जा हो वाही रहो, पाई नाम का उचारण करो, पाई नाम का प्रचार करो, भगत गीता पढो और भगवत गीता के संदेश का प्रचार करो। 1 भक्त थे का नाम था वास्तव। वेपरावासतेवपेपरा जो था उन्हें कोढ की बीमारी थी, और उनका पूरा शरीर भर गया था। कि बस और पोती के साथ तो से परा की इच्छा थी, इच्छा थी क्यो ने प्रभु का दर्शन, जब उन्हें पता लगा महा प्रभु कुरमा ब्राह्मण के घर में है, वो वहाँ पहुँचे, नका लेने ल, पर मा प्रभु वहाँ से चल पड़े थे। माह प्रभु क्यूँकी है, वो समझ गए की ये बाजे देने के लिए और दुखी है कि मैं चल पड़ा दर्शन। वो वापस गए और वापस गए। उन्होंने वास था जैसे हमने कहा, मुझे कोढ की बीमारी थी, पूरा शरीर भरा था फुंसियो के साथ और पस के साथ, और वो इतने दयालु थे, अगर उनके शरीर से कोई कोई कीड़ा नीचे गिरता था, उसको उठाकर वापस छोड़ देते थे। उनके शरीर से इतनी बदबू आती थी कि वो बाय थे। सब दाने हो जाते, पर उन्हें क्या किया, उन्हें गले लगा लिया। और जैसे ही गले लगाया, उनका क्या हो गया। और सारे पास त्यादी सब समाप्त समाप्त हो गए। बाबू आज आपकी कृपा से कहीं मैं घमंडी नहीं बन जाओ। तुमने क्या करना चाहिए? जिस प्रकार तुम्हारा उधार हुआ है, उस प्रकार समझाकर क्या करोगे, दूसरों को धारण करो और उधर करोगे तो भाव से सेवा कर। पाओगे। तो पापाजी तापर कहते हैं ये जो आदेश भा प्रभु ने वस को दिया, आदेश इस संस्था के सारे भक्तों के लिए है। इन भक्तों को उदार हुआ है। हमें क्या करना चाहिए? क्या करना चाहिए? प्रयास करना चाहिए।
क्या?
क्या कहते हैं परा दुखा दूखे। तू प्रचार करना परेशान काम नहीं है। पर हमारे जो वैश् चाय है, सबने इस विषय पर बल दिया। प्रधान में। आज क्या कहते थे, कहते थे जब मैं देखता हूँ किस प्रकार भौतिक भारी दुख की स्थिति को सुख की स्थिति मे बदलने का प्रयास करने मुझे अत्यंत दुख होता है। बौद्धिक समाज में आप क्या देखते हो? ये समाज है। इस प्रयास करें क्या की सुख प्राप्त हो और सुख कैसे प्रधान। राज कहते हैं यह नहीं जानते कि अति सुख शांति प्राप्त हो सकती है कैसे? इस ज्ञान के द्वारा। तो ये जो प्रचार की सेवा है, यह सबसे महत्वपूर्ण सेवा है। और हमारे 4 ने इस विषय पर बल दिया है। ठाकुर भक्ति विनोद पहले महान चाहिए थे जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय प्रचार आरम्भ किया। क्षेत्र ने मा ठाकुर बक्से चेतन मा प्रभु के ऊपर 1 ग्रंथ प्रकाशित किया था। और उन्होंने ये ग्रंथ विश्व के अनेक मा विद्यालयों को भेजा। और आगे उन्होंने अपने प्रतिनिधि की। और ने यह आदेश दिया किसे और समय प्रॉपर के साथ ज्यादा कुद। और उन्होंने ने 1 मृदंग की तस्वीर खींची। अगर भगवान तुम्हें सुविधा दे तो क्या करना को प्रकाशित करना। तो आप देखोगे कि