क्या है साधु के लक्षण ? | SB 5.10.8 | 25.03.2020 | ISKCON Delhi | Srila Gopal Krishna Goswami

Srila Gopal Krishna Goswami explains the seven qualities of a true sadhu based on Srimad Bhagavatam 5.10.8: tolerance, compassion, humility, universal friendship, devotion combined with service, ego-renunciation, and scriptural discipline. He uses stories and examples to show how these qualities bring peace and spiritual awareness to society, urging listeners to practice them daily.
Chapters
ओम नमो भगवते वासुदेवाय, ओम नमो भगवते वासु देवार, म नमो भगवते वासु देवार श्रीमद भागवत 5 कसकन दसवा है शोक नंबर 7 और 8 में लंबे शोक है। शब्द माल साल केवल
आज सरदार
ठीक है, सवार
सब देते है
तो ये मईकलेरलॉं नहीं नहीं माइक। 2 सब
से अप करना पड़ेगा। ऐसे ब्रज बोल सुनाई दे रहा है।
कैमरा?
बोल
नहीं तो कैसे करो?
महाराज
बोले।
तब पश्चात राजा ने उसको अखबार उसको दोहराई सातवा है। आठवीं को दोहरा सातवा तद पश्चात। जब राजा ने देखा की उसकी पाली की अब भी और बबल हिल रही थी तो वह अत्यंत द्रुत हुआ और कहने लगा अरे दोस्त, तू क्या कर रहा है? क्या तू जीवित ही मर गया है? क्या तू नहीं जानता कि मैं तेरा स्वामी हूँ? तू मेरा अनादर कर रहा है और मेरी आज्ञा का उलंघन समज्ञा के लिए मैं अब तुझे मृत्यु यमराज को ही समान दंड दूंगा। मैं तेरा सही उपचार ये देता हूँ जिससे तू होश, मे आ जाएगा और ठीक से काम करेगा।
आज सबको सुनाई दे रहा है।
शब्द अनुवाद एवम बेवा। इस प्रकार बोलता राजा शासक मानता था, जो ऐसी
सी
हे धेला, हरेरा बागल देगा है। ईश्वर के भक्त जी ने बालि
को आगे
आते हुए आते कहा होता
होता ह
का
मित्र है योग, योग व
योगियों की योग से, मान से,
बाद को लिए
हम करने के कारण ये देश
सी हो।
ऐसी दुतकार
मां और
लेजदीराजाअपने आप को बड़ा और ी कालगेस
और
हा बुद्धी को नहीं था। इस के आकर इस शो में देहात देहात। बुद्धी से परे दिल के पिता अंतर बनाया गया। बिहार की बुद्धि न जाय। अपने को राजा माना था और चे को खटका रहा था किन्तु दिल का तनिक नहीं होती, बल्कि वे मुस्कुराए और राजा को देश और अब बेचना सभी प्राणियों का सा हो गा है तथा मैं अपने शत्रु का मित्र रहता है। मां को किसी को शत्रु नहीं समझता सुविधा ऊपर से रोज प्रकट करता है किन्तु यह अभक्त के लिए लाभप्रद होता है। लैदर साहित्य ऐसे पधराओं से भरा ये बाद नारद कुबेर के 2 न था। गरीब पर खुद हो गई, बिट्स बना ली। इसका की बात के भक्तों पर पद पता चाहे। वह प्रसन हो या तो इस से कोई नहीं पड़ता क्यूँकि बाद है।
gatimadasaanasa manos patna हर बन्दे पिड़ो जा, कम स, कम स किशना पद साब हे करृषणासोनासुनदो बचा कर। वह क्या का बात है,
त
जी है। अरे रे hikश्nतुमइस अध्यान में पढ़ते हो, किस प्रकार मान रोगन का परिचय हो जन भारत के साथ जैसे आप बिजली में सुन्दर जल भारत क सुधारण भर है। वो बहुत ऊँचे कोडी के और क्यूंकि में उन्होंने छोटी सी गल्ती की थी, हे हो गए थे, जिसके कारण उन्हें रूप में जनम ग्रेड और जल्दी उन्होंने फिर जल 1 ब्राहमण कुल में ब्राहमण खादान। उन्होंने ये निश्चित कर दिया था। मैंने अभी फिर से गल्ती नहीं करनी है। ऐसी गलती में कहते हैं वनसविजपशाएकबार जल्दी कर दे। दूसरी बार सावन तो जल भारत में निर्णय कर लिया था। अब मैंने गूगा और हम हैरालयासेववाकरे। उसके पिता ने प्रयास किया था बेटे को ध्यान मे ज्ञान ने, पर जल भारत का व्यवहार सदा। बूठिया सो महाराज रोगन समय के राजा थे, वो जा रहे थे, कपिल शो में, कथा सुनी और भक्त भी थे। और राज सर तमलगदाप्भााउनके चरित्र में। जब वो उनके राजा से