प्रकृति कोरोना जैसे कष्ट क्यों देती है ? | SB 5.10.11 | 05.04.2020 | ISKCON Delhi | Gopal Krishna

Gopal Krishna explains why natural disasters like coronavirus strike, tracing the cause to spiritual ignorance. Drawing from the Bhagavad-Gita, he argues that understanding the soul and karma, combined with devotional chanting and Vedic study, builds the resilience to face material suffering.
Chapters
ओम नमो भगते wazu ओम नमो भगते वaसुदेाओमनमभगुते वासु देववाई, seema bagosomcanddofi with apto ten text eleven english ad jivan emetatanyamanarajn asia s a game baboduaidiaata so a a a a a a a a a a a a b at 400 ब्रिक योगा,
सारे, जीवन का सममन, राज,
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शब्द्त, जीवन, वत्तो, जीवित, हहलीविहो, निरेन, राजन आदि लगभग प्रत्येक पदाकाआदिवनयक्यू ट बेकारी बता यह सही बा गिश्रण देखी जाती है। सो स्वाम सेव था खाने का काम वह परिवर इस मीडियम भी मुझे य जमा रही। अभी हो छेदी कहा जाता है।
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आगे बढ़ा पर विकास की जो हवा से बोले ये आपने नजर जीवित मिल खुलने के होने बाद आप लोग बताया इस स्टंबंधमेंमैंअनी कहना चाहता हूँ की ऐसा जरुरत है क्योंकि अपना आदि साथ न आपको यह सूचना की मैं राजा स्वामी और इस प्रकार आप मारा मुझे आप का दिया जाना भी ठीक नहीं है क्योंकि ये पद अस्थाई है आज आप और मैं आपके पास किन्तु पर स्थिति बदल सकती है और आप मेरे पास बिना मैं आपका स्तन नदी द्वारा उत्पन्न है स्थाई कर दिया है आप इस संसार में ये हाथी ही सारे कष्टों का मूल कारण विशेष रूप से लोग में लोग इतने अशिक्षित है कि उनकी समझ में ये भी नहीं आता शरीर प्रत्येक शाम बदल रहा है और अंतिम परिवर्तन भी मृत्यु रहता। जो इस जन्म में राजा है वही हर बरस अगले जीवन में कुत्ता बन सकता है। आत्मा को फतरीकीशकतीसेबनन बिहरी शंका में मन रहा है। बुरे प्रकार के ऐसे दूसरे प्रकार की अवस्था में कर दिया जाता है। बिना आम सा, छा तथा ज्ञान के भी जीवन सुनता रहेगा और मनुष्य को झूले जा। बस तूफान या बिल्ली फैलाने का परम व्यवस्था द्वारा लाए जाने वाले मां मनुष्य की सरिता स्थाई बिहार से ही होना चाहिए। वस्तुका संसार कोई ने स्वामी के प्रत्येक काम की और से प्रकट पूर्ण
था।
भगवान श्री कृष्ण जी परमस्वामी, जैसा कि जरीदार कहा गया है 1 अलग निशरकशआजसएकमासामी को सिवीकष्णहै तथा सबल के डांस में परमेशर के साथ अपने संबंध को भूलने के कारण ही संसार के सारे कश् उत्पन्न हो रही है।
home gatndasajananjana shaka tanna grave namashctniamano vesaanbutle fyamrupakramamladi nde ham shrigurosita gun ciopmsajatmhagna m a sadbetmswdutmasitm ksnacenadevsriraधa krishna pधanzaगltaशीवशाखर हे कृष्णा करना सिन्धु yinabndojgttegosa oaeradheesbanu
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ca shiksha s करेगा तो इस श्लोक का उच्चारण झत भारत कर रहे हैं। यह से आप पढ़ बैठे और इस में झदभालक कौन थे बहुत बड़े सन थे पूर्व जन्म में 1 समय वो पृथ्वी के राजा भी थे। उनका नाम तो भारत बना। उनका शासन इतना सुन्दर था कि समाज में किसी नागरिक को किसी प्रकार का कशन्भवनहींकरना पड़ा है। जैसे कि कुछ दिन पहले हम लोग ने रामराज्य की चर्चा की रामराज्य के समय समाज में किसी प्रकार का कश्मीर था जो नेता थे राजा व प्रजा की चिंता करते थे जैसे अपनी उदार हो और जो प्रजा थी उनको पूरा विश्वास था ये राजा हमारे पिता के समान है तो इसी प्रकार भारत बना भी उनके शासन बड़ा सुंदर था, नागरिक अत्यंत प्रसन्न थे, किसी प्रकार की कमी नहीं थी और पूरी कृति का नाम बन गया था भारत वर्ष। आज अब हम भारत वर्षा की चर्चा करते हैं जो हमारे विचार से वही भारत जैसे इंडिया के ने जिसके बॉर्डर है आज वो भारत के लासा है और 1 समय पूरे पृथ्वी का नाम था भारत वर्ष है और इतिहासिक किताबों को पढ़ने पर आप पढते हो 1 से में बांग्लादेश, पाकिस्तान, बर्मा, इडोनेशिया ये सब भारत में गिना जाता था दिन पर दिन जो भारत है वो छोटा तो भारत राज शासन के प्रशाद जंगल में गए थे तपस्या के लिए यहां के हिरन के प्रति अधिक आकर्शन हो गया जिसके कारण उन्हें इस हिरन के रूप में जन्म ग्रैंड करना पड़ा क्यूंकि बाग की थे जहाँ हमारा मन होगा मृत्य समय उस प्रकार का भैया हमें प्राप्त होगा इसलिए भागु गीता में बार बार ये कहा जाता है मन मन बाबा मन भर तो बाल जी मजबूर हो मेरा मेरा स्मरण करो कि मन को ठीक रूप से भगवान की सेवा में सदा लीन और इस प्रकार की तैयारी होनी चाहिए की अंतिम नारायण स्मृति पर क्यूंकि भारत बाज ने सेवा भी की थी ज्यादा देव ने पशु के रूप में नहीं रहना पड़ा और फिर उन्होंने जन्म लिया किस रूप में जद भारत के रूप में भारत के रूप में उन्होंने ब्राहमण खानदान में जन्म लिया और उनके पिता ने बहुत प्रयास किया। 