एक भक्त की भगवान से प्रार्थना कैसी होनी चाहिए? | SB 7.10 7 | Kanpur | 2021 | Gopal Krishna Goswami

The video records a devotional discourse delivered in Kanpur in 2021, in which the speaker (associated with Gopal Krishna Goswami) explains the proper attitude and method of prayer for a true bhakta. The talk weaves together chants of the divine names (Rama, Krishna), references to scriptural stories (e.g., Dhruva, Bhagavatam), and a call for sincere, self‑less devotion free from material cravings. The speaker stresses that prayers should be offered with humility, a desire for association with other devotees, and a willingness to accept divine tests. He warns against seeking worldly benefits or personal comfort in worship, urging instead that the devotee seek pure service, inner purification, and the company of saintly people. Practical suggestions are given for community activities such as book distribution and collective chanting, and the discourse repeatedly returns to the theme that true bliss arises only when the mind is detached from Maya and fixed on the divine. The overall message is a passionate exhortation to adopt a devotional lifestyle centered on chanting, self‑less service, and reliance on divine grace.
Chapters
i लखनऊ से कौन कौन आया है
जायरा दमा व कुंजा हार जाय र dma dawa gunja हर गोपी जाला बाला भा व ध जाला बाला भा जायरा दमा धवा कुज जायरा दमा दवा कहा शोदनननन भज जन सौदान भजजननगना हम दरिया बन जा ब जा राज जा
हा
जाना वाला भाग
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वरदा क
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श
a मरेगा हर दिन ले परेशना ना रे रे हर राम रे राम नाम राम हाले हलाहल काले हाले हाल रा मोबाल रामा रामा रामा लेआलरानेक कृष्णा के नाले हरे हरे रामा रे रामा रामा रामा हरे ले क्रिष्णा ले हरेहयेरामारे रामा राम रा मारे हे हे हे रे ग्रे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे रामा रामा रामा हरे
अरे
रामा रामा रे आरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हे अरे रामा रामा रामा रारहरर राम राम
रे
राम र का जागो जागो रे
बा
बा बा बा बा बा बा
she got she s a book distibusio lana gori a सेवा हम नंबर भगदेवा हम नंबर भगदेवा भक्तों का हार्दिक स्वागत आज आपको भगवदम के साथ वेशक के सातवें अध्याय का 7 10 साल मे a a a a sa amroha wine some he s mohan you the yadi theses bousyouviar
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यदि गली
राजी ना जाते मैं कुछ को
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अपने
वाह तुम बरस कोई भी वार सरते हैं का ना हो सारी कामता
अपनेही आंसर होगा
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कहा
आप से
तो
