हमारा अगला शरीर क्या होगा ? |SB 6.16.09 |15.03.2020 | Vrindavan |Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja

Śrīla Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī Maharaja explains how God grants souls freedom to choose between remembrance and forgetfulness, creating the conditions for spiritual progress or moral decline. He connects the COVID-19 pandemic to collective sin and adharma, arguing that true remedy lies in spiritual knowledge and bhakti-yoga rather than material solutions alone.
Chapters
हर
मो
ओम नमो भगते वासु ओम नमो भगते वासुदेवा भगतेवासव srीमाभgtmcnsxctr 69 छेह 16 9 6 16 9 sa ssरवयतमायाविश्वम आत्मन santa sum ब
यह जीवन को नित्य, नित्य, शत, सी, सुक्स, जो आप से न दिखाए। पर यह जीवन को
श,
विभिन्न प्रकार के देवका, स्वयं, तेज, हर, तुमारा, श्री भगवान की माया के इस जन मन
अपने आप को
करता है। स्वामी स्वामी शिरवाल जिवात्मा मेत्योगताअनिनाशी है, क्योंकि इसका अदि तथा उन नहीं है। न तो उसका जन्म होता है, न मृत्यु। वह समस्त प्रकार की देह का मून है, तब भी उसकी सगी वर्ड में गिनती नहीं होती। जीवात्मा इतना उच्च है कि परमात्मा के ही सब तौ भी हतनसिक्षशबगासुखि मोहित होता रहता है और अपनी इच्छाओं के अनुसार अपने विभिन्न देह उत्पन करता है। तारा इस स्व में अजीत का है। जिवातोऔररुषो भगवान के समान है, नाली है, कि परमात्मा है, उससे बड़ा कोई नहीं और न ही उसका हुई है, जबकि जीवात्मा सूचना है। शास्त्रियों का पतन है कि जीवात्मा भाग्य विभाग के 10 हजार में भारत व् परमात्मा सर्वव्यापी है। अनांतरसपरमांचउतरशम यदि सापेक्ष दया जीवात्मा को शुखचमतहर्थांत, अति लगू मान लिया जाता है तो प्रश्न उठता है कि फिर सबसे बड़ा अर्थांत विराट को है। विराट तो से अति लघु है। जीव की दूसरी विशिष्टता यह है माया आज हो जाता है, आत्मा माया नहीं, भगवान की माया से अभी होने वाला है। जिवाना इस जगह जीवन के लिए उत्तम है, इसलिए उसे प्रभु हरकांतस्वमी हा गया है। यदि वह चाहे तो इस जगत में आ सकता है और चाहे तो भगवत नाम वापस जा सकता है। चूंकि वह भौतिक जगत का सुख उठाना चाहता है, इसलिए भगवान ने या के माध्यम से उस भौतिक शरीर प्रदान किया है। भगवान ने स्वयं ईश्वर, सरवगुद्तारणरदेश, स्थिति, रावत, सरवगुत्ताली, मिश्र, प्रत्येक राय, वही देह रूपी नियंत्रण में आरो सब जीवों को अपनी माया सक्ति से घुमा रहे हैं। परमात्मा जीवात्मा को अवश्य प्रदान करता है एवं अपनी इच्छा अनुसार इस सुख भोग कर ले किन्तु साथ ही भगवान अपनी इच्छा व्यक्त करते हैं। जीवात्मा समस्त आकाक्षाओं को त्याग कर, उनको समर्पण करके और धन को वापस जाए। जीवात्मा अटतरलगुअर्थांत सुक्ष्म है और इस बस में जिवगसनेकातदहै कि बहुत वैज्ञानिकों के भी शरीर में जीवात्मा दुकान दुष्ट है। यदि हमे विद्वानों से यह ज्ञात है कि जीवात्मा शरीर के भीतर ही है, शरीर