1 आतंक मनसे सुना शिक्षा दें और उनका व्यवहार समाज में जैसे वो, भूमि और बैर है। और अंत में पिता ने कहा पिता ने सोचा मेरे भी योग्यता नहीं है सीखने व आत्म ज्ञानी थे शुरू से और जब भारत का इतना गहरा विश्वास था। 1 समय पिता के ध्यान के पश्चात जब उनके सौतेले भाई भाइयों ने रखा था उन्हें खेती की देखभाल के लिए, ठाकुर ने उन्हें चुरा लिए, उन्हें उठाकर ले गए, गाजी चरन में अर्पण कर रहे, वे अर्पण करने के लिए और जल्द भारत छाकूदासागेडाकू तैयार थे बार जद भारत लीन थे वागे जैसे हम कहते हैं से मना कृष्ण दारा और भगवान ने अपने बाद की ऐसी सुरक्षा की किसी चाकू से इंडा दुर्गादेवी के भाग जीवित व्यक्तियों को भी अर्पण करते हैं। पर जो मुल्क हो कम मुीोतुजतभारत शुरू से आत्म ज्ञानी थे, समाज में लोग सोचते थे, ये तो गुंगा भरा है और गूंगा नहीं। और 1 समय उन्हें कहा गया राजा कोपली राजा जो था, यहाँ रहे कपिल आश्रम में कथा सुने राजा की इच्छा थी हम थोड़े तेजी से जाए, राजा से में है भाव और वो अपने सेवकों को कह रहे थे जल्दी चलो चीन समय में जो राजा होते थे, उन्हें पलकी में उठाया उठाकर ले जाया जाता था, उनके लिए कोई मर्जुरी गाड़ी नहीं थी, उनकी मसूरी गाड़ी थी पल की, और राजा ने कहा तेजी से चलो तो दूसरे सेवक ने देखा 1 बड़े कद का लम्बे हाथ और मजबूत गन्दे उन्होंने सोचा यह व्यक्त वे साथ में जुड़ जाए। राजा की पलकी उठाने में हम तेजी से पहुँच जायेंगे जो राजा की इच्छा है, उन्हें भी जोर दिया। पर परिणाम क्या हुआ? तेजी से जाने के बजाय पर गिन धीमे जाने लगे। उन्होंने कहा राजा, यह हमारा दोष नहीं है, ये जो नया व्यक्ति हमें साथ जोड़ा है, ये बहुत धीमे धीमे चल रहा है। और इसके कारण अभी बल्कि पल की धीमे जारी। तो राजा ने कठोर शब्दों में जल भारत को डाटा जल भारत को कहा। तुम मूर्ख हो। ताना देते हुए कहा देखते हो, पहलवान हो कमजोर। और ये आज के लोगो में भी वो उन्हीं को शिक्षा दे रहे हैं। आज के जल्द भारत जो है। उन्होंने पहले तो सब सुन लिया, जो रोना ने कहा, जब उन्होंने सुना सुन लिया, उसके पश्चात जल्द भारत ने उसे देना आरम्भ किया जो उनका व्यवहार कैसा था, गुमर बहरा है। गुंबर बह रहे थे, साधारण पर जलपा से बचने के लिए, को प्रचार का समय आया। तो जैसे आप देख रहे। इन लोगों में शेर जैसे वो प्रचार कर लेते। यह होना चाहिए। हमारा व्यवहार भौतिक चर्चा से हमने दूर रहना है। मगर गीत में जीप की तपस्या के विषय में कहा जाता है जीप की 1 तपस्या है सत्या का उच्चालन करना। हम लोग उच्चारण करें। सत्य का उच्चारण होना चाहिए। और जो भगवान का सदेश प्रस्तुत किया जाए तो सत्य रूप से प्रस्तुत होना चाहे। तो यह जीपीए के परे सत्य बोलो पर ठीक मिठाई के साथ और फिर जल बद से बचा। तो जद भारत इन श्लोकों में राजा को उत्तर दे। राजा ने उन पर बहुत आरोप लगाया तो हमारे मुल्क जैसे हो और भारत से गए। अब जल्द भारत ने बोलना शुरू कर दिया और जद भारत क्या कह रहे हैं वो कह रहे हैं आप मुझे क्या डांट रहे हो? आप ये सोच रहे हो कि आज आप राजा हो और मैं सेवक हूँ और कल यह स्थिति बदल सकती है? कल मैं राजा बन सकता हूँ और तुम मेरे सेवक बन सकते हो? दूसरे शब्द में जल भारत उन्हें आध्यात्मिक ध्यान दे रहे हैं और इस लोक के तार की समाप्ति में प्राजी कह रहे हैं क्या पूर्व प्रभु जी कह रहे है पूरे विश्व के स्वामी हैं परम भगवान और हम सब का कर्तव्य बनता है। क्या? क्या हम भगवान की सेवा में रहे? जीेसरुपयसबकाकर्तव्य क्या है हम भगवान की सेवक रहे हैं। आज हम समाज में देख रहे हो, अनेक प्रकार की परेशानियां, उसकी आप कल्पना भी नहीं लगा सकते हैं। इस समय हम सब भारत में 1 रूप से कैदी बने हुए हैं। नहीं कैदी बने हुए है। लॉक आउट है हजारा और के कैली बोले। तो इस स्थिति पर हम कैसे क्यों पहुँचे? और पृथ्वी पर जब पाप का बोझ बढ़ जाता है, पृथ्वी पर जब देखा जाता है कि गाय माता की सुरक्षा नहीं हो रही तो जो प्रकृति जो है हमें अनेक रूप से सजा देते है। भगवान गीता में कहते हैं मयादक्शेनाप्रकृति यह जो प्रकृति है, यह मेरे निर्देश में चलती है। और भगवान ने गीता में कहा है 7 प्रकार के कष्टों से कोई बच नहीं सकता और बुरा बुडापा चाहते नहीं हैं। वो सा है, हाँ, रोग पीड़ा चाहते नहीं, बचा, कोई चाहता ही नहीं। आज उदाहरण के लिए भयंकर भयंकर, भार हर कोने में पहुंच है, सारे विश्व में इसका भय है। आप चाहे अफ्रीका जाओ, जाओ, अमेरिका जाओ तो ये वायरस सब जगह फैल गया है। किसी ने कभी इस प्रकार का वायरस का प्रभाव देखा इतिहास में और आदि देवी का दिबोलेधयालेशीहै, जब पापा का भोज प्रीवी बढ़ जाता है तो हमें अनेक प्रकार के कष्टों को अनुभव करना पड़ता है। 