भगवान को हम कैसे देख सकते हैं ? | SB 7.6.24 | 23 Jan 2018 | Bhubaneswar | Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Goswāmī

Śrīla Gopāla Kṛṣṇa Goswāmī explains how sincere surrender and disciplined bhakti practices like chanting, scripture study, and saintly company allow a devotee to see God. Divine grace flows in proportion to your surrender, and stories of Prabhupada and Haridas Thakur show how guru-guided service spreads Krishna consciousness.
Chapters
ओम नमो भगते वासुदेवा। ओम नमो भगते वासुदेवा होम नो बरेवा सुदेवा होमनोभवदेवासुदवाह smasासरवेशुरेशु भूतेशुदेशोदयम saansaaaasusasa am kruta soda bawa masur n m क्रुत सो मासूम ओलमूकियाेतो या ना हो माताजी
से हे shbdrdrsmaसmाअत दर शू हुदतूजवोरदयागयाउलद दिखलाओ सौदमतीहागमहप्रवति आ सूरम असुरों का जो मित्रों तथा शद्दुओंकोपुसक करते हैं, उनत्यात्याकरयया इससे दुष्टि होता है। परम भगवान, जो इंद्रियों की अनुभूति के बने अनुभा तथा असेजरेअकसरों से पं मेरे प्यारे तरुण मित्रों, तुम सब ऐसा करो कि वे परम भगवान जो भौतिक ज्ञान की साधना से पायेंगे, वे तुम पर प्रसन्न हो। तुम अपनी आंसुरीसुभावप्यार 2 और शत्रुता या द रहित होकर कर। 2 सभी जीवों में भक्ति लगाकर उन पर दया प्रदर्शित करो और इस प्रकार
उनके विदेशी बने अनुवाद राय
दे। हे असुरों। हे असुरों से। उस पर मेरे प्यारे तरो मित्रों। तुम सब ऐसा करोगी। ऐसा मे परम भगवान जो बहुत ज्ञान की ना से भरे दिन हुए, तुम पर प्रसन्न हो, तुम अपनी बांसूरी शोभा, त्याग 2 और शत्रुता या 2 धि होकर गर्म करो। सभी लीगों में पत्ती लगाकर उस पर दया प्रदर्शित करो और इस प्रकार उनके विदेशी मन भगवत। वेता अठरा बचपन में भगवान कहते हैं भक्तियां मा। अवितानाजीयाहवा जास में मनुष्य केवल भक्ति से परवेश्वर को यथा रूप में समझ सकता है। परलादमाराजने अंत तक अपने अशुभ सपा की शिक्षा दी कि वे प्रत्येक व्यक्ति को कृष्ण भावना विज्ञान का उद्देश देक। भक्ति की विधि स्वीकार करें। उपदेश देना प्रचार करना भगवान की सर्वोतम सेवा है। जो व्यक्ति कृष्ण भावना के प्रकार प्यारे से इस सेवा में लग जाता है, उससे भगवान तुरंत ही अतीव प्रसन्न होते है। उसकी पुष्टि स्वयं भगवान ने विता 18, 61 में भी है। नददसमाचअनुशेकरची में भे इस संसार में न तो उससे बढ़कर ये मेरा साथ है, न भविष्य में कभी इससे बढ़कर प्रयोग होगा। यदि कोई भगवान के यस तथा उनकी श्रेष्ठता का उद्देश्य करते इस भावना को फैलाने का प्रयास निस्ठाकुरको तो, भले ही वह अपूर्ण रूप से शिक्षित क्यों न हो, वह पूर्ण पर भगवान का सर्व दास बन जाता है। यह भक्ति जो ही शत्रु तथा मित्र का भेदभाव के बिना महातपा, वह सेवा करता है। क्यों ही भगवान प्रसन्न होते है और उसके जीवन का उद्देश्य पूरा हो जाता है। अतएव श्री टेक महाप्रोम ने प्रत्येक रक्त उपदेश दिया है कि वह गुरू भक्त बने और कृष्ण भावना का प्रचार करें जारी, देखकर। तारेगहकृषकाउपदेश पूर्ण पुस्ता भगवान की अनुभूति करने का यह सरलता उपाय है। ऐसे उपदेश कार्य से उपदेशक दुष्ट होते हैं और जिन्हें उपदेश दिया जाता है, वे भी दुष्ट हो जाते हैं। संपूर्ण विश्व में शांति लाने की विधि यही है भुकतारमियंयातपचा सरबलूपमहेश्वरम दम सरब भुतान जा। प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वो परमेश्वर समाज ज्ञान के इन 3 सूत्रों को समझे कि वे भोगता है, वे प्रत्येक वस्तु के स्वामी हैं तथा वे सभों के शेष शुरनासकाहैउपदेश्य को ये संके स्वयं समझना चाहिए और सभों को इन्हीं का उपदेश देना चाहिए। तब सारे शिशु में शांति रहे। इस लोक में सुतबसफअतेपमहत्वपूर्ण बने। सामाज्य लोग दृष्ण भावना से अंजाब है, अतएव उनकी उनका विदेशी बनने के लिए मनुष्य को चाहिए कि वह उन्हें बिना किसी भेदभाव के विष्णु भावना की शिक्षा दे। क्योंकि भगवान विष्णु हर 1 के