क्या हर कोई शुद्ध भक्ति कर पायेगा? | SB 6.1.19 | 21 Aug 2022 | Delhi | Srila Gopal Krishna Goswami

In this lecture Srila Gopal Krishna Goswami reflects on the evolution of pure devotion (shuddha bhakti) from the early 20th‑century encounters with senior saints to the present day. He recounts the 1922 meeting with a senior devotee (referred to as Dadaji) and the lineage of saints who inspired the propagation of bhakti. A major focus is the arduous effort required to publish sacred texts such as the Bhagavata and the three‑part Shiva‑Bhagavata, describing how the early disciples manually set type, printed on hand‑operated presses, and overcame severe material shortages. The speaker emphasizes the role of determination, self‑sacrifice, and service in realizing the mission of spreading bhakti, linking these qualities to the teachings of Krishna. He discusses the tension between birth‑based caste notions and the bhakti principle that spiritual status depends on qualities and devotion, citing historical examples of Brahmins who either upheld or transcended caste constraints. The lecture also mentions the establishment of educational institutions (e.g., Slipri Rock College) to disseminate the teachings abroad, and the need for modern devotees to study original Sanskrit scriptures, their translations, and commentaries to grasp the true essence of knowledge. Throughout, Goswami urges listeners to confront challenges with humility, to prioritize pure devotion over material concerns, and to adopt practical steps—such as regular study, service, and sincere prayer—to cultivate authentic spiritual progress.
Chapters
भगवत duशeनावiदेवa si आवाज कम है, विषय सुनाई दे रहा है, नहीं सुनाई दे
रहा है,
बैठ गया था और बालाजी सुनाई दे रहा है। भागवत का श्लोक है और इसका उचारण कौन कर रहे हैं? यमराज हो इस में आप है ना महिमा विश्व ज्ञान प्रात करते हैं। और इस में यामुलदूधसे उन्होंने यमराज से प्रश्न पूछ या मुदो कौन है यमराज के रि और यामराजी कौन है? हम सबके का हिसाब? किताब रखते हैं? यमराज और कर्म के अनुसार तो आज भी जो था जैसा आप जानते हो जन्म हुआ था में खानदान और बचपन से साथ की ध्यान किया था, उन्होंने विवाह किया विवाह के पश्चात भी विधिक शासकों का आयोजन करते थे पूजा और 1 दिन आज मेरा जंगल मे पूजा के लिए लाने उन्होंने देखा 1 वैश्य को अपने प्रेमी तो इस घटना के प्रति बहुत आकर्षित हो गए थे और उन्होंने हस्ते हस्ते उन्होंने स्पेशल का चिंतन बना दिया था। इसके कारण गाय के बढते गया और उन्होंने को पहले पत्नी के रूप में रखा नौकरानी के रूप में उनके कितने 10 बज है जिनमें सबसे पूरे बेटे का नाम क्या था। ये प्राचीन रिवाज है यह बच्चों को वहाँ के नाम लगभग हर घर में, मुसलमानों में भी आप देखते हो दान देते हैं। तो इन कुरान के नाम के निर्भर किश्टा जोन में से वाइपर के नाम है। तो भारत में निवास बच्चों को सास नाम देते। आज के वाथ में कई बार पौधा पिता आते हैं ये विनती बच्चों को नाम दे। 