भक्त का स्वभाव कैसा होना चाहिए | SB 5.10.25 | 03 May 2020 | ISKCON Delhi | Gopal Krishna Goswami

Gopal Krishna Goswami explains what makes a true devotee: equality toward all beings, absence of enmity, and obedience to God's will. He uses Prahlad and Kapil as examples, addresses COVID fears through faith, and offers practical guidance on temple management, overcoming anger, and effective preaching.
Chapters
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तानिया
सागुनामे sbaकdaमejsीहे करिश्णा जी का विश्व सर पानी तो इसरो का उच्चारन वहाँ लोग ना कर रहे है। और जैसे आप सुन बैठे हो, वहाँ लोग राजा थे, वो साथ उनके पास धार्मिक ज्ञान के साथ राजा होते हुए थोड़ा श्री समनवीथाराजा होने के कारण केवल भागता वो बोल बड़े में की है। और जब उन्होंने जल्द भारत की शिक्षा सुनी, वो समझ गए कि उन्होंने प्रात किया है ये जो गुंगोरभैरा व्यक्ति है, गुंगारा नहीं, पर आत्म ज्ञानी लगी है। और क्योंकि उनके पास जान विज्ञान था, वो समझ गए कि उन्होंने अपराध किया। पिछले कई लोगों के द्वारा यह महत्वपूर्ण संदेश दिया जा रहा है। वैष्णव अपराध से बचने का। और वैसे आप सांस में अनेक स्थानों में पढ़ते हो किस पर। वैशनअपराधसे हम लोग सुबह लगभग हर मंडल में 10 नाम अपराधों का वर्णन करते है। और सबसे पहले कौन से अपराध का है, जी है भगवान कैसे। हमारी समस्या यह है कि हम लोग सुनते हैं की हमे कैसे बचना चाहिए। ने भी हम बच नहीं पा रहे हैं। गहरी बीमारी है तो मना गनना स्वीकार कर रहे हैं कि जल बाल कोई सधारण पुरुष नहीं है। वो ये स्वीकार कर चुके हैं स्वयं आदमेंगलनीहैऔर आज के शोक में क्या कह है? वो मेरे स्वामी। उन्होंने जज भरल मैंने आदर से कहा ओ माई लॉट, वो मेरे स्वामी को स्वीकार कर रहे हैं कि आप से मैंने शिक्षा ग्रहण करना है। मेरे स्वामी आदर से बोल रहे हैं। तुम जो हो, आप जो हो परम भगवान के मित्र हो और सब जीवात्मा के मित्र हो, जो भगवान का भक्त होता है उन सबके साथ समानता का व्यवहार करता है। भगवत के तीसरे स्तर में देवभूति ने पूछा बेटे कपिल देव से की कैसे हम बहुत कष्ट से मुक्त हो सकते हैं? उन्होंने कहा की आप मेरे नेत्रों जिनके द्वारा मुझे ध्यान में ज्ञान प्राप्त हो सकता है। और बेटे ने कहा की भक्ति योग 1 साधन है जिसके पालन से मुक्त हो सकते हो। जनमृतेकेबंधनऐसी आगे माता ने पूछा भक्तियोग कैसे प्राप्त होता है? और उन्हे कहा भक्तों की सन के द्वारा आगे पूछा भक्तों के गुण क्या होते है? आप कह रहे हो कि बक्सों की सुंदर में रहना चाहिए। तुम कैसे पचाने, कौन भक्त है? कौन नहीं है, सच बात है कैसे पहचाने इस प्रश्न के उत्तर में महान लेक्सा। फितिक्सवाकरुलीका सुदासरवाेजससंता 7 साल 1 गुण वैश्य में ये होता है तितिकsवासेशीभगवान के भागते है, मे संशील होना चाहिए। और चेतिनमागको इसी भाव को प्रकट करते हैं। अब लोग ना ले लेना। इस करूनी दयालु नया की भावना ही है और दया की भावना प्रकट करते हैं। भगवान के प्रचार की मां है सूरज सर्व दही को, वो सब का मित्र है। तो भगवान की जो बात है वह सब के मित्र है। वो ये नहीं सोचते ये हमारे दल का है, वह सामने के दल का है। हमारा और तुम्हारा कई बार हम इस पर मैं आकर 1 ही मंदर के बस होते कहते हैं हमारा यह तुम्हारा है। हम जो जो दल बना देते हैं भी दल बना लेते हैं। और भगवान ने कहा सुविधा से वह जो बहाने बढ़त है, वह सबके मित्र है, भगवत पढते हो। मन के पिता चाहते थे कि उन्हें राजनीतिक सी दरवाजा थोड़ा बंद कर सकते है। या हवा कम आएगी। आज आला बन कर के पिला के पिता थे। उनकी इच्छा थी रात को राजनीतिक शिक्षा दी जाए। रानी क्या friends in anime you my friend anime। तुम मेरे मित्र हो, ये मेरा शत्रु है, जो मित्र में हाँ नहीं मिला था, वो शत्रु है, यहाँ हमें मिला था, वो मेरा बंधन है, वैसी बुद्धि रहती है हमारी। पर। प्रलाद ने कहा मेरा कोई शत्रु नहीं है, जो मुझे आरोप लगता है, वो भी मेरा मित्र है, मेरा कोई सत्र नहीं है। और मैं ये शिक्षा मुझे नहीं चाहिए। पापा जी भी कई बार कहते थे, हम सब 1 ही दोनो दरवाजे बंद मत करो। 1 हम सब 1 ही दल के सदस्य हैं। तो यही भाव यहाँ पकड़ते है। क्यूँकि जल भारत कौन है? कौन है जलभारदसंधऊचीकोड़ी का सं, साधारण साधु नहीं। असली साधु फसली साल की महिमा करते हुए डॉग आप तो सबके मित्र हो। ये थोड़ी क्या मित्र हो? 1 शत्रु ये भाव व हृदय में बैठ जाना चाहिए। हम सब 1 ही दल के हैं, हम सब के मित्र हैं। ये नहीं, ये मेरा ज्यादा मित्र है, ये मेरा है, ज्यादा बंद सब 1 साथ 1 जैसे हैं। तो रोना कह रहे हैं आप परम भगवान की मित्र हो तो भगवान का उत्तम कोटी का भक्त है। वो केवल भगवान की सेवा करना चाहता है। जिस काम भाव से। तो यहाँ कहा जा रहा है गुना के द्वारा। आप गेंद, वार, सब के मित्र हो। और सब व्यक्ति आपके मित्र हैं। आपका कोई कत्ल नहीं। ये था प्रॉपर्टी का विभाव, वहाँ कोई शर्त। 1 समय हम प्रॉपर्टी के साथ 1 प्रोग्राम में गए थे। कैनाडा में का हो। पहली सुनाई है। 1 स्कूल के प्रोग्राम में गए है नाइन सिक्स्टी एट में क्रिश्चियन स्कूल का प्रोग्राम उपरबाले शाम के समय वन क्र दिया। नक् के 7 बजे हमेशा से थे। एनी, क्वेशचंस कोई प्रश्न है? वे हिंदू बंगाली भक्त भक्त ने मंदिर से बेसी की की आप ये संदेश विशे देशों में क्यों दे रहे हो? इंडिया में लोग सो बक्स तो क्रोध आ गया था। 2 सन शील और 2 महीने बाद जब प्रॉपर्ली जा रहे थे कि छोड़ के उन्होंने कहा, बुलाओ मूवी बुलाया, उसे आशीर्वाद दे चलने। ये स का भाव जो उसकी आलोचना करे, उसे भी अपना मित्र मानता है। लाल मान के पिता ने क्या नहीं किया? पहाड़ों से फेंका जेल सापों ने घेरा, धेर खिलाई गई, चारो तरफ आग लग गई। मुझे भी बवाल इलाके के मान के माने कृष्णराज। और जब यहां ने कर्ज पूरा हुआ तो प्रधान ने क्या माना? भानस ने कहा, हालांकि मेरे पिता इतने दुष्ट भाव के थे। हालांकि उन्होंने मुझे अनेक युगों से कर्ज पहुंचाने का प्रयास किया। मैं जब भी 1 प्रार्थना करता हूँ, क्या उनको आप मुक्ति दे। 2 उनका उद्धार कर। 2 कुम्हार ने यह नही कहा बरसा 2 गाउन का उद्धार कर। 