चोबैसवभक्त हैं, उन की क्या क्या प्रयास रहता है। इन गधों को बाटे और क्यों बनना चाहते हैं। क्योंकि इन गंधों में क्या है, क्या है दिव्यज्ञान। आज अगर समाज में किसी चीज की कमी है तो किस पेशे की? ज्ञान की कमी है? बहुत ज्ञान की कमी नहीं है। कुने जाओ 5 साला है और आप बहुत ज्ञान प्राप्त है, कमी है राजवि जो ज्ञान है, यह सबसे महत्वपूर्ण ज्ञान है। तो ये ज्ञान आधार ज्ञान कैसे? पहले फैले कैसे भक्तों के भक्ति सिधांत ने आदेश दिया था वह भगवान में सुविधा दे तो ग्रंथों को प्रकाशित करना और बना। और यही संदेश प्रॉपर ने अपने शिशन पर दिया जा। प्रॉपर के प्रॉपर अमेरिका पहुंचे थे, पहली बार उन्होंने अपने भक्तों को कहा डिस्ट्रीब्यूट बुक, डिस्टीब्यूट बुक। और तो भग जो थे अमेरिका भाग मे वो चिंता में थे, ोबाजी कहते हैं किताबों को बांटो, हम कैसे बांटे, किशन देश है। और यहाँ वैदिक संस्कृति के ऊपर ग्रंथ हम कैसे बंटेंगे वो चिंता में थे। परवाज कहते थे बाबा। तो हमारे 2 भाग समकतनकरकेजबबंद लौट रहे थे। तो रास्ते में रुके पेट्रोल लेने के लिए गाड़ी में और उन में एक्सपेरिमेंट करने 2 $10 का पेट्रोल लिया था और $10 देने की बजाय उसे पेट्रोल बम के मालिक को पूछा। note puta call i give you this book ten dollars kisna cpk आई थी japan in a so सो उस व्यक्ति ने उस किताब को देखा, अच्छी तरह आई विल टेक तो भक्तों ने देखा की 1 व्यक्ति से प्रचार किया और उसे इसे भक्तों का हौसला बढ़ गया। उन्होंने प्रयास करते गये अलग अलग तरीकों से और हस्ते हस्ते क्या परिराम हुआ हजारों की संख्या में की किताबें अमेरिका जैसे देश में बिकी थी। और पापा जी बड़े प्रसन्न हुए। जब उन्होंने देखा की हजारों की संख्या में तो कहने का तार पर यह है कि भक्तों की क्या इच्छा रहती है की दुखी व्यक्ति सुर्खी बने। भक्तों में यह विश्वास किया कि चाहे आप कितनी भी सफलता प्राप्त कर लो, असली शुल्क प्राप्त होगा। केवल सेवा भगवान के तो वैसा जो है प्रयास करते हैं, क्या भगवान के तो ये प्रचार की जो सेवा है 1 रूप से मानना पड़ेगा की कठिन सेवा। आप अगर रसोई बना रहे हो, मंदिर साफ़ कर रहे हो, पुजारी कर रहे हो, ये कार्य चर के लिए जाते हो तो क्या नुभव होता, क्या होता है सब साथ देते है हो। जब चेतन माँ बहु ने प्रचार आरम्भ किया, प्रभु ने क्या कहता है जिसे भी भेदभाव के बिना क्या करो, हरदास बुलाया जाओ घर घर कि क्या करने से आगे बोलो। कृष्णा, कृष्णा सबको बोलो क्या कृष्णा का उनकी पूजा करे उनका उपासना करे। सो महा प्रभु के आदेश के नुसार है। दास कहते हैं भगवान द इस से ज्यादा शक्तिशाली कोई टीम हो सकती है। नंदा और भगवान नंदा और फायदा घर जाए हम कभी सपने में नही देखे। 3 से ज्यादा शक्तिशाली कोई टीम होगी। घर घर जा रहे थे, कहने भी वो घर घर जा रहे थे, सब भक्तों ने स्वागत या कई घर पहुँचे, यहाँ के लोगों ने कहा संत गये हमारे घर को बना देंगे, बैठिए बैठिए बैठिये क्या आपका देश बोलो। कृष्णा कहते थे कई घरों में गए,
