ग्रंथो के अध्ययन से होती है बुद्धि तेज | SB 7.13.7 | Vrindavan | 11 May 2022 | Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī

The discourse, delivered in Hindi at Vrindavan, emphasizes that diligent study of sacred scriptures sharpens the intellect and deepens devotional awareness. The speakers repeatedly advise seekers to cultivate a disciplined reading habit focused on texts such as the Bhagavad‑Gītā and other Vedic works, while warning against consuming worldly literature—newspapers, novels, magazines, and frivolous debates—that distracts the mind and hampers spiritual progress. Practical guidance is offered on how a true practitioner should conduct daily life: avoid earning a livelihood through teaching for profit, refrain from engaging in disputes, marriage, or material pursuits, and maintain humility and simplicity. The conversation also touches on the logistical challenges of publishing and distributing holy books, noting issues of printing quality, cost, and the need for sincere dissemination. Throughout, devotional chants and reverent invocations underscore the spiritual atmosphere, reinforcing the central message that focused scriptural study leads to a brighter, more discerning mind.
Chapters
रा जमा हवा गोपी जाना वाला बा
रा
रा हा गया धम हवा जब हार सोदननजनरग चोदन जन जन जमनभीराजमनतीरा चा द गाला वाला गालवाल वाला बा
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श्री राधा सिवा सरग न राधा दिवा हरे राम रे राम राम राम राम
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म देना बेटा देना ले ले आये राम राम राम ला मा रे रे ना हरे हरे रामा रा राम रा हा काले के हर जमा हमा रा मा र रामराम मा र मा र रामराम रामा रामा रामा रे हाररे हराराम हा हम हा
हा jio g hell grass cris hardik swagutmre a a m n o b b म न म भागे वास gita to
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से लेगा दीर, ना ही करेगा कोई हजिरा
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मा न असत स, देशो समाचार पत्र, उपन्यास, मारकर, परली तथा जैसा सहित
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पढ़े या सख्त हो। ना। न तो उपजी रहने का प्रयास करें जीविका। इसी व्यवसायिक सहित विधि पारंभ वाद वाला, दर्शन के विविध पक्षों पर व्यर्थ के तर्क उदर त्यजे छोड दे। दरकार तर्कों की तर्कों को पक्ष पक्ष दल पंच कोई ना नहीं, शांत रहे, सरल ग्रम करे, धन्यवाद समय का वध अपवाय कराने वाले अर्थात आध्यात्मिक लाभ से विधि सहित का तिरस्कार करना चाहिए। न तो कोई अपनी जीविका अर्जित करने हेतु वृद्धि पर शिक्षक बने, न विवाद में भाग लें, न विवाह, किसी कारण या पक्ष का आश्चर्य हाथपर। अध्यात्मिक ज्ञान में प्रगति करने के इच्छुक व्यक्ति को अत्यंत सावधान रहना चाहिए कि वह साधारण साइट करने से बचे। यह संसार