1 फेल ये वायरस, यह वायरस भी क्यों आ रहा है, यह 1 रूप से हमें सजा दे रहा है। आज सब डरे हुए हैं, वैसे तो किसी का डर नहीं, पर वायरल का डर है, सबको है, सबको डर है। वायरस हमारे यहाँ नहीं आ जाए और सब यही सोच रहे हैं। वैक्सिनेशन पैदा करो, यह वायरल व कंट्रोल में आ जाएगा। जैसे की पहले कई एविटेबल आ गए और चले गए, वो 1 समस्या आती है, हम प्रयास करते हैं वैस्टिनेशन ढूंढने के लिए, वैक्सिनेशन सफल होती है, तो वो वायरल चले जाते। हम सोचे चलो वायरल खतम, वे थोड़े साल बाद नया वायरस आ जाता है। इसलिए प्रॉपर ने 1 लेक्चर में न्यूयॉर्क में कहा tiscaninhykrisna इस रियल, वैसिnaशoन तो ये वायरस से बचने के लिए जो 80 वैस्टिनेशन हैं वो आध्यात्मिक उपाय। जैसे ही सर में सबकी बुद्धि लगी हुई है वो वैक्सिनेशन पैदा करे जिसके द्वारा ये वायरल भी कंट्रोल में आ जाए। तो ये माँ मान लो। ये वायरल भी कंट्रोल में आ गया और 2 महीनो में, उसके बाद फिर नया वायरस आ जाएगा और फिर आप खोजोगे। नए वायरस के मुझे मुझे कूल दिखा रहा था। सौ साल पहले अमेरिका में 1 बहुत बड़ा एपिडेमिक था और उस एपिडेमिक की तस्वीर में दिखा रहा था जो आज आपकी डॉक्टर कहते हैं, वही दवाई उन्होंने सौ साल पहले भी किया। दूर रहो iti तobotisंसar me bagan कहते, ha sa m m i भगवान कहते हैं सब धर्मों को छोडकर, वेशररमेंआओ मैं तुम्हीं सुरक्षा करूंगा, ये है असली वेसिनेशनये हरीराम और भगवान का आदेश, अगर हम इसका पालन करें तो ये जो शारीरिक आकर्षण है। 1 समय प्रापा जी अमेरिका के 1 प्रसिद्ध महाविद्यालय में लेक्चर दे रहे थे और उन्होंने पूछा विद्यार्थियों से, व्यापकं से आपके इस प्रसिद्ध महाविद्यालय में कोई ऐसा अंग है जहाँ की ये शिक्षा मिलती है, आप हो कौन? और मृत के बाद आज लोग ज्ञान में है, हमें मंच का उच्चारण करते है। मैं ज्ञान थी, वह जन्म हुआ था ज्ञान में, अक्सर हम पलते हैं ज्ञान में और अक्सर मृत्यु भी हो जाती है ज्ञान rikoo गुरु कृष्ण का जो भाग्यशाली व्यक्ति है, और के पश्चात ये स्वीकार कर। 2 वो किसी संसाधुकीसंगरमे तो जब तक हम अध्यात्मिक ज्ञान को अनुकूल नहीं करेंगे, आज समाज में सुख असली सुख प्राप्त करोगे और 1 वायरस आयेगा और 1 वायरस की वैक्सिनेशन आप ढूंढ लोगे और जिन कंपनियों ने ढूंढा का वैक्सिनेशन वो अच्छा कमा लेंगे और फिर अगले अगले कुछ सालों के बाद फिर 1 नया वायरस आ जाएगा। अगर आप डब्लू एच ओ की रिपोर्ट पढ़ो तो देखते हो हर 134 साल बाद 5 साल बाद नया नया वायरस हो जाता है। जैसे आजकल आप देखते हो। भूकम्प बहुत तेजी के साथ आ रहे है, बहार बहुत तेजी के साथ आ रहे है। पहले को ता था 1, 20, 30 साल में, अब 44 सालों में आ रहा है। ब्लड बाहर तेजी के दादा। तो आप देखते हो कि प्रकृति द्वारा जो कश हम अनुभव कर रहे हैं, वो बढ़ते जा रहे हैं। और कारण क्या है? हम भगवान की शिक्षा से दूर जाए। तो जब भारत इन श्लोकों में हाल रुगरा के माध्यम से हम सबको महत्वपूर्ण शिक्षा दे रहे हैं, जल भारत ने कह दिया है। आप यह नहीं समझते कि हर चीज अस्थाई है और आज है। कल नहीं रहेंगे। आप सोचते हो, आज आप राजा हो तो यकीन से आप, हर जगह में राजा रहोगे नहीं रहोगे। हर चीज स्थाई है। मान लो, आप चाप यूसी करके अर्अरभपतिव्यक्ति बन जाओ। क्या ये धन हमेशा आपके साथ रहे हैं। लोग। यह सोचते नहीं है। आप किसी धनी व्यक्ति के पास जाओ। हम 1 मंदिर बना था, चंदा दोगे किसके लिए चंदा जाओ, कमाओ दया की भावना होगी तो थोड़ा चन्दा दे देंगे। लोगों ने ये सोचा, ये जो धन है मेरे पास, इसका असली स्वामी मैं नहीं हूँ। पर हम भगवान है और मुझे ये धन का उपयोग करना चाहिए। भगवान की सेवा में। ये है। अगर, हम ये सोचें कि ये दे, ये बुद्धि, ये योग्यता जो भगवान की कृपा से प्राप्त हुई है। हम जो भगवान की सेवा में उपयोग कर रहे हैं, पापों के परिणाम से भर जाओगे। पर अक्सर क्या देखते हो, अगर हवा में कुछ योग्यता है, हम उस योग्यता का उपयोग करते थे। इसलिए मौजे का योग, जो भाग्यवान व्यक्ति है, वो समझते हैं। हाँ, इस धन के कारण परम भगवान है। जैसे हमारे संसद में 1 भक्त है, अमरीश को मानता है, जो सम्पत्ति मेरे पास है, भगवान ने दी है। भगवान की सेवा में उपयोग किया। तो अज्ञानता के कारण हम सोचते हैं। ये दे हमारा स्वरूप है। और अज्ञानता के कारण हम सोते हैं। ये स्थाई है, स्थान हम सोचते ही नहीं। 