भौतिक दोषों से बचने का एकमात्र उपाय | SB 7.10.12 || Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī | Delhi | 12 Dec 2021

The video is a devotional lecture centered on the teaching that renouncing material desire (भौतिक दोष) is the sole means to attain spiritual liberation, anchored in Srimad Bhagavatam 7.10.12. Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī, together with several participants, recites Sanskrit shlokas, chants Hare Rama/Hare Krishna, and offers detailed commentary on how attachment to material objects creates spiritual defects. The speaker emphasizes the importance of hearing and practicing the teachings, the role of the guru‑disciple relationship, and practical steps for daily bhakti. Interspersed throughout are audience interjections that raise contemporary concerns—police corruption, challenges in distributing sacred books, and criticism faced by spiritual teachers. The lecture addresses these concerns, urging perseverance, proper book‑distribution strategies, and a compassionate response to skeptics. The overall tone is reverent, instructional, and occasionally defensive, aiming to inspire devotion while confronting modern obstacles.
Chapters
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जायरा जमा हवा
जब
हार जाय धमा जाना वाला बा सीवर गोपी जनाब लाभा धा जाहरा जमा हवा जब हार जाये जमा जब हार 2 जाना न जाना जाना सो जाना दन पहले जाना न जाना जमा रा बन जाय जनाली रा बन जाय जरा जा जवाब लाला वाला t gay बोल जाना
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रे आरे आरे राम रे राम राम राम रे आ रे
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हरे राम राम रहा हलेहरेजेकाले हरे रामा रे राम रामा रामा ले आ
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गाले हरे हरे राम हरे राम राम राम
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हरे बेचारे हरे हरे रामा रामा रामा
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रामा
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बेटा राम रे राम हमारा ा
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श्रीमन भारत सा अध्याय 10 शलोक संख्या द्वारा अध्यक भक्तश्रलकथामदिया जुषमाणप्रियासवा बे श्यामा महात्मानिसंत कम सर्वेश भुधेश्वधियज्जनी श्ंेशुेशयजस्वयोग चकर महिमन कधामदीरुषमानपरिया वाम वेश्यमामातमरिसंक में कम सर्वेश भूधेश्वधियज्यमी शम यजस्वयोगनजकवहि दी रुषवनपरियतव मनि संत में कम सर्वेश भूत श्वधियज्ञमी
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यजस्वयोग्यनचकरबगिन बन ोे
मान का रवि
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सभी देश शासरेसूदेिशा
दिया जुsमanप्रियस्त्वम हाय जुश्मायस्ववेशमा मद सं त मे कम
भूतेशुदजमिशमअते
व योग ना चा कर महीन बन
जस्
ाराज हर शाम
होते कि नेजा
शा मारे जान म
हरे सुकेसियगरेशाम
गा
धन्यवाद श्रोताका परिपृषपभाजमूरत धाय भक्त विधानदस प्रभोपानकीदथाहा संदेश उपदेश मदिाहदेरद्वारा प्रदत जुषमाणहासदेवसुनकर या विचार करके प्रिया अत्यंत प्रेयर त्वं तुम आव एशिया पूर्णतया लीन होकर वा मुझको आप मनी अपने हृदय में सं तम विध्यवामरहकर कम। 1 अथवा वही परमात्मा सर्वेश समस्त भू देशो जीवों में अधियज्ञ समस्त कर्म कांटों के भोक्ता जन परमेश्वर को यजस्वपू योग न भक्तियों द्वारा च भी कर्म सकाम करना हिं बन त्याग कर धन्यवाद। मेरे बाद दोहराए। भले ही तुम इस भौतिक जगत में ही क्यों न रहो, लेकिन तुम्हे निरंतर मेरे उद्देश्यों तथा बच्चों को सुनना चाहिए और मेरे ही विचार में लीन रहना चाहिए, क्योंकि मैं हर 1 के हृदय में परमात्मा रूप में निवास करता हूँ। अतएव तुम सकाम कर्मों का परित्याग कर के मेरी पूजा करो पर ध्यान करो श्रवन करें। जब भक्त भौतिक दृष्टि से अत्यधिक ऐश्वर्यवान बन जाता है तो उसे यह नहीं सोचना चाहिए कि वह अपने सकाम कर्मों का फल हो रहा है। इस जगत में भक्त अपने सारे श्वर्यों को भगवान की सेवा में लगाता है, क्योंकि वह यह योजना बनाता रहता है कि अपने ऐश्वर्य से भगवान की किस तरह सेवा करे, जैसा कि भगवान स्वयं सलाह दे रहे हैं। उसके पास जो भी भौतिक संपदा होती है, उसे वह भगवान के यश को तथा उनकी सेवा के प्रसार में लगाता है। भक्त कभी भी ऐसे कर्म के फल को भोगने के लिए कोई भी सकाम कर्म या कर्मकांड नहीं करता, प्रत्युत वह यह जानता है कि ऐसा कर्मकांड अल्प के लिए होता है। नरोतमदास ठाकुर ने अपनी कृति प्रेम