2 से मारा और पांडव भाइयों को अनेक प्रकारों के कष्ट सहने। पड़े क्यूंकि दुनियो भाई चाहते थे। किसी प्रकार के पान में शुरू होने से पहले। भगवान ने कह दिया था, किसी का पक्ष नहीं लेना। तो यो ने कहा, हमें भगवान ही चाहिए, आवेदन की सेना चाहिए। भगवान ने तो कह दिया है किसी का पक्ष। और अंत में पनभयनकेविजयहो भगवान के भक्त है। तुम्हारे रूप से उन्हें देने का प्रयास किया। वो असफल हो। यू के पश्चात देश ने क्या कहा? जरा मुझे। उन्होंने कहा कि क्या सुविधा चाहिए। बोले, उन्होंने बड़ा अच्छा महल दे दिया, मैं संजाला लगाओ, देखो गोवा। यहाँ ये सब प्रयास कर रहे थे, बस करने के लिए क्या कर रहे थे? वो पूछ रहे हैं, आपकी क्या सेवा कर सकते हैं? वो इतने अच्छे महल का सुविधा बना दिया। लगा, यह मेरी भी लाश पूरी हो गई है। तो ये विचार, ये संदेश, बार बार आप पढ़ते हो, जो भगवान के भक्त हैं। 1 तो सब जीवात्मा के मित्र हैं, कोई शत्रु नहीं है। और ऊपर भगवान के भी मित्र हैं। और भगवान के मित्र। इस देश से जीवन में 1 ही भाव रहता है। भगवान के आदेश का पालन वे और भगवान के आदेश का पालन करने के दौरान कष्टों को भी सहना पड़े, वो तैयार हो जाते। पिछले हफ्ते हमने माले पूरी की कथा बोली थी। भगवान ने पूरी देखते हो की भगवान ने, उन ने बड़ा कठिन आदेश दिया, जाओ पूरी पैदल। उन्होंने स्वीकार कर लिया। उन्होंने यह भी कहा कि यह कठिन कार्य में कैसे कर पाऊँगा। ये होना चाहिए हमारा भाव की। और आगे क्या कहते हैं। आप सबके प्रति समानता से व्यवहार करते है। ये बहुत आवश्यक है। ईक्वल, टू, ऑल, सबके साथ समानता का व्यवहार। यह होना चाहिए। भर का भाव यह है की कैसे हम कह रहे थे, यह हमारा दल है, उनका। ऐसे नहीं, ये मेरा ज्यादा अच्छा मित्र है। ये में कम अच्छा मित्र है। नहीं, ये, ये मुझे सुविधा देता है। मैं उसको सुविधा दूंगा। ऐसे है। तो भक्त जो है भगवान का मित्र क्यों है? जो भगवान के आदेश का पालन करने का प्रयास कर रहा है, वो है भगत। भगवान की इच्छा के अनुसार हर कार्य करता है। भगवान की क्या इच्छा है? कैसे सजाती है संतो के द्वारा। तो यहाँ रगुनाथ कह रहे है? आप सबके प्रति समानता का भाव महात्मा। बुद्धि के ज्ञान से मुक्त भौतिक वादी और आध्यात्मिक वादी में क्या अंतर भौतिक वादी। यह सोचता है निर्देही। मेरा असली स्वरूप है उद्देय को संतोष करना, जीवन का लक्ष्य। और इसलिए सुबह से रात तक यही भय रहता है, यही प्रयास रहता है। देह को कैसे संतोष किया जाए? जैसे आप सब जानते हो। मय कोरोना, वायरस से सब को डर लगा। हा, ये सच झूठ डर लगा, नहीं लगा। आप लोगों को, नहीं लगा। अच्छा आप सारे विश्व की प्रजा से बात करो। कल रात को में प्रोग्राम देख कर रहा था ढाई सौ भक्तों के साथ, जो अमेरिका में रहते है में, और वो कह रहे थे अमेरिका में भी। लोग कहते हैं ऐसी घटना उन्होंने पहले कभी नहीं देखा कि 1 साथ इतना भय लोगों के हृदय में इतना भय है। भय क्या है? सब शरीर को अपना असली रूप मान रहे हैं। और भई इसलिए है क्योंकि वायरस के प्रभाव से शरीर मित्या सकता है। उसका इलाज भी इतना इस दी है और अभी तक कोई दवाई निकाली है जो इस इस बीमारी का इलाज कर सकता है। तो लोगों के मन में यह है ज्ञान लगे। कारण अज्ञान के कारण बुद्धी से शरीर से प्रेम रहता है और सुबह से रात तक प्रयास रहता है। क्या हम इन चुप्पी के कार्य में सपोर्ट जीवन का लक्ष्य क्या है? how poj ये मंत्र है भौतिक जीवन का खाओ पियो। भविष्य को किसने देखा है? तो साधु लोग का प्रॉपर है।
ये है
अज्ञानता का मंत्र। तो अज्ञानता के कारण देह को संतोष करना ही जीवन का लक्ष्य है। पर हमारी सासों में अनेक कथा पढते हो जिनके द्वारा यह शिक्षा मिलती है कि आप वीरों का भी संतोष नहीं कर पाओगे। मनाया याती के पास 10 हजार साल की सुविधा थी। तो अंत में उन्होंने क्या कहा आई वाज लाइक लस्टी गोड। आप सुभरी मूली की कथा बढती है। भगत में सुभरी मूली होती, ऊँची होती के योगी थे। पानी के नीचे से सबमरीन होती है, जो नाव पानी के नीचे आ जाती है। पानी पानी के नीचे बैठ कर सालों सालों से चिंतन कर रहे थे। भगवान का जान दिया। स में मेरे नाम जो कि साफ पानी से 1 बने, 2 मंे, 3 बजे, 4 नीचे तक जा सकती। ये है आजकल के नई उसी प्रकार के योगी भी होते हैं जो पानी के बहुत नीचे जा जा सकते हैं। सबरी मुनी बिल्कुल योगी शक्तियों के द्वारा पानी के नीचे चले गए थे, भगवान का चिंतन कर रहे थे। वहाँ उन्होंने देखा 2 मछलियों को भोगविलास करते हुए, जिसके पश्चात वो जरा विचलित हो गए। वो यही सोचने लगे हैं, बड़े आनंद का कार्य है। और उन्होंने अपने चिंतन की सेवा छोड़ दी। और उस शहर के राजा के महल में पहुँचे। राजा की 50 बेटियां थीं और राजा से सवाई मुल्ला, मैं चाहता हूँ की तुम्हारी 1 बेटी से विवाह हो जाए। मेरा राजा ने देखा जंगली जैसा योगी है, लम्बे लम्बे बाल, लंबे, लम्बे नाक हूँ, इतना बदसूरत। तो उन्होंने कहा मैं तो जबरदस्ती मैं तो जबर्दस्ती की की शादी नहीं कर सकता, तुम खुद जाकर, देख लो बेटी वापस आती है तो कर लेना चाहता। सब। बेटियों ने देखा ली दरवाजा बन गया। इन मुसरत योगी, योगी शक्ति की अंदाजा भी नहीं लगा सकते। वो समझ गए सब लोग मुझे ठुकरा रहे हैं, क्योंकि मैं जंगली जैसे दिख रहा हूँ। लम्बे बाल, लंबे नाखून लम्बे। तुम्हे अपनी योगिक शेत्रों द्वारा। खूबसूरत देव बना लिया, साथ में महल भी बना लिए। जब बहनों ने देखा वह कोई सवारी बुरी इतना कस बन गया है। तो बहनों में झगड़ा पैदा ओगे क्यूँ, हर बहन कहने लगी मैंने इसे पहले चुना था तो पहले मेरा हक है, दूसरी बहन के दिल नहीं नहीं, तुम से पहले मैंने देखा था 50 बहनों का झगड़ा हो गया। सुबह मुनी ने सोचा ये ठीक नहीं है, झगड़ा हो रहा है, पचालधैनोसेसेशाली कर और सबसे जल उस बड़ी मुनी ने देखा कि मैं कितना मूर्ख बन गया हूँ। मैं इतनी शांति के साथ भगवान का चिंतन कर रहा था। 2 मछलियों के द्वारा मैं विचलित हो गया और मैं सोचने लगा भोग विलास के आनंद की लीला। उसके कारण अब मैंने समय न जा रहा ह। जंगल में सवारी बनी, सब कुछ छोड़कर जंगल में गए, उनकी पत्नियां भी साथ हो गई। तो जो जो व्यक्ति शरीर की दयात्माबुद्धि से जुड़े हैं, वो सर ये सोचते रहते हैं। इन नेतिप्रीयोगकारियो में कैसे जुड़े पर हमारे शास्त्र में कहा गया है, जहर पी के देखने की कोई आवश्यकता नहीं। जाएगा। क्या परिणाम हो, ता है। आप सब जानते हो, इन का जहर पीने के बराबर है। सिर्फ भक्त ने क्या कहा है? मनुष्य जन्म पाया, राधा कृष्ण नए हानिया जानिया, सुनिया पीसा राज ठाकुर राजकुमार थे। उन्होंने कहा कि मनुष्य जन्म पाया, मनुष्य जन्म ने मैंने प्राप्त कर लिया और मैंने राधा कृष्ण का भजन नहीं नहीं किया। तो मैं जान बुझकर झैर पी रहा था। तो जो व्यक्ति भगवान के शरण अगर नहीं होते, वो जान बुझकर क्या पी रहे हैं? पे पापा जी कहते थे आजकल लोग इतने दुर्भाग्यशाली हैं, उन्हें तो ढेर पीरे हो, खतरा है कैसे पीने। 