1 दिन त्याग पड़ेगा। हम सोचते ही नहीं कि यह धन जो है हमारे पास, वहाँ जाए कल जा भी सकता है। हमने कुछ दिन पहले अवंती ब्राह्मण की कथा पढ़ी थी। श्रीमद भगलमसेवंतीब्राहमन बहुत धनी व्यक्ति था और खेती की खेती का धंधा था। उसका धनी था। उसके बाद बहुत धन था। पर न तो वह धन का उपयोग करता था, इंडियन लिफ्ट के लिए, न ही इसका उपयोग करता था रिश्तेदारों के शो के लिए, जिसका परिणाम यह हुआ, पत्नी, बच्चे, मित्र, रिश्तेदार, सब शत्रु बन गए है। सब उसके दुश्मन बन गए। जवाब के बाद धन होता है तो उसके कारण कई शत्रु बन जाते हैं। सुधार कहते हैं हवाई कृपा से तुम धनी बने। अगली थोड़ा हिस्सा 2 सरकार कहती है, हमारे अच्छे राज्य के कारण। तुमने धन करवाया में चोर। कहते हैं। हाँ, यह व्यक्ति इतना धन क्यों रखे? चलो योजना बनाते हैं। चोरी कर चोर कभी झोपरपीजालीकनहीं सोचते, व देखने का है, है हे सब के सब उसके दुश्मन बन गए। और अंत में उनकी जितनी संपत्ति थी, सब हाथ से खो। शुरू में तो शोक में था, यह हो कि इसाई वस्तु खो गई है। बाली, शरणगत हो गया वो। हालांकि लोग ताना मारते थे, वो खाना खाने को ले जाता था। लोग पेशाब कर देते थे। उधर कहते थे देखो, अभी बिखारी बनाए तो साधु बन गया। जब पैसे थे तो साधु की बात भी सुनते, बात भी नही करता। पर अवनी ब्राहमण अंत में वो भगवान के श्रनगरहोऔर वो बिल्कुल संतुष्ट हो गया। तो हमें यह नहीं भूलना चाहिए की चाहे जो योग्यता हो, धन हो, सुविधा हो, ये सब भगवान की कृपा प्राप्त हो रहा है और इससे हमें भगवान की सेवा में उपयोग करना चाहिए। बाबा जी दा कहते हैं 1 ईश्वर कृष्ण और है, लोक है। जिसमें कहा गया है 1 ही ईश्वर है। बाकी सब्ज हैं उनके दा। तो आज अगर समाज में इतनी बेचैनी है। अगर आज समाज में इतनी चिंता है। आज के समाज में मानसिक, भगत इन सब का कारण क्या है? हम समाज में ध्यान विज्ञान की कमी है। और क्योंकि ध्यान विज्ञान नहीं दिया जा रहा, इसलिए लोग ये ही नहीं समझ पाते। मारा क्या कर्तव्य होना। इसलिए प्रधान राज क्या कहते हैं? प्रधान राज कहते हैं कॉम
5 साल
की आयु से हमें अधातमिकज्ञान अनुकूल करना आरम्भ कर देना चाहिए। प्रधान राज का भाग्य था। जब वो माता के घर में थे, उन्होंने द्यातवीजञानधादमुनी द्वारा प्राप्त किया था और छोटी आयु से ही उन्होंने प्रचार करना आराम कर लिया। पार के जो अध्यापक थे, संदमक उन्होंने बहुत प्रयास किया। किसी प्रकार प्रलाद राजनीतिक शिक्षा को अपनाये, पिता को स्वीकार करें सुपर श्रेष्ठ के रूप में और पलानी ज्ञान प्राप्त लिया। माता के गर्म प्लान के पिता ने। प्लान के अध्यापकों को डाटा लगता है। ये वैश्व बेश दल कर आते हैं। तुम समझ पेचानते नहीं हो, वो मेरे बेटे को वैश्व बना रहे। आप ऐसे मत कहो हम ही ब्राह्मण है। हमे झूठा दोष, मत। 2 हमें खुद नहीं समझ आता, विज्ञान ने कौन दे रहा है, कौन दे रहा था माता के घर में? उन्होंने प्राप्त सुप्रा कहना है। छोटी आयु से ही ज्ञान अनुकूल करना आरम्भ कर देना चाहा। भगवत गीता के नौवें अध्याय में भगवान क्या कहते हैं राज विद्या। ये जो आध्यात्मिक ज्ञान है, यह सबसे महत्वपूर्ण है। सब ज्ञानों का। राजा। भक्ती सिधानी कहते थे अगर किसी की की कमी हो, समाज में इस अध्यात्मिक ज्ञान की कमी है। तो आज अगर हम वायरस इत्यादि से बचना चाहते हैं तो हमें अध्यात्मिक ज्ञान को अनुकूल करना चाहिए। जब तक हम आध्यात्मिक कार्यों में जुड़ते, भौतिक कार्यों में जुड़ते जायेंगे, कभी भी आप संतोष शांति नहीं प्राप्त कर सकते। 1 समस्या हल होगी, अगली समस्या पैदा होगी और ये चक्र चलते जाएंगे तो आध्यात्मिक ज्ञान की बहुत आवश्यकता है। इसे प्रॉपर जी ने कहा 5 साल में भाव जल में सब जगह ये ज्ञान देने का प्रयास करना चाहिए। तो भगुर गीता के दूसरे ध्यान में ये ज्ञान बड़ी गहराई के साथ दिया जाता है। और ठाकुर जी ने कहा है कि पूरी गीता का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है दूसरा अध्याय है, क्योंकि यहाँ आपको शिक्षा मिलती है। आत्मा के बैठे जायदे मेरदेवारकराज, ये है आत्मा का रूप न जनम सुना और वैदिक साहित्य में इतना पक्का ज्ञान है कि जो आत्मा का माप है, उसकी शिक्षा भी प्राप्त होती है। उदहारण के लिए। वन टेन था, उसका सौ भाग, फिर 1 जगह, फिर भाग। सौ भाटों में, भागों में बांटो वो है अपने आपकी आत्मा का बाप। और जब तक आत्मा शरीर में क्या है, कभी आत्मा शरीर को त्याग देती है। आपको शरीर का उत्तर देगा। तो जद भारत इन श्लोकों में बढ़ा योगना को अध्यात्मिक शिक्षा दे रहे हैं न? वैसे अज्ञान तो नहीं थे, थे कपिल आश्रम कथा सुनने के लिए, उन मेरा ध्यान में ज्ञान था, पर शुद्ध ज्ञान की कमी थी। और राज्य भाव था। पर वो पहचान सकते हैं, पहचान सकते है, कौन है? असली संत ने? तो जल भारत शिक्षा दे रहे हैं। और ज्ञान गीता के दूसरे अध्याय पर आरंभ होता है। यहाँ की अनेक लोगों द्वारा यह शिक्षा दी दी गई है कि हम कौन हैं? आत्मा है महात्मा का शुरू, क्या है? सुना, ये शरीर जो हमारा है, ये अस्थायी है, अगर देखो, ये जो भौतिक दे है, वे 6 अवस्थाओं में गुजर जाता है। pala had but