सेवक परती में राजा को उठा रहे थे, तो राजा ने कहा कि जल्दी जल्दी मुझे देर हो रहा है। मैं था और दूसरे से उन्होंने देखा जल्द भारत लंबा लंबे। कद का बड़े हार। तो उन्होंने कहा कि राजा को सहयोग राजा की पक्की को उठाने में सहयोग दे। जो जद भारत, अब मैंने भूल भारत और आप देखोगे। जो प्रचार के समय आया सोने से 4 सो जद भारत बड़ी सावधानी से चल रहे थे। क्यों? क्योंकि जो भगवान के भक्त हैं वो किसी को किसी प्रकार का कष्ट देना चाहते हैं। और ये गोल इसकी चर्चा करेंगे। जल्द। तो जज भारत क्योंकि सावधानी से चल रहे थे, उपल की तेजी से जाने की वजह और धीमे जाने लगे और ऊपर नीचे होने लगी। ये बाकी सेवक सुदर भाव के थे। वो तो हाथ पैर रख रहे थे कि वो इस तेजी से जाना जाते थे। पर जब भारत की चिंता थी, किसी यूनिक में कैश नहीं, लोग तो आगे 3 फोटो को देख रहे थे। कोई चीटी तो नहीं है। और चीटियां होती थी। तो पहले चीटियों को चलने देते थे तो फिर खुद चलते थे। ऐसा ऊंचा भाव था। पर ये भाव जो दूसरे सेवक थे, राजा नहीं समझ पाए। आज जैसा सुना कठोर शब्दों में उन्होंने 1 रूप से जल्द भारत का क्या किया। अब पानी का सानी के रूप में कहा तुम शातिर में कौन हूँ। सो भारत
ने,
महान लोगो ने उनको चेकशाइकिया डाटा थाने। ताना दिया जल भरत दें। सहेली। तो ये है भक्त का 1 गुण और प्रभुजितालपुरे में फेरे हैं, जो भक्त है वो सबका मित्र रहता है। sanchi देbहutiदेवभूति ने कहा तुम अधहालनेत्रहो, शिक्षा, दीजिये, स प्रकार मैं सब कष्ट मुक्त हो सके। और भगवान की लेने और वहां के अफसर थे। उन्होंने कहा कि भक्ति साल है जिसके द्वारा आप पाप के पापों के परिणाम से बच सकते है। फेर भाषा ने पूछा भक्तियोग प्राप्त कैसे होता है? उन्होंने कहा भक्तियोग प्राप्त हो जाए। साल, सन, पराग, इलाके में साल में क्या लक्षण होते हैं, यह समझना बहुत आवश्यक है। साल के क्या लक्षण होते है और आज के शो के साथ में प्रॉपर्टी बड़े गिराई के स्थान इस विषय की चर्चा करते हैं। ये जो भक्त है भगवान का वो चाहे डांटे या सारे दोनों तो कपिल भगवान ने आधा के सिर सेक्स् करुण ने कहा सुविधा सर्वा 7 साल बाद साल भूषण आप में से कितने भक्तों? 1 शो को कॉन्ट्रेस्ट किया हुआ? ये शो कंटेस्? तो माता का प्रश्न था। किस प्रकार से यह ज्ञानता दूर होगी। उन्होंने ज्ञान की भीख मांगी। बेटे ने कहा साधु संग द्वारा उड़ागे जाकर। उन्होंने कहा साधु के क्या लक्षण त जो पहला लक्षण है, इस रोग में सिर सैइनशीलहोगतो। ये संदेश भगत सैयंशीलहोनाचाहिए लगभग रोज होते चाहे। कोई भी कासे, किसी न किसी रूप से ये भाव प्रस्तुत हो जाता है। पर हम रोज सुनते हैं। जब भी इसका पालन करने में बची तो भग को सहनशील होना चाहिए। यहाँ आप देखे कि रोगन है। 1 रूप से जल भारत की बस की तुम मुल्क हो। तुम जानती नहीं, तुम कुसको उठा, तुम्हे याम राज द्वारा जायेगा तो वो डाल। तो जल्द भारत चाहते है। वे भी उत्तर दे सकते थे। पर उन्होंने क्या कहा? और सेम वो, शादी से सुने जितने। वरनाचीआएथेतोवो धेरे से चन्द्र। शेखर के घर में तो वहाँ ब्राह्मण के सवाल चल रही थी। उनके मायावादी सन्यासी थे, लगभग 10 हजार उनके गुरु थे। वो बार बार निंदा करते थे। ये किस पड़ाका सन्यासी है, संयास लिया है हवाई संप्रदाय में। वो हमारे साथ बैठ के सो बा। बहू ने इसका मन नहीं माना, जो भाग के भक्त थे। न। तो हम जी हो गए। उनके सारे सा ले मंच पर बैठे थे। मां उन्हें जाकर बैठे, ताकि हम पाउंड होते हैं। बंदर में रेशे और उन्होंने अपना जेवियर इतनी। रोशनी ने ऐसे लगा कि लाखों फूलों रोशनी रोशनी प्रस। और फिर जब सारे नको पकड़कर ऊँचे ऊपर लिखा लेगे, तो महा फैल लिया। तो भग जो