वैष्णव अपराध से कैसे बचे ? | वैष्णव अपराध के दुष्परिणाम ||ŚB 5.10.25|| ISKCON Delhi || 03.05.2020

The video is a devotional discourse delivered at ISKCON Delhi that explains what constitutes a Vaishnava (devotee) offense, the spiritual and material consequences of such offenses, and practical ways to avoid or rectify them. The speaker defines various categories of offenses—intentional versus unintentional, verbal, mental, and behavioral—citing passages from the Śrīmad‑Bhāgavatam and other scriptural sources. He emphasizes that sincere service (seva) and direct repentance, including heartfelt apology to the Lord and senior devotees, can neutralize the negative effects. A substantial portion of the talk discusses the tension between mechanical, managerial approaches to service and genuine, spontaneous devotion, warning that overly bureaucratic attitudes can become a new form of offense. The discourse also addresses personal habits and emotional tendencies (e.g., anger, impatience) that hinder bhakti, offering guidance on self‑discipline, mindfulness, and seeking senior guidance. Practical temple etiquette is covered, including correct posture while praying, maintaining cleanliness (e.g., phone hygiene), and respecting temple rules. Throughout, the speaker weaves anecdotes, scriptural quotations, and real‑world examples to illustrate how rational decision‑making can be harmonized with spiritual discernment, ultimately urging devotees to cultivate humility, continuous learning, and a balanced approach to service that avoids both negligence and rigid management.
Chapters
मेरी हरि
ओम नमो भगवते ओम नमो भगवते स। omoavasudeso this should not gone into should go into no i go ter srimad baguatamमैगलारी बैठ चुका हुई है तो भगवदम 5 10 शो twenty five हेिा
न।
जरा अदेटीगेसदेसस मे का
काहे रानी
का
जरुर किया मे
या
सी होंगे मेरा गाने नउराशुलन
रेस काहे
ले
गलेवेबरकककल्ा
ले
हाल मा बरनाली माले नाले
चाल े नाले नाले का
काल माले रहे
रहे हम ने
कल
माताजी माताजी रशमरेरहेहजाहम पे चाहे ले शब्द श्रद्धा नाम ही दिल
परिवर्तन को सुदेश करते मित्र वाला सफसे मित्र का आपका सामने आपके मानसिक संतुलन के कारण जी आदि है, जिसने जीवन के विहार वोर्ड को सर्वदा त्याग है
की सर संदेश
माना पहानमनकापरांज से
का
मेरे अपने कार्य से
2 से मार
जैसा की नष्ट हो जाएगा होगा अभी की फूल के समान से शादी हो
जा।
हे स्वामी। आप शवंतजिवाआओंगे था, आप सबों के लिए अरमान है और वे हर खुशी से। परिधान जब मैंने आपकी अरमान करके अपराध किया, तो मैं जानता हूँ कि मेरे इस साल से आपको कोई हानि लाभ नहीं होने वाला है। आप जरदीमेअपराधीइसी भगवान शिव कि मा गलवान 1 व्शमकेचरनसमजगा अपराध करने के जाने में
नष्ट हो जाएगा। बड़े राष्ट्रीय
महाराज और अपराध के असर तथा वे जल समान जान। हाल के प्रत्येक मनुष्य को राज पद से अनुकरण करते हुए वचन को मदर कहते हैं छोड़ पानी समय का मान मारे। हे बैठना दे। यदि कोई विश करता तो वह येसूटधाईशिवजीके मान सकते। अपने आप दर्शन जाएगा। ये समस्त वैलेसा न्होंने भागवत सवेरे। पर समय
था,
पर वन है। रोज दिन मरे जो वेचतोकीनाकरता, उससे कोई नहीं बचा सकता। बाहरी सिरजी के समान यदि मैं वैचतोकीलितकरता तो उसका विनाश होना ही है। सनंतरसाथकयदि कोई सासकों के निर्णय करके वेज की निंदा करता है। पुस्तक विनाश निश्चित है। समय सास यदि कुछ सासों की योजना की भजन करके ना करता है। इसके कारण मे जन्म में जनमानतरकष्टभोगता है। इस प्रकार श्रीमंत पंचम भर था। भारत ोगणकीभारकाकामहोता है।
ये लोग, ये क्या किया है? कृष्ण? यह श्लोक कितना महत्पूर्ण है। मैं चाहता था। 1 बार फिर से आप नमाज दुराई क्या हो गया सावन को? hi giga हम यस लो इमगाबकेपीछेजानदा सीरी
हे स्वामी। आप समझे जीवन को भगवान पर आता। आप सबों के लिए समान है और जिसे मैंने आपकी आप मानना अपराध किया है, तो मैं जानता हूँ कि मेरे पुरस्कार से आपको कोई हमे लाभ नहीं होने वाला।
आप
जल में अपराधी ही चलिए, ने में शिव जी के समान बगवान फिर तुम बैठोगे चरम अपराध।
as an sicitaniamaossagna mera jise he is a via vishwa sur ab मा मनसवा कृतादि, मदर भी खुला पानी तो शो का उचारण महा रोग ना कर रहे हैं। और जैसे आप सुन बैठे हो, वहाँ लोग न राजा थे और साथ में उनके पास लारिजानी था। राजा होते हुए थोड़ा शरीर शरीर समनवीदकाराजा होने के कारण केवल भाव था। के वो बहुत बड़े व्यक्ति हैं। पर जब उन्होंने जल्द भारत की शिक्षा सुनी, वो समझ गए कि उन्होंने अपराध किया है। ये जो गुंग और भैरा व्यक्ति है, गुंग और बैरा नहीं, पर आत्म ज्ञानी है। और क्योंकि उनके पास ध्यान ने दिया था, वो समझ गए कि उन्होंने अपराध किया है। तो पिछले कई लोगों के द्वारा यह महत्वपूर्ण संदेश दिया जा रहा है। वैन अपराध से बचने के लिए। और वैसे आप सांस में लेक स्थानों में पढ़ते हो कि किस पर हमें नेशन अपराध से हम लोग सुबह। लगभग हर मंडल में 10 नाम अपराधों का वर्णन करते हैं। और सबसे पहले, कौन सी अपराध का वर्णन करते हैं?
हाँ,
जिन्होंने जीवन अर्पण किया है, भगवान की सेवा है। हमारी समस्या यह है कि हम रोज सुनते हैं कि हमें कैसे बचना चाहिए, जभी हम बच नहीं पाते हैं। क्योंकि इतनी गहरी बीमारी है। तो माजरा स्वीकार कर रहे है कि जल भारत कोई साधारण पुरुष नहीं है। वो ये स्वीकार कर चुके हैं कि वह स्वयं आत्म ज्ञानी है। और आज के सुख में क्या करे। वो मेरे स्वामी। उन्होंने जद भर मैंने आदर से कहा, हम लॉड वो मेरे स्वामी हैं, कोई स्वीकार कर रहे हैं कि आप से मैंने शिक्षा ग्रहण करना है। मेरे स्वामी आदर से बोल रहे हैं। तुम जो हो, आप जो हो परम भगवान के मित्र हो और सब जीवात्मा के मित्र हो को भगवान का भक्त होता है। उन सबके साथ समानता का व्यवहार करता है। भागवतम के तीसरे साल में देवहुति ने पूछा अभी बेटे कपिल? देव से कि कैसे हम भौतिक कष्टों से मुक्त हो सकते हैं? उन्होंने कहा कि आप मेरे अध्यातम नेत्र हो, जिनके द्वारा मुझे अध्यात में ज्ञान प्राप्त हो सकता है। और बेटे ने कहा कि भक्ति योग 1 साधन है, जिसके पालन से आप मुक्त हो सकते हो। यह मत से आगे माता ने पूछा भक्ति को कैसे प्राप्त होता है? और उन्होंने कहा भक्तों की सनयतितवाराऔर। आगे पूछा भक्तों के गुण क्या होते है? आप कह रहे हो कि भक्तों की संगत में रहना चाहिए। हम कैसे पिचाने, कौन भक्त है, कौन नहीं है, सच बात है, हम कैसे बचाने? तो इस प्रश्न के उत्तर में वान ने क्या था, विधिक्शवाकरूलीका सुविधा, सर्वा संता 7 वां साल, भूषण 1 गुण वैश्व में ये होता है तितिक्षा सें शील। भगवान के जो भागते हैं उन्हें सेंशील होना चाहिए। और चेतमा इसी भाव को प्रकट करते हैं। अपने सिशासकोेसिनादपिसली चेन रोलपीसगन, हमारी रमाना देना, इतना दिस करूनी कहा दयालु दया की भावना होती है, बताया की भावना प्रकट करते हैं। ार के प्रचार के माध्यम से सूरत, सर्वादी वो सबका मित्र है। तो भगवान के जो भक्त हैं वो सब के मित्र हैं। और ये नहीं सोचते ये हमारे दल का है, वो सामने के दल का है। हमारा और तुम्हारा कई बार हम इस में आकर 1 ही मंदिर के बखत होते हुए कहते हैं ये