जीवात्मा से हिंद है। जिला बार भी हलवान तरमातजीदौराया, जिवात्मा, रिक्त तथा अभी नसी है, क्योंकि इसका आदि तथा अंत नहीं है, तो उसका जन्म होता है और न ही वह समस्त प्रकार की देह का मूल है, तो भी उसकी दजीवडमेंगिनती नहीं होती। जीवात्मा इतना उच्च है कि परमात्मा के समजा है तो भी अत्यंत सक्षम होने से वो बालक सकती। मान वही होता है, का है और अपनी इच्छाओं के अनुसार अपने ली विल्म देहे उत्पन करता रहता है।
ओम मई ज्ञान स। yhananjnashlautnina tasman shri guru vinamactamnvestam but हम श्री गुरु sita ptkmanshregurn tam s sit krishna, श्री राधा krishna बदन llt
हे
कृष्ण करुणा सिंधु जीन बंधु goes गोरा radhe saipa chetna
हरा
तो माया गुणेरisतोइसधान में पढ़ते हो किस प्रकार चित्रकेतु महाराज ने भगवान का दर्शन प्राप्त किया। चित्रकेतु महाराज बड़े राजा थे, खूबसूरत थे और उनके पास धन की कोई कमी नहीं थी, हजारों पत्नियां थीं, पर सब की सब पत्नियों से कोई संतान पैदा नहीं हुए। और इसलिए हालांकि क्षेत्र के महराज के पास हर प्रकार का भौतिक सुख था। राजा थे, हजारों पत्नियां थी, पर जब भी वो उदास है, ते थे। मुनि संतों का 1 ही भाव रहता है कि पतितों का उद्धार करो। अंगीरा मुनी आये उनके महल में। और राजा ने बड़े आदर से स्वागत किया। और अंगीरा मुनि उनके चेहरे को देखकर समझ गए कि जो राजा है, बहुत उत्सुक तो है चारों तरफ, पर जब भी दुखी है, तगीरममुनीने पूछा सब ठीक है, कैसे हो? राजा ने कहा, आप संत महात्मा हो, अंतरिम आप से क्या छुपाया जाए। और उन्होंने कहा कि मेरी हजारों पत्नियां हैं, जभी भी कोई संतान नहीं है। संगी मुनि ने राजा को आशीर्वाद कहा, संतान होगी, पुत्र होगा, परे सुखा कार्य बनेगा और दुख का कारण भी बनेगा। और मुनि की कृपा से उनकी हजारों में से 1 पत्नी। इसके नाम ने बेटे को जन्म दिया। और बेटे का नाम क्या था। rs sohrskartekusi ann प्रकार सब हम सब का नाम है। हर शो दास आज आप आनंद रहे, आनंद हो, अब यह श्री दुगा कामी बनेगा। तो जब हर शो का जन्म हुआ, राजा ने बेटा और माँ को बहुत समय दिया, पूरे समाज में दान दिया, सोना बारा गाय दान मिल गया। जो दूसरी पत्नियां थीं, उनके हृदय में एशिया बढ़ गई। उन्होंने देखा कि राजा सारा समय कृता जूती उसके पुस्तक है, और एशिया और देश के कारण बच्चे की पहली साल में क्या किया। झैड़ खिला दिया। जब लौटी अपने बेटे को देखा, उन्हें लगा कि बेटा सो रहा है, नौकरानी को कहा इसे लगा कर मेरे पास लाओ। पर जब सेवक गई उठाने के लिए, तो ने देखा कि इसकी तो आंखें भूख हो गई है। और कुल शब्दों में शोक की मृत्यु हो गई थी। क्यूँ एशिया के कारण रूसी पत्तियों ने उन्हें जहर खिला दिया। तो पिता माता बड़े दुखी थे। और अगर मुनी ने सोचा अब वो शोक में है, अब मुझे जाकर प्रचार करने। 2 और अगर मुनि अकेले नहीं आए, वो है अपने साथी से लाल मुनी को लेकर प्रचार करते हो। जो व्यक्ति शोक में हो, दुख में हो, तू ज्यादा सरलता से स्वीकार करता
