भक्ति क्यों करनी चाहिए ? | SB 4.8.22 | 7 Jan 2018 | ISKCON Raipur | Gopāla Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja

Gopala Krishna Goswami Maharaja explains why bhakti-yoga matters: material success and worldly security are temporary, while surrender to God and devotional service free the soul from cycles of birth and death. Mental distress comes from attachment and ignorance; chanting and seva, especially sharing sacred texts, offer lasting happiness.
Chapters
mega timndsiazaa के कन्या मन
रहे
सर ramreradadati सुंदर श्लोक का उ्चालनसनीतिमाता कर री है। वो दे देवी है। हम सब को पदरोंमनानके माध्यम से श्ीमाभागुदमका। हर लोग चीनी जैसा मीठा है, लोग हैं, हर शोक मीठा है। कई लोगों का, कई लोग थोड़े ज्यादा मीठे दूसरे लोगों से, वो, उनमें से 1 ही 1 श्लोक है। धरमराज का अपमान किया था उनकी सौतेली मां ने। उनके पिता को जाना। पाला के 2 पतियां थी सुनी थी और सूरीजी। धुवा। सुनीति का बेटा और उतमा था। सुरीजी का बेटा 1 दिन सुरीजी के साथ बैठी थी, उसका बेटा पिता की गोद में था, जब धो ने देखा कि उसका सौतेले भाई पिता की गोद में सोने में प्रयास किया गोद में भरने के लिए। सौतेली मानेगा नहीं, तुम तुम्हारे पिता की गोद में नहीं बैठ सकते, जब तुम्हारा सौभाग्य होगा कि मेरे गम से जन्म लोगे, जब तुम्हें यह अधिकार प्राप्त होगा। pati चुप रह। हालांकि सौतेली मायने कठोर शब्दों से डाट रही थी, पति ने कुछ नहीं कहा। इंग्लिश में कहते हैं हंपेकहजबenजोकीबलो की पत्नी के राज्य को चलने देता है। धुर ने बड़ा मान महसूस किया और उनकी सौतेली माँ ने इतनी जोर से चिल्लाया था कि महल के सारे नौकरों ने नौकरों ने भाग के बोल दिया। सुनील, आज तुम्हारे बेटे का बड़ा भारी अपमान हुआ है। रुल रोते रोते गए माता के पास। और माता ने कहा मैं तुम्हारा सहयोग नहीं दे सकती, क्योंकि तुम पिता मुझे कुछ आदर नहीं दे रहे। कौन मदद कर सकता है? मैं लोगों की इच्छा थी। 1 बड़ा विशाल राज्य प्राप्त हो, इतिहास में किसी को प्राप्त नहीं हुआ था। दादाजी उनसे भी ज्यादा बड़ा। धुआ ने कहा कौन नहीं मदद कर सकता है? माता ने कहा मैंने सुना है, भगवान ही मदद कर सकते हैं। तुम्हारे कहाँ प्राप्त होंगे सुना है? जंगल में तो धरमराज की कथा वही प्रसिद्ध कथा है। चेतने मा प्रभु। उनके साथ ही अक्सर जब बगल की चर्चा करते थे तो धरमराज पलानिलीनौंगा करते थे। रासली लगा नहीं तो इस लोक में मसमीतीमातामहाज को उपदेश दे रही है। ये उपदेश हम सब के लिए है। ना केवल माध्यम बने हैं ये उपदेश देने के लिए, खास कर के आप रायपुर के भग्न के लिए है। तो के क्या कहने हैं ये मेरे बेटे तुम परम भगवान की शरण लो। अब मार की शरण क्यों नहीं? पर में आई आई टी में ले दे रा था आई आई टी कानपुर में। तो 1 विद्यार्थी ने पूछा, why why why do we have to believe in god? भगवान में क्यो तो कई बार लोग पूजते हैं भगवान की शरण को, भगवान की लेनी, हमारी भलाई के लिए यहाँ समिति क? भगवान के चलन लोग जोकि भक्तों के प्रति अत्यंत दयालु है, भगवान अत्यंत दयालु है। पर भगवान हमें ये सोचना चाहिए। भगवान कृष्ण नहीं लेंगे तो किसकी शरण में