भक्त सेवा परम सिद्धि | SB 5.12.13 | 14.06.2020 | ISKCON Delhi | Srila Gopal Krishna Goswami Maharaja

इस ISKCON दिल्ली के प्रवचन में, श्रीलंका गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराजा भक्त सेवा के कई आयामों पर प्रकाश डालते हैं। वे कहते हैं कि भागवत या गीता का एक बार सुनना पर्याप्त नहीं; निरन्तर, बार‑बार सुनना हृदय को आध्यात्मिक ज्ञान में डुबोता है। शुद्ध भक्तों की संगत, सच्चे संतों की पहचान और उनके प्रति सेवा का महत्व बताया गया। तपस्या को केवल बाहरी नियमों तक सीमित न रख कर, आंतरिक ईमानदारी के साथ अभ्यास करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। दैनिक भगवद‑गीता पाठ, कृष्ण कथा और रिषभदेव जैसे दिव्य व्यक्तियों के उदाहरणों से भक्ति को गहरा करने के उपाय प्रस्तुत किए गये। प्रमुख रूप से 24‑घंटे सेवा की अवधारणा पर चर्चा हुई—प्रातः 5 बजे से रात 10 बजे तक निरन्तर पूजा, प्रचार, प्रसाद वितरण और अन्य कार्यों में लगे रहना, यहाँ तक कि नहाना, भोजन, विश्राम को भी सेवा के रूप में गिना जाता है। इस दौरान समय के दुरुपयोग से बचने, हर क्षण को भक्ति में लगाने की चेतावनी दी गई। महामारी के दौरान उत्पन्न चुनौतियों—कोरोना संक्रमण, भक्तों का रोग, लॉकडाउन—को कैसे संभालें, इस पर व्यावहारिक उपाय बताए गये: स्वास्थ्य सुरक्षा, रोगियों की देखभाल, सामुदायिक सहयोग, और सेवा में निरन्तरता बनाए रखने के लिए लचीलापन। अंत में, कठिनाइयों के बावजूद सेवा को न छोड़ने, सभी कार्यों को भक्ति के रूप में देख कर निरन्तर प्रयास करने की प्रेरणा दी गई।
Chapters
ओम भरोसे वासुदेव और मो भर से वासुदेव से वासुदेव, मेरे ख्याल से आप सबको 1 नेम टैक भी पहनना, पड़ेगा आप को पहचानना तो बहुत मुश्किल हो गया। जो भागवत के आज का तेरा बरवे दिखाई का तेरा शो करेंगे ला कर गया। बच्चा कि
सी राा इसलिए ही है े भी है। o o ल हम ना नमस्कार इंसान
बिला
शब्द रिस बदर्दी है
जिसे
सरकार से
अत्यंत ऐसी
ऐसी या यहाँ पर कौन है के समाने लीजिये सारी चर्चा जरा ने कहा भगवान के हारा लोग ऐसे हो जा हा है सुने ऐसा वही माँ देवी जिला मा
पर्पल को ध्यान से सुनिए पापा जी आप भक्तो को 1 शिक्षा दे रहे है सुन
अपने नारों को सांस्थानिक करने के लिए रद्द किया है में बर्बाद न ही मनुष्य को नहीं समाज मनुष्य को इस प्रकार से समय में नहीं कमाना चाहिए नहीं इसलिए लाया गया जिससे लोगों को अनुमान इस संस्था के विधार्थी
आगे
हम किस की सुने कभी ऐसी।
home gansajananjanashlka श्री चेतन्य साबित न भूत ले suymrupagdamadavi za n de ham shigणositaptkm gun sa sa shrीरopमसगयतम सागर गुना तनवितमतम सजेवाम सदवेतmसबधuतmpriजna sitam kishna chetna devam shri raधakrsnaallita श्री का तम श् हे कृष्णा करुणा सिंधु जीरा बंदू जगtteसpकचनगोनगे राधे बिन्दा mनेshwरjcptvsa कृपा सिंधु भbcapitanapane so nevionamolmaha jai shri krishna chatna mukusmi तो शो का उच्चारन जद भारत कर रहे हैं और आप पिछले कई अध्यायों से जद भारत की कथा सुनते है। भारत के भगवान कृष्ण देव के बेटे और पृथ्वी पर शासन चला था और यही भारत में जन्म लिया था। जल्द भारत के रूप में जल्द भारत को शिक्षा दे रहे हैं।
और
