प्रभुपाद लीलामृत, जीव गोस्वामी आविर्भाव दिवस, वामन द्वादशी विशेष | SB 8.18.12 | 7 Sep 2022 | Delhi

The video is a devotional gathering recorded in Delhi on 7 September 2022, featuring multiple speakers who intersperse chanting of Hare Krishna/Hare Ram mantras with narrative recollections and teachings. The participants recount Srila Prabhupada’s historic trips to America, his health challenges, and the reactions of devotees both abroad and in India. They describe the distribution of gifts such as sarees, kartals and mridangams to devotees, and share anecdotes of devotees facing illness (including cancer) and receiving support. A substantial portion of the talk delves into philosophical reflections on Krishna, his avatars, and the nature of divine forms, linking these ideas to the significance of Vāmana Dvādaśī. The session also outlines practical plans for a new temple’s opening, community service activities, and the role of devotees in sustaining the movement. The overall tone is reverent, celebratory, and instructional, with moments of informal banter.
Chapters
दमलगिहानकागरा
रा
हार जाना वाला बाधा j भोनiनaनधtaराधा वासरेगोप anaaarataa गो a पेशा हरे हरे राम रे रामा रामा रामा रे हे रा रा रे हर कशारेणाकृश्ना केना हरे राम रे रामा रामा रामा रे आरे आरे के
राहे
राह र हरा हरे हरे रामा रामा रामा रामा हरे हरे राम राम राम राम हरे हाहहहा हरे हरे कृष्णा हरे
कृष्णा कृष्णा
हरे राम राम
रे राम
हरे कृष्णा हरे कृष्णा का रे रे हरे राम हरे राम करे कृष्णा
रहे
रा रा अरे अरे मर मर मर ह
हेरा वह
आहे हे राम राम हरे राम राम म हे राम राम हमारे हमारा मार आ रे hybhबाबहबाबा hi bas
goto go hi krishna ेबदeaेा home ganaannastन वनडे हम हम
जम
जम जम
राधा कृष्ण
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शrीksणaचेकबोन हरे कृष्ण कि कृष्णा कृश्णा आप बक्सों का हार्दिक स्वागत पीछे सुनाई दे रहा है जो एकादशी के दिन इस पर मनोमे अक्सर प्रॉपर से हम पढ़ते हैं, लीलाओं का क्या करते है पापा से इस संस्था की स्थापना की और बुधनी अच्छा रहती है उनको ज्यादा ज्ञान मिले ब a the same है a a a
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a o इस समय आप हो। बाबा जी अमेरिका गये थे, सब जानते हो। ो गुरु ने आदेश दिया था क्या जा महाप्रभु संदेश को पश्चिम देशों में औ अत्यंत संघर्ष के बरसात लगभग 20 साल के भारत में और दूसरा मंदरा तो बाबाजी ने 2 गेंद खोल दिए थे और 4 और दादा ज्यादा भी शुरू गई थी और भाग जुड़े थे। फिर बाबाजी का suwascamoहoa किन किन किन को सुनाई नहीं
कि सुनाई
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grave। मेरे लिए san tebercarऔर on the der bad बिल्कुल ठीक हो गया a बाद मे बिलकुल ठीक हो गया। तो आप इस समय पढ़ रहे, ये प्रबल स्वस्थ है, ठीक हो जाए बाजी जान का पस