भक्ति चंद्रिका में कहा है कर्मकांड ज्ञानकांड केवल विशेष कर्मकांड तथा यान कार्ड दोनों ही विश्व के पात्रों के तुल्य है। जो इन दोनों की ओर आकृष्ट होता है, वह अपने मनुष्य जीवन को नष्ट कर देता है। अतएव भक्त कभी भी कर्मकांड या यान कांड में रूचि नहीं रखता तो भगवान के अनुकूल सेवा में अनुकूल नदषानशीलन अथवा भक्ति संबंधी आध्यात्मिक कार्यों के अनुशीलन में रुचि रखता है। शीला प्रभुपाद की रेस्पोंसिबल देता कृपया वर श्रवण करें। भले ही तुम इस भौतिक जगत में ही क्यों न रहो, लेकिन तुम्हे निरंतर मेरे उद्देश्यों तथा वचनों को सुनना चाहिए और मेरे ही विचार में लीफ रहना चाहिए, क्योंकि मैं हर 1 के हृदय में परमात्मा रूप में निवास करता हूँ। अत तुम सकाकरमोकापरित्याग करके मेरी पूजा करो
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ज्ञान जनशक्। chetna manvestameutende ham shri गु हे कृश्णा करुणा सिंधु बिना, तब तक जन गौरांगी राधे। बृंदावन श्री हे कि सहहरेहरेामेरहाई। इस श्लोक का उच्चारण परम भगवान करे हैं और ये श्लोक सुना रहे हैं किसको खुला साउंड। to plan raco अनेक प्रकार की कठिनाई हो का सामना करना। उनका 1 ही दोस्त था की ओर थे विश्ुगेबाद और भक्त का रोल ज्यादा शत्रु का। तो प्रधान राज को अलीपुरा के कष्टों का सामना करना पड़ा। तो इस श्लोक के आरंभ में, इस अध्याय के आलम में भगवान ने कहा लाल। मेरे कारण तुम्हें यह देखकर ने पड़े मांगो में क्या हो चाहिए। मा मांगो देख तपस्या का सामना करना पड़ा। प्राध मुझे आप आगशे मत करो। बहुत शो के प्रति मुझे आप से कोई वर नहीं चाहिए। जो व्यक्ति सेवा के बदले में ऊपर मांगता है, वो क्या है, वह पारी है और जो स्वामी शिक्षा देता है। मीन के साथ किस के बदले में मुझे लाभ मिलेगा वो भी असली ो मिली है। दूसरे शब्दों में शिष्य को भक्ति स्वीकार करना चाहिए। जिस काम भाव से और जो स्वामी गुरु शिक्षा देता है, इस भाव से मुझे इसके बदले में होगी या वर्ड सुविधा। प्रापी। प्रभात ने कहा मेरे में कोई पूछे आगे जाकर। उन्होंने कहा पर। अगर आप मुझे कोई वर देना ही चाहते हो तो कल क्या वर दीजिये। मेरे हृदय में किसी प्रकार का बौद्धिक आकर्षण नहीं हो। बौद्धिक आकर्षण में हिलने से बिल्कुल दूर मिला। ये होनी चाहिए हमारी इच्छा, हम भगवान से ज्ञान, केवल शुद्ध भक्ति की इच्छा रखे। श्रीमत भगवत में हमको इस विषय का ज्ञान मिलता है।
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मेरी शास्त्र की रचना की थी, उनके सार को प्रस्तुत किया था। और जब भी उनके मन में हेले शांति का भाव और ब्याज शुभतज्ञान केवल शुद्ध भक्ति, ज्ञान 2 और करमन इत्यादि के द्वारा अति शांति पाप हो। तो इसलिए आप श्रीवन भरत में शुरू से अंत तक 1 ही भाव देखते हो। वो क्या भाव है। शुद्ध भक्ति और बाकी विधिक शास्र में आप सकाम भाव के विषय में पढ़ते हो। बाकी विधिक शास्र में अभी ये शोख चाहिए, यह सुविधा चाहिए। इस प्रकार खुशी से। तो अगर आप मुझे वर देना चाहते हो तो ऐसा वर दीजिये। मेरे हिरदे में किसी प्रकार का पौधे का आकर्षण नहीं है, कि ये होना चाहिए। हम सब के में कहा गया है ृष्णपकतविसखाम भूपति, पुत्ती सीधी, गामी काल, जो निष्काम भाव से जुड़ते हैं। भगवान की सेवा में वो सदा शांत रहते है। और इसकी तुलना में भुक्ति भुक्ति सीरीका में मुक्ति चाहिए। भुक्तीभूकती कोशला आशा रहेंगे तो मुझे कोई भौतिक वर्ड नहीं चाहिए। आप धुबरी कि भगवान ने धुर से भी कहा तुने इदी तपस्या स्वीकार किया है मांगो मुझे प्राप्त के लिए बड़ी गरी बा। अगर आप मुझे वर देना चाहते हो तो क्या बोल दीजिये? ऐसा वर दीजिये कि मैं सदा उत्तम भक्त की संगत में हो। भगवान कहते है मांगो में से जो मांगना चाहते हो, अगर आप देना चाहते हो, मुझे बहुत बार नहीं देना चाहते हो तो ऐसा वर दीजिए कि मुझे उद्दम भक्तों की संगत मिलेगी। क्यूंकि उनकी संगत मिलेगी। तो जिसका भाव शिक्षा प्राप्त होगी ये होना चाहिए, हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए। तो इस लो पर भगवान लाल कुरी। भगवान क्या करे कि तुम भौतिक जगत में भी रहो पर तुम्हें सदा मेरी जो शिक्षा है उसका पालन करना चाहिए। और मेरी सेवा में तो ये है कि हमें भौतिक जगत में भी तो हमें भगवान की शिक्षा का सम और इस शिक्षा को बेकार बनाया जाय। तो भगवान की शिक्षा का पालन करेंगे। तो इसके द्वारा भगवान। तो भगवान कहते है लाल लाल मान ने कहा अगर मुझे देना चाहते हो से वर दीजिये जिसके द्वारा हृदय में किसी प्रकार का बौधिक आकर्षण नहीं हो। क्राप लो मोमनमतसेसेमैं बिल्कुल जुदा हो जाओ। तुम भगवान प्रसन्न हुए ने सुना के प्रदान मान किसी प्रकार की बौधिक सुविधा को स्वीकार नहीं करना चाहता। भगवान कहते है तुम भौतिक जगत में रहो पर वे सदा मेरे विषय में सुनना चाहिए। मैं राहों को सु प्लान बनाने नवधा भक्ति का ज्ञान भी दिया था। जब उनके पिता को पता लगा कितने राय के साथ प्रदार्थ भक्ति में जुड़ गया है और अपने मित्रु को भी प्रभावित कर रहा है। तो ू kiकesesmbvhe ruesta