1 उदाहरण देते थे। भक्ति से ना देने का उदाहरण चाहिए की सी पतंग उड़ा रहा था से वो नीचे गिरने वाला था, किसी का साथ हर नीचे गिर जाओगे। वो कहता है? पुरे पतंग उड़ाने तो आज बहू की स्थिति ऐसे है। तो भगवान के जो भक्त हैं, जिहाद बुद्धि के ज्ञान से बुक है, इसलिए हमे करते हैं। व मैं ज्ञान थी, वह जन्म था ज्ञानता में। गुरु साधु के सहयोग से। ज्ञानता का भाव जो है वो निकला है। गुना गुना, गुना क्या कहे है? सब के मित्र हो। देहात में बुद्धि के भाव से मैंने आपके प्रति बहुत अपमान किया है। अब आप देखिये इस अध्याय के कई श्लोकों में यही विचार रहना प्रगट कर। दूसरे शब्दों में बड़ा गहरा शोक उनके हृदय में पहुँचा है। मैंने इतने महान साल का अपमान कर लिया। मैंने इस दिल भार का अपमान किया है। तो अनेक शोको द्वारा यही कह रहे है। वो यहाँ कैसे है? मैंने 1 महान अपराध किया है, छोटा पानी महान अपराध किया है। कैसे आपकी बस्ती करके उन्होंने क्या सन की बस्ती की? वो अपमान महसूस कर रहे है। जब आप किसी सन की बेस्ती करते हो, हँसी उड़ाते हो या कुछ करते हो। नुकसान किसका है जिसके विषय में आप चर्चा कर रहे हो या जो करता है मा रहूनस्पषकरेहै। मैंने अपराध किया है आपकी बेसिक के आपको, इसमें कोई लाल या नुकसान नहीं। जब हम वैक्षणअपरान करते हैं। नुकसान उसी व्यक्ति का होता है जो करता है। जो व्यक्ति करता नहीं है, उसको कोई चिंता की बात नहीं है। और जो बैठे राज करता है उसको चिंता की बात है। खेती और नासी में आये थे और नासी में 1 ब्राह्मण के घर में थे रहे थे। ये जो ब्राह्मण था वो उसे सुनने में आता था कि जो मायावदी सन्यासी हैं दिन रात महाप्रभु की निंदा करे। और जब महाप्रभु वरणासी आए तो तपन मिस और चंद्र शेखर जो महाप्रभु के भक्त थे। उन्होंने कहा हम सह नहीं सकते। ये मायावादी सन्यासी अभी कितनी निंदा करते हैं। हम चाहते हैं कि आप चलिए उनके आश्रम में में। तो वहाँ पर व्यू कहा गया की ये माया वाली सुनास आपकी निंदा कर ने है। उन्होंने भरवाने किया। उन्होंने कहा आखिर मे निंदा कर न करने 2 पर जो पल वो नहीं सह सके भगवान की निंदा हो रही है। तो जब कोई व्यक्ति निंदा करता है किसी व्यक्ति का जिस व्यक्ति की निंदा हो वो निश्चित रहता है में निंदा करने करने 2 निंदा करके खुश हैं करने 2 नो प्रॉब्लम पर जो दूसरे भक्त हैं वो ये नहीं सह सकते कि वइशोंकीनिंदा क्यों हो रही है। अगर कोई आप की निंदा कर रहे सह 2 पर वो दूसरे भक्तों की निंदा कर रहा है तो फिर सेना ज्यादा कठिन हो जाता है। तो ब्राह्मण ने सारे माया वाली सनिहाजोकनेमंजर दिया था अपने घर में आने के लिए, वो ब्राह्मण आये, वहाँ प्रभु को ने मंजर देने के लिए लिए। वह प्रभु का नियम यह था किसी मायावादी के घर में नहीं जाना। किसी मायावादी ऐसी संपर्क नहीं रखना, किसी मायावादी की चर्चा निक। इस ब्राहमण वह प्रभु कभी भी मायावादी के घर नहीं जाते। पर इस ब्राह्मण की बड़ी इच्छा थी कि जो निंदा हो रही है बार बार वहाँ प्रभु हे वो रोका जाए, वो अपराध है। तो ब्राहमण ने वहाँ पर वो कहा मैं जानता हूँ कि आप मयवादियोकेघरमें नहीं जाते पर ये खास स्थिति है, वो इतनी निंदा करते है आप की कि हम सह नहीं सकते। आइए मा प्रभु ने जब देखा कि उनके भक्तों की इतनी चिंता है क्योंकि वो अपराध करने हैं उनके प्रति हम माँ प्रभु के प्रति फिल्म मान गए और ब्राहमण माँ प्रभु को अपने घर ले जाए वो अपने घर ले गये। मा कबो ने देखा कि ऊँचे मंच पर यह मायावनी सन्यासी बैठे हैं और महा को अपने अपनी विलमबरसपकडकी जैसे महा कहते हैं कि ना सुने अगर आप हरे के नाम में सफलता चाहते हो तो what is saving की प्रिंसिपल वैपन स्पेशल एडवांस में तो वहाँ अपनी सा कैसे दिखाई, वो सीधा ऊपर नहीं गए बैठने मायावनी सने वो बैठे जहाँ के लोग पाउंड होते हैं। मंदिर में प्रवेश करने से पहले और बापू वानजा बैठ गए तो साथ में हाँ प्रभु अपनी अदभुत लीला भी प्रगट करना चाहते थे क्योंकि वह चाहते थे। वो समझ था की वो कौन है। उन्होंने अपने चेहरे से लाखों सूर्य की रोशनी या प्रकाश प्रकट किया। जब सन्यासी ने देखा इतना प्रकाश इनके चेहरे से आ रहा है तो समझ गए ये सन्यासी जो हैं साधारण सन्यासी नहीं है। सन्यासी कौन है स्वयं भगवान? तो प्रकाश सर स्वती गुरु से वो नीचे आये और उनके हाथ को पकड़ कर ऊपर ले और सब साथ में बैठे तुम आप लोगो की निर्मता देखो माय वाली सन्यासियो को जब सामने आया, उन्होंने उनको प्रणाम किया। आप पढते की सनातन स्वामी की इच्छा नहीं थी। नौकरी में रहे। उनके भाई को नौकरी छोड़ चुके थे। वो सनातन 1 महीने के ले दफ्तर ले गये। घर में बैठ कर भागवतम पढ़े थे। 3 नामों के साथ राजा दुखी था, नौकरी या की थी और सनातन में त्याग। उसने अपने डॉक्टर को भेजा देखने के लिए क्या बीमारी है। नाथ के साथ डॉक्टर जब अंदर आया, वैद्य ने कहा ओह वो तो बिल्कुल फर्क देखते है की बम के साथ बैठकर भागवत का अध्ययन कर। राजा ने नाथ को निमंशनदिया। तुम झूठ क्यों बोल रहे हो? तुम्हारा भाई भी कम निकला निकल रहे हो? तुम झूठ क्यों बोल रहे हो? तुम राज्य को संभालो मुझे। इस समय जाना है, वहाँ के राजा से लड़ने ले। सनातन राजा के सामने आये। लागी। राजा मुस्लमान था, कम था, प्रणाम किया। पहले तो कहते हैं कि ये भग्घाव्यवहार हमेशा नम्रता और स्नातस्वामीऊँचे के सं थे। वो राजा के सामने आये तो उनको ने दी किया। तो ये विनम्रता का भाव प्रकट होना चाहिए। हमारे यहाँ कहा जा रहा है, गुना द्वारा के द्वारा क्या भौतिक दे, उसे मुक्त हो। और ये ये ज्ञान बहुत इंडिया लिपी जीवन का लक्ष्य है। अगर मैंने आपका अपराध किया भी है। इसे आपको कुछ अंतर नहीं आएगा। ये आप को आत्म इसका परिणाम कैसे मुकरना? पड़ेगा मुझे करना पड़ेगा। तो यहाँ फिर से यह कह रहे हैं। यही भाव पिछले कई लोगों में प्रस्तुत किया। आगे यह कह रहे हैं आप जब भक्ति में फिक्स, शो, विद, जर्मिनेशन, ये कह रहे हैं बना के। आप जो हो, भक्ति में दीर्ध होकर जुड़े हो, तो आपका विचलित होने का प्रश्न तो भगवान के जो भक्त हैं, उन्हें देर ोकर ना चाहिए। लगभग स्समने। हमें कई ग्रंथ किए हैं। 2 ग्रंथों के वाद किया। देशहित और भक्ति तो देश में क्या कहते हैं? भक्ति में आगे बढ़ने के लिए क्या कुलों की आवश्यकता है? 70 संग आगे सत्र म, अगर आप भक्ति में आगे बढ़ना चाहते हो तो क्या आवश्यक है? 1 उत्साह उत्साहित होना चाहिए। जब आप प्रचार में मिल जाते हो, उत्साहित होकर प्रचार करोगे। तो ज्यादा असर आएगा इसे खड़े होकर करोगे सर के बिना तो इतना पाप nitrvinatioन, ये बहुत आवश्यक है। प्रॉपर भागु गीता में। 1 बहुत सरल उदाहरण देते हैं। इस विषय पर कौन कौन सी धारा