है
के पास केवल भौतिक सुख हो और भौतिक सुख को भोग नहीं लीन हो। सो इतनी सरलता से हम नहीं सुनते हैं। भगवान खुद कहते है जान मा 4 परिस्थिति के लोग मेरी शरण में आते हैं, चारों में 1 है, दुखी रोगी पीड़ित। तो मुनी दोनों पहुंचे छेत्र केतु के महल में। और उन्होंने देखा राजा से पहले सूखी दिखा था, अब रोना था। और फिर मनी कृपा से झवात्माेथीफिर जुड़ गए। और हर्ष शोक ने चर्चा की उपदेश दिया। हर्षे शुगर ने कहा, आप कह रहे हो कि माता पिता के पास जाऊँ कौन से माता पिता में तो अनेक जन्म को प्राप्त कर लिया है। मैंने कौन से है माता पिता इन श्लोकों का उच्चारण आर सी शो का कर रहे हैं। और बड़ा महत्वपूर्ण संदेश है। इन में। तो यहाँ क्या जा रहा है? आर सी शो द्वारा। ये वात्मा क्या है, सनातन है और अविनाशी है। यह समझना बहुत आवश्यक है। ज्ञान में हम सब क्या सोचते हैं, ये देह हमारा रूप है और सुबह से रात तक हम व्यस्त रहते हैं। किसी ढेर को सुझाने में, ढेर को संतोष करने में सच और जो आत्मा है, उनकी कोई चिंता ही नहीं। अब 1 पक्षी को खुबसूरत पिंजरे में रख, 2 पिंजरे को सझा, 2 हीरे मोतियों के साथ पर। पक्षी को खाने को मत, 2 वो जी पायेगी है। तो अब हम बड़ी बड़ी योजना बनाते हैं। और जो आत्मा का स्वरूप है, आत्मा का ज्ञान है, उसमे हम रुचि नहीं लेते। भगवन गीता के दूसरे ध्यान में अनेक लोगों द्वारा आत्मा के विषय में न देते और क्या क्या कहते जा? क्या आत्मा का न तो अमेरिका के 1 बड़े प्रसिद्ध महाविद्यालय में पति पूछा इस सभा में कोई ऐसा विभाग है जहां की शिक्षा मिलती है के बाद व्यक्ति कहा जाता है और कोई उत्तर नहीं दे पाया तो हमारा हम सबका संबंध स्वरगत धे के साथ है। ध नारद मुनी ने कहा हर शिशु को तुम वापस लौट जाओ। मैं माता पिता बड़े दुखी है। शिशुको ने कहा कौन सी माता पिता। मैंने तो अनेक जन्म प्राप्त कर लिया है और हर जन्म में अलग मात्र धन प्राप्त हुए है। तो भगवत गीता के दूसरे दिहाई में अनेक स्टोको के द्वारा यह साबित किया जाता क्या कि आत्मा का क्या है, क्या है असली रूप? वो सनातन है, अविनाशी है। जब हम ये समझ आये कि यह देह केवल थोड़े समय के लिए हमारे आत्मा को ढक रहा है, फिर आप अध्यात्मिक जीवन में आगे बढ़ सकोगे। पर अगर हम यह सोचे कि ये देह सब कुछ है और शाम मित्र के साथ सब कुछ समाप्त हो जाएगा, यह भूल है। तो इसलिए आध्यात्मिक जीवन आरंभ होता है। इस संदेश के साथ गंभीरता के दूसरे अध्याय में प्राप्त करते हैं। और ये भाव जो आत्मा सनातन है, यह दूसरे गंध में भी प्राप्त होती है। उदाहरण के लिए बाइबल में कहा गया है, what we do and the हो? वर स for the losopirtेllol? आप सारे विश्व के धन को प्राप्त कर, लोगे, पर अपने आत्मा को खो दिया, क्या प्राप्त किया? प्राप्त किया। तो ये विचार कि आत्मा है। और आत्मा केवल 1 देर से अगले दिन में जाती है। और आत्मा को आप जला सकते हो, सुखा सकते हो, देख सकते हो न। आप को आज