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हमें दोष मत 2 हम भी बड़ा मन है। हमें खुद ही समझ कैसे और घबराओ मत हम उसके विचारों को बदल देंगे।
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क बाद में सूचना मिली कि उनके बेटे को बिल्कुल बेनवाज कर दिया। आपको विश्व का नाम भी लेगा चाहते हो तो परीक्षा परीक्षा ली बताओ क्या सीखा है? तो इस विषय की चर्चा हम में लगभग हर में पढ़ते हो। तो कितना सबसे आगे बढ़ना चाहिए? यहाँ प्रधान भगवान क्या कहते है? मे हो पर क्या करना चाहिए? सदा में शिक्षा चाहिए केतन का हमें लाभ उठाना के द्वारा। क्या मानते हो? भगवान के नामों का उचारण और काल केतन जो भोतिक आकर्षण है वो दूर हो केतनसेसरलमहै। और इस युग में श्रम का सबसे सरल मार्ग क्या है भगवान के नामों का। उचारण ने पूछा ये बताओ इस कलयुग में लोगों का उधार कैसे होगा? जो भगवान के भक्त हैं वो सदा इस विषय की चिंता करते हैं। किस प्रकार बाजियों का उधार हो? हजारों संत आत्मा ऊपर थे वो 1 बहुत बड़े यज्ञ की तैयारी की थी उन्होंने जो हजार सालों के लिए चलेगा और वह तो जो भक्त उनकी इच्छा से यह किया जाए जिसके द्वारा संसार के व्यक्तियों को लाभ मिले। तो जो भक्त हैं वो सदा उसी प्रकार के कार्य में जोड़ना चाहते हैं जिनके द्वारा समाज को कुछ लाभ हो। तो यहां भगवान की तुम बहुत जगह में रहो। पर मेरी जो शिक्षा है तो भगवान की शिक्षा कहाँ प्राप्त होती है। भगवान की जो शिक्षा है वो प्राप्त होती है। और भगवान की शिक्षा में कोई कमी है, कोई 2 है उनके लिए शिक्षा
है,
गीता में लिया है। मैंने ज्ञान दिया था किसे सबसे पहले सूर्य के लिए भगवान की शिक्षा है। आप उसे बार बार पढ़ो तो भी थगोगेरहे क्यूंकि। ये है अध्यात्मिक ज्ञान। तो भगवान की जो शिक्षा है, उसमें किसी प्रकार का दोष नहीं और जो बौद्धिक शिक्षा है, बौद्धिक ज्ञान है, उसमें कमी है। उनमें नए प्रकार के दोष है। तो इसलिए कहा जाता है या में भगवान शिक्षा का पालन
भगवती
भगवान। तो यहाँ मेरी शिक्षा और मेरे नामों का उच्चारण कर और मेरे में दिलाओं का समाधन विष्णु ये 3 सबसे आवश्यक है। तो जीव से क्या करें भगवान के नामों का और जब हम जीप का, वहां के नामों का, भगवान की कथा का उचार नहीं करते तो हम क्या करते है खासकर के 2 गरतंकनुवादपनजीे किया उपदेश वेद और सो उपदेशरवेदमेंउसमे क्या कहते है बहुत ही चर्चा जिसका भगवान से कोई समन नहीं हो। तो अक्सर हम क्या देखते हैं लोग जुड़े हैं में टीवी रेडियो या सुने तो परजल्बासे भक्ति जो है आपकी देखे क्या बता गया है शर लूम के दिन शोरूम के दलम का अर्थ है भगवान के नामों का उचारण करना, भगवान के नामों का कटा कर चर्चा करना और अगर आप क करोगे तो क्या लाभ होगा तो हमें श्रम कृत में रुचि बढ़ाने। और सबसे सरल मार्ग क्या है? तो परीक्षण राज ने पूछा कलियुग में कैसे लोगों को उधार होगा? क्या करें? 2 से हे राजा राज राजा, इस कलयुग में क्या है दोषी दोष है जहाँ देखो वहाँ भौतिक आकर्षण पर 1 गुन है सेव का नाम और उस नाम के उच्चारण से क्या लाभ होगा उस नाम के उच्चारण से दूर हो जाएगा। तो बौधिक सिरसा में कहते थे मेक द बेस्ट ऑफ बेल बार्गर जो बौधिक जीवन है ये 1 प्रकार से बुरा सौदा है। यहाँ क्लेशके देख हो? 1 वायरस आता है, उसका इलाज करते हो तो दूसरा वायरस आ जाता है, उसका इलाज करते हो तो तीसरा bolicsisaisabedbarg और चाहिए आप कितने ही मनो बल अपने आप को 7 और हर कदम पर खतरा है, हर कदम में खतरा है जैसे सुना कुछ दिन पहले भारत
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तो हर कदम में हम विश्वास नहीं करते, देखो तो हर कदम में खतरा है। तो इसके इसका इलाज क्या है? इसका इलाज है शरण के दिल में की जब आप भक्ति में जोडते हो तो आपको क्या शिक्षा मिलती है प्लीज चा चेंडिंगमेंइती शक्ति है कि चैंडिंगद द्वारा आप समझ पाओगे क्या प्रतिकूल है। क्या जरा ने पहला मंदर खोला था, उन्होंने भारत को हा जस्ट जैन कोई नियम ने दिया और उन्होंने शुरू की और कुछ in bad पूछा swami dodyoondasfolsm rus। तो ये है श्रम के जनम का परिणाम अगर आज आप देखते हो भक्त भक्ती का पालन कर रहे हैं यह भर्ती शुरू कैसे होती है? तो हमें शर्म के में रूचि बढ़ाने और रुचि बढ़ाने का प्रयास करेंगे। तो जो हमारे दोष है, अनार है beti के द्वारा क्या होगा? और इनसे बचने का क्या उपाय? बोबकविोगरहैइंदियों का उपयोग करना। भगवान कैसे? तो भगवान या कहे हैं? बला