ऐसे सामान्य साइड से भरा पड़ा है, जो अनावश्यक ही मन को विचलित करने वाला होता है। ऐसा साहित्य जिसमें समाचार, पत्र, नाटक, उपन्यास तथा पत्रिका सम्मिलित है, वास्तव में अध्यात्मिक ज्ञान में उमरती हेतु नहीं। इससे तो लोगों का हिरासथलतदवाजतीफ नहा गह है। अध्यात्मिक ज्ञान में प्रगति करने वाले को ए ऐसे सहायत का तिरस्कार करना चाहिए। न ही मनुष्य को विभिन्न तार्किकों या दा्सेलकों के विदर्शो से संबंध रखना चाहिए। नि संदेह प्रचारकों को कभी कभी विपक्षियों के गहर पर तर वितरित करने की अवश्यकता पड़ती है, किन्तु जहाँ तक संभव हो, ऐसे वाद विवाद की मानव वृत्ति से बचना चाहिए। इसके सम्बंध में श्री मधमाचारकरते हैं। न तो विधा साहित्य का घर करे, न उन तथा अनेक दार्शनिकों तथा विचारकों से सम्बंध रखे, जो अध्यात्मिक प्रगति हेतु व्यर्थ है। न इन फैशन या लोक प्रियता हेतु किसी को शिक्ष ना मनुष्य। इन प्रथा सहित शास्त्रों के प्रति उदासीन बना रहे है। न तो पक्ष ले, न विरोध करे, न ही शास्त्रों की व्याख्या हेतु धन लेकर अपने जीविका चलाए सन्यासी को सदा दस्त रहना चाहिए और शिव भगवान के शरण करणोंकीउर्मशरणग्रहण करने आध्यात्मिक जीव में प्रगति करने हेतु साथियों की अनवेशना करनी चाहिए। अनुवाद पीछे बोलिए समय का व्यक्त अपवा करने वाले अर्थात अध्यात्मिक लाभ से भी साहित्य का तिरस्कार करना चाहिए। न तो कोई अपनी जीविका करने हेतु अर्जित करने हेतु विरति पर शिक्षक बने, न वाद विवाद में भाग लें, न ही वह इसी कारण या पक्ष का आश्रय ले।
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mansa बंदे हम श्री गुरु shri श्री रुपम सर सदवेतबसवहध वि राधा किशन का। तब तक का होरा गी राधे बिना जय श्री कृष्णा चेतन्य
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a a a a a a a a a a o muni an e a मैंने कहा मैं कुछ कमी व पंच ने क्या कहा प्रबंधन इसके साथ उन्होने तो भगत is is man ratan man
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साना ने क्या कहा? अगर आप मुझे कोई वर्ड देना चाहते हो तो ऐसा वर दीजिए के द्वारा मेरा क्या का वर्ड देना है। ऐसा बिल्कुल भी इस अध्याय में ज्ञान आयुर्वेदिक। शास्त्र के अनुसार 4 मनना औ o 24 घंटे चाहिए। जा तो यहाँ गोली शिक्षा देने कि सन्यासी का क्या उद्देश्य। दूसरे आफिस यहाँ कुछ लोगों में उनकी चर्चा की जा रही है जो कि सौ प्रतिश सवाल पर तुल जाते तो आगे से वो पीछे सुनाई दे रहा है, आगे आगे सुनाई दे रहा है। a casa kha जा है कहा जा रहा है कि इस व्यक्ति की इच्छा है के 4 टोनमेंट करने से वो शायद नहीं पढ़ना चाहिए। इसमें वान के विशय में जो हाने वाली व्यक्ति है तो सदा से मन में, चाहे वो किसी आशा में हो, मन में हमारे किसान होने की इच्छा है, उसे उस हेति नहीं पढना चाहिए जो कि cop said who has ruchi हवा को आप कई साल के लिए ये ज्ञान व्यक्ति को क्या का आध्यात्मिक। वह तो समाज में बहुत विशों की किताबों में कोई कमी नही किसी बुक शोर में जाओ क्या ले गे anti, nine, nine, percent in नाइन परसेंट किताबें आपको मिलती है, वे साहित्य है वे साहित्य किस किस विषय मे पाते सो ना भूलिए क्या कह रहे हैं? जो व्यक्ति भगवान की शरनगतथोड़ाजयाता है, यूं रखी री भी में जुड़े है, उसको वो साइत नहीं पढ़ना चाहिए, जिसमें भगवान
