नरक मे जाने से बचने के उपाय | SB 6.1.17 | 22 Jan 2022 | Delhi | Srila Gopal Krishna Goswami Maharaja

Srila Gopal Krishna Goswami Maharaja teaches how sincere devotional service protects the soul from hell. He stresses chanting the Hare Krishna mantra, accepting prasadam, and maintaining pure conduct guided by a guru. True devotion requires correct behavior and integrity, offering liberation from the cycle of birth and death.
Chapters
यहाँ यह ट रिकॉर्ड की लाइव भाई की कोशिश करते हैं।
गोबर दवा
गया दमा हावा जहा 2 द नन द ब्रज जगननारोदनद ना ना जाना तेरा भला 4 जाना तेरा भला जार हर हाराजा
जो
जैशे radaeajago हर प्लाजा का ना राजा राधा दिवा
her
राम रे राम राम राम रे 4 हरे हरे रामा रे राम राम रा म ल ह ले हाल के 4
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हरे मारे राम मारे हा रे हाय रे रे हरे हरे रामा रे रा मारे हर हरे चिकारे हरे हरे राम राम हम मारे रे हम बे हरे रामा रामा रे रे रे के रे राम राम रे रा
ना रे
हम वाले
की ganga make a make should be social disensi
कपया उचित सामूहिक दूरी बनाये रखे सभी प्लीज की सोशल, लिसेंस वैर यो mas
काफी जगह है ओम नमो भगवते वासुदेव, म नमो भगवते वासुदेवाय नम भगवते was bgt can do scapdoneslokseme home am goa bntatobaयmsuशiला यात्रा रयनमबायना 9 हम लोग, सर जी, हम लोग
के
बा सुशीला साद हो यात्रा
यात्रा
प्रायन हम ल अगर जीरो यात्रा सादवोयात्रा यात्रा शीला सादो यात्रा पर नारा
के आधार हो या जिला होगा हाल
चीन
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भय या चीला साद यात्रा जिला रा य यन
लेमन हाशी मोको तो भयहायाशीला सद वो यत्रा रायण परायण हारा
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सली आता हो
हे हे
या
होगा
न
रहा था अभी होगे, हे होोaहकानla श्रद्धा धन्यवाद कृष्ण का
विधान जगतगुरुशीलाप्रभु के द्वारा जगत गुरुजी प्रभुपाद की स्त्री चिनहउपयुकतहैनिशचर आम लोगो के संसार में अनथाह मा र षेमहानंबलमाशुभह सोरी इसका अब ता है। सुशीला अच्छे का चरण वाले साधवा साधु पुरुष यत्र जहाँ नारायण परायण जिन्होंने नारायण के मार्ग अर्थात भक्ति को अपना सर्वस्व मान लिया है, अनुवाद के मेरे भक्त, सुशील तथा सर्वोत्तम गुणों से युक्त शुद्ध भक्तों के द्वारा पालन किया जाने वाला मार्ग निश्चय ही इस भौतिक जगत का सबसे मंगलमय मार्ग है। यह भय से रहित है और शास्त्रों द्वारा प्रमाणित है। पर परक्षरवनकरे किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि भक्ति अंगीकार करने वाला व्यक्ति वेदों के कर्मकांड अनुभाग में संस्कृत अनुष्ठानों को संपन्न नहीं कर सकता, या कि आध्यात्मिक विषयों पर चिंतन करने के लिए पर्याप्त शिक्षित नहीं है। मायावादी सामान्यत यह आरोप लगाते हैं कि भक्ति मार्ग स्त्रियों तथा अशिक्षितों के लिए है। यह निराधार आरोप है। भक्तिमान का अनुसरण अत्यंत, विद्वान, पंडितों, यथास्रीचैतनमहाप्रभु तथा रामामजलचारे जैसे गोषस्वामिों द्वारा किया गया है। भक्ति मार्ग के ये ही वास्तविक अनुगामी है। कोई चाहे शिक्षित या उच्च कुलीन हो या न हो, उसे इनके ववचुनोंकामनुसरण करना चाहिए। महाजनों या कथा सफलता मनुष्य को महाजनों के मार्ग का पालन करना चाहिए। महाजन देश है, जिन्होंने भक्ति के मार्ग को ग्रहण किया है। सुशीला सादवोंयंत्रनारायण है। क्यूंकि ऐसे महापुरुष ही पूर्ण पुरुष हो गए हैं। श्रीमत भातर के पांचवे संघ के अठारहवे के बागली ोक में कहा गया है सियासी भक्ति भगवत् की जन सर्वे त्र समाज से देश हो रहा है। जिसमें भगवान के प्रति अविचल भक्ति होती है। उसमें देवताओं के समस्त सर्प पाये जाते हैं, किन्तु जो अल्पग्य है, वे भक्ति मार्ग का गलत अर्थ लगाते हैं। इसलिए वे यह आरोप लगाते हैं कि भक्ति उन लोगों के लिए है जो अनुष्ठान नहीं सपनगर सकते, चिंतन नहीं कर सकते, जिससे कि यहाँ पर सगरी चिकना शब्द से पुष्टि हुई है। भक्ति ही वह महक है जो उपयुक्त है, कर, मकान तथा यान कांड के मार्ग नहीं मायावादी, भले ही सुशीला साल वह अच्छे, असरारे साथ पुरुष हो, किन्तु इसमें संदेह ही है कि वास्तव में वे प्रगति कर रहे हैं, क्योंकि उन्होंने भक्ति मार्ग स्वीकार नहीं किया है। दूसरी ओर जो लोग आचार्यों के मार्ग का अनुसरण करते हैं, वे सुशीला तथा साध वह है, किन्तु इतना ही नहीं, उनका मार्ग अब तो भयह है, अर्थात वह भाई से रहित है। मनुष्य को चाहिए कि निर्भय होकर 12 महाजनों तथा उनकी परंपरा का अनुगमन करें और माया के पास से मुक्त बोले शीला की कृप्या धनबाद 1 और बात द्वारा सकते हैं। सुशील तथा सर्वोतम गुणों से युक्त शुद्ध भक्तों के द्वारा पालन किया जाने वाला हार निश्चय ही इस भौतिक जगत का सबसे मंडल में मार्ग है। यह कैसे रहित है और शास्त्रों द्वारा प्रमाणित है।