2 जब नाम देते हैं तो धार्मिक नाम हो। वे कहते हैं ऐसा नहीं यार ये नवाज भी खत्म हो रहा है। आज बी ने छोटे बेटे का नाम रखा था क्या और कई बार छोटे बेटे को पुकार दे जमीन अपनी वैश्य पत्नी को संतुष रखने के लिए ने प्रकार के पाप के कार में उन्हें जोड़ना पड़ा और उनके पाप इतने बढ़ गए ने निर्णय किया क्या अब को खाना चाहिए? और जैसे ही एकदम घबरा गए उन के अपने यहाँ पर दूसरे की तस्वीर देखिये एकदम गए और घबराकर उन्होंने क्या कहा बेटे जैसे उन्होंने नारायण कहा इन सब को बड़े प्रेम से, सदा से सहन किया वह तुरंत पहुंच गए है। विश्णु लूत है बड़े खुबसूरत है विश्णु जैसे दिखते हैं बड़े पद रात और उनका चेहरा देखते ही घबरा विशु उपस्थित हो गए। विश्णु यहाँ यमदूतों को रोक दिया। आज मन को ले जा रहे थे, वो जो यावदु थे वो विचलित हो गए थे। क्यूंकि ये पहली बार घटना बीती थी, उन्हें भेजा था या राज दे किसी को और किसी और के बीच में रुकवा लिया। यहाँ दूर गए यामाहा उन्होंने पूरी घटना सुनाई और क्या लोगों में यामा जी क्या कह रहे हैं और शिक्षा दे रहे हैं या पूछते थे की हमारे स्वामी ही सुप्रीम ेथोरिती है। तो उन्होंने देखा कि किसी और के भा अधिकार है, वो आश्चर्य हो गए है। तो आज में शिक्षा देने में उनके प्रश्नो का उत्तर दे। आज इस लोक में आप क्या पढ़ते हैं? आप? किस लोक में सबसे पहले आप ये पढते है की धर्म का अर्थ है भगवान। आज कलयुग में बहुत कम लोग धर्म का पालन करते हैं। धर्म के हम किसी नाम के लिए, नाम के लिए गुरु बना गया, नाम के लिए था बन जाते हैं। असली असली धर्म को कोई सबधननहीथाय। धर्म का अर्थ है भगवान की प्रभा जी कई बार इस श्लोक का उपयोग करते थे, ये साबित करने के किया what is real religion relign? और ये यमराज क्या कह रे वो सी धर्म है कहाँ से पास होता है? वो है जो देवता है, वो भी ऐसी धर्म का ज्ञान है। और जो वेदों का संदेश है, उसमें कर्माकर का वर्णन भी है। कर्मा खान के द्वारा आप अपने आप को संतोष नहीं कर सकते। कर्माकर क्या होता है? 1 प्रकार का धन्धा हमारे हम आपके लिये ये करेंगे, उसके बदले में ये सोचते है। तो कर्माकर के द्वारा भी आप असली धर्म का पालन नहीं कर और वेदों का संदेश है वेदों के संदेश में। वेदों के सन्देश में कर्माकर का भी वर्णन है। पर परम भगवान द्वारा यह कहा जा रहा है कि धर्म का अर्थ है भगवान की मालिक। योगेश हमें परम भगवान द्वारा प्राप्त होता है। और किसी अध्याय में कहा गया है कैसे है, असली धर्म है। यह ज्ञान आपको इन प्रति के द्वारा प्राप्त हो जाता है। बोल रहा है समूह। तो असली धर्म जो है वो हमेशा मलना चाहिए भगवान के भक्तों के द्वारा। उदाहरण के लिए, भाग गीता में भगवान ने गीता का सन्देश दिया। किसे का। यह से मैंने पहले सूर्य के देवता विवान को दिया था। समय के साथ कॉलेज लॉस, मैं फिर से तुम्हें ले रहा हूँ। भगवान ने ज्ञान को क्यों दिया। इस और को क्यों नहीं चुना। भगवान ने कहा कि जो मेरे मित्र हो, भक्त हो, गाने का भक्त हो। इसलिए तुम इस िविज्ञान को समझ पाओगे। तो अगर हम भगवान के संदेश को समझा जाये। हमें इस ज्ञान को स्वीकार करना चाहिए किसके