ने
स्परोॉशलएक्ीदीओश पक्षी थी। उसके बच्चे गिर गए। सागर में पक्षी ने कहा मेरे बच्चों को लुटा।
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सागर लगा। तुम्हारे बच्चे वापस नहीं, मिलेगा, नहीं दोगे वापस, तुम्हे तुमें सुखा दूंगी। अपने मुँह से सागर हँसने लगा देखो। छोटा मुँह, बड़ी बड़ी बात। वो ये पक्षी अब छोटे मुँह से मुझे सुखाएगी। मुझ पर से 34 बून पानी आता है। 1 तो उसमें बड़ा दिल भाव था, ठीक है, मैं शुरू करती हूँ तुम्हे सुखाना। और ये सूचना कहाँ तक पहुँच गयी? गुरुता के बाद गुरुजा ने पर धमकी दी। उनके बच्चे प्राप्त। तो प्रापा जी इस श्लोक के तारे गीता में कहते हैं। प्रापा जी ने इस उदाहरण, इस उदाहरण की चर्चा कई बार की है की हम जब भक्ति में जुड़ते हैं, दर्ज होकर जुड़ना चाहिए, इन्हें भक्ति में जुड़े हैं। और कोई कठना कठिनाई हो? हम कहते चलो हम लोग घर जा रहे, फिर भक्ति में अक्सर नहीं कर सकोगे। इसलिए बार बार पढ़ते हो, दर्द होना चाहिए। तो फिर भक्ति में सफल हो गया। तो प्रश्न। ये उठता है। तो यह डिटर्मिनेशन जो इतना आवश्यक है, ये गुण कैसे प्राप्त हो? और ये गुण प्राप्त हो सकता है। शब्दों में जल पिया का पालन करो। मुझे पिया का मतलब है नियमो का पालन, साधना का पालन और इन चीजों का पालन करो। जब देर हो कर आप सेवा कर सकते हो। अगर हम आज ही रहे। श्रम कितना बली दे। फिर सोचना की डिटरमिनेशन प्राप्त होगी। गलत है। यह सम्भव है। सो चाहे भक्ति का कार्य हो। किसी विषय में यूनिट ट्रमिनेशन है की नहीं। आप लोगों को याद लंच जब आप स्कूल में पढ़े थे और कॉलेज में दाखला की तैयारी करने से, तो आपको भेज होकर पढ़ाई करनी पड़ी है की नहीं खा सके। अगर आपको आईटी वगैरह में जाना है तो उसी प्रकार हमें दे होगा। भगवान की सेवा कर। नीचे हर स्थिति में सेवा के लिए तैयार रहना चाहिए। यह नहीं कि केवल अगर सुविधा जो हमें चाहिए, वो हो। तो हम सेवा। भगवान कहते हैं। सुन जगीश जर्मनी मिश्र है। तो यह कहा जा रहा है जल्द भारत द्वारा। आप देर होकर जुड़े हो। भक्ति के रास्ते में मैंने अपराध कर दिया है। शाब शुद्ध भक्त, भगवान के रथ के प्रति। मैंने अपराध किया है। फिर से देखो। 1 स्लोक में 3 दफा महाराज रोग ना अपराध किया है, मैंने अपराध किया है, मैंने अपराध किया है या फिर से कह रहे है कि मैंने अपराध किया है और उन्हें इन अपराधों का बहुत डर है। तो यह कहते हैं क्यूँकि मैंने यह अपराध किया है? मेरी जो भक्ति है, नष्ट हो जाएगी। तो इससे क्या समझा भाई? हमें सावधान रहना चाहिए और अपराधों से बचना चाहिए। और अपराध समझो कभी कर भी लो, हमने उसकी माफी मांग ले। तो अगर आप को माफ नहीं करे तो कर ली है। तो हमारे शासन ने। उदाहरण है। जैसे अमरीश मराज का। अमरीश राज ने, 1 साल कार्तिक के महीने में वर्ज छोड़ने ही वाले थे। दुर्वासा मुलियन के बल में पहुँचे। सो। अमरीश ने मंशनदियामेंभीवर्द छोड़ने वाला हूँ। आइये प्रशाद स्वीकार के लिए। दुर्वासा ने कहा, मैं स्नान दोपहर का स्नान करके आता हूँ। वो स्नान करने गये, भगवान का चिंतन कर रहे थे, पानी में गए, भूल गए की राह देख रहे है। अमरीश के सामने चिंता क्या थी, बस से बात करने का समय बीत रहा था, बीतने वाला था, और अमरेश चाहते नहीं थे। बस को ठीक से न छोड़ा जाए। तुम ब्राहमण से पूछा क्या करना चाहिए? ब्राहमणों ने कहा जल्द पी लो, जल्द पीना। 1 रूप से अपराध है, जो 1 रूप से उसके द्वारा वर्ल्ड टूट जाता है, दूसरी तरफ से नहीं भी। जब दुर्वास मोरी, वहाँ पहुँचे, समझ गए। अम्बरीश ने मेरी राह देखे बिना अपना तोड़ दिया। मुझे भी इसे सबक सिखाने। 2 उन्होने अपने सीके से राक्षस amrish maharaj we बिल्कुल stir bachan kisna or से वो राख से डरे नहीं, भगवान ने अपने भाग के लिए क्या किया, भगवान को पता था कि मेरा अमरेश 24 घंटे जुड़ा रहे थे, मेरी सेवा में उन्होंने अपने सुलेशन चेप्टर को छोड़ दिया। दरवासकेदुरवासा पहुंचे ब्रह्माजी के पास बचाओ बचाओ बचाओ, मैंने निशा में आकर नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया, कुछ नहीं कर सकता, हो गए शिव जी, पर यही संदेश देगा शिव जी ने कहा कुछ नही कर सकता, अमीश उत्तम पुलिस कुछ नही कर सकता। तो फिर हो गए परम भगवान के बाद। परम भगवान ने मैं भी कुछ नहीं कर सकता, तू कौन कर सकता? मैं भी कुछ नहीं कर सकता, तू कौन कर सकता? मैं तो कुछ नहीं कर सकता, पर मेरा भक्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि मेरे भक्त प्रिय है की वो मेरे हृदय में रहते हैं, मैं सदा उनके हृदय में रहता हूँ। दवा को आना पड़ा किसके पास? तो इस कथा आप सब ने ये कथा हजारों बार सुनी होगी। आपको क्या शिक्षा मिलती है। भगवान के जो भक्त हैं वो अत्यंत प्रिय है। शिव जी, ब्रह्मा जी, भगवान ने भी स्वयं इनकार कर दिया, हम कुछ नहीं कर सकते ह। पर जो भकयीकिता हुई तो उन्हें माफ कर दिया गया। और सच्ची माता का उदाहरण 1 भक्त थे, उनका नाम था देवनंद। पंददनेवनन्धपंदिद। बड़े विद्वान थे, उन्होंने भागवत को लगभग खंठसट्सकीाहुआ था, पर उन्हें 1 गुन 1 कमजोरी थी, जो भगवान का जस्वी उपदेश भक्ति योग उस विषय में लगभग बहुत कम ज्ञान था। जैसे कई लोग भागवत कथा करते, कई उन्हें गीता को कंटेस्ट किया हुआ है, कई उन्हें भागवतम को कंटेस्ट किया हुआ है। पर कृष्ण भगवान स्वयं स्वीकार नहीं करते है। संस्कृत के बड़े विद्वान थे। भागवत में पूरा विश्वास है, भागवतम को पड़ा था। तो भागवतम की जो असली संदेश है, उसका उनके बाद गया था। सो 1 दिन श्रीवास जा रहे थे, उनके घर के आगे से, उन्होंने अंदर देखा भागवतम की रचना हो रही है। श्रीवास तो कुल शुद्ध से समझ गए, भागवतम की रक्षा हो रही है, चर्चा हो रही है। वो अंदर गए। जब उन्होंने भागवत के मधुर श्लोकों का उच्चारण सुना तो उनके मन में भक्ति भाव ऐसा उत्पन हुआ कि आंसू बहने लगे और रोना शुरू हो गया। कई बार लोग नकली रोते है। तो जो दूसरे विद्यार्थी थे, जन को सुन रहे थे, विद्यार्थी थे। कौन है ये पागल आदमी जो अन्दर आया था और उनको उठाकर फेंके जाओ जा। हम हमारे टीचर को सुन नहीं सकते हैं। बाहर फेंक दिया और श्वास पूरा ज्ञान था भगत। पर जो भागवत का असली संदेश है, क्या रहा था, उन्होंने देखा उनके विद्यार्थी शिवाज की बेचती कर रहे हैं, वो चुप रहे। और जब मा प्रभू को यह पता लगा, वह तिन हुए पद के ऊपर उन्होंने अपराध किया, क्या अपराध शिवाज जैसे उत्तम कोटी के भार को उठाकर भाग ले गए तो शिवा ने कुछ भी नहीं कहा। देव पन् ने कुछ देखा, माँ बहू