कुशा, चीन के अतिरिक्त लेना पत्र 56 अमेरिका में वापसी सेल क्रंसिस्कोंट फोर्टी संबरनइटीनसर्टसेवन श्रील बहुवाद को देखते ही अनेक भर चिल्लाने अथवा असली बात करने लगे। वे काफी स्वस्थ, दिखे और धूप से तपने के सामने हो गए थे। वे हाथ हिला रहे थे और मुस्कुरा रहे थे। मुस्कान से भक्तगण और अधिक उत्सुक होते वे अपने आप को मुश्किल से रोक पाए। जब प्रभुपाद के समान का निरीक्षण कस्टम अधिकारी कर रहे थे। पिछली बार जब श्रील प्रभुपाद अमेरिका से गए थे, तो उनके भक्तगण अनिश्चित थे कि वे शायद ही पुन उनका दर्शन पा सके। उन्हें न्यूयॉर्क में लगलगबाकाआधात हुआ था। पंद्रह में स्वास्थ्य लाभ हेतु भारत वापस चले गए थे। उन्होंने कहा था कि यदि मरना ही है तो इसके लिए वृंदावन ही संसार में सर्वश्रेष्ठ स्थान होगा। किन्तु जहा भारत जाकर। तुरंत ही उन्होंने पत्र लिखा कि उनमें शक्ति का संचार हो रहा है। कृष्ण ने उन्हें बचा लिया था। अब वे वापस आ गए थे। भक्तों को उनकी आवश्यकता थी। यदि उन्हें उनका प्रतिनिधित्व करना है और कृष्ण भावनामृत का विस्तार करना है, तो उन्हें कृष्ण के विशुद्ध भक्त की संगति की अधिक अधिकाधिक आवश्यकता थी। दयानंद, उन्हें हवाई अड्डे से फूल ऑफ सती 1 पुरानी लीमोसीन कार में बैठा कर विराट स्ट्रीट में फैड्रिक स्ट्रीट के स्ट्रॉग फ्रंट बनने से 2 ब्लॉग पूरे पर आए हुए। ब्रह्मचारी आवास तक ले गए, जहां उन्हे ठैरा। जैसे ही वे अपने कक्ष के दरवाजे के समीप पहुंचे, उन्होंने कांच के भीतर जितका भगवान विश्णु का चित्र देखा, जिसका चेहरा उनकी ओर था। यदि अभी भक्त इस क्षेत्र के विषय में बहस कर चुके थे, क्योंकि भगवान विष्णु को नीले रंग से नहीं लगा गया था। किन्तु प्रभु बात ने प्रणाम की मुद्रा में दोनों हाथ जोड़ दिए और अपना सिर थोड़ा सा झुकाकर आगे बढ़कर घर में घुसे।
भक्तगठपापाजीका स्वास्थ कमजोर हो या भारत में है में आते है, पाजी स्वास्थ हो गया वापस लौट रहे हैं तो पाप पहला केर दूसरा केमर खोला पढने जाइनवि। american se jude sales jinan भावना seva senses सती दिन गई थी भारती स्टोर में तो वहां से 3 डॉलर्स दिखे 3 जब होता है। व ने प्रणाम किया और done छोड़े में जी ने पूरी कथा सुनाई। भगवान जी कैसे प्रकट हुए थे ने पूछा उन भक्तों से आप में से कोई कार्मिक जानता है प्रपुजलकावर्णन कर रहे थे। इन्हें कैंसर की बीमारी हो गई थी। जब उन्होंने अभी सेवा नहीं रोकी, वो कैंसर की बीमारी हो गई थी। अमेरिका में अगर बीमारी हो तो आपके पास सूरिया नहीं है तो सरकार आपको आपको कूपन देती है, जिससे आपको ही मुफ्त मिल तो जाय पॉवर सरकार हर महीना कूपन देती थी, $2000 का दवाइए खरीदने के लिए कैंसर था वाइफ 2000 महीना दे जाइनलनेधनसेकिया। क्या इसका इस्तेमाल किया। रधलतबनानेाऔर उनके प्रयास से पी रहा था। निकली के द्वारा से लौट रहे थे। उनके भक्त
दुख
पता पता नहीं लौटेंगे। बिंदा लौटेंगे तो आप का पढ़ते हो जाने प्रभु गए थे। प्रभाव जी को देने उन्होंने बंद किया था। प्रभाजी के रहने के लिए 1 अपार्टमेंट लिया था। कुछ दिनों में 1 कोर के पास कोई खास सुविधा नहीं थी। लाइन में खड़े होते थे, होते थे पापा भाव गुरु के आदेश का पालन