रहना पड़ेगा। किसी की तो शरण आपने लेना है। जैसे की कई देशों में नासिक सरकार है, रशिया में 1 समय नासिक सरकार थी। कम्युनिजम तो कॉमुनिजममें भगवान को नहीं मानते। उन्होंने सबोच फैक्ट्री बनानी थी। तो किसकी सर लेन लेनन, का सिधांत पढ़तेरेजव लेनन, वाजा जागा लेनन की फोटो भेज तो किसी के लिए शरण आपने लेना है। अगर हमने किसी की शरण लेनी है। पर अब भगवान की शरण क्यों नहीं है? और अगर दूसरा उपाय क्या है। दूसरा उपाय यह है कि भगवान की शरण नहीं लेंगे तो वहा की शरण में रहना पड़ेगा। वहां के शहर में रहने का क्या? अर्थ आप जुड़े रहो पाप के कार्य में और जनमृदकेबंधन में गुजरते जाओ। तो इसलिए सास का निर्णय है। अर्थात अब मंच अभी मनुष्य जीवन प्राप्त हुआ है। परम भगवान की शरण लो। सो सुनील देवी कहती हैं। तुम परम भगवान की शरण लो, जो भक्तों के प्रति अत्यंत दयालु है। भगवान अत्यंत दयालु हैं। गलती के समय अगर हम थोड़ी गलती कर भी दें, गवान भक्ती को स्वीकार करते। अगर आप रादर बचें तो ये सबसे बेहतर है। और कई बार भक्ती के साथ कुछ बाद हो भी जाए तो भी भगवान आपकी अच्छा करते। वा ने अर्जुन को क्या कहा? हे अrजonतुमसुमाल। सारे माल खरीदो लोग खरीद लेते है, इसलिए उनको कर रुपए दिए जाते हैं। ये सब देश बने हैं। भगवान की शिक्षा से मिली भगवान खुद के से थे। भगत भी नाश नहीं होता। भगवान ने कहा अर्जुन तुम्हे भग 2 तुम बोलोगे मैं बोलूंगा तो लोग विश्वास नहीं करेंगे। अगर तुम बोलोगे तो ज्यादा विश्वास करेंगे। उसी पर कोई बिजनेस मैन को पारी, कोई चीज बना रहा है। वो कहेगा कि तुम खरीदो अच्छा अच्छा माल है। हमेशा नहीं खरीदेंगे। पर कोई फिल्म आगे फिल्म का कार या क्रिकेट स्टार बोलेगा खरीदो। यह अच्छा है। लाइक हमें पता है, उसने पैसे लिए, इसके लिए, फिर भी हम जाके खरीदें। ये आइडिया को मिला। कृष्ण भगवान के उदेश्य से तो सुनील के लिए भगवान भक्त के प्रति अत्यंत दयालु है। जो व्यक्ति जन्म मिति के बंधन मुक्ति चाहते हैं, वो सदा भगवान के चल लेते है। जब आप पढ़ते हो सास में कि भगवान के चरण कमलों की शरण लो, उसका असली भाव अर्थ यह है भगवान के शिक्षा का पालन करो, उनके आदेश का पालन करो। भगवान का आदेश कहा प्राप्त होता है? भागुर गीता में भगवान की शिक्षा कहां प्राप्त होती है? मेरे साथ में क्या कारण है? कि भर प्रयास करते हैं अनेक मात्र में गीता और दूसरे ग्रंथों का बिल करने के लिए कई लोग सोचते होंगे। यह तो हर साल जाते हैं पैसा कमाने के लिए, पर हम जाते हैं। क्यूँ पति उद्धार करना चाहते हैं? हम चाहते कि लोगों का ज्ञान बढे। वान के आदेश के विषय में लोग गीता को पढ़ेंगे और अपने जीवन को सुधारेंगे। और अगर। समाज में किसी जी की कमी है। ज्ञान की कमी है तो प्रचार की। जो सेवा है, सब सेवाओं में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। सेवा तो हर प्रकार की लाभदायी है। और प्रचार की सेवा में क्यों ज्यादा? कृपा जब प्रचार में जाते हो, आप चिंता में भी रहते हो। यह व्यक्ति गीता लेगा या नहीं, यह व्यक्ति साथ देगा कि नहीं है कि नहीं? 