हमारा, यह तुम्हारा है, हम 22 दल बना देते हैं, 3 दर्द बना लेते है। पर अब भगवान ने कहा सुरिधसवहहैनजो भगवान के भक्त हैं, वह सबके मित्र हैं। आप भगवत पढ़ते प्रलाद महान के पिता चाहते थे कि उन्हें राजनीतिक शिक्षा, रिज दरवाजा थोड़ा बंद कर सकते है। यह हवा काम आएगी आप लोग अंदर आ जाओ। आधा बंद प्रलाल के पिता थे। उनकी इच्छा थी कि फला फला को राजनीतिक शिक्षा दी जाए। राजनीतिक a friend in animi friend im your enemy तुम रे mitr, ये मेरा shatru हाथ, हाँ में हाँ नहीं मिला था, वो शत्रु है यहाँ हमें हाँ मिलाता, वो मेरा बंधन है, ऐसी बुद्धि रहती है हमारी। पर। प्रलाद ने कहा मेरा कोई शत्रु नहीं है, जो मुझे आरोप लगता है, वो भी मेरा मित्र है, मेरा कोई शत्रु नहीं है और मैं यह शिक्षा मुझे नहीं चाहिए। तो पापा जी भी कई बार कहते थे हम सब 1 ही दोनों दरवाजे बंद बंद करो। हम सब 1 ही दल के सदस्य हैं। तो यही भाव यहाँ बाजों जलभर कौन है? कौन है जल भारत संत, ऊंची कोटी का संग, साधारण साधु नहीं, असली साधु तो असली साधु की महिमा करते हुए ये के आप तो सब के मित्र हो, ये थोड़ी क्या 1 के मित्र हो। 1 शत्रु ये भाव हमारे हृदय में बैठ जाना चाहिए। हम सब 1 ही दल के हैं, हम सब के मित्र हैं। यह नहीं, ये मेरा ज्यादा प्रिय मित्र है, मेरा है ज्यादा निकट का बंद, सब 1 साथ 1 जैसे हैं। तो रोना कह रहे हैं आप परम भगवान की हो तो भगवान का उत्तम कोटि का भक्त है। वो केवल भगवान की सेवा करना चाहता है। निष्काम भाव से। तो यहाँ कहा जा रहा है माँ के रवीना के द्वारा। आप जिद भारत सब के मित्र हो और सब व्यक्ति आपके मित्र हैं। आपका कोई शत्रु नहीं। ये था प्रॉपर्टी का विभाव, हमारा कोई शत्रु नहीं। 1 समय हम प्रॉपर्जी के साथ 1 प्रोग्राम में गए थे। कैनाडा में कथा आमको पहली सुनाई है। 1 स्कूल के प्रोग्राम में गए थे नाइन टी सिक्टी 8 में क्रिश्चियन स्कूल का प्रोग्राम था और पापा ने शाम के समय वन क्र दिया। लक्सर के पश्चात प्रापा जी हमेशा पूछते थे एनी क्वेश्चन कोई प्रश्न है? तो 1 हिंदू बंगाली भक्त भक्त नहीं रही, मंदिर आता था, उसने राज बेसी की प्रश्न के आप ये सन्देश विश्व देश में क्यों दे रहे हो? के इंडिया में? 2 तो भक्तों को क्रोध आ गया था, प्रपात कल साइन शील थे और 2 महीने बाद यह प्रॉपर्ली जा रहे थे। मोंटियल छोड़के। उन्होंने कहा बुलाओ मुखर्जी को और जो बुलाया उसे आशीर्वाद ले चलने से पहले। ये है संत का भाव, जो उसकी आलोचना करे, उसे भी अपना मित्र मानता है। लाल मान के पिता ने क्या नहीं किया। पहाड़ों से फेंका झेलूसामपोनेघेरा झैर खिलाये गए, चारों तरफ आग लग गयी। पर भी भगवान उनके रखे राके, कृष्ण मान गए, माने कृष्णाराज। और जब ध्यान वज हुआ तो प्लान ने क्या मांगा भगवान से। प्लान ने कहा, हालांकि मेरे पिता इतने दुष्ट भाव के थे। हालांकि उन्होंने मुझे अनेक रूपों से कष्ट पहुँचाने का प्रयास किया। मैं जब भी 1 प्रार्थना करता हूँ या उनको आप मुक्ति दे, 2 उनका उद्धार कर। 2 रा ने यह नहीं कहा बता 2 गाँव का उद्धार कर। 2 महाराज और पांडव भाइयों को अनेक प्रकार के कष्ट सहने पड़े, क्योंकि दुर्योधन की सेना के वाहन चाहते थे, किसी प्रकार से पांडव का वध जाए। कुरुशुरूकेयुद्ध में युद्ध शुरू होने से पहले भगवान ने कह दिया था, मैं किसी का पक्ष नहीं लेना। दुर्योधन ने कहा, हमें भगवान नहीं चाहिए, आवेदन की सेवा चाहिए। भगवान ने तो कह दिया है, उन्होंने किसी का पक्ष नहीं लेना। और अंत में पाडवाके विजय हुई। तो ये भगवान की भक्त तो हर रूप से उन्हें कर देने का प्रयास किया। वो युद्ध के पश्यात ने क्या कहा? उन्होंने कहा कि क्या सुविधा चाहिए। बोलिए उन्होंने गुना बहल दे दिया रहने के लिए और ज्यादा लगाओ देखो को। वयवहार यहां ये सब प्रयास कर रहे थे। और वो का वत करने के लिए बजे बचा हो क्या कर रहे हैं, वो पूछ रहे हैं, वह आप की क्या सेवा कर सकते हैं? वो इतने अच्छे महल का सुविधा बना है। ग के अंदर मेरे ल की लाशा पूरी हो गई है। तो ये विचार, ये संदेश, बार बार आप पढ़ते हो, जो भगवान के जो स्कूल भक्त हैं। 1 तो सब जीवात्मा के मित्व हैं, कोई शत्रु नहीं है। और ओपन हम भगवान के मित्र हैं और भगवान के मित्र। इस दृष्टि से जीवन में 1 ही भाव रहता है। भगवान के आदेश का पालन बरतें और भगवान के आदेश का पालन करने के दौरान कष्टों को भी सहना पड़े तो तैयार हो जाते। पिछले हफ्ते। हमने मां ने पूरी की कथा बोली थी। और बाद में भगवान ने उन्हें बड़ा कठिन आदेश दिया जाओ। उन्होंने स्वीकार कर लिया। उन्होंने यह नहीं कहा कि मैं कैसे कर पाऊंगा। ये होना चाहिए हमारा भाव। और आगे क्या कहते हैं? आप सबके प्रति समानता से व्यवहार करते। ये बहुत आवश्यक है। इक्वलटू। और सबके साथ समानता का व्यवहार, ये होना चाहे भर का भाव। वो यही नहीं की जैसे हम कह रहे थे, हमारा ले, उनका। ऐसे नहीं, ये मेरा जाना अच्छा मित्र है। यह कम अच्छा मित्र है। नहीं, ये, ये मुझे सुविधा देता है। मैं उसको सुविधा देता हूँ। ऐसे तो भक्त जो है, भगवान का महत्व क्यों है? यह भगवान के आदेश का पालन करने का प्रयास कर रहा है। वो है भक्त। भगवान की इच्छा के अनुसार हर कार्य करता है। भगवान की क्या इच्छा है? वो कैसे समझाती है? संतो के द्वारा। तो यहाँ रघुनाथ रघुनाथ कह रहे हैं। आप सबके प्रति समानता का भाव है। देहात्मा बुद्धि के ज्ञान से मुख भौतिक वादी और आध्यात्मिक वादी में क्या अंतर भौतिक विभाग वादी। यह सोचता है। ये देह मेरा असली स्वरूप है। और देह को संतोष करना जीवन का लक्ष्य है। और इसलिए सुबह से रात तक यही भय रहता है, यही प्रयास रहता है। देह को कैसे संतोष किया जाए? जैसे आप सब जानते हो, समय करूणा वायरस से सब को डर लगा पाए। ये सच है या झूठ है? लगाए नहीं लगा, आप लोगों को नहीं लगा। अच्छा आप सारे विश्व की प्रजा से बात कर। कल रात को में है, प्रोग्राम देर कर रहा था ढाई सौ भक्तों के साथ, जो अमेरिका में रहते हैं, वो अलग अलग घरों में और वो कह रहे थे कि अमेरिका में भी लोग कहते हैं ऐसी घटना उन्होंने पहले कभी नहीं देखी कि 1 साथ इतना भय लोगों के हृदय में इतना भय है भय क्यों है क्योंकि सब शरीर को अपना असली रूप मान रहे हैं। और भई इसलिए है क्योंकि वायरस के प्रभाव से शरीर में त्याग सकता है उसका इलाज भी इतना सान नहीं है और अभी तक कोई दवाई निकाली है जो इस बीमारी का इलाज कर सकता है तो लोगों के मन में ये है अज्ञानता के कारण, अज्ञानता के कारण बुद्धि से शरीर से प्रेम रहता है और सुबह से रात तक प्रयास है। क्या हम के कार्य में सफल हो जीवन का l kya? ये मंत्र है भौतिक जीवन का how you भुवेशरकाकिसने देखा है तो साधु लोग का प्रॉपर है, ये है अज्ञात अगर अज्ञानता का मंत्र, तो अज्ञानता के कारण दे को संतोष करना ह जीवन का लक्ष्य है। पर हमारे साथ में अनेक कथा पढ़ते हो जिनके द्वारा यह शिक्षा मिलती है कि आप शरीर को कभी संतोष नहीं कर पाओगे। मरहाजायाती के पास 10 हजार साल की सुविधा थी। तो अंत में उन्होंने क्या कहा i was like a latte god। आप सुपारी होने की कथा पढ़ते हो। भगवत सुपारी बोली बहुत ही ऊँची गोटी के योगी से पानी के नीचे कैसे सबमरीन होती है जो नाव पानी के नीचे आ जाती है। पानी पानी के नीचे बैठ कर सालों सालों से चिंतन कर रहे थे भगवान का, अब जान दिया सर मैं ने, क्या होता सर मेरे नाम जो कि साफ पानी से 1 महीने, 2 महीने, 3 महीने, 4 महीने नीचे तक जा सकती है। ये है आजकल के नई समय। इसी