ये तीसरा अध्याय है। क्यूँकि जब भारत द्वारा गुना शिक्षा गरम है। महराज रोगुन के पास भी ध्यान ज्ञान था। यह नहीं कि ध्यान से और लोग पलक में बैठ कर कहाँ जा रहे थे? क्या सुनने के लिए कपिल देव जी की शिक्षा, कपिल देव की शिक्षा सुनने जा रहे थे। उन में इतना उत्साह था। जब वो देखा उन्होंने जो पलकी के भागते पलके उठा रहे हैं, तेजी से नहीं चला रहे। उन्होंने कहा डाटा उन्हें क्या कर रहे हो? मुझे देर हो रही है, जल्दी करो। और उन्होंने इन सेवकों को डांटा। तो फिर जब उन्होंने जल भारत द्वारा उपदेश सुना तो वो समझ गए। ये भारत है, ये गुंग और बहरा व्यक्ति नहीं है और ज्ञान व्यक्ति नहीं है, मुर्ख नहीं है। जैसे वो व्यवहार कर रहा है। वो तो आत्मज्ञानी व्यक्ति है, अध्यात्म ज्ञान था। तुरंत वो पल की सी नीचे उठे और उन्होंने उनको प्रणाम किया और कहा मुझे सबसे बड़ा भय है किस का, यह से वैशणअपराधहैमने इंद्रा के बोर्ड का है, मैं वैशणअपराध नहीं करना चाहता। और वो फिर बस बना जल्द भारत के शरणगत हो गए। तो पिछले अध्याय में जल्द भारत शिक्षा दी है। और इस अध्याय के आलम में जल्द भारत। महाराज ने कहा मैंने सुन तो लिया है यो संदेश हो पर मुझे ठीक समझ नहीं आया। तो फिर से सरल भाषा में वो देश मुझे दे दे। तो इससे हमें क्या शिक्षा मिलती है। इससे हमें यह शिक्षा मिलती है कि 1 बार सुनने से ही ये संदेश आपके हृदय में नहीं बैठे है। हमें बार बार सुनने की आवश्यकता है। बन। आज रोग, ना वो स्पष्ट कह रहे हैं। मुझे समझ नहीं आया। तो फिर से समझाओ और गहराई के साथ और सरल भाषा में। तो हम अगर सोचे। 1 बार गीता पढ़ लिया, 1 बार भागवत पढ़ लिए और साले हम स्मरण कर लेंगे, यह गलत है। हमें नियमित रूप से रोज भागवत पढ़ना चाहिए, रोज गीता पढ़नी चाहिए। भागवत के विषय में कहा गया है भागवत से भागवत, भक्ति, भागती रोज, ध्यान से अगर भागवत। हम सुनेंगे तो यह भक्ति की भावना हृदय में स्थापित हो और गीता को भी मैं। रोज पढना चाहता प्रापा जी, डी गीता माईसेल्फ, एवरी दे, सो पापा जी। तो जद भारत से मुझे समझ तो पूरा नहीं आया, वह आप और गहराई से संदेश लीजियेगा। तो इस अध्याय में जब जल भारत और गहराई के साथ यह उद्देश तो पिछले श्लोक में आज हमने तेरवा श्लोक पढ़ा। बारवे श्लोक में भारत ने कहा कि आपको परमहंस के शरणगत होना चाहिए। अगर हमने अगर हमें आध्यात्मिक ज्ञान चाहिए तो जो आत्मज्ञानी व्यक्ति हैं, उनके चैनल कमलों में सेवा करनी चाह। ये भाव कि शुद्ध भक्तों की सेवा करनी चाहिए, उत्तम भक्तों की सेवा करनी चाहिए और वन संतों के चरण कमलों की सेवा करनी चाहिए। ये भाव अनेक स्थान में आ चूका है। जिसे आप ये समझ सकते हो। यह बहुत महत्वपूर्ण है। 10 इस वेरी इम्पॉर्टेंट भगवा तुमने 5 में भगवान रिश्वदेवजीकेविषय में पढ़ते हो और रिशव सबसे प्रसिद्ध और रिशवदेव भगवान के अफसर थे। उनके पिता का नाम था महाराज नाभि, वादा नाम था मेरु देवी। दोनों की इच्छा थी कि 1 पुत्र प्राप्त हो। भगवान के जैसा भगवान उनकी तपस्या से बड़े प्रसन्न थे। अगर हम भगवान को प्रसन्न करना चाहते हैं तो भौतिक धन की आवश्यकता नहीं, बहुत तालीम की आवश्यकता नहीं, बौदिक गुनो की आवश्यकता नहीं, किस विषय की आवश्यकता है। जीवन सेवा और वन में क्या कहते हैं तुम पता जल्द प्रेम के साथ अगर अर्पण करोगे। प्रेम के साथ गर है। तो यहाँ तुम भगवान रिषदेवनेपांचध्ा में पहले हम देह। ये जो मनुष्य देव प्राप्त हुआ है, इसे पशु के समान उपयोग मत करो। तो किसलिए करो? सपोर्ट देवी तपस्या उठाने के लिए, देवम डीवीएम भगवान की खुशी के लिए। वैसे। तो अधिक जीवन 1 प्रकार का तपस्या का जीवन है। आज जिस भय के वात में सब जी रहे हैं, यह तपस्या नहीं है, बंदर खुले हैं, लोग अंदर जाने से डर रहे हैं। तो तो ये भी 1 प्रकार की तपस्या है। जहाँ के चारो तरफ भय है, कुछ वायरस आ जाएगा, ये हो जायेगा, उसके साथ जीवन त्यागी पर है। तो ये भी 1 प्रकार का 1 पूरा की। परेश देव जी कह रहे हैं इस प्रकार की तपस्या के सपूत देविय। भगवान की खुशी के लिए भगवान गीता में कहते हैं जन्म कर्म च मे दिव्यं मेरा होना। दोनो