SB 6.2.49 हरिनाम की महिमा, Glories of Holy Name | 24.9.23 | ISKCON Kharghar | Gopal Krishna Goswami

In this devotional lecture at ISKCON Kharghar, Gopal Krishna Goswami addresses a wide range of topics centered on the power of the holy name (Hari‑nama). He recounts scriptural stories such as Ajamila to illustrate how chanting the divine name can liberate even the most sinful souls, and explains the spiritual benefits—inner joy, mental clarity, and eventual liberation. The discourse then moves to everyday challenges faced by modern devotees: balancing secular jobs, avoiding wrongdoing, handling distractions like phones during japa, and maintaining concentration. Goswami emphasizes that sincere chanting, whether with a mala or silently, must be done with full attention. He discusses the role of seva and prasara (preaching) as essential service, describing how book distribution, temple projects, and community events help spread Krishna consciousness. Practical questions from the audience are answered, covering topics such as optimal times for chanting (morning vs. evening), how to gauge one’s interest (ruchi), the moral implications of taking off shoes while chanting, and the destiny of those who die while reciting the name. The session also outlines organizational goals—target numbers for book distribution, upcoming Bhadr Purnima celebrations, and plans for temple construction—highlighting the importance of collective effort and humility in service.
Chapters
यबह गया जब ब वलाभाभ
जाना वाला भा ऐसा जन
गलहलयह 2 गगजोगगगगय लल्ला केरा का लल्ला तेरा हल का जाना
वाला
गाना बाला भाई हो गाहगगयय 10
गला बाला बा
बंदि गाय के ना टा राधा जागे ज
हरा हे हमारा
है
े
हमारा मार
हम ह
आयरा
हमारा मारा।
hi krishna आप सब भक्तों का हाईक होली नेम की बहु है में ये जो 10 दिन का पेड हैं। इसमें कहा गया है होली में होली में हमारा उद्देश्य क्या है कि हम हाई नाम महिमा हुए मा ने कहा था कि 1 दिन आयेगा जब कि दुनिया के कोने कोने में लोग क्या करेंगे। ये है छठे दूसरे फोर्टी नाइन लो forty nine म्रियमाण
हरि नाम गिणन पुत्र उपचारित अजामिल अपि अगाद धाम क कम उत श्रद्धया गण मिय मनोहर नाम गृणान पुत्र उपचारित अजामिल अप धाम किम उत श्रद्धया गण मय मानो हरि नाम गृणान पुत्र उपचारित अजामिलोअपियगदाम कि उत श्रद्दय गण मय मानो हर नाम गणन पुत्र परचारित अजामिलोअपिगधामा क मत स दया गण
हार ना रयमररेरापुरोबचका। एहोरसराा
रिया
होला।
यह
मत या बात है। बधाई रहगोरराहलोवगा
यह
गा
रिया हो रहा दे मृमाण मृत्यु के समय हरे नाम हरि का पवित्र नाम गणन उच्चारण करते
हुए
पुत्र उपचारित अपने पुत्र की ओर इशारा करते। अजामिल अजामिल अभी तक अगत गया। धाम। आध्यात्मिक जगत कि उत क्या कहा जा सकता है, श्रद्धया श्रद्धा तथा प्रेम पूर्वक गृ उच्चारण करते हुए अनुवाद तातपरेसडिवाेससी भक्ति वेदांत स्वामी श्लप्रपादमहाराज द्वारा शिलप्रभपाद महाराज के अनुवाद अजामिल ने मृत्यु के समय कष्ट भोगते हुए भगवान के पवित्र नाम का उच्चारण किया और यद्यपि उसका ये उच्चारण उसके पुत्र की ओर लक्षित था, फिर भी वह भगवत धाम वापस गया। इसलिए यदि कोई श्रद्धापूर्वक तथा निर अपराध भाव से भगवान नाम का उच्चारण करता है तो वह भगवान के पास लौटेगा। इसमें संदेह कहाँ है? तात्पर्य मृत्यु के समय मनुष्य निश्चित रूप से मोहग्रस्त हो जाता है, क्योंकि उसके शारीरिक कार्य अव्यवस्थित हो जाते हैं। उस समय भले ही किसी ने अपने जीवन पर भर भगवान नाम का कीर्तन करने का अभ्यास किया हो, किन्तु वह स्पष्ट रूप से हरे कृष्ण महामंत्र का उच्चारण न कर पाए, फिर भी ऐसे व्यक्ति को पवित्र नाम के कीर्तन का सारा लाभ मिलता है। इसलिए जब तक शरीर स्वस्थ है, क्यों न हम जोर जोर से तथा स्पष्ट रूप से भगवान नाम का कीर्तन करे। यदि कोई ऐसा करता है तो यह सम्भव है कि मृत्यु के समय भी वह प्रेम तथा श्रद्धापूर्वक भगवान नाम का ठीक से किरतन कर सके। निष्कर्ष के रूप में जो व्यक्ति निरंतर भगवान नाम का कीर्तन करता है, उसकी भगवत धाम वापसी बिना किसी संध्या के सुनिश्चित है। स्लपरोपातमहाराज की