आगे
लोगो के बेसी की ये का तुम पागल हो। हमे भी पागल बनाने आये। अच्छे मा ने अपना केतन का आंदोलन आरंभ किया था तो जो मुसलमान थे उन्होंने काले को शिकायत की थी। उन्होंने कहा था अगर हम माइके है राम को नहीं रोकेंगे तो सारे मुसलमान हिंदू बन जाएंगे। और जो हिंदू ब्राह्मण थे उन्होंने भी विरोध किया क्यूंकि उनकी आमदन कम हो रही थी नाम की तो कोई खर्चे की आवश्यकता नहीं। तो वो इन ब्रामणो ने कहा ये जो निमाना शुरू किया है ये संकृतन, यह हमारे धर्म के आधार पर नहीं है, यह बनावटी कार्य है। तो उन्होंने हिंदू ब्राहमण शिकार किया जा रहे थे। कइयों ने स्वीकार किया, स्वागत किया। कइयों ने कहा लो जो पागल महा प्रभु के महा प्रभु के प्रभाव में आ गए तो हमें पागल बनाने की कोशिश करेगा। और महा प्रभु ने जब आंदोलन आरम्भ किया था वो केवल शिव संगन में वो क्या कर रहे थे। हर नाम और शिव सागर में ये हरनाम को देखने के लिए केवल चुने लोगों को सुविधा दी जाती थी। और नम के कई निवासियों को याद नहीं मिली थी। अंदर आने और मा बाबू इतने स्ट्रेक थे खेर, जो भक्त एडवांस भक्त थे, उन्हें पता था, यही समझ पाएंगे में उन्हें दिया गया था। जब कीर्तन हो रहा था। जो भाई घर घर जा रहे थे, हमने प्रयास किया था शिवा धनगर में, किर्तन में उपस्थित होने के लिए। अंदर आने नहीं दिया। अब हम आने नहीं देंगे इस प्रकार से हरिदास की। तो इसे आप देख सकते हो की अगर भगवान हरिदास को ऐसे बेसी की जाए। वही छोड़ जब आप ना मिल जाते है, जब आप बुक डिस्ट्रिप्यूशन मिल जाते हो, तो आपका भ्यास होगा की कई लोग तो बड़ी उत्सा से आपका स्वागत करते हैं। नहीं, कई कहते हैं। हाँ, हम तो तुम्हारी राह देख रहे थे, कब आयेगा दिसम्बर में था। क्यूकी? आपके जो भी भक्त जुड़े हैं, सब जानते हैं कि जंदेउपलक्ष हर साल किया करते हैं। तो कई भागते हैं जो तैयार रहते हैं आपको किताबें लेने के लिए, और कई भागते हैं जो की नहीं लेते करने पर भी नहीं लेते। भक्तों को लगता है हम जब में जाए, ऐसा वतन होना चाहिए। देखते ही सब के कई बार बात करते हैं, अगर होकर है किताब। 2 हम खुश होने तक खुश होते हैं। और जब वो देखते हैं कि इतना प्रयास करने के बाद भी लोग थोड़ा डिस्क्राइब हो जाते हैं, तो बड़ी कठिन सेवा है? तो कठिन सेवा में ज्यादा कृपा मिलती है जितनी कठिन सेवाएँ? हमारा प्रयास भगवान को खुश करने के लिए। और प्रापा जी ने भी इस विषय में उदाहरण दिया। वो प्रापा निवास कर रहे थे, कह दी दिल्ली में क्या करने के लिए बने और को बाटने के लिए। और उन्होंने इन गंधों को काटा फैक्ट्री गोरडेडप्रत्रिका जो थी उसको लेकर कॉफी हाउस में भी जाते थे। 