की आधुनिक की प्रजा कहेगी? अगर जिस चीज को आप देख नहीं सकते, उसमें हम विश्वास नहीं करेंगे, हमें दिखाओ, फिर हम विश्वास करेंगे। आपका क्या उत्तर है? क्या है? प्रमाण आत्मा है, उसका प्रमाण क्या है? चेतना आत्मा के कारण चेतना रहती है। जब आत्मा 1 देह को त्याग कर दूसरा देश स्वीकार करती है, तो जो आत्मा 1 को छोड़ती है, उसे में चेतना रहती है। नहीं सो आत्मा का प्रमान है। चेतना आज के धुनिक युग में बहुत कम व्यक्ति यह विश्वास कर रहे हैं आत्मा सनातन है क्यों? क्योंकि अगर उन्हें पता लगे वो स्वीकार करे कि आत्मा सनातन है। तो उन्हें यह भी स्वीकार करना पड़ेगा कि हमारे पापा पापा का परिणाम हमें भुगतना पड़ेगा। ये वो सोचना नहीं चाहते। वो सोचते हैं कि सब कुछ त्याग से समाप्त हो जाता है, जिसके द्वारा वो सोचते है। कुछ भी करो को कोई परिणाम नहीं भुगतना पड़ेगा। ये है अज्ञानता ज्ञान। हम सब का जन्म हुआ था। अज्ञानता में तो 1 दूसरे का संदेश सबसे महत्वपूर्ण है। ठाकुर भक्तिन ने कहा है पूरी गीता में, दूसरे न्याय सबसे महत्वपूर्ण है। तो आत्मा का प्रमान है। चेतना हमारे वैदिक शास्त्र में बहुत ही गहरा ज्ञान प्राप्त होता है। उदाहरण के लिए केवल यह शिक्षा नहीं मिल रही है। आपको। आत्मा सनातन अविनाशी है। आता का माप क्या है? वो ज्ञान भी आपको प्राप्त हो रहा है। कैसे? पता मा 10 हजार ा बाल के कौन है, बाल की लम्बाई के 10 हजार ने, अगर बाल बाल की लंबाई के 10 हजार, ऐसा होता तो औरतों की आत्मा पुूसीजाकहबढ़ीहोती। और 1 बार हमने 1 योगी की तस्वीर देखी थी, जिसका बहुत ही लम्बा सीखा था, 1 किलोमीटर लम्बा अगर लंबाई का 10 हजार हिस्सा होता। योगी की आत्मा भारी होती है। तो ये समझना बहुत ही महत्वपूर्ण है कि आत्मा है सनातन। अविनाशी और आत्मा का केवल दांत हो रहा है। प्रभाजी बड़े स्पष्ट रूप से यह शिक्षा दी है। हमारे वेदों में, मेरी शास्त्र में न ही आत्मा का वर्णन है। आत्मा का जो माप क्या है वो शिक्षा में दी जाती है। तो ये समझोगे फिर आप समझ पाओगे की सुख दुख का परिणाम सुख दुख प्राप्त होगा, जो निर्भर है। आपके कर्मों के आधार पर। तो प्रभा जी कह रहे है जीवात्मा जो है वो भी नित्य है। वो परम भगवान भी नित्य है। तो अंतर क्या है? अंतर यह है कि परम भगवान जो नित्य है वो बाकी सब को संभाल रहे हैं। नित्य नितिराम चेत को भावना मिला दी का परम भगवान का है, वो भी नित्य है। पर वह तो कर्मों के आधार पर हमारा अगला दे निश्चित होता है। यह यह प्रश्न देवहूती ने पूछा था। कपिल देव भगवान से, भगवान से पूछा। देवहूती ने अनेक प्रश्न पूछे थे। पहले तो देवहूती ने पूछा, उन्हें पता था मेरा बेटा जो है भगवान का अवतार है। देवहूती ने पूछा ये बताओ की किस प्रकार इन भौतिक संघर्ष से छुटकारा प्राप्त हो सकता है। तो माता के प्रश्न को सुन कर। मेरा बड़ा पसंद था। अगर आपको कोई मेरे और आपसे आध्यात्मिक प्रश्न पूछे तो आप खुश नहीं हो जाते। कोई आपसे पूछे हम कैसे कर सकते