है। अत्यंत सैंशीलहोताहै आदर, अपमान सुख दुख, इस हमने हमें भूल न हो। तो भक्त का पहला गुण इस शोक में है कि और माप लोगों क्या करे। अगर आप ही शिक्षा से ही इसे शोक, इसका मुचाला रोज करते हैं को अपना ले। फिर जीवन सब आसन सेंशल। करू ने कहा दया की भावना है तो भौतिक दया है और ध्यान मिल भौतिक। दया का अर्थ है हम सामाजिक सेवा करते हैं, गरीबों का ऑपरेशन करा ले रहे हैं। और ये है बौधिक दया। कई बार आप लोग चंदे के ले जाते हो, लोग रहे है। मंदा बता कर, क्या मिलेगा गरीबों को भोजन। 2, भोजन 2 पर प्रसार के रूप में 2 तो कूल दया दया क्या है, उसे दया। यह है। यह ज्ञान देना देश के द्वारा हम भगवान हो। ै 1 बार प्रावार रिशिकेश लक्ष्य दे रहे थे, प्रावपाजानतेबोलत कई बार बड़े कठोर शब्दों में स 21 अमेरिकन हल थी। उसने कहा कि स्वामी जी शब्द चाहिए। बबल ने कहा कि जब हम हंसी हो, पस के साथ, उसको दबाते पष्ट निकालने के लिए या वो ले। खूब मारते दबाते हैं। पर निकाले तो स्पष्ट बोलना पड़ता है। तो ऐसी दया है। भगवान का संदेश। आगे पूछा, ये है हसी दया। और जो भक्त है, वो जानते हैं कि ये है। इसलिए आप शास्, सबसे उत्तम सेवा के सेवक सूdaसa भगवान के भक्त हैं। वो सब के मित्र है। वो ये नहीं सोचते कि वो ये नहीं सोचते। यह मेरा शत्रु है, यह मेरा मित्र है। उनकी राजनीतिक कार्य मे रुचि नहीं रहती है। भागो भागो में देखते हो। इरा ने इच्छा थी के बेटे को राजनीतिक शिक्षा दी जाए। राजनीति शिक्षा शासन करो तो लोगों को बांटो। ये ये तुम्हारा मित्र है, ये तुम्हारे क्षेत्र है। राज ने कहा मेरा कोई भी शत्रु नहीं है, सभी मेरे मित्र हैं। जो जो वैश्व भक्त हैं, उन सबके प्रति मित्रता का भाव लगता है। और अगर सब के प्रति मित्रता का भाव रखोगे सो वो है। बैठना था शी सुधार कि सब जो है, सभी मे मिटर है, कई बार हमें शिकातें सुननी पड़ती है, कई बार लोग हमारा भी निंदा करने को भगजहैसैयलेताहै। ये नहीं कि वो में आलोचना कर रहा है, तो वो में आलोचना। तो सुर। सब के मेटर बर जी ने कहा साल में 1 ही है, 1 ही दल है, वह किस कर डाल ै इस का जल जो भक्त सहनशील होता है, दयालु होता है, सब को मृत होता है। 17 सन और वो किसी के प्रति मदभेद का भाव नहीं रखता। 17 वर्ष, अंदर और क्यूंकि वो सबको सबके प्रति मृत का भाव रखता है। इसलिए कहा जाता है इसे वो शांत शांत में रहता है। क्या कारण है? कई बार हम सुनते हैं बलों से मन, मेरा मन अशांत है। शाल मन जब बन जाता है, जब हमारे हृदय में संघर्ष हो रहा है, किस विषय पर हावी नियमो का पालन करो, तब बहुत नियमो का पालन करो। अगर आपके मन में 1 मात्र 1 ही भाव वो है, मित्रता का भाव, तो वे आपका मन, हमेशा शांत रहेगा। हम ये सोचते हैं कि 1 तरफ हमें झाल मी नहीं चाहिए, दूसरी तरफ से बौधिक भी वजह, तो फिर धार्मिक कोनसी कठिन हो जाए और आप शांत हो जाओगे। और अगर आपके मन में यही भाव है, सेवा शांत हो गए। ग्रुप कुसमी कहते हैं कि जो भी कीमत भरने पड़े भरो, कृष्ण भक्ति को हाथ से मत। समय शब्दों में कृष्णा शक्ति, कृष्ण भक्ति के द्वारा आपसी शांति प्राप्त कर सकते हो। लोभी कीमत भरने पड़े भर, कृष्ण भक्ति को मत छोडो, उसका अर्थ है कई बार हमें कई चीजों को त्यागना पड़ता है। कृष्ण भक्ति में सफल होने ले, हमें तैयार हो जाना। जैसे आपके शरीर के किसी अंग में कोई चोर डाला तो उस अंग को बचाने के लिए कोई भी कीमत देने तो वो होना चाहिए। हमारा भाव सो मोबाइल, मन शांत रहेगा। 