ही देवम ब्रहमाजी कहते है तपस्या व परम ज्योति भागता मधोक पर भगवान जो हैं उनके नामों में 1 नाम है, धोकशजाऔधोकशजाकारत है जो की कठिनाई से प्राप्त होता और तपस्या से भगवान वजन कर सकते हो। तो रिशवदेव भगवान भी ये उपदेश दिया की तपस्या का पालन करो, भागे का बहुत सेवा, संतो की सेवा करो, उत्तम कोटी के संतो की सेवा करो। तो ये आज के शोक में प। जद भारत हमें ये सिखा रहे हैं, शिक्षा दे रहे हैं कि जो संत थे, उनके क्या गुण होते, उनमें क्या गुण होने चाहिए? और उन्हें आप कैसे पहचानते हो, संध को आप पहचानते हो, बच्चों के द्वारा, नहीं। तो वाणी के द्वारा बापू और वाणी वा पूर। जब किसी की और वानी उनका ऑपरेट दोनों ही महत्वपूर्ण है, तो हम 5 वे पांचवे दहाई में दे। भगवान कह रहे हैं, भरत सेवा की सेवा करो। तो यही विचार फिर से यहाँ प्रकट हो रहा है। जैसे हम कई बार कह चुके हैं, भागवत में देखोगे, वही महत्वपूर्ण विषय बार बार बताया जा रहा है, इस भाव के साथ कि ये हमारे हृदय में बैठ जाए। तो यहाँ के जल्द भारत क्या करे? पहले तो वो कह चुके हैं पिछले शोक में कि जो असली संस है, वो जो असली साधु है, वो असली सरंदोकीशरण लेते हैं। तो इन भक्तों का लक्षण क्या है? इन लक्षण, इन भक्तों का लक्षण यह है। ये शुल् भक्त हैं। वो केवल भगवान की सेवा में ही जोड़ना चाहते हैं। और यहाँ कहा गया है इन शुल्क भक्तों की संगत में 1 ही भौतिक विश्व की चर्चा नहीं होती। इंस्टीट्यू भक्तों की संगत में क्या होता है? भगवान के नाम, भगवान के गुण, भगवान की लीलाओं का। दूसरे शब्दों में कृष्ण कथा की चर्चा होती है। शास्त्र में जाता सीखते हो और कृष्ण कथा सीखते हो। जो शुद्ध भक्त हैं, उनकी ये इच्छा रहती है की हमेशा कृष्ण कथा करते रहे। कृष्ण कथा का ऐसा विषय है कि जितना भी आप सुनोगे उतना ही कम है। उदाहरण के लिए में जब स्वामी पहुँचे स्वामी शिक्षा दे रहे थे परेश को और दूसरे में हा। हम पूरे हैं मैंने पूरा वर्त रखा हुआ है, मुझे भी मुझे भूख नहीं लग रही। भगवान के अमृत वाणी को और भी सुनाई। 1 हफ्ते से परे अमित वाणी सुनते आ रहे है। और उन्हों ने 1 बूंद पानी यहाँ कुछ खाने के लिए स्वीकार किया था, जब भी उन्हें किसी प्रकार की भूख नहीं लगी, जब वो पूरे रूप से संतुष्ट थे, और और सुनाओ, और सुनाओ और सुनाओ, वही स्थिति होती। कहते हैं अभी बहोत हो गया है प्रसाद और सुनाओ। क्यूँकी। यह है भगवान की अमित और कोई कभी सकता नहीं। से कई बार बोली वाले व्यक्ति आश्चर्य होते हैं। कहते हैं तुम लोग वही मत गा रोज करते हो। सुबह से शाम तक। लगता है तुम्हारे दिमाग को किसी ने खा लिया है, पागल हो गये हो। और हम दही थकते क्यूँकि। भगवान ने अपने दामों में पूरी शक्ति राल। तो भगवान के जो शुद्ध भक्त हैं, वो जो भक्तों के संग होते हैं, उनकी 11 रुचि होती है। वो क्या है? कृष्ण कथा? कृष्ण कथा को कैसे अनुभव करते हैं? कृष्ण कथा के कृष्ण कथा में वन के नाम गुण, लीला, रूप चर्चा की जाती है। तो जज भारत कह रहे है वो भगवान के शुद्ध भक्त हैं। जिनका वर्णन किया है, उनके मन में सदा 1 ही भाव रहता है। वो हैं कृष्ण। कृष्ण कथा नहीं करोगे आप का, मन
का।
अब वानी द्वारा क्या निकलेगा क्या ्रजलपापरजपारपाक है। जिसका कृष्ण से कोई सम्बन्ध नहीं है, उसे हम कहते हैं। रूप के स्वामी ने हमें अनेक गण दिए हैं। वहाँ प्रभु ने रूप में उपदेश दिया था। प्रयाग में आगे आदेश दिया जाओ। ब्रिंदावन वहाँ पहुँच कर अनेक गंधों की रचना करो। रूप को स्वामी ने अनेक गंधों की रचना की। 2 देश क्या कहते हैं प्र प्रजल्प करोगे तो भक्ति का पेड़ गिर जाएगा, प्रजल्प करोगे तो भक्ति कमजोर हो जाएगी।
और
