ध्रुव महाराज की शिक्षाएं | SB 4.8.34 | 3 Jan 2018 | ISKCON Kanpur | Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja

Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja teaches Dhruva Maharaj's lessons on how devotees should treat others: feel joy meeting those more qualified, show compassion to those less qualified, and practice genuine friendship with peers. He emphasizes sangat, association with guru and fellow devotees, as the foundation for spiritual growth and warns against modern distractions like internet criticism and material comfort-seeking.
Chapters
hi krishna ओम नमो भगते wasवaसुदेवाहमनम भवतेवासुदवासुव ओमन भवतेवासुदेवावेa इस लोक दरुमराजसेsmhegrsna सुनाई दे रहा सबको celi गनाधiकmudmsनagona mana भultेगनारiकan गुना तपे अभी भूले malika nada ा
मैं
हर
मालिकान दल्ले से नाला से सेना
जकथापुयतेनाएड़िका राय से हो चंपा urahisansamba चेहरे से का रविपुयनहाहहा हरि हा े है तुम क्या कर
ना बोलो
गुना धिकानमदम्लिपसे गुनिका गुना धमाके समाज से ताेहूयेहैह मासरजीजमाबसेगभ we have no viitue sisaगुणरधीता
अधिक गुप्त
पुरुष
मद प्रसन्नता अनुभव करेगा अनुरोश दया लोग कम रोगी मैं समय
पानी
कामना
करे घटना
कहा पे दिल अभी हो
ये प्रभावी अलवान
प्रत्येक मनुष्य को इस प्रकार परवान चाहिए। यदि वह अपने से अधिक लोग की गति से बने त उसे अत्यधिक हर्षित होना चाहिए। यदि अपने से कम योग्य व्यक्ति से मिले तो उसके प्रति सदय होना चाहिए और यदि अपने समान योग्यता बालों से मिले तो उससे मित्रता करनी चाहिए। इस प्रकार मनुष्यों को इस भौतिक संसार के त्रिविध का कभी भी प्रभावित नहीं कर पाता। कारे सामान्यता अपने से अधिक ज्योति व्यक्ति को पाकर हम उससे वर्षा करने लगे हैं। अपने से कम जो व्यक्ति से मिलने पर हम उसका उपहास करते हैं और अपने सामान व्यक्ति को पाकर हम अपने कार्यो के प्रति गर्मी छोड़ते हैं। ये भी सभी भौतिक कष्टों के कारण है। इसीलिए भारत होती कि भक्त को संयत भाव से आचरण करना चाहिए। अपने सदी योग्य व्यक्ति से दुेश्करनेकी अपेक्षा उसका प्रसननापूर्वक स्वागत करना चाहिए। कम योग्य व्यक्ति को इडा जाने के बजाए उस पर दया न होना चाहिए, जिससे वह उचित स्तर पर उठ सके और जब समाज को वाले किसी एकरीमेभेंकहोतो उसके समाज, अपने कार्यदल के पति गर्प्रकंटनकरके उसके साथ बितरीलजाजरानरना चाहिए। मनुष्य को चाहिए कि जो शीकृष्णको भूल जाने के कारण कष्ट हो रहे हैं, उन सब पर क्या इन प्रमुख कारों से मनुष्य इस जगत में सुखी बन सकता है।
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प्रत्येक मनुष्य को इस प्रकार व्यवहार करना चाहिए। यदि वह अपने से अधिक योग की री से मिले तो उसे अत्यधिक हर्षित होना चाहिए। यदि अपने से कम योगी वक्ती मिले तो उसके प्रति सदय होना चाहिए और यदि अपने समान योग्य दवा ले तो उसे मिलता करनी चाहिए। इस प्रकार मनुष्य को बहुत दिखा चाह त्रिविध का कभी पालन नहीं कर पाता।