पाकल थ्री शो का उच्चारण शुवदेवगोस्वामी करते है और इस इस अध्याय में भारी नाम की महिमा के विषय में बात करते है। शुगदेववामiने लड़कों का वर्णन किया, इसे सुनाया तो परीक्षण राजे। जब सुना कि दल जोर से किस प्रकार का परिणाम होगा उनके लिए, क्योंकि शादी के विपरीत कार्य करते हैं। तो जो परीमाल मन में ये भावना ऊँची कैसे समाज के लोगो को रोका जाए, वरिष्ण भागते हैं, उनको क्या क्या कहा जाता है। दूसरों को दुखी देखकर वो भी दुखी हो जाते हैं। ये पीछे से आवाज आ रहा है। कल दूसरों को देखकर, उनके मन में भी यही भावना होती है। कैसे सबको उधार किया जाए जैसे आप सब लगभग 6 हफ्ते 87 हफ्ते के लिए बुक में रन कर रहे थे। इसका उद्देश्य क्या है कि इन गधों के द्वारा वि ज्ञान प्राप्त होगा, जिसके पालन से जीवन के दर्श को प्राप्त कर सके। तो परी्षरमराजने पूछा ये बताइए किस प्रकार से, किस प्रकार के कार्य में जुड़ने से हम बच सकते हैं और पापों के परिणाम से? और उन्होंने यह भी कहा की अगर कोई व्यक्ति अपराध करता है, इस जीवन में से प्रायश्चित हो जाना चाहिए, उसे शब्दों में अगर प्रायश्चित नहीं हो, गले में वहाँ भी भयंकर परिणाम भोगना पड़ेगा। तो वामी प्रेमराज के प्रश्नो का उतर दे रहे हैं। परेशरीमराजकेजञाती इच्छा की वो ज्ञान प्राप्त हो जिसके पालन से व्यक्ति मुक्त हो सके। तो ओपरेशन भरा ने यह भी कहा कि हमें शुद्ध भक्ति का ज्ञान चाहिए, वो क्या नहीं। आज आप पाप करो करो, फिर पाप करो। और परेश का असल प्रश्न था कि हृदय में हम कैसे हृदय को कैसे साफ़ करे। इस प्रकार का भौतिक गर्शन। और उन्होंने यह उदाहरण दिया था, पेड़ के पेड़ हो रूट, शो, तो ऊपर आग लग जाएगी, पेड़ जल जायेगा, क्योंकि रूट्स हैं, उधर गढ़ है, पेड़, पेड़ फिर से उग जाएगा। तो उन्होंने ये कहा कि इस ज्ञान का क्या लाभ जिसके द्वारा में शुभ की प्राप्ति हो। आज हम पाप करते हैं वे प्रेशर करते हैं, वे पाप करते हैं, वे कर दे। उन्होंने उदाहरण दिया, हाथी, सलाम में जाता है, अपने शरीर को साफ करता है, वही फिर तलाब से निकालता है और बैठा है। तो क्या होता है? वही गंदा हो जाता है। प्रेमराज की इच्छा थी की हमें वैसा ज्ञान मिले जिसके द्वारा इस प्रकार के कार्य से बच सके। और अनुवाद में क्या कहा जा रहा। जो मार्ग भक्तों द्वारा प्राप्त होता है, उनका जो आचरण होता है, बिल्कुल शास्र के धार होता है। जो भगवान के भक्त हैं, उनका आज कैसे होता है? शास्त्र के आधार पर। और उनका स्वभाव ठीक रहता है, उनमें अच्छे गुण होते हैं। और ये जो मार्ग है, यह शुभ का मार्ग है। और इसके द्वारा आप प्राप्त कर सकते हो। इस शुल्क देखो में क्या कहते हैं? भारतीय योग 1 मार्ग है जिसे हमें अपनाना चाहिए। तो भारतीय योग के विषय में आप पढ़ते हो में भागवत गीता का निर्णय क्या है? भगतिया मुझे। आप कैसे प्राप्त कर सकते हो? भक्तियों के द्वारा शिव भागवत में भी भक्तियों की महिमा की जाती है। या देव ने अनेक शासन की रचना की थी, जब उन्हें लगा की रचनाओं में कुछ कमी रह गई है। और जब वो अपने ग्रुप को मिले मुनि ने क्या कहा? कमी यह रही है कि गंध में केवल शुद्ध भक्ति के ज्ञान का, सार के तैयारी का भी वार्डन है। तो शिव भगत मे प्रेस ने हमें क्या दिया है शुल्व भक्ति का ज्ञान शुरू से अंत तक, शुरू से अंत तक। आप इसी विषय का ज्ञान प्राप्त करते हैं। तो जो संत हैं, महात्मा हैं, वो क्या करते हैं? वो शुल् भक्तों का इस शिक्षा के आधार पर कार्य करते हैं। इस शिव भगवन में के में कहा जाता है महाजन एकता से हमें उनके मार्ग के अनुसार चलना चाहिए जिस पर महाजन चले है। महाजन महाजन भारत नाम भी महाजन शब्द का उपयोग किया जाता है। उसके धर्म के अधिकारी जिनके पास सम्पूर्ण ज्ञान है, की जीवन का लक्ष्य कैसे प्राप्त कर सकते हैं? और इस इस में आप क्या पढ़ते हो? आज कथा जिसमें आप पढ़ते हो कि हर नाम की क्या शक्ति है? और इस अध्याय में यमराज को क्या कहा के तुम भविष्य में को नहीं छूना का उचारण किया हो।
और
12 से महाजन हैं जिनके द्वारा आप आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करते है। सही समूह बारा धिकारी हैं जिनके द्वारा हम प्रामानिक प्रमाणिक ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। दूसरे शब्दों में वाणी ज्ञान हमें प्राप्त होता है महाजनों के द्वारा, संतों के द्वारा। और इसी अध्याय में स्वामी क्या कहते हैं। भगवान की वाणी। तो भगवान की वाणी का पालन जो करते हैं उनका चरित्र है शाह से पर आधारित रहता है। तो को हमें ज्ञान दे रहे हैं। और पिछले शो में यह कहा गया की आगे हमे भक्तों की संगत मिले, उसके द्वारा हमारे हे में भक्ति का ज्ञान प्राप्त हो सकता है। तो शुकदेव स्वामी ये है कि जो शुद्ध भक्त भगवान के उन में कोई कमी नहीं रहती और उनमें सारे गुण हैं, सारे गुण है, साधु के क्या गुण होते हैं? देव ने कहा है, भागवत के में, सुविधा में साधु के लक्षण प्रकट होते है। किसी में भगवान के पिता देव से माता ने पूछा था ये बताए कि इस प्रकार में बहुत को पता था, कौन हैं भगवान सो? पहले? तो कपिल भगवान ने कहा कि भक्ति योग के माध्यम से। फिर उन्होंने आगे पूछा भक्ति योग कैसे प्राप्त होता है? और उत्तर में शुकदेव भगवान ने कहा प्राप्त होता है भक्तों की दवा भक्तों की संगति के द्वारा। आप शास्त्र में पढ़ते हो कि इस विषय का ज्ञान बार बार हमें दिया जा रहा है। जैसे कि ध्यान में में ये वर्णन था। क्या हमें मान भक्तों की संगत लेनी चाहिए? तो माँ को भगवान ने कहा, भक्ति योग के द्वारा। और फिर आगे उन्होंने पूछा भक्तियोग कैसे प्राप्त होता है? कैसे संघ के द्वारा? और उन्होंने पूछा भक्ति के गुण क्या है में है?