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देव का तुम पापी हो। अंत में जाकर देव पर ने माफी मांगी। तो कई उदहारण हैं जिनसे आप देखते हो कि वैसा अपराध का भयंकर परिणाम होता है। तो यहाँ भरा कहते हैं कि मैंने बोला महान अपराध किया है, वैसा के चरण कमलों में अपराध किया है तो प्रयास रहना चाहिए। हम अपराध से बचे। जब महाप्रभु नाथ स्वामी को शिक्षा दे रहे थे, उन्होंने क्या कहा भगवान जी, गुरु कृष्ण के अनेक यूनिया में गुजरने के पश्चात भाग्यशाली गलती है, उसे ज्ञान प्राप्त होता है। क्या ये भक्ति सबसे महत्वपूर्ण सेवा है। भक्ति दादा बीच, भक्ति बीच का मतलब, ये ज्ञान जीवन का लक्ष्य क्या है। और जैसे आप किताब बाटते हो किसी को तो 1 रूप से आप के हृदय में भक्ति का बीज बो रहे हो क्योंकि इस ज्ञान का लाभ कभी न कभी होगा और जब आप इस बीज को पानी पिलाते हो तो भक्ति में उत्साह बढ़ता है। कहा कि महा ने ये भी कहा इस सुन्दर बगीचे में पागल हाथी को आने दोगे तो क्या होगा? पूरा बगीचा नश हो जाएगा तो ये ही भाव आप पढते हो। बार बार हमें बचना अपराध से बचना चाहा और प्रयास करोगे तो सफलता प्राप्त होगी। और कई बार हम बहुत ज्यादा डर जाते हैं वैसा अपराध में और वैश्य अपराध से यह मतलब नहीं मान लो आप मंदिर में हो और कुछ कमी है आपके व्यवहार में और आधिकारिक उनको बोलने की आवश्यकता है। और उसको मैं बोलूंगा मैं वैष्ण अपराध कर रहा हूँ में वैसा अपराध अधिकतर, उसका अर्थ है इंशा द्वेश निन्दा की भावना में आकर हम अपराध करे और हमारा प्रयास होना चाहिए हम वैश परात से बचे और अगर अपराध हो भी जाए तुम भक्तों के सामने प्रणाम करो जिनके प्रति वैश्य अपराध हो। और अगर आप भी सोचते हो, दूसरा व्यक्ति अगर नही स्वीकार करे ये फिर उसका दोष है। तो वैश्य अपराध से बचना चाहिए और आप भी लगभग रोज सुन हर क्लास में सुन रहे हो। चोर की बात है, बार बार सुनने के कारण भी हम गलती कर देते। तो महज रहो बेटा असली भक्त थे, उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने गलती की है, वो जद भारत के शरणगत हो गए, जद भारत से ज्ञान की भीग मांगे, वह ध्यान से जद भारतद्वारा जो संदेश मिला उसको स्वीकार किया। तो हमारे में भी वही उत्साह होना चाहिए जो जदमलोगनमेथा पूछा की हमें असली ज्ञान प्राप्त हो। फिर हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम अपराध से बचे ध्यान को जाप करे और अगर आप प्रयास करोगे तो आवश्यक ही सफलता प्राप्त करोगे। और आज के लोग के तारे में पाजी ने चेतन भगवत के तेरे अध्याय और बाईसवें अध्याय इस लोकों का वर्णन किया है। ये 5 लोग हैं, वे 5 लोगों का अर्थ 1 ही है कि हमें विष प्राथ सो भागवत मय में कहते हैं रिपिटेशन इस सारी टू ड्राइव द पॉइंट होम। कई बार जब बात कमाई को पढते हैं, आपके ग्रंथों में सेम पॉइंट गेस्ट रिपीटेड। अगेन अगेन, ये बात तो सच है, यही नहीं की अलग लीला सुन रहे हो, न गया। बार बार आप सुनते।
हो।
हर नाम की महिमा दसम, अपराधों से मुक्ति वैसे अपराध से साधु सह की आवश्यकता बेसिक प्वाइंट्स हैं। वो तो सेम है। तो कई बार उन को लगता है कुछ नया स्कूल में नहीं आता। राधापुर जायेंगे 2 नई विला सुन प्रभुजी कहते हैं बार बार सुनोगे तो ही आपके हृदय में बैठेगा, 1 बार, 2 बार सुनने से नहीं बैठेगा। तो इसीलिए शास्त्र को पढ़ना, चाहे, रोज इधर को पढ़ना चाहिए। बार बार सुनोगे तो भी थकोगे नहीं है। नाम का उच्चारण, नाम का उच्चारण करते हो। आपको कभी ऐसा लगता है यह नाम चारण बहुत बार हो चुका है। बासी हो गया सामने। कृष्ण चेतन राज ा पूर्व शोध नाथ। भगवान के नाम अभिल है। उसी प्रकार भगवान के ग्रंथ भी अभिल भगवदम क्या है, भगवान की वाणी गीता क्या है। भगवान की वाणी को जितनी बार सुनोगे पढ़ोगे से कम कभी कभी उन्हें भक्त मिलते हैं। जो कहते हैं हम दूसरे चाहियो के ग्रंथों को पढ़ सकते हैं, उनके ग्रंथों को पढ़ सकते हैं, पढ़ सकते हो। और प्रॉपर्टी के शब्दों में प्रॉपर माई बुक प्रॉपर्जीके, ग्रंथों को पढो, उनको पहले समझो। और जब यह समझ लोगे पढ़ लोगे। कई बार फिर आप यह विचार कर सकते हैं। हम दूसरे ग्रंथों को पढने। पर इन इन ग्रंथों को पढ़ने पढ़ना बहुत महत्वपूर्ण है। अब जाकर असली को समझोगे। संक्षेप में मारे रोगुन हम सबको सूचना दे रहे हैं की सूचना क्या है, अपराध से बचना है, प्रयास करेंगे। भगवान आवशक सबूत भी देंगे और बार बार पढ़ोगे, बार बार ज्ञान, सुनोगे, अपराधों से भी बच पाओगे। pryas kare prison pression ye ye
कोई भी ऐसा
उसको हम अपराध खिलाते हैं। मान लो अब बंदर के अधिकारी हो। आप कुछ कमी, तो उसको अब सुधारो। वो भी बैठना परा नहीं बन। मान लो कोई व्यक्ति भगवान की सम्पति का दुरुपयोग कर रहा है, उसका जल्द के परा वो एक्शन अपराध नहीं बनता। नहीं लता।
प्रश्न यह है की अगर जब ज्यादा निकट के समान हो जाते हैं किसी भक्त के साथ, तो फिर उसके प्रति हमारी दुर्भावना पैदा हो जाती है।
20 यहाँ उड़ना नहीं चाहिए। हम जब नए नए आये थे, हमें लगा कि सारे भक्त व कुंदा से आये है, उठना बैठना होता है, तो हमें लगता है कि वो दिल्ली के, तो हम जरा ज्यादा दुख निकालना शुरू कर देते हैं। पहले हम सब भक्तों के गुणों को देखते हैं, इसे पापा जी कहते थे। पहले दूसरों के गुणों को देखो, फिर हम गुणों को देखो। और यह नहीं कि अगर मान लो किसी को कुछ कमी है। अब सुनाओ भी कमी है, तो वो अपराध ही है। what a question यह स दीदी मात्रा में हवा लोगे, उतनी मात्रा में वो हमारा सहयोग देंगे। तो आज से आप अपनी कमियों को छोड़ोगे तो आज से आप क्रेडिट मिलेगा? आप ये भी कह सकते हैं 6 महीने भर मे जरूर याग देना है 6 महीने की छूट, 2 मुझे भगवान खुद कहते है न हम प्रबल ऑल ऑफ मेडिसन बी रेकॉर्डिंग मे okay yeh soanspecelouda yeah तो
तो
एंड किसका अपराध एंटरेजवोर्स
में ये अफसर कहा जाता है
महाराज मैं कुछ भूल रहा हूँ,
यहाँ
चरण है ही नहीं, मैं यह देखना
चाहता हूँ, ये अफसर कहा जाता है की हम भगवान वशनुमकीचरणमेअपराध नहीं करना चाहिए, मतलब निंदा करना भी चरणों में अपराधी है, जो उनके चरणों में अपराधी है।
मतलब की wsनवabdडसकइबिंग वैश्नव isis loda speed won the vision as body ful to all? ओके,
