शुद्ध भक्ति है भगवत प्राप्ति का साधन | SB 7.10.6 | 18.10.20 | Vrindavan | Srila Gopal KrishnaGoswami

Srila Gopal Krishna Goswami teaches that pure, selfless devotion is the only real path to God. He emphasizes chanting the divine name, finding a genuine guru, and warns that wealth and worldly comfort cannot satisfy the soul. The practice of bhakti-yoga, combined with sincere service and satsang, purifies the heart and leads to lasting spiritual fulfillment.
Chapters
ओमल मो भगवते वासु देव, हमल भगवते वासु दिवा, हम्ल भगवते वासु देवा। आज हम सिसकने दसवी जाएगा छटा शो पर उपदेश देंगे हम कम व। lic have your so ja sewa or came
ो
राजा सेवक युवा हम कमश पश्या सो नर सेवा के ओरिवााम
हमने
गले नेहा
भारत
माता जी बहुत दी शब्द
जहाँ तक मेरा सम्बन्ध से बिना गुेमिसमभावऐसी आम हासिल है, डॉक्टर स्वामी भाव से श्रोताओं मे पर होने वाला है मै नाम नहीं से 3 दिसंबर के म इस महान से स्वामी महाराज म
से
जिस मानस के अनिवाल में आपका विश्वास से हूँ आप के स्वामी होने से हमें कुछ चाहिए। आप सुहावी मगे स्वामी के सोहा सभा आपका सेवक हम लोगों में पूरी अन्य महान लोगों ने जिले के राज जी जवानी जवानी को मजे पांचवे में सभी ग्रह स्वामी मुजवानीकेिसमावि, जल विहार सब स्वामी सास जब हम सार समपन्न बलवा सूखी बना और अपने स्वामी को अपना। हर साल इस तरह ऐसी सुन नहीं सकता। स्वामी को चाहिए अपने सेवक की इच्छाएँ पूरी नौकरी करता है तो वह असली वाणी नहीं है। असली वामी को यह आदेश से ला है करना है और असली जिव है। जब तक दीवान जिन सा संग शादी नहीं हो जाता तब तक असली सुख नहीं जाता। जी को आज करे सजे और साल के लोग इस लगन में इसे नहीं होने से इस का जी की जीवन का देख भगवान को हराम से समझे नाम दाम में अपने बाल को बताते है की जीवन का सर्वोच् पसंद करना है। कोई भी कभी प्रसन हो सकता है मनुष्य को दास का होना चाहिए। भगवान जी से सुना आपका आदि समाज बनाना चाहता है। भगवान स्वामी बने ऐसी कार इस तरह मेरी श्रम करता है। उसी के अनुसार में वाली समझ गया था में रहना है से लाभ अनुमान
धुरा
में आपका सवाल शामिल है। जो स्वामी
आप
मेरे स्वामी सुनाव हम संबंध,
हमका सिमरदसियाानंजना क्या न स मा श्री गुरवे नम, श्री चेतन्या मनौवेसमसाबतमेन भूत ले सयम रूपा गधा बंद हम श्री गुरु श्ीतापदकमनश्रगर रुपम सगजतमसगनगुनतन जेवन तम स्वधुतम श्री राधा कृष्णा पदान शहाना लड़ेता हे कृष्णा करुणा सिंदू हीना बंधू जल पते कलपासशाहिपसिन्धु भय बचा। pbl onmahjskina as
a
h cism दिया में प्राप्त होता है। इस शो का उच्चारन कौन करता है? लाल राज जानते हो कोई सुधारण पुरुष अब सुना सुना नही पीछे सुनाई दे रहा है या नहीं? हाँ या नहीं अब दे रहा है। फिर शो का उच्चारन फ्लान मनाज कर रहे है और फलान मनाज श्लोक के द्वारा हमें 1 बार फिर से शूल भक्ति योग का ध्यान दे रहे हैं। राज बना जानते हो। उन्हें अनेक कठिन सीटी में रख डाला था, किसने उनके से प्रदान का दोष क्या था। केवल 2 था वो आकर्षित थे और उनकी इच्छा सदा की सेवा की। पिता को तो प्लान बना को अनेक प्रकार की कठिन सीधा सामना करना