प्रकार के योगी भी होते हैं जो पानी के बहुत नीचे जा सकते हैं। सबरी मुनी बिल्कुल योगी शक्तियों के द्वारा पानी के नीचे चले गए थे, भगवान का चिंतन कर रहे थे। तो वहां उन्होंने देखा लोग मछलियों को भोगविलास करते हुए जिसके पश्चात वो जरा विचलित हो गए। वो यही सोचने लगे हां बड़े आनंद का कार्य है। और उन्होंने अपने चिंतन की सेवा छोड़ दी और उस शहर के राजा के महल में पहुँचे। राजा के 50 बेटियां थीं और राजा से सुवाई मोली ने कहा मैं चाहता हूँ कि तुम्हारी 1 बेटी से विवाह हो जाए। मेरा राजा ने देखा जंगली जैसा योगी है लम्बे लम्बे बाल, लम्बे लम्बे नाखून इतना बदसूरत। तो उन्होंने कहा मैं तो जबरदस्ती मैं तो जबरदस्ती की की शादी नहीं कर सकता, तुम खुद जाकर देख की किसी बेटी को पसंद आती है तो कर लेना चाही। सब बेटियों ने देखा देखते ही दरवाजा बंद कर दिया सूरत शादी नहीं करने। तो ये थी योगी योगी की शक्ति की आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते। वो समझ गए सब लोग मुझे ठुकरा रहे हैं क्यूंकि मैं जंगली जैसे दिख रहा हूँ। लंबे बाल लम्बे नाको लम्बे। तो उन्होंने अपने योगी शक्तियों द्वारा खूबसूरत देव बना लिया साथ में महल भी बना लिया। जब बहनों ने देखा वह सुमारी मूवी इतना खुबसूरत बन गया तो बहनों में झगड़ा पैदा हो गया, क्यों हर बहन करने लगी। मैंने इसे पहले चुना था। तो पहले मेरा हक है, दूसरी बहन के दिल नहीं, नहीं, तुमारे पहले मैंने देखा था। इस प्रकार 50 बहनों का झगड़ा हो गया। बडी मुनी ने सोचा ये ठीक नहीं है, झगड़ा हो रहा है 50 भनों से। उसने शाली और सब से उस बारीमन देखा कि मैं कितना मुर्ख बन गया हूँ। मैं इतनी शांति के साथ भगवान का चिंतन कर रहा था। 2 मछलियों के द्वारा मैं विचलित हो गया और मैं सोचने लगा। वो गिलास के आनंद की लीलाएं। उसके कारण मेरी नौकरी न सो। अब मैंने समय करना मैं जा रहा हूँ। जंगल में सवारी सब कुछ छोड़कर जंगल में गए, उनकी पत्नियां भी साथ हो गए। तो जो जो व्यक्ति शरीर की चदयात्वाबुद्धि से जुड़े हैं, वो सदा ये सोचते रहते हैं। इन नतृतिकेउकारियो में कैसे जुड़े पर हमारे शास्र में कहा गया है, जहर पी के देखने की कोई आवश्यकता नहीं। जाएगा। क्या परिणाम होता है, आप सब जानते हो। इंडियन फ्रीका का। यह जहर पीने के बराबर है। मैं। 1 भक्त ने क्या कहा? मनुष्य जन्म पाया राधा किशन ना जाने सुनिया पीशामरदमलाजठाकुर राजकुमार थे। उन्होंने कहा कि मनुष्य जन्म पाया। मनुष्य जन्म ने मैंने प्रार्थ कर लिया। पर मैंने राधा कृष्ण का भजन नहीं किया। तो मैं जान बुझ कर जहर पी रहा था। तो जो व्यक्ति भगवान के शरण अगर नहीं होते, जान बुझकर क्या पी रहे हैं। झैर पीरे। पापा जी कहते थे आजकल लोग इतने दुर्भाग्यशाली है, उन्हें को ढेर पी रहे हो। खतरा है कहे पीने। 2 तवा उदाहरण देते थे। बकतीसिधांताजे का उदाहरण चाहिए कि 1 व्यक्ति पतंग उड़ा रहा था, टेरेस से, वो नीचे गिरने वाला था, किसी का साधा नीचे गिर जाओगे। वो कहता है? पतंग उड़ाने। 2 जो आज लोग की स्थिति ऐसी है तो भगवान के जो भक्त हैं, देहात में, बुद्धि के ज्ञान से बुक्स हैं। इसलिए हम प्राथना करते है। मैं ज्ञान थी, जन्म हुआ था ज्ञानता में, गुरु साधु के सहयोग से। ज्ञानता का भाव है, वो है रोगुन। लगुना जी क्या लगना, क्या कह रहे हैं? सब के मित्र हो। देहात बुद्धि के भाव से मूल हो। मैंने आपके प्रति बहुत अपमान किया है। अब आप देखिये इस अध्याय के कई श्लोकों में यही विचार रहना प्रगट कर रहे हैं। दूसरे शब्दों में बड़ा गहरा शोक उनके हृदय में पहुँचा है। मैंने इतने महान 7 का अपमान कर लिया। मैंने इस जनभार का अपमान किया है। तो अनेक लोगों द्वारा यही कह रहे हैं। तो वो यहाँ कैसे है? मैंने 1 महान अपराध किया है। छोटा अपराध महान अपराध किया है। कैसे आपकी उन्होंने क्या सन की? वो अपमान महसूस कर रहे है। जब आप किसी संत की बेचती करते हो, हँसी उड़ाते हो या कुछ करते हो? नुकसान किसका है जिसके विषय में आप चर्चा कर रहे हो या जो करता है तो रगुमाजरहगनस्पष कर रहे हैं। मैंने अपराध किया है आपके बेसिक के। आपको, इसमें कोई लाभ या नुकसान नहीं। जब हम बैठना अपराध करते हैं, नुकसान उसी व्यक्ति का होता है। जो करता है, जो व्यक्ति करता नहीं है, उसको कोई चिंता की बात नहीं है। और जो बैठा बात करता है उसको चिंता की बात है। चेतन वरणासी में आये थे, वरणासी में 1 ब्राह्मण के घर में ठहरे थे। ये जो ब्राह्मण था वो उसे सुनने में आता था कि जो मायावादी सन्यासी हैं दिन रात महाप्रभु की निंदा करने। और जब महाप्रभु पनासी आये तो तपल मिश्र और चंद्र शेखर जो महाप्रभु के भगत से। उन्होंने कहा, हम सह नहीं सकते ये मायावादी सन्यासी अभी कितनी निंदा करते हैं। हम चाहते हैं कि आप चलिए उनके आश्रम में उलझे हराउडेबेटमें। तो वहाँ पर जब कहा गया कि ये मायावादी सुहासी आपकी निंदा कर रहे हैं, उन्होंने भगवान ने किया। उन्होंने कहा आखिर मे निंद न करने 2 पर जो तपन वो नहीं सह सके तो भगवान की निंदा हो रही है। तो जब कोई व्यक्ति निंदा करता है, किसी व्यक्ति का जिस व्यक्ति की निंदा हो वो निश्चित रहता है में निंदा कर दे। करने 2 निंदा करके खुश है करने 2 नो प्रॉब्लम। पर दूसरे भक्त हैं, वो ये नहीं सह सकते कि वैश्य की निंदा क्यों हो रही है। अगर कोई आपकी निंदा कर रे सह लो और वो दूसरे भक्तों की निंदा कर रहा है तो फिर सेना ज्यादा कठिन हो जाता है। तो ये ब्राह्मण ने सारे मायावादी निहासयोकोनेमंजा लिया था अपने घर में आने के लिए। वो ब्राह्मण आये, वहाँ पग को निमंत देने के लिए भी। वहाँ प्रभु का नियम यह था कि इसी मायावादी के घर में नहीं जाना, किसी मायावादी से संपर्क नहीं रखना, किसी मायावादी से चर्चा निकला। इस ब्राह्मण को पता था वह प्रभू कभी भी मायावादी के घर नहीं जाते। पर इस ब्राह्मण की बड़ी इच्छा थी कि जो निंदा हो रही है बार बार वाह प्रभु की को रोका जाए, वो भी अपराध है। तो उस ब्रामण ने वहाँ प्रभु को कहा। मैं जानता हूँ कि आप मायावादियों के घर में नहीं जाते। पर ये खास स्थिति है, वो इतनी निंदा करते हैं, आपकी हम सह नहीं सकते। आइए मा प्रभु ने जब देखा कि उनके भक्तों की इतनी चिंता है, क्योंकि वो अपराध करने के प्रति, हम माँ प्रभु के प्रति, तो फिर वो मान गए और ब्राहमण माँ प्रभु को अपने घर ले गए, वो अपने घर ले गये। महा पगू ने देखा कि ऊँचे मंच पर ये मायावती सन्यासी बैठे हैं और महापबनेअपनी विनम्र परबैठी, जैसे महा कहते हैं नाजपिसनीचेना, अगर आप हरे के नाम में सफलता चाहते हो। so what is it principle? wepnaspitl advanc? तो वहां पर कैसे सीधा or बैठे mayavi? वो बैठे जहाँ के लोग पाउंड होते हैं मंदिर में प्रवेश करने से पहले, और वहाँ पर हुवां आगे बैठ गए। तो साथ में हां प्रभु अपनी अद्भुत लीला भी प्रगट करना चाहते थे, क्योकि महा चाहते थे समझना कि वो कौन है? तो उन्होंने अपने चेहरे से लाखों सूर्य की रोशनी का प्रकाश प्रकट किया। जर्व सन्यास ने देखा इतना प्रकाश इनके चेहरे से आ रहा है। तो समझ गए ये सन्यासी जो है साधारण सन्यासी नहीं है। सन्यासी कौन है? स्वयं भगवान सो प्रकाश नंदा सारस्वती उनके गुरु से वो नीचे आये और उनके हाथ को पकड़ कर ऊपर ले गये और सब साथ में बैठे निमृत देखो मायावनी। सन्यासियों को जब सामने आये, उन्होंने उनको प्रणाम किया आप पढ़ते हो। चेतन की सनादस्वामीकी इच्छा नहीं थी और नौकरी मिल रहे है। उनके भाई को स्वामी नौकरी छोड़ चुके थे और सनातन 1 महीने के लिए दफ्तर ले गए। घर में बैठकर भागवतम पढ़ रहे थे। 