तो उसके फोन भी कैसे वापस
है ये बहुत की कोई समझ पाया मैंने गलती कर ली है, समझ ले मैंने गलती की है, समय व्यस्त वेस्ट हो गया है। अब भैया वापस जाने। 2 मिलि यस
वैक्सीन थे, लोग समझते है की कर रहे है। 1 गुरु राम तो आज के लोग समझते लिए, तुम्हारे सुसाइटी 4 को होते हैं, इसके लिए बड़ी बड़ी कर लगता। वो के लिए सर सो महाराज सही
नहीं ये भी नहीं है कि कोई सुनता नहीं है, अगर कोई सुनता नहीं होगा, यह कमरा खाली रहता। आप देखते हो मंदिर में भक्त हैं, लाखों भक्त हैं, संस्था के लोग सुन रहे हैं पर जितनी मात्रा में जुड़ना चाहिए उतनी मात्रा में नहीं जुड़ रहे है। और यह कहना कि कल कोई सुधा हमारे देश को, वो भी गलत है। यह प्रोग्राम होते हैं, हजारों लोग आते हैं, जितनी बातें सुनना चाहिए उतनी मतलब नहीं सुन पाते। ठीक है।
जो समझना नहीं चाह रहे है की कैसे
आप लोग कैसे कनवेंस हुए आप लोग भी जब पहले भौतिक जीवन में थे, किसी ने आकर प्रचार किया, ग्रंथ दिया, मैंने मंत्र दिया, संडे फीस में आये भग्गी, तो ये जो प्रोसेस है दिस स कुबन प्रोसेस जो प्रॉपर दिया है। तो अगर हम प्रचार करते जाए तो लोग जरूर जोड़ेंगे वायरस का थोड़ा इफेक्ट तो रहेगा प्रचार प्रचार का और प्रचार का भी इफेक्ट रहेगा। आज को भक्त कर रहे हैं, ऑनलाइन इतने कोर्सेस चल रहे है, समझ में न आता कौन सा कोर्स नहीं। हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि कलयुग में कोई भक्त नहीं बनाएगा जो बुद्धिमान व्यक्ति हैं। और प्रॉपर्टी ने जैसे 1 समय प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा डायमंड के हजारों गिराक तो नहीं होते, सी डायमंड के कुछ गिने चुने गिराक होते है। तो प्रॉपर ने कहा दिस क्रिश्न का लाक रियल डाइमंड यू गेट थाउजंड ऑफ कस्टुमर्स लोग कहते है आपके प्रोग्राम में हम इतनी बड़ी संख्या नहीं देखते है, वो स्वामी जी वो महात्मा में हजारों लोग आते है। हम कहते हैं से आते असली सोना बेच रहे हैं, वो नकली हीरा बेच रहे हैं नकली हीरा के ज्यादा गिराक होते है वो यहाँ बैठना चाहिए।
राज आपने बताया की अगर किसी वक्त के प्रति देश और वर्षा की भावना है तो लगता है तो अगर किसी भक्त के प्रति को ही भाव तो
अगर तो कारण है क्रोध का, ये अलग बात है किसी ने ऐसी गलती की की नुकसान हो गया। मुंदर का बहुत बड़ा फिर कारण है क्रोधित है केवल क्योंकि भर्ती में
वो
में से आगे बढ़ गया है मुझे उसका नाम खराब करना चाहिए। वो अपराध है। ऐसे तो गलती करते हैं, उनको डालना भी पड़ता है। चेतन कोली चमार की सफाई कर रहे थे। जो भक्त ज्यादा अच्छी तरह सफाई कर रहे थे उन्हें वो जाकर कहते थे। जो ज्यादा धन इकट्टा नही करे उनको शिक्षा 2 तो अगर आपको लगे, हम ठीक नहीं कर और कोई दिया जाता है ट्रेनिंग देने के लिए, तो ये वो अपराध नहीं है तो
तो बना, नहीं है तो वो आप कर रही है क्या करना चाहिए और दूसरा
आपको उसे कहना चाहते हैं। प्रभु जी, मैं तुम्हें बचाने की कोशिश कर रहा हूँ, नहीं बना कह सकते हो की है उस वैसे की निंदा कर रहा है। ये बिल्कुल दोष है। तो इसका परिणाम आपको बोलना पड़ेगा और हम जब साथ देते हैं सुनने में दूसरे की निंदा हमें भागीदार बन जाता है। क्योंकि अगर किसी ने शावेश की बात करनी है दिवारों से थोड़ी थोड़ी कोई साथी चाहिए। हम जब साथी बन जाते हैं तो आप भी अपराध के भागीदार बन जाते हो। इसलिए कोई निंदा कर रहा है तो आप कह 2 कि मैं इस से नहीं जुड़ना चाहता ओके
आपने न्यू सुनाई छमा माफी।
अगर आप आपका कहना है भक्त माफ़ कर देंगे तो उनके चरण धूली नेकर नहीं भक्त, अगर माफ करेंगे चरण धुल कर देंगे। ये थोड़ी आप कह सकते हो, ये थोड़ी आप कह सकते हो, भक्त माफ़ कर दे े
गुरु
के
हम उनसे
माफी मांग लेते हैं।
लेकिन पिता कुछ है
आपके मन में या दूसरे व्यक्ति के मन में
तो
हम ये उम्मीद नहीं कर सकते की 12 महीने, 12 साल हम शोर भगत बन जाए। मतलब की हर चीज है तो हम गलती शुरू में अगर करे तो हमें इस गलती से बचने का प्रयास करना और भक्तों के संग में रहोगे। तो जो सीनियर देबुली थे उनसे आप योग ले सकते हो कि उस ने ऐसा किया। मैंने ऐसा किया किसका दोष
की जैसे घर में आ सकती होता है। अपने बच्चे से कैसे होगा?
सिद्धान्त को समझोगे तो भक्तों के प्रति भगवान के तिल क्या कहा? कोई आ सकती, जो भौतिवादेके प्रति है वो ही आ सकती। हमें संत के प्रति जोड़ देना चाहिए। तो संबंधों के प्रति आसक्ति रोकने जोड़ने का मतलब क्या? शिक्षा का पालन करना संघ जो शिक्षा देते हैं उसका पालन करना त प्रयास करने से हो जाता है। प्रॉपर जी भागवत के प्रथम समय कहते हैं he lives for ever by divine instrctnefollow isme, जो गुरु है, अपनी वाणी द्वारा जीवित रहता है, व शिष्य वाणी का पालन करके उसके साथ हमेशा रहता है। तो भक्तों के प्रति आशक्ति बढ़ाना चाहिए और बात बोलियों के प्रति आशक्ति घटाना चाहिए। ये समस्या और कर सकते है
नही करे
आप दूसरे मंदिर में जाते हो, वहाँ समस्या है तो इसमें उनका है
जो बड़े सीनियर डिवोटी, बड़े सम्मान और
वो उल्टी बात बोलते है किसी के
बारे में तो हम उनको मना भी नहीं कर सकते। इसमें क्या करे?
अगर कोई सीनियर भक्त किसी और वैश्य की निंदा कर रहा है आपके सामने तो अफसोस की बात है। सीनियर भक्त सिन्योरिटी का आक्षरण नहीं दे
रहा,
व्यक्ति सीनियर बनता है आचरण के द्वारा से, यही सोचना हम 30 साल से 30 साल से भागते हैं। हम जो भी करे ठीक है वो ठीक नहीं है। आज से न मारा ठीक होना चाहिए। इस बे
में क्या करू गर्व कर
रहे हैं तो वो मना भी कर सकती है। आप ने उनको कह सकते हो अगर आप बुरा नहीं मानो। मैं या से चल सकता हूँ। वो पूछेंगे क्यूँ ना सुनना नहीं चाहता। वैसे करना और सुनना दोनो ही गलत है। कोई जबरदस्ती आपको बांध कर थोड़ी जाएगा नही तो सुनना ही पड़ेगा।
मल कमेंट्स को लेकर बहुत सारे ड्यिटी कुछ हो जाता है।
भक्तों के सामने तो ये बिल्कुल गलत है। अगर सीना भक्तों का शूटिंग मैच, शाउटिंग मैच, अगर सीने भक्त 1 दूसरे को आरोप लगा रहे हैं सबके सामने ये ठीक है। दोनों तरफ से ठीक वही है देर जोर से क्या सुनने में तकलीफ होती है। you hear that question and some।
और सेवा किया गया
लेकिन कई बार हो जाता है
महाराज कोई नया भक्त, नया भक्त आता है। वो हमसे बाद में नया है और उसको कोई ऊँची पोस्ट दे दी जाती है, पोजीशन दे दी जाती है और नम्बर पोस्ट के रिगार्डिंग हमें उसे रेस्पेक्ट करना पड़ता है। पर अंदर से रेस्पेक्ट जागृत नहीं हो पाती है। तो फिर ऐसी सिचुएशन में क्या करना चाहिए?