पड़ा। घरेलू सापों ने घेरा आदी लेवल पर उन्हें सागर में फेंक दिया था। राकेश बचाना चाहे कोई नहीं मार सकता, ना चाहे कोई नहीं बचा ले सो पड़ो भगवान पिछले के अंतिम शोक में कहा हे प्रा। मेरे कारण तुम्हे इतनी का सामना करना पड़ा। भांगमेसे क्या वर चाहिए? तुम्हे तो इस प्रश्न के असर में, इन श्लोकों में फिलहाल हमें शुद्ध भक्ति का ज्ञान देने हैं। निष्काम भक्ति और अनेक श्लोकों द्वारा ये संदेश दिया जा रहा है में निष्काम भाव से सेवा में जून थी। ऐसे तो व्यास थे, ये सांसों की रक्षा की थी। मुझे भी उन्हें लग रहा था की मेरी रचना में कुछ कमी रह गई है और जो विचार करने से क्या कमी हो सकती है, वह नमूने पहुँचे। गुरु जिन्होंने कहा की शुद्ध भक्ति के विषय में जानने दिया, वेदों में है आधार मीडिया पर इसका भाव। फिर उन्होंने हमें तो भगवान ने क्या कहा? दाल भंगा मेरे से क्या चाहिए। कहते है हे में आगे छोटे खानदान, सूर्य खानदान, जन मिले। अमर आप मुझे अगर कोई वर देना चाहते हो तो बहुत 1 बार मुझे नहीं चाहिए, बहुत इच्छा हो भौतिक सुविधाओं के लिए। उनका भाव था कि काम तो प्रारम अगर आप मुझे वर्ल्ड देना चाहते हो। ऐसा दीजिये में किसी प्रकार का भौतिक और हवा से पूछा जाए। कुछ बल चाहिए। हम कहेंगे बड़ी कोठी राज कहते हैं। अगर मुझे वर्ड देना चाहते हो तो ऐसा वर्ल्ड दीजिए। मेरे हृदय में किसी प्रकार का बहुत ही आकर्षक नही। तो मे से कितने भक्तों की इच्छा है। आपको ऐसा वर्ग प्राप्त हो। अच्छा फेल। तो इस शोध में प्रधान क्या कह रहे हैं? मैं जो हूँ आपका निष्काम भाव से जुड़ा हुआ सेवा और निष्काम भाव का सेवा करना। बिना किसी प्रकार की उम्मीद रखे। तो मैं हूँ भावगर सेवक। और आप मेरे सनातन स्वामी है। ये नहीं की थोड़ी देर बाद हम भगवान बन जाएंगे। वो करे है आप मेरे सनातन स्वामी है और लावा और कोई रिश्ते आवश्यकता नहीं। शो का वर्णन कर रहे हैं सपा कृष्ण हम सबका स्वाभाविक कर्तव्य तो बना जा लोगो द्वारा हमें शिक्षा दे रहे है, भगत द्वारा हमें शिक्षा प्राप्त हो रही है। क्या उत्तम पुरी की सेवा है और संतो द्वारा यह ज्ञान प्राप्त हो रहा है की सबसे उत्तम है निजाम भाव की सेवा। और यह होना चाहिए हम सब का भाव। तो प्लान कह चुके हैं इस अन्हाई में कि जो सेवक सेवा करता है इस उम्मीद के साथ कि इस सेवा के बदले में मुझे वह लाभ मिलेगा और से जुड़े है अमेरिका जाना।
तो
इस बार अमेरिका जाना मुश्किल है। जो सेवक जुड़े इस भावना के साथ किस के बदले में मुझे कोई आर्थिक लाभ हो? उस सेवक में, उस सेवक में तो कौन है? वह कौन भगवान से सौदा कर रहा है मैं आपकी सेवा में जुडूंगा और इसके बदले में मुझे सुख। पर कई बार जो स्वामी है वो भी शिष्य को जोड़ते हैं। इस उद्देश्य के साथ हमें इससे लाभ। ये बड़े धन है खान का धनी, खानदान का सेव सदस्य इसको अगर शिष्य बना लो तो भी भैवा बढ़ेगा सो। अभी ये उम्मीद रखता है की इसको सेवा में जोडूंगा ला तो इस प्रदान करे। वो भी असली स्वामी ने क्यूँकी यह भाव रखता है। मैंने इनको सेवक बनाकर कुछ आर्थिक लाभ में आज कहते हैं मुझे कोई वर्ण नहीं चाहिए। और अगर आप 1 अगर आप वर्ड देना चाहते हो तो ये वर्ड दीजिये की मेरे हैजे में किसी प्रकार के