इंद्रियों को तृप्त करने का एक मात्र उपाय | SB 7.4.19 | 27 Jan 2022 | Ghaziabad | Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī

In this extended devotional lecture, Gopāl Kṛṣṇa Goswāmī deepens his earlier exposition on the futility of satisfying the human senses and presents Krishna devotion as the sole, effective remedy. Building on Srimad‑Bhagavatam 7.4.19, he recounts the Asura’s endless craving despite limitless material pleasures, and stresses that true contentment arises only through surrender to Krishna, chanting His holy name, and associating with devotees. The speaker interweaves mythological illustrations (Kamsa, Brahma, Prhalad), critiques the material‑driven conversion tactics of Christian missionaries, and highlights the global spread of the Hare Krishna mantra as evidence of its power to satisfy the senses. Audience questions about innate spiritual knowledge (Prhalad’s prenatal learning) and practical concerns (how to practice bhakti in daily life, workplace, or study) are addressed. Concrete guidance is offered: regular japa, participation in sankirtan, mindful remembrance of Krishna, avoidance of sensory overload, and study of the movement’s law‑book. The talk concludes with a call to constant remembrance of Krishna, communal worship, and living a life guided by devotion rather than material craving.
Chapters
ہائے کشنا ہائے کشنا اومنم بھگوتے واسد باہر اومنم بھگوتے واسد باہر اومنم بھگوتے واسد باہر اومنم بھگوتے واسد باہر اومنم بھگوتے واسد باہر کینٹر سیون چپلر فور ٹیکس نائنٹین صاحب एताम ने जिता काकूब एका राद विसायन प्रियन यतोप जोसा बुञ्जनो नतप्याद जितन्दिया साइताम ने जिता काकूब एक राज विशयन प्रियान। जितो पुझो सम्भून जानों। मत्रपया जितन दिया। साय तामने जिता काकुब। एक राज विशयन प्रियान। जितो पुझो सम्भून जानों। मतर پیار पजितन्दिया सइठं
निर्जिता ककुबा एकराद विशयाल प्रिया लतो पजूसं भुणजा नात्रिप्यद अजिते
हिंद्रिया सही दंगीत का पुक्रा इत्करायति स्यांत्रिया
जो पंजस्या भुञ्जानो
साइतं निर्जितत काकू एकराड विशयान प्रिया वो पजोसं भुञ्जानो मात्रि प्याजितें
द्रिया मातरी साइतं निर्जितत काकू
خیدر آنکھ
سی آنکھ ریاں ڈیلے ڈھوکھ جو شنبھوں ڈھنڈھانوں ڈیلے ڈھوکھ جو شنبھوں ڈھنڈھانوں ڈیلے
ڈھوکھ شب
دات سا
उसने भिरन्यकसिभु इत्थं इस प्रकार निर्जेत भीत्ली खुग सारी दिशायें एक सत्व भीशयान भिंद्रियो विशेवुप्पियान अत्यन्त प्रिय जथा अग्विको जोसं जथा संगो भूप करते हुए न नहीं अत्रिप्यत संतुष्ट था अजीत इंद्रियों को बस में न कर सकने के कारण। अन्वारत समस्त दिशाओं को बस में करने की सक्ती प्रात करके तथा यथा संभव सभी प्रकार की इंद्रित तृत्ति का भोग करने के बावजूर भिरन्य गस्यकू असंतुष्ट रहन पाया केव कि वह अपनी इंद्रियों को व्यस्न करने के बदाए उनका दास बना रहा था। तात पर यह आसुरी जीवन का एक उदहरण है। भले ही ना और इंद्रियों के लिए अध्यन्त सुखमें परिस्थिती उपन कर लिए हैं। के तू इंद्रियों के पसिभूत होने के कारण वे कभी तुष्ट नहीं होते हैं। यह आध्मिक सम्हिता का प्रभाव है। बहुत इग्वादी विक्ति घानु तथा इस्तिरियों का भोग करन मानु समाज कवी सुखी एवन सांत नहीं रह सकता जहांकड इंद्र त्रिप्ली का प्रश्न है भौतिक वादी अपने बोहोग को अपनी करपना भर बढ़ाते जा सकते हैं किन्तु ऐसी भौतिक इस्थितिय में लोग अपनी इंद्रियों के तास में रहते हैं अतह एव अनुवारत पिसे सब वो ये सम्मत विश्माओं को बस में करने की शक्ती प्राथ करते तथा यथा संभो सभी प्रकार की इद्र त्रिक्ति का भोक करने के बावजूर पिरने का शिवु اور سنتوشت رہ آیا کیونکہ وہ اپنی اندریوں کو بس بھی کرنے کے بجائے اُن کا داس بنا رہا ہوں औम
ज्ञान चिम्रणदास्या ज्ञान जनाईश्वलक्या शक्षुर्मिल्धनेन تس مشید ہوئے بھائی شریف چیتانیا مناویستا ساپتامیر بھوتلے سویوں روپا شاہی شریف کریشنا چیتانیا ربوں کی تیانندا
شیخ نے تلادھا کھشتا گا ساری گھوڑا کھندا اے کریشنا اے کریشنا کریشنا کریشنا اے اے اے اے رام اے رام
आये कृष्णा आप सब भक्तों का हादिक स्वागत साइथामने जिता काकुम एकारविशयन प्रियर्द यतो पुरुषमुन्जासो नतप्रेद अचेतने लिया आये कृष्णा तो आप इस समय फिराने काशिकू के विशे में पढ़ रहे हो اور اگر آپ سے پوچھا جائے کہا ہے نا کشی پو بھاگت ہیں یا اوہ بھاگت ہیں انہوں نے کیا پچان ہے دونوں ہیں وہ بہت اوچھے کھوڑے کے بھاگت ہیں آپ تیسے سکرمیں پڑھتے ہو کہ بھرما کی پتھر کمار آئی چار کماروں سے آپ پرچھت ہو وہ گئے تھے भगवान का धर्शन करने के लिए उनकी पास युगीता थी कि वो प्रमण करो यहां था कर सकते हैं कि यह हवाई जाज़ के बाद ना और वो पहुंचे गुन्ददाम में हाँ भगवान के धर्शन के पहले साद द्वारों से आपको गुजर के जाना पड़ता है अगर आप कभ भारत के राश्रापती के घर गयो गयो तो वह राश्रापती के एक कमरे में पहुंचने तक चा या पांच दुआर से गुधर के जाना पढ़ता है वेन में जाकर एक छोड़ा कम्रा राश्रापती मिलेगा तो लगता है कि ये शरूनने नकल की वगीयार की लगते हैं � پھر جائے ہے یہ کمارہ دیندے کا اور کے چھلے گئے کسی نے روکا نہیں پھر جب وہ ساتھ میں دوار پہ پہنچے تو وہاں دیکھیا دو چوکیدار سیکیورٹی کمپلی کے دو چوکیدار تھے دو دوار پہ چاہے بے جائے جیسے آپ کے مندر کے اندر آنے سے پہلے بھی چاہے بے جائے کی بولتے ہیں और उपसान नगर मंदल में भी हैं अब अपने सब पड़े मंदल में हैं तो वो इन दुआरपालों ने देखा इन नंगे पच्चे जा रहे हैं भगवान के स्थान पर और इन कुमारास को इतना घहरा अनना आ रहा था और वो इन दुारपालों ने क्या क्या रोग दिया تم رنگے بچے اندر نہیں جا سکتے اور انہوں نے کیا کہا تمہیں کوئی عدیقات نہیں ہے ہمیں روکنے سے تمہاری بھکتی میں ہر چند بن رہے ہو تو جائے بھجائے انہیں روک دیا پھر روکا تو کمارت