अगर मान लो कोई भक्त आपके आने के बाद जोड़ा है, कोई जिम्मेदारी दे दी या डिपार्टमेंट हेड बना दिया है या कोई में यही सोचना चाहिए। मारी बुद्धि के अनुसार नहीं होना चाहिए था। पर मंदिर के अधिकारी है। उनके विचार से वो व्यक्ति तैयार है और जिम्मेदारी उठाने में यह भगवान की इच्छा है, हमें स्वीकार करने। 2 ये हर चीज का निर्णय मंदिर के हर भक्त के साथ थोड़ी किया जायेगा। मान लो आप किसी को जिम्मेदारी दे रहे हो तो हम 1 वे करेंगे 150 ब्रह्मचरी के साथ उनको ये पद दे या नहीं दे। वैसे तो मंदिर नहीं चल सक। हमें जरा विश्वास रखना चाहिए। जो अधिकारी जिनके पास जिम्मेदारी सोपी हुई है दूसरों को जिम्मेदारी सौपने के लिए उन हृदय ठीक है किया जा। अगर हमारे हृदय में थोड़ा ऐसा भाव है इस व्यक्ति के। ये नहीं मिलना चाहिए था। पद से मैं साथ नहीं दूंगा। वो ठीक बेचान नहीं है। जो मैनेजमेंट सिस्टम है, उसे हमें पूरा कॉरपोरेट करना चाहिए। यह नहीं कि हर निर्णय, हर भग के साथ पूछा जाएगा को चलेगा ही नहीं। हमें विश्वास रखना चाहिए। वो अधिकारी और मान लो उन्होंने गलत निरणय लिया। हम यह नहीं कहते। कृष्ण भक्ति का मैनेजमेंट हंड्रेड परसेंट राइट है, हमेशा वह सिद्धार्थ हंड्रेड परसेंट राइट है। ग्रंथों में जो ज्ञान है वो साफ प्रतिशत ठीक है। पर मैनेजमेंट में कभी कभी निर्णय हम ले लेते हैं। 2 बार में लगता है कि शायद गलत ने, ने, सा वो ट्रायल ने बस चलता है। तो यह नहीं सोचना चाहिए। हम ये नहीं कहते। हर निर्णय जो हमने लिया है सौ प्रतिशत राइट होगा और सदस्य ईमानदारी से अधिकारी प्रयास करते है। ठीक लेने के लिए की ये गुरु नाराज।
कई बार जब रेजमेंट होते है तो कुछ कई एक्टिविटीज होती है। तो क्या हमें इस चीज की चिंता करनी चाहिए? और हमारे बारे में कोई गलत सोच रहा है तो क्या इस चीज का टेंशन लेना चाहिए? अपनी सेवा करते रहना चाहिए।
हम अपनी सेवा ईमानदारी से करते रहो, यह चिंता मत करो। लोग हमारे बारे में क्या सोचते हैं? अगर अब यही सोचते रहोगे मार में क्या सोचते हैं तो कुछ भी ठीक नहीं कर पाओगे। अपनी तरफ से ट्राई करो ऑन समीर और भक्त के सहयोग ले सकते हो। उनसे पूछो जैसे चित मे को शिक्षा दे रहे थे। उन्होंने कहा, पहले कदम में गुरु की सेवा करो, उसे स्टेप में दीक्षा। 2 इस स्टेप में आगे पूछो मुझे क्या त्यागना चाहिए? भक्ति में आगे बढ़ने के लिए सीनियर भक्तों के साथ रहते हो। उनसे पूछिए आपको क्या कमी दिखती है? मेरे में क्या कमी मुझे सुधारना चाहिए। वे पूछते रहना चाहिए। हमारी समस्या क्या है? हम केवल प्रशंसा सुनना चाहते हैं, कोई कमी नहीं बोलो क्या कमी है? क्या कमी से मुझे सुधारना चाहिए। ओके
प्रश्न अधिकारी जी, ये सोचिये की मैं आप की को जीवन कलेक्ट नहीं कर सकता? लेकिन उसके सी के कारण काली
कॉम्प्लिकेटेड क्वेशन नहीं? अगर मंदर का अधिकारी कहे, तुम कुछ भी इसमें बोल नहीं सकते तो वे रूप से गलत है। अगर मानो किसी ने कोई निर्णय लिया है और आपको लगता है इसमें गलती कमजोरी रह गई है तो आप अपनी तरफ से जाकर 10 बोल सकते हो। और जब भी वो नहीं बदले तो भगवान पर छोड़। 2 आप ये कह सकते हो माई साइड ट्राई में बैठे और वो नहीं सुनना चाहते हम क्या करें? तो फिर अगर वो गलत निकल आएगा, दूसरे तो दोष पहुँचेगा आपको उसका परिणाम नहीं भी बना पाया।
good relation with some senior, but even
सो i how well so mono here in negative, hearing will be there? हम ये नहीं कह सकते। 1 एकदम ऐसा वातन बन जाएगा, ये सब शुलभ का व्यवहार करेंगे, थोड़ी बहुत कमी है तो आप देखेंगे मैनेजर में कई बार कोई डिसीजन गलत भी निकल सकता है। we just have to भी टॉल। हम ये नहीं कहते, मैजमेडिसीजनीमaक इस हंड्रेड परसेंट राइट नोट हंड्रेड पर्सं लाइक तो आपको ये कॉलेज करना चाहिए। पूछा जब भूख लगती है, कुशाल का समय आ रहा है तो आप उत्साहित होते प्रसाद खाने के लिए न तो उस पर का उत्साहित होना मतलब। हम बड़े उत्साह से भगवान की सेवा करना चाहते हैं। इस समय हमारा उत्साह रहता है। तप्त प्रति और ज्ञान प्राप्त करने के पश्चात वही उत्साह हमें अर्पन करना चाहिए। भगवान की सेवा में। ओके थैंक यू यस
अपराध। तो
कई बार ऐसा होता है की
सी नरेंद्र हमारे अनबीती, लेकिन आपने प्रवृत
हम यह तो कहते है मैनेजमेंट का हर निर्णय हमारा हंड्रेड परसेंट ठीक होगा। और हम ये भी नहीं कहते है की आप सब 6 महीने में शुध भक्त बन जाओगे, हमें प्रयास करते रहना चाहिए, प्रयास करते जाए। जॉब के बल पर जो कमियां हैं वो दूर हो सकती है।
a question फ्रोम students, when someone of you ventes natural to read it is given situation
this somebody or fans, you you dont have to nesshellydeatid for tat, we do tit for tat, then the atmos fenty, environment becomes more complicated, but suppose somebody of fens you need to all rate, then we dont have you ted for tadaevything okay sting on a to more pression यह में जिसने केशन पूछा नही
क्या होता है,
हमारी कमी ये है की हमारी कृष्णा कथा में रूचि बहुत कम है और प्रजा में रूचि ज्यादा है। क्योंकि हमारी प्रजाता में रूचि ज्यादा है। हम तो खुश होते हैं जब किसी की कोई गलती है हम सुने पर भक्ति के विधियों के पालन से कृष्ण कथा की वजह जल रूचि है तो भक्ति की विधियों का पालन करोगे। तो फिर कृष्ण कथा में रूचि बढ़ाएगे। असली समझ से 1 असली कार है कृष्ण कथा में हमारी बहुत कम रूचि है कृष्ण कथा में शुरू होती है हमें नींद आ जाती है हे कृष्ण कथा में रूचि बढ़ानी है से रूचि बढ़ाओगे तो खुद कोई रूची भरेगी हम सोचते हे रूची चाहिए। तो कृष्ण कथा में से यह सभा बाल के सिर में, लेकिन बाद में
हो
मा है। महा प्रभु इतने खुश हुए, उन्होंने बाकी पंद्रह की सेवा की, लोगों को रोका उनके पास आने से महा प्रभु। साहब का मतलब ये है 1 वैश्ना के प्रति अपराध किया के जो यहाँ मंदिर में 1 के प्रति अपराध कर सकते हो, दूसरों को सेवा करके खुश कर सकते हो, कर सकते हो। अगर आप ये उदाहरण लो, हमारा प्रयास पर से बच कर रहे। हमें यह नहीं सोचना। जैसे की मन में गलत सोचना 1 प्रकार से में आपको छूट है कोई इसका यह अर्थ आप मन के द्वारा विचारों को सो se जुड़ जाएगा। yes difference opinion between the managers vision, even if you dont agrevithegether, there is a certin line of command in is phone that should be respected, we cannot say i don t agree with this not my will do we do what were you or that is not profit is that a question
डिसकस
सो हम लove keep try hard, we dont say that in win in one year or two year, everyone will become a per dowody to keep try hard and if we are sicily trying to ksianbaltohev we dont say every management decision we make in hundred person, right propaneversaid that the device body, the there was say is that a okay mature content means an sein the classic, but yes like what s definition of an mature man, macor man in one, who grown up in a child, you to do what it so majority in prison cons meas i know the folate live by the folose, okay yeh? जैसे कई बार भागते wniceडigmacanical है, am नू ट्रैक शुड है की नहीं सोहा क्वेश्शन है, कई बार आप सेवा करते हो मैकेनिकल चाहे मैकेनिकल हो या स्पोनटेनियस, आप सेवा करते जाओ, चाहे मैकेनिकल हो या स्पोनटेनियस, आफ जॉब करते जाओ, यमस हो जाओ। आज मैकेनिकल सेंडिंग कर रहा हूँ, मैकैनिकल भी करोगे जंगल गए थे, इच्छा राज्य प्राप्त हो। उनकी भक्ति में इतनी शक्ति थी, यह बाद में भाव एकदम बदल गए। मैकेनिकल चैन मैकेनिकल सेवा ke do more question
वी सी देर तू मने साधना से जो सर्विस और मैनेजमेंट समाझते हैं तो साधना साधना करते हैं तब तो कोई अपराध नहीं होता है। लेकिन जब सेवा करते हैं, मैनेजमेंट करते है तब अपराध होता है। और हम सुनते हैं कि मैनेजमेंट करते हुए भी कई सारे अपराध होते हैं, कम्यूनिकेशन व काटिंग होती है। तो क्या इसे कैसे समझ सकते हैं कि मैनेजमेंट को कम करे और साथ का मैनेजमेंट करते?