1 समय 1 भक्त ने प्रॉपर से कहा, property i gon book distribution may eंगाitiincreses मेरी चिंता बढ़ जाती है, में प्रचार में जाता हूँ। मेरी इच्छा तो देती कि लोग किताब ने वो नहीं लेते, कहीं लेते हैं, कहीं नहीं लेते। बाबा ने उतर कहा ये जो चिंता रहती है, आपको गुगराले, ये चिंता है। सौदा माता की चिंता के बराबर, यशोदा माता सदा चिंतित रहती थी। मेरे बेटे को कुछ हो ना जाए। में भगवान की लीलाओं के वेश में पढ़ते हो। कि जब भगवान प्रकट किस प्रकार सूर ने, तो यार का पूतना राक्षसी के रूप में आई। इस विचार से कि स्तन में जहर होगा और कृष्ण का बाल हो जाएगा। कई आंसू आये हैं कि नहीं। सदा चिंता में थी, मेरे बेटे को कुछ होनी जाए। हालांकि ब्रिजवासी का भाग्य था। ये शेर नारायण है। 46 पर नारायण की कृपा है, शरीर देवता तो नहीं है। इतने बड़े बड़े स्कूल आते हैं, उनकी सुरक्षा हो जाती है। तो शोध मादा सदा चिंता में थी। मेरे बेटे को कुछ हो न जाए। उसी प्रकार भगवान की सेवा के संबंध में, जब हम चिंता में होते हैं, ग्रंथों को बांटना मंदरगनिर्माणकरना तयारी शोदामहताके चिंता के बराबर है। चिंता तो रहेगी। ध्यान दें, बहुत ठीक है। ये नहीं की बहुत बात उनके मन में चिंता नहीं रहती। उनके मन में अनेक प्रकार की चिंताएं हैं। इसलिए आजकल लोगों को मेंटल डिप्रेशन हो जाता है। है न मेंटल डिप्रेशन बहुत कॉमन है। हम बड़ी, बड़ी इच्छाओं को रखते हैं। जब उन्हें प्राप्त नहीं कर सकते तो आत्महत्या या डेरे तो सुनीति कहनी है? जो व्यक्ति जन्म मृत के बंधन से मुक्ति चाहते हैं, उन्हें क्या करना चाहिए? भगवान की शर लेनी चाहिए। जाना मृतका चक्कर है। केवल कस्टिपोंचाता है। आप चाहे पति बन जाओ। यह जीवन अस्थायी है। उन में पड़ रहा था। पेपर में। 1 भारत के बहुत बड़े व्यापारी ने 40 साल पहले 1 बोल बड़ा
1
छोटा व्यापार शुरू किया था। हजार साल वाल भारत का सबसे बड़ा व्यापार बन गया है। सबसे बड़ी कंपनी पर जिस व्यक्ति ने कंपनी शुरू की, वो तो आज नहीं है। चाहे कितना भी धन कमाया हो, हम देख सकते हैं। चाहे हम बड़े प्रसिद्ध कलाकार बन जाए, प्रसिद्ध नेता बन जाए, प्रसिद्ध खिलाड़ी बन जाए। ये सब अस्थायी है, मृत है वो केवल कष्ट। इसलिए भागवत के 5 के स्कैन में भगवान देव कहते हैं नाम प्रमत करते विकरमा। जो व्यक्ति शासक विपरीत कार्य करता है, वो भी विकर्विकमाकार वो प्रमदा मूर्ख है। क्यों क्यों वो देख नहीं सकता। वो देख सकता है कि यहाँ जो देय प्राप्त हुआ है, वो कष्ट कश दे रहा है? और फिर से जो देय प्राप्त होगा, वो कष्ट कष्ट देगा। तो जो बुद्धिमान वाद, वो क्या कहता है, सोचता है। कैसे में कष्टों से छुटकारा प्राप्त कर। ये जो गीता का वितरण किया जाता है, प्रचार का कार्य किया जाता है, उसका मूल उद्देश्य ये है। हम लोगों को शिक्षा दें। किस प्रकार जन्म मिलता के बंधन से छुटकारा प्राप्त करके असली सुख प्राप्त हो सकता है। लाल मान कहते हैं ने स्वरा। कते में विष्णू लोग ये नहीं जानते कि असली सुख कैसे प्राप्त होगा? लोग सोचते हैं। मौतें कहानियों के द्वारा। उस दिन में यह वाईडी में था। जो कहीं उनसे चर्चा कर रहा था, वो कॉलेज में जैसे आप जानते हो, वो हर जगह हम लोग रंग ले लेते हैं, क्यों लेते हैं, सोचते हैं कि इन चीजों से हमें आनंद मिलेगा, हम कष्टों से दूर हो जायेंगे। यह प्रोब गए थे। पहली बार और पहले केंद्र की स्थापना हुई। उन दिन में। अमेरिका