काम वासना की इच्छा न हो। कृष्ण भक्त सकाम से लिए काम सरकारी का प्रसिद्ध श्लोक है। इसमें के इसे कहते हैं। जो निष्काम भाव से कृष्ण के भक्त हैं वो हमेशा शांत रहेंगे। और जो सकाम भाव से जुड़े हैं, भूखी जाते हैं, भुकी जाते है वो सदा शांत रहेंगे। हमें शांत अच्छी शांति च निष्का भाव से भगवान की सेवा में जुड़े तो शुद्ध भक्ति का ज्ञान हमेशा द्वारा प्राप्त हो रहा है। दूर मनाज ने भी बड़ी कठिनाई उठाई थी, कि इसलिए भगवान को प्राप्त करने उनकी इच्छा तो थी कि बड़ा महान राज्य प्राप्त हो सो। ध्रोंमराजकोभगवान ने कहा धरुआमेरेकालतुमे। इतनी कटाई कठिनाई सहनी पडी मांगो क्या वर ष। अगर आप वर देना चाहते हो तो सवाल दीजिये क्या कैसे उत्तम भगत क्यूँ उत्तम भगत की मिलेगी तो देवी ज्ञान प्राप्त होगा। और उस ज्ञान के योग से हम और धार्मिक क्षेत्र में आगे बढ़ गए थे। तो भक्त की इच्छा यह होनी चाहिए की हम भाव से भगवान की सेवा में जुड़े और इस सेवा में जुड़ते हैं। क्यूँ? क्यूंकि ये हमारा स्वाभाविक है? यह भगवान के सदस्य व है। तो ये ज्ञान कैसे प्राप्त होता है? संत। इसलिए साधु संगत पर साहस में बल दिया जाता है। प्रसि साधु संगत, साधु संग लावा मात्र साल 1 पल के लिए लव मात्र 1 सेकेंड का ग्यारहा हिस्सा शुल् भक्ती, आपका ध्यान भी जीवन। तो शुल् भक्ति है भागवत का न और हमें जुड़ना चाहिए जिसका वैसे तो भगवान कहते हैं छात्र विदा और जन देवम। 4 परिस्थितियों में लोग मेरी सर 11 और धन और दूसरा भगवान कहते है वो भी मेरे पास आये। भगवान कहते हैं कम बुद्धि के व्यक्ति देवताओं के पास जाते हैं। ये नहीं समझते की जो वर्ड दे साव द्वारा प्राप्त हो रहा है वो असल में कौन दे रहा है? ध्यान चाहिए होगी। फिर ज्ञान ज्ञान के आधार पर ओह भगवान की शरण में आता है। दुखी व्यक्ति रोगी पीड़ित। तो चाहे आप किसी कारण से भी जुड़े। भक्ति में इतनी शक्ति है की भक्ति की विद्या के पालन से सूर्य ने हमारा शुरू हो। तो साधु संग में रहोगे शास्त्र का अध्ययन करोगे तो आपको 1 ज्ञान मिलेगा। इसलिए शास्त्रों का अध्ययन भी बहुत आवश्यक है। और शूल भक्तों की संघ में रहोगे तो सी ज्ञान प्राप्त होगा। वो क्या है? देश का तो समाज हम देखते है, अनेक धर्म के प्रचारक हैं। पर अगर आप ध्यान से उनकी शिक्षा को सुनो तो देखोगे। शुद्ध भक्ति का की कोई चर्चा नहीं होती। तो प्रापा ने हमें शुद्ध संदेश दिया है। प्रवाद है। उस समय के उपस्थित स्वामी कहे थे? स्वामी जी आप भी उपदेश दोगे, कोई नहीं। सुनेगा जी को विश्वास था तो श्लोक के तार में राबजी बताए कृष्ण भगवान भगवान भोग से भोग ज्ञान में क्या सोचते हैं? हम में भोगता कोई और अगर कोई सुविधा प्राप्त हो। हम सबसे पहले क्या सोचते हैं? हम से लाभ कैसे उठाये धन प्राप्त होता है। तो हम सोचते है बड़ा मकान बनाना,
चाहता