do had growth, is a have mentainencsotha poses, both groth mentainentproducing bay product लिंग इन फाइनली तू चाहे आप करोड़पति हो या बिखारी, सब की शपद है, इससे वरसाने गुजर जाता। तो ज्ञानी और ज्ञान में अंतर क्या है? और ज्ञानी यह नहीं मानता ज्ञान दा सोचता है यानी बडी, सोसा सब कुछ समाप्त हो जाता है मृत्यु के साथ। और जो जातक वादी है इसने धारमिक शिक्षा ग्राम की है, वो जानता है। ये दे जो है 2 दिन का साथ है। राक्षा और या पू दोनों सूर थे, थे हसन जब उनके भाई का बदा, उनकी पत्नी व बच्चे, बड़े उदास है या का शिक्षा दी। उन्होंने कहा 1 राजा था इस योजन जिसकी मृत्यु हो गई थी। युद्ध के मैदान में। तो अक्सर नियम यह है कि अगर ढेर समाप्त हो सुबह तो शाम तक शमशान घाट ले जाना चाहिए। अगर शाम को गधे समाप्त हो तो सुबह सूर्य के सूर्य के प्रकाश आने से पहले उनको अंतिम संस्कार के लिए ले जाना। और जो राजा योजना थी, थे, उनके अनेक पत्नियां थी। और सबने शरीर को अपने पास रखा। और जोर जोर से रोने लगे। इतनी जोर से की रोने की आवाज यमराज तक पहुँच गए। तो यहामराजने सोचा चलो मैं शिक्षा के यामराज ने। 1 बालक का रूप बन कर के ये बच्चे हैं, केला भी पहुँच जाते हैं। बाला का रूप पहन करके वो पहुंच गए। उस सभा में। ओ या यमराज ने कहा देखो, ये औरतें रोती हैं उनके रोने से, क्या उनका पति जीवन बन जाएगा। और यमराज ने कहानी सुनाई, 1 में 1 व्यक्ति शिकार कर रहा था जंगल में। और ये जो शिकारी था, वे गाड़ी के समान था, पक्षियों को मारने में बड़ा आनंद देता था। तो शिकारी ने मेरे वो अनपेक्षा था, खा ले जाते थे। पक्षियों के पक्षियाँ या उनको मार देता था। तो पहले उसने शिकारी यह पक्षी की। पत्नी को गोली से मरा और बाप बच गया। पिता यही सोचता था मेरे बच्चों की देखभाल कौन करेगा? पत्नी के देहांत पर देहांत हो गया। और ये सोचते सोचते शिकारी की गोली पक्षी। तो यामराज ने यह कथा का उदाहरण दिया। ये दिखाने के लिए यहाँ लोग रो रहे हो, जोर जोर से ये समझते हो, क्या आपकी मृत्यु नहीं आएगी? और आपकी मृत्यु भी आएगी? और फिर इन्होंने इजाजत दी को समान ले जाने के तो में ज्ञान की बहुत आवश्यकता है। और जल्द भारत क्या करे? श्री हमारा स्थायी साथी है थोड़ी देर के लिए। तो पूर्व जन्म के संस्कारों के कारण हमें सुख तो प्राप्त होता है। कृपया भगवान की माता देवहूती उन्होंने पूछा किस प्रकार यह निर्णय किया जाता है की आपको किस प्रकार का धेय प्राप्त होगा और कमान कामनी धिकार से कर्मो के आधार पर है, निश्चित किया जाता। तो आध्यात्मिक ज्ञान, ये बहुत आवश्यकता है। और यह अध्यातमिक ज्ञान प्राप्त हमें कैसे होता है, प्राप्त होता है। सादुसंकेदवार कितने बाप बने हैं। 5 मैंने पूर्ण विषयों पर बोल दिया। अगर आप भाग्यों से पूछा जाए, आप कैसे जुडे थे कि भक्ति में पहली बार आप कैसे जुड़े थे, है आप? और या किसी ने आपको निमंत्रन दिया मंदिर आने के लिए या भक्ति रक्षा में या किसी ने आपको ग्रंथ लिया या किसी कॉलेज, प्रोग्राम, वगैरा में। दूसरे शब्दों में भक्तों के प्रचार के माध्यम से आप जुड़े प्रचार के लिए कई बार हम ग्रंथों का लाभ उठाते हैं, कई बार मनसुन ते हैं, किसी न किसी। इसलिए प्रचार की सेवा पर की इतनी प्रशंसा की जाती है। और भार गीता में कहते हैं सब भक्तों में सबसे प्रिय कौन है पाम प्रचार का, जो प्रचार के द्वारा अज्ञानता दूर होती है। आप पापाजी का उदाहरण देखिये। 70 साल की आयु में केवल 40 रुपए के साथ। उन्होंने इतनी बड़ी योजना की इतनी बड़ी यात्रा की। केवल 1 उद्देश्य के साथ दुखी व्यक्ति को सुखी बनाना। ये है भक्तों का भार। तो ये ज्ञान जैसे ही समय जल भारत ज्ञान दे रहे हैं, तुम हो कौन ये समझा रहे हैं। हर चीज अस्थाई है। जो ज्ञान ही व्यक्ति है, वो स्वीकार करता है, सब अस्थाई है। वो जिस प्रकार आप यात्रा कर रहे हो, थोड़े समय के साथ ही मिलते हैं। फिर मंजिल स्टेशन आने। पर। अब अपने अपने राष्ट्र जाते हैं। तो बेजिक शास में ये शिक्षा शुरू से अंत तक दी जा रही है। बार बार क्यूँ, बार बार सुनोगे। तो ये सुन लिया और भूल जाओगे। तो इसलिए भगवत गीता का अध्ययन बहुत महत्वपूर्ण है। नित्य भागवत से भगवती के बाकी भागती। तो धात्विक ज्ञान को अनुकूल करना आवश्यक है। तो साधु संघ के द्वारा हमें यह ज्ञान प्राप्त होता है और भाग्यवान लगती है। तो शुद्ध साधु की संगत में आओगे। तो क्या शिक्षा मिलेगी। ये शिक्षक मिलेगी कलयुग में क्या है, साल हेलो छेतिन, महा प्रभु जिनके जो कलि के अवतार हैं, उन्होंने खुले रूप से यहाँ नाम का प्रचार किया और हम सब को आदेश दिया गया। जाए उसे क्या कहो? तो shani hekisnaवकliaकीo का उपाय और चेतन। वहा बाबू ने इनाम का प्रचार किया और यह भी कहा कि 1 दिन दुनिया के कोने पर प्रचार। कुशल