اور بھی غصے ہو گئے یہ آنکھیں اگزم لال ہو گئیں کمری میں پہنچنے کے لئے اور دوار پالوں نے جب سمجھا کہ ہم نے بھکتوں کو رکھا ہے بھگوان کی درشن لینے سے تو وہ سمجھ گئے کہ ہم نے گلتی کی ہے یہ جو ورطلاب ہو رہا تھا اسے بھگوان سن رہے تھے اُن کی ایک بہن سے تھوڑی دوری پر بھگوان آئے دیکھنے کے لئے کیا ہو رہا ہے کیا ہو رہا ہے جیسے آپ کے مندر کے سامنے کوئی جو جو سے بات کرے گا تو آپ کبھی کبھی آگے کوئی دیکھنا چاہو گے کون ہوا ہے تو بھگوان آئے بھگوان نے دیکھا انکماراج نے دیکھا کہ جائے و جائے کا بھگوان کے ساتھ بڑا گہرا سمبند ہے بھگوان بڑے پیم سے آئے اور کہا کیا ہو رہا ہے اور جب جائے و جے نے دیکھا کہ جب کمارت نے دیکھا کہ جائے و جے کا اتنا گہرا سمبند ہے تو وہ سوچ لگے ہم نے گلتی کر دی ہے اور ہمیں وہیں شراب کو واپس لے لینا چاہیے تو بھگوان نے کہا نہیں یہ میری اچھا تھی کہ تم انہیں شراب کرو اور پھر پھر کریہ بجے نے کہا جیسی سجا دینی ہے تو پھر ہماری ایک ہی اچھا ہے کیا جو سجا بھی دو گئے ہم اگوان کو کبھی نہیں بھولیں ایسی سجا دو کہ وہ ہمیشہ اگوان کو سمجھنے کرسکیں باقتی رسالت نویس سندھو میں روپا کو سمجھنے کے لئے ایک نیم دی ہیں وہ کہتے ہیں ان سب نیموں کا एक ही मूर वो देश है, single point, वो क्या है? We should always remember Krishna, never forget Krishna. All these rules and regulations have only one goal. रूमा के सबे कहते हैं, जो अनेक नियम है, बक्ति और रसमन सिंदु, is the law book of the Krishna conscious movement. प्रापा जी लोस जैंजनले में थे, जब इन किताब छप के आई थी, جیپین سے اُن دن میں ہماری بی بی ڈی کی بک جیپین میں چھاپی جاتی تھی تو پورا مندر کا بھکتوں سے بھراوا تھا پھر آباد نے نیکٹر ڈیبوشن کو اوپر اٹھا کر کہا This is a law book of the Krishna conscious movement. Everyone must study this book. और अपने क्या کہتے ہیں इनसमनीوں کا मून उदेश एक ही है दिम्सदा कृष्णा का स्मारंग करो तो कभी कृष्णा का पूरो में नहीं है अगर अन्दिम्सदा में कृष्णा का स्मारंग कर रहे होगे तो बहुत आगे जाना हम जा सकते हैं अन्दिन नरायंद में ती हैं तो हियाने का शिपूर पहले तम उन्हें असूर के रूप में स وہ دے پھاہ سے بہمان کا اصول بھی گئے تو جائے بھجائے بن گئے تھے ہیرانہ کارشپو اور ہیرانہ کارشپو ہیرانہ کارشپو کوئی سدھانن اصول نہیں تھا اُن میں جو شکتی تھی اُس کی تلنا کوئی نہیں کر سکتا سدھانن کیلئے ہیرانہ کارشپو کی کیا ایچہ تھی کہ میں ایمورٹل ہونا چاہئے مجھے کبھی بھی मिर्दे के सापना नहीं करना पड़ा है। तो वो गए ब्राह्माजी के पाद। अच्छा, तो ब्राह्माजी ने क्या कहा? ब्राह्माजी ने कहा, मिर्दे के सापने तो मुझे भी जोड़ना पड़ता है। 311,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000, वो यहाने का जिपू। विश्णु के शत्रु बन गए थे। यहाने का जिपू। की इच्छा थी कि मुझे ऐसा चनन प्रावस हो के इसकी बाद मिंत्य का सामना नहीं करना पाए। उन्होंने बहुत गहरी तपस्या की। आप आच्छोड़े होगे वनकी तपस्या � खड़े हुए और हाथ आकाश की हो और क्या कर रहे हैं किसे कितनी देखले खड़े हुए देवतोऽप के सहाव वर्ष्व करें हैं हमारे प्रिश्वी के छे महिनें देवतोऽप के बारा खड़े के ब्राबर हैं तो अंजेद सेलिश्टरी येर्स तक इन्हांने करें क्या जैसे आपके प्रिसिज भारत का सद्ध योगी कौन हैं राम देव उन किसे को पूछो कहो तो अपने अंगुटे में खड़े होकर बताओ की देव कर सकते हैं मेरे ख्याल से जाधा से जाधा आदा गंडा कर पाए करें ये आये वो भी मुन। में खड़ाने का शिपू सो اتنی شدید میں اور انہوں نے ایک بون پانی کبھی نہیں پیا اتنی شدید میں اور
انہوں نے ایک بون پانی کبھی نہیں
پیا اتنی شدید میں اور انہوں نے
ایک بون پانی کبھی نہیں پیا اتنی
شدید میں اور انہوں نے ایک بون پانی کبھی نہیں پیا اتنی شدید میں اور انہوں نے ایک بون پانی کبھی نہیں پیا اتنی شدید میں اور انہوں نے ایک بون پانی کبھی نہیں پیا اتنی شدید میں اور انہوں نے ایک بون پانی کبھی نہیں پیا اتنی شدید میں اور انہوں نے ایک بون پانی کبھی نہیں پیا اتنی شدید برابا جی نے جب دیکھا کیا کرے؟ برابا جی نے کمنڈا کسی پانی پیکا اور پھر پھر سے یہ حکم نہیں ہے۔ فیحانِ کچھ بھو جو تھے سادھان عصور نہیں تھے۔ فیحانِ کچھ بھو جو اچھا تھی کہ مرزے سے بچے سدھاں کے من میں بشنوں کا ہی چندن تھا بشنوں کے روح کا چندن تھا تو ہیہنے کا شپور کے پاس ہر پرکار کی شکتی تھی تو ان کے پاس کسی چیز کی کم ہی نہیں تھی اور ہیہنے کا شپور کے پاس ایسی شکتی تھی کہ وہ کنٹرول کر سکے ہر جگہ اور پوری سفیدہ प्राप्त होई थी इन्दियों के इन्दिया सिप्त के पर सारे पुरी सिख्ष सुविदा प्राप्त होई थी इन्दियों के इन्दिया सिप्त के पर पुत्याज़ परिया प्रभोजी क्या कहते हैं पर वो हमने इन्दियों के दास बन गया था क्याने के शिपु बड़ी गहरी उनके बाद इन्दिया देप्टी की अनेक सुविधाएं थी और अन्त में यहाँ नहीं कि उज़े भी बिल्कुल सन्तूष नहीं थे उनकी इंदियों को सन्तूष नहीं कर सके तो इसे हम क्या सीखते हैं हम सीखते हैं कि इंदियों को अगर आप सन्तूष करना चाहो आपको इन्दिया को उप्योक करना चाहें बहुत आगी सेव हैं तो हिखाने का जीपू उन्हें बादराम उन्हें ब्रह्माण जी के दुबारा ये वार मिल गया था जब हिखाने का जीपू शुरू ने सुना की ब्रह्माण जी ये वार नहीं दे सकतें कि वो मेथे के सा� میں انڈریکلی وعدہ لے لے داؤں دل میں نہیں, راہ میں نہیں, ساگر میں نہیں اس پر آگے میں نے ایک بار پراپ کر لیا وہ کیا سوچ رہے تھے ہمیں مجھے وہی ادیشہ پراپس ہو گیا پراپس ایک سمیں ڈالس اینڈرز میں لیکچر دے رہے تھے اس ہینانگا شپو کی لیلہ کے اوپر تو پراپس تھے کہا آس پر کھیلیں ہینانگا شپو ہے لارڈ ٹرول برمہ प्रभावाजी लेक्शा दे रहे थे इसी कथा के वरत तो प्रभावाजी ने कहा कि याने कशिपु का बत होने के बच्चाद भगवाण ने कहा प्रभावाजे ऐसे वर्व बगविश्वे मत देना तुम दे मेरा कारिया बहुत कठ्रीन मना दिया था तो याने कशिप� दिव्य ग्यान प्राप्त किया था जब वोकान थे माता की घर में जब हिराण का शिपू मंजारा परवद में बड़े गहनी सपस्या कर रहे थे खलाद माता की घर में थे और इंदर और दिव्यानों ने सोचा ये भी पिता जैसे निकलेगा वो गसीर के ले जा रहे थे जबकि کہ یہ کیا کر رہے ہو؟ اور انہوں نے کیا کہا ہم اس عورت کو گھسید رہے ہیں اور اس عورت کا نام ہے شریمتی کھانے کا شبو تو انہوں نے کہا نہیں کلتی کر رہے ہو اس عورت کے گھر میں کیا ہے؟ مہد پوچھے پھر کھاں پھاگ رہے ہیں تو ان کا اصفہ آ گیا تھا کہ انہوں نے گھیان پرات کر لیا مہد پر کھاں پھاگ رہے ہیں تو انہوں نے کہا شبو یہ بات ہر پرکار کی سمیدہ تھی وہ اور ان کی ان کی خوشی تھی کس بھی اندیا دیپٹی میں یہ ہر پرکار کی اندیا دیپٹی میں خوشی تھے پر انت میں کیا دیکھا کہ ان پر بے کل سنتوش نہیں تھے اگیانتہ میں ہم سوچتے ہیں کہ اگر ہمیں اندیا دیپٹی کی سمیدہ پرابت ہو تو ہم سنتوش رہیں گے اور یہاں ہم क्या उपदेश दिया जा रहा है? यहाँ तालपरी भी प्रभोजे कह रहे हैं कि आप किसी भी प्रकार से इंडियों चेप्टी द्वारा अच्छी संदुज़ प्रापनी कर सकते हैं. तो जो बुदी मान वेक्ती है, वो क्या करता है? वो शाल्सा के सिख्षा का लावडा रहा ह शास तक अरथ है भगवान की बानी और शास से तोरा हमें सिक्षा मिलती है क्या कि कैसे आप अच्छी संतुज से प्राप्ड कर सकते हो शीवन भगवतम में शुरू से अंत तक अनेक पिताएं हैं जिनके तोरा आपको यही सिक्षा मिलती है कि आप चाहे किन्दा भी प्रयास कर और पिता ने संदार मरका संदार मरका कौन थे शुक्रचाया के पुर्थर और गलाग के अर्याभग उनको पिता ने खास सिख्षादी लिए किसी पिकार से इसे विश्णों के प्रती जो आकशन है वो समझ तोड़ रहो तो संदार मरका कई मारे मुझे وہ کہتے تھے ہمیں دوش مان دو ہمیں برامین ہیں ہمیں کچھ نہیں سمجھاتا کون آپ کے بیٹے کو گیاں دے رہا ہے پہنچانے کا شکور کہنا تھا پیش بدل کر آ رہے ہیں یہ ویسے لوگ میرے بیٹے کو یہ گیاں دےنے کے لئے تو پلال مراج کے جیون سے ہم کیا دیکھتے ہیں انہیں انیک پرکار کی کچھ ہیں ہم سے سامنا کرنا پڑتے ہیں उन जो कष्ट तपस्या प्राल को अलुमाव करना पड़ा वो शहर कीछे कोड़ी प्राप्त होगा कीछी ने इतना घेरा कष्ट नहीं उठाया पहार के चूड़ी उसे उन्हें प्रेका जेलु साम्बुलें घेरा अंग्री चाड़ा तरह से तरभी मड़ गए सासमे के क्या कहत مانے کی، مانے کرشنا راکے کے تو پھلا ہیران کے جب کو بھما سے یہ ور مل گیا تھا وہ کیا سوچنے لگے کہ ہم आज क्या स्थित्य समान है हम शासों कहें कि शासों पर रखेंगे तो ये विश्वास नहीं रखेंगे कि शासों में क्या संदेश हैं जो संदेश हैं हम डॉट करते हैं ہمارے سمجھ ہے अपने इश्वणारी का उठारण में आपने क्या देखा? उन्हें आमें उठारण दिया है कैसे आप इंदियों का उप्योग कर सकती हो? पहला उठारण के लिए आपने वानी का उप्योग किया किस लिए? किस लिए? पहला उप्योग किया किस लिए? औउंकों को प्योग या किस लिए भगवाण के संदर में आपको देखने के लिए हैं। तो अम्रिश्वर्हान ने हमें उदारें दिया है कैसे हम इंदियों को प्योग कर सकते हैं भगवाण के लिए मैं। शीवन भगवतम के द्रस्विस्कन में आप ननकोरा मनी गीवा की दंगी कोई कमी नहीं थी पर एक दिन जब संदाद उन्ही गुज़र के जा रहे थे वो समय खेल रहे थे दंगी और तोड़ार और और तोड़ार नहीं था پیڑ بن جاؤ گے کیونکہ پیڑ جو ہیں وہ ننگے کھڑے کھڑے ہوتے ہیں اور ایک بار ہے اس کے ساتھ کیا تھا وہ بار؟ دیوزوں کے سو سنوں کے پچھلات میں بھگواں کا درشن پراغت ہو گیا تھا تو وہ بن گئے پیڑ نن مراج کے انگل میں سو ساڑ کی پچھالوں نے کیا پڑھ تھا بھگوانگاں تو سو ساڑ کی پچھال جب دو پیڑھ گرے جن میں دیتی نکلے کبیڑ کی پچھلوں انہوں نے سب سے پہلے نہاردہ مونی کا بہار پکڑ گیا یہ کہا کہ نہاردہ مونی کی قربا سے ہمیں یہ دشن پرات ہو رہے گا پھر انہوں نے کہا اب سے ہم سدا ہماری انہیوں کو اپیوک کریں گے ہماری سیفہ میں ہمیں کہا اب سے ہمارے ہاتھوں کو اپیوک کریں مندر سیفہ کے لیے وانیوں اپیوک کریں جیب کا کھالے کے لیے پرشاہد مرمانی نام کا پچھا کریں تو اس سے ہم کیا سکتے ہیں جب ہم کیان تھا تو انہوں نے ٹھیک بیوار نہیں کیا پھر جب انہوں نے ادھیات میں گیان پرابت ہو گیا تھا اور انہوں نے نراندو منی کی سکھشت کو سبکار کیا جب انہوں نے کیا کیا کہا آپ سے آپ سے ہم صدا آپ کا چندن کریں گے آپ کا سمجھن کریں گے اسی پرکار کریشن پکتی میں جھڑٹنے سے پہلے ہم سب کے منگ پٹکتے تھے کنی تصویروں میں وگیا تھا جب آپ بھکت بن گئے تو اس کے پچھل آپ نے کیا نرنہ کیا آپ نے یہ نرنہ کیا کہ آپ نے جو انکول کھایا ہے اسی بھی انیوں نے اپکیو کرنا ہے یہ ہمارے ہاتھ میں ہے آپ چاہتے ہو کہ انیوں کے انیوں کہ وہ آپ کا ورش ہو ہم کیا دیکھتے ہیں ہم انیوں کے دھاست بجاتے ہیں ہماری انیہاں کہتے ہیں یہ کرو ہم تراند کرتے ہیں تو گھیان پرات کرنے کے پچھل ہمیں جیون کو سدھا دینا چاہئے جیسے بھنگی بھاول اور اُن کی بھائی نے تو ہندیوں کو پیوک ہونا چاہے بھگوان کسی ہوئے پھر آپ سندھل ہوئے اور آمیش مراج کے داران سے آپ دیکھتے ہوں کیسے ہندیوں کو پیوک ہونا چاہے بھگوان کسی ہوئے تو یہاں پرابو جی تاعت میں میں کہہ رہے ہیں کہ انہیوں کو آپ کے ایک ہی پرکار سے سنتوش کر سکتے ہیں انہوں کو پھیل کرو مانگا کی ضرورت نہیں ہے شریف محمد محمد حمد کی نوویس گھن میں آپ سبھائی منی کی قطعہ پڑھ دیو سبھائی منی بڑے اوچھے گھڑی کے یوگی تھے اور وہ چندن کر رہے تھے جیسے سمیرین ہوتی ہیں، سمیرین پانی کے نیچے چلتی ہے۔ تو کئی یوگی ہیں جو بھی پانی کے نیچے رہ کر چندن کر سکتے ہیں۔ تو سبھائی منی چندن کر رہے تھے، بھگواں کر رہے تھے۔ تو ہم کہاں تھے، ہم نے دیکھی ہے چندن کر رہے تھے اور ہم نے دیکھا دو مچھلیاں بھوں گلاس کر رہی ہیں تو اس گھڑنا کو دیکھ کر وہ بچلت ہو گئی سبھائی منی سوچنے لگے ہاں اس کائیہ میں آنند ہے بھوں گلاس ہی تیاری اور انہوں نے اپنا چندن سمالی چھوڑ کر راہ نے نے کہا سبانی مونی نے کہا لمبے ناکھوں لمبے بال جنگلی جیتے تھے شرمت کی کیونکہ آنکھیں وہ پانی کے نیچے بیٹھ کر چندھن کر رہے تھے تو جب نکلے وہ گھنگیا شریر تک وہ جنگلی جیتے تھے اور سبانی مونی نے کہا میں چاہتا ہوں کی آپ کی بیٹی سے میرا ویباہ ہو راجہ نے دیکھا جنگلی جیسا شریف بچ سورت لمے ناکن اور لمے باغ جنگلی جیسے تو راجہ نے بری راجہ نے ایک طریقے سے کہا میں تو ان کو جبردستی نہیں کہہ سکتا تم سے ویباہ کریں وہ نہیں پہنچا. پچاس مہینے تھی. سب نے دیکھا. وہ کہا، اے! سب نے دروازہ بند کر دیا. اس کو اندر بھی آدھے دیتی. ایدھا بدصورت تھا. تو سبارے مجھے نے کیا کہا؟ وہ تھے یوگی. وہ جو اصلی یوگی ہیں ان کے بعد. پہلی گہری شکتی رہتی ہے. وہ تھے یوگی. سب نے مجھے ٹکڑا دیا کیونکہ وہ سوچتے ہیں میں بڑھ سورت ہوں۔ میں ان کو اپنی یوگی شکتی کا روپ دکھاتا ہوں۔ وہ یوگی شکتی کے دوارے کیا بن گئے؟ بہت بڑھ سورت ہوئے ہیں۔ بہت بڑھ سورت اور انہوں نے محل بھی پیدا کر دیا ہے۔ بہنوں میں لڑائی ہو گئی ہر بہن نے کہا میں نے اسے پہلے چھنا تھا یہ میرا پتی بنے گا اسی میں نے کہا نہیں میں نے پہلے چھنا تھا تو بہنوں میں لڑائی ہو گئی اور پہلے بھائی مجھے کہا یہ تو اچھا نہیں ہے بہنوں میں لڑائی ہو گئی وہ نے پچاس بہنوں سے شادی کر لی اور ہر بہن سے صحبت پھر سبانی مونی نے کیا کہا کہ میں کتنا مولک ہوں اُس گھڑنا کا سوال کرنے سے میری بھکتی بھی نشت ہو گئی اور میں انہی سبت کی کاریاں میں جھڑ گیا پھر سبانی مونی نے کہا اب مجھے اِس صدی سے چھڑکارہ پراب کرنا چاہے پھر سبانی مونی نے کیا کیا جا کر پھر سے چندن شرک کر دیا اور اُس کی پادی نے بھگوت میں اس بیشے پر انہیں کتائیں پڑھ رہے ہوں جیسے مہرانیہ یادی کی بھی کتائیں ہیں تو ان کی دوارہ ہمیں کیا سکشہ مل رہی ہے کہ جاہے آپ کتنے بھی پریاس کر دو آپ کبھی بھی اندھیوں کی دوارہ سنتوشدہ پراب نہیں کریں یہ سمجھنا ہیں سب سے مشکل ہے ہم آج کی سماج میں ہم سب کیا سوچتے ہیں یہ اصلی آنان پرابتہ ہوگیا کیسے ہندو سے بڑی دوران اور وہاں پریاس رہتا ہے صبح سے رات تک یہاں بہتے کاریوں میں جڑنے کے لئے یہ ہے اگیانتہ کا پروبا اگیانتہ میں اکثر ہم جنب لیتے ہیں اگیانتہ میں رہتے ہیں اگیانتہ میں اور وہاں جیون سے معاف بھی کرتے ہیں کیسے پھر جو بھاگے شریف بھگتی ہے اس سے کیا ملتا ہے؟ بھگتیوں بھی رمند پرمیتے کنوں بھگوانوں جی گروہ کرشن کے پر بھاگتی لوگوں بھی لیتے ہیں تو یہ بڑا مہتر پونس سلوک ہے کیونکہ ہم سب کی اصلی شتر کیا ہے؟ یہ بوتک آکشن اور یہ بوتک آکشن کی کارن ہم جڑے رہتے ہیں نددی کارے میں تیسری ادہائے میں گیتہ کے بھگوان نے پوچھا ارجون نے پوچھا کیا کہ جانتے ہیں کہ ہم کام کیسے کرتے ہیں اور بہبان نے کیا کہا کہ ہم ایسے کرو دیتے ہیں کہ کام آسنے کے پیچھا انہیں دیتے گی اشاک کے کارنے پھر بہبان کہتے ہیں کہ یہ آپ کا شتروہ ہے اس کا جماعت کا سانگ آپ کسی اوگرمادی کو ڈھونڈنے کو ہو گئی ہے گھنٹ جہوال میں پہنچ گیا ہے پھر آپ پوچھو گئے گھنٹ جہوال کے کونسی علاقے میں ہے نوٹ ساؤڈیس ہوئے ہے اس کو پکڑنے گئے بھگوان نے گیتہ میں پہلے سے یہ ثابت کیا کہ مانا ہاتھی یہ شتل کون ہے وہ ایک کام آسنا پھر بھگوان کہتے ہیں کہ یہ شتل کا نماز کا ستھاں کیا ہے کہاں ہے مَن مُدِعِن لِمَن يَعْمَقُ بِشَتْرُ نِمَا تَخْزَنَا ۚ ۚ ۚ ۚ ۚ ۚ ۚ ۚ ۚ ۚ ۚ ۚ ۚ اس لئے بھگوان کے سیوں ہمیں جوڑنے کے لئے. تو یہ سندھیر آپ ہمیں شروع سے آن تک پراب کرتے ہو. کیوں؟ کیونکہ یہ ہمارا اصلی شتل ہے. اور بھگوان ہمیں یاں دے رہے ہیں کیا؟ کیسے؟ کہ شتل کا اس کے بار کرنا جائے. ہمیں شتل کا وشمل نہ رہے اور کیسے یہ سمبھب ہے ہے سمبھب بھاکتیوں کے دوران تو بہت ایک سماج میں دھن اور اینڈیا دیپٹی کے لئے ہم کچھ بھی کر لیں گے تو جیسے پرابو جی کہہ رہے ہیں دھن اور سیوں کی سمجھ سے آپ سنتوشتہ پرابنے کر سکے تو یہ بودھی مانو یکتی ہے وہ کیا کیا کرتا ہے وہ یہ چاہتا ہے کہ انیوں کا اپیوک کیا جائے اس لیے بھگوانگی سیوہ بے اور اگر ہم انیوں کا اپیوک کریں گے بھگوانگی سیوہ بے پھر آپ اپنے آپ کو سندھل سمجھ سکتے ہوئے اور نہیں تو چاہے کتنا بھی پیار کرو کتنا بھی دربارات کرو آج وشکو میں دھنی لوگوں کی کمی ہے جو دھنی لوگ ہیں وہ جاڑا دھنی بن رہے ہیں اور جو گریب لوگ ہیں جاڑا گریب ہوتے رہے ہیں نہیں کہ نہیں یہ ہے کلیوگا کا ہر سیمپل کہ امیر ہیں وہ اور امیر بننے جا رہے ہیں تو مان لو آپ بن گئے اس سب سے دھنی بھی ہوتے ہیں کیا اس دھنی پرابتے سے آپ سنتوش رہ ہو گئے کئی विदेशी विदेश जो की आर्थिक दुदिश्री से बाहरा दुदिश्री के आगे हैं पाँगी प्रजा भी किदनी मारा आत्मा आत्या करती हैं आज अप क्या देखे हो सूसाइड रेट्स अर गोईंग अप है किरें सूसाइड के एलावा ये डिप्रेशर चिन् तो यहाँ आप देख रहे हो आप बड़े सपर्शुरुप से कह रहे हैं कि कृष्णा भक्ती के बिना कोई व्यक्ति भी संतुष्या नहीं प्राब कर सकेगा कृष्णा भक्ती के बिना तो हमें क्या करना है कृष्णा भक्ती में जुड़ने का क्याज करना चाहें हमें हमें य کتنا بھی دھن پراؤت ہو جائے یہاں آپ کے پہلے ہم نے یعنی گریش بھوکا ہوتا ہے یعنی گریش بھوکا کو ہر پرکار کے سبیدار دی دھن اور عورتوں کی سنگت میں رہتے تھے سب پرکار کے سبیدار آپ اس کی کلبلا بھی کر سکتے ہیں جب بھی آپ نے کیا دیکھا کہ وہ سندوش نہیں تھے یعنی گریش بھوکا उन्हें मना लागे उन्हें इन्या दिप्ली की बहुत सुभीदा प्रावद होगी। तो अगर हमें असली खुशीच चाहिए, तो क्या है उपाय? वो है कृष्णा भक्ती में जुणना। कृष्णा भक्ती में जुणना क्या मतलब क्या है? कि आप इन ग्यान का लाव उठाओ ایک یونیون میں بڑھنے کے پچھاں وہ بھاگشالی بھکتی ہے جسے بھکتی کا بھیج ملتا ہے. دوسرے شفتوں پہ یہ گ्याण, یہ بھاگشتی ہوگا, سب سے مہتم ان سے ہوا ہے. یہ گ्याण کیول ہتھن بھاگشالی بھکتی کو ملتا ہے. آپ سب گھنٹوں کو باٹھتے ہو. یہ گھنٹوں میں کیا سندیش ہے? وہی سندیش جو وہی شلوک میں دیا جا رہا ہے. और इसतम� کہ جب تک آپ بہمان کی سیحہ میں نہیں جڑو گے آپ کبھی بھی اچھی سندوشتہ نہیں پراب کر سکو گے۔ اگر آپ بہمان کی سیحہ میں جڑے ہو تو ہر ستھی میں سندوشتہ ہو گے۔ بہت اکثر مثال دے دیتے ہو سومیوں کا کہ جو گو سومی تھے اُن کے پاس ہر پرکار کی سفیدہ تھی پہلے۔ پر اُنہوں نے وہ سفیدہ کو تیاغ دی۔ जैसे रुपा कुस्वामी और सनातन पूरे सब उस उस सबे आचल 500 साथ पूर्वा विश्व में सबसे धनी राजधानी थी नवां पुसिंचार की वो जो बंगाल का इलाका है इदे वो दे रिचेस पार अब इंडिया था फिर धनी था और वहाँ रुपा सनातन से नौकरी कर � اُنہوں نے کی روچی کیا تھی؟ بھاگتی یوگ میں جھوٹنے کے لئے مہا پبھوگی سیوا میں جھوٹنے کے لئے تو مہا پبھوگی کا فرماندھر پر ملے ہیں ہنیںک یولیوں میں کچھ جھوٹنے کی پہچانے چھوڑا سی راگی یولیوں میں جھوٹنے اور جو بھاگت شریف بیٹھتی ہے ہنیںک جھوٹنوں کے بعد اُس سے یہ گیال میں تھا کہ بھاگتی یوگ ہے اصلی کاریاں تو کیونکہ یہ घ्यान को प्राप्त करने से काम चलेगा ये वीज़ प्राप्त हुआ है इसका मतलब है आपको ये घ्यान प्राप्त हुआ है कि भकति योग जीवन का लक्षन होना चाहें भकति योग दूआ आप अपने अशुल हिर्दे को अशुल बलाते हो तो ये घ्यान केवल प्रा� کیسے ہوگی گا؟ کیسے ہوگی؟ श्रेवनम् कितनम् कितनम् श्रेवनम् कितनम् बहगों तो में आप पढ़ते हो राज में आज के पिता ने उनकी वर्ण में क्रोथ था पिता के प्रती वो हर संदर्मर्का ने भोत प्रयास किया पिर राज को उनकी तरह उनकी संदेश के प्रती � तो एक दिन फिलाद जाकर अपने पिदा को प्रणाम किया और पिदा दे बेटे को अपने पेरा में बिठाया आज तुमने पाचला में क्या सीखा जो सबसे महत्वन संदेश है और फिलाद ने क्या कहा ना हुआ पकदी शर्मन कितने विश्वस में न पाते थे न आज जब � یہ نوزہ بھکتی کا کیاں سب سے پہلے پرات ہوا تھا پلاد مہاج کو وہ گھر میں تھے اور جیسے ہی پیدا نے نوزہ بھکتی کا پوچھارن سنا بیٹے کو اپنی گھول سے ہی نیچے پہ لیا تو شو نم کے دنم تو یہ بھکتی کا بیج اگے گا کیسے اگر آپ شو نم کے دنم کرو گے آپ نے دیکھا ہو گا بار بار آپ ایسے بشیر کے بارے میں پڑھتے ہوں شمنوں کی تنہوں کے بارے میں کیونکہ یہ سب سے مہتبون کاریر ہے چاہے آپ رمچاری ہو یا سنیاسی اگر آپ شمنوں کی تنہوں میں روچی نہیں رہو گے کاریر نہیں کرو گے تو آپ موضیق سماج سے موضیق آکڑن سے نکلنا کٹن رہے گا تو یہ بھکتی کا بیج ہوگے گا اگر آپ کیا کرو گے केर्टन होता है सबा से राथ केर्टन होता है जब प्रापा जी बंबे में आए थे हाई क्रिशनलेंड वहाँ मंदल मनान की चाहते हैं योंने विरोत किया और जो फ़डूसी थे वो कहते थे यो केर्टन की आवाज आती है विकार की बात है وہ کہہ رہے ہیں. This is nuisance. Registration College میں کرتن کیوں پڑھتے ہو؟ تو کرتن کہاں کرے? یہاں تھا لوگ رہتے ہیں. کرتن کیوں پڑھتے ہیں؟ ہمارا بمیں کا مندر بن رہا تھا. तो प्रावपाद उस ंमें हमने पांच्वे मंजल के पांचवे में थे। और नीचे काई कर रहा हैं, काम कर रहे हैं। This is Kirtan. वो जो कहा एक लोग पत्तर तोड़ रहे थे, तो भगतोंने कहा ये तोड़ने से आपकी नीन हैं, हम डिस्टर्ब तो नहीं हो रहे हैं। और परभागादाशन नहीं, ये तो किर्तन हैं, क्योंकि वो तो पत्तर तोड़ रहे थे कि इसलिए बगादाशन का मंद मियं भवान का मंदर मंदर हैं। तो श्रावनम और केथनम ये सबसे महत्बुन हैं। और आगे उन्होंने कहा कि आपको क्या करने चाहें? साधर संग में जाने चाहें। उन्होंने कहा कि जैसे की आप अपने मंदर की सुरक्षा के लिए चारे तरह दिवार बना देते بھگتوں کی سیوہ سنگ میں رکھنے چاہتے ہیں بھگتوں کی سنگ میں رہو گے تو کیا لاب ہوگا؟ زیادہ سرلتہ سے بھگتی کا پان ہو سکے گا بھگتوں کی سنگ میں رہو یہ اس ویڈیو کی جرچہ भगतों की संगत में रहोगे तो क्या पिर्णा का नाम सुनने कोई तो भगतों की संगत में रहना और इसका लाव उठाना भगतों की संगत में रहना और लाव उठाना तो बाप होने का किसी में स्ट्रोंग फेंसिंग पड़ी तग्री दिवार बनाने चाहें
वो
अगर हम इस सिर्चा का लाव उठाएं, तो हम भक्ति की मार्ग में आँगे बढ़ सकें। तो हमने इंदियों को क्या करना हैं, इंदियों को प्योक करना हैं भगवाण के सेवारें। ये हरी नाम की माद्यम से क्या होता है। आप हर जगह देखते हो, शवनं कितनं का वडन یہ دیکھ سکتے ہو کہ ہانی نام کے بچانن سے کیا لہو ہوا آپ کو کیا لہو ہوتا ہے حیدر کی جو محل ہے وہ دور ہوتی ہے کھام کھلو لو محمد یہ چھے پگا کے اناتت ہیں اناتت کا عرض ہے جس کی آمشکت نہیں ہو یہ جو اناتت ہیں ان کی آمشکت کیونکہ جو انارتھر ہے ان سے ہمیں بچنا چاہے یہ نہیں سوچنا چاہے اس کے بغیر ہم رہ نہیں سکتے تو انارتھر کا پت کیسے ہوتا ہے بجنگ کی سکتے دورہ؟ ایسے بھی خود سبھی کہتے ہیں ادھر شردہ تھا تس آدم پہلے آپ کے مند میں شردہ ہونی چاہے شردہ ہونی چاہے کیا کہ ہم نے مکہمہ کے شردہ کا تھوڑا ہے اگر یہ شردہ ہو تو پھر کیا ہوتا ہے بھگوان آپ کو کسی نہ کسی مادہ سے سادھو کی سنگھر میں لے جاتے ہیں یہ سادھو کی سنگھر پرات ہوتی ہے دو روپوں سے ایک ہے بھگ سادھو اور دوسرا ہے کرند سادھو جیسے کہ کرندوں کے ویڈیوں پر اتنا بلد دیا جاتا ہے کیوں کیونکہ ان کرندوں میں ہے بھگوان کی مانی بھگوان کی مانی سننے سے اُن سے آپ بچ سکو گئے ہیں تو اس لئے This changing of the holy name is our most important business ہمیں یہ اسکو سب سے زیادہ تیار دینا چاہئے جو پاکستان بھی کہتے ہیں ہم دے شامل ہیں یہ جو بھاگوار کی نام ہیں یہ چینی جیسے میٹے ہیں بھاگوار کی جلیلہ ہیں وہ بھی میٹی ہیں अब विद्या की विमारी का अरथ है हमें पॉतिक आकरशन है हम सोचते हैं ये पॉतिक आकरशन की मिला जीना असंभव है और कठिन है तो रूप भगतोरे कहते हैं इसको इसे कैसे बचोगे बज्जिलर क्रिया बज्जिलर क्रिया का अरथ है वहीदी भकती का पालन वहीदी تو پھر भक्ति योग में सभूत अपना आपका स्वभूत है. तो भक्ति योग का पान बड़ा महत्सबून है. और फिर अनाधनिवरदी. आप सबका भ्यास होगा. जब आप जब करते हों बड़े धियान से जिसका पंदन में आकर या घर में और आप पढ़ते हों سوس ہو گئے تو کیا دیکھتے ہو؟ کیا دیکھتے ہو؟ مایہ کھب سورت بن جاتی ہے اور بھکتی بھڑ سورت اور جب آپ دھیان سے جہاں پہلی بھکتی کا پالن کر رہے ہو تو پھر کیا دیکھتے ہو؟ مایہ بن جاتی ہے بھڑ سورت اور بھکتی کھب سورت तऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔ� چیت و درپن مارج رہا ہوں مارے مندر میں ہم روج یہ سکھان سکھان کے شلوکوں کا اوچارن کرنے کے مہاں پر ہم نے کیا کہا چیت و درپن مارج رہا ہوں جیسے آئینے میں دھول ہے اب وہ دھول کو کیسے نکالتے ہوں ساپ کھپڑے سے اسی فکر یہ جو کام کو لوگ محمد الصحیح کا اتارن