sri हाई है। कsणiहाईकृश्णा आज मिनी कथा आप पढ़ते हो। सके आज मना थे, मैक्सिमम मिजो थे, उनका जन्म हुआ था रामीण कांदा में और 1 दिन जंगल में जा रहे थे पूजा के फूल लाने के लिए, गले हार बनाने के लिए और लौटते समय 1 भी प्रेमी के साथ 1 दूसरे को गले लगा रहे हैं। और वो इस घटना के प्रति आज हो गया। भगवान कहते हैं मन को सदा मेरी सेवा है, माताजी जन नहीं। करेंगे में भौतिक बेशोंकाजनतनकरना पड़ेगा तो आज मैं घर लौट कर पहले तो उस वेश्या को नौकरने के रूप में से किया और फिर उसके साथ विवाह कर लिया। वह अपनी जो धार्मिक पत्नी थी, अब दिया। और को संतुष्ट करने के लिए
अनेक
प्रकार के पाप के कार्य करना पड़े। चोरी करना लागू। तो यमराज आज मन का पाप का बोझा बहुत बढ़ गया था। और जिनमें से छोटे बेटे का नाम क्या था? तो यामा दूध, या दूध कौन है? याम राज के यमराज के पुलिस और यामा दूत बनाने लिए। तो आज कौन था? उसमें क्या था हो बेटे का नाम नारायण रखा था। जानते हो अनेक धर्मों में है ये बच्चों को भगवान का नाम ले जैसे की किया जोन सेन पोल पीटर वायबल से चुने गए है मुसलमानों में भी और हिंदू में नाम शासन के आधार पर दिया जा रहा था। पर आज मारा हिंदू बाई मोरल नाम सनी लवली। प्राचीन व बच्चों को बागवान के नाम दे, भगवान के नाम अमेजिंग से पुकारो आपको लाभ। मिलेगा तो आज मे बड़ा गहरा आक्शन था दिन में 50 सौ नारायण खरे खाओ सो जाओ चलो उठो तो मधु आपने यामदूतोकीतस्वीर मैं यमराज ने अपने प्रतिनिधि को भेजा 33 प्रति 3 प्रति ने क्यों भेजे bada to ne beja, why i sent yamadusabecause new to, you can selve for get the lot body, mind and a ton। और आप भगवान को सेवा कर सकते हो। और मन के ये 34 दिन हैं भक्ति के लिए और माया के लिए, जैसे की यही हैं के लिए वे व्यक्ति हो इस बिल का लाभ उठायेगा के लिए। 2 ऐसे नहीं चलता, हाई कृष्णा आपको सुनाई दे रहा है कृष्णा 2 माह के समान
अभी भी ठीक है।
तो 3 या मधु भयंकर थे की आज मैं उनके चेहरे को देख कर घबरा गया और नारायण नारायण की बिल्कुल निकट में थे। जैसे ही उन्होंने नारायण से का उचारण किया, तुरंत वहाँ प्रगट हो गए कौन भगवान के सेना के और उनका चेहरा बहुत सी है की आत्मा को ले रहे थे रोक लिया तुम क्या है इसको शेली को गिरफ्तार कर रहे हो ने वा का नाम या तो रोक लिया मधु से वो विचलित हो गई। लेबर कंफ्यूज पहली बार है की हमारे स्वामी ने हमें भेजा है किसी कार्य के लिए, किसी व्यक्ति को लाने के लिए किसने लिया गई मराजू आपके ऊपर कोई शक्ति है? yes भगवान पूरी कथा सुनाई हम गईै आज मे को आगे से ऐसे व्यक्ति को मत छूना जिसने मेरा नाम लिया है, जो मेरे सामने झुकता नहीं है है ऐसे व्यक्ति को तो आज मेरे द्वारा यह सूचना मिलती है। भगवान के नामों में कोई अंतर नहीं। भगवान के नाम क्या है? भगवान से है होई लो नो लोड लोड। इन के इन कलयुग में भगवान होते हैं उनके नाम के द्वारा। भगवान के नाम के विषय में प अनेक श्लोक हैं जिसके द्वारा स्थापित किया जाता है की हर नामी असली किया, भगवान के दाम लौट सकते हो आज जो श्लोक पढ़ा उसमें शुगर जी को स्वामी। कहते हैं बिना शंका के तुम भगवान के दाम लौटोगे। अगर तुमने नाम ने। और बाबा जी इस श्लोक की। कहते हैं की किसी ने आराम किया हो और मेक उनका है कृश्ण? मृति के समय मान लो आपका। मन भगवान की तरफ नहीं है। कहते हैं मृति के समय भग भी हो उसे होश नहीं होती। क्या करना है के समय उनका मन शायद भगवान की तरफ नहीं हो। पर जब भी क्यूंकी उसने आई नाम किया है वो भगवान के धाम लौटेगा। एक्सीडेंट में आ जाता है, कोमा में चला जाता है तो कोई चिंता की बात नहीं। कई बार बक्सों का एक्सीडेंट हो जाता है और तुरंत ही मर जाते है। कुछ साल पहले 34 से जाते थे और एक्सीडेंट में 3 मर गए। हमारा राज नहीं सोच सके और कोई चिंता नहीं क्योंकि उन्होंने हर नाम का उचारन किया था। तो भगवान के जो नाम हैं, उनके उचालनसेहअपाटसे है। हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि मैं है नाम ले रहा हूँ और मैंने दीक्षा ले ली है। तो थोड़ा अपराध भी करूंगा तो कुछ परिणाम नहीं होगा। ये है कौन? सा अपराध था नाम के बल पर पाप करना। हमें नाम के बल पर ये नहीं सोचना चाहिए। हमें नाम लिया है ु काम भी कर सकते हैं, हम भी नियम तोड़ सकते हैं। को भगवान के जो नाम है
ना
चिंता, कृष्ण, नीति मुक्त हो, नाम नाम है। शोक में क्या भगवान का जो नाम है वो चिंतामनी है। चिंतामनी जो भी लेगा, जो भी सुनेगा उसका लाभ उठाएगा। इसलिए हमें ही नाम में जाना चाहिए। हाय, मंदर को 12 बार इनाम करना मेले रोज जाते हैं ना मैं तो में जाते तो क्या आपको लाभ है। और जो सुनते हैं वो भी लाभ है। नाम में इतनी शक्ति है अगर आपका हो देखो पागल कैसे बाद में जाते है। गोला में लगा कई पापाजी भारत में आए थे। अपने विदेशी सतियों के साथ लेख रूप से आध्यात्मिक क्रांति हो गई थी। भारत में लोगों ने पहले कभी नहीं देखा था इतनी विदेश को धोती कुरते में 1 बाबा जी ने बड़े बड़े किये थे में और बॉम्बे में 40 हजार आदमी हो जा रहे थे। तो 1 फिल्मी करकर ने देखा हरे कृष्णा बहुत फैल रहा है, उसने फिल्म बनाई, उस फिल्म में गाना था न मारो दम दिखा रहे थे। जो व्यक्ति आय नाम लेते हैं, ये सब भंग लेते हैं। भंग में नशे में आ कर, वे नाचते है। तो गुण क्या था की आयाम का ढूंढ लो सुनेत