30 मामलों के साथ राजा दुखी था, रुपगसववीरनेनौकी ब्याग दी थी और सनातन भी त्याग था। उसने अपने डॉक्टर को भेजा देखने के लिए क्या बीमारी है। नाथ के साथ डॉ वैद्य ने कहा 2 फल देखते है। 30 ब्रा साथ बैठकर भागवत का अध्ययन कर रहे है। राजा ने सनातन को नेमंशनदिया तुम झूठ क्यों बोल? हे तुम्हारा भाई ने का निकला तुम से निकल रहे हो? तुम झूठ क्यों बोल रहे हो? तुम राज्य को संभाला मुझे में जाना है। मां के राजा से युद्ध लड़ने के लिए सनातन जब राजा के सामने आये, हालांकि राजा मुसलमान था करमींथासनातनने उन्हें प्रणाम किया। ताल कहते हैं कि ये है भग्गा। व्यवहार हमेशा विनम्रता का भाव। और सनातन गोस्वामी पुरी के संग थे। जब वो राजा के सामने आये तो उनको भी उन्होंने जल्दी नाम दिया। तो ये विनम्रता का भाव प्रकट होना चाहिए। हमारे आश्रम में। तो यहाँ कहा जा रहा है ना? ये गुण द्वारा क्या आप से थे, उसे मुक्त हो। और यह ज्ञान बहुत ही इंडिया जी जीवन का लक्ष्य है। और अगर मैंने आपका प्रयास किया भी है, इससे आपको कुछ अंतर नहीं आएगा। वो आदमग्ञानिसनइसका परिणाम किसे मुकदना पड़ेगा मुझे भोगना पड़ेगा। तो यहाँ फिर से यह कह रहे हैं। यही भाव पिछले कई लोगों में प्रस्तुत किया और आगे ये कह रहे हैं आप भक्ति में ये कह रहे हैं महारा यात जो हो, भक्ति में दीर्ध होकर जुड़े हो तो आपको विचलित होने का प्रशन तो भगवान के जो भक्त हैं, उन्हें दीर्ध होकर जुड़ना चाहिए। लगभग स्वामी ने हमें कई ग्रंथ दिए हैं में। 2 ग्रंथों में नुवान प्रॉपलीन किया। देश और भक्ति में क्या कहते हैं? भक्ति में आगे बढ़ने के लिए क्या गुणों की आवश्यकता है? उस निश्धरीसत्तरकरम संगति आगे थे। अगर आप भी भक्ति में आगे बढ़ना चाहते हो तो क्या आवश्यक है? 1 उत्साह उत्साहित होना चाहिए। जब आप प्रचार में मिल जाते हो, उत्साहित होकर प्रचार करोगे। तो ज्यादा असर आएगा इसे खड़े होकर करोगे के बिना तो इतना सब पाप ritrrbinatioन, ये बहुत आवश्यक है। प्रॉपर भागू गीता में। 1 बहुत सरल उदाहरण देते हैं। इस विषय पर कौन जाता है? वह कौन सा उदाहरण है? sperowoलॉsexहोश पक्षी थी, उसके बच्चे गिर गये। सागर में पक्षी ने कहा मेरे बच्चे को लुटा।
2
सागर लगा, तुम्हारे बच्चे वापस नहीं ले, नहीं दोगे वापस, तुम्हें तुम्हें सुखा दोगे। अपने मुंह से सागर हँसने लगा देखो। छोटा मुँह बड़ी बड़ी बात वो पक्षी, अब छोटे मुंह से मुझे सुखाएगी मुशकल से 34 मूद पानी आता है, उसमें बड़ा भाव था, ठीक है, मैं शुरू करती हूं। तुम्हें सुखाना। और ये सूचना कहाँ तक पहुँच गई। रुदा के बाद गुदा ने धमकी दी, मुझे उसके बच्चे प्राप्त है। तो प्रापा जी, इस श्लोक के तार पर वे गीता में कहते हैं। प्रापा जी ने इस उदाहरण, इस उदाहरण की चर्चा कई बार की कि हम जब भक्ति में जुड़ते हैं, देर होकर जुड़ना चाहिए, इन्हें भक्ति में जुड़े हैं। और कोई कठिना कठिनाई हो? हम कहते चलो हम लोग घर जा रहे हैं, फिर भक्ति में अक्सर बात नहीं कर सकोगे। इसलिए बार बार पढ़ते हो, दर्द होना चाहिए। तो फिर भर्ती में सफल हो गए। तो प्रश्न। ये उठता है। तो ये डिटरर्मिनेशन जो इतना आवश्यक है, ये गुण कैसे प्राप्त हो? और ये गुण प्राप्त हो सकता है। शब्दों में भजन पिया का पालन करो। भजन पिया का मतलब है नियमों का पालन, साधना का पालन। अब इन चीजों का पालन करो। जब देर धोकर आप सेवा कर सकते हो। अगर हम आज ही रहे। श्रम कितना पर भली दें। फिर सोचना कि डिटरमिनेशन प्राप्त होगी। यह गलत है, यह संभव है। तो चाहे भक्ति का कार्य हो। किसी विषय में यूनि डिटरमिनेशन है की नहीं। आप लोगों को याद होगा, आप स्कूल में पढ़े थे और कॉलेज में दाखला की तैयारी करे थे, तो आपको देर होकर पढ़ाई करनी पड़ी है कि नहीं? खास लगे। अगर आपको आईटी वगैरह में जाना है तो उसी प्रकार हमें देर होगा। भगवान की सेवा करनी चाहिए, हर सिटी में सेवा के लिए तैयार रहना चाहिए। यही नहीं की केवल अगर सुविधा जो हमें चाहिए, वो हो। तोरी हम सेवा करेंगे। भगवान कहते हैं चित्र विता जगदीश है। ओके हम जर्मनी। मे। तो यह कहा जा रहा है, जल्द भारत मराज द्वारा। आप देर होकर जुडे हो। भक्ति के रास्ते में मैंने अपराध कर दिया है। शाब शुद्ध भक्त हो। भगवान के रात के प्रति। मैंने अपराध किया है। फिर से 1 श्लोक में 3 दफा महाराज रहना स्वीकार करे। मैंने अपराध किया, मैंने अपराध किया है, मैंने अपराध किया है, फिर से कह रहे हैं कि मैंने अपराध किया है और मुझे इन अपराधों का बहुत डर है। तो यहां कहते हैं क्यूंकि मैंने यह अपराध किया है? मेरी जो भक्ति है, नष्ट हो जाएगी। तो इससे क्या संदेश मिल रहा है? हमें सावधान रहना चाहिए और अपराधों से बचना चाहिए। और अपराध समझो कभी कर भी लो, हमने उसकी माफी मांगे। तो अगर आप को माफ नहीं करे तो? तो हमारे शासन अनेक उदाहरण हैं। जैसे अमृराज अमर राज ने 1 साल कार्तिक के महीने में वर्ज छोड़नी वाले थे। जब दुर्वासा मुनियम के महल में पहुँच तो अमरीश ने मंसर दिया, मैं भी तोड़ने वाला हूँ। आइए प्रशाद स्वीकार कीजिये। दुर्वासा ने कहा, मैं स्नान दुपहर का स्नान करके आता हूँ। मुझे वो स्नान करने गए, भगवान का चिंतन कर रहे थे, पानी में ही खो गए, भूल गए, अमरीशमराजउनकी राह देख रहे हैं। अमरीश मेराज के सामने चिंता क्या थी। वर समात करने का समय बीत रहा था, बीतने वाला था और अम्मृशमहाजचाहते नहीं थे। वर्ड को ठीक से छोड़ा, तुमने ब्राहमण से पूछा क्या करना चाहिए। ब्राहमण ने कहा, जल्द पीलो, जल पीना। 1 रूप से अपराध है। 1 रुप से उसके द्वारा वर्ड टूट जाता है, दूसरी तरफ से नहीं टूटा। जब दुरवास मुनि वहाँ पहुँचे amrish rah na wo तो मुझे इसे सबक सिखाने। 2 राक्षस पैदा अमर महाराज who बिलकुल sir bacana वो से भगवान ने अपने भाग के लिए क्या किया। भगवान को पता था कि मेरा भर 24 घंटे जुड़ा रहता है। मेरी सेवा में उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र को छोड़ दिया। दुर्वासा के बीच दरवाजा पहुंचे, ब्रह्माजी के पास बचाओ बचाओ बचाओ, मैंने रशिया में आकर अमरेश पुश, नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। ब्रह्मा जी ने कहा, मैं कुछ नहीं कर सकता, वो गए शिवजी, पर यही संदेश लेगा। शिव जी ने कहा हेलो कुछ नहीं कर सकता, अम्बरीश मे कुछ नही कर सकता तो फिर परम भगवान के परम भगवान, मैं भी कुछ नहीं कर सकता। तू कौन कर सकता है? मैं भी कुछ नहीं कर सकता, तू कौन कर सकता है? न? कहा, मैं तो कुछ नहीं कर सकता, पर मेरा वक्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि मेरे भक्त इतने प्रिय हैं कि वो मेरे हृदय में रहते हैं, मैं सदा उनके हृदय में रहता हूँ। आना पड़ा किसके पास? तो इस कथा आप सब ने यह कथा हजारों बार सुनी होगी। आपको क्या शिक्षा मिलती है। भगवान के जो भक्त हैं, वो अत्यंत है। शिव जी, ब्रह्मा जी, भगवान ने भी स्वयं इनकार कर दिया, हम कुछ नहीं कर सकते। पर जो भक्त की हुई तो उन्हें माफ कर दिया गया। आखरी माता का भी उदाहरण 1 भक्त थे जिनका नाम था देवानंद पंडत। देविननपंदतबड़े विद्वान थे, उन्होंने भागवत को लगभग कंटसकीआवाजथा, पर उन्हें 1 गुण 1 कमजोरी थी उन्हें जो भागवत का जो सभी उपदेश्य है, भक्ति योग उस विषय में लगभग बहुत कम ज्ञान था। जैसे कई लोग भागवत कथा करते हैं, कहीं उन्हें गीता को कंटेस्ट किया हुआ है, कहीं उन्हें भागवत को कंट्रास्ट किया हुआ है? पर कृष्ण भगवान स्वयं स्वीकार नहीं करते।