परिनेपाकतमगरमऐसे े ये समरदातास्वामीयदि आप मुझे कोई वांसपरलेनाहीचाहते है तो मेरी आपसे प्रार्थना है कि मेरे हृदय में किसी प्रकार की भी चाय न ले
तो बात
है श्री क्षेत्र में महामुने हमें सिखा दी है कि भगवान से इस प्रकार वरदान के लिए प्रात की जाए। उन्होंने कहा है आज हम जनम नसदरेकविताहीसिका मम, जनमणीजनमरीसरे और दाब बसती रहेगी। कई ये हू न तो पति कहता न हमे अन्याय न सुंदर जी जब ये सभी वर्ष भुतिताववस्थाए किन्तु यदि मुझे आपसे कोई वरदान आसान ही है तो मेरी प्रार्थना है कि मैं चाहे किसी जीवन में जलनननकरोपडेजा में आपकी की भक्ति से विविधि न भगवन। उन माया सदेव का दे जो प्रदेश को निराहार का शुन्य बना देना चाहते हैं। कोई भी 0 वाल नहीं रह सकता। अपितु उसके पास कुछ सरदुकोहोनाअतएव भक्त दे, कुछ संकुच रखना है और ला इस प्रकार करते है यदि उसे आपसे कोई बरलाधलेनाहीहै तो मेरी प्रार्थना है मेरे हृदय में कोई इच्छा न अपना कर भगवान की सेवा करने इच्छा से भी होती नहीं है। ना सुनिएगा हे सर से वरदाता। यदि आप के कोई मानसिक वर देना ही चाहते हैं तो मेरी आप से कापपनहैकीमेरे हृदय में किसी प्रकार की होती
है।
आप में से कितने भक्तों की इच्छा है कि आपके हृदय में भी होते रहे। साहब bacto my ganinasyhananjna charaka si na a man vesamsaनभuतले swayam upadate n ham shri guru sri सदवेतमहु shri radha kishna
हे कृष्णा करना सिनधुदीरबलूjgpte
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a a a jai shri krishna chat man man had to st किसके ह समाज में लोग हीरो बनाते है कोई movie free sports पर जो भक्त है उसके जीवन में और भक्तों के मन में किस को रामराज मराज प्रभु जब अपने भक्तों के साथ चर्चा करते थे, अधिकतर चर्चा होती मारा और पर, तो इस देश आप पढ़ते हो कि किस प्रकार राज ने आध्यात्मिक ज्ञान स्वीकार किया। माता के घर में थे और किस प्रकार राज ने उद्देश उन्होंने प्राप्त किया था। माता के घर में के द्वारा, उपदेश ने साथ pita क्या भगत थे। bgt gsi, हम तो स्वीकार करे so gray, बहुत कुम्हार को रोका भगवान के धाम में, gusse shrab to yoga नहीं fir कुमार ने कि का बड़ा गहरा सम्बन्ध है, तो होने कहा, हमने सर गलती कर दी है, विश्वा देकर हम वापस लेना चाहते हैं। तो क्या यह मेरी इच्छा थी कि तुम तो वैसे भक्त मां, मांगे तो प्लान विज्ञान प्राप्त किया था, तो वो माता के गंभीर थे और लाल उसके पास शुरू से ही ध्यान विज्ञान था। उसके पिता को समझ नहीं आता था। कौन आता है मेरे बेटे को? ये ध्याान ने कई बार डाटा। वो कितने प्रकार के कष्ट में भगवान के उपा? तो प्रधान ने जीविज्ञान आगे दिया साथ उनके साथी थे, उनके साथ, उन्हें भी उन्होंने भग बना दिया। इसके कारण उनके पिता को और भी आया। राज महाज को मैं ने प्रकार के कष्ट उन्हें से न तो पिछले अध्याय में, अंतिम लोगों में भगवान बाल मैं तुम्हारी भक्ति से बहुत प्रसन्न हूँ और मेरे कारण the gst mango। क्या कोई कार्य सम्भव है? जरमाकरमकाद भगवान का प्रकट होना, दोनों ही देव बहुत पास। और जो भक्त है वो मानता है कि भगवान इसी रूप में प्रकट हो सकते हैं। जैसे भगवान प्रकट हुए थे, इसी में भगवान के रूप में, तो प्रदाधमहाजको a a, a, a, a, a,