देव।
भगवान ने का कहा त्रिशुर? करुण ने कहा पे, दयालु दयालु हैं, भगवान हूँ है। करूण ने कहा, दया की भावना। जैसे सब बुक मे गए थे। आप लोग ने इतना कैश क्यों उठाया है? क्यों आप जा रहे थे, सुबह से शाम तक गए। क्यूँकि ये वैश्ना का, भाव का भाव यह है कि हमने सब पतित का क्या कहना है? उधर करना है। और जो वैशणाहैवोअपनेआप को क्या सोचता है? मैं सबसे पतित हूँ, मैं सबसे पती क्या कहते है? तो आप हो हो किस लिए? तो बौधिक समाज में हम ये सोचते हैं, हम सबसे उत्तम कोटि के भक्त हैं। वैसा भक्त क्या सोचता है? वो सोचता है कि मैं सबसे पतित हूँ, मेरे में कोई गुल नहीं, मेरे में केवल गुण है। यह वैसा का भाव। तो क ने कहा, जो वैसा हैं, उनमें दया की भावना, दया का भाव होता है। और असली दया क्या है? लोगों को यह ध्यान में ज्ञान देना है। इस हाइश्वेलसबसेउसमगन क्या है? को भगवान का संदेश? तो लोगो को वो शिक्षा दे रहा, जिसके द्वारा वो भगवान की सेवा में जुड सके। तो जो व्यक्ति भक्तियोग प्राप्त करते हैं, वह सदा मंगल मय होते हैं, प्रसन्न होते है। जो व्यक्ति भक्तियों के मार्ग में जुड़ते है, वो सदा पर रहते है, उनके मन में चिंता नहीं होती। गोविंदा राज भगत थे, उन्होंने हमें दी है। रशिया में क्या है मेरा मन, तुम भय से भरे हुए हो। और देखा हम सब में, मन में कल क्या होगा? और हम यही सोचते रहते हैं कि वे सब का मन भय में है। बड़े राष्ट्रपति बन जाए, नेता बन जा रही है। पर गोलंदाज के है। अगर आप मांदकेपुत्कीशरल लोगे, मार लोगे, तो भय से बच सके। तो स्वामी की जो भक्त हैं, वो उस मार्ग पर चलते हैं। मार्ग उन्हें वह दिया है। जो महाजन हैं, वो कैसे प्रचार करते हैं? अपने उदाहरण के द्वारा। अपने व्यवहार में आध्यात्मिक गुणों को प्रकट करते हैं। और क्योंकि वो भक्तों के संग में रहते हैं, तो वह सदा प्रसन्न रहते हैं। और ये है असली मंगल का कार्य। जो भक्त हैं, 1 रूप से प्रसन्न रहता है। वो क्या पसंद इसलिए रहता है क्योंकि उसने भक्तियोग को स्वीकार कर लिया है। भक्ति योग में जुड़ा है। वो है की भक्ति भक्त भक्ति द्वारा। दूसरी तरफ से वैश् भक्त हैं। दुखी भी रहता है, क्यों दुखी रहता है? क्यूंकि वो देखता है कि अनेक भर्जी बौद्धिक समाज में, जहाँ की कष्ट कष्ट प्रयास कर रहे हैं, सुख प्राप्त करने के लिए। इस भौतिक जगत को क्या कहा जाता है? जेल खाना, जेल खाना में सब कैदी रहते है? और जो भाग है 1 रूप से प्रसन्न है कि उस सेवा में जुड़ी है। दूसरी तरफ से वो दुखी है। क्योंकि वो देखता है की इतने अनेक व्यक्ति भगवान को भूल रहे हैं, भगवान के विपरित के, सास के विपरित कार्य करते हैं। इस देशी ये बक का भाव स्वयं प्रसन्न है। क्यूँ भक्ति ज्ञान मिला है। पर वो ये नहीं सोचता कि मुझे ज्ञान प्राप्त हो गया है। मेरा कोई नही सोचता है, प्रयास करना चाहिये। इन को भी ज्ञान देने का है। यह उसका उत्तम भाव है।
ओ।
केवल अपने विस्वास करने दूसरे देश स्वास्थ के भी सोचता है। वजननदीखुशनदीवजनंदी उसे कहते हैं जो कि केवल अपने सुधार का सोचता है, कि केवल अपने उधार का सोचते हैं, केवल उसे कैसे लाभ मिलेगा यह सोचता है। यह भजन भजन भी करता है, कोई भजन भी करता है। और यह भी सोचता है की भगवान का संदेश कैसे आगे बढ़ा है, भागते हैं। राज क्या कहते है राजा ज्ञान प्राप्त हुआ था माता के घर में। और बड़ा महत्वपूर्ण संदेश दिया है। सा कहते है किस प्रकार वदवादी व्यक्ति प्रयास कर रहे है तो किस स्थिति को सुखी होता है? तो यहाँ आ की शुक्रगुस्वामी कहते हैं के स्वमी क्यों कह रहे हैं? क्योंकि उनसे ने पूछा यह बताओ कि मेरे हृदय से कैसे मैं को क्या ज्ञान चाहिए था? पर ज्ञान जिसके वापसी से, पालन से व्यक्ति का हृदय शूल बन जाता है। अगर हमारे हृदय में भौतिक आकर्षण रहेगा तो क्या पैदा होगा? अब भगवान के नहीं हो पाओगे। तो भक्त रहती है कि मेरे हृदय में जो भौतिक आकर्षण से उसे क्या किया जाए, उसे दूर किया जाए। ये भक्त। इसलिए इस हराम के उच्चारण से क्या लाभ होता है। हमारे ह मैल है, सबके हित में मैल है या नहीं? तो ये भक्ति योग 1 साथ भक्तियों के माध्यम से आप धन, मन, धन का उपयोग करते हो। भगवान की सेवा भक्ति योग है। शासन, निर्णय, चेतन, ने स्वामी दोनों भाइयों को और भक्ति योग कैसे प्राप्त होता है। सबसे पहले आपको साधु की संगत प्राप्त हो और ये साधु शक का जप किया जाता है। इसका अर्थ है भग साधु और ग्रंथ साधु। क्या कारण है?