अंत स्थल में विद्यमान है। अतएव प्रत्येक शरीर विष्णु का मंदिर है। मनुष्य को चाहिए कि इस ज्ञान का दुरुपयोग ज, दरिद्र, नारायण जैसे शब्दों के बहाने से न करे। यदि नारायण चरित्र अर्थात गरीब मनुष्य के घर में बात करते हैं तो इसका यह नहीं होता है कि वे चरित्र होगे। वे सर्वत्र रहते है दरिद्र के घर में और धनी के घर में भी, किंतु सभी पर स्थितियों में वे नारायण बने रहते हैं। यह सोचना है कि वे निर्धन या सही हो जाते हैं। बहुत ही बलवान है वे सदेव से सूर्य पूर्व अर्थात वे सदेव सभी परिस्थितियों में 6 ऐसौनसेगुरू रहते हैं।
्रहुादकीओानजदश्या anand nashta ndhamtigo हिरपमसगलतम हम रगनादमहरबेठम
का सिंधु गिर बंद ही रहे हे साल से बन जा सा दुबे या
हे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे राम राम राम राम है हाई कृष्णा। आज सबको सुनाई दे रहा है। ठीक ये वोलियम थोड़ा बढ़ा सकते हैं मेरा गला जरा कमजोर है सबको सुनाई दे ा ये 1 बड़ा प्रसिध स्लोक है। भागवतम का भागवत मे 18 हज़ार श्लोक है और सारे श्लोक अत्यंत मीठे हैं और स्लो और ज्यादा मीठे होते हैं। उनका बड़ा गहरा सन्देश है। और उन लोगो में 1 श्लोक इस श्लोक का उच्चारन कौन करते हैं? कौन बताएगा लानालानाकासौभाग्य था की उन्होंने रिविज्ञान प्राप्त किया था जो वो अपनी माता के गरमें थे, जो माता के गरमें थे तो उनकी माँ को सील कर देवता ले जा रहे थे। इस उद्देश्य के साथ जैसे बच्चा पैदा हो उसका बंद कर देंगे नधमुनी। वहाँ नधमुनी ने कहा इस औरत के घर में महान संत उत्पन्न होगा। ये कहने पर प्लान की माँ को छोड़ दिया। देव साहब अत्यंत दुखी थे। यहाँ ने काजपुर द्वारा उनको भाई था की जो उलाद पैदा होगी वो वैसे नहीं निकले। तो प्रात दिवगन्त कहा माता के घर में। इसलिए उनके पिता कभी समझ नहीं पाये। कौन दे रहा है मेरे बेटे को? ये 1 समय पिता ने शानदार 2 अध्यापक थे। उनको बुला कर कहा तुम लोग सावधानी से अपना कार्य नहीं कर रहे। मुझे लगता है कि वैष्णव पेश बदलकर रहे हैं मेरे बेटे के दिमाग को बदलने के लिए। और संदामरकरनेकहा हमें दोष। मत 2 हम ब्राहमण है हमे खुद नही कौन। मेरा आपके बेटे को सन्देश दे रहा है। और और संदेश प्राप्त हो गया था माता के घर में। तो प्रलाल मराज अपने साथियों को यह महत्वपूर्ण संदेश दे रहे है। और 1 रूप से आप कह सकते हो प्रलाल महराज ये संदेश आप सबको दे हैं। हमें दे रहे हैं उनके मन के माध्यम से क्या कह रहे हैं? सबसे पहले कहते हैं परम भगवान भौतिक बुद्धि के परे हैं। अगर आप भगवान को समझना चाहते हो तो किस कार्य की आवश्यकता है? धन की, सूरत की और भौतिक पी एच डी डिग्री की। आपको समझ आ रहा है भगवान को समझना है। भक्त 1 माध्यम है, इसे भगवान कहते हैं। भक्तियां मामा भी जान थी अगर तुम मुझे जानना चाहते हो। भक्ति 1 साधन है, ये है श्रीमद भागवत का निर्णय, यह है भगवत गीता का निर्णय, ये है क्षेत्र तो परम भगवान बहुत हे बुद्धि के परे हैं। इसका मतलब ये है आप अगर भगवान को समझना चाहो तो केवल बहुत 1 बुद्धि से नहीं समझ सकते। जैसे कि भगवान की जो लीलाएं हैं। भगवान जब प्रकट हुए थे, किस रूप में प्रकट हुए थे? गौर मत आयेगा, भगवान प्रकट हुए थे छत्रभोज रूप में माता पिता को यकीन दिलाने के लिए। अब मैं पकड़ हो चुका हूँ। घबराओ मत पिता को डर था, कंस को ये सूचना मिल जाएगी। पिता ने कहा कि साधारण बच्चे का रूप ग्रहण कर, भगवान में सुनती। तो अगर आप ये बौद्धिक वाली व्यक्ति को कहोगे भगवान पकड़ थे? 