यहाँ क्या क्या कहा जा रहा है? क्रिस्ट कथा कृष्ण कता करोगे तो भक्ति का बीज उठते जाएगा। जालपा से बचना है और कृष्ण कथा में रूची को बढ़ाता है। भगवत गीता में भगवान मन की तपस्या, जीप की तपस्या और देह की तपस्या का वर्णन करते हैं। तो जीप की तपस्या के विश्व में कहते हैं जीप की 1 तपस्या, यह है सदा हरी का नाम लो, सदा हरी का नाम लो, जीप की 1 तपस्या। आप पूछोगे क्यों तपस्या जीप की क्यूंकि जीप को आदत है पर जल्पा करने के लिए। और जब हम प्रजल्प की वजह किसका में जुड़ते हैं तो जी इंडिया को इतना अच्छा नहीं लगता। पर अगर हम दीर्ध होकर प्रयास करते जायेंगे, फिर की आदत बन जाएगी। शुरू में भगवान के नाम भी हमें कड़वे दिखते हैं। जैसे कहते हैं भगवान के जो नाम है चीनी जैसे मीठे हैं, भगवान के जो गोल है वो भी चीनी जैसे मीठे हैं। भगवान की जो लीलाएं हैं वो भी मीठे हैं। पर कहते हैं क्यूंकि हमें हमें जीव में अविद्या की बीमारी है, हम इसका मीठा पन महसूस नहीं कर सकते। दूसरे शब्द में हमें आदत है पर जल की, हमें आदत है बहुत चर्चा की। तो इसलिए आप को कहा जाता है को हम हम नहीं कर पाते, हमें यह नहीं देखता, इसका उपाय है। रूप समय कहते हैं की अगर आप दर्द होकर जॉब करते जाएंगे तो यह अविद्या की बीमारी दूर हो जाएगी और आपको फिर से वीजा महसूस होगा। सो यहाँ जद भारत कह रहे हैं। पहले तो उन्होंने कह चुके है पिछले स्लोट में कि शूरलभक्तोंकी संगत लो, उनके चरणों की सेवा करो और उनकी संगत में रहोगे। तो सदा 1 ही भाव रहेगा। वो भाव रहेगा। कृष्ण भक्ति का कृष्ण लीला। जैसे ध्रोबनाजदेइती तपस्या की लिए, जिसके पश्चात पर भगवा ने कहा धrobaमेरेकरणतुमे इतना कैश पा, भागो मेरे से क्या वल्ड चाहिए? तुम्हे अगर आप मुझे वर देना ही चाहते हो तो क्या वर दीजिये? भक्तो की संगत मे क्यूँ उत्तम भक्तों की संगत मिलेगी। तो बधिायों से बचो। तो शास्र में कहा जा रहा है शुर्भ भक्तों की संगत ने उत्तम भक्तों की संगठनों, उत्तम भक्तों की सेवा करो। इसका अर्थ यह है उनके साथ बैठ कर, विहारिक विशु की चर्चा करें। अगर उनके साथ बैठकर हमने पॉलिटिक्स सोशियोलॉजी की चर्चा कर ली है, फिर उसका कोई लाभ नहीं। संतों के संग में रहने का लाभ जब है। जब हम उसका उपयोग करें तो पापाजी आगे कह रहे हैं शुद्ध भक्तों की संगत में क्या है परम भगवान का गुणगान, परम भगवान का गुणगान की चर्चा की जाती है। भगवान की क्वालिटी भगवान के अनेक गुण है। बहमसमितमेंजीने कई गुणों का वर्णन किया है। संक्षेप में। बाजी कहते हैं अद्वेता में चूते बना दी। अनंत रूपम भगवान अद्वेता नाम है। आत्मा को छूता छूता गाज क्या है? जो कभी गलती नहीं करता। अनंत रूपम अपने आपको अनेक रूपों में। अब ये नहीं कर सकते हैं।
वो
रूप में क्यूँ नहीं कर सकते। पुराना पुरुष है सबसे प्राचीन e e का जवान भी भगवान की दाढ़ी के साथ ये अध्य पुराना सबसे पुरान है। तो भगवान के इस प्रकार अपने किसी 1 अंग से किसी और अंग का कार्य कर सकते हैं। हाँ पर हम उदाहरण के लिए अगर भोजन खाना चाहे तो 1 ही साधन है उनके द्वारा। तो पल भगवान नेत्रों के द्वारा खा लेते हैं, कानून द्वारा सुन लेते हैं। जो मायावती भाव के व्यक्ति हैं, वो कहते हैं देखो ये वेचना कितने मूर्ख हैं कहते हैं भगवान ने खा लिया। जब थाली तो भरी हुई है वैसे की वजह से। यहाँ पर हम जब खाते हैं तो थाली खाली हो जाती है। भगवान कहते हैं। और ऐसी तो जद भारत कहते हैं। संतों के साथ बैठकर भगवान के गुणों की चर्चा करो, उनके रूप भगवान अपने आप को विग्रह। इस आर्चर भगवान में कोई अंतर नहीं, कोई सोचे की, ये तो पत्थर की मूर्ति है। थे उन उद्देश्य क्या था? पूरे समाज की प्रजा को वैसा बना देना। 1 समय खेत की चर्चा हुई थी। डिबेट जो बुद्धि थे, उनके गुरु के