मैनेजमेंट भी जरुरी है। आखिर देखो जैसे मंदिर बना है ये थोड़ी के लोग, कोई मंद ने दिमाग लगाया आर्किटेक्टर तो जाके मंदर मजा। तो इसी प्रकार मनी टाइम् स का गुड मैनेजमेंट पर गोली ट्रेन गुड मैनेजमेंट इसका जीबीसी बॉडी के कई प्रोग्राम्स हैं। तो ट्रेन स्टूडेंट्स she college netasapporssab so we belive training and we would take the train and then how to deal with the modi, how to make the signs study holter। अगर हम यही सोचेंगे मैनेजमेंट करेंगे तो अपराध बढ़ जाएगा। अपराध अगर आप ठीक मैनेजमेंट करोगे तो अपराध नहीं बढेगा अपराध बढेगा केवल अगर आप के आधार पर से
किसी ने और कुछ कोई सीनियर डिवोटी जिससे स्पीचर गाइडेंस लेते हैं एंड दैट सीनियर डिवोटी, इज आल्सो एक्टिंग लाइक मैनेजर इन लाइफ दीजगिमिंगआसस्ट्रक्शन मैनेजिंग मैनेजिंग सोसाइटी मैनेजर डिपार्टमेंट कई बार स्पीच तो हमारी शिक्षा को बहुत सम्मान होता है तो अपराध की भावनाओं की नहीं आती यूंकि जब मैनेजमेंट भी डिफ्रेंसेज आते हैं ऐसे होनेके या फिर अफकोर्स कई बार हमारे फेवर भी नहीं होता तो दुःख होता है तो कई बार अपराध की होती है। तो 1 ही व्यक्ति को दोनो अथॉरिटीज के प्रति सम्मान करके अपराध ना ऐसा कैसे करे
मतलब की अब आपको फेस होना चाहिए जो ये मैनेजर है मैनेजियल दृश्टि से वो ठीक लेने लेगे और मैनेजर्स हैं वो ठीक निर्णय लेना चाहिए वो सोच के और इसीलिए अभी कई बंदरों में ए वी हैव कम सुन पर ने कहा की अगर में काउंसिल में लोगे तो उसका अच्छा भाव होता है ने कहा की 1 बंगाली सींग है अगर आप डिसीजन लो दूसरों की राय लेकर कुछ गलती हो तो आप कह सकते हो मेरी राय अकेले की थी सबसे पूछा क्या मैंने सो प्रॉपर डिसीजन मेकिंग बॉडी आल डीवीसी बॉडी में क्या है 1 अकेले कोई निर्णय लेता है पूरी बॉडी डिस्कस करके ले जो चीज हम डिस्कस करके निर्णय लें उसकी अच्छी संभावना है सक्सीडअगरहमारे मैनेजमेंट स्टाइल ने हंसा है कुछ पूछो पर मेरे से माई डिसीजन फाइनल तो ऐसा मैनेजेंट ज्यादा दे नहीं चलेगा ओके यह
गुरु महाराज कई बार हमारी अच्छी बैड हैबिट होती है नैचुरल टेंडेंसीज होती है बचपन से ही जैसे फॉर एग्जाम्पल छोटी छोटी बातों पर क्रोध करना है तो भक्ती में आने के बाद भी ये सब चीजें बाधा पैदा करती है भक्ती करने में तो इन चीजों से, इस ट्रगल से हम कई बार हताश बहुत ज्यादा हो जाते है की यार मेरा कुछ नहीं होता तो कैसे फाइल करे इन चीजों
से try best we do things the right, इnस्ट्रcnम go more senior think that fo number one in guy is
problem
problem stark word you think i know what is best don⁇ttmanyting mo pr dont भ, मुझे कुछ बोलने की जरुरत नहीं है, हम हमारे अचल से दिखा सकते हैं, इस मूव में हम काम करना चाहते हैं और हमेशा यही था। टीम ओके भगोधमेचौदीस्कनड में चेस का डायलॉग है। नाराज मोदी के साथ भगवान बड़े प्रसन्न हुए थे उनकी तपस्या से भगवान ने भाइयों को कहा मैं तुम सबसे बड़ा खुश हूँ कि तुम सब भाइयों में 1 ही भाव है भक्ति योग तो अभय इंडिविजुल सों का भाव 1 ही होना चाहिए भक्ति योग की शिक्षा के आधार पर फिर भगवान ने कहा क्योंकि तुम सम भाइयों में 1 ही भाव है मता का भाव इसके लिए मांगो में से क्या वर्ल्ड चाहिए मैं देने को तैयार हूँ अगर हम पापी की, उसके आधार पर जोड़े तो भगवान खुश होते है भगवान कहते है मार्गो में से क्या वर्ल्ड चाहिए okay i think you bet sok last question यस ये जब आप प्रचार करने जाते हो, आपके पास लिमिटेड टाइम है, वो बड़ी दुनिया है, आपको दिमाग लगाना चाहिए कहा ज्यादा अच्छा है जैसे आप बुक डिस्ट्रिब्यूट हो, आपको पता है कि कौन से शेयर में अच्छा है, कौन से शेर में कमजोर है तो आप उधर ही जाओगे जहाँ अच्छा है कहते है बुक डिजीशन थोड़ा दिमाग को लगाना पड़ता है तो अपनी बुद्धि द्वारा यह निर्णय कर सकते हो tasiscalthe education
ये किसी ने दिया ले के टी ऑल्टर में स्मार्टफोन लेने जा सकते हैं, फोटो कुछ नही
है नई सर मैं तो हूँ कैताहटेलीफोन ऑल्टर में जा रहा है पहले उसको साफ़ करो ये नहीं गो टेलिफोन रास्ते में ताइएथाअबतोवारेस का भी खतरा है मारफंबचीतरा असल में कई बार में देखा पुजारी फोन को ला रहे हैं मैं उनको कैसा ला कोल्टर में अगर फ़ोन लेके जाओगे गारंटी करो सारे रूप से साफ़ करोगे ओके ओके लास्ट महाराज मंदिर के अन्दर
कुछ नियम आ भी किए गए है जैसे
तो धीरे धीरे मन देख रहे
है देखा
दोस्तों क्या we should not sat with a backsudedetis, we should not stand with a bैकsुt आप खड़े होते हो तो पीठ को भगवान की तरफ नहीं रखना चाहिए जब आप बैठते हो पीठ को भगवान की तरफ नहीं रखना
चाहिए और कभी बैठते है तो मसाज नहीं
मंडल में
इसके काफी बड़ा है
और ये काफी मंदिर में मजा गए थे मान लो कि कुछ दर्द हो ज
काफी उसे
डेली
और महाराज इतने लोग घबरा जाते है सिल के नाम
से से कैसे नहीं अभी मान लो अगर कोई क्लास सुन रहा है वो जाकर 1 मिनट में पीछे से उसमें सीरियस कोई रेबारी बीमार है, कोई कर रहा है तो 1 कोने में बैठकर कर सकते हैं ओके है हारे krsnhrकिश्णहारे हारे।
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