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लोग का उच्चारण ना दमूनीकरेहैंनादमुनी उपदेश 2 मराज के माध्यम से हम सबको दे रहे हैं। आप शीमनभवतामें भगवान के भक्तों की लीलाओं के विषय में पढ़ते हो और किसी न किसी रूप से हमारा प्रयास रहना चाहिए कि हम लीलाओं के प्रति आकेतोoboइlाnी थैंक यू ली। thank you maa pras में अब जो मराज ने कथा पढ़ते हो, हम सभी लीलाओं को हजारों बार सुन बे पर धान को बार बार सुन सकते हो। और तो चेतना महा प्रभु र। उनके साथ ही अक्सर जब बैठते थे, भागवत की चर्चा करने के लिए भी दुआ बनाये और प्लानमान विषय में अधिक चर्चा करते थे। 2 बनाये जैसे तक पढ़ा है, उनके पिता का नाम था मना ना पड़ा और उनके पिता की 2 पत्तियां थीं सुनीति और जी। सुरीजी के पुत्र का नाम था गुमा सुनीत सुनीती के पुत्र का नाम था पिता का आकर्षण सुरीजी के प्रति यह देख। और जब धुर ने देखा के भाई पिता की गोद में बैठा है, उसने भी प्रयास किया पिता की गोद में बैठने के लिए। और जब वो प्रयास कर रहा था पिता की गोद में बैठने के लिए। उनकी सौतेली माँ सुनी, जो पाती के साथ बारी थी, उसने रोक दिया। कहा तुम पिता की गोद में नहीं बैठ सकते, क्योंकि तुमने मेरे गर्भ से जन्म नहीं लिया। अगर तुम्हें ये सौभाग्य चाहिए को पिता की गोद में बैठो तो तुम्हें मेरे गर्भ से जन्म लेना। पड़ेगा। दूसरे शब्दों में कह रही थी ये शरीर थियागो नया देवप्रातकरोफिर पिता की और पिता ने कुछ कहा नहीं। इंग्लिश इतने कठोर शब्दों से डाटा, यह भी पिता ने कुछ नी शतिया खून था। बालक में तो रोते हुए माता के पास। माता ने तो सब सुन लिया था। क्योंकि इतनी जोर से चिल्लाकर डाटा था महल के सारे नौकर सोनिया। और ये सूचना माता को पहुंच गयी। 2 पोंटे जब जो ने कहा क्या बीता? माता ने कहा मैं तो सुन बैठी हूँ, मैं मदद नहीं कर सकती। कोई तुम मेरी मदद कर सकता है। हां सुना भगवान कर सकते हैं। 4 पड़ी स्थिति में लोग में ईश्वर में आते है। 44 श्रेणी के व्यक्त धन चाहिए। दूसरा ज्ञासू यानी log से कुछ दिन पहले नया सा। halanki kristine का इतना तेज प्रभाव है कि यह अंतरराष्ट्रीय नया साल बन गया। हम गोडिबैठनातोपुमे बरसात तो आपके मन में भीड़ होगी, सारे मन में लोग मन, वहाँ भी भीड़। तो दि न से प्रार्थना करे नया साल आशीर्वाद मिले कि हमें सुख सुख मिले। यह हम कहते हैं नया साल। hap्pीनयूइसका अर्थ क्या है। ये पूरा साल ब खुशी से मनाओ। और ये संदेश 2017 में भी लोगों ने दिया। 2016 में में लोगों ने 1 दूसरे को कहा हैप्पी नहीं, 2000 पंद्रह में भी, 2000 में भी है। नहीं। तो हम कहते हैं हम सोचते हैं नया साहब खुशी में, बिताए खुशी में बताए का वर्णन क्या है? डॉक्टरों का दर्शन मत लेना, सारे हॉस्पिटल, बंद बंद हो जाना जाए, जिससे हम छूएं सोना बन जाए। बच्चों के अच्छा स्वास था। हर दृष्टि से शो के किले पर अगर आप देखो। 2017 में क्या बीता। हालांकि सारी दुनिया ने आपको कहा नया सा मुबारक। यह पूरा साल क्लेशों से भरा हुआ है। 2017 में क्लेशों से भरा हुआ था? नहीं, 2016 में पंद्रह भी। तो हम जो कहते हैं ना बार को हैप्पी नहीं, उसका कोई मतलब नहीं है। ऐसे ही हम भ्रम में आ जाते हैं। दुनिया कहेगी तो शायद हम सुर से बिताए। असली शुल्क चाहिए। तो हमारी तो सुनीति ने कहा मैं, तुम्हारी मदद नहीं कर सकती। क्योंकि तुम्हारे पिता मुझे नौकरानी से भी ज्यादा नीचा मानते है। कोई मदद कर सकता है। हाँ, भगवान मदद कर सकता है। तुम्हें भगवान बा प्रश्न करने के ले। मोनी का 1 और नाम है चल गया। वो जानते हैं की क्या बीता है, क्या बीत हुया है, क्या बीतेगा। पर भगवान हरि के हृदय में विराजमान है, किस रूप में, माता में, सा, माता में विज्ञान नाम जा। मैं यहदाइशकाकारण बनता हूँ। और हाना, भूलेगा। तो जब पर भगवान देखते हैं, इस व्यक्ति में गैरी श्रद्धा है, तो भगवान उसे किसी भग्य सम्बंध में ले आते हैं। जैसे भक्त भक्त या ग्रंथ भक्त। पर भग्य संबंध में ले आते हैं। अगर आप ध्यान से देखो, आप सब कृष्ण भक्ति में जुड़ने से पहले आपकी अपनी इच्छा होगी। हमें भगवान