में ड्रग कल्चर काफी स्ट्रॉंग था। अब तो और भी स्ट्रांग हो गए। ड्रग कल्चर मतलब ड्रग लेना। तो अमेरिका के रेड के कई स्टेट्स में अगर डॉक्टर ने मैरवाना लेना, अच्छा सेट मैरवाना और कैमिस की दुकान से ले सकते हो। अब उन्होंने कई जगह लीगलाइज कर दिया है। तो लोग ड्रग्स वगैरह क्यों नहीं देते हैं। ये ड्रग्स लेकर थोड़ी देर के लिए हम समाज की समस्या को भूल जाते हैं। और सपने की दुनिया में जीना शुरू कर दे। दे। सच मुच सच में सपने की दुनिया पर फिर वापस लौटना पड़ता है। हवाई जहाज उड़ सकता है। जब तक पेट्रोल हो, पेट्रोल खत्म होने से पहले नीचे आना पड़ता है। क्रैश हो जाएगा। आप मोटर चिल्ला सकते है। जब तक पेट्रोल हो, उसके बाद मोटर रुक जाएगी। तो लोग ड्रग्स लेते हैं, लेते थे, लेते हैं। इस भावना से सपने की दुनिया में रहेंगे। यहां कुछ उनको याद ही नहीं आता। क्या किया है उन्होंने तो सब परेशानियों से दूर रहेंगे को थोड़ी देर के बाद वापस लौटना पड़ता है, जहां फिर से परेशानियों का सामना करना पड़ता है। भक्तों ने 1 पोस्टर बनाया। चेन हरे क्रष्ण, एन स्टे, हाई, फोरेवर, समझे मतलब, हरे कृष्णा का उच्चारन करोगे। तो सदा खुश उँचारहोगेनीचे। आने की संभावना ही ली। और भौतिक ड्रग लोग, शराब लोग, कुछ लोग थोड़ी देर के लिए सब भूल जाओगे। मैं वापस समझे। जो व्यक्ति बुद्धिमान है, जो व्यक्ति देख सकता है कि चारो तरफ क्लेश है, वो क्या कहेगा करेगा? वो प्रयास करेगा। भगवान के नगर होने के लिए। भगवान गीता में क्या करे। ओ मैं, तुम्हें तुम्हारी सुरक्षा करूँगा। आगे क्या कहते हैं भगवान घबराओ मत, मैं तुम्हें सुरक्षा करूँगा। पर हमारा दुर्भाग्य क्या है? भगवान कहते हैं तुम मेरे धाम लौटोगे, घबराओ मत, मैं तुम्हे सुरक्षा करूंगा। हम हिचकते। आप ने अमेजन नाम सुनाये, सब ने सुना। so amazon विश्व का सबसे बड़ा भय पारी बन गया है। देश में तो लोग एमेजन में क्यों लेते हैं? आपका किन हिससा रेट होता है। वो मेन कारण नहीं है। मेन कारण लोग लेते हैं। अगर आपको अच्छा नहीं लगे है वस्तु और 30 दिन के अंदर वापस कर सकते हो। पुरानी और कई लोग इस्तेमाल करते हैं, फिर वापस करते हैं, उनको भी मिल जाता है। पैसा जी। तो हम विश्वास करते हैं, जब कोई बड़ी कंपनी कहती है, हमारा मान लो नहीं, अच्छा लगेगा तो वापस कर देना। भगवान कहते हैं मेरी सुरक्षा, हम सोचते हैं, शायद सच है, सच नहीं है। भगवान कहते हैं तो खाना आम। हम कहते हैं हाँ तो खाला हैं, पर दूसरों के लिए मेरे लिए नये। दूसरे सब मरेंगे पर मैं बचूंगा दूसरे सब बुरे होंगे। मैं यह सादा जवान रहूँगा, दूसरे रोगी बन जायेंगे। पर मेरे पास उपाय है। योगा करके किसी प्रकार की बीमारी से बचूंगा। ये है हमारा मूल युनेशमासेयूनेशमा बड़े ज्ञानी थे। यमराज ने उनसे पूछा इस विश्व में सबसे बड़े आश्चर्य का क्या विषय है? यमराज ने सोचा था हर समय हम देखते हैं, लाखों व्यक्तियों की मृत्यु हो रही है। हम सोचते हैं। हमारा आदमी आएगा यह उत्तर दिया था 5000 साल पूर्व। आज बादी सोचो। तो सुनिती कह रही है, जो व्यक्ति जन्म मृत्यु के बंधन से बचना चाहें, उन्हें क्या करना चाहिए? क्या करना चाहिए? भगवान की शरण मिली और आगे क्या। अपना स्वाभाविक करत करके अपने आप को पवित्र बनाओ और परम भगवान को हृदय में बिठाओ। परम भगवान को हृदय में बिठाने का गान हर है। बुलाए या नहीं। बुलाए भगवान है। वहाँ की है। हिरदे में पवन भगवान, परम भगवान को बिठाओ। गीता में कहा गया है ईश्वर है। हम कैसे है भगवान तो बैठे हुए हैं। हम न बुलाये तो भी बैठे हुए हैं। जो नास्तिक व्यक्ति हैं, बहुत बार व्यक्ति हैं, उसके हृदय में भी भगवान है। नास्तिक व्यक्ति को भी बुद्धि भगवान देते हैं। सर बस। 