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वजे से बचा ना जाए। कष्ट सामने भगवान मैं तुम्हारी हर इच्छा को पूरा कर सकता हूँ। मेरे लिए कोई कार्य सम्भव नहीं है। मांग me क्या हुआ जाए। प्रधान ने कहा आगे की जो, यहाँ से कोई वर्ड नहीं चाहिए, कोई इस के साथ कुछ व्यापारी है क्या? भगवान हा मांगो, जो बल चाहिए। मांगो प्रधान ने क्या करे कोई पर। अगर आप वर्ड देना चाहते हो तो मुझे क्या किसी प्रकार का पौधे का कर? अगर आप वर देना चाहते हो, उन्होंने ये नहीं कहा। अगर आप वर देना चाहते हो तो क्या वर दीजिये कि किसी प्रकार का भौतिक आकर्षण नहीं हो, क्योंकि उनके मन में केवल यही भावना हो कि वो सेवा में जुड़े आप। ध्रुव मराज के कर्ता पढ़ते चौथे साल में और ध्रुव मनाज ने भी बड़ी गहरी तपस्या का पालन किया था। और भगवान ने धुआ मेरे कल कठिन और धुन क्या करू? अगर आप मुझे वर देना चाहते हो तो ऐसा वर दीजिए कि मुझे उद्दम भक्तों की संगत मिलेगा, भक्तों की संगत मिलेगा तो उसके द्वारा वो उसके द्वारा वो वान। तो जो भक्त है, उसकी यह रहती है। क्या? भगवान अगर वर्ष देना चाहते हैं? कहा? हद में कोई भी भौतिक आकर्षण रहे हो? और भक्त जो है क्या आप प्रार्थना क्या कर रहे है। अगर आप मुझे वर देना चाहते हो, गो भक्तों की संगर में रहेंगे तो क्या प्राप्त करेंगे? तो यही संदेश है या हमें भक्ति प्राप्त हो। जब तक भौतिक आकर्षण रहेगा, काम को लोमोमरमसेय, जब तक का आपको भौतिक संसार में परखना और अगर आप भक्ति को स्वीकार करो तो फिर असली आनंद अनुभव कर। पाओगे। फिलहाल महाराज कहते हैं लोग ये नहीं जानते हैं कि अति सौ, सुविधा और सुबह से रात तक परिश्रम करते हैं, किसलिए बहुत कार्य में जुड़ने के लिए, इस विचार के साथ ये हमें असली और बौद्धिक कार्यों के द्वारा आपको कभी सफलता असली खुशी प्राप्त नहीं होती। इसलिए इस श्रीमन भगत में आप शुरू से अंत तक क्या पढ़ते हो। भक्ति शुरू भक्ति तो मुझे किसी प्रकार का बहुत बनी है। अगर मैं आपसे कोई पानी का मुझे भक्ति भी करूंगा। इसके मुझे यह लाभ होना चाहिए। कई बार हम भक्ति में जुड़ते हैं। इस भाव के साथ, इस के बदले में हमें कोई भौतिक सुख प्राप्त हुआ खैर गवान दयालु है। साथ ही में बाबर गीता के भगवान क्या कहते हैं? 4 परिस्थिति में लोग मेरी शरणमे on a car kanpur logo so rogi pediteyaniऔ 4 के 4 पुण्यात्मा है पेन में सर्वशेष कौन है? तो ज्ञान के आधार पर तो श्रीमत भगत के द्वारा हमें इशुलभक्ति का ज्ञान प्राप्त हो ना है। और जब तक बौद्धिक आकर्षण रहेगा, जब तक आपको भौतिक संसार में फोलिक, समाज में रहना पड़ेगा तो ये संदेश भक्ति के मार्ग में जुड़ना चाहिए। ये भौतिक आकर्षण है, उसको वह कैसे तोड़ सकती। भगवान खुद गीता में कहते है देवी माया, इस माया का विरोध करना बहुत कठिन है। भगवान खुद कहते है कठिन है? तो हम कैसे थे, सफल हो गए। पर आगे भगवान क्या कहते? आएगा वो भगवान चाहते है, हम सब क्या करें? भक्ति के यान का दाव उड़ाये श्रीमद भागवत में आपको बड़ी गहराई के साथ शिक्षा मिलती है कि यह भौतिक आकर्षण कैसे दूर किया जाए और भक्तियोग भक्तियोग क्या है? 