साथ
ने हरा दिया। तो उनके शिष्यों को बड़ा अपमान महसूस होगा। उन्होंने सोचा हम 1 ऐसी योजना बनाए, गुरु की बेचने का बदला ले सके होने। 1 पीतल की थाली थाली में सरावा प्रसाद रखा और ले गये ले गये के गुरु प्रसाद ले गए, महा प्रभु को खिलाने ले महाप्रभु से अर्पण करे थे। 1 बाज आई, ऊपर से सरावा टुकड़ा खा लिया, वो पीतल की थाली जो है गिरा दे दी का गुरू के गुरू जी एकदम बेहोश हो गए, उनके शिक्षों लगा ये हमारे अपराधों का परिणाम है। उन्होंने गुरु से स्वीकार किया, नीयत बुरी थी के को होश में ला ने क्या कहा उनके कानों में जाकर भाव मंत्र का उच्चालने किया तो गुरू जी होश में रहे और सारे राम बन गए। क्या तो महा प्रभु यात्रा कर रहे थे। wनaसीमेवहउससमय 1 बड़ी सफाई चल रही थी, जिसमें 10 हजार सन्यासी थे और हजारों मायावनी विचार के, तो ये जो मायावती सन्यासी थे, उनके चीफ कराता प्रकाश बार बार वहाँ पर निंदा करते थे सन्यास ले लिया है। संसद का विधान है तो कभी हमारे साथ बैठते ही नहीं। वेदांत का अध्ययन करने के लिए। तो भगवान के जो भक्त हैं वो अपमान सह सकते हैं। उनकी तरफ जब भक्तों की अपमान हो वो ज्यादा मुश्किल होता है। सो जो भक्त थे, उन्हें अच्छा नहीं लगता था। ेा वहाँ पर की निंदा करते रहे। तो वहाँ पर मुझे काशी आये गए। उन्होंने कहा ये मायावदी आप इतनी बेचती करते हैं, हम सह नहीं सकते। हाँ चलिए हमारे साथ कल। उनके घर में प्रसार को पता था, ये विनती की जा रही है। महा प्रभु गए उस सभा में। यहाँ प्रकाश की सभा चल रही थी। और वह प्रभु ने बड़े विनम्र भाव से प्रणाम किया। पर रुके रुके स्थान में, जहाँ की आप पाउंड होते हो, मंदिर में जाते हो, जैसे बंदर में अंदर जाना हो, तो पहले पाउंड हो कर अन्दर जाते हो। अपने आप को बड़े व्यवहार व्यवहार के साथ किया। प्रभु ने प्रणाम किया। ये मायावी निवासियों और साथ में उन्होंने अपने दीवेलीलाभीप्रकट दिए। भगवान गीता में। क्या कहते हैं, जन्म कर्म चाह में होना ही दीवयमेंहै। भगवान के हो गए। अपनी अद्भुत लीला प्रकट कर। सो ने यहाँ भी अद्भुत लीला। पकड के अपने चेहरे से लाखों सूर्य की रोशनी का प्रकाश जब मायावनी देखा, ये तो ऊँचे मंच पर बैठे थे, मा बैठे थे, पैर धोते हैं। बंदे प्रवेश करने से पहले सो जो सन्यासी थे, वो देख, सके उनकी लीला। तो फिर जब उनको पकड़ लेगा, ऊपर बैठा ले। दोनों की चर्चा की, जिसके द्वारा महाप्रभु स्थापित किया गया की हरी नाम में है, सारे वैदिक सासरों वहा प्रमुख प्रकट हुए थे। सबको नाम से जोड़ने से ज्यादा नगरादिगरा। 1 दिन दुनिया के कोने कोने में नाम पहुँचे। तो भगवान के जो भक्त हैं, वो यही चाहते हैं। भक्तों के संग में रहकर हम कृष्ण कथा को सुने, कृष्ण कथा को सुने। कृष्ण कथा का 4 अभी पिछले 3 महीने से लॉकडाउन था। 1 रूप से लॉकडाउन हमारे दुखी थे। भक्तों को आदत है प्रचार करने की जगह। पर रूप से लॉक डाउन के द्वारा। भगवान ने भक्तों को समय दिया। और शाम शाम कितना मिशन स्मरण करने जो सेवा में जुड़े रहते है, क्या सोते इतनी सेवा थोड़ी छुट्टी मिल जाए। तो अभी पढ़। सके। इस समय इतना समय मिला कि कई भक्तों ने उसका उपयोग किया। यह आज के स्लो के तातपर्य में 2 बड़े महत्वपूर्ण विचार प्रभाजी कर रहे हैं। इसलिए मैंने सुना ताप कहते हैं क्रिश्न मूमेंट। who started engage people twenty four day in the caves, the feed nd cation opेशocontसो पापा जी कहते हैं, ये जो संस्था है, इसकी स्थापना इस उद्देश्य के साथ की गई है कि जो भागते हैं वो कितने घंटे दिन में सेवा करें। 