द्वारा अपने समक्ष देख सकते। इन 1 व्यक्तियों ने बाबर गीता का निवान किया और आप क्या देखें नुवाल में अपना भाव दिया है जिसे कार को इसका कोई लाभ नहीं है। और जब से पापा जी की लाखों की संख्या में लोग जुड़े हैं सारे तो हमने पापा जी का s के कई कnटरब्यूnेत विश्व वाणी को पूरा करने ही वहाँ विश्ववाणी 1 दिन विश्व के हर कोले में यही नाम का उच्चारण होगा। विश्व के लगभग किसी कोने में जाओ। आप को बाबाजी ने इन के अनुमान में उसी भाव से प्रस्तुत किया। इस भाव से भगवान ने बोला और अर्जुन ने हमारा सुबह गे हो, हमें प्रमानिक प्रतिनिधियों के द्वारा ज्ञान प्राप्त हो। वह क्या होगा। विज्ञान के पालन से मार से जुड़ सकते है। प्रभु जी ने अनेक घर दिए है के जो ग्रंथ हैं उनकी प्रशंसा विश्व के कई स्कॉलर्स ने किए। scalar we cok, मे नाम भी सुना है कॉक्स ने पापाजी के विषय में कहा he was when i thousand नो n in a million no n n n मिलियन मिलियन प्रभाजी को नहीं मिल रहा, प्रभाजी ने उनके ग्रंथों को पढना शुरू का swami मिलियन करोड़ करोड़ लोगो में बड़ी सरल भाषा में संदेश हमें यह नहीं सोचना चाहिए में कुछ कमी रह गई है। everything you need to know it। विज्ञान की आवश्यकता है हमें इन गधों को पढ़ कर बढ़ा सो जो जो कई हैं, जो भाग्यवान व्यक्ति है, वो असली धर्म का पालन करते हैं या यामरावजीकहरे हैं। असली धर्म है पर भगवान की माने और जो असली धर्म का प्रचार करते हैं वो ये नहीं सोचते हैं वो करवा कर में रूचि नहीं लेते। 10 नाम वा नाम क्या है? क्या है? यह सोचा है कि हरी राम के द्वारा हमें बहुत सुख बौधिक राहत मिलना चाहिए में हैं असली धन में प्राप्त हो कहाँ से? पर हम भगवान द्वारा और पापाजी के काल प्रिय की समाप्ति में कहते हैं उसे धर्म क्या है। सब धर्म को छोड़कर सो सारे वैदिक सासों का वन किया गया। जब उन्हें लगता था की मेरी रचना में कुछ कमी है कहाँ गए? क्या करे भक्ति के ऊपर? हमें क्या दिया जो सबसे उत्तम ripnfodavidicnolेg साहित्य का पका हुआ फल है, वैदिक साहित्य का संदेश है, वो असली संदेश है। और ये जो फल है, ये आला है गुरु परंपरा के द्वारा। और यह फल गुरु परपरा के द्वारा, इसलिए जो है वो है। उदाहरण देते हैं। अगर हम 1 फल को अनेक व्यक्ति द्वारा चाहोगे तो यथा रूप पहुँचेगा। अगर कोई पेड़ की चोटी में बैठ कर ऊपर को नीचे फेंकेगा, नीचे पहुँचने पर क्या होगा हो जायेंगे। इसलिए यह आवश्यक है कि हम इस शिक्षा को प्राप्त करें किस के द्वारा श्री भगत के दसवीं में पढ़ते हो। स्वामी ने कहा, हमें ये दिव्यज्ञान प्राप्त करना चाहिए किस के द्वारा, परम्परा के द्वारा मालिक संदेश को गुरु परंपरा द्वारा स्वीकार करेंगे का असली नाम में पहुँचेगा। और अगर हम यही सन्देश लेकर अपना भाव जोड़ दे। इसका पूरा लाल मिलेगा, कृष्णा भक्त, निस्काम मुक्ति, मुक्ति सीधी, गामी सरकार पढ़ते हो। हमारे कृषण के जो भक्त हैं, जिनका कोई भौतिक इच्छा नहीं है धर्म को पालन कर रहे हैं होने के लिए, भोले है वो सदा संतुष्ट रहते हैं। भुक्ति मुक्ति सीधी काम के द्वारा बोल ग्राम बोले रखते हैं वो सदा आसान है। तो श्रीमद भागवत हमें शुद्ध भक्ति का ज्ञान मिल रहा है। और शुरू से अंत भाग में 18 हजार लोग