1 मात प्रभाव हो। और जो भक्त है वह सब का 1 प्रसिद है और शास्त्र के आधार पर हर कार्य है। शास्त्र का अर्थ है भगवान की वाणी और भगवान की वाणी में कोई दोष नहीं, वह कमी नहीं। आज के बात में आप देखते हो कि कई बार मैं हिंदू, भाई बहन दे, सासों की निंदा करते प्रशास का संदेश है। तो यह देखा जा रहा है कि maa rognacokirogna me कहा जा रहे थे, मा थोडी जा रहे थे, कपिल आश्रम में उपदे शिक्षा प्राप्त करने ले, उनकी क्षति और ज्ञान प्राप्त किया जाए। और यह थी उनकी छाती पर क्यूंकि राजा थे, जो भी प्रभाव था, उनके तो भग जो है अत्यंत सेंशियलरहै, और ये जल भारत यहां से थे। और जब वो 1 भारत खेती की देखभाल, माँ का ध्यान हो गया था, पिता का ध्यान हो गया था, व सौतेले भाई बने, चर्च तो उन्होंने प्रयास किया था। पिता ने भी ब्रामणी शिक्षा देने के लिए जल्द भारत का ऐसा बर्बाद ही लोगों को उस से वो पागल है या क्या सीखेगा कुछ सीखे तो 1 समय जल भारत खेती की देखभाल कर रहे थे, जब कि डाकुओं ने उन्हें पकड़ लिया। 1 दुर्गा देवी के भक्त और उनकी इच्छा थी बेटा प्राप्त करने का, तो बेटा प्राप्त करने के लिए कई बार जीवित व्यक्ति को भोग लगा देते, जैसे हम लोग फल का भोग लगा दे, जीवित व्यक्ति को भी दुर्गा देवी के चरणों में अर्पण किया जाता। 2 पर उस व्यक्ति को ज्यादा बुद्धिमान न हो पागल जैसे कम बुद्धी की है। फिर डाकू ने 1 ऐसा व्यक्ति ढूंढा था, और को प्यार करने और डाकू वाल मुल्क, तो गुरु ने कहा ढूंढ के लाओ उसको ये पूजा करने, उनके सेवा गयी गुनने के लिए, और वहां उन्हें जद भारत चों की उन्होंने सोचा की ये जद भारत का भी व्यवहार था जैसे वो पागल हो। तो उन्होंने सोचा यह वो व्यक्ति जो भी भाग गया जो जद भारत को पकड़कर जबर्दस्ती ले आये और जलभरने कुछ नहीं बोला मन के द्वारा भगवान का जन करे। तो डाकू जल भारत को ले आए। उन्होंने सोचा कि यही है वो व्यक्ति जो कि भाग या था, हमारे सुपर विजन से और उसको अर्बन करने लगे थे। जब दुरघधीभीमूर्ती में थी, भार आ गए और उसी चाकू से जिससे जार काटने वाले थे, उन्होंने सारे डाकू को जल भारत की रक्षा हो तो जल भारत का भगवान की कृपा में अत्यंत भाव था। जब डाकू ने काटने को आये तो भी उन्होंने कुछ नहीं बोला। यह रोग सो जनभारत अत्यंत सहनशील थे। अब ये नहीं कह रहे कोई अगर आपको मारने आया को ज्यादा गाली, पर अगर कोई आयेगा हम लोग जद भारत की स्थिति पर नहीं है भारत बहुत ऊँची बोली की ऊँची स्थिति में, जब डाकू ने कोशिश की उन्हें काटने के लिए, पर मन द्वारा भगवान के चलना करते है बड़ा के साथ सो जद भारत को जब कहा गया था कि तो मुल्क जादे कौन है, सब कुछ से तो भक्त से होता है और इस क्षेत्र में बापू है शी साथ, पीसे स्लोक पर अगर हम अध्यात्मिक जीवन में सफलता चाहते हैं तो हमें सैंशीलहोनाचाहिए ऑल ब्रेकर उदाहरण दिया जा रहा है। तो साथ में प्रतिष्ठा का भाव हमें क्या आना चाहिए। सनासनगोस्वामी ने हमे अनेक दिए है। दोनों भाई मुसलमान राजा के राज्य का शासन कर रहे थे। दोनों की रुचि नहीं थी, जबरदस्ती उन्हें जोड़ा गया था, जब दोनों भाइयों ने यागी नौकरी मिले 7 ने तो 3 महत्वपूर्ण विश्व का आदेश दिया। पहला, बदलाव में जाकर उन स्थानों को खोजो, यहां की पर, भगवान अपनी लीला पर सोती वा व दूसरा मंजू का निर्माण। उदाहरण के लिए मिला, हो, जयपुर, प्रसिद्ध मंदिर, देखे, इन सब का निर्माण हुआ था। किस के निर्देशन में वो स्वामियों के निर्देश तीसरा आदेश भक्ति सम्बंधित ग्रंथ की रचना करेंगे। महा प्रबल ने स्वयं भाय प्रयाग में शिक्षा दी थी और भक्ति का साथ दिया था। और महा प्रवृ भक्ति सम्बंधित ग्रंथ की रचना कर, जो कि उन्होंने किया। सहरी बरती, विदा, सलासोनेकहतेहै और संघ छोड़ना इतना मुश्किल नहीं है। और धन की संघ छोड़ना भी इतना कठिन नहीं है। और प्रतिष्ठा, ये भाव को छोड़ना बहुत मुशकिल है। कई बार आप देखते हो, हम