कृष्ण नगर बना। भगवान ने आपको किसी के संबंध में जोड़ दिया या मंद के ब्रह्माचारी के माध्यम से। उसी प्रकार भगवान ने देखा, यह छोटा बालक दिर्द है। मुझे प्राप्त करने। हालांकि उनकी इच्छा थी। बहुत 1 राज्य प्राप्त हो बड़ा विशाल राज्य जिसके द्वारा उसके पिता, डाला सब देख सके। सबसे बड़ा विशाल। तो भगवान ने ना जमुनी को भेजा मुनि थे नहीं, जब वर्ता माता का और 2 का और ना जमुनी उपर नहीं थे। पर पर भगवान जो सदा इन में निवास करते हैं, उन्होंने सुन लिया, देख लिया। क्या भाव है ध्रुव का। उन्होंने भेजा कैसे नमूने को दवा की परीक्षा देने में ना जमुनी ने कहा कि तुम तो छोटे बालक हो, तुम्हें अपने सोतेली मां के शब्दों को इतनी गंभीरता से कहा नहीं करना चाहिए। को 2 नानमून ने कहा ने कहा आगामी मदद कर सकते हो तो मैं चर्चा करूँगा े गिने छोड़। 2 मुनि इस श्लोक का उच्चारण कर रहे हैं। भक्त हर्श लोक महत्वपूर्ण है। बाबाजी ने कहा कि हगुदमीतीशक्ति है का पूरा ग्रंथ पढ़ लो सबसे बेहतर है। अगर आप 1 श्लोक भी पढ लो, ध्यान से समझ लो, उसका अर्थ और उसके अर्थ को अपने जीवन में उतार। आपका जीवन तो साधुसंग आवश्यक है को नदी करना चाहते हैं या नादमुनीकहरेहैं? कि सा व्यक्ति के 3 प्रकार के संबंध होते हैं। 1 है हम मिलते हैं उन भक्तों को जिनमें हमारे से ज्यादा योग्यता है। ठीक है आपसे ऊँची योगिता का कोई नही है। मिलते हो या आपके बराबर के होते हैं। तीसरा है योगी, आपके कम होगी। हम आप से कम योगे। दर 3 सीन के कु व्यक्ति हैं जो आप से ज्यादा योग्य है, जो आपके बराबर में हैं, जो आपके कम योग्य हैं। तो किस प्रकार का व्यवहार होना चाहिए? जवाब इन प्रकार के व्यक्ति को मिला नानी कहते हैं। जब आप आपसे ज्यादा ही योग्य के व्यक्ति को मिला तो हमें प्रसन्न होना चाहिए। और इस विषय में भागमदसस्कलमें 1 उदाहरण दिया जाता है। बोर्ड जो है जब बादल को देखता है, पहली बार तो खुशी में नाचने लगता है। बादल को देखकर किसान जब बादल देखता है, खुश होता है। उसी प्रकार जब हम मिलते हैं। हार से ज्यादा योग्य व्यक्ति को तो हमें पतन होना चाहिए। जब आप अपने बराबर के व्यक्ति को मिल सके, प्रति मित्रता का भाव होना चाहिए। और जब आप आप से कम योग्य व्यक्ति को मिला का भाव होना चाहिए। दयाल राबाजीतातुनमें कहते हैं भौतिक समाज में जब आप अपने से ज्यादा योग्य व्यक्ति को मिलते हो, अब यह दिखाने का प्रयास करते हो। आपके मन में श्ादेश, क्यों वो मेरे से ज्यादा आगे बढ़ गया, वो मरीज में जा रहा है, मुझे बस में 2 घंटे रुकना हो रहा है। देखते हो बड़ी बड़ी कोठी में रह रहा है, समाज में देखे, इसमें ज्यादा योग्यता है इर्शा का भाव और भौतिक समाज में। जब आप देखते हो, कोई आपके बराबर का है तो आप क्या करते हो? यह दिखाने का प्रयास करते हो, आप उनसे आगे हो, हम हमार से आगे है, जो आप मिलते हो किसी से जो आपके कम योग्य में मिलता है, हम क्या करते हैं, उसको एक्सप्लॉइट करते हैं, उसका फायदा उठाते हैं गरीबी का, जैसे आप हो भौतिक जगत में धनी देश, गरीब देशों का फायदा उठाते हैं, अपने देश में केमिकल टॉक्सिक नहीं फेकेंगे, ध्यान से भेजेंगे, अफ्रीका के देश में, तुम्हारे पानी में हम हमारा कचरा फेकेंगे, हमारे देश में कचरा फेंकना ठीक नहीं है। तो ये धनी देश, देशों के ह सागर में पानी कचरा केमिकल बेस फेंकते हैं। वहाँ लोग मर सकते हैं हमारे नाम में न हो, हम फायदा उठा रहे हैं। तो आध्यात्मिक क्षेत्र में हमें नारद मुनि के उपाय के अनुसार चलना चाहे। जब आप किसी ज्यादा योग्य व्यक्ति को मिलो, हमें प्रसन्न होना