4 हाथों के साथ पूरा श्री सजा हुआ था। रेशम के वस्त्र के साथ, वो विश्वास नहीं करेंगे। पर जो भक्त हैं वो विश्वास करे। भगवान की माँ ने 1 दिन कहा तुमने क्या गंद खाया, मिट्टी खा। खेलते समय भगवान ने कहा नहीं, मैंने कोई मिट्टी नहीं खाई, मैं क्यों खाऊँ। मिटटी। पर मेरे भाई, उनके मित्रों ने झूठी शिकायत लगा दी। आपको, क्योंकि वो चाहते हैं, आप मुझे डाँट, आपको विश्वास नहीं है, मैं मुँह खोल के बता देता हूँ, अंदर क्या है। और जब भगवान ने मुँह खोला तो माँ ने क्या देखा? किस प्रकार अनेक देवताओं का दर्शन, किस प्रकार हम गुणों के, किस प्रकार हम कर्म का परिणाम भुगत रहे हैं। तो आप किसी भौदेकबादी व्यक्ति को बोला वाह, जब खोला पुरे दर्शन, मिला, वो क्या कहेगा, लोकल फूल, मुंह खोला। भगवान ने सारे दर्शन किया। यह कैसे सम्भव है, सम्भव है, सो भगवान की लीला है, अदभुत है। भगवान जब 5 साल के थे, उन्होंने 1 महान पर्वत थैंक यू मार, बॉय क्या भगवान 5 साल के थे, उन्होंने महान पर्वत को पाये हर के छोटे उम्र के नाखून के बल पर उठाया। आज जब आप गौदान परिक्रम करते हो, वो इतनी लम्बी नहीं है और आप गोदान की चोटी को सकते हो। भगवान ने गोदान पर्वत उठाया है, गोदान पर्वत आकाश तक उठा लिया। तो अगर आप किसी को कहोगे ये है भगवान की लीला, वो क्या कहेगा देखो ये पागल लोगों को कभी संभव है? 1 छोटा बच्चा उम्र के बल पर मान पर है, इसलिए लादमनहाजकहरेहैं सबसे पहले परम भगवान बौद्धिक बुद्धि के परे हैं। और इसी विषय पर भागवत हमें 1 और प्रसिद्ध श्लोक है। आप अपने बौद्धिक इंद्रियों द्वारा भगवान को समझ जाओगे, असफल होगा तो सेवा के माध्यम से आप समझ सकोगे, जैसे की आज जैसे आप जानते हो, इस कौन के कोने को, विश्व के कोने कोने में, इस कौन के केंद्र हैं। आप सब जो यहाँ उपस्थित हो, आप सब का सौभाग्य था। क्या आप बचपन से कृष्ण राम के नाम सुनते आ रहे है की नहीं? और उन देशों में जहाँ किसी ने कभी कृष्ण का नाम भी नहीं सुना था, आज आपको भक्त भक्त मिलेंगे, जो शुल् ब्रामण बन गये हैं, जो भगवान के अलबूनीलामें पूरा विश्वास करते हैं, ये कैसे प्राप्त हुआ है? भक्ति के माध्यम से जब आप भक्ति की विधियो का पालन करो तो आप हल्दी को साफ करते हो। फिर आप समझ सकते हो की परम भगवान कौन है? ईश्वर परम कृष्ण, सचित, नंद, बिगाहा, गोविंद, अनेक ईश्वर हैं। supreme। तो plasma है। god is beyond all model conception। पर भगवान जो हैं बौधिक बुद्धि के हैं। और तुम आगे ऐसा कार्य करो जिसके द्वारा परम भगवान संतुष्ट होंगे। विच can sisi the lord भौतिक समाज में हम प्रयास करते हैं। 1 दूसरे को संतुष्ट करने के लिए सच बात है। भौतिक रिश्ते में पाती पति प्रयास करते हैं। संतुष्ट करने के लिए। आप नौकरी करते हो, प्रयास करते हो अपने मालिक को संतोष करने के लिए। पर न माने। क्या कहा था? तुमने क्या किया? किसी को संतोष कर सकते हो? नहीं माँ। बाप तपस्या से बच्चों को पालते हैं। बच्चे जब बड़े होते है, कहते हैं तुमने क्या? क्या हमारे फर्स्ट किया? और क्या इसमें क्या बड़ी चीज है? सो भगवान तो सेवा भी करोगे, उसके लिए आपके भारी हो जाते हैं। 1 भारत के गाँव में छोटा मंदिर था। कोई बिजली नहीं थी। गाँव में तो 1 दिए के सहारे लोगों को रोशनी मिलती थी। भगवान का दर्शन देख सकते थे। 1 दिया बुझ रहा था तो 1 चुआ था। वहाँ चूआ ने देखा ओह वो रूई है। गिली चल। मक्खन तो गया चाकनेमरखनकोचाकने, पर मक्खन को चाटने के दौरान उसने रूही को धक्का दे दिया। इसे और ज्यादा ज्यादा रोशनी प्रकट हो गई। लोग भगवान का दर्शन दे सके। ये कुछ सेवा के लिए। भगवान के धाम चले। तो भगवान को संतुष्ट करना कठिन नहीं है। वेरी जी तो प्लीज लौट। क्या करने की आवश्यकता है, जो आदेश भगवान का हो। यह नहीं कि आप कुछ भी करो, आप कहोगे व प्लीजिंग भगवान को सुंदर कर। 2 भगवान की शिक्षा आदेश उनके ग्रंथों में है। जैसे भागवत गीता, भागवत गीता क्या है, भागवत गीता, भगवान की वाणी वापू और वाणी वापू पुकार। जब परम भगवान महान सन होते हैं और वाणी का है। उनकी, तो विलि के अनुसार हम सब का प्रयास करना चाहिए कि हम ऐसा कार्य करें जिसके द्वारा भगवान संतोष हो सके। बाईवचवीकैनप्लीज a lot। तो आगे यह प्रश्न उठता है। हमें कैसे पता लगे कि कैसे हम भगवान को संतोष कर सकते हैं? हाँ, व िज ने आंसर उत्तर क्या है? कौन बताएगा
है?