है। प्लास ने क्या इच्छा प्रकट की थी कि मुझे ऐसा ज्ञान दीजिये जिसके द्वारा मेरा सारा, बौद्धिक, आक्शन, टूटे, बिल्कुल समाप्त हो जाए। वो भगवान बहुत कह रहे हैं। ये कैसे संभव है? तुम मेरे नाम का साथ कह रहे हैं, मेरी शिक्षा का शिक्षा कहाँ प्राप्त होती है? वान की धर्म का अर्थ क्या है? भगवान की वाणी? तो भगवान की वाणी में ऐसी शक्ति है कि सुनने से, पढने से, आप क में अध्याधिक जागती प्राप्त होती है। बंगाल की वाणी में कोई दोष नहीं हमारे जब उन्होंने अपने स्कॉलर थे, उनको शिक्षा दे, फिर उन्होंने अनुवाद किया यह दिखाते के लिए जो शो में jan, olmithologी, ये सब बुरा है। पर यह खबर नहीं है। पापाजी ने इन गंधों का अनुवाद किया, वो आगे वाद विश्व की लगभग हर भाषा में हो गया। और सारे विश्व में लोग इस गंध को पढ़ रहे है और लाभ उठा रहे हैं। और ये साबित किया है कि जो ग्रंथ हैं, इनका संदेश क्या है? है और हम बीज प्रदाता में, पूरे मानव समाज के ग्रंथ में है दिव्यज्ञान। और इसलिए कोई नहीं हम क्या कहते सनातन परम, भगवान, प्रधान, राज के माध्यम से हम सब को ये शिक्षा दे रहे हैं। ये मौलिक में रहते हुए हमेशा दोषों से बच जाए। और गीता में उदाहरण पड़ते कमर का फूल जल में है। पर छूटा। तो अगर हम दोषों से बचना चाहते हैं तो क्या है उपाय? और जो शिक्षा है उसका हमें लाभ उठा ले, लाभ कैसे उठाये पढ़ कर। और इस शिक्षा के द्वारा आप समझ सकते हैं। क्या है हमारे में भागवत में, शुरू से अंत तक आपको भक्ति योग की शिक्षा मिलती है। और बहू गीता में क्या है भगवान भगवान बोल रहे है और इस दिव्य ग्रंथ के सन्देश से लाखों लोग है। तो परम भवन का ये उद्देश्य है में शन के रुचि ले। तो हम बता रहे थे की न भगवान के जो नाम है भगवान से बौधीवादीव्यक्ति ये समझ नहीं सकते। कैसे आप ये कि राम का उच्चालनकरतेहो ham ko take
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and holy name is sending from where is coming for these for jentakishna? जो भी हरिराम लेगा ज्ञान से या ज्ञान से क्या लाभ होगा, आप हरी नाम को किसी लाभ होगा रापी, jandhoलiनीcandholy ने और जुडते हैं तो हमारा, हमें अपराधों के विषय में चिंता नहीं होती, अपराध के विषय में ज्ञान ही नहीं होगा। तो वो जी कहते थे चानिंग क्यूंकि अगर हम अपराध रहे, उचारण करेंगे तो भी हमें उचारण करना च। or if you going chaning result, kya hoga, ki chain chanting, the holi benefit situation, but i chand without fences, but can, तो शुरू में जब आप किसी पर आप क्या कहते हो, जस्ट चे आप ट्रेड फेनस पर जो ये शेडिंग शुरू करते हैं और ये चैंडिंगसेअसलेसे बढ़ते हैं, आगे जाते है और साथ साथ अज्ञान प्राप्त करते हैं, क्या अपराधों से कैसे बचना चाहे? तो चैंडिंगइमोपूण भारत की यात्रा में थे, तो वो रमन रॉय से मिले। रमन रॉय उस समय राजपाल थे और बड़े ऊंचे कुटी के प जब जतिन महाप्रभू अपनी यात्रा शुरू कर रहे थे तो सरोबमबनुचायाजोकी कर मायावादी थे। महा प्रभु की सर से ब दक्षिण भारत की यात्रा करोगे तो वहाँ आपको ग्राम रॉय के नाम का 1 भाग मिलेगा। उसे मेरे का, गुदावी, नदी के पर और माँ से अनेक प्रश्न पू, बात कहोगे बात भगवान से उन्होने पूछा भगवान, भगवान अपने भक्तों की महिमा बढ़ाना चाहते है, टार्जन कॉम्पटिशन, लाल बोली भाग जो है, भगवान की प्रशंसा करना चाहता है, भगवान की सेवा बनाना चाहता है, भगवान क्या अभी भर की मुहिम्मा बनाना चाहते है। सवाल जब आ गए थे उस समय bagan pandav भाई, pstitbagvan
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whats the peple आग्रह है क्या करना चाह और बेस प्रशन पूछे किसे भगवान अपने भक्त महिमा बढ़ाना चाहते तो चेतन मा भूले पूछे हमें किस विषय का उच्चारण करना चाहिए और क्या क्या भगवान के नामों का, भगवान की दिलाऊंगा, भगवान के उपदेश, जब हम श्रम किम की चर्चा करते हैं, उसका अर्थ क्या श्रमके aधयatioathe names of the lord for तो बोधिक संस्था
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पढ़े हो। 1 जेल खाला है जिसमें अनेक प्रकार के कष्ट और ये बुद्धिमान है की क्या क्या सोच रहे हैं, बोले कष्ट है आप शिक्षा दीजिये े जब सरादनस्वामीऔररपागु स्वामी चीतल माप्रभूसेमिले राम में राम के लिए, बांग्लादेश में जाता है तो महा प्रभु कम खास आई थे राम के लिए, किस लिए, शिक्षा देने के लिए? और उन्हें मुझे समाज में लोग बड़ा विद्वान समझते हैं। पर मैं बर मैं ये भी नहीं जानता कि में तो ध्यानिक है जब हम ज्ञान बात करते है किनसे भगवान के उत्तम भक्तों अगर आप मुझे वर देना चाहते तो उत्तम भक्तों की, तो जब हम उत्तम भक्तों की संगत में आते हैं तो हमें विज्ञान बनता है। तो भगवान के नाम का उचारण, भगवान की कथा, कथा का। जैसे ही समय आम जन जिनके वैशणाभावहैवैशाभाव का व्यक्ति क्या करता है। पर धोखा वैशभावकाव्यक्ति जानता है कि समाज में चारो तरफ क्लेश है और अगर हम इस क्लेश को दूर करना जाए क्या है उपाय क्या उपाय भगवान का उपदेश और भगवान का उपदेश कहाँ प्राप्त होता है जो प्रचार की सेवा है और प्रचार प्रभाव है। यह वैश् होता है as