भक्तगण प्रभुपाद के कमरे में अति उत्तेजित होकर एकत्रित हुए। उनमें से 1 ने गुरु के चरण भूलने की वैशनाबेतनेके विषय में पढ़ रखा था। अतः उन सभों ने 1 पात्र तथा 1 परात तैयार कर बैठे थे। प्रभु ने चरण धोने की अनुमति दे दी और कुछ ही सेकंड में यह कार्य संपन्न हो गया। तब शिव भुवान परिचित भगतों की भीड़ भरे कमरे की ओर मुख करके बैठ गए। उन्होंने अपनी करता ले ली और धीरे, धीरे तथा मधुर भली से बजाते हुए वे हरेकृष्ण कीकर की अगुवाई करने लगे। जिस तरह से कभुवादनेगाया था, गाया तथा भक्तों ने सुना तथा एकादशी से भुनाया, वह कोई सामान्य चीज नहीं थी। किंतु यह किन्तु यह अतिसमछि्तथा तद पश्चात, शील प्रभुपाद कृष के विषय में बोलने लगे। उन्होंने कहा कि कृष्ण भगवान हैं और वे हरे के मित्र हैं। यहाँ तक कि इस संसार में अच्छी मित्रता कृष्ण की मित्रता की भी सूचक है, क्योंकि दृष्ट से भी हत्थिउत्पन्न है। यदि आप बसंत के दिन अच्छा अनुभव करते हैं तो यह कृष्ण का संकेत है। सुगंधित पुष्प सुगंध भी कृष्ण है। इस संसार में जो भी श्रेष्ठ है, वह कृष्ण है। जो कुछ भी बुरा है, बुरा है, वह कृष्ण को विस्मरण करने से उत्पन्न है। प्रभु बात, उदार तथा वीर भाव से बोले। वे अपने साथ कुछ उपहार लाए थे, महिलाओं के लिए साड़ी लाए थे। वे 11 करके महीन, सूती वस्त्र निकाल दे और प्रत्येक दीक्षित, शिक्षा, शिक्षा, शिक्षा का नाम पुकार कर उसे 1 साड़ी दे देते। इनमें से 1 साड़ी श्वेत थी, जिसका किनारा लाल था तथा जो काले डिजाइन की थी। शेष साड़ियां श्वेत थी, पर किनारे किनारे 1 ही रखते थे। 1 सरिया झोले में ब के पास 3 बरेशमीहार थे। उन्होंने उन्हें खोलकर कहा कि वे भगवान जगतनाथ, सुबद्रा तथा बलराम में गले में डाला जा सकता है। इसके पूर्व अच्छा वीडपरनाकईवस्तथा न अलग कर दे।
पजी बाबा जी विश्वास लगभग ठीक हो गया है। पापाजी में क्या स्थापित करे? कृषि प्रापक विदेश में आने से पहले बहुत कम व्यक्ति है। कृष्ण का ज्ञान मिला और प्रभा ने 4 द्वारा का सिक्स ईश्वर परम कृष्ण साबित किया। अनेक श्र परमेश्वर का नाम क्या है। krishna cones जब साबित हो थी, यह चर्चा हो रही थी भक्तों में want should be call the r socity? क्या नाम दिया जाए तो क ने you should call it for, you would be very spec। क्या किया is an ban on des
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कौन पापाजी ये पापाजी ने उन्हें शिक्षा दी। कृष्ण भगवान कौन है? और प्रापा जी अपने भक्तों के लिए वायर से present और जो लाइन थी उनके अलग सानी किसी सारी है। बाबाजी, रिबोर, सो,
मुकुल तथा शाम सुरबने आगे आकर अपना पहला अमेरिका विगत करताल दिखाया था। महीनों को महुवार सुझाया था कि अमेरिका में करताल बना सकते हैं और लोगों ने भारतीय करतालों का रासायनिक विश्लेषण करके कवाड़ खाने से उन उन अभेपदियोंकोएकत्र कर लिया था और वे उन्हें अपने टकसाल में ले गए थे और ठलवाकरकरतालतैयार कर लिया था। प्रभुपाद ने अमेरिका निर्मित करने को अपने हाथ में अपने हाथ में लिया, उन्हें कुछ बार बताया और घोषणा कर दी उतने अच्छे नहीं है पश्चात उन्होंने भारत से लाइक अपने सुन्दर चमकीले कर ताल निकाले उन्हें 1 बार बताया और फिर देर तक हो जाते रहे। तब कहा ये महान है।