चाहिए। हम क्यों प्रसन्न होते हैं। क्योंकि हमें ऐसा कुछ सन्देश मिलेगा जिस के पालन से आप पाओगे क्षेत्र में वह भाव होना चाहिए कि हम ध्यान दे निति करें। तो इसलिए भगत प्रसन्न होते हैं, क्योंकि उनकी संगत में आकर हमें कुछ शिक्षा मिलेगी, जिसके आधार पर हम आगे बढ़ जाती है। ध्यान के क्षेत्र में जवाब बराबर के व्यक्ति को मिला जो इसके प्रति ना मुनी के नुसार क्या भाव होना चाहिए। मित्रता का भाव, मित्रता का भाव क्या है? भौतिक समाज में मित्रता का भाव का है। तुम हमें सहयोग 2 इंडिया मार्ग में हम तुम्हें सहयोग दे। और जब हम 1 दूसरे को सहयोग नहीं दे सकते। बौधिक समाज में मित्रता कब तक रहती है, इंग्लिश में कहावत है fेnwetrfrenड तक मौसम छाया मित्र हैं, मौसम बिगड़ जाए हम परिवार प्रकार, जब तक हमें कोई लाभ मिल रहा है, इसी रिश्ते में हम गुड मॉर्निंग बोलते हैं। नहीं, मिल कर देखते भी नहीं। तो क्षेत्र में समानता के योग्य के व्यक्ति को जो मिला मित्रता का भाव, मित्रता का भाव का, क्या, मित्रता का भाव करत है हम 1 दूसरे का सहयोग दें, भगवान की सेवा में जोड़ने के लिए 1 दूसरे का साथ दें, हम मिलकर भगवान की सेवा करें। ये है मरजंदाकाभा 1 दूसरे का, 1 दूसरे के गुणों को देखे। पावर ने कहा अनेक समय कि हमें वैसा सिद्धांत में अच्छा वातन पैदा करने के लिए 1 दूसरे की इर्शादवेशकी वजह 1 दूसरे के गुणों को देखना चाहे, 1 दूसरे के गुणों को 2 देखोगे तो सबका उत्सव बढ़ाया। कई बार हमारे भक्त एक्सपोर्ट होते हैं। नुक्स निकालने में, इसमें यह कमी है, इसमें यह कमी है। कमी कभी कभी देखते जाओगे तो आप बड़े अच्छे बन जाओगे, महात्मा और दूसरा व्यक्ति ना अच्छा बन जाएगा। हमारा सिद्धांत क्या है सब के प्रति वृत्त का भाव, तो मित्रता का भाव बहुत आवश्यक है। और जब हम कम योग के व्यक्ति को मिला क्या करना चाहिए? दया का भाव, दया का भाव का अर्थ है क्या? अर्थ है दया का भाव। हम सोचते हैं कैसे इस व्यक्ति को जोड़ा जाए भगवान के सेवा में। जैसे की नया साल का उदाहरण। तो बड़े शहरों में न्यूरल यू मतलब की दिसम्बर 1 में होटलों में बड़ी बड़ी पार्टीज होती है। लोग लाख लाख रुपए 1 टेबल में खाने के लिए देते हैं। और कई जगह तो 66 महीने पहले बुकिंग हो जाती है। लोग सोचते हैं शराब के वादन में। बैंड बाजा के बार वातल में नया साल शुरू करेंगे तो सारा साल शराब भी देेंगे है। बैन बाजार। तो भक्तों ने इसका फायदा उठाया। हमारे मंद में 31 दिसम्बर को बढ़ाई होगी योजना करते, जिसमें कहीं हमारे पंजाबी बाग मंदिर में बड़ी योजना थी, जिसमें हजार से भी ज्यादा लोग आये। मतलब कि भग सोचते है। हर 1 स्थिति का कैसे लाभ उठाया जाए। कानपुर में युद्ध फैसल होता है। पिछले साल युद्ध फैसल हुआ था, पंद्रह हजार मिलियार्थी आये थे। तो यह नहीं कि सारे पंद्रह हजार जो आये थे। पर कई योग्य प्रति, किसी कई कारण वर्ष भारत यही सोचते हैं किस प्रकार से व जीव को ये दिव्य ज्ञान दिया जाए। जैसे गृह वतन की सेवा। इसके पीछे भाव क्या है? कई बार लोग सोचते हैं। यह है कृष्ण वाले तो पैसे के पीछे हर साल आजाद गीता ले नहीं होने और कोई काम नहीं, उनको समझाना पड़ता है। हम तो किताबें छपाई की कीमत में देते हैं। और हमारी इच्छा है। अब गीता पढ़ो, सुधार गीता पढ़ो और गिरो गीता के संदेश का पालन करो। अगर आज आप देखते हो कि भक्तों की संख्या बढ़ रही है। इसका मूल कारण है इन ग्रंथों का प्रभाव। तो जब आप काम योग्यता के व्यक्ति को मिला माना क्या दया का भाव होता था? और दया का भाव का अर्थ है ये भाव कि कैसे लोगों को सुखी बनाया