1 साधन है जिसके द्वारा हम अपने भौतिक आगरशनकोउड़सक or ye bci ने गहराई के साथ सनातन 5 आवश्यक भावशाली चीजों की चर्चा की और सबसे पहले का था शादी का राव माता 1 पलक ने भी अगर आपको भक्ति संगत मिले, आपका जीवन भक्ति की मांग में आगे बढ़ सकते तो साधु संघ के विषय में आप अनेक स्थानों में उधार के लिए तीसरे स्कंद में भगवान के पीले देव और देवहूती के तो देवहूती। जो थी भगवान की माता थी, उन्हें पता था कि ये जो मेरा बेटा है, भगवान है तो बताइए कैसे man छुटकारा प्राप्त तो क्या इसको हो। 3 उनकी आगे हम भक्ति में उन भक्तों की, आप उन भक्तों की संघर्ष में होते हो तो आप अनुभव कर और हम क्यों उन तुम भक्तों की सोना चाहते हैं। दिल व ज्ञान की परी हो तो 1 संगत है उनके साथ आप से ज्यादा ज्ञान रखते हैं और जो वो तुम भागते हैं, उनके मन में 1 ही भाव है न। तो जब आप अपनी समानता के भक्तों के साथ संगठन को तो फिर हमें क्या करना चाहिए? मित्रता का भाव, मित्रता का भाव है, वे 1 साथ मिलकर प्रयास करें, 1 साथ मिल कर सेवा करे के लिए होना जवाब भाव जवाब आपसे कम ज्ञान के व्यक्ति को मिलती है। तो क्या भाव होगा? दया की भावना है तो दया की भावना वश में होती है, हा जाता है। पर दुख दुखी जब वो देखते हैं कि दूसरे व्यक्ति भौतिक समाज में किस प्रकार से दुखी स्थिति को सूखी स्थिति बनाने का प्रयास करते है। बौधिक संसार में जैसे आप जानते हो क्लेश?
क्लेश
पौधिकवादियों का क्या प्रबल, क्या प्यार है? किसी प्रकार से आप इन क्लेश कष्ट को बदल, 2 दुखी स्थिति को शोख बनाओ। जैसे कइयों को सुनने में तकलीफ होती है। तो प्यारे हियरिंग जो बनते थे bare band a na, sa a contact तो बाल समाज में प्रयास है। क्या दुख की स्थिति को सूखी स्थिति बना तो ज्ञान कैसे दूर होगी? साथ के द्वारा। अगर आप सब ये सोचो कि आप कैसे जुड़े आप के भक्ति में जुड़े 1 किसी ने आपको मंसन दिया, कोई आपका मित्र था और दूसरा किसने grant, तो चेतन ने साधु संग ही सबसे महत्वपूर्ण है। और अगर आप शुलभक्तोंकीसरखोगे अगर आप 80 साल की संघ रखोगे तो आपको क्या प्राप्त होगा? क्या विज्ञान ये या कि मैं क्या है? माध्यम हर राम भगवान कलयुग में प्रकट होते हैं। किस रूप में ruरामचाकृश्ण पूर्ण मेरा नाम भगवान के नाम है, चिंतावली परसत जैसे है, चिंता को सोना बना दे। भगवान के नाम ज्ञान से ले या ज्ञान से ले, उसका केवल लाभ है। ये है sashrnamhrnamhrnam to me। अगर आप भक्त की तो आपको असली संदेश संदेश क्या है? कलयुग में ये है और राम के माध्यम से भगवान के जो भी लेगा ज्ञान से है, ज्ञान से क्या काला बोला सो रूप स्वामी जी ने हमें अनेक ग्रंथ दिए हैं। और चेतन ने रुपऔरसंदातनको, ब्रज, वृंदावन भेजा। उससे पहले उन्होंने उन्हें प्रयाग में शिक्षा दी। भक्ति के विषय में ने ये आदेश दिया, vrnदाnउन्हंनेग्रंथ की रचना की, मंदूर निर्माण किया और