to
a cloth case again, you go to the cold none people, we here the holy name। तो हरिनाम का उच्चारण का हर स्थिति में है। भक्तों को कहा जाता है कि हर नाम हमें सुनना चाहिए। शूल भक्तों के द्वारा शो कुछ साल पहले अमेरिका में 1 भग को ना दे। तो मैंने उस भक्त से पूछा तो भक्त कैसे बने? उसने कहा जब मैं छोटा था, 1 फिल गाना था मारो दम हरे कि मारो दम। तो लोग भूल गये और जो दमारोदमथावोपोष लोग वो भी भूल गया। तो नाम जो है आप शास्त्र में है ना ना ना म। हेलो नाम का नाम यही है 1 साल। भगवान क्या कहते है 3 बार नाम है नाम, हर नाम 3 बार एम्बरसाइजकरने के लिए दिस इज वैरी इम्पोर्टेंट जो है ना में कहाँ से आया है अमेरिका से में नाम? इस कमिंग फ्रॉम स्पेशल बोल या है भगवान के दिविधामसीाऔरहाईनाम द्वारा हम क्या प्रार्थना करते हैं, हम प्रार्थना करते हैं। हे रानी है भगवान, हमें भग दीजिये, राधा, रानी जी को प्रसन्न करोगे भगवान होंगे। रानी कहती है ये भक्त बहुत अच्छा है। भगवान आंख बन कर स्वीकार कर लेते हैं। तो है न पर लेकर में कहा जैसा। 1 बच्चा मार प्रे टू फादर बाबा से प्राथना करे सेवा सो माया बड़ी बवाल है माई। माया कहते हैं माया है बो स्ट्रॉंग है। आप कहोगे कैसे, क्या भविष्य है उपाय क्या है माँ वाह मेरे शेर में जो आएगा वो मेरे में जो आयेगा वो माया क्या विरोध कर सकता है? सो। can the holy name in a defense against a may is strong, but strong with an में बहुत महत्वपूर्ण संदेश देते हैं आपने पढ़ी ये किताब इंsनमृ उसमें 11 श्लोक हैं। हर श्लोक का बड़ा महत्वपूर्ण सन्देश है। भगवान के जो पवित्र नाम है वो बिल्कुल प्योर है। भगवान के जो नाम है वो मीठे हैं। मीठी जी तो सबको अच्छी लगती है, पर अवलिया के कारण आम उसका मीठा पान मशहूर नहीं कर सकते हो। सी लाइक शो मई अवलिया है। मुस्लिम भगवान के नाम को क्या है। उपाय सामी ने कहा भगवान के नाम चीनी जैसे मीठे हैं, पर हम उसका मजबूर नहीं कर पाते। उधर जब के समय हमें नींद आ जाती है
और
कोई सोता नहीं है। देखा कि सी हो के नाम में थोडा नाम कर देते हैं और थक जाते हैं। क्या किया जाए? कोई उपाय है, कोई उपाय हैं। कहते हैं हालांकि हमारे बलिया की बीमारी है। जब भी हम ध्यान पर शुरू में आप जब भक्तों को मिलते हो। वो कहते हैं पी हाय कृष्णा। आप थोडा कडवा लगता है आय नाम लोगे बौधिक चीजों का गाने नहीं गा आय। नाम लोगे शमित हो गए। जॉब के लिए तो बोसिकचीजोंके लिए समय नहीं होगा। भाई नाम करो क्या लाभ होगा। 2 पर नाम से क्या काम? यह नाम के उच्चारण से इस में जो मैल है वो दूर हो जाएगी। इसमें मेल है या नहीं? आप क्या सोचते हो? कोई भक्ष है इस सभा में, उसके हृदय में मैल नहीं है। बाबाजी कहते थे आपका हृदय कोलेज से भी ज्यादा का रहा है तो राम लेने से आपका हृदय साफ होने लगता है। आप सब का नाम के उचार सी। पहले आप कई गलामों में उचाल आरम्भ किया। क्या देखते हो की हमारा हृदय वो चीजें जो आपको 1 समय सूरत लगती थी। आप सूरत लगती है तो हरी नाम की महिमा है। शाह में लाखों मंचों का वर्णन है। 1 हर 1 के मन को महा मंत्र माना जाता है। तो राम की महिमा अब प्रचार होना चाहिए। वासदेविपराभगवान के भाग से जिसे कोर की बीमारी थी और उनके शरीर से बदबू आती थी। हमेशा इतनी बदबू आती थी की अगर कोई व्यक्ति उनके साथ था चले जा रहा था, चले जाता था तो खेत आये थे विदा और और कुर्मा ब्राहण के घर निवास किया था चल पड़े और जब से परा गया कुरमा ब्राह्मण के घर में जो उसे पता लगा कि भगवान चल पड़े हैं वो शोक में आ गया माँ बाबू भगवान उन्हें पता था हे माँ बाबू वापस लौटे। जब वो लौटे तो उन्होंने को गले लगाया और जैसे ही गले लगाया उनकी सारी कोर्ट की बीमारी समाप्त हो गई। वो वो 1 खूबसूरत युवक बन गया और उसके मन में था पहले तो कोई खुबसूरत हो गया हूँ मैं भाग की इच्छा क्या होती है आप हम हुमनिटी एंड प्राइड ऑफ भाग है चाहता है को चिंता थी लोग सा करेंगे तो मिलने का फूल कैसे बंद है तेरे मा से पूछा आप की कृपा से मैं कैसे? pisegoiग इफ यू डू दिस ल बी मीन will ने कहा तुम हरी नाम का उच्चारन करोगे, तुम सदा में हर साल रहोगे मैं तुम्हारे आप ने आई राज ठाकुर का नाम सुना, आई राज ठाकुर वैसे ब्रह्मा जी के अवसर है भाईराज ठाकुर जन्म हुआ था किसमें मुसलमान खान ने वो क्या करते। उस समय भारत खास कर के बेंगौल मुसलमान राजा के शहर में था, मुसलमान हो कर हिंदुओं को कोई शहर के काजी था। आजकल चीफ मिनिस्टर होता है। म वह पता लगा के ही मुसलमान खाना में जन्म लिया। वही नाम का उच्चारण कर रहा है