हैं और शुरू से अंतर यही संदेश मिल रहा है। क्या शुद्ध भक्ति इस ओल्ड यह तार पर में पापा जी कह रहे हैं कि हमें जो ज्ञान है प्राप्त करना चाहिए भक्तों के द्वारा और शुद्ध भक्ति द्वारा स्वीकार करेंगे तो इसका गहरा प्रभाव पड़ा। उस भगत में इसी शुद्ध भक्ति का वर्णन किया जाता है। और जब तक हम भक्ति को नहीं अपनाएं, जब तक आप को, तो यहाँ रोज कहते हैं। धर्म का अर्थ है भगवान गिवान और पारा महाजनों के द्वारा जो वाया महाजन हैं, ये भगवान के प्रतिनिधि हैं, जिनके द्वारा भगवान का सन्देश, ये जो धार्मिक ज्ञान है, हमे प्राप्त करना चाहिए हमारे गुरु के द्वारा। वो भगवत हमें महज मैं, मांगता, संदेश, कैसे को श्राप दिया था। इशान के पश्चात वह चाहते तो शाप का विरोध कर सकते थे। न्होंने गाय किया और उन्होंने संग बुलाकर पूछा किस ने वाला से क्या करना चाहिए? और स्वामी ने क्या उपदेश दिया। आपको भाग सुना तो बड़े ध्यान से भागो सुन रहे थे। बारिश में। वो कहते हैं, हालांकि मैंने कुछ खाया नहीं है, कुछ पिया नहीं है। जब भी मुझे बिलकुल भूख नहीं लग रही है, क्यूँ क्यूँ नहीं लग रही? क्यूंकि मुझे आपकी कथाएं सुनकर? इतना आननदाला है कि भूख लगी है भगवान की लीलाओं में, भगवान की उपदेश्य में रूचि लोगे और भौतिक आकर्षण से आप लीला की कथा में पढ़ते हो की इंद्र देवता बड़े क्रोधित हो गए थे। जब उन्होंने देखा कि इस बालक के कहने पर उनके पिता ने भाषियों ने यज्ञ रुकवा दिया। इंद्र ने क्या सोचा, मुझे ने शिक्षा देने। उन्होंने संविदा के बादल को आदेश दिया, जा ब्रज के ऊपर सबको बोल कर। और इतनी तेजी से पानी बढ़ रही थी। बारिश का हर भूल, पाले बारिश तो सारे ब्रजवासी डर तेज बारिश, व भक्त है। सुख में, दुःख में उनका 1 ही सहारा रहता है। सारे ब्रिजवासी हमारी तरफ देखते हैं। क्या किया भगवान ने गोदान प्रबध को बड़ी सरलता के साथ पाया। हाल के उंगली के नाखून के बल पर ये बृजवासी जो थे। 7 दिन, 7 रात के ले वासी बड़े गहराई के साथ के चेहरे को देख रहे थे और दीदी वो वहाँ के चेहरे को देख रहे थे। भूख भी नहीं लगी और पास भी लगे बिलकुल है भगवान पर नहीं गिरेगा, मे ऐसी बाहर गिरने चाहिए। छोटा घबराओ मत बाहर नहीं गया। तो जो ब्रिज वासी थे, बिल्कुल भूख नहीं लगी, बिल्कुल प्यास सी लगी। क्यूंकि बड़े घर के साथ मार के चेहरे को देख रहे थे। क्यूंकी मैं अमृत कहानियों को सुन रह हूँ? मुझे बिल्कुल भूख नहीं लग रही है, बिलकुल क्या नहीं लगी? इससे हमे क्या शिक्षा मिलती है? इस में ये शिक्षा मिलती है की अगर हम भगवान के देश में निरा में रूचि लें, हमारे मन को उनकी निरा में सस्ते बनाये, हम भी बच सकेंगे और हम भी असली संतुष्ट प्राप्त कर सकेंगे तो यहाँ पढ़ रहे हो। हमें किसी रूचि लेनी चाहिए, हमें शुर भक्ति में रूचि है। जो व्यक्ति ये सोचते हैं कि कम कर द्वारा जीवन का लक्ष्य प्राप्त होगा, वो गलत है। और कई लोग सोचते वीरों में जो ज्ञान है वो ही सबसे ज्यादा अच्छा ज्ञान है। तो वो यह नहीं जान। देंगे विधवा से ऊपर क्या है? शुद्ध भक्ति का ज्ञान जो कि परम भगवान ने दिया है। तो शुल्धभक्तिका ज्ञान हमें परम भगवान के द्वारा प्राप्त होता है। जो ज्ञान परम भगवान द्वारा प्राप्त हुआ है, उसका पालन करेंगे उसका