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को कोई सायते पढना चाहिए। इसमें क्या है हम उस जी, इसका कोई के स i i
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i i पहले महाना चाहिए थे जिन्होंने वैदिक सहायता को और बच्चों ने पहले तो प्रिंटिंग ये सुविधा नहीं कि समाज में कहा किताबों को स a a
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सो आगे दिखाए व्यक्ति को प्रोफेशनल प्रचारक नहीं बना चाहे। हमे चाय के कार में नहीं जुड़ना चाहिए। यह भावना धन कमाएंगे
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a o कि व्यक्ति को यह नहीं सोचना चाहिए कि मैं पैसे कमाऊँगा का व्यक्ति नहीं और व्यक्ति को अपनी लाइवलीवुड द्वारा के लावा और किसी में मुषवरभगतमेयेसनदेश की। हमें मोते रचा। जिन वो जिसमें भगवान के विषय में कोई ज्ञान न हो, वो क्या है। श्रम में हमें उत्तम ज्ञान मिला है। लोग प्रभरी कहते हैं कि व्यक्ति को भुत एक्साइट से और उसका पूरी तो सही अध्ययन करोगे तो क्या लाभ होगा? क्या लाभ बढ़ेगा जाति ज्ञान को प्रकार के ज्ञान व ज्ञान व ज्ञान के द्वारा आप जीवन को प्राप्त कर जानवी। ज्ञान के द्वारा आप जाजविज्ञान प कर सकते हो, जिसके द्वारा आपको शिक्षा मिल रही है। यहाँ कहा जा रहा है जो व्यक्ति ध्यान मान में आगे बढ़ना चाहता है, उसे इस भौतिक साइकिल में ऊंची नहीं लेने और पूरे विश्व भर है। इसके साथ है बहुत ही बुक शोर और ये बुक शोर भरे हैं। इसके साथ बहुत एक्साइट लगेगी srimad यह स्थापित किया जा was उसे रुची नहीं। ध्यान ज्ञान और वो सहित जिसमें ध्यान विज्ञान है, चाहे वो योसाहसेपूरीजफाई में कमी भी हो। जैसे था वो भारत में प्रापर कर रहे थे, वो 1 से 1 दिन वो 1 ्लाइबरमेंपहुंचे लाइब्रेर से कहा मिकी इन किताबों को पाने में, पर किताब को ज्यादा नहीं नहीं लगेंगे पढ़ेंगे फेंके अगर आप ग्रंथ के रूप में प्रकाश करोगे तो पढ़ेंगे और लगेंगे तो सोचा ये भगवान का लक्षण प्रसार को बजे जाम। सबसे पहले ननाएश्ीमबबदसुखन मजूर में कहते हैं कि अगर फर बाजी ने छापा था कि क्वालटी ज्यादा ऊंची नहीं थी, वो वाले छापे थे। लेटर प्रत। आज कल तो ऑटोमेटिक प्रेस में अच्छा पॉइंट नहीं लिया और प्रॉपर्ली लो सारा कार्य खुद कर रहे थे, नाव में शुरुआत कर रहे थे, फिर इजाजत दे देने में, फोर्ड क्लास डब्बे में और फिर प्रॉपर्टी जेली पहुंचकर या दे दे फ्रिटिंग प्रेस में, जहाँ वो खुद बैठ कर सिप्रोवाइजकरदेदे finding मे तो उस गंध में संदेश तथा पर अनेक कमियां,
हालांकि