जाए। लान मराज कहते हैं भगवान में जहाँ मैं देखता हूँ कि किस प्रकार बाजी दुख की स्थिति को हो, सुखी स्थिति में बदलने का प्रयास कर दे। मुझे दुख आता है। आज क्या करे लोग दुखी स्थिति को सुख में बदलने का प्रयास आपका चेहरा बूढ़ा दिख रहा है। no problem बाल सफेद होने है, नो प्रॉब्लम आप गंजा होने हो, रे जैसे नो प्रॉब्लम हम बाल को नकली बार गा देंगे आप। आपके शरीर का कोई अंग चलता नहीं है। नो प्रॉबलम रिप्लेस कर देंगे। पर ये सब कर भी 2 कब तक किसको कर सकते हो? gवanceingimetim am रीथिंग समय जो है हर चीज को न कर देता है, जो बुद्धिमान व्यक्ति है वो ये स्वीकार करता है। फिर ये तो शो का स्थान है। इसलिए वो ध्यान संदेश में रूची लेता है। हमारा यह व्यवहार हो रहे है उन व्यक्ति के संग रात के है जो हमारे से जाए ज्यादा योग्यता के व्यक्ति हैं। तो धुमराजगएथेंऔर तपस्या का पालन किया था बड़ी गहरी तपस्या और मुझे कल मैंने सुना या राज का मंदिर भी है पास में है तो यह भगवान की प्राप्ति के लिए बड़ी गहरी तपस्या भी पर भगवान ने कहा धुआ से धुआ मेरे मुझे प्रसन्न करने के लिए तुमने तपस्या का पान किया। मांगों में से क्या वर्ड चाहिए ने कहा अगर मुझे वर्ड देना चाहते हो। ये वणदीिमैंसदा उननत भक्तों की संगत में होंगा। क्यूंकि उनकी संगत होगा। मुझे ऐसा संदेश मिलेगा जिसके पालन से जीवन लाल। भगवान ने कहा भागो मे से क्या वर्ड चाहिए। वरना हमेशा की संगत में बाजी में संघ की स्थापना की, जिसके द्वारा हमें 7 वे सन का लाभ मिलता है। और अगर हम इसका लाभ उठायें ठीक उपयोग करे तो बिना शकर के ध्यान गुनी कर पाओगे। हमारा प्रयास ना चाहिए। हम भक्तों की सं है और खाज कि भक्तों की संगत का लाभ उठा है। और समानता के व्यक्ति के साथ मित्रता का भाव रहे। इशा द्वेश से हमें बचना है। अधिक समाज में आप अपने समान के व्यक्ति को मिला तो भी हम एशा द्वेश के प्रभाव में आ जाते हैं। ऐसा जब तक रहेगा भगवान हृदय में नहीं रहेंगे। आप के रिनचसमीतामेंसरबम बन जाये की कथा पढते हो। जिस प्रकार उन्हें के ऊंचे कोली माया वाली थे भाग्य बनाया उनके 1 दम थे बरामदा मोगा मोगा के मन में महाप्रभु के प्रति उन के लुक्स निकालने में व्यस्त था। 1 समय महा प्रभु घर में भोजन खाया माँ बरबूजायात्ाकरते थे आइए 10 दिन के लिए खाना खाए। हमारे 2 दिन 2 दिन का मान जाते थे। तो जवान जया की जो पत्नी थी वो माइक्रोवेब कोकर से भी ज्यादा तेजी के साथ परेशान बनाती थी लोग माइक्रोवेब कोकस का जमाना है, पर वह कहते हैं खतरा खैर। 1 घंटे के अंदर उसने 60, 17 अनेक सब्जियां वगैरा बना ली थी। और आप लोगो तो थोड़ी मात्रा में स्पीकार करते थे तो ा रोज डंडा देखे द्वार में खड़े रहते थे। वो छाले नहीं देखे होगा को देखने का मौका मिले क्या भोग खिलाया जा रहा है। भगवान को तो 1 दिन को सान छोड़ना पड़ा पत्नी का सहयोग देने के लिए हम लोगों ने अंदर आकर देख लिया। क्या क्या खा रहे थे वह? उनके सामने क्या क्या पड़ा था कार? तो उसने कहा देखो ढोंगी सन्यासी को सन्यास लिया है। खाते से भी ज्यादा और सरमोरबनशाय बड़े दुखी हो। और अंत में का क्या हुआ को को पता लगा वो चाहते नहीं थे उनके भक्त सुनो मूल दुखी हो। आप उनके पास पहुँचे, अपने हाथ को छाती पर का जब शिया देश रहेगा भगवान व राजा नहीं होंगे। और फिर होगा उधार हो गया एशिया और भैसे हमें बैठना आगे किस कुछ योग्यता हमें खुश होना चाहिए। कोई यह नहीं कि हम शा द्वेश करे। तो उत्तम भक्तों की इच्छा क्या रहती है कि सदा समाज सुखी रहे। ध्यात्म संदेश को स्वीकार करे। जो ध्यात्मिकवादि व्यक्ति हैं, उनको ये पता है में सुख चाहिए। असली सुट्टी असली जो असली सो 1 ही उपाय है, वो क्या है। कृष्ण भक्ति जिस प्रकार मछली जल के बाहर संतोष नहीं हो सकती, आध्यात्मिक संदेश के बिना जीवन अधूरा माना जाता है। तो मित्रता का भाव हमें रखना चाहिए। जहां 1 दूसरे से और कितने माह को धर लिया। भक्तों को मिलकर सेवा करना चाहे। ऐसे मा बाबू ने 1 दिन नितिन नंदा हरीदास को बुलाकर कहा सुनो सुनो, तुम दोनों जाओ प्रचार करने के लिए माँ। बाबू ने अकेले नहीं भेजा। 