ہے
پاکتی سے ہم جدہ ہو جاتے ہیں اور اگر پاکتیوں میں سنگ میں رہ کر پاکتیوں کا پانن کرو پھر شہر آدھا سے ہم ملک ہو سکتے ہیں تو اِس آج کے سلوک میں آپ پڑھ رہے ہو کہ ہیرا لنگا شبکوں ہر پرکار کی سویدہ تھی کسی چیز کی کمی نہیں تھی اور جب ہی وہ سندوشت ہے He was not happy جب بھی ان کے مند میں سدا چندن کا بھاو تھا اور خوش نہیں رہے اور اگر ہم اصلی خوشی چاہتے ہیں تو کیا ہے اپائے؟ کیا ہے اپائے؟ ہندیوں کو کھو کرنا ہماری کسی روپے نہیں ہے جب ہم بھکتوں کے سنگ میں رہتے ہیں تو نیموں کا پالن زیادہ سرل ہو جاتا ہے اور جب ہم بھگتوں کی سنگھ سے شدہ ہوتے ہیں تو جادہ کھٹن نہیں ہوتا ہے اس لیے وہاں بھاہ ہونا چاہے کیا تو بھگتوں کی سنگھ میں رہے ہیں اور یہاں ہینا ہمیں روچی بنانے کے لئے چھے دن ماں پھر بنایاں کیا کہا جاتا ہے جناد بھی سننی چاہیے نا روچی سنی چاہیے ہماری نماز نہ دینا ہمیشہ لوگ کو ہزار بار سنتے ہیں روچی سنتے ہیں روح مندل میں بھی اس کا اچھانا ہوتا ہے اس کا پالن کرنا ہم بھول جاتے ہیں تو ہمیں اس کا لاب اٹھا سکتے ہیں اور یہاں نہ اٹھا پورا لاب اٹھا سکتے ہیں آپ اگر قیدی بھکتی کا پالن کرو یہ جو نیم ہیں جن کے پیش میں آپ پڑھتے ہو یہ سب ہے ہماری بلائی کے لئے کئی بار لوگ کہتے ہیں ہمارے اسکار میں بہت سے نیم ہیں तुम्हारे गुरुरी देखो इनने अध्यालुम हैं पुरी चूट्डी हुई है तो इसका क्या होता है हमें पूरा विश्वाल कही लोग आपको कहते हुँगे तुम्हारे गुरुरी दिक्षा ले रही है इनने कड़क नियम हैं एक तैसलो, दूसरा तैसलो, द ایسے ہو جاتی ہے میں پتہ نہیں بھکتی کی مرحلے پر کیا پرابت ہوتا ہے سُنی آنا نہیں تو اصلی کوشش کر کے what is the solution? take to bhakti ہوگا اور یہ جو سندیش ہے بھاپ ربوں کی مبیشوری کا نہیں کیا تھی پتی کی ہر کوڑ میں یہ آئین ہم ہون سکتا ہے آج آپ دیکھ رہے ہو all over the world People are chanting the Hare Krishna Mantra. Why? This is giving them satisfaction. Papa ji ek same time Dallas mein lecture dekh rahe the. Papa ji dekha, The Christians came to India and converted people by economic benefit. Christians log jaise aap jaati ho, daan dete hain, apne marshal mein, mohut mein padhate bhi hain. Malayang bhagat hain Kanpur mein jo, کریشن کالچ بھے پروفیسر ہے وہ مجھے کہہ رہا تھا کریشن کو نوکری بھی جلدی میں جاتی ہے یہاں کم طالبوں تو بھی جاتی ہیں انہوں نے لوگوں کی دھرم کو بدلا پیسے کے لالچ پر ہاسپیٹل کھول دیا سکول کھول دیا انہوں نے نوکری دے دی وغیرہ تو
آپ
کو ہر پرکار کے سویزہ پیسے پرابت ہوتی ہے تو پاپا نے کہا کریشتین لوگ آئے تھے انہوں نے پیسے کے بلپر لوگوں کے دھرم کو بتا مسلمان لوگ جو تھے انہوں نے دھرم کیسے بتا تدوار کے تدواراں بدلو دھرم نہیں تو پور مسلمانوں کا راج یہ تھا پاپا نے کہا میں تو ایک گڑھا بیقتی ہوں سال ہی سبھے کے ساتھ آپ لوگ اپنے دیش میں آئے ہوں پھر آپ لوگ جب ہی بھی آخرشت ہو رہے ہوں کیوں؟ کیونکہ کریشنا ہے ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے پاس ہمارے ہمارے پاس ہمارے بھگتی کے پرتیحہ کشید ہوئے جب انہوں نے اینام شروع کیا باستاد سے کیا لے گا کہ یہ دوسرا اینام ایسے بہت اٹریکٹ ہے ہم اینام کیوں لےتے ہیں کیونکہ اس کے دوارہ you can find real satisfaction. تو کیا لے گا شیپو کہ ویژے میں یہ آگیا ہے چاہے آپ کتنی بھی سبیدہ پرات کر لو آپ بہت کاریوں کے دوارہ کبھی بھی سنتوش نہیں ہو سکو گے یہ گیاں کو سننا بھی آفشک ہے نہیں تو ہم بھول جاتے ہیں اس لیے چیتن چیتن چیتن چیتن چیتن چیتن چیتن چیتن چیتن چیتن چیتن چیتن چیتن چیتن چیتن چیتن چیتن چیتن چیتن چیتن چیتن چیتن چیتن چیتن چی آپ چاہو تو اتنا سنے کاٹھو جتنا خرند باٹنے میں لگتا ہے کہ آپ سوچلائز کرلو بات کرتے جاؤ پھر آپ کا کیا پیاس ہے چاہے ملیمم اتنا ہی بات کریں کہ آپ کو سندیج دینے کے لئے تو اس سلوک میں یہ کہا جا رہا ہے کہ آپ جب تک بقتی عقل میں نہیں چڑھو گے جب تک اصلی سندوشتہ پراب نہیں ہوگی اور یہاں کہا جا رہا ہے اگر میں اتھا تو برہمان جگہ آتا ہے اب یہ بڑھوشتہ جیون پرابت ہوا ہے اس کا سلوک کرو تو اس سلوک کا سندش بڑا مہتبون ہے ہمیں اس کو پرکیدہ سننا چاہیے پڑھنا چاہے اور ہم انہیں حضرتی پر چڑھیں گے کیا پہلے رہم ہوگا وہی سب human life منوشے جن میں پھایا رادہ کشن نہیں جے جانے چونے پیشا منوشے جیونے پھر آتھ کر لیا میں نے رادہ کشن کا وجہ رہ گیا میں جانتا ہوں کہ کیا کر رہا ہوں حیر کا تو آج لوگ جہر پی رہے ہیں ہم جا کر اُنہیں کہتے ہیں تیسٹیک امریت وہ کیا کہتے ہیں نہیں میں جہر پھینے دوں ہاں کہ جاتا ہے پھر کئی بھاگشالی بگتی ہے پھر کہتے ہیں ہاں تینکیو آپ اصلی سندھے جے رہے ہو ایسی جگہ ہوں یہ دینندہ اور ہریدہ شاکر ہر گھر جا رہے تھے کئیوں نے تو ان کا سواقت کیا آ گئے سندھ مہاتمہ ہمارے گھر کو پبیتر بزا دے کے لئے پتہ ہی یہ کیا ہے آپ کا اپدیش प्रिश्णा उदे, कहते हैं सुर्फ आम इसका उचारण करेंगे। कहीं जो उनका विरोड किया, कहीं जो उनको घाली दी, कहीं जो उनको कहा कि तुम यासूस हो, आयो देख रहे हैं गहर में क्या आया, फिर आओ के छोरी करने। तो उसी परकार जब आप प्रचार में � سباقت ہے کیا ہے سمدیج؟ اور کئی آپ کا بھی روز کریں گے. پھر جب ہی ہمیں اس سکھ شرکت کا ناب اٹھا گئے تو بھکتوں کی سنگ میں رہو گے پھر نمردہ کا بھاہ و لکھ کل کرو گے پھر آپ بھکتی یوگ میں آگے پڑھ سکو گے. تو اِس کھلوک میں یہ سمدیج پرابت ہو رہا ہے that only by the meaning of bhakti yoga can you what? satisfy your senses. तो चाहे कितना भी दन कमा लो आप प्याचेन रहोगे। आजकर की जो मिलेनर्स हैं किसी को भी आप मिलो आप देखो के वो अश्चानत हैं चिन्ता है कोई पकड़ लेगा कोई ये ये साना चाहेगा बाज़े हुए बज़ाशी नन्दन नन्दनन अभी चड़ना रभ پچھنا چاہتے تو کیا یہ حفاظ ہے؟ کس کی شرن لوں؟ دوسری شبز میں بھگوان کی شرن لوں بھگوان کی شرن لینے کا ارض کیا ہے؟ ان کی سکھشا کا پادن کریں ان کی سکھشا کا جب ہم پادن کریں جب ہم کہہ سکتے ہیں ہم ان کی شرن نشانہ کا کھویں گے اگر ہم نام کیلئے ان کی تصویر رکھیں اور کہیں ہم شنہ گت ہیں وہ گت ہے تو اس روک میں کھاپا جی اتار پڑے ہوئے ہیں اس پر شب سے کہہ رہے ہیں کیا کرو بھاگتی ہو افسوس کی بات یہ ہے کہ کئی بار ہم سنتے ہیں روز سنتے ہیں یہ سندگی جب ہی ہم بجلت ہو جاتے ہیں کیا کارن ہے بجلت کیسے ہوتے ہیں آپ ایشوئیت ہوتے ہو کیونکہ آپ بھکتیوں کی نیمہ کا پالن نہیں کرو۔ اگر آپ اچھی ساہناں رکھ رہے ہو پھر دیدھ ہو کر آپ مایاں کو ہرا سکتے ہو۔ پھر میاں کا بیوت کرنا کٹین ہے پرسات میں کٹین ہے پھر جو میری شرن لیتا ہے وہ مایہ کے پھر وجہ پراب کرنا چاہے تو ہمیں بھکتیوں کی سکھ شک پالن کرنا چاہے اگر ہم جیون کے لکھش کو پراب کرنا چاہے جو بھکتیوں کے پر جڑیں گے انہن بودی کا نام کا ایک تو لاب تھا اصلی آدھن پرابت ہوگا جو کہ کیول بڑھتے جائے گا spiritual happiness is always in you یہ سندھیش دیا جا رہا ہے ہم سب کی بھلائی کے لئے ہمیں شنوں کرنا چاہے کہ دن ہم شنوں کے دن ہم کریں گے اس سندھیش کے دوارہ ہم تیرد ہو کر بھکتی کے مانگ میں جڑ سکتے ہیں अच्छा, कुछ बहुत कुछ बहुत कुछ बहुत कुछ बहुत कुछ बहुत कुछ कुछ बहुत
कुछ बहुत परलात परलात वरास को बचाने के लिए वहाँ स्वग आये। उसना आपने पंसीर बुंदे कु का उधारण दिया, वहाँ मुझे रहने का कोई आसी बात से अउसर हो जा था। तो अपने देखा वहाँ लोग सराख के लॉटले को फेकते थे। तो अभी बगला देश में जो हिं� हम इतने सुख नहीं है कि हम जो बचाने आएंगे तो आप क्या संदेश थें गुरु माराज ऐसे लोगों के लिए जो कि बहुत अधिक कश्ट पाते हैं भक्ति माने के बाद में हैं।
बाग जो हैं कश्टों से डड़ता नहीं है बाग जो है नरहेंगी सेवा में सेवा करना च جو محسان بھکت ہیں وہ کھٹیناہی میں بھی سیوہ کر سکتا ہے جیسے کی اس حصہ کی سامنا کے لیے کئی بھکت دنیا کی آدھا لکھوڑے میں مملکت کے سامنا کرنا پڑا جہاں پرابہ جی نے ریشہ میں یہ کارکرم آرام کیا تو مقدم کی طور پر پڑچار پڑا پھر کئی بھکتوں کو سرکار نے جھیل میں دا دا اور کہا باز کھانا شروع کرو ہم تمہیں چھوڑ دیں گے انہوں نے نہیں چھوڑا اور کئیوں کی پیتے بھی ہوئی تو بھگ جو ہے کھٹنائی سے لڑتا رہی ہے اور بھگوائن کے شرکت ہو کر کی سیوہ میں چھوڑ دا ہے کئی ساتھ دیں گے کئی بھی روز کریں گے ہمیں پرچار جا سہابدھاری سے کرنا چاہیے جب باقی صاحب کو جنہیں حساب داری دے کرنا چاہے گا. He is under pressure? Anymore?
Thank you, Maulana ji. Maulana ji, my question is this. کہ प्रहलाद माराज अपने माता के गर्भ में ही सीखे थे लेकिन हम लोग आज तक सीखने पहें तो तो फिर हम लोग क्या कर सकते हैं?
प्रहलाद माराज माता के गर्भ सीख करे थे हम लोग आज तक नहीं सीख
पहें तो क्या करना चाहिए? आपको प्रयास क
مہاجی کے چلو مہاجی کے چلو مہاجی کے چلو مہاجی کے چلو مہاجی کے چلو مہاجی کے چلو مہاجی کے چلو مہاجی چلو مہاجی کے چلو مہاجی کے چلو مہاجی کے چلو مہاجی کے چلو مہاجی کے چلو مہاجی کے چلو مہاجی کے چلو مہاجی کے چلو مہاجی کے چلو مہاجی کے چلو
مہاجی کے چلو بھاگوان دیکھتے ہیں کتنی سوفیدہ ہے اور کتنا آپ کر رہے ہوں بھاگوان نے دین دھیال میں پتہ بھی ارپن کرو گے تو میں سرکار کروں گا بھاگوان یہ نہیں کہتے گا کہ جرور یہ سب ارپن کرنا چاہے پر اگر آپ شالکہ کی پویا کرنا چاہتے ہو تو جو منیومم سٹینر ہے وہ جرور آپ کو کرنا چاہے आपको क्लास के वश्चे में एक विश्चा है? पूछे
पूछे जैसे के लिए पूछे पूछे पूछे पूछे पूछे पूछे पूछे پڑھتے ہیں पूछे पूछे کہ ये सब पूछे प्रसादा पूछे पूछे पूछे पूछे था भवत प्रसादो महराजी एक प्रशन है कि हमारे भुत्ति में ऐसे कौन से एफर्ट है जो आपको प्रसन कर सकती हूँ महराजी वो
इस थाला हाइना में रुजी बढ़ा हो हाइना में गजाव करो तो क्लास में सनते हो इसका पारण करो जो � हर श्लोक के तात्परे में इस विशे के चर्षा की जाती है। जैसे आज के श्लोक में, तात्परे में सपर्श प्रापर जो कह रहे हैं। जो किड़र भी हैपी बाई मुम्मेन और मानी बाई भक्तियों के लिए है। मुन संदेश तो बड़ा सिंप्पल है। चायाव कासे बा بھگوان کا چندھر کرنا اور آزا پہاڑ کے اوپر بھی بیٹھ جاؤ چندھر مشکل ہے کیونکہ بھوائی جانوار دے لائے اور کرتے ہیں پھر تھے تو یہ بڑے بڑے ینگیاں آپ کو بولا جائے روج اپنے گھر میں ینگیاں کرو آپ لوگیں مشکل سے گھر کا کھڑچا لگاتے ہیں اور شدھو شدھو کیا جاتی ہے रूची बड़े। वेरी सिंपल। कोई डिग्री की जुड़ग नहीं। इसी चीज़ी के आपशक्त नहीं। और। एक विश्ण गुरुमराज।
गुरुमराज आपने बताया सवरीर मनी के एक्जांपल से कि उन्होंने साथ लाथ पर प्रस्थेट दिया। फिर भी उनका मन � تو میرا پرشن ہے گل منت کی اندریوں کو تو ہم کئی بار بھگوان کی شہر میں لگاتے ہیں پوری طرح جو بھی ہمیں شکست دلتے ہیں لیکن پھر بھی منت کئی بار ہمارا بھگوان کی بھگوان میں نہیں لگا ہوتا ہے تو اس کا کیا آپ پیش آتے ہیں؟ پر
پریاز کر دے دو بھگو سمیں کہتے ہیں مصاد نشید ہرید We should be determined اور اگر ہم determination رہو گئے پھر سب ہوتا پراپت کی، بھاگویں گیتہ میں پراپت ایک بڑا سرال ادھارن دیتے ہیں کس کا؟ پکشی جس کے پچوں کو ساگر نے چھڑا دیا تھا۔ اس نے کہا پچوں کو لٹا دو لے تو میں سکھاؤں گا۔ ساگر ہسنے لگا۔ پھر جو وہ پکشی प्रिमृति जी में आये सेयोग के लिए But we must go on trying. Don't give up. प्रापादिश्य से Don't take no for an answer. ये काम नहीं हो सकता है। हर काम ये सब कोई भगवान्गी के पास है। अगर हम शर्दा से सेवा करेंगे
बता रहते हैं कि वैंखुंट में जय रद्वि जय उनका जो कि कोई गलत इंटेंशन नहीं था और हमारा भगवान का प्रसंद के लिए सेवा कर रहे थे और वो चार कमार का ब्रह्मपरदी थे उनको केवला कोई जूटी पुरा करने के लिए इस तरह क्या बताया तुर्वि
आपने क्या कहा?