4 भेद माता ज्ञान अहान, मेरे द्वारा स्मरण की शक्ति आती है। मेरे द्वारा अपान भूलने की शक्ति आती है। योग व्यक्ति भगवान को भूलना चाहे। उसको भगवान ऐसी योग्यता देते हैं कि भूल सके जो भगवान का स्मरण करना चाहे, भगवान अंतर्यामी हैं। जैसे शिक्षा देंगे, जिसके द्वारा आप साधु संगत में रहो और भगवान का स्मरन कर पाओ। भगवान ने हम सब को छूट दिए। गीता के दूसरे अध्याय में भगवान अर्जुन ने कहा मैं आपकी शरणागत होता हूँ। मुझे शिक्षा दीजिये, जिसके द्वारा या ज्ञान दूर हो। भगवान ने उपदेश देना आरम्भ किया। हा में भगवान ने पूजा हे अर्जुन, क्या तुमने ध्यान से सुना है ये संदेश को क्या तुम्हे ये ज्ञान दूर हो गए हैं ने क्या कहा है? ध्यान से सुना म समाप्त हो गया है। और अब मैं आपके आदेश के अनुसार का ये करने को तो भगवान ने हम सब को छूट दी है। जिस प्रकार आप अगर बगीचे से गुजर जाते हो तो आप फूल को सूखने से बचा लेते हो। कौन सा फूल है? कई लोग अगर बदि सुन के धुएं को सूखने से पहचान लेते। कौन गरबि फ्लेवर है। तो भगवान हमारी इच्छाओं को समझ लेते हैं और उसके अनुसार हमें मार्ग दर्शन देते हैं। तो सुनीति कैरी है कि अपने कार्य से अपने आप को पवित्र बनाओ। राव। कहते हैं sma हे हर, जोन मन बोधि को मुझे अर्पण करते हुए तुम इस युद्ध में लड़ो। मेरी खुशी। तो कभी कभी लोग कहते हैं गीता आप घर में रखेंगे तो लड़ाई हो जाइए। हां कहते हैं हिंदुओं की क्या मुरकपणगीता हम घर में रहेंगे तो पुरुषेतर युद्ध कब, मिला स्थान बन जाएगा। हमारा मैंने कहो। जब गीता लोगे रखोगे तो जो युद्ध है वो समाप्त हो जायेगा। यह मूर्ख लोग क्या हम गीता नहीं चाहिए? गीता रखेंगे तो युद्ध हो जाएगा। युद्ध तो चल रहा है। घर में है। हम स्वीकार नहीं करना चाहते। गीता रखोगे तो शांति का वादा आ जाएगा। वो लोग इतने मूर्ख हैं। तो भगवान ने अर्जुन से क्या कहा? मन और बुद्धि को मुझे अर्पण करते हुए तुम्हें यूज में लड़ा भगवत गीता। कई बार लोग सोचते हैं गीता पढ़ेंगे तो हम समाज में निकम्मा बन जाएंगे। कुछ रुचि नहीं। अगर आप गीता पढ़ोगे हमारी 1 योजना है। कॉर्पोरेशन में जाकर गीता की महिमा का उपदेश देना। अब बहुत सी कॉरपोरेशन में मंचन दे ले। गीता पढोगे संदेश का पालन करोगे, जीवन को सुधारोगे, हिले को सुधारोगे। काम क्रोध लोभ। सब बचोगे। भगवान क्या कहते हैं 3 रास्ते हैं नर एंगल, काम क्रोध लो, काम क्रोध, लो। क्यु कारण कोई मानने से काम करता ही नहीं है। ठीक है शोजा में कैसे चुनाव सच है या नहीं। सोचता कैसे चुनाव में हमारे प्रधानमंत्री 1 योजना है। स्वच्छ भारत। हम कहते हैं हमारी योजना का नाम है स्वच्छ हृदय, स्वच्छ हृदय, हृदय को साफ़ करोगे साफ रखोगे। तो काम क्रोध लोभ से बचोगे। ठीक है न। काम क्रोध लोभ से बचोगे, सही न ईमानदारी से काम करोगे। जब काम क्रोध, लोभ से नहीं बचोगे तो बेमानी के अलावा अपन मन में रहेगा ही नहीं। हम यही सोचेंगे हम कहाँ से? 