24 घंटे दिन में, 24 घंटे दिन में सेवा में जुड़े है। और इसी तातपरीमेंप्रॉपरजी कहते हैं जो कि फाइव मॉर्निंग, टू, टोन दे। नाइट बाबा जी कह रहे हैं, जो भक्त हैं उन्हें 5 बजे सुबह से शुरू करके रात के 10 बजे तक सेवा करेंगे, सुबह, 5 बजे से लेकर रात के 10 बजे तक क्या करना। तो सेवा में इस प्रकार से इसमें 7 को पार करना सब गिन सकते हो। कहने का ताप यह है 24 घंटे जुड़े रहोगे, सेवा में, तो माया के समय नहीं रहे हो। माया का इतना तेज प्रभाव है थोड़ी देर के लिए अगर आप छूट करोगे मैं आपको पकड़ लेगा। तो इसलिए पापा जी कहते हैं हम भक्तों को 24 घंटे, 24 घंटे, अगर कहोगे तो इसमें जो विश्राम करते है 6 घंटे वो भी गिने जाते, क्यूँ ये विश्राम नहीं करोगे, बाकी समय में कैसे सेवा करोगे? तो इसलिए विश्राम स्नान करना, प्रचार, खाना ये सब गिना जाता है। कहने का तातपर्य यह है कि हम किसी प्रकार से समय का दुरुपयोग नहीं करे। के बंदे ने क्या कहा? 1 लम्बा पोती, 1 पल का भी दुरुपयोग करोगे तो सारे विश्व के धन से वापस नहीं ला सकते। तो हमें समय का बड़ा ठीक उपयोग करना चाहिए। और अगर समय का ठीक उपयोग करोगे तो क्या आप परिणाम होगा की रास्ते में आगे बढ़ते जाओगे। कह रहे हैं 24 घंटे सेवा में
रहो और
4 करो तो वैसे करेंगे तो भगवान मना करेंगे। god है तो है तुम सब का सहयोग देते हैं, स्वयं प्रयास करते हैं। सेवा में जुड़ने के लिए हमारे गो का उदाहरण है 18 घंटे, 20 घंटा, 22 घंटे दिन में सेवा। तो आप कह सकते हो हाजी मुकाबला थोड़ी कर सकते है, कोई मुकाबला थोड़ी कर सकते है, हम मानते नहीं कर सकते पर कम से कम प्रयास तो करना प्रयास करना चाहिए। 1 से में जल न हो जाए। तो भगवान के जो भक्त हैं वो चाहते हैं कि हर समय भक्ति में जुड़े रहे और इस विषय में सनातन गोस्वामी को क्या। भगवान के शरायत होने के लिए लोग प्रतिकूल है उसे या जो अनुकूल का यह है उसे करोगे। तो ये श्लोक में जो संदेश दिया जा रहा है वो अनुकूल कार्य है और वो कार्य करोगे भर्ती में आगे बढ़ सकते हैं। और जो प्रतिकूल कार्य है उसका भी करते हैं उसमें जुड़ोगे भक्ति में आगे नहीं पढ़ पाए। तो पापा जी ने लिखा है की भक्तों को चाहिए कि 24 घंटे सेवा में रहे, ये हमारा प्रयास पापाजी कहते थे जो कॉलेज में से उनका 1 प्रोफेसर था जो कहता था you should over the me to get more marks in you actually, get a पास होने के लिए sat percent सोच के लोगे 60 परसेंट चाहिए, न होशियार 50 से 40 पर्सेंट राइट, अब ये सोचोगे नहीं 60, 70 परसेंट नहाना नंबर 50 सो हेंगे अब सोच के चलो हमने 24 घंटे सेवा में जोड़ना है केसे आज के लोक में विश्णु स्पर्म, शवनम कितना बार है तो श्रम कितना करोगे, विश्णु स्पर्म भी सम्भव हो पायेगा। सुजल भारत इन लोगो में शिक्षा दे रहे हैं, इसे थी ये आप और गिराई से मुझे समझाइए। तो इससे हमें यह शिक्षा मिलती है की अगर हम कोई आध्यात्मिक विषय संभालना चाहते हैं, सो विल हैव नो रैली रैली प्रश्न पूछो उत्तर प्राप्त करो फिर आपको ठीक से मजा। 1 बार पढने में इधर समझ नहीं आयगी। पढने में लोक नहीं होगी, बार बार करते जाए तो याद होगी सो जल्द भारत बहुत महत्वपूर्ण शिक्षा दे रहे हैं, प्रभाजी कह रहे हैं 24 घंटे सेवा में रहने की योजना बनाओ और कई बार भक्ति का पालन करने के लिए अनेक कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ता है। हरदा ठाकुर को 22 बाजारों में पीटा क्यूँ के बदल में 1 कमी थी। उन्होंने ही राम को नहीं देखा। तो कई बार प्रचार के दौरान सेवा के दौरान कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता है। 