गुरु साधू शास्त्र shastr bagwanjevani was of god neterdereinthe bonifisciptls shastr है। कलम मना गए थे माने पूरी की गोपीनाथ का दर्शन लेने। वहाँ उनकी समाधि थी। वहाँ भी प्रणाम किया। तो माधवन पूरी बे चे। हमें शुद्ध भक्ति का संदेश दिया। जब हम पूरी याद पूरी में यात्रा कर रहे थे, वहाँ गए हम हाय राज ठाकुर किस समाधि में में हर दाल महान संत थे, जिन्होने हमें की महिमा का उपदेश दिया है। राज के उदाहरण से हम देखते हैं। माया ने अनेक रूप से प्रयास किया था। उनको विचलित करने के लिए। तो वो सफल हुई थी या असफल क्यूँ? क्योंकि उन्होंने महा मंद का लाभ लिया था। महामंत्र की शरण मे थी। तो भगवान को संतुष्ट करना हमारे जीवन का लक्ष्य होना चाहिए। चेतन्य महाप्रभु सनातन को, स्वामी को उपदेश देते थे रूप और सनातन। पहले ये 3 भाई थे रूप, सनातन और अनुपम थे। राम भक्त। वह अप्रकट हो गए थे। रूप, सनातन उस समय के सबसे धनी
राजा
के राज्य का शासन करने से आज से 500 साल पूर्व बंगाल था। भारत का विश्व का सबसे धनी स्थान। पर दोनों की रुचि रही थी। राजा की सेवा में रहे। पहले के स्वामी ने त्याग त्याग और 6 दिन महापबुसेविवेज्ञान प्रापत। 6 दिन महाप्रभु ने सनातन गोस्वामी को भगवान के शरणागत होने के विषय में सूचना दी। शरणगत होना what नगर men sent hom भगवान वरि संसार में हम सब इंदियों के शरणागत हो गए हैं। तो जो इंडियन कहे हैं, वो ही करते हैं। गंदी तस्वीरें देखो, बहुत देर संगीत सुनो, बहुत देर चर्चा करो, बहुत देख विषयों का अध्ययन करो। पर चेतने महार पबो ने कहा on it srendetothelod, अगर हम भगवान की गत होना चाहते हैं तो छ विधियों की आवश्यकता है। सबसे पहले क्या था जो भक्ति के लिए अनुकूल है, उसे स्वीकार करो। sep what is फेर फॉर डिवोशन भक्ति के लिए क्या अनुकूल है? कौन बताएगा नाम का जाप सासों का अध्ययन, साधु संगत में रहना, ये उदाहरण है। कई और उदहारण है अनुकूल प्रतिकुल जे जो प्रतिकूल है, उसे त्याग। प्रतिकूल क्या है। जमाना नहीं करना, शासन में नहीं पढ़ना, बहुत जला करते रहना, घमण्डी बन जाना, ये है प्रतिरोध। तो यहाँ कहा जा रहा है जो कि भगवान को संतोष करो। तो भौतिक समाज में हम प्रयास करते हैं। 1 दुसरे को संतोष करने के लिए पर क्या कर पाते हैं? पापा जी महात्मा गांधी का उदाहरण देते थे। गांधी ने देश की स्वतंत्रता के लिए कितना त्याग किया और 1 व्यक्ति था जिसे नहीं गलत काम कर दिया। समाज में आप कभी भी किसी को संतोष नहीं कर सकते। इसलिए हम सब का भाव होना चाहिए। वी विल, ओनली, डू और क्रिष्णा न। और वो ही करेंगे जो कृष्ण मन चाहते हैं। होना चाहिए हमारे भाव। और अगर कोई कार्य प्रतिकूल है तो उसको हम त्यागेंगे। इस विषय में रूप गोस्वामी ने कहा है हे मेरे प्रिय, मित्र जो कीमत ही भरने पड़े भरो। कृष्ण भक्ति को हाथ से मत फिसेलो। कृष्ण भक्ति के मार्ग में सफलता प्राप्त करने के लिए हमें कई चीजों को त्यागना पड़ता है। मान लो भौतिक। समाज में आपको मीठी चीजों का बहुत टेस्ट है। रसगुला गुलाब जा, मोहन कर्मी। लोग चॉकलेट खाते हैं। बीती जी सबको अच्छी लगती है। और फिर क्या चाहिए डायबिटीजी बीमारी हो जाए, आपको छोड़ना पड़ेगा या नहीं? हा ना छोड़ना पड़ेगा, नहीं तो बीमारी और बढ़ जाएगी। तो इसी प्रकार अगर हमारा lg is तो प्लीज। जो प्रतिकूल कार्य है, वो हमें त्यागना। जन संघर्ष लोलियम। 4 सतबीर भक्ति, आपकी भक्ति नष्ट हो जाएगी। अगर आप आवश्यकता से अधिक प्रयास करो, बहुत जलवा करोगे प्यारे। प्रधान राज। कहते हैं वैसे कार्य करो, वैसा कार्य करो जिसके द्वारा भगवान संतुष्ट हो। कई बार पूछते हैं, अभी आरती होली है, कई बार पूछते हैं। हम कैसे बचाने? भगवान संतुष्ट कर दे या नहीं। आप अगर जानना चाहते हो और गुरु से पूछो, साधु से पूछो और जल से पूछो तो प्लान क्या कहा? भगवान बौधिक बुद्धि के परे है और उनको करना वहाँ लक्ष्य होना चाहिए। आगे क्या कहते हैं वह जो सूरत भाव है, उसे त्याग। हम सब जन्म लेते हैं। अज्ञानता में बोन सच बात है। हाँ, क्या समय है ज्ञान में, हम उपदेश देने से पहले 1 मंत्र बोलते है मैं ज्ञान से ज्ञान ना। हमारा जन्म हुआ था अज्ञानता