आप
लोग ग्रंथोंको पढने से प्रभावित हो जाते है। क्योंकि इन में है भगवान की वाणी, मैं भगवान का उपदेश। इसलिए भगवान खुद कहते हैं जो व्यक्ति प्रचार का क्या है तो भक्ति योग है। शासक निर्णय ने स्वामी को क्या उपदेश दिया? भगवान गुरू, कृष्ण भक्ति लता। ये जो भक्ति है, यह बीच भक्ति का बीच है। भक्ति की महिमा का ज्ञान हमें कैसे प्राप्त होता है। पूजन के पश्चात हमें यह भक्ति योग की भक्ति, महिमा, भक्ति की महिमा का ज्ञान प्राप्त होता है। और जैसे बीज बोते हो तो बीज उठता कैसे है। जल के सहारे जल पिलाओगे उड़ गया। तो इसी प्रकार केवल ये ज्ञान प्राप्त करना है। यह भक्तियों की सबसे महत्वपूर्ण सेवा है, ये काफी लिए है। हमे इस भक्ति का बीज भक्ति के प्रति आकर्षण बुलाना हो तो क्या है? उपाय शरणचनमकाआप, उसकी की महिमा का ज्ञान, शास्र में पढ, ते भगवान के नामों में रुचि लेना। भगवान के नामों का उच्चारण करना। भगवान के संदेश का तो भक्ति साधन है, जिसके द्वारा हम जुड़ते हैं। न, सारे 700 में की महिमा आपको प्राप्त होती है। और ये जो भक्ति का बीज है, ध्यान से आप करोगे। और ये जो भक्ति बीज है, जिसकी सुरक्षा के लिए हमें क्या करना चाहिए, हमें चारो तरफ दीवार बना लेनी चाहिए कि गलत व्यक्ति अंदर नही में भी यहाँ बड़ी ऊंची दीवार है, यूं दीवार है। इसलिए गलत व्यक्ति अंदर नहीं आ जाए। तो हमें भक्ति के बीच को उगाने के लिए श्रम कृष्ण का लाभ उठाए और अपने आपको सालुसंघमेंरहा साधु संघ में रहोगे। तो सुनते जाओगे साधु की संगत का लाभ और शुरू से अंत तक आप पढ़ते के लाभ की पर्ति कैसे सफल होती है। तो आप सोम की करो और भक्तों के संग में रहो। ये जो संघ हम प्राप्त करते हैं, इसके भी 3 भाग हैं। 1 है उनके साथ संगत, क्योंकि आपसे ज्यादा उत्तम है, दूसरी श्रेणी के जो आपके समान है, तीसरा उनकी संगत जो होगी, आपसे कम ज्ञान लगते। तो कहते हैं जब आपको आप से उतम भक्तों की संगत मिले, हमें क्या करना चाहिए, प्रसन्न हो जाना चाहिए। पसंद इसलिए होते हैं क्योंकि हम ऐसा कुछ ज्ञान प्राप्त करेंगे, जिसके पालन से हम भगवान न हो सकेंगे। जब आपको तुम भक्तों की संगत मिलती है तो आप क्या होते हैं? अपने सम्मान के भक्तों की संगत देते
हो
या अपने बराबर के देते हो। हमारा क्या भाव भाव होना चाहिए? क्या मित्रता का भाव, मित्रता का भाव, मित्रता का भाव का अर्थ है ये
भाव हम
1 साथ जुड़कर सेवा के भाव, आएंगे मित्रता का भाव और जो देखते हो, यह व्यक्ति आपसे कम ज्ञान लगते हैं, गे बदी के भाव होना चाहिए, दया का भाव होना चाहिए। तो साधु संघ का गुणगान। आप पूरे शहर में पढ़ते हो। और साधु संगर के अलग अलग श्रेणी के हैं। जब आप उत्तम वक्त की संगत प्राप्त करते हो, आप इसलिए प्रसन्न होते हो, क्यूंकि आपको ज्ञान प्राप्त होगा। राजविज्ञान और बहुत ज्ञान। बहुत ज्ञान की कुछ कमी नहीं है, कोने कोने में है, ध्यानी ज्ञान की कमी है, की थे। इस विशु में अगर किसी चीज की कमी है तो क्या है ज्ञान? समाज में इस ज्ञान की कमी है। और इस आध्यात्मिक ज्ञान का मृतरघरनाबोला आवश्यक है। हमने कुछ दिन पहले पढ़ा था कि भारत में अभी कई हैं, वो यहाँ की गीता की शिक्षा दी जा रही है। तो प्रापा जी ने क्या लिखा था पापा जी की जब भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुई, पापा जी ने गाँधी जी को कहा आप अपने आप को गीता के भक्त समझते हो तो गीता का ज्ञान हमें देना चाहिए में चाहिए। देने में तो धान की, ध्यान में ज्ञान की प्राप्ति होती है। साधु संग के माध्यम से। तो चेत मा बबूने कहा भक्ति का बीज प्राप्त होता है। अनेक जन्म में गुजरने के पश्चात, 84 लाख की जल की योनी, साव यूनी, पक्ष योनी और जो जल में रहते हैं। और पक्षी, चिड़िया और मानव। और यह मनुष्य जीवन है, प्राप्त होता है किसे कठिनाई के साथ। और इसलिए शासन में कहा गया है अर्थात ब्रह्मा या अब इस वन के द्वारा क्या करो ज्ञान को प्राप्त करो। इसके द्वारा आप इन कष्टों से मुक्त हो। जो बुद्धिमान व्यक्ति है, वो इस ज्ञान का लाभ उठाने। तो हा अपने आपको भक्तों की सर में रखो। कई बार भक्ति का बीज को प्राप्त कर लेते हो। और भक्ति करते हो साथ और साथ साथ वटेडवीजीपगटहोने लगे बीज है। ये भाव बहुत अच्छा भक्त हूँ। मैं सबसे सुन्दर कीर्तन करता हूँ। ऐसे भाव जब आते तो हमें क्या करना चाहिए? बीज को क्या करना चाहिए? पर आप इन्हें अकेले पार नहीं कर सकते। आप भक्तों के संग में रहोगे, खास करके उत्तम भक्तों के संकट में रहोगे। फिर आप इन अनमुंडेडवीज को जल्दी चान, गे नहीं तो ये बीज रहेंगे, आप पहचान नहीं पाओगे। इसलिए हमें जहाँ तक हो सके साल संकट का लाभ उठाना जाए। और आगे उन्होंने क्या कहा? ये जो भक्ति का सुन्दर बगीचा है, दर्ज कैसे हो सकता है, कैसे हो सकता है? यह भी शास् में बार बार और पागल हाथी को अब छोड़ दोगे जंगल में बगीचे में बगीचा। तो यहाँ कहा जा रहा है शुकदेव को स्वामी के द्वारा कि जो संत हैं। में ने क्या कहा? प्रामाणिक भक्तों की संगत लो और इसके द्वारा भक्तियों का ज्ञान