भकसन को ये भी कहा था मृदंग बनाने के लिए और शायद आपने देखा और अमेरिका में मृदंग मिरदंगा की बजाय वे उन्होंने मृदंग बनाये और आज कल को मर ना लिखते नहीं है बस मन मोह में लगा भक्तों ने करताल भी बनाया था। क्या निकर और प्रभाजी ने अमेरिका में सबसे पहली बार 1 फीट का भाव क्या था? बल का भाव ना लोकली बन जाए तो भारत से मंगा जाए a a a a a सो caकoस्वामीviदावan बारे में so पूरा वर्ष वो आजकल आप देखते हो कि गुमी नाम से इस्तेमाल करे पूरा वा तो चे गोस्वमी है, जैसा आप जानते हो उ्नूपरसके भतीजे थे, जिनका नाम था रूपा सनातन। 1 समय उस स्थान के राजा के शासन थे। उनकी रुचि नहीं थी, उनकी रूची थी किसमें हमारी सेवा में जुड़े नहीं है। वो ही रूचि थी कि वो सदा वहाँ पर के साथ यात्रा कर। और थोड़ी देर के बाद उन्होंने आगे मां ने उन्हें नाव में जाता, इसलिए पंत की रचना करने े प्रयाग में मछली संबंधित शिक्षा दी और उन्हें कहा था कि जाकर उन स्थानों को। भगवान ने अपनी लीला की भर्ती सम्बंधी करन की रचना करो, बंदों का निर्माण करो, बंद का निर्माण देव। जीवन में कौन थे उनके भतीजे जीव कुस्वामी उस समय के सबसे प्रसिद्ध वान माने जाते थे और स्वामी हमारा गहरा गया। कहा जाता है कि उन्होंने 4 लाख से ज्यादा लोगों का क jio ने jio ा दिशा पर दिक्षा लेने से पहले बड़ी धेरी, हर भगगखायकायाखाना बनाओ सब्जी काटो और हर कोई साफ करो कभी देखना चाहते थे कितना गहरा है इनका भाव और काफी परीक्षा ली ने देखा कि युवा में निभाते हैं बड़े अच्छी तरह तो वो खुश हो गई थे। दिक्षा चाह होती है, आपको थोड़े ध्यान बढ़ते हैं तो आप लोगों को ऐसा टेस्ट दिया जाए जी को। मिला पास ही सकेगा सबसे कठिन सेवाली झारा रोटी बना दी। यामि जीवन में ठीक सेवा है। विधवान उनका ज्ञान था, इसलिए बोदना रूबरनसरेसहोते क्या करते थे, वो जाते थे और जाते थे, विधवा से डिबेट करते थे और फिर वो जी जाते थे। रहे हो मुझे विजय पत्र 2 की मैंने हें हरा दिया तो इसी प्रकार वो आये मैंने भारत में सबको हरा दे रहे और मैं चाहता हूं कि आप दोनों भाइयों को दोनों भाइयों से डिबेट करे रूप श्री भक्ति के मार्ग मे वो नाव घुमाने के रूप। हम आपकी तुलना में कुछ नहीं है। आप ज्यादा सो लेकिन उन्होने दिया वो a o को जो इनके पास ये पता था कि मैंने और जी ने यह कभी संभव नहीं हो कि किसी को बड़े जाल है। ना सो ने डिबेट की डिबेट में कई लोग देखे, तू हार गया बुरी तरह। उसके बाद कोई जवाब न था जो fir या पता लगा के 2 के साथ डिबेट किया है। इसका जाना खुश नहीं थे, लोग खुश नहीं थे और खुशी खुलय में 1 पेड़ के नीचे रेल में रोज प्रसाद के समय मिलते थे और 22 भाई चर्चा करते थे। वहाँ पर उन्हें क्या शिक्षा दी है।
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a o o co so jeoesamii rachna in mahato तो आपको इस प्रकार आपका ज्ञान बढ़ता है और वे है सारे, जो प्रसिद्ध जिला है, उनसे उनको सेलिबेट करता है। some भगवान के साथ गए थे number or kuskobiki a r kiska baba s