कोई सुविधा प्राप्त हो, वे सोचते माया इस्तेमाल कर। हमारा भाव होना चाहिए। जो कला है, जो योग्यता है, जो सफलता है, इसका उपयोग करो। धनी व्यक्ति की कमी नहीं है भारत में। पर अगर आप देखो, धनी व्यक्ति कितनी मात्रा में धन का उपयोग कर दे भगवान की सेवा में, तो क्या देखोगे बहुत कम। कई साल पहले बिजली में था, आश्चर्य हो गया था देख कर हर 10 कदम में 1 मस्जित है हर 10 कदम में। मैंने वहाँ के भक्तों से पूछा ये मश्चिका सरकार बनाती है, उन से बनते हैं लोगो से, और ये कहा की मुसलमानो में ये भाव रहता है। जैसे धन कमाए, पहले भगवान का मंदिर बनाये और हमारे में क्या भाव है मकान बनाओ, बच्चों के ले बनाओ, उनके बच्चों के लिए बनाओ। फिर अगर कोई चिल्ला रहे है या भगवान है, वो है हर चीज के में। और हमारा कर्तव्य क्या है और का उपयोग कर रहे हैं सेवा में। तो इन श्लोकों के द्वारा प्लाजमा। आज कौन है? श्रधा पुरुष महाजन है। जिनके द्वारा हम अध्यान में ज्ञान प्राप्त करते हैं, उनमें ये कौन है? शिक्षा को बहुत महत्वपूर्ण शिक्षा के द्वारा चर्चा करते हैं। कौन से वो लोग लाल मराज ने धिव्यजञानप्रा्त किया था। जब वो माता जो उन के अध्यापक अमेरिका को या बेटे को दिविज्ञान कहाँ से प्राप्त हो रहा है या नहीं, उसे ज्ञान प्राप्त कर लिया था, तो ये इस प्रेशर स्लोक में राजराज कह रहे हैं। लोग भी जानते है की असली कैसे प्राप्त होती है तो ये ज्ञान आपको प्राप्त होता है। शासोेदवारा जैसे की इसको को जोड़ने से पहले हम सब के पास क्या ज्ञान था? चाय दे ही है, सब सब 1 ही है। किसी की भी उपासना करो की नतीजा प्राप्त होगा। ये छा के कहा गया है। 1 ईश्वर कृष्ण 1 ही है परम भगवान वो है। कृष्ण तो हमें समझाना पड़ता है, तेतीस करोड़ देवता, देवी है। 1 ही है। परम भगवान तो वो ज्ञान प्राप्त होता है की संगत में आ कर। 6 सो तो ये ज्ञान हमें प्राप्त होता है। शासन तो लाल कह रहे हैं लोग यह नही जानते की सुख कैसे प्राप्त हो?
रा
वो जानते है क्या? क्या हमें असीस चाहिए, क्या है? उपाय क्या है? उपाय चाहिए। भगवान ल हमें बड़ा महत्वपूर्ण सा देश सिखाए, शी शासन के 8 श्लोकों में पोरेवेदिक सहित्य का ज्ञान आपको प्राप्त होता। और पहले शो में माँ क्या कहते है? अनंदभुरमो कि आप हर नाम का उच्चारण करोगे तो असली आनन्द प्राप्त करोगे। और ये असली आनंद क्या है। केवल पढ़ते ही जाएगा। भगवान देव ने भी शिक्षा दिए। 5 देव भगवान ने कहा भक्ति करोगे, इसके बदले में क्या सुख मिलेगा तो केवल बढ़ते हो जाएगा। सपोर्ट हुआ एवं तपस्या को उठाते हैं भगवान की खुशी के लिए जो उसके बिल्ले में क्या असली शोक प्राप्त होगा, जो केवल बढ़ते जाएगा। तो हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि हम बाकी योग में जुड़े हैं। इसके द्वारा हम कुछ खो रहे हैं। आप असली शिक्षा प्राप्त कर रहे हो और असली आनंद प्राप्त हो। इसलिए इन शासकों का अध्ययन भी आवश्यक है और भक्तों की संगत में रहना आवश्यक है। तो बुरी ने चौसिंहा की हमें 3 प्रकार की संगत प्राप्त हो सकती है। ये देश उन्होंने, उन्होंने कहा 1 उत्तम भक्तों की संगत दूसरा। हमारे बराबर के भक्तों के संग वो तीसरा जीन के पास से कम ज्ञान है। हाँ बैठना जरा मुश्किल है। तो जब आपको उत्तम भगत की संगत मिलती है, हमें प्रसन्न हो जाना चाहिए। क्यूँकी उनके द्वारा हमें देवी ज्ञान प्राप्त हो रहे है। जिसके पालन से जीवन के लक्ष्य को प्राप्त कर। जब आप अपने समान के भक्तों से मिले तो क्या भाव होना चाहिए? विस्ता का भाव मित्रता का भाव है। हम 1 साथ मिलकर भगवान की सेवा कर ले। भगोदमकेचौतीसमेहमे