1 बड़ा प्रसिद्द कॉफी हाउस था पहले, पता नहीं o is copy husan राबा जाकर क्या कर रहे थे, लाइबरेरी में, बा जा रहे प्रथम को प्रकाशित किया था, 2 बोल में, और उसके पश्चात 3 बोली में, और 1 तरह से प्रभा जा रहे थे कॉफी हाउस, 1 तरह से प्रापा जी जा रहे थे लाइब्रेरीज में और साथ में सड़क में भी। राज के पास, उसमें वन मैन, वन मैन आर्मी थी। अनुवाद करना, तो का, अनुवाद प्रकाशित करना, चंदर, खट्टा करना, बाटना सब का यह प्रजा, इसे आप देख सकते हो। प्रॉबबजीनेअपने उदाहरण से हमें यह बताया कि कैसे हमें प्रयास करना चाहिए। इसलिए इस प्रचार को आगे बढ़ा न। तो ये जो बोकरेस्रेशनकी सेवा है, यह सेवा है समाज के उधार के लिए, समाज के सुधार के लिए। और हमें यह नहीं, हमें डरना नहीं चाहिए। थोड़ा कठिन सेवा है? क्यूँकि? ये सेवा आप किसके लिए कर रहे हो? if you want to please me कई बार लोग सोचते हैं, वे bुकडिटजनकरते है किस लिए? पैसे कमाने के लिए, पैसे कमाने किसे है? यह है, है किसलिए वो चाहते हैं। गिरो सारे विश्व में, गिरो पूछो, आप कृष्ण भक्ति में कैसे जुड़े आपको? 4 प्रतिशत से ज्यादा मिलेंगे। तो कहेंगे इन ग्रंथो के माध्यम से आप में से कितने भगत जुड़े हो के किसी ने आपको किताब दी? अपनी किताब पढ़ी आपकी ध्यानमे, तो हमें यह नहीं सोचना चाहिए की कोई इन गंध को परेता नहीं है। इन गंधों को अगर आप लेहीबीपड़ोआप इन गंधों को अपने घर में रखो, उसी से आपको आध्यात्मिक लाभ तो हो जाए। और और अगर हम इन गर्धव को पढ़े। कबाज ने कहा अगर तुम इन में 1 श्लोक को भी ध्यान से पढ़ो और अपना लो, आपको जीवन सबूत हो सकता ह, ये आवश्यक नहीं। अगर आप किसी ग्रंथ को आज बाँटो तो कल बन जाएगा। कई उदाहरण हैं जहाँ किसी ने ग्रंथ लिया 567 साल खोला, जब खोला से अपने जीवन को सुधारने लगे तो हम सब में उत्साह होना चाहिए, उत्साह तो गंधों को क्या होना चाहिए? आप उत्साहित हो जाए, उत्साहित होगे तो
लोग
खुद ही वहाँ खड़े हो जाओगे। अमेरिका में 1 धारा में है, जो हो बिजनेस में भी है, तो जो अमेरिका में लोग जाते है डिस्ट्रीब्यूशन के लिए, वो 1 टेबल लगाते हैं और खड़े रहते हैं ऐसे लेना खोद देगा पर अगर आप टेबल लगाओ या खड़े हो जाओ मेरे खयाल से ज्यादा किताबें नहीं बची आप भगत लोग उसका से जब प्रचार करते हो तो क्या उसका असर पड़ता है? 