हैं? कृष्णा भक्ति तो आप खुश हो जाते हो। तो कपिल देव? भगवान ने कहा आपका प्रेशन बड़ा सुंदर है। उन्होंने कहा कि संतों की संगत में रहो, संतों की संगत में रहोगे। तो असली ज्ञान प्राप्त हुआ। और कपिल? देव ने कहा भक्तों के संग में रहकर, भक्ति का पालन सरल हो। फिर देव होती ने पूछा कि ये बताओ की किस प्रकार निर्णय होता है, किस प्रकार का धेय आपको प्राप्त होगा? कोई सिद्धांत तो होना चाहिए, जिसके द्वारा यह निश्चित किया जाता है। इस प्रकार का ले, ये थोड़ी की लॉटरी टिकट निकाली जाती है। इसका इसका सुंदर देव प्राप। ये संत निर्मल होता है। कर्मों के कमरा देव और हमारे कार्यों के अनेक साक्षी है। ये जो भौतिक वादी व्यक्ति हैं, जो विश्वास नहीं करते कि आत्मा सनातन है, ये स्वीकार नहीं करते, आत्मा है, उनका वो हैं। अज्ञानता में तो असली ज्ञान हमें प्राप्त होता है। शासन के द्वारा तो साधु संग में रहोगे तो असली ज्ञान प्राप्त होगा। तो हमारे हर कार्यों के अनेक साक्षी है। ये अगर हम सोचे कि कोई साक्षी नहीं है। सर आप को मृत्यु के साथ भाप से जाता है। यह गलत भाव है, हजारों साक्षी हैं, सूर्य और चन्द्रमा क्या है? भगवान के 2 है। सूर्य, मा हर चीज के साक्षी हैं। आज कल बौद्धिक समाज में आप जाप, हाइजा में यात्रा करते हो, आप सुरकेस को एक्सरे मशीन में वो खोल, आपके खोलते थोड़ी है, एक्सरे मशीन में देख ते है। और आजकल जो सैटलाइट्स चल रहे हैं, वो हजारों मील की दूरी से हर चीज को देख सकते हैं। तो जब बहुत वादी व्यक्ति ऐसी सुविधा बना सकते हैं की दूर से भी आपको दिख जाता है, क्या हो रहा है? भगवान साक्षी नहीं बन सकते है। तो परम भगवान और देवता हर कार्य के साक्षी है। और हमारे कर्मों के आधार पर सुख दुख प्राप्त होता है। यह स्पष्ट रूप से 7 प्रभाजी समझाते हैं। यह हमारे कर्मों के आधार पर भगवान ने छूट दी। अर्जुन ने कहा, दूसरे दहाई में शिक्षा दीजिये, मुझे समझ में आया, क्या कार्य करना चाहिए? भगवान ने शिक्षा देना आराम किया। फिर भगवान ने पूछा ज्ञानता क्या दूर हो गई है? अर्जुन ने क्या कहा का है। अब मैं आपकी शिक्षा के आधार पर कार्य करने को तैयार हो। भगवान का कहते हैं ये परम भगवान जो हैं, उन्होंने सब कुछ छूट दी है। भगवान गीता में कहते हैं सर्व पुहान, मेरे द्वारा ही स्मरण की शक्ति आती है। बड़ा पहान भूलने की शक्ति आती ह। तो क्या कारण है? 1 व्यक्ति को भूलने की शक्ति देते है, 1 को स्मरण की शक्ति देते हैं। क्या कारण है? कहन ये है भगवान ने हम सब को छूट दी हुई है। ईश्वर, न, मैं हर में बिराजमान हूँ। तो भगवान ने हमें छूट दी हुई है, छूट है। हम चाहे तो भगवान की शिक्षा का पालन कर सकते हैं और चाहें तो इसका विरोध कर सकते हैं। पर हमें यह नहीं सोचना चाहिए। हर कार्य का कोई परिणाम नहीं होता। प्रगति कर्मी, प्रगति के जो नियम हैं, लौज कर्मा है, बड़े कड़क हैं, भगवान दयालु हैं। पर यह नहीं कि आप गलती करते जाओ और माफ होते जाओगे। आप 1 बार