चेतस की कथा मिलती है। जो परम भगवान बड़े प्रसन्न हुए थे, उनकी तपस्या से भगवान ने कहा मैं जब सब भाइयों से प्रसन्न हूँ, क्यूँ क्यूँकि तुम सब में तुम सब का 1 ही व्यापार है। बोल रहे व्यापार हम सब का 1 ही उद्देश्य है, क्या भक्ति का 1 ही भाव है। हम सब जुड़े किसमे भाग सेवा में। तो इसी प्रकार अगर भक्तों की सेवा में, सारे भक्तों का ये भाव है कि हम निष्काम भाव से भक्ति में जुड़े, फिर हमेशा शांति का वास रहेगा और सब प्रयास भक्ति में। पर इस की तुलना में अगर हमारा ये भाव हैं। सुख मे, रा मेरे। ये, तो फिर क्या, फिर यहाँ आपको असली शांति प्राप्त होगी। भगवान ने से कहा तुम सब भाइयों में 1 ही भाव है, 1 ही उद्देश्य है। वो क्या है कि ये होना चाहिए हम सब का भाव और चाहे हम किसी प्रकार के भौतिक इच्छाओं से जुड़े भी जब उठाने गए, सबसे पहले सेलीमा अपमान किया तो उन्होंने निर्णय किया कि मुझे इसका बदला लेना। तो माँ के कहने पर जंगल में गए, जहाँ उन्होंने मनी शिक्षा जो प्राप्त हुई थी, उसका पालन किया। तो जो मराज जुड़े थे, भक्ति द्वारा इतना आनंद आया, इतना आनंद आया। भगवान ने कहा मांगो क्या वर
मैं
निकला था, घर से शीशे की खोज में मुझे क्या प्राप्त हो गया है? असली डान असली हीरा प्राप्त हो गया है। तो इस भक्ति है असली हीरा। और श्री स्वामी कहते है कि शुर भक्ति में इतनी शक्ति है कि अगर आप आज बंद करके दौड़ोगे तो वे आप दोगे, उस शब्द में छोटी माता सेवा में करोगे, वैसे भी आपको पूरा लाभ मिलेगा। तो श्रीमद बागुसनद्वारा हमें महत्वपूर्ण संदेश प्राप्त ह। भगत की भौतिक सुविधाओं के द्वारा आप को प्राप्त नहीं हो सकता। ये है तू जो बुद्धिमान व्यक्ति है, वो क्या सोच रहा है।
े
इस धुल जीवन का सौ रुपयो आजकल समाज में देखते हो। भारत में ही नही सारे विश्व में 1 बडी भयंकर बीमारी का सामना हो रहा है। क्या, वो, कोड सब डरे हुए हैं। जो कोविल शुरू हुआ तो उसके नाम सुनते ही हम डर जाते थे। जब वो कोविल शुरू हुआ, 1 सर्वे हुआ था। भारत में सर्वे न था की कोविल की। बीमारी से लोग कैंसर से भी ज्यादा डर है। जैसे मानो किसी को बोला जाए। को कैंसर है तो मन में सोच लेता है। बस जाना ही पड़ेगा कैंसर से डर जाते है। तुझे जो कोविल बीमारी शुरू वायरल शुरू हुआ, कोविद बन गया तो बड़ा कॉमन है? और हम सब ने बड़ी बड़ी योजना बनाई थी। ये करेंगे, वो करेंगे भी क्या अनुभव हो रहा है। दुख, दुख, दुख बढते जा रहे है। तो भौतिक संसार में चाहे आपके पास कितनी भी सुविधा हो, कितना भी धन हो, आप सी प्राप्त नहीं कर सकते। अगर आपको 80 शोक चाहिए, भक्ति के मार्ग में जोड़ना चाहिए। और जैसे पाल ने कहा देना चाहते हो तो ऐसा वर दीजिये। मेरा भौतिक काम वासना जो है उससे मैं तो हम सबकी इच्छा होने से है। पर केवल इच्छा रखने से काम नहीं लेगा। हमें प्रयास करना चाहिए। इसको प्राप्त करने में। कहते हैं कि आप भौतिक इच्छाओं से बच सकते हो। अगर भक्ति योग तो वो है। भक्ति योग, भक्ति योग आरम्भ होता है के द्वारा। और भक्ति योग का सबसे आवश्यक अंग क्या है? शाह द्वारा। हमें पता ये ज्ञान मिलता है। अगर हम भौतिक आकर्षण से बचना है। अगर हम हिंदी की मैल को दूर करना चाहते हैं तो हमें क्या करना चाहिए? हमें भगवान के नामों का भाग में म। परेश महा ने पूछा ये बताओ की ये जो इच्छा है, देखते हैं कि हम टोरमेंट करते हैं, परसा ते हैं, फिर वही गल्का कर देते हैं। यह किस प्रकार का धर्म है? उन्होंने उदाहरण दिया। 