1 समय 1 भक्त ने अमेरिकन भक्त ने पर से पूछा की जब हम प्रचार के लिए जाते है तो क्या भाव हो तुम घर में बंदर में हो, भक्तों के साथ कैसा रखो और जो प्रचार करने जाओ, जब क्या यह म शेयर के उस प्रचार, यही नहीं घर में शेर बन जाओ और प्रचार के न तो वैरी इम्पोर्टेंट डिस्टरब। तो आप सब प्रालि में जा रहे हो। तो जहाँ भी हो में हो या बंद में हो, हमें क्या चाहिए, इस भाव से करना चाहिए, शहीद होना चाहिए और फिर दूसरे को प्रभावित कर सकते हैं। तो हमें हमारे प्रयास है क्या हर साल, हर साल मेहतन आता है और हम सोचते हैं खा जायेंगे, दीदी जान, बचानी है, सब समाप्त कर दे। पर आप ये देखोगे, ऐसे सोचते हो जा। प्रयास करते हो तो कोई न कोई व्यक्ति जुड़ जाता है जिसकी इच्छा है इन गंधों को पढ़ा जाए। baba ne a this book will be read for the next ten thousand ears। तो की जो सेवा है, यह बड़ी महत्वपूर्ण सेवा है। और जो भक्त इसमें जुड़ते हैं, उन्हें क्या उन्हें सीमा प्राप्त होती है? तो हमें उषा के साथ जुड़ना चाहिए। और आप में से कितने भक्त हो? ये साल पहली बार जाओगे बुक ट्रैवलिंग में बाकी पहले जहाँ तो प्रयास करोगे तो क्या अनुभव होगा, कोई सम्भव नहीं है ये बुक ये सेवा शुरू हुई थी। पापा जी ने कहा और सारे विश्व में भक्त प्रयास करे क्या किताबों को मारने के लिए आपने देखा होगा कि विदेश में भी, यहाँ की विदेश के देशों में इस समय ठंडी का मौसम है। और उस वादन में भी भक्त क्या करते हैं, प्रयास करते हैं। इन गंधों को तो हम सबको प्रयास करना चाहिए क्या
में
और अगर आप ट्राई करेंगे तो क्या परिणाम होगा? भगवान की कृपा प्राप्त हो। हमें आप बुक डिस्ट्रिब्यूशन में जा रहे हो। मान लो आप गए, 6 घंटे ले और आपने इन्ही किताबों को नही होगे। मेरा टाइम वेस्ट हो गया, 6 घंटे गए और 1 किताब। और भगवान की दृष्टि से आपको क्रेडिट मिलेगा पूरे 6 घंटे भगवान कहेंगे? इस वक्त ने प्रयास किया था? तो बुक डिस्ट्रिब्यूशन की सेवा में कुछ भी कु प, थोड़ा भी प्रयास करोगे तो उसलिए से भगवान प्रसन होते है। आखिर गंथ में है, क्या? क्या है, मन में कृष्णा का सन्देश? क्या, गीता का सन्देश क्या है? भगवान का सन्देश में है भगवान की वाणी। तो ये बुक जो सेवा है, हमें उत्साह से करना चाहिए। कठिन सेवा है? हम आपको गलत इम्प्रेशन नहीं देंगे। 1 कठिन सेवा है। पर कठिन सेवा में भगवान ज्यादा कृपा भी देते हैं। और अगर हम प्रयास करें तो आप कामयाब हो सकते है। तो नारदमुनी कहते हैं अगर आप भगवान को प्रश्न करना चाहते हो तो 3 चीजों की आवश्यकता है। 1 है दया दया भाव। आगे आपको। मन बुद्धि हिंदियों पर वश करना चाह। आध्यात्मिक जीवन में जब आप प्रवेश करते हो, जब आप ग्रंथों को पढना शुरू करते हो, आप देखते हो कि यहाँ क्या उद्देश्य है। उदेश्य यह है की हमें सीधा महाराज की कुी। तो ये उम्मीद की जा रही है। रतन जुडेंगे सा के साथ शब्द शब्द वो बन गये। अंतरराष्ट्रीय शब्द किसी मतलब अधिक प्रयास करना। तो वो विभाग के साथ 50 भाग जा।