रोको
यही नाम का उच्चार तुम मुसलमान खाना में जन्म लिया है। आला भाईराज समझाया भगवान के नाम को उनमें कोई नहीं, उसने बड़ा प्याज किया हलाज को विजित करने के लिए। 1 दिन उसने होशियार की सभी पेशियों को बुलाया और कहा देखो तुम्हें कौन है जो हाईलाइन को सिड्यूस कर देगा कौन है जो की हरिदास को हजारों लोग ते थे है इलाज को मिलने और काजी को कोई काजी को कोई नही था को इतना नाम मिल रहा है लोग करते हैं उन को बुलाया था तुम सब में कौन है जो की हरी 10 को का सकता है समझाओ और आदाज को के साथ प्रेम करो मैं चौकीदार हूं को भेजूंगा मुझे गिरफ्तार करने के लिए इन वैश्यों को जब कहा तुम्हे कौन आगे आयेगा। सब ने कहा सब ने कहा हम नहीं कर सकते आईदाजइतनाबड़ासंत है हमें नहीं करेंगे। पर 1 थी जिसने कहा मैं हायदाजकोपसाओगी चिंता मत करो तो जी ने म्होंने तुम तुम्हे अच्छी रकम देंगे हम तो हाईदास तो कुटिया में जॉब कर ले ते उस कुटिया में 1 कोने में शाम से उसने कुछ नहीं किया पर हाई दाज हमेशा 1 हाई दाज हमेशा 1 साल में नहीं रहते थे वायदा छोड़कर जाने वाले थे, भगवान ने दिया ये वो, रुक गए भाई मैंने आज का जॉब खत्म नहीं किया है तुम उधर बैठो और खत्म करने पर से उसे आकर्षित करने का प्रयास करे। तो आईना आईना का उपचार कौन सुन रहा था तो सुबह आ गया आज मैं नहीं कर सकता
ल
कल भी आई और वह भी खत्म नहीं हुआ है कल सुबह आना है नाम का उचार 30 दिन आये दिन आई। वो जॉब करने लग गए और उसने बताया कि उन्हें भेजा था, जानकारी है और शिया गत हो गई नेहा अब हैना में भी करना चाहती हूँ
न
वो आई थी आज को फसाने के लिए क्या बन गई है साधु संग प्रभाव। इसलिए में कहा गया है शालू संग, साधु संग को 1 पल के लिए भी लू की जाए, आपका जीवन हो सकता है। तो ये और भी निराश हो गया प्रयास किया समाज को ये दिखाने के लिए कहा धोनी है वो फेल हो गए। तो हाई नाम का उच्चारण इतनी शक्ति है कि उसके द्वारा जो भी है वो है तो जन का जीना। राजा के पास ने कहा की ये हैजा मुस्लिम धर्म का बेच कर रहे, हम तो किसी हिंदू के घर में है। 1 चावल का दाना भी निकाले और ये है राज हिंदू भगवान। राजा ने राज को राजा के पास ले गया की राजा ने कहा मुसलमान खानदान में जन्म लिया है इतना था और तुम ये हिंदुओं का नाम ले रहे हो हम तो 1 दाना भी नहीं खाते जो भगवान के नाम भगवान भगवान है सबके लिए खैर राजा ने नही किया और काजी ने कहा ले जाओ इधर इलाज कहो 22 बाजारों में में जो 22 बाजारों में शौक उनको जब हराम कर दे गया तो 20 बजाय गए, जो लोग पी रहे थे उनमें घबराहट हो गई। राजा ने बोला था इसको ऐसे पीना तुरंत मर जाए। अक्सर पीते से दूसरे पर अपराधियों को जो तीसरे बाजार तक पहुँचने तक व्यक्ति मर जाता था। कभी बस बाजार में आ गए है जी कोई निशानी नहीं, मारने की कोई दर्द नहीं, कोई नहीं तो जो थे अब राजा हमें जिंदा नहीं छोड़ देगा। राजा हमें जिंदा नहीं छोड़ेगा, वो हमें फांसी दे देगा तो हैराज नहीं है सुन लेगा हरदा और हरा निर्णय किया मर जाऊँ। ऐसा वार किया, बीजिंग प्रोसेस रोक लिया अगर शरीर बिल्कुल स्थिर हो गया खुशी जो राजा को। राजा ने कहा काजी से अब इसको अंतिम संस्कार करो। दराज ये जो है पापी मन का इसको कोई संस्कार के आधार पर समय समय फेंक। 2 इसे गंगा में उन्होंने गंगा में फेंक दिया। आहराजिसनेइतने समय तक ऐसा व्यवहार किया। मृत हो गयी तो राजा नदी के दूसरी तरफ तैर कर। फिर उसने बजट शुरू कर। राजा को सूचना मिली ये हदाज समझा था या है और कुटिया के नीचे जॉब कर रहा है। ये महान संत है पीटा गंगा में लास को शुरू में सोवियत यूनियन से रशिया के नाम से जानते हो। हमारे कई भक्तों को जेल में डाल दिया था और उनको कहते थे
मास
खाना शुरू करो, हम छोड़ दे न करो, छोड़ दे नहीं किया नहीं छोड़ा ही मर गए, नहीं छोड़ा राम तो राम जो हैं प्रोजेक्ट और हम है हर नाम का जॉब करना, हर नाम को जॉब।
3
पहला है आप जॉब कर रहे
हो