हमारे इस कार्य में कई कमियां रह गई हैं। क्यूंकि ये संदेश और भगवान का है? भगवान की वाणी है, इसको माना जाए। vnisbritisoi to आपके शो को, फांसी को, उनका उचारण करना सो जाम्रजञानकीचर्चा नहीं हो क्या है उसे हमें क्या करना चाहिए उस ज्ञान में जिसमें फर्म भगवान का मिलता है। तो यहाँ पापाजी से 7 में कह रहे हैं कि वो बुद्धिमान व्यक्ति है, वो वो साहित्य में रूचि लेता है, जिसमें फर्म भगवान का मिला है। सो पापा जी का पूरा तो हमे ज्ञान ज्ञान का। तो आप ये जो अखबार में किताब है, ये जो kbarकावidसेआकिताब wotpl से बना है पेड़ों को काट के पेड़ों को, पेड़ों को भी, पेड़ों को भी जान तो पेड़ों को काटना पड़ता है से पल पलता है। वो पल से आगे जाता आगे o o jo, o, a, o manga, ko, rusia
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plp सबसे ज्यादा पेड़ है, पेड़ का बना देते हैं। पर सारे जंगल सारे क्या कमी है? तो प्रभा जी ने i m, a, a, a to sn्ासiउसकीमा ही भरती और स्वभाग है। आप के पास अनेक गंध है, रापाजीलगगअसीगंख नुवान की भाषा में यह ग्रंथ है। काले हो गए बात आज से
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बार में कौन पढ़ेगा इस ग्रंथ को e a pavitra तो और ऊपर से आपका सर आप हमारे लिए न हो सके तो यह ना कह रहे हैं कि वो साहिल जिसमें भगवान के विषय में कोई ज्ञान नहीं है, क्या उसका कुछ वैल्यू है और भक्त हैं का क्या भाव रहता है कि हम अध्यातमिक ज्ञान को 5 साल की आयु से मान अध्यालमिज्ञानको श्रीमत भगवत में है समस्या का, तो यहाँ ये कहा जा रहा है जो न समनपननजाउसेवो को बाधा रोग कोई आपसे पूछेगा क्या है i इसके लिए इस कॉंफ्रेंस में दे साल ने पूरा दम लगाया तो प्रयास करा जा रहा है। क्या क्या हम पर ग्रंथों को पढना
है,
खा सके वो गर जिनमे हम पढ़ेंगे तो उसके द्वारा क्या होगा? जाती होगी आपके गीत को गीता क्यों कहा ै आपने पूछा कि सारे लोग पूछते है की गीता को प्रभा जी समझाते हैं? भूमिका प्रोबा जी कहते हैं क्यूंकि कइयों ने गीता प्रकाशित किया है और अपने को roपजiचोसीसरदेश प्रापा जी soमiजीआपहाउसदेश हो उसे कोई अभी देश इसको कोई आप माय। जैसे प्रभाजी ने क्या प्रभाजी पहला खेल खोला था तो उनके शो से चर्चा की जा रही थी। और हम सोसाइटी को भी रजिस्टर करेंगे। क्या ध्यान देना इस नेंशल सोसाइटी फॉर पानी का तो आध्यातमिक े किस चीज की कमी है और किसी धानी कहते थे अगर बलिक समाज में किसी चीज की कमी है तो क्या है ये ध्यान ज्ञान के कमी है। विदेशों में जो संडे का, अखबार का उसमें 2, 200 पेज हो और अखबार के विषय में 1 अखबार
को पढ़ो
अखबार को आप क्या देखने है? ये है हमारा दुर्भाग्य समाज में अगर इसी की कमी है, कान की कमी है और हम में गंध पढ़े आप को रोज बिक बिजनस से बार बार भी a an देगे। हम क्या है jet, jet,
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और
कृष्ण का दावी पड़ोगे फिर संभव हो तो हमें merit रोज रोज पढ़ते है। बहुत कम संख्या मा है। उसी प्रकार हमें शासन का भी अध्ययन हो। इसलिए कब स्थापित किया कि हर व्यक्ति जो बंधन में रहता है, उसे क्या करना चाहिए। भगगीता क्या आप मालिक कथा को सुनेंगे तो यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम ग्रंथों को पढ़े, केवल से जाने के लिए नहीं, रखे जाने के लिए ज्यादा बेहतर है। ब। get is reading habit हमें ये आन ने क्या तेज बुद्धि के साथ सरलता के साथ यहां को पापाजी पापाजी का वर्णन किया है। जो पापा जी कहते कि इन गंधों में क्या होना चाहिए। तो माने आधार में ज्ञान। तो यह बहुत आवश्यक है। तो प्रयास करेंगे तो रूची पीनी पड़ेगी