1 साल में तो हवा में मित्रता का भाव होना चाहिए। और दया की भावना दया के विषय में बड़ा सुन्दर उदाहरण है। शासन में दाजसायदाजसाजैसे जानती हो, ना छाया के थे, 3 लाख बार जाप करे, बिना, समाप्त किए, बिना कुछ खाते थे, न पीते थे तो लाज ठाकुर है। नाम का वचालनकरतेथे दिन में भारत में बंगाल मुसलमान राजा था। जानकारी ने राजा से कहा, ये hidाsजन्ममुस्लमान खानदान में यह नाम को अपना लिया है। उसने को सजा दी जाए। राजा ने कहा ब्लाउज है। राजा ने कहा तुम्हारा क्या सौभाग्य है? इतनी ऊंची मुस्लिम तरह में तुमने जन्म लिया। हम लोग तो कोई चावल पर हिंदू का हाथ भी लग जाए तो नहीं खाते। और तुम हिंदू की भगवान का नाम ले रहे हो। हरिदास ने कहा। हरिदास ने कहा मोबाइल फोन बंद कर। 2 भाई हरिदास ने कहा भगवान के नाम 1 है। हरिदास ने इनकार कर दे तो राजन। जानकारी ने कहा, भेज जाओ इसे गजीरकरबाजारों में और पीटो। उन दिन में सुझाव का 1 साधन था। बजार में खरीद कर पीटना है। तो भाई दास को ये सजा मिली थी। पीटो इसे जरूरी आराम का उचारोकेनेतोहरिलाज को पीटना शुरू कर दिया। 1 बजार में पीटा है, लाज नहीं मरे, दूसरे विधान में खजीरकरलेगएतीसे ले गए। अक्सर यह भ्यास था कि जो व्यक्ति दूसरे बाजार तक पहुंचता था, उनका देहांत हो जाता था। तो इस प्रकार हैदाद को घसीट कर ले जा रहे थे। 22 वे बाजार तक पहुँच गए। वो हैदाद पर कोई चोट का निशाना नहीं था। वो हैना वो ले गया। वे जब 22 बाजार पर पहुँचे और जो पीते थे, उन्होंने कहा, आप तो राजा हमें जितना नहीं छोड़ेगा। अकसर 2 दुसरे बजा जा, इसे मार नहीं पाये। राजा हमें फांसी दे देगा, हमें सजा होनी। पड़ेगी भारी दास के मन में दया का भावना फिर बना। हरिदास ने सोचा, मेरे कारण इन लोगों की मृत्यु होगी। भारी दास ने योग द्वारा सांस लेना मन कर दिया और ऐसा लगा कि अपनी मृत्यु हो गई। बड़े खुश हुए, नाचने लगे, दौड़कर जानकारी को सूचना दी। अब तो उनकी मृत्य हो गयी। राजा ने कहा कि मुसलमान संस्कारों के है, अंतिम संस्कार कर। 2 काजी ने कहा, नहीं, ये तो अपराधी मुस्लिम था, इसे इतना उचा अंतिम संस्कार नहीं दिया जा। ता फेक। 2 उसे गंगा में तो से गंगा में फेंक दिया। और हारेदास्तैरकर, गंगा के पार आकर पेड़ के नीचे जा पड़ने लगे। जब सूचना रह जाता है, यही है राज। तो सबने कहा था, मृति हो गई। आज पेड़ के नीचे जॉब कर रहा है। राजा समझ गया, यह कोई बहुत ऊँचे कोटे का सा है। बारी राज दया की भावना। 2 लोग उसे पीट ने हैं। हर दा क्या सोच रहा है, क्या सोच रहा है उनका उधार। ये 1 उदाहरण है। महेश बुदी का। तो हम कहेंगे, पर हमारे में तो इतना बरदार की छपी नहीं है। हमारे में तो यह योग्यता नहीं है, पर सुनने से, चिंतन करने से, प्रयास करने से हमारा हृदय बन सकता है। ऐसे आप इंदी नाम के विषय में पढ़ते हो तो यह नहीं सोचा जाता। जैसी तपस्या दुरमानेकरोगे। पहले महीने, हर तीसरे दिन खा रहे है, न क्या खाते और तीसरे दिन हल जो कि जानवर खाते हैं। आम से अगले महीने सूखा गया खास, तीसरे महीने पानी भी नहीं, पानी भी 1 बार जा में अगर आपको कहा जाए, आप भक्त बनिए और आपको वो फल मिले जानवर खाते है। 