देव
संस्कृत के बड़े विद्वान थे। और भागवत में पूरा विश्वास है। भगवद पड़ा था। तो भगवत की जो असली संदेश है, उसका उनके बाद क्या नहीं है। तो 1 दिन श्रीवास जा रहे थे, उनके घर के आगे से, उन्होंने अंदर देखा भागोतम की रचना हो रही है। श्रीवास तो खुद शुद्ध भक्त हे समझ गए, भागोतम की रक्षा हो रही, चर्चा हो रही है। वो अंदर गए। जब उन्होंने भागोतम मधुर लोगों का उच्चारण सुना तो उनके मन में भक्ति भाव ऐसा उत्पन हुआ कि आंसू बहने लगे और रोना शुरू हो गया। कई बार लोग नकली रोते हैं। असली तो दूसरे विद्यार्थी थे, देवानंद पंद्रह को सुन रहे थे विद्यार्थी दे कौन नहीं है पागल आदमी जो अन्दर आया था, रो रहा और उसको उठा कर बाहर फेंक दे जाओ जब हम हमारे टीचर को सुन नहीं सकते। बाहर फेंक दिया और shrivas ज्ञान था। और जो भगवत का असली संदेश है, वो उनका क्या अपराध था। उन्होंने देखा उनके विद्यार्थी शिवाज की बेस है, वो चुप रहे। और जब महा प्रभु को यह। पता लगा। वो अत्यंत क्रोधित हुए देवनंदरपदतकेऊपर उन्होंने अपराध किया, क्या, अपराध, शिवाज जैसे उत्तम कोटि के भर को उठाकर भाग ले गए। शिवाज ने कुछ भी नहीं कहा, देव ने कुछ नहीं कहा। माँ बहू ने देविंदर पर का तुम पापी हो। अंत में जाकर देवनंद पद से माफी मांगी। तो कई उदाहरण हैं जिनसे आप देखते हो कि वैष्ण अपराध का भयंकर परिणाम होता है। तो यहाँ मणाजरोगनाकहरे है कि मैंने बोला महान अपराध किया है, वैसा के चरण कमलों में अपराध किया है। तो प्रयास हम अपराधों से बचे। जब महाप्रभु नाधरंगोस्वामी को शिक्षा दे रहे थे, उन्होंने क्या कहा? भगवान जी? गुरु कृष्ण के बाय भक्ति, अनेक यूनिया में गुरजने के पश्चात ओ भाग्यशाली व्यक्ति है। इसे ये ज्ञान प्राप्त होगा क्या ये भक्त सबसे महत्वपूर्ण सेवा है। भक्ति दादा बीच भक्ति लता बीज का मतलब, यह ज्ञान जीवन का लक्ष्य क्या है। और जैसे आप किताब बाते हो किसी को तो 1 रूप से आप उसके हृदय में भक्ति का बीज बोले हो क्योंकि इस ज्ञान का लाभ कभी न कभी होगा और जब आप इस बीज को पानी पिलाते हो तो भक्ति में उत्साह बढ़ता है। और आगे महापरब कहा अगर आप सुन्दर बगीचे में पागल हाथी को आने दोगे तो क्या होगा? पूरा बगीचा नश हो जाएगा तो ये ही भाव आप पढ़ते हो। बार बार वैसा अपराध से बचना चाहे और प्रयास करोगे तो सफलता प्राप्त होगी। और कई बार हम बहुत ज्यादा डर जाते हैं। वैश्णअपराधमऔरवैशण अपराध से ये मतलब नहीं मानो बंधन में हो और कुछ कमी है आपके व्यवहार में और अधिकारी को उनको बोलने की आवश्यकता है और आप सोच उसको मैं बोलूंगा। तो मैं वैषणअपराध कर रहा हूँ में भाषण अपराध अधिकतर उसका अर्थ है इस्टा द्वेश जिंदा की भावना में आकर अपराध करे और हमारा प्रयास चाहिए हम भैषणअपराधसेबछे और अपराध हो भी जाए तो इन भक्तों के सामने प्रणाम करो जिनके प्रति वैश्व अपराध हो। और अगर आप ये सोचते हो वो दूसरा व्यक्ति अगर नहीं स्वीकार करे ये फिर उसका दोष है तो वैश्य अपराध से बचना चाहिए और आप ये लगभग रोज सुनता हर क्लास में सुनते हो ना किसी नीचे न बोला। अफसोस की बात है। बार बार सुनने के कारण भी हम गलती कर दे थे। तो माँ आज रहूंगा असली भक्त थे। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने गलती की है, वो जद भारत के शरणगत हो गए, जज भारत ज्ञान की भीख मांगे बड़े ध्यान से जज भारत द्वारा जो संदेश मिला उसको स्वीकार किया तो हमारे में भी वोही उत्सव होना चाहिए जो जल्द महाराज में था। उत्सव की हमें असली ज्ञान प्राप्त हो। फिर हमारा प्रयास होना चाहिए के हम अपराधो से बचे और ध्यान पूर्वक जाप करे और अगर आप प्रयास करोगे तो अवश्य ही सफलता प्राप्त करोगे। और आज के लोग के तातपर्य भगवत के तरवे और बाईसवें अध्याय किस लोकों का वर्णन किया है। ये 5 लोग हैं, ये 5 लोग का अर्थ है की है कि हमें बाईशन अपराध से बच न सो भाग बाजी में कहते हैं रिपिटेशन ने सेरी टू ड्राइव पॉइंट होम। कई बार जब हवाएं ग्रंथों को पढ़ते हैं, वो कहते हैं आपके ग्रंथों में सेम पॉइंट गेस्ट, पीते गे। यह बहुत तो सच है। यह नहीं कि आज 1 अलग लीला सुन रहे हो। लीला सुनोगे बार बार है। नाम की। महिमा 10 अपराधों से मुक्ति। वैसे अपराध से बहुत साधन सन की आवश्यकता जो बेसिक पॉइंट्स है वो तो सेम है। तो कई बार लोगो को लगता है कोई नया में नहीं आता। राधा को जाएंगे तो नई विला सोने। पर प्रॉपर जी कहते हैं बार बार सुनोगे तो ही आपके हृदय में बैठेगा। 1 बार 2 बार सोने। से नहीं बनेगा। तो इसीलिए शास्त्र को पढ़ना, चाहे, रोज इधर को पढ़ना चाहिए। बार बार सुनोगे तो भी थकोगे नहीं। हर नाम का उच्चारण अबधेनादहईनाम का उच्चारण करते हो। आपको कभी ऐसा लगता है बहुत बार हो चुका है। यह भी बासी हो गया है। कोई ताजा नाम, नाम चेतन, पूर्ण शुद्ध, दिति, मेरे नाथ का नाम, भगवान के नाम अभिन है। उसी प्रकार भगवान के ग्रंथ भी है। भगवदम क्या है, भगवान की वाणी? गीता क्या है भगवान की वाणी मनको जितनी बार सुनोगे पड़ोगे उतना ही कम। कभी कभी उन्हें बर्थ मिलते। जो कहते हैं हम दूसरे चाइयों की ग्रंथों को पढ़ सकते हैं, उनके ग्रंथों को पढ़ सकते हैं, पढ़ सकते हो। और प्रौपर्जी के शब्दों प्रॉपर्जी कहते है। कोच नेस्टर मई बुक कर आप प्रॉपर जी के ग्रंथों को पढ़ो, उनको पहले समझो और जब समझ लोगे पढ़ लोगे। कई बार फिर आप यह विचार कर सकते हो। हम दूसरे ग्रंथो को पढ़। पर इन इन ग्रंथों को पढ़ना बहुत महत्वपूर्ण है। कोई अब जाकर असली संदेश को समझोगे तो संक्षेप में गुना। हम सबको सूचना दे रहे हैं कि सूचना क्या है, अपराधों से हमें बचना है। अगर हम प्रयास करेंगे तो भगवान आवश्यक है सबोतभीलेंगे और बार बार पढ़ोगे, बार बार ज्ञान सुनोगे। तो फिर बाद से बच पाओगे और प्रयास करेंगे कि कई प्रश्न yes yes जल्दी दी
हमारे ने सा ताया है चलो की।
m sorry ki
कोई भी ऐसा उसके
अपराध हो, उसको हम अपराध खिलाते हैं। मान लो मंदर के अधिकारी हो। आप देखें कुछ कमी तो उसको आप सुधारो। वो भी वैसा पराध नहीं बना। मान लो कोई व्यक्ति भगवान की सम्पति का दुरुपयोग कर रहा है वो वैसा पराध नहीं बन।
उल्टा दिन का प्रश्न यह है की अगर ज्यादा निकट के सम्बन्ध हो जाते है किसी भक्ति तो फिर उसके प्रति हमारी दुर्भावना पैदा हो जाती है।
बीज कोंटे होना नहीं चाहिए। कहते हैं हम जब नए नए आये थे, हमें लगा कि सारे भग व कुंदा से आये है, उनके साथ उठना बैठना होता है। तो हमें लगता है कि वो तो दिल्ली के बाइफहोसकेहैतो हम जो ज्यादा नुक्स निकालना शुरू कर देते हैं। पहले हम सब बालकों के गुणों को देखते हैं। इसे पापा जी कहते थे। पहले दूसरों के गुणों को देखो, फिर हम गुरु को देखो। पर ये नहीं कि अगर मान लो किसी को कुछ कमी है और आप सुनाओ या कमी है तो वो अपराध वो अपराध नहीं ना र। question ya छोड सोचते है, छोड़ने है
जो सोचते है की तभी से भगवान मेरे ते
दीदी मात्रा में भवानशहोग वो हमारा सहयोग देंगे। तो अगर आज से आप अपनी कमियों को छोड़ोगे तो आज से आपको क्रेडिट मिलेगा आप ये नहीं कह सकते। 6 महीने भर मे जरूर त्याग देना है 6 महीने की छूट, 2 मुझे भगवान खुद ही कहते हैं न ये all of the median i a ecording ly okay, yeah, son speak the outer yeah,
इसलिए चलना है तो हाल इसका
स है।
तो इस तरह 2 चीज भगवान के डीडी से शरीर को से यहाँ पे शहरों में
किसका अपराध जिसमें महान संतो
के चरणों में अपराध चरम, ntडेजwoभीसबोलना चाहते बोलना चाहे, यह अफसर कहा जाता है?