a की।
तो ब्राहमण कुरमा के घर में निवास कर रहे थे और उनके 1 भक्त वासते उनको कोड की बीमारी थी, इतनी गहरी बीमारी पूरा शरीर भरा हुआ था किसके साथ कीड़ो के साथ वो इतने दयालु थे। जब कोई कीड़ा उनकी छुरी से नीचे गिरता था, उसे उठाकर वापस जोर तो माँ बाबू को मिलने माँ बाबुल चल पड़े तो शोक में जैसे गले लगाया, उनका बजूरी और और से बदबू आती थी। अब खुशबू बनने लगे, डर था कि मैं गाने जाने, मैं क्या करूँ? jiske dwara chandrecrishna get, तुम मेरे साथ रहोगे, मैं तुम्हारे साथ और इस कार के द्वारा आप भाग गे। तो माप प्रापा कहते हैं जैसे वासवी उधार हुआ इस संस्था के भक्तों को गुजार हुआ है। इन सब को क्या करना चाहिए, इस देश का प्रचार करना चाहिए। तो ये जो वक्त के भीतर की सेवाएं, जैसे कई बार सुन बैठे हो, इस सेवा है। समाज के सुधार के लिए बड़ी खुशी की बात है। क्या भक्त, भक्त जल्द लगभग पूरे भारत में इस मैराथन इतनी सेवा कर रहे हैं कि विवि जी के पास बुक्स बची नहीं स्ट्रॉग। मंदर दूसरे बंदर को फ़ोन कर रहा है। मुझे 10 हजार की है। जयपुर के प्रेसिजन का फोन आया क्या? e for e, n forty thousand, book twenty? तो ये है भक्तों के सागर, जब आप उत्साह से प्रचार करते हैं। मत शुरू होने से पहले सारे भक्तों में चिंता थी, फिर चिंता चिंता थी। इस वायरस के वाटर में हम कैसे पाले, हम बात नहीं पाएंगे। महीना खत्म हुआ, ग सारे, मनों का शौक खत्म हो गया। तो ये है भक्तों का गुस्सा और पर गुस्सा में क्या करते हैं? अगर आप भक्ति के मार्ग में जुड़ न जाओ तो हमें उत्साह जाए। तो बोले।
समाज में
वो सायद है किस लिए? बौद्धिक सुविधाओं की है। जैसे आप देखते हैं कि शराब की दुकानों में भीड़ होती है, लोग बड़े साइत। तो भक्त साहित है किसमें भगवान के संदेश को आगे पूछनेमे। और अगर हम प्रयास करेंगे। तो? तो यहाँ कहा जा रहा है? इस में की हमें भगवान के नामों का उचारण और भगवान जो शिक्षा है, उसको उसका लाभ उठाया जा। भगवान की शिक्षा है। इन ग्रंथों में, इन ग्रंथो को लोग क्यों पढ़ रहे हैं, लोग पढ़ते हैं। और पबाजी
होगा।
अगर आप 1 श्लोक को पढ़ लो, अपनाओ जीवन सफल हो सकता है। तो। पर भगवान कह रहे हैं कि हमें उनके नामों का, उनकी शिक्षा का भी हो जाना चाहिए, हमें भी जाना है। अध्यात्मिक विचारों में। भगवान गीता में क्या कहते हैं मन मन भा, मन भक्तों, मेरा चिंतन करो, मेरे भक्त बनो, मुझे नमस्कार करो, मेरा भक्त बनो, मैं धीरा स्मरण करो और ये सब करोगे। तो क्या लाभ होगा? क्या होगा, क्या लाभ हो? पर कई बार हमारे मन में यह आता है। यह सच है, झूठ है। बिना इस के मेरे पास आओगे विदाउट डाउट हंड्रेड, परसेंट गारंटी मन बना, मेरा चिंतन कर। तो आप पूछना चाहोगे भगवान के विश्व में क्या चिंतन करे? नीम, का, भगवा के नरम की कुछ कमी है। गंध में इतनी अनेक है जैसे कार के महीने में अनेक मिलान भी थी, थी और जिसकी आप चर्चा कर रहे थे। घोर पर्वत को भगवान ने उठाया, भगवान ने 1 दम लीला प्रस्तुत की और भगवान ने राजा को प्रकट हुआ। तो भगवान अनेक लीला है जो यहाँ कहा जा रहा है, मन बना, मेरा मुझे नमस्कार करो, प्रणाम करो किसे आप जो मदद में आते है, हम प्रणाम करते है किस पर और ये सब करोगे बिना शक के। में। तो भगवान कहते हैं श्रम कितना करो? और मेरा मनन करो। स्मरन सम्भव है केवल अगर आप शणमकिनकरोगेअगरआप शबनम के दिन नहीं करोगे और ये सोचोगे मैं सीधा सवाल करो, यह संभव है। इसलिए शहरों के फिल्म के बाद विशेस आप विशेस को पहले नहीं सुन पढ़। विशेस फिल्म। तो मन द्वारा भारी नामों का गान, विधाओं का, उदेश्य का स्मरण करना, तो यह आवश्यक है। भगत गीता में भगवान कहते हैं जहाँ आपका मन होगा मृत्यु के समय, वो इस प्रकार का सुभागी के अंते नारायण इस प्रकार का योजना करो की अंत में मृत्यु के समय आप क्या कर सको, आप हमारा स्मरण कर सको। ये अगर हम जिनके बार बुद्धि कार्यों में जुड़े हैं तो मृत के समय भी वासा विचार होगा। और अगर हम अध्यात्मिक कार्य में जुड़े है तो फिर संभव है कि हम भगवान का स्मरण कर पाओगे। यह वापी बाबु गीता में भगवान क्या कहते है? जहाँ व्यक्ति का मन हो, वो इस पर क्या भारत राज ने हर प्रकार की सुख त्याग दिया था और जंगल में गए थे ger, और वहाँ उनका हो गया। फिर 1 दिन मुझे आंखों से दूर था और भारत में खोज रहे थे, man का था
क्योकि?