कैजूल होने का वादा नेचर है और इंटन संदी का भी कुछ भरसा नहीं है मड़ा तमहरा कोई होप है भवत धंजाने के मुझे?
आप लोगों ने प्रापट के पत्स पढ़े होंगे प्रापट ने ने एक पत्स में कहा है अगर आप प्रापट के पत्स پراپڑنگ पढ ہی نہیں کہا میبی ہمارے سائنڈرشن کہتے ہیں میبی بھگوان کہتے ہیں سرواں سرواں پڑھتے ہیں جماں میکم شرن مچھا ہم تو ہم سرواں پاپِ مکم شرن مچھا بھگوان ہی نہیں کہتے ہیں میبی شاید وہ کہتے ہیں پکا تُو میرے شرن میں آگے تو تمہارا مداروں کا لڑو ماتے ہیں پھر یہ ہمارا چنچل من ہے جو کہتا ہے جس کی کارناں ہم بیشواس نہیں کرتے بھگوڑ کی والی میں آئے گے شلوک میں بھگوڑ جو کہہ رہے ہیں ہمیں ہندیوں کو داس بنانا ہے ہمیں ہندیوں کا داس نہیں بننا ہمیں سب ہمیں ہندیوں کا داس ہے ہمیں ہندیوں کے سوامی بننا ہے मैं भती हूँ। इसे आपका कवलकता है? बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत
बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत
سادھ سکھ میں رہو گے، روپا کو سوال میں کہتے ہیں، امتحان میں کہیں، چھے پرکار کے سب مند ہونے چاہے بکتوں کے ساتھ اور پہلا کیا ہے؟ نگاہ کھلنے پر، نگاہ کھلنے پر، نگاہ کھلنے پر، نگاہ کھلنے پر، نگاہ کھلنے پر،
نگاہ کھلنے پر، نگاہ کھلنے پر، نگاہ
کھلنے پر، نگاہ نگاہ کھلنے پر، نگاہ کھلنے پر، نگاہ کھلنے پر، نگاہ کھلنے اور پھر اگر آپ کو ابدیک دیا جائے اس پر پالن کرو اس کے لئے سادھ سکھ میں رہنا ضروری ہے سادھ سکھ کا ارد ہے آپ تین پرکار کے بھگتوں کو ملتے ہو آپ سے جو اتھم ہیں آپ کی برابر ہیں اور آپ سے کیا تیزہ کیا کم گیاں میں رکھتے ہیں تو جب اتھم بھگتوں اپنے ساتھ یہ کو پوچھو بھیل میں کیا کمی دیکھتی ہے تو میں کیا سدھار کر سکتا ہو جو اصلی مٹر ہیں وہ تو وہ ہی کہے گا جسے آپ سدھر سکتے ہو
वाले कुछ नहीं बाहुत प्रिडाम। जल्बु जी, एक तरफ भगवान कृषिने अपने गुरुं के मरे भी पुत्र गो वो यंग्रूं से वाफ़ट से ले गाया था। और 1971 का जो वर्ल्ड वार होने जा रहा था, शीर अपनी पास जी के जाएने पर, उन्होंने उसको भी � वर्वार्मति शिर्णी अगर उनकी मरे हुए पुर्टल को जब उनकी जो गुरुमात्री पुत्री रहते थे उन्हें कान ठूका और उसे यहाँ उसे वापस दे कराये थे. और 90-70 उनका जो तिर्त्रे विश्वत होने जा रहा था उसको भी शेयर की बात की लेने पर उन्हें � और दूसरी तरह जहव महावाल पर लुथ वा तो महने अपनी पिरिया कहाने सुगल करा पिरिया पर अर्चुन के कुछ अभिमन्यों को इतने करदुनात मिर्तू क्यों होने थी और पाँचाली के लिए इतने पिरिया को क्यों होने बचा रहा थी।
उनके
फैने क इनको सदाधन घटनाओं से कभेड नहीं करना चाहें और ब्राभा ने शहत देनी की साथा की किर्षना बगती हैं आपने वकाल पड़ा ब्राभा ने ही नहीं कहा कि یوٹ کا یہ نہیں world war چھوٹے war کا جگہ ہمیں رشیہ اور امریکہ کا ایک اور یوٹ شروع ہو رہا ہے بہت ایک سماج میں تو روج ہی یوٹ ہو رہا ہے اور ایک ہی اپائے ہیں
مدد جی میرا سوال یہ ہے کہ تیرڑا دھبی کا بھاگ جو ہے اپنے اندر لانے کے لیے ہم کن کن سیٹویشن میں پریکٹس کر سکتے ہیں؟ مطلب کونسی سیٹویشن ہوگی جس میں ہم تیرڑا دھبی
کھا سکتے ہیں؟ آپ ہر سیٹویشن میں پریکٹس کر سکتے ہیں جب آپ بہشنوں کے ساتھ ہو اگر آپ دفتر میں یا بزنس میں ہو تو وہاں الگ روپ ہے جب آپ بھکتوں کے ساتھ بیوار کرتے ہو تو ہمیں اِس کا پالن کرنا چاہے دوسروں کو عادت دو. We don't expect anything. اپنے آپ کو سب سے پتید سمجھو. جیسے کی آپ ایشنا و اچھاریوں کے پیشے میں پڑھتے ہوں. جیسے گوپال بھٹا گسومی چھے گسومیوں میں ایک گسومی ہے. تو کشینات کا بیراج چھے تینہ چھے ترمیدہ لکھنے سے پہلے وہ برج کے ہر پرسید سوامی کے پاس گئے آشباد لینے کے لئے کمال پٹھرکو سوامی نے منے آشباد دیا اور کہا میرا نام نہ دکھنا کافی تو ہم ہر ستھی میں اس کو پھیو کر سکتے ہیں اگر کوئی ہمیں عادر کے ساتھ کہے تمہارے میں یہ کمی ہے تو ہمیں اس کا لاب اٹھانا چاہے یہ نہیں ارشدویش کے قارن ہم اسی کو جا رہے ہیں
हरे कृष्णा गुरुमाराज।
आप एक वाला करें और इसे बचें। हरे कृष्णा गुरुमाराज।
हरे कृष्णा गुरुमाराज। हरे कृष्णा गुरुमाराज। हरे कृष्णा गुरुमाराज। हरे कृष्णा गुरुमाराज। हरे कृष्णा गुरुमाराज। ہر
ستھی میں آپ بھگوانوں کا سمنان کر رہے ہو وہ بھکتی ہے اور پھیانے کا جبوت ہوں بھگوانوں کی اچھا کو پورا کر رہے تھے بھگوانوں کی اچھا تھی بھگوانوں پرکھٹ ہونے والے تھے اور بھگوانوں کی اچھا تھی کہ ان کے ہی بھگت شتلوں کا بیوار کرے تو بھگوان جہاں نے کہا کہ ہم بھگوان کے سیوہ کر رہے تھے بھگوان نے کہا کہ میں چاہتا ہوں کہ کوئی خود کے ساتھ میرے ساتھ بحیوار کرے تو انہوں نے کہا یا تین جنب لے دو یا ساتھ انہوں نے کہا تین سے ہم جلد ہی پہنچ جائیں گے بھگوان کے ساتھ پھر ہم اُس کی تعداد نہیں کر سکے पूछे, पूछे पूछे जल्ली. है विष्णा! है विष्णा!
है विष्णा!
है विष्णा! है विष्णा! है विष्णा! है विष्णा!
है विष्णा!
है विष्णा! है विष्णा! है विष्णा! है विष्णा! है �
کیوں کہ मہराज आपे आथ बोले की कल का मौणी का जो लेक्शर होगा बहुत स्पेसल मुझे करेंगा था।
हाले कृष्टा, हाले कृष्टा।
कृष्टा, कृष्टा, हाले, हाले।
हाले रम, रम, रम।
More from PRASAD

Rare Pastimes & Timeless Lessons of Guru Mahārāja | Stories Every Disciple Should Hear

ISKCON Legends- pure devotees meet-HH Jayapataka Swami, HH Gopal Krishna Goswami, HH Radhanath Swami

Jagannātha Ratha-yātrā Through Śrīla Prabhupāda's Mercy | 29 April 2006 | Nairobi, Kenya

Lord Jagannātha's Appearance Pastime | 21.07.2019 | ISKCON Calgary | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

The Ācārya Teaches by His Own ExampleGuṇḍicā Mārjana by Guru Mahārāja #shorts

Guṇḍicā Mārjana – Lord Jagannātha's Pastime | 21.7.2019 | ISKCON Calgary |Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī

H.H. Gopāla Kṛṣṇa Gosvāmī Mahārāja - Exemplary Sādhana and Deity Worship # shorts

भगवान की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? | 11 Jan 2014 | Punjabi Bagh | Srila Gopal Krishna Goswami

Material Education vs Spiritual Education | Srila Gopal Krishna Goswami #shorts