2 पैसे जे में और डाल सके हैं? है कि नहीं? दिन रात हम करप्शन की चर्चा करते हैं कि क्यों नहीं बंद कर पाते हैं। काम को लोग से हम नहीं बचे हैं। हम सोचते हैं जितना कमाल हो उतना कम है, जितना कमाओ उतना ही कम है और कमाओ और कमाओ और कमाओ जैसे बड़े बड़े बड़े पारी और बड़े होते जा रहे है। अगर आप देखो हिंदुस्तान में 1 पर्स बादी के बाद 60 पर्सेंट सब बची है है उससे भी ज्यादा। भारत की 60 से ज्यादा प्रतिशत सम्पति 1 आबादी के पास है। और ये सारे विश्व की सीपी है। क्योंकि लोग और और और और और और जो भक्ता भगवान के लिए सौरी नो कुछ नहीं है। ये है दुर्भाग, अपना मकान बना लेंगे, बच्चों का मकान बना लेंगे, पोतों का मकान बना लेंगे, फिर अगर कोई चिल्ला बच जाए, वो हरे कृष्ण बाल बनायेंगे, अपना मकान बाद में अपना मकान बनायेंगे, बच्चों को मकान मनाएंगे। हम भक्ति के माध्यम से आप अपने शुद्ध हृदय को शुद्ध बना सकते हो। और आगे 1 सुनीति देवी कह री, विचलित हुए बिना सदा भगवान की सेवा में रहो हम बड़ी सरलता से विचलित हो जाते हैं े कुछ कठिनाई का सामना करना पड़े घबरा जाते हैं। सेवा के दौरान सेवा के समान में कोई कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ता है। अब देखिये प्रलाद बनान के जीवन में कितनी कठिनाई थी, धुमधान के जीवन में भी कठिनाई थी, प्रौब के जीवन में कितनी कठिनाई थी। पापा जी को जब भगवान पृथ्वी से न मनाज, ने गोकुल से वृंदावन आ गए, क्योंकि गोकुल में बहुत सूल और प्रापा के जीवन में कितना संघर्ष करना पड़ा। 1922 में गुरु ने आदेश ज्यादा 40 साल लगे प्रभाजी को उस आदेश को सफल बनाने के लिए, पर वो कभी पीछे नहीं हटे। तो भगवान की सेवा के संबंध में, जब हमें संघर्ष करना पड़ता है, कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यह भगवान की कृपा है। क्योंकि जब भग जो है, हर स्थिति में भगवान का स्मरन बढ़ाने का प्रयास करता है। और जैसे कुंती कुंती, मनाने कहती है पादुर संदु सच तराजू, हे भगवान, आप मेरे कशों को बुलाओ। कोई ये प्राथना करता है, कशों को बुलाओ, हम के कश घटाओ, खुली मनाने के लिए, कशों को बुलाओ। पर आगे वो कहती हैं, क्यूंकि जब कष्ट पढ़ते हैं, मैं आपका स्मरण करती हूँ और जितना अधिक स्मरण करेंगे, उतनी जल्दी ही मुझे बंधन से, तो कठिनाई का ये अर्थ नहीं कि आप सोचो ये भक्ति नहीं हूँ। मैं दबी माया के साथ इ सुखियों, आप कठिनाइयों का सामना कठिन स्थितियों का सामना करना पड़े। आप लोग। भारत में तो बड़ी सरल के साथ जाति और बुक डिस्ट्रिब्यूशन में पुलिसवाले दाव को पकड़ते नहीं है। पर ऐसे देश हैं जैसे खर्जेकिसानयहां की इस कौन और किसी धार्मिक संस्था को अधिकार नहीं है। रंत बाटने का पुलिस देख ले तो पकड़ लेती है। उन देशों में भी हमारे भाग सुबह से शाम जाते हैं। ग्रंथों को बाटने के लिए कई विदेशों में, और साथ में उन उन देशों में mines twenty tempratr, मौसम में krishna पिछले हफ्ते, one man, distributed, one ity, six box लड़की ने अकेले 180 बड़ी किताबें पा, तो उस वार्ता में भी भाग जाते हैं प्रचार करने। क्यों? क्योंकि उन्हें