1 रुप से। आज की जो स्थिति है जहाँ की करना वायरस का प्रभाव, तो भक्तों को उसके प्रभाव से बचाने के लिए सबको मेहनत करनी पड़ रही है, सब प्रयास करे उसका असर नहीं पड़े। और कई भक्त जो बीमार हो गये हैं, वो उनकी देखभाल के लिए कई और भक्त बड़ी। अच्छी सेवा कर दे। जब हमें मौका मिलता है, फैशन की सेवा के लिए, हमें बड़े भाग्यवान समझना चाहिए। कई भाग छूमंतर हो गए, यहाँ रहेंगे तो हमे भी वायरस का असर आ जाएगा। हम भाग कर छुप जाते हैं। और कई दूसरे भागों ने कहा, नहीं, हम सेवा करेंगे भक्तों की और वो सेवा करने को। जब हमें भक्तों की सेवा का मौका मिले, हम आपको बड़ा भाग्यशाली माना। जब हम सेवा से भागने के प्रयास करना प्रयास करते हैं, मतलब आप सिद्धांत को नहीं समझे। आप केवल अपने स्वाद का सोच है। स्वार, खास कर के कई भक्तों का आभार करना चाहता हूँ, जिन्होंने बहुत मेहनत की है भक्तों की देखभाल के लिए, जैसे आप सब जानते हो। 8, 10 या 11 भक्तों को अलग अलग रूप से यह बीमारी हुई है। बॉम्बे में भी हुई थी, 2 हफ्ते पहले सारे भाग ठीक हो गयी। बीमारी। यह बीमारी लोग जल्दी पकड़ लेते हैं, वो ठीक भी हो जाते है। खास कर के भक्ती, रक्षक के नंद, महाराज, मन, प्रभु के देश डॉक्टर हैं, पर हो जाते हैं सेवा करने। साधु हृदय भुबनेश्वर प्रभु, ropibamamadvprभु, hello prem, राराज, सुंदर, मोहन, अब, गोल, मोहन श्याम और कई और भक्तों ने बहुत मेहनत की है भक्तों की देख भाल के लिए और आप के प्रयास से जो भक्त हैं, उनके कहो का स्वाद ठीक हो गया। और कइयों का थोड़ा थोड़ी बीमारी है। और हमें उम्मीद है भक्तों की सेवा से, वो सब ठीक हो जाएगा। फिर भगवान हमें सेवा बढ़ाने का प्रयास मौका दे रहे हैं। वैश्य सेवा केवल भाग्यशाली बच्चे का। जब हमें मौका मिले किसी क्षेत्र में वो की सेवा करने का। हमें अपने आप को बड़ा भाग्यवान समझना चाहिए। और जो छूमंतर हो जाते हैं, सेवा के, वो दुर्भाग्यशाली है, उन्हें भगवान की कम कृपा प्राप्त होंगे? सो थैंक यू वेरी मच ओ मोरी पार्ट टू के मी डिब्बी बिकेम से। ये बीमारी ऐसी है और जल्दी से लोग पकड़ लेते हैं। हमें अत्यंत सावधान होना चाहिए और सावधान रहेंगे। तो फिर भक्त इस बीमारी से बच सक। ling saying, if you, what
की बात है, यहाँ भी नहीं है to in और तो आप काम के
थैंकस
सुना तो मैं आपको
ओके की ये करना वायरस है, क्या आपका पीछा इतनी जल्दी नहीं छोड़ेगी करना वायरस कर दी है। यह तो बहुत अच्छा स्थान है। तो हमें बहुत सावधान रहना पड़ेगा भविष्य में यह की कुनावर जारी है। by by yes my
ये नया से 11 जो इसलिए सभी को के प्रयास और मारा गाव से अपने यहा पहुंचे और कई बहनों का नाम ले लेकिन इसमें बहुत ज्यादा लोग है जो सेवा का ताकि हम लोग हम लोग का चीज कनेक्टेड है इसी पार्टमेंट में सेवा करते हैं तो हमारा इस चीज को रोकना मुश्किल है और हमारे आश्रम में लोग 1 साथ तो बात से दिपास आप लोग यहाँ पर सेवा कर रहे है देखिये जो अच्छी बात है की आप लोग ही से थे और जैसे आपकी दूरी में बीमारी आपके पास नही होता है अगर आप पास नहीं है तो ये बीमारी के पास नहीं हो सकता है लेकिन गलती कर रहा है हमको तो आदत है और जिंदगी का
शैली
से आसानी से कराया है और यह बीमारी से इतने दूर पर पहुँचा है कि कोई की बीमारी को ब तो बीवी हम लोगो को 1 करते है वो किताब है बीमारी उसी के पास पहुँच जाता है एकदम ज्यादा बीमार
हो जाता है 11 दम बता देना चाहिए