नहीं मैं कोई ढूंढ रहा हूँ यहाँ चरणों है ही नहीं मैं यह देखना चाहता हूँ का ये अफसर कहा जाता
है की हम भगवान वैश्नव के चरणों में अपराध नहीं करना चाहिए मतलब निंदा करना यह भी चरणों में अपराधी है
जो उनके चरणों में अपराध मतलब कि वैश्णव बॉडी। describing of vishno is is not a speed on the vishnu, s body to respect full to all okay।
कैसे अपने बताया स्वामी जिसे 2 बजे तो अपने
से प्राप्त किया गया है,
तो उसके बाद जो भी विवाह शादी की की उनकी बात कैसे आप ै
यह बहुत क्योंकि वो समझ पाए मैंने गलती कर ली है, समझ लिया मैंने गलती की है समय व्यस्त हो गया है, अब मुझे वापस जाने। 2 ये
मैंने बताया था कि लोग समझते है। 1 जो गुरुवार ने बताया की मतलब आजकल लोग समझते नहीं है भी कह रहे हैं तुम्हारे सुसाइट 4 को ढोते हैं इससे भी बड़ी बड़ी चीज और उनको लगता ही है। और आज कल जैसे स्पीकर्स है वो भी की है ये नेचुरल में सो इसका हमको लगता है, सही
नहीं। ये भी नहीं है कि कोई सुनता नहीं है, अगर कोई सुनता नहीं होगा तो ये कमरा खाली रहता हो। मंदिर में भक्त हैं, लाखों भक्त हैं संस्था के, तो लोग सुन रहे हैं पर जितनी मात्रा में जुड़ना चाहिए उतनी मात्रा में नहीं जुड़ रहे हैं। और यही कहना कि कलयुग में कोई ही सुधा हमारे संदेश को, वो भी गलत है। यह प्रोग्राम होते हैं, हजारों लोग आते हैं। जितनी माता में सुनना चाहिए उतनी मात्रा नहीं सुन पाते है है
जो समझना नहीं चाह रहे हैं कि हम गलत कर रहे हैं उनको कैसे
आप लोग कैसे कनवेंस हुए आप लोग भी पहले भौतिक जीवन में थे, किसी ने आप का प्रचार किया, ग्रंसलियामंमैंने मंसर लिया ने फीस में आए और स से आपकी भग्गी बड़ी है। नहीं तो ये जो प्रोसेस है प्रूवन प्रोसेस जो प्रॉपर्दी ने दिया है। तो अगर हम प्रचार करते जाए तो लोग जरूर जुड़ेंगे वायरस का थोड़ा इफेक्ट तो रहेगा, प्रचार का, प्रचार का भी इफेक्ट रहेगा। आज कल भक्त कह रहे हैं ऑनलाइन इतने कोर्सेस चलने भी समझ न आता। कौन सा कोर्स हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि कलयुग में कोई भक्त नहीं बनेगा। जो बुद्धिमान व्यक्ति हैं बनीं पर प्रॉपर जी ने जैसे 1 समय प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा डायमंड के हजारों गिराक तो नहीं होते है, असली डायमंड के कुछ गिने चुने ग्राहक होते हैं। और प्रापा ने कहा this krishna consile, real time you wont get thousand of cases। आपके program में हम इतनी संख्या नहीं, वो स्वामी जी महात्मा के हजारो लोग आते है, हम कहते हैं से आते हैं, हम असली सोना बेच रहे हैं। और वो नकली हीरा बेच रहे हैं, नकली हीरा के ज्यादा ग्राहक होते हैं। यहाँ बैठना चाहिए।
राज। आपने बताया कि अगर किसी बात के प्रति द्वेश और ईशा की भावनाएं तो अपराध लगता है। तो अगर किसी बंद के प्रति क्रोध की भावना है तो भी
अगर। तो कारण है क्रोध का, फिर अलग बात है। मान लो हो किसी ने ऐसी गलती की कि नुकसान हो गया मुंदर का बोल पड़ा फिर क्रोधित हो? कारण है गरम क्रोधित हैं केवल क्योंकि भक्ति में वो मेरे आगे बढ़ गया है, मुझे उसका नाम खराब करना चाहिए, वो मेरा है। ऐसे तो कई बार जो गलती करते है उनको डालना भी पड़ता है। तेरे कुली मंदर की सफाई कर रहे थे। जो भगत ज्यादा अच्छी तरह सफाई कर रहे थे, उन्हें जाकर कहते थे। जो ज्यादा गन कटना नहीं करे उनको शिक्षा 2 तो ये अगर आपको लगे, ये हम ठीक नहीं और कोई दिया जाता है ट्रेनिंग देने के लिए, ये वो अपराध नहीं है,
रश्मि है तो किसी और ही। तो हमे उसको बताना चाहिए, नहीं तो वो की वो मुझे बुरा आप
आपको उसे कहना चाहिए हो जी, मैं तुम्हें बचाने की कोशिश कर रहा हूँ, नहीं बचना चाहता तो कह सकते हो कि आप उस पैसे की निंदा कर रहा है जो बिल्कुल निर्दोष है। तो इसका परिणाम आपको बोलना पड़ेगा। और हम जब साथ देते हैं, सुनने में दूसरों की निंदा हम भागीदार बन जाते हैं। क्योंकि अगर किसी ने एशिया देश की बात करनी है, दीवारों से थोड़ी करेगा कोई कोई साथी चाहिए, हम जब साथी बन जाते हैं तो आप भी अपराध के भागीदार बन जाते हो। तो इसलिए अगर कोई निंदा कर रहा है तो आप कह 2 मैं इसमें नहीं जुड़ना चाहता। okay so,
आपने मेरे सुना है और बहुत समान है। और तो की इसका मतलब क्या है?
नहीं अगर आप आपका कहना है भक्त माफ कर देंगे तो उनके चरण धूली नहीं करेंगे। नहीं भक्त अगर माफ करेंगे तो चरण धूली भी कर देंगे। नहीं थोड़ी आप कर सकते हो, यह थोड़ी आप कर सकते हो। ha but mout is one in the same thing।
गुरुवर जी से तो कोई जिस तुरी हमसे माफी वी भाग लेते को प्रणाम भी रहे हैं। लेकिन फिर भी अंदर से कुछ है, पूरा चीज है आपके मन में या
दूसरे व्यक्ति के मन में
है तो उसे कैसे है हम ये उम्मीद नहीं
कर सकते कि 12 महीने 12 साल में हम शोर भक्त बन जाए। मतलब की हर चीज है तो हम गलती शुरू में अगर करेंगे। तो हमें इस गलती से बचने का प्रयास करना है। और भक्तों के संघ में रहोगे तो जो सीनियर देबुली उनसे आप सहयोग ले सकते हो कि उस व्यक्ति ने ऐसा किया। मैंने ऐसा किया किसका दोष है
पूछते हैं कि जैसे घर में आसक्त होता है अपने बच्चे से वैसे भक्तों के जा सकते है।
ऐसे सिद्धान्त को समझोगे तो भक्तों के प्रति भगवान का पीला दे ने और क्या कहा वही आ सकती जो बहुत वादे के प्रति है वही आसक्ति हमें संत के प्रति जोड़ देना चाहिए। तो संत के प्रति आसक्ति के जोड़ने का मतलब क्या शिक्षा का पालन करना, जो शिक्षा देते हैं उसका पालन करना पर प्रयास करने से हो जाता है। प्रॉपर जी भागवत के पतन सकरने कहते हैं livforevrbydemin instructions and follow us जो गुरु है अपनी वाणी द्वारा जीवित रहता है और शिष्य वाणी का पालन करके उनके साथ हमेशा रहता तो भक्तों के प्रति आसक्ति बढ़ाना चाहिए और भातिक वलियम के प्रति आसक्ति घटाना चाहिए। जल समस्या अब हम कर सकते हैं
और कभी
मंदी है उनको है उन को मन के ा आप दूसरे मंदिर में जाते हो। मन समस्या है उसमें बड़े सीनियर है
बड़े सम्मानित है हल की बात बोलते हैं किसी में हम उनको मना भी नहीं कर सकते से क्या कहा और
कोई सीनियर भक्त किसी और वैश्व की निंदा कर रहा है आपके सामने तो अफसोस की बात है वो सीनियर भक्त सिन्योरिटी का आचरण नहीं दे रहा व्यक्ति सीनियर बनता है आचरण के द्वारा। यही सोचना हम 20 साल से 30 साल से भगते हैं हम जो भी करें ठीक है वो ठीक नहीं है आज से हमारा ठीक होना चाह में दिया जाता है।
ऐसे में क्या कर।
अगर वो कर रहे है तो उनको मना नहीं कर सकते
उनको कह सकते हो अगर आप पुरानी मानो भैया से चल सकता हूँ। वो पूछेंगे क्यूँ कहना मैं वैश्रनेंदा सुनना नहीं चाहता वैश्रयनेंदा करना और सुनना दोनो ही गलत है कोई जबरदस्ती आपको बांध कर थोड़ी जायेगा नहीं तो सुनना ही पड़ेगा।
कई बार चम्पल होल कमेंट्स को लेकर के बहुत सारे सीनियर डिबिट में कुछ हो जाता है भक्तों के सामने तो
तो ये बिल्कुल गलत है अगर सीने भक्तों का शाउटिंग मैच शाउटिंग मैच क्या कहने अगर सीने भक्त 1 दूसरे को और आरोप लगा रहे हैं सबके सामने ये ठीक नहीं है दोनों तरफ से ठीक नहीं है राज जोर से यह सुनने में तकलीफ होती है। here the question and some i did home। अगर कोई
और कुछ पोजीशन मिला सेवा दिया गया है तो वो करते लेकिन करार हो जाता है और हम इस चीज को कैसे महाराज? कोई नया भक्त नया भक्त आता है वो हमसे बाद नया नया है और उसको कोई ऊँची पोज दे दी जाती है, पोजीशन दे दी जाती है और उस पोज के रिगार्डिंग हमें उसे रिस्पेक्ट करना पड़त। पर अंदर से रिस्पेक्ट जागृत नहीं हो पाती है तो फिर ऐसी सिचुएशन में क्या करना चाहिए।