3 दिन में 1 बार, 6 दिन में 1 बार आपको सूखा घास खाना पड़ेगा। आप खो गई तो हमारे लिए नहीं है। तो यह पर इन भक्तों की लीलाओं सुनकर। हमें आज भी प्रेरणा उत्पन होती है कि हमें भी तपस्या का पालन करना है। तो जादतमुनीकाउद्देश्य है बड़ा महत्वपूर्ण है। और साधु संग के विषय में शासन बार बार वर्णन किया जाता है। देवा होती और कपिला देव का वरटलाबापपढ़ते हो। कपिला देव भगवान के उदार थे क्योंकि माता देवहुति को पता था मेरा बेटा कौन है? स्वयं भगवान। तो माता ने पूछा। माता ने पूछा ये बताओ किस प्रकार मैं क्लेशों से मुक्त हो सकती है? और कपिल देव ने कहा भक्तों की संगत के द्वारा, साधु संगत के द्वारा आप ज्ञान प्राप्त करते हो और उज्ञान के पालन से आप बौधिक संगत को त्याग सकते। चेतिनमाभूदक्षिण भारत यात्रा में थे। रामनंद राय से मिले गुलाबी नदी के तट पर और वहां ने अनेक प्रश्न पूछे। जिस प्रकार भक्तों का भाव रहता है, भगवान की प्रशंसा कर रहे है, भगवान जाते है। मतों का गुणगान तो अनेक प्रश्न में 1 प्रश्न था। इस विश्व में शोक सबसे बड़ा दुःख का क्या है, उदाहरण है। और राम ने क्या कहा? भक्तों भक्तों की संघ से जुदा होना जाना, इससे ज्यादा दर्द है। कोई कार्य नहीं। तो हमारा प्रयास सदा भक्तों की संघ है। शास्र में अनेक उदाहरण है। इस 212 दिए। अनेक उदाहरण है। और साधु संग रहोगे, साधु संगत, साधु संग ने सर्वर नाव मादर साधु संग, चेतिनमाबबूनेगरी शिक्षा दी थी। ना स्वामी को उनको सारे रूप में प्रस्तुत किया और 5 महत्वपूर्ण विशी चर्चा की। मैं सबसे पहले क्या आता है साधु संग? तो भक्तों की संगत में रहो। पापा जी ने जिस बड़ी सुन्दर संस्था बनाई है, जिसमें हमें आदि संगत पर अच्छा मौका मिलता है, इसका लाभ उठाओ सुनने का भाव रखो। जब आप उन भतों की संगत में आते हो तो सुनने सुनो क्या कह रहे हैं? और भक्त सिनाताजीनेअनवाब किया। रापाजीकहेरापाजी बैठे थे सुनने के लिए। कई बार उन्हें समझ भी नहीं आता था। क्या कहा जा रहा है? ध्यान से सुनते थे बाकी। सिधांत जी ने कहा ये बालक ध्यानपूर्वक सुनता है। ध्यान पूर्ण पूर्ण वेश में प्रचार करेगा तो शांत संग रहो। और अगर हम ठीक बुद्धि रखेंगे तो ध्यानिक वासन बढ़ता जाएगा। और अध्यानविहोसाभी बढ़ते जा तो महत्वपूर्ण है हम सब के लिए। परेश देर। तो हाँ जी को साल के जोर दिया। आपने के दौरान कर ने वाले है कि जो आज भक्ति 50 हजार हो है, उस मूल तो यह शास्त्र, शास्त्र और साथ ही साथ श्रेष्ठ है, जिससे
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2 प्रकार के संगत के भक्त साधु का ग्रंथ साधु। यह ताका तो भक्त साधु आपको ब्रेज देता है। वो अनेक उदाहरण है कि किसने ग्रंथ लिया पढ़ा और खींचा गया ध्या मैंने में कई उदाहरण जानता हूँ। किसी ने ग्रंथ लिया था और 10 साल दांत को खोला भी ली। 10 साल के बाद खोला पढना शुरू किया, प्रभावित हुआ और अंत में मन। तो इसलिए प्रापा कहते थे the bombs न xपलोedaनीtइमe यही नहीं कई बार हम सोचते हैं, हाँ, 11 हजार गीता बाली तो अगले महीने 11 हजार नये भगत आ जाने चाहिए हो। यह नहीं कि सारे बॉम्बे 1 साथ एक्सप्लोर करने में टाइम लगता है और किसी समय वेन का प्रभाव आ लगता है। हमें यह नहीं सोचना चाहिए क्या की बारी में क्या नए भक्त आ जायेंगे। कानपुर में, पर इनका असर जरूर पड़ेगा सो 1 घर में 1 उदाहरण है, किसी ने शादी में, किसी को गीता प्रेजेंट ली थी। 1 जिसको प्रेजेंट ली गीता शादी में, उसने बाद में पढ़ना शुरू किया, बड़ा प्रभावित हुआ और भाग्य बन गया। o in घnतoabeरaबहुt, gala prabावhaokaymor quetion yes in other s for का मेन देस हरियाणा का 50 और लोगों को, लेकिन परा