में, अंधेरे पर में, पर हमें गुरु साधु की संगत प्राप्त करके ये ज्ञानता दूर हो गए। साधारण समाज में हम जब पैदा होते हैं, लिखना पढ़ना जानते हो आप, स्कूल में जाते हो, लिखना पढ़ना सीखते हो आप जब इस कॉल में हम सब पैदा होते है ज्ञान मे, कॉल सम्बन्ध में आते हैं, गीता त्यादी पढते हैं। पता लगता है क्या? कृषन हम भारत के वन में जब जन्म लेते हैं, हम सोचते हैं, सब भगवान ने किए हैं। सच बोला किसी रास्ते को चलो 1 नतीजा होगा में आते हो क्या पढ़ते हो कृश्ना सुप्रीम demigod मेरा, हम सोचते हैं ये कैसे, हमें तो ये सिखाया भगवान की है, किसी की पूजा करो 1 ही नतीजा। अब हमें कहा जा रहा है कृष्णा सुप्रीम देवता है तो शो संग माध्यम से आपको ज्ञान मिलता है। तो असली ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। और ये जो ज्ञानता है ये दूर होती है भक्तों की संगत के द्वारा। इसलिए हमारे शास्त्रों में साधु संग पर बहुत बल दिया गया है। कौन सा है वो प्रसि स्टोक। इस विषय पर। आप प्रापर का उदाहरण देखो। प्रापा जी 1 संत थे जो लगभग 70 साल की आयु में भारत से गए। यह नहीं कि किसी ने कभी विदेश में गीता का नाम नहीं सुना था, सुना था और कोई भक्त नहीं थे। उन्होंने अपनी संगति लोगों को और प्रभावित किया और उन्होंने अपना जीवन सुधारा। पापाजी सोवियत यूनियन में गए थे नाइनटीन सेवेंटी, वन में 5 दिन के लिए toरiswiजaके द्वारा। क्योंकि उन दिन में वो देश पूरा नास्तिक था। और पापा जी गए थे 2 सेक्रेटरीज के साथ, 5 दिन के अन्दर। उन्होंने 1 रशन भक्त को भक्त बना दिया। दिक्षा भी देदी, शिक्षा भी देवी आगे चल पडे। उनहोंने कहा तुम प्रचार शुरू करो। उस भगत ने प्रचार शुरू किया और हसते हसते प्रचार बरतेगा और आज हजारों हजारों भगत। तो ये कैसे हुआ? साधु संघ के द्वारा। भक्त साधु करण। साधु 2 माध्यम है साधु संघ के। भक्त। साधु का अर्थ है आप किसी भक्त को मिलते हो, वो आपको निमंत्र देता है, वो आपको उपदेश देता है, आप उससे प्रभावित होते हो। दूसरा है ग्रंथ साधु, ग्रंथ साधु का क्या मतलब ग्रंथों के माध्यम से। जैसे कि प्रापा जी ने ये कहा की अगर तुम ने संतोष करना चाहते हो। डिस्ट्रीब्यूट माई, क्या कारण है कि हमारे अचचाइयोंने प्रचार की सेवा पर बल दिया। पर भगवान स्वयं कहते हैं भागवत गीता के अधार में सब भक्तों मे कौन सबसे प्रिय है, कौन है सबसे प्रिया? यह मुझे ध्यान देता है इसके पास पीएच डी डिग्री है। कौन से ज्यादा हुआ है। तो इस आदेश के पालन के लिए हमारे चारों ने प्रचार की सेवा पर बल दिया है। जैसे की उदाहरण के लिए ठाकर भक्ति मिनौर, जिन्होंने कृष्ण भक्ति को शुद्ध रूप से स्थापित किया, उन्होंने 1 ग्रांतलेकाथाचेती वहाँ प्रभु के जीवन के ऊपर, जो की उन्होंने आईटी नाइनटी सि, वही साल जब प्रकट हुए थे पृथ्वी पर अपना ग्रंथ भेजा। विश्व के प्रसिद्ध महाविद्यालयों में, तो जो भक्त है वो यही चाहता है। भगवान का संदेश पहले क्यूँ, क्यूँ, क्यों वो चाहता है। हा ये भगवान की इच्छा चेतन प्रभु है। ठाकुर के भजन कुटीर में गए। आदाज ठाकुर नाम चाहिए हरिराज ठाकुर, वो कभी भी जंगल पुरी मंदर के अंदर प्रवेश नहीं कर पाए। क्यूंकि उन दिनों में इंद्र समाज, इतना कंजर्व था जो जिनका जन्म नहीं हुआ था, हिंदू खाना में प्रवेश नहीं करते थे? भाई राज ठाकुर बहार बैठ के जाप पड़े थे। सो और उनके प्रचार के द्वारा, उनके शुद्ध भक्ति के द्वारा। प्रचार नाम का प्रचार हो रहा था। दूर दूर से लोग आते थे उनका दर्शन देने के लिए। तो हमारे अचार ने, विन और ठाकुर ने 1 ग्रंथ लिखा था चेतन माँ जीवन के ऊपर, उन्होंने विश्व के प्रसेमहाको भेजा भक्ति सिदांत। उनके प्रतिनिधि। जब भक्ति ठाकुर ने कृष्ण भक्ति का प्रचार किया तो उन्होंने भगवान से प्रार्थना की थी की आप कृपा करके कोई ऐसी उलात भेजना जो की आपके आंदोलन को आगे ले जा सके। विष्णु की किरण वो थे। और उन्होंने प्रचार को बढ़ाया अपने कई सन्यासी सी को विदेश में भेजा, इस उम्मीद के साथ कि वो चेती ने मा प्रभु जी के भविष्य वाणी को पूरा करेंगे। क्या थी माँ वाणी सफलता पर विश्व के हर कोने में यह नाम पहुँचेगा। कै ने प्रयास किया पर सफलता प्राप्त