रद त्यागते हैं, संग त्याग दे। और प्रतिष्टा हमने क्या चली चाहिए। और अध्यात्मिक जीवन में भी आप देख रहे हो, तो सरादगोसाले कहते हैं ये जो प्रतिश्ता का भाव है, उसकी तुलना वो करते हैं 1 पशु के मल के साथ, कि जब तक सुराद नुसार कर जाए, यह प्रतिशत का भाव रहेगा। प्रतिश्ता के क्षेत्र में हम इतने उत्तम भक्त हैं, फाइल योग्यता है, यह है जब तक कि प्रेम प्राप्त होगा। तो जब हम विनम्र तक भाव की चर्चा करते हैं, उसका। यह नहीं, परेरा मीटिंग शब्दों से बोलो। मेरे बोलना भी आवश्यक है। ये ही केवल मीठे शब्दों से बोला। उसका अर्थ है कि हम शिक्षा देने को तैयार है। और हमारा जो व्यवहार है, प्रतिशत का जो भाव है, वो भी हम तैयार हैं। श्रांत कहते हैं ये प्रतिश्ता के भाव के कारण अनेक नर्स पैदा होते हैं। सो ये भाव के हम बिल्कुल निगम में हैं। वो भाव है। कि कहते हैं अगर, तुम कहते हैं मेरा नाम ही मत लो, मेरा ना भी लगे। तो क्या होगा? हमारे सारे गुल। तो हम भक्तों को शासन के अध्ययन के साथ यह भी समझना चाहिए कियोकी संग क्या हो? ब्रह्मचारी और धन की भी सुन त्याग में इतना कठिन है। पर ये जो प्रतिष्ठा का भाव हिलने में रहता है, वो भाव निकर रहेगा। जब तक हरिराम का केस नही आएगा साल। सोना कहते हैं जब तक आप प्रतिष्ठा के भाव को नहीं त्याग हो, हर नाम का कुछ जार पूरा, तो हमे इस प्रकार का भाव रख है, कम है। अब जल भारत को देखा में कितना डाटा रहा है, कितनी बेसी हो री है, यह बहुत आवश्यक है। तू जो भगवान के भक्त हैं, सुख में, दुख में, धोने परिस्थिति में, संभावना के और प्रॉपर जी तारपुर में कह रहे हैं, वहां के जो भक्त हैं, कई बार भक्तों को श्राप भी देते हैं, कई बार भक्तों के सारे, दोनों स्थितियों में हमें विचलित हुए बिना ना पाबुजी चर्चा कर रहे हैं। धसुस्कनकीएकलीला पर कौन सी लीला है। बी के मनेगी देवताओं की जान तो वो रेल के पुल नंगी स्रियों के साथ खेल रहे थे। जब देखे साधारण सभा में भी कोई धनी हो तो इतनी आसानी से भगवान वेश्य नगर न हो, बहुत जालिम हो तो भी वह भगवान वेश्रनगे इतने सारे को नहीं होती। सो मनाल बुंदी ने देखा की खुर के बेटे शराब के नशे में इतने बेशरम हो गये है की संघ सामने खड़ा है, और उन पे गे शरीर कभी नहीं था। सो मरारमहनेकेआसूचा मुझे ने श्राप दिया, धाधगुलीकेश्राब से उबल गए और प्रपेलकारडदमराज के आंगन मे साधारण शेयर में ले सुना तो उन्हें श्राप क्यों दिया क्योंकि वो चाहते थे वो सुधर जाए और श्राप के साथ 1 वर भी दिया, वो चाहते थे वो सुधर जाए तो वह भक्ति के मार्ग में अगर आपको। सुधर सुधरने के लिए कहा जा तो हमें बड़ी खुशी से स्वीकार करना चाहिए। बाकी अगर कोई आपकी तारीफ कर रहा है तो उसे दूर भागो की अगर वो तारीफ कर रहा है। तो आपका दुःख सुन हमारी क्या इच्छा है। और उनके साथ ही रेंज का तो तारीफ करे उसके संघ से दूर रहो। जरूर को सुना मुनी ने सोचा कि उनको शाप दिया जाए और साथ में हर साल जब कोई उपदेश भी देता है, वो भलाई बना। सुधा ने। मुनि ने श्राप दिया, पेड़ बन जाओ और पेड़ बनोगाधनबाकेआंगर में। साथ ही उनको 1 बार भी लिया। वर्ल्ड क्या था, देखता हूँ कि सौ वर्षों के पश्चात उन्हें क्या प्राप्त होगा, भगवान का दर्शन प्राप्त हो। अगर आपको ये वर्ल्ड शाप दिया जाए। आप ही रिया मंदिर के कम्पाउंड प्रेम मे वर भी हो, क्या भगवान का दर्शन का, तो कुंवर के बेटों ने ादमुनीकेश्राप को स्वीकार किया। और भगवान अपने भक्तों के आदेश का, अपने भक्तों के वादे का पूरा आदर से, जैसे कि हराने का चीकू। ब्रह्मा ने लगभग हर प्रकार का वर्ड दे दिया था। मुझे कभी मुझे मृत के सामने नहीं झुकना पड़ता। ब्रह्मा ने कहा, मुझे भी झुकना