अगर मान लो कोई भक्त आपके आने के बाद जोड़ा है को जिमेदारी दी या डिपार्टमेंट हेड बना दिया या कोई हमें यही सोचना चाहिए मानी बुद्धि के अनुसार नहीं होना चाहिए था। पर जो मंदिर के अधिकारी हैं, उनके विचार से ही वो व्यक्ति तैयार है। और जिम्मेदारी उठाने में अगर, ये भगवान की इच्छा है, हमें स्वीकार करने 2 कि हर चीज का निर्णय है, मंदिर के हर भक्त के साथ थोड़ी किया जायेगा। मान लो, आप किसी को जिम्मेदारी दे रहे हो, तो हम 1 सर्वे करेंगे, 150 ब्रह्मचारी के साथ उनको ये पद दे या नहीं दे तो मना नहीं। हमें यह विश्वास रखना चाहिए कि जो अधिकारी, जिनके पास जिम्मेदारी सौपी हुई है, दूसरों को जिम्मेदारी सौपने के लिए, उन्हे उन्होंने ठीक ही किया होगा। अगर हमारे हृदय में थोड़ा, ऐसा भाव है। इस व्यक्ति को नहीं मिलना चाहिए था। पर और इसलिए मैं साथ नहीं दूंगा। वो ठीक विचार नहीं है। जो मैनेजमेंट सिस्टम है, उसे हमें पूरा कॉपरेट करना चाहिए। यह नहीं कि हर निर्णय, हर भग के साथ पूछा जाएगा। फिर तो कभी कोई चलेगा नहीं। हमें विश्वास रखना चाहिए। जो अधिकारी हैं, उनके डिसीजन में
और
मान लो, उन्होंने गलत निर्णय लिया। हम ये नहीं कहते हैं। कृष्ण भक्ति का मैनेजमेंट हंड्रेड परसेंट राइट है, हमेशा वहां सिद्धार्थ हंड्रेड परसेंट राइट है। प्रॉपर ग्रंथों में जो ज्ञान है, वह सौ प्रतिशत ठीक है। और मैनेजर में। कभी कभी हम ले लेते हैं। जो बाद में लगता है कि शायद गलत लेना था, वो ट्रायल स चलता है। और यह नहीं सोचना चाहिए। स्वामी ये नहीं कहते हैं। हर निर्णय जो हमने दिया है, सौ प्रतिशत वाइट करेगा। और श्रद्दा से, ईमानदारी से अधिकारिक प्रयास करते हैं। ठीक निर्णेनेनेकेलिए। य, ये गुरु महाराज।
कई बार जब हम मैनेजमेंट में होते हैं, तो कुछ कहीं एक्टिव होती है। तो क्या हमें इस चीज की चिंता करनी चाहिए? हमारे बारे में कोई गलत सोच रहा है, तो क्या इस चीज का टेंशन लेना चाहिए? या हमें अपनी सेवा करते रहना चाहिए?
आप अपनी सेवा ईमानदारी से करते रहो, ये चिंता मत करो। लोग हमारे बारे में क्या सोचते हैं? अगर आप यही सोचते रहोगे, हमारे वा में क्या सोचते हैं, तो आप कुछ भी ठीक नहीं कर पाओगे। अपनी तरह से ट्राई करो। ऑसी और आप वैसे सी ने भग्न किया, सहयोग ले सकते हो। उनसे पूछ जैसे गुस्मामीको शिक्षा दे रहे थे। उन्होंने कहा, पहले कदम में गुरु की सेवा करो से स्ट में दीक्षा। 2 तीसरे स्टेप में आगे पूछो, मुझे क्या त्यागना चाहिए? भक्त में आगे बढ़ना, सीन भक्तों के साथ रहते हो। उनसे पूछिये, आपको क्या कमी दिखती है? मेरे आश्रम में क्या कमी से सुधारना चाहिए, पूछते रहना चाहिए। और हमारी समझ से क्या है, हम केवल प्रशंसा सुनना चाहते हैं। कोई कमी नहीं बोलो। क्या कमी है। क्या कमी से मुझे सुनाना चाहिए। ओके
लगी, कॉलिटी सोचिये की मैं टी हो और मुझे कोई कर नहीं कर सकता। लेकिन उसे मंदिर के सारे ले, उसको करना अपराध है।
अगर मंजर का अधिकारी कहे, तुम कुछ बीच में बोल नहीं सकते, तो में रूप से गलत है। अगर मानो, किसी ने कोई निर्णय लिया है और आपको लगता है कि इसमें गलती कमजोरी रह गई है। आप अपनी तरफ से जाकर, विनता से बोल सकते हो। और जब भी वो नहीं बदले तो आप भगवान पर छोड़। 2 आप ये कह सकते हो mईसाइडटरामेंबठ और वो नहीं सुनना चाहते तो हम क्या करें? तो फिर अगर वो गलत निकल आएगा तो उर्दू से भग उसका सारा दोष पहुँचेगा, आपको उसका परिणाम नहीं मुभरनापड़ेगा। yes
as god relationship is pitta some
over, but been have a relationship, so
the surat you don w
rah so here negative hearing will be। देर, हम ये नहीं कह सकते, मंदर एकदम ऐसा वातन बन जाएगा, ये सब शुभ का व्यवहार करेंगे, थोड़ी बहुत कमी आए। तो आपको देखेंगे manage में कई बार कोई decision glte nikal सकता है, we just have to be toll men, ye kate every managment dicesonwemake is hundred percent right, ecas there s not hundred percent right। तो आपको ये कॉल देर करना चाहिए? हाँ हाँ सा, जब भूख लगती है और प्रशाद का समय आ रहा है तो आप उत्साहित होते हो प्रसाद खाने के लिए, तो उसी प्रकार उत्साहित होना मतलब हम बड़े उत्साह है। भगवान की सेवा करना चाहते हैं। इस समय हमारा उत्साह रहता है इंडिया तिप्ती कार्यों के प्रति और ज्ञान प्राप्त करने के पश्चात वह उत्साह हमें अर्पण करना चाहिए। धान की सेवा में ओके
यस अपराध है। कई बार ऐसा होता है कि रस से नरेंद्र हमारे होते, लेकिन
हम यह क्या कहते हैं मैनेजर का हर निर्णय हमारा हंड्रेड पर्सेंट ठीक होगा। और हम ये भी नहीं कहते है कि आप सब 6 महीने में शुद्ध भक्त बन जाओगे, हमें प्रयास करते रहना चाहिए और प्रयास करते जाए। जॉब के बल पर जो कमियां हैं वो दूर हो सकती है।
its a question from more hcesagberywasens is when someone of ans you ratites national to react in this given situation
let s somebody or fens, you you dont have to nessesallydoatid for tat, we do tit for tat, then the admusfameanvirement becomes more complicated, but suppose somebody or fens you need all rated, then demate peace, we dont have to route for tata okay, we just a one to more pressor yes jisne cesionpूछा। हमारी कमी ये है ये हमारी कृष्ण कथा में रूचि बहुत कम है, और प्रजा में रूचि ज्यादा है। क्यूंकि हमारे प्रजल्प में रू ज्यादा है? हम तो खुश होते हैं जब किसी की आज कल में कुछ गलती है। हम सुने पर भक्ति के विधि के पालन से, कृष्णा करता की वजह परजलपगरूचीहै भक्ति की विधियों का पालन करोगे। फिर कृष्ण कथा में रूचि बढेगी असली समझ से 1 असली करनी है। कृष्ण कथा में हमारी बहुत कम रूचि है। कृष्ण कथा में जब शुरू होती है, हमें नींद आ जाती है। हमें कृष्ण कथा में रूचि बढ़ानी है। मे रूची बढ़ाओगे खुली कोई प्रजल्प रूची और अगर हम सोचते हे परजलपमेरूचीचाहिए किसने था यह संभव नहीं हो पाएगा।
o अपराध किया पंडित, लेकिन बाद में सेवा की तो उनको समा हो। डायरेक्ट से क्षमा मांगी तो ऐसा भी
हो सकता है की है महा प्रभु इतने खुश हुए उन्होंने राकेश पंद्र की सेवा लोगों को रोका। उनके पास आने से माँ पर पा का मतलब है। 1 वैष्णा के प्रति अपराध किया में 1 के प्रति अपराध कर सकते हैं, और दूसरों को सेवा करके खुश कर सकते हो कर सकते हो। पर अगर आप ये उदाहरण लो, पर हमारा प्रयास होना चाहिए, अपराध से बच कर रहे। हमें यह नहीं सोचना, जैसे कि मन में गलत सोचना 1 प्रकार से कलयुग में आपको छूट है, पर इसका यह अर्थ नहीं कि आप मन के द्वारा विचार को सोचते शरीर में जुड़ जाएगा। उस हाल उन कार्यों में। yes
difference of opinion,
different of opinion between the managers
and
in it don naagreviticther, there is a certin line of command in his son that should be respected, we can not say i dont agree with this so, i m i will do we do what ever you that is not proper is a question
we
keep trine hard, wenonsaytes in wininonyerrtwo year, everyone won become a peurdebodyokeep trig hard and if we are sinciatlytrying the fisamaalsohav, we dont say every managment decision weve make in hundred persent right papa said that and the device body all the news is okay record, consious means you? and sanding the philosmicbetter s like what s definition of macor man, macor man in on wo grown up an act child no to do what is right? so maturity isagonsmeans i know the philosmiundlive by the fhilosme? ओके या जी
की तरह करते है, पोर्वैरेटीकीतरह करते हैं, सेवा को दी न में सेवा नहीं कर पाता है, तो उसे कैसे