तो जहाँ मृत्यु के समय आपका मन होगा, वो स प्रकार का दे आपको प्राप्त होगा। ये भाग गीता का उपदेश। तो यहाँ आज के लोक में भगवान प्रधान मन से क्या कहते हैं? 1 तो उन्होंने कहा की मिली दिलाऊंगा मेरा नाम होगा। फिर मंद्वालामेराफिर उन्होंने कहा सदा मेरे लाऊंगा, मेरे बारे में कैसे कर सकते हो? का विलाओं का, भाग्य उपदेश्य का, उन की शिक्षा का क्या करो। और फिर भगवान कहते हैं यह कि मैं जो हूँ हरे ऊपर से तो किस रूप में फार्मा में लोड? इस प्रेजेंट और ईश्वर सर्व भूत भगवान का है। लड़के, हृदय और हिरदे में क्या काम करने हैं भगवान? वो हर चीज के साक्षी बनते हैं, हर चीज के साक्षी बनते हैं। और हमारे इच्छा द्वारा फाइनल सेंक्शन करते है। भगवान हर चीज के साक्षी और
वह
हिसाब किताब रखते हैं आशा और मान लो आप की इच्छा है कि यह सुविधा प्राप्त हो ली जाए। बड़ा भगवान, बड़ी मोटर। तो यह आपकी इच्छा और फिर परमात्मा क्या कहता है? परमार आपके अकाउंट अकाउंट क्या बैलेंस है? sar को सुविधा। po a saikil pamatyhehijeid sex acci and the ultimate sencingahority, there is a famous fran man proposes, godso man prapose। आप अपनी इच्छाओं को प्रकट करते हो, परमात्मा देखते हैं क्या है इसका बैलेंस god डिपोज फरमाता सो। यहां भगवान कह रहे हैं की स्वर में हरी गेंद में उपस्थित हूँ किस रूप में, परमात्मा के रूप में, तो परमात्मा के रूप में। भगवान के पास हर चीज का हिसाब पति, समाज कम्यूटर कभी फेल भी हो जाता है। परमात्मा कंप्यूटर कभी फेल नहीं होता है। तो बाबा जी रहे हैं हमें कर्म, कर्म में कोई रूचि नहीं है। कर्म जो है कर्म, ये 1 प्रकार का सौदा है। भगवान के, हम ये दान देंगे the से करेंगे। इसके बदले में हमें क्या चाहिए? यह सोच साकार भक्ति और और कोई है जैसे हम कर चुके हैं। कर्माकर किसमे गिना जाता है? सो कर्मागन में कोई रुची नहीं, बाजी ठाकुर के विषय में ठाकुर राजकुमार थे। राजा की बेटी है, पर उनका कोई आदर्श नहीं था। बहुत दिकारियो में साकुरे में अनेक कविताएं हुई है, जिसमें ये साबित होता है कि चीते माप कौन है? तो राज धमनदास ठाकुर की चर्चा कर रहे हैं। उधर धुमदासठाकुर ने कहा कर कर ज्ञान कर क्या है? जैर पीना सूर्य के प्यारे से, सोने के प्यारे से झर डालोगे पड़ेगा चाहे ger पोय। तो कर्माकर ज्ञाना। कर में भक्तों की कोई भी नहीं कर्माकज्ञानाकनद्वारा पौधे, मिल जाएगा। पर। और जब तक आप बहुत काल में हो, साथ क्लेशों को अनुभव करना पड़ेगा। और अगर आप इन क्लेशों से दिखना चाहते हो तो क्या है उपाय काम? भाव। तो सान साखान काम में कुछ प्रोमिन सौदा नहीं है। और भगत में क्या है? गीता में क्या है? गीता का जो ज्ञान है, उसका निर्णय क्या है? आंसर भगवान क्या कहते है? भक्त? या अगर तुम जानना चाहते हो तो क्या है? भक्त माध्यम से कर सकते है। तो इन में वो दिव्यज्ञान है जिसके पालन से हम असली प्राप्त कर सकते हैं और भगवान के हो सकते हैं, जो भगवान ठारवेधहाईमेंकहते है। सर्वदा पड़ते जमा, अमेरिकम सब धर्मों को छोड़कर। मेरी शरण में।
आओ।
ये है निर्णय किसका जो भक्ति योग स्वीकार करते, भगवान करे सब धर्मों को छोड़कर। इसका ये नहीं कि आप इस्लाम छोड़ 2, ये छोड़ 2, इसका अर्थ है मन बुद्धि हिंदियों से भगवान की सेवा करो। और अगर आपके पास कोई सुविधा है तो उसका क्या करो, उसका उपयोग करो। भगवान की सेवा साल भर में करते हैं। आगे किस के पास धन है। तो धन का उपयोग कैसे करना चाहिए? पाद में कहते हैं opens in service of lord। तो जो भक्त हैं, जब मुझे कोई सुविधा प्राप्त होती है, मान लो, उसे धन कमा लिया। तो क्या सोचता है? यह धन का उपयोग होना चाहिए। इसलिए भक्ति और ऐसा मार्ग है जिसे हर व्यक्ति स्वीकार कर सकता है। उदाहरण के लिए भाग भगवान क्या कहते है पत्र, पुष्प, पदम हुए होंगे जो मैं तुम प्रेम और