और गलत काम में कर रहे हो। हमारे रो हरी राम 16 माना करते थे और शाम को शराब भी पीते थे। करे शराब छोड़ तो पहले से में आप जॉब करो और अपराध भी हो जाए। जब आप बक्सों के सगे आते हो, शास्त्र को पढ़ते हो तो आपको ये गाल क्या krishna se prem bukti medium shravan खुला मना करते हैं और जो जॉब करते जाओ कौन सी सेज में आओगे तो अपराधों से बचो सेवा उसका ज्यादा लाभ है। सो फॉर वन चेतना ने कहा चाहेगा जायेगा में तो आज हमारे नाम आई नाम का प्रचार कैसे ये हाई नाम के द्वारा, इसको इच्छा ही राम का प्रचार तो भगवान का जो नाम है भगवान से शा शा युग है, कितने युग है जो हर युग में अलग माध्यम है। सतयुग में लोग आयु सी 1 लाख सा और 80 हजार साल तक वो भगवान का चिंतन कर सकते थे।
आज अगर
ऊपर तक पहुँच जाओ, या से ऊपर जा सकते। ये चिंतन करना सम्भव नहीं है। द कौन सा योग साहब क्या था, माध्यम माध्यम था बड़े करने, जिसमे ब्राह्मण आदि और ये जो ब्राह्मण थे, ये अग्नि को उत्पन्न करते देखे मानसा लाइट नही। तो में तो यह भी संभव नहीं है। मुश्किल से घर का खर्चा चलाते हैं और हम दूर साधन क्या था भगवान के सेवा को कहे पार्ट राधामदन मोहन राधा मदन मोहन का दर्शन ले रहा है। सो आपको सोना लाना पड़ेगा, सोना लाना पड़ेगा लोग आयेंगे वो इनाम प्राप्त हो सकता है में किसके द्वारा अलग बीमारी का अलग इलाज है। इस प्रकार अलग अलग माध्यम है। आप सब का शुभा है या नाम हो महिमा है। हमें क्या करना चाहिए? भगवान रूचि बढ़ानी चाहिए में कोई रूचि नहीं है, ना करते जाओगे, फिर आपकी रूची बढ़ेगी और यह होना चाहिए। हमारा सब को देखना चाहिए। वां आगे बढ़ रहा हूँ, रूचि बढ़ रही है। सोना मना कर लिया। ब बड़ा पोजा गाओगे तो यह अच्छा भाव है। सो हमारा रोज करना है। तो आप का लाभ क्या है? आपको असली आनंद मिलेगा। और ये जो आनंद है, बढते जा रहा है, बौद्धिक आनंद की सीमा है, आप भूख लग रही है। 1 चवादिखातेदोगजवादी बस पर ये नाम है। इसके द्वारा वो आनंद प्राप्त होता है। वो बढ़ते ही जाता है। जो आराम का उच्चारन करने के लिए क्या भाव होना चाहिए। क्या भाव, कौन बताएगा राज गुरु भाई आये। उन्होंने पूछा अबे बाबू, तुम के प्रवर्ग केमिस्ट की दुकान थी, तुम दवाइयां बनाते हो, तुम यह बता सकते हो की हरियाणा में रूची कैसे बढ़े? मैंने मा से कहा मुझे फॉर्मूला पता है, पर दवाई तैयार नहीं भी जानता हूँ कि ये दवाई कैसे बढ़नी चाहिए, दवाई तैयार नहीं होगी प्लीज। बताइए क्या है? फॉर्मुला यह शो कितना महत्वपूर्ण है। राज कहते हैं इस श्लोक को अपने गले में लगा के रखो। हमेशा याद रखो कितनी आदि। अगर आप चाहते हो की आपकी वाणी से भगवान के नाम का उपचार हो नाम का क्या कहते हैं? घर से भी ज्यादा पतित समझो घास के सिर पर सब चलते हैं। घास कहता है क्यों मेरे सिर पर पाव रख रहे हो। सर लेता है, सबकी सेवा करता है। सर्दियों में लोग लकड़ी ले जाते, आग पैदा कर दे। धूप हो या बारिश जो जो सैल पेड़ जो है सर्दी में लोग काटते हैं और गर्मी में लोग पेट की लेते हैं धूप से बचने के लिए। तो सैंजीबनोसोआदर 2 पर आदर की उम्मीद रखे बिना इस विनम्र भाव से करोगे तो हैणामसदाआपकी निकलेगा सो विनम्रता। heminityisvery important as your life on tेnशoनयमरसोचोगी मुझे आदर नहीं देता तो मैं भी उसका आदर नहीं दूंगा, बहुत सोचते हैं नेल देला तुम ये करोगे तो मैं ये करूँगा डेड फॉर टैट ऐसे करोगे तो मैं ऐसे करूंगा आद। 2 उम्मीद रखे बिना मैंने देखा था। 1 प्रोग्राम में की 1 व्यक्ति ने प्रॉपर का अपमान किया था, प्रबल नेकृशस्कूलदिया हिंदू भाई था कैनाडा की कथा जिसने कहा आप क्यूँ आती हो और आशीर्वाद दिया 2 महीने बाद जल छोड़ रहे थे तो संसो द्वारा अनेक उदाहरण है तो आप सब की पूरी श्रद्धा है इनाम में जानती हो की घडी कहाँ है। नाम सबसे सरल माध्यम है प्राप्ति के लिए। और हम गोचर कुछ कठिनाई भी नहीं है, हमने कभी नहीं सुना। चीन में भी यह नाम गोचान नाम की महिमा का विचार करना है। शु एडवांसेज हो इन्हें सो esi आप किसी बकते कर सकते हैं भरयणामकापजापूजा के कमर में हर जगह हो सकता है और कोई भी उस नाम का उचारन करे लाभ मिलेगा लिए कितना गैरासनेहै भगवान, कितना प्रेम है, कितनी सेवा भावना राधा कृष्ण बन गए राधा कृष्ण ह भारत में थे तो दूर दूर से लोग आते थे, उनसे मिलने वापस जाते थे उनको लेकर ऐसे बौधिक बीमारी को कोबिड था कोबिड 1 व्यक्ति से शुरू हुआ, दूसरे हो गया, तीसरे हो गया। तो ये जो है नाम है, दर इस रियल वैस्िनेशनहमसबरूी है। तो ये है नाम का प्रचार और दक्षिण भारत में पूरी प्रजा आयेगा हमारा सोभाग्य है हमें ये अमेरिका में करना चाहिए। care krishna and paste gulyhikrishna question a very interesting pec sony a मारा सुन सुन सकते थे,
कल भी आपने अच्छा प्रवचन दिया, आज का भी अच्छा था,
बहुत बहुत धन्यवाद महाराज जी और मेरा