जो
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तो इसको कैसे भगत जो हैं, अत्यंत दयालु होते हैं, चेतिनमहाप्रभूभी स्वयं दयालु थे। इस प्रकार नितिन के माध्यम से जगाई मलाई का भी उधार हो गया। अभी जगायी मदाई का जन्म ब्राहमण खानदान हुआ तो आज पूरी प्रजा जगह मदाई के समान है। हमारा प्रयास है इंजगायमदाईकाउधार करना। तो हम हर नाम का परिचय दे सकते हैं। हम घेरा अर्थ जब समझाएंगे तो व्यक्ति में थोड़ी श्रद्धा तो भक्तों का, दया का भाव है। जैसे हम हर नाम में जाते हैं मोड़ी कहते हैं केवल श्रद्धा व्यक्ति साथ दीजियेगा, 4 लोग दूर हो जाओ। हम सब को सुनाते है क्योंकि भक्तों में दया की भावना होती है के साथ लेक्चर बता रहे थे कि अभी ोबिसकासोशनदेना चाहिए और उसमें भी पेसिफिक सीनियर ज्यादा। परंतु जब इसे ज्यादा करते हैं तो दीदी फोर्ड देखने करे उससे कैसे बचा। good question can look at a good point code, lookat a good points। जब मिल मैं इस कौनससंसथाकीीबात कर रहा हूँ, नए नए होते हैं, हम सोचते हैं हर भक्त व कुंदा कम प्रतिमा भी है। कहते है ये लोग से मी, यह शब्द हमारे समान है। हमारा आद थोड़ा कम हो जाता है। तो इसका 1 उपाय है हमारा सिद्धांत हर 1 पर्सेंट हंड्रेड परसेंट परफेक्ट है। यह उपाय है chandra krishna vegeta krishna supreme grovadpodibody no out hंdredprsentro। हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि हर भाग का डीलिंग भी हंड्रेड परसेंट परफेक्ट होगा। अगर किसी के व्यवहार में कुछ कमी था, यह मतलब नहीं है कि संस्था कल्ट है, यह मतलब नहीं कि हमारा सिद्धांत गलत है। अपने तो प्रयास करो गुणों को देखने का। अगर आप कुछ कमी देखते हो, किसी में तो आप सीनियर भर के सहयोग लेकर ये सूचना उनको दे सकते। ये नहीं कि आप केवल कमियों को देखो। अगर किस में कमी है तो सिर्फ गुन को भी देखो। वह संस्था में भी कई उदाहरण है। कई भक्तों ने इतनी सेवा की, पर बाद में किसी कारण विचलित हो गया। यह संभव है के नी मोर qवेशtंस yes sir ats creston in english? olseveowal
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of course, one thing at the four things, you see is is romar corrector on so many rumors and people are using the internet। तो डैकवसकॉनलीडरबने अब यह देखो कि जो आलोचना है सच है, जो आजकल इंटरनेट का जमाना है, कोई भी इंटरनेट में जाकर किसी को भी गाली दे सकता
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अगर one tru you made and i said we dont see evydibordis behavior is hundred percent perfect i say that but or philosophy is perfect so mad do it brvebesumeedued slitlyinpropartly, why should be compromis on the philosophy okay one question पूछ eonpucsestibook deलीntrीबैकबुk expelikenewkether are to related questions? when is still how to be made to
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किसी
को सिंगार करना है। भगवान कई बार हमें सेवा करनी पड़ती है, जो हम चाहते नहीं तो अक्सर सेवा निशा के अनुसार भी देते हैं, कई बार आवश्यक सेवा भी करनी पड़ती है। वह भाव होना चाहिए जो भगवान के लिए आवश्यक है वो हम करेंगे। यही नहीं, मेरे विचार से मेरी इच्छा, मेरा अपना वजा ओके ह।
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