नहीं की। इन 1922 में, क्रौपाजीकेमित्र ने कहा 1 खास संत थे काका मैं, तो माँ उसके उपदेश को सुनने के लिए का नाम क्या था जो की बकायदा संतो की सेवा करते थे और praपाजीइनसंदों से बिल्कुल प्रभावित नहीं थे। पापाजी ने कहा coming me वेरी iलिमेtेdसाधु पापा ने कहा मेज मेनीसाधुमकइको मिल चुका हूँ, मैं किसी से प्रभावित नहीं हुआ। उनके मृत ने कहा ये साधू दूसरे साधु जैसा नहीं है। स्पेशल प्योर और पहली मुलाकात में उन्होंने क्या कहा प्रोपर से तुम पढ़े लिखे, युवक हो नी जाओ चेतन मा प्रमुख संदेश, को पश्चिम देशों में प्रॉपर ने इस आदेश को गंभीरता से स्वीकार किया और उनका प्रयास था किस प्रकार इस भविष्यवाणी को पूरा किया जाए। पापा जी राधा दामन मंदर में निवास करते थे, वहाँ से दिल्ली आते थे अपने ग्रंथ को प्रकाशित करने के लिए और बड़ी कठिनाई के साथ, उन्होंने भागवत के प्रथम गण के पहले, दूसरे, तीसरे धाय को प्रकाशित किया, उजप्रापाजीनेपहले स्कंद को प्रकाशित कर लिया था। फिर ने लगा कि अब विदेश जाने के योग्य हो और उन्होंने अपने प्रचार और संगत से लोगों को प्रभावित किया। तो यह है जो भगवान के भक्त हैं, वो चाहते हैं। ये भक्ति योग का ज्ञान हर व्यक्ति तक पहुँचे। भौतिक समाज में अगर मान लो। आप कामयाब बिजनेसमैन हो, आप अपना सीक्रेट दूसरों को बताते हो। नहीं, कोई नहीं, कोई नहीं बताता चाहते हम अमीर हैं, तुम खड्डे में जाओ। पर आध्यात्मिक समाज में हमने आनंद प्राप्त किया है। हम भक्त चाहते हैं, दूसरों को भी प्राप्त हो। पर दुख दुखी जो भगवान के भक्त हैं, जब देखती है, किसी व्यक्ति को वो प्रयास कर रहा है, सुख प्राप्त करने के लिए सुख है। नहीं तो उन्हें दुख पहुंचता है। वो सोचते हैं। कैसे इसका उधार हो? 1 दिन वो हरिदास ठाकुर को मिलने गए, हरिदास कहा वहाँ प्रभु ने, हरिदास में यामनाकोदेखता हूँ, मैं अत्यंत दुखी हो जाता हूँ। कैसे उनका उधार होगा? नेचुरल या मन का अर्थ है तो चाहते विपरीत कार्य। माँ। ने क्या कहा? हा राम, हा राम बालिके भाई नाम का उच्चारण अपराध से रहे, करेंगे। तो बच जाएंगे। तो सरदार कहते हैं जो भक्त हैं सबके sुpcntकहैwelason, तो आप कहोगे, but i dont have that mentality। मेर में वो भाव नहीं है। तो मेरे वैलुएशन हैं। तो कई बार जैसे हम भक्तों को कहते हैं, प्रचार करो, गंध को, बाँटो भग कहते हैं। हमारे कोई भाव नहीं है, हम प्रचार करें। लोग नरक में जाते हैं। जाने। 2 हमारा का तो आप में बेच वो रियलाइजेशन नहीं हो। पर अगर हमें गुरु साधु, शास्त्र के वचनों में विश्वास है और उसका हम पालन करें तो आप सफलता प्राप्त कर सकोगे। तो प्लान राज कहते हैं समाज के क्या बनोsrpाजnwodrइt प्रापा लिखते थे, किसको अंत में क्या लिखते थे सदा हमारा शुभ तो वो भाव होना चाहिए। हमारा हम सदा सब के शुभचिंतक बने। और ये भाव का अर्थ है हमारा प्रयास रहना चाहिए। क्या हर व्यक्ति को भगवान को उपदेश दे। ज्यारेदाकोताएकहो हा और या जैसे क्या हो। कृष्ण का उपदेश। तो प्लाजमा महाजन थे। महाजन का अर्थ है स्पिरचअथोरिटी धर्म के अधिकारी। और जब वो हमें ये उपदेश देते हैं, हमें पूरे विश्वास के साथ स्वीकार करना चाहिए। सो हमारा ये प्रयास होना चाहिए। हम सदा वही कार्य करे जो भगवान को संतोष स। कई बार हम सोचते हैं भगवान इतने दयालु हैं, जो भी हम करेंगे, भगवान माफ कर दे जायेंगे र।
हा,
ये सच है जो भी तुम करोगे, गलत काम करते जाओ, भगवान माफ़ करते जायेंगे। जितनी श्रद्धा में हम भगवान की शरण लेंगे, उतनी मात्रा में ही भगवान हमारी रक्षा करेंगे। यह यह तमाम तो हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अगर हम प्रयास करें तन मन, धन से भगवान की सेवा करने के लिए 1 लाभ होगा। और अगर हम सोचे की हम पूरा शरणागत नहीं होना चाहते। 