प्राप्त हो जाएगा। और इसी अध्याय में पीछे ब्रह्मचारी के विषय में चर्चा की। ब्रहमचारी किसे कहते है तपस्या तपसे तपस्या के पालन से खास कर के सो। sुगaiswामi हमें ये उपदेश्य दिला रहे हैं। जो व्यक्ति भक्ति योग के मार्ग में जुड़ेंगे, वो शास्त्र के आधार पर शास्त्र का क्या अर्थ है? धरमामद्षभगवान की वाणी यह नहीं कि कोई व्यक्ति अपने मन के आधार पर शिक्षा, वानी, आयाम, समान में क्या देखते हो। अनेक व्यक्ति ये दावा करते हैं। क्या ये उपदेश सासु के आधारित है? आप क्या देखते हो? तो 4 में प्रभा जी मायावादियों का वर्णन करते हैं। मायावादी किसे कहते हैं? कहते हैं कि भगवान है तो भक्ति होगी है। मायावदी व्यक्ति क्या होते हैं? भक्ति तो उनके लिए है जिनमें कोई गुण नहीं है, कोई योग्यता नहीं है। बाबा जी कहते हैं भक्ति योग उनके लिए है जो की असली बुद्धिमान व्यक्ति है। और हम यह नहीं कहते की भक्ति केवल उनके लिए है जो अनपढ़ है में और कुछ करने की शक्ति नहीं है। कई बार लोग आपको आरोप लगा दे, समाज से बचने के लिए हम लोग ने भक्तियों स्वीकार कर लिया। हमने भक्तियों को स्वीकार किया है क्योंकि यह है सबसे उत्तम मार्ग, यह है शासु का निर्णय और भक्तों द्वारा। क्या आपने शुद्ध इंद्रियों को शुर बना सकते हो? और जो व्यक्ति असली भक्तियोग में जुड़ता है, धन, मन धन का उपयोग है। इस लिए। तो पापा जी कहते हैं वर्षा जो भक्तियों का सिद्धांत है, यह तो गोस्वामियों ने अपनाया था। और श्री और उसके अलावा की माप भक्ति योग का जो मार्ग है, इसका पालन बड़े विद्वानों ने भी किया है। यहां सबसे पहले प्रभाजी कहते हैं गोस्वामी। गोस्वामी का अर्थ क्या है? जिसने अपने मन और बुद्धि पर वर्ष के हो? जैसे महाजन, महाजन, महाजन गोस्वामी का क्या अर्थ है? मान लिया पर पूरा हुआ शो। तो गोस्वामी के द्वारा यहाँ वर्णन किया जा रहा है। 6 गोस्वामियों का स्वामी गोपाल, स्वामी गोस्वामी गोपाल जो गोस्वामी है, ये बड़े ऊँचे खानदान के थे, हमें यह नहीं सोचना चाहिए की ये गोस्वामी थे, पर थे निज खान। गोस्वामी समाज में बहुत सा था। स्वामी गोस्वामी है ज्ञान के द्वारा,
और
रूप क्या क्या क्या दिया है हमें विज्ञान और जो सिद्धांत गोस्वामी ने छोड़ा है उनकी तुलना कोई नहीं करना। स्वामी सरा्ामजीवगसवामी जीवा स्वामी ने 4 लाख से अधिक स्टोक की रचना की है। और माना जाता है प्रसिद्ध थे रघिननदाजस्वामी बड़े धनी खानदान के थे, और उस समय उनका खानदान न गिना जाता था, वो 1 ही बेटे थे, और गिनाना शुरू से उनकी रुची थी कि वो जुड़े किसके साथ पर वो घर को छोड़ने पड़े। गोस्वामी ने सब कुछ त्यागा और उनके मन में क्या था। तो स्वामी वे बड़े ऊँचे खानदान की ओर से। उनके पिता उस समय के सबसे बड़े जमींदार थे, हर प्रकार की सुविधा थी, वो घर से निकलते ही थे, तो उनके साथ बाला स्कोर्ट पुलिस वाले होते थे। इन था और उनके कोई रूची भी। मे रूची केवल खेत मा प्रभु सेवा में तो जो गोस्वामी है, उन्होंने हमें क्या दिया है, अनेक गंध दिए हैं। और इन गंथों में है क्या गोसवामी। फिर उन्होंने दिया, फिर इन 2 भाइयों को कहाँ भेजा वृंदावन भेजा किस लिए? सासों की रचना करने के लिए और शासन की रचना उन सालों को खोजना जहाँ की भगवान ने अपनी
और
भगवान के और बंदों का निर्माण, बंधों का निर्माण भी धान में हुआ था। कब इन गोस्वामी की प्रेरणा से जो अनेक प्रसिद्ध बंदर थे, सबको मुसलमान राज्य के समय सबको लगभग छोड़ दिया था। तो गई पुजारी ने, भगवान की विगरा को लेकर, जयपुर गए जयपुर में, देखते हो नेक, बंदों में मुर्तियां जिनकी उपासना जिनकी स्थापना को हो गई थी। पर जो बने थे इनकी पूजा भी गोस्वामी ने की थी। ऐसे राधा गोविंद गोस्वामी की प्रेरणा से, तो जो गोस्वामी हैं, उन्होंने हमें क्या दिया है भक्ति विषय में ieजञानऔrgosami और जो गाम थे, उसे लक्ष्मण किया लक्ष्मण के मन में सदा 1 ही भाव रह दादा क्या राम राम की सेवा सीधी ऐसी हो गई थी मेरा कोई सेवा नही, जो भी कार्य में करना चाहती हूँ मेरे करने से पहले, तो बड़ी गुरु के पास क्या घरेलु कार्य है, वो सीधा देखेगी जिम्मेदारी होगी तो है लैक्मे उन्होंने हमें शुद्ध भक्ति योग का ज्ञान दिया है। मीरा के गुरु थे, जिनका नाम था उनके गुरू थे मायावादी भाव। तो रामनुजा जैसे उनके शिशे बले वो सीखना चाहते थे, वो देखना चाहते थे। ये मायावादी जो है क्या सिधांत देता है। वो उनके शिष्य बन गए। तो गुरु ने देखा कि ये शिशे तो बहुत तेज है हो और सोच रहे थे। इसका वध किया जाए। तो उन्होंने ऐसी योजना की थी की उनका वध और राम कृष्ण भक्ति का ज्ञान दिया है। और उन्होंने अपने प्रचार से जो मायावादियों का भाव था, उसको फिर आगे चेतन प्रकट हुए किस रूप में चेतन ग सागर के आगे सबसे हो, मैं क्या हूँ, मौसम पतिता बाबू, मैं तो पापा 7 बजे से कह रहे हैं। भक्ति का जो मान, भक्ति का जो ज्ञान है, ये हमे गोस्वामियों के सिद्धांत के द्वारा प्राप्त हो रहा है। सिद्धांत गोस्वामी ने छोड़ा है, किसी ने नहीं छोड़ा। तो गोस्वामी ने हमें क्या दिया है। अनेक गंध जिनमे भक्तियों की महिमा ज्ञान प्राप्त होता है। और जो गोस्वामी हैं, भक्ति का ज्ञान दे रहे हैं। और चेतन माप ने क्या किया, उन्होंने भी कृष्ण भक्ति का ज्ञान दिया। चेतन माप प्रकट हुए थे। भक्ति के ज्ञान का प्रचार करने के लए चेतन ने भक्तों को क्या आदेश दिया है। जी से मिला क्या और शुरू से प्रकट हुए थे। उनके मन में 1 ही भाव था, छोटे थे, रोना बंद करते थे। तब जब पड़ोसी नाम का उच्चार करते, चेतन नाम का प्रचार किया और चेतन इनाम करते थे। हजारों लोग जुड़ जाते थे। नासी में। 