कोले नाम प्रचार होना चाहिए प्रचार होगा तो भगवान की भक्ति के दौरान हमें अगर सफलता चाहिए। हमें अत्यंत सीन ने शिक्षा सल के तीसरे स्कूल में क्या था। date अगर तुम चाहते हो कि ये हरी का नाम सदा आपकी वाणी से निकले तो हमे कुछ प्रयास करना पड़ेगा और क्या अत्यंत पचीस बन। अध्यात्मिक जीवन में आप बार बार सुनते है hiमिlitीसकापचीर बन और हमारे शास्र में अनेक उदाहरण है जिनके द्वारा इस गुण को अनुकूल करने की शिक्षा दी जाती है। जो वैष्णव भक्त हैं उनका भाव रहता है बिल्कुल उनकी इच्छा रहती है अत्यनपतीतमाने अपने आप को। यह नहीं अभी आप को बड़े ज्ञानी माने कामराज ने रखा है मेरे में इतनी गुन है का नाम लोगे तो तुम्हारे सारे गुन मिल जाएंगे। यह था उनका संदेश तो ये जो tिनaiokहैइसको ने बड़े ध्यान से इसका लाभ उठाना है और आया व्याप माध्यन सेंशल बनाओ और हर स्थिति में यही भाग रखो या सेवा कर में और पेड़ से भी ज्यादा सेंशल और हमारे शासन में कई उदाहरण हैं। राज ठाकुर को कहा गया था तुम्हारा जरा मुसलमान खानदान में हुआ है तुम हिंदू के नाम क्यों ले रहे हो? बाप ने अपना सब कितना नोनार किया में कइयों ने उसका विरोध किया। 1 तो मुसलमानो ने विरोध किया, मुसलमानों ने कहा अगर हम ये हरीराम को नहीं रोकेंगे तो सारे मुसलमान बने। वो हिंदू ब्राह्मण ने भी विरोध किया, खास कर के वो ब्राहमण जिनकी आमदन होती थी तयारी और हरिदास ठाकुर को। राजा ने भी कहा तुम्हारे इतने ऊँचे खानदान धन में जन्म हुआ है, क्या यह मेरे भाई छोड़ने का स्विकार नहीं गया? राजा ने क्या कर ले जाओ इसे बाजारों में पीटने के लिए और 22 बाजार में उन्हें घसीटकर ले जाते गए। अक्सर अनुभव था कि दूसरे या तीसरे बाजार में बोंझलेहरव्यक्ति का देहांत हो जाता। ना वो लेते गए। और जब उन्होंने सुना कि ये पीटने वालों को चिंता है, क्या थी अभी अगर हम तुम्हें नहीं मारेंगे, राजा हमें जिन्दा नहीं छोड़ेगा तो हरिदास का भाव देखो ये पीट रहे है उनको मानना की पूरी प्रयास करें हरिदास क्या चिंता है। इन पीटने वालों के स्वार्थ के विशय में भाईदास ने ऐसा व्यवहार किया जैसे लगा कि उनकी मृत्य हो गई। तो जो पीछे थे बहुत खुश हो गए, नाचने लगे देखो। अंत में उनकी मृत्य हो गई। राजा को सूचना पहुँची काजी के द्वारा कि आयदासकीअंतमें मृत्यु हो गई। raja e a scare करो वही पर kadi नहीं, हम तो हिंदू के घर में चावल का दाना भी नहीं लेते इस पापी को हम वह ऊंचे धरम का के आधार पर अंतिम अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। फेंक 2 इसे गंगा में फेंक दिया, दूसरी तरफ तैर कर, फिर नारीराम शुरू कर। दिया। जब राजा ने देखा, सुना वही संत जिससे लोगों ने कहा था कि मर गया, जीवित है और पेड़ के नीचे जॉब कर रहा है। वह माफी मांगे और समझ। तो हम ये नहीं कह रहे कि आप सब भी राजा से बनोगे, हम हमें भी 22 बाजारों में पीटो, हम देखेंगे और परीक्षा लेंगे। और कहने का साथ तो ये है भग है। मुझे अत्यंत सहनशील होना चाहिए। और भगवान की सेवा की धुररात कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता है। कई बार भगवान की सेवा के उपलक्ष कठिन स्थिति में आना पड़ता है। वह हमें घबरा ली जाए। मां पुरी को कहा गया। चन्दन लेके आओ, मेरे लिए तुन्दी गये आशा करने का। तो भगवान के जो भक्त हैं, वो स्वीकार करते हैं कि हर चीज भगवान का है। और भक्तों की इच्छा क्या है? भगवान की सेवा में रहे। जद भारत यहाँ रोगन को उपदेश दे रहे हैं। और जैसे जोगिना ने जद भारत का उपदेश सुना, वो समझ गए। ये जो संत है, यह कोई मूर्ख व्यक्ति नहीं है, आत्मज्ञानी व्यक्ति है। मैंने क्या कर दिया? मैंने तो इतना अपराध कर लिया है। यानी व्यक्ति को डाटा और गुस्से से उनको दे दिया। तुरंत ही पलक से नीचे आये तो संत को पहचाना जाता है। जब संत अपना मुंह खोलता है। बाबाजी ने भी अनेक समय का, तो जब जज भारत ने अंदर मुंह खोला, वैसे उनका व्यवहार था जब घूमने और भे रहे बनने का और जब जज बारत ने उपदेश देना शुरू किया। रोगन, कल, विचारों का ठीक करते है। ठीक उत्तर दिया तो भाई लोग न समझ गए। मैंने जो अपराध किया है। और वो उन्होंने कहा, मुझे किसी चीज की डर नही है, किसी विषय का डरनी है। पर बेचना अपराध से मैं डरता हूँ। तो हमारे शास्र में आप पढ़ते हो। अगर हम भक्ति गत पूरा लाभ उठाना। चाहे में वैश् अपराध से बचना चाहिए। सेवा, अपराध, वेशण, अपराध से बचना चाहिए। क्यूंकी वैश्व अपराध के विषय में माकन कहा है? जिस प्रकार 1 सुन्दर बगीचा नष्ट हो जाता है, पागल हाथी के आने से, उसी प्रकार जो भक्ति का लाभ है, वो समाप्त हो जाता है। इस पर अपराध से तो हमें जल भारत जैसे उपदेश देना जाए और आगे आध्यात्मिक। ज्ञान आरम्भ होता है इस शिक्षा के साथ कि तुम ये शरीर नहीं हो। हमारी सबसे बड़ी