पड़ता, ये वर्ड में कैसे सो हराने का स्कूल है, इंडरेक्टरीकेसे वर्ग प्राप्त करे और सो जा की। भगवान ने। जब हराने का स्कूल का बज गया, सारे वरों का पालन करते हुए। और भगवान ने कहा वादे हसते हुए लगेंगे, self to tor brahma, dont give, such endectionsanfuture you made my job difitutसोयाभगवan ने देखा, me muni ने इन 2 को भर दिया था, मेरा पाप हो रा। भगवान ने नाजमुन के वचन का पालन किया, 2 पेड़ों को उखाड़ दिया। जिनसे निकले और ग्रो। बेटो ने स्वीकार किया कि धाजजबुनीकी कृपा से आज उन्हें भगवान का दर्शन प्राप्त हुआ है। और उन्होंने बडी सुंदर स्तुति में कहा, आप से हमारे श्री के सारे अंक जुड़े रहे। आपकी सेवा में। तो अज्ञानता में हम अनेक प्रकार के कर कार्य करते हैं। जब गुरु शादी के उस ज्ञान के द्वारा हमें इन कम् से बचना है, इसे हम प्राथना करता गया। वह में गाती वह जन्म हुआ था। अज्ञानता में। अब हमे पूरुसआदुनीकृपा से ज्ञान प्राप्त हुआ है। इसके द्वारा ज्ञान की हो जाती है। कृष्ण सूर्य, सम, माया या देगा। यहां किशन साइन या जहाँ कृष्णा होगा, वह क्या नहीं होगा। माय जिस प्रकार जार की रोशनी है, वहां अंधेरा पर नहीं होता। तो भक्त जो है, उसको अत्यंत सेम शील होना चाहिए। और प्रपाती जा संस्थान की स्थापना करने का प्रयास करे। अनेक कठिन स्थितियों का सामना करना पड़ा और सेसिल। और इस कारण अंत में सब हो। तो यहां हम देख रहे हैं कि जज भारत वो बर्बाद कर रहे थे, जैसे घोंगे और भरे थे। पर जब उन्होंने शुरू में तो कुछ नहीं कहा, पर जब उन्होंने देखा, क्या बहुगना अपराध कर रहा है साधारण। और जैसे लोक में कहा गया, भगवान उनके हृदय में निवास करे थे। और वो 24 घंटे जुए हुए थे। किसमें मार में हा कहा जाता है, गूंगे भरे थे, वो गूंगे और बैठे थे बहुत ही चर्चा के लिए। पर जब प्रचार का समय आया तो वो शेयर बन गए। जब उन्होंने देखा कि भोगना अपराध कर रहा है, तो फिर भारत में देश बना ने सुना क्या संदेश दिया जा रहा है? रहुगिनाककी, उनका भी धार्मिक जीवन हाल में ज्ञान भी था। वो समझे, ये व्यक्ति गुरगरभैरानहीं, यह व्यक्ति हज ज्ञानी है। और जैसे उनका उपदेश सुना और समझ गए कि ये आत्मज्ञानी व्यक्ति है। तुरंत पाकी जो नीचे उठे। उन्होंने कहा, मुझे इंदर की ठंड बोल की चिंता नहीं है। और मुझे चिंता है कि फैसला अपराध करेगा। वो उनके सर तो जल्द भर करो। छेत्र में हम क्या देखते हैं। साधारण समाज के साथ उनका व्यवहार था। गूंगे और बहरे जैसे लोग उनको ताना मारते थे, छेड़ते थे, वो सैर लेते थे। पर जब उन्होंने देखा, अब प्रचार का अच्छा मौसम है, तो बोले शेर जैसे बोलने लगे। और जब उन्होंने देश लिया, शेर जैसे बार नासा बन गए। ये गूंगा व्यक्ति नहीं है, यह भरा नहीं है। यह है आत्म ज्ञानी। वक्त। उन्होंने कहा कि अपराध से मैंने बचना है। और हालांकि राज के उन्होंने पहले की पर सबके लिए माफी मांगे और उन्होंने कहा, उनके तो ये होना चाहिए, हमारा भाव। साधारण स्थिति में वहाँ भाव होना चाहिए। गोलभ्यरेजैसे उसका अर्थ क्या, उसका अर्थ यह है कि प्रजल्प से हमे बचना है। रूपा गसवानी। हम गोस्वामी की चर्चा कर रहे थे। रूप गोस्वामी ने भी अनेक ग्रंथ दिए हैं। और वैस्ट की इच्छा रहती है। उनके गधों को पढ़ा जाए। हम जो गोडिया वैसा है, हमें रूपनोंकाभीकहा जाता है। क्यूँ? जो कि रूपक स्वामी के सिद्धांत के आधार पर जोते हैं, जो शिक्षा हमारे आचार्यो ने दिया है। ये निर्बल है। रूपक के स्वामी के। 