स्कंद श्रीम धानकम स्कंद, 8 अध्याय। 18 लोक संख्या वाला का अनुवाद इस प्रकार से है भगवान अपने आदि रूप में आभूषण पहने तथा हाथ में आयु, धारित किए, प्रकट हुए। यद्यपि उनका यह सदरिविदिवानरने वाला रूप भौतिक जगत में दृश्य नहीं है, तो भी वे इसी रूप में प्रकट हुए। पश्चात अपने माता पिता की उपस्थिति में ही उन्होंने उसी तरह ब्राह्मण रामन अर्थात ब्रह्मचारी का गुण धारण कर लिया, जिस तरह कोई नष्ट कर लेता है। यहाँ पर नटवाब्दमहत्वपूर्ण है। 1 अभिनेता, 1 ही व्यक्ति होते हु भिन्न भिन्न अभिनय करने के लिए वेश बदलता रहता है। इसी प्रकार भगवान भी लाखों रू बदलते रहते हैं। जैसा कि समय गया है जरूर पर वे अपने असम के अवतारों समेत सभी रहते हैं। राम, देश, नदी, यह भी वे विभिन्न अवतार में प्रकट होते हैं, किन्तु वे 1 दूसरे से भेद नहीं होते। वे कहीं व्यक्ति रहते हैं। उसी शक्ति, उसी नित्यता एवं उसी दिव्य अस्तित्व के साथ किन्तु 1 ही साथ विभिन्न रूप धारण कर सकते हैं। जब बाबा दे अपनी माता के गर्भ से उत्पन्न हुए थे, तो वे नारायण के रूप में थे, जिनके चारों हाथों में आवश्यक प्रतीकात्मक आयुध थे। किन्तु तुरंत ही उन्होंने अपने र्मचारी बडू के रूप में बदल लिया। इसका अर्थ यह हुआ कि उनका शरीर भौतिक नहीं है। जो यह सोचता है कि परमेश्वर भौतिक शरीर धारण करते हैं, वह बुद्धिमान नहीं है। उसे भगवान के रूप में, उसे भगवान के रूप के विषय में अधिक जान है। जैसा कि भीताावरफ्लाइनमें पुष्टि हुई है, जरमकामचमएवमदवेिदत पता भगवान द्वारा आदि दिव्य शरीर में सचिदननविग्रह दिव्य, अपराध लेने के विषय में समझने की आवश्यकता है।
भगवाना तो भगवान अपने आप को अनेक रूपों में प्रकट करते हैं। और 7 पापाजी ने ब्रह्म समित के लोगों का वर्णन है। अब पीछे सुनाई दे रहा है तो परम भगवान के लिए कोई कार्य सम्भव नहीं है। जन्म प्रगट होना उन्हें क्या है। भगवान सो भगवान ने और भगवान प्रकट होते हैं। ना यहाँ कहते है में कु जानता नहीं चूत, कभी गलती नहीं करते, सदा गलती करता है पर मानी गलती नहीं, अपने को पुराना है। व सबसे प्राची तो देखते हैं क्या
होते हैं
या हमारे नीति के मूल माता? भगवान अपने भक्तों को पिता जाने रे कोई कार्य सुनो अरे कोई है के यह क्या प्रमाण है कि तुम कहते हो भगवान प्रकट हुए है है शास्त्र में उनका वर्णन शास्र के वर्णी पालन करता सो भगवान प्रगट हुए और भगवान श्री पुरा सा जवाद 4 हाथों के साथ ये पहने हुए थे। मे पढते भगवान कृश्ण ले? ता पिता समक्ष कैसे 4 माता पिता मिल जाएंगे, तुरंत ही तुरंत सारा लू तो भगवान के विषय में मैं बोला नही जा उनके हर खाया और उनके लिए कोई काया सम्भव नहीं है और यहां पर तो भगवान पर अपने जिम रूपी भगवान के लिए कोई काया संभव नहीं है। और यहाँ पढ़ते हो करे भगवान देव रूप में रूप सजाहुआ था। घनों के साथ, डायमंड के साथ क्या क्या है सधाब्हुचरूप सो बाल भगवान से रो रहे। बामन भगवान के अनेक अवतार है अवतार शब्द का है जो कि बौधिक संसार से आजकल आपको ढूंगी मिलते है। वे कहते हैं हम भगवान के अवतार हैं और तार के विषय में ज्ञान होना चाहिए। कहा हम उसे स्वीकार करते है तो वामदेव विषय में bagan