पता है हमें वो रियलाइजेशन नहीं है, हम बजी है, हम अज्ञान हैं, हम मूर्ख हैं, हमारे में वो रियलाइजेशन नहीं है। लोग तरफ, उनको उधार किया जाए। पर भगवान ने खुद का अठारहवे दहाई में सब भक्त में सबसे प्रिय कौन हैं। तुम यहाँ पर 4 करता है, ज्यादा हुआ न होगा। और इसी विचार को लेकर हमारे यहाँ चारियों ने भी यही कहा। प्रापा ने क्या कहा? अगर तुम प्रश्न करना चाहते हो तो ग्रंथों को बार 2 अगर आप कहोगे, अगर आप ध्यान से देखोगे, इन ग्रंथों में हैं क्या कृष्ण? भगवान का संदेश। हम कहते हैं प्रवाल के ग्रंथ प्राबालकेग्रंथ। उस दृष्टि से कि प्राबाजीनेकृष्ण? भगवान गिरवानी को यथा रूप प्रस्तुत किया है। और जो तातपर्य है, उसमें भी यही भाव कृष्ण की तो बोला। भगवान की सेवा केवल भागव्त व्यक्तियों को मिलती है। भगवान क्या कहते हैं? मनुष्य नाम सा से लाखों में 1 व्यक्ति मुझे समझने का प्रयास करता है। उन हजारों में 1 व्यक्ति मुझे समझा। तो दातपरिमेकाबाजी कहते हैं परम भगवान मृतियोबदसला है। भक्तों के प्रति बड़े दयालु हैं। कितने दयालु हैं आप? 1 कदम लोगे भगवान की तरफ, भगवान 10 कदम लेंगे आपकी तरफ? इसे क्या चाहिए। मौलिक दुनिया में ऐसे है और 1 पैसा दल, दूसरे के 10 पैसा दारे, लाखों माताओं की दया दया भगवान की दया से कम है। भगवान भक्त के परियाननदयालु है। पर इतने दयालु भगवान नहीं है कि आप अपराध करते जाओ और क्षमा हो जायेंगे। कई बार जब लोगों को इसका परिणाम होगा, तुम्हें वो क्या कह रहे? भगवान? तो बड़े दयालु परिणाम नहीं होगा, नहीं, परिणाम होगा मानेसर काय, पापों का परिणाम। भुगतना पड़ेगा यह मत सोचिए पाप करते जाओ माफ कर दे। जायेंगे कर्मों के अनुसार हमारे हर कार्य के अनेक साक्षी काम देव, ने जानतो। हर कार्य के अनेक साक्षी है तो हर चीज का रिकॉर्ड रखे। आजकल अमेरिका में जो भी व्यक्ति है सबका रिकॉर्ड है गवर्नमेंट के पास। अगर भौतिक समाज में ऐसे कोई रख सकता है। यमराज का कंप्यूटर कभी फेल नहीं होता। आगे भौतिक कंप्यूटर में वाइन सा जाता है न कोई उनके कंप्यूटर को कोई कोई हैक भी नहीं कर सकता है हैकिंग वो कॉमन हो गई है। आजकल अभी लोग कंप्यूटर से भागने लगे हैं। क्योंकि जो भी कंप्यूटर पर लिखो जिनके बाद हैकिंग कल वो हम निकाल सकते हैं। तो और याम राज के कंप्यूटर को हैक भी नहीं कर सकते तो गुदधीमानीकहरी है। पर हम भगवान की शरण लो। भगवान अध्यन दयालु है। और प्रापर्जीकेतापरे माकरी में कुंती ने यह नहीं कहा कि किसी देवता या देवी की शरण लो। उन्होंने क्या कहा किसकी शरण लो। कृष्णा देव भगवान भगवान जैसे की भगवदम के उन्हें कहते हैं। जिस प्रकार पेड़ के जड़ में पानी डालने से पूरे वृक्ष में उसका प्रभाव आ जाता है। कृष्ण भक्ति द्वारा 33 करोड़ देवता देवी सब के प्रति जो भार है वो चुका देते। आप 33 करोड़ देवदान। देवियों की तस्वीर भी नहीं रख सकते। पूरा घर भर जाएगा। कृष्ण भगवान की तस्वीर रखोगे रेदीकोलथरीीकरोर देवता देवियो। ये बड़ा ऐसा मार्ग है तो सुनील देवी का जो संदेश है हम सब के लिए है और हमें प्रयास करना चाहिए। इसका पालन करने के लिए साधु संग लाभ उठाना चाहिए। शंगमकेजनमेरूजी बढ़ानी चाहिए। परशान के समय रूची बढ़ाएंगे तो ज्ञान भी बढ़ेगा। समाज में सुख बढ़ेगा। आज समाज दुखी है, समाज की प्रजा दुखी है। आप नई नई मोटरें देखे। सड़क में और सोच से लोग सुखी है और अगर वो भौतिक सुख है भी हम सब देख सकते हैं। यह अस्थाई है तो असली सुख चाहिए। सुनी दी देवी का उपदेश का पालन करना चाहिए और हम प्रयास करेंगे भगवान सहयोग देंगे। हायकृ्न a hamare bordebointments a no me so co presn no questions yes