है।
रूटी कैसे बोर्ड सलमान भक्त हैं, वो चाहते हैं। ruchi colege वो प्यार। उसी प्रकार हायना रूची बढ़ेगी। अगर भाई नाम का सार शाजोकी अध्ययन में रूचि बढेगी। अगर आप उनका अध्ययन कर, आप अध्ययन कर हो तो आपकी रूची नहीं बढ़े जाते। भाव कैसे brea, oka, a, a, ae, follow mochi चाहते हो की सदा smaजमeo हमें क्या तो अगर आप देखते हो की भक्तों की संख्या को मूल कारण यह है। इन गधों को पढ़कर हम यह सोचते है, कोई गंध को नहीं पढ़ता हू, ये अपराध है। पढोगे to canada to avi hoti pou e लाइब्रेरी में किताबों को सारा दिन फ्री थे। 1 दिन उनके हाथ में आई, फ्रेंच भाषा में भगुली। उन्होंने फ्रेंच भाषा की भगरीता और वो लाइब्रेरी थी। kanun था to a man को किसी व्यक्ति ने पढ़ा में 1 है जिसका बिजनेस है रंग को रिपेयर करना है। ट्रंक समझते हो सूर के आज तो कोई नही देने आये 1 ट्रंक भी ट्रंक को देने से पहले उसका मालिक था। उसने देखा सा अन्दर कुछ किताब कुछ तो नहीं है। तू छोड़ी कित नहीं थी। पर उसे जब ये व्यक्ति प्रीपेयर करता था, उसने प्रिपैयर चोरी किताबें उसका कोई परि्षनहीथाoa उसे वो किताबों को पढना शुरू कर और पढने से परिवर्तन उसका भक्ति में रूचि। बढ़ी मांगे तो साहित्य आध्यात्मिक साहित्य में बहुत प्रेशर। तो अगर हम पढ़ेंगे कहा तो क्या क्या होगा? तो हमे ध्यान मे संदेश में रची लेनी। साइड है या अध्ययन करना चाहे वो महत्वपूर्ण है। अगर हम चाहते हैं बगली मार होली में गुजरने के पश्चात, इससे क्या मिलता है? ki भक्ती और भक्ति का बीज उगा कैसे कैसे पता कि केवल तो जुड़ेगा कैसे तो आप क्या करोगे? क्या हमे कैसे कर के ये बहुत बंगले मे बेटे के पूछा, ये बताओ किस प्रकार मुझे भक्ति कैसे होता ये भक्ति और प्राप्त होता है। हे ज्ञान के द्वारा हमें ज्ञान प्राप्त होता है। और उन्होंने ये कहा कि हमें किससे बचना है, कैसे बचना है भक्ती के बगीचे को vishal? तो आप इस श्लोक में आपको ये महत्वपूर से मिल रहे है। क्या पढ़ना चाहिए ध्यान साइड
का अर्थ
संदेह इन श्लोकों में शिक्षा दे रहे है कि किस प्रकार हमें और खा सके सन्या राज में है, उनको सन्यास क्या करना चाहिए? भौतिक सर वो 7 पढ़ना चाहे तुम्हारे वो ही शायद पढ़ना चाहिए। इसमें क्या है? site a site a a
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a ये खाना से केवल माँ लखपतियों के घर पर खाओगे लखपत,
हमारे माँ
नकपतिका मतलब है। to a o se smdy क्या है सो हमें इसमें रूचि देनी चाहिए। औ हाल क्या बढ़ेगा तो उसका वार न्यारा में उनका नमन cold ये legato yes i ga yhaishallge uikquikikshady eon गली जल्दी भई बंद कर दिया हाए ग्रीश mega सुनाई नहीं
नहीं नहीं ले रहा
था है, मैंने तो पूछा था क? okay on
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अरे किस प्रकार
है भगवान आगे 624 बताया आज तुम तो हर 62 थारे बेटा wonageskyyehhig।
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