जबकि दूसरे के पास पहुंच गए और उसे कभी विवाद हो गए तब हम लोग के पास तब हम लोगों को ये बताया जा हम लोगो को इससे से दूसरे के पास आसानी से तो हम लोगों को आप से रिक्वेस्ट है जो काफी सेवा बहुत लोग ही हो लेकिन सा रास्ता उनको नहीं होना चा रहा है तो इसके काम से आप सभी से चाहिए और ये जो हमारा प्रोसेस है जो हमारा पाचन है वहाँ पर इससे टीवी चल रहा है तो टीवी को चलते मंदिर को देखना चाहिए तो ये हर बात को भी अलावा तो और आगे चलके भी अलाव आएगा और हम लगातार में हा नहीं कर सकते हैं तो फिर भी अगर हम आप से करते है की आप लोग ऑफर एरिया और दूसरे लोग से ज्यादा नहीं तो आप क्यूंकि आगे बढ़ा और आप लोग इस प्रयास करे और नहीं होते की बीमारी के लिए तो जो बात लोग ये विवाद हुए उन्होने गया उनको दिया जा है और साथ लोगों की सभा की जो है उसके बाद हो तो लेकिन ये किसी भी माल की करते है मुश्किल है परेश जिसके कारत से हो तो आप उसे कस कर रहे राज काफी है किसी के पास जा फोर मीटर चाहिए और जो मैं अगर तो इसी कारण से पार ना हो आप लोग टीवी की स्टोरी को दीजिए अब पूरा प्रयास से पहले आपको अच्छी तरह से लोक सेवा कर पाए और अच्छे से ये देखा हो और से की हो जाए तो लेकिन अगर ना बढ़े यहाँ पर तो दूसरे बार ना चाहिए यह हरा है तो प्लीज आप को अभी से कीजिये और बहुत धन्यवाद आप लोगो को पेश
समझ गए सब बड़ी अच्छी मेडिकल फैसिलिटी बनायी हुई है हॉस्पिटल से हजार गुना अच्छे भविष्य में कोई मोरी बीमार भी हो जाए तो हमारा यह विचार है और थोड़े दिनों के बाद हम लोग दर्शन सब खोल देंगे मंदिर को 9 से 11 और शाम को 5 से 7 भक्तों दर्शन के लिए आ सकते हैं और यह महीने के आखिर तक बंद खोल देंगे। सबको पर हम पहले हरसिल करना चाहते हैं, ट्रायल करना चाहते हैं यह देखने के लिए कि कोई व्यक्ति को बीमारी होने जा। हम छुहनहीं 1 बड़ा कॉम्प्लिकेटेड प्रोसीजर है और इस समय कोई भी मंदक खोलना नहीं है। सब हमारे जैसे ट्रायल कर रहे हैं और सब खोलना चाहते हैं। 23 हफ्ते बाद ये हे और छोटे
और है
अभी
उसके बाद
ये चीज है। भक्तों ने बास पहना तो अच्छी तरह सीख लिया की भी अब उनको आदत पड़ गयी है मास मास पहनेंगे में मोहन को कहा था 120 30 बचा है कोई ट्रेन नहीं हो सकती प्रसाद
बनाने में
बहुत मुस्कल कई मर्डर है जहाँ हंड्रेड पर्सेंट कुकिंग 4 तो पुषार बनाओगे तो कुशाल खाओगे, पार नहीं बनाओगे तो कार सीख स अभी आप लोग को ट्रेनिंग लेनी पड़ेगी
ओके
आप मे से किसी भक्त में रुचि नहीं है परचार बनाने के लिए यह परचा भगवान पर पन किया जाता है कोई नहीं किनकी रूची है प्रचार बनाने में या बाकियों की रूचि है प्रसाद खाने में न खाओगे बनाओगे तो खाओगे, नहीं बनाओगे तो पास नहीं करना पड़ेगा okay mask is com pulse mask is campus kाकiस हाय क्रिश्ना हार किशना क्रिश्ना हारे हारे हार रहा ह नाम राधलेलाले।
More from PRASAD

Rare Pastimes & Timeless Lessons of Guru Mahārāja | Stories Every Disciple Should Hear

ISKCON Legends- pure devotees meet-HH Jayapataka Swami, HH Gopal Krishna Goswami, HH Radhanath Swami

Jagannātha Ratha-yātrā Through Śrīla Prabhupāda's Mercy | 29 April 2006 | Nairobi, Kenya

Lord Jagannātha's Appearance Pastime | 21.07.2019 | ISKCON Calgary | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

The Ācārya Teaches by His Own ExampleGuṇḍicā Mārjana by Guru Mahārāja #shorts

Guṇḍicā Mārjana – Lord Jagannātha's Pastime | 21.7.2019 | ISKCON Calgary |Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

H.H. Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī Mahārāja - Exemplary Sādhana and Deity Worship # shorts

भगवान की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? | 11 Jan 2014 | Punjabi Bagh | Srila Gopal Krishna Goswami

Material Education vs Spiritual Education | Srila Gopal Krishna Goswami #shorts