गलती कर, 2 बार करो, सी सी बज जात, साहब थोड़ी करेंगे। तो इस 7 में प्रॉपर जी समझा रहे हैं कि किस प्रकार भगवान ने हम सब को छूट दी है। हम चाहें तो हमारी बुद्धि का सुदुपयोग कर सकते है, वो चाहे तो दुरुपयोग कर सकते है। ये छूट हम सब को दी गई। तो जो बुद्धिमान व्यक्ति हैं वो क्या करते हैं, वो देखते हैं कि चारों तरफ क्लेश ही क्लेश है और ये क्लेश बढ़ते जा रहा है या घटते जा रहा है। जैसे की आजकल आप सब जानते हो नंबर वन टॉपिक क्या है वायरस की चर्चा तो ये भी वाइन एस पहले निकाला तो लोगों ने सोचा कि ये तो केवल चाइना में ही रहेगा, चाइना से निकाला था और चाइना में रहेगा असे से। ये वायरल बढते गया। वह आज क्या स्थिति है। विश्व के हर कोने में पहुंच कर लोगों का इतना गहरा स्नेह है। देय के साथ कोई देश त्यागना नहीं चाहता है, को त्यागना चाहता है, बीमार व्यक्ति का है। डॉ थोड़ी देर जीवन जी ने विदेश जाने से पहले 1 आर्टिकल लिखा था, उनके बैक रिकॉर्ड परिक का नाम था सौरी नो टाइम, उसे प्रभाजी ने कहा की वो 1 प्रसिद्ध व्यक्ति को प्रचार कर रहे थे, मंत्री को उसने कहा स्वामी जी, आप जानते थे हम कितने व्यस्त हैं। सौरी नो टाइम अगले दिन डा सो आज क्या स्थिति है, वाइरस का प्रभाव हर जगह पोइटिक है और पूरा विश्व बंद हो रहा है। अमेरिका 2 भक्तों की फोन आया, फोन आया था उन्होंने अमेरिका बिल्कुल शट डाउन हो गया है, शट डाउन मतलब सारे एयरपोर्ट बंद हो गए हैं। 1 महीने के लिए आप देश नहीं छोड़ के कोई विदेशी नहीं आ सकता, सारे ऑफिस लगभग बंद हो गए हैं, सबको का कहा गया है घर से काम करो और और जो दुकानें हैं उनका सारा माल लगभग खाली है। और जो माल आता है 1 घंटे में पूरी दुकान साफ़ हो जाती है। और हमारे मनुष्य प्रभु से बात रहे थे, इटली के जीव है, वो कह रहे थे आप लोग भक्तों को हमारे लिए प्रार्थना कर लीजिए क्योंकि क्या क्या आधे से ज्यादा देश इटली का ये बंधन लगाया हुआ है, कोई नहीं निकल सकता घर के बाहर घर के बाहर निकला है तो मिलिट्री की रमेशन लेनी पड़ेगी, घर के बाहर भी नहीं निकाल सकते है तो ये सब हमारे पापों का परिणाम है। जब समाज में पाप का बोझ बढ़ जाता है तो प्रकृति अनेक रूपों से कैश हो जाती है। और जिस समाज में जैसे प्रभा जी कहते है, गाय माता की सुरक्षा न हो वो समाज कभी शांत के साथ नहीं रह सकता। तो उन्होंने विज्ञान ने प्रयास किया बड़े बड़े हवाई जाज बना लिए सेवन फोर सेवन, पर आज क्या स्थिति हो गई है और उड़ नहीं सकते। वाइज सामने खड़ा है और आप न जाने। आजकल प्लेन की टिकट विदेश में भी बहुत सस्ती हो रही है। र कोई घूम ही नहीं सकता। तो आप पेज से क्या करोगे? तो ये है कलियुग में पापों का परिणाम। जब पापों का बोझा बढ़ जाता है, जब प्रकृति हमें अनेक रूपों से कष्ट देती है और आज हवाई है, पर आप उड़ नहीं सकते, बड़े बड़े कार खाने हैं, पर आप छिला नहीं सकते। इसका क्या फायदा तो यह है अज्ञानता का परिणाम। तो ये है वायरस। तो ये वायरस