समस्या क्या है? हमें देश से बड़ा गहरा प्रेम रखते हैं। सच बात हीने के सामने दिन में कितनी बार जाते हो? सच बोलो, जो स्त्रियाँ है, वो ज्यादा जाती है। इसलिए वो बडे रखते है। और जो पुरुष है वो भी जाते हैं। क्यूँ देखना चाहते हैं? मिनट ज्यादा सुन्दर बन रहा है। हम सोचते हैं, हर घंटे शरीर की खबसूरती बढ़ती जा रही है, पर केवल परम भगवान की खुबसूरती बढ़ती जा रही है, बागी बाघुगीतस्वीरगड़ते जा रही है। तो धे के प्रति बहुत ज्यादा स्नेह है। अब यामराज ने पूछा देश राज है। इस विश्व में सबसे आश्चर्य की क्या बात है? कौन सा विषय है जिसे आप कह सकते हो? most srp्rाiजing ने यमराज ने पूछा तो। यमराज ने कहा, हर समय लोगों की मृत्यु हो गयी है और हम सोचते हैं, हमारे मृत्यु नहीं आएगी। sc व आएगी भी हमारे से पूछकर आई, जैसे राम राज्य के विषय में सुना। रामराज्य के समय हर व्यक्ति मृत्यु के समय खुद चुन सकता था। और लोगों में ऐसी भावना थी कि थोड़े समय के बाद सब चुन लेते थे। और जाने का समय। आज क्या स्थिति है? चुन सकते हो, आप तो नहीं चुन सकते। आजकल केवल वायरस सुन सकता है, सुन सकता है किस समय किस के बाद पहुँचता है। पर वैसे हम लोग नहीं सुन सकते हो। इसलिए यह आध्यात्मिक ज्ञान का को करना बहुत ही। जब तक हम अध्यात्मिक जीवन नहीं निभाएंगे, समाज में शांति नहीं रही, बेचैनी बढ़ती जाएगी और चिंता बढ़ते जाएंगे। इसलिए इस ज्ञान की बहुत आवश्यकता है। प्रापा जी ने हमें शुद्ध संदेश दिया, कोई बनावटी संदेश नहीं। लोगों ने प्रापा को कहा अमेरिका में सोमी जी आप ही उपदेश दोगे तो कोई सुनेगा नहीं, आप इन कड़क नियम दोगे, कोई सुनेगा नहीं। अगर आप लोगो को आकश करना चाहते हो तो ये नियम वैसे मत 2 वो प्रॉबर्जीनेकुछ कॉम्प्रोमाइज नहीं किया? तो जिस जज भारत इस समय प्रचार करते है, हर श्लोक में रहूगण को वैसे हम लोगो को भी प्रचार करना चाहिए। जल भारत बड़ी स्पष्ट रूप से रोगन के हर प्रश्न का आप से राजा हो, मैं सेवक हूँ कल स्थिति बदल सकती है? तो अध्यात्मिक ज्ञान को अनुकूल करो। यह संभव है। साधु संग में। जब देवहूती ने पूछा बेटे से, कैसे ये संभव है? इन क्लेशों से मुझे पूर्ति मिले देवहूती तो भगवान की माता थी। कोई प्रश्न नहीं था कि वो ज्ञाता में रहे। पर हम सब की भलाई करे। यह प्रश्न पूछे गए। जैसे अर्जुन अर्जुन ने भगवान के सनातन साथी है, वे शुरू से आत्म ज्ञानी है। यह नहीं कि उनके पास ज्ञान नहीं था। पर हमारी पढाई के लिये अर्जुन ने प्रश्न पूछे कि हम उसका लाभ उठाकर। अध्या सके प्रेषित महाज भगवान ने उनकी सुरक्षा की थी। एव माता के घर में थे। तो शुरू से ही ज्ञानी ने उन्हें पूेकसिअंतआनेवाल अंत आने वाला क्या कहना चाहिए? पर अनेक प्रश्न प्रकार थोड़े लोगों को प्रशाद भगवान के श्रग हो जायेंगे। वो बुजजलभारतको, गुरु बनायेंगे और से शिक्षा, ज्ञान की भीक मांगे। इस ज्ञान को हमें अनुकूल करना चाहिए। और कपिल? भगवान ने कहा संतों की संगत संतों के प्रति आकर्षित हो तो भक्ति में आगे बढ़ सकोगे। अगर यही आशक्ति हम भौतिकवादियों के प्रति रखेंगे तो जीवन के लक्ष्य को नहीं प्राप्त रहेंगे। सो सारी संगत में रहो, आपको, आईना की महिमा का ज्ञान मिलेगा, शास्र का ज्ञान मिलेगा, ये ज्ञान प्राप्त होगा। भगवान आवगा के रूप में प्रकट होते हैं। आपके मन में भगवान प्रकट हुए हैं। सीताराम, अनुमान, पा, साथी, गोली ताई के रूप में। और बाकी की विधियों का पालन करने से अध्याधिक जीवन अलग कर पाएंगे। तो बाप ने कहा भक्ति का बीज तो प्राप्त होता है। अनेक जन्म के प्रसाद हे बीज उगता है, कब उगता है ये? हर नाम के माध्यम से? तो ये है नाम जो है, कलयुग का उपाय है, हर नाम जो है, असली हर समस्या का हल है। आपको मन की शादी चाहिए तो क्लबों में जाने की जरुरत नहीं है। अब क्या है यही ना, ये जो लॉक आउट लॉक। आउट कहते है लॉक लॉक, डाउन, जो लॉकडाउन है, का थोड़ा बहुत लाभ भी है। जैसे सारे रेस्टुरेंट बाहर बंद हो गए है, बाहर मतलब या शराब दिखती है, वो बंद हो गए है। और कई देशों में मीट का कंजमशन भी बहुत घट गया है। थोड़ा लाभ भी हो रहा है, हर चीज का लाभ भी होता है, नुकसान भी होता है। तो इस अ्यातविज्ञानकेहरी की असली लॉक कोड का उपाय है। भाई राम नाम की महिमा का प्रचार करो और हमें गंभीरता के साथ शिक्षा को अनुकूल करना चाहिए। और गंभीरता के साथ और जो अनुकूल है, उसे स्वीकार कर। सनातन को, स्वामी को शिक्षा दे रहे थे। सनातन रूप। दोनों ने सार रूप में शिक्षा प्राप्त की। जब वो माँ पाप को मिले थे और फिर देश के अनुसार उन्होंने अनेक भक्ति संबंधित ग्रंथों की रचना की। उचित है वहा पर होंने कहा? वहाँ में सरना गति होने के 6 विभाग है, 1 विभाग है। जो अनुकूल है, उसे स्वीकार करो, जो प्रतिकूल है, उसे क्या और प्रिय मित्र। जो