1 भजन। कहते हैं रूप कब, वो शुभ समय आएगा। जब मुझे रूपा के स्वामी गंगा अध्ययन करने का मौका मिला, तो रुभगगुस्वामीने हमें नेक गरन दिए हैं। प्राव पानी ने खास करके 2 ग्रंथों का अनुवाद किया है। अंग्रेज वा में सिंधु रुभगगस्सामेहै। इस केवल गया छोटी पुरे हर का बड़ा क्या है? हम जल पकड़ेंगे तो उसके द्वारा क्या होगा? भक्ति का भी उगेगा नहीं। पर जलपा के द्वारा क्या क्या परिणाम होता है? भक्त? बेमार। जलपा के द्वारा। भक्ति का बगीचा खराब हो जाता है। तो प्रिजलपासेहमे बढ़ा। इसलिए भगी जीप की तपस्या की चर्चा करते हैं। वो जी तपस्या है। क्या मेरे ग्रंथों का उछाल पर से बचो। तो प्रजा हमारा शत्रु है। अध्यातिक प्र जालपा से हमें प्रजलबासे बचोगे कैसे प्रजा। पहले केवल जब बच पाओगे, जब हम कृष्ण कथा रूची बढ़ाएंगे, कृष्ण रुचि बढ़ाने का अर्थ है नाम के सासों का वर्णन करना। दूसरे शब्दों में पानी का उपयोग करना, भगवान के गुणगान में, फिर आप भक्ति में आगे बढ़ सके। तो प्रचार पा से हमें बचना चाहिए। तो जल भारत। जब उन्होंने प्रचार किया तो शेर जैसे प्रचार किए। 1 समय 1 भाग में प्रॉपर अमेरिका में हो। कmीबीहमबलएस्यूट बुक द सेम चल हम विनम्र भाव कैसे रहते है? और ग्रंथों का वेतन भी कैसे करे? क्योंकि जब आप ग्रंथों को बांटने जाते हो, तुम जो उत्साहित होकर प्रचार करते है, वो ज्यादा समुंदर प्राप्त कर लेने। पर यह प्रश्न था। 1 तरफ से, तो हमारा सिद्धांत है आप बड़े विलंब रहो दूसरी तरफ से पापा कह रहे हैं। तो मुझे संतुष करना चाहो करो। तो ये 21 रुप से कोनडिट शब्द है। तो शब तो प्रचार करते हो तो शेर जैसे प्रचार करो। और जब भक्तों से व्यवहार करते हो तो मेम जैसा हो जाते। पर यह नहीं घर में शेर बन जाओ और घर में बन जाए। अच्छा अब क्या देखते हो घर में हम शेर बन जाते हैं। पर जब कुछ समय आता है, अब मेम जैसे बन जाते तो जल्द भारत, वैसे तो मेम जैसे थे। डाकू ने उठा लिया, कुछ नहीं बोला उन्होंने, डाकू ने काटने के चाकू ऊपर उठा, जब भी कुछ नहीं बोला और शुरू शुरू में उनके बेसीहुईथी उनको उठाने से बोला और करकर भाषा में बोला लोग राजा थे, पर में तामसिक और राजगंगा भी प्रभाव था। तो उन्होंने से लिया। फिर जब उन्होंने देखा अब इनका उद्धार होना चाहिए ज्यादा अपराध कर रहे हैं या प्रचार किया, प्रचार किया तो हमारा भी इस प्रकार का भाव बहुत अच्छा है। वैसे आप रहो गोली बन जाते मतलब बहुत ही चर्चा के लिए, पर जब प्रचार का मौका मिले, सिद्धार्थ का, उपदेश का मौका मिला, शेर जैसे से ना। तो आज के इन 2 लोगों में महाराज बना क्रुधित है वो वो डट रहे हैं जज भारत को, क्योंकि जज भारत के कारण उनकी पूरी पलकी धीमे जारी है। जेमिनी जारी डामाडोल राजा ने कहा, यह ठीक नहीं है, जो दूसरे सेवक थे, उन्होंने कहा, हम इसका कारण नहीं है। परकीशोजारहीक्यूकि नए व्यक्ति को जोड़ा है वो वो अस्त चल रहा है और जल पालत, ऊंचे कोडी के ब्राह्मण थे। तो हालांकि उन्हें डांटा जाता था वो अपने सेना से जो ब्राहमण है वो सबका है। तो जद भारत ने हमें उपदेश दिया है। इस प्रकार हमें सेंस होना चाहिए। हम जब भक्ति के रास्ते में आते हैं, ये नहीं कि हर कार्य चलता है हमारी इच्छा के, हमें सेंस होना पड़ता है, खासकर के भक्तों के और प्रचार के दौरान अपराध होता है, कठिन स्थितियों में जाना पड़ता है। आम लोग जैसे हरतौर करते हैं, विदेशों में अत्यंत ठंड होती है। 