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ता के साथ बोडी मंजू सुंदर के साथ टैनिंग शुरू हो गई है। बोली मंजू सुंदर के साथ पंद्रह भाग ट्रैवलिंग में हैं। वो बड़ी खुशी की बात है कि आपके मंदिर से 70 भाग भी ट्रैवल में होंगे। और जो दूसरे भगत हैं, वे जो लाइफ मेंबरशिप के भक्त हैं, वो भी बड़े एक्पोर्ट चारक है। महा मंजर में नंबर बनाते हैं। कई लोग चाहते हैं कि गंद बढ़े तो वो खुद नहीं कर सकते। क्या कहते हैं, ठीक है। इन किताबों को लेकर बिहार पर बा। तो हम सबको मार में जोड़ने के लिए उत्साह से प्रयास करना चाहे। तो का कई बार भाग पूछते हैं ये भावना कहा से आएगी गुस्सा है? अगर आप साधना रखोगे अच्छी तो उसा भी रहेगा pयूritीफोरतो ये भाव की हमें इस का प्रचार करना चाहिए। यह भाव कैसे आएगा पवित्रता के द्वारा आपको मित्रता कैसे कैसे आएगी अच्छी सान तो चाहे मसान हो या नहीं हो। आपकी साधना माला का जाप करो को बोलो दौरा। आपको आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त हो। तो धान मुनी कह रहे हैं से 3 चीजों की आवश्यकता है दया की। भावना मन बुद्धि नदियों को वैश्वि रखना और संतुष्ट है संतुष्ट रहना। बहुतिक समाज में कोई भी संतुष्ट नहीं हैं। जो करोड़पति हैं, वो भी संतोष नहीं है, कोई संतोष नहीं है। भौतिक कार्य के द्वारा आप कभी संतुष्ट नहीं रह सकते। इसलिए शासन में क्या उपाय दिया है। 4 से मन िंदियोंकोवचमे कर पाओगे और संतुष् प्राप्त होगी। तो ये जो श्लोक है। गम का बड़ा महत्वपूर्ण श्लोक है। और हर साल हम भक्तों को कहते हैं। इसे कंडसकरनेआपमेसे कितने भक्तों ने इस श्लोक को कंटर्स किया है। बस सब को करना चाहिए। क्यूँ इसका जो उपदेश है, बहुत ही महत्वपूर्ण है। तुम रतन शुरू कर रहे हो। सब जाओगे हाई किश सरदार महाराज जो माराज बोलना चाहते हैं। माता जी राज बाम्बे बंदर की हेल पुजारी थे। बोझ साल रायपुर में है और हर साल गोवी भाव की सेना बन जाती है। महाराज आज शाम को जा रहे हैं। थोड़ा बोलोगे महाराज नहीं आ पाया बोल 2 मैन का हिस्सा बनाने के लिए। महज गला बैठा हुआ।
हमारे बहुत बहुत थे, sir लगा दी
ने पेशल स्लो ये भग, जाने कल
सुबह से तो ना ही पढ़ाया पा रहा है। तो हम लोग कितना भी सेवा करे, आश्रम में रहते हैं। शाम तो पुस्तक बांटना बहुत जरूरी है, मेरा दे रहा हूँ। महाराज
तो देखा के बाद
पडे
तो
बुलावा तो मेरे आया प्रणाम क्या किताब जाते हो न कितना हर दिन भारते से डबल ले के जाए डबल लिया। मैंने आज 3 बजे 2 या 3 तुम्हें कोलोनी कोलोनी जाता था, क्यों दिल्ली में उस समय था फुटबॉल की करते हुए करते हैं तो पुलिस बंद कर दिया था। रोना गुरू भाई के घर सुन्दर
में