1 समय उनकी चर्चा हुई थी। प्रकाशन सरस्वती है, मायावती और मा बने, सबको हरा दिया। और फिर सारे मायावती सन्यासी क्या बन गए, सारे गये नाम करने। वरना। तो चेती ने महा प्रभु लोगो को जोड़ा नाम चिति। प्रभु दक्षिण भारत की यात्रा करते थे तो दूर दूर से लोग आते थे, नगर दर्शन देने ले कर दर्शन लेते
ही
क्या करते थे, वो भी प्रभावित हो जाते थे। इस प्रकार पूरी प्रजा को क्या बना दिया था, बना था, वो है भगवान कृष्ण। बुलाना भगवान की कृपा के बगैर कोई हरिनाम का प्रचार नहीं कर सकता। माँ प्रभु की भविष्य बनी थी क्या पृथ्वी की। 1 दिन ये हरिराम पहुंचेगा दुनिया के उन में ठाकुर ने क्या कहा था? बहुत ही जल्द, 1 महारथी होगा। स्वयं भगवान है क्या शुद्ध भक्ति का ज्ञान दिया, जो महाजन है, गोस्वामी है। इन सब ने हमें क्या ज्ञान दिया? कि भक्ति रोग। तो शास्त्र में शुरू से अंत तक हमें क्या ज्ञान प्राप्त हो रहा है, भक्तियोग का ज्ञान प्राप्त हो रहा है। तो यहाँ फिर से कहा जा रहा है कि हमें संतों के मार्ग पर चलना चाहिए, संतों के मार्ग पर चलोगे। तो आप असली धर्म को प्राप्त कर सकेंगे। तो वो सदा प्रसन्न रहेंगे। यहाँ इन 2 शब्दों का उपयोग किया गया है। सुशीला सातवां, सुशीला सातवां। इसका क्या किया गया है? उनका जो आचरण है, बिल्कुल शास्र के आधार पर होना चाहिए। तो यह आवश्यक है कि हम भक्त बन रहे हैं। आचरण कैसा हो? सास ठाकुर के विषय में क्या कहा? उन्होंने कहा कहीं में प्रचार की शक्ति है, पर आचार नहीं है। वो गए हो का आचार है। और रात में दोनो गुण प्राप्त है। आचार भी। पर अगर हम प्रचार करेंगे, आचार ठीक भी रहेगा। लोग क्या कहेंगे को ढोंगी। शादो तो भक्त का भी होना चाहिए, वहाँ पर 4 भी होना होना चाहिए। क्या मतलब ही प्रैक्टिस व प्लीज। हम जो देश देते हैं, उसका पालन भी करें। यह नहीं कि हम लोगों को बड़ा बड़ा सिद्धांत सिखाए। हमारा विपरित हमें अचार रखना है, वहाँ पर चाय भी रखना है। यह आवश्यक है। इसलिए आप देखोगे की प्रापर की गंध में इस विषय का वर्णन बार बार किया जाता है। क्या अचार भी और और ये दोनों का पालन करेंगे से ज्ञान प्राप्त होगा। तो जो भक्त हैं वो अचारियों की शिक्षा के आधार पर चलते हैं। हम भक्ति योग में रहेंगे। तो असली आनंद प्रात भगवान कृष्ण देव की शिक्षा प्राप्त करते है। भगवान कृष्ण देव ने भगवान के अवतार है। तो भगवान कृष्ण देव ने अपने पुत्र के माध्यम से पूरे मानव समाज को क्या उपदेश दिया है। तो देवी हे मेरे, तुम सबको तपस्या का पालन करना चाहे। तपस्या का अर्थ है प्रभाग, सेवा में सेवा के अनुसार। और उसमें हर कठिनाई को भी से दे। सफलता चाहते हैं। नियो पर वश ना जाए। फेरियो वश करने के लिए क्या आवश्यक है? या भक्ति की विधियों का पालन करो? जब हम भक्ति की विधियों का पालन करेंगे तो शुरू में जैसे हमें आदत है पर जल पा की और जीप की तपस्या का क्या क्या रूप है? जीप का उपयोग करें केवल और प्रजल्प से बचे। मी कहते हैं किस प्रकार आपकी भक्ति रस हो सकती है। और 1 माध्यम क्या है? पुजापा प्रजल्प का अर्थ है वो चर्चा जिसकी भक्ति से कुछ सम्बल नहीं हो। जैसा की हम सब चर्चा करते रहते हैं। तो वो है पुजारा। प्रजल्प करोगे रूप में क्या कहते हैं? भक्ति जायेंगे, संघर्ष न होना। और और 1 क्या है हमारा यह वाली द्वारा क्या करें में भगवान सुनील की तपस्या का वर्णन करते हैं। मन की और, तो जीप द्वारा, वाली द्वारा क्या करना चाहिए? भगवान ज, कृष्ण कथा और कृष्ण कथा इतनी गहरी है।
या
1 अध्याय भी पढ़ोगे। तो पूरी जिंदगी में सारे प्रभाव। तो हमें जीव द्वारा क्या करना चाहिए कृकथामेरूी? और यह है। तो आप पैसे का पालन करो, उदारण के लिए जीव का वर्णन उपयोग करो। भगवान का गुणगान करने के लिए कृष्ण का की चर्चा और वाणी का उपयोग करो। किस लिए? कृष्णा में क्या कहते हैं जो मुझे भूल लाय लगाए। क्या कह ते है? इससे हमे बचना है हम गायेंगे। तो क्या खाये कृष्ण कृष्ण प्रसाद में इतनी शक्ति है। कृष्ण प्रसाद द्वारा अनेक व्यक्ति जुड़े है माध्यम उनका परिचय हुआ था। कैसे प्रसाद के द्वारा। तो वाणीदाृण का उच्चारण करो और प्रसाद स्वीकार करो। जब हम वाणी का, वाणी को पिजलपासेदूरलेजाते और भगवान के गुण करने का प्रयास करे, तो शुरू में तो तुप्सेकाअर्तहै वो चली has जब हम परीक्षा का पालन करें, उसके बदले में। आपको क्या मिलता है? सो क्या, आपको, आध्यात्मिक सुख मिलेगा, आनंद मिलेगा। और ये आनंद का रूप क्या है, यह केवल बढ़ता ही