10 परसेंट होंगे तो हम को 10 परसेंट सुरक्षा प्राप्त होगी। जैसे की बाजार वैपारी भाषा में क्या कहते है यू गेट वाट यू पे फॉर जैसा दाम भरोगे वैसा माल में लगा नहीं तो जितनी मात्रा में भगवान की शरण लोगे उतनी, परम भगवान आपकी सुरक्षा करेंगे। ये भाव, हमें ये उपदेश हमें नहीं भूलना चाहिए। तो लाज प्लान करे। है। एशिया दुवेश से बचो एशिया द्वेश, एन वी जेलेसी, उससे बचो, एशिया बोधिक समाज में हम सब एशिया के प्रभाव में है। अगर हम देखते हैं किसी व्यक्ति के पास हमारे से अच्छी योग्यता है, तो मेशा करते हैं। some viltesanuswel become envies, sa was। हमारे शत्रु हैं, अगर किसी में कोई योग्यता है जो आप में नहीं है, तो एशिया के बजाय हम उनसे उनसे प्रेरणा ले लीजिये। सर पापा ने क्या चमत्कार दिखाया, भगवान के भविष्य मानी को पूरा किया। और को ने कहा सोमजी ने क्या किया, अमेरिका गए, लोगो को बना दिया, हम को भक्त नहीं बनाना, चाहते गए। से करते हैं तो इस दवे से बचो, इस दवे से कैसे बच पाओगे? हमारे शास्त्र में अनर्थ के विषय में चर्चा की जाती है। ये कहा जाता है, इन अनर्थ के कारण हम भगवान के नगर नहीं हो पाते। अनार था किसे कहते हैं कौन बताएगा, जो की आवश्यक नहीं है, काम, क्रोध, लोमोमलमसरयाये, क्या आवश्यक है। पर इनको दूर कैसे करोगे? कहते हैं 2 श्रद्धा तथा साधु। सबसे पहले हमारे हृदय में ये श्रद्धा होनी चाहिए। क्या भगवान के शरणगत होना चाहते हैं? हम भगवान की शरण लेना चाहते हैं। पर हम भगवान, हमारे हृदय में परमात्मा के रूप में विराजमान हैं। और अगर हमारे हृदय में ये श्रद्धा होगी, तुमे क्या लाभ होगा? साधु कोई भक्त साधु या ग्रंध साधु। 1 भक्त मुझे मिला था, मैंने पूछा, तुम भगत कैसे बने? उसने कहा 10 साल पहले मैंने 1 गीता ली थी और मैंने कभी खोली भी नहीं लेकर रख दिया। अपने ड्रॉर में 10 साल के बाद कोई दुर्घटना बीती, मैंने वो गीता पढना शुरू किया। मैंने देखा कि ये उपदेश्य मेरे लिए है। वो मंदिर में आये, भक्तों की संगत में आये, वो जीवन सुधर गया। तो इन ग्रंथों के विषय में ये हैं एलबम। जैसे किसी बगल में इनका प्रभाव आप महसूस कर। सकोगे यह नहीं कि अगर आपने 10 हजार गीता बांटी है, महीने अगले महीने 10 हजार नए भक्त आ जाएंगे। पर ये आवश्यक हैं इनका प्रभाव। आज न कल परसों तरसों पड़ेगा। तो लाल माज का जो उपदेश है, इसे हमें गंभीरता से स्वीकार करना चाहिए। नास्ता प्रदेश, देश, नित्य भागवत सेवा, भागवत भक्ति। बात में कहते हैं, नियमित रूप से हमें भगवत गीता, भागवत सुनना चाह, नियमित रूप से रेगुलर क्या लाभ होगा, पूछोगे सुनने से क्या होगा? नs्परेमाया का जो प्रभाव है, जो मेल आपके हृदय में, वो दूर हो जाएगी और भक्ति भावना हृदय में स्थापित होगी। और अंत में अंत में कृष्ण पैकिंग, अंत में कृष्ण प्रेम प्राप्त होगा। आप सब का अनुभव है, खास कर के उन भक्तों का जो गंभीरता से नियमों का पालन करते। जब आप नियमों का पालन करोगे, जॉब करोगे, भागोतम पढ़ोगे सुनोगे, तो क्या आप खुद ही महसूस कर सकते हो? भक्त साल बन जाती है। और जब हमारी साधना कमजोर हो, नियम का पालन नहीं कर। ते जब क्या अनुभव होता है, माया कब सूरत बन जाती है, वो भगवान बदसूरत। और जब आप ध्यान से अच्छी साधना रखते हो, उत्साह से सेवा करते हो, तो क्या परिणाम होता है? भक्ति सूरत बन जाती है और माया सूरत बन जाती है। तो ओके कैचमेंट द होली? नाम श्रद्धालु भक्त सदा यही चाहते हैं। हमारा आकर्षण है नाम के प्रति बढ़े आप कितने भक्त सभा में जो चाहते है की हरी नाम के प्रति आपका आकर्षण बड़े शुद्ध भक्त की समा comment estonia आर कमिंग पिता अटैचमेंट द होली नेम, आंसर क्या है भाई प्रति क शन बनाना चाहते हो, नाम का जवाब को शास्त्र के प्रति आकर बढ़ाना चाहते हो तो सास पडो, सेवा करना चाहते हो तो सेवा करो, फिर सेवा का टेस्ट, आएगा सेवा करोगे तो सेवा का टेस्ट कैसे आएगा? तो भक्तों की संगत में आकर
भजन
क्रिया का पालन होता है। भजन क्रिया के पालन का क्या परिणाम है? जो आपके अनर्थ है? जिन की आवश्यकता नहीं, वो नष्ट हो सकते हैं। तो इसलिए प्रापा जी ने हमें बड़ा सरल उपाय दिया है। असल में यह सरल उपाय चेतना महाप्रभु जी ने दिया है। आपके में इतने प्रसिद्ध स्थान हैं यहाँ के खेती ने महा पूप ने अपनी धीविलीलापकड़कीपले 24 साल महा। प्रभु बंगाल में थे, अंतिम 24 साल। उन्होंने का काटा आपके पूरी में, रस में 24 साल में, पहले 6 साल पुरी में थे और भारत भारत की यात्रा की। पुरुष के पश्चात अंतिम 18 साल। पूरा समय पूरी धाम में थे। और आपके में कई मंदिर हैं जहाँ जहाँ के मा प्रभु ने आये हा हा गया है। पदीपवानहेतूदवा बतारा छे माह प्रभु प्रकट हुए थे किसलिए परतोंको उद्धार करने मे और सब अवतारों में क्या है सबसे दया दयालु श्री कृष्ण चेतना प्रभु दया को मोरे। तुम बिन के पति भगवान प्रभु। आप इतने दयालु हो, आप प्रकट हुए हो पतितों का उद्धार करने के लिए। पर सब पत्तों में सब से ज्यादा पतित कौन है? मैं हूँ। तो हाँ भगवान के होने का, ये कौन लक्षण हैं। humility