prg ean रेहाना की बधाई के पोंचेजहमनदेवपहुंचे बारे में तो बाल कभी भी इतना खूबसूरत बाल नहीं लगा था उन्हें नारी रूप में, तो बाल राज ने कहा हंग मे क्या मांगना, हम हंग मे क्या मांगना चाहते है और बाल थे उन्हें पता था कि दिपसंतआय ये सेवा भायल ने उनसे पूछा कि क्या सेवा मैं कर सकता हूँ, तो वामनेनेखहाकिअगर कुछ सेवा करना चाहते हो। मुझे केवल उन्ना स्थान 2 a को, 3 कदम को उतना स्थान या में 3 कदम न सो आश्चर्य हो गए। उन्होंने कहा कि तुम किसी धनी बेटी पहुँच कर कुछ गाने तो मिट्टी नहीं माँगा, तुमसे mango तुम्हे पूरा दे सकता। सो महू ने देखा था। उन्होंने कहा कि इस व्यक्ति ने इंदियोमझमें नहीं है। व्यक्ति को सारे विश्व के धन दोगे संतोष नहीं हुआ। और उन्होंने कहा कि जिसे मां ने दरों को वाशमेकियावहरस्थिती में संतोष रहे, उसने को वशमे नहीं किया। वो कभी कभी भी संतोष नहीं रहेगा। इससे हमें क्या शिक्षा में कि हमें भक्ति के बारे मे जुड़ना चाहिए। भक्ति मान के जुड़ोगे तो स्थिति पर संतोष बाबाजी विधान के गोस्वामी का वर्णन करते थे, विदा गोस्वामी थे, समाज में रचा रूप नौकरी के आगे उनके कितने कितने सीके सुने के पूरी नाव भर बाद में जाकर वो संतुलित थे। सो मा जुड़े आप हर स्थिति में, नहीं तो प्रयास करते जाओगे। और आप सब ने पाप के 3 चीजें last and red se hi ने कहा बड़े a a a s gita doge ंतो vक्tiमेजुड़ो सुख हो या दुख, व अक्सर समाज में भार लेते, सिति में संतुर्षशुधाव ब्रा जो पत्नी थी a it on a e। उन्होंने इनकार कर so go women so पाली सोहम भगवान दिररूपपरगडगया तो शुक्रचायाजोने उन्हें पता था कि ये जो ग्राम है, ये कोई साधारण मेरे शिशु के धन को लेने के लिए, तो हाल वाली गा कि तुम जानते नहीं, ये ब्राहमण लड़का कौन है? तुम्हारी सारी कुछ आखिर मर गया है। says i say गुरु का फायद की शिष्य को बोले क्या हम तो सब छोड़कर में में तो गुण को खुश होना चाहिए। सब सम्पति तो वामन देव ने, इसका पालन और भगवान होते है। वामन देव ने पहले कदम है, एक्सपेंड किया, ये पूरे पूरे पर पैरेंटस को पाने से उन्होंने किया सो आजकल की जासारमितेउनसे पूछो कि लॉगजम वो ज्यादा नहीं कर पाए भाव पूरे पृथ्वी के जितना भजन व वादे दूसरे कदम में क्या किया? पी पूछा न्होंने क्या का सिर ने सब को तो। आज के दिन भगवान अगर, मन, दिल और मन दे के तार में अपनी परम प्राप्त करते है। शासन तो शीम इस हर विषय का काल है, भगवान के अस्पताल है उनके विषय में और इन तारों के विषय
में
भगवान हम देखते कि दी, सो, मैं, भवन के चारों के
मन को
किस का जोड़ना चाहिए। srenmrkitaदिस इस वेरी इमपोर्टंट श्रीमन भागवत है, लीलाओं का वर्णन है, उपदेश का वर्णन है और हमें में ऊंची बानी सबसे शांत दिया गया है। लाभ कितन इसका अर्थ क्या है? न। ये नाम वान लीलाएं, वन, देश के सर्व विषय का मन ना और आप परते लीला पड़ोगे तो क्या होगा? अगर आपका मन जुड़े रहेगा तो क्या लाभ होगा? महल में भगवान भवने में पढ़ा के किस प्रकार श्रभाबालस्वाद? इस प्रकार हमें और न करेंगे। क्या लाभ होगा? आपका मन गलसथानमेंनहींपढेगा, न भावा, मेरा बाइक बन, जब करोगे तो