जा रहा है। peru happens go on inकीजiंगबदसमाज में मानद आपको भूख लगी है। तो पलीचेपादीखाओगे पेट थोड़ा थोड़ा, फिर आप ऐसी सीधी मे जाओगे जवाब करोगे। और नहीं चाहिए बस नो। भगवान के उच्चारण के विषय में जितना आप लोगे उतना ही दिल करेगा। और लेने के लिए। कभी आपको महसूस होता है, कभी महसूस होता है, हरिनाम करने है। अब थोड़ी छुट्टी रहने जैसे की जो तार छुट्टी होती है, आपको लगता है कि 5 दिन हफ्ते में हमने जॉब किया था, तो 2 दिन की छुट्टी ली है। कभी आपको लगता है की जैसे की बच्चे जो स्कूलों में पढते हैं, थोड़ी देर पढ़ते हैं, फिर छुट्टी हो जाती है। आप कभी चाहते हो, छुट्टी मिले स्कूल के बच्चे 2 महीने की छुट्टी मिल जाते है। आपको लगता है क्योंकि आपको इस हर नाम के उजाले से क्या प्राप्त हो रहा है। आनंद? आपको कभी ऐसा नहीं लगता कि हमने बहुत कर लिया है। हमेशा यही सोचते रहना चाहिए, हमने कुछ भी नहीं किया। और जब हम इंडियन का उपयोग करे भगवान की सेवा में, तो द्वारा, तो भगवान निदेव कहते हैं अभी मनुष्य जीवन प्राप्त हुआ है, इसका दुरूपयोग मत करो, इसका उपयोग करो। किस लिए? तपस्या का पर, तपस्या का लक्ष्य क्या होना चाहिए? भगवान की सेवा भौतिक जीवन में भी तपस्या है। बहुत खास कर के आज की में यहाँ की रसम आपका भय रहता है। ये वायरस आपको नहीं पकड़ ले। तो ये भी बहुत तपस्या करती है। और यह ऐसी तपस्या करो जो भगवान की खुशी को हम भगवान का गुणगान करते हैं और बचते है कृष्ण प्रसाद स्वीकार करते हैं और दूसरे परिसर खाने से बचते। तो हमारे इंडियन का उपयोग होना चा। सदा भगवान की सेवा में। और इस विषय में सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है जो आप बार बार पढ़ते हो किसका अमरीश मराज का। इस प्रकार उन्होंने हमें शिक्षा दी, मनबुद्धि इंडियन का उपयोग करना चाहे। और इस शिक्षा का पालन करोगे तो बदले में क्या मिलेगा? हा जी कहते थे, अब सागर के किनारे में जाओ। और जो लेने आती हैं, उनकी ऊँचाई की सीमा है। पर भक्ति के माध्यम से कोई सीमा नहीं है। आप जितना भगवान होगे, उतना ही जाना क्या प्राप्त होगा, आनंद प्राप्त होगा। और भक्ति का आनंद है। दर आलवेज क्लीजिंग ऑलवेज इनक्रीज, आपको कभी ऐसा महसूस नहीं होगा। अब गीता पढने की जरुरत नहीं है,
गीता
स्वाभाविक पड़ी है। जब भी जब पढ़ते हैं तो कुछ न कुछ नया सन्देश मिल रहा है। तो आज की श्लोक में ये उपदेश्य मिल रहा है। हमें स्वामी के माध्यम से की, हमें भक्तियों के मार्ग में चलना चाहिए। ये भक्तियों के जो सिद्धांत है, किसके द्वारा प्राप्त हो रहा है, संतों के द्वारा, ये जो विज्ञान है, संतो के द्वारा प्राप्त हो रहा है। जैसे की उदाहरण देते हैं 1 फल अगर आप ऊपर से नीचे भेज रहे हो अलग अलग व्यक्तियों के द्वारा, तो वो उसी रूप में पहुँच जायेगा। अगर आप ऊपर से पेड़ की चोटी में बैठकर किसी आम को फेंकोगे तो जीवन में पहुँचे तो क्या हो जायेगा जायेगा। तो हमारा सौभाग्य क्या है की हमें यह ज्ञान प्राप्त हो रहा है। इसलिए गीता में ज्ञान आपको रूप प्राप्त हो रहा है। इसलिए अगर आप इसका उपयोग करोगे। क्या लाभ होगा आप के ज्ञान का ज्यादा ज्यादा प्रभाव पड़ेगा, असली संदेश को तो पूरा लाभ मिलेगा। तो यहाँ शुगवुसवमीकहरहे है कि जो भगवान के शुद्ध भक्त हैं उनकी संगत का वर्णन श्री केसुविधा तो भगवान के जो शुद्ध भक्त हैं उनका व्यवहार शासन के आधार पर रहता है और उनमें गुन है, अचार भी है और प्रचार भी है। और इस यह असली आनंद का मार्ग और जो भक्त इसे स्वीकार करते हैं वो भी ऐसे बन जाते हैं। हमारे जीवन में भय भय है जैसे कि 1 बच्चा पिता के साथ चल रहा है। अगर आप अंधेरे में जाते हैं जल्दी तो भय से रहित होने के लिए क्या है, उपाय भी रही हो। और ये जो मार्ग है देश कहाँ पर है शास् भगवान? तो शास् में क्या है अध्यात्मिक ज्ञान जिसमें किसी प्रकार की कमी नहीं है। यह बहुतिक ज्ञान चाहे आपको किसी प्रस् व्यक्ति द्वारा प्राप्त हो। इसमें कितने प्रकार के दोष है। 2 हमारे इंडिया, आज हम 1 दुसरे को देख सकते हैं, हम के बाद बिजली है। अगर बिजली चले जाए नहीं देख पाओगे तो हम सब गल्ती करने की गलती, हम सब जल्दी करते हैं और हम झूठ बोलते हैं या अपने आप को बड़ा दिखावा करते है। बड़े दवा। तो 4 प्रकार के दोष आपको मौत ज्ञान प्राप्त होता है और बरवेिज्ञानमेंप्राप्त होता है। और कोई कमी नही है ने कोई कमी नहीं। आज भी हम भागवात गीता को पढ़ रहे हो जिसका उच्चारण भगवान ने किया था। कब भगवान, क्या बोला ये ज्ञान सबसे पहले किस को दिया था यह मैं। आज की कथा पढ़ोगे की महिमा ज्ञान प्राप्त हो गया है। तो आज की कथा चूरेगुस्वामीने कब दी 5000 साल पूर्व। और उन्होंने कहा कि हमारे प्रमाणिक पुराणों में, प्रामानिक पुरानों में क्या है, अपनी शक्ति है यह ज्ञान है किस प्रकार 1 ब्राहमण विचलित हो गया था और किस प्रकार से वो बच्चा नाम विधायक। तो 5000 साल पहले। शुगर गोस्वामी ने कहा हमारे प्राचीन शास्त्रों में करता है और फिर उसका ना तो दूसरे शब्दों में आपको। उदाहरण के