उधर नहीं जाता था, घर में दरवाजा आई, काला तीर क्यूँ हो काला मल करने के बाद काला टीका होता है। बोला मेरा नाम करण हुआ है, मेरा नाम दुर्गा जितने किताब ले जाओ। वे काफी पुस्तक ले है। सो हम रख लेंगे अपने बहन को सब ले वापस आ गए। जमा कर 5 बजे। फिर सुन्दर हमारी साथी किताब जाता नहीं
है,
जमा करते हैं तो गुरु महाराज के गुरु मुख का गुरु महाराज डबल सन हम लोगो को भी आपको बताया था। मुझे बहुत खुशी हो रही है की आप आर सी थोड़ा बहुत जो भी था दीदी, पूरा नंबर आय कोशिश करे सब कुछ। मैं इतना देखने में ठीक लग रहा हूँ, लेकिन मैं
मेरा नया लाइट।
अध्यार्थी जीवन का पहले मैं बताया हूँ। गुरु है गुरु की कुछ आगे से गुरु का वास बारी बोलते है, पालन करे न के सवाल नहीं हो सकता है, करो नहीं हो सकता तो कल बताया की मैं नहीं कर पाया। और उसी समय कितना गीत, कितना बजट
कोटा कोटा, क्या कोड कोटा पिछले, कितना मिला कर
5 लाख पर राज का आदेश हो तो होगा ही है। आजकल पानी आया तो जहाँ भगवान
पानी
का बहुत नुकसान महाराज स्वयं बहुत नुकसान हो गया है महाराज कोई बात नहीं राम सर मेरा दोस्त है, वो माफ़ कर दे की भाव में है। बहुत अच्छा जाता है महाराज की वाणी
बोलने
अभी तक
बोरे
कोटा कोटा बहुत दिल्ली का कोटा
5 कला का बजे हो जायेगा
महाराज आशवाद गोले
की सुता का जिम्मेदारी मेरा
पर
कितना पैसा है। आजकल कितना 21 सौ का कितना बड़ा करने का प्रयास करूँगा।
आपको
सिलरहबार
थोड़ी देर।
गोपाल महाराज
बोले
बुला के ले आओ और ले ले मैं भी पाकिस्तान हिंदी पाकिस्तान महाराज के बोले तो रशिया को मारे।
दूसरे दिन,
दूसरे दिन ग
ओके
बागी
जी, महाराज का बहुत बहुत धन्यवाद सिद्धात महाराज बहुत बहुत धन्यवाद महाराज का भी धन्यवाद की सबका उत्साह बनाया भक्तों का बहुत जरुरी है क्यूंकि जो शक्ति है, जो पावर है, जो कृपा है महाराज के थ्रू आ रही है और तभी हम लोग, हमारी बैटरी भी चार्ज होगी भर जाने के लिए, भार जाने के लिए, हमारे पर शक्ति की यकताहै
माहौल
में तो आप सबसे रिक्वेस्ट है आप बुक्स ले सकते है बुक्स अवेलेबल है जो बुक्स का प्राइसिंग है वो इस बार नॉर्टोग्रीजिन के लिए 1 ही प्राइज पूरे नार्थ इंडिया के लिए 1 ही प्राइजिंग है। बर्थों के टाइम में हिंदी का डेढ़ सौ रुपया, इंग्लिश का 180 रुपया। ये प्राइज याद रखियेगा गलत कोट मत करिएगा, कम प्राइज कोट करिए ज्यादा प्राइज कट कर जो वभिगीताका प्राइज है क्यूंकि नॉर्टन सबका ध्यान चंदीगढ, हिंदी सब जगह बहुत गीता का 1 प्राइस तो ले सकते है और कल जो है बता चल जाएगा उसके अलावा कर ग्रेजेशन को भी हम लोग एंकरेज कर रहे है, फरदवातीकग्रेगेशन ने सवाल किया है
के है