प्रभाव पड़ता है, उसका लाभ उठा सके। तो जो भक्त हैं, क्या चाहते हैं, भक्ति ज्ञान को लाभ उठाना चाहते है। शिव भगत में शुरू से अंत इसी विषय का ज्ञान है। तो भगवान द्वारा क्या भक्ति का ज्ञान मिल रहा है। और भगवान में क्या कहते हैं में अनेक प्रकार के योग का वर्णन है। क्या कहते हैं भक्ति अगर तुम मुझे समझ न चाहो तो क्या है वो है शुद्ध भक्ति और शुद्ध भक्ति को अपनाओगे तो मुझे समझ भी यही निर्णय है। और गीता का भी यही निर्णय है। भक्ति को हर व्यक्ति नहीं स्वीकार करेगा प्रेस कॉन्फ्रेंस दे रहे थे अगर आपकी इतनी पक्की है, पूरा भरवा क्यो नही है? प्रबल ने कहा तुझे डाइमेंस ओनली यू पीपल पीपल वाईरल डाइमेंस सो। प्रभा जी ने हमें क्या दिया है शुद्ध भक्ति का ज्ञान जो कि असली निगरा है असली। और फिर सामी कहते हैं की शुद्ध भक्ति में इतनी शक्ति है। अगर आप आग बंद करके दौड़ोगे शुद्ध भक्ति में आप कुछ सेवा भी कर दोगे। कोई लाभ शिव भागवत के द्वारा हमें शुद्ध भक्ति और ज्ञान मिल रहा है। और गीता में कहते है मध्य जी क्या करो भाग बताओ पास और अगर करोगे क्या मिलेगा क्या मेरे धाम आओगे बिना किसी भगवान कहते हैं मेरे धाम में आओगे के हम डर जाते हैं। कंपनिया को कहती है मा अच्छा नहीं लगे, वापस कर देना। भगवान कहते हैं s to me i will prodect protect from all react। ये कलयुग का दुर्भागय तो हमे भक्तों की संगत में रहना चाहिए। साधु संग साधु भक्तों के संग में है। अगर भक्तों के संघ में रहोगे आपको में 1 व भाव से वार के दामों में रुचि लेनी चाहिए। इस कथा के द्वारा भगवान की महिमा का गान 1 उडीसा थे, 1 गुण था भगवान का म का उच्चारन कर रहे थे और श्रवत ठाकुर कहते हैं वो शब्द का उचारन कर रहे थे। दिन में इस भावना से नहीं है, इसके बदले में कुछ सुख मिल जाए। और उनका जो उचारण था था। तो भगवान के नामों में भगवान में अंतर है। में पूछते हैं आप लोग दिन में 1 जॉब करते हो, समाज में, 5 दिन काम करते हो, 2 दिन स्कूल में पढते हो छुटिया, अगर आप जज साहब हो। वो तो छोटी छोटी की कहना है कि बहुत तो लोग जो भी कार्य करते हैं उसे तंग आ जाते हैं। बात क्या है फाइनल बोरिंग आज दिन काम करते हैं तो 2 दिन फाइल का चेहरा नहीं देकर। पर भक्त कभी अनुभव होता है। 5 दिन वार नाम क्या है? तो 2 दिन छुट्टी मिल जाए। तो बच्चे कहते हैं नंदी भगवान के नामों का चालन करोगे, उसका लाभ क्या है? 1 लाभ है चेत में जो मैल है, बहुत ही आकर्षक है, उसे आप दूर कर तो बहुत आकर्षण को दूर करना है। और कलयुग में यह उपाय हमारे वो चाह रहे हैं। उन सब की इच्छा थी जो क्षेत्र है बार की, पुरुष बारी है, उसे सफल बनाना जरूर है। बढ़ाया जा रहा है। तो हमारे चारो ने प्रयास किया था, खास कर के उन्होंने अपने प्रति निधियों को भेजा जर्मनी यूरोप के सब लौट कर आ गए। े तो हमारे गोड़िवैशोंकेसनयासी सोचने लगे है। भगवान की भविष्य वाली तो है, लगता
नहीं है