ये प्रश्न है महाराज जी, आपने बताया कि ध्यानपूर्वक जप करना चाहिए। मतलब ध्यान पूर्वक करने की कोई विधि है की बैठक कैसे मतलब उसका है
याद करो। केवल जप कर हो, यह नहीं कि 1 हाथ में माला है, दूसरे हाद से आप मोटर चला रहे हो ये की 1 द में माला है और दूसरे कुछ और कार्य कर, आप मन बगल पर रखता है, उसको पटक दे। 2 ये तो सरल है या करो, मन में करो, अंग में करो, पर 1 ही काम जब शाद खाते हो तो आप नही कर, ता बात किया
जाए हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, महाराज जी, मेरा प्रश्न, ये है महाराज जैसे आपने कथा में हरिदास ठाकुर जी के बारे में बताया की उनको 22 बाजार में इतना मारा गया, प्रताड़ना दिया गया, फिर भी उन्होंने उनके ऊपर दया किया और ये हमारे आचार्यों में हम देखते हैं कि वो पूरे संसार के ऊपर दया कर रहे हैं। यह हमारे हृदय में यह भाव कैसे आ सकता है। क्योंकि हमें अगर कोई छोटा सा भी कुछ बोल देता है तो हमको बड़ा बुरा लग जाता है। हमारा नाम में जो मन लगना लगता नहीं, सेवा में मन नहीं लगता तो ये हम अपने हृदय में, अपने जीवन में कैसे उसे हम धारण कर सकते हैं। हम जब
पढते है, अनुकूल होना चाहिए और ट्राई गेन, ट्राय गेन प्रयास करते रहना चाहिए। महान संतों की महिमा पढ़ते हैं। हमें भी प्रयास उस के भाव को अनुकूल करने के लिए। समझे। अंडरस्टैंड महाराज जी,
महाराज जी, आप ने जैसे बताया की।
जैसे जैसे हम नाम लेते रहेंगे वे
रूचि बढ़ती जाती है। हम देख रहे हैं कि 17, 18 साल से हमारी रूचि बनी रही है, घट रही है। सोला माला बड़ी मुश्किल से कर पाते है। सोला माला करते हैं, माला रख देते है। अंदर तो उससे कैसे रूचि बढ़ेगी। जबकि माया के प्रति रूचि बढ़ती जा रही है।
दिन पर दिन कैसे उम्र बढ़ रही है, रुचि बढ़ रही है। इसीलिए आप आज भी सोना माला कर रहे हो। अगर रूची नहीं बढ़ रही होती। आप को हमारा जाब छोड़ दे थे, आदमी में नहीं छोड़ा है में थोड़ी रूची आ गयी है। पर हमें रूची को बढ़ाना है, श्रधा नहीं होती। हम जा क्यू होते है। यह 12 बार प्रणाम गुरुदेव, बारम बार धन्यवाद है।
इस धरा पर आप उत्तरित हुए, ये हमारा सौभाग्य है। आपके चरणों में कोटी कोटी बंधन।
मेरा कोश्चन है कि हम लोग जब
चैंटिंग कर रहे है और कोई भक्त का फ़ोन आ जाए तो हम चैंटिंग भूल कर फ़ोन पहले ले लेते हैं, बाद में लगता है कि अरे यह तो अपराध कर दिया। बट ये बार बार अपराध करते हैं।
तो यह ठीक है।
या गलत है कि हम किसी भक्त का चैंटिंग के टाइम में फ़ोन लेते है। अरे कृष्ण,
co इmपोर्टanटपoint important point 8 से 10 में फोन करना इतना आसान नहीं है। पर प्रयास करो प्रयास करोगे। अनिल सक्सेस होगा।
हरे कृष्ण, गुरु महाराज जी, प्लीज, एक्सेप्ट मई। हम्बलोबेसनसेस गुरु महाराज, महाराज जी जैसे भगवत गीता में आता है कि जब व्यक्ति शरीर का त्याग करता है तो उसका हृदय में जो भी भाव रहता है उसके अनुसार उसको अगले शरीर की प्राप्ति होती है। यम यम वापी स्मरण भाव। तो महाराज जी, यहाँ पर कई भक्तों का हमसे प्रश्न होता है तो हम उसका असर ठीक से नहीं कर पाते। इसीलिए आपसे जानना चाह रहे हैं। तो भक्तों का प्रश्न होता है कि भाव तो ठीक है जो वो भाव हमें मिलेगा। लेकिन किसी की यदि अकाल मृत्यु हो गई है तो अकाल मृत्यु के समय तो मन में किसी के क्या भाव हैं, किसी का कोई कंट्रोल नहीं है। तो ऐसे में उनका डेस्टिनेशन क्या होगा?
और यह कहा गया है कि मरते समय हमारा बैलेंस नहीं रहता। समय को माँ में हो सकते हैं क्योंकि अगर उस व्यक्ति ने नाम किया है। पहले सुरक्षा लेगा। कई बार भक्त एक्सीडेंट न मारे जाते हैं तो एक्सीडेंट हुआ सड़क पर से आपका एकदम हो जाता है। आपको 1 मिनट जिंदा हो। आगे म नथिंग दूरी जो नाम किया है, आपने पा जी क्या कहते हैं, पढ़ के सुना दी में 1 मिनट हमने कसम नहीं? आज का आपका प्रशन अच्छा है। भाग जो है, किसी स्थिति में भी उसकी मृत्यु हो। उसको ये अनुवाद
अनुवाद अजामिल ने मृत्यु के समय कष्ट भोगते हुए भगवान के पवित्र नाम का उच्चारण किया। और यद्यपि उसका ये उच्चारण उसके पुत्र की ओर लक्षित था, फिर भी वो भगवत धाम वापस गया। इसलिए यदि कोई श्रद्धापूर्वक तथा निर अपराध भाव से भगवान नाम का उच्चारण करता है, तो भगवान के पास लौटेगा। इसमें संदेह कहाँ है? हरे कृष्ण माराजदनदतप्रणाम, महाराज जी 2 प्रश्न थे। पहला प्रश्न है कि प्रचार का सही में अर्थ क्या है? क्या पुस्तक वितरण करना प्रचार है? कि भक्तों को मंदिर में जोड़ना प्रचार है? कि सेवा करना प्रचार है? क्या आचरण करके दूसरे को सिखाना? यह प्रचार है। और दूसरा क्वेश्शन यह है की आपको सबसे ज्यादा भक्तों से खुशी कब होती ह?