का नाम क्या है? करोना वायरस। तो भक्तों ने इसका नाम रखा है करूणा वायरस, करुणा वायरस और करोना वायरस में क्या अंतर है? करुणा वायरस से सब नष्ट हो जाता है। कोरोना वायरस का प्रभाव है, क्या है गलती से भी अपने सांस ले लिया और किसी व्यक्ति की संगत प्राप्त कर ले जिससे जिसका करोना वायरस है तो वो वायरस आप पर और करुणा वायरस क्या है। करुणा का अर्थ क्या है? दया दयालु भगवान के पीले देव कहते है तिकाकरुनेकहा जब, तो भक्तों के नेक में 1 लक्ष्य क्या है। या तो इस स्थिति में हमें उत्साह से प्रचार करना चाहिए। ये है करुण वायर की आ भगवान का प्रचार करो। और आज लोग खुद देख सकते हैं कि चारों तरफ क्या है और कुछ पता नहीं यह कब तक चलेगा, कहीं कहने है पूरा 1 साल साल रहा है, 1 साल से भी ज्यादा चलेगा क्योंकि अब वो खोज रहे हैं कोई वैसे नहीं तैयार करने का, जिससे बीमारी को रोक सकेंगे। ये है भौतिक जीवन। आज 1 समस्या आती है और हम सोचते हैं हम उपाय, हम कोशिश करेंगे इसको दूर करने के लिए और प्रयास करते रहे। इस समय कैंसर पर सारे विश्व में अरबों रुपए खर्च जा रहे हैं कैंसर के लिए, कोई उपाय लाने के लिए। और ये कोई नहीं सोचेगा। हमें आध्यात्मिक ज्ञान देना चाहिए, हमें शिक्षा का पालन करना चाहिए। अगर आप शु जीवन बचाओ बिताओ तो आपको कैंसर भी नहीं होगा। 1 कारण कैंसर का है मास खाना, ये कोई नहीं कहेगा, मास मत खाओ, ये कहेंगे हम कैंसर के लिए उपाय ढूंढने का प्रयास कर रहे है। तो ये है अज्ञान साब। तो इसलिए इस शास्त्र के संदेश की बहुत आवश्यकता है। तो हर शो कहते हैं कि हम आत्मा जो है, सनातन है और अविनाशी है। और अगर हम ये समझ ले, हमारा व्यवहार जो होगा, शास्त्र के आधार पर होगा। और भगवान गीता में क्या कहते हैं भौतिक जीवन के क्या लक्षण हैं,
हम
देख सकते हो कितना दुख है और हर चीज आस्था। तो लोग वायर से क्यों डर रहे हैं। पैलवान लोग है, कई के ब्लैक बेल्ट है। पर क्यों? क्योंकि वायरस इतना खतरनाक है कि अब जी नहीं पाओगे। और कोई भी शरीर त्यागना नहीं चाहता, नहीं त्यागना चाहते। जबरदस्ती त्यागना ही बोलेगा तो लोग अज्ञानता में है, अज्ञानता में पलते हैं और अक्सर अज्ञानता में मृत्यु भी हो जाती। रूकृष्ण कुस्वामी को कहा अनेक योनियों में गुजरने के पश्चात व भाग्यशाली व्यक्ति जिसे क्या मिलता है भक्ति का ज्ञान, यह ज्ञान, भक्ति योग सब समस्या का हल है। भक्तियोग का ज्ञान आवश्यक है और भक्ति का बीज प्राप्त होता है। जैसे जब आप जुड़े कृष्ण भक्ति में किसी ने आपको प्रचार किया होगा या किसी ने ग्रंथ दिया होगा, किसी ने आपको निमंत्रण दिया होगा। इस काल के मंत्र हैं और आ गए आपने सिद्धांत। सुना भारत में हम सब जन्म लेते हैं और सोचते हैं। सारे भगवान की है है कि नहीं? तेतीस को है। सब 1 ही है जिसकी पूजा का 1 ही नतीजा हिसक को पढ़ते है। तो पता लगता है क्या ईश्वर पर कृष्ण गोविंद अनेक ईश्वर हैं पर 1 परमेश्वर और ये परमिशन है। यह पूरे विश्व को संभालते