और उन्होंने कहा कि प्रो पाजी का ये 125 सौ बार लिए हैं इस वजह से उन का सवाल तो इस बार थोडा बड़ा पड़ेगा प्रो पाजी हमेशा कहते थे की डबल नहीं सिल 2 साल से तो सिल नहीं हो, बहुत कम हो गया तो 2 साल जो अब अच्छे से खराब कर ली है वो सारी एनर्जी हमार पास बची हुई है तो उस एनर्जी को यूज कर इस वर्ष 2021 में ठीक है 2 साल का अभी हमारे पास क्या है कवर करना 2 साल का जो एक्चुवल होना चाहिए था वो नहीं हुआ है वो सारा सारा गाँव जाता है इस साल कवर करना चाहिए हमें तो आप सब से रिक्वेस्ट है क्यूँ की हमने सारी गुप्तों को भी प्ले कर दिया है और आपने जो किया है उसका फॉलो करेंगे पीछे से उसकी चिंता मत करिए आपको याद दिलाएंगे बार बार की कितना क्लेश किया है हमारे के फीचर्स है उन्होंने भी पेश कर दिया है इस महा को क्लैश किया कम से पंद्रह हजार 1 व्यक्ति से तो मैं तो फिर याद दिलाना चाहूँगा जिस जावा बाली को याद दिला दे की कितनी
शक्ति है
याद दिलाना पड़ा तो प्रभु जी ऐसे ही हमारे भाव है और 1 समय उन्होंने कुछ साल पहले मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के 1 लाख
का था
तो उनके पास कुछ शक्ति है, ऊर्जा कई बार छूट जाती है तो उसको कवर कर रहे है उसका अवरोध हटा रहे हैं और उसे प्रा कर रहे है की इस साल चमत्कार करके दिखाए तो आप सबसे रिक्वेस्ट है प्लीज आप लोग साइट रहे और हर बार स्तर बैठे हैं हमारे 1 और बात है जो भी आवश्यक तो यह पारी गुरुवार सोच सोच समझ के लाभ दिया को मार बिल्कुल सही बैठता है और ये सातों समुद्र पार कर के जा सकते है
और
मायापुर मंदिर के लिए मायापुर में हॉस्पिटल है और हॉस्पिटल के लिए भी बहुत अच्छा ला तो इसके लिए कोई भी पॉसिबल नहीं है और इसे करते है की कुछ बड़ा करके दिखाया गया अभी बताया ही नहीं लेकिन बात से पता लगे आपको बता
1 चीज है आप को कई कई लोग है किताब की कीमत क्यों बढ़ रही है। यह साल क्या मोल। प्राइस कोने पिछले साल गया था ज्यादा नहीं बाजार में पेपर का बाय प्राइस है। 30 पर्सेंट बढ़ गया है। 1 साल में 30 पर्सेंट छुपाई की कीमत बहुत बढ़ गई है और बीमीरी लगभग कासफाईफामलीपेचरे है। सो अगर कोई कहे रेड गूम बढाए बता सकते हो जिसका भी अनुभव है। इस किताबों को छापने में कोई जानता है। पेपर की प्राइस बढ़ गई है और प्रिंटिंग प्राइस भी बढ़ गई है। मजबूर है हमें आना पड़ रहा है।
अगर आप गौर से देखें और एडिशन जो बहुत ही जा लगा है मार्केट में उसके अगर प्राइजेज कंपेयर करेंगे तो हमारा सबसे सस्ता है तो क्वालिटी कंपेयर कर और क्वालिटिटी क्वालिटी साइड भी है क्वालिटी ऑपसाइडभीहैतोउस हिसाब से हमारा जो प्राइस है बुक का बहुत जीता वो सबसे सस्ता है। पूरे मार्केट में परमहनयोगननवालों का भी है वो 3 मोलिम और 1 ही कॉलम ढाई सौ रूपए का है तो 700 साढ़े 700 रुपए की गीता 1 से तो उसे साथ तो हमारा सबसे ज्यादा सस्ता है और इंडिया में चिंता मत करिए लोगों के पास इतना है कि दे
ग।
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