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s c m ने क्या आदेश दिया the chana रो, अगर तुम सदा कृष्ण का नाम लो तो हमें सहनशील होना पड़ेगा। बौद्धिक समाज में सुख, दुख, आधार, अपमान दोनों ही हमें सहना पड़ेगा आदर। 2 आदर की उम्मीद किये बिना हम क्या सोचते हैं? हम आदर देंगे अगर दूसरा व्यक्ति आदर देगा। हमारा भौतिक समाज में सिद्धांत क्या है। डिtforटेटहरदाज ठाकुर के विषय में हो चांद काजी ने उनको सजा दी क्यूंकि हरी दास है नाम ले रहे थे। चना जी ने कहा तुम मुसलमान खानदान में जन्म लिया, हरी नाम क्यों। राजा ने कहा हम लोग इतने में हमने जन्म लिया है है और तुम हिंदू भगवान का नाम ले रहे हो। तो हरिदास ने इनकार किया, उन्हें हरिदा से कहा तो मैं हाई नाम रोको बंद करो लोग। हरिदा ने कहा की आज मेरे शरीर को काट सकते हो, टुकडो में मैंने हाय नाम बंद नहीं करना। तो फिर जान। काजी ने कहा पीटो इसे तो 22 बजारों तक पीट के घसीट ले जा रहे थे, वो जिंदा था पूरा जेवर हाय नाम लेते गया। तो जो उनको पीटते थे उन्होंने क्या कहा उन्होंने 1 दुसरे से चर्चा की ये हरिदास अभी तक जिन्दा है, इसके शरीर में कोई निशाना ही नहीं है, चोट का ये चान का हमें जिन्दा नहीं छोड़ेगा, क्यूंकी हम इसको मार। नहीं पाये। उनका अनुभव यह था कि 2 बाजार में पीने के बाद आदमी मर जाता था। भाई दा को 22 बाजार में पीटा। to a bat r te, what will happen to s now can was a live? ने क्या थे महराज ने क्या सोचा मेरे कारण इनको सजा भुगतनी पड़ेगी भाईदास ने अपना बीजिंग वगैरह पूरा कंट्रोल कर दिया। उन्हें लगा कि हरिदास की मृत्यु हो गई है। खुश हो गई नेशनल। यहाँ तो उनको पीटा जा रहा है उनका भला, ये वैसा का भाव, यह नहीं वो पीट रहे हैं। तो हमे पीटेंगे यह भाव होना चाहिए। और कृष्णनाथ कामराज विषय में कहते है मेरे में इतनी अवगुन है, मेरा नाम ही कोई लेगा, उसके सारे अवगुन मेरे में इतने अवगुण हैं की मेरा नाम ही कोई लेगा तो उसके सारे गुण समाप्त हो जायेंगे। तो पर भगवान को प्रसन करने के लिए भक्ति की विधियों का पालन करना चाहिए है नाम का उच्चालन अपराधो रहे सासों का अध्ययन, साधु संगत में रहना, सेवा, भाव, अनुकूल करना और विनम्र का भाव, यह विनर का भाव रखोगे तो भगवान को प्रसन्न कर सकोगे। कभी कभी हम सोचते हैं if i humble be exploited नंबर है तो लोग फायदा उठायेंगे, विनम्र हो, भगवान के आशीर्वाद मिलेंगे तो संक्षेप में राज मराज। इस लोक में हमें 1 तो ये कह रहे हैं पर हम भगवान की शरण लो, भगवान को संतोष करो। भगवान बहुत दरियों के पास है और तुम भगवान समाज के शुभचिंतक बना सबको भगवान का ज्ञान 2 इस प्रकार और एशिया से बचो इस प्रकार भगवान को संतुष्ट कर सकोगे तो श्रीमद भागवत अब हमें ध्यान से पढ़ना चाहिए इस में सभा, शाम भागवत का अध्ययन, गीता का अध्ययन होता है। तो अगर आप रोज मंद नहीं आ सकते और घर में पढ़ सकते है किताब और हमें नियमित रूप से इनाम करना चाहिए, भगवान का अध्ययन करना चाहिए, भक्तों की संघ में रहना चाहिए। इस माध्यम से उन्नति होगी और माया से बच सकोगे ठीक है। hi कृsnaकरशनसिरव 2 दिन प्रश्न लूंगा मुझे अभी बी बी जी जाना यस quik
हाs
के लिए कम से कम 10 हजार साल तक के बाद मेरा मेरा प्रश्न राज महाराज देव माता के घर में कितने साल थे वो किसी सम्भव
हो
इतने साल कैसे से समझना muskil है cin unestanwither mental mाindपरपलानमाता के घर में थे और उन की मां को सुरक्षा के भी प्रधान मन माता स्वामी माता के घर में 16 साल से anymore कें going okay thank you very much krishna भी।
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