उन सालों को खोजा। जब भगवान अपने देवी नीरा तो श्री उदेशरमृतमेंजिसकी रचना की है, उदेशमृतमेंआगया है। भगवान के जो नाम हैं, वो क्या हैं? चीनी जैसे मीठे भगवान की लीलाएं हैं, वो भी क्या हैं। चीनी जैसे मीट है। भगवान के जो गुण हैं, वो चीनी जैसा मीठा तो मीठा पन का मतलब है, इतने मीठे है। क्या हमें इसका मीठापन महसूस नहीं होता? अगर हमें हरी राम का मीठापन महसूस होता तो हम 24 घंटे पर क्या है। हम मीठापन महसूस नहीं कर पाते। तो क्या मीठा यू क्या है? बिमारी क्या क? तो आप कहोगे क्या है? उपाय कोई उपाय है, बहुत है। समाज में कई बीमारियाँ हैं। अब डॉक्टर साहब के पास जाओ पूछो क्या है जी? कहेंगे ये बीमारियाँ और आप को सका को las कई बार डॉ sorry पर, धार्मिक क्षेत्र में संतों ने समस्या की चर्चा की है और उसका क्या उपाय है? रूप कहते हैं भगवान के नाम तो मीठे हैं। चीनी जैसे भगवान की जो मिला है, वो भी मीठी है चीनी जैसे भगवान पर। क्यूंकि हमारी जीत में विद्या की बीमारी है? बता क्या है? उपाय है रूप में ताकि तुम ध्यान से ना। तो ये विधि की बीमारी है, क्या उसका इलाज हो जाएगा और फिर से मीठा पन महसूस कर सके। तो ये जो हराम है, ये है उपाय के क्या, क्या ये हरिराम का कौर लाभ यह है कि इसके उच्चारण से क्या होता है? जो हिदेकी महल है। तो हमें प्रयास करना चाहिए कि हम माल को क्या करें? साल के और क्या नाम ले so
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अपना समकनडोलरआरमभकिया। तो कईयों ने इसका विरोध किया, मुसलमानों ने विरोध किया। मुसलमानों ने कहा अगर हम मायके को नहीं रोकेंगे तो सारे मुस्लिम हिंदू बन जाएंगे। और यहाँ हिंदू ब्राह्मण थे, विरोध विरोध करे। माँ प्रभु के मा प्रभु ने जब संविदा किया गया, हिना की उपासना उच्चारण के लिए कोई पैसा खर्च नहीं होता। क्यूंकि धंदा खराब होगा? रोग तो और 1 मुसलमान था, वो बार बार काजी को आकर शिकायत कर देता। रोको भाई, मेरे सारे, मुसलमान हिंदू बन जायेंगे। तो काजी ने कहा तुम बार बार आकर मुझे शिकायत करते हो, रोको रोको रोको, पर मैं तुम्हें देखता हूँ, तुम्हारे नाम कर रहे हो। ये क्या उपाय है? ये बात सच है कि जब से मैं मैंने हर काम शुरू किया, ये हरी नाम अगर हम हृदय की दूर करना चाहते हैं। का मर्म बचना चाहते हैं। क्या ये उपाय कहते हैं? शुरू में आप के हृदय में श्रद्धा ये श्रद्धा होनी। क्या? भगवान बोली जगह में क्लेश क्लेश है? असली जीवन है भगवान की सेवा के माध्यम से। और फिर सास। तो रूप कहते हैं शालू द्वारा। बजी क्रिया करते? क्रिया है? साद ना रखना, अच्छी साधना रखना बहुत महत्वपूर्ण है धार्मिक जीवन में परिवर्तन करने के लिए। और मुझे क्या करोगे? राम राम करोगे तो क्या होगा? परिणाम आना था ये जो शत्रु है, आध्यात्मिक जीवन के वो जो है, कमजोर होते जायेंगे तो का पालन करोगे कि आप प्राप्त हो। और फिर आपके हृदय में निशा भी आयेंगे। कई बार भाग पुरे विनम्रता का भाव कैसे अनुकूल करे? हमारे में विनम्रता कैसे पैदा करें? तो क्या है वो उपाय राम को जब हम ध्यान से कई नाम का उच्चारण करेंगे तो उस के द्वारा a si, ha, ha, sbse, mhtvpurn, he,