1 हाथी स्नान करता है तालाब में, और तालाब से जब निकलता है, फिर आ कर मिटटी में बैठ जाता है, फिर गंदा हो जाता है। इस प्रकार के धर्म के का क्या लाभ? आज आप पाप करो, कल पछताओ, फिर फिर पाप करो। जैसे मेला आने वाला लग जायेंगे। स्नान करने के लिए। उन का भाव क्या रहता है। हमारे पापा गा। तो इस प्रकार की इच्छा से कैसे बचे? ये सारे धर्म चोझमेंजातेहै मशीन में जाते हैँ, मंदर में जाते है, मांगते है, फिर वही गलती करते हैं। भक्त वासुदेव भगवान वासुदेव की सेवा में षूल्भावऐसी जुड़ोगे। फिर यह इच्छा को आप समाप्त कर सकते हो। और आगे जाकर उन्होंने कथा और आज की कथा का मूल उद्देश्य क्या है कि ये है नाम हर नाम के उच्चारण के द्वारा। ये जो बहुत आकर्षक है, ये जो इच्छा रहती है, मोदी में, जुड़ने के इसको आप समाप्त कर सकते है। हम सब के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य क्या है? क्या है? ये है सारे सासों का निर्णय जो प्रेशर वा ने पूछा ये बताइए कि खलियगामें लोगों को उधार कैसे होगा? कल ही 2 से राज, ये है नाम, ये है कलयुग के वैसे तो इसका वर्णन शास्त्र में है। तेरे महाप्रभु ने इसका खुले रूप से प्रचार किया और वहा बाबू के प्रचार द्वारा ये हराम भारत के कई कोने में पहुँच गए। और आज प्रॉपरटी की कृपा से ये हराम जो है विश्व के तो ये हर नाम का उच्चारण सबसे महत्वपूर्ण है और ध्यान पर उच्चारण करेंगे, इसका पूरा लाभ मिलेगा। तो कल कल ये ही नाम कहाँ से आता है भगवान कलयुग में के द्वारा। तो ये इच्छा की हम निष्काम भाव से जुड़े हैं। भगवान की सेवा में ये इच्छा प्रयास करने पर प्राप्त हो सकती है।
सब।
और सबसे सरल उपाय क्या है ये राम का हर नाम? पापा जी ने जो मार्ग हमें दिया है, जो शिक्षा दी है, उसके पालन से आवश्यक आप लोग मन से कहा जाता है कि काम वासना च्छा, हज से निकले मुझे का 2 वो मदमसुरेऐसी। बचाओ बचोगे। तो फिर शुर भक्ति का भाव। तो देवी भगवान कहते हैं ये माया का विरोध करना बहुत पुष्ट है। निवेदन किया था वो न होना और इसको नष्ट करना इतना आसान काम नहीं है। आसान काम भगवान कहते हैँ जो व्यक्ति मेरे शरण में आयेगा, जो व्यक्ति भक्ति की विधि का पालन करेगा, वो जो भक्ति का पालन है, उसके द्वारा भगवान की शरण तो हम सब जुड़े हैं। भक्ति के मार्ग में, इसको के द्वारा 1 ही शूल भक्ति का ज्ञान दिया जा रहा है। ये लग ज्ञान और साधन है। वो प्रभा जी ने अपने ग्रंथों में बड़े स्पष्ट रूप से समझाया प्रॉपर के ग्रंथों में, दूसरे ग्रंथों में क्या अंतर है? ग्रंथों में यह रूप सन्देश दिया है। बिना बदले और न कुछ जोड़ा, न कुछ कम। और आप खुद देख सकते हो की इस शिक्षा के प्रचार के द्वारा लाखों लोग जुड़े हैं। तो भक्ति योग है सासों का निर्णय। और हम सब में ये इच्छा होनी चाहिए जो इस लोक में प्रकट हो रही है कि हम भगवान की सेवा में जुड़े निष्काम भाव से, जिसका भाव से जुड़ोगे तो असली आनंद के अनुभव कर सकोगे