भी कीमत भरने पड़े भरो, कृष्ण भक्ति को हाथ से मत लो। तो जो अनुकूल है, वो स्वीकार कर। अनुकूल क्या है। भक्तों के संग में ध्यान पूर्वक ही नाम कंजा करना, ग्रंथों का अध्ययन करना और विनम्रता का भाव, अंका का भाव ले, अंगा का भाव हमारा शास्त्र बन जाएगा। और संक्षेप में पसकूल क्या है, ध्यान पूर्वक जाप नहीं करना। अच्छी साधना नहीं रखना, पर जलपा में अधिक रुचि लेना हवा हमारी समस्या क्या है, जल्पामेमादेकरूची ले ते हैं और किसने कथा में रूचि लेनी था, किसने कथा में रूचि लेने में बड़ा आनंद आता है। रूप स्वामी ने कहा हथियार जल्पा का अर्थ है वो कथा, वो चर्चा जिसका भगवान से कोई सम्मान न हो, तो प्रजल्प के द्वारा भक्ति का बीज नष्ट हो जाता है। और कृष्ण कथा में रूचि लोगे। तो यह ध्यान क्षेत्र में हम आगे बढ़ पाएंगे, हवा निर्णय होना चाहिए। हम कृष्ण कथा में रूचि ले। तो पहला है, जो अनुकूल है, उसे स्वीकार करो। जो प्रतिकूल है, उसे या 2 आगे और और क्या भगवान की इच्छा को अपनी इच्छा रखो। और यह स्वीकार कर के हाजी जो प्राप्त हो रहा है, भाग्य के वर से प्राप्त है। पर में महाप्रभु के ले विनम्रता। तो विनम्रता का भाव अनुकूल करना चाहिए। जो प्रतिकूल है, उसे त्याग हो या अनुकूल है, उसे स्वीकार करो। भक्तों से संघ में रहो और इन ग्रंथों का भी अध्ययन करो। राबा जी ने ग्रंथों के काअनुवाद किया। इस उद्देश्य के साथ नहीं, केवल हम बाटेंगे, इस उद्देश्य के साथ यह पढेंगे भी। और फिर बाटेंगे तो संक्षेप में आज के श्लोक में जल्द भारत महाराज। रहोगे ना के अनेक विचारों का के ऊपर उत्तर देने, घणा ाजा होते हुए उन्होंने डाटा, क्योंकि हालांकि जाने कपिल उन्हें तब से भाग था, उससे बचने के लिए जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण किया, उन्होंने अज्ञान के ज्ञान के अलग विभागों की चर्चा की और ज्ञान के विषय में ज्ञान में क्या कहना चाहता है। भय? मृत्यु का ये 1 अज्ञानता का रूप है। हमारे मन में सदा भय रहता है। फिर ये भाव, मैं हर चीज का स्वामी हूँ। अगर ये भाग जो है, ये खतरनाक है। मैं हर चीज का स्वामी हूं, हर चीज का स्वामी कौन है? अपने असली स्वरूप को नहीं बचाना ज्ञान सोचते हैं। शरीर हमारा ी सुरूप है। और आज के विषय में बहुत कम ज्ञान रखते। अध्यात्म के विषय में ज्ञान आवश्यक है। तो क्रोध हम हमें कोई चीज चाहिए? आप नहीं होरी तो हम क्रोधित बन जाएंगे। तो ब्रह्माजी ने जब सृष्टि के निर्माण के समय अज्ञानता के अनेक रूपों की स्थापना की। 1 नकली भाव की मैं हूँ मालिक, फिर क्रोध, पर 80 सूरब को नहीं पहचाना और मित्र कब है? उन्होंने कहा, यह तो खतरनाक चीजें हैं, मुझे साथ में अच्छे, अध्यात्मिक मार्ग भी देना चाहिए। उन्होंने संख्या सिद्धांत की स्थापना की। युवा की शिक्षा दी। विराग और तपस्या विराग का अर्थ है हम उन चीजों को तिआगे। योगी भक्ति के लिए प्रतिकूल है। और योगा और योगी कौन है। योगी राम अपनी सर्वेशा जो भगवान का चिंतन करता है, तो हमारे सामने सदा ही फ्री चोइस रहती है। चाहे हम तो भक्ति की शिक्षा का लाभ उठाये हो। चाहें। तो क्या इसका विरोध कर सके। तो साधु संग में रहोगे तो ठीक मार्ग में जुड़े रहोगे और साधु संग से जुदा हो जाओगे। बुरी संगत में आ जायेंगे तो भक्ति का मार कठिन? जब चेतन मालाबो ने पूछा, रामनंद से सबसे कठिन दर्द देने वाला क्या कार्य है? रामनंद रॉय ने कहा, भक्तों की संगत से जुदा हो जाना, उससे ज्यादा दर्द का कोई कार्य नहीं है। तो बक्सों की संगत से जुदा हो जाना ही पेन। को रावजी ने प्रावली की कृपा से आज लगभग विश्व के हर कोने में केंद्र है। भक्त हैं, इनका हमें लाभ उठाना चाहे। अध्यात्मिक जीवन को सबल बनाने के लिए। तो जल भारत बहुत महतवपूर्ण शिक्षा दे रहे हैं और थोड़े लोगों के बाद बाल हो जायेंगे और यही शिक्षा और गहराई के साथ आप सुनोगे। अब देखते है कि भगवत वगैरह में वही विषय की चर्चा बार बार की जाती है। इस उद्देश्य के साथ बार बार सुनेंगे। तो फिर इसका लाभ या उठाए पर कृपा करके लाभ उठाइए। जल्द भारत बहुत ही महत्वपूर्ण शिक्षा दे रहे हैं। और लाभ उठाकर और भक्तों की संग रहोगे। तो फिर सदा भक्ति में जुड़े रहोगे, भक्तों की संगत में रहो और देर होकर उत्साह लेश्चेयरधरियदेर में भक्ति में जुड़ा जाए। यह नहीं कि थोड़ी कठिनाई आई, थोड़ी समस्याएं का विचलित हो जाए। हम हर स्थिति में दीर्ध होकर भगवान की सेवा करनी चाहिए। और अगर ये भाव रहेगा, ये प्रयास रहेगा तो भगवान भी सहयोग देंगे। राभा जी कहते थे, अब 1 कदम उठाओ भगवान की तरफ। भगवान 10 कदम उठाएंगे तो प्रयास करो दीर्ध होकर और इस माध्यम से अतीमेसबोलदाब्राट कर सकोगे किशना हाई क्रिश्ना, हाई क्रिशन हर हर लाल हम हारे हारे।
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