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slung कह रहे थे सबसे ऊँचा ज्ञान है और इसके अध्ययन से आप अपने अनार को आचे विगरा भगवान प्रकट होते है। आज वि भगवारमे an an, ra, puri s मुझे दबयवा है। उस काल में हुई उस साल से सचमुच गोपाल ने उनके 2 साल तक मरपुरी स्वयं भगवान की सेवा कर रहे थे। सा देर उनका लीन था किसमें हुई गोपाल विघा की सेवा में और रात को भगवान को सुलाने के पश्चात who थोड़ा सा dot kul, pujari stand
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अकेले कोई और puja nmensow और रात को भगवान को सुला देते हैं, उसके बाद थोडा सा दूर to sal ke bad भगवान की परीक्षा में प्रसन्न हूँ, तुमने मेरा सामना किया और मुझे अभी भी गर्मी लग रही है। chandan sीkrकरla वो कहा कि उन्हें लोग ब्राहमणों को परीक्षा दी, शिक्षा दी और फिर वो चले। तो भगवान कई बार अपने भक्तों की परीक्षा भी लेते हैं, कठिन स्थिति में डाल दे, ये देखने के लिए पुसलगतहैानह भक्ती करते हैं। हमारा ये भाव नहीं होना चाहिए, हम भक्ती करेंगे केवल कॉम्फोर्ट जोन में कम्फर्ट जोन समझते हो, भक्ति करेंगे। पर हमें पूरी सुविधा हमारे इच्छा के अनुसार। तो कम्फर्ट जोन, ये इच्छा रखोगे, हम सेवा करेंगे। पर हमें हमारी इच्छा के अनुसार चाहिए। तो कम्फर्ट जोन में रहोगे। तो कुछ ज्यादा लार है, भक्ति पूरा लाभ, नहीं तो हमारा भाव होना चाहिए। सेवा में जुड़ा बाद पुरी, किस प्रकार उन्होंने वन सेवा की इतनी लंबी यात्रा की, देखा और पुरी ने सफलता के साथ पुरी पहुंच कर चन्दन ले लिया है। उन्होंने कहा की अब तुम्हारा ब्रज से गाने की आवश्यकता है, ये चन्दन लगा 2 किस पर गोपी। तो भक्ति में जब हम जुड़ते हैं, हमें ये भी सोचना चाहिए कि कोई चैलेंज नहीं होंगे, कोई कठिनाई नहीं होगी, हमें यह स्वीकार करना चाहिए हमने भगवान की सेवा के, भगवान की सेवा में ना तो प्रधान राज कहते हैं हमारे कोई भी बल देना चाहते हो, क्या दी हृदय में जो बहु 1 बार पापा जी लंदन में थे और भगवान का स्वागत कर रहे थे, तो भक्त ने पूछा आप क्या प्रार्थना कर रहे थे? i was prang krsna जो उद्धम भागते हैं, उनमें विनम्रता का भाव होता है। और इसलिए यह इच्छा रहती है की सारा भौतिक आकर्षण है, यह सम्भव है सबके लिए भक्तियों की विधियो, उठाए और ब्रह्मा भूत प्रसाद। और जो भक्त भक्ति में जुड़ते हैं, उनका क्या अनुभव है? वो असली अनुभव तो असली धन चाहिए तो भक्ति योग उपाय है। नकली आदन चाहिए तो बहुत न के द्वारा प्राप्त होते। वो जो आनंद है, असली नकली है। जब आप साधारण समाज में कुछ दवाई खरीदना चाहते हो, अब देखते नहीं हो, आस बी देखते हो, कई बार सौ, वो कई साल पहले सौ डॉलर के जो बिल अमेरिका के वो नकली किसी ने छापी, तो आप अगर किसी अमेरिका में भी दुकान में जाते हैं, उस बड़े ध्यान से देखते हुए यह जाली है। या तो हर क्षेत्र में हमें चाहिए तो भक्ति के मार्ग में भी जुडकर, वहाँ क्या प्रयास होना चाहिए। असली सुख, असली आनन में हम