और सकाम भाव से जुडो सकाम भाव से जुड़े हो। और अगर आप भक्ति की विधा का पालन करोगे तो ये भौतिक इच्छाएँ भी नष्ट हो जाएगी। तो श्रीमा भगत द्वारा यह महत्वपूर्ण संदेश मिल रहा है। नस्टप्रशेश भागवत से भागवत के भाग, जो श्रीमत भगवत ज्ञान है, रोज ध्यान से सुनना चाहिए। और कई बार हम देखते हैं, सोचते है, क्लास है? वो ही कहेंगे मायर से बच्चों मे नाम करो। और भगवान पर हाँ, वो सन्देश दिया जा रहा है। वो तो यथा रूप है। और जो सन्देश दिया जा रहा है वो हजारों साल से आ रहा है। और कई बार हम सोच रहे हैं। हमें रास्ते न सुनना है। लीला हम जाना चाहते, हमारा क्या था सुरूप, हमारा शुरू क्या था, क्या होना चाहिए, उसका यह विश्वास होना चाहिए की जो ज्ञान हमें चाहिए, ये सब प्राप्त है। प्रोजी ग्रंथों में और ग्रंथो में पूरा ज्ञान प्राप्त है। तो हमें और किसी प्रकार के ज्ञान की खोज नहीं करनी चाहिए। अगर अब 1 मात्र भाव से इस प्रकार भक्ति योग में जुड़ोगे फिर आप भक्ति योग में उरदीगरसहोगअगरहम सोचे की नई कमी रह गयी है। पर प्रभजी बड़े सरल है। सरल इसलिए है कि प्रभा सरल भाषा में इन्हें प्रकट किया है और इसमें असली संदेश है। आप जानते है या ये कहना चाहता और क्या देखे हम शरीरिक समान नहीं छोड़ सकते। हम माया, ऐसी माया, ऐसी माया से बचने के लिए हमें दीर्ध होकर सेवा में जुड़ना चाहे। फिलहाल कहते हैं ना। नी कहते हैं की आप बहुत से बच सकते हो, अगर आप दीर्ध होकर विजिटर का पालन करो। इसलिए क्या कहते है पूछा संत आगे सी नेशन देर हो कर सेवा में जुड़ोगे तो को दूर कर पाउडहणाम। ना मे रूचि नहीं है पर हरामी रूचि बढ़ जाएगी। नाम का उच्चारण करेंगे तो संक्षेप में भगवान सग्दे प्रकट हुए थे किसलिए भक्त की रक्षा के बद्ध हो गया। भगवान से अत्यंत रोले अनेक देवता देखकर पीछे भाग रहे थे। पर जाकर तुरंत चला कर से भगवान ने कहा भला मेरे खयाल, मे तुमने इतना कष्ट सहा मांगो क्या होना चाहिए? क्या मैं आपसे कोई वर नहीं मांगना चाहता और जो व्यक्ति सेवा में जुड़ता है इस भावना के साथ की इस सेवा के बदले में मुझे ये लाभ मिलेगा ये लाभ मिलना चाहिए। लाभ मिलना है तो वो भक्त कभी भी संतोष नहीं रहेगा और उसे व्यापारी माना जाएगा। स्वामी है जो की शिष्य बनाता है वो सोचे की, इसके द्वारा मुझे यह लाभ मिलेगा। वो भी असली तो शूल भक्ति का वर्णन है। चूल भक्ति का ज्ञान हमें प्राप्त हो रहा है ये होना चाहिए हम सब का भाव और यह ज्ञान हमें आगे भी पहचाना है का हो जिससे भी तुम मिलो से क्या करो। आज की स्थिति में 1 भक्त दुखी है हम प्रचार नहीं कर सकते सारा दिन घर में ही रहना पड़ता है से आज इन्टरनेट के द्वारा प्रचार बहुत बच गया है, बढ़ गया है। अभी हमारे जो भक्त जाल सी भक्त हैं वो तो विश्राम कर रहे है। जो भक्त यही सोचते है समय कीमती चीज है और हमें भगवान के सन्देश का प्रचार करना है। वो हर वो हर सेकेंड, हर पल का लाभ उठाते हैं। किसने भगवान के सहयोग 1 समय देवताओं ने महाराज करोंगे के सहयोग से, महाराज के सहयोग से, देवताओं ने असुरों का वध किया था। सर ने पूछा महाराज के टोंगा आपके सहयोग से हमने विजय प्राप्त किया है मंगा हमारे से क्या वर्ड चाहिए के लिए देना कठिन नहीं है महाराज कटोरानेहा और मेरी जिंदगी में कितना समय बच गया है न कि 1 पल जीवन समाप्त होने वाला है क्या अगर मुझे ये वर दीजिये वो बताए कितना समय बच गया जब उन्हें यह सूचना मिली की 11 पलक बच गया। उन्होंने कहा मुझे प्रथ्वी पर लौटने 2 भगवान का चिंतन करते हुए