20, 20 इंच इस और उस स्थिति में भक्त आज भी जाते हैं। किताबों को मार लेगा ये छोटी तब मैं बहुत बड़ी तो 1 शक्ति आती है व जद भारत जैसे हमारा भाव होना। जब हमें प्रचार का मौका मिले में बड़े उत्साह से प्रचार करना चाहे तो जल भारत रोगनाकी बेसी को सहे और बड़ा रोगन बोले स्वीकार किया। मैंने अपराध किया है और मैं किसी हालत में वैसा अपराध नहीं करना चाहता। हूँ को पता था वैसा अपराध का भयंकर प्रिय धाम होता है। कई बार हम समझ नहीं पाते, अपराध कर रहे है। और चेतना अपराधों पर बहुत बल दिया। अनेक घटनाएं हैं जिनमें आप देखते हो कि भावगोंने अपराधों से बच निकलेगा। और 1 उदाहरण उनकी माता गा है। वैसे महा पाप बड़े दयालु थे और सब को पार किया और उनके भक्त कहते थे। अब सब पर दया कर हो अपनी माँ पर दया भगवान कहते थे बड़ी माँ ने अपराध किया है ा जब तक वो अपराध का माफी नहीं मांगे उनको दया प्राप्त होगी। जब भक्त सच्ची माता के बच जाते थे क्या दे दे कि आप ने अपराध किया है नहीं जाते थे और कहते थे की सच्ची वादा ने आपके चरणों में अपराध किया था। अलविदा कहते थे नहीं अपराध कैसे कर सकती है ने 1 दिन जब अलविदा करते थे सच्चिादा चरणों की धूल ली फिर से भगवान प्रसन्न है। तो ऐसे अनेक उदाहरण हैं जिनमें आप ऑपरेशन अपराध का पर तो हमारा भाव प्रयास के अबरेशनअपराधसे बचे और अगर ऑपरेशन अपराध हो भी जाए। वे हमे उसके लिए प्रणाम करके माफी मांगना चाहिए और दूसरे भक्त खुशी से बात करेंगे वैसे अपराध से हमें बचना चाहिए। तो ये जल भारत का व्यवहार, उनके चरित्र और उनकी शिक्षा का हमें लाभ उठाना चाहिए। और आज कि लोगों में ये शिक्षक ये संदेश मिल रहा है की भगत जो है वो सबका मित्र है सुविधा सा नहीं सबके प्रति भाव और अगर आप प्रयास करोगे तो अवश्य ही सफलता प्राप्त होगी। हम सब को प्रयास करना चाहिए और भगवत ध्यान से सुना े बहुत बुरा दिया है। 14 तारीख पंद्रह तारीख 1 हफ्ते के लिए आए थे 233 सबको जा न मैं कल पढ़ा था मैं दुनिया की वनफिफ्सअबालीलॉकडाउन में है, आज पूरी दुनिया में टोटल पॉपुलेशन वन इसमें है। पर लॉक डाउन तो भक्तों का था ये भाव रहता है कि जो देश के नियम है उनका पालन करे। हमें कोई इस से देखना चाहिए कि भगवान हमें और समय दे रहे हैं छनमकितनमकरनेकेलिए और ग्रंतों को पढ़ो और जब मना कर सकते हो। और के दिन ने 1 समय कहा भक्तों को मैं केवल लखपति के घर में खाऊँगा और किसी घर में बचा नहीं ह। हम आप लोगों के बड़े क्रोध हो गए दुखी हुए हमारे घर ले आएंगे जाएंगे तो उदास होंगे आप अभी हमारे घर नहीं आओगे। आप ने कहा कि अब लगपदीकेघरमेंखाओगे लगपतीसे मतलब है लाख बार जाप कर रे जब मन ज्यादा हो सकता है वह कम नहीं तो आप सब अभी आपको जोक्स की छुट्टी और मिल गई है वैसे तो नाम की इजाजत होती तो आई नाम कर से ईनाम मंदर में कर ते है और यही निवेदन है कि समय का दुरुपयोग मत करना ये भी ज्यादा टाइम मिल गया ज्यादा विश्राम करेंगे, विश्राम करो जिस ये आवश्यक है बाकी समय लो। और सब लोग कोई सी वाली है। आप सारा दिन में जॉब कर सकते हो आप का दिन में शासन पढ़ सके यह ऐसे ग्रंथ थोड़ी है। 1 बार करो तो रूचि नहीं होगी जितना पढ़ोगे व रूचि बढ़ेगी जितना हाई नाम का उचारण करोगे और दी रूची बढ़ेगी भरत के लिए नो टाइम तो उसका लाभ उठाना। और हम ने ने कभी सोचा भी न था। 1 दिन आएगा कि बंदर बंद हो जायेंगे। हालांकि बंदर थोड़े से मिले बंद हुए थे अभी बंदर भी बंद रहेंगे। 4 कल कल युग मिल रहा है पर भगवान ने हमें पूरी सिर मिला ली है। जे सन के। सनम में सारा समय लगा ना जाए और जो भी समाप्त होगा उसके बाद मन की सेवा शुरू कर देंगे। तो make up the time loss जैसे कभी आप ट्रेन में जाते हो, ट्रेन 4 घंटे की लेट चल रही है or ill will make कई बार ले चलते हैं fair will रuचiसनफितनमे जुड़े उसके द्वारा रुचि भी बोले और जब का लॉक डाउन न आप से जायेगा क्या विचार है। भगवान ने भक्तों को सोनम कितना मुमकिन है, समय नहीं मिल। ता री शन बढ़ाने के लिए समय मिल गया और पूरा पूरी सुविधा भी है। आयक हर kृशnहकरिशणाहारे हारे हारे, हम हर हार्।
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