क्या लाभ होगा? सो हमारा तुम काया क्या है। धार्मिक कार्य में रूचि बढ़ाए और भाग को ध्यान से सुनोगे। तो ये होगा आप अपने श्िरमनकुबुलासहोगे वावललेवजीकीकस हम प्राप्त करते है सारे तारों के विषय में। o les आपने वार को पुरा के विषय में सुना होगा। पापाजी ने जार के काया पर कुल बल दिया। क्यूँ ये भगवान की इच्छा है? मारी इच्छा क्या है? जाने ताएगोबलेआपअगर देखते हो कि आप डेली शहर में भक्तों की सरिया बढ़ रही है। उसका कारण क्या है? भक्त प्रचार करे आप सब प्रचार कर रहे हो ग्रंथों को बार ब्रांड ग्रंथों पर इतना बल ग्रंथ में क्या है? क्या है? और इस ज्ञान के उपयोग से अपने जीवन को सुधार करे। तो बदजपुर्णिमाके विषय में था को ये प्रोग्राम हुआ था, जिसमें से विनती की कि आप सब इसमें जुड़े में क्या देखा है? जो भक्त पर पुरवा के सम्बन्ध में वो को मारता है और द देता है, उसे क्या प्राप्त होगा? भगवान के धाम में नोट्स बिना किसी शंका के वार महज पूछते हैं। अभी संस्था में कोई शॉरटपेडनहींहै? तो ये है शॉटपेडथामेसेवा में जुड़े और go to brabu e la every house in india should have agat hi school bagwat co को तो पिछले साल सब भक्तों ने मिलकर 25 हजार से 30 हजार से मारे देश विश्व में और आपके दिल्ली में, दिल्ली में, यह सो अल्यान्मिक जीवन में किली हो? some everything is posososoldhavefull at my book बड़ी चिंता में थे, क्यूंकि उन्होंने कभी देखा नहीं था गीता को, कैसे बार नाम भी नही सुना उनके मन में यह भाव था। we to tax 1 बार हमारे समर जैसे लौटेते रास्ते में वो रुके $10 का पेट्रोल देने के लिए में भाव आया कि 10 थोल देने की वजह मैं कृष्ण को और सोचा जब 1 वे लेने $10 की बजाए किताब ले pos प्रयास करे तो ऐसे वो 1 चीज से दूरी से दूसरी और देखते
हो
कोई परोग्राम है बस जहां नई ट्राई तो पिछले साल कौन न
मर
सा में कॉमपबुकशकातमेकम पर बहुत जुड़े हैं
सब में 4 का बड़ा अच्छा स so i ये सर क्या को है no पिछले साल आपके भक्तों ने 12 1200 भग पूरी दिल्ली में ज्यादा तो हम सबसे विजेट है pryas krishnan eganizeswomaganises feachr भगवान की इच्छा है इस लिए आप सब जुड़े के बाद फिर गीता जाए। कई बार लोग कहते हैं इस कर में बहुत में होती है टाइम नही मिलता रिलैक्स करने को। आप भी भलाई के है ज्यादा मनतन होंगे ज्यादा सेवा में रहोगे तुम्हारा गे to my brains m to bras will be ok thank you my yes we bank by so jurasoehavespeat and fetwhal कितना बचा सेवा मंच रोनी मंदिर जो है
पिछले 10 साल पहले के सामने ये मंदिर लगभग पूरा हो चुका है और 6 महीने के अंदर इस मंदिर की
4 आप क्या जाते बात क्या करें
हम चाहते हैं कि वह भक्त भगवान
के आने से पहले तैयारी कर ले कि मंदिर ओपनिंग में भी हमारा जो नीसियम अभी और टेम्पल ओपनिंग में भी बनाएंगे 8 से 10 चाहिए तो उसके लिए तैयारी करनी है लगभग 1 हफ्ते का फंक्शन देखेंगे काफी सन्यासियों को बनाए गए सारे कर ये सारी सेवा में लग जाएंगे 3 दिन का और नहीं करेंगे और आज नरेंद्र मोदी जी को
भी ने
कृश्णा
मोब।
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