सफल हो को पूरा विश्वास था क्या पूरा विश्वास था कि यह भविष्य वाणी सफल हुई। तो 1922 में, आज से सौ साल पूर्व ये साल जो है। इस में बड़ा सिग्नल है क्यूंकि इस साल सौ साल पहले भक्ती से दादाजी मिले थे। is hundred envers? क्सी प्राबाजीके जो पिता थे बकाना संतों की सेवा करते थे तो प्राबाजीका काफी अनुभव था संतों को मिलने का। वह प्राबाकीसेभी प्रभावित नहीं हुए थे। मलिक ने कहा यह 1 खास साधु है। मैं चाहता हूँ की तुम उसे मिलो। मैं अनेक साथ को मिल चुका हूँ ने कहा अपने शब्दों में litralलygragमीं जबर्दस्ती सी कर ले गए है जो कि चेतन महाबगोकेाको प्रभाजी या और जैसे ही प्रभाजी को या देश मिला, उनके 4 प्रभा जी इसी लक्ष्य को काम करने के लिए प्रयास करने के लिए योगी हस्ताक्षर में थे। उन्होंने उदार में जाने का प्रयास किया, फिर सन्यास लिया सन्यास लेकर आये में निवास जो वृंदावन में निवास कर रे थे, बड़ी कठिनाई के साथ उन्होंने ग्रंथ निवाद भी शुरू किया। प्रभाजी ने ग्रंथों का वाद शुरू किया उनके बाद कोई सुविधा नहीं थी zero कोई सहयोग देने के। nemen army you know what is one man army? वन मैन doing तो अनुवाद करते थे अपने हाथ से फोन में ऑफसाइडप्रेस नहीं था लेटर प्रेस था कम्पोज कर, फिर उन्हें छाप देते और फिर उन्हें कोई जान बाटने को जा करना पड़ेगा जहा से उसके पश्चात उन्होंने उनको किसी ने 1 टूटा वा टाइप कर दिया, फिर वो टूटे टाइप कर दे। उसके बाद प्रभाजी आधुनिक सुविधा तो प्रभा जी के जीवन में देखते हैं की कितना डिटरमिनेशन था भाव था उन में क्या बन के आदेश को पूरा करने का। वो क्या था की ग्रंथों को प्रकाशित करो और 1942 में भक्ति हजारों भक्तों के ब्रजमंडल कर रहे थे और तस्वीर कीजिए अगर भगवान को सुविधा दे तो क्या करना को बड़ी गंभीरता से। और जब शिव भागवत 3 भागों में प्रकाशित हो गई थी पापा आप मेरे पास हथियार है विदेशो में राजी चाहते नहीं थे कि विदेश में जाए बिना किसी हथियार के। जब गत 3 भागों में प्रकाशित हुई ने कहा गो टू फिर बाबाजी पैदा था कॉलेज में, इसका नाम था स्लिपरी rog college आपको समझ rok college grwalअग्वाल बाजी को निमंत्रण दिया था। जब वो मिसेज अग्रवाल के घर में ठहरे थे, बहुत से लोगों ने फोन करके पूछे थे ये साधु आया तुम्हारे घर में साधु कौन है? आज कल आप अमेरिका में हर कोयले में इंडियन्स को देखते हैं, उन दिनों में बहुत कम दिखते रहे। तो अग्रवाल ने 1 प्रेस कॉन्फ्रेंस शिया उसने कहा कि इतने लोग मुझे फोन कर रहे हैं। कौन है ये शालू? कौन है ये साल प्रेस कॉनफ्रेंस जिसे उन्होंने कहा roman suns wis caller from india is now in butler बटलर 1 छोटा सा शहर था, जहाँ की जीप बनती है, तो 1 प्रोफेसर था बटलर के परोस के कॉलेज का
ने
मी invityerसाधुgi पूछा लक्षय देने को तैयार हो, कॉलेज में बहुत खुश हो गए, ये थे विदेशो को प्रचार करने के लिए जी ने ला दिया स्लिपरी रॉक कॉलेज
में
है भक्तों के प्रश्न पर सोना पूरा, अब लोग देश में तैयार हैं सन्देश पापाजी अमेरिकन भाव वोसान छोड़कर प्राबाजीके मन में जिस भाव था, क्या डालना है बताना मन मन में भी, भाव में भी परंपरा के संदेश को आगे बढ़ाने का प्रयास करना है। ये भाव होना जाए तो अगर हम प्रयास करेंगे, अपराध होंगे, प्रयास नहीं करेंगे। हमें होकर वह किस सेवा में जुड़ना चाहिए। कई बार कठिन चैलेंजेस दिए जाते हैं। सेवा के पाया बाद पुरी ने को माने। क्या आदेश मेरे लिए चंदन लेकर आओ और हमें भी या रहना चाहिए। हर प्रकार के चैलेंज का सामना करने के।
गा।