भक्ति के साथ पत्र। पत्रम का अर्थ है पुश पानी, तुम मुझे, पानी नहीं, लोगे, भोग लगाकर, मैं उसे ही पर। मेन पॉइंट क्या होना चाहिए? भक्ति के भाव, प्रेम और भक्ति के साथ और प्रेम भक्ति के साथ? हमें क्या करना चाहिए? मरीज को भगवान के सेवा में? boka rer, enjoy boka हम क्या सोच है? धनी की कमी नहीं, बात है न। ये ही स्वीकार करते। पर भगवान असली हम कहेंगे है सब कुछ स्वामी जी का, भगवान का है। चाबी हमारे जेब में, नाम के लिए भगवान के भगवान को मालिक बना। तो बगल देश क्या है? तो आज के इस रोग में, परम भगवान उपदेश दे रहे हैं। कैसे प्रधान है? और प्रधान राज के माध्यम से हम बस जीवन को उपदेश दे रहे है। तो भगवान क्या कह रहे हैं? तुम बहुत में भी हो, पर मेरे नाम का रो केवल नहीं। आगे यह भी कहते हैं कि सदा मेरा स्मरण करो, सो कम। और और आगे भगवान क्या कह रहे हैं? मैं हरि के हृदय में उपस्थित हूँ। परमात्मा के रूप में, भगवान हरि के हृदय में उपस्थित है। और हर चीज के साक्षी हैं, जो जो पौदिवादीव्यक्ति है। कई बार पूछते हैं, कौन साक्षी है? हम क्या कार्य कर रहे हैं? तो परवान साक्षी है, हर कार्य कर साक्षी है। भगवान को छुपा नहीं सकते। तो भगवान अगर कोई संपत्ति हो, धन हो तो हमे क्या करना चाहिए? भगवान। तो आज समाज में जीव ज्ञान की कमी है। समाज में अनेक पार्सले महाविद्यालय है। पर इसी विज्ञान की कमी है और इन के द्वारा यह ध्यान दिया जा रहा है समाज को सुधारने के लिए। आज समाज में क्या है, क्लेश क्लेश और 1 क्रेज तेजी से बढ़ता जा तो 1 रूप से आज के बल में प्रचार थोड़ा सरल भी हो गया कि आप देखते हो, मिलते है उनसे जो जो स्वीकार करेगी। जैसे लॉकडाउन हुए कई भक्त, कई ने प्रचार शुरू कर दिया। ऑनलाइन 4 तो कई भक्त जुड़े हैं। आज इसके साथ जिनका परिचय हुआ था लॉकडाउन के समय ऑनलाइन फीचर तो लोग लोगों ने देखा कितना क्लेश है। और जब यह पता लगा कि उपाय दिया जा रहा है, कई शरद्वान भाग्यशाली व्यक्तियों ने मार्ग पर जुड़े जुड़े हैं। मैं हर शहर में भक्तों को जुड़े थे। यह ऑनलाइन के माध्यम से तो प्रचार करना चाहे और आप भक्तों का भार को बारे में प्रयास करे ने कहा कि किताबें खत्म हो गई है। तो यह मत खतमहो मतलब की किताबें हैं गोडाउन में और और तो हो अभी का हमें प्रयास करना चाहिए अधिक अधिक मास में जनता को बाटने के लिए। और इस प्रचार का क्या परिणाम होगा? समाज की बनेगा, समाज में शांति प्राप्त हुए। बाबा जी ने 1 spanish flu स्पेनिश फ्लू आया था 1900, प्रापा जी की उम्र 1 साल थी प्रभाजी ने lecr the best remedy to sale is pindi problem, s people to an सो हरी नाम की महिमा का ज्ञान शास्त्र में है न कि हर नाम को बढ़ावा देना चाहिए। पापाजी ने कहा ये जो स्पेनी फ्लू जब आया था इंडिया में करकटमें खास कर के बहुत से आदमी मर गए थे और ये 1 स्वामी जी थे उस मे जिन्होंने लोगों से है क्या भगवान का नाम से क्या ये जो मारी थी वो भी भाग गए। तो हमे आज आप क्या देखते हो? 11 दूसरी से 1 वायरस आया अभी नया वेरियंट आ गया ओम कॉल omigronsixtimfastr they go। हमारे भगत है। कुछ दिन पहले कानपुर में तो 1 बग आये थे, न है मास्क बनाना तो कहे थे, मास्क ने रीना बंद कर दिया था। पर ओमिक्रॉन का भय आया फैक्ट्री डबल, शेर पर काम कर भी सबको मास्क चाहिए। उन्होंने मास्क पहनना बंद कर दिया था। अभी ओमिक्रॉन आ गे भाई से सा मांस दे दिया से मास्क पहना शुरू कर। so this is a time to please her ricrishna, i think, questions is gogtpresnaryes
figs।
हरे कृष्ण महाराज थैंक यू तो महाराज मेरा ये प्रश्न है कि कहा जाता है कि भक्तों के संग में आप एकदम कंसिस्टेंट होके भक्ति कर सकते हैं उत्साह पूर्वक, लेकिन अगर परिस्थिति वैसे अगर आप तो कहीं भक्तों के सिर से दूर रहना पड़ता है। जानना पड़ता है तो हमें क्या कर?