प्रयास करे तो यहाँ प्रदान क्या उपदेश निकालोगे? तो क्या असली अनुभव कर, सकोगे तो बहुत रहेगा। जब तक आपको बोले जगत में रहना पड़े। तो इसलिए सारे साल ये है तो भक्ति शिक्षा कौन प्राप्त करते हैं इन ग्रंथों में, इन ग्रंथों में कैद पढना भी चाहिए। हम लोग विचार में तो रुचि दे दे। a prop is books and some you bana, रोज cm sीकmtksloggeta rose that अनुमान पढ़ेंगे और कितने रोज पढ़े तो ये इतना अच्छा स्कोर नहीं देखा, पर ये जरूरी है। आप सब मन हो, ईमानदार नहीं पढ़ते न्होंने का हम ये नियम होना क्या और इसे आगे बोले। भारत यात्रा में थे तो उनके भक्त वासुदेव पर, वादी वासुदेव पर कोड की बीमारी थी और उनके शरीर से इतनी बदबू आती थी वो सड़क के बाय सब दाने हो जाते थे। वो मापगोंेबड़े वास को पता लगा चेतेरमाहप्रबुकुरमा ब्राहमण के घर में आये हैं। रहने के लिए। बड़े पहुँचे, पता लगा पर चल पड़े बड़े दुखी हो गए तो भगवान अंदर उन्हें उन्हें पता है और शोक में है मेरा दर्शन। तो महा प्रभु लौटे। ब्राहमण को गले लगाया, कैसे गले लगाया, गले लगाया, उनके कोड की बीमारी तुरंत समाप्त हो गए और बन गए। बड़े खुबसूरत तो में घबराहट हुई। उन्होंने सोचा पहले मैं इतना बदसूरत था, इतनी बीमारियां थी। man what to do i dont became braud man logo ka chand harikrishna and please take goritochanahisna red bagi pres in this way or papa? we just like a chain, moment was ben। तो इसलिए इस को संस्था के भक्तों को क्या करना चाहिए, प्रचार करना चाहिए। और जिस प्रकार से बच्चे से गुल प्रचार करना चाहिए। इसलिए दूसरों को बचाने के जो भक्त हैं, व समाज का कल्याण। तो बाबा जी कहते हैं इस विप्र का उधार हुआ वैसे उधार कर सकते हो। कैसे हम सब का क्या कर्तव्य बनना चाहिए। अपना बल्कि महिमा का प्रचार करे। ये जो ग्रंथ वतन की सेवा है, आज सब में हजार से ज्यादा गीता हुई थी। मैंने सुना है कि आप कार का उदेश्य है नंबर वन
बा
pryas करोगे तो संभव तो ट्रांसिन कॉम्पिटिशन का mu ज्यादा है हमें प्रयास करना। prयासkरोगeआगआपका। मंदिर तो बहुत सुंदर है।
बड़ा
बात सब प्रयास आपके मंदिर को तो उनकी क्या इच्छा देती है और यहाँ को स्वीकार करें। mahima आप अपने जीवन को surge bodi loo ctinhesmbvne, fiting maya is not so easy। हमारे रायों ने हमें सारे हथियार दिए हैं, जिनके द्वारा माया का विरोध कर। सके सो संदेश है। वो हमारे भाव में भी होना चाहिए। भाव के चाहि सब प्रकार के पोजिशन मुक्त संभव है। नाम के माध्यम स, इसके दाब उठाइए और अपने जीवन को सफल बनाइए और दूसरों को भी सुखी बनाइए। हरी कृष्ण who you see some in probe, even you can take some quistions okay
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ये
हमें प्रचार के लिए दूसरे के साथ मिलकर करना चाहिए। आप चौदीसरमेंप्रचेतस के विषय में पढ़ते हो। तुम भगवान ने कहा, मैं तुम सब भाइयों से बहुत खुश हूँ। क्यों? क्योंकि तुम सब का 1 ही धंधा है। क्या नंदा भक्ति हो? भगवान ने कहा, मैं खुश हूँ, तुम बाहों का 1 ही भाव है। तो उसी प्रकार हम भक्तों में ये भाव होना। हम सब ने दिस्कम भाव से सेवा में जोड़ने का प्रयास करना चाहे। कृष्ण भक्त भक्त, मूर्ति की काली दिशकामभाव से जुड़ोगे so at rs sadi sakamhाvसejuroa mansaa