लिए वाजिम की कथा प्राप्त हो रही है। ये रचना बीती होगी 6, 7, 8000 साल। वो ज्ञान हमें प्राप्त हो रहे हैं। तो ध्यान में ज्ञान में कोई दोष नहीं, कोई कमी नहीं। ज्ञान विज्ञान भगवान में कोई अंतर नहीं है। भगवान के नामों का उच्चारण चिनसाकृष्णपूशुध, मुक्त भिन् न। तो भगवान के जो नाम हैं उनसे भिन्न है और भगवान के नाम है। उनका कोई भी उच्चारण करे उसको क्या मिलेगा लाभ मिलेगा सो, ध्यान दें भगवान से है इसलिए आप गीता को रोज सुनते ही सुनोगे। भगवान के नाम भगवान से क्या है। इसलिए आप जितने प्रयास करोगे भगवान के होने के लिए उसी मात्र में आपको भगवान की सुरक्षा भी प्राप्त होगी। भक्त ऐसा साधन है जिसको हर व्यक्ति अपना सकते हैं हमें कोई व्यक्ति नहीं मेरा यात्रा कर सकते का नाम नहीं ले सकते हर व्यक्ति ले सकता है। तो इस दिन में आप पहले तो अनेक प्रश्न पूछ रहे हैं और इसके पश्चात आज मन की कथा का वर्णन होगा जिसमें क्या शिक्षा मिलती है की महिमा भगवान के नाम जितना लोगे उतना ही कम है भगवान के शास्र है जितना पढ़ोगे मैं कभी साल से पढ़ रहे हैं अब छूट चाहिए क्यूँकी भगवान के नाम है तो परीक्षण उपदेश दे रहे है की जो शास्र के प्रमाणिक है शास के आधार पर है उसके पालन से हम भगवान कृष्ण रखेंगे। आज हम कथा पढ़ोगे और आप पढोगे या याम राज ने कहा अपने दूतों को, अपने सेवकों को भविष्य में उलेक्ेगोमतछूना इन्होंने क्या किया है भगवान नाम क्या है भगवान के नाम में पूरी शक्ति है और हम सब का सौभाग्य है की चिति महाप्रभु की कृपा से महान संदूकी कृपा से हमें असली ज्ञान प्राप्त हुआ है दिल होकर उत्साहित पूर्वक लाभ उठाना चाह। भगवान क्या कहते हैं जितनी बात श्वर में क्या है सो हम सब का यह प्रयास होना चाह रुक जाए आपका बहुत बहुत शुक्रिया आप सब भक्तों ने बहुत मेहनत की और सबके प्रयास से कितने बड़े गीता मेरे खयाल से इसका कम्पलेश आपका देली का टू
we dont
today my noleg is in the early total, you know to in the man। बहुत बहुत शुक्रिया। bse 2 mahine, ca, hafte and books at the caving party test may be gobipawcanxxpanvo dewotytedewortis feeling avlemniceyou can say fudeodiscacebte expीrieंस कोपी भाल
धन सब लोग तीज बहुत ही कबसे, बहुत सुन्दर प्रसंता सोच की
आप किसे की राजधारी कौनसे शहरों
में गए हम पहले गोली में थे कुल ऐसी बोल से भोपाल सागर सागर से रायपुर रांची सो कुरियन पी खबर की छत्तीसगढ़ झारखंड
कितने मा
बहुत खुश थे हम लोग तो ऐसे कोई तपस्या नहीं रहता है फेस्टिवल र सी सुबह प्रसाद भी फेस्टिव में ऐसी इतनी गाड़ी
आ जाते थे
लोग भी बोलती है बहुत लोग कितनी वेलकम की इतने प्रेम से सब लोग करें बोडी का तो
रात में ही
बहुत सुन्दर सुन्दर
बुद्धि
देता है लोग का कुछ बोलना भी नहीं आता ना। बहुत सुन्दर कर प्रचार कर रहा है
सो
गुरु को हो सकता है, गुरू को पसंद कर सकता है, हरियाणा में उची प्राप्त कर सकता है अच्छा प्रचारक सारे से दूर हो सकता है सब वापस कौनसे स्पार्ट में जायेंगे
सो
बहुत अच्छी सबका का
मन
आपके। एक्पीरियंस
तो आज शिरपबालजीनेजसा बोला है कि मैं ऐसा करना हुआ जिसमें सारा संस्था रस। तो अगर ये हमसे पूछे, हम बताना चाहेंगे कि अब वो ऐसा घर बन
चुका है
तभी हम लोग जब जाते हैं तो करने 2 किसी भी जगह पर जाते है सब जगह रहने का, खाने का साफ इंतजार में जता है ठाकुर जी के छिरकुाजीकेपासहै तो ये बुरा और हमें जो है मैं छोड़ गया था तो वहा वैश्वक मंदिर के आप की गाड़ी सी है जहां टीचर नहीं है गाड़ी किचन की जरुरत नहीं जहाँ पर की सुविधाएं तो ये सर जी की कृपा और बड़ी। बहुत बड़ी बात है की हम लोग प्रचार करने जाते हैं। जहाँ पर हमारे कहीं तेजी का साइ सेंटर या मंदिर नहीं है तो वहाँ पर जाते है लोग हम लोग प्रचार करने आते है, रोड पर खड़े होते हैं तो लोग मारे अपने आप को। हम लोग गाड़ी खड़ी करते हैं, गाड़ी में ल के जाते है और कहीं तो 10 करते हैं कि अरे आप लोग यहाँ सो ऐसे में क्या किसी को पता नही में तो हम लोग ज्यादा दवा जाते है यहाँ क्या होगा लेकिन शापुर कितना वहाँ गाड़ी ले। इतना खुश कौन वाले सवाल बोलो अपने गुरु हा
मतलब
कुछ है, आपका खुद तो हमने जो है पुस्तक तो वहाँ पर उसकी बाइक बाइक खराब हो गयी,
क्या हुआ
गाड़ी खराब हो गई है। मैंने बोला कि तुम गीता को ठीक हो जाए। मैंने बोला मैं गारंटी दे रहा हूँ, गीत जा र सो उसने मैंने बोला बार डिक 1
माला
मे दोस्त
तो
बोला यार नंबर जल्दी गनेशा
मोबाइल है
मोबाइल नंबर पर
बात मैंने सोचा यार
व्यक्ति का
र
तो क्या हुआ होता। गाड़ी खराब हो गई बोला गीता सह जाएगी बोलो अच्छा पक्का मन से गीता ले ली, गीता ले लिए स्टार्ट करो वो स्टार्ट हो रहा है, स्टार्ट हुई बोले
क्या स्टार्ट
लेकिन सना
case
in
a हाई कृष्ण हर प्रयास से तो
देखा की बहुत पुरानी किया को किस
करने के लिए, मतलब इधर जायेंगे उधर जायेंगे तो हमने मना को बहुत हल किया इधर उधर जाने के लिए। फिर लास्ट मे मे
रामा रामा रे रे।
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