है। चेतन माँ प्रकट हुए थे, कुछ दिन पहले, वो परणवा मनाये और चेतन मा क्यूँ परिदों का उद्धार करने के लिए, श्री कृष्ण के तो वो बिना के दयालु प्रदीप वान हेतु ता बता रहा। आप वो सब अदारों में सबसे दयालु और चेतन माँ पर बुने ुले युग से प्रचार किया, ये भेदभाव नहीं किया कि इसको देंगे, इसको नहीं देंगे। सबको। जैसे बारिश जब बरसती है तो बादल बारिश बरसती है, सागर में भी, पहाड़ों में भी, और में भी। तो महा प्रूप प्रकट हुए हर नाम का प्रचार करने है। ये है इसका जब प्रभु। वरणासी पहुंचे थे तो वो ठहरे थे। 1 भग चंद्रशेखर के घर में चंद्रशेखर जो थे, नीची जाती, कैसे खोजी जाती के नहीं थे, पर वह उनके घर में रुके क्यों? क्योंकि वो भगत थे। तो वासी में उस समय माया वालियों की बड़ी सभा चल रही थी, हजारों माया वाली से न्यासी थे और वो चर्चा करते थे। ये निमाई पंडित ने हमारे संप्रदाय में सन्यास लिया है, पर हम लोग के साथ बैठते हैं। तो उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं। हां, उन मिलो तो ले गये। 1 महाराज ब्राहमन घर में हजारों सन्यासी उपस्थित और उनके वहाँ बाबू ने यहाँ अपनी दिव्य लीला। जन्मा कर्मचा में। कहते है ना दोनों ही है, अद्भुत है कि मोबाइल के नीला में देखते हो। साई दी लाइन लगभग अदभूत है। सो महाप्रभु ने क्या किया? बैठे थे जहाँ चरण होते हैं प्रवेश करने से पहले। और उन्होंने अपने चेहरे से लाखों सूर्यों के प्रकाश को प्रकाश में सरस्वती। उनके शिष्यो ने देखा, वो समझ गए, ये कोई साधारण सन्यासी नहीं है। और प्रकाश में सरस्वती उनके हाथ को पकड़कर उनके ऊँचे मंच पर ले आये। यहाँ के दूसरे सन्यासी भी बैठे थे। तो होंने चर्चा की क्या, फिरते विधवान हो भगवान के अनेक नामों में। 1 नाम जो कि नंबर चक्रवती ने दिया था, वो था क्या विश्वम्बर gegen।
More from PRASAD

Rare Pastimes & Timeless Lessons of Guru Mahārāja | Stories Every Disciple Should Hear

ISKCON Legends- pure devotees meet-HH Jayapataka Swami, HH Gopal Krishna Goswami, HH Radhanath Swami

Jagannātha Ratha-yātrā Through Śrīla Prabhupāda's Mercy | 29 April 2006 | Nairobi, Kenya

Lord Jagannātha's Appearance Pastime | 21.07.2019 | ISKCON Calgary | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

The Ācārya Teaches by His Own ExampleGuṇḍicā Mārjana by Guru Mahārāja #shorts

Guṇḍicā Mārjana – Lord Jagannātha's Pastime | 21.7.2019 | ISKCON Calgary |Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

H.H. Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī Mahārāja - Exemplary Sādhana and Deity Worship # shorts

भगवान की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? | 11 Jan 2014 | Punjabi Bagh | Srila Gopal Krishna Goswami

Material Education vs Spiritual Education | Srila Gopal Krishna Goswami #shorts