क्या आपका परेशान है? प्रचार का उद्देश्य क्या है? प्रचार का उद्देश्य ये है, दुसरे व्यक्ति भी सुखी बन जाए। ऐसे में दी 1 औरत सेवा करती थी। बड़े खुश थे, तुम्हारा नाम क्या है? उसने कहा। दुखी। दासी ने कहा, आज से तुम्हारा नाम होगा, सूखी। दासी तो उद्देश्य है, सब को सुखी बना। तो इसके लिए हम प्रचार करते हैं। ग्रंथों को इसलिए दिया जाता है भगवान की वाणी, भगवान की वाणी को ही ऊपर रहेगा। उसमें आध्यात्मिक जागृति उत्पन होती है।
आप तो
बक्सों होता हूँ। मैं देखता हूँ की वो आराम कर रहे हैं, गंध को पढ़ रहे हैं, बन रहे हैं, पर शहर का भाव है। जब हम खुश से है ही नहीं की हमें इतना ना लोग, लेकिन हम की सेवा में जाती है सेकेंड। prmrीरस
maharaj, my question is doing the course of preaching, we come across many new devoties marg,
yes marg, we come
across many new new devoties so, there gating attracted to the process of chanting? how do we atract people to the
process of chanting, maragnxaexplain explain why anesabafolosi? हम थोडा पेशन होना पड़ता है, साइद होगा आएंगे शहर में आएंगे दुर्भागे, दुर्भागे हमारा कर्तव्य है। आपको भाग,
हरे कृष्णा, गुरु, महाराज। हम लोग जो पुस्तक वितरण करते हैं, भगवत गीता का वितरण करते हैं, तो कई लोगों को पुस्तक देते हैं, लेकिन बाद में वो पढ़ रहे हैं या नहीं पढ़ रहे हैं, इसका हमारे पास कुछ रिकॉर्ड नहीं होता है। कुछ लोग पूछते हैं कि आप लोग बांट देते हो, लेकिन वो पढ़ते है की नहीं, इसका आप क्या करते हो,
इसके आप करना और अगर आप भी। दोगे आपको जीवन। कई लोग पढ़ते भी हैं, ई बार सच है, कई लोग गंद को लेकर, भागवत से, भगवान से, कई लोग लेते हैं। हमें ड्राइंग रूम में रख देते हैं, ठीक है, और कुछ पता नहीं कब का ऑस्ट्रेलिया में 1 भाग थे, जो की 10 साल के ले खोला भी नहीं। गीता 1 डोर में थी। विचलित हो गए, दुख। दुख में उन्होंने गीता में देखा, वो भगवन गीता है, गीता पढ़ना शुरू किया और वे इसके माध्यम से बन गए।
रिक्शा महाराज मैं क्वेश्चन वाज की अभी अभी हमारे टेम्पल्स पर बाहर के देश में बहुत सारे अटैक्स हो रहे है और टीस पर अटैक्स हो रहे हैं तो फिर हमें कभी दया, दिखानी, चाहि और कभी ऐसे फाइट पैक करना चाहिए। क्यूँकी मतलब
कोई wo जैसे कोई चोर आ जाए तो को पुन शूट भी कर सकती है। विवाह में हमें ने पर ज्यादा नहीं करना चाहिए। नेशनल के सम्बन्ध में में अलग है। शू स्टेट फोवडहम्बल
हरे कृष्ण प्रभु महाराज मैं अभी बिजनेस कर रहा हूँ और मेरा इंट्रेस्ट है ज्ञान प्राप्त करके ज्ञान देना भी मुझे अच्छा लगता है। तो मैं अपने जीवन में सबसे अच्छी सेवा कृष्ण, लाल कृष्ण की किस प्रकार कर सकता हूँ। मेरी इच्छा है उनको सबसे ज्यादा परेशान करने की। तो ऐसे क्या कार्य क लू। मैं जीवन में है महाराज मैं बिजनेस कर रहा हूँ अभी और मुझे ज्ञान प्राप्त करके ज्ञान देना भी अच्छा लगता है। लोगो को तो मैं अपने जीवन में पानी पी ले जाओ। मैं अपने जीवन में ऐसा कौन सा कार्य करूँ जिसमे भगवान कृष्ण की सबसे अच्छी सेवा कर पाऊँ। मैं उनको प्रसन्न करने के लिए
बड़ी अच्छी भावना है। भगवान की खुशी में हमारी खुशी, ये हमारी खुशी में भगवान की खुशी, हम कृष्णा को क्या से ही राधा भाव है। हाऊ कैन मेक कृष्णा मोर हैप्पी। तो आप जॉब करना शुरू करो। जब करते हो करते हो। भगवान आप बड़े परेशान होते हैं, भगवान देखते हैं। ये व्यक्ति में आदेश का पालन कर रहा है। अगर भगवान का क्या, आदेश, आमिर सब धर्मों को छोड़, मैं, तुम्हे तुम रक्षा करूँगा। बिना शंका के भगवान को पसंद करना है तो करो के भगवान से बड़े प्रसन्न हैं। आप क्या गीता पढ़ते हो
है
जिसे भगवान प्रसन्न है, गीता पढ़ते हो, भगवान देखते है। ये व्यक्ति मेरे आदेश को पढ़ रहा है। 1 व्यक्ति मुझे जानने का प्रयास कर रहे है। भगवान खुश होते है, भगवान खुश होते है। इस पर से धन कमाया है। चाहता है भगवान का प्रचार हो, मंदिर का मतलब क्या, भगवान का घर, समाज में धनी बनते हो। सबसे पहले क्या सोचते हो, मकान बनाओ। पर अगर हम भगवान की सेवा के भगवान खुश होते बनेगा। यहाँ के लोग हजारों की संख्या में आयेंगे। जैसे का मंदिर निर्माण जब हो जायेंगे, कम 30, 40 हजार लोग रह जायेंगे। म लोग आओ मंदर में आयेंगे। भगवान लोग देखेंगे भगवान का सुन्दर इतना सुन्दर मंदर मार्बल में बना, भगवान खुश नहीं और जो जॉब करना बंद करो तो भगवान मे दुखी हो जाते हैं। माया में गिरो मे भगवान दुखी हो जाते हैं। आपने बच्चों से संतोष रहता है। वो देखता है कि बच्चे उनके आदेश पर चल रहे हैं।
कृष्णा गुरु महाराज जी जब महामंत्र का जाप करते हैं तो जॉब के टाइम पर कुछ लोगों को देखा जाता है। चाहे खुद भी चैटिंग करते टाइम पे जिससे हर 1 कृष्ण है तो वहाँ पर हर 1 कृष्णा बोल देते है, राम है तो रामा बोल देते है, हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, कृष्णा, हरे हरे राम, हरे राम और राम कृष्ण और राम हो जाता है। तो इसको कैसा अपराध है की कैसा
है
महामंत्र का जब चैटिंग करते हैं तो कृष्ण की जगह पे कृष्णा बोल देते हैं और राम के जगह पर रामा,
हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, कृष्ण, कृष्णा, हरे, रामा, रामा, रामा, रामा आरे मे यह देखना चाहे कि हम ठीक से अनाउंस कर रहे हैं।