तो ये
होना चाहिए हम सबका भाव किसी 1 पल बच गया है हम सोचे नहीं अभी तो बहुत लम्बी आयु है अभी हम केवल 7 साल के है और सभी ध्यानम जीवन है पर जल्दी नहीं है बहुत मे हमेशा आप किसी हालत में भी गलती नहीं कर पाओगे। 1 ही पलक बचा है समय बहुत कीमती है पद का उपयोग करोगे इसलिए भगवान की सेवा में प्रचार करने के। तो आज कल इन्टरनेट के द्वारा प्रचार बनाने का अच्छा मौका भी है कि भागते जो प्रचार करने और इसके द्वारा नए लोगों को जोड़ रहे हैं और कई लोग प्रचार के द्वारा सीमा भागवत को भी बांट रहे हैं आपको शायद पता होगा की पिछले 4 सालो से बदपुरा समय प्रयास करते हैं अधिक से अधिक मात्रा में क्या भाग, 5000 से ज्यादा गीत भगवदम भारत के मन ने तो और ये बदपुर चलेगा तो कई भक्तों ने इसका लाभ उठाया भक्त वो प्रचार कर रही है और साथ में भगवधमसेबेच और 200 से अधिक बाते सेवर्स तो प्रचार का अच्छा स्कोप है भक्त जो है हर सिटी का लाभ उठा दे इसलिए भगवान की सेवा को आगे बढ़ाने के लिए तो संक्षेप में राजमा की शिक्षा हम सबको अपना ना चाहिए और अगर हम भक्ति के वीडियो का पालन करे तो उसके द्वारा भगवत प्राप्त श्री भगतों द्वारा हमें यह महत्वपूर्ण संदेश मिल रहा है और हम सब में भावना होनी चाहिए निश्काम भाव से जुड़े और निष्काम भाव से जुड़ोगे प्रयास करोगे क्या लाभ होगा भागवत प्राप्त हुआ तो ये है भगवद का संदेश और ये है महाप्रभु का सन्देश यह हमारा अच्छा सन्देश हमें इसका पालन करना चाहिए न बैठना बहुत मुश्किल है पर कहा गए smart a any question
on
ओके 1 प्रशन और फिर से बात करेंगे फिर आप लोगों को प्रशाद ही मिलेगा हमे क्या
है दिल में है और वो
दर्शन
ऐसी
ह सीनियर उत्तम कोरे का भक्त रहा है आपके प्रति
इनका जो भक्ति में लाये है, जो सीनियर है वो जो है 1 दूसरे के पति
अगर वो द्वेष रखता है रखने 2 आप सास के शिक्षा के आधार पर कार्य करो और अगर हम ठीक कार्य करें, चाहे दूसरा व्यक्ति कुछ भी करे आपको नुकसान नहीं लाभ ही मिलेग अगर हम ये सोचें वो द्वेश रख रहा है तो हमे लगेंगे ले ला तो फिर आप भी दोषी बन जाओगे वो भी किसके हृदय में इशा है आपके प्रति द्वेश है इसलिए माँ आपको ने कहा सिनारी सुनी जाएगा अगर आप इस सिनादसुनीचेनशरोक का पालन करोगे तो सारी कठिनाइयाँ दूर जाइए इसमें हर समस्या का हल रहता है अगर वो देश रख रहा है, चाहे वो नहीं भी रख रहा हो आपकी नज़र में कुछ कमी रह सक हम हम सोच रहे हैं उद्वेजक कोई शहर नही भी हो आपके मन में व्यक्ति कोई प्रयास करता है सोचने के लिए मेरे में कुछ कमी नहीं है सारी कमियाँ मेरे सामने से आदमी में, मेर में केवल गुन गुन है हमें यही सोचना चाहे सारे दोष हमारे में है और प्रबल के शब्द में बक्सों के गुलो बोले थैंक यू ये आपको प्रसाद की चिंता है है हार क्रिश्ना हारे किशना क्रिश्ना हारे हारे
हार
रामा रामा ने हाल।
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