पूछिये तो बहुत अच्छा लगता है। अपने टाइम के बाद चाहते भी बहुत कुश।
कई कारण हैं। जब हम शुरू में आते हैं तो हमें हर व्यक्ति वाइकोंतकापतिनी थोड़ी देर बाद क्रिटिकल बन जाते हैं। तो वह कोने का प्रति नहीं है। यह तो माया का प्रति उल्टा कम हो जाता। तो हमें प्रयास करना चाहिए। गुणों को देखने के लिए हमारा सिद्धांत परफेक्ट है, हर नाम परफेक्ट है। कृष्ण भगवान का संदेश परफेक्ट है। पर हर भाग का व्यवहार हमेशा परफेक्ट नहीं हो समझो। 1 का व्यवहार ठीक भी है। यह नहीं कि सिद्धांत गलत है, सिद्धांत ठीक है। तो 1 व्यक्ति की कमी देकर। ये सभी से हमें भी भक्तों को बड़ा एग्जाम्पली होना चाहिए। कोई नुकरी नहीं है मोर कवेंस
महाराज
जी
के बारे में तो महाराज भगवान की माता से बोली की जा। तुम भगवान। लेकिन हम वर्तमान में ऐसा पाते हैं की ऐसा
बोलते हैं।
पहले पढाई कर 2 बेटा ये सब हरे कृष्णा बाद
यह प्रश्न अच्छा है। पर कई माता पिता हैं खुशी से बच को कहते हैं। क्योंकि माता पिता क्यों कहते हैं पढाई करो करो, शादी करो, यह करो कि वो अज्ञानता में पढ़े हैं। और उन्हें पता नहीं ऐसे कैसे प्राप्त होगा। हम सोचते हैं हां बेटा भग बन जाए, लोग हंसेंगे हसेंगे नहीं खुश होंगे जब वो देख दे। हमारे 1 अमेरिकन लीडर है। बहुत बड़ा भग बना। व किशन बैगग्राउंड से था। उनके पिता इतने गुस्से हो गए थे। उन्होंने फिल्म में लिखा कि मेरी कोई संबंधि मेरे बेटे को नहीं जानी चाहिए। मेरे समय के साथ उन्होंने देखा वे दूसरे बच्चे थे, वो शराबी बन गई है, बन गए और घर में नहीं आते थे। और ये भग बेटा अच्छा चरित्र अच्छा होगा। बिल फिर से लिख ली। तो कई बार बच्चों के प्रभाव से माता पिता जॉब करना शुरू कर देते हैं। तो यह प्रचार की बात है। यह बात आपने सीखा सुनीती जैसे ज्यादा माता नहीं है, ये बात ठीक है, सुनीती जैसे ज्यादा माता नहीं है। पर कई बार सुनी थी क रोग बेटे को करना पड़ता है बेटा मावा को कैताहै मैं कानपुर में 2 हज़ार, 2 को मिला अपने माँ बाप को लेकर आए दोनों जॉब कर बेटे का करने का काम कर रहे है। कई की मां साइंस को रवाना कर दी है। कभी प्रेरणा पिता माता से बनती, कभी बच्चों से प्रेरणा ती है मा वाव को धीर। ek he, or or press note questions more question,
how to deal with it is in god for the desindeistrest, so one and down and i out evreotheaniman
ted rating everyone samguldqualeiv अक्सर क्या होता है, हम सोचते हैं हमारे मन गुन गुन है, 10 में अगली गुन है, हम सोचते हैं मैं श्रद्धावाद हूँ मेरे में कोई कपट नहीं है, मैं स्टेटफोर्ड हूँ मैं पोलिटेशन नहीं हूँ, दूसरा व्यक्ति पॉलिटेशनहीउनमें कपट है मैं अपने को इतना ऊपर चढ़ा देते हैं बिल्कु हम majाtamahatmaduse mnjatehookso fiver clock i at it program fivetsounok।
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