जैसे कई बार भाग जाते है। when chanting the mechanical am no trac नहीं, जो आप क्वेन है। कई बार आप सेवा करते हो, mechanical चाहे मैकेनिकल हो, यह स्पोनटेनियस आप सेवा करते जाओ, चाहे मैकेनिकल हो या स्पोनटेनियस, अब जॉब करते जाओ। ये मत सोचो आज मैकेनिकल चेंजिंग कर रहूँ, मैं मैकेनिकल भी करोगे। गम यो जरमा जंगल गए थे, इच्छा थी कि बड़ा राज्य प्राप्त हो। उनकी भक्ति में इतनी शक्ति थी। बाद में उनके भाग एकदम बदल गए। सो बिग मैकेनिकल चैन मैकेनिकल सेवा। okay, what are do more questions
there to aspect sanrise? मन साधना service of managment, smart? तो साधना करते हैं, तब तो कोई अपराध नहीं होता है, कि जब सेवा करते हैं, मैनेजमेंट करते हैं, तब अपराध होता है। और हम सुनते हैं कि मैनेजमेंट करते हुए ही कई सारे अपराध होते हैं। कम्यूनिकेशन मेसंडरस्टैंडिंग होती है। तो क्या इससे यह सीखने का, इसे समझ सकते हैं कि मैनेजमेंट को कम करें और साधना पर ज्यादा मैनेजमेंट करते।
मैनेजमेंट भी जरूरी है। आखिर देखो जैसे मंदिर बना, ये थोड़ी के लोग ईंट ले, कोई सीमेंट ले आया और मंदर बन गया। कई ने दिमाग लगाया, आर्किटेक्टर का काम था। तो जाके मंदर बना। तो इसी प्रकार से मनी टाइम इस फॉनमरसफगुटमैनेजमेंट opaonadgodietran in for managment on isfanjebcbody के कई programs हैं to train students bc college dedershipcorces so we beled training and we should take the train, how to deal with the bodies, how to make decisions study all this, अगर हम यही सोचेंगे मैनेजमेंट करेंगे तो अपराध बढ़ जाएगा। अगर आप ठीक मैनेजमेंट करोगे तो अपराध नहीं बढ़ेगा अपराध बढ़ेगा केबल अगर आप
सी में 1 और कोशन था कोई सीनियर डिवोटी जिससे फ्यूजुल गाइडेंस लेते हैं। and that sीnidewotyis आlsोactinglk manager in our life, s giving, इंस्ट्रक्शन मैनेजिंग मैनेजिंग सोसाइटी मैनेजिंग डिपार्टमेंट कई बार स्प िचलआसपेटमें तो हमारी शिक्षा को बहुत सम्मान होता है तो अपराध की भावना नहीं आती क्योंकि जब मैनेजमेंट में डिफ्रेंसेज आते है ऐसा उन्होंने क्यों डिसीजन दिया मेरे फेवर में नहीं हुआ या फिर अफकोर्स कई बार हमारे फेवर में नहीं होता है तो दुख होता है तो कई बार अपराध की भावना होती है। तो 1 ही व्यक्ति को दोनों अथॉरिटीज के प्रति सम्मान करके अपराध न करे। ऐसा क
मतलब कि आपको फेस होना चाहिए। अगर ये मैनेजर हैं मैनेजर दृश्टि से, वो ठीक निरे लेंगे और जो मैनेजर्स हैं उनको ठीक निर्णय लेना चाहिए और सोच के और इसीलिए कई बंदरों में एv्रीवेरवी हैव कम स ने कहा कि काउंसल तो उसका अच्छा प्रभाव होता है। रब ने कहा कि बंगाली सेइंग है अगर आप डिसीजन लो, दूसरों की राय लेकर कुछ गलती हो जाए। आप कह सकते हो मेरी राय अकेले की थोड़ी सी सबसे पूछा गया मैंने so proper up decision begin bॉdiआlसोी जीबी सी बॉडी में क्या है? 1 आदमी अकेले थोड़ी निर्णय लेता है, पूरी बॉडी डिस्कस करके ले दिए तो जो चीज हम डिस्कस करके निर्णय ले उसकी अच्छी संभावना है से फीड पर अगर हम मैनेजन स्टाइल ऐसा है कुछ पूछो बर मे से my decision is final तो वैसा मैनेजमेंट ज्यादा देर नहीं चलेगा।
okay यह मनु महाराज कई बार हमारी मतलब ऐसी बैड हैबिट होती है नैचुरल टेंडेंसीज होती है बचपन से ही जैसे फॉर, एग्जाम्पल, छोटी, छोटी बातों पर क्रोध करना ये है तो भक्ति में आने के बाद भी ये सब चीजें बहुत बाधा पैदा करती है भक्ति करने में, तो इन चीजों से, इस ट्रगल से मत कई बार हताश बहुत ज्यादा हो जाते है की यार मेरा कुछ नहीं होता। तो कैसे फाइल करें इन चीजों से?
trier best to do things the right way, take instruction from to her more senior think that in full number one in en gidaneeknow problem problem starts, but you think i know, what is best for men anyting? मुह पर नहीं बोलेंगे वो भाव मुझे कुछ बोलने की जरुरत नहीं है, हम हमारे आचरण से दिखा सकते हैं, इस मूड में हम काम करना चाहते हैं। और राज का सजेशन यही था। we can slot team में शमिल बगुधमचौदीस्कन में चेस का डायलॉग है। नाराज मोनी के साथ भगवान बड़े प्रसन्न हुए थे। उनकी तपस्या से तो भगवान ने पृथ्वी 10 भाइयों को कहा। मैं तुम सब से बड़ा खुश हूँ, क्योंकि तुम सब भाइ v a भctiyogसovian individuals, हम सब का भाव 1 ही होना चाहिए। भक्ति योग प्रापी शिक्षा के आधार पर। फिर भगवान ने कहा, क्यूंकि तमसमभाइयोमेंएक ही भाव है मता का भाव, इसके लिए मांग महज क्या वर चाहिए। मैं तैयार हूँ। अगर हम पापाजी के शिष्य हैं, उसके आधार पर चले तो भगवान खुश होते हैं। फिर भगवान कहते है मांगो क्या वर्ड चाहिए। okay i think we saw last preso यe जब आप प्रचार करने जाते हो, आपके पास लिमिटेड टाइम है, वो बड़ी दुनिया है तो आपको दिमाग लगाना चाहिए कहाँ ज्यादा अच्छा है जैसे आप बुक डिस्ट्रिप्यूटर्ज हो, आपको पता है कि कौन से शेयरों में अच्छा है, कौन से शेरों में कमजोर है तो आप उधर ही जाओगे जहाँ अच्छा है। हम ये नही कहते है बुक डिज्रीब्यूशन करने के लिए सहारा जजजमेंजाओथोड़ा दिमाग तो लगाना पड़ता है
ले लेगा ये ले
लेगा तो आप अपनी बुद्धि द्वारा ये निर्णय कर सकते हो जिस कॉल एजुकेशन
किसने दिया लेके डीटी अल्टर में स्मार्टफोन लेकर जा सकते है। फोटो कुछ
ह म भी, नई भी सर, मैं तो भागता हूँ कहता हूँ अगर pेलिfoनऑल्टर में जा रहा है, पहले उसको साफ करो, वो telefon रास्ते में था, ये था आप तो वायरस का भी खतरा है मारपंजबचचेतरह साफ़ कर के, जी हा रा असल में कई बार मैं देखता हूँ पुजारी फोन को ला रहे हैं, मैं उनको कैसा पर नहीं ला सकता। कल्चर में अगर फोन लेके जाओगे और गारंटी करोगे उसको हर रूप से साफ करोगे। ओके भाई ओके लास क्वेशन महाराज मंदिर
के अन्दर कुछ नियम लागू किए गए हैं। जैसे बैठने का 1 तरीका, तो धीरे धीरे बाद हम देखते है की बैठने का तरीका जैसे ही
क्या we should not sat with a back, to the
deti,
should not stand with a back, the deres। आप खड़े होते हो तो पीठ को भगवान की तरफ नहीं रखना चाहिए। जब आप बैठते हो पीठ को भगवान की तरफ नहीं रखना चाहिए
और कभी तो बैठते हैं तो मसाज भी लेते हैं।
मंदिर में
काफी दबा हुआ है और
ये काफी मंदर में मजा गये थे। मान लो कि कुछ दर्द हो रही है यार जलने।
काफी काफी
डेली
और महाराज इतना लोग घबरा जाते हैं। सीनियर रिकॉर्ड के नाम से। तुमसे कैसे बोल
नहीं अभी मान लो अगर कोई क्लास सुना है 1 मिनट में पीछे से उसमें सीरियस ले, अगर कोई रिबोली बीमार है तो कोई कर रहा है तो 1 कोने में बैठ के कर सकते हैं। ओके हाय कृश्ण geoecageg।
More from PRASAD

Rare Pastimes & Timeless Lessons of Guru Mahārāja | Stories Every Disciple Should Hear

ISKCON Legends- pure devotees meet-HH Jayapataka Swami, HH Gopal Krishna Goswami, HH Radhanath Swami

Jagannātha Ratha-yātrā Through Śrīla Prabhupāda's Mercy | 29 April 2006 | Nairobi, Kenya

Lord Jagannātha's Appearance Pastime | 21.07.2019 | ISKCON Calgary | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

The Ācārya Teaches by His Own ExampleGuṇḍicā Mārjana by Guru Mahārāja #shorts

Guṇḍicā Mārjana – Lord Jagannātha's Pastime | 21.7.2019 | ISKCON Calgary |Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

H.H. Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī Mahārāja - Exemplary Sādhana and Deity Worship # shorts

भगवान की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? | 11 Jan 2014 | Punjabi Bagh | Srila Gopal Krishna Goswami

Material Education vs Spiritual Education | Srila Gopal Krishna Goswami #shorts