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और इसी तरह मारने का ताकि आप को कर सकेगे
इतना ज्यादा कष्ट उतना ज्यादा गहराई
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और इनके अन्दर
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चाहिए इसके सम्बन्ध में बताई
भगवान जब देखते है की अगर ये इच्छा के द्वारा भागती कमजोर हो जायेंगे तो वह भक्तों को दे देती हूँ भगवान चाहते हैं कि हम सब shibaki bagan jbrdsti bagan cut his very sense, here we as a tiny attachment भगवान कई बार सुविधा नहीं देता o okay godhra gulia
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अगर भगवान लगा
दे तो क्या हम क्या हम भगवान को कर के मन के पास धन है धन मैंने कमाया है पर इसके असली स्वामी है भगवान तो आप उनके चरणों में अर्पण कर देते हो। तो परिणाम पापा के परिणाम से बजा। तो भक्तों का यह भाव रहता है कि हर वस्तु का उपयोग होना चाहिए। भगवान की सेवा में अगर आपको man na dnkmayaamehotle me jaunga me jaenge
राज भगवान हमारी परीक्षा ले के लिए हम तैयार हो गए है
क्या बोला है
महाराज की भगवान परीक्षा को ले ले। लेकिन कभी कभी े
परेशानी अनुभव होती है सेवा के दौरान क्या है परेशान अच्छा है आप और गहराई के साथ भगवान होगा। और जब कोई समस्या आती है तो आप क्या सोचते हो कि rava gुrुmणाजने 1922 में उन्हें आदेश दिया जी नाइंटीन सिटी फ क प्रयास कर रहे थे 40 इस आदेश को कोर बनाने के लिए और प्रापी को समय था तो कोई रहने का ठिकाना नहीं था जो प्रापा जी 1 बार जा रहे थे दिल्ली से गोरखपुर पलाजो मिलने के लिए उनके ब 180 रुपए की अब देखते हैं की प्रोपर्ली घबराए नहीं पीछे नहीं हटे pryas in we should go in devin जब आप बुक डिस्टिब्यूशन move, कल आप में से कितने भाग गए थे बुक डिस्टरिप्यूशनब सोचा सब जायेंगे तो आज कितने लोग जायेंगे okay thank you so yeah
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जाता है मनुष्य की अति में जिस भाव को वसूसकरताैवोअपनपने काम करता है तो कोई मनुष्य की कर केवल पाप करता है के अंतिम घर में वर को दिया तो क्या उसके सारे पाप नष्ट हो जाएगा ये कैसे ै
it is is spirit question।
मगर जैसे ही कहा जाता है मनुष्य अपनी करने जिस जिस भाव को महसूस करता है, वो अपने घर में काम करता है, तो कोई मनुष्य जीवन भर के पाप करता। हा ने, अनदीघरनेशवरको सर,
अगर आप सारे जीवन पाप करते आये हो। अंतिम समय में हम भवन का स्मरण नहीं कर पाओगे, अगर गान का स्मरण वन की सेवा करते आये, फिर अंत समय भी भगवान का स्मरण कर सके। शांति नारायण। इस प्रकार की योजना बनाने की मृत्य के समय हम कृष्ण का स्मरण कर सके। वो केवल संभव है, बाकी समय भी सेवा में जुड़े हो। okayso।
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