गॉड हैव्स। दोज 22 वार का सहयोग करते हैं, स्वयं प्रयास करते हैं। भगवान को पसंद करने के लिए यह होना चाहिए। हमारा भाव की। जो भक्ति के लिए अनुकूल है, उसे आप स्वीकार करोगे और जो भक्ति के लिए प्रतिकूल है उसे क्या करोगे भी कहते हैं। जो भी आपको त्यागना, पड़े याग हो, पर कृष्ण भक्ति को आज से ये होना चाहिए। हम नहीं नहीं ट्रक चैलेंज, मिला है। तो हम सोचे कि का बात कर रहे हैं। अगर हम प्रयास करें, उन हर पद हु, हर क्या कहते हैं प्रयास करते मुझे प्रसन करने के लिए कुछ कमी भी हो। तो मैं क्या करता हूँ। गॉल सीरीज 1 कदम उठाओ, वहाँ की 10 कदम उठाए। तो इस अध्याय में यह साबित हो रहा है कि असली धन आपको प्राप्त होगा। किस के माध्यम से मन के द्वारा अगर कोई धार्मिक शिक्षा का वर्णन करें तो हमें उसका उत्तर देना। कैसे शासन के आधार पर आप ाभाजीजबबिपेज करते थे, शासन के आधार पर वह आगे कर देते हैं। 1 समय था जब कि भारत में जो ब्राहमण थे ये निर्णय था। ये ब्राह्मण व्यक्ति बनता है जन्म के आधार पर, कर्म के आधार पर। तो भक्ति सिद्ध जी पहले महान चाय थे भक्ति ठाकुर जिन्होंने यह साबित किया व्यक्ति रावत बनता है। गुणों के आधार पर, जन्म के आधार पर। 1 बार भक्ति से दादाजी को मंत्र मिला था। राम की सेवा में बागी उन्होंने ठाकुर का स्वाद उन्होंने की धारी को डिजाइनर ने पहले लोगों द्वारा यह साबित किया ब्रामणो समाज में होना बहुत क्या है है। शरीर में सिर के समाज अधूरा माना जाता है। लोगों के द्वारा यह साबित किया क्या ब्रामण बनते कैसे गुणों के आधार पर चाहते वरना मया गुणा कर्मा। गुणों के आधार पर यह निर्णय किया जाता है। तो हमारा यह प्रचार है किस पर आधारित है। इसलिए हमें क्या करना चाहिए, क्या करना चाहे, अध्ययन करना है, अध्ययन करना चाह। इन ग्रंथों में आप क्या देखते हैं? ओरिजनल, संस्कृत, इंग्लिश, न, बोल्ड, बाई, वोल्ड, मीनिंग और आगे हमें साइफिक तरीके से यह शिक्षा दी जाती। विश्व के कई स्कोरर्स है। उन्होंने स्वीकार किया है कि प्रेजेंटेशन सा में तो ब्रहमाजी ने इस रूप से इसने हमें दिया है। कोई भी व्यक्ति श्रदा से सभला चाहता है। ग्रंथो को पढ़ सकता है। इस विषय पर का करिश्णा। सी ट्राइक टोरेस के इंटेलीजेस। तो आइए देखते हैं यह आप ग्रंथों को पढ़ रहे हो। भगवान आपको बूंदी देते हैं जिस के दौरा, बोले सब तो धर्म का ज्ञान है। विनिक्स जो देवता हैं और जो व्यक्ति यह सोचते हैं कि वेदों का यही वेदों द्वारा हमें ज्ञान मिल रहा है। असली ज्ञान है, भूल है। असली ज्ञान प्राप्त हो रहा है। परम भगवान श्री कृष्ण के द्वारा। और यह ज्ञान है का। क्या कहते हैं? रे वेदों के द्वारा, क्या है आवेदन के द्वारा, ये जानना चाहता है कि मैं कौन हूँ? ये है शासन का निर्णय और असली धर्म, जिया को में शासन के द्वारा इस शिक्षा को स्वीकार करना चाहिए। इस अध्याय में इसी विषय की चर्चा बार बार होगी इस विषय की। भगवान के जो नाम है भगवान से, और याम राज ने भविष्य में उनको मन छूना जिनकी वाणी से, भगवान के मन छोड़ना चूना, जो कि भारतीय करते हैं, की सेवा करते है। दूसरे शब्दों में, तुम्हारा अधिकार केवल उन पर है, वाणी से है, न के नाम नहीं। निकले मन से में भगवान के लाऊंगा नहीं होता। जो बिल्कुल