आज के wtn
आप।
भक्तों को सान इंटरनेट द्वारा कर प्राप्त कर सकते हो। मान शहर में रह रहे हो। जान की वे बंदर के भक्त जरूर मिलेगा के लावा का sblsukutecnology आज हम भगुदमकासुनगेोभक्त ृष्बालप्रदर्शन टेक्नोलॉजी के माध्यम से आप पर से बिल्कुल दूर कभी नहीं हो। आज बारिश हुई, किसी कोने में मूर्तियों का दर्शन ले सकते है, किसी कोने
में
सुन सकते हो और लगभग किसी कोने में sc baeeayesaiscoma मैंने 1 लेटर
पढ़ा जिसमें प्रभाजी कहते हैं कि उनकी जो किताबें हैं, जो ग्रंथ हैं, वो यूमनस के लिए टन थाज के लिए लॉग बुक बनेंगे, तो इसके लिए हम कुछ कर सकते हैं।
book filvneloboकबo to the is possible you aleoisbreacपचार के लोगों को पावित कोई 25 साल पहले चंदीगरमेंएकहाईकोर्ट जज ने जजमेंट दिया था, उस ने पूरा जजमेंट लिया था, बेशन प्रापत उसे गीता के सेक्शन से को करके जजमेंट दिया था जब हम प्रचार करेंगे उसका प्रभाव उडाएगा
महाराज जी
1 और किसी से रिलेटेड है, अभी जो गवर्नमेंट है ऑलरेडी प्रउपाजीका, उन्होंने क्वाइन रिलीज कर दिया, तो अगर हम गवर्नमेंट को नरेंद्र, मोदी जी को अगर रिक्वेस्ट करें इसके बारे में पार्लियमेंट में कोई कैशशनलेसकरनेकेलिए तो इजर्टपॉसिबl
everything it was in log, herdy rajneti, log herdy
trai to do that we counted of the service,
yes, if you want to do
an
आप में से कितने भक्तों ने अभी तक मन पर में सेवा की है? varigodऔरआजवा आज भी जाओगे
thank you to
much for sitainmardvacosion, menicasorobatis riten especialy stdiwotisold have their sndt that home and the s, but my motion is late to the dematic were living in the proximity to time are living in the near the tamil shudras person, they can just had photos and to har las mandar और मंदिर के बिल्कुल सामने वो 40, 50 फ्लैट हैं, जिनमें किया सारी बुरी रहते है, और जब गया तो कहीं घर में मूर्तियाँ रखी living the templ, you don t do it was a come to the temple, m me karoge to live proximity no hoden fat, but the jnvence। हरे
कुशन है कि जैसे हमारे शास्त्र में लिखा कई माता पिता या गुण बनता है क्या अगर कोई माता पिता या गुण बनता है तो क करता? अपने लिए उनके आश्रित को बस से बाहर निकालना है, तो जैसे हमें आपसे परीक्षा ली ठीक से पाडर
b bus presion pusa man pucha with everybody is can go back to god follow us on go back tegaded। अगर आप नियमों का पालन करते हो, सिxीगराफोबिफोर हम शिक्षा का पालन करे, setisenycangobak
god
जैसा दाम भरोगे वैसा मान लेगा। i will be buddimataetecon
gishnamarag had a question that when executing total service, if i saretigotto me that pakes on one hand, we feel quite sure that all the need to do is chand re suv ar esociatwitdiis of read it on the other hand, then we read books we find that that there is minutes in everything, how we supposed to talk how we supposed to be have much minlutnesisthere so so making states are that that is we began to question water we have started bugti or not so? how can we understand this like out to me? and maybe solve maybe accept the difference is
we follow the pros n calling for? and then you will make spertan definitely anti cinta mat karo so we have to have faith in krishna any and felines practis, but to go you cheste mor ans potifyougokaits hlykishnamarाj mari if from degutiintetampon more sacall ctivity with other mataji than wisata solve company about dot in tempo m so माताजी महाराज जी सम
big personally rsnlynotnikथैंक यू माना जी बहुत
बहुत धन्यवाद आपका महाराज जैसे गुबडिशूसनमें जा रहे हैं तो कहीं कहीं लोग गाली भी दे रहे हैं, लेकिन क्या हमारे सपोर्ट लोग काफी आ जाते हैं वहीं दीवार चिढ़जाते पस में, तो हमें उस परिस्थित में क्या वहाँ रहने चाहिए वहाँ पर चले जाना चाहिए।
लोग गाली दे रहे हैं काफी लोग
के बिजनेस मैन उल्टे सीधे बोलते हैं। जैसे हम रेलवे स्टेशन आजकल घुस जाते है, अंदर वहाँ काफी अच्छा डिस्टब्यूशन हो जाता है तो कभी कुछ लोग बोले तुम लोग व्यापार करने आ रहे हो लेकिन हम निकल जाते हैं कभी कुछ पकड़ के बैठा लेते हैं की बताओ इसमें क्या लिखा है तो काफी समय हमारा चला जाता है, वहाँ कैसे उनसे निकाल के आगे बढ़ जाए
क्या लिखा अच्छा
और महाराज जी जैसे निजाम दिल में पुराने जिले रेवलेशन में वहाँ कभी पुलिसवाले अपने परमिशन मांगने लगते हैं। कोई तो छोड़ देते कोई पकड़ लेते है स र चल आज कल
जो आप प्रचार करते हो आप उम्मीद कर सकते हैं की कई लोग आप चिल्लाएंगे गाली देंगे। मैंने निकर में आपको नितिन हरी उदाहरण दिया है। तो वह आदेश पर और पर निकले 4 करने कई सालसदमहातमआगएहै क्या आपका उपदेश वेरीगुड कई जगह पर जाते थे
भागो
मे मै पागल हो गया है अभी dog is prkar भगवान, अगर हमारी हमे a a a a a अगर किताबें जल्दी जल्दी लोग भेजे तो पिता वहां उस विचार शराब जल्दीजल्दी शराब पर प्रचार को आपका अपराध होगा लोग ताना मारेंगे जूता मर्जी कोई सेल नहीं है आखिर आप का संदेश इन किताबों में है क्या सा की किताब में है क्या?
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manas, sometimes dudi book distrbution, somiwotislike wala distribu books टाइम सॉम्यूटकमएंदेआर पैर एंड वन ऑफ देम सेस की मैंने आपकी गीता पहले ले रखी थी, लेकिन कुछ कुछ पार्टी को समझ में नहीं आता। ऑल द प्रोपर रिटेल वेरी, सिम्पली, बट एवं हिंदी में जब अनुवाद होता है, दूसरे लाइट वेट में कुछ ऐसे टमनोलिजलआतहतो लोगों को समझ में नहीं आता। तो देश है कि हमें समझ में नहीं आ रहा तो मलतावावउनको क्या रेस्पोंस देना चाहिए?
a fire पढो जाना पड़ेगे esa gole col hering to the do so we stop er banilinartame।
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