हरेकृष्णा महाराज जी प्रश्न यह है कि जैसे हम श्रवण करते हैं, भागवत पढ़ते हैं, भगवत गीता पढ़ते हैं, कीर्तन में भी भाग लेते है। बट कभी हर भक्त का रुचि किसी 1 विशेष चीज में ज्यादा होता है, किसी को सुनने में ज्यादा अच्छा लगता है तो किसी को पढने में ज्यादा अच्छा लगता है, किसी को कीर्तन में भाग लेना ज्यादा अच्छा लगता है तो इसमें हम किस तरीके से तय करे कि हम सही कर रहे हैं। अगर हम ज्यादा सुन रहे हैं, ग्रंथ कम पढ़ रहे हैं या कीर्तन में ज्यादा भाग ले रहे हैं, श्रवण और ग्रंथ कम पढ़ रहे हैं तो इसमें हम कैसे निर्णय ले की हम कैसे सही तरीके से यह
भर की इच्छा होती है। ये वो हरे ठीक हो फिर सनी करना है, सलेक्शन भी देना है, पढना भी है, आपका कार्य है को न करना न की सेवा में आप जुड़ सकते हो और मान लो अभी पढने में रूची है एडवांस करोगे जो भी सेवा भगवान दे हम करने को तैयार है भेजा जाए किसी को कश्मीर में जाना पड़ता है हम भगवान की सेना के सोल्जर हुए चाहिए
अरे कृष्ण, माराज,
महाराज, भगवान और भगवान के नाम में
कोई अंतर नहीं है
तो हम लोग
जब मंदिर जाते है तो चप्पल खोल
के जाता है लेकिन हम लोग भगवान
का नाम लेते हैं तो चप्पल का 1 नाम अपराध नहीं है क्या महाराज क्वेस्टन की हम जब मंदिर जाते हैं भगवान और भगवान के नाम में से अंतर नहीं है तो मंदिर जब जाते हैं, चप्पल खोल के जाते हैं और जब नाम जप कर रहे हैं कभी कभी चप्पल पहन के कर रहे हैं तो क्या यह अपराध है नहीं है
कर सकते हो। भगवान ने कहा कोई नियम नहीं है
हरे कृष्णा, हरे कृष्णा गुरु महाराज मेरा प्रश्न है, हरे क्रष्णा गुरु महाराज मेरा प्रश्न है कि प्रकृति के तूर्णति 3 गुणों के उपलब्ध जैसे की हमारे जीवन में सुबह का समय सात्विक होता है और दोपहर का समय राजसिक होता है और रात्रि का समय तामसिक होता है तो हम सुबह हरिणाम करते है और दोपहर में थोड़ा हमें हरिणामकरने में कम रुची आती है और रात्रि के समय जब हरणम करते है तो हमें नींद आती है और तरह तरह के गन्दे विचार आते है तो रात्रि का शेड कैसा हुआ हमारा की रात्रि को कैसे अपने आप को उसके अंतर्गत अच्छे से रखें अपने मन को काबू करे और फिर
सोने चले जाए।
रात्री का समय
है कृष्णा सुबह का समय जब के लिए सुबह के ज्यादा अच्छा रहता है, रात को भी कर सकते हो पर सुबह के समय ज्यादा सरल है इसलिए कई परत के नियम बनाते हैं हमारा हम नहीं खायेंगे कर सकते हो। करो
हरी कृष्ण गुरु महाराज दनयवाद प्रणाम महाराज मेरा प्रश्न है कि हर भक्तों में 1 अलग खूबी होती है कोई कीर्तन बहुत अच्छा करते है, कोई कुकिंग बहुत अच्छा करते है, कोई प्रचार बुक डिस्ट्रीब्यूशन अच्छा करते हैं तो महाराज हम कैसे समझे की हम किस सेवा के लिए उपयुक्त है। मतलब हम किस सेवा को ज्यादा अच्छी कैपेसिटी से कर सकते है।
आपका है सेवा में जुड़ जी में जुड़ना चाहिए।
हरे कृष्णा, हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हम सब बहुत भाग्यशाली है और बहुत भगवान की कृपा है हमारे बीच। गुरु महाराज ऐसे आकर खारघर प्रोजेक्ट को ब्लिस करते रहते हैं और 12 बार महाराज को धन्यवाद देते हुए हर मंत्र का उद्घोष करेंगे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे परम पुजा गोपाल सवाई महाराज के हरे कृष्णा। तो जैसा की आप जानते है आने वाली 29 तारीख को हम भाद्र पुर्णिमा मना रहे हैं तो अभी 6 दिन ही बचा हुआ है तो ये 6 दिन में विशेष डिस्काउंट है श्रीमत भागोतम के सभी लैंग्वेज में आज का दिन बहुत अच्छा है पर ये गुरु महाराज यहाँ पर उपस्थित है। आप किसी को भी अगर भागवतम लेना है तो ये एकदम सही टाइम है क्योंकि गुरु भी उपस्थित है, भागवत उपस्थित है तो बैक टू गॉडहेड निश्चित है तो इसलिए अगर आप वो लाभ लेना चाहते हैं तो प्लीज आज ही अपना सेट ले लीजिये या आपको किसी को दान भी देना है तो उनका नाम लिख दिये 29 तारीख को हम उनको बुला कर के यहाँ पर आपके हाथ के द्वारा या प्रभुजी के हाथ के द्वारा हम दिलवा देंगे उनको कृष्ण इस
विषय में मैं कहना चाहता हूँ। प्रवाल की इच्छा थी, उन्होंने पद से किया। हर घर में भारत के चेतन सैड होना चाहिए। और शिव भागवत का पिछले कई सालों से इसको ने निर्णय किया है। हमें भागवत का प्रचार बढ़ाना चाहिए। तो आपको जानकर खुशी होगी कि पिछले साल सारे विश्व में फोर्टी फाइव थाउजंड। भगवान से ब जब मसान शुरू हुआ तो 5000 राम कर रहे थे, पिछले साल फोर्टी फाइव थाउजन्ड, पर पहुँच गए। और अगले साल का टारगेट है 1 लाख तो ये भगवदम में क्या है, भगवत में है सबसे उत्तम ज्ञान और भगवत में इतनी शक्ति है कि अगर 1 श्लोक भी पढ़ लोगे तो जीवन सुधर सकता है। आप में से कितने भक्तों के पास भगत है लगभग सब के पास, पर आप क्या कर सकते हो? आपने अगर किसी को प्रेजेंट भेज देना है तो भगवदम का सेल दे सकते है। बेशक वो नहीं पड़े पर भगवदम उसके घर में होगा, उसके द्वारा ही शुभ वातावरण हो जाएगा। और भारत में अनेक लाइबेरी हैं, वही लाइबेरी वालों के पास पैसा नहीं रहता। लाइबरी में आप डोनेट कर सकते हो। और रिश्तेदार हमारे कई भक्तों ने कहा है रिशेदारों को दिया और उनमें उनकी कोई रूचि नहीं थी। मरने के बाद भला प्रकट हुई। भक् तो जो व्यक्ति भगवान भगधमसेठपढता है और वितरण करता है से भगवान की अधिक कृपा प्राप्त होती है, उसी भगवद शुरू से 1 ही संदेश है। प्योर डिवोशन से कर्म करना। भक्ति योग तो जैसे अपने हाथ उठाया सर के बाद सर के बाद बाबदमसेडहैउसे पढ़ना भी शुरू करो पर आप सपने सकते हो। दूसरों को बांटने के लिए गुडाया
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