भक्तियों की पालन नहीं करते, उनको तुम जो भक्ति करते हैं, जो भगवान का नाम ले रहे हैं, उनको सुनेगा कोई अधिकार नही है। तुम्हे मैं नाम की महिमा का या हलोहने होने में कल होली सॉलूशन। यह भविष्य वाली पापाजी ने सफल कैसे बनाए जाकर पार्क में कितन करना शुरू कर दिया और उन्होंने 10 दिन लगातार रोज गए। इसी मार्ग में और इसके द्वारा लोग जुड़े हर कोने में लोग बड़ी से, चाइना को, आसानी से, शहर ही कोई मिला है हमें दुनिया में स्टू डिफिकल् प्रनाउन, हमको कोई मिला कैसे सू नाउंस? is and a chance in early in you re go in stand next or the asian in see that was a a but। द ओशन वक्ती हर गो हाय हाय, गो नाम के द्वारा जो आनंद है उसकी कोई सीमा नहीं है। यह सीमा की ओर बढ़ती जा रही है। हमें दर्ज होकर नाम पंजाब करना चा और भाति जुड़ना चाहिए। और इस लोक के द्वारा आपको ये शिक्षा मिल रही है की हमें असली ज्ञान चाहिए। वो कहाँ से प्राप्त होगा के द्वारा? असली ज्ञान का निचोड़ क्या है को इसका अर्थ क्या है? इस्लाम छोड़ 2, छोड़ 2 वो हिंदू का अर्थ है धन धन से आप लाइन की सेवा करो। यह शादी छोड़ 2, मुला सलाम छोड़ 2 और योगिता का का उपयोग
स
ये है गीता का। 18 दहाई में गीता का सार प्राप्त होता है और बार फिर से शामिल कर रहे हैं। क्या भक्ति के द्वारा ये आज के लोग का संदेश आपको चाहिए और कहाँ से प्राप्त होगा? हम भगवान के द्वारा आप असली ज्ञान पर हमारा क्या गया है जो महान चर्या है। उन्होंने भगवान की वाणी को लेकर हम सरल भाषा में इसकी व्याख्या कि जैसे राभा जी के साथ वे में पढते हो। सबसे पहले प्री भारत, चाहिये ता, श्रीधर स्वामी विश्व, जगदी भारत चाहिए थे भगवान की वाणी को लेकर, पर्या के माध्यम से हमें समझाया ने मचारियों का भाव लेकर जोड़ा और सरल भाषा में इसे लाभ उठा सकते हैं। प्रैक् than me will be even to find media, apne, hi krishna hi krishna pecesteaa ओके
हरे, कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे र रामा रामा हरे हरे हरे किश्नहरेश्कृश्णा, किशन हरे हरे राम हरे राम राम रा।
More from PRASAD

Rare Pastimes & Timeless Lessons of Guru Mahārāja | Stories Every Disciple Should Hear

ISKCON Legends- pure devotees meet-HH Jayapataka Swami, HH Gopal Krishna Goswami, HH Radhanath Swami

Jagannātha Ratha-yātrā Through Śrīla Prabhupāda's Mercy | 29 April 2006 | Nairobi, Kenya

Lord Jagannātha's Appearance Pastime | 21.07.2019 | ISKCON Calgary | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

The Ācārya Teaches by His Own ExampleGuṇḍicā Mārjana by Guru Mahārāja #shorts

Guṇḍicā Mārjana – Lord Jagannātha's Pastime | 21.7.2019 | ISKCON Calgary |Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

H.H. Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī Mahārāja - Exemplary Sādhana and Deity Worship # shorts

भगवान की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? | 11 Jan 2014 | Punjabi Bagh | Srila Gopal Krishna Goswami

Material Education vs Spiritual Education | Srila Gopal Krishna Goswami #shorts

